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सेना प्रमुख ने पेश किया ‘VIJAY’ विजन, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना बनाने का रोडमैप

नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय सेना प्रमुख ने ‘VIJAY’ (Vision for Indian Army as a Joint, Adaptive and Future-Ready Force) विजन प्रस्तुत करते हुए भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की रणनीति का व्यापक खाका सामने रखा। इस पहल का उद्देश्य सेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम, संयुक्त अभियानों के लिए तैयार और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप विकसित करना है। क्या है ‘VIJAY’ विजन? ‘VIJAY’ विजन भारतीय सेना के दीर्घकालिक आधुनिकीकरण की रूपरेखा है। इसके तहत सेना को ऐसी आधुनिक और चुस्त सैन्य शक्ति के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है, जो पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और ड्रोन आधारित चुनौतियों का भी प्रभावी ढंग से सामना कर सके। प्रमुख उद्देश्य ‘VIJAY’ विजन के तहत कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं तय की गई हैं— आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल सेना प्रमुख ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्वदेशी हथियार प्रणालियों, संचार उपकरणों, निगरानी तकनीकों और रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी बढ़ने से सेना की परिचालन क्षमता और रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत होगी। बदलते युद्ध के स्वरूप पर फोकस अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। भविष्य के संघर्षों में साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसलिए सेना को इन सभी क्षेत्रों में लगातार क्षमता विकसित करनी होगी। संयुक्त सैन्य क्षमता पर जोर ‘VIJAY’ विजन में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियानों को प्राथमिकता दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग होगा और किसी भी चुनौती का तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी। रक्षा विशेषज्ञों की राय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ‘VIJAY’ विजन भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दस्तावेज है। इससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारी को नई दिशा मिलेगी और तकनीक आधारित युद्ध क्षमता मजबूत होगी। आगे की राह भारतीय सेना आने वाले वर्षों में ‘VIJAY’ विजन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। रक्षा मंत्रालय, DRDO, निजी उद्योग और अन्य रक्षा संगठनों के सहयोग से आधुनिक सैन्य प्रणालियों, डिजिटल तकनीकों और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करना है। स्रोत:भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय एवं आधिकारिक सैन्य जानकारी। मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को भारतीय सेना प्रमुख द्वारा प्रस्तुत ‘VIJAY’ विजन और संबंधित आधिकारिक विवरण के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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सेना प्रमुख बोले- हालिया सैन्य अभियानों से आत्मनिर्भर भारत और नई रक्षा रणनीति को मिली मजबूती

नई दिल्ली, 30 जून। भारतीय सेना प्रमुख ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हालिया सैन्य अभियानों और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण ने देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित स्वदेशी रक्षा प्रणालियां, आधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य रणनीति भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर विशेष जोर सेना प्रमुख ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के बढ़ते उपयोग से भारत की रणनीतिक क्षमता मजबूत हुई है। स्वदेशी हथियार प्रणालियां, संचार उपकरण, ड्रोन और निगरानी तकनीकों का विस्तार सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियां उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक सैन्य शक्ति के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, अंतरिक्ष आधारित निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी क्षमताएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं। भारतीय सेना इन नई चुनौतियों के अनुरूप अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट कर रही है। संयुक्त सैन्य समन्वय पर बल सेना प्रमुख ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय को आधुनिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अभियान, साझा संसाधन और तकनीकी एकीकरण भविष्य की सैन्य तैयारियों को और प्रभावी बनाएंगे। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिली गति उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा उत्पादन में निजी उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी बढ़ रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा। सैनिकों के प्रशिक्षण और तकनीक पर फोकस सेना प्रमुख ने आधुनिक प्रशिक्षण, सिमुलेशन तकनीक, डिजिटल युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और सक्षम सैनिक भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं। रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने से घरेलू उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे रोजगार, नवाचार और रक्षा निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। आगे की रणनीति सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए जा रहे कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेंगे। स्रोत:भारतीय सेना द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य एवं रक्षा मंत्रालय की उपलब्ध जानकारी। मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को सेना प्रमुख के संबोधन और रक्षा क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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