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भारत-जापान रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को मिली नई रफ्तार, निवेश, AI और हरित ऊर्जा पर रहेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों का उद्देश्य नवाचार, सतत विकास और आर्थिक प्रगति को नई गति देना है। निवेश को मिलेगा बढ़ावा दोनों देशों ने भारत में जापानी निवेश बढ़ाने और औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए निवेश के अवसर पैदा होंगे तथा रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। AI और डिजिटल तकनीकों पर सहयोग भारत और जापान ने AI, मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। दोनों देश उभरती तकनीकों के विकास और उनके सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को भी बढ़ावा देंगे। हरित ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने का संकल्प भी दोहराया। उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में जापान ने उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने में सहयोग बढ़ाने का भरोसा दिया। इससे भारत के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। उद्योग जगत को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीतिक साझेदारी से भारतीय उद्योगों को नई तकनीकों तक पहुंच, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। आगे की राह भारत और जापान आने वाले वर्षों में इन समझौतों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। इससे भारत-जापान संबंध और अधिक मजबूत होने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की भूमिका भी सशक्त होने की उम्मीद है। स्रोत:भारत सरकार, जापान सरकार एवं दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को भारत-जापान रणनीतिक आर्थिक सहयोग से संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में, अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति: पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर वार्ता अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ शेष बिंदुओं पर चर्चा जारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े अधिकांश विषयों पर सहमति बन गई है। अब कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत मुद्दों पर चर्चा चल रही है, जिनका समाधान होने के बाद समझौते की घोषणा की जा सकती है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में वृद्धि, निवेश प्रवाह में तेजी और दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है। किन क्षेत्रों पर है विशेष फोकस? वार्ता के दौरान कृषि, औद्योगिक उत्पाद, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार कर रहे हैं। भारतीय उद्योग को मिल सकता है लाभ यदि समझौता अंतिम रूप लेता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। आईटी सेवाएं, फार्मा, इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिल सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण पहल वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी। सरकार का भरोसा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शेष मुद्दों पर भी जल्द सहमति बन जाएगी। आगे क्या? दोनों देशों के अधिकारी शेष बिंदुओं पर बातचीत जारी रखेंगे। सहमति बनने के बाद व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उद्योग जगत और निवेशकों की नजर अब इस महत्वपूर्ण समझौते पर बनी हुई है, क्योंकि इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार तथा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का आधिकारिक बयान। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी आधिकारिक जानकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-जापान 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में 10 अरब डॉलर के निवेश सहित कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत और जापान के बीच आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। सम्मेलन के दौरान जापान ने भारत में 10 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। 10 अरब डॉलर के निवेश पर सहमति शिखर सम्मेलन में जापानी कंपनियों द्वारा भारत में लगभग 10 अरब डॉलर के निवेश की योजना पर सहमति बनी। यह निवेश विनिर्माण, डिजिटल तकनीक, परिवहन, औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में किया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। AI और सेमीकंडक्टर पर विशेष फोकस दोनों देशों ने AI, सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप डिजाइन, डिजिटल नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और उन्नत तकनीकों में साझेदारी को नई दिशा देना है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के महत्व पर जोर दिया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास बैठक में ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने के लिए नए अवसर तलाशने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा, आधुनिक तकनीकों का हस्तांतरण होगा और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, डिजिटल कनेक्टिविटी और नवाचार के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। आगे की राह विशेषज्ञों का मानना है कि 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हुए समझौते दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। AI, सेमीकंडक्टर, रक्षा, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को नई गति प्रदान कर सकता है। स्रोत:भारत सरकार, जापान सरकार एवं दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को आयोजित भारत-जापान 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन से संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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नई रिपोर्ट में दावा: इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत

नई दिल्ली, 30 जून। भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा सुधारों की गति और उच्च विकास दर बनी रहती है, तो देश इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। रिपोर्ट में निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और घरेलू मांग को विकास के प्रमुख आधार बताया गया है। रिपोर्ट में क्या कहा गया? रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सेवा क्षेत्र का विस्तार आर्थिक वृद्धि को गति दे रहे हैं। यदि ये रुझान जारी रहते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) तेजी से बढ़ सकता है। विकास के प्रमुख आधार रिपोर्ट में कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जो भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ा सकते हैं: विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र पर जोर विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार से भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हो रहा है। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक चुनौतियां भी बनी हुई हैं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आर्थिक सुधारों की निरंतरता और नीति स्थिरता महत्वपूर्ण रहेगी। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन यदि निवेश, उत्पादकता, निर्यात और रोजगार में लगातार सुधार होता है तो भारत इस दिशा में मजबूत स्थिति बना सकता है। इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक माना गया है। निवेशकों का बढ़ता विश्वास हाल के वर्षों में भारत में घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। वैश्विक कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा। आगे की राह रिपोर्ट के अनुसार भारत के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों मौजूद हैं। यदि आर्थिक सुधार, निवेश, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर लगातार ध्यान दिया जाता है तो देश आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। हालांकि 7 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य एक पूर्वानुमान है, न कि कोई आधिकारिक सरकारी घोषणा। स्रोत:अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषण एवं बाजार अनुसंधान रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी आर्थिक विश्लेषणों और उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन को लेकर उद्योग जगत की तैयारियां तेज

नई दिल्ली, 28 जून। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के क्रियान्वयन की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार, उद्योग संगठनों और निर्यातकों ने समझौते से मिलने वाले संभावित अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्यातकों की बढ़ीं उम्मीदें एफटीए लागू होने के बाद भारतीय वस्त्र, आभूषण, चमड़ा, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कई निर्यातक कंपनियों ने यूके बाजार के लिए अपने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। उद्योग जगत का कहना है कि इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी सुधार होगा। निवेश को मिलेगा बढ़ावा व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी वृद्धि हो सकती है। भारतीय और ब्रिटिश कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रही हैं। उद्योग संगठनों ने शुरू की तैयारियां देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने सदस्य कंपनियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि उन्हें एफटीए के नए नियमों, टैरिफ में बदलाव और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते तैयारी करने वाली कंपनियां नए अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगी। MSME क्षेत्र को भी होगा लाभ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच मिलने से छोटे उद्योगों के निर्यात में वृद्धि हो सकती है। सरकार भी MSME क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार ने जताया भरोसा केंद्र सरकार का कहना है कि भारत-यूके एफटीए देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी को मजबूत करेगा। वाणिज्य मंत्रालय संबंधित विभागों के साथ मिलकर समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। विशेषज्ञों की राय आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग समय पर आवश्यक बदलाव करते हैं तो भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। आगे की राह समझौते के औपचारिक क्रियान्वयन से पहले दोनों देशों के संबंधित विभाग तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि समझौते के लागू होने के बाद भारत और यूके के बीच आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:वाणिज्य मंत्रालय, उद्योग संगठनों एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होगा, व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, 26 जून। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। दोनों देशों की सरकारों ने आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली हैं। इस समझौते के लागू होने के बाद व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों देशों के व्यापारिक संबंध होंगे मजबूत भारत और यूके के बीच यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इसके लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और दोनों देशों के कारोबारियों को नए अवसर प्राप्त होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। भारतीय निर्यातकों को मिलेगा फायदा व्यापार समझौते के लागू होने के बाद भारतीय वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि उत्पाद, रत्न एवं आभूषण और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। शुल्क में कमी आने से भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। निवेश के नए अवसर खुलेंगे आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को भी बढ़ावा मिलेगा। ब्रिटेन की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं भारतीय कंपनियों को भी यूके के बाजार में विस्तार का बेहतर मौका मिलेगा। रोजगार और उद्योगों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव विशेषज्ञों के अनुसार मुक्त व्यापार समझौते से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात आधारित उद्योगों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का मानना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और देश की आर्थिक वृद्धि को भी मजबूती मिलेगी। उद्योग जगत ने किया स्वागत देश के प्रमुख उद्योग संगठनों और निर्यातकों ने इस समझौते का स्वागत किया है। उनका कहना है कि व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरल होने से कारोबार में तेजी आएगी और भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि 15 जुलाई से समझौते के लागू होने के बाद आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे भारत और यूके के आर्थिक संबंध एक नए दौर में प्रवेश करेंगे। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार तथा सार्वजनिक व्यापारिक जानकारी मूल रिपोर्ट:भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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