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होर्मुज में तनाव बढ़ा, दो ADNOC-संबद्ध जहाजों पर हमले के बाद UAE ने ईरान की निंदा की

अबू धाबी: रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ईरान ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से जुड़े दो जहाजों को निशाना बनाया। UAE के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। दो जहाजों को बनाया गया निशाना UAE के मुताबिक, दोनों जहाज 13 अगस्त की शाम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। ADNOC ने भी पुष्टि की कि उसके दो जहाजों को निशाना बनाया गया था। कंपनी के अनुसार घटना के बाद स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि जहाजों को हुए संभावित नुकसान या उनके कार्गो से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की गई। UAE ने बताया ‘पाइरेसी’ UAE के विदेश मंत्रालय ने हमले को गंभीर बताते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज जलडमरूमध्य को आर्थिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पाइरेसी जैसा कृत्य है। अबू धाबी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। UAE ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में स्वतंत्र और सुरक्षित नौवहन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। ईरान की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, UAE के आरोपों पर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पहले उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं जिन्हें वह अपने विरोधी देशों से जुड़ा मानता है या जो उसके निर्देशों का पालन नहीं करते। कुछ ही दिनों में दूसरी घटना यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले भी UAE ने एक अन्य ADNOC-संबद्ध जहाज को होर्मुज में निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया था। लगातार घटनाओं ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ADNOC के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके कई जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों का सामना करना पड़ा है। होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य या सुरक्षा संकट का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। ताजा घटनाक्रम के बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर से नीचे बनी हुई है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। तेल बाजार पर भी असर होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर है। शुक्रवार को Brent crude करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव और होर्मुज में जारी तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। निष्कर्ष होर्मुज जलडमरूमध्य में दो ADNOC-संबद्ध जहाजों पर हमले के UAE के आरोप ने अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। UAE ने घटना को कड़ी भाषा में निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बताया है। फिलहाल ईरान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। Source: Reuters, Al Jazeera, ADNOC, UAE Ministry of Foreign Affairs जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान तनाव में कमी के बाद कूटनीतिक प्रयास तेज, पश्चिम एशिया पर वैश्विक बाजारों की नजर

वॉशिंगटन/तेहरान, 1 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव में कमी आने के बाद दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में तेजी देखी जा रही है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। इस घटनाक्रम पर वैश्विक निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और वित्तीय बाजारों की करीबी नजर बनी हुई है, क्योंकि पश्चिम एशिया की स्थिरता का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। संवाद को मिल रही प्राथमिकता कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, तनाव कम होने के बाद विभिन्न माध्यमों से संवाद और विश्वास बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत का सिलसिला जारी रहने से क्षेत्र में स्थिरता मजबूत हो सकती है और आगे किसी बड़े टकराव की आशंका कम होगी। वैश्विक बाजार क्यों हैं सतर्क? पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां की किसी भी सुरक्षा या राजनीतिक स्थिति का असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार, तेल बाजार और निवेशक क्षेत्र के हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। क्षेत्र में शांति और निर्बाध नौवहन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है असर यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी नए तनाव या सुरक्षा चुनौती की स्थिति में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। भारत सहित कई देशों की चिंता भारत सहित कई देश पश्चिम एशिया से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। इसलिए क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत लगातार संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत जारी रहना सकारात्मक संकेत है। हालांकि, क्षेत्र की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और स्थायी समाधान के लिए निरंतर संवाद तथा आपसी विश्वास आवश्यक होगा। आगे क्या? आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर रहेगी। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूती मिल सकती है। स्रोत:संबंधित देशों के आधिकारिक बयान एवं अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्र। मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को उपलब्ध आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत, पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन पर दिया जोर

नई दिल्ली, 1 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-ईरान संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में तनाव कम करने, कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। क्षेत्रीय शांति पर भारत का स्पष्ट संदेश वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता केवल क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से मतभेदों का समाधान निकालने की अपील की। होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन के महत्व को रेखांकित किया। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का वैश्विक परिवहन होता है। किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। भारत-ईरान संबंधों पर चर्चा दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। कूटनीतिक समाधान पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी संबंधित देशों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। वैश्विक ऊर्जा बाजारों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक ऊर्जा बाजारों की करीबी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता कायम रहने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत की संतुलित विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि भारत लगातार सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित और रचनात्मक संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में शांति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। आगे क्या? भारत आने वाले समय में भी पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सकारात्मक समर्थन मिलेगा। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय (MEA) मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के बाद कतर में वार्ता की उम्मीद, पश्चिम एशिया पर टिकी वैश्विक बाजारों की नजर

दोहा/वॉशिंगटन/तेहरान, 30 जून। हालिया सैन्य तनाव और संघर्ष विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में नई कूटनीतिक वार्ता की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से वार्ता के स्वरूप और समय को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं, लेकिन मध्यस्थ देशों के प्रयास जारी हैं। संघर्ष विराम के बाद कूटनीतिक प्रयास हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ। इसके बाद कतर सहित क्षेत्रीय मध्यस्थों ने संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं ताकि तनाव दोबारा न बढ़े। वार्ता को लेकर अलग-अलग दावे अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि दोहा में बातचीत की संभावना है। वहीं ईरान ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वार्ता को लेकर अभी आधिकारिक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। वैश्विक बाजारों की नजर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखा जा रहा है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि वार्ता आगे बढ़ती है या क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है। इसी अनिश्चितता के कारण खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में सतर्क रुख देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा विशेषज्ञों के अनुसार वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कतर की मध्यस्थ भूमिका कतर लंबे समय से पश्चिम एशिया में विभिन्न कूटनीतिक वार्ताओं का महत्वपूर्ण मंच रहा है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में उसकी भूमिका आगे भी अहम रह सकती है। आगे क्या? विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है और ऊर्जा बाजारों को स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं यदि बातचीत में प्रगति नहीं होती है, तो पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बनी रह सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर दोहा में संभावित कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। स्रोत:रॉयटर्स, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्र मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 तक उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर परस्पर विरोधी बयान सामने आए हैं। इसलिए वार्ता की पुष्टि दोनों पक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से अभी नहीं की गई है। जय राष्ट्र न्यूज़

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ईरान द्वारा मिसाइल हमले किए जाने के बाद इजरायल में सुरक्षा अलर्ट बढ़ाया गया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध की आशंका बढ़ गई।

ईरान के मिसाइल हमलों के बाद इजरायल अलर्ट, मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा गहराया

8 जून 2026 | विश्व समाचार मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान और इजरायल के बीच टकराव को तेज किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है। इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइल हमलों के बाद देशभर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। कई इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। कैसे बढ़ा तनाव? हाल के दिनों में लेबनान की राजधानी बेरूत और आसपास के क्षेत्रों में हुए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा था। ईरान ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। इसके बाद ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए, जिन्हें क्षेत्रीय विश्लेषक दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का गंभीर संकेत मान रहे हैं। इजरायल की प्रतिक्रिया मिसाइल हमलों के बाद इजरायली सुरक्षा बलों को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। देश की रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया और संभावित खतरों से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी चुनौती का उचित जवाब दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की चिंता संयुक्त राष्ट्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने की अपील की है। UN अधिकारियों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। वैश्विक प्रभाव की आशंका विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। मध्य पूर्व दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए किसी भी बड़े संघर्ष का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर अमेरिका, यूरोपीय देशों और अन्य प्रमुख शक्तियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोशिश है कि बढ़ते तनाव को कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से नियंत्रित किया जाए और क्षेत्र को बड़े युद्ध की स्थिति में जाने से रोका जाए। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते हैं तो संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति प्रयासों में जुटे हुए हैं ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी जा सके। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अपडेट

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दिनांक: 31 दिसंबर 2025 मुख्य समाचार दुनिया भर में नए साल 2026 का स्वागत: आतिशबाजी और उत्साह के साथ विदाई 2025 को नई दिल्ली: दुनिया भर में आज रात नए साल 2026 का जोर-शोर से स्वागत किया जा रहा है। सिडनी में आतिशबाजी के शानदार प्रदर्शन के साथ नए साल की शुरुआत हुई, जहां बॉन्डी बीच हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में लाखों लोग जमा होकर बॉल ड्रॉप का इंतजार कर रहे हैं। लंदन, पेरिस, टोक्यो और दुबई में भी भव्य आतिशबाजी हो रही है। भारत में दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में लोग पार्टियों और परिवार के साथ नए साल का जश्न मना रहे हैं। ठंड के बावजूद उत्साह कम नहीं है। ईरान में बड़े प्रदर्शन: महंगाई के खिलाफ सड़कों पर लोग तेहरान: ईरान में मुद्रास्फीति की भयंकर मार से जनता आक्रोशित है। रियाल की कीमत गिरने से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब विश्वविद्यालयों तक फैल गए हैं। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। यूक्रेन-रूस युद्ध: रूसी ड्रोन हमले, ओडेसा बंदरगाह प्रभावित कीव: रूस ने यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर रात भर ड्रोन हमले किए। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि शांति वार्ता में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना शामिल है। युद्ध अब चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। इज़राइल-गाज़ा: सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध, यमन पर सऊदी हमले यरुशलम: इज़राइल ने गाज़ा में 24 से अधिक सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमले किए। मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। अमेरिका: ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां, फ्लू का कहर वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में कड़ी आव्रजन और व्यापार नीतियां जारी हैं। इस साल फ्लू से 81,000 अस्पताल में भर्ती और 3,100 मौतें हुई हैं। नए साल में शांति की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रीय समाचार प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: 2026 में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ें नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित कर कहा कि भारत 2026 में नई उम्मीदों और उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों का जिक्र किया। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण चरम पर: कई जगहों पर ‘गंभीर’ स्तर नई दिल्ली: दिसंबर में दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बेहद खराब हो गया है। कई स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बाहर निकलते समय सावधानी बरतें। इंडिगो संकट के बाद उड़ानें सामान्य: DGCA की सख्ती मुंबई: दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की हजारों उड़ानें रद्द होने के बाद अब स्थिति सामान्य हो रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर कार्रवाई की थी। खेल: ओसमान डेम्बेले बने फीफा प्लेयर ऑफ द ईयर पेरिस: फ्रेंच फुटबॉलर ओसमान डेम्बेले को 2025 का फीफा मेंस प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया। मौसम: उत्तर भारत में ठंड का कहर, कोहरा और शीतलहर नई दिल्ली: नए साल की पूर्व संध्या पर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कोहरे से ट्रेन और उड़ानें प्रभावित। जय राष्ट्र न्यूज़ की ओर से सभी दर्शकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! नया साल खुशियां और सफलता लाए।

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