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UGC NET दिसंबर 2026: आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख आज, NTA ने बढ़ाई समयसीमा

नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA ने UGC NET दिसंबर 2026 परीक्षा के लिए शुल्क भुगतान की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। जिन अभ्यर्थियों ने अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र पहले ही जमा कर दिया है लेकिन परीक्षा शुल्क का भुगतान नहीं किया है, वे अब 1 नवंबर 2026 रात 11:50 बजे तक शुल्क जमा कर सकते हैं। केवल शुल्क भुगतान की तारीख बढ़ी NTA ने साफ किया है कि यह राहत केवल उन उम्मीदवारों के लिए है जिनका आवेदन पत्र सफलतापूर्वक जमा हो चुका है लेकिन शुल्क भुगतान बाकी है। इस नोटिस के जरिए नए आवेदन पत्र भरने की अंतिम तारीख नहीं बढ़ाई गई है। इसलिए जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन पत्र ही जमा नहीं किया था, वे इस बढ़ी हुई समयसीमा का लाभ नहीं ले सकेंगे। आज रात 11:50 बजे तक मिलेगा मौका उम्मीदवार क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के जरिए आज रात 11:50 बजे तक शुल्क भुगतान पूरा कर सकते हैं। NTA ने अभ्यर्थियों को आखिरी समय तक इंतजार न करने और भुगतान के बाद पुष्टि पृष्ठ डाउनलोड कर सुरक्षित रखने की सलाह दी है। पहले बढ़ाई गई थी आवेदन की तारीख UGC NET दिसंबर 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख पहले बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 की गई थी। इसके बाद NTA ने 1 नवंबर को अलग नोटिस जारी कर केवल शुल्क भुगतान की समयसीमा बढ़ाई है। किन अभ्यर्थियों को मिलेगा फायदा? यह विस्तार खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने अंतिम तारीख तक आवेदन पत्र जमा कर दिया था लेकिन किसी तकनीकी समस्या, बैंकिंग समस्या या अन्य कारण से परीक्षा शुल्क जमा नहीं कर पाए थे। अब वे बिना नया आवेदन भरे शुल्क जमा कर अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। UGC NET परीक्षा किसके लिए होती है? UGC NET परीक्षा का आयोजन भारतीय नागरिकों की जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्रता और कुछ श्रेणियों में पीएचडी प्रवेश से जुड़ी योग्यता तय करने के लिए किया जाता है। परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से करती है। भुगतान के बाद क्या करें? अभ्यर्थियों को शुल्क जमा करने के बाद यह जरूर देखना चाहिए कि भुगतान की स्थिति सफल दिखाई दे रही है या नहीं। इसके बाद आवेदन का पुष्टि पृष्ठ डाउनलोड कर उसका प्रिंट या डिजिटल प्रति सुरक्षित रखनी चाहिए। अगर भुगतान खाते से कट गया हो लेकिन स्थिति सफल न दिखे तो उम्मीदवार को आधिकारिक सहायता माध्यम से संपर्क करना चाहिए। केवल आधिकारिक वेबसाइट पर करें भुगतान NTA ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन और भुगतान से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए केवल आधिकारिक UGC NET और NTA वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें। फर्जी वेबसाइट या किसी अनधिकृत भुगतान लिंक से बचना जरूरी है। समयसीमा खत्म होने से पहले पूरा करें भुगतान जो उम्मीदवार UGC NET दिसंबर 2026 के लिए आवेदन पत्र जमा कर चुके हैं लेकिन शुल्क अभी बाकी है, उनके लिए आज अंतिम मौका है। NTA के नोटिस के अनुसार 1 नवंबर रात 11:50 बजे के बाद यह बढ़ी हुई भुगतान सुविधा समाप्त हो जाएगी। स्रोत – राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, UGC NET आधिकारिक सूचना जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में CNG ₹1 प्रति किलो महंगी, नई कीमत ₹90; सात महीनों में छठी बढ़ोतरी

मुंबई: मुंबई और महानगरीय क्षेत्र में वाहन चालकों को आज, 1 नवंबर 2026, से सीएनजी के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। महानगर गैस लिमिटेड ने सीएनजी की खुदरा कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद नई कीमत ₹90 प्रति किलो हो गई है। यह अप्रैल के बाद सात महीनों में छठी बढ़ोतरी है। ₹89 से बढ़कर ₹90 प्रति किलो हुई कीमत नई दर आधी रात से लागू हो गई है। इससे पहले मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी ₹89 प्रति किलो बिक रही थी। अब वाहन चालकों को प्रति किलो एक रुपया ज्यादा देना होगा। अप्रैल से लगातार बढ़ रही कीमत टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल के बाद सीएनजी की कीमतों में यह छठी बढ़ोतरी है। लगातार संशोधनों के कारण ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और निजी सीएनजी वाहन मालिकों की ईंधन लागत बढ़ गई है। महानगर गैस ने बताई बढ़ोतरी की वजह महानगर गैस लिमिटेड ने कहा है कि गैस खरीद की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा। विशेष रूप से आयातित पुनर्गैसीकृत तरलीकृत प्राकृतिक गैस की कीमत अंतरराष्ट्रीय गैस सूचकांकों से जुड़ी होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस महंगी होने से कंपनी की लागत बढ़ी है और इसका असर खुदरा सीएनजी कीमत पर पड़ा है। ऑटो और टैक्सी चालकों पर बढ़ा बोझ मुंबई में बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा और टैक्सियां सीएनजी पर चलती हैं। कीमत बढ़ने से इन वाहन चालकों की रोजाना परिचालन लागत भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी संगठनों ने लगातार बढ़ती सीएनजी कीमतों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो किराए में दोबारा संशोधन की मांग उठ सकती है। मुंबई में लाखों सीएनजी वाहन मुंबई महानगरीय क्षेत्र में करीब 4.7 लाख ऑटो-रिक्शा, 1.6 लाख टैक्सियां और 5 लाख से अधिक निजी सीएनजी वाहन हैं। इसके अलावा बसों और दूसरे व्यावसायिक वाहनों में भी सीएनजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। हाल ही में बढ़ा था ऑटो किराया सितंबर में न्यूनतम ऑटो-रिक्शा किराया ₹26 से बढ़ाकर ₹27 किया गया था। इसके बाद भी सीएनजी की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे चालक संगठनों का कहना है कि लागत और किराए के बीच अंतर फिर बढ़ रहा है। किराए पर पड़ सकता है असर मुंबई रिक्शामेन यूनियन के मुताबिक ताजा बढ़ोतरी से प्रति किलोमीटर परिचालन खर्च और बढ़ गया है। यूनियन ने संकेत दिया है कि अगर ईंधन लागत में बढ़ोतरी जारी रहती है और कुल परिचालन खर्च तय सीमा से ज्यादा बढ़ता है तो भविष्य में किराया संशोधन की मांग की जा सकती है। घरेलू पाइप गैस की कीमत नहीं बढ़ी राहत की बात यह है कि घरेलू पाइप गैस की कीमत में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ताजा संशोधन मुख्य रूप से सीएनजी दरों पर लागू हुआ है। आम लोगों पर भी अप्रत्यक्ष असर सीएनजी महंगी होने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ता है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव आम यात्रियों पर भी पड़ सकता है। अगर भविष्य में ऑटो और टैक्सी किराए बढ़ते हैं तो रोजाना सफर करने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। आगे अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों पर नजर सीएनजी की आगे की कीमतें अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार, आयात लागत और घरेलू आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेंगी। महानगर गैस लिमिटेड समय-समय पर इन लागतों की समीक्षा के आधार पर खुदरा कीमतों में बदलाव करती है। स्रोत – महानगर गैस लिमिटेड, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹10 महंगा, दिल्ली में नई कीमत ₹2,820; विमान ईंधन के दाम भी बढ़े

नई दिल्ली: महीने की शुरुआत के साथ ही होटल, रेस्तरां और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को महंगाई का नया झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने आज, 1 नवंबर 2026, से 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹10 की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर ₹2,810 की जगह ₹2,820 में मिलेगा। लगातार दूसरे महीने महंगा हुआ व्यावसायिक सिलेंडर यह लगातार दूसरा महीना है जब व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ाई गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर को 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में ₹62.50 की बढ़ोतरी हुई थी। सितंबर में भी इसकी कीमत ₹9.50 बढ़ाई गई थी। हालांकि जुलाई और अगस्त में कीमतों में क्रमशः ₹183.50 और ₹192 की कमी की गई थी। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत नहीं बदली राहत की बात यह है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत फिलहाल ₹942 बनी हुई है। होटल और रेस्तरां पर बढ़ेगा खर्च व्यावसायिक सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, ढाबे, रेस्तरां, कैटरिंग कंपनियां और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान करते हैं। सिलेंडर की कीमत बढ़ने से इनके संचालन खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर लागत लगातार बढ़ती है तो इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विमान ईंधन भी ₹1.37 प्रति लीटर महंगा तेल कंपनियों ने विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमत भी बढ़ा दी है। दिल्ली में एटीएफ की कीमत ₹137.12 प्रति लीटर से बढ़कर करीब ₹138.50 प्रति लीटर हो गई है। यानी विमान ईंधन की कीमत में लगभग ₹1.37 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। लगातार चौथे महीने बढ़े एटीएफ के दाम विमान ईंधन की कीमतों में यह लगातार चौथे महीने की बढ़ोतरी है। 1 अक्टूबर को एटीएफ की कीमत में करीब ₹16 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले सितंबर में ₹6.28 और अगस्त में करीब ₹5 प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। हवाई कंपनियों की लागत पर पड़ेगा असर विमान ईंधन किसी भी एयरलाइन के संचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है। रिपोर्टों के मुताबिक एयरलाइन कंपनियों के कुल संचालन खर्च में एटीएफ की हिस्सेदारी 40% तक हो सकती है। ऐसे में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें एयरलाइन कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। आगे चलकर इसका असर हवाई किराए पर भी पड़ सकता है, हालांकि किराया कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं 1 नवंबर को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोनों ईंधनों की मौजूदा दरें बरकरार हैं। हर महीने क्यों बदलती हैं कीमतें? व्यावसायिक एलपीजी और विमान ईंधन की कीमतों की समीक्षा आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमत, कच्चे तेल की स्थिति और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कारकों के आधार पर घरेलू कीमतों में बदलाव किया जाता है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों के कारण कीमतें अलग हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर इस साल वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया से जुड़ी आपूर्ति चिंताओं का असर एलपीजी तथा अन्य ईंधनों की कीमतों पर देखा गया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने या माल ढुलाई महंगी होने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। आम आदमी पर कितना असर? घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ने से घरों के मासिक बजट पर फिलहाल सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत बढ़ने से बाहर खाने-पीने की लागत पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। वहीं विमान ईंधन के लगातार महंगा होने से आने वाले समय में विमान कंपनियों की लागत और हवाई किराए पर दबाव बढ़ सकता है। स्रोत – सरकारी तेल विपणन कंपनियां, पीटीआई, बिजनेस स्टैंडर्ड, इकोनॉमिक टाइम्स, मनीकंट्रोल जय राष्ट्र न्यूज़

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IND vs NZ 5th T20I: हैमिल्टन में भारत-न्यूजीलैंड की भिड़ंत, टीम इंडिया 3-1 से आगे

हैमिल्टन: भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला आज, 1 नवंबर 2026, हैमिल्टन के सेडन पार्क में खेला जा रहा है। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। भारत पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है और पांचवें मैच से पहले 3-1 की बढ़त बनाए हुए है। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर चुनी गेंदबाजी हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के कप्तान ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। पांचवां टी20 सेडन पार्क में भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 बजे शुरू होना निर्धारित है। भारत पहले ही जीत चुका है सीरीज भारत ने शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली थी। पहले टी20 में भारत ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया, दूसरे मुकाबले में भी चार विकेट से जीत दर्ज की और तीसरे टी20 में छह विकेट से जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली। चौथे टी20 में न्यूजीलैंड की जोरदार वापसी 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेले गए चौथे टी20 में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी करते हुए भारत को 87 रन से हराया। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 259 रन पर 7 विकेट बनाए, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका सर्वोच्च स्कोर रहा। जवाब में भारतीय टीम 20 ओवर में 172 रन ही बना सकी। ग्लेन फिलिप्स ने जड़ा तूफानी शतक चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स ने महज 49 गेंदों पर 107 रन की आक्रामक पारी खेली। उनकी पारी में छह चौके और 10 छक्के शामिल थे। माइकल ब्रेसवेल ने भी सिर्फ 25 गेंदों में 65 रन बनाए और न्यूजीलैंड को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। जैकब डफी ने तोड़ी भारतीय बल्लेबाजी 259 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में आ गई। तेज गेंदबाज जैकब डफी ने चार विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। भारत ने पहले ही ओवर में संजू सैमसन और ईशान किशन के विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद टीम नियमित अंतराल पर विकेट खोती रही। पांचवें मैच में भारत की नजर जीत के साथ अंत पर सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी भारतीय टीम अब अंतिम मुकाबला जीतकर दौरे के टी20 चरण को 4-1 के अंतर से खत्म करना चाहेगी। वहीं न्यूजीलैंड के पास लगातार दूसरी जीत हासिल करके अंतिम स्कोर 3-2 करने का मौका है। सेडन पार्क में बल्लेबाजों पर नजर हैमिल्टन का सेडन पार्क आम तौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है। छोटी सीमाएं और तेज आउटफील्ड के कारण यहां बड़े स्कोर देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों के गेंदबाजों के लिए सही लंबाई और गति में बदलाव अहम साबित हो सकता है। अभिषेक शर्मा भारत के प्रमुख बल्लेबाज भारतीय बल्लेबाजी में अभिषेक शर्मा इस सीरीज में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं। तीसरे टी20 में उन्होंने 113 रन की तूफानी पारी खेली थी और भारत ने 199 रन का लक्ष्य सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया था। अभिषेक ने उस पारी में 13 छक्के लगाए थे, जो किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा एक टी20 अंतरराष्ट्रीय पारी में सर्वाधिक हैं। भारतीय गेंदबाजी के लिए भी बड़ी परीक्षा चौथे टी20 में भारतीय गेंदबाजों ने 259 रन लुटाए थे। इसलिए अंतिम मुकाबले में गेंदबाजी इकाई पर खास नजर रहेगी। भारत को नई गेंद से विकेट निकालने के साथ बीच के ओवरों में रन गति नियंत्रित करने की जरूरत होगी। न्यूजीलैंड सम्मानजनक अंत चाहेगा पहले तीन मुकाबले गंवाने के बाद न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 में जीत दर्ज कर लय हासिल की है। अब मेजबान टीम अंतिम मुकाबला जीतकर सीरीज को 3-2 के अंतर पर खत्म करने की कोशिश करेगी। इसके बाद शुरू होगी वनडे सीरीज टी20 सीरीज के बाद दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी। पहला वनडे 4 नवंबर 2026 को ऑकलैंड के ईडन पार्क में होगा। स्रोत – बीसीसीआई, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद, न्यूजीलैंड क्रिकेट जय राष्ट्र न्यूज़

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नेपाल के डोलपा में 6 भारतीय पर्यटक भारी बर्फबारी में फंसे, सेना ने शुरू किया बचाव अभियान

काठमांडू/डोलपा: नेपाल के दुर्गम डोलपा जिले में भारी बर्फबारी के बीच छह भारतीय पर्यटक फंस गए हैं। ये सभी शै-फोक्सुंडो झील क्षेत्र की ओर यात्रा कर रहे थे, तभी नुमा ला और बागा ला दर्रों के आसपास उनसे संपर्क टूट गया। ताजा जानकारी के मुताबिक प्रशासन ने उस इलाके की पहचान कर ली है जहां पर्यटक फंसे हैं और नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर उन्हें निकालने के लिए भेजा जा रहा है। दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल फंसे हुए भारतीय पर्यटकों में दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। प्रशासन ने उनकी पहचान मौमिता हलदर, पियाली कोले, जाजला त्रिवेदी कुमार, आदित्य सिंघा, दिपलीना बिस्वास और राजेश डे के रूप में की है। शै-फोक्सुंडो झील की ओर जा रहा था समूह यह समूह डोलपा के धो क्षेत्र से शै-फोक्सुंडो झील की ओर जा रहा था। शै-फोक्सुंडो नेपाल की सबसे गहरी झील मानी जाती है और यह लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारी बर्फबारी के बाद टूटा संपर्क क्षेत्र में लगातार बर्फबारी के कारण पहाड़ी दर्रों पर मोटी बर्फ जम गई। इसी दौरान पर्यटकों से संपर्क टूट गया। इलाके में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण शुरुआत में उनकी सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया था। प्रशासन बोला—अब इन्हें लापता नहीं कह सकते डोलपा की मुख्य जिला अधिकारी जुनू ढकाल ने स्पष्ट किया है कि पर्यटकों के फंसे होने वाले क्षेत्र की पहचान कर ली गई है, इसलिए अब उन्हें पूरी तरह “लापता” कहना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सेना का हेलीकॉप्टर मौके पर भेजा जा रहा है और जल्द से जल्द उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ा था समूह स्थानीय अधिकारियों और गाइड ने पर्यटकों को भारी बर्फबारी के कारण आगे न जाने की सलाह दी थी। रिपोर्ट के अनुसार इसके बावजूद समूह ने यात्रा जारी रखी और लौटते समय बर्फ में फंस गया। सेना की टीम भी तैनात नेपाली सेना की एक टीम को जमीनी स्तर पर भी बचाव अभियान में लगाया गया है। हालांकि भारी बर्फ, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी स्थानीय प्रशासन के मुताबिक हेलीकॉप्टर के जरिए सभी छह पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की योजना है। बचाव अभियान का खर्च आपदा प्रबंधन कोष से उठाने की व्यवस्था भी की जा रही है। ऊपरी डोलपा में 244 पर्यटक डोलपा प्रशासन के अनुसार इस समय ऊपरी डोलपा क्षेत्र में कुल 244 पर्यटक मौजूद हैं। इनमें 149 नेपाली नागरिक, 44 सार्क देशों के नागरिक और 51 अन्य विदेशी पर्यटक शामिल हैं। अन्य पर्यटकों के लिए भी चेतावनी भारी बर्फबारी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी पर्यटकों को जोखिम वाले पहाड़ी इलाकों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी है। प्रशासन ने कहा है कि मौसम खराब रहने पर हालात और मुश्किल हो सकते हैं। बचाव अभियान पर नजर फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि छह भारतीय पर्यटकों का संभावित स्थान पता चल चुका है। नेपाली सेना और स्थानीय प्रशासन अब उन्हें सुरक्षित निकालने के अभियान में जुटे हैं। स्रोत – काठमांडू पोस्ट, पीटीआई, डोलपा जिला प्रशासन, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में आज से सख्त प्रदूषण नियम लागू, पुराने वाहनों और प्रदूषण पर कड़ी निगरानी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आज, 1 नवंबर 2026, से सख्त शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू हो गए हैं। दिल्ली सरकार की 10 सूत्रीय योजना के तहत पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई, बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन न देना, कार्यालयों में घर से काम की व्यवस्था और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं। बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा ईंधन दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली लगाई गई है। जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों पर भी यही नियम लागू होगा। पुराने बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक आज से दिल्ली में बाहर से आने वाले उन पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है जो बीएस-6 उत्सर्जन मानक पूरे नहीं करते। सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। 50% कर्मचारियों के लिए घर से काम दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में यातायात और वाहन प्रदूषण कम करने के लिए 50% कर्मचारियों को घर से काम कराने या सप्ताह में दो दिन घर से काम की व्यवस्था लागू करने को कहा है। सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि व्यस्त समय में यातायात का दबाव कम हो सके। निर्माण और तोड़फोड़ पर भी पाबंदी धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर आज से सख्ती लागू हो गई है। सरकार की योजना के मुताबिक 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक रहेगी। वहीं 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच व्यापक निर्माण प्रतिबंध लागू किया जाएगा। निर्माण स्थलों पर 100% सीसीटीवी जरूरी निर्माण स्थलों पर अब पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी जरूरी होगी। भवन योजना की मंजूरी के लिए मलबा प्रबंधन से जुड़े सरकारी मंच पर पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और मलबे के गलत निपटान को रोकना है। पार्किंग शुल्क हुआ दोगुना निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना कर दिया गया है। हालांकि दिल्ली मेट्रो की पार्किंग को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है। सरकार लोगों को ज्यादा से ज्यादा मेट्रो और बसों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी निगरानी दिल्ली सरकार प्रदूषण नियमों के पालन की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल भी करेगी। वाहन नियम तोड़ने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों और अन्य उल्लंघनों की पहचान के लिए स्वचालित निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। प्रदूषण वाले 37 क्षेत्रों पर खास नजर दिल्ली के 37 प्रदूषण और यातायात वाले प्रमुख क्षेत्रों का हर सप्ताह निरीक्षण किया जाएगा। सांसद, विधायक, पार्षद और संबंधित अधिकारी इन क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करेंगे और धूल, यातायात तथा स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। खुले में कचरा जलाने पर सख्ती सरकार ने खुले में कचरा और जैविक सामग्री जलाने के खिलाफ शून्य दहन अभियान चलाने की भी घोषणा की है। सड़कों की मशीन से सफाई, पानी का छिड़काव, कचरे के ढेर हटाना और धूल नियंत्रण के लिए अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। हजारों प्रदूषणकारी इकाइयों पर कार्रवाई दिल्ली सरकार के मुताबिक 11 हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों के सर्वे के बाद 2,283 प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद या सील किया जा चुका है। नियमों का उल्लंघन करने वाली अन्य औद्योगिक इकाइयों पर भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 28 फरवरी तक लागू रहेगा शीतकालीन अभियान दिल्ली का यह शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण ढांचा 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। सरकार का कहना है कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की समस्या को केवल आपातकालीन उपायों से नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और पहले से तय नियमों से नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। स्रोत – दिल्ली सरकार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली आज, रामलीला मैदान में विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली: INDIA गठबंधन आज, 1 नवंबर 2026, दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी बहुचर्चित ‘चलो दिल्ली’ रैली आयोजित कर रहा है। विपक्ष इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रामलीला मैदान में जुटे हजारों समर्थक सुबह से ही रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचने लगे। कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के दलों ने देशभर से समर्थकों को दिल्ली बुलाया है। कांग्रेस ने रैली के लिए बड़े जनसमर्थन का दावा किया है, जबकि दिल्ली पुलिस ने वास्तविक भीड़ के लिए अलग अनुमान के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था की है। राहुल गांधी समेत बड़े विपक्षी नेता शामिल रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। राहुल गांधी ने इससे पहले छात्रों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों से रैली में शामिल होने की अपील की थी। मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग और SIR विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और चुनाव आयोग ने शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। ये विपक्ष के आरोप हैं और चुनाव आयोग इन्हें स्वीकार नहीं करता है। ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग रैली का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी है। इससे एक दिन पहले INDIA गठबंधन ने मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें विपक्षी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। यह वास्तविक संवैधानिक महाभियोग नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोध कार्यक्रम था। मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च कार्यक्रम के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के पास से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च की भी घोषणा की गई थी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि रामलीला मैदान में रैली की अनुमति दी गई है, लेकिन प्रस्तावित पैदल मार्च के लिए अलग से अनुमति मांगी या दी नहीं गई। हालांकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मार्ग पर व्यापक व्यवस्था की है। हजारों पुलिसकर्मी तैनात रैली और मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों के हजारों जवान तैनात किए गए हैं। रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है। रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया भीड़ नियंत्रण के लिए रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए अलग नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है। दिल्ली की कई सड़कों पर यातायात प्रतिबंध रैली के कारण आईटीओ, दिल्ली गेट, राजघाट, अजमेरी गेट और तुर्कमान गेट समेत कई प्रमुख स्थानों पर यातायात में बदलाव किया गया है। वाहन चालकों को बहादुर शाह जफर मार्ग, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, मिंटो रोड और देशबंधु गुप्ता रोड से बचने की सलाह दी गई है। भाजपा ने भी खोला मोर्चा INDIA गठबंधन की रैली के जवाब में भाजपा ने भी दिल्ली में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। भाजपा ने विपक्ष की रैली को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर हमला बताया है और 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है। राहुल गांधी ने व्यापारियों के लिए भी की अपील दिल्ली के कुछ व्यापारिक संगठनों ने रैली से त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई थी। राहुल गांधी ने रैली में पहुंचे समर्थकों से अपील की कि वे केवल प्रदर्शन में हिस्सा न लें, बल्कि स्थानीय बाजारों में खरीदारी भी करें ताकि व्यापारियों को नुकसान न हो। 2027 से पहले विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 2027 में होने वाले चुनावों से पहले यह रैली विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। INDIA गठबंधन की कोशिश चुनाव आयोग, मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक अभियान बनाने की है। दूसरी ओर भाजपा विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगा रही है। रैली की भीड़ और राजनीतिक संदेश पर नजर अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि रामलीला मैदान में वास्तविक भीड़ कितनी जुटती है और विपक्षी नेता मंच से आगे की रणनीति को लेकर क्या घोषणा करते हैं। रैली के बाद INDIA गठबंधन इस अभियान को राज्यों तक ले जाने की बात भी कर चुका है। स्रोत – दिल्ली पुलिस, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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0-6 से 8-6 तक का ऐतिहासिक सफर! मनीषा भानवाला ने रचा विश्व कुश्ती में इतिहास

अस्ताना/नई दिल्ली: भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में ऐसा मुकाबला जीता, जिसे भारतीय खेल इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। फाइनल में एक समय 0-6 से पिछड़ने के बाद मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए अमेरिका की अबीगैल नेटे को 8-6 से हराया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। शुरुआत में 0-6 से पिछड़ीं मनीषा फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के लिए बेहद मुश्किल रही। अमेरिकी पहलवान अबीगैल नेटे ने शुरुआती दौर में चार अंक हासिल किए। भारतीय खेमे की चुनौती असफल होने पर नेटे को एक अतिरिक्त अंक मिला और मनीषा पर लगी चेतावनी के बाद स्कोर 6-0 हो गया। पहले दौर से पहले खोला खाता मनीषा ने हिम्मत नहीं छोड़ी और पहले दौर के खत्म होने से पहले प्रतिद्वंद्वी को बाहर धकेलकर अपना पहला अंक हासिल किया। इसके बाद स्कोर 6-1 हो गया और भारतीय पहलवान ने मुकाबले में वापसी की नींव रख दी। दूसरे दौर में बदला पूरा मुकाबला दूसरे दौर में मनीषा ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने नेटे को नीचे गिराकर अंक हासिल किए। अमेरिकी टीम ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन चुनौती असफल रही और मनीषा को एक अतिरिक्त अंक भी मिला। इसके बाद उन्होंने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर को 6-6 तक पहुंचा दिया। आखिरी मिनट में निर्णायक दांव मुकाबले के अंतिम चरण में नेटे थकने लगीं। मनीषा के कोच ने पहले ही उनकी मुकाबले की शैली का अध्ययन किया था और अनुमान लगाया था कि अमेरिकी पहलवान पांचवें मिनट के बाद थकती हैं। मनीषा ने सही समय का इंतजार किया और आखिरी मिनट में निर्णायक दांव लगाकर दो अंक हासिल किए। इसके साथ ही स्कोर 8-6 हो गया। आखिरी सेकंड तक बचाई बढ़त 8-6 की बढ़त बनाने के बाद मनीषा ने आखिरी सेकंड तक मजबूत रक्षा की और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही मनीषा विश्व चैंपियन बन चुकी थीं। पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में नया अध्याय लिखा। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। भारत को इससे पहले पुरुष वर्ग में सुशील कुमार ने 2010 में विश्व चैंपियन बनाया था। मनीषा की जीत ने भारत का 16 साल का विश्व खिताब का इंतजार भी समाप्त कर दिया। 16 साल की उम्र में शुरू की थी कुश्ती मनीषा का सफर पारंपरिक नहीं रहा। उन्होंने करीब 16 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की, जो कई शीर्ष पहलवानों की तुलना में काफी देर मानी जाती है। जूनियर स्तर पर भी उन्हें कोई बड़ा पदक नहीं मिला, लेकिन लगातार अभ्यास और मेहनत के बल पर उन्होंने सीनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई। चार अलग-अलग भार वर्गों में खेल चुकी हैं सीनियर स्तर पर मनीषा ने चार अलग-अलग भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा की है। वह 62 और 65 किलोग्राम वर्ग में भी खेल चुकी हैं और अब 59 किलोग्राम में विश्व विजेता बनीं। आने वाले टूर्नामेंटों में उनका लक्ष्य 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने का है। पिता का सपना किया पूरा विश्व खिताब जीतने के बाद मनीषा ने अपने दिवंगत पिता सुरेश भानवाला की तस्वीर वाली टी-शर्ट उठाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके पिता ने ही करीब 13 साल पहले उन्हें कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया था और सपना देखा था कि उनकी बेटी एक दिन भारत के लिए विश्व स्वर्ण जीतेगी। सुरेश भानवाला का 2022 में निधन हो गया था। चार साल बाद मनीषा ने उनका सपना पूरा किया। मानसिक मजबूती बनी जीत की सबसे बड़ी ताकत मनीषा के कोचों के अनुसार उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका मानसिक दृढ़ता और आखिरी क्षण तक मुकाबला करने की क्षमता है। पहले उनके आक्रामक खेल के कारण सहनशक्ति प्रभावित होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस कमजोरी पर खास काम किया गया। विश्व चैंपियनशिप का फाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण बना, जहां छह अंक से पीछे होने के बावजूद उन्होंने मुकाबला नहीं छोड़ा। अब 2028 ओलंपिक पर नजर विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा की नजर अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर है। इसके लिए वह 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने की तैयारी करेंगी। मनीषा का कहना है कि वह चाहती हैं कि आने वाली भारतीय महिला पहलवान उनके रिकॉर्ड को भी तोड़ें और भारत के लिए ज्यादा विश्व और ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतें। भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक क्षण 0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीत हासिल करना केवल एक फाइनल मुकाबले की वापसी नहीं थी। इस जीत ने भारतीय महिला कुश्ती को उसका पहला विश्व चैंपियन दिया और आने वाली पीढ़ी के लिए नया मानक स्थापित किया। स्रोत – यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग, रॉयटर्स, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ का भव्य शुभारंभ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया धर्मध्वजारोहण

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 का धार्मिक और सांस्कृतिक शुभारंभ भव्य समारोह के साथ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर को ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और धर्मध्वजारोहण में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच आयोजित इस समारोह ने आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत का संकेत दिया। रामतीर्थ पर फहराया गया धर्मध्वज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक के रामतीर्थ क्षेत्र में धर्मध्वज फहराया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह कार्यक्रम दोपहर करीब 12 बजकर 2 मिनट पर हुआ और इसमें संत-महात्माओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के साथ शुभारंभ अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दिन बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के शुभ अवसर पर सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़े धर्मध्वजारोहण और अन्य पवित्र अनुष्ठानों में शामिल होने का उन्हें अवसर मिला। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ परंपरा ज्योतिषीय स्थिति से गहराई से जुड़ी मानी जाती है। गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रपति ने गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना की और रामकुंड क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। आकाशवाणी के मुताबिक नासिक में मुख्य ध्वजारोहण राष्ट्रपति ने किया, जबकि त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वज फहराया। राष्ट्रपति बोलीं—कुंभ भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता तथा परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में सदियों से आयोजित होते आ रहे कुंभ भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं की शक्ति को दर्शाते हैं। 2027 का सिंहस्थ बनेगा विरासत और आधुनिकता के बीच सेतु राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक समय के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को देश की सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर राष्ट्रपति ने महाकुंभ की तैयारियों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता की भागीदारी से नासिक महाकुंभ स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक उदाहरण स्थापित कर सकता है। सूखे और किसानों की स्थिति का भी किया जिक्र अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में सूखे और चरम मौसम की घटनाओं से प्रभावित किसानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों तथा प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए प्रयास कर रही हैं। नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों हैं सिंहस्थ के प्रमुख केंद्र सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन नासिक में गोदावरी नदी के तट और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में किया जाता है। रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ दोनों धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आने वाले महीनों में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सड़क, यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और आवास समेत बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। जुलाई 2028 तक चलेगा महाकुंभ से जुड़ा आयोजन क्रम इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन क्रम 2027 से आगे जुलाई 2028 तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और पर्व स्नानों के साथ जारी रहेगा। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी धर्मध्वजारोहण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, साधु और श्रद्धालु पहुंचे। वैदिक मंत्रों, शंखनाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच नासिक का रामतीर्थ क्षेत्र पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में रंगा नजर आया। सिंहस्थ 2027 की तैयारियों को मिली औपचारिक गति धर्मध्वजारोहण के साथ अब सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की प्रशासनिक और धार्मिक तैयारियों को औपचारिक गति मिल गई है। आने वाले समय में लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है। स्रोत – राष्ट्रपति सचिवालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, आकाशवाणी समाचार, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसा: पायलट समेत सभी 6 की मौत, शव बरामद; जांच का दायरा बढ़ा

चमोली/देहरादून: उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में 30 अक्टूबर को हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई थी। अब 1 नवंबर 2026 की सुबह जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि सभी छह शव दुर्घटनास्थल से बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स भेजने की व्यवस्था की जा रही है। बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा था हेलीकॉप्टर हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांस भारत एविएशन कर रही थी। यह बदरीनाथ से पांच यात्रियों को लेकर देहरादून लौट रहा था, तभी जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक से आए पांच यात्रियों की जान चली गई। दुर्गम इलाके के कारण शव निकालने में लगा समय दुर्घटनास्थल बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में था और निकटतम सड़क से लगभग 20 से 22 किलोमीटर दूर था। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने कठिन परिस्थितियों में शवों को बाहर निकाला। ज्योतिर्मठ के अस्पताल लाए गए शव सभी शवों को दुर्घटनास्थल से निकालकर चाईं गांव के पास सड़क तक लाया गया और वहां से ज्योतिर्मठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच में खराब मौसम के अलावा दूसरे कारण भी शुरुआती रिपोर्ट में हादसे के समय खराब मौसम का जिक्र किया गया था, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर से पहले और बाद में भी उसी क्षेत्र से कुछ अन्य हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी और वे सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गए। इसलिए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसा केवल मौसम के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी या परिचालन कारण भी था। हादसे से आठ मिनट बाद भी उड़ा था एक हेलीकॉप्टर जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने के सिर्फ आठ मिनट बाद एक अन्य हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से रवाना हुआ था और वह सुरक्षित पहुंच गया। एक अन्य उड़ान करीब एक घंटे बाद हुई और वह भी सुरक्षित रही। इसी वजह से स्थानीय मौसम की स्थिति और दुर्घटनाग्रस्त विमान की तकनीकी अवस्था की विस्तार से जांच की जा रही है। जांच टीम पहुंची दुर्घटनास्थल विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम दुर्घटनास्थल पहुंच चुकी है। टीम हेलीकॉप्टर के बचे हुए हिस्सों को इकट्ठा कर दुर्घटना से पहले की घटनाओं का क्रम समझने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक मलबा काफी हद तक नष्ट हो चुका है और केवल पीछे का हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित मिला है। अभी नहीं मिला ब्लैक बॉक्स जांच अधिकारियों ने बताया कि अभी तक हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं हुआ है। इसके मिलने पर उड़ान से जुड़े तकनीकी आंकड़ों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी की जांच की जा सकेगी। मौसम विभाग ने जारी किया था ऑरेंज अलर्ट 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसमें कुछ स्थानों पर आंधी, बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की चेतावनी दी गई थी। चार्टर उड़ानों में अब सह-पायलट अनिवार्य हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने मौजूदा यात्रा सत्र के शेष समय के लिए चार्टर हेलीकॉप्टर उड़ानों में सह-पायलट को अनिवार्य करने का फैसला किया है। अब एक पायलट के साथ चार्टर हेलीकॉप्टर संचालन की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया है। हादसे की असली वजह जांच के बाद होगी साफ फिलहाल खराब मौसम को शुरुआती संभावित कारणों में माना गया है, लेकिन जांच एजेंसियों ने किसी एक वजह को अंतिम नहीं माना है। अन्य हेलीकॉप्टरों के सुरक्षित उड़ान भरने, स्थानीय मौसम, विमान की तकनीकी स्थिति और पायलट के उड़ान संबंधी फैसलों समेत सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। स्रोत – जिला प्रशासन चमोली, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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