Unemployment in Madhya Pradesh forces postgraduates

मध्य प्रदेश में इस कदर बढ़ी बेरोजगारी कि पोस्ट ग्रेजुएट युवा सब्जी बेचने और ऑटो चलाने को हुए मजबूर

टेक्नोलॉजी के इस दौर में युवा सबसे ज्यादा बेरोजगारी का शिकार हुआ है। कहने की जरूरत नहीं वर्तमान समय में बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हर हाथ काम नहीं होने के चलते मध्य प्रदेश में लाखों पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारी का शिकार बने बैठे हैं। उच्च शिक्षित होने के नाते छोटे-मोटे काम करना नहीं चाहते। नतीजतन बेरोजगारी का दामन थामे बैठे हैं। पारिवारिक खर्च के चलते उन्हें मजबूरन पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को भाजी का ठेला लगाने से लेकर ऑटो चलाने तक का काम करना पड़ रहा है। बेशक मध्य प्रदेश में बेरोजगारी (Madhya Pradesh unemployment) का बढ़ता ग्राफ बड़ा चिंताजनक है। इस बीच भले ही प्रदेश के बेरोजगारों को अब आकांक्षी युवा कहा जाने लगा है, लेकिन जमीन पर किसी की पहचान पोस्ट ग्रेजुएट सब्जी वाला है तो किसी की पीजी ऑटो वाला। जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में बेरोजगारी के आंकड़े आसमान छू रहे हैं। जहाँ जुलाई 2024 में 25.82 लाख बेरोजगार थे, जो वहीं अब बढ़कर 29 लाख हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में बीते मार्च के महीने में रोजगार पोर्टल पर तकरीबन 29 लाख से अधिक रजिस्टर्ड आकांक्षी युवा थे, जो जुलाई 2024 में 25.82 लाख बेरोजगारों से 3 लाख से अधिक हैं। प्रदेश में बेरोजगारी का आलम यह है कि पोस्ट ग्रेजुएट पढ़े लिखे युवा सब्जी बेचने और ऑटो चलाने को तक मजबूर हैं।  सरकारी भरती और निजी क्षेत्र में रोजगार के प्रयासों के बावजूद प्रदेश में बढ़ रही है बेरोजगारी (Madhya Pradesh unemployment)  सोशल मीडिया में वायरल हुए 2 वीडियो में एमपी के ब्यावरा के अजय प्रजापति बता रहे हैं कि वह कई महीनों से ऑटो चला रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन कर रखा है, कई सरकारी नौकरियों में आवश्यक कम्प्यूटर दक्षता बताने वाला सीपीसीटी टेस्ट भी पास हैं। इसी तरह नरेंद्र जिनके पास डिग्री मास्टर्स ऑफ सोशल वर्क की है, लेकिन काम सब्जी बेचने का करते हैं। बता दें कि पहले ये बतौर जनसेवा मित्र काम करते थे। वो पुनः इस योजना को शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच सरकारी भरती और निजी क्षेत्र में रोजगार के प्रयासों के बावजूद प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी (Madhya Pradesh unemployment) को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस नेता पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल ने कहा कि “यह आंकड़ा तो सिर्फ रजिस्टर्ड बेरोजगारों का है।बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। बेशक यह सरकार के रोजगार देने के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- वसुंधरा राजे ने अधिकारियों से मांगा पाई-पाई का हिसाब, कांग्रेस नेता ने ढूंढा आपदा में अवसर मध्य प्रदेश में रोजगार पोर्टल पर लगातार रजिस्ट्रेशन (Madhya Pradesh unemployment) के आंकड़े बढ़ रहे हैं जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में रोजगार पोर्टल पर लगातार रजिस्ट्रेशन (Madhya Pradesh unemployment) के आंकड़े बढ़ रहे हैं। मजे की बात यह कि सरकार अपनी ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर सिर्फ प्रयास ही कर रही है। इस पूरे मामले ओर युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि “ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के साथ ही मध्य प्रदेश के अलग-अलग संभागों में रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें बड़े पैमाने पर आए निवेश से आने वाले समय में रोजगार मिलेंगे। वहीं सरकारी नौकरियों के लिए भी भर्ती अभियान चला कर लाखों लोगों को रोजगार देने पर काम हो रहा है।” बता दें कि सरकार ने साल 2024 में 563 रोजगार मेलों का आयोजन किया। जिसमें तकरीबन 52000 से अधिक ऑफर लेटर दिए गए। यही नहीं, साल 2023 में 778 मेलों के माध्यम से 68 हजार से अधिक ऑफर लेटर दिए गए, तो वहीं साल 2022 में 861 रोजगार मेले आयोजित किये गए और 1 लाख 21 हजार लोगों को ऑफर लेटर मिले थे।  मध्य प्रदेश में गौर करने वाली अहम बात यह कि पढ़े लिखे बेरोजगारों की संख्या अशिक्षित बेरोजगारों से अधिक है।  Latest News in Hindi Today Hindi News Madhya Pradesh unemployment #MPUnemployment #JobCrisisIndia #YouthStruggles #PostgraduatePain #UnemployedYouth #MadhyaPradeshJobs #IndiaJobCrisis #OddJobsForGrads #AutoDriverYouth #SellVegForLiving

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Vasundhara Raje Seeks Audit

Congress attack BJP: वसुंधरा राजे ने अधिकारियों से मांगा पाई-पाई का हिसाब, कांग्रेस नेता ने ढूंढा आपदा में अवसर

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अधिकारियों को फटकार क्या लगाईं कांग्रेस की बाँझे खिल गई। कांग्रेस अब इसे एक बड़े अवसर की तौरपर देख रही (Congress attack BJP) है। दरअसल, मंगलवार की शाम पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पहुंची रायपुर कस्बे के दौरे पर थी। तभी ग्रामीणों ने उनसे पेयजल संकट की शिकायत कर दी। फिर क्या था, पूर्व मुख्यमंत्री जलजीवन मिशन और जलदाय विभाग के अफसरों पर ही बरस पड़ीं। इस दौरान, राजे ने अधिकारियों से पूछा कि “क्या जनता को प्यास नहीं लगती? सिर्फ आप अफसरों को ही लगती है। गर्मी में पेयजल संकट के कारण जनता त्रस्त है। अफसर तृप्त हैं। पानी कागजों में ही नहीं, बल्कि लोगों के होठों तक पहुंचे। अफसर सो रहें है, लोग रो रहें हैं। मैं ऐसा नहीं होने दूंगी।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 42 हजार करोड़ जल जीवन मिशन में दिए हैं। पाई-पाई का हिसाब दो कि झालावाड़ के हिस्से की राशि का आपने क्या किया?” अधिकारीयों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “पेयजल संकट निवारण के लिए हमारी सरकार तो पैसा दे रही है, लेकिन अफसर योजनाओं का सही क्रियान्विति नहीं कर रहे। इसलिए राजस्थान के लोग प्यास से व्याकुल हैं। यह तो अप्रैल का हाल है। जून-जुलाई में क्या होगा?” अपने ही सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाना कांग्रेस (Congress attack BJP) के लिए किसी बड़े मौके से कम नहीं  ध्यान देने वाली बात यह कि राजे के सवाल का अधीक्षण अभियंता समेत उपस्थित किसी भी अधिकारी ने संतोषप्रद जवाब नहीं दिया। इससे नाराज राजे ने कहा कि “लोगों के धैर्य की परीक्षा मत लीजिए। झालावाड़ में ऐसा हरगिज नहीं चलेगा।” वसुंधरा राजे ने इस दौरान मौजूद अधिकारियों को जमकर लताड़ा। यह तो ठीक, लेकिन अब इस पर राजनीति तेज होने लगी है। दरअसल, वसुंधरा राजे का इस तरह अपने ही सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाना और पाई-पाई का हिसाब मांगना कांग्रेस (Congress attack BJP) के लिए किसी बड़े मौके से कम नहीं लग रहा है। इसका राजनीतिक फायदा उठाते हुए टीकाराम जूली ने न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा बल्कि कड़ी प्रतिक्रिया भी दी।  इसे भी पढ़ें:-  वक्फ संसोधन बिल के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस वजह से भड़की हिंसा  जब भाजपा की ही पूर्व मुख्यमंत्री इस सरकार के अधिकारियों के सामने इतनी मजबूर हैं, तो आमजन की स्थिति क्या होगी? बता दें कि प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा (Congress attack BJP) कि “पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का ट्वीट भाजपा सरकार की सच्चाई उजागर करने के लिए काफी है। कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी की सरकार के बावजूद पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति के लिए अपनी बात मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से कहनी पड़ रही है। जब भाजपा की ही पूर्व मुख्यमंत्री इस सरकार के अधिकारियों के सामने इतनी मजबूर हैं, तो आमजन की स्थिति समझी ही जा सकती है।” यही नहीं, कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “अब तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री भी कह रही हैं कि जनता परेशान है और अफसर सो रहे हैं। भजनलाल सरकार को अब तो नींद से जाग जाना चाहिए।” Latest News in Hindi Today Hindi News Congress attack BJP #VasundharaRaje #CongressVsBJP #RajasthanPolitics #BJPNews #DisasterFunds #PoliticalScandal #CongressLeader #BJPControversy #AuditDemand #NewsUpdate

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Murshidabad violence

Murshidabad violence: वक्फ संसोधन बिल के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस वजह से भड़की हिंसा

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित जंगीपुर के मुस्लिम बहुल वक्फ संसोधन बिल के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग जुटे थे। प्रदर्शनकारी बिल को वापस लेने की मांग कर रहे थे। शांतिपूर्वक चल रहा प्रदर्शन देखते ही देखते एकएका एक झूठी अफवाह के चलते उग्र और हिंसक (Murshidabad violence) हो गया। अचानक उग्र हुए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस की कई गाड़ियों के साथ तोड़फोड़ की बल्कि उन्हें आग के हवाले भी कर दिया। दरअसल, किसी ने अफवाह फैला दी कि वक्फ संसोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों में से किसी की पुलिसलाठी चार्ज में मौत हो गई है। फिर क्या था , आंदोलन हिंसक हो गया। घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है।  अफवाह के चलते फैली (Murshidabad violence) हिंसा  जानकारी के मुताबिक जंगीपुर ग्राउंड पर पुलिस की तैनाती कम थी। दरअसल, इस बीच रामनवमी के मौके पर दूसरों जगहों पर पुलिसकर्मियों को भेजा गया था। कारण यही अनियंत्रित भीड़ को काबू करने में पुलिस को काफी मशक्क्त करनी पड़ी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी नेशनल हाईवे के पास पहुंचकर सड़क को जाम करने लगे। इस बीच पुलिस ने जब इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की तो धक्का मुक्की शुरू हो गई। और इस धक्का मुक्की में एक युवक नीचे गिर गया।  युवक के नीचे गिरने के बाद यह अफवाह फैल गई कि जो व्यक्ति नीचे गिरा है वो पुलिस की लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। इस अफवाह के बाद माहौल बिगड़ गया। इससे आक्रोशित प्रदर्शनकारी आगजनी और तोड़फोड़ (Murshidabad violence) करने लगे।  कई इलाकों बीएनएसए की धारा 163 (Murshidabad violence) कर दी गई है लागू  स्थिति बेकाबू होती देख पुलिस प्रशासन ने इंटरनेट सेवा को बंद करने का दिया। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। यही नहीं,  स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज और सूती इलाकों बीएनएसए की धारा 163 लागू (Murshidabad violence) कर दी है। जानकारी के मुताबिक इन क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। अब इस घटना को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुंकात मजूमदार ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट कर कहा कि “ममता बनर्जी के शासन में बंगाल लहूलुहान हो रहा है।” इसे भी पढ़ें:- मराठी बनाम हिंदी विवाद से डरा महाराष्ट्र का उद्योग जगत, कारोबारियों को सता रहा मजदूरों के पलायन का डर रैली पर लाठीचार्ज करना (Murshidabad violence) अस्वीकार्य है- तृणमूल कांग्रेस जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि “प्रदर्शनकारियों ने इलाके में तैनात पुलिस पर पथराव किया और कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा (Murshidabad violence) दी गई। उन्होंने कहा कि घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। झड़प में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। तो वहीं इस मामले में राज्य के मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि “वामपंथी शासन के दौरान भी अल्पसंख्यकों के साथ पुलिस द्वारा ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता था।” इस बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी ने कहा कि “वामपंथी शासन के दौरान भी पुलिस ने अल्पसंख्यकों पर कभी लाठीचार्ज नहीं किया। अगर किसी ने हिंसा का सहारा लिया है तो जाहिर तौर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन एक रैली पर लाठीचार्ज करना अस्वीकार्य है।” Latest News in Hindi Today Hindi News Murshidabad violence #MurshidabadViolence #WaqfAmendmentBill #WestBengalNews #ProtestNews #WaqfBillProtest #MurshidabadClash #WaqfBillControversy #IndianPolitics #BreakingNewsIndia #WaqfRights

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Ajit Pawar statement

Ajit Pawar statement: नहीं भूला पाए पत्नी सुनेत्रा की हार, उपमुख्यमंत्री अजित पवार का झलका दर्द, कही यह बड़ी बात

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हुई बगावत के बाद बारामती की दावेदारी को लेकर अजित पवार और वरिष्ठ नेता शरद पवार के बीच होड़ देखने को मिल रही है। आये दिन दोनों नेता अपने कार्यों को एक दूसरे से बड़ा दिखाने की कोशिश में लगे हुए हैं। बता दें कि बारामती की जनता ने लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले को जितवा कर शरद पवार का साथ दिया था तो वहीं विधानसभा चुनाव में युगेंद्र को हरा कर अजित पवार का। बड़ी बात यह कि अजित आज भी लोकसभा चुनाव में हुई पत्नी सुनेत्रा की हार का दर्द भूल नहीं पाए हैं। रविवार को उनका यह दर्द आखिरकार झलक ही उठा। दरअसल, बारामती दौरे पर आए अजित पवार (Ajit Pawar statement) ने वोटरों को बारामती के विकास के लिए किए गए अपने कामों की याद दिलाई। बारामती के विकास के लिए सर्वाधिक काम मैंने ही किया है (Ajit Pawar statement) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बारामती पंचायत समिति दिव्यांगों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar statement) ने याद दिलाया कि “बजट में डीपीडीसी को 22,000 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसका एक प्रतिशत दिव्यांगों पर खर्च करने के लिए दिया गया है। दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं चाहिए, उन्हें समान अवसर चाहिए। हमने दिव्यांगों को पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। कार्यक्रम में दिव्यांगों को निशुल्क साइकिलें भी वितरित की गईं।” गौर करने वाली बात यह कि इस कार्यक्रम में अजित ने अपने चाचा व वरिष्ठ नेता शरद पवार को आड़े हाथों लिया। इस दौरान उन्होंने खुद को क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ विधायक व नेता बताते हुए कहा कि “बारामती के विकास के लिए सर्वाधिक काम मैंने ही किया है।” वो यहीं नहीं थमे, खुद के कार्यों को गिनाते हुए उन्होंने आगे कहा कि “साल 1991 से वह बारामती विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन 1952 से अब तक जितने भी विधायक यहां से विधायक बने हैं, सभी के द्वारा किए गए कार्यों की तुलना मेरे कार्यों से कर लें। मेरे जैसा विधायक दोबारा नहीं मिलेगा। मैं अभी और काम करूंगा।”  इसे भी पढ़ें:- मराठी बनाम हिंदी विवाद से डरा महाराष्ट्र का उद्योग जगत, कारोबारियों को सता रहा मजदूरों के पलायन का डर ऐसी हरकत करनेवाला यदि मेरा बेहद खास कार्यकर्ता या उसका बेटा भी होगा, तो उसे छोड़ना नहीं (Ajit Pawar statement) अजित पवार बीड जिले के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हुई नृशंस हत्या मामले से बेहद आहत दिखे। खैर बीच, इसी तरह के बारामती के दो युवकों द्वारा एक युवक की पिटाई के सीसीटीवी फुटेज पर उन्होंने तल्ख टिप्पणी की और पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि “इन्हें अच्छा सबक सिखाएं (Ajit Pawar statement)।” यही नहीं, इस घटना का उदाहरण देते हुए उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को ऐसी हरकतों से बाज आने की स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि “मुझसे मदद की उम्मीद नहीं करना।” अजीत पवार ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि ऐसी हरकत करनेवाला यदि मेरा बेहद खास कार्यकर्ता या उसका बेटा भी होगा तो उसे छोड़ना नहीं । Latest News in Hindi Today Hindi News Ajit Pawar statement #AjitPawar #SunetraPawar #AjitPawarStatement #MaharashtraPolitics #NCPNews #EmotionalSpeech #PoliticalNews #DeputyCM #Election2024 #IndianPolitics

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Waqf Amendment Bill)

देश भर में हो रहा Waqf Amendment Bill का विरोध, कोई लैंड जिहाद खत्म होने की दे रहा दुहाई, तो कोई बता रहा मजहबी मामला

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 (Waqf Amendment Bill) पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह कानून पूरे देश में लागू हो चुका है। इस विधेयक को संसद के बजट सत्र में पारित किया गया था। बता दें की लोकसभा में 3 अप्रैल की सुबह और राज्यसभा में 4 अप्रैल की सुबह हुई मतदान प्रक्रिया में इसे मंजूरी मिली। लोकसभा में 520 में से 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट दिया, जबकि राज्यसभा में 128 सांसदों ने समर्थन और 95 ने विरोध किया। सरकार को उम्मीद है कि इससे वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और उचित उपयोग को नई दिशा मिलेगी। लेकिन विरोधी पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरे के रूप में देख रहा है। बिल के पास होते ही विपक्षी दलों और कई मुस्लिम संगठनों ने इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। यही नहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आप विधायक अमानतुल्लाह खान सहित कई लोगों ने विधेयक की वैधता को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसके साथ ही एक गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने भी वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। इस कानून (Waqf Amendment Bill) के जरिए सरकार मुस्लिमों का छीन रही है हक  वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 (Waqf Amendment Bill) का विरोध थमता नहीं दिख रहा है। वक्फ कानून पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने बड़ा बयान दिया है। मदनी ने कहा है कि “इस कानून के जरिए सरकार मुस्लिमों का हक छीन रही है। वक्फ हमारे मजहब का मामला है इसलिए इससे हम खुद निपट लेंगे।” यही नहीं, मदनी ने वक्फ कमेटी में हिंदुओं के रखे जाने पर सवाल उठाया और इस कानून का विरोध करने वाले विपक्ष नेताओं को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि “विपक्ष के जो नेता इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वे मुस्लिमों को उनका हक देंगे। आज नहीं तो कल हमारा हक मिलेगा।” मदनी ने आगे यह भी कहा कि “सरकार को वक्फ मंत्रालय भी किसी मुस्लिम को दे देना चाहिए था।” संशोधित वक्फ विधेयक (Waqf Amendment Bill) देश में भूमि जिहाद को खत्म करने में करेगा मदद  इसके अलावा तेलंगाना से बीजेपी विधायक टी राजा सिंह ने रविवार को दावा किया कि संशोधित वक्फ विधेयक (Waqf Amendment Bill) देश में भूमि जिहाद को खत्म करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत में भगवा सरकार के सत्ता में आने के बाद से भूमि जिहाद में शामिल लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।” कल तक जो लोग वक्फ नोटिस जारी करके भूमि जिहाद के नाम पर बोर्ड लगाते थे, जैसे कि यह उनके पिता की संपत्ति हो, वे अब ऐसे बोर्ड नहीं लगा पाएंगे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया है। जब भारत आजाद हुआ तो ‘वक्फ बोर्ड वालों’ के पास करीब 4,000 एकड़ जमीन थी। उन्हें 9,50,000 (9.5 लाख) एकड़ जमीन कैसे मिली? बता दें कि पिछले सप्ताह भारतीय संसद के दोनों सदनों में में लंबी बहस और कड़े विरोध के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अपनी मंजूरी दिए जाते ही शनिवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 कानून बन गया। गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर अब यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) अधिनियम, 1995 हो गया है। इसे भी पढ़ें:- मराठी बनाम हिंदी विवाद से डरा महाराष्ट्र का उद्योग जगत, कारोबारियों को सता रहा मजदूरों के पलायन का डर नए कानून का मुख्य उद्देश्य (Waqf Amendment Bill) वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है नए कानून का मुख्य उद्देश्य (Waqf Amendment Bill) वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग, पक्षपात और अतिक्रमण को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस कानून का विरोध करने वाले मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों का कहना है कि “यह धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है। खास तौर पर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को वे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप मानते हैं।”  विरोधियों का यह भी तर्क है कि यह कदम वक्फ की मूल भावना को कमजोर करता है। Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Amendment Bill #WaqfAmendmentBill #LandJihadDebate #WaqfProtests #ReligiousFreedom #IndiaPolitics #WaqfBill2025 #MinorityRights #WaqfLandIssue #WaqfControversy #SecularIndia

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Priyanka Gandhi absent

Priyanka Gandhi absent: वक्फ बिल पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति पर भड़का मुस्लिम लीग

2 अप्रैल को लोकसभा में वक्‍फ बिल 288-232 वोटों से, तो वहीं 3 अप्रैल को राज्‍यसभा में 128-95 वोटों से पास हुआ था। मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह उनकी धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है। वक्‍फ बिल को विपक्ष मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक करार दे रहा है। तो वहीं, सरकार का कहना है कि “वक्फ बोर्ड के प्रशासन में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने से संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी।” इस बीच ध्यान देने वाली बात यह कि कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी केरल के मुस्लिम बहुल इलाके वायनाड से लोकसभा की सांसद है। मुस्लिम बहुल इलाके से सांसद होने के बावजूद प्रियंका लोकसभा में वोटिंग के दौरान नदारद (Priyanka Gandhi absent) रही। वैसे भी मुस्लिम समाज में वक्‍फ बिल को लेकर बड़ी नाराजगी है। ऐसे में आधी रात को हुई वोटिंग के दौरान प्रियंका की गैर-मौजूदगी ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद को अल्पसंख्यकों का हितैषी बताने वाली प्रियंका के मंसूबों पर प्रश्नचिन्ह उठाया जा रहा है। बता दें कि वायनाड के लोगों ने प्रियंका गांधी को पिछले साल भारी बहुमत से जिताकर लोकसभा में भेजा था। बेशक उनकी जीत में मुस्लिम वोटों की अहम भूमिका रही। कहने की जरूरत नहीं, वक्फ संशोधन बिल जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी अनुपस्थिति ने मुस्लिम समुदाय के मन असंतोष की भावना को जन्म दे दिया है। गौरतलब हो कि राहुल गांधी ने लोकसभा में बहस के दौरान हिस्सा नहीं लिया, लेकिन वह वोटिंग के लिए मौजूद जरूर थे।  वक्फ बिल पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी (Priyanka Gandhi absent) पर मुस्लिम लीग ने जताई नाराजगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान वायनाड के सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति (Priyanka Gandhi absent) पर असंतोष व्यक्त किया है। जानकारी के मुताबिक समस्त केरल जेम-इय्याथुल उलमा के मुखपत्र सुप्रभातम ने बुधवार को लोकसभा में विधेयक पर बहस के दौरान सत्र में शामिल नहीं होने के लिए प्रियंका गांधी की घोर आलोचना की। 4 अप्रैल को प्रकाशित संपादकीय में उनकी अनुपस्थिति को एक काला निशान कहा गया और यह भी सवाल उठाया कि जब भाजपा इस विधेयक को आगे बढ़ा रही थी, तब प्रियंका गांधी कहां थीं? और विपक्षी नेता राहुल गांधी ने बिल पर क्यों नहीं बोला?  बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों ने बिल का कड़ा विरोध किया है।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ बिल पास होते ही कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, महाराष्ट्र के इस बड़े मुस्लिम नेता ने छोड़ी पार्टी यह कांग्रेस की अल्पसंख्यक-समर्थक छवि को कर सकता है प्रभावित (Priyanka Gandhi absent)  जानकारों की माने तो कांग्रेस की ओर से यह रणनीति संभवतः केरल के ईसाई संगठनों और मुस्लिम समुदाय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई संगठनों ने इस बिल का समर्थन किया था। कहने की जरूरत नहीं,  प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति (Priyanka Gandhi absent) का असर न सिर्फ वायनाड तक सीमित रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस की अल्पसंख्यक-समर्थक छवि को प्रभावित कर सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य 1995 के अधिनियम में संशोधन करके भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है। Latest News in Hindi Today Hindi News Priyanka Gandhi absent #PriyankaGandhi #WakfBill #MuslimLeague #Congress #ParliamentDebate #IndiaPolitics #WakfControversy #PoliticalNews #PriyankaAbsent #LokSabha2025

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Political switch in Maharashtra

Muslim leader leaves Congress: वक्फ बिल पास होते ही कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, महाराष्ट्र के इस बड़े मुस्लिम नेता ने छोड़ी पार्टी

संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद से बीजेपी के सहयोगी दलों में इस्तीफों का दौर जारी है। कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देन शुरू कर दिया है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी अछूती नहीं है। वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद कांग्रेस का एक बड़े मुस्लिम चेहरे ने पार्टी का साथ छोड़ (Muslim leader leaves Congress) दिया है। ध्यान देने वाली बात यह कि एक तरफ कांग्रेस जहां खुद को मजबूत करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों में जोरशोर से जुटी है, तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने पार्टी के सभी पद और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अब्राहनी ने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इसके साथ ही उसकी एक प्रति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा व सांसद गायकवाड़ को भी भेजी है। संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी छोड़ दिया था कांग्रेस का साथ (Muslim leader leaves Congress)  कांग्रेस से इस्तीफा देने के बारे में यूसुफ अब्राहनी ने बताया कि “पार्टी की बहुत बुरी हालत है। और इसके जिम्मेदार पार्टी के नेता ही है।” जानकारी के मुताबिक उन्होंने यह बात राहुल गांधी को विस्तार से बताई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे वे बहुत निराश है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे है कि जल्द ही कांग्रेस के कई और नेता पार्टी को से इस्तीफा दे सकते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और फिर उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी कांग्रेस को राम-राम बोल (Muslim leader leaves Congress) दिया था। इसे भी पढ़ें:- सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप  यूसुफ अब्राहनी राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी कर चुके हैं (Muslim leader leaves Congress) बता दें कि पेशे से वकील यूसुफ अब्राहनी कई मुस्लिम संगठनों और एसोसिएशन से भी जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वो इस्लाम जिमखाना के अध्यक्ष हैं। वो राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। यही नहीं, वो मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अहम बात यह कि पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी छोड़ दी। हालांकि पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने अपनी भविष्य की रणनीति के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। अभी तक कुछ नहीं पता चला है कि उनकी अगली रणनीति क्या होगी। क्या वो किसी अन्य दल में शामिल होंगे या फिर राजनीति से तौबा कर लेंगे। खैर, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दिए इस्तीफा पत्र (Muslim leader leaves Congress) में उन्होंने कांग्रेस और पार्टी से मिले स्नेह के लिए धन्यवाद भी दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi News  Muslim leader leaves Congress #CongressCrisis #WaqfBill #MuslimLeaderExit #MaharashtraPolitics #PoliticalShakeup #IndianPolitics #CongressNews #WaqfControversy #PartySwitch #MinorityPolitics

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Mohan Bhagwat

हनुमान पौराणिक आदर्श, छत्रपति शिवाजी हमारे आधुनिक आदर्श’ मोहन भागवत ने नागपुर में दिया बड़ा बयान 

हनुमान जी हमारे पौराणिक युग के आदर्श हैं और छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) आधुनिक युग के हमारे आदर्श हैं। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नागपुर में ‘युगांधर शिवराय’ नामक पुस्तक के विमोचन के दौरान कहीं। मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित कर करते हुए कहा कि राजा अलेक्जेंडर के समय से भारत वर्ष पर शुरू हुए विदेशियों का आक्रमण लंबे समय तक चला और इस्लाम के नाम पर हुए आक्रमण के दौरान सब कुछ नष्ट हो गया। अनेकों लड़ाईयों के बाद भी जब इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला, तब छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) ने इसका समाधान दिया और एक के बाद युद्ध जीत कई वीर गाथाएं लिख दी।  भारत के लिए शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) हमेशा से प्रेरणा रहे हैं- मोहन भागवत मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा कि आरएसएस (RSS) का काम भी व्यक्ति-आधारित नहीं बल्कि देश आधारित रहा है। भारत के लिए शिवाजी महाराज हमेशा से प्रेरणा रहे हैं। शिवाजी महाराज ने दक्षिण भारत में अपनी वीरता से विजय प्राप्त की, लेकिन उनके पास समय कम था, इसलिए उत्तर की तरफ नहीं बढ़ पाए। उन्होंने अपने युद्ध कौशल से भारतीय राजाओं को लगातार मिल रही पराजय के युग को बदल दिया और विजय का रास्ता दिखाया। भागवत ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय राजाओं के हार का सिलसिला सिंकदर के आक्रमण से शुरू हुआ था और देश में इस्लामीकरण तक यह हमला जारी रहा। इस दौरान ही 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना हुई और महाराज शिवाजी अपने युद्ध कौशल से इस समस्या का समाधान लेकर आए। उस समय विजयनगर साम्राज्य और राजस्थान के राजाओं के पास भी यह युद्ध कौशल नहीं था।  इसे भी पढ़ें:- नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा? छात्रपति शिवाजी महाराज आधुनिक युग के हमारे आदर्श मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस (RSS) संस्थापक केबी हेडगेवार, द्वितीय सरसंघचालक एमबी गोलवलकर (गुरुजी) और तृतीय सरसंघचालक एमडी देवरस (देवरस) ने कई बार यह बात कही थी कि हनुमान जी हमारे लिए पौराणिक युग के आदर्श और योद्धा थे और छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) आधुनिक युग के हमारे आदर्श हैं। ये 250 वर्ष पहले भी हमारे आदर्श थे, आज भी हैं और आगे भी आदर्श रहेंगे। हम सभी व्यक्तियों और भारत वर्ष के लिए उनकी शौर्य गाथा को सुनना सौभाग्य की बात है। मोहन भागवत ने इस दौरान यह भी कहा कि दक्षिण भारत के एक अभिनेता ने एक फिल्म में शिवाजी का रोल अदा किया था। इस फिल्म के आने के बाद उनका नाम गणेशन से बदलकर शिवाजी गणेशन हो गया। जो बताता है कि देशवासी शिवाजी को कितना सम्मान देते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi News Chhatrapati Shivaji Maharaj MohanBhagwat #RSSChief #ChhatrapatiShivaji #LordHanuman #IndianIdeals #NagpurNews #HinduIcons

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Waqf Amendment Bill 2025

12 घंटे चली लंबी चर्चा के बाद देर रात लोकसभा में पास हुआ Waqf Amendment Bill 2025, अब राज्यसभा में होगी अग्निपरीक्षा

बुधवार को 12 घंटे चली लंबी चर्चा के बाद आखिरकार वक्फ संशोधन विधेयक-2025 (Waqf Amendment Bill 2025) लोकसभा में पास हो गया। रात दो बजे के करीब हुए मत विभाजन में इस विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। दरअसल, बुधवार को यह बिल लोकसभा में पेश हुआ था और इस विधयेक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने 12 घंटे लंबी चर्चा की। आधी रात तक चर्चा होने के बाद इसके बाद हुए मतविभाजन में सरकार की जीत हुई और विधेयक लोकसभा में पास हो गया। बता दें कि अब यह संशोधन विधेयक पारित होने के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार के पास जरूरी बहुमत नहीं है। इसे पारित कराने के लिए उच्च सदन में सरकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यहां भी भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मजबूत स्थिति में है। अन्य दलों के समर्थन से वह इस विधेयक को आसानी से पारित करा सकती है।  अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025)  नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं बता दें कि चर्चा के दौरान विपक्ष के सांसदों ने बिल के खिलाफ 100 से अधिक संशोधन प्रस्ताव दिए, लेकिन वोटिंग के दौरान विपक्ष के सभी संशोधन गिर गए। चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि “अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं और कांग्रेस के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों का सही से प्रबंधन होता तो केवल मुसलमानों की ही नहीं, बल्कि देश की तकदीर भी बदल जाती।” इस बीच केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है।” जबकि उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तो देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय पारसी को भी बचाने के लिए प्रयास कर रही है।” रिजिजू ने आगे कहा कि “विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन यह कहना कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, सही नहीं है।” उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि “मैं खुद अल्पसंख्यक हूं और कह सकता हूं कि भारत से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हर अल्पसंख्यक समुदाय शान से इस देश में जीवन जीता है।” कांग्रेस ने साल 2013 में तुष्टिकरण के नाम पर जो गलती की उसे हमने सुधार दिया है- (Waqf Amendment Bill 2025) यही नहीं वक्फ संशोधन विधेयक-2025 (Waqf Amendment Bill 2025) के पारित होने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि “कांग्रेस ने साल 2013 में तुष्टिकरण के नाम पर जो गलती की उसे हमने सुधार दिया है। इस विधेयक के जरिए हमने मुस्लिम महिलाओं और गरीबों को तोहफा दिया है।” गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि “हमें उम्मीद है कि भविष्य में गरीब लोगों को उनकी जमीन का अधिकार मिलेगा।” तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि “मतविभाजन का अंतर केवल 50 वोटों का था। आप समझ सकते हैं कि यह विधेयक लोगों के जनादेश के कितना खिलाफ है। सरकार बहुत मुश्किल से इस विधेयक को पारित करा पाई है। भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के लिए यह एक काला दिन है। यह विधयेक लोगों के मूलभूत अधिकारों के खिलाफ और अन्यायपूर्ण है। इस संशोधन विधेयक का मुस्लिम समाज पर बहुत गहरा असर पड़ने जा रहा है।” इसे भी पढ़ें:- नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा? इस विधेयक (Waqf Amendment Bill 2025) से वक्फ बोर्ड के कामकाज में जब पारदर्शिता आएगी तो विपक्ष को इसमें परेशानी क्या है? खैर बिल (Waqf Amendment Bill 2025) के पारित होने के बाद संसद परिसर में लोजपा रामविलास के अध्यक्ष और संसद चिराग पासवान ने कहा कि “मुस्लिम समाज की भलाई के लिए अगर कुछ संशोधन इसमें शामिल किए जाते हैं तो विपक्ष को इसमें भी सहयोग करना चाहिए। इस विधेयक से वक्फ बोर्ड के कामकाज में जब पारदर्शिता आएगी तो विपक्ष को इसमें परेशानी क्या है? यह विधेयक पीएम मोदी और एनडीए द्वारा लाया गया है, केवल इसलिए विरोध हो रहा है। विपक्ष के सभी सांसदों ने एक तरह के बयान दिए हैं। उन्होंने तथ्यों पर बात नहीं की है। ये नेता मेरे धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।” चिराग पासवान ने आगे कहा कि “वे उन लोगों का समर्थन कर रहे हैं जो सच्चर कमेटी के मुताबिक मुस्लिमों की बदहाल हालत के लिए जिम्मेदार हैं। बिहार चुनाव में सब कुछ साफ हो जाएगा।” यह भारत का कानून है, सभी को स्‍वीकारना होगा:- अमित शाह गौरतलब हो कि “इससे पहले, चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “यह भारत सरकार का कानून है और इसे सभी को स्वीकार करना होगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि “वह समाज में भ्रम फैला रहे हैं और मुसलमानों को डराकर उनका वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” इस दौरान शाह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर भी विपक्ष के दावे को खारिज करते हुए कहा कि “सीएए लागू होने के बाद किसी भी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई है और अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला जैसे नेता चुनाव जीतकर लौटे हैं, जो बताता है कि स्थिति में सुधार हुआ है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है और विकास और पर्यटन बढ़े हैं।” तो वहीं एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया और अपनी बात रखने के बाद अंत में विधेयक की प्रति फाड़ दी।  Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Amendment Bill 2025 #WaqfAmendmentBill2025 #LokSabhaPassesBill #WaqfLawChanges #IndianParliament #RajyaSabhaDebate #LegalReforms #GovtBill2025 #WaqfActAmendment #IndiaPolitics #ParliamentSession

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Who Benefits Most from the New Waqf Act Amendments

Waqf Act amendments: नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा?

लोकसभा में आज वक्फ बिल को नए स्वरूप (Waqf Act amendments) में पेश कर दिया गया है। फ़िलहाल बिल चर्चा जारी है। संसद में वक्फ बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा में वोटिंग के जरिए बहुमत की जरूरत है। इसमें सरकार को इस बिल को पास कराने हेत लोकसभा के 543 में से 272 और राज्यसभा के 245 में से 123 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बात करें राज्यसभा के सांसदों की संख्या की राज्यसभा में अभी 9 सीटें खाली हैं। तो ऐसे में मौजूदा 236 में से 119 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बीजेपी के पास 96 सांसद हैं। वहीं एनडीए की सहयोगी पार्टियों के पास 19 सांसद हैं। ऐसे में सरकार को 6 नॉमिनेट सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में यदि यह विधेयक संसद से पास हो जाता है तो यह बिल कानून बन जाएगा। साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में किए जा रहे हैं बदलाव  हालांकि वक्फ बिल पर केंद्र सरकार का कहना है कि “साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में बदलाव किए जा रहे हैं।” बता दें कि 8 अगस्त को लोकसभा में बिल पेश करते हुए संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि “इस बिल का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं के कामकाज में दखलंदाजी करना नहीं है। बिल मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में हिस्सेदारी देने के लिए लाया गया है। अहम बात यह कि इसमें वक्फ प्रॉपर्टीज के विवाद 6 महीने के भीतर निपटाने का प्रावधान है। इससे वक्फ में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का हल निकलेगा।” जानकारी के मुताबिक नए बिल के कानून बन जाने के बाद वक्फ की संपत्ति का विवाद सुलझाने में राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां मिल जाएँगी। ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि प्रस्तावित कानून का असर दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों और पुरानी मस्जिदों पर नहीं होगा, लेकिन बिल में किए गए परिवर्तनों में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो जरूर हो सकती है। नए बिल के मुताबि वक्फ बोर्ड के सदस्यों के अलावे अब बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। मौजूदा सरकार अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं। जैसे कि  अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं की गईं हैं दायर  बता दें कि साल 2022 से अब तक देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं दायर की गईं थीं। जिसमें मौजूदा वक्फ कानून में कई खामियां बताई गईं। इनमें से तकरीबन15 याचिकाएं तो खुद मुस्लिमों ने दायर कर रखी है। इन याचिकाओं में सबसे बड़ा तर्क यह कि वक़्फ़ एक्ट के सेक्शन 40 के मुताबिक, वक्फ किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी प्रॉपर्टी घोषित कर सकता है। इसके खिलाफ कोई शिकायत भी वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल में ही की जा सकती है और इस पर अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल का ही होता है। ऐसे में एक आम इंसान के लिए वक्फ के फैसले के कोर्ट में चैलेंज करना आसान नहीं है। इसे भी पढ़ें:- मुंबई में हिंदू युवकों की पिटाई पर मचा बवाल, बजरंग दल ने दी यह चेतावनी वक़्फ़ का इतिहास (Waqf Act amendments) ऐसे में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वक्फ (Waqf Act amendments) कहते किसे हैं। दरअसल, वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है, ठहरना या रोकना। कानूनी शब्दों में समझने की कोशिश करें तो वक्फ उसे कहते हैं, इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है, तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। फिर वो चाहे कुछ रुपये हों या संपत्ति हो या फिर चाहे बहुमूल्य धातु हो, घर मकान ही या जमीन ही क्यों न हो? बता दें कि दान की गई ऐसी प्रॉपर्टी को अल्लाह की संपत्ति कहते हैं। और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाले इंसान को वकिफा कहा जाता है। गौर करने वाली बात यह कि वकिफा द्वारा दान की गई या वक्फ की संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता। इसका उपयोग सिर्फ धर्म के लिए ही जा सकता। रही बात भारत में वक्फ के परंपरा की, तो बता दें कि इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है। भारत में आजादी के बाद साल 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था। फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन किए गए थे। और फिर संशोधन करने के बाद नया वक्फ एक्ट बना। इसके अलावा साल 2013 में भी इसमें कई बदलाव किए गए। Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Act amendments #WaqfAct #WaqfBill2024 #WaqfProperty #WaqfBoard #IndianLaw #MuslimCommunity #LegalReforms #IndiaNews #GovtPolicy #WaqfRights

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