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मोदी सरकार पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध- अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार पंजाब के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और राज्य के बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के प्रति कटिबद्ध है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार की शाम को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें मानसून के दौरान आई बाढ़ से राज्य में हुए नुकसान की जानकारी दी. उन्होंने आपदा राहत एवं पुनर्स्थापन के लिए राज्य के लिए अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत करने की भी मांग की. बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में राज्य के पास 12,589.59 करोड़ रुपए की पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, जिसका उपयोग भारत सरकार के मानदंडों के अनुसार प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और तत्काल पुनर्वास के लिए किया जा सकता है. केंद्र सरकार ने राज्य में हाल ही में आई बाढ़ के दौरान खोज, बचाव और तत्काल पुनर्वास के लिए केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से राज्य प्रशासन को हरसंभव सहायता प्रदान की है. प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का किया आंकलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 सितंबर को पंजाब का दौरा किया था और राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान की समीक्षा की थी. प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता में से, 805 करोड़ रुपए (एनएचएआई द्वारा स्वीकृत 170 करोड़ रुपए सहित) विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य सरकार, लाभार्थियों को पहले ही जारी किए जा चुके हैं और शेष राशि राज्य से संबंधित जानकारी प्राप्त होने पर जारी कर दी जाएगी. इसके अलावा, पंजाब राज्य से ज्ञापन प्राप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना, 1 सितंबर को एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) का गठन किया गया था. केंद्रीय टीम ने 3 से 6 सितंबर तक राज्य में मौके पर नुकसान के आंकलन के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. हालांकि, राज्य सरकार द्वारा अभी एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत करना बाकी है. ज्ञापन प्राप्त होने के बाद भारत सरकार द्वारा स्वीकृत मानदंडों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा उस पर विचार किया जाएगा. इसके अलावा, राज्य, आजीविका और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए एक रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन योजना तैयार कर सकता है. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पहले ही 14.08.2024 को एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ ) के तहत रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन फंडिंग विंडो के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं.

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BJP के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा के निधन से दिल्ली और भाजपा में शोक की लहर

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के विकास में अहम योगदान देने वाले विजय कुमार मल्होत्रा का निधन हो गया है. उनके निधन से दिल्ली के राजनीतिक, व्यापारिक और खेल जगत में शोक की लहर छा गई है. भाजपा नेताओं ने उनके निधन को दिल्ली और पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. प्रवीण खंडेलवाल ने मल्होत्रा के खेल प्रेम को किया याद भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रवीण खंडेलवाल ने मल्होत्रा को दिल्ली का सच्चा मित्र और व्यापारियों का मसीहा करार दिया. उन्होंने कहा, “मल्होत्रा जी ने दिल्ली के आधुनिक विकास की नींव रखी और राजधानी की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया. वे व्यापारिक समुदाय के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील थे. उनका सहयोग व्यापारियों के लिए ताकत का स्रोत था.” खंडेलवाल ने उनके खेल प्रेम को भी याद किया और कहा कि मल्होत्रा का खेलों के विकास में योगदान हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा. उन्होंने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की. मनोज सिंह बिष्ट ने भी मल्होत्रा के निधन पर जताया गहरा दुख वहीं, भाजपा नेता मनोज सिंह बिष्ट ने भी मल्होत्रा के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा, “विजय कुमार मल्होत्रा दिल्ली भाजपा के पहले अध्यक्ष थे. वे कुशल संगठनकर्ता थे और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में माहिर थे. वे हमेशा दिल्ली के विकास के बारे में सोचते थे. उनका निधन दिल्ली भाजपा और शहर के लिए बड़ा नुकसान है.” बिष्ट ने मुस्तफाबाद विधानसभा की जनता की ओर से प्रार्थना की कि ईश्वर उनकी आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें. कौन हैं विजय कुमार मल्होत्रा? बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार सुबह दिल्ली के एम्स अस्पताल में 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. दिसंबर 1931 में लाहौर में जन्मे विजय कुमार मल्होत्रा दिल्ली से पांच बार सांसद और दो बार विधायक रह चुके थे. वे 1972 से 1975 तक दिल्ली जनसंघ के अध्यक्ष रहे और इसके बाद दो बार भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष (1977-80 और 1980-84) के पद पर भी रहे.

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पवन सिंह की सियासी पारी का नया मोड़, अब इस पार्टी में होंगे शामिल

पवन सिंह की सियासी पारी का नया मोड़, अब इस पार्टी में होंगे शामिल

भोजपुरी सिंगर और एक्टर पवन सिंह अब राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय होने जा रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना नया सियासी ठिकाना भी तय कर लिया है. खबर है कि मंगलवार सुबह 10 बजे पवन सिंह दिल्ली में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात करेंगे और औपचारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे. लोकसभा चुनाव में थे आमने-सामनेदिलचस्प बात ये है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ ताल ठोकी थी, जिससे कुशवाहा को हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन अब सियासत ने ऐसी करवट ली है कि पवन सिंह उसी कुशवाहा की पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं. कहां से चुनाव लड़ने की तायारी?माना जा रहा है कि पवन सिंह बिहार की आरा विधानसभा सीट से एनडीए उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ सकते हैं. इससे पहले पवन सिंह बीजेपी में शामिल हुए थे और उन्हें बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट भी मिला था लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. बीजेपी में दोबारा एंट्री कोशिशपवन सिंह की बीजेपी में दोबारा एंट्री कराने की कोशिश आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह कर रहे थे लेकिन अब पवन सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के जरिए अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. पवन सिंह की लोकप्रियता और भोजपुरी बेल्ट में उनकी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि उनकी एंट्री से राष्ट्रीय लोक मोर्चा को मजबूती मिलेगी. अब देखना होगा कि पवन सिंह की यह सियासी चाल उन्हें विधानसभा में पहुंचाती है या नहीं लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में एक नया चेहरा पूरी ताकत से उतरने को तैयार है.

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महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा को लेकर विवाद सामने आया है. इस बार मामला मुंबई के अंधेरी मेट्रो स्टेशन का है, जहां सिर्फ हिंदी में विज्ञापन लिखे जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया. उन्होंने स्टेशन के नाम पर कालिख पोत दी और नारेबाजी की. उनका कहना था कि मराठी को नजरअंदाज करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है. पहले भी विवाद ये कोई पहली बार नहीं है जब भाषा को लेकर विवाद हुआ हो. जुलाई में मीरा रोड पर एक मिठाई दुकानदार को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने मराठी बोलने से इनकार किया था. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ और सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. इनमें से तीन को नोटिस भी जारी किया गया. इसके बाद सैकड़ों MNS कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मराठी गौरव की रक्षा के लिए विरोध मार्च निकाला. पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ताकि माहौल बिगड़ने से रोका जा सके. वीरार और पालघर में मारपीट भाषाई विवाद यहीं नहीं रुका. जुलाई 2025 में ही वीरार और पालघर में एक ऑटो-रिक्शा चालक को मराठी न बोलने पर पीटा गया. इस बार हमला शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने किया. वीडियो में देखा गया कि चालक ने कहा, “हिंदी या भोजपुरी बोलना मेरा हक है.” लेकिन ऐसा कहने पर उसे थप्पड़ मारे गए और सार्वजनिक माफी मांगने को मजबूर किया गया. महाराष्ट्र बैंक की शाखा में मारपीट लोनावाला के महाराष्ट्र बैंक की एक शाखा में भी ऐसा ही मामला सामने आया. वहां MNS कार्यकर्ताओं ने मैनेजर से मराठी में बात करने की मांग की. जब एक कर्मचारी ने हिंदी के इस्तेमाल का समर्थन किया, तो उसे भी पीटा गया. इन घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र में भाषा को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. मराठी को लेकर भावनाएं गहरी हैं लेकिन हिंसा और जबरदस्ती से समाधान नहीं निकलता. भाषा का सम्मान जरूरी है लेकिन साथ ही हर नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने का अधिकार भी मिलना चाहिए.

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कमाए 241 करोड़…प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, कहा- 98 करोड़ पार्टी को किए डोनेट

राज्य में चुनावी माहौल गरम है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. इसी बीच जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपनी पार्टी जनसुराज को लेकर बड़ा खुलासा किया है. पिछले साल 2 अक्टूबर को उन्होंने जनसुराज को राजनीतिक पार्टी के रूप में लॉन्च किया था और अब बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. प्रशांत किशोर ने तोड़ी चुप्पी प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पर कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि वो बीजेपी के एजेंट हैं. साथ ही उनकी बड़ी टीम और प्रचार को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतना पैसा कहां से आ रहा है. अब प्रशांत किशोर ने इन सवालों पर चुप्पी तोड़ते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,आरोप पर पीके ने क्या कहा? पीके (Prashant Kishore) ने आगे कहा कि उन्होंने देश के कई नेताओं को राजनीतिक सलाह दी है और अब 2022 से वो इसके लिए फीस भी लेते हैं.प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने यह भी कहा कि उनके पास सरस्वती से पैसा आता है. उन्होंने कहा कि पहले वो फीस नहीं लेते थे लेकिन अब उन्होंने इसे प्रोफेशनल तरीके से करना शुरू किया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष पर निशाना बिहार में घूम-घूमकर जनसभाएं कर रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साध रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वो बीजेपी की B टीम की तरह काम कर रहे हैं जबकि प्रशांत का दावा है कि जनसुराज (Jan Suraaj) बिहार के लोगों को एक नया और साफ विकल्प देने की कोशिश कर रही है.

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आजम खान की रिहाई अखिलेश यादव का बड़ा बयान

आजम खान की रिहाई: अखिलेश यादव का बड़ा बयान

आजम खान की रिहाई: अखिलेश यादव बोले– खुशी का दिन, सरकार आने पर मुकदमे होंगे निपटाए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री आजम खान की हाल ही में रिहाई ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे “खुशी का दिन” करार दिया और कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में वापस आती है तो वे यह सुनिश्चित करेंगे कि आजम खान पर दर्ज अधिकांश मामले जल्द निपट जाएँ। अखिलेश यादव ने अपने बयान में सरकार की आलोचना करते हुए संकेत दिया कि वर्तमान प्रशासन के दौरान कई मामलों में उचित कार्रवाई नहीं हो पाई और सियासी दमन की कोशिशें की गईं। उनका यह बयान न केवल पार्टी समर्थकों के लिए उम्मीद जगाने वाला है, बल्कि राजनीतिक विरोधियों के लिए भी संदेश है कि आगामी समय में पार्टी अपने नेताओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए सख्ती से काम करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजम खान की रिहाई और उसके बाद अखिलेश यादव के बयान आगामी चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। पार्टी समर्थक इसे न्याय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे विवादास्पद करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी आजम खान की रिहाई को लेकर चर्चा तेज है। लोग अपने विचार साझा कर रहे हैं, किसी का रुख स्वागतयोग्य है तो किसी का आलोचनात्मक। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को और भी जटिल बना दिया है, और आने वाले महीनों में इसके परिणामों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। अखिलेश यादव का यह बयान स्पष्ट करता है कि पार्टी अपनी नीतियों और नेताओं के मामलों में सक्रिय और सख्त रवैया अपनाने के लिए तैयार है, और आगामी समय में न्यायिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर कई निर्णय लिए जा सकते हैं।

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पीएम मोदी का गुजरात दौरा: विरासत और विकास का संगम

पीएम मोदी का गुजरात दौरा: विरासत और विकास का संगम

गुजरात, 20 सितंबर 2025 — आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया जिसमें सौर ऊर्जा, समुद्री विरासत और सामाजिक विकास से जुड़े कई पहलुओं पर ज़ोर दिया गया। उनका यह दौरा इस बात का प्रतीक है कि कैसे विकास और पारंपरिक विरासत को साथ लेकर चलना संभव है। नए सोलर विलेज की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने कच्छ जिले के धोरड़ो गाँव को राज्य का चौथा पूर्णतः सौर ऊर्जा पश्चिम गाँव (solar village) घोषित किया। धोरड़ो पिछले कुछ समय से पर्यटन की दृष्टि से प्रसिद्ध है, और अब यह सोलर विलेज बनते ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उदाहरण स्थापित करेगा। राज्य सरकार ने इस पहल को पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में कदम बताया है।  राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का निरीक्षण अपने दौरे के दौरान उन्होंने अहमदाबाद जिले की लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का निरीक्षण किया। लगभग ₹4,500 करोड़ की इस परियोजना का उद्देश्य भारत की प्राचीन समुद्री सभ्यता और व्यापारिक इतिहास को जीवंत बनाना है। लोथल का इतिहास इंडस घाटी की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है और NMHC में बनने वाले उद्घाटन किए जा चुके हिस्सों और चल रहे कार्यों का पीएम मोदी ने जायजा लिया।  सार्वजनिक संबोधन और रोडशो प्रधानमंत्री ने इस दौरे के दौरान जनता को संबोधित किया और रोडशो भी किया। इस तरह की सार्वजनिक उपस्थापनाएं विकास की परियोजनाओं के साथ सीधे लोगों को जोड़ने का माध्यम बनती हैं। मोदी के भाषणों में अक्सर स्थानीय जरूरतों, ग्रासरूट विकास और सरकार की योजनाओं की अहमियत बताई जाती है, जिससे जनता को सरकार की प्राथमिकताएं समझ में आती हैं।  “विरासत भी, विकास भी” का सिद्धांत प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा उस प्रस्तावना को पुष्ट करता है जो उन्होंने विकास के साथ विरासत को भी महत्व देने की कही है — अर्थात् पुरातन इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए आगे बढ़ना। धोरड़ो गाँव में सोलर विज़न लागू करना और लोथल जैसे ऐतिहासिक स्थल को पुनर्जीवित करना इस दृष्टिकोण के स्पष्ट उदाहरण हैं।  लाभ और चुनौतियाँ इन पहलों से स्थानीय लोगों को कई तरह से लाभ मिलने की उम्मीद है — बिजली की बचत, पर्यटन से आय, स्थानीय रोजगार, और पर्यावरणीय स्थिरता। हालांकि, इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना, रख-रखाव सुनिश्चित करना, और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप संचालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह जरूरी है कि परियोजनाएँ सिर्फ उद्घाटन तक ही सीमित न रह जाएँ बल्कि लंबे समय तक चलने वाले हों। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश  प्रधानमंत्री मोदी का यह गुजरात दौरा यह संदेश दे रहा है कि विकास का रास्ता सिर्फ नई परियोजनाएँ नहीं हैं, बल्कि पुरानी विरासत को संजोने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के माध्यम से भी गुजरता है। धोरड़ो गाँव का सोलर विलेज बनना और लोथल परिसर का काम इस तरह के मिश्रित विकास का प्रमाण हैं। जैसे-जैसे ये परियोजनाएँ पूरी होंगी, यह देखना होगा कि इनके प्रभाव कितने व्यापक और दीर्घकालीन होते हैं — क्या ये जमीन पर बदलाव लाती हैं? गुजरात के लोगों और सरकार दोनों की निगाहें इस दिशा में बनी हुई हैं।

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1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह: भारत पड़ोसियों के मामले में भाग्यशाली नहीं, पर इसे नियति नहीं माना नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर सैनिकों से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों के मामले में हमेशा भाग्यशाली नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश ने इस स्थिति को अपनी नियति मानकर कभी स्वीकार नहीं किया। भारत ने हर चुनौती का सामना किया और अपनी तकदीर खुद लिखी। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने 1965 के युद्ध में लड़ने वाले जांबाजों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उस दौर के सैनिकों का साहस, बलिदान और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्हीं की वीरता की बदौलत आज भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारी सेनाओं का मनोबल ऊंचा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा शांति और सहयोग की नीति पर चला है, लेकिन जब-जब हमारी सीमाओं को ललकारा गया है, तब-तब हमारी सेनाओं ने दुश्मन को करारा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत का पड़ोसी कौन होगा यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन उनसे संबंध किस तरह रखने हैं यह हमारे नियंत्रण में जरूर है। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत हमेशा बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अगर पड़ोसी सहयोग न करें तो भी देश पीछे नहीं हटेगा। रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत किसी से वैरभाव नहीं चाहता, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता भी नहीं करेगा। इस मौके पर उन्होंने हाल के सैन्य अभियानों का भी उल्लेख किया और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए कदमों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने कठिन हालात में भी जीत को अपनी आदत बना लिया है। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों को विश्वास दिलाया कि सरकार उनके साहस और बलिदान को कभी भुला नहीं सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सीमावर्ती तनावों के बीच बेहद अहम है। चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव की पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री ने साफ संदेश दिया है कि भारत संवाद और दोस्ती की नीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी हर चुनौती का सख्ती से सामना भी करेगा। 1965 का युद्ध भारत के इतिहास का एक अहम मोड़ माना जाता है। इस युद्ध में भारतीय सेनाओं ने जिस साहस और रणनीति का परिचय दिया, उसने पूरे देश को गौरवान्वित किया। राजनाथ सिंह का जांबाजों के साथ यह संवाद न केवल इतिहास को याद करने का अवसर था, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा नीतियों पर भी एक सशक्त संकेत था

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Pakistan and Bangladesh feel like home...," said Sam Pitroda, echoing Rahul Gandhi's appeal to Gen-Z

पाकिस्तान-बांग्लादेश घर जैसा लगता है…’, बोले सैम पित्रोदा, Gen-Z से दोहराई राहुल गांधी वाली अपील

पाकिस्तान-बांग्लादेश घर जैसा लगता है…’, बोले सैम पित्रोदा, Gen-Z से दोहराई राहुल गांधी वाली अपील नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा ने एक बार फिर बयान देकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पित्रोदा ने कहा कि “पाकिस्तान और बांग्लादेश हमारे लिए घर जैसा लगता है”। उन्होंने साथ ही Gen-Z यानी नई पीढ़ी से राहुल गांधी की सोच और संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की। राहुल गांधी की लाइन को दोहराया सैम पित्रोदा ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते हमेशा संवाद और विश्वास पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की “नफरत नहीं, मोहब्बत” वाली लाइन को दोहराते हुए कहा कि नई पीढ़ी को सीमाओं से आगे बढ़कर भाईचारे और शांति का रास्ता अपनाना चाहिए। Gen-Z को संदेश उन्होंने खासतौर पर Gen-Z पीढ़ी से कहा कि वे सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए हैं, इसलिए उन्हें सीमाओं से परे सोचकर वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पित्रोदा ने कहा कि भारत का भविष्य तभी मजबूत होगा जब नई पीढ़ी नफरत और विभाजन की राजनीति से ऊपर उठकर साझेदारी और भाईचारे की राह चुनेगी। बीजेपी का पलटवार पित्रोदा के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुद्दों पर “नरम रुख” दिखाती रही है। उनका आरोप है कि इस तरह के बयान से राष्ट्रीय हित और सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। चुनावी संदर्भ में देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सीधा-सीधा चुनावी राजनीति से जुड़ा है। कांग्रेस लगातार युवाओं और नए मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के संदेश को आगे बढ़ाकर सैम पित्रोदा भी उसी दिशा में काम कर रहे हैं।

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PM Modi Birthday 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर कस्बे में हुआ था। इस साल वे 75 वर्ष के हो गए हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साधारण परिवार से निकलकर भी कोई व्यक्ति मेहनत, अनुशासन और सेवा भाव से देश के सर्वोच्च पद तक पहुँच सकता है। मोदी जी का बचपन बहुत सादा था। उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे और उनकी माँ गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन बचपन से ही मोदी जी में सीखने और समाज की सेवा करने की लगन थी। युवावस्था में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और यहीं से उनका सामाजिक व राजनीतिक सफर शुरू हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से संगठन और जनता के बीच पहचान बनाई। वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और लगातार 13 वर्षों तक इस पद पर कार्य करते रहे। उनके नेतृत्व में गुजरात ने विकास के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए। इसके बाद 2014 में वे पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने। फिर 2019 और 2024 में भी जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने कई महत्वपूर्ण योजनाएँ शुरू कीं। स्वच्छ भारत अभियान के जरिए देशभर में सफाई और शौचालय निर्माण को बढ़ावा मिला। जन धन योजना ने करोड़ों गरीब लोगों को बैंकिंग से जोड़ा। उज्ज्वला योजना के तहत लाखों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया। इसके अलावा डिजिटल इंडिया अभियान ने तकनीक और इंटरनेट को गाँव-गाँव तक पहुँचाया। इन सबके साथ-साथ मोदी जी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की मजबूत पहचान बनाई। मोदी जी अपना जन्मदिन बहुत सादगी से मनाते हैं। वे इसे निजी उत्सव नहीं मानते बल्कि समाज सेवा का अवसर समझते हैं। उनके जन्मदिन पर भारतीय जनता पार्टी और उनके समर्थक “सेवा पखवाड़ा” चलाते हैं, जिसमें सफाई अभियान, पौधारोपण, रक्तदान और स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्य होते हैं। उन्हें मिले तोहफों और स्मृति चिन्हों की नीलामी कर दी जाती है और उससे प्राप्त धनराशि सामाजिक कार्यों में खर्च की जाती है। इस वर्ष उनका 75वाँ जन्मदिन विशेष महत्व रखता है। देशभर में सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वाराणसी में 111 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ है। मध्यप्रदेश में पोषण अभियान और महिला सशक्तिकरण से जुड़े नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित देश-विदेश के कई नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं। मोदी जी की जीवनशैली हर किसी के लिए प्रेरणा है। वे कम सोते हैं, बहुत अधिक काम करते हैं और हमेशा अनुशासन का पालन करते हैं। उनका मानना है कि नेतृत्व का मतलब केवल पद पर बैठना नहीं बल्कि जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना है। उनके नारे “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” ने करोड़ों लोगों को नई दिशा दी है। नरेंद्र मोदी का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का क्षण है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मन में देशभक्ति और दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

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