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तिब्बत सीमा से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही; 160 से ज्यादा मौतें, सैकड़ों लापता, भारतीय तीर्थयात्रियों की भी तलाश

काठमांडू/रसुवा: Nepal-Tibet border के पास हिमालयी इलाके में हुए भीषण glacial ice-rock collapse के बाद आई flash flood ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 27 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक नेपाल में कम से कम 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि Tibet की तरफ भी तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। दोनों ओर मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और rescue operation युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल के Rasuwa और Dhading जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। पानी, कीचड़, बड़े पत्थरों और बर्फ के मलबे की तेज लहर ने गांवों, सड़कों, पुलों, hydropower projects और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई इलाकों में electricity और communication network भी ठप हो गया है। 26 अगस्त की सुबह अचानक आया सैलाब यह आपदा बुधवार, 26 अगस्त की सुबह सामने आई। Nepal के Rasuwa जिले में Bhote Koshi river system में अचानक पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ा। कुछ ही समय में पानी के साथ भारी मात्रा में mud, rock और debris नीचे की तरफ आया और Timure तथा Syafrubesi जैसे इलाकों में विनाश मचा दिया। Reuters के मुताबिक flood wave इतनी तेज थी कि river level downstream इलाकों में लगभग आधे घंटे के अंदर 9 metres तक बढ़ गया। क्या सच में Tibet से आई बाढ़? Geographically देखा जाए तो disaster का शुरुआती source Nepal-Tibet border के उत्तर-पूर्वी Himalayan क्षेत्र में था। Nepal की disaster authority द्वारा satellite images के शुरुआती analysis में पाया गया कि Rasuwagadhi border crossing से करीब 20 km northeast में Lhende river valley के ऊपर ice और rock का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इस collapse ने नदी के flow को अचानक प्रभावित किया और फिर बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान तथा sediment downstream Nepal की तरफ बढ़ गया। इसी वजह से इसे कई reports में “Tibet-origin flood” कहा जा रहा है। Glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा Planet Labs की satellite imagery का analysis करने वाले experts के मुताबिक करीब 5,200 metre की ऊंचाई पर स्थित glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे की valley में गिरा। Ice-rock mass ने लगभग 1,200 metre नीचे गिरते हुए भारी debris avalanche पैदा की। यह debris नदी में पहुंचा और उसके साथ मिलकर बेहद शक्तिशाली flash flood में बदल गया। Experts इसे सामान्य monsoon flood के बजाय ice-rock avalanche triggered flood मान रहे हैं। पहले Earthquake समझा गया, फिर तस्वीर बदली Disaster के शुरुआती घंटों में इलाके में दर्ज seismic signal को लगभग 4.4 magnitude earthquake माना गया था। लेकिन बाद की geological analysis में यह संभावना मजबूत हुई कि seismic signal खुद massive glacier और rock collapse के कारण पैदा हुआ हो सकता है। इसलिए अभी यह निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा कि earthquake ने glacier तोड़ा। Scientists अभी exact sequence और trigger की जांच कर रहे हैं। नेपाल में 162 लोगों की मौत 27 August की latest Reuters update के मुताबिक Nepal में कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet की तरफ तीन मौतें confirm की गई हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों में confirmed death toll कम से कम 165 हो जाता है। Casualty figures अभी भी लगातार बदल रहे हैं क्योंकि कई दूरदराज इलाके पूरी तरह accessible नहीं हैं। Authorities को आशंका है कि search operation आगे बढ़ने के साथ death toll बढ़ सकता है। करीब 1,000 लोग दोनों ओर लापता इस disaster का सबसे चिंताजनक पहलू missing persons की संख्या है। Associated Press की latest reporting के मुताबिक: बताए गए हैं। यानी combined figure करीब 1,000 लोगों तक पहुंच रहा है। हालांकि disaster के शुरुआती दौर में duplicate registrations और communication breakdown के कारण missing figures में बदलाव संभव है। भारतीय तीर्थयात्री भी लापता इस tragedy में बड़ी संख्या में foreign tourists और pilgrims भी फंसे हैं। यह इलाका Mount Kailash और Mansarovar जाने वाले कई यात्रियों के transit route से जुड़ा है। Nepal Tourism Board से जुड़ी reports में कम से कम 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय authorities नेपाल सरकार के साथ उनकी पहचान और location verify करने में जुटी हैं। अलग-अलग reports में Indian missing count में कुछ अंतर है, इसलिए final number अभी बदल सकता है। India ने भेजी 10 Ton Relief Material आपदा के तुरंत बाद भारत ने Nepal को humanitarian assistance भेजना शुरू कर दिया। External Affairs Minister S. Jaishankar के मुताबिक India ने 10 tonnes Humanitarian Assistance and Disaster Relief material तथा essential medicines Nepal भेजे हैं। पहली खेप Indian Air Force के C-130J aircraft के जरिए Kathmandu भेजी गई। 27 अगस्त की सुबह relief material Nepal पहुंचने और वहां authorities को hand over किए जाने की पुष्टि भी हुई। PM Modi ने Nepal को दिया मदद का भरोसा Prime Minister Narendra Modi ने Nepal के Prime Minister Balendra Shah से बातचीत कर इस tragedy पर संवेदना व्यक्त की और भारत की तरफ से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया। India ने rescue teams और additional assistance को भी standby पर रखा है। नेपाल भारत का करीबी पड़ोसी होने के साथ खुली सीमा साझा करता है, इसलिए इस तरह की Himalayan disaster का असर भारत की disaster preparedness पर भी पड़ता है। गांव, घर और गाड़ियां मलबे में दबीं Verified footage में पहाड़ों से आती mud और debris की विशाल लहर को buildings तथा vehicles को बहाते देखा गया है। Reuters के मुताबिक कई स्थानों पर: Survivors ने बताया कि पानी के साथ इतना ज्यादा mud और rock आ रहा था कि flood सामान्य नदी के पानी की बजाय moving concrete जैसी दिखाई दे रही थी। 40 KM से ज्यादा Road Network प्रभावित Latest international reports के मुताबिक disaster में करीब 40 kilometres road और कम से कम 19 bridges को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इससे rescue teams के लिए remote areas तक पहुंचना और भी मुश्किल हो गया है। कई जगह helicopters ही survivors तक पहुंचने का मुख्य जरिया बने हुए हैं। Hydropower Projects को भारी नुकसान Nepal की economy में hydropower की बड़ी भूमिका है और प्रभावित Himalayan river belt में कई power projects…

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