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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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नेहा बोरा की हिरासत पर उठे सवाल, महिला प्रदर्शनकारियों से पुलिस के व्यवहार का वीडियो वायरल

नई दिल्ली | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर बहस तेज हो गई है। नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और हिरासत के दौरान असुविधाजनक परिस्थितियों में रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बस तक पहुंचाया 11 अक्टूबर को आरके आश्रम और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को एक साथ कई पुलिसकर्मियों ने पकड़कर बसों तक पहुंचाया। इन घटनाओं के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के तरीके और प्रदर्शनकारियों को संभालने में इस्तेमाल किए गए बल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे। नेहा बोरा दोबारा हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को 10 अक्टूबर को दिल्ली हाट के पास हुए मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। हिरासत की परिस्थितियों पर नेहा बोरा के आरोप 11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बेहद तंग परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि बस के भीतर लोगों के लिए सांस लेने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी। ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं है। महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में महिला पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते देखा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि बिना अनुमति आयोजित सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना की पूरी परिस्थितियों या बल प्रयोग की आवश्यकता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। पहले की हिरासत में भी प्रक्रिया पर विवाद 4 अक्टूबर को नेहा बोरा की एक अन्य हिरासत के दौरान AISA ने आरोप लगाया था कि उन्हें जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस आरोप को निराधार बताया था। इस प्रकार, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं। फोन और बैग को लेकर भी सामने आए दावे AISA ने पहले की हिरासत के बाद आरोप लगाया था कि नेहा बोरा का फोन और बैग उन्हें वापस नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया था। इस मामले में भी आरोप और पुलिस के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान को लेकर विवाद का स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं होता। महिला कंटेंट क्रिएटर ने भी लगाया था आरोप नेहा बोरा की पहले की हिरासत का वीडियो बना रही एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर मारपीट और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की थी। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस के व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ाईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बस को घेरा 10 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को घेर लिया, जिसमें उन्हें ले जाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाने लगे, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ एकत्र होने से रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने सुरक्षा तैनाती, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों के रूप में बताया। ‘गलत नेहा’ को हिरासत में लेने का मामला 11 अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई के दौरान पहचान को लेकर भ्रम की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, आरके आश्रम इलाके में पुलिस ने पहले नेहा बोरा जैसी दिखने वाली दूसरी महिला को हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि नेहा बोरा उस समय कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें बाद में विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस की प्रदर्शन-प्रबंधन रणनीति पर बढ़ी निगरानी लगातार हिरासत, बसों में प्रदर्शनकारियों को रखे जाने की परिस्थितियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग के बावजूद एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते एहतियाती कार्रवाई आवश्यक थी। निष्पक्ष जांच की मांग कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सामने आए वीडियो तथा पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे। जब तक किसी आधिकारिक या स्वतंत्र जांच में निष्कर्ष सामने नहीं आते, हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान हिरासत में, मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

मुंबई | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ उनकी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन और अभिनेत्री जायन मैरी भी अगस्त क्रांति मैदान के बाहर प्रदर्शन में शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में 400 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे थे इमरान खान अभिनेता इमरान खान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। यह प्रदर्शन दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था। पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान इमरान खान समेत कई अन्य लोग भी पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए। लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी भी हिरासत में इमरान खान के साथ लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, जायन मैरी ने बाद में पुलिस वैन के अंदर से एक वीडियो साझा किया, जिसमें हिरासत के दौरान की स्थिति दिखाई गई। मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में मुंबई में विभिन्न स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान से ही करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि हुतात्मा चौक और अन्य स्थानों पर एकत्र हुए समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। तुषार गांधी भी लिए गए हिरासत में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी 10 अक्टूबर को बांद्रा से हिरासत में लिया गया था। वह ‘हम भारत के लोग’ के माध्यम से लोगों से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला मुंबई पुलिस के अनुसार, अगस्त क्रांति मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं माना गया था और वहां प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। CJP और उसके समर्थकों ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और हेरफेर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये आरोप विवादित हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। रिहाई के बाद इमरान खान ने कहा ‘जय हिंद’ रिपोर्टों के अनुसार, कुछ घंटों की हिरासत के बाद इमरान खान, लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को रिहा कर दिया गया। बाहर निकलने के बाद इमरान खान ने मीडिया के सामने संक्षेप में “जय हिंद” कहा और वहां से चले गए। जायन मैरी ने चोट लगने का दावा किया 12 अक्टूबर को जायन मैरी ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें चोटें आईं। यह उनका आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में चोट लगने की परिस्थितियों पर पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं था। फिल्मी हस्तियों ने भी दी प्रतिक्रिया प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार, विजय वर्मा, हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने प्रदर्शन और असहमति जताने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट साझा किए। मुंबई के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई अगस्त क्रांति मैदान के अलावा शिवाजी पार्क समेत कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत जमावड़े को रोकना और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना था। दिल्ली से कई शहरों तक फैला आंदोलन 10 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के अलावा बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शनों और हिरासत की खबरें सामने आईं। हिरासत में लिया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं इमरान खान और अन्य प्रदर्शनकारियों को एहतियाती हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया। किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाना अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन मुंबई में भी तेज, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया

मुंबई: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में चल रहा CJP आंदोलन अब मुंबई में भी तेज हो गया है। शहर में प्रदर्शन के लिए जुटे कई activists और supporters को Mumbai Police ने हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि gathering को निर्धारित permission नहीं मिली थी और law-and-order बनाए रखने के लिए preventive action किया गया। मुंबई में CJP समर्थकों का प्रदर्शन CJP और उससे जुड़े activists ने मुंबई में Election Commission और SIR process के खिलाफ प्रदर्शन करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग उठाई और electoral rolls से जुड़े कथित irregularities पर सवाल किए। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया Protest शुरू होने के दौरान Mumbai Police ने कई लोगों को preventive detention में लिया। Reports के मुताबिक protesters को police vehicles में बैठाकर local police stations ले जाया गया और बाद में प्रक्रिया पूरी होने पर कई लोगों को छोड़ दिया गया। Permission नहीं मिलने का हवाला Mumbai Police का कहना है कि protest को formal permission नहीं दी गई थी। Authorities ने crowd movement, traffic disruption और public order concerns का हवाला देते हुए gathering को रोकने की कार्रवाई की। “लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक” का आरोप दूसरी तरफ CJP supporters ने police action की आलोचना की। उन्होंने कहा कि peaceful protest करना constitutional right है और preventive detentions के जरिए dissent को दबाया जा रहा है। यह protesters का आरोप है। Pune के बाद Mumbai में भी कार्रवाई महाराष्ट्र में CJP protest को लेकर सिर्फ Mumbai में ही नहीं, Pune में भी police action हुआ है। Pune में भी 80 से ज्यादा protesters को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे साफ है कि Maharashtra के कई शहरों में आंदोलन तेज हुआ है। SIR को लेकर क्या है CJP की मांग? CJP का आरोप है कि Special Intensive Revision के दौरान voter lists में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। संगठन SIR को रोकने और CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और revision exercise को electoral rolls को अधिक accurate बनाने की प्रक्रिया बताता है। Delhi से शुरू हुआ आंदोलन कई शहरों तक पहुंचा 10 अक्टूबर को Delhi के Jantar Mantar protest के बाद CJP ने दूसरे शहरों में भी demonstrations जारी रखने की बात कही थी। इसके बाद Mumbai, Pune और अन्य जगहों पर supporters के जुटने और detentions की खबरें सामने आईं। Mumbai Police की अतिरिक्त तैनाती Protest को देखते हुए sensitive locations पर police deployment बढ़ाया गया। Authorities ने किसी भी unauthorized march या बड़ी gathering को रोकने के लिए barricading और monitoring बढ़ाई। आंदोलन और तेज करने का दावा CJP leaders का कहना है कि detentions के बावजूद agitation जारी रहेगा। उनका दावा है कि यह केवल एक शहर या एक दिन का protest नहीं, बल्कि electoral accountability को लेकर nationwide campaign है। आरोप और आधिकारिक पक्ष दोनों अहम Protesters police action को democratic rights पर restriction बता रहे हैं, जबकि authorities इसे public order बनाए रखने के लिए preventive measure बता रही हैं। SIR और Election Commission को लेकर लगाए जा रहे आरोप अभी राजनीतिक और कानूनी विवाद का हिस्सा हैं और इनके अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र जांच या judicial scrutiny से ही तय होंगे। source – The Times of India / Reuters / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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पुणे में भी CJP आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, 80 से 85 प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुणे | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में चल रहे CJP आंदोलन पर पुणे में भी पुलिस ने कार्रवाई की। रविवार को फर्ग्यूसन कॉलेज रोड स्थित कलाकार कट्टा और गुड लक चौक के पास प्रदर्शन के लिए जुटे करीब 80 से 85 कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई की गई। बिना अनुमति जुटे प्रदर्शनकारी CJP ने पुणे में SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। आयोजकों ने डेक्कन पुलिस स्टेशन में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद रविवार शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शनकारी कलाकार कट्टा के आसपास एकत्र होने लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया गया पुणे पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान करीब 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में 85 लोगों का उल्लेख है, जबकि द इंडियन एक्सप्रेस ने लगभग 80 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है। शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाए गए प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस वैन से शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले के अनुसार, आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रदर्शनकारियों को उसी रात करीब 8 बजे रिहा कर दिया गया। लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई पुणे में CJP समर्थकों के खिलाफ यह लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई थी। इससे पहले शनिवार को शानिवारवाड़ा से पुणे कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश के दौरान भी 80 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उस मार्च को भी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जुटे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर लश्कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया। गुड लक चौक के पास कुछ देर तनाव रविवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पास के गुड लक होटल में भी चले गए, जिससे वहां कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल CJP कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक बताया। संगठन से जुड़े हर्षल लोणकर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने के कुछ ही समय बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रिहाई के बाद कुछ समर्थकों ने फर्ग्यूसन कॉलेज के मुख्य द्वार तक मार्च किया। पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई बताया पुणे पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोगों के एकत्र होने और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के चलते कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच मतभेद सामने आए हैं। CEC के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग पुणे में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग उठाई। आंदोलन से जुड़े समूहों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। मुंबई और पुणे में भी प्रदर्शन CEC और SIR के विरोध में महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे समेत विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं के बीच आंदोलन का दायरा दिल्ली से बाहर भी चर्चा में आया है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और हिरासत की घटनाओं के बाद विभिन्न शहरों में आंदोलन जारी रहने से चुनावी सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हुई है। स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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चुनावी खर्च का खुलासा: 5 राज्यों में कांग्रेस ने खर्च किए ₹136.94 करोड़, उम्मीदवारों पर गया सबसे ज्यादा पैसा

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनावी खर्च को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग (Election Commission of India) को सौंपी गई खर्च संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित खर्च पर गया, जबकि स्टार प्रचारकों की यात्राओं और मीडिया विज्ञापनों पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पांच राज्यों में ₹136.94 करोड़ का कुल खर्च चुनाव आयोग को सौंपे गए व्यय विवरण के अनुसार, कांग्रेस ने पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के दौरान कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इसमें पार्टी के केंद्रीय संगठन और उम्मीदवारों से संबंधित विभिन्न चुनावी मदों का खर्च शामिल है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पार्टी ने अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर लगाया। उम्मीदवारों पर खर्च हुए ₹96.42 करोड़ कांग्रेस के कुल चुनावी खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित मद का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में पार्टी ने ₹96.42 करोड़ खर्च किए। इसमें से करीब ₹95.29 करोड़ उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान के रूप में दिए गए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की जरूरतों और उनके प्रचार से जुड़े खर्चों के लिए पार्टी ने बड़ी राशि आवंटित की। सामान्य प्रचार पर ₹40.51 करोड़ खर्च पार्टी ने सामान्य चुनाव प्रचार पर करीब ₹40.51 करोड़ खर्च किए। इस श्रेणी में विज्ञापन, स्टार प्रचारकों की यात्राओं और अन्य प्रचार गतिविधियों से संबंधित खर्च शामिल थे। चुनाव के दौरान मतदाताओं तक पहुंचने और पार्टी का संदेश प्रसारित करने के लिए इन गतिविधियों पर संसाधन लगाए गए। स्टार प्रचारकों की यात्राओं पर ₹21.78 करोड़ कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की यात्रा पर लगभग ₹21.78 करोड़ खर्च किए। चुनावी सभाओं, जनसंपर्क कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों में पार्टी के प्रमुख नेताओं की भागीदारी के लिए यात्रा खर्च एक महत्वपूर्ण मद रहा। मीडिया विज्ञापनों पर करीब ₹11.95 करोड़ मीडिया प्रचार पर भी पार्टी ने बड़ी राशि खर्च की। रिपोर्ट के अनुसार, अखबारों, टेलीविजन, डिजिटल माध्यमों और अन्य विज्ञापन गतिविधियों से जुड़े खर्च पर करीब ₹11.95 करोड़ लगाए गए। मीडिया विज्ञापन चुनावी अभियान के दौरान पार्टी की नीतियों, उम्मीदवारों और राजनीतिक संदेशों को मतदाताओं तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम रहे। रैलियों और जनसभाओं पर ₹1.23 करोड़ रिपोर्ट में सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और रैलियों पर करीब ₹1.23 करोड़ खर्च दर्ज किया गया। यह राशि पार्टी के अन्य प्रमुख प्रचार खर्चों की तुलना में कम रही। हालांकि, चुनावी गतिविधियों के अलग-अलग मदों में खर्च का वर्गीकरण पार्टी की ओर से दाखिल विवरण पर आधारित है। वर्चुअल प्रचार पर भी खर्च कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए वर्चुअल प्रचार गतिविधियों पर भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में करीब ₹1.13 करोड़ का खर्च दर्ज किया गया। डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रचार करना भी चुनावी अभियानों का हिस्सा रहा। राज्य इकाइयों को हस्तांतरित किए गए ₹83.2 करोड़ रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के केंद्रीय संगठन ने विभिन्न राज्य इकाइयों को कुल ₹83.2 करोड़ हस्तांतरित किए। यह राशि चुनाव संबंधी गतिविधियों और संगठनात्मक जरूरतों के लिए दी गई थी। राज्य इकाइयों के खर्च में चुनावी क्षेत्र की परिस्थितियों, उम्मीदवारों की जरूरतों और स्थानीय प्रचार गतिविधियों के अनुसार अंतर दिखाई दिया। केरल कांग्रेस इकाई का खर्च सबसे ज्यादा राज्य इकाइयों के खर्च के आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित राज्य इकाइयों का कुल खर्च ₹102.48 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें केरल कांग्रेस इकाई ने करीब ₹59.28 करोड़ खर्च किए। यह पांच राज्यों और पुडुचेरी के चुनावी अभियानों में केरल इकाई के खर्च का बड़ा हिस्सा होने को दर्शाता है। असम, तमिलनाडु, बंगाल और पुडुचेरी का खर्च रिपोर्ट में अन्य राज्य इकाइयों के खर्च का विवरण भी दिया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस इकाइयों का चुनावी खर्च अलग-अलग रहा। चुनावी चक्र के अंत में ₹85.48 करोड़ का बैलेंस रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित चुनावी चक्र के अंत में कांग्रेस के पास करीब ₹85.48 करोड़ का बैलेंस बचा था। यह आंकड़ा पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को प्रस्तुत किए गए व्यय विवरण में दर्ज किया गया था। BJP के खर्च से तुलना उस समय संभव नहीं थी रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भाजपा का तुलनीय चुनावी व्यय विवरण उपलब्ध नहीं था। इसलिए उस समय दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खर्च की सीधी तुलना करना संभव नहीं था। किसी भी तुलना के लिए दोनों दलों के समान अवधि, समान चुनावों और समान खर्च श्रेणियों के आंकड़ों का उपलब्ध होना जरूरी है। चुनावी खर्च में पारदर्शिता क्यों जरूरी? राजनीतिक दलों को चुनाव के बाद निर्धारित नियमों के तहत अपने चुनावी खर्च का विवरण चुनाव आयोग को देना होता है। ऐसे विवरणों से यह समझने में मदद मिलती है कि पार्टियां उम्मीदवारों, विज्ञापनों, नेताओं की यात्राओं और संगठनात्मक गतिविधियों पर अपने संसाधन किस तरह खर्च करती हैं। कांग्रेस के ₹136.94 करोड़ के खर्च का यह विवरण चुनावी अभियानों में उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर होने वाले खर्च की तस्वीर पेश करता है। अन्य दलों के तुलनीय आंकड़े उपलब्ध होने पर चुनावी खर्च के विभिन्न पहलुओं का बेहतर आकलन किया जा सकता है। स्रोत: The Indian Express / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशांत भूषण के सवाल, बोले—पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अन्य वकीलों के साथ मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और शहर में व्यापक बैरिकेडिंग किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरे शहर की आवाजाही को प्रभावित करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उठा दिल्ली की आवाजाही पर प्रतिबंधों का मुद्दा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मुद्दा उठाया गया। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाओं को प्रभावित करने और व्यापक बैरिकेडिंग को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। प्रशांत भूषण ने पूछा—पूरी दिल्ली को बंद क्यों किया जा रहा है? प्रशांत भूषण ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए लक्षित और सीमित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही प्रभावित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और नागरिकों की सामान्य आवाजाही के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकारियों ने 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध या बंदी की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे प्रतिबंधों से छात्रों, कर्मचारियों, कारोबारियों और रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी थे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर भी उठे सवाल प्रदर्शन से पहले कुछ दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अंतरशहरी परिवहन सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित करने से आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर जताई चिंता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की टिप्पणियों में आवाजाही पूरी तरह रोकने और उसे नियंत्रित करने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों को ऐसा समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम जनता को कम से कम असुविधा हो। सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंधों पर सवाल सुनवाई के दौरान प्रतिबंधों की आनुपातिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी संभावित गड़बड़ी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम परिस्थिति के अनुरूप होने चाहिए। मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित आवाजाही की संभावनाओं पर विचार करने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के मद्देनजर 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली समेत कई इलाकों में 20 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। कुछ रिपोर्टों में तैनाती की संख्या लगभग 23 हजार से 25 हजार तक बताई गई। प्रशासन का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना था। सैकड़ों बसें और बॉडी कैमरे भी सुरक्षा योजना में शामिल रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने संभावित हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की थी। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल की योजना भी सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा थी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तैनाती की गई। प्रशांत भूषण पहले भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे 3 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशांत भूषण भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था इस मामले में प्रमुख सवाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। एक ओर प्रशासन को संभावित गड़बड़ी रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी होता है। व्यापक प्रतिबंधों के बजाय नियंत्रित आवाजाही पर जोर सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों ने इस बहस को केंद्र में ला दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान आवश्यक सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित किए बिना कैसे किया जा सकता है। प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में देखा गया। नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों ने नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशांत भूषण का मुख्य सवाल यही रहा कि किसी निर्धारित स्थान पर होने वाले प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही को किस हद तक प्रभावित किया जाना चाहिए। इस मामले ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ उनके दायरे और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। स्रोत: The Indian Express / Supreme Court proceedings /…

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अमित शाह के अलवर दौरे पर टीकाराम जूली का निशाना, भीड़ जुटाने को लेकर BJP पर लगाए आरोप

अलवर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार जनसभा में बड़ी भीड़ जुटाने और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर ध्यान दे रही है, जबकि अलवर में सड़क, सफाई, रोजगार और प्रशासन से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। अमित शाह के दौरे को लेकर की गईं व्यापक तैयारियां अमित शाह के अलवर दौरे को लेकर प्रशासन और BJP संगठन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और पुलिस बल तैनात किया गया था। टीकाराम जूली ने भीड़ जुटाने पर उठाए सवाल टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि BJP अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए जनसभा में अधिक से अधिक लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी सभा में उमड़ने वाली भीड़ से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता। उनके मुताबिक, सरकार को राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लोगों की परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए। अलवर की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार पर हमला जूली ने अलवर की नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि शहर में सड़क, सफाई और नगर प्रशासन से संबंधित कई समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके। सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा भी चर्चा में अमित शाह के दौरे से कुछ दिन पहले अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर विवाद सामने आया था। इस मुद्दे पर राजस्थान के मंत्री संजय शर्मा भी सफाई कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने BJP सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक समन्वय से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस ने मंत्री के धरने को लेकर भी घेरा कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब सत्तारूढ़ दल के मंत्री को अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठना पड़े, तो प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार के भीतर समन्वय की स्थिति पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, यह विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी और इसे प्रशासनिक विफलता का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। कांग्रेस नेताओं और छात्रों को हिरासत में लेने का मामला अमित शाह के दौरे से पहले कुछ कांग्रेस नेताओं और छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और पुलिस के दावों में अंतर सामने आया। कांग्रेस ने दावा किया कि करीब दो दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस की ओर से बताई गई संख्या इससे कम थी। विरोध प्रदर्शन रोकने के आरोप कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसके कार्यकर्ताओं को संभावित विरोध प्रदर्शन से पहले ही रोक दिया गया। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया। इस मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए। ऐसे में कार्रवाई के कारणों और परिस्थितियों को समझने के लिए आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। जूली ने जनता से सीधे संवाद की उठाई मांग टीकाराम जूली ने मांग की कि अमित शाह को केवल पार्टी नेताओं और अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर स्थिति का आकलन नहीं करना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से जनता के बीच जाकर अलवर की वास्तविक समस्याओं को समझने की अपील की। उनका कहना था कि स्थानीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए और जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज अमित शाह का अलवर दौरा BJP के संगठनात्मक संपर्क और राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण था। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुविधाओं और सफाई कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को उठाया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। जहां BJP का कार्यक्रम संगठनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित था, वहीं विपक्ष ने स्थानीय समस्याओं और सरकारी कामकाज को लेकर सवाल उठाए। भीड़ जुटाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं टीकाराम जूली की ओर से भीड़ जुटाने को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक दावों की श्रेणी में आते हैं। उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि लोगों को अवैध या जबरन तरीके से जनसभा में शामिल कराया गया था। फिलहाल, अलवर दौरे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्थानीय समस्याओं, सफाई कर्मचारियों के मुद्दे और पुलिस की कार्रवाई चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं। स्रोत: The Indian Express / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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