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हिंदी-मराठी विवाद से गरमाई देश की सियासत, ठाकरे बंधुओं पर उत्तर भारतीय नेताओं का हमला, कांग्रेस ने बनाई विवाद से दूरी 

महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मराठी भाषा पर हालिया सक्रियता और बयानों ने जहां इस विवाद को राज्य में राजनीतिक हवा दी, वहीं हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस मराठी भाषा विवाद (Marathi Language Controversy) को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। जिसकी वजह से राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सहयोगी कांग्रेस ने इस मुद्दे से दूरी बना रखी है।  बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) न बोलने वाले हिंदीभाषियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ बोले जा रहे बयानों पर हिंदी पट्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey), बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने ठाकरे बंधुओं को खुली चुनौती दी है। ‘अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने तो राज (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सीधा हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि, ”अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं। अपने घर में शेर बनना उनके लिए आसान है। आओ बिहार और उत्तर प्रदेश, हम भी देखेंगे तुम्हारी हेकड़ी। यह गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी।” इस दौरान दुबे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए कहा कि हम मराठी संस्कृति का आदर करते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए जो भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, वह निंदनीय है। पप्पू यादव और निरहुआ ने राज ठाकरे को ललकार  सांसद पप्पू यादव ने भी राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे हिंदीभाषियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा करवा रहे हैं। पप्पू यादव ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने यह गुंडई बंद नहीं की, तो मैं खुद मुंबई आकर उनको उनकी ही भाषा में जवाब दूंगा।“ पप्पू यादव का आरोप है कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर यह सब कर रहे हैं ताकि इसी साल महाराष्ट्र में होने वाली BMC चुनाव में ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा के पूर्व सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी ठाकरे बंधुओं को ललकारते हुए कहा, “मैं खुद मुंबई में रहता हूं। अगर हिम्मत है तो मुझे निकालकर दिखाओ।” उनका यह बयान उत्तर भारतीयों की ओर से एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने भी किया पलटवार हिन्दी भाषी राज्य के इन नेताओं के बयानों पर जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दुबे, बिबे जैसे लोग केवल विवाद खड़ा करना जानते हैं। महाराष्ट्र की जनता सब जानती है। इनकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।” उद्धव ने इस दौरान यह भी कहा कि, उनका विरोध हिंदी भाषा से नहीं है, बल्कि हिंदी की जबरन थोपे जाने वाली अनिवार्यता से है। उन्होंने कहा, “हम खुद हिंदी में बात कर रहे हैं, हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। यह विवाद जबरन खड़ा किया गया है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस की चुप्पी और संतुलित रुख इस पूरे विवाद पर जहां महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में हलचल मची हुई और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं। वहीं, कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग रखने का निर्णय लिया है। मुंबई में कांग्रेस के उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह (Nishikant Dubey) ने कहा कि मुंबई में वर्षों से उत्तर भारतीय समाज शांतिपूर्वक रह रहा है और यहां की संस्कृति में घुल-मिल चुका है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीतिक फायदे के लिए सामाजिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह पर भाजपा की सरकार है, तो भाषा के नाम पर हो रही उकसाने वाली राजनीति पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। सरकार को चाहिए कि वह उन नेताओं पर कार्रवाई करे जो समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #hindi #marathi #controversy #thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #northindianleaders #congress #politics #india

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250 Million Workers on Strike

Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike: भारत बंद आज, 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर

आज देशभर में परिवहन, डाक सेवाएं, कोयला खनन, राजमार्ग, बैंकिंग, बीमा, निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले तकरीबन 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी आम हड़ताल पर रहेंगे। दरअसल, यह हड़ताल 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों के मंच ने सरकार की मजदूर, किसान और राष्ट्र विरोधी नीतियों के विरोध में बुलाई है। बेशक इससे कई राज्यों में सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। बता दें कि यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर बुलाया गया (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। प्रदर्शनकारी संगठन केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें वे मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक मानते हैं। कहने की जरूरत नहीं, परिवहन, बैंक और डाक सेवाओं में रुकावट के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों के अनुसार, केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित इस हड़ताल में बिजलीकर्मियों की भागीदारी बड़े पैमाने पर होगी। ऐसे में कई क्षेत्रों में पावर कट या सेवाओं में रुकावट की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही बिहार में कांग्रेस, आरजेडी, और अन्य महागठबंधन विपक्षी दलों ने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में बंद करने का ऐलान किया है।  ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और सड़कों पर जाम की रणनीति बनाई गई (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि मजदूर यूनियन, और कई क्षेत्रीय संगठनों का समर्थन भी मिला है। यूनियनों का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन श्रम कानूनों में बदलाव, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण, संविदा नौकरियों के विस्तार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर है। ध्यान देने वाली बात यह कि इस बार हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मंच का भी समर्थन मिला है। इनके सहयोग से ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और सड़कों पर जाम की रणनीति बनाई गई (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। इस मौके पर केरल के परिवहन मंत्री के. बी. गणेश कुमार ने कहा है कि “बुधवार (9 जुलाई) को केएसआरटीसी की बसें सामान्य रूप से चलेंगी, क्योंकि यूनियनों की तरफ से कोई हड़ताल सूचना नहीं मिली है, लेकिन ट्रेड यूनियनों ने मंत्री के बयान को गलत बताया है।” उनका कहना है कि “हड़ताल की सूचना पहले ही दी जा चुकी है और केएसआरटीसी के कर्मचारी भारत बंद में शामिल होंगे।” हड़ताल का नेतृत्व कर रहे 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ सरकारी विभाग युवाओं को नौकरी देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ज्यादा रख रहे (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) हैं- यूनियन  हालाँकि इस बीच यूनियनों का यह कहना है कि “सरकारी विभाग युवाओं को नौकरी देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ज्यादा रख रहे हैं। उन्होंने रेलवे, एनडीएमसी लिमिटेड, स्टील सेक्टर और शिक्षा सेवाओं के उदाहरण देते हुए कहा कि “यह ट्रेंड गलत है क्योंकि देश में 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है। 20 से 25 साल के युवाओं में बेरोजगारी सबसे ज्यादा (Bharat Bandh Today: 250 Million Workers on Nationwide Strike) है। वे खासकर नए श्रम कानूनों की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे, काम करने के घंटे बढ़ेंगे और यूनियन बनाना या हड़ताल करना मुश्किल हो जाएगा। वे सरकार से ज्यादा नौकरियां, MGNREGA की मज़दूरी और काम के दिन बढ़ाने और शहरी इलाकों के लिए भी ऐसी ही रोजगार योजनाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यूनियनों ने श्रम मंत्री को 17 मांगों की एक लिस्ट सौंपी है। उनका कहना है कि “सरकार की ओर से कोई खास जवाब नहीं मिला है। बैंक खुले रहने की उम्मीद है, क्योंकि 9 जुलाई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने छुट्टी घोषित नहीं की है।” ऐसे में यदि बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि यह पहली बार नहीं है, जब ट्रेड यूनियनों ने इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी साल 2020, 2022 और 2024 को भी हड़तालें हुई थीं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण, नौकरी की असुरक्षा और वर्कफोर्स को कैजुअल बनाने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। Latest News in Hindi Today Hindi news 250 Million Workers on Nationwide Strike #BharatBandh #NationwideStrike #250MillionWorkers #IndiaProtest #LabourRights #StrikeIndia #WorkersUnite #TodayStrike #BandhAlert #IndiaNews

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UP Native Slams Raj Thackeray Over Maharashtra Sacrifice

‘यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाया…’, राज ठाकरे और मनसे पर पूर्व मार्कोस कमांडो का तगड़ा अटैक 

महाराष्ट्र में इन हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जबरदस्त विवाद चल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता हिन्दी बोलने वाले उत्तर भारतियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जिसकी वजह से राज्य में तनाव बना हुआ है। इस विवाद पर 26/11 मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attacks) में कई लोगों को बचाने वाले पूर्व मरीन कमांडो फोर्स (MARCOS) प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने भी अपना पक्ष रखते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर भाषा के नाम पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल पूछ हैं।  प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने सोशल मीडिया पर राज ठाकरे (Raj Thackeray) से पूछा है कि मुंबई पर जब पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया तब आपके ये योद्धा कहां थे, जो अब मराठी भाषा न बोलने वाले मासूम लोगों को पीटकर खुद को महाराष्ट्र का योद्धा बता रहे हैं। कमांडो प्रवीण तेवतिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो भी पोस्ट की है, जिसमें वो कमांडो की वर्दी पहने नजर आ रहे हैं, उनके बुलेटप्रूफ जैकेट पर UP लिखा हुआ है और गले में एके 47 गन लटक रही है।  I saved Mumbai on 26/11.I bleed for Maharashtra.I'm from UP. I saved the Taj Hotel.Where were Raj Thakre's so Called Warriors?Don't divide the Nation. Smiles don't require any Language. https://t.co/z8MBcdcTAW pic.twitter.com/uZAhM4e6Zq — Adv Praveen Kumar Teotia (@MarcosPraveen) July 5, 2025 मुंबई पर जब अटैक हुआ तब आप और आपके योद्धा कहां थे- तेवतिया प्रवीण तेवतिया (MARCOS) ने अपने पोस्ट में लिखा, “26/11 आतंकी हमले (26/11 Mumbai Attacks) के दौरान मैनें यहां के लोगों को बचाया था। मैं यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाने से पीछे नहीं हटा। मैंने और मेरे साथियों ने ताज होटल को बचाया। उस समय राज ठाकरे के ये तथाकथित योद्धा कहां थे? क्या उनको यह हमला नहीं दिख रहा था? राज ठाकरे आप खुद कहीं नहीं दिखे। उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के कोई सदस्य भी नहीं दिखा। उस समय ठाकरे परिवार ने कुछ भी नहीं बोला, क्योंकि उस समय मुंबई में लोगों की जान बचाने वाले सेना के ज्यादातर जवान यूपी और बिहार जैसे दूसरे राज्यों के थे। इसलिए तुच्छ राजनीति के नाम पर हमारे देश को मत बांटो। मुस्कुान और खुशी के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं पड़ती।”  तेवतिया ने यह भी कहा कि, मैं भी यूपी से हूं और देश के पांचवें प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं। इसलिए, हमें राजनीति सिखाने की कोशिश मत करो। राजनीति और भाषा को अलग रखो। महाराष्ट्र के लोगों की तरह हमें भी मराठी भाषा पर गर्व है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर आप लोगों को राजनीति करनी है, तो युवाओं को नौकरी देने और विकास कार्यों पर करो। आप लोगों ने महाराष्ट्र के विकास के लिए अब तक क्या किया, यह जनता को बताओ। प्रवीण तेवतिया ने यह पोस्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए किया। सीएम फडणवीस इस वीडियो में भाषा के नाम पर राज्य में गुंडागर्दी और हिंसा फैलाने वालों को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कौन हैं शौर्य चक्र विजेता प्रवीण कुमार तेवतिया? बता दें कि प्रवीण तेवतिया यूपी के रहने वाले एक पूर्व मार्कोस कमांडो हैं। इन्होंने मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान ताज होटल में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपनी टीम का नेतृत्व किया था। ऑपरेशन के दौरान ये आतंकियों से सीधे भीड़ गए थे। दाेनों तरफ से हुई गोलीबारी में इन्हें चार गोलियां लगीं थी, लेकिन तब भी ये पीछे नहीं हटे और आतंकियों से लड़ते रहे। इनके और इनकी टीम के त्वरित कार्रवाई और अदम्य साहस के कारण ही ताज होटल में फंसे 150 से अधिक लोगों को बचाया गया था। प्रवीण तेवतिया को उनके इस बहादुरी भरे कार्य के लिए शौर्य चक्र पुरस्कार से नवाजा गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Praveen Teotia MARCOS #RajThackeray #MNS #MaharashtraPolitics #MARCOSCommando #UPvsMaharashtra

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Bihar Youth Commission Formed,

Bihar Cabinet Meeting: ‘बिहार युवा आयोग’ का गठन और महिलाओं को मिलेगा 35% आरक्षण

बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं और महिलाओं के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में कुल 43 एजेंडों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से कुछ फैसले न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाले समय में बिहार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी गहराई से प्रभावित करेंगे। कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में सबसे अहम घोषणा बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के गठन को लेकर की गई, जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह आयोग न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें स्किल डेवलपमेंट की दिशा में मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी देगा। क्या है बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog)? बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) राज्य के युवाओं को केंद्र में रखकर बनाया गया एक विशेष निकाय होगा, जिसका उद्देश्य युवाओं की जरूरतों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर काम करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने X के पोस्ट में लिखा है कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार के युवाओं को बेहतर शिक्षा, ट्रेनिंग और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ‘बिहार युवा आयोग’ के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आयोग सरकार को सुझाव देने के साथ-साथ युवाओं के हित में नीतियां बनाने में सहयोग करेगा। इस आयोग का काम न केवल प्रशिक्षण और रोजगार तक सीमित रहेगा, बल्कि यह युवाओं की सामाजिक, शैक्षणिक और मानसिक स्थिति का भी मूल्यांकन करेगा और सरकार को समय-समय पर सुझाव देगा कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। आयोग की कार्य और जिम्मेदारियां बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के प्रमुख कार्य इस प्रकार होंगे: यह आयोग युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें एक सशक्त नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला: 35% आरक्षण कैबिनेट की इस बैठक में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया गया। अब से बिहार की मूल निवासी महिलाओं को सरकारी नौकरियों (Government Jobs) में 35% आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण सभी स्तरों और सभी विभागों की सीधी नियुक्तियों में लागू होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने कहा है कि बिहार की महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के लिए यह आरक्षण न केवल एक हक है, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है, जिसे राज्य सरकार निभा रही है। इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, नौकरी के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाना और उन्हें समाज में बराबरी का स्थान दिलाना है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उस मांग के जवाब में आया है, जिसमें यह कहा जा रहा था कि बिहार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ केवल राज्य की मूल निवासी महिलाओं को ही दिया जाए, न कि बाहरी राज्यों की महिला उम्मीदवारों को। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ क्या होगा असर? बिहार सरकार के ये दोनों फैसले बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) का गठन और महिलाओं को आरक्षण राज्य के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक विकास में नई जान फूंक सकते हैं। जहां एक ओर युवा आयोग उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर महिला आरक्षण से बेटियों को सरकारी नौकरियों में अधिक भागीदारी का मौका मिलेगा। राजनीति से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह आयोग अगर ठीक तरीके से काम करता है, तो यह बिहार के युवा टैलेंट को राज्य में ही रोकने और ब्रेन ड्रेन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। नीतीश कुमार की सरकार ने इस बार की कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में ऐसे निर्णय लिए हैं, जो सीधे तौर पर राज्य की युवा और महिला आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। ये फैसले केवल प्रशासनिक घोषणाएं नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम हैं। अब देखना यह होगा कि इन योजनाओं को ज़मीन पर कितनी तेज़ी और ईमानदारी से लागू किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Yuva Aayog #BiharCabinet #YouthCommission #WomenReservation #BiharNews #ReservationForWomen #NitishKumar #BiharGovernment

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Tejashwi Slams Nitish on Bihar Law and Order Crisis

Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar: बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को घेरा, कही यह बात

बिहार की राजधानी पटना में अपराधियों का तांडव है कि थमने का नाम नहीं ले रहा है। पटना के कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या के बाद बेख़ौफ़ अपराधियों रविवार (06 जुलाई, 2025) की रात एक और बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। दरअसल, खगौल में डीएवी स्कूल के पास अपराधियों ने अजीत कुमार नामक एक 50 वर्षीय व्यक्ति को गोलियों से भून (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) डाला। गोली लगते ही मौके पर अजीत कुमार की मौत हो गई। अजीत मुस्तफापुर के रहने वाले थे। जानकारी के मुताबिक अजीत कुमार प्राइवेट स्कूल का संचालन करते थे। बाइक सवार अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया है। गोली मारने के बाद अपराधी  फरार हो गए। हालांकि अपराधी कौन थे क्योंकि मारा इसके बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि घटना पटना के खगौल थाना क्षेत्र की है। बाइक सवार अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ है। हालांकि हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।  बिहार सीएम नीतीश कुमार ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए डीजीपी को अधिकारियों को पकड़ने के (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) निर्देश दिए हैं इस बीच राजधानी पटना में बिनजेसमैन गोपाल खेमका हत्याकांड के बाद विपक्ष पूरी तरह सरकार पर हमलावर हो गया है। हालाँकि बिहार सीएम नीतीश कुमार ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए डीजीपी को अधिकारियों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं। लेकिन आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को निशाने पर लिया (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) है। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री अचेत हैं और अपराधी मस्त है।” इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए हैं। यही नहीं, उनकी पार्टी के एक्स हैंडल से भी लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं। जिसमें लिखा है कि “रोज-रोज हत्याएं हो रही हैं, पुलिस वाले बाबाओं की सुरक्षा में लगे हैं। पटना के गांधी मैदान में लगे सनातन समागम पर आरजेडी का प्रहार है।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कहीं कोई किसी की सुनने वाला (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) नहीं है- तेजस्वी यादव बता दें कि बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था और हत्याओं को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने न सिर्फ नीतीश सरकार पर हमला बोला है बल्कि एक पोस्ट के जरिए सीएम और सरकार पर निशाना साधा है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “पटना में हत्या, नालंदा में डबल मर्डर! अपराधी मस्त, पुलिस पस्त। मुख्यमंत्री अचेत, अधिकारी जड़ और व्यवस्था निर्जीव। कहीं कोई किसी की सुनने वाला (Tejashwi Yadav Targets Nitish Over Law Crisis in Bihar) नहीं है।” इसके अलावा आरजेडी द्वारा किए गए पोस्ट में लिखा कि “बिहार में हत्या पर हत्या। रात में अपराधियों द्वारा कई हत्या। पुलिस बाबाओं की सुरक्षा में लीन है। पटना में हुए हत्याकांड पर राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि “भाजपा और नीतीश कुमार ने मिलकर बिहार को क्राइम कैपिटल बना दिया है। आज बिहार लूट और गोली के साए में चल रहा है। अपराध यहां पर न्यू नॉर्मल बन चुका है और सरकार पूरी तरह नाकाम है।” कहने की जरूरत नहीं, जिस तरह से बिहार में हत्याएं हो रहीं हैं उससे एक बार पुनः कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है। विपक्ष लगातार हमलावर है और आरोप लगा रहा है कि बिहार में महाजंगलराज है। सीएम नीतीश कुमार के पास गृह विभाग है जो उनसे संभल नहीं रहा। प्रदेश में एक के बाद एक बड़ी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में चुनावी वर्ष में कानून-व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav #TejashwiYadav #NitishKumar #BiharNews #LawAndOrder #BiharPolitics

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Uddhav Thackeray news

महाराष्ट्र में टूटेगा कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का गठबंधन या रहेंगे साथ! बिहार चुनाव में क्या पड़ेगा असर?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल के अंत तक होनी है। जिसको लेकर राजनीतिक पार्टियां जोड़-तोड़ और गठजोड़ में जुटी हैं। इन सबके बीच एक घटना ने इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) फिर से एक साथ आ गए हैं। दोनों ठाकरे बंधु बीते शनिवार को वर्ली में एक साथ मंच साझा किया, लेकिन इस भरत मिलाप से कांग्रेस (Congress) ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में फूट पड़ गया है? क्या कांग्रेस (Congress) महाराष्ट्र में अब भी शिवसेना यूबीटी साथ रहेगी?  एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं के मिलन के बाद कटाक्ष करते हुए महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को नए नाम से संबोधित किया। निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, ”यह एमवीए गठबंधन नहीं, बल्कि टीवीए यानी ठाकरे विकास आघाड़ी गठबंधन है।” संजय निरुपम ने कहा कि, महाराष्ट्र में कांग्रेस (Congress) को गठबंधन से घटाकर एक नया राजनीतिक गठबंधन बना है। पहले इस गठबंधन को एमवीए कहा जाता था यानी महा विकास अघाड़ी, लेकिन अब इसका नया नाम टीवीए रख देना चाहिए, क्योंकि यह ‘ठाकरे विकास अघाड़ी’ बन चुका है।  बिहारियों पर अत्याचार करने वालों के साथ कांग्रेस- केसी त्यागी  बिहार चुनावों (Bihar Assembly Elections) से ठीक पहले महाराष्ट्र में हुए इस गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ अभी भी गठबंधन में रहेगी या फर इनसे दूरी बना लेगी। इस नए गठबंधन पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने निशाना साधा था। चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में कहा था राज उद्धव अगर मराठी भाषा को लेकर सरकारी आदेश वापस लेने का श्रेय अकेले लेना चाहते हैं, तो हमें कोई परेशानी नहीं। लेकिन अगर वे राजनीतिक रूप से हमारे साथ आना चाहते हैं, तो इस पर सोचना पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हर्षवर्धन सपकाल ने भी कहा कि ठाकरे परिवार अगर साथ मिलकर सरकारी आदेश वापस लेने का जश्न मनाना चाहता हैं तो हमे कोई परेशानी नहीं, लेकिन भाइयों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन पर अलग मत है। वहीं दूसरी तरफ जेडीयू नेता केसी त्यागी ने भी इंडिया गठबंधन पर हमला होगा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता का सबसे ज्यादा उत्पीड़न मुंबई में होता है। वहां पर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी गठबंधन में हैं, लेकिन बिहारियों के शोषण का विरोध नहीं कर रही है। जो बताता है कि कांग्रेस किस तरह से बिहारियों पर अत्याचार पर मौन सहमति दे रही है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ उद्धव और राज के साथ दिखने पर बिहार में कांग्रेस को हो सकता है नुकसान  राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में जल्द ही चुनाव होने हैं, ऐसे में उद्धव और राज ठाकरे के बिहार विरोधी स्वभाव को देखते हुए कांग्रेस अब उद्धव ठाकरे के साथ रहने से परहेज कर सकती है। अगर कांग्रेस अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश करती है तो उसे हिंदी भाषी बिहार के आगामी चुनाव (Bihar Assembly Elections) में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बता दें कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) की राजनीति ही उत्तर भारतीयों का विरोध करने पर टिकी है। इनकी पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन उत्तर भारतीयों को पीटने को लेकर चर्चा में रहते हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी इस मामले में मनसे के पाले में ही खड़ी नजर आती है। महाराष्ट्र में इसी साल के अंत तक स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, ऐसे में यहां पर उत्तर भारतीयों का खिलाफ जहर उगलने की राजनीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #congress #shivsenaupta #uddhavthackeray #maharashtrapolitics #biharelections2025 #politicalnews #alliancebreak #indianpolitics

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Nishikant Dubey Sparks Controversy Over Urdu

Nishikant Dubey Sparks Row Over Urdu Language Remark: भाषा विवाद पर भड़के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे, कहा- “यदि हिम्मत है तो उर्दू भाषी लोगों को मार कर दिखाओ”

पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद जारी है। हिंदी भाषा थोपने के नाम पर जबरन परप्रांतियों को मारा जा रहा है। बढ़ते तनाव के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ओपन चैलेंज किया है। महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों पर हमले करने वालों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा “यदि हिम्मत है तो उर्दू भाषी लोगों को मार कर (Nishikant Dubey Sparks Row Over Urdu Language Remark) दिखाओ।” ध्यान देने वाली बात यह कि निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय में आया जब हिंदी विरोध में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एकजुट हो गए हैं। उन्होंने हिंदी भाषियों को मारने वालों से कहा, अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है? कौन कुत्ता कौन शेर खुद ही फैसला कर लो। अपनी इस बात को निशिकांत दुबे ने मराठी में भी पोस्ट किया है।” हालांकि यह पहली बार नहीं जब निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे को न उठाया हो। आपको बता दें कि इससे पहले भी उन्होंने महाराष्ट्र की भाषा को लेकर राजनीति का मुद्दा उठाया था और उसे कश्मीरी पंडितों की स्थिति से जोड़ते हुए एक्स पर लिखा कि “मुंबई में शिवसेना, मनसे के राज ठाकरे और एनसीपी के पवार साहब और कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं को भगाने वाले सलाउद्दीन और मौलाना मसूद अजहर और मुंबई में हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले दाऊद इब्राहिम इन सबमें क्या फर्क है? एक ने हिंदू न होने के कारण अत्याचार किया और दूसरे अब हिंदी बोलने के कारण अत्याचार कर रहे हैं?”  मंत्री नितेश राणे ने उर्दू बोलने वालों से हिंदी बुलवाने के लिए कहा (Nishikant Dubey Sparks Row Over Urdu Language Remark) था गौरतलब हो कि निशिकांत दुबे के अलावा भी इससे पहले भाजपा के दूसरे नेता भी हिंदी बोलने वालों पर हमला करने वालों को चुनौती दे चुके हैं। मंत्री नितेश राणे ने उर्दू बोलने वालों से हिंदी बुलवाने के लिए कहा (Nishikant Dubey Sparks Row Over Urdu Language Remark) था। यही नहीं उन्होंने ठाकरे ब्रदर्स पर हिंदू समाज को बांटने का भी आरोप लगाया था। गौरतलब हो कि “महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल महीने में हिंदी भाषा को लेकर एक फैसला लिया था, जिसमें उन्होंने कक्षा 1 से 5 तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा के रूप में हिन्दी को अनिवार्य कर दिया था। फडणवीस के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ। अंत में उन्होंने अपना यह फैसला वापस लेते हुए कहा कि “हिंदी तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं है। अगर कोई छात्र दुसरी भाषा लेना चाहता है तो वह ले सकता है।” बता दें कि पिछले दिनों मनसे पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा न बोलेने पर एक दुकानदार की पिटाई कर दी थी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ महाराष्ट्र में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, तो तीसरी भाषा के रूप में हिंदी ही क्यों होनी चाहिए- आदित्य ठाकरे बढ़ते तनाव के बीच शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे का भी बयान सामने आया (Nishikant Dubey Sparks Row Over Urdu Language Remark) है। आदित्य ने कहा, कि महाराष्ट्र में हिंदी बनाम मराठी भाषा की कोई बात ही नहीं है। यह मुद्दा सिर्फ सोशल मीडिया पर ही चल रहा है, महाराष्ट्र की जमीन पर ऐसा कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि “विवाद सिर्फ कक्षा 1 के छात्रों के तीन भाषाओं के बोझ को लेकर था और तीसरी भाषा हिंदी क्यों होनी चाहिए?” बता दें कि “आदित्य ठाकरे का कहना था कि “महाराष्ट्र में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, तो तीसरी भाषा के रूप में हिंदी ही क्यों होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि “हम अपनी मातृभाषा का अपमान नहीं सहेंगे।” बता दें कि आदित्य ठाकरे ने हिंदी भाषा विवाद को लेकर कहा कि “सोशल मीडिया और गोदी मीडिया मराठी बनाम हिंदी का मुद्दा फैला रहे हैं। महाराष्ट्र की जमीन पर तो ऐसा कोई मुद्दा है ही नहीं।” आदित्य ने स्पष्ट करते हुए कहा कि “विवाद सिर्फ कक्षा 1 के छात्रों के तीन भाषाओं के बोझ को लेकर था। तीसरी भाषा हिंदी ही क्यों होनी चाहिए? महाराष्ट्र में अनेक भाषाएं बोली जाती है, लेकिन हम अपने ही राज्य में अपनी मातृभाषा का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस बीच ठाकरे ने कहा कि “हम किसी भी भाषा को अपने ऊपर थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे।” भाषा को लेकर आदित्य ठाकरे ने कहा था कि “हम नहीं चाहते कि महाराष्ट्र या मराठी भाषा का अपमान हो। उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि “हम चाहते हैं कि हमारी मातृभाषा मराठी का अपमान न हो। कोई भी भाषा जबरन थोपी न जाए। उन्होंने कहा कि “हम नहीं चाहते कि कोई कानून अपने हाथ में ले। लेकिन जब इसका उल्टा होता है और मराठी या महाराष्ट्र का अपमान होता है तो मामला बिगड़ सकता है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #NishikantDubey #UrduControversy #BJPMP #LanguageRow #BreakingNews #Politics #UrduSpeakers

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Uddhav and Raj Thackeray reunite after 20 years

Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha: महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ

किसी ज़माने में एक दूसरे के धुर विरोधी रहे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मराठी भाषा के मुद्दे पर शनिवार को एक साथ एक ही मंच पर नजर आए। दोनों चचेरे भाइयों को एक साथ देख दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) है। गौरतलब हो कि दो दशक पहले ही राज ठाकरे ने अपनी अलग राह चुन ली थी। अब दोनों भाई एक ही मंच पर साथ आए तो उद्धव ने ऐलान कर दिया कि “दोनों के बीच दूरियां खत्म हो चुकी हैं और वह साथ रहने के लिए राज ठाकरे के साथ आए हैं।”उद्धव ने कहा, “कई वर्षों बाद मेरी और राज ठाकरे की मुलाकात मंच पर हुई है।” राज ने मुझे “सन्माननीय उद्धव ठाकरे” कहा, मैं भी कहता हूं, सन्माननीय राज ठाकरे। उनका कार्य भी बड़ा है। मेरे भाषण से ज्यादा अहम है हम दोनों का साथ आना। हम दोनों के बीच जो दूरियां थीं, वो अब खत्म हो चुकी हैं। हम एक साथ आए हैं, साथ में रहने के लिए।” भाजपा अफवाहों की फैक्ट्री है, हम असली मराठी बोलने वाले कट्टर हिंदू (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) हैं राज की तारीफ करते हुए उद्धव ने कहा कि “राज ठाकरे का काम सभी ने देखा (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) है। मराठी हिंदू भाइयों और बहनों, राज ठाकरे ने सारे मुद्दे बेहतर ढंग से रखे हैं और अब मुझे कुछ और कहने की जरूरत महसूस नहीं होती। हम साथ आए हैं, साथ रहने के लिए। भाजपा अफवाहों की फैक्ट्री है। हम असली मराठी बोलने वाले कट्टर हिंदू हैं। मराठी आदमी अगर आंदोलन कर रहा हो और आप उसे गुंडागिरी कह रहे हो, तो फिर हां, हम गुंडे हैं। संयुक्त महाराष्ट्र के आंदोलन में हमने मुंबई हासिल की है।” इस बीच एकनाथ शिंदे को आड़े हाथों लेते हुए उद्धव ने कहा, “आज कई तांत्रिक बिजी होंगे। नींबू काट रहे होंगे, भैंसा काट रहे होंगे। लेकिन इस काले जादू के खिलाफ हमारे बालासाहेब ठाकरे लड़े थे और हम उसी विरासत को आगे ले जाएंगे।”  आप (फडणवीस) सिर्फ नाम के मराठी हैं, आप असली मराठी हैं या नहीं, यह चेक करना (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) होगा वो यहीं नहीं रुके, फडणवीस को संबोधित करते हुए उद्धव ने कहा कि “आप सिर्फ नाम के मराठी हैं। आप असली मराठी हैं या नहीं, यह चेक करना होगा। हिंदुस्तान हमें मंजूर है, लेकिन हिंदी की जबरदस्ती हम सहन नहीं (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) करेंगे। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने मराठी भाषा को अनिवार्य किया था। सत्ता आती है, जाती है, लेकिन हमारी असली ताकत हमारी एकजुटता में होनी चाहिए। संकट आता है, तो हम साथ आते हैं, लेकिन संकट के बाद दूर चले जाते हैं। अब हमें हमेशा साथ रहना चाहिए।”  बीजेपी को लेकर उद्धव ने कहा कि “इन्होंने हमारा इस्तेमाल किया और फिर छोड़ दिया, लेकिन अब हम दोनों मिलकर तुम्हें फेंक देंगे। फडणवीस ने कहा है कि भाषा के नाम पर गुंडागर्दी सहन नहीं करेंगे। हां, हम गुंडे हैं, लेकिन हम भाषा के लिए लड़ेंगे। अगर इंसाफ नहीं मिलेगा, तो गुंडागर्दी भी करेंगे।” इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? अब तक हमने कुछ नहीं किया (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) है- राज ठाकरे  इस बीच राज ठाकरे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि “आपके पास विधानभवन में सत्ता है, लेकिन हमारे पास सड़कों की सत्ता है। आज महाराष्ट्र जब एकसाथ खड़ा हुआ, तो सरकार को यह दिखाई दिया होगा कि जब यह राज्य एकजुट होता है, तब क्या (Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha) होता है। कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए राज ठाकरे ने कहा “उस दिन मीरा रोड में एक व्यवसायी के साथ मारपीट हुई थी। क्या उसके माथे पर लिखा था कि वह गुजराती है? अब तक हमने कुछ नहीं किया है। उस आदमी को मराठी आनी चाहिए। बेवजह किसी को मत मारो, लेकिन अगर कोई ज्यादा नाटक करता है, तो उसके कान के नीचे जरूर बजाओ। और अगली बार जब किसी को पीटो, तो उसका वीडियो मत निकालो।” कहने की जरूरत नहीं, महाराष्ट्र की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि दोनों का साथ आना वोटो की मजबूरी है यह कुछ और? खैर, बीएमसी इलेक्शन नजदीक है। देखना दिलचस्प होगा कि दोनों एक ही पार्टी के झंडे के नीचे आते हैं या दोनों मिलकर अपनी अपनी पार्टी से चुनाव लड़ते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav & Raj Unite Against Hindi After 20 Years in Maha #UddhavThackeray #RajThackeray #HindiOpposition #MaharashtraPolitics #MarathiPride #ShivSena #MNS #PoliticalUnity

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Rahul Gandhi Slams Centre on US Tariff Policy Deadline

अमेरिकी टैरिफ नीति पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: क्या भारत झुकेगा ट्रंप की डेडलाइन के आगे?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर सीधा हमला किया है। इस बार उनके निशाने पर है भारत और अमेरिका (India and America) के बीच चल रहा टैरिफ विवाद। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Union Commerce Minister Piyush Goyal) पर आरोप लगाया कि वे अमेरिका के दबाव में आकर राष्ट्रीय हितों से समझौता कर सकते हैं। राहुल गांधी का ट्वीट और आरोप राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा है कि पीयूष गोयल (Piyush Goyal) चाहे जितना सीना ठोक लें, मेरी बात लिख लीजिए, मोदी ट्रंप की टैरिफ डेडलाइन (Tariff Deadline) के सामने चुपचाप झुक जाएंगे। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत और अमेरिका (India and America) के बीच व्यापार शुल्क (Tariff) को लेकर काफी तनाव बना हुआ है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण कर सकती है। क्या है टैरिफ विवाद? इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिका की वह नीति है जिसके तहत ट्रंप प्रशासन (Trump Government) ने लगभग 100 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाए थे, जिनमें भारत पर 26% तक का शुल्क शामिल था। अमेरिका ने हालांकि इन टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया था, लेकिन यह छूट अब 9 जुलाई को समाप्त होने जा रही है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच व्यापार डील को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी बाजार व्यवस्था को अधिक खुला करे और अमेरिकी उत्पादों (American Products) पर लगने वाले शुल्कों में कटौती करे। वहीं भारत की कोशिश है कि वह व्यापार संतुलन को बनाए रखते हुए अपने घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करे। सरकार का पक्ष: भारत किसी दबाव में नहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Commerce Minister Piyush Goyal) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत अपने व्यापार समझौते केवल अपनी शर्तों पर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, चिली और ओमान जैसे कई देशों के साथ वार्ता जारी है, लेकिन भारत तभी समझौता करेगा जब वह राष्ट्रहित में हो। पीयूष गोयल ने यह भी कहा है कि हम किसी डेडलाइन के दबाव में आकर फैसले नहीं करते। जब कोई डील देश के लिए लाभदायक होती है, तभी उसे मंजूरी दी जाती है। विपक्ष क्यों उठा रहा है सवाल? राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ही नहीं, बल्कि विपक्ष के अन्य नेता भी लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों दिख रही है। विपक्ष का कहना है कि जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर टैरिफ लगाया, तब भारत ने पर्याप्त रूप से आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दी। राहुल गांधी ने इसे सरकार की कमजोरी बताते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भरता के दावों के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्या होगा 9 जुलाई के बाद? अब जब टैरिफ में दी गई 90 दिनों की छूट 9 जुलाई को खत्म हो रही है, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत का अगला कदम क्या होगा। अगर अमेरिका दोबारा टैरिफ लागू करता है और भारत उसके सामने कोई रियायत देता है, तो विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मौका मिल जाएगा। वहीं, अगर भारत अमेरिकी दबाव को नकारता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है। भारत की रणनीति क्या हो सकती है? भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक ओर उसे अमेरिका जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ संबंध मजबूत रखने हैं, वहीं दूसरी ओर उसे घरेलू उद्योगों और किसान वर्ग के हितों की रक्षा भी करनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को ऐसे समझौते करने चाहिए जो दीर्घकालिक रणनीति और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए किए जाएं। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों ने एक बार फिर से टैरिफ नीति और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों (India-US trade relations) को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस दबाव से कैसे निपटती है। क्या वह अमेरिकी समयसीमा के आगे झुकती है या एक मजबूत और संतुलित निर्णय लेती है। आने वाले दिनों में इसका असर न सिर्फ भारत की विदेश नीति पर, बल्कि देश की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Narendra Modi #RahulGandhi #USTariffPolicy #TrumpDeadline #IndiaUSRelations #ModiGovt #TradePolicy #RahulVsModi

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Yogi govt revenue change,

Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP: योगी सरकार का बड़ा फैसला, लेखपाल नहीं बल्कि अब नायब तहसीलदार करेगा राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच

अपने निडर और निर्भीक फैसलों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व मामलों की जांच को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। फैसले के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब लेखपाल की रिपोर्ट ही अंतिम नहीं मानी (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन में आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल स्तर की जांच पर परिवर्तन किया है। इस फैंसले के बाद अब राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच लेखपाल नहीं बल्कि नायब तहसीलदार करेंगे। जानकारी के मुताबिक अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा। शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार अपनी रिपोर्ट देंगे। और नायब तहसीलदार की ही रिपोर्ट मानी जाएगी।  यूपी की जनता लेखपाल की मनमानी से (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) थी त्रस्त  दरअसल, बिगत कई महीनों से शिकायतें मिल रही थी कि लेखपाल स्तर की जांच में पारदर्शिता का अभाव है और कई बार पीड़ित पक्ष को सुना ही नहीं जाता। शिकायत यह भी थी (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) कि कई बार लेखपाल रसूखदारों और प्रधानों के झांसे में आकर शिकायतकर्ता को सुने बगैर मनमाने ढंग से रिपोर्ट बना देता था। कई बार शिकायत करने के बावजूद लेखपाल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे थे। ये हाल अमूमन यूपी के सभी जिलों में था। यूपी की जनता लेखपाल की मनमानी से त्रस्त थी। जनता इस कदर त्रस्त थी कि बार-बार मुख्यमंत्री कार्यालय में इस बाबत शिकायत की गई। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब केवल रिपोर्ट नहीं, सुनवाई के बाद होगा न्याय। कहने की जरूरत नहीं, सीएम ऑफिस, जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर हो गया है, इस वजह से अब किसी की रिपोर्ट से नहीं, सुनवाई से न्याय होगा। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर पर अंतिम निर्णय और समाधान होगा।  अब लेखपाल (लेखपाल) के बजाय नायब तहसीलदार इन शिकायतों की जांच (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) करेंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब लेखपाल (लेखपाल) के बजाय नायब तहसीलदार इन शिकायतों की जांच (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) करेंगे। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लिया गया है, ताकि राजस्व मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाई जा सके। जानकारी के लिए बता दें कि पहले, राजस्व संबंधी शिकायतों मसलन: वारासत, आय प्रमाण पत्र, जमीन विवाद, निवास प्रमाण पत्र आदि की प्रारंभिक जांच लेखपाल किया करते थे। लेकिन अब यह जिम्मेदारी नायब तहसीलदार को सौंपी दी गई है। अपर मुख्य सचिव (राजस्व) एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नायब तहसीलदार से नीचे का कोई अधिकारी राजस्व शिकायतों की जांच नहीं करेगा। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? लेखपालों पर अक्सर रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगते रहे (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) हैं दरअसल, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार को कम करना। न सिर्फ भ्रष्टाचार को कम करना है बल्कि शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता भी लाना है। बता दें कि लेखपालों पर अक्सर रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगते रहे (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या इस फैसले से भ्रष्टाचार पर नकेल कस सकेगी? क्या समय रहते सभी शिकायतों का निपटारा हो पाएगा?  इसके अलावा साथ ही बड़ा सवाल यह भी क्या नायब तहसीलदार के स्तर पर जांच होने से जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायतों का निपटारा अधिक विश्वसनीय हो सकेगा? देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय पर यह आदेश क्या रंग लाता है और जनता की शिकायतों का किस हद तक समाधान होता है। कहने की जरूरत नहीं, इस फैसले से लोगों में न्याय की उम्मीद जगी जरूर है। कम से कम लेखपालों की मनमानी से लोगों को निजात मिल जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Tehsildar #UPGovernment #NaibTehsildar #RevenueComplaints #YogiAdityanath #LekhpalUpdate #UttarPradeshNews #GovtDecision

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