जय राष्ट्र न्यूज़ | ओपिनियन डेस्क | 22 जून 2026
प्रस्तावना
हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन संबंधी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रही है। NEET, CUET और अन्य बड़ी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या भारत को सभी प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं पूरी तरह CBT (Computer Based Test) मोड में आयोजित कर देनी चाहिए।
यह केवल तकनीकी बदलाव का मुद्दा नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न भी है।
CBT मोड के पक्ष में तर्क
CBT परीक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ इसकी पारदर्शिता और सुरक्षा को माना जाता है। प्रश्नपत्रों की डिजिटल डिलीवरी होने से पेपर लीक की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।
इसके अलावा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया तेज होती है और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बना सकती है।
परीक्षा प्रक्रिया में तेजी
ऑनलाइन परीक्षाओं का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि परिणाम अपेक्षाकृत जल्दी घोषित किए जा सकते हैं। इससे छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया और काउंसलिंग के लिए अधिक समय मिलता है।
कई विकसित देशों में बड़ी प्रवेश परीक्षाएं पहले से ही डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाती हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि CBT मोड के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारत जैसे विशाल देश में अभी भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सभी क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को इंटरनेट, कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
डिजिटल विभाजन का मुद्दा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी परीक्षाएं अचानक ऑनलाइन कर दी जाएं तो डिजिटल संसाधनों की कमी वाले छात्रों को नुकसान हो सकता है।
इसलिए किसी भी बड़े बदलाव से पहले तकनीकी ढांचे को मजबूत करना और सभी छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
JEE और अन्य परीक्षाओं का अनुभव
JEE Main जैसी परीक्षाएं वर्षों से CBT मोड में आयोजित की जा रही हैं। इस मॉडल ने कई सकारात्मक परिणाम दिए हैं और इसे अपेक्षाकृत सफल माना जाता है।
इसी अनुभव के आधार पर कुछ विशेषज्ञ अन्य बड़ी परीक्षाओं को भी धीरे-धीरे डिजिटल मोड में स्थानांतरित करने का समर्थन करते हैं।
संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण बदलाव के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाई जानी चाहिए। जहां संभव हो वहां CBT मोड को बढ़ावा दिया जाए और साथ ही तकनीकी पहुंच को मजबूत किया जाए।
इससे छात्रों और संस्थानों दोनों को नए सिस्टम के अनुरूप ढलने का समय मिल सकेगा।
निष्कर्ष
CBT मोड पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के लिहाज से कई लाभ प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ डिजिटल पहुंच और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। भारत को सभी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को CBT मोड में बदलने पर विचार करते समय तकनीकी क्षमता, क्षेत्रीय असमानताओं और छात्रों की सुविधा को समान महत्व देना होगा। भविष्य की परीक्षा प्रणाली संभवतः अधिक डिजिटल होगी, लेकिन उसका क्रियान्वयन संतुलित और समावेशी होना चाहिए।
स्रोत: National Testing Agency (NTA)
मूल रिपोर्ट:
https://nta.ac.in
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