Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict

Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग

किसी महिला को गलत तरीके से पकड़ना और पजामा का नाड़ा तोड़ना, बलात्कार के अपराध के बराबर नहीं है। ये शर्मनाक बात किसी नेता-अभिनेता या समाजसेवक ने नहीं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने अपने फैसले में कही है। गौरतलब हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि “लड़की को गलत तरीके से पकड़ना और उसके पजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार नहीं है।” हाई कोर्ट जज के इस फैसले के बाद से देश की महिलाओं में रोष व्याप्त है। इस पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) देते हुए कहा कि “ऐसे फैसलों से समाज में गलत संदेश जाएगा।” उन्होंने इस फैसले को शर्मनाक और बिल्कुल गलत बताया है। यही नहीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की लड़की से जुड़ा है। साल 2021 में दो लोग पवन और आकाश ने 11 वर्षीय लड़की पर हमला किया था। आरोपियों ने उसको गलत तरीके से पकड़ा, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया और उसे एक पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया था। इस बीच जब उसकी चीखें सुनकर लोग वहां पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग निकले। इस तरह वो दुष्कर्म का शिकार होते-होते बच गयी थी।  यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict)  बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग के स्तन का स्पर्श और वस्त्र का नाड़ा तोड़ने को दुष्कर्म का प्रयास न मानते हुए गंभीर यौन उत्पीड़न माना था। दरअसल, न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने कासगंज के स्पेशल जज (पोक्सो कोर्ट) का समन आदेश संशोधित कर नए सिरे से समन करने का आदेश दिया है। आपने आदेश में हाई कोर्ट ने निर्देशित किया कि आरोपितों के खिलाफ धारा 354-बी आइपीसी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के मामूली आरोप के साथ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाया जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद संसद के बाहर संवाददाताओं से हुई बातचीत में स्वाति मालीवाल ने कोर्ट के फैसले पर आपत्ति (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) जताते हुए कहा कि “यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है। वे समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं कि एक छोटी लड़की के साथ इस तरह की हरकत की जा सकती है और फिर भी इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा?” इसे भी पढ़ें:- नक्सल के खिलाफ सुरक्षा बलों की नई रणनीति कामयाब, 80 दिन में किए 113 नक्सली ढेर सुप्रीम कोर्ट इस तरह के न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) करे सख्त कार्रवाई  यही नहीं, स्वाति मालीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप करने और ऐसी न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।” गौर करने वाली बात यह कि स्वाति मालीवाल ही नहीं, बल्कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी सुप्रीम कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है। लोकसभा के बाहर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि “वह फैसले से पूरी तरह असहमत हैं। और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने का आह्वान किया।” इस बीच उन्होंने कहा कि “मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं और सुप्रीम कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह के फैसले के लिए कोई जगह नहीं है। कहीं न कहीं इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हम इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict #SwatiMaliwal #AllahabadHC #SupremeCourt #LegalVerdict #JusticeForWomen #IndianJudiciary #CourtRuling #LegalRights #BreakingNews #SupremeCourtIntervention

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SC Questions India's Growth-Poverty Data Mismatch

राज्य के विकास और गरीबी के आंकड़ों में तालमेल नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्यों द्वारा विकास सूचकांक में वृद्धि दिखाने के लिए प्रति व्यक्ति आय को दर्शाने और सब्सिडी के लाभार्थियों की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि राज्यों ने अपनी प्रति व्यक्ति आय बढ़ने की बात तो की, लेकिन जब बात गरीबी रेखा (BPL) से नीचे रहने वाली 75 प्रतिशत आबादी की आती है, तो उनका दावा उल्टा पड़ता है। कोर्ट ने यह चिंता जताई कि सब्सिडी (Subsidy) का वास्तविक लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, जो इसके हकदार हैं। राशन कार्ड और सब्सिडी वितरण पर सवाल जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हमारी मुख्य चिंता यह है कि क्या गरीबों के लिए निर्धारित लाभ उन तक सही तरीके से पहुँच रहे हैं, या फिर यह लाभ उन लोगों को मिल रहा है जो इसके हकदार नहीं हैं?” उन्होंने यह भी कहा कि “राशन कार्ड (Ration Card) अब एक लोकप्रियता कार्ड बन गया है,” जिसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना हो सकता है, जबकि असल गरीबों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा। न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा, “कुछ राज्य जब विकास दिखाते हैं तो दावा करते हैं कि उनकी प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, लेकिन जब बीपीएल के आंकड़े आते हैं, तो वही राज्य 75 % आबादी को गरीबी रेखा से नीचे बताते हैं। इन आंकड़ों में यह विरोधाभास है और यह सवाल उठता है कि इस बीच सामंजस्य कैसे बैठाया जा सकता है?” असमानता और भ्रामक आंकड़े यह मामला कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं से जुड़ा हुआ है। इस पर स्वतः संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की थी। वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में यह तर्क प्रस्तुत किया कि यह आंकड़ों में विसंगति लोगों की आय में असमानताओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “कुछ लोग अत्यधिक संपत्ति के मालिक हैं, जबकि बाकी गरीब ही बने रहते हैं।” भूषण ने यह भी कहा कि सरकार को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत गरीब प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त राशन देना चाहिए, और इसके अंतर्गत करीब 8 करोड़ लोग आते हैं। राशन वितरण में राजनीति का सवाल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राशन कार्ड वितरण में किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हमें उम्मीद है कि राशन कार्ड जारी करने में कोई राजनीतिक उद्देश्य शामिल नहीं होगा। मैं हमेशा गरीबों की दिक्कतें समझना चाहता हूं और जो परिवार गरीब हैं, उन्हें मदद मिलनी चाहिए।” वहीं भूषण ने केंद्र सरकार द्वारा 2021 की जनगणना न कराए जाने का मुद्दा भी उठाया, जिससे यह समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। 2011 की जनगणना के आधार पर, कई गरीबों को बीपीएल श्रेणी से बाहर कर दिया गया, और करीब 10 करोड़ लोग मुफ्त राशन से वंचित हो गए। इसे भी पढ़ें:- दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई       सरकार की तरफ से राशन वितरण का जवाब केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सरकार लगभग 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त, 11 करोड़ लोग एक अन्य योजना के तहत इसी तरह की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मामले की सुनवाई को स्थगित करते हुए केंद्र से गरीबों को दिए गए मुफ्त राशन (Free Ration) के वितरण पर जवाब दाखिल करने को कहा। इससे पहले, दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुफ्त उपहार देने की संस्कृति पर अपनी नाराजगी जताई थी और यह टिप्पणी की थी कि प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करने और उनकी क्षमता निर्माण की आवश्यकता है। मुफ्त राशन वितरण पर न्यायालय की चिंता सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यह भी कहा कि यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब केवल करदाता ही मुफ्त राशन से वंचित होते हैं। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि क्या यह केवल गरीबों के बजाय एक राजनीतिक हथियार बनकर रह गया है। कोर्ट ने यह भी सिफारिश की थी कि यदि मुफ्त राशन देने का काम किया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका लाभ सही तरीके से उन तक पहुंचे जिन्हें इसकी आवश्यकता है, न कि उन तक जो इसका लाभ लेने के हकदार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का यह आदेश और टिप्पणी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि देश में सब्सिडी वितरण, राशन कार्ड और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वास्तविक गरीबों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचे और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक प्रेरणा या धांधली न हो। Latest News in Hindi Today Hindi news Subsidy #SupremeCourt #IndiaDevelopment #PovertyStats #EconomicGrowth #SCVerdict #IndianEconomy #PovertyVsGrowth #GovtPolicies #JudicialReview #EconomicJustice

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Disha Salian Case Father Seeks Fresh Investigation

Disha Salian death investigation: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के पिता ने की मुंबई हाईकोर्ट से मौत की नए सिरे से जांच की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई है। दरअसल, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने दिशा की मौत (Disha Salian death investigation) की नए सिरे से जांच की मांग करते हुए बीते बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं इस याचिका में आदित्य ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच सीबीआई को सौंपने की गुजारिश की हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक उनका आरोप है कि दिशा के साथ सामुहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। बता दें कि आठ जून 2020 को दिशा सालियान की मौत उपनगरीय मलाड में इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से हुई थी। इसके बाद शहर की पुलिस ने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया था। हालांकि उस समय दिशा के पिता ने इस जांच को संतोषजनक भी करार दिया था।  सबसे पहले नेता नितेश राणे ने ही दिशा से गैंगरेप के बाद उनकी हत्या (Disha Salian death investigation) का लगाया था आरोप  सबसे पहले नेता नितेश राणे ने ही आज से ठीक तीन साल पहले दिशा से गैंगरेप के बाद उनकी हत्या (Disha Salian death investigation) का आरोप लगाया था। हालांकि तब दिशा के माता-पिता ने बेटी को बदनाम करने की साजिश कहते हुए उल्टा नितेश पर ही केस दर्ज कराया था।  तो वहीं अब दिशा के पिता का कहना है कि “उन्हें नजरबंद करके पुलिस के पेश सबूतों को सच मानने के लिए मजबूर किया गया था।” यही नहीं, इसके साथ ही अपनी इस याचिका में उन्होने डिनो मोर्या, सूरज पांचोली और मुंबई पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा कि “वे अभी भी याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं और आज हाई कोर्ट के रजिस्ट्री विभाग में इस पर नंबर दर्ज कराएंगे।” इसे भी पढ़ें:- दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई       बेटी की मौत (Disha Salian death investigation) की नये सिरे से जांच कराने के लिए बंबई उच्च न्यायालय का खटखटाया है दरवाजा  प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिशा सालियान के पिता ने इस मामले में (Disha Salian death investigation) बुधवार को कहा कि “उन्होंने जून 2020 में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई अपनी बेटी की मौत की नये सिरे से जांच कराने के लिए बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सतीश सालियान ने आगे कहा कि “याचिका में उच्च न्यायालय से शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।” कहने की जरूरत नहीं है, इसके बाद दिशा के पिता की इस याचिका के बाद महाराष्ट्र में राजनीति तेज हो गई है। गौर करने वाली बात यह कि महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र अभी चल रहा है। इस मामले को तूल देते हुए कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने कह कि “आदित्य ठाकरे को विधायक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और जांच का सामना करना ही चाहिए।” ध्यान देने वाली बात यह कि इस बीच शिवसेना के प्रवक्ता ने आश्चर्य जताया कहा कि “चार साल बाद अचानक यह मामला सुर्खियों में क्यों आ गया। उन्होंने इसमें साजिश की आशंका जताई।” Latest News in Hindi Today Hindi news Disha Salian death investigation #DishaSalian #JusticeForDisha #SushantSinghRajput #SSRCase #MumbaiHighCourt #DishaSalianDeath #CBIInvestigation #BollywoodMystery #IndiaJustice #BreakingNews

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Rahul Gandhi question (2)

Rahul Gandhi question: संसद में पीएम मोदी ने महाकुंभ में मरने वालों को क्यों नहीं दी श्रद्धांजलि? 

महाकुंभ के भव्य आयोजन पर आज संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना बयान दिया। महाकुंभ की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि “हम सब जानते हैं कि गंगा को धरती पर लाने के लिए एक भगीरथ प्रयास हुआ था, वैसा ही महाकुंभ के महाप्रयास में भी दिखा।” नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि “प्रयागराज महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। इससे एकता का अमृत निकला है। देश के हर क्षेत्र और हर कोने से लोग इस आयोजन में आए और एक हो गए। लोग अहंकार से हम में एकजुट हो गए।” प्रधानमंत्री ने महाकुंभ की तुलना भारतीय इतिहास के मील के पत्थरों करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “हर राष्ट्र के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जो सदियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन जाते हैं। मैं प्रयागराज महाकुंभ को एक ऐसे मील के पत्थर के रूप में देखता हूं जिसमें देश के जागरूक होने का प्रतिबिंब दिखता है। सफल महाकुंभ, महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को जवाब है।” उन्होंने कहा कि महाकुंभ में बड़े और छोटे का कोई भेद नहीं था।” आदतन पीएम मोदी के बयान के बाद विपक्ष हमलावर हो गया। मजे की बात यह कि प्रधानमंत्री मोदी के बयान समाप्त होने के बाद सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के (Rahul Gandhi question) साथ-साथ पार्टी के अन्य नेताओं ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री सदन में बोलने वाले थे। समय रहते इसकी जानकारी नहीं दी गई।”  राहुल गांधी ने आरोप मढ़ते (Rahul Gandhi question) हुए कहा कि “पूरे मसले पर विपक्ष को नहीं बोलने दिया जाता इस बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आरोप मढ़ते (Rahul Gandhi question) हुए कहा कि “पूरे मसले पर विपक्ष को नहीं बोलने दिया जाता। ये कैसा न्यू इंडिया है?” इसी के साथ राहुल गांधी ने ये भी कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी को बेरोजगारी के बारे में भी बोलना चाहिए था। परंतु उन्होंने इस पर कुछ नहीं बोला। पीएम मोदी को कुंभ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।” बता दें कि संसद परिसर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “कुंभ हमारी परंपरा है, इतिहास है, संस्कृति है, लेकिन हमें इस बात की शिकायत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ में जान गंवाने वालों के बारे में कुछ नहीं कहा। मृतकों को श्रद्धांजलि तक नहीं दी।” इस बीच राहुल गांधी ने दृढ़ता से कहा कि “कुंभ में जाने वाले युवाओं को प्रधानमंत्री से रोजगार भी चाहिए। प्रधानमंत्री को रोजगार के बारे में भी बोलना चाहिए था।” इसे भी पढ़ें:- शरद पवार ने पीएम मोदी की तारीफ में पढ़े खूब कसीदे, चिट्ठी लिख कर दी बड़ी मांग आज के युवा परंपरा और संस्कृति को अपना रहे हैं- पीएम मोदी  आपको बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ के आयोजन पर अपनी बात रखते हुए कहा कि “मैंने लाल किले से सबका प्रयास के महत्व पर जोर दिया था। पूरे विश्व ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए। सबका प्रयास का यही साक्षात स्वरूप है।” इस दरम्यान प्रधानमंत्री ने कहा कि “पिछले साल अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हमने महसूस किया था कि कैसे देश एक हजार वर्षों के लिए तैयार हो रहा है। इसके ठीक एक साल बाद, महाकुंभ के आयोजन ने हम सबके इस विचार को और बल मिला है। ये सामूहिक चेतना देश का सामर्थ्य बताती है।” पीएम मोदी ने यह भी कहा कि “विघटन के दौर में हमारी एकता एक महत्वपूर्ण बिंदु है। और आज के युवा परंपरा और संस्कृति को अपना रहे हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi Rahul Gandhi question #RahulGandhi #PMModi #MahakumbhTragedy #ParliamentDebate #PoliticalControversy #KumbhMela #ModiRahulClash #BreakingNews #IndiaPolitics #OppositionAttack

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Narendra Modi past life

Narendra Modi past life: बीजेपी सांसद के इस बयान पर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक मचा हंगामा, कांग्रेस ने कही यह बात 

मुगल शासक औरंगजेब को लेकर महाराष्ट्र में बवाल मचा हुआ है। मचे बवाल के बीच बीजेपी सांसद के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। दरअसल, बीजेपी के सांसद ने शिवाजी महाराज को लेकर ऐसा बयान दिया कि उस पर विवाद शुरू हो गया है। बता दें कि ओडिशा के बारगढ़ से बीजेपी सांसद प्रदीप पुरोहित ने संसद में कहा कि “पीएम मोदी (Narendra Modi) पिछले जन्म में (Narendra Modi past life) मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज थे। कहने की जरूरत नहीं सांसद के इस बयान पर बवाल मच गया।” लोकसभा में बोलते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि “उनकी मुलाकात एक संत से हुई थी।” इस बीच उन्होंने कहा कि “गिरिजा बाबा नाम के एक संत ने मुझे बताया कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी का पूर्व जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में था। इसीलिए वह राष्ट्र निर्माण में काम कर रहे हैं।” इस पर अधिक जानकारी देते हुए सांसद प्रदीप पुरोहित ने आगे कहा कि “पीएम मोदी वास्तव में छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र समेत पूरे देश को विकास और प्रगति की तरफ ले जाने के लिए पुनर्जन्म लिया है।” जाहिर सी बात है सांसद के इस बयान में हंगामा मचना ही था। हालांकि इस बयान के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आसन से आग्रह किया कि “अगर इस टिप्पणी से किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो इसे सदन की कार्यवाही से हटाने के बारे में विचार किया जाए।” खबर के मुताबिक उपसभापति ने उनके बयान को सदन की कार्यवाही को निकालने का आदेश दिया। बता दें कि चेयर पर बैठे दिलीप सैकिया ने निर्देश दिया कि प्रदीप पुरोहित की बातों की जांच करके उसे सदन की कार्यवाही से हटाने की प्रक्रिया की जाए।  बीजेपी सांसद के इस बयान (Narendra Modi past life) का कांग्रेस समेत विपक्ष के कई सदस्यों ने जताया विरोध  बीजेपी सांसद के इस बयान (Narendra Modi past life) का कांग्रेस समेत विपक्ष के कई सदस्यों ने विरोध जताया। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने प्रदीप पुरोहित के बयान की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “अखंड भारत के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करने तथा महाराष्ट्र और दुनियाभर के शिव प्रेमियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए भाजपा नेतृत्व द्वारा एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। इन लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की मानद टोपी नरेन्द्र मोदी के सिर पर रखकर शिवाजी महाराज का घोर अपमान किया है। अब इस भाजपा सांसद का यह घिनौना बयान सुनिए। हम शिवाजी का बार-बार अपमान करने के लिए भाजपा की सार्वजनिक रूप से निंदा करते हैं। भाजपा शिव-द्रोही है। हम शिवाजी का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेंद्र मोदी को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और इस सांसद को निलंबित करना चाहिए।” इसे भी पढ़ें:- नागपुर में औरंगजेब की कब्र के विवाद को लेकर हुई हिंसा, आगजनी और पथराव के बाद कई इलाकों में लगा कर्फ्यू बीजेपी सांसद प्रदीप पुरोहित के बयान (Narendra Modi past life) की कड़ी निंदा कर रहे हैं सोशल मीडिया यूजर्स यही नहीं, सोशल मीडिया यूजर्स भी बीजेपी सांसद प्रदीप पुरोहित के बयान (Narendra Modi past life) की कड़ी निंदा कर रहे हैं। नेटिज़ेंस उनपर टूट पड़े हैं। उनका कहना है कि ये छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान है। एक यूजर ने लिखा कि “शिवाजी महाराज स्वराज्य के संस्थापक थे, न कि किसी पार्टी के प्रतीक। उनके शौर्य, बलिदान और विचारधारा को राजनीति से जोड़ना क्या उनकी महानता को सीमित करना नहीं? बता दें कि वर्तमान समय में मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर भी देश में काफी बहस चल रही है। इसलिए छत्रपति शिवाजी और मराठा साम्राज्य को लेकर भी देश में काफी बयानबाजी हो रही है और मुगल साम्राज्य की आलोचना की जा रही है Latest News in Hindi Today Hindi news Narendra Modi Narendra Modi past life #NarendraModi #ShivajiMaharaj #BJPMPStatement #PoliticalControversy #ParliamentDebate #SocialMediaBuzz #ModiShivajiRow #IndiaPolitics #ViralNews #BreakingNews

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Aurangzeb Tomb Row Sparks Curfew

Nagpur violence: नागपुर में औरंगजेब की कब्र के विवाद को लेकर हुई हिंसा, आगजनी और पथराव के बाद कई इलाकों में लगा कर्फ्यू

सोमवार को महाराष्ट्र के नागपुर में (Nagpur violence) जमकर हिंसा और पथराव हुआ। दरअसल, एक अफवाह के बाद नागपुर के महल और हंसपुरी इलाके में दो गुटों के बीच पथराव और आगजनी की घटना हुई। उपद्रवियों ने हंसपुरी इलाके में बीती रात कई दुकानों और घरों को निशाना बनाया। स्थानीय लोगों की माने तो उपद्रवियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और 8 से 10 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। हिंसा का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पुलिस को पथराव और आगजनी के बाद बिगड़ी कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करने के साथ ही आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर अचानक हिंसा भड़की ही क्यों? दरअसल, नागपुर के कई इलाकों में सोमवार की शाम इस अफवाह के बाद हिंसा फैल गई कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान कुरान को जला दिया गया। फ़िलहाल पुलिस अधिकारियों ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कानून-व्यवस्था का उल्लंघन न करने की सख्त चेतावनी दी है तो वहीं सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार रात शांति की अपील की और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की बात कही है।  उपद्रवियों ने (Nagpur violence) दुकानों में तोड़फोड़ करने के साथ-साथ आगजनी और पथराव किया प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो कुछ नकाबपोश उपद्रवी हाथों में धारदार हथियार, स्टिकर और बोतलें लेकर आए थे। उन्होंने यहां पर जमकर (Nagpur violence)  हंगामा किया। दुकानों में तोड़फोड़ की और पथराव किया। यही नहीं उपद्रवियों ने वाहनों को आग के हवाले कर दिया।” इसके बाद हिंसा भड़क उठी। अचानक भड़की इस हिंसा में कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। खैर, नागपुर के महल और हंसपुरी इलाके में भड़की हिंसा के बाद प्रशासन ने अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया। इस पूरे मामले में नागपुर पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर कुमार सिंघल ने बताया कि “नागपुर शहर के कोतवाली,  इमामवाड़ा, पचपावली, शांतिनगर, गणेशपेठ, लकड़गंज, सक्करदरा, नंदनवन, यशोधरा नगर और कपिल नगर के पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू अगले आदेश तक लागू रहेगा।” फिलहाल पुलिस की गाड़ी यहां गश्त कर रही है। पुलिस न सिर्फ माइक लाउडस्पीकर पर लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही है बल्कि कर्फ्यू की जानकारी भी दे रही है। बता दें कि नागपुर में हिंसा से प्रभावित इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (जो पहले आईपीएसी की 144 हुआ करती थी) के तहत कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस के अनुसार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि पथराव करने वाले को पकड़ा जा सके। नागपुर में हिंसा (Nagpur violence) को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस आयुक्त को दिए सख्त कदम उठाने के आदेश  नागपुर में हिंसा (Nagpur violence) को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वहां के पुलिस आयुक्त को कड़े कदम उठाने के लिए कहा है। हिंसा के बाद देर रात जारी बयान में फडणवीस ने कहा कि “नागपुर के महल इलाके में जिस तरह से स्थिति तनावपूर्ण हुई, वह बेहद निंदनीय है। कुछ लोगों ने पुलिस पर भी पत्थरबाजी की। यह गलत है। मैं स्थिति पर नजर रख रहा हूं। मैंने पुलिस कमिश्नर से कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है, उठाएं। अगर कोई दंगा करता है या पुलिस पर पत्थरबाजी करता है या समाज में तनाव पैदा करता है, तो ऐसे सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। मैं सभी से अपील करता हूं कि वे नागपुर की शांति को भंग न होने दें। अगर कोई तनाव पैदा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर सिंघल ने कहा कि “पुलिस तलाशी अभियान चला रही है और इसमें शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है।” पुलिस ने धारा 163 लागू कर दी है। सभी को कहा गया है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और कानून को अपने हाथ में न लें। अफवाहों पर विश्वास न करें। इस क्षेत्र को छोड़कर, पूरा शहर शांतिपूर्ण है।” इसे भी पढ़ें:- पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नागपुर में जो स्थिति निर्माण हुई है, जिन लोगों ने भी वो स्थिति निर्माण की है, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए- चंद्रशेखर बावनकुले नागपुर में हिंसा (Nagpur violence) की घटना महाराष्ट्र के मंत्री और राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि “नागपुर में जो स्थिति निर्माण हुई है, जिन लोगों ने भी वो स्थिति निर्माण की है, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन वहां मौजूद है। नागपुर की जनता बहुत संवेदनशील है। हमने नागपुर में कभी ऐसी घटना नहीं देखी।” यही नहीं, नागपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि “कुछ अफवाहों के कारण नागपुर में धार्मिक तनाव की स्थिति पैदा हुई है। नागपुर शहर का इतिहास ऐसे मामलों में शांति बनाए रखने का रहा है। मैं अपने सभी भाइयों से आग्रह करता हूं कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और शांति बनाए रखें।” Latest News in Hindi Today Hindi news Nagpur violence #NagpurViolence #AurangzebTombRow #NagpurCurfew #StonePelting #CommunalClashes #MaharashtraNews #NagpurRiots #ViolenceInNagpur #LawAndOrder #BreakingNews

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Aurangzeb’s Tomb Sparks Rift in Mahayuti Alliance

औरंगजेब की कब्र को लेकर महायुति में बढ़ता मतभेद

महाराष्ट्र में मुग़ल शासक औरंगजेब (Mughal ruler Aurangzeb) की कब्र को लेकर विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है, जिसमें महायुति के विभिन्न दलों के बीच मतभेद और तनाव देखने को मिल रहे हैं। यह विवाद खासतौर पर एनसीपी और हिंदू संगठनों जैसे वीएचपी और बजरंग दल के बीच बढ़ रहा है। एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा और इस कब्र को बचाने के पक्ष में बोलते हुए हिंदू संगठनों को कड़ी फटकार लगाई। उनका मानना है कि यह कब्र शिवाजी महाराज के संघर्ष का प्रतीक है और इसे हटाना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गलत होगा। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी का बयान एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने इस विवाद पर अपना स्पष्ट रुख पेश करते हुए कहा कि यह कब्र हमारी शौर्य की प्रतीक है और हमें इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कब्र उस संघर्ष की याद दिलाती है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुआ था। इसे हटाना हमारी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने कब्र को हटाने का अल्टीमेटम दिया है, वे इसका कोई हल नहीं निकाल सकते। मुख्यमंत्री ने पहले ही कह दिया था कि कब्र का निर्णय ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल के पास। मिटकरी ने कहा, “यदि कोई यह कहता है कि हम इसे तोड़ देंगे, तो ऐसा नहीं होगा। हम थोड़ा धैर्य रखें और अपने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।” अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन हिंदू संगठन इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस तरह के विवादित मुद्दों को उठाकर राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटा रहे हैं। “किसानों की सेवा करो, कार सेवा करने की बजाय किसानों के लिए प्रदर्शन करो, तभी लोगों से आशीर्वाद मिलेगा,” उन्होंने कहा। मिटकरी ने जोर दिया कि कब्र को रहने दिया जाए, लेकिन औरंगजेब का महिमामंडन न हो, क्योंकि यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा होगा। एनसीपी और एसपी का रुख महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर विवाद बढ़ने के बाद, NCP और SP ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। NCP-SP के उपाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सांगली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अब बातचीत की शुरुआत ‘जय शिवराय’ से करें, न कि ‘हेलो’ से। शिंदे ने यह भी कहा, “हम सभी शिवाजी महाराज के मावले हैं, और यही हमारी पहचान है।” इस आदेश से यह स्पष्ट है कि NCP और SP अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय के सम्मान को बनाए रखने के लिए शिवाजी महाराज के नाम का प्रचार कर रहे हैं। यह कदम भी औरंगजेब की कब्र के विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, क्योंकि शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष महाराष्ट्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट का बयान महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग हुई। महाराष्ट्र विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा कि कब्र की मौजूदगी महाराष्ट्र के इतिहास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह बताना चाहिए कि औरंगजेब यहां आए थे और इसी भूमि पर उन्हें दफनाया गया।” दानवे ने जोर देते हुए कहा कि यह कब्र हमारी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है, और इसे हटाने की मांग एक साजिश है, जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है। “अगर किसी को हिम्मत है तो वे जाकर इसे हटाकर दिखाएं,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार राजनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) पर विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि औरंगजेब की कब्र को हटाकर इस भूमि को ‘स्वतंत्रता’ का प्रतीक बनाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कब्र उन संघर्षों और पराजयों का प्रतीक है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुए थे, और हमें इसे एक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। यह विवाद सिर्फ एक कब्र का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी मुद्दा बन गया है। यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सही संदर्भ में स्वीकार करना चाहिए, या इसे अपने वर्तमान राजनीतिक और सांस्कृतिक रुख के अनुसार बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यह निश्चित रूप से एक जटिल सवाल है, जो भविष्य में और भी राजनीतिक चर्चाओं और विवादों को जन्म दे सकता है। औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) को लेकर चल रहे इस विवाद ने महायुति की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे महाराष्ट्र के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे से राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ेगा, और यह निश्चित रूप से आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mughal ruler Aurangzeb #AurangzebTombDispute #MahayutiPolitics #ShivSenaVsBJP #MaharashtraPolitics #HinduSentiments #HistoryDebate #AurangzebGrave #PoliticalConflict #MarathaPride #HindutvaAgenda

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Yogi government crime control

UP law and order: योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आठ साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच पिछली सरकारों में गुंडाराज के लिए मशहूर यूपी के बदमाशों पर योगी सरकार (UP law and order) काल बनकर टूटी है। कारण यही जो योगी सरकार की पुलिस न सिर्फ यूपी, बल्कि पूरे देश में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। नतीजतन विगत आठ वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधारों से अपराध दर में भारी गिरावट आई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी सरकार ने न सिर्फ संगठित अपराधियों और माफिया पर शिकंजा कसा है, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव को भी जागृत किया है। कानून-व्यवस्था के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का असर देखने को मिला। गौर करने वाली बात यह कि प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ अपराध से अर्जित करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई।  अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त (UP law and order) की कार्रवाई  पिछली सरकारों में अपराध के बल पर अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त कार्रवाई (UP law and order) की है। बता दें कि यूपी पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत तकरीबन 142 अरब से अधिक की संपत्ति को जब्त किया गया। यही नहीं, योगी सरकार के आठ साल में अपराधियों को सजा दिलवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यूपी पुलिस ने हरसंभव प्रयास किया कि अपराधी किसी भी हाल में कानूनी शिकंजे से छूटने न पाएं। योगी की पुलिस ने अपराधियों पर इस कदर शिंकजा कसा कि जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 51 दोषियों को मृत्युदंड की सजा मिली। इसके अलावा 6,287 दोषियों को उम्रकैद तो वहीं, 1,091 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के आठ सालों में पुलिस और एसटीएफ के साथ हुए एनकाउंटर में कुल 222 अपराधी मारे गए। इतना ही नहीं आठ साल में 130 आतंकवादी गिरफ्तार किये गए। न सिर्फ आतंकवादी बल्कि 171 अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा पिछले आठ वर्षों में 20,221 इनामी बदमाश गिरफ्तार किए गए तो वहीं 79,984 अपराधियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। प्रदेश को भयमुक्त बनाने हेतु 930 के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हुई। मुठभेड़ में 20 हज़ार से अधिक इनामी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन योगी सरकार (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से कराया मुक्त  डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि “योगी सरकार द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। इस दौरान एटीएस ने 130 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।” हालांकि डीजीपी ने यह भी दावा किया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश को भयमुक्त बनाने में सफलता हासिल हुई है। उन्होंने यूपी पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि “अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई ने राज्य को सुरक्षित बनाने में मदद की है और राज्यवासियों को कानून के प्रति विश्वास दिलाया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news UP law and order #YogiAdityanath #UPLawAndOrder #CrimeFreeUP #YogiGovernment #UPPolice #UPCrimeControl #UPSafety #UPDevelopment #TerrorismArrest #CrimeDown

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Waqf Amendment Bill 2024

वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने साल 2024 के वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बोर्ड ने इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की है। AIMPLB के सदस्य और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस विधेयक को असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ मानते हैं। वहीं, केंद्रीय सरकार का कहना है कि देश कानून के हिसाब से चलेगा, और वक्फ संशोधन विधेयक संसद में जल्द पेश किया जा सकता है। विरोध प्रदर्शन का कारण ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  (AIMPLB) के उपाध्यक्ष उबैदुल्ला आज़मी ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा, “हमारे सभी धार्मिक मामलों की सुरक्षा का अधिकार भारतीय संविधान देता है। जैसे नमाज और रोज़ा हमारे लिए जरूरी हैं, वैसे ही वक्फ की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए था कि वह वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती, लेकिन इस विधेयक के माध्यम से वह खुद वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस विधेयक को वापस नहीं लिया जाता है, तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  (AIMPLB) के नेतृत्व में देश भर के मुसलमान किसी भी तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं, जो देश उनसे मांगेगा। विपक्षी दलों का विरोध विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), और अन्य विपक्षी दल भी शामिल हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उनका पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है और वे इसे संसद में भी मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस विधेयक को लाकर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि जब वक्फ पर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) बनाई गई थी, तब उन्होंने अपने विचार स्पष्ट किए थे। अब, इस विधेयक को संसद में पेश करने पर भी उनका विरोध जारी रहेगा। भारी पुलिस बल की तैनाती विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और विधेयक को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के धर्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसे भी पढ़ें:- पीएम मोदी ने पॉडकास्ट में दिया करारा जवाब, पाकिस्तान ने हमेशा धोखा दिया, दुनिया जानती है कि आतंक की जड़ें कहां हैं भाजपा का रुख भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने AIMPLB द्वारा विरोध प्रदर्शन करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वक्फ एक बहाना है, असल में इन संगठनों का उद्देश्य देश में अशांति फैलाना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AIMPLB और इसके समर्थक राजनीतिक दल वक्फ के नाम पर मुस्लिम नागरिकों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “यह देश कानून से चलता है। अगर इस विधेयक में सुधार की जरूरत है, तो उसे संसद में पेश होने के बाद देखा जाएगा।” विधेयक के उद्देश्य और संशोधन वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill 2024) का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की बेवजह बिक्री पर रोक लगाना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत, वक्फ संपत्तियों की बिक्री की अनुमति सिर्फ वक्फ बोर्ड के माध्यम से होगी और गरीबों के कल्याण के लिए इन संपत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, विपक्षी दल और कई मुस्लिम संगठन इसे गलत मानते हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill 2024) पर चल रही बहस और विरोध प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि इस विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों में गहरी चिंता है। वहीं, सरकार इसे समाज के विकास के लिए जरूरी कदम मानती है। यह मुद्दा अब संसद में आने की संभावना है, जहां इस पर व्यापक बहस होनी तय है। देश के विभिन्न समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा। Latest News in Hindi Today Hindi news AIMPLB #AIMPLBProtest #WaqfAmendment2024 #WaqfBillDebate #MuslimRights #WaqfProperties #AIMPLBStand #IndiaPolitics #WaqfAct #LegalDebate #MinorityRights

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Sanjay Raut on Maharashtra Govt

महाराष्ट्र सरकार का शासन औरंगजेब से भी बदतर: संजय राउत 

महाराष्ट्र में मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) पर शुरू हुआ विवाद और राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बहस में अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद पड़े हैं। राउत ने कहा है कि भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार औरंगजेब से भी बदतर है। इस नकारी सरकार के कारण ही महाराष्ट्र के किसान मर रहे हैं, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं।  बता दें कि औरंगजेब (Aurangzeb) को लेकर पिछले कई दिनों से सियासी संग्राम चल रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा विधायक अबु आजमी ने औरंगजेब को क्रूर शासक मानने से इनकार करते हुए कहा कि औरंगजेब के समय में भारत सोने की चिड़िया थी। औरंगजेब के समय में मंदिर नहीं तोड़ गए थे और संभाजी महाराज की हत्या राजनीतिक कारण से हुई थी। आजमी के इस बयान का सभी पार्टियों ने विरोध किया और खूब सियासी बयानबाजी हुई। बात औरंगजेब की कब्र खोदने तक पहुंच गई। अब इस विवाद में संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद गए हैं।  जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे- संजय  संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘औरंगजेब को जमीन के नीचे दफन हुए 400 साल हो चुका है, उसे भूल जाइए। क्या महाराष्ट्र के किसान औरंगजेब (Aurangzeb) के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। वे भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की वजह से ऐसा कर रहे हैं।’ संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से मुगल शासक औरंगजेब ने अत्याचार किए थे, उसी तरह ये सरकार भी जनता पर अत्याचार कर रही है। इनकी वजह से किसान, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या कर रही। जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे हैं।   इसे भी पढ़ें:-गिरिडीह में होली जुलूस पर पत्थरबाजी, हिंसक झड़प और आगजनी संजय राउत ने यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के उस टिप्पणी पर दी। जिसमें फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा था कि हर देशवासी महसूस कर रहा है कि छत्रपति संभाजी नगर में मौजूद औरंगजेब की कब्र को हटा देना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता औरंगजेब का कब्र हटाने की नहीं सोच रही, वह इस अत्याचारी सरकार को हटाने की सोच रही है। यह सरकार राज्य को लूटने में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Raut #SanjayRaut #MaharashtraPolitics #ShivSena #UddhavThackeray #EknathShinde #BJPShivSena #Aurangzeb #MVA #MaharashtraNews #PoliticalControversy

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