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बिहार की बाढ़ और महिला सुरक्षा के सवालों पर मैथिली ठाकुर से मीडिया के सवाल, जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं BJP विधायक

पटना: बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति और महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच BJP विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर से मीडिया ने उनके हालिया विदेश दौरे और राज्य के हालात पर प्रतिक्रिया मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकार लगातार सवाल पूछते रहे, लेकिन मैथिली ठाकुर ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विदेश दौरे से लौटने के बाद पूछे गए सवाल मैथिली ठाकुर हाल ही में विदेश दौरे से बिहार लौटी थीं। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे पूछा कि जब राज्य के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं, तब उनके विदेश दौरे और मौजूदा हालात को लेकर वह क्या कहना चाहेंगी। जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं मैथिली ठाकुर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकारों के कई सवालों के बावजूद मैथिली ठाकुर ने मौके पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। वह पत्रकारों से दूरी बनाते हुए अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए गए। बिहार में बाढ़ से कई इलाके प्रभावित हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने गंभीर स्थिति पैदा की है। सारण समेत कई इलाकों में गांव जलमग्न हुए हैं और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन को helicopter तक का इस्तेमाल करना पड़ा है। बाढ़ राहत व्यवस्था पर भी उठे सवाल राहत वितरण से जुड़े कई वीडियो और घटनाएं भी चर्चा में रही हैं। एक मामले में सारण जिले के एक पुलिस अधिकारी को बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत वितरण के दौरान pistol लहराते दिखने के बाद निलंबित किया गया था। महिला सुरक्षा पर भी बढ़ी बहस बिहार में हाल की कुछ घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा का मुद्दा भी राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। इसी संदर्भ में पत्रकारों ने मैथिली ठाकुर से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही। पुराना वीडियो फिर हुआ वायरल इस बीच मैथिली ठाकुर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हुआ, जिसमें वह कहती नजर आती हैं कि वह बिहार की बेटी हैं और खुद को राज्य में सुरक्षित महसूस करती हैं। लेकिन fact-check में सामने आया कि यह वीडियो अप्रैल 2026 का है और इसे Jamui की हालिया घटना से जोड़कर शेयर करना भ्रामक है। क्या कहा था पुराने वीडियो में? अप्रैल में मीडिया से बातचीत के दौरान मैथिली ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बिहार और उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़ी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि वह खुद बिहार से आती हैं और यहां सुरक्षित महसूस करती हैं। यह बयान किसी हालिया Jamui case के बाद नहीं दिया गया था। सोशल मीडिया पर चुप्पी को लेकर आलोचना ताजा मीडिया interaction के बाद सोशल मीडिया पर कई users ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते मैथिली ठाकुर को बाढ़ और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। वहीं केवल वीडियो के आधार पर उनके इरादों या पूरे राजनीतिक रुख का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। Alinagar से BJP विधायक हैं मैथिली ठाकुर लोकगायिका के रूप में प्रसिद्ध मैथिली ठाकुर अब बिहार की राजनीति में भी सक्रिय हैं और Alinagar विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसी कारण उनसे सांस्कृतिक हस्ती के साथ-साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में भी स्थानीय मुद्दों पर जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है। वायरल दावों की जांच जरूरी इस पूरे विवाद में दो अलग बातें सामने आई हैं—एक उनका ताजा media interaction, जिसमें उन्होंने सवालों का जवाब नहीं दिया, और दूसरा महिला सुरक्षा पर उनका पुराना बयान। दोनों को एक ही घटना से जोड़कर पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। source – Navbharat Times / Inshorts / Newschecker / Aaj Tak / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार | बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, बीजेपी सांसद संजय जायसवाल की गाड़ी पर फेंका गोबर और मिट्टी!

बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण में बाढ़ से परेशान लोगों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे। बथना स्थित राहत शिविर में ग्रामीणों ने राहत व्यवस्था को लेकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री के जाने के बाद बीजेपी सांसद संजय जायसवाल की गाड़ी को भीड़ ने घेर लिया और कथित तौर पर उस पर गोबर और मिट्टी फेंकी। बथना राहत शिविर में हुआ हंगामा घटना पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड स्थित बथना राहत शिविर की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान कई ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। राहत व्यवस्था से नाराज थे बाढ़ पीड़ित स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप था कि बाढ़ के कारण घर और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त और समय पर मदद नहीं मिल रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। CM सम्राट चौधरी के सामने हुई नारेबाजी राहत शिविर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी के दौरान भी कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमंत्री के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी और इसके बाद वह इलाके से रवाना हो गए। सांसद संजय जायसवाल को भीड़ ने घेरा मुख्यमंत्री के जाने के बाद BJP सांसद संजय जायसवाल और स्थानीय विधायक को कुछ समय तक स्कूल परिसर में ही रुकना पड़ा। सुरक्षा बलों ने बाद में सांसद को उनकी गाड़ी तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन बाहर मौजूद भीड़ ने वाहन को घेर लिया। गाड़ी पर फेंका गया गोबर और मिट्टी रिपोर्टों के अनुसार आक्रोशित ग्रामीणों ने सांसद की गाड़ी पर कथित तौर पर गोबर और मिट्टी फेंकी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने वाहन पर हाथ भी मारे। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर सांसद को इलाके से बाहर निकाला। पुलिस और सुरक्षा बलों को करनी पड़ी मशक्कत भीड़ बढ़ने के कारण मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सांसद को सुरक्षित निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति दिखाई देने का दावा किया गया है। घटना की विस्तृत परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर स्थानीय प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से बिगड़े हालात पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। निचले क्षेत्रों में पानी भरने और तटबंधों पर दबाव बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। आसपास के कई जिलों में भी बाढ़ और तटबंध टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने राहत कार्य जारी रहने का किया दावा अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। NDRF और SDRF की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और प्रभावित लोगों तक भोजन, नाव तथा अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद सियासी माहौल भी गरमाया सांसद की गाड़ी पर गोबर फेंकने और मुख्यमंत्री के सामने विरोध की घटना ने बिहार में बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि घटना के पीछे राजनीतिक संगठन की भूमिका या पूर्व नियोजित विरोध का कोई स्पष्ट प्रमाण अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मुख्य रूप से स्थानीय बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश के रूप में बताया गया है। source – Navbharat Times / Prabhat Khabar / ABP News / Media Darshan जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के स्कूल में दर्दनाक हादसा: सीढ़ी गिरने से 9 साल की छात्रा की मौत, 3 बच्चे घायल

खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की सीढ़ी अचानक गिरने से 9 साल की छात्रा रितिका कुमारी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसा मानसी थाना क्षेत्र के अमनी गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुआ। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया। अमनी गांव के सरकारी स्कूल में हुआ हादसा हादसा बुधवार सुबह अमनी गांव के पासवान टोला स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुआ। स्कूल की सीढ़ी अचानक भरभराकर गिर गई और उसके नीचे कई बच्चे दब गए। आसपास मौजूद लोगों और स्कूल स्टाफ ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। 9 साल की रितिका कुमारी की मौत मृत छात्रा की पहचान 9 वर्षीय रितिका कुमारी के रूप में हुई है। रितिका पहली कक्षा की छात्रा थी। उसे मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। तीन बच्चे घायल, अस्पताल में भर्ती हादसे में तीन अन्य बच्चे घायल हुए हैं। घायल बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में हल्की चोट वाले बच्चों की संख्या अधिक बताई गई है, इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही अंतिम संख्या स्पष्ट होगी। स्कूल की जर्जर हालत पर उठे सवाल घटना के बाद स्कूल भवन की हालत को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीढ़ी में पहले से दरारें थीं और भवन की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि स्कूल प्रबंधन ने पहले ही जर्जर स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी थी। प्रधानाध्यापक की पहले की शिकायत भी चर्चा में एक रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के प्रधानाध्यापक ने जर्जर सीढ़ी और भवन की स्थिति को लेकर पहले ही संबंधित BRC को जानकारी दी थी। हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर शिकायत पहले की गई थी तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई। इस पहलू की भी जांच की जा रही है। DM ने 24 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी खगड़िया के जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को मामले की जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने घायल बच्चों के इलाज और मृत छात्रा के परिवार को सहायता देने की बात कही है। SDM ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा सदर SDM धनंजय कुमार समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्कूल भवन की सुरक्षा, सीढ़ी गिरने के कारण और मरम्मत में संभावित लापरवाही की जांच की बात कही है। सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इस हादसे के बाद सरकारी स्कूलों की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं। स्कूलों में नियमित structural audit, समय पर मरम्मत और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीढ़ी गिरने का मुख्य कारण क्या था और क्या रखरखाव या प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई थी। source – PTI / India Today / Aaj Tak / NDTV / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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मस्तीपुर, बिहार | बाढ़ के बीच खुले में लगाए गए अस्थायी शौचालय, निजता पर उठे सवाल

मस्तीपुर, बिहार: बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन मस्तीपुर से सामने आई खुले स्थान पर लगाए गए अस्थायी शौचालयों की तस्वीरों ने निजता और सम्मान से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बाढ़ जैसी आपदा के बीच शौचालय की व्यवस्था बेहद जरूरी है, लेकिन पर्याप्त पर्दा और सुरक्षित स्थान नहीं होने पर विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खुले स्थान पर शौचालय की व्यवस्था पर सवाल सामने आए दृश्यों में अस्थायी शौचालय खुले इलाके में स्थापित दिखाई देते हैं। ऐसे में इनके आसपास पर्याप्त घेराबंदी और गोपनीयता की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन केवल ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। लोगों की निजता, सुरक्षा और स्वच्छता भी राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती निजता बाढ़ के दौरान घरों में पानी भरने के बाद बड़ी संख्या में परिवार सड़कों, तटबंधों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के लिए शौच, स्नान और कपड़े बदलने जैसी सामान्य जरूरतें भी बड़ी समस्या बन जाती हैं। बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों पर पहले की रिपोर्टों में भी महिलाओं ने सुरक्षित और निजी शौचालयों की कमी को गंभीर परेशानी बताया है। अस्थायी शौचालय के साथ पर्दे की व्यवस्था जरूरी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाने वाले अस्थायी शौचालयों के आसपास उचित घेराबंदी, दरवाजे और पर्याप्त निजी स्थान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सुविधाएं, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध होने से ऐसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। बाढ़ में स्वच्छता भी बनती है बड़ी चुनौती बाढ़ का पानी उतरने या लंबे समय तक जमा रहने के दौरान साफ पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं। गंदे पानी के संपर्क, खुले में शौच और अस्वच्छ वातावरण के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए राहत कार्यों में भोजन और आश्रय के साथ स्वच्छता की सुविधाओं को भी प्राथमिकता देना जरूरी होता है। बिहार में पहले भी सामने आई है ऐसी समस्या बिहार के अलग-अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय की कमी पहले भी सामने आती रही है। सितंबर 2026 में पूर्णिया के कुछ प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी शौचालय बनाए गए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी संख्या जरूरत के मुकाबले कम होने की बात सामने आई थी। वहीं मुंगेर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी महिलाओं के लिए शौचालय और निजता की समस्या की रिपोर्ट सामने आई है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बाढ़ के दौरान स्वच्छता व्यवस्था केवल स्वास्थ्य का सवाल नहीं है। महिलाओं और किशोरियों के लिए यह सुरक्षा और सम्मान से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। अगर अस्थायी शौचालय ऐसी जगह लगाए जाते हैं जहां पर्याप्त पर्दा या सुरक्षा नहीं है, तो कई महिलाएं उनका इस्तेमाल करने से बच सकती हैं। इससे उन्हें रात होने का इंतजार करने या अन्य असुरक्षित विकल्प अपनाने की मजबूरी हो सकती है। राहत व्यवस्था में Privacy-Friendly Toilets की जरूरत आपदा प्रबंधन के दौरान ऐसे अस्थायी शौचालयों की जरूरत होती है जिन्हें सुरक्षित और निजी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। शौचालय के चारों ओर पूरी घेराबंदी, अंदर से बंद होने वाला दरवाजा, पर्याप्त रोशनी, महिलाओं के लिए अलग सुविधा और नजदीक सुरक्षित पानी की व्यवस्था राहत शिविरों में बुनियादी जरूरतों का हिस्सा होनी चाहिए। स्थानीय घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित मस्तीपुर से जुड़े इस विशेष मामले को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में सीमित है। इसलिए तस्वीरों या वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि ये शौचालय किस विभाग या एजेंसी द्वारा लगाए गए अथवा बाद में इनके आसपास अतिरिक्त पर्दे या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं या नहीं। हालांकि बिहार में बाढ़ के दौरान स्वच्छता और महिलाओं की निजता की समस्या कई रिपोर्टों और अध्ययनों में पहले भी दर्ज की जा चुकी है। source – बिहार आपदा प्रबंधन विभाग / Hindustan / Dainik Jagran / Down To Earth / UNICEF जय राष्ट्र न्यूज़

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क्या बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा? हर साल तबाही के पीछे नेपाल की नदियां, गाद और अधूरी परियोजनियां

पटना: बिहार में बाढ़ दशकों से बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला और महानंदा जैसी नदियां हर मानसून में लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित करती हैं। सरकारें तटबंध, बैराज, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण परियोजनियों पर काम करती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई एक उपाय सामने नहीं आया है जिससे राज्य को बाढ़ से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। नेपाल में भारी बारिश से बढ़ता है बिहार की नदियों का जलस्तर उत्तर बिहार की कई प्रमुख नदियों का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में स्थित है। वहां भारी बारिश होने पर इन नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है और इसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। केंद्रीय जल आयोग ने भी संसद में बताया है कि उत्तर बिहार में बाढ़ का एक प्रमुख कारण नेपाल में स्थित ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा में बढ़ने वाला जलप्रवाह है। केवल तटबंध बनाना क्यों नहीं है पर्याप्त? बिहार में लंबे समय से बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तटबंध कई क्षेत्रों को सामान्य बाढ़ से सुरक्षा देते हैं, लेकिन अत्यधिक जलप्रवाह, कटाव या संरचनात्मक नुकसान की स्थिति में समस्या गंभीर हो सकती है। इसके अलावा नदियों में लगातार गाद जमा होने से नदी तल ऊंचा होने और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने की चुनौती भी बनी रहती है। इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय से केवल तटबंधों के बजाय नदी बेसिन, ड्रेनेज और जल प्रबंधन को एक साथ देखने की जरूरत बताते रहे हैं। नेपाल में बड़े बांधों की योजना लंबे समय से चर्चा में भारत और नेपाल के बीच सप्तकोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सुनकोसी-कमला डायवर्जन जैसी परियोजनियों पर वर्षों से अध्ययन चल रहा है। सितंबर 2026 से पहले उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार इन परियोजनाओं से जुड़े टोपोग्राफिकल, हाइड्रोलॉजिकल, भूकंपीय और अन्य कई तकनीकी अध्ययन पूरे किए जा चुके हैं, लेकिन परियोजनियां अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची हैं जहां उन्हें बिहार की बाढ़ समस्या का तत्काल समाधान माना जा सके। भारत-नेपाल समन्वय क्यों है जरूरी? बिहार की बाढ़ केवल राज्य की सीमा के भीतर पैदा होने वाली समस्या नहीं है। कई नदियों का प्रवाह नेपाल से आता है, इसलिए दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन, बांध, बाढ़ पूर्वानुमान और नदी नियंत्रण पर सहयोग जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच बाढ़ पूर्वानुमान, कोसी-गंडक परियोजनियों और जल संसाधन प्रबंधन के लिए कई द्विपक्षीय समितियां मौजूद हैं। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच नदी और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। 2025-26 में संयुक्त समिति की बैठक नहीं हुई हालांकि बाढ़ प्रबंधन में भारत-नेपाल सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में संबंधित भारत-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक नहीं हुई। इसी जवाब में केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण बनाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। पिछले तीन वर्षों में बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत बिहार को 206.77 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई। बैराज और नदी परियोजनियों पर भी चल रहा काम बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए केवल तटबंध ही नहीं, बल्कि बैराज, नदी लिंक और सिंचाई परियोजनियों पर भी काम करने की योजना है। 2024 के केंद्रीय बजट में कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक सहित कई सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। इसके साथ कोसी से जुड़ी बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई परियोजनियों के सर्वेक्षण और जांच का भी प्रस्ताव रखा गया था। क्या नदियों की सफाई और गाद हटाना समाधान है? नदियों में गाद जमा होना बिहार की बाढ़ समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन केवल बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग करना हर नदी के लिए स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। नदी की प्रकृति, पानी का प्रवाह, गाद की मात्रा, पर्यावरण और लागत का अध्ययन करने के बाद ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कदम तय करने पड़ते हैं। साथ ही गांवों के तालाब, प्राकृतिक जल निकासी मार्ग और जलभराव वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी जरूरी माना जाता है। बाढ़ को पूरी तरह रोकना मुश्किल, नुकसान कम करना संभव विशेषज्ञ दृष्टिकोण से बिहार में बाढ़ को पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक रूप से कठिन है क्योंकि यह राज्य प्राकृतिक रूप से गंगा और उसकी हिमालयी सहायक नदियों के विशाल मैदानी क्षेत्र में स्थित है। लेकिन बेहतर बांध और बैराज प्रबंधन, मजबूत तटबंध, ड्रेनेज सुधार, बाढ़ पूर्वानुमान, जलाशय प्रबंधन, गाद पर वैज्ञानिक अध्ययन और भारत-नेपाल सहयोग के जरिए नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। स्थायी समाधान के लिए एकीकृत रणनीति की जरूरत बिहार की बाढ़ समस्या का समाधान किसी एक बांध, तटबंध या नदी की सफाई से संभव नहीं दिखता। इसके लिए पूरे नदी बेसिन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है। इस रणनीति में नेपाल के साथ जल प्रबंधन समझौते, आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान व्यवस्था, नदी और ड्रेनेज नेटवर्क का वैज्ञानिक प्रबंधन, संवेदनशील तटबंधों की निगरानी और बाढ़ प्रभावित आबादी के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था शामिल करनी होगी। इसलिए सवाल यह नहीं है कि बिहार में बाढ़ को हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हर साल होने वाली तबाही और जान-माल के नुकसान को कितना कम किया जा सकता है। source – केंद्रीय जल आयोग / जल शक्ति मंत्रालय / गृह मंत्रालय / भारत सरकार जय राष्ट्र न्यूज़

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पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, यौन अपराध मामले में ‘आपत्तिजनक टिप्पणियों’ पर जताई चिंता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है, जिसमें एक महिला के कपड़े उतारने की कोशिश और उसके साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कृत्यों को तथ्यों के आधार पर ‘बलात्कार के प्रयास’ के लिए पर्याप्त नहीं माना गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियों को “offending observations” बताते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया है। 9 जुलाई के पटना हाई कोर्ट के फैसले का मामला मामला पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने आरोपी हिमांशु कुमार पाठक की उस दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था, जो IPC की धारा 376 के साथ धारा 511 यानी बलात्कार के प्रयास से संबंधित थी। हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने जैसी हरकतें, बिना ऐसे स्पष्ट कृत्य के जो बलात्कार करने के इरादे को निर्णायक रूप से दिखाए, ‘attempt to rape’ के अपराध को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। हालांकि कोर्ट ने इन कृत्यों को महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ा अपराध माना था। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणियों को बताया ‘आपत्तिजनक’ 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि फैसले में कुछ “आपत्तिजनक टिप्पणियां” हैं और उन्हें हटाने या फैसला रद्द करने से पहले संबंधित आरोपी का पक्ष सुनना आवश्यक है। आरोपी हिमांशु पाठक को जारी हुआ नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी हिमांशु पाठक को नोटिस जारी किया है। पीठ ने बिहार के एडवोकेट जनरल से स्थानीय पुलिस के माध्यम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आरोपी तक नोटिस पहुंचाया जाए, ताकि अगली सुनवाई में उसका पक्ष भी कोर्ट के सामने आ सके। 2008 की घटना से जुड़ा है मामला यह मामला 19 जनवरी 2008 की घटना से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक महिला अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने आरोपी के स्टूडियो गई थी। आरोप था कि आरोपी ने महिला के पिता को कंप्यूटर पर फोटो देखने के लिए कहा और इसके बाद स्टूडियो का दरवाजा बंद कर महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार किया। महिला द्वारा शोर मचाने पर उसके पिता पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा निचली अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 और 342 के तहत दोषी ठहराया था। उसे बलात्कार के प्रयास के मामले में तीन साल की कठोर कैद और गलत तरीके से बंद रखने के मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई थी। बाद में पटना हाई कोर्ट ने बलात्कार के प्रयास वाली दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मामले से भी जुड़ा संदर्भ इस मामले का जिक्र इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में उस समय भी हुआ था, जब अदालत इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक अन्य यौन अपराध संबंधी फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी। उस मामले में भी हाई कोर्ट की ओर से यौन अपराध के प्रयास को लेकर की गई व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। शीर्ष अदालत ने बाद में वह फैसला रद्द करते हुए न्यायाधीशों के लिए यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी दृष्टिकोण को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटना हाई कोर्ट के फैसले को अंतिम रूप से रद्द नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित आरोपी को सुनने के बाद ही इस पर आगे फैसला लिया जाएगा। मामले को SMW (Crl) No. 5/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। आने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि पटना हाई कोर्ट की टिप्पणियों और कानूनी निष्कर्षों में किस हद तक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। source – Supreme Court Proceedings / LiveLaw / Bar & Bench / Hindustan Times / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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जमुई मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुलिस मुठभेड़ पर उठे सवाल

पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में नंदन के पैर में गोली लगी, जबकि उसका साथी हरेराम यादव भागने की कोशिश में घायल हुआ। हालांकि अब इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर आरोपी के परिवार और ABVP ने सवाल उठाए हैं और पारदर्शी जांच की मांग की है। 19 सितंबर की घटना के बाद वायरल हुआ था वीडियो मामला 19 सितंबर 2026 का है। पुलिस के मुताबिक जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्रा को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और कथित छेड़छाड़ की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया और आरोपियों की पहचान शुरू की। मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी के नेतृत्व में SIT भी गठित की गई। नंदन यादव के पैर में लगी गोली 22 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया। मुंगेर रेंज के DIG राकेश कुमार के मुताबिक नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जबकि हरेराम यादव भागने की कोशिश के दौरान घायल हुआ। दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने क्या बताई मुठभेड़ की कहानी? पुलिस के अनुसार नंदन यादव को पकड़ने के दौरान उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। हालांकि मुठभेड़ के घटनाक्रम और बरामद हथियार को लेकर बाद में सवाल उठने शुरू हो गए। ABVP ने पूछा- हथियार कहां है? अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर कई सवाल उठाए हैं। ABVP नेताओं ने पूछा कि यदि वास्तव में आरोपी और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई थी तो घटनास्थल से हथियार की आधिकारिक बरामदगी क्यों नहीं दिखाई गई। संगठन ने घटनास्थल की बैरिकेडिंग, साक्ष्यों के संरक्षण और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हरेराम की चोट को लेकर भी उठे सवाल ABVP ने हरेराम यादव की चोट को लेकर भी पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उसके पैर में गंभीर चोट या फ्रैक्चर होने की बात सामने आई थी। बाद में उसकी अदालत में पेशी से जुड़े वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि यदि चोट इतनी गंभीर थी तो वह अगले दिन सामान्य रूप से कैसे चल रहा था। हालांकि Amar Ujala की पड़ताल के मुताबिक सोशल मीडिया पर नंदन और हरेराम की चोटों को लेकर भ्रम भी फैला। पुलिस का कहना है कि गोली नंदन यादव को लगी थी, जबकि हरेराम को भागते समय चोट आई थी और उसके पैर टूटने की बात सही नहीं थी। आरोपी की मां ने लगाया ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप नंदन यादव की मां ने बेटे की घटना में भूमिका को गलत बताते हुए नहीं बचाया, लेकिन पुलिस मुठभेड़ पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने नंदन को पकड़ने के बाद उसके पैर में गोली मारी और इसे मुठभेड़ बताया। यह परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अपने बयान में इसे गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ बता रही है। अस्पताल में रखने के तरीके पर भी विवाद 26 सितंबर को यह सवाल भी उठा कि नंदन यादव को अस्पताल के सामान्य कैदी वार्ड के बजाय एक अलग आइसोलेशन वार्ड में क्यों रखा गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि नंदन फिलहाल मरीज के रूप में भर्ती है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कैदी वार्ड से जुड़ी व्यवस्था लागू होगी। कई आरोपी हिरासत में पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, वाहन नंबर और डिजिटल सबूतों के जरिए आरोपियों की पहचान की गई। इसके साथ ही पीड़ित नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग जमुई की मूल घटना को लेकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग व्यापक रही है, लेकिन इसके साथ पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो गई है। एक तरफ पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भागने और फायरिंग की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर परिवार और ABVP मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इन सवालों से पुलिस मुठभेड़ के फर्जी होने की पुष्टि नहीं होती और अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र या आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। source – Hindustan Times / Dainik Jagran / Times Now Navbharat / Amar Ujala / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार बाढ़ के बीच दो तस्वीरों ने खींचा ध्यान; एक में बेबसी, दूसरी में मदद की मिसाल

पटना: बिहार में हालिया बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित की है। कई इलाकों में घर पानी में डूबे, परिवार राहत शिविरों में पहुंचे और खेती को भारी नुकसान हुआ। इस संकट के बीच सामने आई दो तरह की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा है—एक तरफ अपना घर-सामान गंवाकर अस्थायी शिविरों में रह रहे परिवारों की बेबसी, तो दूसरी ओर नावों और दूसरे साधनों से बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाते लोगों की तस्वीरें उम्मीद का संदेश दे रही हैं। राहत शिविरों में घर लौटने का इंतजार भागलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है। तिल्हा कोठी समेत कई जगहों पर लोगों ने प्लास्टिक शीट और उपलब्ध सामान से अस्थायी ठिकाने बनाए हैं। Indian Express की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कुछ परिवारों के घर अब भी पानी में डूबे हैं। बाढ़ में दस्तावेज, अनाज, पैसे और घरेलू सामान तक बहने या खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। प्रभावित लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पानी उतरने के बाद उनके पास वापस लौटने के लिए क्या बचेगा। करीब 50 लाख लोगों तक पहुंचा था बाढ़ का असर सितंबर में बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ा था। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 15 जिलों में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। पटना, भागलपुर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत कई जिलों में घर, सड़कें और कृषि भूमि जलमग्न हुईं। इस दौरान गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानी पैदा की। दूसरी तस्वीर में राहत पहुंचाते दिखे सोनू सूद बाढ़ की मुश्किल तस्वीरों के बीच अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सूद भी राहत कार्य के लिए बिहार पहुंचे। बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित इलाकों में उन्होंने नाव से जाकर लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित की और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। सोनू सूद ने कहा कि बिहार को जब भी मदद की जरूरत होगी, वह लोगों के साथ खड़े रहेंगे। उनकी राहत सामग्री बांटते हुए सामने आई तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहीं। प्रशासन और स्थानीय लोग भी राहत कार्य में जुटे बिहार के कई हिस्सों में NDRF, SDRF, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी समूहों ने नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने का काम किया। सितंबर की शुरुआत में स्थिति गंभीर होने के दौरान 13 जिलों में 34 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की सूचना थी। भागलपुर में एक नाव पलटने के बाद SDRF ने उसमें सवार सभी 10 लोगों को सुरक्षित बचाया था। पानी घटा, लेकिन मुश्किलें बाकी कई क्षेत्रों में अब बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन नुकसान की पूरी तस्वीर पानी उतरने के बाद सामने आ रही है। खेतों में फसल खराब होने, घरों को नुकसान और जरूरी सामान बर्बाद होने से प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और रोजमर्रा की जिंदगी दोबारा शुरू करने की चुनौती है। राज्य सरकार ने बाढ़ से फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 23 से 29 सितंबर के बीच कृषि इनपुट अनुदान के आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू की है। दो तस्वीरें, एक ही त्रासदी के अलग चेहरे बिहार बाढ़ की ये तस्वीरें आपदा के दो अलग पहलू दिखाती हैं। एक ओर ऐसे परिवार हैं जो अपना घर और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन, स्वयंसेवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के राहत प्रयास सामने आ रहे हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में पुनर्वास, फसल नुकसान की भरपाई और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करना अगली बड़ी चुनौती होगी। source – The Indian Express / Navbharat Times / Mongabay India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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जमुई घटना के बाद सम्राट चौधरी का पुराना बयान वायरल, विपक्ष ने पूछा- क्या अब देंगे इस्तीफा?

पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित मारपीट और छेड़छाड़ की घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिया गया एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो गया है। पुराने वीडियो में चौधरी को यह कहते सुना जा सकता है कि बिहार में कोई महिला रात में बाहर निकले और “किसी ने छू दिया” तो वह अगली सुबह इस्तीफा दे देंगे। विपक्ष अब इसी बयान का हवाला देकर मुख्यमंत्री से सवाल कर रहा है। जमुई में क्या हुआ? मामला 19 सितंबर 2026 का है। जमुई जिले में कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को कथित तौर पर युवकों के एक समूह ने रास्ते में रोका। पुलिस के मुताबिक दोनों के साथ मारपीट की गई और छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ हुई। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। पुलिस ने POCSO Act समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया और शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। क्यों वायरल हुआ सम्राट चौधरी का पुराना बयान? जमुई की घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने सम्राट चौधरी का पुराना वीडियो शेयर करना शुरू किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 29 सितंबर 2025 के एक कार्यक्रम में चौधरी ने बिहार की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर किसी व्यक्ति का कोई निजी दुश्मन नहीं है तो वह रात 12 बजे खाना खाने के बाद बाहर घूमकर आए और यदि कोई उसे छू दे तो “सम्राट चौधरी सुबह इस्तीफा दे देगा।” यह बयान उस समय कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए उनके राजनीतिक दावे का हिस्सा था। अब जमुई की घटना के बाद विपक्ष इसी पुराने बयान को उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। विपक्ष ने मांगा मुख्यमंत्री का इस्तीफा जमुई मामले के बाद RJD और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने बिहार सरकार पर महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने सम्राट चौधरी के पुराने बयान का हवाला देते हुए उनसे जवाब मांगा। कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग भी की है। यह विपक्ष की राजनीतिक मांग है। सम्राट चौधरी ने जमुई मामले पर क्या कहा? विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सुशासन है और अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। चौधरी ने सोशल मीडिया पर वीडियो और ‘रील’ बनाने की प्रवृत्ति का भी जिक्र करते हुए कहा कि अपराध का वीडियो बनने से आरोपियों की पहचान करने में पुलिस को मदद मिली। मुख्य आरोपी पुलिस कार्रवाई में घायल मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पकड़ने के दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी ने कथित रूप से पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है और घटना की जांच के लिए विशेष टीम लगाई गई है। पुराने बयान ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव सम्राट चौधरी का पुराना वीडियो वायरल होने से जमुई मामला केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बिहार में राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। विपक्ष पुराने बयान को मुख्यमंत्री की जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुराने बयान में कही गई इस्तीफे की बात एक राजनीतिक वक्तव्य थी; यह अपने आप कोई कानूनी या संवैधानिक बाध्यता नहीं बनाती। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। source – The Indian Express / Aaj Tak / ABP News / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति, कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। श्रावण के तीसरे सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़ बताया जा रहा है कि श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए अशोक धाम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर परिसर में भीड़ अचानक बढ़ गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बैरिकेडिंग टूटने की भी बात सामने आई लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच भीड़ काफी बढ़ गई थी। शुरुआती जानकारी में मंदिर की एक तरफ की बैरिकेडिंग टूटने के बाद कई लोगों के एक-दूसरे पर गिरने की बात सामने आई है। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मंदिर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है और मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका घटना अभी विकासशील स्थिति में है। शुरुआती रिपोर्टों में 6 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों का भी उल्लेख आया है। इसलिए फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। निष्कर्ष लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में श्रावण सोमवार के दौरान भारी भीड़ के बीच हुई इस त्रासदी ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति की वास्तविक वजह क्या थी। Source: PTI, The New Indian Express, The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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