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ISRO कर्मचारियों ने Private-Sector Push पर मांगी सफाई, Rocket और Satellite Manufacturing के भविष्य पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: भारत के space sector में private companies की बढ़ती भूमिका के बीच ISRO के कई कर्मचारी संगठनों ने agency के भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं। नौ employee associations ने ISRO Chairman और Department of Space Secretary V. Narayanan को संयुक्त पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि rockets, satellites और launch infrastructure से जुड़ी ISRO की मौजूदा जिम्मेदारियों का भविष्य क्या होगा। करीब 5,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व पांच पन्नों के इस joint representation पर ISRO के अलग-अलग centres से जुड़े नौ employee associations के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें VSSC, SDSC, URSC, LPSC, SAC, NRSC और IPRC जैसे महत्वपूर्ण centres शामिल हैं। ये संगठन करीब 5,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो ISRO की कुल workforce का लगभग 27% है। Private Companies से नहीं, ISRO की भूमिका घटने से चिंता कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे private companies की भागीदारी या space sector के commercialisation के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मुख्य चिंता यह है कि कहीं ISRO की अपनी rocket manufacturing, satellite production, testing और launch operations capabilities धीरे-धीरे private sector या PSUs को transfer न हो जाएं। PSLV, LVM3 और SSLV को लेकर सवाल कर्मचारियों ने खास तौर पर PSLV, LVM3 और SSLV जैसे launch vehicles का जिक्र किया है। SSLV technology और production capability HAL को transfer की जा चुकी है, जबकि LVM3 और PSLV से जुड़ी technology transfer तथा private production की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। Associations ने पूछा है कि भविष्य में इन rockets के design, development और manufacturing में ISRO की भूमिका कितनी रहेगी। Satellite Manufacturing पर भी चिंता पत्र में routine satellite manufacturing के भविष्य को लेकर भी clarification मांगी गई है। कर्मचारियों को आशंका है कि यदि satellites और launch vehicles की actual production बड़े स्तर पर बाहर चली गई तो ISRO मुख्य रूप से research और advanced technology development तक सीमित हो सकता है। Recruitment और Promotions पर पड़ सकता है असर Employee associations ने चेतावनी दी है कि core activities के outsourcing से ISRO के भीतर उपलब्ध technical work कम हो सकता है। इससे भविष्य में recruitment, promotions, skill development और career opportunities प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। ISRO में पहले से हजारों पद खाली इस चिंता के बीच government data के मुताबिक फरवरी 2026 तक ISRO में 18,142 sanctioned posts के मुकाबले 15,529 कर्मचारी कार्यरत थे। यानी करीब 14.4% पद खाली थे। Employee groups का कहना है कि outsourcing बढ़ने से regular recruitment और कम हो सकती है। ‘Residual R&D Boutique’ बनने की आशंका Joint representation में कर्मचारी संगठनों ने चिंता जताई कि ISRO को केवल एक सीमित research-and-development organisation में बदलना उचित नहीं होगा, जबकि launch vehicles की actual manufacturing और launch infrastructure का operation दूसरे entities के पास चला जाए। उन्होंने policy changes से पहले कर्मचारियों के साथ structured consultation की मांग की है। V. Narayanan से Written Clarification की मांग Employee associations ने ISRO Chairman V. Narayanan से launch vehicles, satellites, infrastructure, staffing और recruitment से जुड़े भविष्य के roadmap पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल ISRO या Department of Space की ओर से इस joint representation पर कोई विस्तृत public response सामने नहीं आया है। source – India Today / The Indian Express / Times of Indiaजय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के निजी स्पेस सेक्टर में Vikram-1 मिशन बना सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी अपडेट, अंतरिक्ष उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी कड़ी में Skyroot Aerospace का Vikram-1 मिशन सबसे बड़े तकनीकी अपडेट के रूप में चर्चा में है। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय स्पेस मार्केट में देश की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Vikram-1 मिशन अपने निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। इससे देश की स्पेस इकोनॉमी को भी महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है। क्या है Vikram-1 मिशन? Vikram-1, हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace द्वारा विकसित एक ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इस रॉकेट में आधुनिक कंपोजिट सामग्री, उन्नत प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और कई स्वदेशी इंजीनियरिंग समाधान शामिल किए गए हैं। कंपनी का उद्देश्य वैश्विक ग्राहकों को कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। भारत के लिए क्यों है ऐतिहासिक? भारत लंबे समय से ISRO की उपलब्धियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन अब निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Vikram-1 मिशन की सफलता से— ISRO और निजी क्षेत्र का सहयोग भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बाद ISRO, IN-SPACe और NSIL जैसी संस्थाएं निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इस नीति का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और व्यावसायिक स्पेस सेवाओं को बढ़ावा देना है। Skyroot Aerospace इसी बदलते स्पेस इकोसिस्टम का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। निजी स्पेस सेक्टर को कैसे मिलेगा लाभ? विशेषज्ञों का कहना है कि Vikram-1 मिशन की सफलता से— वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है। संचार, मौसम पूर्वानुमान, पृथ्वी अवलोकन, कृषि, रक्षा और इंटरनेट सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में छोटे सैटेलाइट लॉन्च किए जा रहे हैं। ऐसे में कम लागत और विश्वसनीय लॉन्च सेवाएं देने वाले देशों की मांग भी बढ़ रही है। यदि भारत इस क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित करता है, तो वैश्विक स्पेस मार्केट में उसकी प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा Vikram-1 मिशन केवल एक कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन से— आगे की राह Skyroot Aerospace भविष्य में अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और वैश्विक स्पेस उद्योग में देश की भूमिका और मजबूत हो सकती है। निष्कर्ष Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह मिशन केवल एक रॉकेट कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, स्टार्टअप नवाचार और वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, ISRO, IN-SPACe की सार्वजनिक जानकारी एवं आधिकारिक घोषणाएं। Original Report: उपलब्ध सार्वजनिक और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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Vikram-1 क्या है? जानिए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट और Skyroot Aerospace मिशन का महत्व

नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के साथ इतिहास रचने की तैयारी में है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो Skyroot भारत की पहली निजी कंपनी बन जाएगी जो स्वदेशी रूप से विकसित ऑर्बिटल रॉकेट के जरिए उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में स्थापित करने का प्रयास करेगी। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता का बड़ा प्रदर्शन भी माना जा रहा है। क्या है Vikram-1? Vikram-1 एक चार-चरण (Four-Stage) ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है जिसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी ऊंचाई लगभग सात मंजिला इमारत के बराबर है और इसे हल्के लेकिन मजबूत कार्बन-कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार किया गया है। रॉकेट में Skyroot द्वारा विकसित स्वदेशी प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और 3D-प्रिंटेड इंजन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। ‘मिशन आगमन’ क्यों है खास? Skyroot ने अपने पहले ऑर्बिटल मिशन का नाम “Mission Aagaman” रखा है। यह मिशन मुख्य रूप से रॉकेट के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम—जैसे स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस, नेविगेशन और प्रोपल्शन—की वास्तविक अंतरिक्ष परिस्थितियों में जांच करेगा। इस परीक्षण से भविष्य के व्यावसायिक (Commercial) लॉन्च का रास्ता तैयार होगा। Skyroot Aerospace कौन है? Skyroot Aerospace की स्थापना वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने की थी। कंपनी का उद्देश्य कम लागत, तेज़ और विश्वसनीय सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। वर्ष 2022 में Skyroot ने Vikram-S नामक भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। अब Vikram-1 के माध्यम से कंपनी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता प्रदर्शित करना चाहती है। भारत के लिए यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है? Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक है— ISRO और निजी क्षेत्र की साझेदारी हाल के वर्षों में भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद IN-SPACe और NSIL जैसे संस्थानों के माध्यम से सहयोग बढ़ाया है। इसी नीति का लाभ उठाकर Skyroot जैसी कंपनियां उभर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ISRO और निजी उद्योग मिलकर भारत को वैश्विक लॉन्च सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं। वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं देने वाली कंपनियों की मांग भी बढ़ रही है। Vikram-1 की सफलता भारत को इस वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिला सकती है और विदेशी ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है। भविष्य की योजनाएं Skyroot केवल Vikram-1 तक सीमित नहीं है। कंपनी भविष्य में Vikram-2 और Vikram-3 जैसे अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके अलावा पुन: प्रयोज्य (Reusable) तकनीकों और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर भी कंपनी का फोकस है। निष्कर्ष Vikram-1 केवल एक रॉकेट नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की नई उड़ान का प्रतीक है। इस मिशन की सफलता देश के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक नवाचार और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की भूमिका को नई ऊंचाई दे सकती है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन भारत को दुनिया के प्रमुख स्पेस लॉन्च हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, IN-SPACe, ISRO से संबंधित सार्वजनिक जानकारी एवं विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: आधिकारिक घोषणाओं और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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गगनयान मिशन की तैयारियों को मिली रफ्तार, उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर भारत का बढ़ता फोकस

नई दिल्ली, 6 जुलाई। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मिशन से जुड़े विभिन्न तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा प्रणालियों का सत्यापन और अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर काम जारी है। इसके साथ ही भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्पेस सेक्टर पर उद्योग जगत और निवेशकों की भी विशेष नजर बनी हुई है। गगनयान मिशन की तैयारियां जारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन के लिए आवश्यक प्रणालियों के परीक्षण और मिशन से जुड़े विभिन्न चरणों की तैयारी कर रहा है। मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना इस मिशन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर बढ़ा जोर मानव अंतरिक्ष मिशन के साथ-साथ पुनःप्रवेश (Re-entry) तकनीक, जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System), अंतरिक्ष यान सुरक्षा, संचार नेटवर्क और मिशन नियंत्रण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। निजी स्पेस सेक्टर को मिल रहा बढ़ावा भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिली है। सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सेवाएं, अंतरिक्ष डेटा, पृथ्वी अवलोकन और स्पेस टेक स्टार्टअप्स में निवेश लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। निवेशकों की बढ़ी रुचि स्पेस टेक्नोलॉजी को भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में माना जा रहा है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सरकारी और निजी निवेश से भारतीय एयरोस्पेस एवं स्पेस उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि गगनयान मिशन केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत की अनुसंधान क्षमता, उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण, रक्षा, संचार और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह मिशन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भविष्य की राह आने वाले महीनों में गगनयान मिशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण और तकनीकी गतिविधियां होने की संभावना है। यदि सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे होते हैं, तो भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा। साथ ही देश का स्पेस सेक्टर वैश्विक निवेश और तकनीकी सहयोग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। स्रोत:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), भारत सरकार की सार्वजनिक अंतरिक्ष संबंधी जानकारी एवं आधिकारिक अपडेट। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के लॉन्च की तैयारियां तेज, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ा उत्साह

नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के लॉन्च की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस मिशन को देश के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस लॉन्च से भारतीय स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की भागीदारी और मजबूत होगी। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ा कदम Vikram-1 भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसके सफल प्रक्षेपण से निजी कंपनियों की उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता में वृद्धि होगी और भारत का वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। आधुनिक तकनीक से लैस रॉकेट Vikram-1 को आधुनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत एवियोनिक्स और हल्के कंपोजिट ढांचे के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करना है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन की सफलता से भारत के स्पेस स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योग को नई संभावनाएं मिलेंगी। इससे नवाचार, निवेश और उच्च तकनीकी रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। वैश्विक लॉन्च बाजार में बढ़ेगी भागीदारी भारत पहले से ही किफायती उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं के लिए जाना जाता है। Vikram-1 के संचालन से निजी क्षेत्र भी वैश्विक लॉन्च सेवाओं में सक्रिय भूमिका निभा सकेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों का असर हाल के वर्षों में भारत सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और नियामकीय सुधार लागू करने के बाद कई स्पेस टेक स्टार्टअप्स तेजी से उभरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि Vikram-1 मिशन इन सुधारों का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। विशेषज्ञों की राय अंतरिक्ष विशेषज्ञों का कहना है कि यदि Vikram-1 मिशन सफल रहता है, तो भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकता है। इससे भविष्य में अधिक व्यावसायिक लॉन्च, तकनीकी सहयोग और विदेशी निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। आगे की राह लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मिशन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। सफल प्रक्षेपण के बाद भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है तथा वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में देश की भूमिका और मजबूत हो सकती है। स्रोत:Skyroot Aerospace, भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक सार्वजनिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 तक उपलब्ध Vikram-1 मिशन और भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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