Rahul Gandhi Accuses Govt No Space for Opposition in LS

Rahul Gandhi accusation: राहुल गांधी का बड़ा आरोप, ‘मुझे’ लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा,सदन में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है

यूपी के रायबरेली से कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर संसद में बोलने का मौका न देने का आरोप (Rahul Gandhi accusation) लगाया। लोकसभा में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कार्यवाही अलोकतांत्रिक तरीके से चल रही है। इस बीच उन्होंने दावा किया कि “प्रमुख मुद्दों को उठाने के उनके बार-बार अनुरोधों को नजरअंदाज किया गया। पुरे मामले पर उनका कहना है कि “लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष की जगह होती है, लेकिन इस सदन में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है।” इस पर आगे बोलते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि “एक परंपरा है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाता है। मैं जब भी खड़ा होता हूं तो मुझे बोलने नहीं दिया जाता। यहां हम जो कहना चाहते हैं, हमें कहने नहीं दिया जाता है। मैंने कुछ नहीं किया, मैं बिल्कुल शांति से बैठा था। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष की जगह होती है, लेकिन यहां विपक्ष की कोई जगह नहीं है। यहां सिर्फ सरकार की जगह है। उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ मेले के बारे में बोला, जिसमें मैं अपनी बात जोड़ना चाहता था। मैं बेरोजगारी के बारे में कुछ कहना चाहता था, लेकिन मुझे नहीं बोलने दिया गया।” राहुल गांधी ने बिल्कुल सही (Rahul Gandhi accusation) कहा है- शत्रुघ्न सिन्हा राहुल गांधी के बयान पर टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि “राहुल गांधी ने बिल्कुल सही (Rahul Gandhi accusation) कहा है। राहुल गांधी हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं, वे हम सभी के नेता हैं। ,ऐसा पहले भी हुआ है कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया और आज भी ऐसा ही हुआ है। यह बहुत निंदनीय बात है। मैं अध्यक्ष की बहुत इज्जत करता हूं, मगर मुझे नहीं पता कि उन पर क्या दबाव है? विपक्ष में एक से बढ़कर एक दमदार नेता हैं।” यही नहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी सरकार पर संसदीय परंपराओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। गौरव गोगोई ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “संसदीय परंपराएं सिखाती हैं कि सदन जितना सत्ता पक्ष का है, उतना ही विपक्ष का भी है। जब भी विपक्ष के नेता सदन में आते हैं और सदन में अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो उन्हें नियम दिखाकर लोगों के मुद्दे उठाने के उनके अधिकार से वंचित किया जाता है। अगर सरकार का कोई मंत्री, कोई बीजेपी सांसद, बस खड़ा हो जाता है, तो उनका माइक चालू हो जाता है और उन्हें बोलने का मौका मिल जाता है।” इसे भी पढ़ें:- क्या है अटल कैंटीन योजना? सांसदों से सदन की मर्यादा और शालीनता के उच्च मानदंडों को बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है- ओम बिरला  तो वहीं, लोकसभा में स्पीकर ने सांसदों के आचरण को लेकर नसीहत दी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आपसे सदन की मर्यादा और शालीनता के उच्च मानदंडों को बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।” मेरी जानकारी में ऐसे कई मामले हैं, जब सांसदों का आचरण सदन की मर्यादा और परंपराओं के उच्च मानदंडों को बनाए रखने के अनुरूप नहीं था। पिता, पुत्री, माता, पत्नी और पति इस सदन के सदस्य रहे हैं। इसलिए, इस संदर्भ में मैं विपक्ष के नेता से नियमों के अनुसार आचरण करने की अपेक्षा करता हूं। विपक्ष के नेता से विशेष रूप से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपना आचरण बनाए रखें।” दरअसल दो दिन पहले राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ अजीब अभिवादन किया (Rahul Gandhi accusation) था। इस पर स्पीकर की तीखी प्रक्रिया सामने आई थी।  Latest News in Hindi Today Hindi News  Rahul Gandhi accusation #RahulGandhi #LokSabha #IndianPolitics #OppositionVoice #Democracy #CongressParty #BJPVsCongress #ParliamentDebate #PoliticalCrisis #SpeakUp

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Atal Canteen Yojana Affordable Meals for Everyone

क्या है अटल कैंटीन योजना?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश कर दिया है। यह बजट खासतौर पर दिल्ली के बुनियादी ढांचे, प्रदूषण नियंत्रण, महिला सशक्तीकरण और गरीब वर्ग के कल्याण पर केंद्रित है। यह बजट खास इसलिए भी है क्योंकि बीजेपी के 27 साल बाद सत्ता में लौटने के बाद यह पहला बजट है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने इसमें कई बड़े ऐलान किए, जिनमें सबसे चर्चित योजना अटल कैंटीन योजना (Atal Canteen Scheme) है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को कम कीमत में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। अटल कैंटीन योजना (Atal Canteen Scheme) क्या है? दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित अटल कैंटीन योजना  (Atal Canteen Scheme), तमिलनाडु की अम्मा कैंटीन (Amma Canteen Scheme) और कर्नाटक की इंदिरा कैंटीन  (Indira Canteen) की तर्ज पर बनाई गई है। इस योजना के तहत दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में 100 अटल कैंटीन खोली जाएंगी। हर कैंटीन में 5 रुपये में गरम, ताजा और पौष्टिक भोजन (Healthy Food) उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गरीब और श्रमिक वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी। यह कैंटीन खासकर रिक्शा चालक, मजदूर, फुटपाथ पर काम करने वाले लोग और अन्य दिहाड़ी मजदूरों के लिए मददगार साबित होगी। किन लोगों को मिलेगा अटल कैंटीन योजना का लाभ? झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवार रिक्शा चालक, मजदूर और फुटपाथ पर काम करने वाले लोग दिहाड़ी मजदूर, सफाई कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग ऐसे लोग जो अत्यधिक महंगाई के कारण पौष्टिक भोजन नहीं ले पाते हैं योजना का उद्देश्य और सरकार की मंशा अटल कैंटीन योजना (Atal Canteen Scheme) का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। सरकार इस योजना के तहत स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर कुपोषण की समस्या को दूर करने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा, इससे दिल्ली में भोजन की बर्बादी को भी कम करने में मदद मिलेगी। बजट में अन्य प्रमुख घोषणाएं 1. यमुना की सफाई और पुनरुद्धार दिल्ली सरकार ने यमुना नदी की सफाई और पुनरुद्धार को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। इस परियोजना को अहमदाबाद के साबरमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट से प्रेरित बताया जा रहा है। इसके तहत यमुना नदी के किनारे सौंदर्यीकरण, प्रदूषण नियंत्रण और जल की शुद्धता बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। 2. दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। इस बजट में सरकार ने प्रदूषण को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं: इसे भी पढ़ें:-आगरा और पानीपत में बनेगा छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य ‘शिव स्मारक, CM फडणवीस ने बताया इस फैसले का कारण? 3. महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तीकरण योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सरकार ने नई योजनाओं की घोषणा की: 4. बुनियादी ढांचा विकास और परिवहन सुधार सरकार ने दिल्ली के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 28,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का ऐलान किया है। 5. व्यापार और उद्योग को बढ़ावा नई औद्योगिक नीति लागू होगी। दिल्ली सरकार (Delhi Government) का यह बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। गरीबों के लिए अटल कैंटीन (Atal Canteen), महिलाओं के लिए आर्थिक योजनाएं, पर्यावरण सुधार के लिए यमुना पुनरुद्धार और प्रदूषण नियंत्रण तथा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीति जैसे कई अहम फैसले इस बजट का हिस्सा हैं। बीजेपी सरकार (BJP Government) ने इस बजट के जरिए दिल्ली की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका ध्यान सिर्फ बुनियादी विकास ही नहीं बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग की समस्याओं के समाधान पर भी है। अब देखना यह होगा कि ये योजनाएं जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव डालती हैं और दिल्ली के विकास में कितना योगदान देती हैं। Latest News in Hindi Today Hindi News  Atal Canteen Scheme #AtalCanteenYojana #AffordableMeals #SubsidizedFood #GovtScheme #BudgetMeals #PublicWelfare #FoodForAll #IndiaGovt #CanteenScheme #CheapMeals

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Eknath Shinde & Kunal Kamra

हम व्यंग्य को समझते हैं, लेकिन इसकी एक सीमा होनी चाहिए: एकनाथ शिंदे 

महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कॉमेडियन कुणाल कामरा (Comedian Kunal Kamra) द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy CM Eknath Shinde) पर की गई टिप्पणी के बाद विवाद तेजी से बढ़ गया है। एक ओर उद्धव ठाकरे (Udhaw Thakrey) गुट कुणाल कामरा के समर्थन में खड़ा है, तो दूसरी ओर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने कामरा को समन जारी कर पेश होने के लिए कहा है। इस विवाद के बीच अब एकनाथ शिंदे का बयान भी सामने आ गया है, जिसमें उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बीबीसी मराठी के एक कॉन्क्लेव में इस मामले पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को है और हम व्यंग्य को समझते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। किसी के खिलाफ बयान देना ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह ‘सुपारी’ लेकर बोला गया लगे। हर किसी को अपनी भाषा और स्तर का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।” एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने आगे कहा कि कुणाल कामरा (Kunal Kamra) की टिप्पणी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि किसी एजेंडे के तहत दिया गया बयान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि वे काम करने वाले व्यक्ति हैं और अनावश्यक बहस में पड़ना नहीं चाहते। शिवसेना कार्यकर्ताओं की तोड़फोड़ जब शिंदे से पूछा गया कि क्या वे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई तोड़फोड़ का समर्थन करते हैं, तो उन्होंने इस पर संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं कभी भी तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करता, लेकिन जब कोई व्यक्ति आरोप लगाता है, तो उसे भी अपनी भाषा और स्तर का ध्यान रखना चाहिए। कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। मैं संवेदनशील और सहनशील हूं, लेकिन सभी कार्यकर्ता इतने सहनशील नहीं हो सकते।” इस बयान से स्पष्ट होता है कि शिंदे सीधे तौर पर तोड़फोड़ का समर्थन नहीं कर रहे, लेकिन इसे कार्यकर्ताओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। क्या कहा था कुणाल कामरा ने? कुणाल कामरा  (Kunal Kamra)  ने मुंबई के खार इलाके में स्थित हैबिटेट स्टूडियो में एक कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के गाने का संशोधित संस्करण प्रस्तुत कर एकनाथ शिंदे पर कटाक्ष किया था। इस प्रस्तुति में उन्होंने ‘गद्दार’ शब्द का उपयोग कर शिंदे पर तंज कसा, जिससे शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। इसके बाद रविवार रात बड़ी संख्या में शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ता होटल यूनिकॉन्टिनेंटल के बाहर इकट्ठा हुए, जहां क्लब स्थित था, और उन्होंने क्लब व होटल परिसर में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। एमआईडीसी थाने के एक अधिकारी ने बताया कि कामरा पर भारतीय दंड संहिता की धारा 353(1)(बी) (सार्वजनिक उत्पात संबंधी बयान) और 356(2) (मानहानि) समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसे भी पढ़ें: योगी सरकार के 8 साल: सेवा, सुरक्षा और सुशासन की मिसाल विवाद के राजनीतिक मायने इस पूरे विवाद का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर साफ दिख रहा है। एक तरफ उद्धव ठाकरे गुट इस मामले में कुणाल कामरा का समर्थन कर रहा है, तो दूसरी तरफ शिवसेना (शिंदे गुट) अपने नेता के बचाव में खड़ा है। यह विवाद न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है, बल्कि इसमें कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस भी तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इसे हास्य और व्यंग्य की स्वतंत्रता मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे लक्षित हमले के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी प्रक्रिया में इस मामले का क्या नतीजा निकलता है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) पर क्या प्रभाव पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Eknath Shende #ComedianKunalKamra #Shivsena #EknathShende #MahrashtraPolice

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Government Scheme Review Meeting

नय वित्त वर्ष में सरकार की योजनाओं की होगी समीक्षा, हो सकते हैं बड़े बदलाव!

1 अप्रैल से नय फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) की शुरुआत होने जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसमें कई बड़े बदलावकिये जा सकते हैं। केंद्र सरकार (Central Government) इस फाइनेंशियल ईयर में अपनी सभी कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इस समीक्षा के दौरान विभिन्न योजनाओं के खर्च की गुणवत्ता, फंड्स के सही उपयोग और उनकी प्रभावशीलता पर विचार विमर्श करेगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अनावश्यक योजनाओं को खत्म करना और सरकारी फंड्स (Government Funds) के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना होगा। हर पांच साल में होती है समीक्षा यह समीक्षा हर पांच साल में एक बार की जाती है, जिससे योजनाओं को उनकी उपयोगिता और आवश्यकता के आधार पर जारी रखने, संशोधित करने या समाप्त करने का निर्णय लिया जा सके। सरकार इस रिव्यू प्रक्रिया को नए वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप आगे बढ़ाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजनाओं में अनावश्यक खर्च को रोका जाए और अधिक प्रभावी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। किन बिंदुओं पर की जा सकती है समीक्षा? सरकार इस समीक्षा में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल करने जा रही है। इनमें निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा— समीक्षा प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग प्रमुख भूमिका निभाएगा और विभिन्न मंत्रालयों से फीडबैक लेकर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगा। वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार की 10 प्रमुख योजनाएं और उनका बजट अप्रैल में आ सकती है समीक्षा रिपोर्ट सरकार ने नीति आयोग को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह ऐसे क्षेत्रों की पहचान करे जहां राज्य सरकारों की योजनाएं केंद्र की योजनाओं के समान हैं। अप्रैल 2025 तक नीति आयोग की रिपोर्ट आने की संभावना है, जिसमें यह सिफारिशें शामिल होंगी कि- नीति आयोग की रिपोर्ट को वित्त आयोग के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) का बजट और महत्व केंद्र सरकार (Central Government) विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) को भी लागू कर रही है, जिनमें शामिल हैं— CSS बजट 2025-26 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने CSS के तहत 5.41 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया है।2024-25 में यह बजट 5.05 लाख करोड़ रुपये था, जिसे संशोधित कर 4.15 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार ने मार्च 2015 में मुख्यमंत्रियों के एक उप-समूह का गठन कर CSS योजनाओं की संख्या 130 से घटाकर 75 कर दी थी। यह फैसला योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया था। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के 8 साल: सेवा, सुरक्षा और सुशासन की मिसाल क्या होगा बदलाव? इस समीक्षा से सरकार बिना उपयोग वाली योजनाओं को बंद करेगी।कम प्रभावी योजनाओं को मिलाकर एक नई, प्रभावी योजना बनाई जा सकती है।सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि योजनाओं का क्रियान्वयन राज्यों में बेहतर तरीके से हो।फंड्स का सही उपयोग हो, जिससे लाभार्थियों को अधिक फायदा मिले। केंद्र सरकार (Central Government) का यह कदम सरकारी योजनाओं को बेहतर, प्रभावी और अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इस समीक्षा से बेहतर योजना प्रबंधन और फंड के सही उपयोग को सुनिश्चित किया जाता है, तो इससे करोड़ों लोगों को लाभ मिलेगा। अब देखना यह होगा कि अप्रैल में आने वाली नीति आयोग की रिपोर्ट में कौन-कौन सी योजनाओं पर बदलाव की सिफारिश की जाती है और वित्त आयोग इस पर क्या निर्णय लेता है! Latest News in Hindi Today Hindi news Government Scheme Review Meeting #GovernmentScheme #RivewMeeting #CentralGovernment #GovernmentScheme

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Yogi Govt's 8 Years Service, Security & Good Governance

योगी सरकार के 8 साल: सेवा, सुरक्षा और सुशासन की मिसाल

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के आठ साल पूरे हो चुके हैं। इस खास मौके पर सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के मार्गदर्शन को श्रेय देते हुए राज्य की 25 करोड़ जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यूपी की डबल इंजन सरकार ने सेवा, सुरक्षा और सुशासन के मंत्र को साकार करते हुए राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 8 साल पहले की स्थिति और बदलाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने बीते आठ वर्षों की तुलना करते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश अराजकता और पहचान के संकट से जूझ रहा था। अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर थे, जिसके कारण राज्य को ‘बीमारू’ की श्रेणी में रखा जाता था। महिलाएं और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे, वहीं किसानों की स्थिति बदहाल थी। लेकिन सरकार बदलते ही व्यापक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए गए और आज यूपी विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। सेवा, सुरक्षा और सुशासन का नया दौर योगी सरकार (Yogi Government) ने कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिसके परिणामस्वरूप अपराधों में भारी कमी आई। माफियाओं और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की गई, जिससे प्रदेश में निवेश और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बना। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर प्रदेश की जनता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) का मानना है कि उत्तर प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के समर्थन से सरकार ने विकास के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आज यूपी देश के विकास को एक नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पुलिस सुधार और कानून-व्यवस्था उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए योगी सरकार ने पुलिस व्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर दिया। सरकार ने देश का सबसे बड़ा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया और अब तक 2.16 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की है। इससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है। विकास उत्सव का आयोजन सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए 25 से 27 मार्च तक विकास उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सभी जिलों में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) ने कहा कि आठ साल पहले प्रदेश की अर्थव्यवस्था और अधोसंरचना बदहाल थी, लेकिन आज यूपी देश में विकास के मॉडल के रूप में पहचाना जाता है। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? सरकार बदलने से व्यापक सुधार सीएम योगी (CM Yogi) ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश वही है, प्रशासन वही है, लेकिन केवल सरकार बदलने से बड़े बदलाव संभव हुए हैं। योजनाओं के सही क्रियान्वयन और पारदर्शिता के कारण उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य की श्रेणी से निकलकर देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में शुमार हो चुका है। कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार कृषि क्षेत्र में भी यूपी ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 2017 से पहले जहां किसानों की आत्महत्या की खबरें आम थीं, वहीं अब प्रदेश कृषि उत्पादन (Agricultural Production) में अग्रणी बन चुका है। सरकार ने किसानों की कर्जमाफी से लेकर नई तकनीकों को अपनाने तक अनेक कदम उठाए, जिससे कृषि विकास दर 13.5% तक पहुंच गई और राज्य की जीडीपी में 28% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। योगी सरकार (Yogi Adityanath) के आठ सालों में उत्तर प्रदेश ने एक नई दिशा पकड़ी है। सेवा, सुरक्षा और सुशासन के साथ प्रदेश में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। अपराध पर नियंत्रण, किसानों का उत्थान, बुनियादी ढांचे का विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसी उपलब्धियां इस सरकार की कार्यशैली को दर्शाती हैं। आने वाले वर्षों में भी यह सरकार प्रदेश को और आगे ले जाने के लिए संकल्पित है। Latest News in Hindi Today Hindi news  CM Yogi Adityanath #YogiGovernment #UPDevelopment #GoodGovernance #8YearsOfYogi #UPProgress #SecurityFirst #YogiAdityanath #NewUttarPradesh #GrowthWithYogi #UPModel

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Bihar Liquor Ban Exposed Former Minister Raises Questions

Political expose Bihar: पूर्व मंत्री ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, कहा शराबबंदी के बावजूद बिहार पुलिस बिकवा रही है शराब

पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने एनडीए की बिहार सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए (political expose Bihar) हैं। दरअसल, भाजपा के वरिष्ठ नेता आरके सिंह ने रविवार को एक बार फिर चौंकाने वाला बयान दिया है। कहने की जरूरत नहीं पूर्व मंत्री के बयान के सामने आने के बाद एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उन्होंने पुलिस कर्मियों पर शराब बेचवाने का आरोप लगाते हुए बड़ा बयान दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबीक आरके सिंह ने बिहार सरकार और पुलिस पर शराब बेचवाने का आरोप लगाया है। यही नहीं, उन्होंने शराबबंदी कानून हटाने की मांग की और भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बड़हरा के सरैया बाजार स्थित भीखम दास मठिया के प्रांगण में आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि “शराबबंदी कानून को हटा देना चाहिए। इससे नौजवान बर्बाद हो रहे हैं।” इस बीच उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि “थानाध्यक्ष समेत पुलिस ही शराब बेचवा रही है।”  आरके सिंह ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर (political expose Bihar) लगाए थे गंभीर आरोप गौरतलब हो कि बीते दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप (political expose Bihar) लगाए थे। बता दें कि आरके सिंह चार दिनों के दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र में पहुंचे हैं। जहां कि उनके इस बयान के सामने आने के बाद बवाल मच गया है, तो वहीं चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। यह कोई पहली बात नहीं है जब आरके सिंह ने अपनी ही सरकार पर अंगुली उठाई हो। इससे पहले भी उन्होंने अपनी पार्टी बीजेपी के कुछ नेताओं पर साजिश के तहत उनको हराने का आरोप लगाया था। ऐसे में अब फिर से सरकार और सिस्टम पर सवाल खड़ा कर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है।  इसे भी पढ़ें:- क्या सच में ब्रिटिश नागरिक हैं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी? आज इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा सुनवाई जितना काम संसदीय क्षेत्र में किया है, उतना किसी सांसद ने नहीं किया और आगे भी कोई नहीं कर (political expose Bihar) पाएगा बता दें कि इस दौरान आरके सिंह जनसभा के दौरान पूरे फॉर्म में दिखे। इस बीच उन्होंने कहा कि “उन्होंने जितना काम संसदीय क्षेत्र में किया है, उतना किसी सांसद ने नहीं किया और आगे भी कोई नहीं कर (political expose Bihar) पाएगा।” आरके सिंह ने आगे कहा कि “उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार को कभी पनपने नहीं दिया। कारण यही जो इतना काम हो पाया। इस दरम्यान लोगों की समस्या सुनने के क्रम में सभा मंच से ही आरके सिंह ने मोबाइल पर एक अभियंता को हड़काते हुए कहा कि “सुनने में आ रहा है कि आप कुछ विधायकों के कहने पर टेंडर मैनेज कर रहे हैं। तो सुन लीजिए, हम जेल भेज देंगे।” यही नहीं, इस दौरान पूर्व मंत्री ने सरैया में महिला कॉलेज खोलने के लिए शिक्षा मंत्री से बात कर पहल करने को कहा।” इसके अलावा वर्तमान सांसद की कार्यशैली की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि “विकास कार्यों से अलग हो उन्हें जिताने में शामिल जनप्रतिनिधियों को पानी में डूब मरना चाहिए।”  Latest News in Hindi Today Hindi news  political expose Bihar #BiharPolitics #LiquorBan #BiharPolice #PoliticalExposé #BiharNews #Corruption #IllegalLiquor #FormerMinister #StateScandal #IndianPolitics

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Rahul Gandhi court case

Rahul Gandhi Citizenship Case: क्या सच में ब्रिटिश नागरिक हैं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी? आज इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा सुनवाई

24 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता (Rahul Gandhi Citizenship Case) के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली है। दायर याचिका में राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता होने का आरोप लगाया गया है। जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख पेश करने की अपेक्षा की है। गौरतलब हो कि इस मामले में कोर्ट ने केंद्र को 19 दिसंबर को निर्देश दिया था कि वह अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा 24 मार्च तक पेश करें। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर दिया था। बता दें कि आज क्रेंद इस मामले पर जवाब दाखिल करने वाला है। ऐसे में यदि राहुल गांधी दो पासपोर्ट मामले में दोषी पाए जाते, हैं तो उनके खिलाफ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 (2) के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिर उनके खिलाफ नागरिकता छिपाने और गलत जानकारी देने का केस दर्ज किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह कि नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी व्यक्ति को 5 साल की सजा हो सकती है। 50,000 रुपये का जुर्माना या सजा दोनों लगाया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय नागरिकता भी खारिज की जा सकती है। वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case की थी याचिका  बता दें कि 1 जुलाई 2024 को कर्नाटक के बीजेपी के सदस्य और वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case) की थी। दायर इस याचिका में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता के आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, याचिकाकर्ता ने ब्रिटिश सरकार के 2022 के गोपनीय मेल का भी हवाला भी दिया था। इसके अलावा विग्नेश ने भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9 (2) के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की थी। शिशिर ने दलील देते हुए कहा था कि राहुल गांधी की संसद की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। उनकी इस दलील के पीछे की वजह यह ये कि भारतीय नागरिकता रखने वाला व्यक्ति ही लोकसभा चुनाव लड़ सकता है। इसे भी पढ़ें:- कठुआ में 5 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने घेरा, एनकाउंटर जारी, गोली लगने से एक बच्ची घायल  कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) में की गई थी सीबीआई जांच की मांग  प्राप्त जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) की भी सीबीआई जांच की मांग की थी। दरअसल, याचिका इस दावे के आधार पर दायर की गई थी कि राहुल गांधी भारत के नागरिक हैं या ब्रिटेन के नागरिक हैं? यदि वो ब्रिटिश नागरिक हैं तो वह संविधान के अनुच्छेद 84 (ए) के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। 2023 जुलाई में कोर्ट ने राहुल गांधी के सांसद के रूप में चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को याचिकाकर्ता द्वारा वापस लेने के बाद खारिज कर दिया था। यही नहीं, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि “वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच में दायर याचिकाओं पर स्पष्टता मिलने के बाद ही मामले की सुनवाई करेगी।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi Citizenship Case #RahulGandhi #RahulGandhiCitizenship #Congress #BritishCitizenship #IndianPolitics #AllahabadHighCourt #RahulCase #PoliticalNews #IndiaNews #BreakingNews

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Aurangzeb Tomb Protests

Nagpur riots 2025: रामनवमी थी निशाने पर, अब नागपुर गरजेगा देवा भाउ का बुलडोजर, दंगाइयों से की जाएगी भरपाई

17 मार्च को हुई हिंसा नागपुर में भड़की हिंसा (Nagpur riots 2025) में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ रहा। ऐसे में पुलिस ने सभी सोशल मीडिया अकाउंट को छानना और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बीच पुलिस के हाथ कई सबूत लगे हैं। इन सबूतों से ये साबित होता है कि ये हिंसा केवल नागपुर या महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि बाहर के लोग भी इसमें शामिल है। दरअसल, मामले की जांच में नागपुर साइबर पुलिस को जांच में कुछ ऐसे इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पोस्ट मिला हैं, जिसमें हिंदुस्तान के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में लिखा गया है। कुछ ऐसे भड़काऊ भाषण के पोस्ट और वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें भड़काऊ पोस्ट लिखा है। पोस्ट के मुताबिक लिखा है कि 15 मिनट दो फिर देखो हम क्या कर सकते हैं, मुसलमान जितनी जंग लड़े हैं सब जीते हैं, औरंगजेब जनाब पहले भी जिंदा थे, आज भी जिंदा है और कायामत तक जिंदा रहेंगे, 6 अप्रैल को रामनवमी है, हिंदूओं को रामनवमी तक के लिए अस्पताल भेजो जैसी भाषा लिखी गई है। यही नहीं, जांच में ये भी पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी फहीम खान ने हिन्दू धर्म के खिलाफ अपनी इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट में कई आपत्तिजनक पोस्ट पहले भी किया था।  हिंसा (Nagpur riots 2025) के बाद पहली बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहुंचे नागपुर  बता दें कि हिंसा (Nagpur riots 2025) के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहली बार नागपुर पहुंचे थे। शनिवार को उन्होंने वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया। बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नागपुर हिंसा को लेकर कहा कि “झूठा प्रचार किया गया कि कुरान की आयत जलाई गई है। झूठी अफवाह के चलते बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई। सीएम ने आगे कहा कि “हिंसा में शामिल लोगों को जब तक हम सबक नहीं सिखा देते, तब तक हम लोग शांत नहीं बैठेंगे। खासकर पुलिसकर्मियों पर जिन लोगों ने हमला किया है, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।” गौर करने वाली बात यह कि “इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा में हुई नुकसान की भरपाई दंगाइयों से की जाएगी। उनकी प्रोप्रटी भी जब्त की जाएगी।” बुलडोजर एक्शन को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “जहां पर चलाने की आवश्यकता होगी, वहां पर बुलडोजर चलाया जाएगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”  इसे भी पढ़ें:- जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार  हिंसा (Nagpur riots 2025) वाले दिन औरंगजेब की कब्र की प्रतिकृति को सुबह जलाया गया था बता दें कि हिंसा (Nagpur riots 2025) वाले दिन औरंगजेब की कब्र की प्रतिकृति को सुबह जलाया गया था। इस पर एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन इस पर कुरान की आयत लिखी होने की अफवाह फैलने के बाद लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने पथराव और आगजनी की घटना को अंजाम दिया। हिंसा दौरान पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई की। अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दंगा करने वालों की शिनाख्त कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अब तक 105 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पूरे मामले पर सीएम ने कहा कि “सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी सह-आरोपी बनाया जाएगा।” गौरतलब हो कि अब तक 68 सोशल मीडिया पोस्ट की पहचान कर उन्हें हटाया जा चुका है। महत्वपूर्ण बात यह कि नागपुर शहर सीएम फडणवीस का गृह नगर होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी है। ऐसे में नागपुर में हिंसा होना बड़ी बात है। ध्यान देने वाली बात यह कि घटना के बाद छठे दिन बाद भी शहर के 9 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Nagpur riots 2025 #NagpurRiots2025​ #AurangzebTombProtests​ #AurangzebTombProtests​ #CommunalViolence​ #CurfewInNagpur​ #PeaceInNagpur​ #NagpurClashes​ #ReligiousHarmony​#SocialMediaResponsibility​ #CommunityLeadersUnite​

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Ajit Pawar on Muslims

Ajit Pawar on Muslims: जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार 

महाराष्ट्र में नागपुर हिंसा को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। दरअसल, पूरा का पूरा विवाद महायुति सरकार द्वारा छत्रपति संभाजीनगर से औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग के बीच शुरू हुआ था। नागपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा राज्य सरकार की आलोचना जारी रहने के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने मुंबई में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव और एकता पर जोर देते हए कहा कि “होली, गुड़ी पड़वा और ईद जैसे त्यौहार एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि एकता ही देश की असली ताकत है।” यही नहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने मुसलमानों को (Ajit Pawar on Muslims) आश्वासन देते हुए कहा कि “आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा, तथा कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, फिर वो चाहे कोई भी हो.. उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं किया जाएगा।” ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं- अजित पवार  अजित पवार यही नहीं रुके, (Ajit Pawar on Muslims) उन्होंने आगे कहा कि “जो कोई भी दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करेगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बीआर अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य जैसे कई महान नेताओं ने सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर सामाजिक प्रगति का मार्ग दिखाया है। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है। भारत एकता और विविधता का प्रतीक है। हमने अभी होली मनाई है और अब गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है। ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं। हमारी असली ताकत एकता में है।” बता दें कि रमजान इस्लामी धर्म का सबसे पवित्र महीना है। यह हिजरी (इस्लामी चंद्र कैलेंडर) के नौवें महीने में आता है। इस पवित्र अवधि के दौरान, मुसलमान भोर से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। #WATCH | Mumbai | Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, at an Iftar party hosted by him, says, "…India is a symbol of unity in diversity… We should not fall into the trap of any divisive forces. We have just celebrated Holi, Gudi Padwa and Eid are coming – all these festivals… pic.twitter.com/5s7hMhdGmb — ANI (@ANI) March 22, 2025 इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से  किया गया था इफ्तारी का आयोजन बता दें कि मुसलमानों के पाक माह रमज़ान पर एनसीपी अजित पवार (Ajit Pawar on Muslims) गुट की तरफ से मुंबई के इस्लाम जिम खाना में इफ्तारी का आयोजन किया गया था। इस मौके पर अजित पवार, छगन भुजबल, सना मलिक, प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, नवाब मलिक सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इसके अलावा भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी मौजूद थे। इस दौरान अजित पवार ने यह भी कहा कि “रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। और जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने की प्रेरणा देता है।” बता दें कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जलाये जाने की अफवाह के बाद मध्य नागपुर में सोमवार को तनाव उत्पन्न हो गया और पुलिस पर पथराव किया गया। इस दौरान चार लोग घायल हो गए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ajit Pawar on Muslims #AjitPawar #MuslimsInIndia #MaharashtraPolitics #AjitPawarStatement #IndianPolitics #MuslimRights #NCP #PoliticalNews #SecularIndia #MaharashtraNews

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BJP MLA Suspended

BJP MLA Suspended: कर्नाटक विधानसभा से BJP के 18 विधायक क्यों किये गए निलंबित?

कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) से BJP के 18 विधायकों (BJP MLA Suspended) को निलंबित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष, यूटी खादर ने शुक्रवार को हनी ट्रैप (Honey Trap) मामलों के संबंध में हंगामा करने और सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के कारण इन विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने का फैसला लिया है। हनी ट्रैप (Honey Trap) मामले की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की मांग विपक्षी नेताओं ने कर्नाटक सरकार से कहा था कि राज्य के एक मंत्री और अन्य राजनेताओं से जुड़े कथित ‘हनी ट्रैप’ मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। शुक्रवार को बीजेपी विधायकों (BJP MLA) ने विधानसभा में कागज फाड़कर और वेल के पास आकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। मंत्री एचके पाटिल द्वारा विधेयक पेश कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल (HK Patil) ने इस मामले में कार्यवाही को बाधित करने के लिए 18 बीजेपी विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने वाला एक विधेयक विधानसभा में पेश किया। यह विधेयक पारित कर दिया गया और निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई। कर्नाटक का ‘हनी ट्रैप’ मामला कर्नाटक में हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले (Honey Trap Case) ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी। यह मामला तब सामने आया जब कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना ने विधानसभा में खुलासा किया कि वह खुद हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार होने से बच गए, लेकिन राज्य के 48 अन्य नेताओं, विधायकों, और यहां तक कि केंद्रीय नेताओं के भी इस जाल में फंसने की संभावना जताई। इस खुलासे ने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी को एक गंभीर विवाद में घसीट लिया है। सदन में बीजेपी विधायक द्वारा मामले का उठाना 20 मार्च 2025 को कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) में बजट सत्र (Budget Session) के दौरान बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हनी ट्रैप की घटनाएं बढ़ रही हैं और सहकारिता मंत्री राजन्ना को भी निशाना बनाया। इसके जवाब में मंत्री राजन्ना ने स्वीकार किया कि उनके खिलाफ हनी ट्रैप की कोशिश की गई थी, और यह समस्या केवल उनके तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक अब पेन ड्राइव और सीडी का कारखाना बन चुका है। मेरे पास जानकारी है कि 48 लोग, जिनमें विधायक, केंद्रीय नेता, और जज भी शामिल हैं, इस जाल में फंस चुके हैं।” इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग मंत्री जारकीहोली द्वारा हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश का स्वीकार करना इसके बाद राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “यह सच है कि एक मंत्री को हनी ट्रैप (Honey Trap) में फंसाने की कोशिश की गई थी। यह दो बार हुआ, लेकिन दोनों बार यह प्रयास असफल रहे। कर्नाटक में हनी ट्रैप कोई नई बात नहीं है, यह पिछले 20 सालों से चल रहा है। कुछ लोग इसे राजनीति में निवेश के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।” जारकीहोली ने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित मंत्री को पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए ताकि इस मामले के पीछे के लोग पकड़े जा सकें। कर्नाटक का यह हनी ट्रैप मामला (Honey Trap Case) राजनीति में नया मोड़ ले चुका है और राज्य की सियासी सरगर्मियों को और तेज कर दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। Latest News in Hindi Today Hindi news BJP MLAs Suspended #BJPMLA #HoneyTrapCase #KarnatakaAssembly

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