प्रमुख खबरें
G7 शिखर सम्मेलन 2026 में वैश्विक सुरक्षा, ईरान और यूक्रेन संकट पर चर्चा

G7 शिखर सम्मेलन आज से शुरू, ईरान, यूक्रेन और वैश्विक सुरक्षा एजेंडे में शामिल

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा अंतरराष्ट्रीय अपडेट दिनांक: 15 जून 2026 मुख्य समाचार नीस (फ्रांस): दुनिया की सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 का बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन आज फ्रांस में शुरू हो गया है। इस सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन संघर्ष, ईरान से जुड़ा तनाव, ऊर्जा आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दुनिया भर की नजर इस सम्मेलन पर टिकी हुई है क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय संकटों और आर्थिक चुनौतियों के बीच वैश्विक नेतृत्व की दिशा तय करने में G7 देशों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यूक्रेन संकट रहेगा प्रमुख मुद्दा नीस: यूक्रेन में जारी संघर्ष इस सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। G7 देश क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय सहायता और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीतियों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन से जुड़े फैसले आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के संबंधों पर नजर फ्रांस: ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम और पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। मध्य पूर्व की स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नेताओं के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस विषय पर लिए गए निर्णयों का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है। वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग नीस: सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर भी चर्चा की जाएगी। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। आर्थिक चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा फ्रांस: वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी गति, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा भी एजेंडे में प्रमुख स्थान रखती हैं। G7 देश आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और निवेश को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक स्रोतों और हरित ऊर्जा निवेश पर भी फोकस रहने की संभावना है। AI और उभरती तकनीकों पर विशेष चर्चा नीस: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। G7 नेता AI नियमन, डिजिटल नवाचार और तकनीकी सहयोग के नए ढांचे पर विचार कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI से जुड़े निर्णय भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेंगे। भारत की भूमिका पर भी नजर नीस: हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन एक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक साझेदार के रूप में उसकी भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं में शामिल है। भारत ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल नवाचार, वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण रख सकता है। निष्कर्ष नीस: G7 शिखर सम्मेलन 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया कई आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। यूक्रेन संघर्ष, ईरान संकट, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर होने वाली चर्चाएं आने वाले समय की अंतरराष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। दुनिया भर की नजर अब इस सम्मेलन के परिणामों और संभावित घोषणाओं पर टिकी हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, वैश्विक राजनीति और विश्व अर्थव्यवस्था की हर बड़ी खबर के लिए।

आगे और पढ़ें
भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव

भारतीय नाविकों की मौत पर भारत-अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव, G7 बैठक में भी उठ सकता है मुद्दा

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा अंतरराष्ट्रीय अपडेट दिनांक: 14 जून 2026 मुख्य समाचार नई दिल्ली: समुद्री क्षेत्र में हुई एक गंभीर घटना में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ गया है। भारत सरकार ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी प्रशासन से जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। घटना के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क बढ़ गए हैं और इस मुद्दे पर कई स्तरों पर चर्चा जारी है। राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आगामी G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यह विषय प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा है कि मृतक भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति सरकार पूरी संवेदना रखती है। भारत ने अमेरिकी पक्ष से विस्तृत जानकारी साझा करने और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का आग्रह किया है। अधिकारियों के अनुसार भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए। G7 सम्मेलन में उठ सकता है मुद्दा नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की G7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी के दौरान यह मामला चर्चा का विषय बन सकता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री कानूनों के सम्मान को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रख सकता है। हालांकि दोनों देशों की ओर से आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर वैश्विक स्तर पर भी रुचि बनी हुई है। भारत-अमेरिका संबंधों पर नजर वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में यह घटना दोनों देशों के संबंधों के लिए एक संवेदनशील परीक्षा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्ष संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे ताकि दीर्घकालिक साझेदारी प्रभावित न हो। समुद्री सुरक्षा पर बढ़ी चर्चा नई दिल्ली: घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर कार्यरत नागरिक नाविकों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों ने समुद्री क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत लंबे समय से वैश्विक समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित व्यापार मार्गों का समर्थक रहा है और इस मुद्दे को भी उसी दृष्टिकोण से देख रहा है। वैश्विक समुदाय की नजर लंदन: G7 शिखर सम्मेलन में विश्व के प्रमुख नेता वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। ऐसे में भारतीय नाविकों की मौत का मामला भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से समुद्री कानूनों और नागरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू हो सकती है। निष्कर्ष नई दिल्ली: भारतीय नाविकों की मौत ने भारत और अमेरिका के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति पैदा कर दी है। भारत ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। अब सभी की नजर G7 शिखर सम्मेलन और दोनों देशों के बीच होने वाली उच्चस्तरीय चर्चाओं पर टिकी है, जहां इस मुद्दे पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कूटनीति और वैश्विक राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए।

आगे और पढ़ें
तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ा कूटनीतिक तनाव

भारत ने अमेरिकी कार्रवाई पर जताया कड़ा विरोध, तीन भारतीय नाविकों की मौत पर बढ़ा कूटनीतिक तनाव

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा अंतरराष्ट्रीय अपडेट दिनांक: 13 जून 2026 मुख्य समाचार नई दिल्ली: समुद्री क्षेत्र में हुई एक सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ गया है। भारत सरकार ने घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी प्रशासन के समक्ष आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सरकार ने मृतक नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हरसंभव सहायता देने का भरोसा भी दिलाया है। विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष भारत की चिंताओं को औपचारिक रूप से रखा है। मंत्रालय का कहना है कि ऐसी घटनाओं में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का हिस्सा है और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। भारत ने घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी और परिस्थितियों की पूरी रिपोर्ट साझा करने का भी आग्रह किया है। जांच की मांग हुई तेज सरकार ने मामले की व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा है कि यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि किन परिस्थितियों में भारतीय नागरिक इस कार्रवाई की चपेट में आए। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। भारत-अमेरिका संबंधों पर असर की चर्चा भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद तेज हो गया है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश इस संवेदनशील मुद्दे को बातचीत और सहयोग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करेंगे ताकि द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव न पड़े। समुद्री सुरक्षा पर उठे सवाल घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक समुद्री व्यापार में कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। निष्कर्ष तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भारत और अमेरिका के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। भारत ने निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। अब दोनों देशों की आगामी प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए।

आगे और पढ़ें
ईरान द्वारा मिसाइल हमले किए जाने के बाद इजरायल में सुरक्षा अलर्ट बढ़ाया गया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध की आशंका बढ़ गई।

ईरान के मिसाइल हमलों के बाद इजरायल अलर्ट, मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा गहराया

8 जून 2026 | विश्व समाचार मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान और इजरायल के बीच टकराव को तेज किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है। इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइल हमलों के बाद देशभर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। कई इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। कैसे बढ़ा तनाव? हाल के दिनों में लेबनान की राजधानी बेरूत और आसपास के क्षेत्रों में हुए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा था। ईरान ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। इसके बाद ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए, जिन्हें क्षेत्रीय विश्लेषक दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का गंभीर संकेत मान रहे हैं। इजरायल की प्रतिक्रिया मिसाइल हमलों के बाद इजरायली सुरक्षा बलों को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। देश की रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया और संभावित खतरों से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी चुनौती का उचित जवाब दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की चिंता संयुक्त राष्ट्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने की अपील की है। UN अधिकारियों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। वैश्विक प्रभाव की आशंका विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। मध्य पूर्व दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए किसी भी बड़े संघर्ष का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर अमेरिका, यूरोपीय देशों और अन्य प्रमुख शक्तियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोशिश है कि बढ़ते तनाव को कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से नियंत्रित किया जाए और क्षेत्र को बड़े युद्ध की स्थिति में जाने से रोका जाए। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते हैं तो संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति प्रयासों में जुटे हुए हैं ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी जा सके। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

आगे और पढ़ें

रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व तनाव पर दुनिया की नजर

वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और कूटनीति पर बढ़ रहा दबाव रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया के कई देश इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका प्रभाव केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष वैश्विक राजनीति का प्रमुख विषय बना हुआ है। इस संघर्ष के कारण यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था, रक्षा नीतियों और ऊर्जा रणनीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। कई देशों ने अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया है और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया है। वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर तेल और गैस बाजारों पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिलता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश प्रभावित हो सकते हैं। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। विकासशील देशों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है क्योंकि वे ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर होते हैं। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना रहती है। ऊर्जा बाजारों की चिंता मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि होने पर परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है। यूरोप में भी ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद कई देशों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों की तलाश तेज कर दी है। इसके परिणामस्वरूप नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा विविधीकरण पर निवेश बढ़ा है। कूटनीतिक प्रयास जारी संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। विभिन्न देशों के नेता कूटनीतिक समाधान तलाशने पर जोर दे रहे हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक शांति के लिए बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है। कई देशों ने संयम बरतने और संवाद जारी रखने की अपील की है। सुरक्षा चुनौतियां भू-राजनीतिक संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। साइबर सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग, रक्षा सहयोग और वैश्विक स्थिरता जैसे विषय भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के प्रभाव तेजी से वैश्विक स्तर पर महसूस किए जाते हैं। इसलिए दुनिया के प्रमुख देश इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। मुख्य बिंदु • रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दुनिया की नजर • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से चिंता • ऊर्जा बाजारों पर असर की आशंका • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव • कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी • सुरक्षा और व्यापार पर संभावित प्रभाव निष्कर्ष रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दुनिया भर के देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और शांति तथा स्थिरता की दिशा में प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में इन घटनाक्रमों का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण रूप से देखने को मिल सकता है। (जय राष्ट्र न्यूज़ अंतरराष्ट्रीय डेस्क)

आगे और पढ़ें

यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ९०% समझौता तैयार, लेकिन खतरे बरकरार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर, ३ जनवरी २०२६ यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध अब तीसरे साल में है। हाल ही में शांति की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि समझौता ९०% तैयार है। लेकिन चुनौतियां अभी भी हैं। रूस की तरफ से झूठे हमले की चेतावनी दी गई है। यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस लेख में हम नवीनतम घटनाओं पर नजर डालेंगे। हम शांति वार्ता की प्रगति देखेंगे। साथ ही, बाधाओं पर भी बात करेंगे। यह जानकारी आपको अपडेट रखेगी। शांति समझौते की प्रगति जेलेंस्की ने नए साल के संबोधन में अच्छी खबर दी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच समझौता लगभग पूरा है। यह युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, रूस को इसमें शामिल करना बाकी है। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन शांति चाहते हैं। लेकिन रूसी अधिकारी सहमत नहीं दिखते। यूक्रेन ने सुरक्षा सहयोगियों से बात की। ये वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। वे समझौते को मजबूत बनाती हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन कमजोर हो रहा है। लेकिन यूक्रेन मजबूती से खड़ा है। इसके अलावा, परमाणु संयंत्र एक बड़ी समस्या है। जपोरिजिया परमाणु संयंत्र: मुख्य बाधा जपोरिजिया संयंत्र यूक्रेन में है। लेकिन रूस ने इसे कब्जा कर रखा है। यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। जेलेंस्की ने कहा कि यह शांति योजना में अटकाव है। यदि रूस इसे नहीं छोड़ेगा, तो खतरा बढ़ेगा। संयंत्र में कोई दुर्घटना हो सकती है। यह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगी। संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। वे सुरक्षा चाहते हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए, समझौते में इसका समाधान जरूरी है। अन्यथा, शांति मुश्किल होगी। रूस की संभावित साजिश यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है। वे कहते हैं कि रूस झूठा हमला कर सकता है। यह हमला रूस में ही होगा। इसका उद्देश्य शांति वार्ता बिगाड़ना है। यह फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन होगा। इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं। चेतावनी के अनुसार, यह हमला चर्च पर हो सकता है। रूसी ऑर्थोडॉक्स क्रिसमस से पहले। यह ७ जनवरी को है। यूक्रेन ने कहा कि रूस ऐसा करके दोष यूक्रेन पर डालेगा। इससे वार्ता रुक जाएगी। दुनिया को सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, रूस लगातार हमले कर रहा है। हाल ही में एक मिसाइल हमले में दो लोग मारे गए। इसमें एक तीन साल का बच्चा भी था। ३१ लोग घायल हुए। यह दिखाता है कि युद्ध थमा नहीं है। फ्रंटलाइन पर स्थिति यूक्रेन ने फ्रंटलाइन से निकासी का आदेश दिया। हजारों लोगों को सुरक्षित जगह जाना होगा। रूसी सेना आगे बढ़ रही है। खारकीव क्षेत्र में ड्रोन हमले हो रहे हैं। यूक्रेन की सेना नियमों का पालन कर रही है। वे नागरिकों की रक्षा कर रही हैं। हालांकि, रूस का दावा अलग है। वे कहते हैं कि यूक्रेन हार रहा है। लेकिन यूक्रेन ने कहा कि वे लड़ते रहेंगे। शांति के लिए तैयार हैं। लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया इस पर नजर रखे हुए है। अमेरिका यूक्रेन का समर्थन कर रहा है। ट्रंप प्रशासन वार्ता को बढ़ावा दे रहा है। यूरोपीय संघ भी शामिल है। वे सुरक्षा गारंटी चाहते हैं। रूस ने कहा कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। लेकिन शर्तें उनकी होंगी। पुतिन ने कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन उनके अधिकारी सक्रिय हैं। इसके अलावा, चीन और भारत जैसे देश मध्यस्थता कर सकते हैं। वे शांति चाहते हैं। २०२६ में शांति की संभावना नए साल में शांति की उम्मीद है। लेकिन बाधाएं हैं। यदि झूठे हमले हुए, तो सब बिगड़ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि वार्ता जारी रखनी चाहिए। दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। यूक्रेन ने कहा कि वे ९०% तैयार हैं। बाकी १०% पर काम हो रहा है। लेकिन रूस की मंशा साफ नहीं है। इसलिए, सावधानी जरूरी है। भारत की भूमिका भारत ने हमेशा शांति की वकालत की है। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से बात की। भारत मध्यस्थ बन सकता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा होगा। इसके अलावा, युद्ध से ऊर्जा कीमतें प्रभावित होती हैं। भारत को फायदा होगा यदि शांति हो। निष्कर्ष यूक्रेन-रूस शांति वार्ता महत्वपूर्ण मोड़ पर है। ९०% समझौता तैयार है। लेकिन रूस की साजिश चिंता का विषय है। दुनिया को एकजुट होना चाहिए। शांति से सभी को फायदा होगा। हम आगे की खबरों पर नजर रखेंगे। यह स्थिति तेजी से बदल रही है। अधिक जानकारी के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें। यदि आपके कोई सवाल हैं, तो कमेंट करें।

आगे और पढ़ें
रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

भारतीय संस्कृति रियल रिव्यू गुरुग्राम: सोशल मीडिया पर इन दिनों रशियन महिला केसेनिया शकीरजियानोवा (@vegkseniia) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। केसेनिया पिछले तीन साल से भारत में रह रही हैं और गुरुग्राम में बस चुकी हैं। कार में सैंडविच खाते हुए रिकॉर्ड किए गए इस कैजुअल वीडियो में उन्होंने भारत को लेकर विदेशियों की छह बड़ी गलतफहमियों को बेबाकी से खारिज किया है। वीडियो की शुरुआत में केसेनिया मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं भारत में लगभग तीन साल से रह रही हूं, और आज कुछ मिथकों को क्लियर करती हूं।” उनका यह ईमानदार और सहज अंदाज लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। केसेनिया ने तोड़े ये 6 मिथक: केसेनिया का मुख्य संदेश है कि भारत ने उन्हें नहीं बदला, बल्कि भारत को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच को उन्होंने चुनौती दी है। वे कहती हैं कि भारत का जीवन विदेशियों की कल्पना से कहीं ज्यादा आधुनिक, विविध और सामान्य है। इस वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं कमाल की हैं। एक यूजर ने लिखा, “आपकी ईमानदारी के लिए थैंक यू, भारत की सच्ची इमेज दिखाने के लिए!” दूसरे ने कहा, “ये वीडियो हर विदेशी को दिखाना चाहिए।” कई लोगों ने इसे भारत की पॉजिटिव इमेज बनाने वाला बताया। केसेनिया का यह वीडियो न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि यह दुनिया को भारत की असली तस्वीर दिखा रहा है। अगर आप भी विदेशी नजर से भारत का रियल रिव्यू देखना चाहते हैं, तो इंस्टाग्राम पर @vegkseniia जरूर चेक करें! रशियन महिला केसेनिया का भारत प्रेम: पहले वीडियो ने भी मचाया था तहलका, हैदराबाद को बताया दुबई से बेहतर! केसेनिया शकीरजियानोवा हैदराबाद वीडियो | रशियन टूरिस्ट इंडिया रिव्यू | भारत मॉडर्न सिटी रशियन नजर केसेनिया शकीरजियानोवा सिर्फ मिथक तोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने हैदराबाद की हाइटेक सिटी को देखकर कहा था, “हबीबी, ये दुबई नहीं, हैदराबाद है!” सनसेट व्यू और मॉडर्न आर्किटेक्चर देखकर वे हैरान रह गई थीं। यह वीडियो भी लाखों लोगों ने देखा और भारतीयों ने गर्व महसूस किया। केसेनिया जैसे विदेशी भारत की तेज विकास और विविधता की तारीफ कर दुनिया को नई नजर से देखने पर मजबूर कर रहे हैं।

आगे और पढ़ें

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर: जासूसी की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर भारत में सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कर्नाटक के कारवार तट पर एक सीगल पक्षी पकड़ा गया, जिसकी पीठ पर हाई-टेक चीनी GPS ट्रैकर लगा हुआ मिला। यह घटना दिसंबर 2025 में सामने आई है और इससे जासूसी की आशंका गहरा गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। चीनी GPS ट्रैकर वाली सीगल की घटना के विवरण यह सीगल पक्षी कारवार क्षेत्र में पकड़ा गया। पक्षी पर लगा ट्रैकर अत्याधुनिक तकनीक वाला है, जो चीन से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रैकर पक्षियों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की निगरानी या डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत में चीनी जासूसी उपकरणों की खबरें आई हैं, लेकिन पक्षी पर ट्रैकर मिलना एक नया और चौंकाने वाला मामला है।यह घटना भारत-चीन सीमा तनाव और समुद्री क्षेत्रों में निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और खुफिया एजेंसियां पहले से ही दक्षिण चीन सागर और भारतीय महासागर में चीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत इस ट्रैकर को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि यह ट्रैकर कितने समय से सक्रिय था और क्या कोई संवेदनशील डेटा भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट जारी किया गया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीनी ड्रोनों और जासूसी उपकरणों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। यह घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सामाजिक मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे चीनी जासूसी का सबूत बताया, जबकि कुछ ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत-चीन संबंधों का संदर्भ यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध सामान्य की दिशा में हैं, लेकिन सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।कर्नाटक तट भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई आधार हैं। इस घटना से समुद्री सुरक्षा पर फिर से बहस छिड़ गई है।फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आएगी। जय राष्ट्र न्यूज इस घटना पर नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स लाता रहेगा।यह चीनी GPS ट्रैकर सीगल पक्षी मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें।

आगे और पढ़ें
ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

भारत ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात 38% घटाया: ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 दिसंबर 2025 भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल का आयात मूल्य के हिसाब से 38 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 31 प्रतिशत तक कम कर दिया। यह 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर सबसे ज़्यादा निर्भरता दिखाने वाले भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल क्रूड आयात में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उसका हिस्सा सितंबर 2025 के 40 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर में करीब 35 प्रतिशत रह गया। दूसरी तरफ इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका से आयात में तेज़ उछाल देखा गया है। पिछले तीन साल का ट्रेंड उलट गया 2022 के बाद से रूस भारत को औसतन 1.5 से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बेच रहा था। उस समय पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी उराल ग्रेड क्रूड ब्रेंट से 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था। भारतीय रिफाइनरियों (खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा वाडिनार) ने इसका भरपूर फायदा उठाया था। लेकिन अक्टूबर 2025 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गिरावट के पांच बड़े कारण रिफाइनरियों पर क्या असर? रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बताया कि रूसी भारी-खट्टा क्रूड (उराल) की जगह अब वे इराकी बसरा हेवी, सऊदी अरेबियन मीडियम और अमेरिकी WTI मिडलैंड क्रूड ले रहे हैं। इनमें सल्फर कम है और रिफाइनिंग मार्जिन 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल बेहतर मिल रहा है। नायरा एनर्जी (रूस की रोसनेफ्ट में हिस्सेदार) ने भी कहा कि वह अब स्पॉट मार्केट से मध्य-पूर्व का तेल खरीद रही है। रोसनेफ्ट से लंबे अनुबंध अभी भी जारी हैं, लेकिन मात्रा में 25-30 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। अर्थव्यवस्था को फ़ायदा भारत-रूस संबंधों पर असर? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला “100 प्रतिशत व्यावसायिक” है। रूस के साथ 15 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य अभी भी बरकरार है। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा में S-400 की अतिरिक्त रेजीमेंट, ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात और न्यूक्लियर पावर प्लांट के समझौते हुए हैं। तेल की मात्रा कम होने से द्विपक्षीय संबंधों पर कोई ठेस नहीं पहुँची है। आगे की राह: हरित ऊर्जा और विविधीकरण सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी साल गुजरात और राजस्थान में 50 गीगावाट के सोलर पार्क और 30 गीगावाट के ग्रीन हाइड्रोजन हब को मंजूरी मिली है। लेकिन अभी भी तेल भारत की कुल ऊर्जा मांग का 33 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए अगले 10-15 साल तक विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते कहा था,“हमारा लक्ष्य है कि 2035 तक किसी एक देश से 25 प्रतिशत से ज़्यादा तेल न लें।” निष्कर्ष अक्टूबर 2025 की 38 प्रतिशत कटौती कोई अस्थायी घटना नहीं है। यह भारत की नई ऊर्जा रणनीति का पहला ठोस संकेत है। सस्ता तेल चाहिए, लेकिन सुरक्षित और विविध स्रोतों से। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक कीमतें 65 डॉलर से नीचे चली गईं, तो फिर रूसी तेल की वापसी हो सकती है। लेकिन तब भी पुरानी मात्रा शायद ही लौटे। भारत अब ऊर्जा के खेल में सिर्फ़ खरीदार नहीं, एक स्मार्ट रणनीतिकार बनकर उभरा है। जय राष्ट्र न्यूज़ – भारत की खबर, भारत की आवाज़Instagram: @jairashtranewsYouTube: @JaiRashtraNewsवेबसाइट: jairashtranews.com RussianOilCut #IndiaEnergyPolicy #JaiRashtraNews

आगे और पढ़ें
Iran Wants to Destroy US , trump

Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path: ईरान अमेरिका को नष्ट करना चाहता है, मगर उसकी राह में इजरायल सबसे बड़ा रोड़ा है- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच भीषण युद्ध युद्ध हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद कई दिनों तक चला भीषण युद्ध समाप्त हुआ था। इसके बाद अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। दरअसल, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को मौत का पंथ कहते हुए कहा कि “यह अमेरिकी की मौत की बात करता (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) है। अमेरिका को ईरान नष्ट करना चाहता है। मगर उसकी राह में इजरायल रोड़ा है। बता दें कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में मारे गए लोगों के घरों का दौरा किया। वह उन क्षेत्रों में भी गए जहां, ईरानी मिसाइलों से लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान नेतन्याहू ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “यह ईरान पर ऐतिहासिक विजय के बाद ऐतिहासिक दौरे का अंतिम दिन है। मैं और मेरी पत्नी सारा की ओर से, गुश एत्ज़ियों में मारे गए व्यक्ति के परिवार के प्रति दिल से संवेदनाएं प्रकट करता हूं। आतंक के खिलाफ लड़ाई गाज़ा, यहूदा , और सामरिया में और उससे भी आगे सभी मोर्चों पर जारी है।” हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाते नेतन्याहू ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि “मैंने जीवित और शहीद दोनों बंधकों के परिवारों से मुलाकात की। मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि हम सभी को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं एक ऐसे कदम को आगे बढ़ा रहा हूं जो एक महत्वपूर्ण रिहाई की ओर ले जाएगा, लेकिन केवल उन्हीं शर्तों पर जो इज़रायल निर्धारित करता है। हमास को निरस्त्र किया जाए, गाज़ा को सैन्य मुक्त किया (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाए। अगर यह कूटनीति से संभव नहीं हुआ तो यह बल प्रयोग से किया जाएगा। हम पहले भी ऐसे ही कार्य करते आए हैं और आगे भी ऐसे ही करेंगे। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।” इसके अलावा एक साक्षात्कार के दौरान ​उन्होंने यह भी कहा कि “अब्राहम समझौते में सीरिया को शामिल करने से पहले उन्हें हिज़्बुल्लाह और भयानक तानाशाह हाफ़िज़ अल-असद को हराया था।” अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि “सीरिया तब तक अब्राहम समझौतों में शामिल नहीं हो सकता था, जब तक हिज़्बुल्लाह और हाफ़िज़ असद जैसे तत्वों को पराजित नहीं किया जाता।” यहाँ बता दें कि “हाफ़िज़ असद ने 1973 के अरब-इज़रायल युद्ध में इज़रायल से लड़ाई लड़ी थी और उनका निधन वर्ष 2000 में हो गया था।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है बंधकों की अगली (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) रिहाई- इज़राइली प्रधानमंत्री बड़ी बात यह कि इस बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ़ संकेत दिया है कि “अगली बंधक रिहाई कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है।” उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दौर में वह बचे हुए 50 में से लगभग आधे बंधकों को वापस ला सकते (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) हैं। बंधकों की रिहाई पर नेतन्याहू ने कहा कि “हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही बड़ी संख्या में अपने लोगों को घर ला सकेंगे।” गौर करने वाली बात यह कि हमास ने भी संकेत दिया है कि “वह 10 बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त ये है कि पहले समझौते की कुछ शर्तें पूरी की जाएं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत एक नए समझौते की ओर इशारा कर रही है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि क्या हमास वाकई में बंधकों को सही सलामत रिहा करता है या फिर कोई खेल खेलता है। इस बात में रंच मात्र भी गुंजाईश नहीं है कि हमास ने यदि जरा भी चालाकी की तो इजरायल एक और बड़ा हमला करने से चूकेगा नहीं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path #Netanyahu #IranThreat #IsraelDefense #USMiddleEast #BenjaminNetanyahu #IranVsUS

आगे और पढ़ें
Translate »