Mehul Choksi's ₹2,565 Cr Property to Be Auctioned

Mehul Choksi property auction: कोर्ट के आदेश के बाद भगोड़े मेहुल चोकसी के 2,565 करोड़ रुपये की संपत्तियों की होगी नीलामी

करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी के आरोपी और फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी, दोनों साल 2018 में सुर्ख़ियों आये पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी हैं। यह घोटाला तकरीबन 14 हजार करोड़ का है। यह देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना जाता है। इस बीच मेहुल चोकसी की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया (Mehul Choksi property auction) अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक मुंबई की एक विशेष अदालत ने 2,565 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जब्त संपत्तियों को बेचने की इजाजत दे दी है। अब इस नीलामी से जो भी राशि प्राप्त होगी, उसे एफडी के रूप में बैंकों के नाम पर रखा जाएगा।  ताकि इससे प्रभावित खाताधारकों को उनकी रकम वापस की जा सके। गौरतलब हो अब तक गीतांजलि जेम्स लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों की बिक्री से तकरीबन 125 करोड़ रुपये की राशि पीड़ितों को लौटाई जा चुकी है। इन संपत्तियों में मुंबई स्थित सांताक्रूज के छह फ्लैट, दो फैक्ट्रियां और गोदाम भी शामिल हैं।  ईडी ने साल 2018 में चोकसी की 41 संपत्तियों को (Mehul Choksi property auction) किया था जब्त  बता दें कि ईडी ने साल 2018 में चोकसी और उनके समूह की 41 संपत्तियों को ₹1,217.2 करोड़ की राशि के साथ जब्त (Mehul Choksi property auction) किया था। जिनमें मुंबई में 15 फ्लैट्स और 17 कार्यालय परिसरों, कोलकाता में एक मॉल, अलीबाग में 4 एकड़ का फार्म हाउस इसके अलावा नासिक, नागपुर, पनवेल (महाराष्ट्र) और तमिलनाडु के विलुपुरम में 231 एकड़ भूमि के साथ-साथ हैदराबाद के रंगा रेड्डी जिले में 170 एकड़ का पार्क {जिसकी कीमत तकरीबन ₹500 करोड़ से है), मुंबई के बोरीवली (पूर्व) और सांताक्रूज़ (पूर्व) क्षेत्रों में फ्लैट्स। यही नहीं, मुंबई के सांताक्रूज़ इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (SEEPZ) में दो कारखाने और गोदाम शामिल हैं।   इसे भी पढ़ें:-  मध्य प्रदेश में एक नहीं, कई घोटाले: कौन है जिम्मेदार? ईडी ने जब्त प्रॉपर्टी के नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी (Mehul Choksi property auction) है खैर, इसके अलावा मेहुल चोकसी की जब्त की संपत्तियों में मालाबार हिल उसकी वह भी प्रॉपर्टी है, जिसे ईडी ने जिसे जब्त किया है। उसके नीलामी की प्रक्रिया शुरू की  (Mehul Choksi property auction) है। गोकुल अपार्टमेंट मालाबार हिल जिसके 9/10 मंजिल पर मेहुल चोकसी का डुप्लेक्स फ्लैट है। उसने 11 वे मंजिल पर अवैध निर्माण किया है। बता दें कि फ्लैट के मेन गेट और दीवारों पर ईडी, सीबीआई के अलावा अलग-अलग बैंक के नोटिस, बीएमसी, सोसायटी और बिजली बिल की नोटिस चस्पा की गई है। यह फ्लैट करीबन सात हज़ार स्क्वायर फीट का है जिसकी क़ीमत करीबन 70 करोड़ है, जो अब खण्डर बन गया है।  बता दें कि मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर 2018 में पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा से तकरीबन 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। हालाँकि मेहुल चौकसी के प्रत्यार्पण की बात चल रही है। इस मामले में भारत ने गुरुवार को कहा कि “वह भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए बेल्जियम के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत सरकार के औपचारिक अनुरोध के आधार पर शनिवार को चोकसी को बेल्जियम के एंटवर्प में गिरफ्तार किया गया।”  Latest News in Hindi Today Hindi news Mehul Choksi property auction #MehulChoksiAuction #PropertyAuction #FugitiveAssets #CourtOrder #ChoksiNews #EDIndia #IndianNews #AssetSeizure #BreakingNews #MoneyLaundering

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Hindi Language Dispute

Hindi language dispute: हिंदी भाषा विवाद को लेकर राज ठाकरे के घर अहम बैठक, नई शिक्षा नीति पर होगी चर्चा

नई शिक्षा नीति के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा स्कूलो में कक्षा 1 से कक्षा 5 तक हिंदी पढ़ाए जाने के ऐलान के बाद महाराष्ट्र में हिंदी भाषा का विवाद पुनः गर्माता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने इसका खुलकर विरोध किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “वह हिंदू हैं लेकिन हिंदी स्वीकार नहीं हैं।’ खबर है कि इससे जुड़े मुद्दों पर राज ठाकरे के घर आज (Hindi language dispute) पार्टी के नेता चर्चा करने वाले हैं। खबर के मुताबिक राज ठाकरे ने एमएनएस के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है। शुक्रवार सुबह 11 बजे राज ठाकरे के घर शिवतीर्थ पर ये बैठक होगी। इस बैठक पर में महाराष्ट्र में लागू किए गए नई शिक्षा नीति के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। कहा जा रहा है कि हिंदी विरोध के मुद्दे पर जनता के बीच कैसे जाएं? कैसे मराठी लोगों और मराठी संगठनों को इस मुद्दे के साथ जोड़ा जाए? इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के बाद, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी अनिवार्य तीसरी भाषा होगी। इसको लेकर तमिलनाडु के बाद अब महाराष्ट्र में विरोध होने लगा है। स्कुलों में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध कर (Hindi language dispute) रहे हैं राज ठाकरे  दरअसल, मनसे प्रमुख राज ठाकरे स्कुलों में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध कर (Hindi language dispute) रहे हैं। राज ठाकरे का कहना है की “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं। सरकार अगर फैसले को पीछे नहीं लेती है, तो संघर्ष अटल है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी लोगों के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?’ हालाँकि इस बीच राज ने यह भी कहा कि “हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, फिर इसे महाराष्ट्र में छात्रों को शुरू से ही क्यों पढ़ाया जाना चाहिए।” ठाकरे ने एक्स पर लिखा कि “आपका त्रिभाषी फॉर्मूला जो भी हो, उसे सरकारी मामलों तक सीमित रखें, शिक्षा में न लाएं।” इसे भी पढ़ें:–  महाराष्ट्र में कक्षा 5वीं तक हिंदी अनिवार्य किए जाने पर आग बबूला हुए राज ठाकरे ने कहा, “यह बर्दाश्त नहीं” राज्य सरकार के फरमान के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना (Hindi language dispute) होगा अनिवार्य  गौरतलब हो कि पिछले दिनों दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हिंदी को लेकर विवाद हुआ था। अब महाराष्ट्र भी इसकी जद में आ गया (Hindi language dispute) है। राज्य सरकार के फरमान के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना अनिवार्य होगा। आदतन राज्य सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे ने विरोध किया है। ठाकरे ने अपने एक बयान में कहा है कि “मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस अनिवार्यता को बर्दाश्त नहीं करेगी।”  इस बीच राज ने आरोप लगाया कि “यह कदम महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को कमजोर करने का प्रयास है। महाराष्ट्र की एक पहचान है और हम मराठी भाषा के सम्मान की रक्षा करेंगे।” अहम बात यह कि राज ठाकरे की यह नाराजगी ऐसे वक्त पर सामने आई है जब फडणवीस सरकार के फैसले सफाई दे चुके हैं। बता दें कि इससे पहले उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज ठाकरे से मुलाकात की थी। ऐसे में देखना दिलचस्प यह कि हिंदी विरोध का यह मामला किस ओर करवट लेता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Hindi language dispute #HindiLanguageDispute #RajThackeray #NEP2020 #LanguagePolitics #MaharashtraNews #MarathiVsHindi #HindiImposition #EducationPolicyIndia #PoliticalDebate #LanguageRow

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Hindi compulsory in Maharashtra

Raj Thackeray Slams Hindi Rule: महाराष्ट्र में कक्षा 5वीं तक हिंदी अनिवार्य किए जाने पर आग बबूला हुए राज ठाकरे ने कहा, “यह बर्दाश्त नहीं”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र में कक्षा 5वीं तक हिंदी पढ़ने को अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, महाराष्ट्र के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना अनिवार्य होगा। जैसे कि इस आदेश के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे की प्रक्रिया अपेक्षित थी। और आई भी। राज्य सरकार के इस फैसले का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कड़ा विरोध (Raj Thackeray Slams Hindi Rule) किया है। एक बयान जारी करते हुए राज ने कहा कि “मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस अनिवार्यता को बर्दाश्त नहीं करेगी।” इस मुद्दे पर अपनी चिंता और नाराजगी व्यक्त करते हुए, राज ठाकरे ने ट्वीट किया कि महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य बनाना हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। केंद्र सरकार की ये कोशिशें महाराष्ट्र में हिंदी को थोपने की हैं, जो पूरी तरह गलत है। हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं, बल्कि एक राज्य भाषा है, जैसे अन्य भाषाएं हैं। इसे शुरू से ही महाराष्ट्र में क्यों पढ़ाया जाना चाहिए? आपका जो भी त्रिभाषी फॉर्मूला है, उसे सरकारी मामलों तक सीमित रखें, शिक्षा में न लाएं।” वे आपको भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना (Raj Thackeray Slams Hindi Rule) चाहते हैं राज ठाकरे ने कहा कि “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं, अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रंग में रंगने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आने वाले चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और उसका फायदा उठाने की कोशिश है? इस राज्य के गैर-मराठी भाषी लोगों को भी सरकार की इस योजना को समझना चाहिए। ऐसा नहीं है कि उन्हें आपकी भाषा से कोई खास प्यार है। वे आपको भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना (Raj Thackeray Slams Hindi Rule) चाहते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “भारतीय संविधान में भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया है और अब इस पर हमला किया जा रहा है।” राज ने आरोप लगाते हुए कहा कि “यह कदम महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को कमजोर करने का प्रयास है। महाराष्ट्र की एक पहचान है और हम मराठी भाषा के सम्मान की रक्षा करेंगे।” इसे भी पढ़ें:–  दिग्विजय सिंह का कबूलनामा, बाबरी मस्जिद शहीद होने पर हमने करवाए दंगे? क्या किसी दक्षिणी राज्य में भी हिंदी को अनिवार्य (Raj Thackeray Slams Hindi Rule) किया जाएगा? इसके अलावा राज ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते (Raj Thackeray Slams Hindi Rule) हुए कहा कि “जब राज्य की आर्थिक हालत खस्ता है, युवा बेरोजगार हैं और किसानों के कर्ज माफी का वादा पूरा नहीं हुआ, तो सरकार इस मुद्दे को उछाल कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है।” खैर, इस बीच उन्होंने यह भी पूछा कि “क्या किसी दक्षिणी राज्य में भी हिंदी को अनिवार्य किया जाएगा?अगर ऐसा होता, तो वहां की सरकारें इसका विरोध करतीं।” यही नहीं इस दौरान मनसे प्रमुख ने मुख्यमंत्री और अन्य सत्ताधारी नेताओं से अपील की कि “वे इस फैसले को वापस लें और महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं का सम्मान करें।” बता दें कि इसके साथ ही, उन्होंने मराठी बोलने वाले सभी लोगों से इस मुद्दे के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने की अपील भी की। Latest News in Hindi Today Hindi news  #RajThackeray #HindiRule #MaharashtraNews #LanguageDebate #HindiControversy #MNSNews #MarathiVsHindi #SchoolPolicy #EducationNews #BreakingNews

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Digvijaya Singh's Confession on Babri Masjid Riots

Digvijaya Singh confession: दिग्विजय सिंह का कबूलनामा, बाबरी मस्जिद शहीद होने पर हमने करवाए दंगे?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बड़बोलेपन की वजह से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। चाहे वो 9/11 के आतंकी ओसामा को ओसामाजी कहना हो या फिर 26/11 मुंबई हमलों का मुख्य आरोपी हाफिज सईद की हाफिज साहब कहना हो। इस बार तो दिग्विजय ने एक ऐसा बयान दे दिया (Digvijaya Singh confession) है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल इस वीडियो में वो यह कहते सुने जा सकते हैं कि “बाबरी मस्जिद शहीद हुई तब हमने हिन्दू मुसलमानों को जोड़कर दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की।” दरअसल, शाजापुर के चौबदार वाडी में मुस्लिम समाज द्वारा सद्भावना सम्मेलन का कार्यक्रम रखा गया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए उनकी  जुबान फिसल गई।  हिंदू-मुसलमानों को जोड़कर हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की (Digvijaya Singh confession)- दिग्विजय सिंह सभा को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि ”बाबरी मस्जिद जब शहीद हुई थी, उस समय में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष हुआ करता था। मैंने लगभग दो हफ्ते तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के दफ्तर में रात बिताई। घर नहीं जाता था। लेकिन हिंदू-मुसलमानों को जोड़कर हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की। भोपाल में 1947 में भी ऐसे दंगा नहीं हुआ, लेकिन बाबरी मस्जिद गिरने पर दंगा (Digvijaya Singh confession) हुआ।” यहां उन्होंने दंगा फसाद रोकने की बजाय दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश कह दिया। दरअसल, दिग्विजय सिंह कहना चाहते थे कि दंगा फसाद रोकने की कोशिश की, लेकिन आदतन उनकी जुबान फिसल गई। अब कांग्रेस नेता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  इसे भी पढ़ें:–  वक्फ कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, इस बात को लेकर है विरोध मेरे बयान को तोड़ मरोड़ के पेश (Digvijaya Singh confession) किया गया- दिग्विजय सिंह View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jai.rashtranews) इस बीच वीडियो वायरल होने पर दिग्विजय सिंह ने अपने इस बयान पर कहा कि “मेरे बयान को तोड़ मरोड़ के पेश (Digvijaya Singh confession) किया गया। मेरे बयान से बीजेपी के नेताओं ने ना हटा दिया। पूरा देश जानता है, दिग्विजय सिंह दंगे के खिलाफ है। मैंने ये कहा था कि 15 दिन पीसीसी दफ्तर में सोया था। हिंदू, मुसलमानों के साथ मिलकर दंगा फसाद ना हो इसका प्रयास किया था। सिर्फ मेरे बयान से ना ही तो हटाना था।” इसके अलावा बाबरी मस्जिद को शहीद बताने वाले बयान पर दिग्विजय ने कहा कि “हां मैंने शहीद कहा है, किसी पूजास्थल को जबरदस्ती गिराओगे तो क्या कहेंगे।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के दंगे भड़काने के बयान पर मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने उन पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया। और ट्वीट करते हुए कहा कि “सुनिए दिग्विजय सिंह का कबूलनामा।” उन्होंने आगे कहा कि “बाबरी मस्जिद को शहीद कहने वाले दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने दंगे करवाए। दिग्विजय सिंह की मानसिकता हिन्दू विरोधी है। कांग्रेस ने हर समय दंगे भड़काने का काम किया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Digvijaya Singh confession #DigvijayaSingh #BabriMasjid #RiotsConfession #IndianPolitics #CongressNews #HindutvaPolitics #BreakingNewsIndia #PoliticalScandal #AyodhyaControversy #DigvijayaStatement

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Family murder case

Parents kill children: मां-बाप ने अपने ही तीनों मासूमों को पहले तो दिया जहर, फिर घोंटा गला, काटीं नसें और चाकू से रेता गला

हमारे समाज में माँ-बाप को भगवान का दर्जा दिया गया है। यह तो ठीक लेकिन क्या हो जब माँ-बाप ही भगवान बनने के बजाय हैवान बन जाये तो? आज के दौर में कुछ कहा नहीं जा सकता। लोगों के भीतर गुस्सा इस कदर है मामूली कहासुनी में एक दूसरे के खून के प्यासे बन जाते हैं। ऐसा ही एक वाकया हुआ है राजस्थान में। दरअसल, राजस्थान के जोधपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मां-बाप ने अपने ही तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक तरीके से हत्या कर (Parents kill children) दी है। तीनों मासूमों की हत्या करने के बाद दंपति ने खुद भी जान देने का प्रयास किया। पूरी घटना सोमवार की रात की बताई जा रही है। अगली सुबह जब पड़ोसियों ने खून देखा तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद आनन-फानन में तीनों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। पति-पत्नी की हालत गंभीर है। फ़िलहाल दोनों का इलाज जारी है। मामूली विवाद बाद दोनों ने इस पूरी घटना को दिया (Parents kill children) अंजाम  मामला है जोधपुर के फलौदी तहसील का। फलौदी तहसील स्थित कोलू पाबूजी गांव में तीन बच्चों की उनके ही मां-बाप ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि दंपति के रिश्तेदारों ने पुलिस को इसके बारे में सूचना दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फलौदी की एसपी पूजा अवाना ने बताया कि “शिवलाल और उसकी पत्नी जतनो के बीच सोमवार की रात को किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इस मामूली विवाद बाद दोनों ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया (Parents kill children) है। फिलहाल पुलिस की मामले की तहकीकात कर रही है और साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  Ladli Behna Yojana पर सियासी संग्राम: महिलाओं के हक पर राजनीति या भ्रम? पुलिस की टीम ने घर से जहर की खाली बोतल, ब्लेड और एक चाकू किया है (Parents kill children) बरामद  पुलिस अधीक्षक पूजा अवाना के मुताबिक, पति-पत्नी ने अपने 9 वर्षीय बेटे हरीश और दोनों बेटियों 5 साल की किरण और 3 साल की नत्थू जहर दिया। जहर देने के बाद दोनों ने उनका गला घोंटा। इससे भी उन्हें तसल्ली नहीं मिली। फिर इसके बाद पति-पत्नी दोनों ने अपने बच्चों की बांह की नसें भी ब्लेड से काट दीं और फिर चाकू से गला रेतकर उनकी हत्या (Parents kill children) कर दी। ये सब करने के बाद दोनों मिलकर खुद की भी कलाई काट आत्महत्या करने की कोशिश भी की। अगले दिन जब शिवलाल के भाई की पत्नी ने घर के बाहर खून देखा तो सकपका गई। और डर के मारे अपने घरवालों को सूचित किया। घरवालों ने पुलिस को सोचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची। एसपी ने बताया कि “मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी को अचेत अवस्था में पाया। घर में खून फैला हुआ था।” जानकारी के मुताबिक पुलिस की टीम ने घर से जहर की खाली बोतल, ब्लेड और एक चाकू बरामद किया है।  Latest News in Hindi Today Hindi News Parents kill children #ParentsKillChildren #FamilyMurderCase #ChildMurder #CrimeNews #PoisonedKids #TragicIncident #DomesticCrime #MurderStory #ShockingCrime #CrimeInIndia

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Ladli Behna Yojana next installment

Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहनों को दे सकते हैं खुशखबरी, आज आएगी अगली क़िस्त

मध्य प्रदेश में महिलाओं को लाड़ली बहन योजना (Ladli Behna Yojana) के तहत मिलने वाली किस्त अभी तक नहीं आई है। क़िस्त में मिलने में देरी देख तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार इस योजना को धीरे-धीरे बंद कर रही है। हालांकि इसे लेकर अब मोहन सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी। सीएम मोहन यादव ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है। जानकारी के मुताबिक़ मोहन यादव ने कैबिनेट मीटिंग से पहले मंत्रियों को कहा है कि “राशि हस्तांरण की तारीख में एकरुपता लाना है और अब राशि हर माह 15 तारीख के आसपास अकाउंट में डाल दी जाए।” इसके अलावा, सीएम मोहन ने यह भी बताया कि “पशुपालकों के दूध और इससे जुड़े अन्य प्रोडक्ट अब सीधे नेशनल डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से खरीदे जाएंगे। इसके लिए 13 अप्रैल को राज्य सरकार और बोर्ड के बीच एक डील हुई है।” लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) के तहत 1250 रुपये हर रजिस्टर्ड महिला को दिए जाते हैं। इस बीच लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) को लेकर फैले भ्रम को दूर करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि “यह योजना बंद नहीं होगी। अब इस योजना के तहत दी जाने वाली राशि 10 से 16 तारीख के बीच लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी। आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वयं मंडला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस योजना की राशि जारी करेंगे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस बार 16 अप्रैल को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मंडला जिले के ग्राम टिकरवारा में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहन की किस्त डाली जाएगी। यह किस्त 1.24 करोड़ महिलाओं के बैंक अकाउंट में 1,552.38 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे। गौरतलब हो कि इस किस्त के तहत 1250 रुपये हर रजिस्टर्ड महिला को दिए जाते हैं।  इसे भी पढ़ें:-  Ladli Behna Yojana पर सियासी संग्राम: महिलाओं के हक पर राजनीति या भ्रम? 5 सालों में 2 लीटर करोड़ लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन की क्षमता का है लक्ष्य जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस पर पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल को निर्देश दिया गया है कि नए लक्ष्य को शामिल कर कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किया जाए। खबर है कि आने वाले 5 सालों में 2 लीटर करोड़ लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन की क्षमता का लक्ष्य रखा जाएगा। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 5 रुपये लीटर बोनस देने समेत डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रसार के साथ प्रदेश के दूध की राष्ट्रीय स्तर समेत प्रदेश भर में मार्केटिंग भी की जाएगी। देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में धरातल पर यह योजना कितनी कारगर सिद्ध होती है। खैर, डबल इंजन की सरकार से मध्य प्रदेश के वासियों को उम्मीदें बड़ी हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi News Ladli Behna Yojana #LadliBehnaYojana #MPGovernment #ShivrajSinghChouhan #WomenWelfare #YojanaUpdate #MadhyaPradeshNews #FinancialAssistance #WomenEmpowerment #GovtSchemes #LadliYojana

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Mamata Banerjee statement

Mamata Banerjee statement: मुर्शिदाबाद हिंसा पर ममता बनर्जी ने चुप्पी तोड़ते हुआ कहा, “बीजेपी फैला रही झूठ”

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जारी हिंसा को लेकर सीएम ममता बनर्जी अपनी चुप्पी (Mamata Banerjee statement) तोड़ी है। इमामों संग हुई बैठक में ममता ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए  कहा कि “बंगाल को बदनाम किया जा रहा है। बीजेपी वाले झूठे वीडियो दिखाते हैं। हर धर्म की बात करती हूं।” ममता ने कहा, केंद्र कहता है कि इसमें बांग्लादेश का हाथ है। बंगाल पर बोलना है तो मेरे सामने बोलो।” इस बीच बीजेपी पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि “आप लोग राम और रहीम सभी के अधिकार को छीनना चाहते हैं। आप छुप कर यूनुस के साथ मीटिंग करते हैं। हम राज्य में हिंदू-मुसलमान नहीं होने देंगे, मैं हाथ जोड़कर शांति की अपील करती हूं।” दरअसल, बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वक्फ कानून को लेकर नेताजी इंडोर स्टेडियम में इमामों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने इमामों को संबोधित करते हुए माना कि मुर्शिदाबाद के कुछ इलाके अशांत रहे, कुछ घटनाएं हुईं।  सीएम (Mamata Banerjee statement) ने कहा कि “हमारे कार्यकर्ताओं पर भी हमला हुआ इस दौरान सीएम (Mamata Banerjee statement) ने कहा कि “हमारे कार्यकर्ताओं पर भी हमला हुआ। पार्टी कार्यालय पर भी हमला किया गया। मुर्शिदाबाद में बीते दिनों जिस तरह हिंसा हुई, वह एक योजना के तहत की गई। आज इस देश में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह भाजपा का नहीं, भारत का संविधान है।” ममता बनर्जी ने कहा, मुर्शिदाबाद जिले के कुछ इलाकों में वक्फ अधिनियम को लेकर थोड़ी बहुत घटनाएं जरूर हुई है, लेकिन इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि “टीएमसी ने वक्फ कानून के खिलाफ संसद में सबसे मुखर होकर लड़ाई लड़ी, लेकिन अफवाहें फैलाकर पार्टी को बदनाम किया जा रहा है।” सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर बाहरी लोगों को बुलाकर हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद की हिंसा सुनियोजित साजिश थी। घुसपैठियों को क्यों आने दिया गया? बॉर्डर की जिम्मेदारी बीएसएफ की है। राज्य सरकार के पास बॉर्डर संभालने की जिम्मेदारी नहीं है।” सीएम ममता ने आगे कहा कि “हम रवींद्रनाथ ठाकुर की विचारधारा में विश्वास करते हैं।” उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि “मैं केंद्र की मोदी सरकार से पूछना चाहती हूं कि उन्होंने वक्फ एक्ट को पारित कराने में इतनी जल्दबाजी क्यों की?” सीएम ने भाजपा पर आरोप लगाया कि इन लोगों को केवल सत्ता की परवाह है। हम जब तक रहेंगे, किसी भी कीमत पर हिंदू-मुसलमान नहीं होने देंगे।” ममता ने बीजेपी पर बरसते हुए कहा, आप लोग राम और रहीम सभी के अधिकार को छीनना चाहते हैं। अगर ये बंगाल में जीत गए, तो आपका खाना-पीना बंद कर देंगे।”  इसे भी पढ़ें:–  वक्फ कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, इस बात को लेकर है विरोध भारतीय जनता पार्टी सीएम ममता बनर्जी पर आक्रामक (Mamata Banerjee statement) है प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुर्शिदाबाद दंगों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को शुरुआती जांच रिपोर्ट मिली है जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश उपद्रवियों ने इसे अंजाम दिया है। इन दंगों को लेकर भारतीय जनता पार्टी सीएम ममता बनर्जी पर आक्रामक (Mamata Banerjee statement) है और लगातार हमले कर रही है। मंगलवार को भाजपा नेता दिलीफ घोष ने ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बांग्लादेश में बांग्लादेश जैसे हालात उत्पन्न कर रही है। इस बीच दिलीफ घोष ने यह भी आरोप लगाया कि ‘राम नवमी से पहले माहौल उग्र बनाकर पश्चिम बंगाल की सीएम हिंदुओं को उनके घरों के भीतर हीं बंद रखने की साजिश रच रही थीं। बता दें कि भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। मरने वालों में बाप-बेटा भी हैं जिन्हें धारदार हथियार से मारा गया। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़, आगजनी और लूट की थी। हिंसा के मामले में अब तक कुल 180 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख केंद्रीय सुरक्षा बालों को तैनात किया गया। फिलहाल अशांत क्षेत्रों और आसपास की स्थिति शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mamata Banerjee statement #MamataBanerjee #MurshidabadViolence #BJPvsTMC #WestBengalPolitics #PoliticalViolence #TMCNews #BJPNews #MamataStatement #IndianPolitics #FakeNewsClaim

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SC hearing on Waqf

Waqf Law hearing: वक्फ कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, इस बात को लेकर है विरोध

आज सुप्रीम कोर्ट में  वक्फ कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई (Waqf Law hearing) होगी। दोपहर 2 बजे देश के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इस पर सुनवाई करेगी। गौरतलब हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले साफ किया था कि “वह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देगा, लेकिन संविधान से जुड़े मुद्दों पर अंतिम मध्यस्थ के रूप में, वह याचिकाकर्ताओं की बात सुनने के लिए सहमत है।” दरअसल, संशोधित वक्फ कानून का मकसद मुस्लिम वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी बनाना है। अप्रैल की शुरुआत में लोकसभा और राज्यसभा में लंबी बहस के बाद संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून देश भर में लागू हो गया था। इस बीच इस विधेयक के विरोध में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं।  संशोधित कानून समानता के अधिकार और धार्मिक प्रथाओं को अपनाने के अधिकार समेत कई मौलिक अधिकारों का करता है (Waqf Law hearing) हनन  बता दें कि इन याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि संशोधित कानून समानता के अधिकार और धार्मिक प्रथाओं को अपनाने के अधिकार समेत कई मौलिक अधिकारों का हनन करता है। वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में (Waqf Law hearing) चुनौती देने वालों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, जेडीयू, डीएमके के साथ सीपीआई के नेताओं, धार्मिक संगठन, जमीयत उलेमा हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे गैर सरकारी संगठन शामिल हैं। तो वहीं  बीजेपी शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम, महाराष्ट्र और उत्तराखंड ने वक्फ कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर कुछ याचिकाओं में वक्फ कानून को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है तो वहीं, कुछ याचिकाओं में इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की करते हुए इसे मनमाना और मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण भी बताया गया है। इसे भी पढ़ें:– कोंडागांव-नारायणपुर सीमा के पास मुठभेड़ में दो इनामी नक्सली कमांडर ढेर, एनकाउंटर यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का (Waqf Law hearing) उल्लंघन है- असदुद्दीन ओवैसी  एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी याचिका (Waqf Law hearing) में कहा है कि “संशोधन अधिनियम उन विभिन्न सुरक्षाओं को समाप्त कर देता है, जो पहले वक्फ को दी जाती थीं। अन्य धर्मों के धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्तों के लिए ऐसी सुरक्षा को बनाए रखते हुए वक्फ संपत्तियों को दी जाने वाली सुरक्षा को कम करना मुसलमानों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण भेदभाव है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है।” तो वहीं सरकार का कहना है कि “वक्फ विधेयक संपत्ति और उसके प्रबंधन के बारे में है, न कि धर्म के बारे में।” सरकार ने कहा कि “वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हैं और उसकी इनकम से गरीब मुसलमानों या महिलाओं और बच्चों को कोई मदद नहीं मिलती है, संशोधित कानून इसे ठीक कर देगा। वक्फ कानून को लोगों के एक बड़े वर्ग की सलाह-मशविरा के बाद ही तैयार किया गया है। इसको गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों का भी समर्थन मिला है। खैर, वक्फ विधेयक को लेकर देश के कई हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Waqf Law hearing #WaqfLaw #SupremeCourtIndia #WaqfAct #LegalNews #SCIndia #IndianMuslims #PropertyLaw #LawReform #CourtHearing #JusticeForAll

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CG Naxal Encounter

कोंडागांव-नारायणपुर सीमा के पास मुठभेड़ में दो इनामी नक्सली कमांडर ढेर, एनकाउंटर

छत्तीसगढ़ में कोंडागांव व नारायणपुर सीमा के पास स्थित किलम-बरगुम गांव में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ (CG Naxal Encounter) की बड़ी घटना सामने आई है। इस एनकाउंटर में जवानों ने जंगल में भाग रहे 2 नक्सलि कमांडर को मार गिराया। घटनास्थल से सुरक्षा बलों को भारी मात्रा में हथियार व गोला बारूद मिला है। एनकाउंटर में मारे गए दोनों नक्सलियों की पहचान एरिया कमांडर के तौर पर की गई है। एक नक्सली पर 8 लाख का ईनाम था और दूसरे पर 5 लाख का इनाम घोषित था। 15 अप्रैल की देर शाम गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू (CG Naxal Encounter) शुरू गई छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) ने इस एनकाउंटर की जानकारी देते हुए बताया कि, हमें सूचना मिली थी कि कोंडागांव व नारायणपुर जिला से सटे किलम-बरगुम क्षेत्र में नक्सली एक बैठक करने के लिए आ रहे हैं। यह जानकारी मिलते ही कोंडागांव डीआरजी (Kondagaon DRG) और बस्तर फाइटर (Bastar Fighter) की संयुक्त टीम नक्सलियों की तलाश में निकल गई। सुरक्षा बलों के सर्च अभियान के दौरान 15 अप्रैल की देर शाम गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू (CG Naxal Encounter) हो गई। इस मुठभेड़ में जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली जंगल में भागने लगे। जवानों ने उनका पीछा शुरू किया और देर रात तक एनकाउंटर चलता रहा। सुरक्षा बलों द्वारा रात में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान दो नक्सलियों के शव बरामद हुए।  इसे भी पढ़ें:– भाजपा से नाराज एकनाथ शिंदे ने राज ठाकरे से की मुलाकात, क्या महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाला बड़ा सियासी भूचाल? मारे गए नक्सली पूर्वी बस्तर के थे कमांडर  एनकाउंटर में मारे गए नक्सलियों की पहचान पूर्वी बस्तर नक्सली कमांडर डिवीसीएम हलदर और एसीएम रामे के तौर पर हुई है। ये दोनों नक्सली काफी खुंखार थे और सुरक्षा बलों पर कई हमले को अंजाम दे चुके थे। इसीलिए इन पर 8 लाख और 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सुरक्षा बलों को इन नक्सलियों के पास से एक एके-47 राइफल समेत कई आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं। कोंडागांव डीआरजी (Kondagaon DRG) के अधिकारी ने बताया कि इस इलाके में अभी और नक्सलियों के छुपे हैं। जिन्हें मार गिराने के लिए सुरक्षा बल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। अंदेशा है कि एनकाउंटर के दौरान कई और नक्सली भी मारे गए हैं, लेकिन अभी तक उनके शव बरामद नहीं हुए हैं। इस मामले को लेकर जल्द ही बड़ा खुलासा हो सकता है। बता दें कि, नक्सलवाद और नक्सलियों को खत्म करने के लिए सुरक्षा बल इस समय आखिरी ऑपरेशन चला रहे हैं। नक्सवाद को 31 मार्च 2026 तक जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। इस साल अब तक अलग-अलग मुठभेड़ में सैकड़ों नक्सली मारे जा चुके हैं। सुरक्षा बल अब नक्सलियों के इलाके में घुस कर उन पर प्रहार कर रहे।  Latest News in Hindi Today Hindi news CG Naxal Encounter #NaxalEncounter2025 #KondagaonNews #NarayanpurUpdate #NaxaliteKilled #ChhattisgarhNews #SecurityForces #MaoistAttack #RedCorridor #IndiaNews #BreakingNews

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President Rule West Bengal

Why BJP not sacking Mamata: बीजेपी आखिर क्यों ममता बनर्जी की सरकार को बर्खास्त नहीं कर देती?

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाके मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, हुगली और मालदा जिलों में बीते 10 अप्रैल से विरोध के नाम पर लगातार हिंसक (Why BJP not sacking Mamata) प्रदर्शन जारी है। जारी इस हिंसा में अबतक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं। मुर्शिदाबाद में जारी भयावह हिंसा का यह आलम है कि 500 से अधिक परिवारों को मजबूरन जान बचाकर पलायन करना पड़ा है। राज्य सरकार के अदृश्य सपोर्ट का नतीजा ही है जो उपद्रवी बेलगाम होते जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में 1,600 जवानों को तैनात किया गया है। दरअसल, वक़्फ़ संसोधन बिल पास होने के बाद ही पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में हिंसा और आगजनी होने का अंदाजा था। ख़ुफ़िया विभाग ने राज्य सरकार अराजक तत्वों द्वारा हिंसा फ़ैलाने का इनपुट पहले दिया था। लेकिन राज्य सरकार की नाकामी के चलते हिंसा भड़क उठी। इस बीच स्थित नियंत्रण के बाहर होती देख जिले में केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात किया गया है। गौर करने वाली बात यह कि हिंसा प्रभावित लोगों ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है। भारत के संविधान का अनुच्छेद-356, केन्द्र की संघीय सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की देता है (Why BJP not sacking Mamata) अनुमति  ये तो रही हिंसा की बात। लेकिन ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर क्या वजह है, जो केंद्र, ममता बनर्जी की सरकार को बर्खास्त कर (Why BJP not sacking Mamata) राष्ट्रपति शासन नहीं लगा देती? वैसे भी भारत के संविधान का अनुच्छेद-356, केन्द्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार देता है। जब रात दिन देश संविधान से चलेगा चिल्लाने वाले नेता कह ही रहे हैं कि देश बाबा साहेब के संविधान से चलेगा तो, फिर आखिर केंद्र सरकार क्यों नहीं संविधान के अनुच्छेद 356 का पालन करती? कहीं, केंद्र की मोदी सरकार खुद भी संविधान का पालन नहीं करना चाहती? ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर कब तक संसद से पारित कानून के विरोध के नाम पर राज्य में हिंसा होती रहेगी? पश्चिम बंगाल में हिंसा का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यह हिंसा की आग में झुलस चुका है। हैरत की बात यह कि केंद्र सरकार कठोर कदम उठाने के बजाय आँखमूंदे सब देख रही है। मोदी सरकार चाहे तो अर्धसैनिक बालों को लगाकर उपद्रवियों का अच्छे से इलाज कर सकती है।  इसे भी पढ़ें: – महाराष्ट्र के ठाणे में डॉ बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर पहले माल्यार्पण करने को लेकर दो गुटों में हुई झड़प चुनावी मजबूरी के चलते कड़ी कार्रवाई (Why BJP not sacking Mamata) करने से डर रही है सरकार? दरअसल, साल भर बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं। संभवतः चुनावी मजबूरी के चलते सरकार कड़ी कार्रवाई (Why BJP not sacking Mamata) करने से डर रही है? सरकार चाहे तो राष्टपति शासन लगाकर उपद्रवियों को ठंडा कर सकती है। लेकिन कहीं न कहीं सरकार भी डर रही है। डर इसलिए भी रही है  क्योंकि सरकार को लगता है कि ममता बनर्जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से कहीं बीजेपी को ही बड़ा नुकसान न उठाना पड़े। और एक डर यह भी कि भावनात्मक जुड़ाव के चलते बंगाली वोटर एकतरफा माँ माटी मानुष की बात करने वाली ममता के साथ न हो ले। क्योंकि ममता ने इसी माँ माटी और मानुष का कार्ड खेलकर लेफ्ट का किला भेदा था। कुल-मिलाकर ऐसा करने में नुकसान बीजेपी का ही है। ऐसे में हिंसा से हिंदुओं के मन में डर निर्माण होगा। और हिंदुओं का यही डर बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत साबित होगी। खैर, जब बीजेपी जम्मू-कश्मीर में हालात काबू कर सकती है, तो पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए कोई बड़ी बात नहीं है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Why BJP not sacking Mamata #MamataBanerjee #BJPvsMamata #WestBengalPolitics #TMCNews #BJPStrategy #PresidentRule #IndianPolitics #TMCvsBJP #PoliticalNews #BengalCrisis

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