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मराठी भाषा नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए कामचलाऊ मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के विरोध में मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 24 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 25 अगस्त को भी इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में दिक्कत हुई और कई जगह 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।

प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी language test के तरीके, कम समय और कथित रूप से training से बाहर पूछे जा रहे सवालों को लेकर है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि drivers को मराठी का expert नहीं बनना है, बल्कि काम के दौरान यात्रियों से बातचीत करने लायक basic Marathi आनी चाहिए।

कांदिवली में सड़क पर उतरे चालक

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई के Kandivali क्षेत्र में देखने को मिला। सोमवार सुबह Laljipada के पास Kandivali Link Road पर दर्जनों drivers ने रास्ता-रोको प्रदर्शन किया।

कुछ समय के लिए traffic भी प्रभावित हुआ और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। Kandivali के अलावा Malad West, Santacruz, Dahisar और Andheri समेत कुछ अन्य इलाकों में भी demonstrations की खबरें सामने आईं।

कई चालकों ने काम बंद करके दूसरे drivers से भी protest में शामिल होने की अपील की।

क्यों हो रहा है विरोध?

महाराष्ट्र Transport Department ने passenger vehicles चलाने वाले drivers के लिए working knowledge of Marathi की शर्त को सख्ती से लागू करना शुरू किया है।

RTO अधिकारी drivers से बातचीत कर यह जांच रहे हैं कि वे दैनिक कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं। Assessment process को video-record भी किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि यह शर्त नई नहीं है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक practical Marathi knowledge से जुड़ी requirement महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है।

Drivers बोले- Marathi सीखने से आपत्ति नहीं

प्रदर्शनकारी drivers का कहना है कि उनका विरोध मराठी भाषा से नहीं है।

उनका आरोप है कि RTO assessment में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो उन्हें दी गई training का हिस्सा नहीं थे। कई drivers ने यह भी कहा कि वे मराठी समझते हैं और टूटी-फूटी भाषा में बातचीत कर सकते हैं, लेकिन fluency हासिल करने के लिए उन्हें ज्यादा समय चाहिए।

कुछ drivers ने यह भी कहा कि वे रोज की कमाई पर निर्भर हैं और language classes के लिए काम छोड़ना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है।

पहले Notice, फिर हो सकती है कार्रवाई

सरकार के नियम के मुताबिक किसी driver में पर्याप्त working knowledge नहीं मिलने पर तत्काल licence cancel नहीं किया जाएगा।

पहले उसे एक महीने का notice दिया जाएगा ताकि वह मराठी सीख सके। अगर एक महीने के बाद भी वह requirement पूरी नहीं करता, तो उसका badge तीन महीने के लिए suspend किया जा सकता है। इसके बाद भी जानबूझकर भाषा नहीं सीखने की स्थिति में badge और permit cancellation जैसी कार्रवाई हो सकती है।

यानी किसी driver के language test में कमजोर पाए जाने भर से तुरंत permanent licence cancellation का नियम नहीं है।

₹5,000 से ₹25,000 Fine की खबरों पर सरकार की सफाई

प्रदर्शन के दौरान drivers में यह डर भी फैला कि मराठी नहीं आने पर ₹5,000 से ₹20,000 या उससे ज्यादा का fine लगाया जा रहा है।

Borivali RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी भारी penalty को लेकर misinformation फैलने की बात सामने आई है।

Transport Minister Pratap Sarnaik ने कहा कि एक महीने की notice period पूरी होने से पहले अगर कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से fine लगाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य drivers को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन्हें practical Marathi सीखने का मौका देना है।

Fadnavis बोले- Marathi Expert बनाना मकसद नहीं

मामला बढ़ने के बाद Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ने भी स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि सरकार किसी हिंदीभाषी या गैर-मराठी driver को Marathi language expert नहीं बनाना चाहती।

उनके मुताबिक driver को केवल इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह अपने काम से जुड़े सामान्य सवाल और यात्रियों से basic बातचीत कर सके।

फडणवीस ने यह भी कहा कि drivers को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अभी तक किसी licence को केवल इस आधार पर cancel नहीं किया गया है।

पहले दिन 8,217 Drivers की हुई जांच

Transport Department के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती verification drive में पूरे महाराष्ट्र में 8,217 auto-rickshaw और taxi drivers की जांच की गई।

इनमें 1,268 drivers को notice जारी किया गया।

Mumbai Metropolitan Region में 3,995 drivers की जांच की गई, जिनमें 604 drivers working Marathi requirement पूरी नहीं कर पाए। बाकी जिलों में 4,222 drivers की जांच हुई और 664 को notice मिला।

महाराष्ट्र में कुल करीब 9.65 लाख auto-rickshaw और taxi permits/badges बताए गए हैं।

1.65 लाख से ज्यादा Drivers ने ली Marathi Training

सरकार के मुताबिक करीब 1.65 लाख non-Marathi auto और taxi drivers अब तक Marathi language classes में शामिल हो चुके हैं और कई को certificates भी दिए गए हैं।

सरकार का तर्क है कि training programme drivers को basic conversation सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देता है।

वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training और assessment process को ज्यादा practical और flexible बनाने की जरूरत है।

Bombay High Court पहुंचा मामला

इस विवाद में 25 अगस्त को एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया।

चार app-based cab drivers की ओर से Bombay High Court में PIL दायर किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें Maharashtra government के 12 August notification को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि Marathi language requirement Articles 14, 19 और 21 के तहत उनके fundamental rights को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि Motor Vehicles Act, 1988 में driving licence रखने के लिए किसी खास भाषा की ऐसी requirement निर्धारित नहीं है। मामला अब अदालत में कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।

यात्रियों को हो रही परेशानी

हड़ताल और protest के कारण मुंबई के कुछ इलाकों में यात्रियों को transport shortage का सामना करना पड़ा।

पहले से बारिश और traffic pressure से जूझ रहे शहर में auto और taxi की उपलब्धता कम होने से office जाने वाले लोगों और daily commuters की परेशानी बढ़ गई।

हालांकि यह strike मुंबई के हर auto-taxi driver की पूर्ण हड़ताल नहीं है। रिपोर्ट्स में इसे drivers के एक वर्ग द्वारा की जा रही तीन-दिवसीय strike बताया गया है।

विवाद का असली सवाल क्या है?

पूरे विवाद में दो अलग पक्ष सामने हैं।

सरकार का कहना है कि महाराष्ट्र में public transport चलाने वाले driver के लिए स्थानीय भाषा का basic knowledge यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी है।

वहीं drivers का एक वर्ग कह रहा है कि language requirement लागू करने का तरीका उनकी आजीविका को प्रभावित कर सकता है और assessment को आसान, practical तथा पर्याप्त समय देने वाला होना चाहिए।

फिलहाल Maharashtra government ने immediate harsh penalties को लेकर सफाई दी है, लेकिन drivers का protest जारी है। Bombay High Court में चुनौती सामने आने के बाद अब इस नियम का कानूनी पक्ष भी चर्चा में आ गया है।

नोट: हड़ताल 24 अगस्त से शुरू हुई थी और 25 अगस्त 2026 को भी इसका असर जारी है। यह मुंबई के सभी auto-taxi drivers की पूर्ण strike नहीं, बल्कि drivers के एक वर्ग का विरोध है।

स्रोत – आजतक, पीटीआई, एनडीटीवी, लाइव हिन्दुस्तान, टाइम्स ऑफ इंडिया

जय राष्ट्र न्यूज़

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