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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या होगा? पुलिस ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने और पिकेटिंग पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 10 अक्टूबर का प्रदर्शन अभी आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने Parliament Street Police Station में प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनुमति नहीं मांगी, बल्कि केवल पुलिस को सूचना दी है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि धारा 163 लागू होने के कारण केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। Section 163 में क्या-क्या प्रतिबंधित है? धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, बिना लिखित अनुमति निम्न गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है: इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रदर्शन होने पर पुलिस रोक सकती है जमावड़ा अगर आयोजक 10 अक्टूबर को अनुमति के बिना जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें वहां एकत्र होने से रोक सकती है। स्थिति के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग, लोगों को हिरासत में लेने और भीड़ को तितर-बितर करने जैसी कार्रवाई कर सकती है। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को लेकर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। 40 Metro stations तक बंद करने की तैयारी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान जरूरत पड़ने पर 40 मेट्रो स्टेशनों तक अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऐप आधारित कैब की आवाजाही पर प्रतिबंध, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक क्रियान्वयन प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। 10 detention centres तैयार संभावित बड़े जमावड़े और हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं। दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर निगरानी पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से दिल्ली आने वाले मार्गों पर भी नजर रख रही है। बड़े समूहों की आवाजाही को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई जा सकती है। CJP का दावा—प्रदर्शन होकर रहेगा CJP ने कहा है कि वह 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को वापस नहीं ले रहा है। अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। संगठन ने देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा बोरा और सौरव दास ने क्या कहा? नेहा बोरा और सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है और लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू प्रशासनिक आदेशों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है। मामला Delhi High Court भी पहुंचा Indian Youth Congress ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। इस मामले में होने वाली सुनवाई और आदेश प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर Court या Police से अनुमति मिली तो? अगर 10 अक्टूबर से पहले अदालत या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन को सीमित अनुमति देती है, तो कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के साथ आयोजित किया जा सकता है। इन शर्तों में भीड़ की सीमा, निश्चित समय, निर्धारित स्थान और मार्च निकालने पर रोक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक शर्तें संबंधित आदेश में स्पष्ट होंगी। अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलती और कोई न्यायिक राहत भी नहीं मिलती, तो आयोजकों के लिए जंतर-मंतर पर सभा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस लोगों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोक सकती है, उन्हें हिरासत में ले सकती है और लागू आदेशों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर फिलहाल स्थिति यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनेगी, यह पुलिस की कार्रवाई, अदालत के संभावित आदेश और आयोजकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। Source – The Indian Express, The New Indian Express, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP के मंच पर पहुंचे ध्रुव राठी, बोले—“यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई”; SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

बेंगलुरु: YouTuber ध्रुव राठी ने 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के Freedom Park में आयोजित CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। ध्रुव राठी ने मंच से कहा कि वह किसी सरकार को बदलने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने के लिए आए हैं। Freedom Park में हुआ बड़ा प्रदर्शन CJP ने बेंगलुरु के Freedom Park में “People’s Tribunal” और प्रतीकात्मक “चप्पल प्रदर्शन” आयोजित किया। इसमें ध्रुव राठी के साथ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत कई लोग शामिल हुए। “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” ध्रुव राठी ने प्रदर्शन से पहले भी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया और बेंगलुरु के साथ-साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में भी लोगों से पहुंचने की अपील की थी। “Regime change के लिए नहीं आया” CJP के मंच से ध्रुव राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने आए हैं। Election Commission पर उठाए सवाल ध्रुव राठी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं। वहीं, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बताता रहा है। SIR से कथित रूप से प्रभावित लोगों ने रखी बात People’s Tribunal में ऐसे लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए। आयोजकों ने इन बयानों के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों को सामने रखने की कोशिश की। प्रकाश राज भी पहुंचे मंच पर अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने SIR को समाप्त करने और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग का समर्थन किया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP और प्रदर्शन में शामिल अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान “SIR रद्द करो” और “ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो” जैसे नारे भी लगाए गए। अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी से न डरने को कहा CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से कहा कि वे 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी से न डरें। उन्होंने आंदोलन को मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ा। 10 अक्टूबर के Delhi protest की तैयारी बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। CJP और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने लोगों से दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन को मिला नया चेहरा ध्रुव राठी और प्रकाश राज की मौजूदगी से CJP के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। सोशल मीडिया पर दोनों की भागीदारी और प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी तेजी से प्रसारित हुए। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कथित भूमिका को लेकर प्रदर्शनकारी कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड, आधिकारिक जांच और न्यायिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकता है। Source – The Indian Express, India Today, The Times of India, Jansatta, Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी, नेहा बोरा और सौरव दास ने दी जानकारी

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, Special Intensive Revision (SIR) पर रोक और Election Commission की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी तेज हो गई है। CJP के co-convener सौरव दास और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शन की जानकारी दी और देशभर के युवाओं, छात्र संगठनों तथा नागरिक समूहों से दिल्ली पहुंचने की अपील की। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP, AISA, AISF, SFI और अन्य छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल CEC के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें व्यापक चुनावी सुधारों की मांग भी उठाई जाएगी। Delhi Police को दी गई औपचारिक सूचना सौरव दास ने Parliament Street Police Station जाकर प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना Delhi Police को दी। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी आवश्यक अंडरटेकिंग भी जमा की हैं और पुलिस से सहयोग की उम्मीद है। नेहा बोरा ने युवाओं से की अपील प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने छात्रों और युवाओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इस आंदोलन को मतदान के अधिकार, संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन की प्रमुख मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। CJP और उससे जुड़े संगठनों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं हुई हैं। Election Commission और BJP इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। SIR पर रोक लगाने की भी मांग आयोजक Special Intensive Revision प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मतदाता सूची में संशोधन को लेकर उठे सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। ‘लंबी लड़ाई’ के लिए तैयार रहने की अपील सौरव दास ने समर्थकों से कहा कि वे केवल एक दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद भी चुनावी सुधारों की मांग जारी रहेगी। कई छात्र संगठन साथ आए AISA, AISF, SFI और AAP की छात्र इकाई ASAP समेत कई संगठनों ने प्रदर्शन में भाग लेने की घोषणा की है। इससे 10 अक्टूबर का कार्यक्रम बड़े छात्र जुटाव में बदल सकता है। BKU ने भी भाग लेने का ऐलान किया 9 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने भी घोषणा की कि संगठन 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होगा। इससे आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी भी जुड़ गई है। Delhi Police ने अनुमति के नियमों का दिया हवाला Delhi Police का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है। पुलिस ने यह भी कहा है कि निर्धारित भीड़ सीमा और कानून-व्यवस्था से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। भारी सुरक्षा की तैयारी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए Delhi Police और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मेट्रो स्टेशनों, कैब की आवाजाही, हिरासत केंद्रों और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं को लेकर आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। हिरासत में लिए जाने को लेकर आरोप 9 अक्टूबर को CJP ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आने वाले कई समर्थकों और छात्रों को हिरासत में लिया गया। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है, हालांकि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर अब सभी की नजर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन पर है। एक तरफ आयोजक इसे राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का अगला चरण बता रहे हैं, वहीं Delhi Police कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़ी शर्तों के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Indian Express, Reuters, Hindustan Times, The New Indian Express, The Quint, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Odisha में INDIA bloc का 12 घंटे का statewide bandh, mining law, textbook errors और SIR को लेकर विरोध

भुवनेश्वर: ओडिशा में 8 अक्टूबर 2026 को INDIA bloc की विभिन्न पार्टियों ने 12 घंटे का statewide bandh बुलाया। बंद सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है। प्रदर्शनकारी MMDR Amendment Act, school textbooks में कथित errors और electoral rolls की Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विरोध कर रहे हैं। बंद का असर कई जिलों में transport, shops, petrol pumps और educational institutions पर दिखाई दिया। सुबह 6 बजे से शुरू हुआ bandh Odisha bandh सुबह 6 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलना है। Congress, CPI, CPI(M), CPI(ML) Liberation, Forward Bloc, NCP (Sharad Pawar), Samajwadi Party, RJD और JMM समेत INDIA bloc की कई पार्टियां इसमें शामिल हैं। कई जिलों में सड़कें जाम Bhubaneswar, Cuttack, Bargarh, Bhadrak, Balasore, Rayagada, Kendrapara, Bolangir, Berhampur और Sambalpur समेत कई जगह demonstrations और road blockades किए गए। कुछ स्थानों पर protesters ने buses, trucks, taxis और autorickshaws को रोकने की कोशिश की और tyres भी जलाए गए। Public transport पर पड़ा असर Bandh का सबसे ज्यादा असर public transport पर देखने को मिला। कई जगह buses और autorickshaws कम चले, जिससे commuters, students और office-goers को परेशानी हुई। कुछ routes पर Ama Bus services भी प्रभावित हुईं। Shops और educational institutions भी बंद राज्य के कुछ हिस्सों में shops, business establishments, petrol pumps और educational institutions बंद रहे। हालांकि बंद का असर हर जिले में एक जैसा नहीं रहा। Essential services को रखा गया बाहर Hospitals, ambulances, fire services, pharmacies और milk supply जैसी essential services को bandh से बाहर रखा गया। Opposition parties ने कहा कि emergency services बाधित नहीं की जाएंगी। Mining law को वापस लेने की मांग INDIA bloc की प्रमुख मांगों में MMDR Amendment Act, 2026 को वापस लेना शामिल है। Opposition का आरोप है कि नया mining framework mineral-rich states के taxation rights को सीमित करता है। केंद्र इस कानून को uniform national framework से जोड़ता है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग Bandh में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। Opposition SIR को लेकर voter-list irregularities के आरोप लगा रहा है। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और revision को electoral rolls की accuracy सुधारने की प्रक्रिया बताता है। Textbook errors भी बड़ा मुद्दा Odisha school textbooks में बड़ी संख्या में errors को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा है। एक जांच panel ने करीब 1,700 से अधिक mistakes के पीछे weak academic scrutiny और unrealistic timelines जैसे कारण बताए थे। Nityananda Gond के इस्तीफे की मांग Opposition ने Odisha School and Mass Education Minister Nityananda Gond के इस्तीफे की भी मांग की है। यह मांग school textbooks में कथित गलतियों को लेकर उठाई गई है। BJD ने bandh से बनाई दूरी Biju Janata Dal ने इस bandh में हिस्सा नहीं लिया। BJD ने कहा कि वह BJP और Congress दोनों से समान दूरी बनाए रखेगी, हालांकि पार्टी mining law और textbook errors जैसे मुद्दों पर अलग से सरकार का विरोध कर चुकी है। पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा Odisha सरकार ने district collectors और police अधिकारियों को preventive measures लेने और law and order बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। Bhubaneswar-Cuttack Police Commissioner ने कहा कि protesters को constitutional rights के दायरे में प्रदर्शन करने की अनुमति है, लेकिन हिंसा या जबरन disruption बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंद का राजनीतिक असर यह bandh केवल state-level issues तक सीमित नहीं है। Mining rights, education और electoral roll revision जैसे मुद्दों को जोड़कर INDIA bloc ने इसे broader political protest के रूप में पेश किया है, जिससे Odisha की राजनीति में BJP सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। Source – India Today, The Economic Times, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, दिल्ली पुलिस ने पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और ड्यूटी में बाधा का लगाया आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर को हुए उस प्रदर्शन के बाद हुई, जिसमें विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा था। 7 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला मामला बुधवार को हुए INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। Opposition MPs और नेताओं ने Election Commission तथा CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई। राहुल-प्रियंका पर क्या आरोप हैं? Delhi Police की FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और उन्हें सरकारी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। Police sources के मुताबिक FIR में assault और obstruction से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। कई FIR दर्ज होने की बात पूरे protest episode से जुड़े मामलों में कम से कम तीन FIRs दर्ज की गई हैं। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिसकर्मी ने हमले का लगाया आरोप Delhi Police के constable Ankit Kasana ने आरोप लगाया कि protest के दौरान करीब 30-35 लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी uniform फाड़ी गई, उन्हें scratch किया गया और bite भी किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Viral videos की हो रही जांच Delhi Police protest के कई mobile और social media videos की जांच कर रही है। Police यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों ने कथित तौर पर personnel को obstruct या assault किया और किसकी क्या भूमिका थी। Akashvani Bhavan मामले में भी अलग FIR राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एक अलग FIR उस घटना को लेकर भी दर्ज की गई है जिसमें वे पुलिस द्वारा Election Commission march रोके जाने के बाद Akashvani Bhavan परिसर में चले गए थे। Delhi Police ने उस मामले में भी unauthorized entry और related allegations की जांच शुरू की है। कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए जवाबी आरोप Congress ने Delhi Police के आरोपों को एकतरफा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि police ने opposition MPs और workers के साथ force का इस्तेमाल किया और कई महिला नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ कथित बदसलूकी हुई। राहुल गांधी के कथित push पर भी विवाद एक viral video में राहुल गांधी और एक महिला police personnel के बीच interaction को लेकर भी विवाद हुआ। BJP ने इसे police officer को push करने का मामला बताया, जबकि Congress का कहना है कि राहुल गांधी एक महिला worker को बचाने की कोशिश कर रहे थे। CEC विरोध से जुड़ा पूरा मामला यह FIR उस व्यापक आंदोलन के बीच दर्ज हुई है जिसमें INDIA bloc Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Opposition SIR और voter-list revision को लेकर Election Commission पर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP और Election Commission इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। राहुल गांधी बोले—FIR से नहीं रुकेंगे Rahul Gandhi ने संकेत दिया है कि FIRs के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह CEC के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेंगे और FIRs को लेकर भी चुनौतीपूर्ण रुख दिखाया। आरोप अभी साबित नहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दर्ज FIRs में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं। आगे police investigation, video evidence और judicial process के बाद ही किसी criminal liability पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। Source – The Indian Express, India Today, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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“संविधान बचाने की लड़ाई में आप लोग जरूर आएं—10 अक्टूबर”: नेहा बोरा की अपील

नई दिल्ली: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP और कई student organisations ने 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। Organisers ने Delhi Police को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना भी दे दी है और nationwide mobilisation की अपील की है। नेहा बोरा ने लोगों से की अपील Press conference में Neha Bora ने छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और नागरिक समूहों से एकजुट होकर प्रदर्शन में शामिल होने को कहा। उन्होंने इसे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से जुड़ी लंबी लड़ाई बताया। CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar का इस्तीफा शामिल है। Organisers ने उनके खिलाफ criminal action की मांग भी उठाई है, हालांकि ये राजनीतिक और आंदोलनकारी मांगें हैं और किसी अदालत ने उनके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं किया है। SIR पर रोक की मांग Student groups और CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि voter-list revision से eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission इन आरोपों से इनकार करता रहा है और revision को voter rolls की accuracy सुधारने की प्रक्रिया बताता है। January 2025 Voter List बहाल करने की मांग Organisers ने January 2025 की voter list को restore करने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे voter deletion को लेकर उठे विवादों का समाधान हो सकता है। Election Commission Appointment Law पर भी सवाल प्रदर्शन से जुड़े समूह 2023 के Election Commission appointments law को भी बदलने की मांग कर रहे हैं। वे Chief Election Commissioner और Election Commissioners की नियुक्ति के लिए ज्यादा independent selection mechanism चाहते हैं। “लंबी लड़ाई” की तैयारी CJP co-convener Saurav Das ने supporters से कहा कि वे लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने संकेत दिया कि Gyanesh Kumar के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं होगा, क्योंकि focus wider electoral reforms पर है। कई छात्र संगठन साथ AISA के अलावा AISF, SFI और अन्य student groups ने भी 10 अक्टूबर के protest में भाग लेने की घोषणा की है। इससे प्रदर्शन के बड़े student mobilisation में बदलने की संभावना जताई जा रही है। Delhi Police के नियम भी लागू Delhi Police ने साफ किया है कि Jantar Mantar पर protest के लिए prior permission जरूरी है और gathering size पर भी limits लागू हैं। Police के अनुसार आमतौर पर 10 दिन पहले अनुमति लेनी होती है और एक समय में 1,000 से ज्यादा लोगों की gathering की अनुमति नहीं होती। हाल के प्रदर्शनों में कई लोग हिरासत में इससे पहले Jantar Mantar और Election Commission के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में कई student leaders, activists और opposition leaders को हिरासत में लिया जा चुका है। Neha Bora भी पिछले दिनों police detention का सामना कर चुकी हैं। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर अब सबसे ज्यादा नजर 10 अक्टूबर के Jantar Mantar protest पर रहेगी। Organisers इसे nationwide mobilisation का अगला बड़ा चरण बता रहे हैं, जबकि Delhi Police law and order और permission rules के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Quint, The New Indian Express, The Indian Express, Times of India, Jansatta जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” EC मार्च के दौरान कांग्रेस का तीखा हमला

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान तिरंगे को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा—“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। Election Commission की ओर जा रहा था मार्च INDIA bloc के सांसद संसद परिसर से Election Commission headquarters की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी SIR, voter list revision और Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका Opposition MPs को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले barricades लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। तिरंगे को लेकर हुई नोकझोंक प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी barricade के पास तिरंगा लेकर नजर आए। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने डंडे से चोट लगने की आशंका जताते हुए उसे हटाने की बात कही। विपक्षी नेताओं ने जवाब दिया कि यह “डंडा नहीं, झंडा” है। कांग्रेस ने मोदी-शाह पर साधा निशाना इसके बाद कांग्रेस के official social media account से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपनी पुलिस को “झंडे और डंडे का फर्क” समझाना चाहिए। “बल या छल से नहीं रोक पाएंगे” Congress ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। यह बयान Election Commission के खिलाफ चल रहे विरोध और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में दिया गया। राहुल गांधी ने भी पुलिस से की बहस वायरल वीडियो में राहुल गांधी पुलिस अधिकारी से पूछते दिखे कि अगर उन्हें वहां बैठने की अनुमति नहीं है तो आखिर वे विरोध कहां करें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस संविधान के प्रति जवाबदेह है और प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। प्रियंका गांधी भी हुईं मुखर प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पुलिस से बहस करती नजर आईं। Reports में यह लाइन उनके विरोध और कांग्रेस के social media messaging दोनों से जोड़कर सामने आई है। Akashvani Bhavan में हुआ धरना मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी Akashvani Bhavan परिसर में चले गए। वहीं विपक्षी नेताओं ने कई घंटे तक धरना जारी रखा और Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए लंबे विरोध के बाद Delhi Police ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद देर शाम प्रदर्शन खत्म कराया गया। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और प्रक्रिया को voter lists की accuracy सुधारने से जोड़ता है। राजनीतिक बयानबाजी और तेज “झंडे और डंडे” वाली टिप्पणी के बाद कांग्रेस और BJP के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध पर रोक लगाने का मामला बता रहा है, जबकि BJP ने Congress पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Times Now Navbharat / Aaj Tak / Prabhat Khabar / The Daily Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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EC मार्च में हाई ड्रामा, आकाशवाणी भवन में धरने पर राहुल-प्रियंका; घंटों चला विपक्ष-पुलिस का टकराव

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हाई ड्रामा देखने को मिला। पुलिस ने विपक्षी सांसदों को Nirvachan Sadan की ओर बढ़ने से रोका तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अचानक पास स्थित Akashvani Bhavan परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। कई घंटे चले इस विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। Election Commission तक जाना था मार्च INDIA bloc ने Parliament से Election Commission headquarters तक मार्च का आह्वान किया था। विपक्षी दल Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision यानी SIR को वापस लेने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने रास्ते में रोका Central Delhi में भारी barricading और security deployment किया गया था। जब सांसद Election Commission की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें Akashvani Bhavan के पास आगे जाने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया। राहुल-प्रियंका ने अचानक बदला रास्ता इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अचानक अपना रास्ता बदल दिया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों Akashvani Bhavan के खुले gate से परिसर में प्रवेश कर गए, जिससे पुलिस और वहां मौजूद विपक्षी नेताओं में भी कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना Akashvani Bhavan परिसर में पहुंचने के बाद राहुल और प्रियंका वहीं बैठ गए। बाद में KC Venugopal, Pawan Khera और अन्य Congress नेता भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। प्रदर्शन कई घंटे तक जारी रहा। आठ से नौ घंटे तक चला विरोध अलग-अलग reports में धरने की अवधि करीब आठ से नौ घंटे बताई गई है। इस दौरान Congress workers बाहर जमा होकर नारेबाजी करते रहे और अंदर मौजूद नेताओं ने Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। राहुल गांधी ने लोकतंत्र बचाने की कही बात धरने के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि वह Election Commission और voter-list revision से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने BJP और Election Commission पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और प्रदर्शन को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। EC बोला- formal meeting request नहीं मिली Election Commission ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की ओर से formal appointment request नहीं मिली थी। EC officials ने यह भी कहा कि इतने बड़े delegation के अचानक मिलने की मांग को स्वीकार करना सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शाम को पुलिस ने खत्म कराया धरना लंबे समय तक चले sit-in के बाद दिल्ली पुलिस ने Akashvani Bhavan परिसर से विपक्षी नेताओं को हटाना शुरू किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, KC Venugopal और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में हिरासत में लिए गए नेताओं को छोड़ दिया गया। Barricade पर चढ़े राहुल गांधी मार्च के दौरान राहुल गांधी के police barricade पर चढ़ने का दृश्य भी चर्चा में रहा। उन्होंने वहां तिरंगा लहराया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारा। इस दौरान विपक्ष और पुलिस के बीच कई जगह धक्का-मुक्की और नारेबाजी हुई। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि revision प्रक्रिया voter lists को अधिक accurate बनाने के लिए की जा रही है। INDIA bloc और सरकार के बीच बढ़ा टकराव इस घटना के बाद Election Commission और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद और गहरा गया है। जहां INDIA bloc CEC के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग पर कायम है, वहीं BJP ने विपक्ष पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-led NDA शासित सभी 21 राज्यों में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। मुंबई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया ऐलान अमित शाह ने यह बयान 13 सितंबर को मुंबई में आयोजित एक press conference में दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक और कानूनी समानता के एजेंडे के तहत UCC को आगे बढ़ा रही है। 21 NDA शासित राज्यों का किया जिक्र शाह ने कहा कि BJP-led NDA की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किए जाने को लेकर उन्हें भरोसा है। उन्होंने इसे अगले लोकसभा चुनाव से पहले पूरा किए जाने वाले बड़े policy goals में शामिल किया। क्या है Uniform Civil Code? Uniform Civil Code का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक कानूनों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान civil laws लागू करना है। फिलहाल इन मुद्दों पर अलग-अलग धार्मिक personal laws भी लागू होते हैं। Uttarakhand पहले ही लागू कर चुका UCC उत्तराखंड Uniform Civil Code लागू करने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल है। राज्य में विवाह, divorce, inheritance और live-in relationships समेत कई civil matters के लिए common legal framework तैयार किया गया है। Gujarat भी UCC की दिशा में आगे हाल में Gujarat ने भी Uniform Civil Code से जुड़े कानून को आगे बढ़ाया है। इससे BJP शासित राज्यों में UCC implementation को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा और तेज हुई है। Triple Talaq का भी किया जिक्र अमित शाह ने अपने बयान में triple talaq खत्म किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम बताया। BJP के core agenda में शामिल UCC Uniform Civil Code लंबे समय से BJP के प्रमुख ideological और political commitments में शामिल रहा है। पार्टी का तर्क है कि समान civil laws से gender equality और legal uniformity को बढ़ावा मिलेगा। विपक्ष लगातार उठाता रहा सवाल विपक्षी दल UCC के स्वरूप, implementation और राज्यों की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ दलों का कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी communities और stakeholders से व्यापक consultation जरूरी है। NRC पर अभी चर्चा जारी उसी press conference में अमित शाह ने NRC को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि nationwide NRC पर allies और अन्य stakeholders के साथ चर्चा जारी है, लेकिन इसकी कोई तय timeline नहीं बताई गई। 2029 से पहले बड़ा राजनीतिक लक्ष्य 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का बयान BJP के बड़े policy roadmap के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में कानून बनाने, legislative approval और judicial scrutiny जैसी प्रक्रियाओं के कारण implementation की timeline हर राज्य में अलग हो सकती है। source – The Indian Express / India Today / NDTV / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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