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महिलाओं के लिए सपा का बड़ा चुनावी ऐलान; सरकार बनी तो सालाना ₹40,000, मुफ्त बस सफर और छात्राओं को लैपटॉप

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को लेकर राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ की घोषणा करते हुए महिलाओं के लिए सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और इंटरमीडिएट पास छात्राओं को लैपटॉप देने समेत कई बड़े चुनावी वादे किए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने 26 अगस्त को लखनऊ में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन घोषणाओं को सामने रखा। आज 27 अगस्त 2026 को इन घोषणाओं पर BJP ने तीखा पलटवार किया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई BJP नेताओं ने इसे चुनावी वादा और “महिला कार्ड” बताते हुए सपा पर निशाना साधा। क्या है ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’? समाजवादी पार्टी का कहना है कि अगर 2027 के Uttar Pradesh Assembly Election के बाद उसकी सरकार बनती है तो ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ लागू की जाएगी। इसके तहत शुरुआत में पात्र महिलाओं को ₹40,000 सालाना आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा है कि इस सहायता राशि को आने वाले वर्षों में बढ़ाया जाएगा। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण clarification जरूरी है। कुछ reports ने इस योजना को गरीब या BPL महिलाओं के लिए बताया है, जबकि कुछ में इसे अधिक व्यापक रूप से “महिलाओं को ₹40,000” कहा गया है। अभी detailed manifesto, eligibility criteria, income limit या application rules सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सुरक्षित है कि सपा ने ₹40,000 annual assistance का चुनावी वादा किया है, लेकिन final eligibility बाद में स्पष्ट होगी। छात्राओं को मिलेगा Laptop सपा ने education sector में भी महिलाओं और छात्राओं को लेकर बड़ा वादा किया है। अखिलेश यादव के मुताबिक अगर पार्टी सत्ता में आती है तो Intermediate यानी Class 12 पास करने वाली छात्राओं को laptop दिया जाएगा। सपा इससे पहले अपनी पिछली सरकार के दौरान भी laptop distribution programme चला चुकी है और अखिलेश यादव ने नए चुनावी वादे को उसी policy का विस्तार बताया। पार्टी का कहना है कि technology तक आसान पहुंच से छात्राओं को higher education, competitive examinations और employment opportunities में मदद मिलेगी। महिलाओं के लिए Free Bus Travel का वादा सपा की घोषणाओं में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा भी शामिल है। Reports के मुताबिक पार्टी ने Roadways और city bus services में महिलाओं को free travel सुविधा देने की बात कही है। इसके साथ स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए metro travel को भी free या pass-based बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह अभी केवल चुनावी घोषणा है। इसे लागू करने के लिए सरकार बनने की स्थिति में budgetary allocation और detailed policy framework की जरूरत होगी। महिलाओं को हर महीने 2 Special Leave का भी वादा सपा ने working women के लिए एक और बड़ा वादा किया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक महिलाओं को हर महीने दो दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश देने का प्रस्ताव है। इसे सरकारी के साथ private workplaces तक लागू करने की बात कही गई है। हालांकि private sector में ऐसी व्यवस्था को लागू करने के लिए labour laws, rules और enforcement mechanism की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह भी party promise के स्तर पर है। सरकारी स्कूलों में Fees माफ, Private में आधी करने का दावा सपा की महिला-focused घोषणाओं में education costs कम करने की बात भी शामिल है। Live Hindustan की report के मुताबिक party leaders ने कहा कि: जैसे कदम उठाए जाएंगे। इन promises का exact scope—कौन से classes, कौन से colleges और कौन से income groups—अभी detailed policy document आने के बाद ही साफ होगा। 26,000 बंद Primary Schools फिर खोलने का वादा अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो राज्य में बंद किए गए करीब 26,000 primary schools को दोबारा खोला जाएगा। इसके अलावा Anganwadi centres को मजबूत करने और education infrastructure में investment बढ़ाने का वादा किया गया है। सपा ने इस घोषणा को women empowerment से जोड़ा है क्योंकि rural areas में schools और Anganwadi centres की accessibility का सीधा असर छात्राओं और महिलाओं पर पड़ता है। 1090 Women Power Line को मजबूत करने की बात अखिलेश यादव ने अपनी पिछली सरकार के दौरान शुरू की गई 1090 Women Power Line का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर women safety system को और मजबूत किया जाएगा और महिलाओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सपा ने women safety को अपने 2027 election campaign के प्रमुख मुद्दों में शामिल करने के संकेत दिए हैं। Widows और बेसहारा महिलाओं के लिए Housing पार्टी ने विधवा और बेसहारा महिलाओं के लिए housing support का भी वादा किया है। Reports के मुताबिक ऐसी महिलाओं को Lohia Awas जैसी housing व्यवस्था से जोड़ने और elderly women की public transport accessibility बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि इसके लिए पात्रता, घरों की संख्या और annual budget जैसी details अभी सामने नहीं आई हैं। महिला Reservation पर BJP को चुनौती महिला-focused press conference के दौरान अखिलेश यादव ने BJP को 33% महिला आरक्षण अगले Uttar Pradesh Assembly Election से लागू करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि अगर BJP ज्यादा महिलाओं को टिकट देती है तो समाजवादी पार्टी उससे भी ज्यादा महिला candidates को चुनाव मैदान में उतारने का प्रयास करेगी। अखिलेश ने कहा कि देश और प्रदेश का विकास “आधी आबादी” की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। PDA में ‘A’ का मतलब ‘आधी आबादी’ समाजवादी पार्टी लंबे समय से अपने PDA formula को चुनावी strategy के रूप में पेश कर रही है। डिंपल यादव ने महिला योजना की घोषणा के दौरान कहा कि पार्टी के PDA में ‘A’ का अर्थ ‘आधी आबादी’ भी है। उनका कहना था कि महिला empowerment केवल slogans तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं को आर्थिक सहायता, technology, education और representation देना जरूरी है। इससे साफ है कि SP 2027 election में women voters को अपनी PDA strategy का central component बनाने की कोशिश कर रही है। Uttar Pradesh में 6 करोड़ से ज्यादा महिला Voters महिलाओं पर इतना political…

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छात्र आंदोलन में ‘कुत्ता जनता पार्टी’ का पोस्टर चर्चा में; BPSC अधिकारी की टिप्पणी के विरोध का बना प्रतीक

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच ‘कुत्ता जनता पार्टी’ यानी KJP नाम का एक पोस्टर और उससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे किसी वास्तविक चुनावी राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि Bihar Public Service Commission (BPSC) के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक Rajesh Kumar Singh की विवादित टिप्पणी के विरोध में एक प्रतीकात्मक नाम के तौर पर इस्तेमाल किया है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘कुत्ता जनता पार्टी जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिखाई देते हैं। Banner पर छात्रों के सम्मान से जुड़ा संदेश भी लिखा गया है और आरोप लगाया गया है कि BPSC अधिकारी ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की तुलना कुत्तों से की। कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत BPSC के परीक्षा नियंत्रक Rajesh Kumar Singh की एक press conference से हुई। छात्रों के ongoing protests पर सवाल पूछे जाने के दौरान Singh ने हिंदी की कहावत “हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार” का इस्तेमाल किया था। प्रदर्शनकारी छात्रों और विपक्षी नेताओं ने इस टिप्पणी को आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से जोड़कर देखा और इसे अपमानजनक बताया। हालांकि Rajesh Kumar Singh ने बाद में कहा कि उनकी कही गई कहावत को context से अलग करके देखा गया और उनका किसी व्यक्ति या समूह को अपमानित करने का इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है। इसलिए यह कहना ज्यादा accurate होगा कि छात्रों ने उनकी टिप्पणी को अपने लिए अपमानजनक माना, न कि यह तथ्यात्मक रूप से घोषित कर दिया जाए कि अधिकारी ने सीधे छात्रों को ‘कुत्ता’ कहा था। सरकार ने Rajesh Kumar Singh को किया Suspend विवाद बढ़ने के कुछ घंटों के भीतर Bihar government ने Rajesh Kumar Singh को suspend करने का निर्देश दिया। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने General Administration Department को कार्रवाई का आदेश दिया था। सिंह की टिप्पणी के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। इसके बावजूद छात्रों का कहना था कि केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से उनकी broader concerns खत्म नहीं होतीं। फिर सामने आया ‘कुत्ता जनता पार्टी’ का Banner इसी controversy के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से ‘कुत्ता जनता पार्टी – KJP’ नाम वाला banner सामने आया। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक viral video में कुछ युवा banner लेकर ‘कुत्ता जनता पार्टी जिंदाबाद’ के नारे लगाते नजर आए। इसे BPSC अधिकारी की टिप्पणी के खिलाफ sarcasm और protest के रूप में पेश किया गया। Navbharat Times के मुताबिक Lovely Kumari नाम की एक प्रदर्शनकारी छात्रा इस symbolic protest के साथ सामने आईं। उनका कहना था कि छात्र अपमान नहीं बल्कि सम्मान चाहते हैं और केवल अधिकारी का suspension पर्याप्त नहीं है। क्या सच में बन गई कोई नई Political Party? नहीं, उपलब्ध credible reports के आधार पर इसे formally registered political party कहना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से protest और social-media satire के रूप में सामने आया है। ‘कुत्ता जनता पार्टी’ नाम के banners, slogans और online posts जरूर सामने आए हैं, लेकिन इसे Election Commission में registered electoral party या established political organisation मानने का कोई आधार इन reports में नहीं है। Aaj Tak ने भी इसे छात्रों द्वारा social media पर बनाई गई अपनी एक प्रतीकात्मक ‘party’ के रूप में describe किया है। इसलिए Jai Rashtra News की खबर में “नई पार्टी का गठन” लिखने के बजाय “प्रतीकात्मक पार्टी/पोस्टर के जरिए विरोध” कहना factual रूप से ज्यादा सुरक्षित रहेगा। आखिर छात्र आंदोलन क्यों कर रहे हैं? ‘कुत्ता जनता पार्टी’ वाला विवाद बिहार में पहले से चल रहे बड़े recruitment agitation के बीच सामने आया है। Patna के Gardanibagh में 18 अगस्त से कई छात्र और अभ्यर्थी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। Indian Express के मुताबिक एक दर्जन से ज्यादा groups आंदोलन में शामिल रहे हैं। प्रमुख मांगों में शामिल हैं: BPSC ने इनमें से कई मांगों पर अलग रुख रखा है। आयोग का कहना है कि TRE-4 के लिए two-stage system और objective examinations में negative marking जारी रहेगी। 70वीं BPSC परीक्षा भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा Students 70वीं BPSC preliminary examination को लेकर भी allegations उठा रहे हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने alleged irregularities और paper leak का दावा करते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग की है। BPSC ने इन आरोपों को खारिज किया है और social media पर circulating कुछ documents को fake बताया है। आयोग का कहना है कि candidates को उनकी answer sheets login ID के जरिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इसलिए paper leak या irregularity को established fact के तौर पर नहीं लिखा जाना चाहिए; फिलहाल ये छात्रों के आरोप और मांगें हैं। 25 अगस्त को उग्र हुआ प्रदर्शन 25 अगस्त को छात्र आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। सैकड़ों प्रदर्शनकारी Gandhi Maidan से मुख्यमंत्री आवास की ओर march करने निकले। JP Golambar और Dak Bungalow Chowk के आसपास barricades तोड़े जाने और police के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। Police ने protesters को रोकने के लिए water cannons का इस्तेमाल किया और बाद में force का प्रयोग भी किया। कई छात्रों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ police personnel के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई। इसी व्यापक agitation के बीच KJP वाला poster और videos तेजी से viral हुए। Opposition ने भी अधिकारी की टिप्पणी पर उठाए सवाल RJD नेता और Bihar विधानसभा में विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav ने भी BPSC अधिकारी की टिप्पणी की आलोचना की थी। उन्होंने अधिकारी से माफी की मांग की और सरकार पर छात्रों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया। हालांकि सरकार ने विवादित टिप्पणी सामने आने के बाद परीक्षा नियंत्रक के suspension का आदेश देकर कार्रवाई की। यह मामला इसलिए recruitment policy के साथ political controversy का भी हिस्सा बन गया। ‘अपमान नहीं, सम्मान’ बना Protest का संदेश KJP poster के पीछे protesting students का मुख्य संदेश उनके मुताबिक सम्मान और dignity का है। Students का कहना है कि job aspirants कई वर्षों तक competitive exams की तैयारी करते…

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आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के दौरान डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी; अजीत भारती पर FIR, कोर्ट पहुंचे YouTuber

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए ‘Reservation Hatao Andolan’ के बाद विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। YouTuber और commentator अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने YouTube कार्यक्रम में नागीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिगत, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। FIR दिल्ली के North Avenue Police Station में 23 अगस्त को दर्ज की गई। शिकायत Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की ओर से दी गई थी। पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के साथ Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की धाराएं भी लगाई हैं। क्या Jantar Mantar के मंच पर हुई थी कथित टिप्पणी? इस मामले में सबसे जरूरी clarification यही है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग caste-based reservation system में बदलाव की मांग को लेकर जुटे थे। आंदोलन में अजीत भारती ने भी हिस्सा लिया और reservation system की समीक्षा, white paper तथा economic criteria जैसे मुद्दे उठाए थे। लेकिन डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद को लेकर जिस कथित आपत्तिजनक भाषा पर FIR हुई, वह शिकायत के मुताबिक 22 अगस्त को जारी YouTube show ‘SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti’ से संबंधित है। इसलिए इसे सीधे “जंतर-मंतर के मंच पर आंबेडकर पर टिप्पणी” कहना अभी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सही नहीं होगा। शिकायत में क्या आरोप लगाए गए? Indian Express द्वारा देखी गई FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि YouTube video में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बी.आर. आंबेडकर को लेकर कथित तौर पर caste-based, abusive और humiliating statements की गईं। शिकायत में महिलाओं को लेकर कथित रूप से sexually degrading language और कुछ statements को inflammatory तथा threatening बताने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता अभी investigation और judicial process में तय होनी है। इसलिए कथित आपत्तिजनक शब्दों को बिना जरूरत दोहराना उचित नहीं है। किसकी शिकायत पर दर्ज हुई FIR? मामला Balakram Bauddh, Delhi State President, Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की शिकायत पर दर्ज हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और Nagina MP Chandrashekhar Azad हैं। शिकायत के साथ कथित video और social-media screenshots को electronic evidence के रूप में पुलिस को दिया गया। शिकायतकर्ता ने investigating agency से original platform data, video URL, upload details, metadata, views, comments और reposts जैसी digital information हासिल करने की भी मांग की। किन धाराओं में दर्ज हुआ Case? रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR में: समेत संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। Police investigation के बाद ही यह साफ होगा कि उपलब्ध evidence के आधार पर कौन-सी धाराएं आगे कायम रहती हैं। Ajeet Bharti ने आरोपों को किया खारिज अजीत भारती ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने FIR को pressure-driven बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ SC/ST Act के तहत मामला नहीं बनता। उनका कहना है कि उनके statements को context से अलग करके पेश किया गया और वे अपने video पर आई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। यह उनका पक्ष है; अदालत और जांच एजेंसी अभी इसकी जांच कर रही हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच Court पहुंचे इस मामले में 25 अगस्त को अजीत भारती ने Delhi के Patiala House Court में anticipatory bail petition दाखिल की। उनके वकीलों ने दलील दी कि FIR में बताए गए facts के आधार पर SC/ST Act का offence prima facie नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी BNSS की Section 35(3) के तहत appearance notice जारी नहीं किया है। Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने मामले की सुनवाई की। Court ने Police को क्या कहा? Court ने कहा कि अगर investigating officer अजीत भारती को BNSS Section 35(3) के तहत कोई notice जारी करता है, तो उसकी copy Court के सामने भी रखी जाए। अदालत उस notice की तारीख और SC/ST Act के alleged offence के prima facie ingredients को देखते हुए anticipatory bail application पर विचार करेगी। Court ने investigating officer को notice जारी किया है और मामले को आगे की arguments के लिए 31 अगस्त 2026 को listed किया है। इसका मतलब अभी anticipatory bail पर final फैसला नहीं हुआ है। Jantar Mantar पर क्या था Reservation Hatao Andolan? 21 अगस्त को दिल्ली के Jantar Mantar पर बड़ी संख्या में लोग reservation policy में reform की मांग को लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में caste-based quota की समीक्षा, economic condition को greater weight देने, reservation पर white paper जारी करने और UGC equity rules पर पुनर्विचार जैसी बातें शामिल थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST Act में बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग भी उठाई। यह मांग विवाद का बड़ा कारण बनी। Police Permission को लेकर भी हुआ विवाद Delhi Police ने शुरुआत में स्पष्ट किया था कि Jantar Mantar पर उस protest के लिए permission नहीं दी गई थी। बाद में Ramlila Maidan में सीमित संख्या में लोगों के लिए peaceful protest की NOC जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, लेकिन प्रदर्शनकारी Jantar Mantar से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और अलग-अलग दिनों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाएं भी हुईं। Chandrashekhar Azad ने भी आंदोलन पर साधा निशाना Nagina MP और Bhim Army प्रमुख Chandrashekhar Azad ने anti-reservation protest की आलोचना की और आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठाए। इसके बाद social media और political discourse में reservation के पक्ष और विरोध में बहस और तेज हो गई। इसी broader controversy के बीच अजीत भारती का YouTube programme सामने आया और उसके बाद Azad Samaj Party की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। यह मामला क्यों Sensitive है? यह मामला तीन बेहद संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ता है: पहला, भारत की reservation policy और social justice debate। दूसरा, SC/ST Act और caste-based speech से जुड़े criminal-law provisions। तीसरा, public figures और historical personalities पर online speech की कानूनी सीमाएं। ऐसे मामलों में किसी statement के words,…

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नाव लेकर MCD सदन पहुंचे AAP पार्षद! दिल्ली में जलभराव के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन, कूड़ा रखकर BJP के खिलाफ नारेबाजी

नई दिल्ली: दिल्ली में लगातार बारिश और जगह-जगह जलभराव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए MCD सदन में inflatable rubber boat लेकर प्रवेश किया। पार्षद अपने साथ कूड़ा भी लेकर पहुंचे और BJP के नेतृत्व वाली नगर निगम व्यवस्था पर सफाई तथा drainage management में विफल रहने का आरोप लगाया। यह प्रदर्शन 24 अगस्त 2026 को दिल्ली के Civic Centre में MCD की General House Meeting के दौरान हुआ था। AAP पार्षदों ने पहले सदन के भीतर नाव दिखाई और बाद में सदन के बाहर नाव तथा कूड़ा रखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जलभराव और सफाई व्यवस्था पर जवाब मांगते हुए BJP के खिलाफ नारे लगाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही करीब 20 मिनट तक स्थगित करनी पड़ी। सदन में अचानक नाव लेकर पहुंचे पार्षद MCD की बैठक चल रही थी, तभी विपक्षी AAP पार्षद inflatable boat लेकर सदन में पहुंचे। नाव को सदन के अंदर घुमाया गया और इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बारिश के बाद दिल्ली की कई सड़कें इतनी जलमग्न हो जाती हैं कि वहां वाहन के बजाय नाव की जरूरत पड़ने जैसी स्थिति दिखाई देती है। यह प्रतीकात्मक विरोध जल्द ही राजनीतिक नारेबाजी में बदल गया। कूड़ा भी लेकर पहुंचे AAP Councillors AAP पार्षदों का विरोध केवल waterlogging तक सीमित नहीं था। वे कथित तौर पर कूड़ा भी साथ लेकर पहुंचे और MCD की sanitation व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान “जलभराव पर जवाब दो” और “कूड़े पर जवाब दो” जैसे नारे लगाए गए। AAP का आरोप है कि राजधानी में drainage और garbage management की समस्याओं के कारण लोगों को बारिश के दौरान भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि ये AAP के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Ankush Narang ने BJP को घेरा MCD में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सफाई और जलभराव की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष पर निशाना साधा। विपक्ष का कहना था कि monsoon से पहले drains की सफाई और waterlogging रोकने के दावों के बावजूद राजधानी में कई महत्वपूर्ण जगहों पर पानी भर गया। AAP ने इसे BJP की civic governance की विफलता बताते हुए जवाबदेही की मांग की। भारी बारिश के बाद कई इलाकों में Waterlogging जिस दिन MCD में नाव वाला प्रदर्शन हुआ, उसी दिन दिल्ली में भारी बारिश से कई हिस्सों में सड़कों पर पानी भर गया था। लुटियंस दिल्ली, Mathura Road, Connaught Place, Bhairon Marg, ITO और Zakhira Underpass समेत कई जगहों पर traffic प्रभावित हुआ। Janakpuri क्षेत्र में उस दिन करीब 67 mm rainfall दर्ज किए जाने की रिपोर्ट थी। सोशल मीडिया पर भी स्कूल के बच्चों और commuters के पानी से भरी सड़कों से गुजरने के कई वीडियो सामने आए। 26 August तक और गंभीर हुआ Rainfall का आंकड़ा मुद्दा केवल 24 अगस्त की बारिश तक सीमित नहीं रहा। IMD के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह से मंगलवार रात 8:30 बजे तक दिल्ली में 107.8 mm बारिश दर्ज हुई। इसके साथ इस monsoon season में rainfall करीब 653 mm पहुंच गई, जो जून-सितंबर के सामान्य seasonal average 640.4 mm से भी ज्यादा है। इस बारिश के कारण Connaught Place, ITO, AIIMS और Chirag Dilli जैसे इलाकों में भी waterlogging तथा traffic disruption देखा गया। Rekha Gupta सरकार का जवाब Delhi Chief Minister Rekha Gupta ने waterlogging की समस्या को लेकर कहा कि राजधानी का drainage network कई जगह 50 साल से ज्यादा पुराना है। उन्होंने कहा कि सरकार पुराने infrastructure और लंबे समय से चली आ रही civic समस्याओं का समाधान केंद्र सरकार के सहयोग से करने पर काम कर रही है। उनके मुताबिक सरकार ने long-term solutions तैयार करने के लिए पिछले डेढ़ साल में पुराने drainage और infrastructure issues का अध्ययन किया है। इस तरह BJP सरकार ने मौजूदा स्थिति को केवल current administration की समस्या मानने के बजाय इसे वर्षों पुरानी infrastructure challenges से भी जोड़ा है। AAP का ‘चार इंजन सरकार’ पर तंज AAP पार्षदों ने विरोध के दौरान Delhi government, MCD और BJP leadership को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के कई स्तरों पर BJP होने के बावजूद जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ। AAP ने अपने विरोध में इसे व्यंग्यात्मक रूप से “चार इंजन सरकार” का मुद्दा भी बनाया। इससे पहले AAP नेता Saurabh Bharadwaj ने भी बारिश के बाद सामने आए waterlogging videos को साझा करते हुए Rekha Gupta सरकार पर तंज कसा था। Talkatora Stadium के Waterlogging पर भी AAP का हमला 25 अगस्त को राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब AAP ने Talkatora Stadium में waterlogging का वीडियो शेयर किया। AAP MLA Kuldeep Kumar ने BJP के एक कार्यक्रम के दौरान venue पर मौजूद पानी को लेकर व्यंग्य करते हुए इसे “swimming pool” कहा और BJP सरकार पर निशाना साधा। यह घटना बताती है कि Delhi waterlogging अब civic problem के साथ-साथ बड़ा political issue भी बन चुका है। MCD Meeting में दूसरे काम भी हुए नाव और नारेबाजी के कारण MCD बैठक चर्चा में रही, लेकिन सदन में दूसरे administrative proposals पर भी काम हुआ। MCD ने parks और green areas की maintenance से संबंधित PPP scheme में बदलाव को मंजूरी दी। इसके तहत RWAs और NGOs को maintenance work मिलने के लिए councillor की recommendation अनिवार्य करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसलिए MCD meeting पूरी तरह केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं थी। नाव वाला प्रदर्शन क्यों हुआ Viral? राजनीतिक विरोध में visual symbolism का इस्तेमाल नया नहीं है, लेकिन MCD सदन जैसी औपचारिक जगह पर नाव लेकर पहुंचना unusual था। दिल्ली की flooded roads की तस्वीरों के बीच नाव सीधे उसी मुद्दे का visual representation बन गई। यही वजह है कि AAP का यह protest तेजी से सोशल मीडिया और news reports में चर्चा में आया। असली सवाल—Delhi में Waterlogging क्यों? Delhi की waterlogging कई agencies और infrastructure systems से जुड़ी समस्या है। Storm-water drains, PWD roads, MCD drains, Delhi Jal Board infrastructure, major drains और अलग-अलग land-owning agencies की overlapping responsibilities लंबे समय से coordination को मुश्किल बनाती रही हैं। साथ ही पुराने…

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TMC के 20 बागी सांसदों की सदस्यता पर Supreme Court में आज सुनवाई; Abhishek Banerjee ने Speaker की देरी को दी चुनौती

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति से शुरू हुआ तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने से जुड़ी याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से फैसला लेने में कथित देरी के खिलाफ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई आज, 25 अगस्त 2026 को निर्धारित है। Supreme Court की सूची के मुताबिक मामले की सुनवाई Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V Mohana की पीठ के सामने होनी है। खबर लिखे जाने तक मामले में आज का अंतिम आदेश सामने नहीं आया था। Abhishek Banerjee Supreme Court क्यों पहुंचे? अभिषेक बनर्जी का मुख्य आरोप है कि उन्होंने 20 सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत disqualification petitions लोकसभा अध्यक्ष के सामने दाखिल की थीं, लेकिन इन पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने Supreme Court से मांग की है कि Speaker को इन याचिकाओं पर समयबद्ध और शीघ्र फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। याचिका संविधान के Article 32 के तहत दाखिल की गई है और इसमें लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा के Secretary General तथा संबंधित 20 सांसदों को पक्षकार बनाया गया है। मामला आखिर शुरू कैसे हुआ? TMC के भीतर यह संकट जून 2026 में खुलकर सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 19 सांसदों ने 14 जून को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अपने समूह के Nationalist Citizens Party of India यानी NCPI में merger को मान्यता देने की मांग की थी। इसके अगले दिन सांसद रचना बनर्जी ने भी इसी तरह का पत्र दिया, जिसके बाद संख्या 20 हो गई। इन सभी सांसदों ने 2024 का लोकसभा चुनाव TMC के चुनाव चिन्ह पर जीता था। TMC का तर्क क्या है? तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सांसद पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में दूसरी राजनीतिक व्यवस्था के साथ जाने का उनका फैसला Tenth Schedule यानी anti-defection law के तहत अयोग्यता का मामला बनता है। TMC का कहना है कि केवल सांसदों के एक समूह का दूसरी पार्टी के साथ जाने का दावा अपने आप उन्हें दल-बदल कानून से संरक्षण नहीं देता और इस पर Speaker को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार फैसला करना चाहिए। हालांकि यह TMC का कानूनी पक्ष है। सांसदों की सदस्यता वास्तव में समाप्त होगी या नहीं, इसका फैसला सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर अदालत की न्यायिक समीक्षा के बाद ही तय होगा। बागी सांसद क्या कह रहे हैं? दूसरी तरफ बागी सांसदों का दावा है कि उनका कदम सामान्य defection नहीं बल्कि वैध merger है। उन्होंने Speaker से अपने नए राजनीतिक समूह को मान्यता देने की मांग की है और तर्क दिया है कि उनका कदम संविधान की Tenth Schedule में उपलब्ध merger-related protection के दायरे में आता है। यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विवाद है—क्या सांसदों का कदम दल-बदल है या ऐसा merger जिसे कानून का संरक्षण मिल सकता है। Speaker Om Birla से मिल चुके हैं Abhishek Supreme Court जाने से पहले अभिषेक बनर्जी ने संसदीय स्तर पर भी मामला उठाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 27 जुलाई को लिखित reminder भेजा और इसके बाद 12 अगस्त को Lok Sabha Speaker Om Birla से मुलाकात कर disqualification petitions पर जल्द फैसला करने की मांग दोहराई। इसके बावजूद अंतिम निर्णय नहीं आने के बाद उन्होंने Supreme Court का रुख किया। Monsoon Session में अलग Seating Arrangement इस राजनीतिक विवाद का असर संसद के भीतर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार Monsoon Session के दौरान 20 बागी सांसदों के लिए अलग seating arrangement किया गया था। हालांकि अलग seating arrangement होना अपने आप में उनकी disqualification या merger की अंतिम कानूनी मान्यता नहीं है। Speaker के औपचारिक फैसले के बाद ही उनकी parliamentary status को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। कौन हैं ये 20 सांसद? Supreme Court में दाखिल मामले में जिन 20 सांसदों को respondent बनाया गया है, उनमें कई प्रमुख TMC चेहरे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें Kakoli Ghosh Dastidar, Sudip Bandyopadhyay, Satabdi Roy, Prasun Banerjee, Rachana Banerjee, Jagadish Chandra Barma Basunia, Partha Bhowmick, Arup Chakraborty, Deepak Adhikari (Dev), Sayani Ghosh, Bapi Haldar, Abu Taher Khan, Kalipada Saren, Asit Kumar Mal, June Maliah, Mitali Bag, Khalilur Rahaman, Mala Roy, Sharmila Sarkar और Yusuf Pathan शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के अलग होने के कारण यह मामला सिर्फ party discipline तक सीमित नहीं है बल्कि Lok Sabha में TMC की संख्या और राजनीतिक शक्ति पर भी सीधा असर डाल सकता है। Anti-Defection Law क्या कहता है? भारत में दल-बदल विरोधी कानून संविधान की Tenth Schedule में मौजूद है। सामान्य तौर पर कोई निर्वाचित सांसद यदि स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या party whip के खिलाफ कुछ परिस्थितियों में मतदान करता है तो उसकी सदस्यता पर सवाल उठ सकता है। वहीं merger से जुड़े मामलों में अलग प्रावधान मौजूद हैं। किसी particular political split या merger पर ये provisions लागू होते हैं या नहीं, यह मामले के तथ्य और कानूनी व्याख्या पर निर्भर करता है। इसीलिए TMC और बागी सांसदों के दावों को अभी अंतिम कानूनी तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। Supreme Court से Abhishek की मांग क्या है? अभिषेक बनर्जी ने Supreme Court से यह नहीं कहा है कि अदालत सीधे सभी 20 सांसदों की सदस्यता तत्काल खत्म कर दे। उनकी मुख्य मांग है कि Lok Sabha Speaker pending disqualification petitions पर जल्द फैसला करें। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि Tenth Schedule के तहत पहली instance में disqualification से जुड़े प्रश्नों का फैसला Speaker के पास जाता है, हालांकि उस फैसले पर judicial review संभव है। फैसले का Lok Sabha Numbers पर पड़ सकता है असर अगर Speaker भविष्य में TMC की disqualification petitions स्वीकार करते हैं और संबंधित सांसद अयोग्य घोषित होते हैं तो Lok Sabha की राजनीतिक संख्या पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर उनके merger claim को वैध माना जाता है तो बागी सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख सकते हैं। यही वजह है कि यह मामला West Bengal…

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नेताओं की भक्ति या राजनीति का नया रूप? भगवान के स्वरूप में नेताओं की तस्वीरों से फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में नेताओं की प्रशंसा नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी राजनीतिक नेता को भगवान, अवतार या धार्मिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगे तो सवाल सिर्फ समर्थकों की भावना तक सीमित नहीं रहता। यह राजनीतिक व्यक्तिपूजा, धर्म और चुनावी संदेश—तीनों के मेल पर बहस छेड़ देता है। हाल के महीनों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में, हाथ में संविधान लिए दिखाया। वहीं दिल्ली के Press Club of India में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देवता-सदृश तस्वीर के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो वायरल हुए। इससे पहले लखनऊ में एक पोस्टर में मोदी को श्रीकृष्ण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में पेश किया गया था। इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या यह सिर्फ समर्थकों की भक्ति है, या नेताओं की छवि को धार्मिक प्रतीकों के जरिए मजबूत करने की नई राजनीतिक रणनीति? अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण, हाथ में संविधान 1 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में समाजवादी युवजन सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हवन का आयोजन किया। इसी दौरान जारी किए गए पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया और उनके हाथों में संविधान की प्रतियां दिखाई गईं। कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और संविधान की रक्षा का प्रतीक बताया। लेकिन BJP ने पोस्टर का विरोध करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं से माफी की मांग की। यहां दिलचस्प बात यह थी कि धार्मिक प्रतीक और राजनीतिक संदेश को एक ही तस्वीर में जोड़ा गया—श्रीकृष्ण का स्वरूप और संविधान। PM Modi की आरती और ‘Modi Chalisa’ अगस्त में दिल्ली से एक और विवाद सामने आया। Press Club of India में आयोजित एक कार्यक्रम के वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देवता-सदृश स्वरूप में दिखाने वाले cutout के सामने आरती की गई और ‘Modi Chalisa’ का पाठ किया गया। Press Club of India ने बाद में स्पष्ट किया कि उसने इस आयोजन को आयोजित नहीं किया था। उसके मुताबिक hall को press conference के लिए किराए पर लिया गया था और जब वहां अलग तरह की गतिविधि सामने आई तो कार्यक्रम को रोक दिया गया। इसी कार्यक्रम से जुड़े Rajan Singh ने बिहार में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की योजना की भी बात कही। उन्होंने लगभग ₹112 करोड़ की लागत और पांच एकड़ जमीन पर मंदिर का दावा किया, हालांकि सरकारी जमीन या funding के उनके दावे का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया था। मोदी ‘कृष्ण’, योगी ‘अर्जुन’ मई 2026 में लखनऊ में लगे एक अन्य राजनीतिक पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीकृष्ण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में दिखाया गया था। पोस्टर में राजनीति को महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ के प्रतीक से जोड़कर पेश किया गया। इस तरह के पोस्टर बताते हैं कि धार्मिक कथाओं और पात्रों का इस्तेमाल अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है; उन्हें राजनीतिक messaging में भी बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा सिर्फ एक Party में नहीं इन उदाहरणों की सबसे अहम बात यह है कि यह प्रवृत्ति किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। अखिलेश यादव के समर्थक उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के समर्थक उन्हें राम या कृष्ण जैसे धार्मिक प्रतीकों से जोड़ते दिखाई देते हैं। इसलिए इसे केवल BJP, SP या किसी एक पार्टी की रणनीति कहना सही नहीं होगा। कई बार ऐसे पोस्टर और कार्यक्रम स्थानीय समर्थकों या कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किए जाते हैं, और जरूरी नहीं कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें आधिकारिक रूप से मंजूरी देता हो। यही अंतर समाचार रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। नेता से ‘प्रतीक’ बनने तक राजनीति में लोकप्रिय नेता अक्सर अपनी पार्टी से आगे बढ़कर एक प्रतीक बन जाते हैं। समर्थक उन्हें किसी खास विचार से जोड़ते हैं—जैसे विकास, सामाजिक न्याय, राष्ट्रवाद, संविधान, धर्म या किसी समुदाय के अधिकार। लेकिन जब यह प्रतीकात्मकता धार्मिक स्वरूप लेने लगती है तो नेता और देवता के बीच की सीमा धुंधली होने लगती है। राजनीतिक संचार के नजरिए से देखा जाए तो भगवान या धार्मिक पात्र से तुलना नेता को साधारण राजनीतिक व्यक्ति से ऊपर उठाकर नैतिक या भावनात्मक authority देने का प्रयास भी हो सकती है। सोशल Media ने बदल दिया Poster Politics का असर एक समय राजनीतिक पोस्टर किसी शहर या विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहते थे। अब एक छोटा पोस्टर भी कुछ घंटों में पूरे देश में वायरल हो सकता है। Instagram, X, Facebook और WhatsApp के कारण राजनीतिक कार्यकर्ता जानते हैं कि विवादित या असामान्य visual को सामान्य पोस्टर की तुलना में कहीं ज्यादा reach मिलेगी। यही कारण है कि नेता को देवता के रूप में दिखाने वाली तस्वीरें अक्सर तुरंत national debate बन जाती हैं। धार्मिक प्रतीकों वाली तस्वीरें लोगों की भावनाओं से जुड़ती हैं, इसलिए उनका engagement भी ज्यादा होता है। भक्ति और राजनीतिक Branding के बीच महीन अंतर किसी समर्थक के लिए अपने पसंदीदा नेता की पूजा करना व्यक्तिगत श्रद्धा हो सकती है। लेकिन जब उसी गतिविधि में party slogans, राजनीतिक संदेश, चुनावी narrative या organised publicity जुड़ जाती है, तो इसे केवल व्यक्तिगत आस्था कहना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर अखिलेश यादव के पोस्टर में संविधान जोड़ना स्पष्ट राजनीतिक संदेश था। उसी तरह ‘Modi Chalisa’ आयोजन में प्रधानमंत्री की राजनीतिक उपलब्धियों को उनकी पूजा के औचित्य से जोड़ा गया। इसलिए कई मामलों में भक्ति और political branding एक-दूसरे में मिलती नजर आती हैं। क्या इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं? विरोध करने वालों का तर्क है कि जीवित राजनीतिक नेताओं की तुलना भगवान से करना धार्मिक परंपराओं का राजनीतिक इस्तेमाल है। अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के रूप में दिखाए जाने पर BJP की प्रतिक्रिया इसी आधार पर थी। दूसरी ओर Modi Chalisa कार्यक्रम को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल की आलोचना की। लेकिन समर्थक इसे अपनी आस्था और अभिव्यक्ति का अधिकार बताते हैं। यहीं से विवाद शुरू होता है—एक व्यक्ति के लिए सम्मान, दूसरे के लिए धार्मिक अतिशयोक्ति हो सकता…

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बाबा रामदेव बोले- ‘आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, ज्यादा बात नहीं करेंगे’; बयान चर्चा में

हरिद्वार: योग गुरु बाबा रामदेव एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा, “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया गया और इसे हाल के दिनों में उनके खिलाफ हुई बयानबाजी और विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। रामदेव ने इसी बातचीत में देश में चल रहे आंदोलनों, सामाजिक सम्मान, आरक्षण, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ और वंदे मातरम समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। किस मौके पर दिया बाबा रामदेव ने बयान? यह बयान 23 अगस्त 2026 को हरिद्वार में सामने आया था। यहां ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर आयोजित संत सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बाबा रामदेव और कई प्रमुख संत शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में रामदेव से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विवादों को लेकर सवाल किए गए। इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि आजकल लोग उन्हें काफी निशाने पर ले रहे हैं, इसलिए वह ज्यादा बात नहीं करेंगे। हाल में Kangana Ranaut से हुआ था विवाद रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया जब BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनकी जुबानी जंग चर्चा में रही। विवाद की शुरुआत कंगना रनौत द्वारा Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी से हुई थी। बाबा रामदेव ने कंगना के बयान की आलोचना करते हुए उनके qualification, अतीत और निजी जीवन से जुड़ी टिप्पणियां की थीं। इसके जवाब में कंगना ने भी रामदेव पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्हें उनके निजी जीवन और चरित्र पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कंगना ने पतंजलि से जुड़े पुराने कानूनी विवादों का भी जिक्र किया। इसके बाद मामला लगातार सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना रहा। बाद में बोले- ‘ओछी सोच वालों पर कुछ नहीं कहना’ हरिद्वार में जब बाबा रामदेव से कंगना रनौत और अन्य आलोचनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने ज्यादा प्रतिक्रिया देने से बचने का रुख अपनाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रामदेव ने कहा कि वह ‘ओछी और घटिया सोच’ वाले लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। इसके बाद उनका “लोगों ने हमें खूब पेल रखा है” वाला बयान सामने आया, जिसे सोशल मीडिया पर उनके पहले के आक्रामक बयानों की तुलना में बदले हुए अंदाज के रूप में देखा गया। हालांकि इसे किसी औपचारिक माफी या अपने पुराने बयानों से पीछे हटने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आंदोलनों को लेकर भी दिया बड़ा बयान बाबा रामदेव ने देश में चल रहे अलग-अलग आंदोलनों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन सड़क और संसद में लगातार हंगामा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। रामदेव ने कहा कि कुछ लोग आंदोलन और हंगामे के जरिए देश की सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है। बच्चों को आंदोलन में उतारने का किया विरोध रामदेव ने आंदोलनों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी वयस्क को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना है तो वह लोकतांत्रिक तरीके से खुद अपनी लड़ाई लड़े, लेकिन बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान हाल में दिल्ली में छात्र आंदोलनों और आरक्षण से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में सामने आया। SC-ST के साथ Brahmin सम्मान पर भी बोले बाबा रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यदि SC-ST समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान संविधान के खिलाफ माना जाता है तो ब्राह्मण समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान भी उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान और अधिकार देता है और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। रामदेव का यह बयान आरक्षण और जातिगत मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच आया था। One Nation One Election का किया समर्थन हरिद्वार के कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार की ‘One Nation, One Election’ पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में सालभर किसी न किसी राज्य में चुनाव चलते रहते हैं, जिससे सरकारी मशीनरी और प्रशासन पर दबाव बढ़ता है। रामदेव ने तर्क दिया कि चुनावों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की duty लगाई जाती है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अगर देशभर में एक साथ चुनाव हों तो प्रशासनिक संसाधनों और समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने ‘One Nation, One Education’ की जरूरत पर भी जोर दिया और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालत की। Vande Mataram पर भी रखी अपनी बात बाबा रामदेव ने वंदे मातरम और भारत माता के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत माता को आस्था, शक्ति, ज्ञान और कर्तव्य का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद के बजाय व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। क्यों वायरल हुआ ‘पेल रखा है’ वाला बयान? रामदेव अक्सर सार्वजनिक मंचों पर तीखे और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनका यह कहना कि “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे” सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींच गया। हाल के दिनों में कंगना रनौत के साथ विवाद और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर आलोचना के कारण भी इस टिप्पणी को ज्यादा चर्चा मिली। हालांकि रामदेव ने यह नहीं कहा कि वह अपने किसी पुराने बयान को वापस ले रहे हैं। इसलिए इसे केवल उनकी बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी के रूप में देखना अधिक उचित होगा। नोट: यह बयान 23 अगस्त 2026 का है। इसे 25 अगस्त की ताजा घटना के रूप में प्रकाशित न करें। स्रोत – इंडिया डेली, आजतक, नवभारत टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित सरकारी घरों की मरम्मत पर 2025-26 में ₹92 करोड़ खर्च: RTI में खुलासा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में केंद्रीय मंत्रियों को आवंटित सरकारी बंगलों की मरम्मत, renovation और furnishing पर होने वाला खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में इन आधिकारिक आवासों पर ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए। यह 2014-15 में दर्ज ₹27.47 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। यह जानकारी समाचार एजेंसी PTI द्वारा दायर Right to Information यानी RTI आवेदन के जवाब से सामने आई है। इन सरकारी आवासों की देखरेख और मरम्मत का काम Central Public Works Department (CPWD) करता है। 12 साल में ₹547 करोड़ से ज्यादा खर्च RTI के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत, renovation और maintenance पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए। इस अवधि में 2025-26 का ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सबसे ज्यादा बताया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इन सरकारी बंगलों के maintenance पर होने वाला सालाना खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। 2014-15 में खर्च था ₹27.47 करोड़ RTI में उपलब्ध year-wise data के मुताबिक 2014-15 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर ₹27.47 करोड़ खर्च हुए थे। इसके बाद खर्च इस प्रकार रहा: इस तरह पिछले वित्त वर्ष में खर्च 2014-15 के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हो गया। क्यों बढ़ रहा सरकारी बंगलों की मरम्मत का खर्च? अधिकारियों ने इस बढ़ते खर्च के पीछे कई कारण बताए हैं। लुटियंस दिल्ली के कई बंगले करीब 80 से 100 साल पुराने हैं। इनमें समय के साथ seepage, termites, पुरानी electrical wiring, plumbing और structural wear-and-tear जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से कुछ बंगलों की स्थिति ऐसी भी रही है कि उन्हें बड़े स्तर पर upgrade करने की जरूरत पड़ी। इसके अलावा construction materials और labour की बढ़ती कीमत यानी inflation को भी खर्च बढ़ने की एक वजह बताया गया है। Fans, LED Lights और Plumbing पर भी होता है खर्च एक केंद्रीय मंत्री के staff member ने PTI को बताया कि सरकारी आवासों में बार-बार आने वाली maintenance requests में electrical और plumbing से जुड़े काम प्रमुख होते हैं। इनमें fans, LED lights, plumbing repairs और कुछ वर्षों के अंतराल पर floor tiles बदलने जैसे काम शामिल हो सकते हैं। यानी ₹92.35 करोड़ का पूरा खर्च केवल बड़े renovation projects पर नहीं, बल्कि नियमित repair और furnishing जैसे अलग-अलग कामों को मिलाकर है। 2019 के बाद तेजी से बढ़ा Average खर्च आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की repair और upgradation पर औसत सालाना खर्च करीब ₹26.78 करोड़ रहा। वहीं 2019 से 2024 के बीच यह औसत लगभग दोगुना होकर ₹50 करोड़ सालाना के करीब पहुंच गया। इसके बाद 2024-25 में ₹71.98 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च हुआ। करीब 70 से 72 Ministers के लिए Official Residences केंद्र की Council of Ministers में अलग-अलग समय पर करीब 70 से 72 Cabinet Ministers और Ministers of State शामिल रहे हैं। ₹92.35 करोड़ के कुल सालाना खर्च को केवल गणितीय औसत में देखें तो यह करीब ₹1.2 करोड़ प्रति मंत्री बैठता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मंत्री के घर पर ₹1.2 करोड़ खर्च हुए। वास्तविक खर्च हर bungalow की उम्र, स्थिति और वहां कराए गए काम के आधार पर काफी अलग हो सकता है। RTI में किन खर्चों की जानकारी नहीं मिली? RTI में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक residences पर हुए खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। लेकिन CPWD ने इस अवधि के दौरान ऐसे Lok Sabha और Rajya Sabha MPs जो मंत्री नहीं हैं, उनके सरकारी आवासों पर हुए खर्च का data उपलब्ध नहीं कराया। इसी तरह Union Ministers और Ministers of State के official offices पर हुए maintenance expenditure की जानकारी भी इस RTI response में शामिल नहीं है। इसलिए ₹547.68 करोड़ का आंकड़ा सभी सांसदों और सरकारी कार्यालयों के कुल maintenance खर्च को नहीं दर्शाता। Lutyens Delhi के बंगले ऐतिहासिक भी हैं दिल्ली का Lutyens Bungalow Zone ब्रिटिश काल में नई दिल्ली को राजधानी के रूप में विकसित किए जाने के दौरान बनाया गया था। इस क्षेत्र का अधिकांश विकास 1912 से 1930 के बीच हुआ। आजादी के बाद इन बंगलों का इस्तेमाल देश के वरिष्ठ मंत्रियों और अन्य सरकारी पदाधिकारियों के आधिकारिक निवास के रूप में होने लगा। कई इमारतें अब लगभग एक सदी पुरानी हो चुकी हैं, जिसके चलते उनका maintenance आधुनिक residential buildings की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है। 2004 से 2009 में खर्च हुए थे ₹93.50 करोड़ RTI से जुड़े पुराने आंकड़े भी खर्च में आए बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। सितंबर 2009 के एक RTI response के मुताबिक 2004 से 2009 के पांच साल के दौरान MPs और Union Ministers के बंगलों की maintenance और renovation पर कुल ₹93.50 करोड़ खर्च हुए थे। इसके मुकाबले केवल 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर खर्च ₹92.35 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि दोनों आंकड़ों की category और coverage पूरी तरह समान नहीं है, इसलिए सीधे तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। RTI के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकारी खर्च पर चर्चा ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सामने आने के बाद सरकारी आवासों पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ पुराने और ऐतिहासिक बंगलों के रखरखाव, electrical safety, plumbing और structural repair की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण transparency और cost efficiency को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल RTI से सामने आया मुख्य तथ्य यह है कि 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवासों की repair, renovation और furnishing पर ₹92.35 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे ऊंचा सालाना आंकड़ा है। स्रोत – पीटीआई, एनडीटीवी, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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जयपुर के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर; ‘भैंसों के बाड़े’ में लग रही कक्षाएं? CJP टीम पर कथित हमले के बाद Cross FIR

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास एक सरकारी स्कूल की हालत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा व्यवस्था से लेकर कानून-व्यवस्था तक बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की मूल इमारत जर्जर घोषित होने के बाद बच्चों की कक्षाएं एक वैकल्पिक टीन शेड जैसी जगह पर लगाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों और CJP का दावा है कि यह जगह भैंसों के बाड़े या तबेले के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां चारा और गोबर भी दिखाई दिया। स्कूल की स्थिति देखने पहुंची CJP की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच 21 अगस्त को विवाद और धक्का-मुक्की हुई थी। अब इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। 24 अगस्त की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और 50-60 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी SC/ST Act समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। क्यों बाड़े जैसी जगह पर लग रही हैं कक्षाएं? राजस्थान सरकार के अधिकारियों के मुताबिक रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी प्राथमिक स्कूल की इमारत को सितंबर 2025 में किए गए सर्वे के बाद जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था। स्कूल में फिलहाल करीब 18 विद्यार्थी और दो शिक्षक बताए गए हैं। पुरानी इमारत असुरक्षित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित की गई। मीडिया रिपोर्टों में इस वैकल्पिक जगह को गौशाला, तबेला या buffalo shed जैसी जगह बताया गया है। तस्वीरों और रिपोर्टों में दावा किया गया कि जिस क्षेत्र में बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं, वहां आसपास पशुओं का चारा और गोबर भी मौजूद था। यही तस्वीर सामने आने के बाद स्कूल की स्थिति सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। School Thik Karo अभियान के तहत पहुंची थी CJP CJP की टीम अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत 21 अगस्त को इस सरकारी स्कूल की स्थिति देखने रामपुरा-कंवरपुरा पहुंची थी। CJP का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि बच्चों की पढ़ाई उचित स्कूल भवन के बजाय पशुओं के बाड़े जैसी जगह पर हो रही है। इसी स्थिति की जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए टीम गांव पहुंची थी। टीम में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। गांव पहुंचते ही बढ़ा विवाद स्कूल तक पहुंचने की कोशिश के दौरान CJP टीम और कुछ स्थानीय ग्रामीणों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। CJP का आरोप है कि टीम को स्कूल तक पहुंचने से रोका गया और फिर उस पर हमला किया गया। संगठन ने दावा किया कि उसके सदस्यों के साथ मारपीट हुई, पत्थर फेंके गए और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने CJP कार्यकर्ताओं पर ही अभद्रता और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। इसी वजह से मामला अब केवल एक कथित हमले की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की Cross FIR दर्ज हो चुकी है। Ashutosh Ranka समेत CJP कार्यकर्ताओं पर SC/ST Act में केस 24 अगस्त को सामने आई Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय निवासी भगवान सहाय धनका की शिकायत पर आशुतोष रांका और करीब 50-60 CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से अभद्रता की, मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर BNS की मारपीट, गलत तरीके से रोकने, unlawful assembly और शांति भंग करने की मंशा से अपमान से जुड़ी धाराओं के साथ SC/ST Act की तीन धाराएं भी लगाई हैं। ये फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और पुलिस जांच के बाद ही उनकी सत्यता स्पष्ट होगी। CJP की तरफ से भी FIR दूसरी FIR CJP कार्यकर्ता रेखा शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। उनका आरोप है कि CJP की टीम स्कूल की स्थिति देखने जा रही थी, तभी उन्हें रास्ते में घेरकर अलग-अलग दिशाओं से हमला किया गया। CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावरों में कुछ लोग BJP से जुड़े थे। हालांकि BJP से जुड़े स्थानीय नेताओं और ग्रामीण पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। इसलिए कथित हमले के पीछे किसी राजनीतिक साजिश की बात अभी आरोप के स्तर पर है। स्कूल के नए भवन के लिए ₹18 लाख मंजूर विवाद के बीच बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। राजस्थान सरकार ने स्कूल के नए भवन के लिए कुल ₹18 लाख उपलब्ध होने की जानकारी दी है। इसमें ₹12 लाख District Mineral Foundation Trust (DMFT) और ₹6 लाख MLA Fund से दिए जाने हैं। सरकार के मुताबिक नए भवन का निर्माण 1 सितंबर 2026 से शुरू किया जाना है। CJP ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षित और उचित स्कूल भवन उपलब्ध कराना ही उसके अभियान की मुख्य मांग थी। CJP ने CM Bhajan Lal Sharma को कहा धन्यवाद नए भवन के निर्माण की घोषणा सामने आने के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद दिया। रांका ने कहा कि उनकी मांग यही थी कि बच्चों को उचित जगह पर पढ़ने की सुविधा मिले। हालांकि उन्होंने कथित हमले के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग भी दोहराई और कहा कि दोषी चाहे किसी भी पक्ष के हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। Rajasthan में 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं रामपुरा-कंवरपुरा का मामला सामने आने के बाद राजस्थान के सरकारी स्कूलों के infrastructure पर भी चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए UDISE आधारित आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपनी इमारत नहीं है। इसके अलावा अपनी building वाले सरकारी स्कूलों में भी: होने की जानकारी सामने आई है। ये आंकड़े राज्य में school infrastructure की चुनौती को बड़े स्तर पर दिखाते हैं। Rajasthan सरकार ने बनाया बड़ा Infrastructure Plan राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए बड़े स्तर पर राशि उपलब्ध कराने की बात कही है। सरकार के मुताबिक जर्जर प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और maintenance के…

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राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का VIDEO वायरल; बोले- भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया गया कि उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वह राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही वहां से चले गए। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। हालांकि सतीश महाना ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर घटनाक्रम को भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है और जिस समय राष्ट्रगान चल रहा था, वह उस प्रेक्षागृह में मौजूद ही नहीं थे। उन्नाव के कार्यक्रम से जुड़ा है Viral Video मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव का है। सतीश महाना यहां एक शैक्षिक संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्हें Guard of Honour दिया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक तरफ राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देती है और दूसरी तरफ सतीश महाना सलामी मंच से नीचे उतरते और वहां से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इसी वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल गए। VIDEO Viral होते ही शुरू हुआ विवाद वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया कि जब राष्ट्रगान चल रहा था तो विधानसभा अध्यक्ष ने वहां रुककर उसे पूरा क्यों नहीं किया। मामले ने जल्द ही राजनीतिक रूप भी ले लिया और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी के नेताओं ने BJP और सतीश महाना पर निशाना साधना शुरू कर दिया। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर घटना का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं था। Satish Mahana ने क्या सफाई दी? विवाद बढ़ने के बाद सतीश महाना ने रविवार शाम सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो के बारे में सही तथ्य जानना जरूरी है और लोगों के बीच भ्रम न फैले, इसलिए वह घटनाक्रम स्पष्ट कर रहे हैं। महाना के अनुसार शनिवार को उन्नाव में उन्हें जिस समय Guard of Honour दिया जा रहा था, उसी समय संयोग से प्रेक्षागृह के अंदर राष्ट्रगान शुरू हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दोनों कार्यक्रम अलग-अलग थे और जिस प्रेक्षागृह के भीतर राष्ट्रगान चल रहा था, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। ‘दोनों कार्यक्रम पूरी तरह अलग थे’ सतीश महाना ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि Guard of Honour और auditorium के भीतर चल रहा कार्यक्रम दो अलग-अलग कार्यक्रम थे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं की तस्वीरों और आवाज को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे ऐसा प्रतीत हो कि वह राष्ट्रगान के दौरान रुके नहीं और वहां से चले गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस interpretation को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ। ‘राष्ट्रगान का हमेशा सम्मान किया’ महाना ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा से लेकर अपने विधानसभा क्षेत्र तक हर अवसर पर उन्होंने और उनके सहयोगियों ने संविधान तथा राष्ट्रगान का सर्वोच्च सम्मान किया है। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से भी अपील की कि किसी वीडियो या घटना पर टिप्पणी करने से पहले उसके तथ्यों की जांच जरूर की जाए। Congress ने BJP को घेरा वायरल वीडियो को कांग्रेस नेताओं और पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स ने भी शेयर किया। कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए कि राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के कथित तौर पर चले जाने की घटना पर BJP नेतृत्व क्या कार्रवाई करेगा। कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी जवाब मांगा। विपक्ष ने इसे राष्ट्रगान के सम्मान से जोड़ते हुए महाना से जवाब और माफी की मांग की। Akhilesh Yadav ने भी उठाया सवाल समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर BJP सरकार पर हमला बोला। उन्होंने वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी। इससे वीडियो को लेकर शुरू हुआ सोशल मीडिया विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस में भी बदल गया। आयोजक पक्ष ने क्या कहा? कुछ मीडिया रिपोर्टों में कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर सतीश महाना को Guard of Honour दिया जा रहा था, वहां अलग से राष्ट्रगान नहीं बजाया जा रहा था। प्रेक्षागृह के भीतर चल रहे राष्ट्रगान की आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। यह स्पष्टीकरण सतीश महाना के उस दावे से मेल खाता है जिसमें उन्होंने Guard of Honour और auditorium में चल रहे कार्यक्रम को अलग-अलग बताया है। Viral VIDEO में क्या दिखता है? वीडियो में सतीश महाना सलामी की मुद्रा में खड़े दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद मंच से नीचे उतरते नजर आते हैं। Background में राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देने के कारण वीडियो को लेकर सवाल उठे। लेकिन वीडियो का छोटा हिस्सा अपने आप यह साबित नहीं करता कि राष्ट्रगान उसी Guard of Honour ceremony का हिस्सा था या किसी दूसरी जगह से उसकी आवाज आ रही थी। इसी बिंदु पर सतीश महाना और उनके आलोचकों के दावे अलग हैं। घटना कब हुई? यह घटनाक्रम 22 अगस्त 2026 को उन्नाव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसके बाद 23 अगस्त को वीडियो सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में बड़े स्तर पर वायरल हुआ। रविवार शाम तक सतीश महाना ने अपना विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी कर दिया। इसलिए 24 अगस्त तक उपलब्ध latest update यह है कि विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। Viral Claim को तथ्य मानने से पहले जरूरी है पूरा Context सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राष्ट्रगान की आवाज के बीच सतीश महाना को आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ राष्ट्रगान छोड़कर जाने का आरोप लगाया गया। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रगान auditorium के भीतर दूसरे कार्यक्रम में चल रहा था और वह उस समय वहां मौजूद नहीं थे। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे…

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