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INDIA गठबंधन का Election Commission तक मार्च, राहुल गांधी-अखिलेश समेत कई बड़े नेता शामिल; पुलिस ने रास्ते में रोका

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को और तेज हो गया। INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने संसद से Election Commission headquarters की ओर मार्च निकाला। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए, लेकिन भारी सुरक्षा और barricading के बीच पुलिस ने मार्च को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले ही रोक दिया। संसद से शुरू हुआ विपक्ष का मार्च INDIA bloc के सांसदों को सुबह Parliament House के Makar Dwar के पास जुटने के लिए कहा गया था। इसके बाद विपक्षी सांसद Election Commission headquarters की ओर बढ़े। मार्च का मुख्य मुद्दा electoral rolls की Special Intensive Revision प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोप थे। राहुल गांधी ने मांगा CEC का इस्तीफा मार्च के दौरान Leader of Opposition राहुल गांधी ने Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने एक placard भी दिखाया जिस पर लिखा था, “Gyanesh, it’s done bro, time to resign.” यह नारा प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी INDIA bloc के मार्च में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि voter-list revision की प्रक्रिया में transparency और impartiality को लेकर गंभीर सवाल हैं और Election Commission को इन पर जवाब देना चाहिए। खरगे बोले- लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई Congress अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य democratic principles और voters के अधिकारों की रक्षा करना है। पुलिस ने Election Commission पहुंचने से पहले रोका Opposition march Election Commission headquarters तक नहीं पहुंच सका। पुलिस ने barricades लगाकर नेताओं और सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं बैठकर विरोध दर्ज कराया। करीब 4,000 सुरक्षाकर्मी तैनात मार्च को देखते हुए Central Delhi में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। Delhi Police और Central Armed Police Forces के करीब 4,000 personnel को New Delhi district में तैनात किया गया। Connaught Place, Patel Chowk, Parliament Street और Election Commission के आसपास traffic restrictions भी लगाई गईं। SIR विवाद है प्रदर्शन की बड़ी वजह Opposition parties Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि voter lists में बदलाव की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission और BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ा राजनीतिक दबाव पिछले कई दिनों से Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। Student groups, activists और political parties अलग-अलग जगहों पर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। Delhi में विरोध का यह पांचवां दिन था। BJP ने विपक्ष पर लगाया राजनीति करने का आरोप BJP ने Congress और INDIA bloc के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष Election Commission जैसी constitutional institution को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। BJP spokesperson Sambit Patra ने Congress पर Form 6 और electoral process को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का आंदोलन आगे भी रहेगा जारी Congress ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। 8 अक्टूबर तक district-level padyatras, 10 से 20 अक्टूबर तक block-level meetings और इसके बाद state-level rallies आयोजित करने की योजना बनाई गई है। SIR को लेकर राष्ट्रपति से भी मुलाकात INDIA bloc नेताओं का एक delegation राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करने वाला है। विपक्ष SIR और Election Commission की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति के सामने रखने की तैयारी में है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कथित कोशिश, BJP BLA के खिलाफ FIR; कोर्ट ने search warrant भी जारी किया

बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम electoral roll से हटवाने की कथित कोशिश को लेकर BJP के Booth Level Agent (BLA) और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला BJP corporator और BLA-1 T. Srinivas Mothkur से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम में बल्लारी की एक अदालत ने पुलिस को उनके दफ्तर की तलाशी के लिए search warrant भी जारी किया है। 1 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR Brucepet Police Station में यह FIR 1 अक्टूबर को Congress BLA Goutham S की शिकायत पर दर्ज की गई थी। FIR में T. Srinivas Mothkur के अलावा Ballari City Corporation के Assistant Commissioner Nandish, BLO Sumalatha और case worker Sharanabasava के नाम भी शामिल हैं। 7,561 वोटरों की re-verification की मांग मामले की शुरुआत 21 सितंबर को हुई, जब Srinivas ने Ballari City Assembly constituency के 7,561 मतदाताओं की दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इनमें कुछ मतदाता क्षेत्र छोड़ चुके हैं, अनुपस्थित हैं या दूसरे स्थान पर भी registered हैं। अधिकारियों ने पहले खारिज किया था अनुरोध चुनाव अधिकारियों ने शुरुआती request को पर्याप्त दस्तावेज या supporting information न होने के कारण स्वीकार नहीं किया। इसके बाद Srinivas ने इन मतदाताओं के खिलाफ Form 7 objections दाखिल करने की कोशिश की। Form 7 का इस्तेमाल electoral roll में किसी नाम के inclusion पर objection या deletion की मांग के लिए किया जाता है। Bulk Form 7 submissions पर सवाल Election authorities ने Srinivas को बताया था कि BLA एक दिन में एक BLO के पास सीमित संख्या में applications दे सकता है। अगर claims-and-objections period में किसी BLA की applications 30 से अधिक होती हैं, तो ERO या Assistant ERO द्वारा व्यक्तिगत cross-verification जरूरी हो जाता है। शिकायत में 98.08% minority voters का दावा Congress BLA की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिन 7,561 voters को target किया गया, उनमें लगभग 98.08% minority communities से थे। यह शिकायतकर्ता का आरोप है और पुलिस जांच में इसकी सत्यता की जांच की जानी है। चुनाव अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप शिकायत में आरोप है कि कुछ election officials ने पहले objection reject होने के बावजूद बाद में इन voters की re-verification शुरू की। इसी आधार पर election officials को भी FIR में आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने BJP BLA के दफ्तर की तलाशी की अनुमति दी मामले में अब एक नया development सामने आया है। Ballari court ने पुलिस को Srinivas Mothkur के Talur Road स्थित office की तलाशी लेने की अनुमति दी है। जांच टीम Form 7 applications की तैयारी और submission से जुड़े records और अन्य material की जांच करना चाहती है। Karnataka CEO ने bulk deletion complaints पर जांच का भरोसा दिया Karnataka के Chief Electoral Officer V. Anbukumar ने bulk Form 7 applications से जुड़ी शिकायतों की जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा दिया है। राज्य के दूसरे हिस्सों से भी कथित mass voter-deletion applications की शिकायतें सामने आई हैं। BJP ने FIRs पर उठाए सवाल BJP और JD(S) नेताओं ने इन FIRs का विरोध किया है। उनका कहना है कि genuine Form 7 objections दाखिल करने वाले party workers को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। BJP ने यह भी तर्क दिया है कि bulk objections दाखिल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। Congress ने लगाया voter suppression का आरोप दूसरी ओर Congress नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान eligible voters, विशेषकर minorities, के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। इन आरोपों को BJP ने खारिज किया है और कहा है कि voter list verification का उद्देश्य केवल गलत, duplicate या ineligible entries की पहचान करना है। जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविकता फिलहाल 7,561 voters के नाम वास्तव में हटाए गए थे, इसका दावा स्थापित नहीं हुआ है। मामला कथित deletion attempt और Form 7 submissions से जुड़ा है। पुलिस जांच, electoral records और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। source – The News Minute / Hindustan Times / The Indian Express / IANS / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार की बाढ़ और महिला सुरक्षा के सवालों पर मैथिली ठाकुर से मीडिया के सवाल, जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं BJP विधायक

पटना: बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति और महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच BJP विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर से मीडिया ने उनके हालिया विदेश दौरे और राज्य के हालात पर प्रतिक्रिया मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकार लगातार सवाल पूछते रहे, लेकिन मैथिली ठाकुर ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विदेश दौरे से लौटने के बाद पूछे गए सवाल मैथिली ठाकुर हाल ही में विदेश दौरे से बिहार लौटी थीं। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे पूछा कि जब राज्य के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं, तब उनके विदेश दौरे और मौजूदा हालात को लेकर वह क्या कहना चाहेंगी। जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं मैथिली ठाकुर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकारों के कई सवालों के बावजूद मैथिली ठाकुर ने मौके पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। वह पत्रकारों से दूरी बनाते हुए अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए गए। बिहार में बाढ़ से कई इलाके प्रभावित हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने गंभीर स्थिति पैदा की है। सारण समेत कई इलाकों में गांव जलमग्न हुए हैं और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन को helicopter तक का इस्तेमाल करना पड़ा है। बाढ़ राहत व्यवस्था पर भी उठे सवाल राहत वितरण से जुड़े कई वीडियो और घटनाएं भी चर्चा में रही हैं। एक मामले में सारण जिले के एक पुलिस अधिकारी को बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत वितरण के दौरान pistol लहराते दिखने के बाद निलंबित किया गया था। महिला सुरक्षा पर भी बढ़ी बहस बिहार में हाल की कुछ घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा का मुद्दा भी राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। इसी संदर्भ में पत्रकारों ने मैथिली ठाकुर से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही। पुराना वीडियो फिर हुआ वायरल इस बीच मैथिली ठाकुर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हुआ, जिसमें वह कहती नजर आती हैं कि वह बिहार की बेटी हैं और खुद को राज्य में सुरक्षित महसूस करती हैं। लेकिन fact-check में सामने आया कि यह वीडियो अप्रैल 2026 का है और इसे Jamui की हालिया घटना से जोड़कर शेयर करना भ्रामक है। क्या कहा था पुराने वीडियो में? अप्रैल में मीडिया से बातचीत के दौरान मैथिली ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बिहार और उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़ी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि वह खुद बिहार से आती हैं और यहां सुरक्षित महसूस करती हैं। यह बयान किसी हालिया Jamui case के बाद नहीं दिया गया था। सोशल मीडिया पर चुप्पी को लेकर आलोचना ताजा मीडिया interaction के बाद सोशल मीडिया पर कई users ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते मैथिली ठाकुर को बाढ़ और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। वहीं केवल वीडियो के आधार पर उनके इरादों या पूरे राजनीतिक रुख का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। Alinagar से BJP विधायक हैं मैथिली ठाकुर लोकगायिका के रूप में प्रसिद्ध मैथिली ठाकुर अब बिहार की राजनीति में भी सक्रिय हैं और Alinagar विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसी कारण उनसे सांस्कृतिक हस्ती के साथ-साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में भी स्थानीय मुद्दों पर जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है। वायरल दावों की जांच जरूरी इस पूरे विवाद में दो अलग बातें सामने आई हैं—एक उनका ताजा media interaction, जिसमें उन्होंने सवालों का जवाब नहीं दिया, और दूसरा महिला सुरक्षा पर उनका पुराना बयान। दोनों को एक ही घटना से जोड़कर पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। source – Navbharat Times / Inshorts / Newschecker / Aaj Tak / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके पर BJP नेता प्रवीण दरेकर का पलटवार, PM मोदी को लेकर बयान पर जताई आपत्ति

मुंबई: महाराष्ट्र BJP के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरेकर ने आरोप लगाया कि शिवाजी पार्क में हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी की गई और आंदोलन अपने मूल मुद्दों से भटककर राजनीतिक मंच बन गया। शिवाजी पार्क प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस दौरान अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे। PM मोदी पर दिपके की टिप्पणी पर आपत्ति अभिजीत दिपके ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी के चाय बेचने से जुड़े पुराने संदर्भ को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल किया था कि जनता ने उन्हें चाय बेचने के लिए नहीं बल्कि सरकार चलाने के लिए चुना है। इसी तरह उन्होंने ‘Melody chocolate’ का जिक्र करते हुए भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। दरेकर बोले- आंदोलन राजनीतिक ड्रामा बन गया प्रवीण दरेकर ने CJP के प्रदर्शन पर हमला करते हुए इसे ‘political drama’ करार दिया। उनका कहना था कि शुरुआत में आंदोलन को छात्रों और चुनावी मुद्दों से जुड़ा बताया गया, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और महाराष्ट्र सरकार को निशाना बनाने के लिए किया गया। बाबासाहेब आंबेडकर को लेकर भी उठाया मुद्दा दरेकर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़े कुछ तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने CJP से आंबेडकरी समाज और महाराष्ट्र की जनता से माफी मांगने की मांग भी की। यह BJP नेता का आरोप है और इस पर CJP की अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आई है। ‘राजनीतिक नेताओं का अपमान स्वीकार नहीं’ दरेकर ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने CJP नेतृत्व पर आंदोलन के जरिए केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने का आरोप लगाया। फडणवीस को भी निशाना बना चुके हैं दिपके अभिजीत दिपके ने शिवाजी पार्क के भाषण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और कहा कि अगर सरकार चाहे तो उन्हें तीन दिन नहीं बल्कि तीन महीने जेल में डालकर देख सकती है। BJP नेताओं का CJP पर लगातार हमला प्रवीण दरेकर के अलावा BJP नेता राम कदम ने भी अभिजीत दिपके के बयानों की आलोचना की है। राम कदम ने संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए और इसे आंबेडकर के सम्मान से जोड़ा। CJP का दावा- मुद्दा चुनाव आयोग की जवाबदेही का दूसरी ओर CJP का कहना है कि उसका आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, voter-list revision और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़ा है। संगठन ने इन मुद्दों पर देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। राजनीतिक टकराव और तेज CJP के प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में BJP और अभिजीत दिपके के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ BJP नेता दिपके पर प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं को लेकर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं CJP सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने की बात कह रही है। source – Loksatta / Reuters / IANS / Pudhari / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ MNS और शिवसेना (UBT) का प्रदर्शन, चुनाव आयोग और SIR को लेकर जताई नाराजगी

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) ने मुंबई में संयुक्त प्रदर्शन किया। इस ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने किया। प्रदर्शन में हजारों लोग तिरंगा लेकर शामिल हुए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ सड़क पर उतरना रहा। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मार्च का नेतृत्व किया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। यह दोनों ठाकरे गुटों की हाल के समय में महत्वपूर्ण संयुक्त राजनीतिक कार्रवाई मानी जा रही है। SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग MNS और शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी दलों का आरोप है कि voter-list revision में पारदर्शिता की कमी है और बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा रहा। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा विवादों के बीच CEC को पद छोड़ना चाहिए। चुनाव आयोग ने विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। पार्टी झंडों की जगह तिरंगा इस मार्च की एक खास बात यह रही कि कार्यकर्ताओं से पार्टी के झंडे और प्रतीक नहीं लाने को कहा गया। प्रदर्शन में तिरंगा प्रमुख रूप से दिखाई दिया। आयोजकों ने इसे किसी एक पार्टी के बजाय चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकार से जुड़ा आंदोलन बताने की कोशिश की। हजारों प्रदर्शनकारी हुए शामिल रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और दक्षिण मुंबई की सड़कों पर मार्च किया। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार हजारों प्रदर्शनकारी तिरंगा और चुनाव आयोग के खिलाफ लिखे placards लेकर BMC मुख्यालय तक पहुंचे। Paper Ballot की मांग भी उठी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने EVM के बजाय ballot paper से चुनाव कराने की मांग भी उठाई। विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ा, जबकि चुनाव आयोग लंबे समय से EVM की सुरक्षा और विश्वसनीयता का बचाव करता रहा है। कांग्रेस और NCP (SP) के नेता भी पहुंचे प्रदर्शन में केवल MNS और शिवसेना (UBT) ही नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे के अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के प्रतिनिधियों ने भी मोर्चे में हिस्सा लिया। CJP ने भी किया समर्थन Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी MNS-शिवसेना (UBT) के प्रदर्शन का समर्थन किया। CJP founder अभिजीत दीपके ने लोगों से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। BJP ने विपक्ष पर किया पलटवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे बंधुओं के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक निराशा से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यह BJP का राजनीतिक पक्ष है। SIR विवाद पर देशभर में बढ़ रहा विरोध ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विरोध केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। दिल्ली समेत कई शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं और विपक्षी दल 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर संयुक्त विरोध की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक टकराव तेज एक ओर विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR और voter-list revision पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए revision को मतदाता सूची साफ करने की प्रक्रिया बताता है। इस विवाद के चलते आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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One Nation, One Election पर सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय समिति के साथ बैठक रद्द की, संभावित Judicial Review का दिया हवाला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने One Nation, One Election से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के साथ प्रस्तावित बैठक को रद्द कर दिया है। यह बैठक 6 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, जिसमें Chief Justice of India और अन्य सुप्रीम कोर्ट जजों के साथ informal interaction की योजना थी। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। 6 अक्टूबर को प्रस्तावित थी बैठक Joint Parliamentary Committee ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का दौरा प्रस्तावित किया था। एजेंडा में इसे “Local Study Visit” बताया गया था, जिसमें CJI और अन्य न्यायाधीशों से informal discussion का भी उल्लेख था। बाद में यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने Judicial Review का दिया हवाला सुप्रीम कोर्ट के Secretary General’s Office ने संसदीय समिति को बताया कि वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रस्ताव पर विचार किया। इसके बाद यह राय बनी कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के सामने judicial review के लिए आ सकता है, इसलिए इस विषय पर administrative side पर चर्चा करना “expedient or desirable” नहीं होगा। किन विधेयकों की जांच कर रही है समिति? संसदीय समिति Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 और Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2024 की जांच कर रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है। PP Chaudhary की अध्यक्षता में बनी है JPC One Nation, One Election से जुड़े Bills की जांच करने वाली Joint Parliamentary Committee की अध्यक्षता BJP सांसद और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री P P Chaudhary कर रहे हैं। समिति में कुल 39 सदस्य शामिल हैं और इसे दिसंबर 2024 में गठित किया गया था। समिति प्रमुख ने कहा- Bill पर चर्चा उद्देश्य नहीं था P P Chaudhary ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट दौरे का उद्देश्य विधेयक पर औपचारिक चर्चा करना नहीं था। उनके मुताबिक यह visit समिति के सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट और उसकी कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए थी, खासकर उन सदस्यों के लिए जो पहले वहां नहीं गए थे। कपिल सिब्बल ने उठाई थी आपत्ति राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बैठक पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि संसद कानून बनाएगी और यदि उस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जाती है तो वही मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आ सकता है। ऐसे में sitting judges के साथ पहले से चर्चा separation of powers को लेकर सवाल खड़े कर सकती है। यह सिब्बल का संवैधानिक तर्क था। चार पूर्व CJI समिति के सामने दे चुके हैं राय समिति के सामने चार पूर्व Chief Justices of India भी अपनी राय रख चुके हैं। इनमें J S Khehar, Ranjan Gogoi, D Y Chandrachud और U U Lalit शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने constitutional amendments के बाद simultaneous elections की संभावित वैधता पर विचार रखा, साथ ही Election Commission को मिलने वाली व्यापक शक्तियों को लेकर कुछ चिंताएं भी जताईं। One Nation, One Election क्या है? One Nation, One Election का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक ही समय पर या एक coordinated cycle में कराना है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे बार-बार चुनाव कराने का खर्च और Model Code of Conduct के कारण प्रशासनिक रुकावट कम हो सकती है। दूसरी ओर आलोचक संघीय ढांचे, राज्यों की विधानसभाओं की अवधि और संवैधानिक जटिलताओं को लेकर सवाल उठाते हैं। अब समिति अपनी प्रक्रिया जारी रखेगी सुप्रीम कोर्ट के साथ प्रस्तावित interaction रद्द होने के बावजूद संसदीय समिति विधेयकों की जांच जारी रखेगी। समिति अलग-अलग संवैधानिक विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों, राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थानों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के सामने आ सकता है मामला अगर संसद भविष्य में One Nation, One Election से जुड़े संवैधानिक संशोधन पारित करती है और उन्हें अदालत में चुनौती दी जाती है, तो उनकी संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना पड़ सकता है। इसी संभावित स्थिति को देखते हुए शीर्ष अदालत ने मौजूदा informal interaction से दूरी बनाए रखने का फैसला किया। source – Supreme Court of India / The Indian Express / Hindustan Times / Bar & Bench जय राष्ट्र न्यूज़

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पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह बने प्रदेश अध्यक्ष

चंडीगढ़: कांग्रेस ने पंजाब में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली है, जिन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बदलाव 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दिया इस्तीफा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। वड़िंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस की कमान संभाल रहे थे और करीब साढ़े चार साल तक इस पद पर रहे। परगट सिंह को मिली नई जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। पार्टी ने उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। वह अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कौन हैं परगट सिंह? परगट सिंह पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और Olympian हैं। वह जालंधर कैंट विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। पहले अकाली दल में थे परगट सिंह परगट सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Shiromani Akali Dal से की थी। उन्होंने 2012 में पहली बार जालंधर कैंट से विधानसभा चुनाव जीता। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए और पंजाब सरकार में Sports और Education Minister भी रह चुके हैं। अंदरूनी गुटबाजी के बीच हुआ बदलाव पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों से वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही थीं। कांग्रेस हाईकमान ने संगठन की स्थिति पर रिपोर्ट और आंतरिक consultations के बाद नेतृत्व में बदलाव का फैसला किया। सचिन पायलट की रिपोर्ट भी रही अहम पंजाब मामलों के AICC प्रभारी सचिन पायलट ने राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक स्थिति पर रिपोर्ट सौंपी थी। इसी प्रक्रिया के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने का निर्णय लिया गया। वड़िंग ने इस्तीफा देने के बाद यह भी कहा कि उन्हें लगा कि सचिन पायलट नेतृत्व में बदलाव चाहते थे। 2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। कांग्रेस नेतृत्व परगट सिंह के जरिए संगठन के अलग-अलग गुटों के बीच बेहतर समन्वय और चुनावी तैयारियों को गति देने की कोशिश कर रहा है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण परगट सिंह जाट सिख समुदाय से आते हैं और पार्टी में उनके चयन को पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उनका नाम पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला समेत कई अन्य नेताओं के साथ प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में था। अब संगठनात्मक फेरबदल पर नजर परगट सिंह की नियुक्ति के बाद पंजाब कांग्रेस में आगे और संगठनात्मक बदलाव होने की संभावना पर भी नजर रहेगी। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक मतभेद कम करने और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट संगठन तैयार करने की होगी। source – The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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कर्नाटक में voter deletion विवाद पर DK शिवकुमार ने जांच की मांग की, CEO ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे संभावित आपराधिक साजिश बताते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद राज्य के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि झूठी जानकारी या फर्जी declarations के आधार पर दाखिल Form 7 मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाए। Form 7 के कथित बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर सवाल विवाद उन शिकायतों के बाद बढ़ा जिनमें आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में pre-printed Form 7 जमा कर मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की गई। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का संगठित तरीके से दुरुपयोग हुआ। DK शिवकुमार ने criminal probe की मांग की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित Chief Electoral Officer के कार्यालय पहुंचकर मामले की जांच की मांग की। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों के साथ धरना भी दिया और कहा कि कथित फर्जी Form 7 applications की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप शिवकुमार ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग बयानों में उन्होंने संभावित रूप से लाखों मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का दावा किया है। ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। CEO ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों को दिया निर्देश कर्नाटक के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी District Election Officers, Electoral Registration Officers और संबंधित municipal commissioners को निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक Form 7 applications पर कार्रवाई से पहले औपचारिक जांच की जाएगी और जानबूझकर झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे बाद खत्म हुआ धरना CEO के आदेश के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रियों ने करीब छह घंटे तक चला धरना समाप्त कर दिया। शिवकुमार ने इसे अपनी मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि मामला पूरी तरह सुलझने तक राजनीतिक और कानूनी प्रयास जारी रहेंगे। तीन FIR दर्ज होने की भी जानकारी रिपोर्टों के अनुसार कथित फर्जी voter deletion applications से जुड़े मामलों में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें Mysuru, Bidar और Belagavi से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस और चुनाव अधिकारी submissions की जांच कर रहे हैं। Belagavi में BJP नेता पर भी FIR Belagavi जिले में एक BJP नेता और अन्य लोगों के खिलाफ 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने की खबर है। यह मामला भी Form 7 submissions से जुड़ा है और जांच जारी है। आरोपों की अंतिम सत्यता पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तय होगी। चुनाव आयोग ने false declarations पर सख्ती के संकेत दिए Election authorities ने साफ किया है कि Forms 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में गलत या फर्जी submissions को रोकना बताया गया है। SIR के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव कर्नाटक में यह विवाद Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के बीच सामने आया है। कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, जबकि आरोपों में जिन राजनीतिक दलों के नाम लिए गए हैं, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच से ही होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR विवाद पर INDIA गठबंधन का बड़ा ऐलान, 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन; 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे। 2 अक्टूबर से शुरू होगा देशव्यापी अभियान INDIA गठबंधन ने तय किया है कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे और विपक्षी दल SIR प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के हालिया फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां जनता के बीच ले जाएंगे। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च आंदोलन के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक 6 अक्टूबर को दिल्ली में होगा। INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आयोग के सामने उठाएंगे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। SIR को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल INDIA गठबंधन का आरोप है कि Special Intensive Revision की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने हाल में सामने आई उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। INDIA गठबंधन ने रखीं छह प्रमुख मांगें बैठक के बाद विपक्षी दलों ने छह प्रमुख मांगों और आगे की राजनीतिक रणनीति की घोषणा की। इनमें SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग, चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की योजना भी शामिल है। राष्ट्रपति से मिलने की भी तैयारी INDIA गठबंधन के नेताओं ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगने की बात कही है। विपक्षी नेता चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना बना रहे हैं। राहुल गांधी ने विपक्षी एकता पर दिया जोर बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता मिलकर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने विपक्ष की इस लड़ाई को किसी एक नेता या दल के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। यह विपक्ष का राजनीतिक पक्ष है और इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं तथा सत्तारूढ़ पक्ष की अलग प्रतिक्रिया रही है। ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर साधा निशाना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। BJP ने विपक्ष के अभियान पर किया पलटवार INDIA गठबंधन की घोषणा के बाद BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और आंदोलन को राजनीतिक बताया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के ‘Save Democracy’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए इसे राजनीतिक परिवारों को बचाने की कोशिश बताया। यह BJP का राजनीतिक जवाब है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा आंदोलन बता रहा है। अक्टूबर-नवंबर में बड़ी रैलियों की भी योजना INDIA गठबंधन सिर्फ एक सप्ताह के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष ने अक्टूबर और नवंबर में अलग-अलग स्थानों पर बड़ी रैलियां आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची, SIR और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे कथित ‘vote chori’ के आरोप प्रमुख मुद्दे रहेंगे। SIR विवाद पर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर के चुनाव आयोग मार्च के चलते SIR विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं तथा अदालतों की प्रक्रिया से तय होगी। source – Reuters / India Today / The Statesman / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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