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Eknath Shinde controversy

एकनाथ शिंदे के ‘जय गुजरात’ के नारे पर विपक्ष ने मचाया बवाल, मांगा इस्तीफा, बचाव में उतरे सीएम फडणवीस, शिंदे ने भी दी सफाई

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) द्वारा जय महाराष्ट्र के साथ जय गुजरात का नारा देने से राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने शिंदे के इस नारे को मराठी अस्मिता पर हमला बताते हुए माफी की है। विपक्ष के इस हमले के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) भी एकनाथ शिंदे के बचाव में उतर आए और सफाई देते हुए कहा कि मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी।  बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बीते शुक्रवार को पुणे में जयराज स्पोर्ट्स एंड कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और अजित पवार भी मौजूद थे। कार्यक्रम में भाषण के दौरान डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंच से ही ‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात’ का नारा लगाया। शिंदे के इसी नारे का विपक्षी दलों ने विरोध किया है।  हर्षवर्धन सपकाल ने एकनाथ शिंद से मांगा इस्तीफा  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan Sapkal) ने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के इस बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जय गुजरात’ का नारा सिर्फ चाटुकारिता नहीं है, बल्कि हर गौरवान्वित महाराष्ट्रवासी का अपमान है। मराठी मानुष के साथ इस ‘विश्वासघात’ के लिए शिंदे को इस्तीफा देना चाहिए। सपकाल ने यह भी कहा कि यह बहुत शर्म की बात है कि उपमुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठा व्यक्ति ‘जय महाराष्ट्र’ की जगह ‘जय गुजरात’ का नारा लगा रहा है। यह चाटुकारिता और सियासी गुलामी का प्रतीक है।  मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि ‘जय गुजरात’ बोलने से कमजोर पड़ जाए  विपक्ष के इस आलोचना के बाद एकनाथ शिंदे के समर्थन में उतरते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा, ” विपक्ष शायद भूल गया कि चिकोड़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते हुए शरद पवार ने भी ‘जय महाराष्ट्र, जय कर्नाटक’ का नारा लगाया था, तो क्या उन्हें कर्नाटक ज्यादा पसंद है?” फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विपक्ष की सोच को संकुचित बताते हुए कहा कि हमारी मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी। मराठी मानुष की सोच बहुत विशाल है, विपक्ष उसे सीमित नहीं कर सकता है। सबसे पहले हम सभी भारतीय हैं और हमें महाराष्ट्र पर गर्व है। इसका यह मतलब नहीं होना चाहिए कि हम दूसरे राज्यों का अपमान करें। ‘एक भारत’ का विचार ही हमारी एकता और संस्कृति की मजबूती है और इस विभाजित करने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा। सीएम फडणवीस ने इस दौरान भाषा विवाद पर सख्त लहजे में कहा, “मराठी भाषा पर हर किसी को  गर्व करना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा करना स्वीकार्य नहीं है। मराठी न बोलने पर लोगों से मारपीट कर कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया नारा- शिंदे एकनाथ शिंदे ने भी अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि, ”उन्होंने यह नारा कार्यक्रम में मौजूद गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया था। जिस भव्य खेल परिसर का उद्घाटना हुआ उसके  निर्माण में गुजराती लोगों का भी योगदार है। हमारे राज्य में मराठी और गुजराती लोग मिलकर एकजुटता के साथ रहते हैं। इसीलिए मैंने भाषण के दौरान ‘जय हिंद’, ‘जय महाराष्ट्र’ और ‘जय गुजरात’ का नारा लगाया। ‘जय हिंद’ जहां हमारे देश की शान है, तो वहीं ‘जय महाराष्ट्र’ हमारे राज्य का गर्व है।  ‘जय गुजरात’ का नारा इसलिए लगाया क्योंकि गुजराती समाज को उनके योगदान के लिए सम्मान देना चाहता था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #EknathShinde #JaiGujarat #PoliticalControversy #MaharashtraPolitics #DevendraFadnavis #OppositionDemand #ShindeClarification

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BJP and Terrorists Alike

भाजपा और आतंकवादी एक, दोनों धर्म पूछकर हमला करते हैं…कांवड़ यात्रा पर सपा नेता के बयाद से यूपी के सियासत में उबाल 

सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन इस यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में में सियासी पारा अभी से हाई हो गया है। कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाली दुकान मालिकों के नाम और उनकी पहचान सार्वजनिक करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश जारी होने के बाद से वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा (BJP) आमने-सामने हैं और एक दूसरे पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने तो भाजपा (BJP) पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा (BJP) नेताओं की तुलना आतंकवादियों से कर दी। जिसके बाद विवाद और बढ़ गया है।   सपा (SP) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने राज्य की योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के रास्ते में आने वाले दुकानदारों से उनकी जाति और धर्म पूछना नजायज है। यह सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भाजपा और आतंकवादियों में कोई अंतर नहीं है। ये दोनों धर्म पूछकर आम जनता पर हमला करते हैं। सपा विधायक के इस विवादित बयान ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। सपा विधायक के बयान पर भाजपा ने भी आक्रामक जवाब दिया है।  भाजपा ने राक्षस से की सपा की तुलना   भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी (Rakesh Tripathi) ने कहा कि सपा के नेता मजहबी तुष्टीकरण से खास वर्ग को साधने के लिए जानबूझकर इस तरह के बयान दे रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को सनातन विरोधी बयान देने का निर्देश दे रखा है कि वो हिन्दुओं की आस्था पर हमला करें। जिससे पवित्र कांवड़ यात्रा में विघ्न डाला जा सके। यह उसी तरह का कार्य है, जैसे सतयुग में राक्षस् हमारे संतों के हवन-यज्ञ में विघ्न डालते थे। सपा को सनातन विरोधी यह प्रयास महंगा पड़ेगा। सरकार ने बताया क्यों नेम प्लेट जरूरी  विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने भी पूरे मामले पर स्थिति साफ की है। राज्य सरकार ने बयान जारी कर बताया कि दुकानों पर उनके मालिक का नेम प्लेट लगाने का निर्देश सिर्फ कांवड़ यात्रा के लिए ही नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने, ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिए गया है। इस मामले में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि हर धर्म के त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराना हमारी सरकार का लक्ष्य है। जो व्यवस्था बनाई गई है वह किसी खास धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है। विपक्ष इसका  अनावश्यक विरोध कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? कांग्रेस भी भाजपा पर हुई हमलावर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Ravidas Mehrotra) ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या दुकानदारों द्वारा लाइसेंस नंबर दिखाना पर्याप्त नहीं है? क्या नेम प्लेट लगाने की अनिवार्यता होनी चाहिए? यह भाजपा द्वारा एक खास धर्म के लोगों पर निशाना साधने का प्रयास है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे राज्य की साझी विरासत पर हमला बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार राज्य की शांति को भंग करना चाहती है, इसीलिए इस तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं। भाजपा के इन हरकतों को राज्य की जनता अच्छी तरह से पहचानती है। इसी तरह मौलाना तौकीर रजा ने भी कहा कि जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं, तब खुले में मांस बिक्री का मैं भी विरोध करता हूं, लेकिन नेम प्लेट का उद्देश्य क्या है? यह राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ravidas Mehrotra #BJP #SPLeader #KanwarYatra #UPPolitics #ReligiousPolitics #Controversy #BreakingNews #IndiaNews

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Congress Sanitary Pad Scheme Sparks Controversy in Bihar Polls

बिहार चुनाव में महिलाओं को साधने की कोशिश: कांग्रेस की ‘सैनिटरी पैड स्कीम’ पर उठा विवाद

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी वादों और अभियानों के ज़रिए जनता को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने राज्य की महिलाओं को साधने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। पार्टी ने माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) के तहत महिलाओं के बीच 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना बनाई है। हालांकि यह स्कीम अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है और विपक्ष खासतौर से बीजेपी (BJP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महिलाओं को जागरूक करने का दावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार (Rajesh Kumar, State Congress President) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश की 5 लाख महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Pads) पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि महिला कांग्रेस की अगुवाई में वितरित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, जो आज भी एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। विवाद की वजह: पैकेट पर राहुल गांधी की तस्वीर इस सामाजिक अभियान पर विवाद तब शुरू हुआ जब वितरित किए जाने वाले सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर छपी हुई पाई (Rahul Gandhi photo on Sanitary Pads) गई। इससे इस योजना की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठने लगे। बीजेपी (BJP) ने इसे प्रचार का एक तरीका बताया है और कांग्रेस (Congress) पर चुनावी लाभ के लिए महिलाओं की समस्याओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने मीडिया से कहा कि यह कांग्रेस की चापलूसी की पराकाष्ठा और मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तस्वीर सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर लगाकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने नेताओं को कहां स्थापित करना चाहती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कांग्रेस केवल चुनावी स्टंट कर रही है। ‘माई बहिन मान योजना’ क्या है? कांग्रेस पार्टी की ‘माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) एक ऐसी सामाजिक और चुनावी पहल है, जिसके तहत पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है। यह राशि विशेष रूप से वंचित, ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को दी जाएगी। इस योजना को पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया है और कहा है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो इस योजना को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक आवश्यकता भारत जैसे विकासशील देश में विशेषकर बिहार जैसे राज्य में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता अब भी एक वर्जित विषय बना हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार बिहार में केवल 30% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का नियमित इस्तेमाल करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा और भी कम है। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक पार्टी महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने का कार्य करती है, तो वह निश्चित रूप से एक ज़रूरी सामाजिक कदम कहा जा सकता है, बशर्ते इसमें राजनीतिक लाभ की मंशा हावी न हो। क्या है विशेषज्ञों की राय? स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसे राजनीतिक प्रचार के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना निंदनीय है।  कांग्रेस की 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल हो सकती थी, यदि इसे केवल महिलाओं की मदद और जागरूकता तक सीमित रखा जाता। लेकिन राजनीतिक छवि निर्माण के प्रयासों ने इस योजना को विवादों में ला खड़ा किया है। यह स्पष्ट है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में महिलाएं एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरी हैं और सभी पार्टियां उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। सवाल यह नहीं है कि सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटे जाएं या नहीं, सवाल यह है कि क्या महिलाओं की गरिमा को बनाए रखते हुए, उन्हें राजनीति से ऊपर रखकर सहायता प्रदान की जाएगी? चुनावी लाभ से परे जाकर महिलाओं के लिए सोचने का वक्त अब आ गया है। Latest News in Hindi Today Hindi Rahul Gandhi Sanitary Pads #BiharElections2025 #CongressScheme #SanitaryPadControversy #WomenVoters #PoliticalDebate

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CM Yogi Adityanath approves 'UPCOS'

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती के लिए नया नियम: मुख्यमंत्री योगी ने दिया ‘UPCOS’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों और उनके हितों की रक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (Universal Pharma-Coding System {UPCOS}) के गठन को मंजूरी दे दी गई है। यह निगम कंपनी एक्ट के तहत गठित किया जाएगा और इसका उद्देश्य न केवल आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता लाना है, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। क्या है यूपीकॉस (UPCOS)? UPCOS यानी Uttar Pradesh Corporation for Outsourced Services राज्य का एक नया सरकारी निकाय होगा, जो अब राज्य में होने वाली सभी आउटसोर्स भर्तियों की निगरानी और काम-काज की देखभाल करेगा। यह निगम कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टरकिया जाएगा और एक स्वतंत्र नियामक संस्था (Independent Regulatory Body) की तरह काम करेगा। इसकी स्थापना से पहले आउटसोर्स भर्तियाँ निजी एजेंसियों के माध्यम से की जाती थीं, जिन पर कई बार पारदर्शिता और शोषण के आरोप लगे हैं। भर्ती प्रक्रिया में आएगा बदलाव अब यूपी में आउटसोर्स के ज़रिए की जाने वाली सभी नियुक्तियाँ UPCOS के माध्यम से ही होंगी। इसमें खास बात यह है कि भर्ती में SC, ST, OBC, EWS, महिलाओं, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं तलाकशुदा महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े और हाशिए पर खड़े वर्गों को समान अवसर मिल सके। मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष UPCOS की प्रशासनिक संरचना भी काफी स्पष्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगम के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव होंगे। इसके साथ ही एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और एक डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी। राज्य स्तर पर ही नहीं, मंडल और जिला स्तर पर भी भर्ती समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया सुचारु रूप से हो सके। भर्ती के लिए निजी एजेंसियों का चयन GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के जरिए किया जाएगा और ये एजेंसियाँ 3 साल की अवधि के लिए नियुक्त की जाएंगी। भर्ती में अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। UPCOS की एक खास भूमिका यह भी होगी कि यह रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि यह निगम केवल भर्ती ही नहीं करेगा, बल्कि भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखेगा। यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो निगम उन्हें ब्लैकलिस्ट, डिबार या दंडित कर सकेगा। इस कदम से एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों के साथ शोषण या भेदभाव की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमित पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी, ताकि सरकारी ढांचे की स्थिरता बनी रहे और नियमित नियुक्तियाँ बाधित न हों। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्यों जरूरी था UPCOS का गठन? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने बताया कि पिछले काफी समय से आउटसोर्स कर्मियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। वेतन कटौती, EPF/ESI का लाभ न मिलना, ओवरटाइम के बावजूद भुगतान न होना और अनुचित कार्य-घंटों जैसी समस्याएं आम थीं। इन समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से भर्ती एजेंसियों की लापरवाही और मनमानी थी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया कि एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जो कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।  सामाजिक न्याय की दिशा में कदम UPCOS सामाजिक न्याय की दिशा में एक बेहतर निर्णय माना जा रहा है । इसमें वंचित वर्गों को न केवल भागीदारी दी गई है, बल्कि उन्हें प्राथमिकता भी दी गई है। इस तरह राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास और अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए। उत्तर प्रदेश में UPCOS का गठन आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल आउटसोर्स कर्मियों को अधिकार मिलेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली में अनुशासन और स्थिरता भी आएगी। यह योजना सामाजिक समानताऔर श्रमिक हितों की रक्षा का एक संतुलित मॉडल पेश करती है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Yogi Adityanath #UPCOS #YogiAdityanath #UttarPradeshJobs #OutsourcingRecruitment #UPJobs #UPNews #GovernmentJobs

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Owaisi's Absence

Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?: क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी?

साल के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं। चुनाव भले ही साल के अंत में होने हैं लेकिन सरगर्मियां अभी से गई हैं। सभी राजनीतिक दल अभी से अपना-अपना नफा नुकसान देखने लगे हैं। इसी कड़ी में हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पैठ जमाने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। इसके चलते एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने बाकायदा लालू यादव को पत्र लिखा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जो ओवैसी लालू के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? ओवैसी इंडिया गठबंधन में इसलिए भी शामिल होना हैं क्योंकि उनकी नजर मुस्लिम वोटों पर है। वैसे तो बिहार में हर बार की तरह इस बार भी सभी की नजर मुस्लिम वोटो पर है। हो भी क्यों न, बिहार में 50 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर्स काबिज जो हैं। बता दें कि मुस्लिम बिहार की कुल आबादी का 17 प्रतिशत है। ध्यान देने वाली बात यह कि बिहार में कभी भी मुस्लिम वोटर एकतरफा वोट कास्ट नहीं करते हैं। बिहार में मुस्लिम जेडीयू, आरजेडी को वोट करते रहे हैं। 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक इंडिया गठबंधन को मुस्लिम वोट सबसे ज्यादा मिलता रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को 87 प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। जबकि 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे। बात करें साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव की तो इस चुनाव में आरजेडी को ओवैसी की पार्टी ने काफी नुकसान पहुंचाया था। जिसका सीधा फायदा जेडीयू को हुआ था। जेडीयू पिछले चुनाव में मात्र 43 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जिसके लिए वे चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि उनको जो सीटें मिली हैं उसमें सीमांचल का योगदान अधिक है। इसकी सबसे बड़ी वजह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम थी। वैसे भी जिस राज्य में मुस्लिम आबादी अधिक होती है, वहां पर ओवैसी पहुंच जाते हैं और विपक्षी पार्टियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं। कारण यही जो विरोधी दल उन्हें बीजेपी की बी भी कहते हैं। हालांकि ओवैसी और बीजेपी दोनों इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं।  चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे कहने की जरूरत नहीं, साल 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के बिखरने से एनडीए को फायदा हुआ था। हालांकि ये बात आरजेडी ख़ारिज करती है। ऐसा इसलिए कि आरजेडी के मुखिया लालू यादव को लगता है कि बिहार में अमूमन अधिकतर मुस्लिम वोटर्स उन्हीं की पार्टी को वोट करता है। दरअसल, लंबे समय से लालू यादव बिहार में एमवाई समीकरण को साधे हुए (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। बड़ा कारण यही जो बिहार में उन्हें मुस्लिम वोटर्स के लिए किसी अन्य पार्टी से गठबंधन की जरूरत नहीं है। वो बात और है कि पिछली बार उन्हें कुछ सीटों का नुकसान हुआ था, लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। एक बड़ी वजह यह भी जो लालू यादव ओवैसी को बिहार में बड़ी चुनौती नहीं मानते।  इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) करेंगे वैसे भी बीजेपी कभी नहीं चाहेगी कि ओवैसी कभी इंडिया गठबंधन में शामिल हों। क्योंकि ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट करेंगे। इसमें नुकसान बीजेपी का (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) होगा। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू ने वक्फ बिल का सपोर्ट किया था। ऐसे में इस बार उससे मुस्लिम वोटर्स के छिटकने का भी डर है। इसके बावजूद दोनों पार्टियों ने मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की रणनीति बना ली है। दरअसल, बिहार की 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स की आबादी में से 10 प्रतिशत पसमांदा यानी अति पिछड़े मुस्लिम हैं। जेडीयू का मानना है कि नए वक्फ कानून से पसमांदा मुस्लिमों को फायदा होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू और बीजेपी का यह पैंतरा इंडिया गठबंधन के खिलाफ कितना कारगर सिद्ध होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi’ #Owaisi #LaluYadav #BiharElections2025 #AIMIM #BiharPolitics #Mahagathbandhan #MuslimVotes #PoliticalAnalysis

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PM Modi praises Bihar’s rich heritage

PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago: त्रिनिदाद और टोबैगो के दौरे पर पीएम मोदी ने बिहार की विरासत को बताया भारत और दुनिया का गौरव

इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो के दौरे पर हैं। इस बीच वहां भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “मैं कुछ समय पहले ही पक्षियों की इस खूबसूरत भूमि पर आया हूं। और मेरा पहला जुड़ाव यहां के भारतीय समुदाय के साथ (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) है। यह पूरी तरह से स्वाभाविक लगता है, क्योंकि हम एक परिवार का हिस्सा हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि “जब मैं पिछली बार आया था, तब से लेकर अब तक 25 साल हो चुके हैं। हमारी दोस्ती और भी मजबूत हुई है। बनारस, पटना, कोलकाता और दिल्ली भले ही भारत के शहर हों, लेकिन यहां की सड़कों के नाम भी हैं। नवरात्रि, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी यहां हर्ष, उल्लास और गर्व के साथ मनाई जाती है। चौताल और भिटक गण यहां पर पनपते रहते हैं। मैं यहां कई जाने-पहचाने चेहरों की गर्मजोशी देख सकता हूं। मैं युवा पीढ़ी की चमकीली आंखों में जिज्ञासा देख सकता हूं, जो एक साथ जानने और बढ़ने के लिए उत्सुक हैं। हमारे रिश्ते भूगोल और पीढ़ियों से कहीं आगे तक फैले हुए हैं।” प्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर में रहा (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) करते थे इस बीच पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को महाकुंभ के संगम और सरयू नदी का पवित्र जल भी दिया। इसके साथ ही उन्हें श्री राम मंदिर की प्रतिकृति भी भेंट की। पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि “आप सभी जानते हैं कि इस वर्ष की शुरुआत में दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम महाकुंभ हुआ (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) था। मुझे महाकुंभ का जल अपने साथ ले आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैं कमला जी से अनुरोध करता हूं कि वे सरयू नदी और महाकुंभ का पवित्र जल यहां गंगा धारा में अर्पित करें।” इसके बाद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “प्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर में रहा करते थे। कमला जी स्वयं वहां जाकर भी आई हैं। लोग इन्हें बिहार की बेटी मानते हैं। यहां उपस्थित अनेक लोगों के पूर्वज बिहार से ही आए हैं। बिहार की विरासत भारत के साथ ही दुनिया का भी गौरव है। लोकतंत्र हो, राजनीति हो, कूटनीति हो, उच्च शिक्षा हो, बिहार ने सदियों पहले दुनिया को ऐसे अनेक विषयों में नई दिशा दिखाई थी। मुझे विश्वास है कि 21वीं सदी की दुनिया के लिए भी बिहार की धरती से नई प्रेरणाएं और नए अवसर निकलेंगे।” मुझे यकीन है कि आप सभी ने 500 साल बाद अयोध्या में रामलला की वापसी का स्वागत (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) किया होगा- पीएम मोदी  इस बीच रामचरित मानस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं प्रभु श्री राम में आपकी गहरी आस्था से अवगत हूं। यहां की राम लीलाएं वास्तव में अनूठी हैं। रामचरितमानस में कहा गया है कि प्रभु श्री राम की पवित्र नगरी इतनी सुंदर है कि इसकी महिमा का गुणगान दुनिया भर में होता (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) है। मुझे यकीन है कि आप सभी ने 500 साल बाद अयोध्या में रामलला की वापसी का स्वागत किया होगा। आपने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पवित्र जल और शिलाएं भेजी थीं। मैं भी इसी तरह की भक्ति भावना के साथ यहां कुछ लाया हूं। राम मंदिर की प्रतिकृति और पवित्र सरयू से कुछ जल लाना मेरे लिए सम्मान की बात है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वो समय अब दूर नहीं है कि जब कोई भारतीय चंद्रमा पर पहुंचेगा और भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा। हम अब तारों को सिर्फ गिनते नहीं हैं, आदित्य मिशन के रूप में उनके पास जाने का प्रयास करते हैं। हमारे लिए अब चंदा मामा दूर के नहीं है। हम अपनी मेहनत से असंभव को भी संभव बना रहे हैं। इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? आपके पूर्वजों ने गंगा और यमुना को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अपने दिल में रामायण को ले (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) गए पीएम मोदी ने आगे कहा, त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय की यात्रा साहस के बारे में है। आपके पूर्वजों ने जिन परिस्थितियों का सामना किया, उसने सबसे मजबूत आत्माओं को भी तोड़ दिया होगा, लेकिन उन्होंने उम्मीद के साथ कठिनाइयों का सामना (PM Modi Hails Bihar’s Heritage in Trinidad and Tobago) किया। उन्होंने समस्याओं का डटकर सामना किया। उन्होंने गंगा और यमुना को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अपने दिल में रामायण को ले गए। उन्होंने अपनी मिट्टी छोड़ी, लेकिन अपना नमक नहीं। वे केवल प्रवासी नहीं थे, वे एक शाश्वत सभ्यता के दूत थे। उनके योगदान ने इस देश को सांस्कृतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से लाभान्वित किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi #PMModi #BiharHeritage #TrinidadVisit #GlobalPride #IndiaCulture #ModiAbroad #BiharPride #IndianDiaspora #ModiSpeech #IndianCulture

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Meera Road Slap Case

Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case: मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन?

महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्यता को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जारी घमासान है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच मुंबई के मीरा रोड में हुआ भाषा विवाद भी अब तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल, मनसे के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड स्थित जोधपुर स्वीट शॉप के 48 वर्षीय मालिक बाबूलाल खिमजी चौधरी को मराठी भाषा न आने के चलते मारापीटा (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) था। इस घटना के विरोध में गुरुवार को मीरा भाईंदर के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी थी। पीड़ित बाबूभाई खिमाजी चौधरी ने मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनसे कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद बाबूलाल चौधरी ने कानूनी तरीके से लड़ने का फैसला किया है ताकि इस तरह की हरकत किसी और के साथ न हो। हालांकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।  सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हुई है दर्ज एफआईआर के मुताबिक मनसे के कार्यकर्ता पानी की बोतलें खरीदना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उनसे हिंदी में बात की, तो उन्होंने मराठी में बात करने की मांग की। मैंने कहा कि “हम सभी भाषाएं बोलते हैं, इसलिए उन्होंने मुझे पीटने की धमकी दी। इसके वह आगे खड़े चौधरी के पास पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में कौन सी भाषा बोली जाती (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है? तो चौधरी ने कहा कि “सभी भाषाएं बोली जाती हैं।” इसके बाद चौधरी को मनसे कार्यकर्ताओं ने पीटना शुरू कर दिया। इस मार-पिटाई का वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ है। खैर, इस बीच सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान हुई है। जिनके नाम क्रमशा: प्रमोद निलेकर, अक्षय सालवी और करन कंदानगिरे हैं। मजे की बात यह कि 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों गिरफ्तार नहीं किया है। मनसे का आरोप है कि बेवजह इस घटना को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) करें इस मुद्दे पर एकनाथ शिंदे की पार्टी के नेता संजय निरुपम ने मुख्यमंत्री फडणवीस से कार्रवाई की मांग की है। निरुपम ने कहा है कि “कार्रवाई नहीं हुई तो गैर मराठी भारी खतरे में आ जाएंगे।” संजय निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि “महाराष्ट्र में रहनेवाले सभी लोगों को मराठी में संवाद करना चाहिए। यह आग्रह उचित है, परंतु इसके लिए गुंडागर्दी और मारपीट सर्वथा अनुचित (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई करें। वरना बीएमसी चुनाव तक मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले गरीब और कमजोर गैर मराठी भाषी लोगों की सुरक्षा लगातार खतरे में रहेगी। कृपया इसकी गंभीरता को समझें और कड़ा एक्शन लेने का आदेश जारी करें।” इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है? हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब मनसे के कार्यकर्ताओं ने गैर-मराठियों को मारा न (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हो। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है? देश में कानून व्यवस्था है भी कि नहीं? एक तरफ बीजेपी कहती है, बाटोगे तो काटोगे तो वहीं दूसरी तरफ भाषा और प्रांत के नाम पर देश के नागरिकों को बेवजह पीटा जा रहा है। बड़ा सवाल यह कि प्रसाशन कब तक इस तरह की घटनाओं पर आँख मूंदे बैठा रहेगा? कुल-मिलाकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है बीएमसी चुनाव और मराठी वोटो के छिटकने के डर से प्रशासन कड़ी कार्रवाई करने से बच रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Nirupam #sanjaynirupam #meeraroadslapcase #mumbainews #viralvideo #justice #policeinaction

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Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides

Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides: 767 किसानों की आत्महत्या पर भड़के राहुल गांधी, कहा “अन्नदाता की जिंदगी आधी हो रही है, तमाशा देख रहे मोदी”

रायबरेली सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जमकर निशाना साधा है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि “महाराष्ट्र में सिर्फ 3 महीनों में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) है।” दरअसल, महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के चौंकाने वाले मामले सामने आए है। महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2025 के बीच केवल तीन महीनों में 767 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से सबसे अधिक मामले विदर्भ क्षेत्र से दर्ज हुए हैं। इन आंकड़ों पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर धावा बोल दिया। उन्होंने कहा कि “वे तमाशा देख रहे हैं।” इस दौरान उन्होंने यह दावा भी किया कि “उनका यह “सिस्टम” किसानों को मार रहा है, लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी अपने पीआर का तमाशा देख रहे हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया। अपने पोस्ट में उन्होंने महाराष्ट्र में पिछले तीन महीनों में हुए किसानों की आत्महत्या के आंकड़ें बताते हुए, इस स्थिति को चिंताजनक बताया। सोचिए.. सिर्फ 3 महीनों में महाराष्ट्र में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली, (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) क्या ये सिर्फ एक आंकड़ा है?  किसानों की आत्महत्या पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल (Rahul Gandhi) ने अपने पोस्ट में लिखा कि “सोचिए.. सिर्फ 3 महीनों में महाराष्ट्र में 767 किसानों ने आत्महत्या कर ली। क्या ये सिर्फ एक आंकड़ा है? नहीं। ये 767 उजड़े हुए घर (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) हैं। 767 परिवार जो कभी नहीं संभल पाएंगे। और सरकार? चुप है। बेरुख़ी से देख रही है। किसान हर दिन कर्ज़ में और गहराई तक डूब रहा है, बीज महंगे हैं, खाद महंगी है, डीजल महंगा है लेकिन एमएसपी की कोई गारंटी नहीं।” यही नहीं, उन्होंने ने सिस्टम पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वो कर्ज़ माफ़ी की मांग करते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज़ कर दिया जाता है। लेकिन जिनके पास करोड़ों हैं? उनके लोन मोदी सरकार आराम से माफ कर देती है। आज की ही खबर देख लीजिए, अनिल अंबानी का ₹48,000 करोड़ का एसबीआई फ्रॉड। मोदी जी ने कहा था, किसान की आमदनी दोगुनी करेंगे, आज हाल ये है कि अन्नदाता की ज़िंदगी ही आधी हो रही है। ये सिस्टम किसानों को मार रहा है, चुपचाप, लेकिन लगातार और मोदी जी अपने ही PR का तमाशा देख रहे हैं।”  सरकार किसानों की आत्महत्या को लेकर चुप्पी साधी हुए है और (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) बरत रही है बेरुखी  बता दें कि कांग्रेस के पूर्व राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर जमकर निशाना (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आत्महत्या को लेकर चुप्पी साधी हुए है और बेरुखी बरत रही है। कहने की जरूरत नहीं महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का मामला किसी से छुपा नहीं हैं। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक चार्ट शेयर कर दावा किया गया कि “कांग्रेस सरकार के 15 साल के कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र में 55,928 किसानों ने आत्महत्या की।” कांग्रेस को घेरते हुए मालवीय ने कहा कि “मृतकों को गिनने की राजनीति घृणित है, लेकिन राहुल गांधी जैसे लोगों को आईना दिखाना जरूरी है।”  इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” चुनावों के दौरान बीजेपी ने कर्जमाफी का किया (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) था वादा  गौरतलब हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने कर्जमाफी का वादा किया (Rahul Gandhi Slams Govt Over 767 Farmer Suicides) था। सरकार गठन के 6 महीने बाद भी सरकार अपने इस वादे को पूरा नहीं कर पाई है। हालांकि इस मुद्दे पर डिप्ट सीएम अजीत पवार ने कहा कि “किसान सरकार की ऋणमाफी की घोषणा का इतंजार करने की बजाय समय पर अपने फसल ऋण की किस्तें चुकाए”, तो वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा कि “सरकार घोषणा पत्र के वादों को पूरा करने को लेकर सजग है। कर्जमाफी ही नहीं हर वादा पूरा किया जाएगा।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi #RahulGandhi #FarmerSuicides #ModiGovernment #767Farmers #FarmersProtest #IndiaPolitics #RahulVsModi #FarmerCrisis

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AAP to Contest Bihar Election 2025 Alone

Bihar Assembly Election 2025: आम आदमी पार्टी अकेले लड़ेगी चुनाव, अरविंद केजरीवाल ने किया बड़ा ऐलान

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने वाला है। और चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना चुकी हैं और चुनाव में विजय होने के लिए अपनी-अपनी स्ट्रेटजी पर काम भी कर रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी यानी किसी भी दूसरी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। AAP लड़ेगी बिना किसी गठबंधन के चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) अब किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित था। बिहार विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) में हम किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे और अपने दम पर मैदान में उतरेंगे। अब इससे ये साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी में है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में रह चुकी AAP अब दूसरे राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता अजय आलोक ने कसा तंज AAP के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। BJP नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर तंज कस्ते हुए कहा है कि कपटीवाल जी बिहार में 243 सीटों पर लड़ने की बात कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में ही जनता ने उन्हें नकार दिया। दिल्ली और पंजाब की जनता केजरीवाल की सच्चाई जान चुकी है। अब बिहार में भी उन्हें अपनी औकात का अंदाजा हो जाएगा। अजय आलोक ने AAP की पंजाब सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और केजरीवाल सरकार वहां की संपत्ति को ATM की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आइए बिहार में चुनाव (Bihar Election) लड़िए, आपको आपकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा खुद ही हो जाएगा। बिहार चुनाव: सियासी जमीन तैयार बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य की राजनीति बेहद गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के साथ-साथ अब आम आदमी पार्टी और जन सुराज जैसे नए दल भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में जन सुराज पार्टी को स्कूल बैग (School Bag) चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो पार्टी की विचारधारा के अनुरूप है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है, अब स्वयं सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं और बिहार की सियासत में नई ऊर्जा लाने का दावा कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती और रणनीति दिल्ली और पंजाब में अपने प्रदर्शन के दम पर AAP अब बिहार में भी बदलाव की राजनीति का संदेश देना चाहती है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को बिहार में भी दोहराने की तैयारी में है। हालांकि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली या पंजाब से अलग हैं, जहां जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना और विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगी। फिलहाल बिहार में AAP की कोई मजबूत उपस्थिति नहीं रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की लोकप्रियता के दम पर वो जनता को आकर्षित कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में अकेले उतरने का फैसला राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह फैसला विपक्षी एकता को झटका दे सकता है, वहीं दूसरी ओर AAP के लिए यह एक बड़ा जोखिम भी है। पार्टी को बिहार जैसे राज्य में अपना आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि यहां की राजनीति पुराने और गहरे जमीनी समीकरणों पर आधारित है। आने वाले महीनों में AAP की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान यह तय करेंगे कि क्या पार्टी बिहार की राजनीति में कोई निर्णायक भूमिका निभा सकती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) की बहस को और गर्म कर दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news AAP #biharelection2025 #aap #arvindkejriwal #biharpolitics #aapbihar

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Owaisi Slams UP Govt Over Kawad Yatra

Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses: कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे”

एक बार फिर कांवड़ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कुछ सख्त नियम जारी किए हैं। इसमें खाने-पीने की दुकानों पर मालिक के नाम की अनिवार्यता के साथ ही लाइसेंस और पहचान पत्र जरूरी कर दिया गया है। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने कहा है कि ढाबा और रेस्टोरेंट में मालिक और मैनेजर का नेमप्लेट जरूरी है। खैर, पिछले साल की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा के दौरान यूपी में बवाल मचा हुआ है। दरअसल, यूपी में उन दुकानों को बंद कराने की खबरें आ रही हैं, जिनके पास नाम और लाइसेंस नहीं हैं। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया। ओवैसी ने कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी की योगी सरकार पर निशाना साधते हुए (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) कहा कि “मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालय चलाने वाले दुकानदारों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।”  बीजेपी पर तंज करते हुए ओवैसी ने कहा कि “ये अफसोस की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल साफ तौर पर निर्देश दिए थे, फिर भी यूपी सरकार ऐसे विजिलेंटे ग्रुप्स को खुली छूट दे रही है। आखिर इनको रोका क्यों नहीं जा रहा?” सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऐसे फैसलों पर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद ऐसा रवैया है, जो कि प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल है।” बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर खुले में मांस बिक्री ना होने के साथ ही ओवररेटिंग पर सख्ती के निर्देश और संचालक को अपना नाम लिखे होने के निर्देश दिए हैं। पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) न हों सूबे की सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हों, लेकिन अब कुछ तत्व संगठित होकर यात्रा के बहाने अराजकता फैला रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि “मुजफ्फरनगर में बाईपास के पास पहले ऐसी कोई दिक्कत नहीं होती (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) थी। अब कोई ग्रुप बनाकर होटल वालों से आधार कार्ड मांगा जाता है। अरे तुम कौन होते हो पूछने वाले? न तुम एसपी हो, न आरडीओ, न एसडीएम।” इस बीच ओवैसी ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि “एक युवक से आधार कार्ड मांगने के बाद जब उसने नहीं दिखाया, तो उसका कपड़ा उतार दिया गया। बाद में पता चला कि उसका नाम गोपाल था।” इस कृत्य की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि वो चाहे वो गोपाल हो या कोई और हो, किसी को ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह की गुंडागर्दी करे।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? यही नहीं उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? क्या बुलडोजर का डर दिखाया जाएगा? सरकार की मंशा पर शक जताते हुए उन्होंने कहा कि “अगर सरकार की नीयत कमजोर है तो ये लोग खुद को सत्ता के संरक्षित मानकर जो चाहें करेंगे।” बता दें कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान बिना लाइसेंस वाले दुकानों को बंद करने की बात एक बार फिर उठ रही है। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार और प्रशासन पर करारा हमला किया। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ओवैसी ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद यूपी सरकार कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अराजकता फैलाने वाले तत्वों की कड़ी आलोचना की।” खैर, देखना दिलचस्प होगा कि आगे यह बवाल शांत होता है या फिर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर इसे और तूल दिया जाता है? Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #KawadYatra #UPGovt #ShopLicense #PoliticalNews #IndiaNews #Controversy

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