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उत्तर भारत में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना; किसानों के लिए IMD की सलाह

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि मानसून उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही किसानों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय मौसम बुलेटिन और कृषि परामर्श के आधार पर ही खेती से जुड़े निर्णय लें। कई राज्यों में बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों के दौरान हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने के साथ कृषि और जल संसाधनों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। खरीफ फसलों को मिलेगा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर होने वाली वर्षा धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। पर्याप्त बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी और सिंचाई पर निर्भरता कम हो सकती है। किसानों के लिए IMD की सलाह मौसम विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने जिले और क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखें। बुवाई, उर्वरक का उपयोग, सिंचाई और अन्य कृषि कार्य स्थानीय मौसम बुलेटिन तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें, ताकि मौसम में बदलाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। जलभराव और बिजली गिरने से रहें सतर्क जहां अच्छी बारिश की संभावना है, वहीं कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कृषि और जल संसाधनों को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के दौरान मानसून सामान्य गति से सक्रिय रहता है, तो जलाशयों का जलस्तर बेहतर होगा और कृषि उत्पादन को भी सकारात्मक समर्थन मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्यान्न उत्पादन पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ सकता है। आगे की राह IMD आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति और वर्षा की स्थिति पर लगातार अपडेट जारी करेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन और कृषि विभाग की सलाह पर भरोसा करें तथा मौसम के अनुसार अपनी कृषि योजनाओं में आवश्यक बदलाव करें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को जारी मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमान और कृषि संबंधी सलाह के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD का अनुमान: जुलाई में सामान्य से कम बारिश की आशंका, खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जून में अपेक्षाकृत कमजोर मानसून के बाद जुलाई में भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान ने खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई के लिए क्या है पूर्वानुमान? IMD के अनुसार जुलाई के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि कुछ हिस्सों में समय-समय पर अच्छी वर्षा होने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग ने किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी है। खरीफ बुवाई पर असर की आशंका धान, सोयाबीन, मक्का, कपास, दालें और अन्य खरीफ फसलें समय पर होने वाली मानसूनी वर्षा पर काफी हद तक निर्भर करती हैं। यदि पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो बुवाई में देरी, सिंचाई लागत में वृद्धि और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। किसानों के लिए सलाह कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम की ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखने, उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आवश्यकता के अनुसार कम पानी वाली फसलों या वैकल्पिक कृषि पद्धतियों पर विचार करने की सलाह दी है। कृषि अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। कमजोर मानसून का असर केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ग्रामीण आय और कृषि आधारित उद्योगों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई में वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कुछ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार और एजेंसियां सतर्क केंद्र और राज्य सरकारें मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कृषि एवं मौसम विभाग किसानों तक समय पर मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाने और आवश्यक सलाह जारी करने की प्रक्रिया को मजबूत कर रहे हैं। आगे क्या? मौसम विभाग आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति के आधार पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के शेष दिनों में होने वाली वर्षा खरीफ सीजन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन के आधार पर ही कृषि संबंधी निर्णय लें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को जारी IMD के मानसून पूर्वानुमान और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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कमजोर मानसून के बीच राहत की उम्मीद, IMD ने अगले कुछ दिनों में बारिश बढ़ने का पूर्वानुमान जताया

नई दिल्ली, 30 जून। देश के कई हिस्सों में जून के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरा पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभाग के अनुसार उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। खरीफ बुवाई पर पड़ा असर बारिश की कमी के कारण कई राज्यों में धान, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो सकी। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसानों को बुवाई टालनी पड़ी, जिससे शुरुआती कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। IMD का ताजा पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत हैं। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। विभाग ने स्थानीय मौसम बुलेटिन पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। किसानों के लिए राहत की उम्मीद यदि पूर्वानुमान के अनुसार पर्याप्त बारिश होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसी अवधि में अच्छी वर्षा होने पर शुरुआती नुकसान की काफी हद तक भरपाई की जा सकती है। कृषि विभाग की तैयारी राज्य सरकारें और कृषि विभाग किसानों को मौसम आधारित सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। किसानों से स्थानीय कृषि अधिकारियों और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने का आग्रह किया गया है। जलभराव और बिजली गिरने का भी खतरा जहां एक ओर अच्छी बारिश से खेती को लाभ मिलेगा, वहीं IMD ने कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने की संभावना भी जताई है। ऐसे इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों की राय मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है, लेकिन वर्षा का वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यदि बारिश संतुलित और समय पर होती है तो खरीफ उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। आगे की स्थिति मौसम विभाग अगले कुछ दिनों तक मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा और समय-समय पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा। किसानों और आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी IMD के मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की उपलब्ध जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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खरीफ बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज, कमजोर मानसून से कई राज्यों में खेती प्रभावित

नई दिल्ली, 29 जून। देश में खरीफ सीजन की बुवाई इस वर्ष शुरुआती चरण में अपेक्षा से धीमी रही है। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई क्षेत्रों में कमजोर मानसून और सामान्य से कम वर्षा के कारण किसानों को बुवाई शुरू करने में देरी हुई है। किन फसलों पर सबसे अधिक असर? शुरुआती आंकड़ों के अनुसार धान, दालें, तिलहन, मोटे अनाज और कुछ अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई किसानों ने खेतों की तैयारी और बीज बोने का कार्य फिलहाल टाल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। कमजोर मानसून बना प्रमुख कारण मौसम विशेषज्ञों के अनुसार देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में मानसून की प्रगति सामान्य से धीमी रही है। कुछ इलाकों में बारिश की कमी के कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई, जिससे किसानों को बुवाई शुरू करने में कठिनाई हुई। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई हिस्सों में वर्षा बढ़ने की संभावना जताई है। किसानों की बढ़ी चिंता बारिश में देरी का असर किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। समय पर बुवाई न होने से फसलों की वृद्धि अवधि प्रभावित होती है, जिससे उपज कम होने का जोखिम बढ़ जाता है। कई किसान अब अगले मानसूनी दौर का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का कार्य तेजी से पूरा किया जा सके। कृषि मंत्रालय की नजर स्थिति पर कृषि मंत्रालय लगातार राज्यों से बुवाई की प्रगति की जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जहां आवश्यक होगा, वहां किसानों को बीज, तकनीकी सलाह और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर मानसून की स्थिति के अनुसार कृषि रणनीति तैयार की जा रही है। खाद्य उत्पादन पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी खाद्यान्न उत्पादन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो बुवाई में आई शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान से बढ़ी उम्मीद भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के अनुरूप वर्षा होती है तो किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ बुवाई की गति में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं। आगे की राह सरकार और कृषि विशेषज्ञों की नजर अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी है। समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। फिलहाल किसानों, कृषि विभाग और मौसम एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन पर मौसम का प्रभाव न्यूनतम रहे। स्रोत:कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:कृषि मंत्रालय द्वारा जारी खरीफ बुवाई के ताज़ा आंकड़ों एवं मौसम संबंधी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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