Chirag Paswan's Dual Strategy

बिहार में एनडीए के साथ भी और खिलाफ भी… चिराग पासवान आखिर किस तरह की राजनीति कर रहे?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल अक्टूबर-नवंबर माह में हो सकती है। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और महागठबंधन, दोनों अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लेकिन इन सबके बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बदले-बदले तेवरों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी महागठबंधन के दल और वाम दल एकजुट होकर वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़कों पर उतर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं एनडीए (NDA) के अंदर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की बयानबाजी जेडीयू (JDU) के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आरा से लेकर सारण तक अपनी रैलियों में वह यही संदेश दे रहे हैं कि उनका गठबंधन बिहार की जनता से है, न कि किसी दल विशेष से। वहीं गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। चिराग पासवान यह बयानबाजी ऐसे समय में कर रहे हैं, जब वे भाजपा (BJP) के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। आरा और सारण जैसे इलाकों में अभी एलजेपी (रामविलास) का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। राजनीति में दबाव की रणनीति अपना रहे चिराग चिराग पासवान के इस आक्रामक रुख को राजनीतिक जानकार सीट शेयरिंग से पहले की दबाव बनाने वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। चिराग पासवान विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए 40 से 60 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन एनडीए (NDA) उन्हें 33 से 35 सीटें ही देना चाहती है। ऐसे में चिराग पासवान अब अपनी ही सहयोगी पार्टियों को घेरने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों यह सवाल जरूर कर रहे है कि विधानसभा में जहां पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है, वहां उसे इतनी सीटें एनडीए किस आधार पर दे दे मिलें? हलांकि यह बात जरूर है कि पिछले लोकसभा चुनाव में एलजेपीआर को पांच में से पांच सीटों पर जीत मिली थी, जो उनके संगठन और वोट बैंक को कुछ हद तक वैधता देती है। लेकिन विधानसभा चुनाव की प्रकृति और गणित अलग होती है। नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती  चिराग पासवान (Chirag Paswan) अपनी सभाओं में भाजपा (BJP) की आलोचना के बजाय जेडीयू की आलोचना कर रहे हैं। चिराग की यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जब चिराग एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रहे थे, तब वो पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए खुद को उनका “हनुमान” बताते थे, लेकिन नीतीश कुमार को निशाने पर रखते थे। इस बार भी चिराग के 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे को जेडीयू पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने अकेले लड़ते हुए जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में जेडीयू के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती भी है और चेतावनी भी। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा के गढ़ में जनाधार बढ़ाने में जुटे चिराग  चिराग पासवान (Chirag Paswan) की सबसे ज्यादा सक्रियता भोजपुरी बेल्ट में दिखाई दे रही है, जहां भाजपा का परंपरागत जनाधार रहा है। लेकिन इन जिलों में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में कुछ कमजोर रहा। मसलन, भोजपुर की सात में से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत पाई थी। इस स्थिति को चिराग एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां पर अपनी पार्टी के जनाधार का विस्तार करने में जुटे हैं। यह सक्रियता केवल मौजूदा विधानसभा चुनाव की रणनीति नहीं है, बल्कि इसका संबंध चिराग के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से भी है। बीजेपी के साथ रहकर वह केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार बने रहना चाहते हैं, लेकिन बिहार में अपनी स्वतंत्र पहचान और महत्व भी बनाना चाहते हैं। चिराग पासवान की वर्तमान राजनीति को जानकार ‘दो नावों की सवारी’ की तरह देख रहे हैं। वे एनडीए में बने रहकर केंद्र में ताकतवर भूमिका निभा रहे हैं, वहीं बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति कर अपनी सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चिराग की यह चाल एनडीए को मजबूती देती है या अंदर से कमजोर करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharPolitics #NDA #LJP #BiharNews #IndianPolitics #RamVilasPaswan

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Aadhaar fraud exposed in Bihar's Muslim-majority districts;

Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed: बिहार में गजब का खेल, मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर बने 120 आधार

साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से सही कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए (एसआईआर) शुरू किया है। आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा। दरअसल, हाल ही में बिहार में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। ऐसा इसलिए राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है। तो वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी है। यानी, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड। सामान्य तौर पर आधार कार्ड एक व्यक्ति-एक कार्ड की नीति पर आधारित है। लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड मौजूद हैं, तो यह संकेत देता है कि या तो डुप्लिकेट आधार कार्ड बनाए गए हैं या फिर गैर-नागरिकों को भी आधार कार्ड जारी किए गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या अतिरिक्त आधार कार्डों का इस्तेमाल गैर-कानूनी मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया गया है? सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं और उससे भी बड़ा सवाल यह कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए और क्यों बनाए गए हैं? इस मुद्दे ने न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी चर्चा को तेज कर दिया है। दरअसल, ममता बनर्जी सरकार की पहले से ही आधार कार्ड डिएक्टिवेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र से तनातनी चल (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) रही है। ऐसे सोचनीय बात यह कि क्या यह विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा है? महत्वपूर्ण बात यह कि सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं। जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ गया है। कहने की जरूरत नहीं यह स्थिति गरीब समुदायों विशेषकर मुस्लिम आबादी को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है।  आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है गौरतलब हो कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र-किशनगंज, पूर्णिया कटिहार और अररिया में मुस्लिम आबादी 38 फीसदी से 68 फीसदी तक है। ऐसे में इन जिलों में आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं, सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। दरअसल, ये जिले पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे हैं। बड़ी बात यह कि बांग्लादेश भी इससे ज्यादा दूर नहीं है। और तो और इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इन जिलों में आधार कार्ड की अधिकता की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं। जिन्हें स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों के सहयोग से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई चुनावी सरगर्मी के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई। दूसरी ओर कुछ लोग तर्क देते हैं कि विपक्ष आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अवैध आप्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। महत्वपूर्ण बात यह कि विपक्ष खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जोर दिया है। लेकिन इसे नागरिकता का सबूत मानने के खिलाफ भी आवाज उठाई है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड डिएक्टिवेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधार डिएक्टिवेशन को एसी, एसटी और ओबीसी समुदायों के खिलाफ साजिश करार दिया था। ममता ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार वैकल्पिक आधार कार्ड जारी करेगी, जिसे केंद्र ने गैर-कानूनी बताया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed #aadhaar #biharnews #scamalert #identityfraud #breakingnews #aadhaarscam #fraudinindia #newsupdate #muslimdistricts #dataleak

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Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

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Article 326 Election Commission's X Post Explained

क्या है Article 326? जिसे भारत के Election Commission ने X पर किया है पोस्ट 

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) की तस्वीर साझा की है। यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गई है, विशेषकर बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के संदर्भ में। इस समय बिहार में विपक्षी दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और अन्य पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। अनुच्छेद 326: भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) में दी गई है। यह अनुच्छेद कहता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, उसे मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त होगा। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। यदि कोई व्यक्ति: तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत में चुनाव स्वच्छ, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। आयोग की X पोस्ट: एक संवैधानिक संदेश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) का अनुच्छेद 326 साझा करना केवल एक सामान्य पोस्ट नहीं, बल्कि यह राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में एक संविधान सम्मत जवाब था। आयोग यह दर्शाना चाहता है कि उसका पूरा काम संविधान की भावना और प्रावधानों के तहत हो रहा है। यह विशेष रूप से उन आरोपों के संदर्भ में था जो बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग की मंशा साफ है कि योग्य भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में स्थान देना, और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 #𝗕𝗶𝗵𝗮𝗿 #𝗦𝗜𝗥 #𝗘𝗖𝗜 pic.twitter.com/o0TCgDCYg9 — Election Commission of India (@ECISVEEP) July 9, 2025 बिहार में SIR अभियान: उद्देश्य और विवाद बिहार में 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य है: इस अभियान के अंतर्गत बिहार के लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें उचित पहचान दस्तावेजों के साथ भरकर जमा करना होगा। विपक्ष की आपत्ति: समय और प्रक्रिया पर सवाल विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया मानसून और संभावित बाढ़ के समय में शुरू की गई है, जो अवास्तविक और गैर-व्यावहारिक है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है और गरीब, मजदूर वर्ग और अशिक्षित लोग जरूरी दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह लोकतांत्रिक समावेशन के मूल सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें:- बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है पारदर्शिता चुनाव आयोग (Election Commission of India) पर यह जिम्मेदारी है कि वह जनता के विश्वास को बनाए रखे और यह केवल तभी संभव है जब उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी हो। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन इस तरह होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह जाए। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और सहायता केंद्रों की स्थापना जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे मतदान अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करें, बजाय इसके कि केवल आलोचना करें। संविधान का अनुच्छेद 326 (𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮) भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे और उसे सशक्त बनाए। बिहार में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक जरूरी और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए। आलोचनाएं यदि तथ्यपरक हों तो उन्हें दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह वक्त है कि हर नागरिक अपने मताधिकार को समझे, जागरूक बने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे। Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission of India #Article326 #ElectionCommission #RightToVote #IndianElections #IndianConstitution

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Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest: बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात

बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के विरोध में महागठबंधन ने आज यानी बुधवार को ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया। जिसमें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। बंद में हिस्सा लेने के लिए राहुल गांधी सुबह ही दिल्ली से पटना पहुंचे हैं। बिहार बंद का असर राजधानी पटना के अलावा अन्य जिलों में भी देखने को मिल रहा (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। इस बंद के दौरान तेजस्वी यादव और राहुल गांधी सहित महागठबंधन घटक दलों के अन्य नेता और कार्यकर्ता आयकर गोलंबर से निर्वाचन कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू कर चुके हैं। विरोध मार्च में वीआईपी चीफ मुकेश सहनी भी शामिल हैं। दरअसल, विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि “मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। मतदाता सूची पुनरीक्षण में जिन 11 दस्तावेजों की मांग की जा रही है, वे गरीबों के पास नहीं हैं। ऐसा ही हुआ तो बिहार में भारी संख्या में मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह जाएंगे।” उनका कहना है कि “इसे विधानसभा चुनाव के बाद किया जाना चाहिए” बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है चुनाव आयोग को ललकारते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी न कहा कि “चुनाव आयोग मैं आपको साफ बोल रहा हूं। मैं बिहार और हिन्दुस्तान की जनता को स्पष्ट कह रहा हूं कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था और वैसे ही बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्हें पता है कि हमने महाराष्ट्र मॉडल समझ लिया है, इसलिए वे बिहार मॉडल लाए हैं। ये गरीबों की वोट छीनने का तरीका है।” इस दौरान बिहार बंद को लेकर तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया है। क्या गुजरात के दो लोग तय करेंगे कि कौन बिहारी वोट दे सकता है और कौन नहीं?” इस बीच चुनाव आयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। गरीब लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है। पहले उनके नाम हटाए जा रहे हैं, फिर उनकी पेंशन और राशन भी छीन लिया जाएगा।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है यही नहीं, कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने बिहार बंद को लेकर कहा कि “सड़कों पर उतरे हैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए। क्योंकि कहा जाता है कि अगर सड़कें सुनी हो जाए तो संसद आवारा हो जाती है इसलिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। इस बीच पुर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन का एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि “शंखनाद हो गया, जनता सड़क पर उतर गई, वोटबंदी की सरकार, उखाड़ फेंकेगा बिहार, राहुल गांधी जी हम बिहारी हैं तैयार।” बता दें कि राहुल-गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन में शामिल दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस और आरजेडी सहित महागठबंधन में शामिल सभी दलों के दिग्गज नेता हुजूम के साथ निर्वाचन कार्यालय की तरफ बढ़ रहे हैं। खबर यह भी है कि प्रदर्शन के बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि निर्वाचन आयोग पर इस बिहार बंद का क्या कुछ असर पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest #RahulGandhi #TejashwiYadav #BiharBandh #ElectionCommission #BiharNews #PoliticalProtest

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hindi marathi controversy

हिंदी-मराठी विवाद से गरमाई देश की सियासत, ठाकरे बंधुओं पर उत्तर भारतीय नेताओं का हमला, कांग्रेस ने बनाई विवाद से दूरी 

महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मराठी भाषा पर हालिया सक्रियता और बयानों ने जहां इस विवाद को राज्य में राजनीतिक हवा दी, वहीं हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस मराठी भाषा विवाद (Marathi Language Controversy) को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। जिसकी वजह से राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सहयोगी कांग्रेस ने इस मुद्दे से दूरी बना रखी है।  बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) न बोलने वाले हिंदीभाषियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ बोले जा रहे बयानों पर हिंदी पट्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey), बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने ठाकरे बंधुओं को खुली चुनौती दी है। ‘अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने तो राज (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सीधा हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि, ”अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं। अपने घर में शेर बनना उनके लिए आसान है। आओ बिहार और उत्तर प्रदेश, हम भी देखेंगे तुम्हारी हेकड़ी। यह गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी।” इस दौरान दुबे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए कहा कि हम मराठी संस्कृति का आदर करते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए जो भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, वह निंदनीय है। पप्पू यादव और निरहुआ ने राज ठाकरे को ललकार  सांसद पप्पू यादव ने भी राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे हिंदीभाषियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा करवा रहे हैं। पप्पू यादव ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने यह गुंडई बंद नहीं की, तो मैं खुद मुंबई आकर उनको उनकी ही भाषा में जवाब दूंगा।“ पप्पू यादव का आरोप है कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर यह सब कर रहे हैं ताकि इसी साल महाराष्ट्र में होने वाली BMC चुनाव में ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा के पूर्व सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी ठाकरे बंधुओं को ललकारते हुए कहा, “मैं खुद मुंबई में रहता हूं। अगर हिम्मत है तो मुझे निकालकर दिखाओ।” उनका यह बयान उत्तर भारतीयों की ओर से एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने भी किया पलटवार हिन्दी भाषी राज्य के इन नेताओं के बयानों पर जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दुबे, बिबे जैसे लोग केवल विवाद खड़ा करना जानते हैं। महाराष्ट्र की जनता सब जानती है। इनकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।” उद्धव ने इस दौरान यह भी कहा कि, उनका विरोध हिंदी भाषा से नहीं है, बल्कि हिंदी की जबरन थोपे जाने वाली अनिवार्यता से है। उन्होंने कहा, “हम खुद हिंदी में बात कर रहे हैं, हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। यह विवाद जबरन खड़ा किया गया है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस की चुप्पी और संतुलित रुख इस पूरे विवाद पर जहां महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में हलचल मची हुई और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं। वहीं, कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग रखने का निर्णय लिया है। मुंबई में कांग्रेस के उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह (Nishikant Dubey) ने कहा कि मुंबई में वर्षों से उत्तर भारतीय समाज शांतिपूर्वक रह रहा है और यहां की संस्कृति में घुल-मिल चुका है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीतिक फायदे के लिए सामाजिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह पर भाजपा की सरकार है, तो भाषा के नाम पर हो रही उकसाने वाली राजनीति पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। सरकार को चाहिए कि वह उन नेताओं पर कार्रवाई करे जो समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #hindi #marathi #controversy #thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #northindianleaders #congress #politics #india

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250 Million Workers on Strike

Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike: भारत बंद आज, 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर

आज देशभर में परिवहन, डाक सेवाएं, कोयला खनन, राजमार्ग, बैंकिंग, बीमा, निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले तकरीबन 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी आम हड़ताल पर रहेंगे। दरअसल, यह हड़ताल 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों के मंच ने सरकार की मजदूर, किसान और राष्ट्र विरोधी नीतियों के विरोध में बुलाई है। बेशक इससे कई राज्यों में सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। बता दें कि यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर बुलाया गया (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। प्रदर्शनकारी संगठन केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें वे मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक मानते हैं। कहने की जरूरत नहीं, परिवहन, बैंक और डाक सेवाओं में रुकावट के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों के अनुसार, केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित इस हड़ताल में बिजलीकर्मियों की भागीदारी बड़े पैमाने पर होगी। ऐसे में कई क्षेत्रों में पावर कट या सेवाओं में रुकावट की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही बिहार में कांग्रेस, आरजेडी, और अन्य महागठबंधन विपक्षी दलों ने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में बंद करने का ऐलान किया है।  ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और सड़कों पर जाम की रणनीति बनाई गई (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि मजदूर यूनियन, और कई क्षेत्रीय संगठनों का समर्थन भी मिला है। यूनियनों का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन श्रम कानूनों में बदलाव, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण, संविदा नौकरियों के विस्तार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर है। ध्यान देने वाली बात यह कि इस बार हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मंच का भी समर्थन मिला है। इनके सहयोग से ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और सड़कों पर जाम की रणनीति बनाई गई (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। इस मौके पर केरल के परिवहन मंत्री के. बी. गणेश कुमार ने कहा है कि “बुधवार (9 जुलाई) को केएसआरटीसी की बसें सामान्य रूप से चलेंगी, क्योंकि यूनियनों की तरफ से कोई हड़ताल सूचना नहीं मिली है, लेकिन ट्रेड यूनियनों ने मंत्री के बयान को गलत बताया है।” उनका कहना है कि “हड़ताल की सूचना पहले ही दी जा चुकी है और केएसआरटीसी के कर्मचारी भारत बंद में शामिल होंगे।” हड़ताल का नेतृत्व कर रहे 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ सरकारी विभाग युवाओं को नौकरी देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ज्यादा रख रहे (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) हैं- यूनियन  हालाँकि इस बीच यूनियनों का यह कहना है कि “सरकारी विभाग युवाओं को नौकरी देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ज्यादा रख रहे हैं। उन्होंने रेलवे, एनडीएमसी लिमिटेड, स्टील सेक्टर और शिक्षा सेवाओं के उदाहरण देते हुए कहा कि “यह ट्रेंड गलत है क्योंकि देश में 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है। 20 से 25 साल के युवाओं में बेरोजगारी सबसे ज्यादा (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। वे खासकर नए श्रम कानूनों की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे, काम करने के घंटे बढ़ेंगे और यूनियन बनाना या हड़ताल करना मुश्किल हो जाएगा। वे सरकार से ज्यादा नौकरियां, MGNREGA की मज़दूरी और काम के दिन बढ़ाने और शहरी इलाकों के लिए भी ऐसी ही रोजगार योजनाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यूनियनों ने श्रम मंत्री को 17 मांगों की एक लिस्ट सौंपी है। उनका कहना है कि “सरकार की ओर से कोई खास जवाब नहीं मिला है। बैंक खुले रहने की उम्मीद है, क्योंकि 9 जुलाई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने छुट्टी घोषित नहीं की है।” ऐसे में यदि बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि यह पहली बार नहीं है, जब ट्रेड यूनियनों ने इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी साल 2020, 2022 और 2024 को भी हड़तालें हुई थीं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण, नौकरी की असुरक्षा और वर्कफोर्स को कैजुअल बनाने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। Latest News in Hindi Today Hindi news 250 Million Workers on Nationwide Strike #BharatBandh #NationwideStrike #250MillionWorkers #IndiaProtest #LabourRights #StrikeIndia #WorkersUnite #TodayStrike #BandhAlert #IndiaNews

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UP Native Slams Raj Thackeray Over Maharashtra Sacrifice

‘यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाया…’, राज ठाकरे और मनसे पर पूर्व मार्कोस कमांडो का तगड़ा अटैक 

महाराष्ट्र में इन हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जबरदस्त विवाद चल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता हिन्दी बोलने वाले उत्तर भारतियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जिसकी वजह से राज्य में तनाव बना हुआ है। इस विवाद पर 26/11 मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attacks) में कई लोगों को बचाने वाले पूर्व मरीन कमांडो फोर्स (MARCOS) प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने भी अपना पक्ष रखते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर भाषा के नाम पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल पूछ हैं।  प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने सोशल मीडिया पर राज ठाकरे (Raj Thackeray) से पूछा है कि मुंबई पर जब पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया तब आपके ये योद्धा कहां थे, जो अब मराठी भाषा न बोलने वाले मासूम लोगों को पीटकर खुद को महाराष्ट्र का योद्धा बता रहे हैं। कमांडो प्रवीण तेवतिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो भी पोस्ट की है, जिसमें वो कमांडो की वर्दी पहने नजर आ रहे हैं, उनके बुलेटप्रूफ जैकेट पर UP लिखा हुआ है और गले में एके 47 गन लटक रही है।  I saved Mumbai on 26/11.I bleed for Maharashtra.I'm from UP. I saved the Taj Hotel.Where were Raj Thakre's so Called Warriors?Don't divide the Nation. Smiles don't require any Language. https://t.co/z8MBcdcTAW pic.twitter.com/uZAhM4e6Zq — Adv Praveen Kumar Teotia (@MarcosPraveen) July 5, 2025 मुंबई पर जब अटैक हुआ तब आप और आपके योद्धा कहां थे- तेवतिया प्रवीण तेवतिया (MARCOS) ने अपने पोस्ट में लिखा, “26/11 आतंकी हमले (26/11 Mumbai Attacks) के दौरान मैनें यहां के लोगों को बचाया था। मैं यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाने से पीछे नहीं हटा। मैंने और मेरे साथियों ने ताज होटल को बचाया। उस समय राज ठाकरे के ये तथाकथित योद्धा कहां थे? क्या उनको यह हमला नहीं दिख रहा था? राज ठाकरे आप खुद कहीं नहीं दिखे। उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के कोई सदस्य भी नहीं दिखा। उस समय ठाकरे परिवार ने कुछ भी नहीं बोला, क्योंकि उस समय मुंबई में लोगों की जान बचाने वाले सेना के ज्यादातर जवान यूपी और बिहार जैसे दूसरे राज्यों के थे। इसलिए तुच्छ राजनीति के नाम पर हमारे देश को मत बांटो। मुस्कुान और खुशी के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं पड़ती।”  तेवतिया ने यह भी कहा कि, मैं भी यूपी से हूं और देश के पांचवें प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं। इसलिए, हमें राजनीति सिखाने की कोशिश मत करो। राजनीति और भाषा को अलग रखो। महाराष्ट्र के लोगों की तरह हमें भी मराठी भाषा पर गर्व है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर आप लोगों को राजनीति करनी है, तो युवाओं को नौकरी देने और विकास कार्यों पर करो। आप लोगों ने महाराष्ट्र के विकास के लिए अब तक क्या किया, यह जनता को बताओ। प्रवीण तेवतिया ने यह पोस्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए किया। सीएम फडणवीस इस वीडियो में भाषा के नाम पर राज्य में गुंडागर्दी और हिंसा फैलाने वालों को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कौन हैं शौर्य चक्र विजेता प्रवीण कुमार तेवतिया? बता दें कि प्रवीण तेवतिया यूपी के रहने वाले एक पूर्व मार्कोस कमांडो हैं। इन्होंने मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान ताज होटल में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपनी टीम का नेतृत्व किया था। ऑपरेशन के दौरान ये आतंकियों से सीधे भीड़ गए थे। दाेनों तरफ से हुई गोलीबारी में इन्हें चार गोलियां लगीं थी, लेकिन तब भी ये पीछे नहीं हटे और आतंकियों से लड़ते रहे। इनके और इनकी टीम के त्वरित कार्रवाई और अदम्य साहस के कारण ही ताज होटल में फंसे 150 से अधिक लोगों को बचाया गया था। प्रवीण तेवतिया को उनके इस बहादुरी भरे कार्य के लिए शौर्य चक्र पुरस्कार से नवाजा गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Praveen Teotia MARCOS #RajThackeray #MNS #MaharashtraPolitics #MARCOSCommando #UPvsMaharashtra

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Bihar Youth Commission Formed,

Bihar Cabinet Meeting: ‘बिहार युवा आयोग’ का गठन और महिलाओं को मिलेगा 35% आरक्षण

बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं और महिलाओं के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में कुल 43 एजेंडों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से कुछ फैसले न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाले समय में बिहार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी गहराई से प्रभावित करेंगे। कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में सबसे अहम घोषणा बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के गठन को लेकर की गई, जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह आयोग न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें स्किल डेवलपमेंट की दिशा में मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी देगा। क्या है बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog)? बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) राज्य के युवाओं को केंद्र में रखकर बनाया गया एक विशेष निकाय होगा, जिसका उद्देश्य युवाओं की जरूरतों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर काम करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने X के पोस्ट में लिखा है कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार के युवाओं को बेहतर शिक्षा, ट्रेनिंग और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ‘बिहार युवा आयोग’ के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आयोग सरकार को सुझाव देने के साथ-साथ युवाओं के हित में नीतियां बनाने में सहयोग करेगा। इस आयोग का काम न केवल प्रशिक्षण और रोजगार तक सीमित रहेगा, बल्कि यह युवाओं की सामाजिक, शैक्षणिक और मानसिक स्थिति का भी मूल्यांकन करेगा और सरकार को समय-समय पर सुझाव देगा कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। आयोग की कार्य और जिम्मेदारियां बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के प्रमुख कार्य इस प्रकार होंगे: यह आयोग युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें एक सशक्त नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला: 35% आरक्षण कैबिनेट की इस बैठक में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया गया। अब से बिहार की मूल निवासी महिलाओं को सरकारी नौकरियों (Government Jobs) में 35% आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण सभी स्तरों और सभी विभागों की सीधी नियुक्तियों में लागू होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने कहा है कि बिहार की महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के लिए यह आरक्षण न केवल एक हक है, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है, जिसे राज्य सरकार निभा रही है। इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, नौकरी के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाना और उन्हें समाज में बराबरी का स्थान दिलाना है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उस मांग के जवाब में आया है, जिसमें यह कहा जा रहा था कि बिहार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ केवल राज्य की मूल निवासी महिलाओं को ही दिया जाए, न कि बाहरी राज्यों की महिला उम्मीदवारों को। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ क्या होगा असर? बिहार सरकार के ये दोनों फैसले बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) का गठन और महिलाओं को आरक्षण राज्य के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक विकास में नई जान फूंक सकते हैं। जहां एक ओर युवा आयोग उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर महिला आरक्षण से बेटियों को सरकारी नौकरियों में अधिक भागीदारी का मौका मिलेगा। राजनीति से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह आयोग अगर ठीक तरीके से काम करता है, तो यह बिहार के युवा टैलेंट को राज्य में ही रोकने और ब्रेन ड्रेन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। नीतीश कुमार की सरकार ने इस बार की कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में ऐसे निर्णय लिए हैं, जो सीधे तौर पर राज्य की युवा और महिला आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। ये फैसले केवल प्रशासनिक घोषणाएं नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम हैं। अब देखना यह होगा कि इन योजनाओं को ज़मीन पर कितनी तेज़ी और ईमानदारी से लागू किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Yuva Aayog #BiharCabinet #YouthCommission #WomenReservation #BiharNews #ReservationForWomen #NitishKumar #BiharGovernment

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Tejashwi Slams Nitish on Bihar Law and Order Crisis

Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar: बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को घेरा, कही यह बात

बिहार की राजधानी पटना में अपराधियों का तांडव है कि थमने का नाम नहीं ले रहा है। पटना के कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या के बाद बेख़ौफ़ अपराधियों रविवार (06 जुलाई, 2025) की रात एक और बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। दरअसल, खगौल में डीएवी स्कूल के पास अपराधियों ने अजीत कुमार नामक एक 50 वर्षीय व्यक्ति को गोलियों से भून (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) डाला। गोली लगते ही मौके पर अजीत कुमार की मौत हो गई। अजीत मुस्तफापुर के रहने वाले थे। जानकारी के मुताबिक अजीत कुमार प्राइवेट स्कूल का संचालन करते थे। बाइक सवार अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया है। गोली मारने के बाद अपराधी  फरार हो गए। हालांकि अपराधी कौन थे क्योंकि मारा इसके बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि घटना पटना के खगौल थाना क्षेत्र की है। बाइक सवार अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ है। हालांकि हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।  बिहार सीएम नीतीश कुमार ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए डीजीपी को अधिकारियों को पकड़ने के (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) निर्देश दिए हैं इस बीच राजधानी पटना में बिनजेसमैन गोपाल खेमका हत्याकांड के बाद विपक्ष पूरी तरह सरकार पर हमलावर हो गया है। हालाँकि बिहार सीएम नीतीश कुमार ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए डीजीपी को अधिकारियों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं। लेकिन आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को निशाने पर लिया (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) है। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री अचेत हैं और अपराधी मस्त है।” इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए हैं। यही नहीं, उनकी पार्टी के एक्स हैंडल से भी लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं। जिसमें लिखा है कि “रोज-रोज हत्याएं हो रही हैं, पुलिस वाले बाबाओं की सुरक्षा में लगे हैं। पटना के गांधी मैदान में लगे सनातन समागम पर आरजेडी का प्रहार है।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कहीं कोई किसी की सुनने वाला (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) नहीं है- तेजस्वी यादव बता दें कि बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था और हत्याओं को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने न सिर्फ नीतीश सरकार पर हमला बोला है बल्कि एक पोस्ट के जरिए सीएम और सरकार पर निशाना साधा है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “पटना में हत्या, नालंदा में डबल मर्डर! अपराधी मस्त, पुलिस पस्त। मुख्यमंत्री अचेत, अधिकारी जड़ और व्यवस्था निर्जीव। कहीं कोई किसी की सुनने वाला (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) नहीं है।” इसके अलावा आरजेडी द्वारा किए गए पोस्ट में लिखा कि “बिहार में हत्या पर हत्या। रात में अपराधियों द्वारा कई हत्या। पुलिस बाबाओं की सुरक्षा में लीन है। पटना में हुए हत्याकांड पर राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि “भाजपा और नीतीश कुमार ने मिलकर बिहार को क्राइम कैपिटल बना दिया है। आज बिहार लूट और गोली के साए में चल रहा है। अपराध यहां पर न्यू नॉर्मल बन चुका है और सरकार पूरी तरह नाकाम है।” कहने की जरूरत नहीं, जिस तरह से बिहार में हत्याएं हो रहीं हैं उससे एक बार पुनः कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है। विपक्ष लगातार हमलावर है और आरोप लगा रहा है कि बिहार में महाजंगलराज है। सीएम नीतीश कुमार के पास गृह विभाग है जो उनसे संभल नहीं रहा। प्रदेश में एक के बाद एक बड़ी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में चुनावी वर्ष में कानून-व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav #TejashwiYadav #NitishKumar #BiharNews #LawAndOrder #BiharPolitics

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