Pahalgam terrorist attack

Pahalgam terrorist attack: पहलगाम आतंकी हमले पर मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने कही यह बात, बड़े एक्शन की तैयारी

पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले ने पूरी देश को झकझोर (Pahalgam terrorist attack) दिया है। मंगलवार को पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जबकि 13 लोग घायल हो गए। आतंकी हमले में मारे गये लोगों में ज्यादातर पर्यटक थे। यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला बताया जा रहा है। इस हमले का भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कड़ा विरोध हो रहा है। यही नहीं इस  आतंकवादी हमले की मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने खुलकर कड़ी निंदा की है। बता दें मुताबिक मुस्लिम वर्ल्ड लीग के सेक्रेटरी शेख मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इसा ने इस हमले की कड़ी निंदा की। जम्मू-कश्मीर में हुए भयावह आतंकी हमले’की निंदा करते हुए निर्दोष लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। गौरतलब हो कि अब्दुलकरीम अल-इसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र की सऊदी यात्रा के दौरान जेद्दा में नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। विदेश मंत्रालय ने जारी अपने बयान में कहा कि “प्रधानमंत्री ने जुलाई 2023 में नई दिल्ली में महासचिव के साथ अपनी बैठक को याद किया। उन्होंने सहिष्णु मूल्यों को बढ़ावा देने, संयम की वकालत करने और सामाजिक सामंजस्य और सद्भाव को आगे बढ़ाने में मुस्लिम वर्ल्ड लीग की भूमिका की सराहना की।” पीएम मोदी ने आतंकवाद, हिंसा और उग्रवाद के खिलाफ मुस्लिम वर्ल्ड लीग के रुख की (Pahalgam terrorist attack) की सराहना  प्राप्त जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय (एमईए) के बयान के मुताबिक बैठक के दौरान पीएम मोदी ने सहिष्णु मूल्यों को बढ़ावा देने, संयम की वकालत करने और सामाजिक सामंजस्य और सद्भाव को आगे बढ़ाने में मुस्लिम वर्ल्ड लीग की भूमिका की सराहना की है। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद, हिंसा और उग्रवाद के खिलाफ मुस्लिम वर्ल्ड लीग के रुख की सराहना (Pahalgam terrorist attack) की। बता दें कि बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।  इसे भी पढ़ें:- पहलगाम में आतंकियों ने लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को सीने-छाती और बाजू में मारी गोलियां, शादी की खुशियां बदल गईं मातम में देश के गृह मंत्री अमित शाह आज पहलगाम जाएंगे (Pahalgam terrorist attack)  बता दें कि हमले के बाद पीएम मोदी अपना सऊदी दौरा बीच में छोड़ भारत आए हैं। कश्मीर के हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। सऊदी अरब से दिल्ली वापस लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी एक्शन मोड में आ गए हैं। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam terrorist attack) को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, एनएसए अजीत डोभाल और अन्य अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक में हिस्सा लिया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यह बैठक एयरपोर्ट पर ही हुई। उन्होंने एयरपोर्ट पर अधिकारियों से इस हमले की ब्रीफिंग ली। यही नहीं, पीएम मोदी सुरक्षा मामलों पर होनेवाली कैबिनेट की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। देश के गृह मंत्री अमित शाह आज पहलगाम जाएंगे। गौर करने वाली बात यह कि गृह मंत्री अमित शाह, पर्यटकों पर हुए हमले के कुछ घंटे बाद श्रीनगर पहुंचे थे। Latest News in Hindi Today Hindi News Pahalgam terrorist attack #PahalgamAttack #TerrorismInKashmir #MuslimWorldLeague #IndiaSecurity #KashmirViolence #JammuAndKashmir #TerrorAlert #GlobalTerror #PeaceInKashmir #IndiaNews

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Lieutenant Vinay Narwal

Pahalgam terror attack: पहलगाम में आतंकियों ने लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को सीने-छाती और बाजू में मारी गोलियां, शादी की खुशियां बदल गईं मातम में

धरती की जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर को नापाक आतंकियों ने जहन्नुम बना कर रखा दिया है। मंगलवार को एक बार फिर आतंकवादियों ने यहाँ की वादियों को दहला (Pahalgam terror attack) दिया है। आतंकियों ने पहलगाम से तकरीबन 85 किलोमीटर दूर बैसारण घाटी में 26 निर्दोष पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी। मरने वालों में दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस हमले में करनाल के सेक्टर 7 के रहने वाले विनय नरवाल की मौत हई है। विनय नौसेना में विनय लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। दो साल पहले ही वो नौसेना में भर्ती हुए थे। जानकारी के मुताबिक बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार के कुछ सदस्य श्रीनगर रवाना हो गए हैं। विनय के जाने से परिवार में मातम छा गया है और पूरा परिवार सदमे में हैं। ग्रामीणों ने कहा कि “आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि “अगर आतंकियों को छोड़ दिया गया तो इस तरह के हमले फिर से हो सकते हैं।” लोगों का कहना है कि “अभी शादी समारोह की खुमार उतरी भी नहीं थी कि यह अत्यंत दुखद घटना हो गई।”  परिवार में खुशियों का माहौल था कि अचानक खुशियां मातम में बदल (Pahalgam terror attack) गईं दरअसल, अभी कुछ ही दिन पहले विनय की शादी हुई थी। बता दें कि 16 अप्रैल को ही उनकी शादी हुई थी और 19 अप्रैल को रिसेप्शन हुआ था। गौरतलब हो कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कोच्चि में तैनात भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की उम्र 28 वर्ष के करीब थी। वो माता-पिता की इकलौती संतान थे। भूसली गांव के रहने वाले विनय शादी की छुट्टियां बीताने कश्मीर घाटी गए हुए थे। थे। करनाल के सेक्टर 7 में वह अपनी बहन और माता-पिता के साथ रहा करते थे। उनकी पत्नी का नाम हिमांशी है जो कि गुरुग्राम की रहने वाली हैं। विनय की शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी और अभी परिवार में खुशियों का माहौल था कि अचानक खुशियां मातम में बदल (Pahalgam terror attack) गईं। गौर करने वाली बात यह कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की यात्रा पर हैं और पर्यटन तथा ट्रैकिंग का सीजन जोर पकड़ रहा है। इसे भी पढ़ें:-  बेंगलुरु में वायुसेना अधिकारी दंपति से मारपीट, कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल इस भीषण एवं क्रूर आतंकी हमले में जिन 26 लोगों की जान गई (Pahalgam terror attack) हैं इस भीषण एवं क्रूर आतंकी हमले में जिन 26 लोगों की जान गई (Pahalgam terror attack) हैं। इस नरसंहार में दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उनमें दो नागरिक यूएई से और दूसरा नेपाल से है। थी नहीं, मृतकों में दो स्थानीय निवासी भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि “मृतकों की संख्या का अभी पता लगाया जा रहा है। उन्होंने इस आतंकी हमले को ‘हाल के वर्षों में आम लोगों पर सबसे बड़ा हमला’बताया।” इस भीषण हमले के बाद देशभर में आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी।  Latest News in Hindi Today Hindi News  Pahalgam terror attack #PahalgamTerrorAttack #VinayNarwal #IndianArmy #JammuAndKashmir #ArmyMartyr #Terrorism #KashmirAttack #SaluteToHeroes #IndiaFightsTerror #NationFirst

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Shiladitya Bose case

Shiladitya Bose case: वायुसेना अधिकारी शिलादित्य बोस पर हुआ हत्या के प्रयास का केस दर्ज

बेंगलुरु में हुए मामूली रोडरेज विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है। भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शिलादित्य बोस पर पुलिस ने हत्या का प्रयास करने का मुकदमा दर्ज कर दिया है। गौरतलब हो कि पहले विंग कमांडर ने आरोप लगाया था कि उन पर एक कन्नड़ शख्स ने जानलेवा हमला (Shiladitya Bose case) किया था। उन्होंने बाकायदा एक वीडियो भी पोस्ट किया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक रोडरेज से जुड़ी यह घटना बेंगलुरु के सीवी रमन नगर की है। जहां डीआरडीओ कॉलोनी से एयरफोर्स अधिकारी अपनी पत्नी स्क्वाड्रन लीडर मधुमिता बोस के साथ एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे। इस दौरान रास्ते में विकास कुमार नामक बाइक सवार ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर सामने रोक दिया। और फिर कथित तौर पर कन्नड़ भाषा में गालियां देना शुरू कर दीं।  म डीआरडीओ से हो, यह कन्नड़ भूमि है, मैं तुम्हें देख (Shiladitya Bose case) लूंगा घटना के बाद विंग कमांडर बोस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि “उस व्यक्ति ने उनकी कार पर डीआरडीओ का स्टिकर देखकर कहा कि “तुम डीआरडीओ से हो, यह कन्नड़ भूमि है। मैं तुम्हें देख (Shiladitya Bose case) लूंगा।” इतना कहकर उसने विंग कमांडर के सिर पर कार की चाबी से हमला किया। इस हमले में बोस लहूलुहान हो गए। यही नहीं स्क्वाड्रन लीडर मधुमिता बोस, जो गाड़ी चला रही थीं। उन्होंने पुलिस को बताया कि “बाइक सवार व्यक्ति तेजी से गाड़ी चला रहा था और लगभग उनकी कार से टकरा गया था। इसके बाद उस व्यक्ति ने गाड़ी के सामने अपनी बाइक रोक दी। और फिर दोनों को अनायास गालियां देने लगा।” आगे उन्होंने कहा कि “इस बीच जब उनके पति गाड़ी से बाहर निकले, तो उस व्यक्ति ने पत्थर से हमला किया और भीड़ भी मारपीट करने लगी।”  विंग कमांडर ने पहले बाइक सवार को धक्का दिया और फिर गुस्से में उसे मुक्का Shiladitya Bose case) जड़ दिया खैर, घटना के अगले दिन, एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ। जिसमें देखा गया कि विंग कमांडर बोस और बाइक सवार एक-दूसरे से मारपीट कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि विंग कमांडर ने पहले बाइक सवार को धक्का दिया और फिर गुस्से में मुक्का जड़ दिया। इससे वह जमीन पर गिर पड़ा।  फिर वह व्यक्ति भी उठकर बोस को लात मारते हुए (Shiladitya Bose case) दिखा। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला किया और यह एक रोडरेज का क्लासिक मामला है। जानकारी के मुताबिक घटना के कुछ घंटों बाद बाइक सवार विकास कुमार ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके आधार पर विंग कमांडर शिलादित्य बोस के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।  इसे भी पढ़ें:-  बेंगलुरु में वायुसेना अधिकारी दंपति से मारपीट, कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल यह मामला एक सामान्य सड़क विवाद है। जिसे गलत रूप से सोशल मीडिया पर जातीय रंग दिया गया (Shiladitya Bose case) है पूरे मामले पर पुलिस उपायुक्त (पूर्व) देवराज डी ने बताया कि “यह कतई ही कन्नड़ बनाम गैर-कन्नड़ का मामला नहीं है। बल्कि यह मामला एक सामान्य सड़क विवाद है। जिसे गलत रूप से सोशल मीडिया पर जातीय रंग दिया गया (Shiladitya Bose case) है। तो वहीं, बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि “सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो डालने से पहले लोग पुलिस को जानकारी दें, ताकि एकतरफा बयानबाज़ी से बचा जा सके। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि “दोनों पक्षों से पर्याप्त वीडियो फुटेज मिले हैं और पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी।” हालाँकि इस बीच उन्होंने यह भी साफ किया कि “जांच अभी भी शुरुआती फेज में है। आगे की कार्रवाई सबूतों पर आधारित होगी।”  Latest News in Hindi Today Hindi News Shiladitya Bose case #ShiladityaBose #IAFOfficer #AttemptToMurder #AirForceScandal #IndianAirForce #CrimeNews #BreakingNews #MilitaryNews #FIRFiled #LatestUpdate

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President's Rule in India

President’s Rule in India: क्या आप जानते हैं  किस राज्य में लगा था पहली बार राष्ट्रपति शासन और क्या होता है इस दौरान?

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा और बवाल के बीच प्रदेश में लगातार राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग (President’s Rule in India) उठ रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 356 यानी राष्ट्रपति शासन लगाने हेतु याचिका भी दायर की गई है, जिसकी आज सुनवाई होनी है। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत राज्यपाल से राज्य की स्थिति पर रिपोर्ट मांगने का निर्देश दे। खैर, उक्त याचिका पर आज सुनवाई होनी है। बता दें कि किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन भारतीय राजनीति के संघीय ढांचे को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि संकट के समय भी उस राज्य में शासन स्थिर रहे। भारतीय संविधान के भाग XVIII में अनुच्छेद 355 से 357, साथ ही भाग XIX में अनुच्छेद 365 राष्ट्रपति शासन से संबंधित हैं। भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक आर्टिकल 355 के तहत संघ का कर्तव्य होता है कि वह किसी भी राज्य में बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति की स्थिति में सुरक्षा का काम करे।  इस सूरत में लगता है राष्ट्रपति शासन (President’s Rule in India) और इसके लगते ही राज्य का प्रशासन चला जाता है राज्यपाल के हाथों में  जानकारों की माने तो संविधान का अनुच्‍छेद-356 (President’s Rule in India) केंद्र सरकार को किसी भी राज्य सरकार को हटाकर प्रदेश का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार देता है। किसी भी राज्य में संवैधानिक तंत्र नाकाम होने अथवा रुकावट पैदा होने पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। हालांकि इसके दो आधार हैं। पहला, जब कोई राज्‍य सरकार संविधान के मुताबिक शासन चलाने में सक्षम ना हो और दूसरा तब, जब राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों को लागू करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई हो। ऐसे में उस राज्य में राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की सभी शक्तियां राष्‍ट्रपति के पास चली जाती हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि राष्ट्रपति शासन लगने के बाद के बाद राज्य के मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को तुरंत अपना पद छोड़ना पड़ता है यानी राज्य सरकार की महत्ता खत्म हो जाती है। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य में कोई भी प्रशासनिक फैसला सरकार या सरकार का कोई मंत्री अथवा मुख्यमंत्री नहीं ले सकता। ऐसी सूरत में राज्य का प्रशासन राज्यपाल के हाथों में चला जाता है। इस दौरान राज्यपाल को यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे और प्रशासन सुचारू रूप से चले। राज्य के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी राज्यपाल और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। इतना ही नहीं सभी योजनाओं और कार्यक्रमों को भी केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद लागू किया जाता है। इसे भी पढ़ें:–  महाराष्ट्र के अकोला में इस वजह से लोग ‘नीले ड्रमों’ में लगा रहें हैं ताला, युवाओं की नहीं हो रही शादियां 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल अबतक 134 बार लग चुका है (President’s Rule in India) राष्ट्रपति शासन बता दें कि साल 1950 में संविधान लागू हुआ था। और संविधान लागू होने के करीब 17 महीने बाद राष्ट्रपति शासन का पहली बार प्रयोग 20 जून 1951 को पंजाब सरकार के खिलाफ हुआ था। इसके साथ ही देश में पहली बार पंजाब में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule in India) लगाया गया था। वर्तमान में मणिपुर में सीएम बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू लगाया गया है। आकड़ों की माने तो अबतक देश के कुल 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 134 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में सबसे अधिक बार राष्ट्रपति शासन मणिपुर में लगाया गया है। मणिपुर में अबतक 11 बार राष्ट्रपति शासन लगा है। दूसरा नंबर है यूपी का, जहां 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news President’s Rule in India #PresidentsRule #Article356 #IndianConstitution #EmergencyRule #GovernanceIndia #StatePolitics #IndianPolitics #FirstPresidentsRule #LegalProvisions #PoliticalCrisis

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Blue Drum Lock Trend in Akola Over Marriage Crisis

Blue Drum Lock Trend: महाराष्ट्र के अकोला में इस वजह से लोग ‘नीले ड्रमों’ में लगा रहें हैं ताला, युवाओं की नहीं हो रही शादियां

बीते दिनों उत्तर प्रदेश में मेरठ में हुए सौरभ हत्याकांड के बाद नीले ड्रम के खौफ का आलम यह था कि इसकी बिक्री में गिरावट तक आ गई थी। मेरठ में तो बाकायदा दुकानदारों ने नीला ड्रम खरीदने के लिए आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया था। नीले ड्रम का खौफ इतना कि लोग इसे देखकर ही सहम जाया करते हैं। यदि आपको कहीं नीला ड्रम रखा या फिर उसमें ताला लगा दिख जाए तो डरना मत, हो सकता है उसमें कोई अपनी बेशकीमती चीज छुपा (Blue Drum Lock Trend) कर रखा हो। खैर, क्या आपको पता है, अब यही नीला ड्रम लोगों की शादियों में अड़ंगा डालने लगा है। इसके चलते लोगों की शादियां तक कैंसल हो जा रही हैं। आप सोच रहे होंगे कि कहीं कोई और ड्रम में मिला क्या? तो आप सही ही सोच रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला में पानी की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि लोग महीनों का लगने वाला पानी नीले ड्रम में स्टोर कर रखने लगे हैं। अकोला जिले में पारा 44°C से ऊपर जा रहा है। बढ़ती गर्मी के चलते कुंएं और तालाब सूख चुके हैं। ऐसे में प्रशासन की तरफ से महीने में एक बार पानी की पूर्ति की जा रही है। ऐसे में पानी चोरी न हो जाये इसलिए लोग ड्रम में ताला तक लगा रहे हैं।  पानी की चोरी रोकने के लिए लोग अपने ड्रमों और टैंकों पर (Blue Drum Lock Trend) लगा रहे हैं ताले  इतना ही नहीं, पानी की किल्लत का असर शादियों पर भी पड़ने लगा है। गांव वालों का कहना है कि “लड़कों के लिए दुल्हन ढूंढना मुश्किल हो गया है। लोग पानी की कमी के कारण अपनी बेटियों की शादी यहां नहीं करना चाहते।” इस पूरे मामले पर उनका कहना है कि “जहां पानी नहीं है, वहां हम अपनी बेटियों को नहीं भेजेंगे। इसके अलावा, शादियों जैसे बड़े कार्यक्रम भी अब टाले जा रहे हैं, क्योंकि पीने के पानी का इंतजाम करने में बहुत पैसा खर्च होता है।” बता दें की महाराष्ट्र के अकोला जिले के कई गांव पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। एक तो पानी की किल्लत और ऊपर से भीषण गर्मी ने हालात और भी बदतर कर दिए हैं। उगवा गांव के लोगों के लिए पानी की अहमियत इस कदर है कि लोग पानी की चोरी रोकने के लिए अपने ड्रमों और टैंकों पर ताले (Blue Drum Lock Trend) लगा रहे हैं। क्योंकि सरकारी पाइपलाइन से महीने में एक बार ही पानी आता है। इसे भी पढ़ें:– क्या सच में पश्चिम बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन और होगी अर्धसैनिक बलों की तैनाती? नजरें सुप्रीम कोर्ट पर  उगवा गांव में हर घर में बड़े-बड़े प्लास्टिक के ड्रम और टैंक (Blue Drum Lock Trend) रखे हुए हैं जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अकोला जिले में कई गांव ऐसे हैं, जहां पानी की बड़ी कमी है। भीषण गर्मी के कारण हालात और भी खराब हो गए हैं। लोग परेशान हैं। बूंद-बूंद पानी बचाने में लगे हैं। यहां तक कि किसी सोना-चांदी और रुपयों की तरह पानी को ताला में रखा जा रहा है। यहाँ नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता। उगवा गांव में हालात बड़े ही खराब हैं। गांव के लोग पानी की चोरी रोकने के लिए अपने पानी के टैंक और ड्रमों को ताला लगा (Blue Drum Lock Trend) रहे हैं। उगवा गांव में हर घर में बड़े-बड़े प्लास्टिक के ड्रम और टैंक रखे हुए हैं। लोग इनमें महीने भर के लिए पानी भरकर रखते हैं। गांव वालो का तो यहाँ तक कहना है कि “पानी की कीमती से भी अधिक है। कारण यही जो, घर से बाहर जाते समय घर को ताला लगाने के बजाय पानी के ड्रमों को ताला लगाती हैं।” यदि पानी नहीं स्टोर कर पाए तो जीवन मुहाल समझो इसके पीछे की वजह यह कि सरकारी पाइपलाइन से महीने में एक बार ही पानी आता है, वह भी सिर्फ एक या दो दिन के लिए। कभी-कभी तो डेढ़ से दो महीने तक पानी के दर्शन नहीं होते। ऐसे में यदि पानी नहीं स्टोर कर पाए तो जीवन मुहाल समझो। इसलिए, जितना हो सके, उतना पानी भरकर रखते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकतर गाँवों का यही हाल है। ज्यादातर गांव वाले पानी की किल्लत से बहुत परेशान (Blue Drum Lock Trend) हैं। पानी की कमी के चलते कई बार उन्हें गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। गंदा पानी पीने से गाँव वालों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। हैरत की बात यह कि कई बार अपील करने के बाद भी प्रशासन ने हमारी पानी की समस्या का समाधान नहीं किया है। 84 खेड़ी योजना सिर्फ कागजों पर दर्ज हैं। धरातल की हकीकत कुछ और ही है। बता दें कि 84 खेड़ी योजना का अर्थ है, ’84 गांवों को पानी देने की योजना’, लेकिन यह योजना अभी तक ठीक से काम नहीं कर रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news #BlueDrumLock #AkolaTrend #MarriageCrisis #YouthProtest #ViralNews #MaharashtraNews #SocialProtest #BlueDrumViral #IndianSociety #AkolaYouth

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President's rule West Bengal

President’s rule in West Bengal: क्या सच में पश्चिम बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन और होगी अर्धसैनिक बलों की तैनाती? नजरें सुप्रीम कोर्ट पर

आज मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई होगी। बता दें कि मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई बेंच आज सुनवाई करेगी। इस संबंध में वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका लगाई है। वकील विष्णु शंकर जैन की याचिका में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग (President’s rule in West Bengal) की गई है। दरअसल, 13 अप्रैल से मुर्शिदाबाद में हुई झड़पों के बाद से राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठ रही है। मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत और 18 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने 13 अप्रैल को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय बलों को तैनात करने का आदेश दिया। चौतरफा किरकिरी होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और दावा किया कि “उसने आगजनी और हिंसा के सिलसिले में 118 लोगों को गिरफ्तार किया है।” जानकारी के मुताबिक दायर की गई याचिका में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन सहित अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की गई है। गौर करने वाली बात यह कि इस मामले पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गई है। कहने की जरूरत नहीं, बंगाल में हुई हिंसा ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार पर वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से भड़की हिंसा को अनुमति देने के लिए जानकर निशाना साधा है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर की गई है (President’s rule in West Bengal) याचिका  बता दें कि राष्ट्रपति शासन पर दायर याचिका का उल्लेख अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की ओर से किया (President’s rule in West Bengal) गया था। जिसे रंजना अग्निहोत्री और अन्य द्वारा दायर एक लंबित याचिका के साथ सुनवाई के लिए रखा गया था। जिन्होंने 2021 में पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के संदर्भ में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इस दौरान अधिवक्ता जैन ने कहा कि “साल 2021 के मामले में अदालत पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है। इस पर विचार किया जा रहा है। इस आवेदन के माध्यम से हमने हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं का हवाला दिया है। हम सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत राज्य से केंद्र द्वारा रिपोर्ट मांग रहे हैं। दरअसल, अनुच्छेद 355 राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने के लिए संघ के कर्तव्य से संबंधित है, जो राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार है। इस प्रावधान के तहत केंद्र को यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलें।  इसे भी पढ़ें:– क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दोनों ने कही यह बात याचिका में की गाई है राष्ट्रपति शासन लागू करने की (President’s rule in West Bengal) मांग  बता दें कि बीते दिन राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग (President’s rule in West Bengal) पर जवाब देते हुए पीठ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए रिट जारी करें? अभी हमें विधायी और कार्यपालिका के अधिकारों में दखल देने के लिए दोषी ठहराया जा रहा है। गौरतलब हो कि बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ ने मुर्शिदाबाद हिंसा मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने दो याचिकाकर्ताओं अधिवक्ता विशाल तिवारी और शशांक शेखर झा को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दी। ऐसा इसलिए क्योंकि अदालत ने पाया कि याचिकाएं मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थीं।  Latest News in Hindi Today Hindi news President’s rule in West Bengal #PresidentsRule #WestBengal #SupremeCourt #MamataBanerjee #ParamilitaryForces #BreakingNews #BengalPolitics #SCVerdict #LawAndOrder #IndiaNews

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SC on jurisdiction allegations

SC on jurisdiction allegations: हम पर लग रहे कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण के आरोप- सुप्रीम कोर्ट 

पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ एक्ट के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान वहां पर हिंसा भड़क उठी जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। हिंसा और सुप्रीम कोर्ट पर हो रही बयानबाजी के बीच पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका पर सुनवाई की मांग वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट से की थी। अधिवक्ता विष्णु ने कहा कि “बंगाल में पैरा मिलिट्री फोर्स की तत्काल तैनाती की आवश्यकता है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई ने कहा कि “आप चाहते हैं कि हम इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति को परमादेश जारी करें? वैसे भी हम पर कार्यपालिका में अतिक्रमण करने के आरोप लग (SC on jurisdiction allegations) रहे हैं।”  इसपर विष्णु जैन ने कहा कि “याचिका में एक आवेदन दाखिल करने की मंजूरी दें।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “ठीक है।” दरअसल, वक्फ संशोधन कानून के विरोध में बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर दाखिल याचिकाओं पर उन्होंने यह टिप्पणी की है।   सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की गई है एसआईटी के गठन (SC on jurisdiction allegations) की मांग  बता दें कि एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि “कल मामला सुनवाई के लिए लगा है। मैं कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करना चाहता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि “इलाके में शांति सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट केंद्र को फोर्स तैनात करने का आदेश दे। गौरतलब हो कि बंगाल में हिंसा से जुड़ी याचिका काफी समय से लंबित है औऱ यह याचिका पहले से ही लिस्टेड है। विष्णु शंकर जैन ने उसी याचिका में नया आवेदन दाखिल किया है और उसमें हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग की गई है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने नए आवेदन की जानकारी कोर्ट को दी। अब कल वाली सुनवाई में वह नए आवेदन को भी कोर्ट में रखेंगे। बता दें कि दूसरी याचिका वकील शशांक शेखर झा की ओर से दायर की गई है। याचिका के जरिए मुर्शिदाबाद हिंसा की की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी के गठन (SC on jurisdiction allegations) की मांग की गई है। फिलहाल इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। दरअसल, मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर दाखिल 2 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। इसे भी पढ़ें:– क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दोनों ने कही यह बात हम पर आरोप लग रहे हैं और आप चाहते हैं कि हम देश के राष्ट्रपति को आदेश जारी (SC on jurisdiction allegations) करें? गौरतलब हो कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बीते दिन कहा था कि “देश में जितने भी गृहयुद्ध हो रहे हैं, उसके लिए सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई संजीव खन्ना जिम्मेदार हैं।” ध्यान देने वाली बात यह कि ऐसे में ये बयान सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी चर्चा में रहा है। कोर्ट ने कहा कि “हम पर आरोप लग रहे हैं और आप चाहते हैं कि हम देश के राष्ट्रपति को आदेश जारी (SC on jurisdiction allegations) करें?” मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद वहां कई घर ऐसे मिले जहां से परिवार पलायन कर चुके हैं और लूटपाट के बाद उनके घरों को जला दिया गया है। सिर्फ राज्यपाल ही नहीं महिला आयोग की टीम ने भी मुर्शिदाबाद का दौरा किया। जिसके बाद महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि “यहां लोग इतने दर्द में हैं, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।” Latest News in Hindi Today Hindi news SC on jurisdiction allegations #SupremeCourt #Jurisdiction #ExecutivePowers #Judiciary #SCIndia #IndianConstitution #SeparationOfPowers #CourtNews #LegalUpdate #SCVerdict

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Bengal violence 2025

Bengal violence 2025: बंगाल में हिंसा पीड़ित महिलाओं का छलका दर्द कहा, “क्या ‘हिंदू’ होना ही हमारा अपराध है?” 

मुर्शिदाबाद में हिंसा थम (Bengal violence 2025) जरूर गई है, लेकिन लोगों के बीच दहशत अभी भी खत्म नहीं हुई है। महिलाओं की आंखों में डर साफ नजर आ रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा ने कई हिंदू परिवारों को बेघर कर दिया है। कई परिवार ऐसे हैं जो घरबार छोड़-छाड़कर राहत कैंप में रहने हेतु मजबूर हैं। इनकी मजबूरी देख दिल पसीज जा रहा है। ऐसे में इन बेघर परिवारों से मिलने के लिए जो भी इनके पास जा रहा है, रोती- बिलखती महिलाएं बस एक ही सवाल कर रही हैं कि “क्या हिंदू होना उनका अपराध है? बता दें कि शुक्रवार को जब बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस मुर्शिदाबाद दौरे पर पहुंचे थे तो वो जाफराबाद भी गए थे। जहाँ वो न सिर्फ हिंसा प्रभावित परिवारों से मिले बल्कि उनसे बात भी की। खैर, अपने बीच राज्यपाल को देखकर महिलाओं को बड़ी तसल्ली हुई।  पीड़ित महिलाएं पूछने लगीं कि “क्या हिंदू होना ही हमारा अपराध है, (Bengal violence 2025)? खैर, इस दरम्यान अपने जज्बातों को बयां करते हुए पीड़ित महिलाएं पूछने लगीं कि “क्या हिंदू होना ही हमारा अपराध है, (Bengal violence 2025) हमें बचाओ।” इतना कहकर व्यथित महिलाओं ने राज्यपाल के पैर पकड़ लिए और उनसे बचाने की गुजारिश। ये सब देख राज्यपाल भी खुद को नहीं रोक पाए और उन्होंने पीड़ित महिलाओं और परिवारों से कहा कि “मुझे शांति बनाए रखने के लिए जो भी करना होगा, करूंगा।” इस बीच महत्वपूर्ण बात यह कि राज्यपाल जाफराबाद में हुई हिंसा में मारे गए हरगोविंद दास और चंदन दास के घर भी गए। वहां जाकर उन्होंने कुछ देर तक शोक संतप्त लोगों से बातचीत की। बोस ने उन्हें आश्वासन दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुर्शिदाबाद के धुलियान के निवासी कह रहे हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो हम अपने घर बीएसएफ कैंप को दे देंगे। बता दें कि पिछले सप्ताह शुक्रवार को वक्फ कानून विरोधी आंदोलन के नाम पर हमले हुए और अंधाधुंध हिंसा हुई थी। अहम बात यह कि हमले के निशान आज भी गांव के जले हुए घरों में मौजूद हैं। इस हिंसा में कई लोगों ने अपनी ज़मीनें खो दी हैं।  इसे भी पढ़ें:– क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दोनों ने कही यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधि शुक्रवार को मालदा शरणार्थी शिविर पहुंचे (Bengal violence 2025) थे यही नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधि शुक्रवार को मालदा शरणार्थी शिविर पहुंचे (Bengal violence 2025) थे। इल्जाम है कि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इस आरोप के कारण शुक्रवार को पूरे दिन मालदा में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इसके बाद आज (शनिवार) को महिला आयोग की टीम मुर्शिदाबाद पहुंच कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। यह पल बड़ा ही भावनात्मक था। दरअसल हुआ यह कि महिला आयोग के प्रतिनिधिमंडल के सामने हिंसा की कहानी बताते हुए महिलाएं फूट-फूट कर रो पड़ी। इस बीच महिला आयोग के प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि “वे केंद्र से सारी रिपोर्ट उपलब्ध करा देंगे और रिपोर्ट में बीएसएफ कैंप का भी जिक्र करेंगे। जानकारी के मुताबिक प्रतिनिधियों ने कहा कि “हम आपके साथ खड़े हैं। केंद्र की सभी टीमों जमीन पर उतर चुकी हैं। पूरा देश आपके साथ है। चिंता करने की कोई बात नहीं है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Hindu targeted in Bengal #BengalViolence #HinduWomen #ReligiousTargeting #IndiaNews #HumanRights #WomensVoices #BengalCrisis #HinduIdentity #IndiaViolence #JusticeForVictims

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Thackeray brothers reunion

Thackeray brothers reunion: क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दोनों ने कही यह बात

बृहन्मुम्बई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनावों के मद्देनजर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उथलपुथल होने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे को साथ आने का प्रस्ताव (Thackeray brothers reunion) दिया है। मनसे के मुखिया ने कहा है कि “महाराष्ट्र और मराठियों के अस्तित्व के आगे उद्धव और उनके झगड़े बहुत छोटे हैं। महाराष्ट्र बहुत बड़ा है। उनके लिए उद्धव के साथ आना और साथ में रहना कोई मुश्किल काम नहीं हैं।” जानकारी के मुताबिक फिल्म अभिनेता और डायरेक्टर महेश मांजरेकर ने एक पोडकास्ट में मनसे प्रमुख राज ठाकरे का साक्षात्कार किया है। इस दौरान महेश मांजरेकर ने राज ठाकरे से कई तीखे सवाल पूछे हैं। इस बीच महेश ने राज पूछा कि महाराष्ट्र के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्या राज ठाकरे उद्धव ठाकरे के साथ आ सकते हैं? इस पर राज ठाकरे ने कहा कि महारष्ट्र और मराठी के मुद्दे पर वे साथ आने के लिए तैयार हैं, लेकिन यही इच्छा उनकी भी होनी चाहिए। हमारे बीच के मतभेद, झगड़े, बहुत छोटे हैं, महाराष्ट्र बहुत (Thackeray brothers reunion) बड़ा है- राज ठाकरे राज ठाकरे ने आगे कहा कि “मैं जब शिवसेना में था, तब मुझे उद्धव के साथ काम करने के कोई दिक्कत (Thackeray brothers reunion) नहीं थी। लेकिन सवाल यह है कि सामने वाले कि इच्छा है, क्या मैं उनके साथ काम करूं? महाराष्ट की अगर इच्छा है। हम दोनों साथ आएं तो उन्हें बताना चाहिए। ऐसी छोटी छोटी बातों में मैं ईगो बीच में नहीं लाता।” इस बीच राज ने कहा कि “किसी भी बड़े उदेश्य के लिए हमारे बीच के मतभेद, झगड़े, बहुत छोटे हैं। महाराष्ट्र बहुत बड़ा है। इस महाराष्ट्र के अस्तित्व के लिए मराठी व्यक्ति के अस्तित्व के लिए हमारे बीच के झगड़े और विवाद का कोई महत्व नहीं है। वे निर्रथक हैं। इसलिए एक साथ और काम करना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है। इसके साथ ही राज ने यह भी कहा कि “मुद्दा सिर्फ इच्छा का है। यह सिर्फ मेरे अकेले के इच्छा या मेरे अकेले के स्वार्थ का मुद्दा नहीं है। मुझे लगता है, हमें बड़े उद्देश्य की ओर देखने की जरूरत है। मैं देख रहा हूं तो मुझे तो लगता है कि महाराष्ट्र के सभी राजनैतिक दलों के मराठी लोगों को एक साथ मिलकर एक ही पार्टी शुरू करनी चाहिए।” इसे भी पढ़ें:– कांग्रेस के तल्ख तेवर में फंसे लालू-तेजस्वी! सीएम फेस से लेकर सीट बंटवारा तक अटका उद्धव के साथ आने में कोई परेशानी (Thackeray brothers reunion) नहीं है- राज ठाकरे बता दें कि राज ठाकरे ने उद्धव को साथ आने का प्रस्ताव देते हुए अपनी तरफ से साफ कर दिया कि उद्धव के साथ आने में कोई परेशानी (Thackeray brothers reunion) नहीं है। महाराष्ट्र के लिए दोनों एक साथ आ सकते हैं। गौर करने वाली बात यह कि राज ठाकरे के साथ आने के प्रस्ताव पर उद्धव ठाकरे का भी बयान सामने आया है। उद्धव का कहना है कि “उनकी तरफ से कोई झगड़ा नहीं था। महाराष्ट्र के हित के लिए वे साथ आने को तैयार हैं।” एक तरह से देखा जाए तो उद्धव ठाकरे भी भाई राज ठाकरे के प्रस्ताव से सहमत दिखाई दे हैं। उन्होंने मिलकर काम करने के संकेत दिए हैं। इस बीच उद्धव ने कहा कि “महाराष्ट्र की भलाई के लिए वह छोटे-मोटे झगड़ों को छोड़कर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि “अगर हमने सही फैसला लिया होता तो हम केंद्र और राज्य में सरकार बना सकते थे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Thackeray brothers reunion #ThackerayBrothersReunion #UddhavThackeray #RajThackeray #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics #PoliticalReunion #ThackerayFamily #UddhavRaj #IndianPolitics

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West Bengal political violence

Yusuf Pathan controversy: इस वजह से मुर्शिदाबाद हिंसा में फंसते जा रहे हैं पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नए वक्फ कानून के विरोध को लेकर भड़की हिंसा भले शांत और स्थिति सामान्य हो गई हो लेकिन बहरमपुर से टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान पर लगातार सवालों के घेरे में हैं। दरअसल उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें वे आराम फरमाते’ नजर आ रहे थे। हिंसा के समय सोशल मीडिया पर किए उनके पोस्ट ने मानो जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया था। जिसके बाद से वो लगातार निशाने (Yusuf Pathan controversy) पर हैं और हर तरफ उनकी निंदा की जा रही है। यहाँ तक कि उनकी अपनी पार्टी के नेता ही उनके इस रवैये से हैरान हैं। खैर, अब अपने ही संसदीय क्षेत्र से उनकी गैरमौजूदगी पर विपक्ष और पार्टी के भीतर से ही तीखी आलोचना हो रही है। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने बताया है कि “यूसुफ पठान फोन पर संपर्क में हैं। उन्हें जल्द जिले का दौरा करने के लिए कहा गया है।” खबर के मुताबिक पार्टी के एक वर्ग में पठान को टिकट दिए जाने को लेकर भारी असंतोष है। ऐसी घड़ी में उनका नदारद होना पार्टी के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा। इसके अलावा कार्यकर्ताओं से उनका जुड़ाव भी बेहद कम ही है। लोगों के मुताबिक वह एक क्रिकेटर और सेलिब्रिटी हैं। अब वो यहां क्यों आएंगे? हम ज़मीन पर हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं। यही दिक्कत होती है जब सेलिब्रिटीज़ को उम्मीदवार बनाया जाता है।”  लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर बहरमपुर जीती (Yusuf Pathan controversy) थी सीट  बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान ने कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर बहरमपुर सीट जीती (Yusuf Pathan controversy) थी। बहरमपुर कांग्रेस का दशकों पुराना गढ़ था। कहा जा रहा है कि पठान की सोशल मीडिया पर हालिया तस्वीरें (जिनमें वे आराम फरमाते’ नजर आ रहे थे) ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी नाराज किया है। टीएमसी के स्थनीय नेताओं का कहना है कि “हिंसा प्रभावित इलाके उनके संसदीय क्षेत्र में नहीं आते, लेकिन जिले में उनकी मौजूदगी जरूरी थी। पार्टी नेतृत्व इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है।” गौरतलब हो कि पिछले हफ्ते मुर्शिदाबाद जिले के धूलियन, शमशेरगंज, सूटी और जंगीपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी। गौर करने वाली बात यह कि ये इलाके बहरमपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर हैं। दरअसल, हिंसा की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों के विरोध में हुए प्रदर्शनों से हुई थी। इसे भी पढ़ें:– कांग्रेस के तल्ख तेवर में फंसे लालू-तेजस्वी! सीएम फेस से लेकर सीट बंटवारा तक अटका टीएमसी सांसद यूसुफ पठान चाय पीते हुए व्यस्त (Yusuf Pathan controversy) हैं- सुकांत मजूमदार  हिंसा के बाद मौके को भुनाते हुए बीजेपी ने टीएमसी पर जमकर हमला बोला है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि “टीएमसी नेताओं की शह में बंगाल जल रहा है, लेकिन टीएमसी सांसद यूसुफ पठान चाय पीते हुए व्यस्त (Yusuf Pathan controversy) हैं, जब हिंदू मारे जा रहे हैं। यही टीएमसी का असली चेहरा है।” खैर, टीएमसी सांसद अबू ताहिर खान का  कहा कि “यूसुफ पठान आईपीएल में बिजी हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि वह सांसद से लगातार संपर्क में हैं और उन्हें जिले में आने को कहा गया है।” गौर करने वाली बात यह कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में से शमशेरगंज और धूलियन मालदा दक्षिण लोकसभा सीट के अंतर्गत आते हैं। यहाँ कांग्रेस की ईशा खान चौधरी सांसद हैं। जबकि सूटी, जंगीपुर लोकसभा सीट में आता है, जिसका प्रतिनिधित्व टीएमसी सांसद खलीलुर रहमान करते हैं। तीसरे सांसद अबू ताहिर खान, मुर्शिदाबाद से टीएमसी के ही हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Yusuf Pathan controversy #YusufPathan #MurshidabadViolence #CricketerNews #WestBengal #YusufPathanControversy #BreakingNews #Politics #IndianCricket #TrendingNow #LatestUpdate

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