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Owaisi Slams EC

Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar: बिहार में चुनाव आयोग के इस प्रोसेस पर भड़के ओवैसी, कहा- “करोड़ों वोटर्स नहीं डाल सकेंगे वोट”

इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल के मद्देनजर राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। यहाँ सबसे बड़ी चर्चा यहां पर वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा जोरों पर है। अमूमन सभी विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की योजना कर विरोध किया (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) है। न सिर्फ विरोध किया है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि “बूथ स्तर के अधिकारियों के लिए इतने कम समय में करोड़ों वोटर्स के रिकॉर्ड को अपडेट करना करीब-करीब असंभव है।” उन्होंने कहा, “आप चाहते हैं कि यह प्रक्रिया एक महीने में निपटा ली जाए। यह कैसे संभव है? आप इसे महज एक महीने में कैसे कर सकते हैं? इसके पीछे क्या तर्क है?” करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में ओवैसी ने यह चेतावनी भी दी कि इस संशोधन की वजह से वोटिंग लिस्ट से करोड़ों नाम छूट सकते हैं। ओवैसी ने कहा, “आप जल्दबाजी करके इन चीजों को रद्द नहीं कर सकते। अगर कल चुनाव होते हैं तो मुझे पूरा यकीन है कि इसमें कई नाम छूट जाएंगे। इसका दोष कौन लेगा? ऐसा करना अभी असंभव है और मेरी आशंका है कि हजारों नहीं, बल्कि लाखों, शायद करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे।” खैर, इस बीच एआईएमआईएम चीफ ने लाल बाबू हुसैन केस का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस व्यक्ति का नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में है, उसे बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा गौरतलब हो कि चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर की प्रक्रिया 24 जून को अधिसूचित की गई थी। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने कहा कि “इसमें वोटर्स को नुकसान (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा। बिहार के ज्यादातर युवा पलायन कर चुके हैं। वे आर्थिक और अन्य वजहों से केरल, मुंबई, हैदराबाद, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में चले जाते हैं, इसी तरह सीमांचल का अधिकांश क्षेत्र बाढ़ की वजह से करीब छह महीने तक कटा रहता है। अब, आप इसे एक महीने में करना चाहते हैं।” यही नहीं, चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “बीएलए आपके घर कितनी बार आएगा? शायद वह एक बार, दो बार और तीन बार आएगा। यह काफी चौंकाने वाला है कि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है।” उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 8 करोड़ वोटर्स हैं। बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव होगा? यह मानवीय रूप से असंभव है।” ऐसा ही नहीं है कि ओवैसी ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने कल बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को कराने के समय से जुड़ी अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराई जा रही इस कवायद की वजह से राज्य के 2 करोड़ लोग वोट डालने का अधिकार खो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #BiharElections #ElectionCommission #VotingRights #AIMIM #BiharNews #IndianPolitics

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Disha Salian Case

दिशा सालियान के साथ नहीं हुआ यौन हिंसा, आदित्य ठाकरे भी निर्दोष… महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से बताई सच्चाई? 

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान केस (Disha Salian Case) में बड़ा मोड़ आ गया है। राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को एक एफिडेविट दायर कर बताया है कि दिशा सालियान की मौत में किसी भी तरह के संदेह की संभावना नहीं है। क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतक के साथ यौन या शारीरिक हमले का कोई सबूत नहीं मिला है। मेडिकल जांच में प्राइवेट पार्ट में न तो सीमन मिला और न ही कोई जख्म पाया गया। जिससे पता चलता है कि मृतका के साथ आखिरी क्षणों में कोई जबरदस्ती नहीं की गई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में यह एफिडेविट राज्य सरकार की तरफ से मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र नागरकर ने दाखिल किया है। इस एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि मृतका के पिता द्वारा दायर किया गए याचिका में लगाए गए आरोप बेवुनियाद और आधारहीन हैं। क्योंकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इन आरोपों को लेकर कोई सबूत नहीं मिले। इस एफिडेविट में आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि उन्हें बेवजह बदनाम करने के लिए इस याचिका को दायर किया गया है।  12वीं मंजिल से गिर कर हुई थर दिशा सालियान की मौत  बता दें कि दिशा सालियान (Disha Salian Case) की 9 जून, 2020 को मलाड की एक बड़ी इमारत की 12वीं मंजिल से गिर कर मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि दिशा खुद वहां से कूदी, जबकि मृतका के पिता सतीश सालियान का दावा है कि उनकी बेटी का रेप करने के बाद उसकी हत्या की गई और इस पूरी मामले को राजनीतिक कारणों से दबाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर शिवसेना (UBT) के मुखिया उद्धव ठाकरे के बेटी आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के साथ आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए।  दिशा सालियान की फ्रेंड्स और बॉयफ्रेंड ने क्या कहा दिशा के पिता के इस याचिका का जवाब पेश करते हुए राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को बताया कि मृतका के पिता द्वारा जो आरोप लगाए हैं, वे आधारहीन हैं। क्योंकि पुलिस SIT की जांच में दिशा की फ्रेंड्स ने बताया कि वह अपने परिवारिक विवाद और बिजनेस डील नहीं पूरी होने के कारण काफी परेशान थी। दिशा सालियान (Disha Salian Case) के बॉयफ्रेंड रोहन रॉय ने भी पुलिस को दिशा के फ्लैट से गिरने की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया है। पुलिस के अनुसार, जिस दिन दिशा की मौत हुई, उस रात वह फ्लैट पर दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थी। मौत से पहले दिशा बहुत ज्यादा नशे में थी। इन दावों की पुष्टि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने भी की है। राज्य सरकार के जवाब में कहा गया है कि उस रात मौजूद सभी गवाहों के बयान एक जैसे हैं। इन सबूतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि दिशा ने आत्महत्या करने के लिए खुद ही खिड़की से छलांग लगा दी थी।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  आदित्य ठाकरे ने खुद को बताया निर्दोष दिशा सालियान केस में एक तरफ जहां राज्य सरकार ने आदित्य ठाकरे को निर्दोष बताया है, तो वहीं आदित्य ठाकरे ने खुद हाई कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने की मांग की है। आदित्य ठाकरने ने अपनी याचिका में कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व के आदेशों से उन पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वे महाराष्ट्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। जिसकी वजह से उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस केस से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, जबरदन मुझ पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद इस केस की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। Latest News in Hindi Today Hindi news Bombay High Court #DishaSalianCase #AadityaThackeray #BombayHighCourt #MaharashtraGovernment #BreakingNews

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90 करोड़ का कर्ज और 2000 करोड़ की संपत्ति: नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल गांधी पर ED के गंभीर आरोप

नेशनल हेराल्ड मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस बहुचर्चित केस की सुनवाई बुधवार को शुरू हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में जो दलीलें रखीं, उन्होंने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। नेशनल हेराल्ड केस (National Herald case) में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) समेत कई वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया है। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? नेशनल हेराल्ड अखबार (National Herald Newspaper) की स्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में की थी। इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के जरिए होता था। समय के साथ अखबार का संचालन बंद हो गया, लेकिन AJL के पास देशभर में करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियां थीं। आरोप है कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने AJL को 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया, जो बाद में वापस नहीं लिया गया। इसके बाद 2010 में यंग इंडिया (Young India) नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसी यंग इंडिया को AJL के सारे शेयर ट्रांसफर कर दिए गए, जिससे संपत्ति का मालिकाना हक कांग्रेस नेताओं के पास चला गया। ईडी का आरोप: कर्ज के बहाने संपत्ति पर कब्जा ASG एसवी राजू ने कोर्ट में कहा कि यह पूरा मामला एक योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि AJL घाटे में चल रही कंपनी थी, लेकिन संपत्ति थी। कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने उसे 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया और बाद में ‘यंग इंडिया’ कंपनी के जरिए इस कर्ज के नाम पर 2000 करोड़ की संपत्ति अपने नियंत्रण में ले ली। ईडी (ED) के अनुसार यह पूरा लेनदेन कागजों पर ही हुआ और असल में न कर्ज की वसूली हुई, न कोई वाणिज्यिक उद्देश्य था। सिर्फ राजनीतिक और निजी लाभ के लिए इसे अंजाम दिया गया। किराया और चंदे में फर्जीवाड़े के आरोप ED ने यह भी दावा किया कि AJL को कई सालों तक फर्जी किराया और चंदा मिलता रहा, जिसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर ट्रांसफर किया गया। एजेंसी ने कहा कि ये पैसे भी एक प्रकार से अपराध की आय (Proceeds of crime) हैं। तफ्तीश के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ नामी नेताओं जैसे डीके शिवकुमार, रेवंत रेड्डी और दिवंगत नेता ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा ने भी इस मामले में चंदा या शेयर ट्रांसफर के रूप में भूमिका निभाई थी। कोर्ट में क्या हुआ? सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पूछा कि क्या यह मामला अभी केवल अपराध के संज्ञान तक सीमित है, तो ASG राजू ने कहा कि हां, इस चरण पर सिर्फ संज्ञान लिया जाना चाहिए। समन की प्रक्रिया बाद में डिस्चार्ज एप्लिकेशन पर निर्भर करेगी। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि वे जल्द ही अपनी बहस पूरी करेंगे, जिसके बाद अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कांग्रेस का पक्ष कांग्रेस पार्टी (Congress Party) इन आरोपों को पहले से ही राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। पार्टी का कहना है कि यह मामला 2012 से ही राजनीतिक प्रतिशोध का प्रतीक बन चुका है, और यह केवल विपक्षी नेताओं को दबाने की एक रणनीति है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने पहले भी संसद और सार्वजनिक मंचों से यह बात कही है कि बीजेपी उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे मामलों का सहारा ले रही है, ताकि वे जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका सकें। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मामला कैसे शुरू हुआ? यह केस सबसे पहले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी (BJP Leader Subramanian Swamy) की शिकायत पर 2012 में सामने आया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यंग इंडिया के जरिए गांधी परिवार ने 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा किया है। इसके बाद मामला कोर्ट और ईडी (ED) के पास गया और अब सालों बाद इसकी सुनवाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंची है। आगे क्या हो सकता है? कोर्ट में अभी केवल प्रारंभिक बहस हो रही है, लेकिन अगर मामले में अपराध का संज्ञान लिया जाता है और समन जारी होता है, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) को अदालत में पेश होना पड़ सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अदालत इस पूरे प्रकरण को केवल वित्तीय लेनदेन मानेगी या इसके पीछे राजनीतिक साजिश की परतें भी खोलेगी? नेशनल हेराल्ड मामला (National Herald case) एक बार फिर सुर्खियों में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी प्रक्रिया आगे क्या मोड़ लेती है। क्या गांधी परिवार निर्दोष साबित होंगे या यह मामला उनके राजनीतिक करियर पर एक और बोझ बन जाएगा? इस केस की हर सुनवाई अब राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से अहम होती जा रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Rahul Gandhi #SoniaGandhi #RahulGandhi #NationalHeraldCase #EDInvestigation #Congress #2000CroreAssets #90CroreDebt #BreakingNews #IndianPolitics

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इटावा कांड के बाद ब्राह्मण विरोधी सियासत कहीं अखिलेश पर पड़ न जाए भारी! यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों का कितना वर्चास्व?

उत्तर प्रदेश की राजनीति को इन दिनों जातीय रंग में रंगी जा रही है। इटावा जिले के दांदरपुर इलाके में यादव कथावाचकों का सिर मुंडवा कर पिटाई करने और चुटिया काट के मूत्र का छिड़काव किए जाने की घटना के बाद से यहां कि सियासत यादव बनाम ब्राह्मण की हो चुकी है। जाति के इस सियायत में सबसे आगे समाजवादी पार्टी (SP) नजर आ रही है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अभी तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए (PDA) की राजनीति करते नजर आ रहे थे, लेकिन इस घटना से वे पीडीए को भुला यादव समाज की राजनीति करते नजर आ रहे हैं।  यादव कथावाचकों के पक्ष में उतरे सपा (SP) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तो ब्राह्मण समाज को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि कृष्ण भक्तों को अगर कथा कहने से रोका गया तो यह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ब्राह्मणों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी लोग घोषित करें कि वो पीडीए समाज द्वारा दिया गए दान और चढ़ावा को नहीं लेंगे। अखिलेश (Akhilesh Yadav) के इस बयानबाजी के बाद अहीर रेजिमेंट समेत कई यादव संगठनों ने अब ब्राह्मणों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इटावा की इस घटना के बाद सपा पार्टी जिस तरह से इसे जातीय रंग देने में जुटी है, उससे सियासी जानकार कहने लगे हैं कि, कहीं अखिलेश यादव का यह एंटी ब्राह्मण कार्ड उन पर ही बैकफायर ना कर जाए? आइये जानते हैं कि यूपी की राजनीति में ब्राह्मण समाज किस तरह की भूमिका निभाती है।    यूपी में ब्राह्मण वोटर 10 फीसदी, लेकिन सियासत में वर्चस्व उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या (Brahmin Voters In UP) करीब 10 फीसदी है, लेकिन इसके बाद भी राज्य (Akhilesh Yadav) की सियासत में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा से रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यूपी की करीब सभी विधानसभा सीटों पर कम से कम पांच से 10 हजार ब्राह्मण वोटर हैं, जो जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, राज्य के करीब 30 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों (Brahmin Voters In UP) का दबदबा है, जो सूबे की सत्ता तक पहुंचने के लिए जरूरी 202 के जादुई आंकड़े का लगभग आधा है। राज्य के वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, बलिया, महराजगंज, गोंडा, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई और झांसी जैसे जिले ब्राह्मणों के गढ़ माने जाते हैं।  जिसके साथ गए ब्राह्मण, उसकी बनी सरकार यूपी में ब्राह्मण वोटर संख्या (Brahmin Voters In UP) में भले ही कम नजर आते हों, लेकिन राज्य की सत्ता तक वही पहुंचता है, जिसके साथ ये रहते हैं। ब्राह्मण समाज शुरुआती दिनों में कांग्रेस के साथ रही, जिसकी वजह से यह पार्टी लंबे समय तक यूपी की सत्ता में रही। लेकिन 1989 में भाजपा ने जब राम मंदिर आंदोलन शुरू किया और मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू हुई तो ब्राह्मण भाजपा के साथ आ गए, जिससे इसने भी राज्य में सत्ता का स्वाद चखा। लेकिन साल 2002 में ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति शुरू होने के कारण यह समाज भाजपा से नाराज हो गया। इसी दौरान मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिये इस समाज को अपने साथ लाने की कोशिश की। मायावती की 2007 के विधानसभा चुनाव में 56 ब्राह्मणों को अपनी पार्टी का टिकट दिया और इसमें से 41 ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। साथ ही बसपा ने भी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाई। इसके बाद सपा ने भी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की और साल 2012 में इस समाज के बदौलत बड़ी जीत के साथ सत्ता में आई। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव से ब्राह्मण समाज का एक बड़ा वर्ग भाजपा के पास चला गया और अभी तक इस पार्टी के साथ बना हुआ है।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  अखिलेश के 5 विधायक और एक सांसद ब्राह्मण  यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में 52 ब्राह्मण जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे, इसमें से भाजपा के 46 विधायकों के बाद सबसे ज्यादा (5) ब्राह्मण विधायक सपा के पास हैं। इसके अलावा सपा के पास एक ब्राह्मण सांसद भी है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)बीते कुछ माह से ब्राह्मणों को पीडीए (PDA) के साथ जोड़कर नया गणित गढ़ने में जुटे थे, लेकिन इटावा की इस घटना के बाद अखिलेश यादव ब्राह्मणों के खिलाफ नजर आने लगे हैं। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि इस घटना को जातीयता के रंग में रंगने से अखिलेश यादव को नफा होगा या नुकसान?  Latest News in Hindi Today Hindi news  Akhilesh Yadav #AkhileshYadav #EtawahCase #BrahminPolitics #UPElections #SamajwadiParty #BrahminVoteBank #UttarPradesh

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Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark

Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark: मौलाना कहे जाने पर भड़के तेजस्वी यादव ने बीजेपी को लेकर कही यह बात 

इन दिनों वक्फ कानून को लेकर बिहार की राजनीति खासी गरमाई हुई है। जिसे लेकर नेताओं में बयानबाजी जारी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए स्पष्ट कहा है कि “वे धर्म नहीं, कर्म की राजनीति में विश्वास रखते हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी के प्रवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों का भी मंच से जवाब देते हुए कहा कि “लगातार दिल्ली में बीजेपी के चिरकुट सब… संघी वाले, दो दिन से हमको गाली दे रहे (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। कभी नमाजवादी कह रहे हैं कभी ‘मौलाना’ कह रहे हैं।” दरअसल, तेजस्वी यादव मंगलवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित अब्दुल कय्यूम अंसारी की 120वीं जयंती के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि “हम मुद्दों की बात करते हैं, वे मुर्दों की बात करते हैं। नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।” हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) बनाएंगे पहचान- तेजस्वी यादव  बीजेपी की आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि “हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर पहचान बनाएंगे। मंदिर भी सजाएंगे और मस्जिद भी, हमारा और जनता का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, जज्बात का (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है। जब हमारी तकलीफ एक है तो हम अलग कैसे हो सकते हैं? अगर जनता का साथ मिला तो नागपुर से चल रही सरकार और नागपुरिया कानून को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।” जानकारी के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते रविवार को तब हुई जब तेजस्वी यादव ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से लागू वक्फ कानून पर तीखा बयान देते हुए कहा कि “बिहार में मौजूदा सरकार सत्ता से बाहर होने की राह पर है। अगर राज्य में विपक्षी दलों की सरकार बनती है तो वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।”  तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं- गौरव भाटिया (बीजेपी प्रवक्ता)  इसी बात को लेकर बीजेपी तेजस्वी यादव पर हमलावर है। तेजस्वी यादव के बयान के बाद बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने बीते मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। ये शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। मौलाना तेजस्वी यादव संविधान को जानते नहीं हैं। आरजेडी बिहार में अगले 50 साल सत्ता में आने वाली नहीं है। हमारे लिए अंबेडकर जी पूजनीय हैं। तेजस्वी यादव और लालू यादव सांप्रदायिक राजनीति करते हैं। हिंदू और मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है- तेजस्वी यादव  इसके बाद पलटवार करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “भाजपा के लोग दो दिन से मुझे गाली दे रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए हमारे प्रवक्ता ही काफी हैं। मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है।” यही नहीं, जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर लगाये जाने पर तेजस्वी ने कहा कि “जेडीयू बीजेपी का प्रकोष्ठ बन गया है। जेडीयू को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। जदयू को तोड़ने की कोशिश तो शुरू से ही हो रही थी, अब यह दिखने लगा है। चाचा जब हमारे पास आए थे उसी समय बीजेपी ने जेडीयू को तोड़ना शुरू कर दिया था।  झारखंड-महाराष्ट्र में जब ऑपरेशन लोटस चल रहा था, उस समय बिहार में भी चल रहा था।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark #TejashwiYadav #BJP #MaulanaRemark #BiharPolitics #PoliticalNews

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Raj Thackeray news

राज ठाकरे की धमकी, ‘हिंदी को मराठी से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे लोग ध्यान रखें चुनाव और गठबंधन होते रहते हैं, लेकिन…’

महाराष्ट्र में तीसरी भाषा पर छिड़ा विवाद (Maharashtra Three Language Policy) अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को लागू करने का आदेश वापस ले लिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने एक बार फिर राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मराठी भाषा (Marathi Language) के मुद्दे को राजनीति का नाम न दें। राज्य में राजनीतिक गठबंधन और चुनाव होते आए हैं और होते रहेंगे, लेकिन अगर एक बार मराठी भाषा (Marathi Language) खत्म हो गई तो समझ लीजिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को एक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।”  मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) मुंबई में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कहा कि, “मराठी भाषा को खत्म करने या इससे समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति का मैं खुलकर विरोध करूंगा। भले ही वह व्यक्ति किसी भी पार्टी का ही क्यों न हो, मैं उसके खिलाफ खड़ा होऊंगा और पूरी ताकत से लड़ंगा।” राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मराठी भाषा पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा, ”हिंदी भाषा देश में व्यापक रूप से बोली जाती है, लेकिन इसे अन्य राज्यों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है। इस भाषा को प्राचीन मराठी भाषा से ऊपर रखने का कोई भी प्रयास कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  मराठी भाषा का इतिहास 3,000 साल पुराना  राजा ठाकरे ने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ मराठी भाषा की रक्षा कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का इतिहास 150 से लेकर 200 साल पुराना है, लेकिन इसे उस भाषा से बेहतर दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिसका इतिहास 3000 साल पुराना है। कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने के लिए साजिश रच रहे हैं और हिन्दी भाषा को सर्वश्रेण दिखा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है और महराष्ट्र की जनता यह नहीं होने देगी। सरकार अगर फिर से हिन्दी थोपने का प्रयास करेगी तो उसे इससे भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।  हिंदी भाषा का विरोध बढ़ता देख सरकारी आदेश रद्द बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी (Maharashtra Three Language Policy) को शामिल किया था। सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जमकर विरोध किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर हिन्दी भाषी लोगों के साथ मारपीट भी की। हिन्दी के खिलाफ विरोध बढ़ता देख देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने ‘त्रि-भाषा’ नीति पर रोक लगाने के साथ एक समिति का गठन कर दिया, जो हिन्दी भाषा को लागू करना है या नहीं, इस बात का फैसला करेगी। राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने इस समिति को लेकर भी राज्य सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा, ‘मैं फडणवीस सरकार को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, उनकी समिति की रिपोर्ट पक्ष में आए या विपक्ष में, लेकिन हिन्दी को दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात सरकार को हमेशा अपने दिमाग में रखनी चाहिए।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने पर बुजुर्ग दुकानदार को पीटा  महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब सरेआम गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मनसे कार्यकर्ता मराठी न बोलने पर एक बुजुर्ग दुकानदार को पीटते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दुकानदार को पीटा गया, वह मुंबई के मीरा रोड पर स्थित जोधपुर स्वीट्स का मालिक है। दुकानदार की सरेआम पिटाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत पैदा हो गया है। पुलिस ने मामले की गंभीर को देखते मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Raj Thackeray #RajThackeray #MarathiPride #MNS #MaharashtraPolitics #HindiVsMarathi #PoliticalWarning #LatestNews

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Priyank Kharge Vows RSS Ban if Govt

केंद्र की सत्ता में आने के बाद RSS को बैन किया जाएगा: प्रियांक खड़गे

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर जो टिप्पणी की है, उसने देश की सियासत में एक बार फिर तीखा मोड़ ला दिया है। प्रियांक ने RSS को राष्ट्रविरोधी मशीनरी बताते हुए कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाएंगे और इसे खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है और चुनावी माहौल में तमाम पार्टियां अपनी विचारधारा को मजबूती से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही हैं। प्रियांक खड़गे का बयान: राजनैतिक रणनीति या वैचारिक विरोध? प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने साफ तौर पर कहा कि RSS पर कभी कोई गंभीर जांच नहीं हुई है और अगर उन्हें सत्ता में आने का अवसर मिला, तो वे इसकी जांच कराएंगे और कार्रवाई भी करेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह संगठन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ काम करता है और सांप्रदायिकता फैलाने का काम करता है। हालांकि कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बयान को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रियांक का यह रुख कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही आरएसएस-विरोधी विचारधारा से मेल खाता है। विशेष रूप से इंदिरा गांधी के दौर में, जब RSS पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध लगाया गया था, तब कांग्रेस और संघ के रिश्ते और भी कटु हो गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलराम हेडगेवार ने की थी। दशहरे के दिन शुरू हुआ यह संगठन आज भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में शामिल है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज में एकता और अनुशासन लाना रहा है। वर्तमान में मोहन भागवत इसके सरसंघचालक हैं, जो 2009 से इस पद पर कार्यरत हैं। संघ की कार्यप्रणाली पूरी तरह से स्वयंसेवकों पर आधारित है। इसके स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि आरएसएस एक सांप्रदायिक एजेंडा चलाता है और इसका अंतिम लक्ष्य “हिंदू राष्ट्र” की स्थापना है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ माना जाता है। पहले भी संघ पर लग चुका है प्रतिबंध RSS पर भारत सरकार ने अब तक तीन बार प्रतिबंध लगाया है: हालांकि हर बार संघ पर लगे प्रतिबंध को बाद में हटा लिया गया और संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत कर लिया। कौन हैं प्रियांक खड़गे? प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का राजनीतिक करियर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से शुरू हुआ। उन्होंने 1998 में राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे प्रदेश युवा कांग्रेस से होते हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) तक पहुंचे। वे कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की चित्तपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बयानों को न केवल एक युवा नेता की मुखरता के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कांग्रेस (Congress) की उस पुरानी लाइन के तौर पर भी देखा जा रहा है जो संघ के विचारधारा से टकराव रखती है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राजनीतिक नतीजे  प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का बयान निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा (Congress and BJP) समर्थकों के बीच एक नई बहस को जन्म देगा। जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा के रूप में देखेगा, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘हिंदू विरोधी’ एजेंडा बताएगा। खासकर चुनावी मौसम में इस तरह के बयान मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। आरएसएस (RSS) का समर्थक वर्ग काफी बड़ा है और यह संगठन भाजपा (BJP) के लिए वैचारिक रीढ़ की हड्डी के समान है। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा संघ को खत्म करने या उस पर प्रतिबंध लगाने की बात करना गंभीर राजनीतिक नतीजे ला सकता है। प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का RSS को लेकर बयान सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारत की राजनीति में विचारधारा की उस जंग का हिस्सा है जो दशकों से चली आ रही है। एक ओर जहां RSS खुद को राष्ट्र सेवा में समर्पित मानता है, वहीं विरोधी उसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकत बताते हैं। इस बहस का अंत फिलहाल कहीं नजर नहीं आता, लेकिन इससे देश की लोकतांत्रिक चर्चा और विचार विमर्श और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Priyank Kharge #PriyankKharge #RSSBan #CongressStatement #PoliticalNews #BreakingNews #IndianPolitics #BJPvsCongress

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Marathi vs Hindi Row Heats Up

भाषा पर राजनीति: महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया

महाराष्ट्र में भाषा को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा (Language controversy) गई है। बीती रात मुंबई के मीरा रोड इलाके में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर एक नॉर्थ इंडियन फेरीवाले की पिटाई कर दी वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह मराठी बोलने से इनकार कर रहा था। यह घटना मीरा रोड (Mira Road) के बालाजी होटल के सामने हुई, जहां पीड़ित मसाला डोसा बेचने का काम करता है। इस घटना ने ना सिर्फ भाषा की अस्मिता पर बहस छेड़ दी है, बल्कि राज्य की राजनीति को भी एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। मनसे की सख्त प्रतिक्रिया मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thakre) ने इस मामले पर खुलकर बयान दिया और हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हिंदी एक बड़ी भाषा ज़रूर है, लेकिन उसे राष्ट्रीय भाषा (National Language) के रूप में जबरन थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि मराठी का इतिहास 3,000 वर्षों से भी पुराना है, जबकि हिंदी एक अपेक्षाकृत नई भाषा है। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से यह संकेत देता है कि मनसे राज्य में मराठी (Marathi) को सर्वोपरि रखने की नीति पर अडिग है। राज ठाकरे (Raj Thakre) ने यह भी कहा कि कुछ लोग हिंदी को मराठी से श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। उनके अनुसार यह मराठी अस्मिता पर सीधा हमला है। हिंदी अनिवार्यता का फैसला रद्द भाषा विवाद (Language controversy) के इसी बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने रविवार को घोषणा की कि पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने का जो निर्णय लिया गया था, उसे वापस लिया जा रहा है। इस फैसले का विरोध शिवसेना (UBT) और मनसे दोनों ने ही किया था। 5 जुलाई को इन दोनों दलों ने मिलकर “महामोर्चा” निकालने की घोषणा की थी, जिसे अब सरकार के फैसले के बाद रद्द किया जा सकता है। फडणवीस सरकार के इस कदम को विपक्ष ने सरकार की कमजोरी और दबाव में लिया गया फैसला बताया है। वहीं, मराठी समर्थकों का कहना है कि यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की दिशा में सही कदम है। उद्धव ठाकरे का तीखा हमला शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने भी इस पूरे मसले पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार यह मानती है कि जो भी भाजपा या सरकार की नीतियों का विरोध करता है, वह देशद्रोही है। ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को स्वतंत्रता संग्राम की भावना का कोई ज्ञान नहीं है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने दावा किया कि त्रिभाषा फार्मूले के तहत हिंदी (Hindi) को थोपने के विरोध में जो एकजुटता दिख रही थी, उसे देखते हुए ही सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। यह विपक्ष की एकजुटता और जन भावना की जीत है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मराठी अस्मिता बनाम राष्ट्रीय एकता? यह पहला मौका नहीं है जब महाराष्ट्र में भाषा को लेकर विवाद हुआ है। मनसे और शिवसेना (UBT) (MNS and Shiv Sena UBT) वर्षों से राज्य में मराठी भाषा (Marathi Language) और संस्कृति को लेकर सख्त रुख अपनाते आए हैं। हालांकि, हर बार यह बहस इस सवाल पर खत्म होती है कि क्या किसी राज्य में एक विशेष भाषा को थोपना जायज़ है, और क्या ऐसा करना देश की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान के खिलाफ नहीं है? वहीं, दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि देश की राजभाषा के रूप में हिंदी का सम्मान किया जाए, लेकिन जबरदस्ती नहीं। संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 के अनुसार, हिंदी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन अन्य भाषाओं के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना। महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रहा यह विवाद (Language controversy) सिर्फ शब्दों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी है राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और राजनीतिक समीकरण। जहां एक ओर राजनीतिक दल अपने-अपने हितों को साधने में जुटे हैं, वहीं आम नागरिकों को ऐसी घटनाओं में नुकसान उठाना पड़ता है। जरूरत इस बात की है कि भाषा को विभाजन का नहीं, एकता का माध्यम बनाया जाए। सम्मान सभी भाषाओं को मिले और यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Language #marathi #hindi #maharashtra #languagepolitics #marathivsHindi #marathipride #hindipolitics #maharashtranews

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Narayan Rane reignites old feud by recalling Uddhav's

Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas: विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात 

बीते दिनों हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद और लंबी चली बहस के बाद आखिरकार महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को अपना फैसला वापस लेना ही पड़ा। भाषा विवाद पर भले राज्य सरकार ने बीएमसी इलेक्शन और मराठी वोटो के छिटकने एक डर से पूर्व के अपने दोनों आदेश रद्द कर दिए हों, लेकिन ठाकरे बंधु इस मुद्दे को हाथ से जाने देना नहीं (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) चाहते। हालाँकि राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि एक नई समिति बनाई जाएगी जो हिंदी भाषा को प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवी तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना है या नहीं इसपर निर्णय लेगी। मजे की बात यह कि सूबे की भाजपा सरकार भले ही मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ठाकरे बंधु 5 जुलाई को एक मंच पर साथ दिखेंगे। दरअसल, राज्य सरकार के इस फैसले को दोनों ठाकरे बंधू अपनी लड़ाई की जीत बता रहे हैं। दोनों का कहना है कि “महाराष्ट्र का मराठी मानुष साथ आया ये देख सरकार डर गई। ये मराठी मानुष की जीत है। इसका विजय दिवस जुलूस मनाया जाएगा।”  ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं मीडिया रिपोर्ट की माने तो 5 जुलाई को दोनों ठाकरे भाई एक साथ एक मंच पर कई वर्षों के बाद आएंगे। पहले इस विजय दिवस के लिए शिवाजी पार्क और गिरगांव चौपाटी पर विचार चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं की आपसी सहमति से वर्ली डोम संभागृह को फाइनल किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि 5 जुलाई को होने वाले विजय दिवस को लेकर ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं। शिवसेना की ओर से संजय राऊत, अनिल परब और मनसे की ओर से बाला नांदगावकर और अभिजीत पानसे के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक की अहम बैठक हुई है। एक तरह से कारगर रणनीति पर मंथन हो रहा है। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो इस बैठक में विजय दिवस की संपूर्ण रूपरेखा, आयोजन स्थल, भीड़ प्रबंधन और भाषणों की रणनीति पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि यह सिर्फ मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और सरकार के निर्णय वापसी का उत्सव होगा। इसमें कोई राजनीतिक झंडा या एजेंडा नहीं होगा। वरली डोम को आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है। दोनों दलों में इसे लेकर सहमति बन चुकी है। आयोजकों का कहना है कि यह पूरी तरह से मराठी भाषा और संस्कृति की विजय के रूप में मनाया जाएगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) मजबूर किया इस पूरे मामले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) कहा कि “उद्धव ठाकरे आज राज ठाकरे को भाईचारे के नाते वापस आने की अपील कर रहे हैं। लेकिन मुझे याद है, यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। क्या उन्हें यह सब याद नहीं है? अब वे क्यों इतनी मिन्नतें कर रहे हैं? उद्धव को आड़े हाथों लेते हुए नारायण राणे ने कहा कि “राज ठाकरे, नारायण राणे, गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं ने शिवसेना को खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन इन्हीं लोगों को उद्धव ने बाहर का रास्ता दिखाया। जिस शिवसेना को माननीय बालासाहेब ठाकरे ने सत्ता तक पहुंचाया, उसी सत्ता को उद्धव ठाकरे ने गंवा दिया। शिवसेना की इस गिरावट के लिए पूरी तरह से उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं।” उन्होंने आगे कहा, मराठी जनता और हिंदू समाज ने इन्हें घर बिठा दिया है। जो चीज एक बार हाथ से निकल जाती है, वो फिर से वापस नहीं आती जो बूंद से गई, वो हौद से नहीं आती! उद्धव ठाकरे में न तो वह हिम्मत है और न ही वह क्षमता कि वो फिर से सब कुछ हासिल कर सकें। Latest News in Hindi Today Hindi news Narayan Rane #NarayanRane #UddhavThackeray #VijayDiwas #RajThackeray #MaharashtraPolitics #ShivSena

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Old Delhi Station Renaming Proposal by CM Rekha Gupta

पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने रेलमंत्री को लिखा पत्र, जानिए कौन थे महाराज अग्रसेन?

दिल्ली की भाजपा सरकार (BJP Government) अब 160 साल पुराने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदलने जा रही है। इस स्टेशन का नाम अब ‘महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन’ (Maharaja Agrasen Railway Station) रखने का विचार किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए निवेदन किया है। भाजपा का कहना है कि सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने यह फैसला सामाजिक न्याय और अहिंसा के प्रतीक माने जाने वाले हमारे महान राजा महाराजा अग्रसेन के सम्मान में लिया है।  स्टेशन के नाम में बदलाव (Maharaja Agrasen Railway Station) होने से यहां आने वाले लाखों लोग महाराजा अग्रसेन के बारे में बेहतर तरीके से जान सकेंगे, यह उनके लिए उचित श्रद्धांजलि होगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि स्टेशन के नाम को बदलने के लिए लंबे समय से विचार किया जा रहा था। सीएम चाहती हैं कि इस मामले में रेल मंत्री खुद हस्तक्षेप करें, इसलिए उन्हें पत्र लिखा है।  महाराजा अग्रसेन के सामाजिक-आर्थिक विकास का दिल्ली पर गहरा प्रभाव  सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को लिखे पत्र में नाम बदलने की वजह का भी जिक्र किया है। सीएम लिखती हैं कि, ‘महाराजा अग्रसेन के सम्मान में और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदल कर उनके नाम पर रखना चाहते हैं। महाराजा अग्रसेन हमारे देश के एक सम्मानित और ऐतिहासिक व्यक्तित्व थे। उनकी विरासत का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास पर और खास कर दिल्ली में बेहद गहरा प्रभाव पड़ा है।’ सीएम रेखा गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ‘महाराजा अग्रसेन को सामाजिक न्याय, सामुदायिक कल्याण और आर्थिक दूरदर्शिता के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके वंशज और अनगिनत अनुयायी आज भी दिल्ली को आर्थिक और सांस्कृतिक तरक्की दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अगर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया तो यह उनके योगदान के लिए उन्हें एक उचित श्रद्धांजलि होगी। मैं आपके मंत्रालय द्वारा स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द विचार करने का निवदेन करती हूं।’ उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है पुरानी दिल्ली  बता दें कि चांदनी चौक इलाके में मौजूद पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन का निर्माण साल 1864 में किया गया था और 1 जनवरी 1867 को यहां पर पहली ट्रेन पहुंची थी। इस स्टेशन के मौजूदा भवन का निर्माण 1893 में शुरू किया गया था और यह 1903 में बन कर तैयार हुई। इस स्टेशन के बनने के बाद ही दिल्ली-कलकत्ता रेलवे लाइन की शुरुआत हुई थी। आज के समय में यहां पर 18 प्लेटफॉर्म्स बने हुए हैं और रोजाना यहां से होकर देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भगवान राम के वंशज थे महाराजा अग्रसेन महाराजा अग्रसेन अग्रोहा रजवाड़े के राजा थे, जो हरियाणा में पड़ता है और आज के समय में हिसार जिले के तौर पर जाना जाता है। महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी क्षत्रिय वंश के थे और इन्हें शासन में समानता, न्याय और अहिंसा को प्राथमिकता देने वाले महान भारतीय राजा के तौर पर याद किया जाता है। कहा जाता है कि इनका वंश भगवान राम से जुड़ा है और वे राम पुत्र कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज थे। इन्हें अग्रवाल समुदाय का पितामह भी कहा जाता है। इन्होंने अपने राज्य में बसने वाले नए परिवार को मदद देने के लिए ‘एक ईंट, एक रुपया’ प्रथा शुरू की थी।   Latest News in Hindi Today Hindi news Rekha Gupta #OldDelhiStation #RekhaGupta #MaharajaAgrasen #IndianRailways #StationRenaming

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