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One Nation One Election: 2029 लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों/UTs में चुनाव कराने के विकल्प पर NDA में मंथन

नई दिल्ली: देश में ‘One Nation, One Election’ यानी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक NDA अपने शासन वाले 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ कराने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम या औपचारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा One Nation One Election विधेयकों की व्यवस्था के हिसाब से देशभर में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया का सबसे शुरुआती व्यावहारिक समय 2034 बनता है। ऐसे में 2029 में ही NDA-शासित राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ कराने का विचार मौजूदा राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दे सकता है। 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर चर्चा इंडियन एक्सप्रेस की 23 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक NDA के पास ऐसे 22 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां उसके घटक दल सत्ता में हैं। इनमें से कई राज्यों के विधानसभा चुनाव 2027 और 2028 में होने हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि संबंधित राज्य सरकारें तैयार होती हैं तो विधानसभा का कार्यकाल समय से पहले समाप्त कर 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ नए चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए संबंधित राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व की सहमति बेहद महत्वपूर्ण होगी। चार राज्यों में पहले से Lok Sabha के साथ होते हैं चुनाव NDA के शासन वाले आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में विधानसभा चुनाव पहले से ही लोकसभा चुनाव के साथ होते हैं। इसलिए इन राज्यों के चुनावी कैलेंडर को 2029 लोकसभा चुनाव से जोड़ने के लिए अलग से विधानसभा कार्यकाल घटाने जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी। चुनौती उन राज्यों को लेकर होगी जहां विधानसभा चुनाव 2027 या 2028 में निर्धारित हैं। इन राज्यों को 2029 तक एक साथ चुनाव की व्यवस्था में लाने के लिए उनकी मौजूदा या अगली विधानसभा का कार्यकाल छोटा करना पड़ सकता है। किन राज्यों का कार्यकाल हो सकता है छोटा? रिपोर्ट के मुताबिक यदि 2029 में एक साथ चुनाव कराने का राजनीतिक फैसला होता है तो कई NDA-शासित राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल कम करना पड़ सकता है। गोवा, गुजरात, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अगला विधानसभा चुनाव 2027 के आसपास निर्धारित है। ऐसे में वहां चुनी जाने वाली अगली विधानसभा को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ तालमेल बैठाने के लिए सामान्य पांच साल से काफी कम कार्यकाल मिल सकता है। इसी तरह छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी चुनावी समय-सारिणी को 2029 से जोड़ने के लिए कार्यकाल में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह केवल विचाराधीन राजनीतिक विकल्प है और संबंधित राज्यों की ओर से ऐसा कोई सामूहिक औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। Constitution में विधानसभा भंग करने का क्या प्रावधान? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 172 के मुताबिक किसी राज्य की विधानसभा सामान्य परिस्थितियों में अपनी पहली बैठक से पांच साल तक चलती है, जब तक कि उसे इससे पहले भंग न कर दिया जाए। वहीं संविधान का अनुच्छेद 174(2)(b) राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की शक्ति प्रदान करता है। सामान्य संवैधानिक व्यवस्था में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के आधार पर इस शक्ति का प्रयोग करते हैं। यानी राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने की स्थिति में किसी विधानसभा का कार्यकाल पांच साल पूरा होने से पहले भी समाप्त हो सकता है। मौजूदा Bill में क्या है व्यवस्था? केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में Constitution (One Hundred and Twenty-Ninth Amendment) Bill, 2024 और Union Territories से जुड़ा एक अन्य विधेयक लोकसभा में पेश किया था। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की संवैधानिक व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्ताव के मुताबिक कानून लागू होने के बाद लोकसभा के आम चुनाव के बाद उसकी पहली बैठक की तारीख को राष्ट्रपति एक निर्धारित तारीख घोषित करेंगे। इसके बाद बनने वाली विधानसभाओं का कार्यकाल अगली लोकसभा के कार्यकाल के साथ समाप्त किया जा सकेगा, ताकि आगे लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। मौजूदा समय-सारिणी के हिसाब से इस प्रक्रिया के जरिए nationwide simultaneous elections की स्थिति 2034 में बनने की संभावना है। Joint Parliamentary Committee कर रही Bill की जांच One Nation One Election से जुड़े दोनों विधेयक फिलहाल संसद की Joint Committee के विचाराधीन हैं। इस समिति के अध्यक्ष BJP सांसद पी.पी. चौधरी हैं। समिति अलग-अलग राज्यों, राजनीतिक प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अन्य stakeholders से बातचीत कर रही है। 2029 में NDA-शासित राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ कराने के विकल्प पर पूछे जाने पर पी.पी. चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि यह फैसला संबंधित NDA मुख्यमंत्रियों का होगा और यह मुद्दा समिति के दायरे से बाहर है। कुछ NDA मुख्यमंत्रियों ने दिया समर्थन रिपोर्ट के मुताबिक One Nation One Election के सिद्धांत को कई NDA मुख्यमंत्री पहले ही समर्थन दे चुके हैं। गोवा, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने Parliamentary Committee के साथ चर्चा के बाद simultaneous elections के विचार के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी संकेत दिया था कि राष्ट्रीय चुनावी व्यवस्था के साथ तालमेल के लिए जरूरत होने पर दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल में उचित बदलाव पर सकारात्मक रूप से विचार कर सकती है। Congress ने फिर जताया विरोध विपक्ष One Nation One Election प्रस्ताव का लगातार विरोध करता रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी का रुख नहीं बदला है और कांग्रेस इस प्रस्ताव को संविधान तथा संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ मानती है। कांग्रेस और DMK समेत कई विपक्षी दलों ने 2024 में भी संसद में इन विधेयकों का विरोध किया था। विपक्ष का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों की सरकारों का कार्यकाल चुनावी कैलेंडर के हिसाब से छोटा करना संघीय व्यवस्था और राज्यों के जनादेश को प्रभावित कर सकता है। वहीं One Nation One Election के समर्थकों का कहना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाला खर्च, प्रशासनिक दबाव और Model Code of Conduct के कारण विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को एक साथ चुनाव कराकर कम किया जा सकता है। क्या 2029 से लागू हो…

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राहुल गांधी का पुणे दौरा; ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों से सीधा संवाद

पुणे: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। इस बार कार्यक्रम का खास फोकस छात्राओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला सुरक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आदिवासी छात्रों की समस्याओं समेत कई विषय उठे। राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय छात्रों की बातें सुनने और उनके सवालों का जवाब देने पर जोर दिया। छात्राओं ने उनके सामने उच्च शिक्षा में आने वाली बाधाओं, परिवार और समाज के दबाव, आर्थिक समस्याओं तथा सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा किए। महिला छात्राओं पर रहा कार्यक्रम का खास फोकस ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस की छात्र और युवा outreach initiative का हिस्सा है। पुणे में आयोजित इस संस्करण को मुख्य रूप से महिला छात्राओं के संवाद पर केंद्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि वह लंबा राजनीतिक भाषण देने के बजाय वहां मौजूद महिलाओं और छात्राओं की समस्याओं को सुनना चाहते हैं। कार्यक्रम में छात्राओं ने sexual harassment, personal safety, शिक्षा जारी रखने में आर्थिक दिक्कत और विवाह तथा घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई प्रभावित होने जैसे विषय उठाए। महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर राहुल गांधी का जोर अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल बेटी, बहन, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं को अपने फैसले लेने, शिक्षा हासिल करने, रोजगार चुनने और सामाजिक जीवन में अपनी जगह बनाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की बात कही। राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान Manusmriti का जिक्र करते हुए महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों पर निर्भर मानने वाली सोच की आलोचना भी की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। MPSC अभ्यर्थी ने राहुल गांधी के सामने रखी समस्या कार्यक्रम में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने भी अपनी परेशानी राहुल गांधी के सामने रखी। छात्रा ने हालिया परीक्षा से जुड़े कथित paper leak और दोबारा परीक्षा कराने की मांग का जिक्र किया। उसने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण महिला अभ्यर्थियों को परिवार और विवाह से जुड़े अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी ने MPSC उम्मीदवारों की मांग को समर्थन देने का भरोसा दिया। आदिवासी छात्राओं ने भी उठाए गंभीर मुद्दे पुणे कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। एक आदिवासी छात्रा ने राहुल गांधी को बताया कि पुणे के मांजरी क्षेत्र में छात्र सरकारी आदिवासी हॉस्टलों से जुड़े नियमों और सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रा ने सरकारी हॉस्टलों में रहने की age limit बढ़ाने, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पीने के पानी, beds और healthcare facilities जैसे मुद्दे उठाए। उसने आश्रम स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल किए। इस पर राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही और जरूरत पड़ने पर उनके साथ आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई। शिक्षा और रोजगार भी चर्चा के केंद्र में कार्यक्रम में केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। छात्राओं और professional women ने शिक्षा, courses, employment opportunities और financial independence से जुड़े सवाल भी रखे। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए और सामाजिक दबाव उनके करियर की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और सामाजिक भेदभाव भी प्रमुख विषय रहे। कार्यक्रम से पहले 30 शर्तों के साथ मिली थी अनुमति राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को लेकर आयोजन से पहले भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पुणे पुलिस ने 22 अगस्त के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। इनमें noise pollution नियमों का पालन, drones के इस्तेमाल पर रोक और आपत्तिजनक banners या सामग्री न लगाने जैसी शर्तें शामिल थीं। कांग्रेस की पुणे इकाई ने दावा किया था कि कार्यक्रम के लिए 30,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन registration कराया था। यह संख्या कांग्रेस की ओर से किया गया दावा था। BJP ने कार्यक्रम को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर BJP और Congress के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। महाराष्ट्र BJP ने कार्यक्रम की funding को लेकर सवाल उठाए और कांग्रेस पर आयोजन में लोगों को जुटाने के लिए पैसे खर्च करने के आरोप लगाए। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम को युवाओं से मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है। कार्यक्रम के एक दिन पहले पुणे की COEP Technological University के hostel के बाहर ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच तनाव और झड़प की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच की कोशिश राजनीतिक दृष्टि से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस की युवा और छात्र वर्ग से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पुणे के कार्यक्रम में खास तौर पर महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और स्वतंत्रता को केंद्र में रखा गया। राहुल गांधी ने छात्राओं के सवालों को सीधे सुनकर उनके जवाब दिए और कुछ आंदोलनों को समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। अब इस कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के Manusmriti, महिला अधिकारों और छात्र समस्याओं पर दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJP नेताओं ने कार्यक्रम और राहुल गांधी के बयानों की आलोचना की है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश बता रही है। फिलहाल 22 अगस्त को पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्राओं के साथ राहुल गांधी के सीधे संवाद, MPSC परीक्षा विवाद और आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों के कारण चर्चा में बना हुआ है। स्रोत – पीटीआई, इंडिया टुडे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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PM Modi ने तेज सुधारों का दिया संकेत, कहा- भारत की ‘Reform Express’ और तेजी से आगे बढ़ेगी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की रफ्तार और तेज करने का संकेत दिया है। Economic Times World Leaders Forum 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में सरकार की ‘Reform Express’ और अधिक गति से आगे बढ़ेगी। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों को लगातार आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरकार युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए लगातार काम करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण है। ‘Reform Express’ और तेजी से आगे बढ़ेगी अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान में अगली पीढ़ी के सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें कारोबार करना आसान हो और आम नागरिकों के जीवन में भी सुधार आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार Ease of Living और Ease of Doing Business दोनों क्षेत्रों में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और नागरिकों के बीच संबंध शक के बजाय भरोसे पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सुधारों की यह प्रक्रिया और तेज होगी और सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी। ‘Prohibited Unless Permitted’ से बदल रहा नियमों का नजरिया प्रधानमंत्री मोदी ने देश की नियामक व्यवस्था में बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले नियमों को लेकर सोच ‘Prohibited Unless Permitted’ यानी अनुमति मिलने तक किसी गतिविधि को प्रतिबंधित मानने जैसी थी। सरकार अब इसे बदलकर ‘Permitted Unless Prohibited’ की दिशा में ले जा रही है। इसका अर्थ है कि जो काम कानूनन प्रतिबंधित नहीं हैं, उन्हें करने के लिए कारोबारियों और नागरिकों को अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े। पीएम मोदी ने Jan Vishwas जैसे कदमों, पुराने कानूनों को हटाने और कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार नागरिकों और उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करने की दिशा में काम कर रही है। उत्पादन बढ़ाने वालों को अब प्रोत्साहन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की औद्योगिक नीति में आए बदलाव को समझाते हुए पुराने दौर और वर्तमान व्यवस्था की तुलना की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब निर्धारित सीमा से ज्यादा उत्पादन करने वाली कंपनियों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री ने इसे ‘Production Linked Punishment’ की सोच बताया। उन्होंने इसकी तुलना मौजूदा Production Linked Incentive (PLI) व्यवस्था से की, जिसके तहत अधिक उत्पादन और विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया जाता है। पीएम मोदी के मुताबिक सरकार का नजरिया उद्योगों को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने में सक्षम बनाने का है। दुनिया भारत को ‘Bright Spot’ के रूप में देख रही: PM Modi प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया कई तरह की अनिश्चितताओं और अविश्वास के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के रणनीतिक इस्तेमाल और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भी दुनिया भारत को विकास और उम्मीद के एक मजबूत केंद्र के रूप में देख रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता देश की बड़ी ताकत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। विकसित भारत के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों पर जोर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए सात महत्वपूर्ण क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा सॉफ्ट पावर शामिल हैं। प्रधानमंत्री का कहना है कि इन क्षेत्रों में सुधार और निवेश भारत को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत की मजबूती से दुनिया को भी मिलेगी स्थिरता पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत जितना स्थिर और सुरक्षित होगा, दुनिया को स्थिरता देने की उसकी क्षमता उतनी ही मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं, नारी शक्ति, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के हित में लगातार काम करती रहेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुधारों की रफ्तार को और तेज किया जाएगा। प्रधानमंत्री के इस बयान को सरकार की आने वाली आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में केंद्र सरकार किन क्षेत्रों में नए सुधारों और नीतिगत बदलावों की घोषणा करती है। स्रोत – प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), द इंडियन एक्सप्रेस, द इकोनॉमिक टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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जयपुर में CJP नेता आशुतोष रांका और टीम पर हमले का आरोप; VIDEO चर्चा में, दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके में सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची CJP की टीम के साथ कथित मारपीट और पथराव का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। CJP के नेता और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि उनकी टीम पर हमला किया गया, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मामला जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव का है, जहां CJP की टीम अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की स्थिति देखने पहुंची थी। सरकारी स्कूल देखने पहुंची थी CJP की टीम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामपुरा-कंवरपुरा का सरकारी प्राथमिक विद्यालय पर्याप्त भवन और सुविधाओं की समस्या से जूझ रहा है। स्कूल से जुड़ी बदहाल परिस्थितियों को लेकर CJP की टीम वहां पहुंची थी। टीम का आरोप है कि जब वे स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे तो कुछ ग्रामीणों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला धक्का-मुक्की तथा कथित मारपीट तक पहुंच गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे लोगों ने टीम पर पत्थर फेंके और गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रांका ने दावा किया कि इस दौरान उनके कपड़े भी फाड़े गए। आशुतोष रांका ने लगाया सुनियोजित हमले का आरोप घटना के बाद आशुतोष रांका ने इसे अचानक हुआ विवाद मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि हमला पहले से योजनाबद्ध था। उन्होंने दावा किया कि हमला करने वालों में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें एक दिन पहले स्थानीय भाजपा विधायक के साथ देखा गया था। CJP की ओर से सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की गईं और इन तस्वीरों के आधार पर राजनीतिक संबंध होने का दावा किया गया। हालांकि इन आरोपों को संबंधित भाजपा विधायक की ओर से खारिज किया गया है। BJP विधायक ने आरोपों पर किया पलटवार बगरू से भाजपा विधायक कैलाश वर्मा ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीण पहले ही बाहरी लोगों के गांव और स्कूल में प्रवेश को लेकर आपत्ति जता चुके थे। विधायक ने कहा कि CJP कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों से बैठकर बातचीत करनी चाहिए थी और स्थिति को तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहिए था। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार विधायक ने यह भी स्वीकार किया कि जिस लालचंद नाम के व्यक्ति को लेकर CJP भाजपा से संबंध का दावा कर रही है, वह भाजपा कार्यकर्ता है, लेकिन उन्होंने हमले की किसी राजनीतिक साजिश के आरोप से इनकार किया। दोनों पक्षों की ओर से FIR मामले में अब कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। पुलिस के पास दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। CJP की शिकायत में टीम को रोकने, मारपीट, धमकी और तोड़फोड़ जैसे आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर ग्रामीण पक्ष ने भी CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग गांव में आकर हंगामा करने की कोशिश कर रहे थे और रोकने पर विवाद हुआ। जयपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। CJP ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम हमले के आरोपों के बाद CJP ने राजस्थान सरकार के सामने कड़ा रुख अपनाया है। आशुतोष रांका और पार्टी से जुड़े नेताओं ने मांग की है कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और संबंधित सरकारी स्कूल में सुधार तथा निर्माण का काम शुरू कराया जाए। CJP ने इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। स्कूल की स्थिति भी बनी बड़ा मुद्दा मारपीट और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उस सरकारी स्कूल की स्थिति भी चर्चा में आ गई है, जिसे देखने CJP की टीम पहुंची थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि स्कूल पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण बेहद खराब परिस्थितियों में संचालित हो रहा है। CJP का कहना है कि उसका अभियान सरकारी स्कूलों की ऐसी समस्याओं को सामने लाने के लिए चलाया जा रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद के साथ-साथ राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वीडियो और तस्वीरों को लेकर बढ़ी चर्चा घटना से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों में सामने आए हैं। इनमें मौके पर विवाद और तनाव की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किस पक्ष की थी और हमला योजनाबद्ध था या विवाद के दौरान स्थिति बिगड़ी, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल CJP और स्थानीय ग्रामीण एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और मामले ने राजस्थान की राजनीति को भी गरमा दिया है। नोट: इस खबर में लगाए गए हमले और राजनीतिक साजिश से जुड़े आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। मामले की पुलिस जांच जारी है। स्रोत – टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी, नवभारत टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—‘मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया’, जातिगत भेदभाव का दावा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े कार्यक्रम में उन्हें पूजा-अर्चना में शामिल नहीं होने दिया गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या है पूरा मामला? मामला लखनऊ के काकोरी क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर का है। मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को लेकर भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में विधायक जय देवी कौशल के साथ भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। जय देवी कौशल का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पूजा शुरू हो गई, लेकिन उन्हें उसमें विधिवत शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक वह पूजा के दौरान खड़ी रहीं और उन्हें पूजा-अर्चना से जुड़े कई धार्मिक कार्यों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला। विधायक का कहना है कि उन्हें ईंट छूने, रोली लगाने, अगरबत्ती जलाने और नारियल फोड़ने जैसे भूमिपूजन से जुड़े कार्यों से भी दूर रखा गया। विधायक ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप जय देवी कौशल पासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ हुआ व्यवहार उनकी जाति से जुड़ा हुआ था। विधायक ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह सामाजिक समानता को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जय देवी कौशल ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले को भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने उठाएंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत हुई थी राशि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की सरकारी राशि स्वीकृत कराए जाने में विधायक की भूमिका रही है। विधायक के पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जाहिर की है। रिपोर्टों के अनुसार एक अन्य धार्मिक स्थल के लिए भी लगभग ₹70 लाख की राशि स्वीकृत कराई गई थी। दोनों परियोजनाओं की रकम को मिलाकर कुछ रिपोर्टों में लगभग ₹1.5 करोड़ की राशि का उल्लेख किया गया है। ऐसे में विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि विधायक ने मंदिर के विकास के लिए सरकारी धन स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है और उसी कार्यक्रम में स्वयं के साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया है। परिवार ने भी जताई नाराजगी मामले पर जय देवी कौशल के बेटे विकास किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के साथ भेदभाव को गलत बताया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पूरे समाज की आस्था के केंद्र होते हैं और वहां किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज विधायक के आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष की ओर से भी घटना को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि जातिगत भेदभाव के आरोप विधायक की ओर से लगाए गए हैं। घटना को लेकर संबंधित पुजारी या मंदिर प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। सामाजिक भेदभाव पर फिर उठे सवाल इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और धर्म, जाति तथा अन्य आधारों पर भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप सामने आना संवेदनशील मामला माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व, स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है। नोट: यह खबर विधायक जय देवी कौशल और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—“मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया”

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर में जीर्णोद्धार और भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद से BJP विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि उन्हें मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती में शामिल होने से रोका गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव का मामला बताते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से शिकायत करने की बात कही है। विधायक ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप जय देवी कौशल के मुताबिक, वह मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। उनका आरोप है कि वहां पूजा की व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें अनुष्ठान में बैठने नहीं दिया गया और वह खड़ी रहीं। विधायक ने दावा किया कि उन्हें अगरबत्ती जलाने और नारियल चढ़ाने तक की अनुमति नहीं दी गई। विधायक का कहना है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार उनकी पासी समाज की पृष्ठभूमि के कारण किया गया। उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि वह मामले को BJP के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट दिलाने का दावा रिपोर्टों के अनुसार, जय देवी कौशल के प्रयासों से काकोरी के शीतला मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, एक अन्य मंदिर के निर्माण के लिए भी करीब ₹70 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। इसी वजह से विधायक और उनके समर्थकों ने सवाल उठाया है कि जिस विकास कार्य के लिए सरकारी बजट स्वीकृत कराने में विधायक की भूमिका रही, उसी कार्यक्रम में उन्हें पूजा में शामिल होने से क्यों रोका गया। मंदिर के पुजारी ने आरोपों को बताया गलत विवाद के बीच मंदिर के पुजारी शैलेंद्र बाजपेई ने विधायक के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंदिर में किसी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और सभी वर्गों के लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। पुजारी के अनुसार, भूमिपूजन और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित पूजा पद्धति और परंपरा के अनुसार कराया गया था। इसलिए विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को मंदिर की सामान्य व्यवस्था से जोड़ना सही नहीं है। मामला राजनीतिक चर्चा में आया विधायक के आरोप और मंदिर पक्ष की सफाई के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जय देवी कौशल इसे जातिगत भेदभाव बता रही हैं, वहीं मंदिर प्रबंधन आरोपों से इनकार कर रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, इसलिए जातिगत भेदभाव के आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। BJP नेतृत्व तक पहुंचेगा मामला जय देवी कौशल ने कहा है कि वह इस पूरे मामले की शिकायत BJP के वरिष्ठ नेतृत्व और आलाकमान से करेंगी। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या मामले की कोई औपचारिक जांच कराई जाती है। यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर समान प्रवेश, सामाजिक भेदभाव और राजनीतिक प्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर नई बहस को जन्म दे सकती है। स्रोत: आजतक, लाइव हिन्दुस्तान, अमर उजाला, UP Tak, दैनिक जागरण Jai Rashtra News

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प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का अनावरण; VIDEO वायरल होते ही मचा बवाल, आयोजकों से अलग हुआ प्रेस क्लब

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के कटआउट के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते लोग दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम में ‘जय जय मोदी’ और ‘हर हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नरेंद्र मोदी की तस्वीर/कटआउट को भगवान राम के स्वरूप में दिखाया गया है। मंच पर इसी तस्वीर के सामने आरती की गई और ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने धार्मिक अंदाज में नारे भी लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और प्रेस क्लब परिसर में हुए इस आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे। बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड से जुड़े पदाधिकारी रहे मौजूद रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे। राजन सिंह इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पटना में मंदिर बनाने की घोषणा को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। आयोजन में ‘मोदी चालीसा’ को प्रस्तुत करने के साथ उसका पाठ भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भगवान श्रीराम के स्वरूप में प्रदर्शित करने वाली तस्वीर भी दिखाई गई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने किया किनारा विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम उसकी ओर से आयोजित नहीं किया गया था। क्लब के अनुसार, एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए हॉल किराये पर लिया था, लेकिन वहां आयोजित गतिविधि ने बुकिंग की शर्तों का उल्लंघन किया। जानकारी मिलते ही क्लब अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रुकवा दिया। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा आयोजन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। VIDEO वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस शुरू हो गई है। आलोचक इसे राजनीतिक व्यक्तिपूजा का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों की ओर से इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रेस क्लब की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने के बाद विवाद का केंद्र अब आयोजकों द्वारा क्लब की बुकिंग की शर्तों के कथित उल्लंघन और कार्यक्रम की प्रकृति पर है। सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है मामला? प्रधानमंत्री की तस्वीर के सामने आरती, धार्मिक शैली में ‘मोदी चालीसा’ का पाठ और ‘जय जय मोदी’ जैसे नारों वाले वीडियो ने कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया। इसी वजह से यह मामला आज की Trending Political News में शामिल हो गया है। फिलहाल प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि उसने इस आयोजन का समर्थन या आयोजन नहीं किया था और नियमों के उल्लंघन के बाद कार्यक्रम को रोक दिया गया। स्रोत: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान, द लल्लनटॉप, अमर उजाला Jai Rashtra News

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PM CARES Fund के पैसे से स्कूल बनाने की मांग! ₹8,452 करोड़ के फंड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: PM CARES Fund में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि को ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में इस्तेमाल करने की मांग उठी है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाए। ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का मुद्दा डिपके ने अपनी ‘School Thik Karo’ मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को बेहतर सड़क, बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में फंड की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ PM CARES Fund में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा स्कूलों का दावा डिपके के मुताबिक अगर एक आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हों, तो ₹8,500 करोड़ की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। हालांकि, यह आंकड़ा डिपके का अनुमान है और इसे सरकार की स्वीकृत स्कूल-निर्माण योजना नहीं माना जाना चाहिए। PM CARES Fund में कितनी रकम है? नवीनतम ऑडिट आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 को PM CARES Fund का बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था। यह राशि 2023-24 के करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस से काफी अधिक है। फंड की करीब 93% राशि यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में थी। वित्त वर्ष 2024-25 में फंड से कुल भुगतान करीब ₹87.85 लाख दर्ज हुआ, जिससे फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। क्या PM CARES का पैसा स्कूलों पर खर्च किया जा सकता है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। PM CARES Fund का घोषित उद्देश्य मुख्य रूप से आपात स्थितियों, आपदाओं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसके उद्देश्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान भी हैं, लेकिन सामान्य स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग से मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए PM CARES की राशि से सामान्य स्कूल निर्माण किया जा सकता है या नहीं, यह फंड के घोषित उद्देश्यों और Board of Trustees की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। BJP ने मांग पर जताई आपत्ति इस मांग के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। BJP ने कहा कि PM CARES Fund का उद्देश्य आपातकालीन और आपदा राहत है और इसे सामान्य स्कूल निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की मांग फंड के मूल उद्देश्य को नहीं समझती। यानी फिलहाल यह सरकार की घोषित योजना नहीं, बल्कि अभिजीत डिपके की मांग है। PM CARES Fund फिर चर्चा में ₹8,452 करोड़ के बड़े कॉर्पस, FY25 में बेहद कम भुगतान और अब ग्रामीण स्कूलों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की मांग ने PM CARES Fund को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार या PM CARES Fund का ट्रस्ट बोर्ड इस सुझाव पर कोई विचार करता है या स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के जरिए ही फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Report, PTI, Hindustan Times, New Indian Express, Times of India Jai Rashtra News

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PM CARES Fund: ₹8,452 करोड़ का फंड, FY25 में खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख!

नई दिल्ली: PM CARES Fund एक बार फिर चर्चा में है। ताजा ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इससे सिर्फ ₹87.85 लाख के भुगतान दर्ज हुए। आंकड़े सामने आने के बाद फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 93% रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में ऑडिट आंकड़ों के अनुसार फंड की करीब ₹7,846.65 करोड़ राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में थी, जबकि लगभग ₹605.41 करोड़ सेविंग बैंक खातों में रखे गए थे। यानी कुल बैलेंस का लगभग 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में था। FY2024-25 में फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब ₹469.38 करोड़ ब्याज भी मिला। ब्याज आय फंड की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की प्रमुख वजहों में शामिल रही। ₹87.85 लाख में ज्यादातर रकम बच्चों की योजना पर वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES से कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ। इसमें लगभग पूरी राशि यानी ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के तहत खर्च हुई। पिछले वित्त वर्ष में कुल भुगतान करीब ₹15.6 करोड़ था। ₹8,452 करोड़ के क्लोजिंग बैलेंस की तुलना में FY25 का यह भुगतान करीब 0.01% है। हालांकि, यह सिर्फ एक वित्त वर्ष के भुगतान और उस वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस की तुलना है; इसे फंड की स्थापना से अब तक के कुल खर्च का प्रतिशत नहीं माना जाना चाहिए। फंड का बैलेंस एक साल में बढ़ा PM CARES का बैलेंस FY2023-24 में करीब ₹7,173 करोड़ था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर ₹8,452 करोड़ से ज्यादा हो गया। इसी अवधि में घरेलू स्वैच्छिक योगदान करीब ₹479 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह करीब ₹682 करोड़ था। बैलेंस बढ़ने में ब्याज आय और अन्य वित्तीय मदों की भी अहम भूमिका रही। खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज ताजा आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष और अन्य आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े फंड के मुकाबले FY25 में खर्च इतनी कम क्यों रही। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ₹87.85 लाख के खर्च और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी बड़ी राशि को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, फंड के समर्थक पक्ष से यह तर्क सामने आया है कि PM CARES का उद्देश्य आपात स्थितियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध रखना है और किसी एक वित्त वर्ष में कम खर्च होना अपने आप में वित्तीय अनियमितता साबित नहीं करता। PM CARES Fund क्या है? Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations (PM CARES) Fund की स्थापना मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी। यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में काम करता है और इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान करना है। ताजा ऑडिट आंकड़ों ने एक बार फिर फंड के बड़े कॉर्पस, कम वार्षिक भुगतान और निवेश पैटर्न को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Statement, India Today, PTI, Tribune India Jai Rashtra News

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