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PM Modi ने युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े ऐलान किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए युवाओं और महिलाओं को लेकर कई बड़े ऐलान किए। प्रधानमंत्री के भाषण में रोजगार, AI skilling, competitive exams, innovation और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर विशेष जोर रहा। 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को Artificial Intelligence (AI) की training दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को तेजी से बदलती technology और future jobs के लिए तैयार करना है। सरकार का फोकस युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय AI और emerging technologies में practical skills देने पर रहेगा। Competitive Exams के लिए Free Online Coaching प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए free online coaching की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि competitive examinations की तैयारी में coaching का खर्च गरीब और middle-class परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालता है। नई व्यवस्था के जरिए युवाओं को बिना फीस के online preparation resources उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा खास तौर पर उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है जो महंगी coaching के कारण बेहतर तैयारी नहीं कर पाते। युवाओं के Ideas और Innovation को मिलेगा Push PM Modi ने युवाओं से बड़े सपने देखने और अपने innovative ideas को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के initiative का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य ambitious ideas, innovation और research को समर्थन देना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसाधनों की कमी युवाओं के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। Sports Talent Hunt भी शुरू करने का ऐलान युवाओं और बच्चों के लिए सरकार ने nationwide sports talent hunt की दिशा में भी बड़ा कदम बताया। इस initiative के तहत 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में sports talent की पहचान करने और उन्हें आगे training देने पर जोर रहेगा। लक्ष्य भविष्य के Olympic-level athletes तैयार करना है। महिलाओं के लिए 33% राजनीतिक आरक्षण पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं के लिए 33% reservation से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की। प्रस्ताव का उद्देश्य Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर साथ आने की अपील करते हुए कहा कि वे इस ऐतिहासिक बदलाव का श्रेय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। महिलाओं की भागीदारी को विकास से जोड़ा PM Modi ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। महिलाओं को केवल welfare schemes की beneficiary के रूप में नहीं, बल्कि economic growth, entrepreneurship, leadership और nation-building की active partners के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। Youth को बनाया Independence Day Speech का केंद्र इस साल के भाषण में युवाओं का उल्लेख विशेष रूप से prominent रहा। एक रिपोर्ट के अनुसार PM Modi ने अपने भाषण में youth-related शब्दों का 52 बार इस्तेमाल किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार की आगामी विकास रणनीति में युवाओं को केंद्रीय भूमिका दी जा रही है। Jobs और Manufacturing पर भी जोर प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए manufacturing, MSMEs, startups और technology sectors को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि भारत में उत्पादन बढ़ने से नए employment opportunities पैदा होंगे और युवा देश की economic growth के प्रमुख भागीदार बनेंगे। ‘Viksit Bharat’ के लक्ष्य से जुड़े ऐलान इन घोषणाओं को प्रधानमंत्री ने Viksit Bharat @2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा। AI skills, free coaching, innovation, sports और women’s representation जैसे मुद्दों को education, employment और national development के साथ जोड़कर पेश किया गया। युवाओं के लिए घोषणाओं का महत्व इन ऐलानों का सीधा असर लाखों छात्रों और job seekers पर पड़ सकता है। मुख्य लाभों में शामिल हैं: महिलाओं के लिए राजनीतिक भागीदारी का बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री की अपील ने इसे Independence Day के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेशों में शामिल कर दिया है। यदि प्रस्ताव को पर्याप्त राजनीतिक समर्थन मिलता है, तो इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकता है। निष्कर्ष PM Modi के Independence Day 2026 संबोधन में युवा और महिला सशक्तिकरण दो महत्वपूर्ण themes के रूप में सामने आए। एक ओर 1 करोड़ युवाओं को AI training, free online coaching, innovation funding और sports talent hunt जैसे initiatives पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से महिलाओं के 33% reservation का समर्थन करने की अपील की। इन घोषणाओं को सरकार के Viksit Bharat @2047 vision का हिस्सा बताया गया है, जिसमें युवा भारत की technology और economic strength के केंद्र में होंगे और महिलाओं की भागीदारी को development तथा governance दोनों में बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। Source: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अगस्त 2026 का Independence Day address और आज प्रकाशित ताजा रिपोर्ट्स। Original Report: PM Modi ने Independence Day speech में युवाओं के लिए AI training और free competitive-exam coaching तथा महिलाओं के लिए 33% political reservation को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं और अपील की। Jai Rashtra News

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हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर सियासी घमासान; खड़गे ने लगाया जातीय भेदभाव का आरोप

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के मंच पर कथित ‘शुद्धिकरण’ कराए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस घटना को जातीय भेदभाव और दलितों के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। वहीं, भाजपा ने इस अनुष्ठान से पार्टी का सीधा संबंध होने से इनकार किया है और मामले की जांच की बात कही है। क्या है पूरा मामला? विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली के बाद सामने आया। इस रैली को मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। रैली के दो दिन बाद, 10 अगस्त को, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर मंच और कार्यक्रम स्थल पर गंगाजल छिड़ककर तथा हवन के जरिए ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की खबर सामने आई। संगठन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई के पीछे धार्मिक और वैचारिक कारण बताए। राज्यसभा में खड़गे ने उठाया मुद्दा खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं और उनके भाषण के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ किए जाने से उन्हें गहरा अपमान महसूस हुआ। खड़गे ने सवाल उठाया कि यदि उनके भाषण में किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई थी, तो मंच को ‘शुद्ध’ करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने इस घटना को संविधान में दिए गए समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों से जोड़ते हुए सवाल उठाए। कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया जातीय भेदभाव का आरोप कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा की गई और इसे दलित विरोधी मानसिकता तथा जातिगत भेदभाव का उदाहरण बताया। कांग्रेस के आधिकारिक बयान में भी कहा गया कि खड़गे ने जिस मंच से जनता को संबोधित किया, उसी मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। पार्टी ने भाजपा पर सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। भाजपा का क्या कहना है? भाजपा ने इस घटना से पार्टी के आधिकारिक तौर पर जुड़े होने से इनकार किया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि यदि ऐसा कृत्य हुआ है तो यह निंदनीय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। इस तरह भाजपा ने कांग्रेस के उस आरोप को स्वीकार नहीं किया कि यह पार्टी की ओर से कराया गया कोई आधिकारिक कार्यक्रम था। शुद्धिकरण कराने वाले संगठन की सफाई शुद्धिकरण से जुड़े संगठन ने कांग्रेस के जातीय भेदभाव के आरोप को खारिज किया है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि अनुष्ठान का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था। उनका दावा है कि कार्रवाई धार्मिक और वैचारिक कारणों से की गई थी और खड़गे के पूर्व राजनीतिक बयानों को भी इसके संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यानी घटना को लेकर कांग्रेस और अनुष्ठान कराने वाले पक्ष के बीच मकसद को लेकर पूरी तरह अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। विवाद अब हल्द्वानी से बाहर भी पहुंचा मामला अब केवल उत्तराखंड की राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने दूसरे राज्यों में भी इस घटना के खिलाफ प्रतिक्रिया दी है। 15 अगस्त को शिमला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित ‘शुद्धिकरण’ के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और खड़गे के अपमान के लिए भाजपा से माफी की मांग की। इससे विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। युवकों के आरोपों से नया मोड़ विवाद के बीच कुछ युवकों ने आरोप लगाया कि उन्हें एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें यह पता चला कि वहां ‘शुद्धिकरण’ हवन होने वाला है। इन युवकों ने दावा किया कि उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना कार्यक्रम में शामिल कराया गया और बाद में उन्हें इस्तेमाल किए जाने जैसा महसूस हुआ। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। जातीय भेदभाव बनाम धार्मिक-वैचारिक विवाद इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि दोनों पक्ष घटना की व्याख्या अलग तरीके से कर रहे हैं। कांग्रेस इसे खड़गे की जातीय पहचान से जोड़कर दलित अपमान और भेदभाव का मामला बता रही है। दूसरी ओर, अनुष्ठान से जुड़े लोग इसे जाति से जोड़ने से इनकार करते हुए धार्मिक और वैचारिक विरोध का मामला बता रहे हैं। भाजपा ने भी अनुष्ठान से पार्टी की आधिकारिक भूमिका होने से इनकार करते हुए जांच की बात कही है। राजनीतिक तापमान बढ़ा हल्द्वानी विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में यह घटना कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकती है। कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और संविधान के मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि भाजपा का रुख फिलहाल घटना की जांच और पार्टी की भूमिका से दूरी बनाए रखने का है। निष्कर्ष हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ ने जाति, सामाजिक समानता और राजनीतिक असहमति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खड़गे ने इसे अपने साथ हुए जातीय भेदभाव और अपमान के रूप में उठाया है, जबकि शुद्धिकरण से जुड़े संगठन ने जातिगत मकसद से इनकार किया है। भाजपा ने भी अपनी आधिकारिक भूमिका से इनकार करते हुए जांच का आश्वासन दिया है। अब इस विवाद में जांच के निष्कर्ष यह स्पष्ट करने में अहम होंगे कि अनुष्ठान किसने कराया, उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इसका किसी राजनीतिक संगठन से सीधा संबंध था। Source: राज्यसभा में दिए गए बयान, कांग्रेस के आधिकारिक बयान और 14–15 अगस्त 2026 की ताजा मीडिया रिपोर्ट्स। Original Report: हल्द्वानी रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। Jai Rashtra News

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संसद परिसर में गृहमंत्री अमित शाह का बदला अंदाज़, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिखा अलग रंग

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद परिसर से सामने आई उनकी तस्वीरों और वीडियो में उनका अंदाज सामान्य राजनीतिक बैठकों से कुछ अलग नजर आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में उनके इस बदले अंदाज को लेकर किसी खास राजनीतिक फैसले या आधिकारिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को तथ्य मानने से पहले सावधानी जरूरी है। मानसून सत्र के दौरान अमित शाह रहे सुर्खियों में संसद के हालिया मानसून सत्र में अमित शाह कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे। खासतौर पर छात्रों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष लगातार गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। अमित शाह ने अंततः सदन में चर्चा और जवाब देने की इच्छा जताई थी। भाजपा की ओर से भी कहा गया कि गृह मंत्री संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सत्र खत्म होने के बाद भी राजनीतिक चर्चा जारी 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी अमित शाह के बयान को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही। विपक्ष ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री ने सत्र के अंतिम चरण में चर्चा की पेशकश क्यों की, जबकि इससे पहले भी उनसे बयान की मांग की जा रही थी। वहीं सरकार और भाजपा ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में बदला अंदाज क्यों चर्चा में आया? अमित शाह की संसद परिसर में सामने आई तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स इसे 15 अगस्त और स्वतंत्रता दिवस से जुड़े माहौल से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ सामान्य सार्वजनिक उपस्थिति मान रहे हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक बयान से यह पुष्टि नहीं हुई है कि उनके पहनावे या अंदाज में बदलाव के पीछे कोई विशेष राजनीतिक संदेश था। 15 अगस्त से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं की गतिविधियों पर स्वाभाविक रूप से लोगों की नजर बनी हुई है। अमित शाह गृह मंत्री के साथ-साथ केंद्र सरकार के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में शामिल हैं। गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में सूचीबद्ध करती है। निष्कर्ष संसद परिसर में अमित शाह का अलग अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक कारण या आधिकारिक संदेश होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दे और विपक्ष की मांगों को लेकर अमित शाह पहले ही राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे हैं। Source: संसद से जुड़े ताजा समाचार, NDTV, Jansatta, गृह मंत्रालय जय राष्ट्र न्यूज़

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Gen Z आंदोलन कर रही है, तो उन्हें देशविरोधी मत कहिए!” — मोहन भागवत का बयान चर्चा में

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का Gen Z और युवा आंदोलनों को लेकर दिया गया बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। भागवत ने कहा कि सिर्फ आंदोलन करने की वजह से युवाओं को देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं की चिंताओं को समझने और उनके साथ संवाद करने की जरूरत पर जोर दिया। आंदोलन को संवाद का हिस्सा बताया भागवत के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों और असहमति को सामने रखना अपने आप में देशविरोधी गतिविधि नहीं है। उन्होंने युवाओं के सवालों को समझने और उनसे बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत बताई। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में Gen Z के नेतृत्व में छात्र और युवा आंदोलनों ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया है। Gen Z को समझने की जरूरत पर जोर RSS प्रमुख ने नई पीढ़ी के व्यवहार और सोच को समझने की आवश्यकता पर भी बात की है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पुराने दौर की तुलना में अलग तरीके से सोचती है और सवाल पूछती है। भागवत के अनुसार, युवाओं के सवालों का जवाब तर्क, संवाद और समझदारी से दिया जाना चाहिए, न कि उन्हें तुरंत विरोधी या देशविरोधी करार देकर। छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि में बयान अहम यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली समेत कई जगहों पर छात्र और युवा परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। Gen Z आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों और सरकार का ध्यान युवा मुद्दों की ओर खींचा है। इन आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बातचीत तथा विरोध प्रदर्शन के तरीके को लेकर भी बहस हुई है। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा भागवत की टिप्पणी के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे युवाओं के प्रति संवादात्मक दृष्टिकोण के रूप में देखा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी भागवत की Gen Z संबंधी टिप्पणी की सराहना की है। वहीं, कुछ राजनीतिक हलकों में इस बयान को मौजूदा छात्र आंदोलनों और युवा असंतोष के संदर्भ में देखा जा रहा है। युवाओं के साथ संवाद पर जोर भागवत ने पहले भी युवाओं और नई पीढ़ी के साथ संवाद की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि युवा जब सवाल पूछते हैं तो उनके सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने माता-पिता और समाज की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा है कि नई पीढ़ी को केवल दोष देने के बजाय बड़े लोगों को अपने व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। बयान क्यों बना चर्चा का विषय? भागवत का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि “देशविरोधी” का टैग छात्र आंदोलनों और सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के संदर्भ में लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। ऐसे में RSS प्रमुख का यह कहना कि आंदोलन करने वालों को सिर्फ इस आधार पर देशविरोधी नहीं माना जाना चाहिए, युवाओं के साथ संवाद और लोकतांत्रिक असहमति को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। निष्कर्ष मोहन भागवत के Gen Z और छात्र आंदोलनों को लेकर बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। उनका संदेश है कि युवाओं के विरोध और सवालों को केवल देशविरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी चिंताओं को समझकर संवाद और तर्क के जरिए समाधान तलाशना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में युवा और छात्र आंदोलनों का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। Source: PTI, Times of India, Indian Express, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद का मानसून सत्र समाप्त, FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया; हंगामे के बीच कई अहम फैसले

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई, जबकि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया सत्र के अंतिम चरण में FCRA संशोधन विधेयक सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में शामिल रहा। लोकसभा ने विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान से जुड़े नियमों को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वहीं विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। विधेयक को लेकर विपक्ष ने जताई आपत्ति विपक्षी दलों ने FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर सरकार की निगरानी और नियंत्रण बढ़ सकता है। कुछ संगठनों ने विशेष रूप से उन प्रावधानों पर चिंता जताई है जिनके तहत FCRA पंजीकरण रद्द या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान से खरीदी गई संपत्तियों को लेकर सरकार को अधिक अधिकार मिल सकते हैं। सरकार ने सुरक्षा और पारदर्शिता को बताया आधार सरकार की ओर से विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या संगठन को निशाना बनाना नहीं है। सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है तथा यदि विदेशी योगदान का इस्तेमाल नियमों के विपरीत होता है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। JPC में अब होगी विस्तृत जांच विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के बाद अब समिति इसके विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी। समिति संबंधित मंत्रालयों, विशेषज्ञों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी। रिपोर्ट में विधेयक को मौजूदा रूप में आगे बढ़ाने या उसमें बदलाव करने की सिफारिशें की जा सकती हैं। मानसून सत्र में कई विधेयक आगे बढ़े मानसून सत्र के दौरान संसद में कई विधायी कार्य हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सत्र में 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए, जबकि कुछ प्रस्तावित कानूनों को आगे की जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। सत्र के दौरान FCRA के अलावा खनन, सहकारी क्षेत्र और अन्य प्रशासनिक विषयों से जुड़े विधेयकों पर भी महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई। सत्र में हंगामा भी रहा प्रमुख मुद्दा मानसून सत्र के दौरान कई दिनों तक विपक्ष और सरकार के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने कई विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि कई मौकों पर सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई। इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी और सत्र के अंतिम दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कार्रवाई हुई। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक भी चर्चा में रहे सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक भी लोकसभा में पेश किए गए। इन प्रस्तावों का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ी व्यवस्था से था। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका और उससे जुड़े अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्रवाई नहीं हुई। अब आगे क्या होगा? संसद का सत्र समाप्त होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर FCRA संशोधन विधेयक की JPC जांच पर रहेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार विधेयक को दोबारा संसद में आगे बढ़ा सकती है। इस दौरान विपक्ष और संबंधित संगठनों की ओर से दिए जाने वाले सुझावों और आपत्तियों का भी महत्व रहेगा। निष्कर्ष 13 अगस्त 2026 को संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया, लेकिन सत्र के दौरान उठे कई मुद्दों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। इनमें FCRA संशोधन विधेयक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है, जिसे अब संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। अब JPC की जांच और उसकी रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि FCRA संशोधन विधेयक किस रूप में आगे बढ़ता है। वहीं संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच फिर से तीखी बहस देखने को मिल सकती है। Source: संसद/संसदीय कार्य मंत्रालय से संबंधित जानकारी, PTI, Indian Express और अन्य ताजा रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की बैठक के लिए दिल्ली में हॉल नहीं मिला? अभिजीत दीपके का गंभीर आरोप, BJP पर लगाया दबाव बनाने का दावा

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में पार्टी की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल नहीं मिलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके का दावा है कि पार्टी ने कई जगहों पर हॉल की तलाश की, लेकिन कई संचालकों ने कथित तौर पर “ऊपर से दबाव” होने की बात कहते हुए जगह देने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि आखिरकार जिस हॉल को बुक किया गया था, उसके मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। करीब 10 जगहों पर तलाशने का दावा अभिजीत दीपके के अनुसार, CJP को 12 अगस्त को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स की बैठक करनी थी। इसके लिए पार्टी की ओर से कई स्थानों पर हॉल तलाशे गए। दीपके का कहना है कि करीब 10 जगहों पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें हॉल नहीं मिला। उनके मुताबिक, कुछ हॉल मालिकों ने कथित तौर पर कहा कि उन पर “ऊपर से दबाव” है। बुकिंग के बाद भी रद्द हुई बैठक दीपके ने दावा किया कि काफी कोशिशों के बाद आखिरकार एक हॉल बुक किया गया और उसके लिए भुगतान भी किया गया। उनके पास बुकिंग की रसीद होने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि, उनका आरोप है कि बैठक से ठीक पहले हॉल मालिक को कथित तौर पर धमकी भरे फोन आए और इसके बाद बैठक आयोजित करने में परेशानी खड़ी हो गई। “उल्टा लटका दिया जाएगा” का लगाया आरोप CJP संस्थापक ने आरोप लगाया कि हॉल मालिक को धमकी दी गई कि अगर वहां CJP की बैठक होने दी गई तो उसे “उल्टा लटका दिया जाएगा।” दीपके ने इन कथित धमकियों के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा की ओर से इस आरोप का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। दीपके बोले—धमकियों से नहीं डरेंगे अभिजीत दीपके ने कहा कि इस तरह की कथित धमकियों से CJP के कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी राजनीतिक संगठन की सामान्य बैठक के लिए निजी स्थान उपलब्ध कराने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी की गतिविधियों को रोकने की कोशिशों के बावजूद CJP अपने कार्यक्रम जारी रखेगी। CJP ने दिल्ली पुलिस पर भी उठाए सवाल CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि हॉल मालिकों को धमकियां दी गईं, तो पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है। रांका ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस केवल भाजपा के लिए काम कर रही है। फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। “जंतर-मंतर सीजन-2” का ऐलान हॉल विवाद के बीच अभिजीत दीपके ने CJP के आंदोलन को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि “जंतर-मंतर सीजन-2” कब शुरू होगा। दीपके ने दावा किया कि इसका दूसरा चरण जल्द शुरू किया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि CJP आने वाले दिनों में दिल्ली में फिर से सार्वजनिक आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रही है। देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ की भी तैयारी CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि पार्टी अब देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं और सुझावों को सुनना बताया गया है। पार्टी ने शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल ऑडिट और स्थानीय समस्याओं को रिकॉर्ड करने की अपील भी की है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हॉल मालिकों को धमकी देने और भाजपा की ओर से दबाव बनाए जाने के आरोप फिलहाल CJP और अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। निष्कर्ष दिल्ली में CJP की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल बुकिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि कई हॉल मालिकों पर दबाव बनाया गया और बुक किए गए हॉल के मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जहां CJP ने इसे दबाव और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। इसी बीच CJP ने “जंतर-मंतर सीजन-2” और देशव्यापी ‘लिसनिंग टूर’ की तैयारी का संकेत दिया है। Source: अमर उजाला / जनसत्ता / NDTV / आजतक रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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जय की ‘पसंदीदा’ तृषा को डिप्टी CM कब बनाएंगे? AIADMK नेता का तंज, सियासत गरम

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय को लेकर AIADMK नेता आरबी उदयकुमार की एक टिप्पणी चर्चा में है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर विजय की कथित “पसंदीदा” अभिनेत्री तृषा कृष्णन को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। यह बयान तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। AIADMK नेता ने विजय पर साधा निशाना AIADMK नेता आरबी उदयकुमार ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजय पर निशाना साधते हुए तृषा का नाम लिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि तमिलनाडु को यह देखना बाकी है कि विजय की “प्रिय” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। उनकी टिप्पणी को विजय की राजनीति और उनके निजी जीवन से जुड़े सार्वजनिक चर्चाओं पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। तृषा का नाम लेकर क्यों किया गया तंज? तृषा कृष्णन और विजय दोनों तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे हैं और दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। इसी सार्वजनिक पहचान का इस्तेमाल करते हुए AIADMK नेता ने विजय पर राजनीतिक कटाक्ष किया। हालांकि, तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात किसी आधिकारिक नियुक्ति या प्रस्ताव के रूप में सामने नहीं आई है। यह टिप्पणी राजनीतिक तंज के तौर पर की गई थी। विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सत्ता में आई और विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विजय के सत्ता में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। AIADMK और DMK जैसे पुराने राजनीतिक दल अब TVK सरकार को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। डिप्टी CM का पद अभी खाली मौजूदा विधानसभा व्यवस्था के अनुसार तमिलनाडु में डिप्टी मुख्यमंत्री का पद फिलहाल खाली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विजय सरकार में इस पद पर अभी किसी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हुई है। इसी राजनीतिक स्थिति के बीच AIADMK नेता की तृषा को लेकर की गई टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद AIADMK और TVK के बीच राजनीतिक दूरी और बयानबाजी लगातार चर्चा में है। हाल ही में AIADMK ने विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय सांसद बैठक से भी दूरी बनाई थी। बैठक का मुद्दा लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा था। ऐसे माहौल में AIADMK नेताओं की ओर से विजय पर किए जा रहे राजनीतिक हमले राज्य की बदलती सियासत को दर्शाते हैं। विजय सरकार के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के सामने सरकार चलाने के साथ-साथ विधानसभा में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। 2026 के चुनाव के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और बाद में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी। अब सरकार के सामने प्रशासन, परिसीमन और विपक्ष के साथ राजनीतिक टकराव जैसे कई मुद्दे हैं। निष्कर्ष तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK नेता आरबी उदयकुमार का विजय और तृषा को लेकर किया गया तंज चर्चा में आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि विजय की “पसंदीदा” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है और यह बयान राजनीतिक कटाक्ष के रूप में दिया गया है। Source: NDTV / Navbharat Times / Latest political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद में ‘मंगल मिलन’! PM मोदी समेत NDA नेताओं ने लहराया तिरंगा, एकजुटता का दिया संदेश

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को NDA संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत NDA के कई सांसद और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। बैठक के दौरान नेताओं ने हाथों में तिरंगा लहराकर देशभक्ति और गठबंधन की एकजुटता का संदेश दिया। PM मोदी का हुआ जोरदार स्वागत ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने पर NDA सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे देशभक्ति के नारे भी लगाए गए। बैठक का उद्देश्य संसद सत्र के दौरान NDA के घटक दलों और सांसदों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखना है। नेताओं ने हाथों में थामा तिरंगा बैठक की सबसे खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब PM मोदी और NDA के कई नेताओं ने तिरंगा हाथों में लेकर एक साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। तिरंगा लहराते नेताओं के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। संसद भवन परिसर में हुआ कार्यक्रम यह ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम संसद भवन परिसर के GMC Balayogi Auditorium में आयोजित किया गया। NDA की ऐसी बैठकें संसद सत्र के दौरान गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं। NDA की एकजुटता पर जोर बैठक में तिरंगा लेकर एक साथ खड़े होना राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NDA नेतृत्व की ओर से लगातार गठबंधन की एकजुटता और सरकार के एजेंडे को लेकर सांसदों के बीच समन्वय पर जोर दिया जाता रहा है। संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में NDA सांसदों का यह सामूहिक कार्यक्रम गठबंधन की एकता दिखाने वाला संदेश माना जा रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंजा परिसर कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के नारों से माहौल उत्साहपूर्ण नजर आया। रिपोर्टों के अनुसार NDA सांसदों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। तिरंगा लहराने की तस्वीरों ने कार्यक्रम को और खास बना दिया और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गईं। संसद सत्र के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज मानसून सत्र के दौरान संसद में कई मुद्दों पर लगातार हंगामा और राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि NDA सांसद सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे माहौल में NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक को सांसदों के बीच समन्वय और रणनीति मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निष्कर्ष संसद भवन परिसर में हुई NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM नरेंद्र मोदी समेत गठबंधन के कई नेताओं ने तिरंगा लहराकर एकजुटता और देशभक्ति का संदेश दिया। ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच हुए इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। Source: DD News / News On AIR / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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