प्रमुख खबरें
विवाद में घिर गए हैं Sanjay Shirsat

नोटों से भरे बैग के पास बैठकर सिगरेट फूंकते दिखे महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट, वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र का सियासी पारा चढ़ा 

महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) एक बार फिर विवादों में हैं। संजय शिरसाट का एक वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कमरे में बैठकर सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं और उनके बगल में एक बैग रखा है जो नोटों से भरा हुआ प्रतीत हो रहा है। इस यह वीडियो को शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने अपने एक्स अकाउंट पर जारी किया। जिसके बाद से ही राज्य की राजनीत में हलचल मचा हुआ है। संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) को अपने अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मुझे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पर तरस आ रहा है! वे कितनी बार यूं ही बैठे-बैठे अपनी प्रतिष्ठा को तार-तार होते देखेंगे? लाचारी का दूसरा नाम है – फडणवीस!” संजय राउत (Sanjay Raut) ने यह टिप्पणी करते हुए भाजपा और शिंदे गुट को एक साथ घेरने की कोशिश की है। राउत के इस पोस्ट के बाद जब विवाद ने तूल पकड़ा तो मंत्री संजय शिरसाट भी सामने आए और सफाई दी कि वीडियो में दिख रहे बैग में नकदी नहीं बल्कि उनके कपड़े रखे थे। उन्होंने कहा कि संजय राउत द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है और यह केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की एक गहरी साजिश है। आयकर विभाग ने कुछ दिन पहले ही भेजा था नोटिस बता दें कि वीडियो सामने आने के ठीक एक दिन पहले संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat Viral Video) ने मीडिया के सामने स्वीकार किया था कि आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा है। यह नोटिस 2019 से 2024 के बीच उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में आई असामान्य वृद्धि के आधार पर जारी किया गया है। शिरसाट औरंगाबाद (पश्चिम) से विधायक हैं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रमुख नेता हैं।  शिरसाट ने आयकर विभाग के नोटिस की जानकारी देते हुए कहा, “कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ आयकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। मुझे बीते बुधवार को जवाब देना था, लेकिन मैंने और अधिक समय मांगा है। मैं सही स्पष्टीकरण दूंगा, कुछ भी गलत नहीं किया है।” संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) ने शुरुआत में दावा किया था कि लोकसभा सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बेटे श्रीकांत शिंदे को भी आयकर विभाग से नोटिस मिला है। हालांकि, बाद में उन्होंने इस बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा, “मेरे जवाब को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि श्रीकांत शिंदे को नोटिस मिला है कि नहीं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।” आदित्य ठाकरे का तीखा सवाल शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने भी इस मुद्दे पर शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज संजय शिरसाट एक वीडियो में अंडरवियर और बनियान में बैठे दिखते हैं, उनके पास नकदी से भरे बैग हैं। हम ’50 खोखे एकदम ठीक’ जैसी बातें सुनते हैं, लेकिन अब ये दृश्य वीडियो में साफ दिख रहा है। इतना पैसा कहां से आया? क्या कोई ऐसे ही नोटों की गड्डियां लेकर घूमता है? क्या मुख्यमंत्री फडणवीस (Devendra Fadnavis) इस पर कोई कार्रवाई करेंगे? क्या इसी तरह से राज्य को लूटने का धंधा चलता रहेगा?” इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी विपक्ष का हमला और सरकार की चुप्पी यह वीडियो अब राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इस पूरे मामले को सत्ता में बैठे लोगों की कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहा है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) या शिंदे गुट की तरफ से अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। राजनीतिक जानकार इस वीडियो को महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष की साख पर बड़ा धब्बा मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस एक वीडियो ने राज्य में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। अगर सरकार ने इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं की तो विपक्ष आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाकर राज्य सरकार को घेर सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से जिस तरह की चुप्पी नजर आ रही है, उसे देखते हुए कम ही लगता है कि इस मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #SanjayShirsat #ViralVideo #MaharashtraPolitics #CashBagControversy #PoliticalScandal

आगे और पढ़ें
Odisha Government Run by Adani

ओडिशा की सरकार अडानी चलाते हैं: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में संविधान बचाओ अभियान के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उद्योगपति अडानी समूह (Adani Group) को लेकर। उन्होंने सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना, महिलाओं की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की और जनता से इन सवालों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। ओडिशा सरकार पर सीधा हमला राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण की शुरुआत ओडिशा की सरकार (Odisha Government) को आड़े हाथों लेते हुए की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य की सत्ता वास्तव में आम जनता के हाथ में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथ में है। उन्होंने दावा किया, ओडिशा की सरकार अब अडानी चला रहे हैं। राहुल गांधी ने जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लाखों लोग भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए एकत्र होते हैं, तो उसी दौरान अडानी और उनके परिवार के लिए रथ रोक दिए जाते हैं। उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ धोखा बताया और कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब जनहित में नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जातीय जनगणना (Caste Census) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में हर जाति और वर्ग की सटीक जनसंख्या का आंकलन नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय केवल एक नारा ही रहेगा। उन्होंने ने कहा कि सबसे पहला काम जातीय जनगणना है, जिससे गरीबों, दलितों, पिछड़ों को अपनी सच्ची शक्ति का अहसास होगा। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल अपने संबोधन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ओडिशा में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में अब तक 40,000 से अधिक महिलाएं गायब हो चुकी हैं और हर दिन औसतन 15 बलात्कार के मामले सामने आते हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रही है और जनता को केवल चुनावों के समय याद करती है। बिहार चुनाव और वोटर लिस्ट विवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बिहार में आगामी चुनावों को लेकर भी बीजेपी और चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के दौरान चोरी हुई, वैसे ही बिहार में भी साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था न रहकर बीजेपी की विंग की तरह काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर लिस्ट (New Voter List) में जुड़ गए जिनकी जानकारी किसी को नहीं है और इसी तरह की प्रक्रिया बिहार में भी अपनाई जा रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि हमने चुनाव आयोग से बार-बार वोटर लिस्ट (Voter List) और वीडियोग्राफी की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बिहार में अगर कोई चुनाव चोरी करने की कोशिश करेगा, तो INDIA गठबंधन (India Alliance) मिलकर इसका मुकाबला करेगा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का समर्थन इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) भी मौजूद थे। उन्होंने भी केंद्र सरकार (Union Government) पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार देश के संसाधन जल, जंगल और जमीन को चुनिंदा पूंजीपतियों को सौंप रही है। उन्होंने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान देश में सैकड़ों सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) बनाए गए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिली। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह दौरा केवल एक राजनीतिक रैली नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी था सामाजिक न्याय, पारदर्शी चुनाव और गरीबों-अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों के लिए संघर्ष। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) अब भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के बाद संविधान बचाओ की मुहिम को अगली दिशा देने को तैयार है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण में बार-बार यह दोहराया कि अब वक्त आ गया है कि जनता जागरूक हो, संगठित हो और अपने हक के लिए आवाज़ बुलंद करे। Latest News in Hindi Today Hindi news Mallikarjun Kharge #RahulGandhi #Adani #OdishaPolitics #BreakingNews #IndianPolitics #OdishaNews

आगे और पढ़ें
PM Modi's Foreign Visit Row

पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर सीएम मान के तंज से गरमाई सियासत, विदेश मंत्रालय ने बताया गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने विदेश यात्रा से वापस लौट आए हैं, लेकिन अब पीएम मोदी (PM Modi) के इस यात्रा पर राजनीति शुरू हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस हालिया विदेश यात्राओं पर तंज करके देश की राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री मान के विवादित बयान का एक तरफ जहां देश का बुद्धजीवी वर्ग आलोचना कर रहा है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने भी कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रलाय के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री मान का नाम लिए बिना उनके बयान को “गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक और अशोभनीय” करार दिया है। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की विदेश यात्राओं पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “प्रधानमंत्री 140 करोड़ की आबादी वाले देश में कम रहते हैं, लेकिन वहां रहते नहीं हैं। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है। इतने लोग तो हमारे यहां पर जेसीबी से खुदाई देखने के लिए इकट्ठे हो जाते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी पीएम मोदी के ब्राजील, घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया दौरे के संदर्भ में की थी। सीएम मान (Bhagwant Mann) का यह बयान विपक्षी आलोचना के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर सामने आया, लेकिन इसकी गूंज अब विदेश नीति के गलियारों तक पहुंच गई है। विदेश मंत्रालय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रेस ने जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमने ग्लोबल साउथ के मित्र देशों के साथ भारत के संबंधों पर राज्य के एक उच्च पदाधिकारी द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां देखी हैं। ये टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक हैं और राज्य के किसी पदाधिकारी को शोभा नहीं देतीं।” हालांकि इस दौरान रणधीर जायसवाल ने सीधे भगवंत मान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि वे किसे संबोधित कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार खुद को इस तरह के हर उस अनुचित टिप्पणी से अलग करती है, जो दोस्त देशों के साथ हमारे संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी, विशेष रूप से राज्य स्तर के जिम्मेदार नेताओं द्वारा, विदेश नीति के गंभीर मसलों को स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखने का प्रयास है, जो दीर्घकालिक रूप से राजनयिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। इन दौरों के दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार, कृषि, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक मंचों पर समर्थन जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा ने किया तगड़ा पलटवार   सीएम मान के बयान के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) की टिप्पणी को “राजनीतिक अपरिपक्वता” और “संविधानिक मर्यादा का उल्लंघन” बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सीएम मान पर पलटवार करते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री को विदेशों में मिलने वाला सम्मान 140 करोड़ भारतीय के लिए गर्व की बात है। चाहे सम्मान देने वाला कोई भी देश हो, जब भारत के नेतृत्व को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलता है तो वो क्षण संपूर्ण भारत की प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता है। लेकिन भगवंत मान जैसे कुछ लोग, जिनके लिए केजरीवाल और उनके जूतों की चाटुकारिता के अलावा सब कुछ छोटा है, वो इस सम्मान का मजाक बनाते हैं। सीएम मान के बयान पर विवाद बढ़ता देश आप (AAP) पार्टी के नेता सफाई देना शुरू कर चुके हैं। आप नेताओं का कहना है कि भगवंत मान का मकसद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की उपयोगिता और लागत को लेकर सवाल उठाना था, न कि भारत के कूटनीतिक रिश्तों को कमतर आंकना। Latest News in Hindi Today Hindi news Bhagwant Mann #PMModi #CMMann #ForeignVisit #MEA #Politics2025 #ModiVsMann #IndianPolitics #LatestNews #ModiAbroad #MEAStatement

आगे और पढ़ें
Maharashtra Passes Public Security

विरोध और मतभेद के बीच महाराष्ट्र में पास हुआ ‘लोक सुरक्षा विधेयक’: वामपंथी संगठनों पर शिकंजा, विपक्ष ने जताई शंका

महाराष्ट्र विधानसभा ने राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद के बीच बहुप्रतीक्षित ‘महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025’ (Maharashtra Public Security Bill) को बहुमत से पास कर दिया है। यह विधेयक राज्य में वामपंथी उग्रवाद, माओवादी विचारधारा और सरकार विरोधी चरमपंथी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) द्वारा पेश किए गए इस बिल को लेकर जहां सत्ता पक्ष इसे राज्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का नया रास्ता बता रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विधानसभा में लोक सुरक्षा विधेयक (Maharashtra Public Security Bill) पेश करते हुए कहा कि गडचिरोली और कोकण जैसे जिले शहरी और ग्रामीण नक्सलवाद से प्रभावित हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह विधेयक उन संगठनों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा जो गुरिल्ला युद्ध और हिंसक विचारधारा के जरिए सामाजिक अस्थिरता फैलाना चाहते हैं।” सीएम फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने यह भी बताया किया कि यह कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी केंद्रीय कानूनी व्यवस्थाओं की खामियों को पूरा करेगा, जो केवल आतंकवाद तक सीमित हैं। यह नया विधेयक चरमपंथी संगठनों की वैचारिक और संगठित गतिविधियों पर भी शिकंजा कसने का काम करेगा।  विधेयक में संशोधन के लिए आम जनता से मिले थे 12,500 सुझाव  बता दें कि महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025′ (Maharashtra Public Security Bill) पहली बार जुलाई 2024 के मानसून सत्र में विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था। उस समय विधेयक में ‘व्यक्ति और संगठन’ जैसे शब्दों के कारण यह विवादों में घिर गया था। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक असहमति जताने वाले आम नागरिकों को भी निशाना बना सकता है। इसी के चलते विधेयक को एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया। इस समिति में जयंत पाटिल, नाना पटोले, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव और अंबादास दानवे जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। समिति को इस विधेयक को लेकर आम जनता से 12,500 सुझाव प्राप्त हुए। समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन अहम संशोधन किए गए। पहला- ‘व्यक्ति और संगठन’ शब्द हटाकर केवल ‘चरमपंथी विचारधारा वाले संगठन’ रखा गया। दूसरा- निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया। तीसरा- जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की जगह अब डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी जाएगी। सरकार ने विधेयक को लेकर पत्रकार संगठनों से भी संवाद कर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि यह कानून मीडिया की स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति के अधिकारों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा। फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी भी लोकतांत्रिक विचारधारा या आलोचना को दबाने की मंशा नहीं रखती। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ विपक्ष की आशंकाएं और विरोध बरकरार हालांकि, विपक्षी दलों ने संशोधन के बावजूद इस विधेयक को लेकर अपनी गंभीर शंकाएं और आपत्तियां दर्ज की हैं। एनसीपी विधायक भास्कर जाधव ने विधेयक को लेकर सवाल किया कि अगर यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना जरूरी है, तो दूसरे भाजपा शासित राज्यों में इसे क्यों नहीं लाया गया? इसे लाने का मतलब सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाना है। वहीं जयंत पाटिल ने कुछ संशोधनों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि “फडणवीस (Devendra Fadnavis) ध्यान रखें, पी चिदंबरम जिस कानून (PMLA) को लाए थे, वही बाद में उनके खिलाफ लागू हुआ।” एनसीपी विधायक नितिन राऊत ने भी विधयेक को लेकर आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल भविष्य में लोकतांत्रिक आंदोलनों, धरनों या मोर्चों पर लागू हो सकता है। उन्होंने कहा, “भीमा कोरेगांव मामले में ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग हुआ था। ऐसा न हो कि यह कानून भी राजनीति का हथियार बन जाए।”  राऊत ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ‘चरमपंथी’ और ‘वामपंथी’ की परिभाषा क्या होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का हर जागरूक नागरिक नक्सलवाद के खिलाफ है, लेकिन कानून का दायरा स्पष्ट होना चाहिए। विपक्ष के इन तमाम विरोध के बाद भी महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक अब कानून बन गया है। सरकार इसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत हथियार मान रही है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून वास्तव में शांति स्थापित करता है या असहमति को दबाने का माध्यम बनता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #Maharashtra #PublicSecurityBill #Opposition #Politics #LeftistGroups #AssemblyNews

आगे और पढ़ें
Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation: क्या सच में मोहन भागवत ने पीएम मोदी को दिए रिटायरमेंट के संकेत?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। इस बार फिर उन्होंने अपने बयान से खलबली मचा दी है। दरअसल, बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में मोरोपंत पिंगले: द आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्जेंस पुस्तक के विमोचन पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) था। इस सभा के दौरान उन्होंने मोरोपंत पिंगले की कही 75 साल में रिटायर होने की बात की थी। उन्होंने यह बात छेड़कर एक नई बहस शुरू कर दी है। इस बीच मजे की बात यह कि नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोहन भागवत के इस बयान पर  शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। संजय राउत ने उनके बयान पर कहा कि “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा है।” इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं पीएम नरेंद्र मोदी  जानकारी के लिए बता दें कि “इस बयान को लेकर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहा है कि “संघ प्रमुख मोहन भागवत यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहे हैं।” इस बीच दिलचस्प बात यह कि पीएम नरेंद्र मोदी इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। बता दें कि संघ प्रमुख भागवत ने अपने बयान में कहा था कि “जब आपको कोई 75 साल का होने पर बधाई देता है, तो इसका अर्थ है कि अब आपको रुक जाना चाहिए और दूसरों को काम करने का मौका देना चाहिए।” अब उनके इस बयान के बाद राउत की प्रतिक्रिया सामने आई। राउत कहा कि “संघ प्रमुख पीएम मोदी को यह संदेश दे रहे हैं।” राउत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी आदि जैसे नेताओं को जबरन रिटायरमेंट दिलाया, क्योंकि वह 75 साल के हो गए थे। अब देखते हैं कि क्या मोदी इसका पालन खुद भी करेंगे।” संजय राऊत इससे पहले भी मार्च के महीने में प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं यह कोई पहली बार नहीं हैं जब संजय राऊत ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट पर कटाक्ष न किया हो। इससे पहले भी मार्च के महीने में वो प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। गौरतलब हो कि जब प्रधानमंत्री संघ मुख्यालय के दौरे पर नागपुर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि “पीएम मोदी अपने रिटायरमेंट का ऐलान करने के लिए आरएसएस के नागपुर मुख्यालय गए।” दरअसल, संजय राउत का मानना था कि पीएम मोदी बीते 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, संभवतः इसलिए यह दौरा उनके आगामी राजनीतिक भविष्य के लिए अहम था। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे- अमित शाह  बता दें कि पिछले वर्ष मई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे।” शाह ने कहा था कि “मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मोदी 2029 तक देश की अगुवाई करेंगे और मोदी आने वाले चुनावों में भी नेतृत्व करेंगे।” विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए गृहमंत्री ने कहा कि “इंडिया गठबंधन के लिए कोई खुशखबरी नहीं है। वो झूठ फैलाकर चुनाव नहीं जीत सकते।” Latest News in Hindi Today Hindi news Mohan Bhagwat #MohanBhagwat #PMModi #RetirementHint #RSS #ModiNews #IndianPolitics #2025Buzz

आगे और पढ़ें
Chirag Paswan's Dual Strategy

बिहार में एनडीए के साथ भी और खिलाफ भी… चिराग पासवान आखिर किस तरह की राजनीति कर रहे?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल अक्टूबर-नवंबर माह में हो सकती है। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और महागठबंधन, दोनों अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लेकिन इन सबके बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बदले-बदले तेवरों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी महागठबंधन के दल और वाम दल एकजुट होकर वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़कों पर उतर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं एनडीए (NDA) के अंदर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की बयानबाजी जेडीयू (JDU) के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आरा से लेकर सारण तक अपनी रैलियों में वह यही संदेश दे रहे हैं कि उनका गठबंधन बिहार की जनता से है, न कि किसी दल विशेष से। वहीं गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। चिराग पासवान यह बयानबाजी ऐसे समय में कर रहे हैं, जब वे भाजपा (BJP) के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। आरा और सारण जैसे इलाकों में अभी एलजेपी (रामविलास) का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। राजनीति में दबाव की रणनीति अपना रहे चिराग चिराग पासवान के इस आक्रामक रुख को राजनीतिक जानकार सीट शेयरिंग से पहले की दबाव बनाने वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। चिराग पासवान विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए 40 से 60 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन एनडीए (NDA) उन्हें 33 से 35 सीटें ही देना चाहती है। ऐसे में चिराग पासवान अब अपनी ही सहयोगी पार्टियों को घेरने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों यह सवाल जरूर कर रहे है कि विधानसभा में जहां पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है, वहां उसे इतनी सीटें एनडीए किस आधार पर दे दे मिलें? हलांकि यह बात जरूर है कि पिछले लोकसभा चुनाव में एलजेपीआर को पांच में से पांच सीटों पर जीत मिली थी, जो उनके संगठन और वोट बैंक को कुछ हद तक वैधता देती है। लेकिन विधानसभा चुनाव की प्रकृति और गणित अलग होती है। नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती  चिराग पासवान (Chirag Paswan) अपनी सभाओं में भाजपा (BJP) की आलोचना के बजाय जेडीयू की आलोचना कर रहे हैं। चिराग की यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जब चिराग एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रहे थे, तब वो पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए खुद को उनका “हनुमान” बताते थे, लेकिन नीतीश कुमार को निशाने पर रखते थे। इस बार भी चिराग के 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे को जेडीयू पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने अकेले लड़ते हुए जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में जेडीयू के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती भी है और चेतावनी भी। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा के गढ़ में जनाधार बढ़ाने में जुटे चिराग  चिराग पासवान (Chirag Paswan) की सबसे ज्यादा सक्रियता भोजपुरी बेल्ट में दिखाई दे रही है, जहां भाजपा का परंपरागत जनाधार रहा है। लेकिन इन जिलों में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में कुछ कमजोर रहा। मसलन, भोजपुर की सात में से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत पाई थी। इस स्थिति को चिराग एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां पर अपनी पार्टी के जनाधार का विस्तार करने में जुटे हैं। यह सक्रियता केवल मौजूदा विधानसभा चुनाव की रणनीति नहीं है, बल्कि इसका संबंध चिराग के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से भी है। बीजेपी के साथ रहकर वह केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार बने रहना चाहते हैं, लेकिन बिहार में अपनी स्वतंत्र पहचान और महत्व भी बनाना चाहते हैं। चिराग पासवान की वर्तमान राजनीति को जानकार ‘दो नावों की सवारी’ की तरह देख रहे हैं। वे एनडीए में बने रहकर केंद्र में ताकतवर भूमिका निभा रहे हैं, वहीं बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति कर अपनी सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चिराग की यह चाल एनडीए को मजबूती देती है या अंदर से कमजोर करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharPolitics #NDA #LJP #BiharNews #IndianPolitics #RamVilasPaswan

आगे और पढ़ें
Aadhaar fraud exposed in Bihar's Muslim-majority districts;

Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed: बिहार में गजब का खेल, मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर बने 120 आधार

साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से सही कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए (एसआईआर) शुरू किया है। आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा। दरअसल, हाल ही में बिहार में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। ऐसा इसलिए राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है। तो वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी है। यानी, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड। सामान्य तौर पर आधार कार्ड एक व्यक्ति-एक कार्ड की नीति पर आधारित है। लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड मौजूद हैं, तो यह संकेत देता है कि या तो डुप्लिकेट आधार कार्ड बनाए गए हैं या फिर गैर-नागरिकों को भी आधार कार्ड जारी किए गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या अतिरिक्त आधार कार्डों का इस्तेमाल गैर-कानूनी मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया गया है? सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं और उससे भी बड़ा सवाल यह कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए और क्यों बनाए गए हैं? इस मुद्दे ने न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी चर्चा को तेज कर दिया है। दरअसल, ममता बनर्जी सरकार की पहले से ही आधार कार्ड डिएक्टिवेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र से तनातनी चल (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) रही है। ऐसे सोचनीय बात यह कि क्या यह विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा है? महत्वपूर्ण बात यह कि सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं। जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ गया है। कहने की जरूरत नहीं यह स्थिति गरीब समुदायों विशेषकर मुस्लिम आबादी को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है।  आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है गौरतलब हो कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र-किशनगंज, पूर्णिया कटिहार और अररिया में मुस्लिम आबादी 38 फीसदी से 68 फीसदी तक है। ऐसे में इन जिलों में आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं, सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। दरअसल, ये जिले पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे हैं। बड़ी बात यह कि बांग्लादेश भी इससे ज्यादा दूर नहीं है। और तो और इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इन जिलों में आधार कार्ड की अधिकता की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं। जिन्हें स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों के सहयोग से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई चुनावी सरगर्मी के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई। दूसरी ओर कुछ लोग तर्क देते हैं कि विपक्ष आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अवैध आप्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। महत्वपूर्ण बात यह कि विपक्ष खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जोर दिया है। लेकिन इसे नागरिकता का सबूत मानने के खिलाफ भी आवाज उठाई है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड डिएक्टिवेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधार डिएक्टिवेशन को एसी, एसटी और ओबीसी समुदायों के खिलाफ साजिश करार दिया था। ममता ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार वैकल्पिक आधार कार्ड जारी करेगी, जिसे केंद्र ने गैर-कानूनी बताया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed #aadhaar #biharnews #scamalert #identityfraud #breakingnews #aadhaarscam #fraudinindia #newsupdate #muslimdistricts #dataleak

आगे और पढ़ें
Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

आगे और पढ़ें
Article 326 Election Commission's X Post Explained

क्या है Article 326? जिसे भारत के Election Commission ने X पर किया है पोस्ट 

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) की तस्वीर साझा की है। यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गई है, विशेषकर बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के संदर्भ में। इस समय बिहार में विपक्षी दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और अन्य पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। अनुच्छेद 326: भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) में दी गई है। यह अनुच्छेद कहता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, उसे मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त होगा। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। यदि कोई व्यक्ति: तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत में चुनाव स्वच्छ, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। आयोग की X पोस्ट: एक संवैधानिक संदेश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) का अनुच्छेद 326 साझा करना केवल एक सामान्य पोस्ट नहीं, बल्कि यह राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में एक संविधान सम्मत जवाब था। आयोग यह दर्शाना चाहता है कि उसका पूरा काम संविधान की भावना और प्रावधानों के तहत हो रहा है। यह विशेष रूप से उन आरोपों के संदर्भ में था जो बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग की मंशा साफ है कि योग्य भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में स्थान देना, और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 #𝗕𝗶𝗵𝗮𝗿 #𝗦𝗜𝗥 #𝗘𝗖𝗜 pic.twitter.com/o0TCgDCYg9 — Election Commission of India (@ECISVEEP) July 9, 2025 बिहार में SIR अभियान: उद्देश्य और विवाद बिहार में 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य है: इस अभियान के अंतर्गत बिहार के लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें उचित पहचान दस्तावेजों के साथ भरकर जमा करना होगा। विपक्ष की आपत्ति: समय और प्रक्रिया पर सवाल विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया मानसून और संभावित बाढ़ के समय में शुरू की गई है, जो अवास्तविक और गैर-व्यावहारिक है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है और गरीब, मजदूर वर्ग और अशिक्षित लोग जरूरी दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह लोकतांत्रिक समावेशन के मूल सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें:- बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है पारदर्शिता चुनाव आयोग (Election Commission of India) पर यह जिम्मेदारी है कि वह जनता के विश्वास को बनाए रखे और यह केवल तभी संभव है जब उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी हो। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन इस तरह होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह जाए। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और सहायता केंद्रों की स्थापना जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे मतदान अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करें, बजाय इसके कि केवल आलोचना करें। संविधान का अनुच्छेद 326 (𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮) भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे और उसे सशक्त बनाए। बिहार में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक जरूरी और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए। आलोचनाएं यदि तथ्यपरक हों तो उन्हें दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह वक्त है कि हर नागरिक अपने मताधिकार को समझे, जागरूक बने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे। Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission of India #Article326 #ElectionCommission #RightToVote #IndianElections #IndianConstitution

आगे और पढ़ें

Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest: बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात

बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के विरोध में महागठबंधन ने आज यानी बुधवार को ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया। जिसमें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। बंद में हिस्सा लेने के लिए राहुल गांधी सुबह ही दिल्ली से पटना पहुंचे हैं। बिहार बंद का असर राजधानी पटना के अलावा अन्य जिलों में भी देखने को मिल रहा (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। इस बंद के दौरान तेजस्वी यादव और राहुल गांधी सहित महागठबंधन घटक दलों के अन्य नेता और कार्यकर्ता आयकर गोलंबर से निर्वाचन कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू कर चुके हैं। विरोध मार्च में वीआईपी चीफ मुकेश सहनी भी शामिल हैं। दरअसल, विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि “मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। मतदाता सूची पुनरीक्षण में जिन 11 दस्तावेजों की मांग की जा रही है, वे गरीबों के पास नहीं हैं। ऐसा ही हुआ तो बिहार में भारी संख्या में मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह जाएंगे।” उनका कहना है कि “इसे विधानसभा चुनाव के बाद किया जाना चाहिए” बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है चुनाव आयोग को ललकारते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी न कहा कि “चुनाव आयोग मैं आपको साफ बोल रहा हूं। मैं बिहार और हिन्दुस्तान की जनता को स्पष्ट कह रहा हूं कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था और वैसे ही बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्हें पता है कि हमने महाराष्ट्र मॉडल समझ लिया है, इसलिए वे बिहार मॉडल लाए हैं। ये गरीबों की वोट छीनने का तरीका है।” इस दौरान बिहार बंद को लेकर तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया है। क्या गुजरात के दो लोग तय करेंगे कि कौन बिहारी वोट दे सकता है और कौन नहीं?” इस बीच चुनाव आयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। गरीब लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है। पहले उनके नाम हटाए जा रहे हैं, फिर उनकी पेंशन और राशन भी छीन लिया जाएगा।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है यही नहीं, कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने बिहार बंद को लेकर कहा कि “सड़कों पर उतरे हैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए। क्योंकि कहा जाता है कि अगर सड़कें सुनी हो जाए तो संसद आवारा हो जाती है इसलिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। इस बीच पुर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन का एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि “शंखनाद हो गया, जनता सड़क पर उतर गई, वोटबंदी की सरकार, उखाड़ फेंकेगा बिहार, राहुल गांधी जी हम बिहारी हैं तैयार।” बता दें कि राहुल-गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन में शामिल दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस और आरजेडी सहित महागठबंधन में शामिल सभी दलों के दिग्गज नेता हुजूम के साथ निर्वाचन कार्यालय की तरफ बढ़ रहे हैं। खबर यह भी है कि प्रदर्शन के बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि निर्वाचन आयोग पर इस बिहार बंद का क्या कुछ असर पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest #RahulGandhi #TejashwiYadav #BiharBandh #ElectionCommission #BiharNews #PoliticalProtest

आगे और पढ़ें
Translate »