Virgin Mojito

Virgin Mojito: एक ताजा और स्वादिष्ट पेय जो गर्मी से दिलाये राहत

गर्मी के मौसम में अधिक गर्मी के कारण बार-बार कुछ ठंडा पेय पदार्थ पीने का मन करता है। गर्मियों में निम्बू पानी (Lemon water) एक लोकप्रिय ड्रिंक है जो तुरंत ताजगी प्रदान करता है। इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत पाने में यह मदद करता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) निम्बू पानी (Lemon water) का ही मॉडर्न रूप है, जो गर्मी के दिनों में खुद को ठंडा रखने का बेहतरीन तरीका है। रेस्टोरेंट्स में यही ड्रिंक आपको बहुत महंगा मिलेगा। वहीं, घर पर आप आसानी से इसे बना सकते हैं। इसके लिए आपको किसी खास इंग्रेडिएंट की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, सामान्य घर में पड़ी चीजों से इसे बनाया जा सकता है। आइए जानें घर पर वर्जिन मोजितो को बनाने का आसान तरीका क्या है? वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito): कैसे बनाएं इसे घर पर? वर्जिन मोजितो को निम्बू (Lemon), पुदीना, और सोडा वाटर के साथ बनाया जाता है। इसमें सोडा वाटर का इस्तेमाल होता है जिसके कारण यह निम्बू पानी (Lemon water) से अलग और स्वादिष्ट बनता है। वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) को बनाने की इंग्रेडिएंट्स इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) बनाने की विधि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह ड्रिंक सामान्य निम्बू पानी (Lemon water) से बहुत स्वादिष्ट होगा और आपके घर के हर सदस्य को यह पसंद आएगा। इस रेसिपी को ट्राई करने के बाद इसे पीने के लिए न तो आपको किसी रेस्टोरेंट में जाने की जरूरत है न ही फालतू पैसे खर्च करने की आवश्यकता है। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Virgin Mojito #VirginMojito #LemonWater #Lemon #Drink

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Top Sunscreen Brands in India

Top Sunscreen Brands in india: चिलचिलाती गर्मी में अपने स्किन को प्रोटेक्ट करें सनस्क्रीन से

गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धुप से खुद को बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हल्के और कॉटन के कपड़े पहनें, दोपहर के समय घर से बाहर जानें से बचें, खुद को कवर कर के रखें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और अच्छे सनस्क्रीन (Sunscreen) का इस्तेमाल करें। अच्छे सनस्क्रीन (Sunscreen) से त्वचा की रक्षा होती है और यह हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से पूरा दिन सुरक्षा प्रदान करता है। इन रेज से बचाव से न केवल प्रीमेच्योर एजिंग के लक्षण जैसे झुर्रियां व डार्क स्पोर्ट्स कम हो सकते हैं, बल्कि स्किन कैंसर का रिस्क भी कम होता है। स्किन को इन हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज  (Ultraviolet Rays) से बचाने के लिए सही सनस्क्रीन का चुनाव करना बेहद जरूरी है। आइए जानें इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) के बारे में। इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) यू.एस फ़ूड एंड ड्रग (U.S Food and Drug) के अनुसार आप सनस्क्रीन का उपयोग किस तरह से करते हैं और अपनी स्किन को बचाने के लिए आप अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, इससे कई समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है जैसे सनबर्न, स्किन कैंसर, समय से पहले एजिंग आदि। इसलिए, आपको सही सनस्क्रीन (Sunscreen) का चुनाव करना चाहिए। इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) इस प्रकार हैं:  लैक्मे सन एक्सपर्ट अल्ट्रा मैट SPF 50 PA+++(Lakme Sun Expert Ultra Matte SPF 50 PA+++) लैक्मे को अपने बेहतरीन ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता है। लैक्मे सन एक्सपर्ट अल्ट्रा मैट SPF 50 PA+++ एक लाइटवेट सनस्क्रीन है, जो बिलकुल भी चिपचिपा नहीं है। यह सनस्क्रीन (Sunscreen) यूवीए और यूवीबी रेज से सुरक्षा प्रदान करता है। अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो भी यह आपके लिए उपयुक्त है। यही नहीं, यह वाटर रेसिस्टेंट और स्वेट रेजिस्टेंस भी है।  डॉट & की वाटरमेलन कूलिंग सनस्क्रीन SPF 50+ (Dot & Key Watermelon Cooling Sunscreen SPF 50+) डॉट & की एक लोकप्रिय स्किनकेयर ब्रांड है, जिसका वाटरमेलन कूलिंग सनस्क्रीन एसपीएफ 50+ पीए++++ सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से बचाव के लिए बेहतरीन विकल्प है। यह हर तरह की त्वचा के लिए उपयुक्त होगा। यह बिलकुल हल्का और नॉन- स्टिकी सनस्क्रीन है। यही नहीं, यह सनस्क्रीन फ्रेग्नेंस और पैराबेन फ्री है। अगर आपकी स्किन ऑयली या ड्राई है, तो यह आपके लिए बेस्ट सनस्क्रीन है। मामाअर्थ मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन SPF 50 (Mamaearth Mineral Based Sunscreen SPF 50) इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) में यह भी शामिल है। यह वो सनस्क्रीन (Sunscreen) है, जो यूवीए और यूवीबी रेज के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन प्रदान करता है। यह नेचुरल इंग्रिडेंट्स से भरपूर है जैसे कॅरोट सीड आयल, जोजोबा आयल और शिया बटर आदि। अच्छी बात यह भी हैं कि इनमें किसी भी तरह का कोई हानिकारक केमिकल नहीं है। द डर्मा को 1% हयालूरोनिक सनस्क्रीन एक्वा जेल (The Derma Co 1% Hyaluronic Sunscreen Aqua Gel) इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) में यह स्क्रीन SPF 50 PA++++के साथ है। यह सनस्क्रीन यूवीए व यूवीबी रेज और ब्लू लाइट्स से सुरक्षा प्रदान करता है। इससे सनडैमेज से बचाव होता है और स्किन हेल्दी रहती है। इसके साथ ही यह हयालूरोनिक एसिड और विटामिन इ युक्त है, जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है और लाइन्स व झुर्रियां कम होने में मदद मिलती है। यह सनस्क्रीन (Sunscreen) किसी भी स्किन टाइप के  लिए उपयुक्त है और बिना किसी समस्या के जल्दी एब्जॉर्ब हो जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बायोटिक बायो सैंडलवुड सनस्क्रीन एसपीएफ 30 (Biotique Bio Sandalwood Sunscreen SPF 30) यह एक हर्बल (Herbal) सनस्क्रीन है, जो यूवीए और यूवीबी किरणों से पूरी सुरक्षा प्रदान करता है। यह चंदन, हल्दी और नीम जैसे प्राकृतिक तत्वों से भरपूर है। यही नहीं, यह सनस्क्रीन (Sunscreen) पैराबेन और सल्फेट जैसे हानिकारक रसायनों से भी फ्री है। यानि, यह अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से पूरी तरह से सुरक्षा करता है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Top Sunscreen Brands In India #TopSunscreenBrandsinIndia #UltravioletRays  #Sunscreen #TopSunscreenBrands #UVAandUVBrays #SunscreenBrands

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World Hypertension Day

World Hypertension Day: जानें क्यों मनाया जाता है हाइपरटेंशन डे और इससे बचने का क्या है उपाय

हाइपरटेंशन (Hypertension) यानी हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure), एक ऐसी समस्या है जिसमें आर्टरीज वाल्स पर दबाव डालने वाले ब्लड की फाॅर्स बहुत अधिक होती है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार यह समस्या गंभीर हो सकती है लेकिन इससे पीड़ित अधिकतर रोगियों में इसका कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करना और इससे बचाव और कंट्रोल को प्रोमोट करना है। आइए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) के बारे में जानें विस्तार से। इस समस्या से बचाव के बारे में भी जानें। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day): पाएं जानकारी वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) को बनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हाइपरटेंशन (Hypertension), इसके रिस्क के बारे में बताना और जागरूक करना है। इसके साथ ही इस दिन के माध्यम से लोगों को इस रोग से बचने के तरीकों को भी बताया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हाइपरटेंशन (Hypertension) से पूरी दुनिया में लगभग दस लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इससे कई समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है जैसे हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और किडनी डिजीज आदि। हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हाइपरटेंशन के लक्षणों को जल्दी पहचान कर सही उपचार हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अब जानिए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day) और इतिहास के बारे में। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day) और इतिहास इस साल वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day)  है ब्लड प्रेशर को सही से मापें, इसे कंट्रोल करें और लंबे समय तक जीएं। यह थीम ब्लड प्रेशर को सही से मापने और इसकी कॉम्प्लीकेशन्स से बचाव पर जोर देती है। क्योंकि, इससे लम्बे समय तक जीने में मदद मिल सकती है। अगर बात की जाए इस दिन के इतिहास की, तो इस दिन की शुरुआत 14 मई 2005 को वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग (WHL) द्वारा की गई थी। बाद में, 2006 से इसे हर साल 17 मई को मनाया जाने लगा। इसे भी पढ़ें: काला बिछुआ के फायदे: आयुर्वेदिक उपचार का एक प्रभावी विकल्प है यह पौधा हाइपरटेंशन से बचाव के तरीके हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हाइपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से बचाव के तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Hypertension Day #highbloodpressure #hypertension #ThemeofWorldHypertensionDay  #Worldhypertensionday

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Benefits of black nettle

काला बिछुआ के फायदे: आयुर्वेदिक उपचार का एक प्रभावी विकल्प है यह पौधा

काला बिछुआ (Black nettle) को बाघनखी, हाथाजोड़ी, बिछु, उलट-कांटा आदि के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम है मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua)। यह एक ऐसा पौधा है जो केवल बरसात के मौसम में उगता है और उसके बाद यह सुख जाता है। जब इसका फल सुख जाता है और फट जाता है, तो उसमे से एक बड़ा काला और भूरा बीज निकलता है। यह पौधा दो मीटर तक ऊंचा होता है और इसके पत्ते किडनी के आकार के होते हैं। इस पौधे में कई औषधीय गुण होते हैं। इसके बीज और पत्तियों का इस्तेमाल आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता है। संक्षेप में कहा जाए तो यह बेहद फायदेमंद पौधा है। आइए जानें क्या हैं काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle)? काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle): पाएं जानकारी काला बिछुआ (Black nettle) अपने खास बनावट के लिए प्रसिद्ध है। इसके बीज देखने में जंगली जानवर के मुड़े हुए नाखून जैसे लगते हैं, इसलिए इसका नाम बाघनख है। यह असली पौधा केवल विंध्याचल के जंगलों, हिमालय आदि में मिलता है। काला बिछुआ (Black nettle) यानी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) एक हेल्थ के लिए लाभदायक पौधा है। काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle) इस प्रकार हैं: पेट के लिए फायदेमंद काला बिछुआ (Black nettle) के बीज और पत्ते पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद हैं जैसे कब्ज, गैस, एसिडिटी आदि। पेट की समस्याओं के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। स्किन प्रॉब्लम्स से छुटकारा स्किन प्रॉब्लम्स से राहत पहुंचाने में भी काला बिछुआ (Black nettle) को फायदेमंद पाया गया है। स्किन की परेशानियों जैसे पिम्पल्स, एक्जिमा आदि से राहत पाने में इस पौधे के बीज और पत्ते को बेनेफिशियल पाया गया है। यानी, स्किन के लिए इस पौधे का इस्तेमाल किया जा सकता है।  सांस संबंधी समस्याओं से राहत सांस संबंधी समस्याओं से भी यह पौधा राहत पहुंचा सकता है। काला बिछुआ (Black nettle) के फायदे में यह बेहद महत्वपूर्ण है। अस्थमा और  ब्रोंकाइटिस जैसी सांस सम्बन्धित प्रॉब्लम्स के ट्रीटमेंट में इसका इस्तेमाल किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इम्यूनटी को करे मजबूत काला बिछुआ (Black nettle) यानी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) के बीज और पत्ते इम्युनिटी को भी मजबूत कर सकते हैं। इसके साथ ही ऐसा भी माना गया है कि बुखार और दर्द के ट्रीटमेंट में भी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) का उपयोग किया जा सकता है।  इसके अलावा काला बिछुआ (Black nettle) में एंटी-कोलेस्ट्रॉल, एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant), एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द दूर करने वाले गुण होते हैं। वीक मेमोरी, पीठ में दर्द, डायबिटीज, सीने में जलन जैसी बीमारियों के इलाज में भी इस पौधे को लाभदायक पाया गया है। नोट:-यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Benefits of black nettle #Martyniaannua #blacknettle #Benefitsofblacknettle

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Mango Chaat

Mango Chaat: गर्मियों में बनाएं यह खट्टे-मीठे आम की चाट

गर्मियों के मौसम में जो चीज सबसे अधिक पसंद आती है वो हैं आम (Mango)। आम चाहे कच्चे यानी खट्टे-मीठे हों या पके हुए रसीले, दोनों का ही अपना स्वाद होता है। आम (Mango) के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। यह डाइजेशन को सुधारता है, इम्युनिटी बढ़ाता है, आंखों और स्किन के स्वस्थ के लिए अच्छा है। आम (Mango) में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं। यही नहीं आम फाइबर, पोटैशियम, विटामिन ए और सी से भी भरपूर होता है। आम (Mango) को लोग कई तरह से खाते हैं। इसे ऐसे ही फल की तरह खाया जाता है, इसके अलावा इससे बना मेंगोशेक, आम रस और मेंगो लस्सी भी बहुत प्रसिद्ध है। लेकिन, क्या आपने आम की चाट (Mango Chaat) खायी है? खट्टे-मीठे आम की चाट (Mango Chaat) को आप घर पर भी बना सकते हैं। आइए जानें इस चाट को बनाने के तरीके के बारे में। आम की चाट (Mango Chaat): कैसे बनाएं गर्मियां (Summer) आते ही इस आम की चाट (Mango Chaat) को आप पके हुए या कच्चे किसी भी आम (Mango) से बना सकते हैं। लेकिन हम इस आम (Mango) की चाट में दोनों तरह के आमों का इस्तेमाल करेंगे। गर्मियां (Summer) आते ही आम की चाट (Mango Chaat) बनाने की सामग्री इस प्रकार है:  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बनाने की विधि नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Mango Chaat #Mangochaat #mango #summer #chaat

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Desi bodybuilders

Strongest village in India: कैसे एक आदमी ने बदली किस्मत, हर घर में रहते हैं पहलवान और बाउंसर्स, यहां है भारत का सबसे मज़बूत गांव

बाउंसरों को देखते ही हमारे मन में एक ही ख्याल आता है कि काश! हमारी बॉडी ऐसी होती। बाउंसर का काम होता है वीआईपी अथवा रईस लोगों को सुरक्षा प्रदान करना। दखने और सुनने में यह काम जितना आसान लगता है, दरअसल उतना है नहीं। क्योंकि आज के इस प्रदूषित वातावरण में खुद को फिट एंड फाइन रखना आसान नहीं होता। खैर, क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के नाईट क्लबों में सबसे अधिक बाउंसर कहाँ से आते हैं? शायद आप जानते हो? यदि आप नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि दिल्ली की भागम-भाग भरी जिंदगी से कुछ दूरी पर स्थित असोला और फतेहपुर बेरी नामक एक जुड़वां गांव हैं, जहां के लोग आज भी अपनी पुश्तैनी परंपरा को बनाये रखें हैं। इस गाँव में एक शख्स ऐसा भी है जिसने पूरे गाँव के युवाओं को कमाई का एक ऐसा जरिया बता दिया है जिसके चलते सभी लोग अपने आपको फिट (Strongest village in India) रखने में जुट गए हैं।  शारीरिक शक्ति को आजीविका में बदलकर की जा सकती (Strongest village in India) है अच्छी कमाई दरअसल, गाँव के एक स्थनीय पहलवान ने पूरे गाँव की किस्मत संवार दी। बता दें कि विजय तंवर भारत की ओलंपिक कुश्ती टीम में जगह बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत भी लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। कद काठी बेजोड़ थी ही, सो इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने बतौर बाउंसर काम करना शुरू कर दिया। उनकी देखा देखी गाँव अन्य लोग भी उनसे प्रेरित होकर अपने शरीर को संवारने में जुट गए। उनका मकसद एकदम क्लियर था। शारीरिक शक्ति को आजीविका में बदलकर अच्छी कमाई की जा सकती (Strongest village in India) है। इस हेतु गांवों के युवा स्थानीय अखाड़ों में कठोर ट्रेनिंग सेशन्स में शामिल होने लगे। जूनून ऐसा कि वे हर दिन सैकड़ों सिट-अप, पुश-अप और कुश्ती अभ्यास करने लगे। देखते-ही-देखते लोग अनुशासित जीवन जीने लगे। यही उनकी अनुशासित जीवन शैली एक अनोखे पेशे में बदल गई। आलम यह है कि गाँव के अधिकतर युवा बाउंसर बन अपना जीवनयापन करने लगे हैं। इसके साथ ही वो युवाओं को भी इस हेतु प्रेरित करने लगे हैं। बता दें कि इस गाँव के कुछ लोग विदेश में सुरक्षा सेवाओं में करियर बनाना चाहते हैं तो कुछ अपने पारंपरिक पेशे कुश्ती में ही अपना करियर बनाना चाहते हैं।  इस गाँव को भारत का सबसे मज़बूत गांव (Strongest village in India) के रूप में भी जाना जाता है कहने की जरूरत नहीं, प्रदूषण भरे इस माहौल में शारीरिक रूप से फिट रहना या फिर अपने आप को मेंटेन करना आसान नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि इस गाँव के लोग इतने फिट कैसे रह लेते हैं? उनकी फिटनेस का राज जानने पर पता चला कि गाँव का हर युवा शराब और तंबाकू से कोसो दूर रहता है। इसके अलावा प्रोटीन युक्त आहार लेता है और जमकर वर्जिश करता है। अपने शरीर को हृष्ट-पुष्ट बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अनुशासन का पालन करता है। गांव का पहला जिम खोलने वाले अंकुर तंवर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा कि “तंवर परिवार में योद्धा का एक तत्व है। हमने मुस्लिम आक्रमणकारियों से लड़ाई लड़ी। हमने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। पिछले 20 सालों में बहुत कुछ बदल गया है।” खैर, बढ़ते नाइटलाइफ़ दृश्य में बाउंसरों की मांग बढ़ती जा रही है। आपको जानकर हैरत होगी कि दिल्ली अधिकतर बाउंसर असोला-फतेहपुर गाँव के ही होते हैं। इस गाँव को बाउंसरों का गढ़ कहा जाता है। इसके अलावा इस गाँव को भारत का सबसे मज़बूत गांव (Strongest village in India) के रूप में भी जाना जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम बार में काम करेंगे बता दें कि सीएनएन से हुई बातचीत में विजय तंवर ने बताया कि “मैं इस गांव का पहला बाउंसर (Strongest village in India) था। फिर सभी ने मेरी राह पर चलना शुरू कर दिया। अब 300 से ज़्यादा पहलवान नई दिल्ली के क्लबों और बार में बाउंसर के तौर पर काम करते हैं।” गौरवान्वित होते हुए उन्होंने आगे कहा कि “जैसा कि वे कहते हैं, स्वास्थ्य ही धन है। हम स्वस्थ हैं, लेकिन हम अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं। बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेज पा रहे हैं, अच्छा खा पा रहे हैं। जीवन में और क्या ही चाहिए?” अपनी बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि “हमने कभी नहीं सोचा था कि हम बार में काम करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi Strongest village in India #StrongestVillage #IndianWrestlers #BouncerVillage #RuralPower #HaryanaHeroes #IndianStrength #VillageOfChampions #DesiPower #BodybuildingIndia #WrestlingCulture

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Bowel Cancer

बाउल कैंसर: युवाओं के लिए बढ़ता खतरा, जानें कैसे करें इससे बचाव

बाउल कैंसर (Bowel cancer), लार्ज बाउल में शुरू होने वाला कैंसर (Cancer) है। इनमें कोलन और रेक्टरम आदि भी शामिल है। यह कैंसर (Cancer) सबसे सामान्य कैंसरस में से एक है। कोलन कैंसर के उपचार के लिए कई तरीके काम में आ सकते हैं। इसके उपचार में रेडिएशन थेरेपी, सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी आदि शामिल हैं। बाउल कैंसर (Bowel cancer) आमतौर पर बुजुर्गों को प्रभावित करता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। आजकल बड़ी संख्या में युवाओं को भी यह कैंसर प्रभावित कर रहा है, जो एक चिंता का विषय है। आइए जानें युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People) के बारे में विस्तार से। बाउल कैंसर से बचाव के बारे में भी जानें। युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People): पाएं जानकारी बाउल कैंसर (Bowel cancer) एक गंभीर बीमारी है जो मृत्यु का कारण भी बन सकता है। हर साल इस कैंसर (Cancer) के कई नए मामले सामने आते हैं। ऐसा पाया गया है कि साल 2023 में इस कैंसर के 19 लाख मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 9 लाख लोगों की मृत्यु हो गई थी। एक स्टडी के अनुसार आजकल युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People) के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है। स्टडी में ऐसा भी पाया गया है कि  20 साल में 55 साल से कम उम्र के लोगों में इस कैंसर (Cancer) के मामले लगभग डबल हो चुके हैं। जबकि बुजुर्गों में यह सख्या स्टेबल या इसके मामले में गिरावट हो रही है। अगर बात की जाए युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People) के कारणों की, तो इसका कारण बिगड़ता लाइफस्टाइल, अनहेल्दी आहार, टेंशन आदि को माना जा रहा हैं। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People) से बचाव कैसे संभव है? नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस (NHS) के अनुसार बाउल कैंसर (Bowel cancer) के सही कारणों के बारे में जानकारी नहीं है। यह समस्या जेनेटिक हो सकती है या लाइफस्टाइल, एनवायर्नमेंटल फैक्टर भी इसका कारण हो सकते हैं। युवाओं में बाउल कैंसर (Bowel Cancer in Young People) से बचाव के तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:-यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Bowel cancer in young people Bowelcancer #Bowelcancerinyoungpeople #Cancer #PreventionofBowelcancer

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Dengue

कर्नाटक में डेंगू का प्रकोप, 30 अप्रैल तक आए 1,186 मामले, जानें इससे कैसे बचें

डेंगू (Dengue) रोग गंभीर हो सकता है और इससे पीड़ित व्यक्ति की जान भी जा सकती है। अधिकतर मरीजों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता ,है लेकिन इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, रैशेज, शरीर में दर्द आदि शामिल हैं। इसके गंभीर प्रकार को डेंगू (Dengue) हेमरेजिक फीवर कहा जाता है। हर साल इस रोग के कारण हजारों लोग प्रभावित होते हैं। अभी कर्नाटक राज्य में इस रोग के कई मामले सामने आ चुकें हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो 30 अप्रैल तक इसके लगभग 1,186 मामले आ चुके हैं। आइए जानें कर्नाटक में डेंगू के नए केसेस (New cases of dengue in Karnataka) के बारे में विस्तार से। डेंगू से बचाव (Dengue prevention) के बारे में भी जानकारी पाएं। कर्नाटक में डेंगू के नए केसेस (New cases of dengue in Karnataka): पाएं जानकारी  कर्नाटक में पिछले साल डेंगू (Dengue) के कुल 32,826 के केसेस सामने आएं थे। हालांकि, यह मामले इस साल अभी कम हैं लेकिन चिंता की बात यह है कि यह मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह मामले सबसे अधिक बेंगलुरु में पाए गए हैं। इसका कारण गर्मी में बारिश, पानी का भरना और कंस्ट्रक्शंस आदि को माना गया है। यह मामले  2 मार्च तक 707 थे जो 30 अप्रैल तक 1,186 हो गए। हेल्थ एक्सपर्ट्सने  इन केसेस से बचाव के लिए लोगों को जागरूक रहने और मच्छरों कि रोकथाम के उपायों को अपनाने के निर्देश दिए हैं। मच्छरों और डेंगू से बचाव (Dengue prevention) के लिए लोगों का सतर्क रहना बहुत जरूरी है। कर्नाटक में डेंगू के नए केसेस (New cases of dengue in Karnataka) चिंता का विषय हैं। इसके साथ ही एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि डेंगू (Dengue) के लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। आइए जानें डेंगू के लक्षण क्या हो सकते हैं? डेंगू के लक्षण डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक डेंगू (Dengue) के हलके लक्षणों के मामले में रोगी एक या दो हफ्तों में स्वस्थ हो जाता है। लेकिन, दुर्लभ मामलों में यह गंभीर हो सकते हैं और यह बीमारी मृत्यु का कारण बन सकती है। इसके शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं: इसके गंभीर डेंगू के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक डेंगू से बचाव (Dengue prevention) नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Dengue #Dengue #newdenguecasesinKarnataka #denguesymptoms #preventionfromdengue

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International No Diet Day

क्यों मनाया जाता है International No Diet Day? जानिए इसकी थीम और हिस्ट्री के बारे में

विभिन्न तरह की डायट्स के बारे में तो आपने सुना ही होगा जैसे कीटो डायट, इंटरमिटेंट फास्टिंग आदि। लेकिन, क्या आप नो डायट के बारे में जानते हैं? नो डायट का अर्थ है किसी भी तरह की कोई खास डायट (Diet) को फॉलो न करना। यानी, आहार के नियमों का पालन न करना और अपनी पसंद की चीजों का सेवन करना। हर साल 6 मई को इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है खाने के साथ सही तालमेल बिठाना, खुद से प्यार करना और बॉडी पॉजिटिविटी (Body positivity) को प्रोमोट करना। यह दिन डायट (Diet) करने के रिवाज को बंद करने और वजन कम करने की जगह पूरे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने को प्रोत्साहित करता है। आइए जानें इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) के बारे में विस्तार से। इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day): पाएं जानकारी  इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) को मनाने का यही उद्देश्य है कि लोग शारीरिक खूबसूरती की जगह अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखें। इससे हम खाने सम्बन्धी समस्याओं से बच सकते हैं और इसके साथ ही अनहेल्दी हैबिट्स से भी बचा जा सकता है। इंटरनेशनल नो डायट डे की हिस्ट्री और थीम इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) की शुरुआत 1992 में हुई थी। इसकी शुरुआत की थी  ब्रिटिश नारीवादी मैरी इवांस यंग ने, जिन्होंने खुद एनोरेक्सिया और कई बॉडी इमेज इशूज का सामना किया था। वो दुनिया को बताना चाहती थी कि डायट (Diet) कल्चर का शरीर पर कितना बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही वो दुनिया को बॉडी पॉजिटिविटी (Body positivity) के बारे में भी जागरूक करना चाहती थी। इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) की इस साल की थीम के बारे में अभी कोई जानकारी उपलबध नहीं है। इंटरनेशनल नो डायट डे मनाने का उद्देश्य इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) मनाने का उद्देश्य इस प्रकार है: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इंटरनेशनल नो डायट डे को कैसे मनाएं? इंटरनेशनल नो डायट डे (International No diet day) को आप कई तरह से मना सकते हैं। इसके तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi International No diet day #nodietday #diet #bodypositivity #food #internationalnodietday

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Fenugreek water

Fenugreek Water: इस पानी को पीने से पहले जानिए किन लोगों को हो सकता है इससे नुकसान?

मेथी दाना एक ऐसा हर्ब है इसका इस्तेमाल खाना बनाने के साथ ही हेल्थ प्रॉब्लम्स के उपचार के लिए किया जाता है। मेथी (Fenugreek) का पौधा अधिकतम दो से तीन फीट लंबा होता है। इसके पत्ते हरे होते हैं और फूल सफेद होते हैं। कई सालों से इसका इस्तेमाल मेडिसिन के रूप में किया जाता रहा है। मेथी दाना और मेथी पानी (Fenugreek water) को वजन कम करने के लिए बहुत फायदेमंद पाया गया है। इसके साथ ही अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को मैनेज करने में भी इसे लाभदायक माना गया है। लेकिन, कुछ लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए। जानिए किन लोगों को मेथी पानी नहीं पीना चाहिए (Who should not drink fenugreek water)? किन लोगों को मेथी पानी नहीं पीना चाहिए (Who should not drink fenugreek water)? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार मेथी (Fenugreek) का इस्तेमाल न्यूट्रिशंस और स्वाद के लिए कई इंडियन व्यजनों में किया जाता है। पाएं जानकारी कि किन लोगों को मेथी पानी नहीं पीना चाहिए (Who should not drink fenugreek water)? गर्भवती महिलाओं को मेथी पानी (Fenugreek water) पीने से बचना चाहिए। इसे पीने से गर्भाशय संकुचन यानी कॉन्ट्रैक्शंस की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए, इसे प्रेग्नेंसी के दौरान नहीं पीना चाहिए। प्रेग्नेंसी में किसी भी चीज का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी इस पानी को पीने से बचना चाहिए। यही नहीं, जिन महिलाओं को हॉर्मोन-सेंसिटिव कैंसरस हैं, उन्हें भी मेथी (Fenugreek) का पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है। 2. एलर्जी अगर किसी व्यक्ति को मेथी (Fenugreek), फलियों या अन्य प्लांट्स से एलर्जी है, तो उन्हें भी इसका सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को मेथी पानी (Fenugreek water) पीने से एलर्जी या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। 3. डायबिटीज मेथी (Fenugreek) से ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) पर असर हो सकता है। इसलिए अगर आप डायबिटीज के रोगी हैं या डायबिटीज की दवा ले रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही मेथी पानी (Fenugreek water) का सेवन करें। 4. बच्चे बच्चों पर इस पानी का क्या असर हो सकता है, इसके बारे में पर्याप्त जानकारी मौजूद नहीं हैं। लेकिन, आमतौर पर बच्चों को मेथी पानी (Fenugreek water) देने से बचना चाहिए या डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: World Hand Hygiene Day: जानें क्यों मनाया जाता है यह दिन और इसे कैसे सेलिब्रेट करें? 5. खास दवाईयां लेने वाले व्यक्ति मेथी (Fenugreek) कुछ खास दवाईयों के साथ इंटरेक्ट कर सकती हैं, जिनमें ब्लड थिनिंग ड्रग्स शामिल हैं। इसलिए, अगर आप कोई भी दवा ले रहा हैं तो मेथी पानी (Fenugreek water) पीने से बचें या डॉक्टर की सलाह ले बाद ही इसे लें। 6. किडनी प्रॉब्लम्स  ऐसा पाया गया है कि मेथी से किडनी के फंक्शन्स प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए जिन लोगों को किडनी की समस्या है, उन्हें मेथी पानी (Fenugreek water) पीने से बचना चाहिए। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fenugreek water #Fenugreekwater #Fenugreek #Whoshouldnotdrinkfenugreekwater #fenugreeseeds

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