turmoil of Maharashtra

महाराष्ट्र की राजनीतिक घमासान में एक दो नहीं 4-4 ‘संजय’ पर चर्चा, तीखी जुबानी जंग से लेकर हाथापाई तक 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरफ जहां मराठी बनाम हिंदी भाषा का मुद्दा गर्म है, वहीं राज्य में संजय नाम के नेता भी सुर्खियों में हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट के मुख्य प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से शिंदे गुट वाली शिवसेना में आए संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) भी विपक्ष पर तीखा पलटवार करने के कारण मीडिया में छाए रहते हैं। इन दोनों संजय के अलावा महाराष्ट्र में संजय नाम से दो और ऐसे नेता हैं, जो चर्चा में बने रहते हैं। ये हैं संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) और संजय गायकवाड़ (Sanjay Gaikwad)।  संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) राज्य सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री हैं और इस समय कैश कांड वीडियो को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ संजय गायकवाड़ मुंबई के आकाशवाणी की कैंटीन में खराब खाने को लेकर मारपीट करने के चक्कर में चर्चित हो चुके हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में देखें तो ये चारों संजय इस समय एक दूसरे पर हमलवार हैं। संजय राउत (Sanjay Raut) जहां शिरसाट और गायकवाड़ को घेरने में जुटे हैं, तो वहीं संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) अपने बयानों से राउत पर प्रहार कर रहे हैं।  संजय राउत बनाम संजय शिरसाट और संजय निरुपम बता दें कि मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) को आयकर विभाग ने संपत्ति में गड़बड़ी को लेकर नोटिस भेजा हुआ है। इस पर राजनीति अभी थमी भी नहीं थी कि संजय राउत (Sanjay Raut) ने शिरसाट के बेडरूम का एक वीडियो जारी किया। जिसमें शिरसाट कथित तौर पर नोटों से भरे एक बैग के पास सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने इस वीडियो के माध्यम से शिंदे की शिवसेना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए घेरा है। वहीं संजय शिरसाट ने बैग में कपड़े होने का दावा करते हुए राउत पर मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है।  वहीं दूसरी तरफ संजय निरुपम और संजय राउत (Sanjay Raut) भी एक दूसरे पर लगातार प्रहार करने में जुटे हैं। पिछले दिनों संजय राउत ने दावा किया था कि गुरु पूर्णिमा के दिन एकनाथ शिंदे अपने “गुरु” गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली गए थे। राउत के इस दावे को संजय निरुपम ने झूठा बातते हुए घेरा। निरुपम ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अमित शाह झारखंड में थे और वहां एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। यह सभी को पता है, लेकिन इसके बाद भी राउत ने गंदी राजनीति के लिए झूठ फैलाया। इसके लिए राउत को बिना किसी शर्त एकनाथ शिंदे से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही राउत को चटुकार तक कह दिया। इसके बाद से ही दोनों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ संजय गायकवाड़ भी भर रहे हुंकार बुलढाणा विधानसभा से विधायक संजय गायकवाड़ अपने कैंटीन प्रकरण को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। गायकवाड़ ने खराब खाने का आरोप लगाते हुए कैंटीन कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया। गायकवाड़ के इस हरकत पर महराष्ट्र में खूब बवाल हुआ है। विवाद बढ़ने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई के लिए यह मामला विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को रेफर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं। संजय गायकवाड़ अपनी हरकतों और बयानों को लेकर अक्सर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। कैंटीन कर्मचारियों को पीटने के बाद गायकवाड़ ने विवादित बयान देते दक्षिण भारतीयों पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था साउथ इंडियन डांस और लेडीज बार चला मराठा संस्कृति को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कैंटीन के ठेके नहीं मिलने चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Maharashtraelection #Election2025 #Mumbai #Devendrafadnavish

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Election Commission

बिहार में वोटर लिस्ट से कट सकते हैं 35 लाख से ज्यादा नाम,  वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अब तक 88% मतदाताओं ने भरा गणना पत्र

बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आयोग की यह महत्त्वाकांक्षी पहल 24 जून 2025 को राज्यभर में गणना फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 25 जुलाई तक चलेगा। मतलब अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मात्र 10 दिन और रह गए हैं। एसआईआर (SIR) के तहत अब तक 7 करोड़ 90 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 6 करोड़ 60 लाख 67 हजार 208 लोगों ने अपने गणना फॉर्म सफलतापूर्वक भरकर जमा करा दिए हैं। यह आंकड़ा कुल मतदाताओं का लगभग 88 फीसदी है, जो आयोग के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जो सबसे चौकाने वाली सामने आई है, वह यह है कि अब तक के सर्वेक्षण और फॉर्म सत्यापन के आधार पर करीब 35 लाख 69 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा उन मतदाताओं का है, जो सत्यापन के दौरान या तो मृत पाए गए या एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत मिले या फिर स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए। मतदाता सूची से हट सकता है बिहार के 4.52% लोगों का नाम चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर अब तक कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। दस्तावेजों के आधार पर बताया गया है कि सत्यापन के दौरान 1.59% मतदाता मृत पाए गए और 2.2% ने स्थायी रूप से अपने निवास स्थान बदल चुक हैं। इसके अलावा 0.73% मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। कुल मिलाकर आयोग को इन तीनों श्रेणियों में 4.52% मतदाता ऐसे मिले हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।   वहीं, अब भी करीब 11.82% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने फॉर्म आयोग के पास जमा नहीं किए हैं। आयोग इन बचे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। तीसरे दौर में राज्यभर में एक लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को फिर से मैदान में उतारा गया है ताकि घर-घर जाकर बचे हुए मतदाताओं से फॉर्म भरवाया जा सके। इस कार्य में चुनाव आयोग को विभन्न राजनीतिक दलों द्वारा तैनात 1.5 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी सहयोग मिल रहा है।  मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) के लिए बिहार के सभी 261 विधानसभा क्षेत्र के 5,683 वार्डों में विशेष शिविर लगाया गया है। इन शिविरों का उद्देश्य सभी विधानसभा में  मतदाता फॉर्म का सत्यापन करना है। साथ ही जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर गए हैं, उनके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे भी ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से समय रहते अपना फॉर्म जमा कर सकें। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आयोग 1 अगस्त को जारी करेगा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को आपत्ति और सुधार के लिए कुछ दिन के लिए समय दिया जाएगा, ताकि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी कर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी।   बिहार में चल रही इस मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को भाजपा समेत एनडीए गठबंधन के दल जहां लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध मतदाताओं का नाम भी सूची से हटाया जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #ElectionCommission #Biharelection2025 #Voterlist #SIR #Biharassemblyelection

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ULFA-1

भारतीय सेना का म्यांमार में मिलिटेंट ग्रुप ULFA-1 पर ड्रोन हमला? 3 टॉप लीडर समेत कई आतंकी ढेर

म्यांमार में रहकर भारत के खिलाफ आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले मिलिटेंट ग्रुप उल्फा (।) (ULFA) पर भारत ने ड्रोन हमला किया है। इस घटना में इस मिलिटेंट संगठन के टॉप लीडर्स समेत कई आतंकियों की मौत हुई है। यह दावा खुद इस मिलिटेंट संगठन ने किया है। उल्फा (I) (ULFA)  ने एक बयान जारी कर बताया कि भारतीय सेना (Indian Army) ने उसके कैंप पर ड्रोन से हमला किया है, जिसमें उसके टॉप लीडर्स को मौत हुई है। हालांकि भारतीय सेना (Indian Army) ने इस तरह के किसी भी ऑपरेशन को करने से इंकार करते हुए बताया कि उनकी तरफ से न तो सीमा पार कोई ऑपरेशन चलाया गया और न ही इस तरह के किसी ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी है।  उल्फा (I) (ULFA)  की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना ने म्यामांर में मौजूद उनके कैंप्स पर ड्रोन के जरिए हमला किया है। इस आतंकी संगठन ने बताया कि, यह हमला देर रात 2 से 4 के बीच उस समय हुआ, जब उसके टॉप लीडर्स कैंप में आराम कर रहे थे। इस ड्रोन अटैक में उल्फा (।) का लेफ्टिनेंट जनरल नयान मेधी उर्फ नायन एसोम, ब्रिगेडियर गणेश एसोम और कर्नल प्रदीप एसोम समेत कई आतंकियों की मौत हो गई। इसके अलावा 20 से ज्यादा आतंकी घायल हो गए। इस आतंकी संगठन की तरफ से जारी एक दूसरे बयान में यह भी दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने ड्रोन के बाद मिसाइल से भी हमला किया।  भारतीय सेना ने कहा- हमने नहीं किया कोई हमला  उल्फा (I) का प्रवक्ता ईशान एसोम ने यह बयान जारी करते हुए जवाबी कार्रवाई तक की धमकी दी है। उसने कहा कि भारतीय सेना फाइटर जेट की मदद से लगातार ऐसे हमले कर रही है। हमने असम के लोगों को यह बता दिया है कि इस कायरता पूर्ण हमले का बदला लेने का हमें भी हक है। हम जल्द ही भार को उनके इस हमले का ठोस जवाब देंगे। एक तरफ जहां उल्फा (I) भारत पर हमले का आरोप लगाते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है। वहीं भारतीय सेना (Indian Army) इस तरह के किसी भी हमले से इंकार किया है। भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने इस संबंध में मीडिया द्वारा पूछ गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उनके पास सीमा पार इस तरह के किसी भी ऑपरेशन की कोई जानकारी नहीं है। भारतीय सेना ने इस तरह का कोई ऑपरेशन नहीं चलाया है।  वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने भी म्यांमार में उल्फा (I) के कैंप पर इस तरह के  किसी ड्रोन हमले से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी ऑपरेशन न तो असम की धरती पर हुआ है और न ही असम पुलिस इसमें किसी भी तरह से शामिल है। भारतीय सेना अगर ऐसा कोई ऑपरेशन करती तो उसके बारे में बयान जारी करती, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। शायद कुछ दिनों के बाद इस कथित हमले को लेकर ज्यादा जानकारी सामने आएगी।  इसे भी पढ़ें:- 7 Demanding Courses: ये हैं 7 डिमांडिंग कोर्स, जिसमें आप भी बना सकते हैं करियर भारत और असम सरकार ने 2003 में उल्फा (I) के साथ किया था समझौता  बता दें कि उल्फा (I) जहां पर भारतीय हमले का जिक्र किया है, वह म्यांमार का सगईंग क्षेत्र है। आंतरिक गृहयुद्ध से प्रभावित म्यांमार के इस क्षेत्र में कई नक्सल और मिलिशिया समूह रहते हैं। यह क्षेत्र भारतीय विरोधी आतंकी समूहों का भी ठिकाना बना हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र और असम की राज्य सरकार ने उल्फा (I) के साथ 2023 में पीस पैक्ट साइन किया था। जिसके बाद से ही इसके भारत विरोधी अभियान रूके हुए थे। हालांकि बीते दिनों प्रकाशित कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उल्फा (I) चीन के समर्थन से फिर अपने आप को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में इस आतंकी संगठन पर हमला होना बड़ी घटना है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #IndianArmy #ULFA #Asam #CMHimantaBiswaSarma #ULFA1

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Chirag Paswan's Bold Move in Bihar 2025 Polls

Chirag Paswan: राजनीतिक विरासत के युवा चेहरे की मजबूत दस्तक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में LJP की भूमिका

जनता के बीच चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नाम हमेशा से ही युवा ऊर्जा और राजनीतिक बदलाव का पर्याय रहा है। राम विलास पासवान के बेटे और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री, चिराग ने अपनी अगुआई में लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। युवा चेहरे की मजबूती चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) सोच को 2025 विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में अगली पंक्ति की लड़ाई में बदलना चाहते हैं । उन्होंने आरा में नव संकल्प महासभा (Nav Sankalp Mahasabha) आयोजन किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे खुद चुनाव लड़ेंगे, हालांकि अभी यह तय नहीं कि वे किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बिहार से चुनाव नहीं लड़ूंगा, बल्कि बिहार के लिए लड़ूंगा।”   243 सीटों की चुनौती छपरा में आयोजित विशाल रैली में चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे बीजेपी–जेडीयू गठबंधन (BJP-JDU Alliance) को सीट शेयरिंग में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  LJP(RV) की रणनीति और गठबंधन समन्वय चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने खुद को नए बिहार के एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते हुए, दलित–पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। उन्होंने नालंदा में बहुजन भीम संकल्प समागम (Bahujan Bhim Sankalp Samagam) की शुरुआत की जिसका मकसद जनता के बीच मजबूत पैठ बनाना है। BJP उन्हेंNDA में सीटों के लिए दबाव बनाते हुए देख रही है – 30 से 40 सीटों की उनकी मांग चर्चा में है। जेडीयू भी सतर्क है और गठबंधन पर फिर से बातचीत की संभावना संकेत दे रहा है। नीतीश–चिराग का गठबंधन राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, चिराग ने संकेत दिए हैं कि यदि NDA सहयोगी बने रहें, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही मुख्यमंत्री का चेहरे होंगे।  हालांकि उनका इरादा सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का नहीं है बल्कि दलित, युवा और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बनकर उनकी परेशानियों को दूर करना है। युवा और दलित वोट बैंक आकर्षित चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अपील में यह स्पष्ट झलकता है कि वे युवा और दलित मतदाताओं को सबसे पहले प्राथमिकता देंगे। बिहार में दलित लगभग 19% आबादी बनाते हैं, और इस समूह पर उनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है । दलित वर्ग को जोड़ने के लिए उनके बहुजन–भीम समूह अभियान पीछे नहीं रहे। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  नई रणनीतिक योजना उनकी रणनीति में शामिल हैं: चिराग पासवान बिहार की राजनीति में अब तक केंद्र में रहे युवा नेता के रूप में सामने आए हैं – उन्होंने दिल्ली वाली राजनीति से ध्यान हटाकर बिहार की जमीन पर आकर मजबूत स्वरुप अपनाया है। उनका बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) विजन बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) तक चिराग का राजनीतिक जोर बढ़ा हुआ दिखता है। अगर वे गठबंधन और सीट वितरण की कवायद में संतुलन बनाए रखते हुए, अपनी रणनीति को धरातल पर ला पाए, तो बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उनका हस्ताक्षर आनेवाला है। चिराग पासवान (Chirag Paswan) केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, वे बिहार में राजनीतिक नवप्रवर्तन लाना चाहते हैं। उनका युवा नेतृत्व, ‘दलित–युवा’ आधारित नीतियां और गठबंधन की चालबाजी 2025 के चुनावी समीकरण को नए स्वरूप देने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharElection2025 #LJP #YouthLeader #BiharPolitic

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CM Yogi Adityanath Bold Statement

CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir: छांगुर बाबा को लेकर सीएम योगी का बड़ा बयान, कही ऐसी बात कि मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण का खेल खेलने वाले छांगुर बाबा से जुड़े एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश आंतकवाद रोधी दस्ते की टीम ने पिछले सप्ताह छांगुर बाबा और उसके एक सहयोगी को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने छांगुर बाबा पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया हुआ (CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir) था। पुलिस के मुताबिक, बाबा और उसके सहयोगियों पर 100 करोड़ के विदेशी फंडिग का भी आरोप है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही है। इस मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को गिरफ्तार किया गया है। अवैध धर्मांतरण और छांगुर बाबा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। धर्मांतरण की साजिश पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “बलरामपुर में धर्मांतरण की साजिश की गई। धर्मांतरण कराने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि “धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है।”  कैसे धर्मांतरण करना है, इसका उसने रेट भी तय (CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir) किया थे सीएम योगी ने बाबा छांगुर के कारनामों का जिक्र करते हुए कहा कि “कैसे धर्मांतरण करना है, इसका उसने रेट भी तय किया थे। ऐसे लोग देश का स्वरूप बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।” योगी ने कहा कि “आपने देखा होगा किस प्रकार की साजिशें हो (CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir) रही हैं। अभी बलरामपुर में हम लोगों ने बड़ी कार्रवाई को आगे बढ़ाया। आपने देखा होगा, उसने रेट तय किए, धर्मांतरण के कार्यक्रम को कैसे आगे बढ़ाना है। हिंदुओं में, ब्राह्मणों में, क्षत्रियों में, सिखों में, ओबीसी जातियों में, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों में, लोगों को कैसे धर्मांतरण करना है, सबके रेट उसने तय किए हुए थे। विदेशों से धनराशि आ रही थीं।” सीएम योगी ने आगे कहा कि “आप सोचिए, 100 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन अब तक उसके 40 खातों में प्राप्त हुआ है और वह लगातार उस अभियान को बढ़ाने का कार्य कर रहा था। इस रूप में देश का स्वरूप बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। परिस्थितियां बदली हैं, उद्देश्य उनका वही है जो उस समय था, हां, काम का तरीका उन्होंने बदला है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ औरंगजेब का उद्देश्य था कि सनातन धर्म को समाप्त किया (CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir) जाए बता दें कि योगी ने गुरु तेग बहादुर महाराज की 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित श्री तेग बहादुर संदेश यात्रा में शामिल हुए थे। सीएम ने कहा कि “सनातन धर्म की रक्षा के लिए गुरू तेग बहादुर महाराज ने शहादत दी (CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir) थी। इस यात्रा और कार्यक्रमों के माध्यम से 350 वर्षों के पूरे इतिहास को एक जीवंतता प्रदान की जा रही है। वह कैसा कालखंड रहा होगा जब औरंगजेब जैसा क्रूर और बर्बर शासक रहा हो। उस समय हर जगह से अत्याचार के समाचार आते थे। औरंगजेब का उद्देश्य था कि सनातन धर्म को समाप्त किया जाए। वह इस्लामीकरण के जिस बड़े अभियान को लेकर आगे बढ़ा था, उसमें उसे सबसे पहले चुनौती गुरू तेग बहादुर महाराज ने दी थी। खैर, इस दौरान उन्होंने कहा कि “अनुसूचित जाति के लोगों का धर्मांतरण भय और लालच देकर कराया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि “देश के स्वरूप को बदलने के लिए विदेश से पैसे आ रहे हैं और छांगुर बाबा के 40 खातों में सौ करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन हुआ है।” खैर, पुलिस के मुताबिक, एटीएस इससे पहले छांगुर बाबा के बेटे और नवीन रोहर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। एटीएस ने बुधवार को छांगुर बाबा और उसके सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को एक सप्ताह के लिए रिमांड पर लिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news CM Yogi’s Bold Statement on Changur Baba Sparks Stir #CMYogi #ChangurBaba #YogiAdityanath #UPPolitics #BreakingNews #ViralNews #YogiStatement #PoliticalBuzz

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विवाद में घिर गए हैं Sanjay Shirsat

नोटों से भरे बैग के पास बैठकर सिगरेट फूंकते दिखे महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट, वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र का सियासी पारा चढ़ा 

महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) एक बार फिर विवादों में हैं। संजय शिरसाट का एक वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कमरे में बैठकर सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं और उनके बगल में एक बैग रखा है जो नोटों से भरा हुआ प्रतीत हो रहा है। इस यह वीडियो को शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने अपने एक्स अकाउंट पर जारी किया। जिसके बाद से ही राज्य की राजनीत में हलचल मचा हुआ है। संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) को अपने अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मुझे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पर तरस आ रहा है! वे कितनी बार यूं ही बैठे-बैठे अपनी प्रतिष्ठा को तार-तार होते देखेंगे? लाचारी का दूसरा नाम है – फडणवीस!” संजय राउत (Sanjay Raut) ने यह टिप्पणी करते हुए भाजपा और शिंदे गुट को एक साथ घेरने की कोशिश की है। राउत के इस पोस्ट के बाद जब विवाद ने तूल पकड़ा तो मंत्री संजय शिरसाट भी सामने आए और सफाई दी कि वीडियो में दिख रहे बैग में नकदी नहीं बल्कि उनके कपड़े रखे थे। उन्होंने कहा कि संजय राउत द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है और यह केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की एक गहरी साजिश है। आयकर विभाग ने कुछ दिन पहले ही भेजा था नोटिस बता दें कि वीडियो सामने आने के ठीक एक दिन पहले संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat Viral Video) ने मीडिया के सामने स्वीकार किया था कि आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा है। यह नोटिस 2019 से 2024 के बीच उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में आई असामान्य वृद्धि के आधार पर जारी किया गया है। शिरसाट औरंगाबाद (पश्चिम) से विधायक हैं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रमुख नेता हैं।  शिरसाट ने आयकर विभाग के नोटिस की जानकारी देते हुए कहा, “कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ आयकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। मुझे बीते बुधवार को जवाब देना था, लेकिन मैंने और अधिक समय मांगा है। मैं सही स्पष्टीकरण दूंगा, कुछ भी गलत नहीं किया है।” संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) ने शुरुआत में दावा किया था कि लोकसभा सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बेटे श्रीकांत शिंदे को भी आयकर विभाग से नोटिस मिला है। हालांकि, बाद में उन्होंने इस बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा, “मेरे जवाब को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि श्रीकांत शिंदे को नोटिस मिला है कि नहीं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।” आदित्य ठाकरे का तीखा सवाल शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने भी इस मुद्दे पर शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज संजय शिरसाट एक वीडियो में अंडरवियर और बनियान में बैठे दिखते हैं, उनके पास नकदी से भरे बैग हैं। हम ’50 खोखे एकदम ठीक’ जैसी बातें सुनते हैं, लेकिन अब ये दृश्य वीडियो में साफ दिख रहा है। इतना पैसा कहां से आया? क्या कोई ऐसे ही नोटों की गड्डियां लेकर घूमता है? क्या मुख्यमंत्री फडणवीस (Devendra Fadnavis) इस पर कोई कार्रवाई करेंगे? क्या इसी तरह से राज्य को लूटने का धंधा चलता रहेगा?” इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी विपक्ष का हमला और सरकार की चुप्पी यह वीडियो अब राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इस पूरे मामले को सत्ता में बैठे लोगों की कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहा है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) या शिंदे गुट की तरफ से अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। राजनीतिक जानकार इस वीडियो को महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष की साख पर बड़ा धब्बा मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस एक वीडियो ने राज्य में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। अगर सरकार ने इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं की तो विपक्ष आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाकर राज्य सरकार को घेर सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से जिस तरह की चुप्पी नजर आ रही है, उसे देखते हुए कम ही लगता है कि इस मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #SanjayShirsat #ViralVideo #MaharashtraPolitics #CashBagControversy #PoliticalScandal

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Odisha Government Run by Adani

ओडिशा की सरकार अडानी चलाते हैं: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में संविधान बचाओ अभियान के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उद्योगपति अडानी समूह (Adani Group) को लेकर। उन्होंने सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना, महिलाओं की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की और जनता से इन सवालों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। ओडिशा सरकार पर सीधा हमला राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण की शुरुआत ओडिशा की सरकार (Odisha Government) को आड़े हाथों लेते हुए की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य की सत्ता वास्तव में आम जनता के हाथ में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथ में है। उन्होंने दावा किया, ओडिशा की सरकार अब अडानी चला रहे हैं। राहुल गांधी ने जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लाखों लोग भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए एकत्र होते हैं, तो उसी दौरान अडानी और उनके परिवार के लिए रथ रोक दिए जाते हैं। उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ धोखा बताया और कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब जनहित में नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जातीय जनगणना (Caste Census) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में हर जाति और वर्ग की सटीक जनसंख्या का आंकलन नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय केवल एक नारा ही रहेगा। उन्होंने ने कहा कि सबसे पहला काम जातीय जनगणना है, जिससे गरीबों, दलितों, पिछड़ों को अपनी सच्ची शक्ति का अहसास होगा। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल अपने संबोधन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ओडिशा में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में अब तक 40,000 से अधिक महिलाएं गायब हो चुकी हैं और हर दिन औसतन 15 बलात्कार के मामले सामने आते हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रही है और जनता को केवल चुनावों के समय याद करती है। बिहार चुनाव और वोटर लिस्ट विवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बिहार में आगामी चुनावों को लेकर भी बीजेपी और चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के दौरान चोरी हुई, वैसे ही बिहार में भी साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था न रहकर बीजेपी की विंग की तरह काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर लिस्ट (New Voter List) में जुड़ गए जिनकी जानकारी किसी को नहीं है और इसी तरह की प्रक्रिया बिहार में भी अपनाई जा रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि हमने चुनाव आयोग से बार-बार वोटर लिस्ट (Voter List) और वीडियोग्राफी की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बिहार में अगर कोई चुनाव चोरी करने की कोशिश करेगा, तो INDIA गठबंधन (India Alliance) मिलकर इसका मुकाबला करेगा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का समर्थन इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) भी मौजूद थे। उन्होंने भी केंद्र सरकार (Union Government) पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार देश के संसाधन जल, जंगल और जमीन को चुनिंदा पूंजीपतियों को सौंप रही है। उन्होंने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान देश में सैकड़ों सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) बनाए गए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिली। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह दौरा केवल एक राजनीतिक रैली नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी था सामाजिक न्याय, पारदर्शी चुनाव और गरीबों-अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों के लिए संघर्ष। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) अब भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के बाद संविधान बचाओ की मुहिम को अगली दिशा देने को तैयार है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण में बार-बार यह दोहराया कि अब वक्त आ गया है कि जनता जागरूक हो, संगठित हो और अपने हक के लिए आवाज़ बुलंद करे। Latest News in Hindi Today Hindi news Mallikarjun Kharge #RahulGandhi #Adani #OdishaPolitics #BreakingNews #IndianPolitics #OdishaNews

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PM Modi's Foreign Visit Row

पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर सीएम मान के तंज से गरमाई सियासत, विदेश मंत्रालय ने बताया गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने विदेश यात्रा से वापस लौट आए हैं, लेकिन अब पीएम मोदी (PM Modi) के इस यात्रा पर राजनीति शुरू हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस हालिया विदेश यात्राओं पर तंज करके देश की राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री मान के विवादित बयान का एक तरफ जहां देश का बुद्धजीवी वर्ग आलोचना कर रहा है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने भी कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रलाय के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री मान का नाम लिए बिना उनके बयान को “गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक और अशोभनीय” करार दिया है। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की विदेश यात्राओं पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “प्रधानमंत्री 140 करोड़ की आबादी वाले देश में कम रहते हैं, लेकिन वहां रहते नहीं हैं। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है। इतने लोग तो हमारे यहां पर जेसीबी से खुदाई देखने के लिए इकट्ठे हो जाते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी पीएम मोदी के ब्राजील, घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया दौरे के संदर्भ में की थी। सीएम मान (Bhagwant Mann) का यह बयान विपक्षी आलोचना के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर सामने आया, लेकिन इसकी गूंज अब विदेश नीति के गलियारों तक पहुंच गई है। विदेश मंत्रालय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रेस ने जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमने ग्लोबल साउथ के मित्र देशों के साथ भारत के संबंधों पर राज्य के एक उच्च पदाधिकारी द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां देखी हैं। ये टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक हैं और राज्य के किसी पदाधिकारी को शोभा नहीं देतीं।” हालांकि इस दौरान रणधीर जायसवाल ने सीधे भगवंत मान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि वे किसे संबोधित कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार खुद को इस तरह के हर उस अनुचित टिप्पणी से अलग करती है, जो दोस्त देशों के साथ हमारे संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी, विशेष रूप से राज्य स्तर के जिम्मेदार नेताओं द्वारा, विदेश नीति के गंभीर मसलों को स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखने का प्रयास है, जो दीर्घकालिक रूप से राजनयिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। इन दौरों के दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार, कृषि, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक मंचों पर समर्थन जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा ने किया तगड़ा पलटवार   सीएम मान के बयान के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) की टिप्पणी को “राजनीतिक अपरिपक्वता” और “संविधानिक मर्यादा का उल्लंघन” बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सीएम मान पर पलटवार करते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री को विदेशों में मिलने वाला सम्मान 140 करोड़ भारतीय के लिए गर्व की बात है। चाहे सम्मान देने वाला कोई भी देश हो, जब भारत के नेतृत्व को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलता है तो वो क्षण संपूर्ण भारत की प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता है। लेकिन भगवंत मान जैसे कुछ लोग, जिनके लिए केजरीवाल और उनके जूतों की चाटुकारिता के अलावा सब कुछ छोटा है, वो इस सम्मान का मजाक बनाते हैं। सीएम मान के बयान पर विवाद बढ़ता देश आप (AAP) पार्टी के नेता सफाई देना शुरू कर चुके हैं। आप नेताओं का कहना है कि भगवंत मान का मकसद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की उपयोगिता और लागत को लेकर सवाल उठाना था, न कि भारत के कूटनीतिक रिश्तों को कमतर आंकना। Latest News in Hindi Today Hindi news Bhagwant Mann #PMModi #CMMann #ForeignVisit #MEA #Politics2025 #ModiVsMann #IndianPolitics #LatestNews #ModiAbroad #MEAStatement

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Maharashtra Passes Public Security

विरोध और मतभेद के बीच महाराष्ट्र में पास हुआ ‘लोक सुरक्षा विधेयक’: वामपंथी संगठनों पर शिकंजा, विपक्ष ने जताई शंका

महाराष्ट्र विधानसभा ने राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद के बीच बहुप्रतीक्षित ‘महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025’ (Maharashtra Public Security Bill) को बहुमत से पास कर दिया है। यह विधेयक राज्य में वामपंथी उग्रवाद, माओवादी विचारधारा और सरकार विरोधी चरमपंथी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) द्वारा पेश किए गए इस बिल को लेकर जहां सत्ता पक्ष इसे राज्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का नया रास्ता बता रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विधानसभा में लोक सुरक्षा विधेयक (Maharashtra Public Security Bill) पेश करते हुए कहा कि गडचिरोली और कोकण जैसे जिले शहरी और ग्रामीण नक्सलवाद से प्रभावित हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह विधेयक उन संगठनों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा जो गुरिल्ला युद्ध और हिंसक विचारधारा के जरिए सामाजिक अस्थिरता फैलाना चाहते हैं।” सीएम फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने यह भी बताया किया कि यह कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी केंद्रीय कानूनी व्यवस्थाओं की खामियों को पूरा करेगा, जो केवल आतंकवाद तक सीमित हैं। यह नया विधेयक चरमपंथी संगठनों की वैचारिक और संगठित गतिविधियों पर भी शिकंजा कसने का काम करेगा।  विधेयक में संशोधन के लिए आम जनता से मिले थे 12,500 सुझाव  बता दें कि महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025′ (Maharashtra Public Security Bill) पहली बार जुलाई 2024 के मानसून सत्र में विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था। उस समय विधेयक में ‘व्यक्ति और संगठन’ जैसे शब्दों के कारण यह विवादों में घिर गया था। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक असहमति जताने वाले आम नागरिकों को भी निशाना बना सकता है। इसी के चलते विधेयक को एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया। इस समिति में जयंत पाटिल, नाना पटोले, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव और अंबादास दानवे जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। समिति को इस विधेयक को लेकर आम जनता से 12,500 सुझाव प्राप्त हुए। समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन अहम संशोधन किए गए। पहला- ‘व्यक्ति और संगठन’ शब्द हटाकर केवल ‘चरमपंथी विचारधारा वाले संगठन’ रखा गया। दूसरा- निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया। तीसरा- जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की जगह अब डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी जाएगी। सरकार ने विधेयक को लेकर पत्रकार संगठनों से भी संवाद कर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि यह कानून मीडिया की स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति के अधिकारों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा। फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी भी लोकतांत्रिक विचारधारा या आलोचना को दबाने की मंशा नहीं रखती। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ विपक्ष की आशंकाएं और विरोध बरकरार हालांकि, विपक्षी दलों ने संशोधन के बावजूद इस विधेयक को लेकर अपनी गंभीर शंकाएं और आपत्तियां दर्ज की हैं। एनसीपी विधायक भास्कर जाधव ने विधेयक को लेकर सवाल किया कि अगर यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना जरूरी है, तो दूसरे भाजपा शासित राज्यों में इसे क्यों नहीं लाया गया? इसे लाने का मतलब सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाना है। वहीं जयंत पाटिल ने कुछ संशोधनों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि “फडणवीस (Devendra Fadnavis) ध्यान रखें, पी चिदंबरम जिस कानून (PMLA) को लाए थे, वही बाद में उनके खिलाफ लागू हुआ।” एनसीपी विधायक नितिन राऊत ने भी विधयेक को लेकर आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल भविष्य में लोकतांत्रिक आंदोलनों, धरनों या मोर्चों पर लागू हो सकता है। उन्होंने कहा, “भीमा कोरेगांव मामले में ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग हुआ था। ऐसा न हो कि यह कानून भी राजनीति का हथियार बन जाए।”  राऊत ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ‘चरमपंथी’ और ‘वामपंथी’ की परिभाषा क्या होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का हर जागरूक नागरिक नक्सलवाद के खिलाफ है, लेकिन कानून का दायरा स्पष्ट होना चाहिए। विपक्ष के इन तमाम विरोध के बाद भी महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक अब कानून बन गया है। सरकार इसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत हथियार मान रही है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून वास्तव में शांति स्थापित करता है या असहमति को दबाने का माध्यम बनता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #Maharashtra #PublicSecurityBill #Opposition #Politics #LeftistGroups #AssemblyNews

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Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation: क्या सच में मोहन भागवत ने पीएम मोदी को दिए रिटायरमेंट के संकेत?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। इस बार फिर उन्होंने अपने बयान से खलबली मचा दी है। दरअसल, बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में मोरोपंत पिंगले: द आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्जेंस पुस्तक के विमोचन पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) था। इस सभा के दौरान उन्होंने मोरोपंत पिंगले की कही 75 साल में रिटायर होने की बात की थी। उन्होंने यह बात छेड़कर एक नई बहस शुरू कर दी है। इस बीच मजे की बात यह कि नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोहन भागवत के इस बयान पर  शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। संजय राउत ने उनके बयान पर कहा कि “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा है।” इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं पीएम नरेंद्र मोदी  जानकारी के लिए बता दें कि “इस बयान को लेकर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहा है कि “संघ प्रमुख मोहन भागवत यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहे हैं।” इस बीच दिलचस्प बात यह कि पीएम नरेंद्र मोदी इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। बता दें कि संघ प्रमुख भागवत ने अपने बयान में कहा था कि “जब आपको कोई 75 साल का होने पर बधाई देता है, तो इसका अर्थ है कि अब आपको रुक जाना चाहिए और दूसरों को काम करने का मौका देना चाहिए।” अब उनके इस बयान के बाद राउत की प्रतिक्रिया सामने आई। राउत कहा कि “संघ प्रमुख पीएम मोदी को यह संदेश दे रहे हैं।” राउत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी आदि जैसे नेताओं को जबरन रिटायरमेंट दिलाया, क्योंकि वह 75 साल के हो गए थे। अब देखते हैं कि क्या मोदी इसका पालन खुद भी करेंगे।” संजय राऊत इससे पहले भी मार्च के महीने में प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं यह कोई पहली बार नहीं हैं जब संजय राऊत ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट पर कटाक्ष न किया हो। इससे पहले भी मार्च के महीने में वो प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। गौरतलब हो कि जब प्रधानमंत्री संघ मुख्यालय के दौरे पर नागपुर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि “पीएम मोदी अपने रिटायरमेंट का ऐलान करने के लिए आरएसएस के नागपुर मुख्यालय गए।” दरअसल, संजय राउत का मानना था कि पीएम मोदी बीते 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, संभवतः इसलिए यह दौरा उनके आगामी राजनीतिक भविष्य के लिए अहम था। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे- अमित शाह  बता दें कि पिछले वर्ष मई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे।” शाह ने कहा था कि “मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मोदी 2029 तक देश की अगुवाई करेंगे और मोदी आने वाले चुनावों में भी नेतृत्व करेंगे।” विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए गृहमंत्री ने कहा कि “इंडिया गठबंधन के लिए कोई खुशखबरी नहीं है। वो झूठ फैलाकर चुनाव नहीं जीत सकते।” Latest News in Hindi Today Hindi news Mohan Bhagwat #MohanBhagwat #PMModi #RetirementHint #RSS #ModiNews #IndianPolitics #2025Buzz

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