Ukraine destroys Russian bombers

Zelensky Warns Putin: यूक्रेन ने रूस के 40 एयरक्राफ्ट बॉम्बर्स को किया तबाह, जेलेंस्की ने दी पुतिन को धमकी

लंबे समय से रूस और यूक्रेन का युद्ध काफी जारी है। दोनों देश हैं कि हार मानने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। आये दिन दोनों एक दूसरे पर घातक बमबारी कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेन ने रविवार को रूस पर अबतक का सबसे बड़ा हमला किया।  जानकारी के मुताबिक यूक्रेन ने रूस में करीब 4 हजार किलोमीटर अंदर ड्रोन हमले कर रूसी एयरबेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया और करीब 40 एयरक्राफ्ट बॉम्बर्स को तबाह कर दिया। ये हमला इतना भयंकर था कि इसे रूस के सबसे बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। बहुत मुमकिन है कि इस हमले के बाद रूस जबरदस्त पलटवार करे। कहने की जरूरत नहीं,  इस कदम से जेलेंस्की को अमेरिकी राष्ट्रपति की भी नाराजगी झेलनी पड़ (Zelensky Warns Putin) सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस हमले को अंजाम देने से पहले यूक्रेन की ओर से ट्रंप को जानकारी नहीं दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति को ड्रोन हमले के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके बारे में एक यूक्रेनी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस हमले में रूसी क्षेत्र के भीतर 40 से अधिक विमान नष्ट हो गए हैं। यूक्रेन की इस हिमाकत के बाद रूसी राष्ट्रपति तो पुतिन ऐसे ही खार खाये बैठे हैं।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों में सीजफायर कराने की भरसक कोशिश (Zelensky Warns Putin) कर रहे हैं गौरतलब हो कि सत्ता संभालने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों में सीजफायर कराने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यूक्रेन के इस कदम ने एक फिर सीजफायर की तमाम कोशिशों पर पानी फेर दिया है। यह बात किसी से छुपी भी नहीं है कि पिछले तीन वर्षों में अमेरिका ने यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य तौर बड़ी मदद की है। अमेरिका नहीं होता तो यूक्रेन शायद ही युद्ध इतना लम्बा खींच पाता। ऐसे में अमेरिका को नाराज करना यूक्रेन के लिए भारी पड़ सकता है। ट्रंप ने पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बारे में सकारात्मक बातें की थी। वह अब उनसे भी नाराज दिख (Zelensky Warns Putin)रहे हैं। बता दें कि एक रूसी हमले के बाद ट्रंप ने कहा था कि रूस के व्लादिमीर पुतिन के साथ मेरे हमेशा बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है। वह बिल्कुल पागल हो गए हैं। यह ऑपरेशन पूरी तरह से उचित और (Zelensky Warns Putin) योग्य है इस हमले के बाद किसी भी तरह की अनहोनी से बेफिक्र यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इसे एक शानदार ऑपरेशन बताते हुए कहा, दुश्मन के इलाके में, हमने केवल सैन्य उद्देश्यों को लक्षित करते हुए ऑपरेशन स्पाइडरवेब को अंजाम दिया जिससे रूस को महत्वपूर्ण नुकसान हुआ  है। जेलेंस्की ने आगे कहा, यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के प्रमुख वसील मालियुक ने आज के ऑपरेशन के बारे में एक रिपोर्ट पेश की और कहा, यूक्रेन द्वारा हासिल किया गया यह परिणाम बेहतरीन है। योजना बनाने से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक एक साल, छह महीने और नौ दिन (Zelensky Warns Putin) लगे। यह हमारा सबसे लंबी दूरी का ऑपरेशन था। ऑपरेशन की तैयारी में शामिल हमारे लोगों को समय रहते रूसी क्षेत्र से वापस बुला लिया गया। यूक्रेन की इस सफलता के लिए मैंने जनरल मालियुक को धन्यवाद दिया। इस हमले से गदगद जेलेंस्की ने कहा, यह ऑपरेशन पूरी तरह से उचित और योग्य है। हम एक पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम का प्रस्ताव करना जारी रखना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ ही सभी तर्कसंगत और सम्मानजनक कदम भी उठाते हैं जो एक स्थायी और विश्वसनीय शांति की ओर ले जा सकते हैं। रूसियों के सामने हमने जो यूक्रेनी प्रस्ताव पेश किया है वह तार्किक और यथार्थवादी है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा रूस चाहता क्या है? रूसियों ने अपना ज्ञापन किसी के साथ साझा नहीं किया (Zelensky Warns Putin) है यही नहीं, जेलेंस्की ने पुतिन को लेकर कहा, रूस चाहता क्या है? रूसियों ने अपना ज्ञापन किसी के साथ साझा नहीं किया (Zelensky Warns Putin) है। हमारे पास यह नहीं है। तुर्की पक्ष के पास यह नहीं है। और तो और अमेरिकी पक्ष के पास भी रूसी दस्तावेज़ नहीं है। इसके बावजूद, हम शांति की दिशा में कम से कम कुछ प्रगति हासिल करने की कोशिश करेंगे। आज, एक शानदार ऑपरेशन किया गया। इसकी तैयारी में डेढ़ साल से ज़्यादा का समय लगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि रूसी क्षेत्र में हमारे ऑपरेशन का कार्यालय उनके एक क्षेत्र में एफएसबी मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित था। Latest News in Hindi Today Hindi news Zelensky Warns Putin #Zelensky #Putin #UkraineRussiaWar #RussianBombers #UkraineAirStrike #RussiaUkraineConflict #WarUpdate #VolodymyrZelensky

आगे और पढ़ें
Petrol bomb attack USA

Petrol Bomb Attack on Jews in US: अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा

गाज़ा में इजरायल द्वारा हो रही हमास के आतंकियों पर बमबारी लगातार जारी है। इस बमबारी में कई निर्दोष नागरिकों के भी मारे जाने की खबरें हैं। इस बमबारी का असर अब दुनिया के अन्य देशों में भी दिखने लगा है। लोग और देश दो धड़ों में बट गए हैं। एक धड़ा इजरायल की इस कार्रवाई को जायज़ ठहरा रहा है तो दूसरा इसे अति करार दे रहा है। इसी क्रम में अमेरिका के कोलोराडो में एक व्यक्ति ने ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा लगाते हुए भीड़ पर पेट्रोल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) बम से हमला कर दिया। इस हमले में कम से कम 6 लोग घायल होने की बात कही जा रही है। खैर, पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है। संदिग्ध की पहचान 45 वर्षीय मोहम्मद साबरी सोलिमा के रूप में हुई है। एफबीआई इसे एक्ट ऑफ टेरर (आतंकी कृत्य) करार दे रही है। एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल ने इसे टारगेटेड आतंकवादी हमला बताया तो वहीं कोलोराडो अटॉर्नी जनरल फिल वीजर ने कहा कि यह जिस समूह को निशाना बनाया गया था, उसे देखते हुए यह एक हेट क्राइम का मामला प्रतीत होता है। इसके आलावा एफबीआई के असिसटेंट डायरेक्टर बेन विलियमसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, संदिग्ध यहूदी लोगों की भीड़ पर बम फेंकते समय ‘फ्री फिलिस्तीन’ चिल्लाया था।  वह आदमी बिना शर्ट के खड़ा था और उसके हाथ में कांच की बोतल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) थी- चश्मदीद चश्मदीदों में से एक कोलोराडो यूनिवर्सिटी की 19 वर्षीय ब्रुक कॉफमैन ने बोल्डर में हुई घटना को अपनी आंखों के सामने देखा। इस संबंध में उसने कहा कि उसने चार महिलाओं को पैरों पर जली हुई अवस्था में जमीन पर लेटे या बैठे देखा। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि उनमें से एक के शरीर का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह से जल गया है और उसे किसी ने झंडे में लपेट दिया है। उसने आगे कहा कि मैंने एक आदमी को देखा, जिसे उसने हमलावर बताया। वह आदमी बिना शर्ट के खड़ा था और उसके हाथ में कांच की बोतल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) थी। वह चिल्ला रहा था। कॉफमैन ने कहा, हमले के बाद हर कोई चिल्ला रहा था, ‘पानी लाओ, पानी लाओ।’ दरअसल, गाजा में बचे इजरायली बंधकों की याद में एक प्रदर्शनी निकाली गई थी। उसी दौरान इस हमले को अंजाम दिया गया। इस पूरे मामले पर बोल्डर पुलिस के मुखिया स्टीफन रेडफर्न ने कहा, पर्ल स्ट्रीट के डाउनटाउन बोल्डर में रविवार की दोपहर यह हमला हुआ और यह काम अस्वीकार्य था। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप पीड़ितों, उन पीड़ितों के परिवारों और इस त्रासदी में शामिल सभी लोगों के लिए दुआ करें। बेशक इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह घटना गाजा में इजरायल के युद्ध को लेकर अमेरिका में बढ़े तनाव के बीच हुई है। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार यह हमला वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की घातक गोलीबारी के बाद हुआ (Petrol Bomb Attack on Jews in US) है यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि गाजा युद्ध ने यहूदी विरोधी हेट क्राइम में वृद्धि हुई गई। यही नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इजरायल के रूढ़िवादी समर्थकों द्वारा फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों को यहूदी विरोधी बताने के कदमों को भी बढ़ावा दिया है। ट्रंप के प्रशासन ने युद्ध के प्रदर्शनकारियों को बिना किसी आरोप के हिरासत में ले लिया है और ऐसे प्रदर्शनों की अनुमति देने वाले कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी को दिए जाने वाले फंड में कटौती कर दी है।  गौरतलब हो कि यह हमला पिछले महीने वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की घातक गोलीबारी के बाद हुआ (Petrol Bomb Attack on Jews in US) है। बता दें कि अमेरिकी यहूदी समिति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे लोगों के एक समूह पर किसी ने गोलियां चला दी थीं। कहने की जरूरत नहीं गाज़ा में हो रही बमबारी और यहूदी समुदाय में हो रहे इस तरह के हमलों ने अमेरिका में गाजा में इजरायल समर्थकों और फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच युद्ध को लेकर तनाव बढ़ा दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Petrol Bomb Attack on Jews in US #PetrolBombAttack #JewishCommunity #FreePalestine #USAProtests #HateCrime #AntiSemitism #USNews #GazaTensions #MiddleEastCrisis

आगे और पढ़ें
Musk Trump disagreement

Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt: एलन मस्क ने छोड़ा ट्रंप सरकार का साथ, इस वजह से दोस्ती में आई दरार

टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सब कुछ सही नहीं चला रहा है। इससे पहले भी दोनों के रिश्तों में तल्खी देखी गयी थी। अततः एलन मस्क ने ट्रंप के विशेष सलाहकार पद से इस्तीफा दे (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के बेहद खास माने जाने वालों में से एक एलन मस्क ने ऐलान किया है कि “वह ट्रंप प्रशासन से बाहर हो रहे हैं। संघीय नौकरशाही को कम करने और उसमें सुधार लाने के प्रयासों का नेतृत्व करने के बाद एलन मस्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सलाहकार के रूप में अपनी सरकारी भूमिका छोड़ रहे हैं। उन्होंने बुधवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर बताया कि “वे सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।” इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “उन्होंने उन पर विश्वास किया और उन्हें अपने प्रशासन में एक विशेष सरकारी कर्मचारी के तौर पर शामिल किया।”  राष्ट्रपति द्वारा इसे एक शानदार बिल कहना निराशाजनक (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) है- एलन मस्क गौर करने वाली बात यह कि मस्क का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब लंबे समय से ये चर्चा चल रही थी कि दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं। हालाँकि मस्क ने कुछ दिन पहले ही ट्रंप के एक फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि “राष्ट्रपति द्वारा इसे एक शानदार बिल कहना निराशाजनक (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) है। मस्क के मुताबिक, यह फैसला खर्चों में भारी बढ़ोतरी करेगा, जिससे संघीय घाटा बढ़ेगा।” बता दें कि एलन मस्क को अमेरिकी सरकार में विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में नामित किया गया था। इसके तहत वह हर साल 130 दिनों तक सरकार के काम में अपनी सलाह देते। ध्यान देने वाली बात यह कि 20 जनवरी को ट्रंप के शपथ ग्रहण से मई के अंत में ये सीमा पूरी हो रही है। जानकारी के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार आउटलेट सेमाफोर को बताया कि “विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में मस्क की ऑफबोर्डिंग बुधवार रात से शुरू होगी। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार मैं राष्ट्रपति ट्रंप को फिजूलखर्ची को कम करने के अवसर के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा- एलन मस्क गौरतलब हो कि उन्होंने इस ऐलान से पहले बाकायदा ट्रंप के सुंदर बिल की आलोचना की थी। मस्क ने कहा था कि “वह इस बिल से निराश (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) हैं। इस विधेयक में कर कटौती और आव्रजन प्रवर्तन में वृद्धि का मिश्रण शामिल है। मस्क ने इसे एक बहुत बड़ा व्यय विधेयक बताया जो संघीय घाटे को बढ़ाता है और उनके सरकारी दक्षता विभाग, जिसे डीओजीई के नाम से जाना जाता है, के काम को कमजोर करता है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा कि “मैं राष्ट्रपति ट्रंप को फिजूलखर्ची को कम करने के अवसर के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा। डीओजेई मिशन समय के साथ और मजबूत होगा क्योंकि यह सरकार चलाने का एक तरीका बन जाएगा।” खैर, कुल-मिलकर बात यह कि मास्क ट्रम्प के कुछ फैसलों से नाराज चल रहे थे। उन्होंने ट्रंप द्वारा टैक्स में कटौती और इमिग्रेशन सुधार के फैसले को लेकर सीबीएस के साथ बातचीत में कहा कि “मेरा मानना है कि कोई भी बिल या तो बड़ा हो सकता है या फिर सुंदर, लेकिन दोनों नहीं हो सकता। कुछ चीजें हैं जिनसे मैं संतुष्ट नहीं हूं, मगर कई चीजों से मैं काफी उत्साहित हूं।” इस दौरान मस्क ने यह भी बताया कि “इस फैसले में कुछ बदलाव होने की संभावना बनी हुई है, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है।” Latest News in Hindi Today Hindi news  Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt #ElonMusk #Trump #Politics #BreakingNews #MuskVsTrump #USPolitics

आगे और पढ़ें
Interpol Begins Silver Notice

Interpol Begins Silver Notice: रेड कॉर्नर नोटिस के बाद इंटरपोल ने शुरू की सिल्‍वर नोटिस, इन लोगों पर कसी जाएगी नकेल

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दुनिया भर के देश रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए फरार अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करते हैं। इनमें भारत भी शामिल है। यह चलन आज से नहीं बल्कि दशकों से चला आ रहा (Interpol Begins Silver Notice) है। अब इंटरपोल ने सिल्वर नोटिस (Silver Notice) नाम से एक नई सुविधा शुरू की है। फिलहाल यह सुविधा एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसमें कुल 51 देशों की भागीदारी है। यह पायलट प्रोग्राम नवंबर 2025 तक चलेगा। जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक देश 9 सिल्वर नोटिस जारी कर सकता है। इसके तहत दुनिया भर के देशों को अपराधियों की संपत्तियों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा करने में मदद मिलेगी। इस नोटिस के जरिए सदस्य देश किसी भी व्यक्ति की अवैध कमाई से जुड़ी संपत्तियों मसलन, गाड़ियां, बैंक खाते, मकान और व्यापार आदि की जानकारी मांग सकते हैं। इससे धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, नशा तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में जुटाई गई संपत्ति को ट्रैक और जब्त करने की प्रक्रिया बेहद आसान होगी। सीबीआई ने पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ किया है (Interpol Begins Silver Notice) जारी   इंटरपोल की इस सुविधा के तहत सीबीआई ने 23 मई 2025 को पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ जारी (Interpol Begins Silver Notice) किया है। बता दें कि शुभम शोकीन नई दिल्ली स्थित एक विदेशी दूतावास में वीजा और स्थानीय कानून अधिकारी के रूप में काम किया करते थे। उन्होंने सितंबर 2019 से मई 2022 के दौरान अन्य आरोपियों के साथ मिलकर वीजा में धोखाधड़ी की। इसके तहत उन्होंने प्रत्येक वीजा आवेदक से तकरीबन 15 लाख से 45 लाख रुपये तक की अवैध रिश्वत लेकर शेंगेन वीजा जारी किए। खबर के मुताबिक इस अपराध से प्राप्त पैसों से उन्होंने दुबई, यूएई में 77.60 लाख दिरहम ( तकरीबन 15.73 करोड़) खर्च कर छह अचल संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, सीबीआई ने पहले उनके ठिकानों का पता लगाने हेतु उनके खिलाफ ब्लू नोटिस भी जारी किया था।  अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ (Interpol Begins Silver Notice) जारी किया गया है दूसरा सिल्वर नोटिस  शुभम शोकीन के खिलाफ पहला तो 26 मई 2025 को सीबीआई ने ईडी के अनुरोध पर अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ दूसरा सिल्वर नोटिस (Interpol Begins Silver Notice) जारी किया। लखनपाल ने मनी ट्रेड कॉइन नामक एक डिजिटल/क्रिप्टो-करेंसी बनाई, जो कि भारत में मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने निवेशकों को लुभाकर 113.10 करोड़ रुपये एकत्र किए। कमाल की बात यह कि बिना सरकारी या भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के उन्होंने निवेशकों को वादा किया गया रिटर्न नहीं लौटाया और धन का गबन कर लिया। लखनपाल ने खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर लोगों को धोखा दिया। उनके खिलाफ पहले रेड नोटिस भी जारी किया जा चुका है।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार सिल्‍वर कॉर्नर नोटिस (Silver Notice) के तहत देश भ्रष्टाचार और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी कर सकते हैं साझा  भारत ने प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच से संबंधित कई मामलों में सिल्वर नोटिस (Silver Notice) हेतु अनुरोध प्रस्तुत किए (Interpol Begins Silver Notice) हैं। गौरतलब हो कि सिल्वर नोटिस इन व्यक्तियों की वैश्विक संपत्तियों की पहचान और निगरानी में मदद करेगा। इसकी मदद से अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और वसूली करने में सहायता मिलेगी। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि यह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। बता दें कि सिल्‍वर कॉर्नर नोटिस के तहत देश भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं की तस्करी, धोखाधड़ी, पर्यावरणीय अपराधों जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी साझा कर सकते हैं।    Latest News in Hindi Today Hindi news  Interpol Begins Silver Notice #Interpol #SilverNotice #RedCornerNotice #MostWanted #InterpolAlert #GlobalCrackdown #InterpolSearch #InterpolUpdates

आगे और पढ़ें
India Slams Pakistan on Terrorism at UN

UN में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को जमकर धोया… सिंधु जल संधि पर भी कर दी बोलती बंद

संयुक्त राष्ट्र (UN) में चल रही अरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए (India Slams Pakistan on Terrorism at UN) उसके दोहरे चरित्र और सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) के उल्लंघन की तीखी आलोचना की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह न सिर्फ संधि का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि भारत पर लगातार आतंकवादी हमले करवा कर हजारों निर्दोष नागरिकों की जान भी ले चुका है। जिसकी वजह से सिंधु जल संधि  (Indus Water Treaty) को स्थगित कर दिया गया है।  पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 में सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को शांति और सद्भाव के आधार पर किया था। यह संधि उस समय भी लागू रही जब दोनों देशों के बीच तीन युद्ध हुए। भारत ने हर परिस्थिति में इस समझौते का सम्मान किया, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इस संधि को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा, “अब तक 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक आतंकवाद की वजह से मारे जा चुके हैं। हाल ही में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है।” भारत के इस तीखे और तथ्यपूर्ण भाषण के बाद पाकिस्तान की स्थिति संयुक्त राष्ट्र में असहज हो गई। उसकी पहले से ही कमजोर पड़ चुकी अंतरराष्ट्रीय साख को और धक्का लगा।  तथ्यों के साथ पाकिस्तान की बोलती कर दी बंद संयुक्त राष्ट्र सभा को संबोधित करते हुए पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने यह भी याद दिलाया कि 2012 में जम्मू-कश्मीर में तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर आतंकियों ने हमला किया था। यह हमला न सिर्फ एक निर्माण परियोजना पर था, बल्कि यह पाकिस्तान की उस मंशा को भी जाहिर करता है कि, यह देश भारत के जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाना और आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डालना चाहता है। सिंधु जल संधि के अंतर्गत भारत को अपनी परियोजनाओं में आवश्यक तकनीकी सुधार और बदलाव करने का पूरा अधिकार है, ताकि संचालन सुरक्षित और प्रभावी हो सके। लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इन कार्यों में बाधा डाली।  इसे भी पढ़ें:- सेना से जारी तकरार के चलते मोहम्मद यूनुस दे सकते हैं इस्तीफा? आतंक और संधि अब एक साथ नहीं चल सकते भारतीय प्रतिनिधि ने सभा को यह भी बताया कि भारत ने पिछले दो वर्षों में कई बार संधि में संशोधन पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित किया, लेकिन पाकिस्तान का रवैया हर बार टकरावपूर्ण रहा। ऐसे में भारत के पास सीमित विकल्प ही बचे थे। यही वजह है कि भारत ने अब यह निर्णय लिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक सिंधु जल संधि को स्थगित रखा जाएगा। अब आतंक और संधि एक साथ नहीं चल सकते। भारत ने हमेशा संयम और उदारता का प्रदर्शन किया है, लेकिन अब वह अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की जान को खतरे में नहीं डाल सकता। भारत के इस ठोस रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान की आतंकवाद-समर्थक नीतियों पर गंभीरता से विचार करे। Latest News in Hindi Today Hindi news India Slams Pakistan on Terrorism at UN IndiaVsPakistan #UNSpeech #TerrorismDebate #IndiaStandsStrong #SindhuWaterTreaty #PakExposed #ModiAtUN #IndiaUNResponse #DiplomaticStrike #GlobalTerrorTalk

आगे और पढ़ें
Mohammad Yunus May Resign

Mohammad Yunus May Resign: सेना से जारी तकरार के चलते मोहम्मद यूनुस दे सकते हैं इस्तीफा?

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में स्थति डाँवाडोल बन गई है। वैसे तो बांग्लादेश में लंबे समय से राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से अब तक बांग्लादेश स्थिर नहीं हो पाया है। खैर, वर्तमान में बांग्लादेश की कमान अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के हाथों में हैं इसके बावजूद स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। इस बीच खबर है कि मुहम्मद यूनुस जल्द अपने पद से जल्द ही इस्तीफा दे (Mohammad Yunus May Resign) सकते हैं। बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट की माने तो, बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस को काम करना लगातार मुश्किल होता चला जा रहा है। जानकारी के मुताबिक राजनीतिक दलों में आपसी सहमत न बन पाने के कारण मतभेद बढ़ता जा रहा है। बढ़ते मतभेद और राजनीतिक गतिरोध के चलते खबर है कि मुहम्मद यूनुस इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं। हालाँकि हाल के दिनों में मुहम्मद यूनुस और बांग्लादेश की सेना के प्रमुख के बीच भी तकरार की खबरें आईं थीं।  अगर युनुस अपना काम नहीं कर सकते तो उनके रहने का कोई मतलब (Mohammad Yunus May Resign) नहीं दरअसल, बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता निद इस्लाम ने खुलासा करते हुए कहा कि “मुहम्मद यूनुस इस्तीफा देने का (Mohammad Yunus May Resign) सोच रहे हैं।” जानकारी के मुताबिक निद इस्लाम ने मुहम्मद यूनुस से मुलाकात करने के बाद कहा कि “हम उनके इस्तीफे के बारे में सुन रहे हैं। इसलिए मैं इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए उनसे मिलने गया था। उन्होंने मुझे बताया कि वह इस बारे में सोच रहे हैं। उन्हें लगता है कि मौजूदा स्थिति ऐसी है कि वह काम करना जारी नहीं रख सकते।” इसपर अधिक बोलते हुए इस्लाम ने कहा कि “उन्होंने युनुस से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक दल एकजुट होकर सहयोग करेंगे और मुझे उम्मीद है कि सभी उनके साथ सहयोग करेंगे।” हालांकि, एनसीपी नेता ने कहा कि “अगर युनुस अपना काम नहीं कर सकते तो उनके रहने का कोई मतलब नहीं।” कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि मोहम्मद युनुस ने पद से इस्तीफा देने की धमकी दी। ऐसे में खबर भी है कि युनुस अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, क्योंकि राजनीतिक दल एक आम सहमति पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस वजह से युनुस को काम करने में दिक्कत हो रही है। माइंड गेम खेलने लगे (Mohammad Yunus May Resign) हैं मोहम्मद यूनुस  दरअसल, यूनुस सरकार एक नहीं, कई मोर्चों पर तमाम तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। सबसे बड़ा संकट सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान के साथ लगातार बढ़ता तनाव है। कहने की जरूरत नहीं, सेना और यूनुस के बीच मतभेद जग जाहिर है। तनाव बढ़ने की वजह लोग जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग बताई जा रही है। यही नहीं, बांग्लादेशी सेना मोहम्मद यूनुस की कार्यशैली और उनकी चीन और पाकिस्तान समर्थक नीतियों से असंतुष्ट है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस खुद की कुर्सी जाती देख इमोशनल ब्लैकमेल करने लगे हैं। करीबियों का कहना है कि यूनुस बांग्लादेश में अपना एकछत्र राज चाहते हैं। वो किसी की नहीं सुनते। ऐसे में जब उनसे सही से सरकार चलाने और चुनाव कराने के लिए कहा गया तो वह माइंड गेम खेलने लगे (Mohammad Yunus May Resign) हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल आखिर क्यों  मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने की सोच (Mohammad Yunus May Resign) रहे ऐसे में बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह कि मोहम्मद यूनुस आखिर इस्तीफा क्यों देने की सोच (Mohammad Yunus May Resign) रहे? क्या वो सेना से डरे हुए हैं या फिर उन्हें लग रहा है कि बांग्लादेश हाथ से निकलने वाला है। जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश के आर्मी चीफ जनरल वाकर-उज-जमान यूनुस को सुनाते हुए कहा है कि देश का भविष्य कोई गैर निर्वाचित सरकार तय नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि देश में जल्द से जल्द चुनाव होने चाहिए। भविष्य एक निर्वाचित सरकार तय करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने चुनाव के लिए दिसंबर 2025 की डेडलाइन दी है। कहने की जरूरत नहीं कि आर्मी चीफ के इस अल्टीमेटम के बाद यूनुस की कुर्सी डगमगा गई है। उन्हें अब लग रहा है कि उनकी कुर्सी जाने ही वाली है। सो, इसलिए वह खुद इस्तीफा देकर एक अलग खेल खेलना चाहते हैं। यूनुस के इस्तीफा देने के पीछे एक वजह यह भी हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Mohammad Yunus May Resign #MohammadYunus #Resignation #MaldivesPolitics #MilitaryTension #BreakingNews

आगे और पढ़ें
Pakistan news today

Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest: पानी की वजह से पाकिस्तान के सिंध में इस मंत्री का फूंका घर, हथियारों से लैस प्रदर्शनकारियों ने मचाया तांडव

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के हाल खस्ता है। दरअसल, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पानी की तंगी को लेकर हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि लोग हिंसा पर उतर आये हैं। लोकल मीडिया के मुताबिक कई हफ्तों से चल रहा यह विवाद मंगलवार को उस समय हिंसक हो गया जब नौशहरो फिरोज जिले के मोरो शहर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस झड़प में एक प्रदर्शनकारी की जान चली गई। दरअसल, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक विवादित नहर परियोजना को लेकर विरोध प्रदर्शन भड़का हुआ है। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने मोरो शहर में गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के घर को आग के हवाले कर (Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest) दिया। डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा के दौरान सिंध के गृह मंत्री जिया लंजर के आवास को फूंक दिया है। इस दौरान हुई झड़पों  में एक डीएसपी सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। पुलिसकर्मी ही नहीं आम नागरिकों के भी घायल होने की खबर है। जानकारी के अनुसार सड़कों पर दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई है और पूरे इलाके में अफरा-तफरी और अराजकता का माहौल बना हुआ है। सिंध के लोग किसी भी हाल में नहर के विरोध में (Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest) थे खबर के मुताबिक सिंधु नदी पर नया नहर बनना प्रस्तावित था। सिंध के लोग किसी भी हाल में इस नहर के विरोध में (Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest) थे। इस बीच सिंध सभा द्वारा एक विरोश प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसे हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया। फिर क्या था इसके विरोध में हथियारों से लैस प्रदर्शनकारियों ने मोरो बाईपास रोड को जाम कर दिया। देखते ही देखते ही प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। और सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के घर में घुसकर तोड़फोड़ की। इसके साथ ही कई जगहों पर आग भी लगा दी। वहां मौजूद मोटरसाइकिलों को आग के हवाले किया गया। इस पूरे मामले पर पुलिस ने एक बयान जारी कर बताया कि “बेनजीराबाद के पुलिस उप महानिरीक्षक परवेज चंदियो और नौशहरो फिरोज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संघार मलिक घटनास्थल पर पहुंचे। हालात पर काबू पाने के लिए विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को भी बुलाया गया।” इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल अजीज धामरा ने इसे आतंकी हरकत (Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest) दिया करार  पीपीपी सिंध के सूचना सचिव अजीज धामरा ने इस घटना की आलोचना करते हुए इसे एक आतंकी हरकत करार (Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest) दिया। इस पर उन्होंने कहा कि “जनता को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के घर पर हमला करना एक साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।” यही नहीं, सिंध के गृह मंत्री ने नौशहरो फिरोज के एसएसपी से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि फरवरी 2025 में पाकिस्तान सरकार ने सिंधु नदी प्रणाली पर आधारित 6 नए नहरों के निर्माण की योजना की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत पंजाब, बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों में नहरें बनाई जानी हैं। यह तो ठीक, लेकिन इस परियोजना के चलते विवाद भी हुए। आलोचकों का आरोप है कि पंजाब सरकार इस योजना के जरिए से सिंध के जल संसाधनों को पंजाब की ओर मोड़ना चाहती है। दरअसल, सरकार पंजाब की 1.9 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि की सिंचाई करना चाहती है। यह तो ठीक लेकिन, सिंध के लोगों का मानना है कि “यह योजना उनके जल अधिकारों का हनन करती है। पहले से जल संकट का सामना कर रहे इलाके के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Minister’s House Burned Amid Sindh Water Protest #PakistanNews #SindhProtest #WaterCrisis #MinisterHouseBurned #PakistanPolitics #BreakingNews #PakistanRiots #ArmedProtest #SindhCrisis #WaterShortage

आगे और पढ़ें
Israel bombings Gaza

Israel Gaza Conflict: इजरायल ने गाजा को किया तबाह, दिन-रात हो रही बमबारी, पलायन या मौत दो ही विकल्प

बीते कई दिनों से गाजा में हर दिन हमला तीव्र होता जा (Israel Gaza Conflict) रहा है। गाजा में आये दिन औसतन 200 से अधिक लोगों की मौत हो रही है। हालांकि इजराइल-हमास में जारी संघर्ष के बीच नेतन्याहू ने गाजा पर नियंत्रण का ऐलान कर दिया है। लेकिन, एक तरफ जहाँ इजराइल ने गाजा पर नियंत्रण की घोषणा की है तो वहीं दूसरी तरफ हमास आम नागरिकों को ढाल बना रहा है। इजराइली सेना और हमास के बीच जारी संघर्ष अब इस स्थिति में पहुँच गया जहाँ सिर्फ मौत ही मौत है। इजरायल आये दिन गाजा पर बमबारी कर रहा है। इस बमबारी के बीच हमास आम लोगों को शील्ड बनाकर इजराइली हमले रोकना चाहता है। इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है। बढ़ते दबाव के चलते डोनाल्ड ट्रंप ने दोहरी नीति अपना ली है। उनकी इस नीति की वजह से यूरोपीय देशों के बीच मतभेद होने लगे हैं। होने वाले अगले एक्शन को लेकर सभी ने चिंता जाहिर की है। खैर, इजरायल द्वारा किये जा रहे हमलों की वजह से गाजा में खाद्य संकट का खतरा गहरा गया है। हालाँकि बढ़ते संकट के बीच इजराइल कुछ सहायता पहुंचाने की बात कर रहा है। ऐसे में लोग अपनी जान बचाकर पलायन कर रहे हैं।  फिलिस्तीनियों के पलायन तक जिंदा रहने की आखिरी उम्मीद वाला एक ही शहर (Israel Gaza Conflict) है राफा  बता दें कि गाजा का अंतिम दक्षिणी सिरा राफा है, जो फिलिस्तीनियों के पलायन तक जिंदा रहने की आखिरी उम्मीद वाला शहर (Israel Gaza Conflict) है, लेकिन ये शहर अब जमींदोज होने के कगार पर है। गाजा पर ये कार्रवाई इजराइली सेना ऑपरेशन गिडियंस चैरियट के तहत कर रही है और हैरानी की बात ये है कि, न तो इजराइल के इस ऑपरेशन पर ट्रंप कुछ बोल रहे हैं, न ही उन्हें इस संहार कार्यक्रम से कोई फर्क पड़ रहा है। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि ऑपरेशन गिडियंस चैरियट को ट्रंप का मूक समर्थन है। इसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि गाजा में जारी संहार ट्रंप के प्लान के तहत ही हो रहा है। और तो और कहना यह भी गलत नहीं होगा कि गाजा के विनाश की योजना भी पेंटागन में ही तैयार की गई थी? खैर, बीच वैश्विक समुदाय की नज़र गाजा की तरफ घूम चुकी है। जिसके चलते ट्रंप खुद को इस कार्रवाई से अलग करने ढोंग करने लगे हैं।  अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हम गाजा पर नियंत्रण (Israel Gaza Conflict) रखेंगे- पीएम बेंजामिन नेतन्याहू इस बीच इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि “अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हम गाजा पर नियंत्रण (Israel Gaza Conflict) रखेंगे। इस स्थिति में गाजा पर खाद्यान्न का संकट मंडरा सकता है। इसलिए हम सहायता आपूर्ति पर लगी रोक हटा रहे हैं।” हालाँकि इस बयान के अनुरूप इजराइली कार्रवाई भी दिख रही है। ये रोकी गई सहायता है, जिसे शुरू किया जाना है, तो दूसरी तरफ इजराइली सेना ने गाजा पर विध्वंसक हमले भी जारी रखे हैं। बता दें कि राफा,खान यूनिस, बेत लाहिया और नुसीरत शिविर में इतने भयावह हमले हुए हैं कि इसे रोकने के लिए फिलिस्तीन हाथ जोड़ गुजारिश कर रहा है। राफा शहर जमींदोज होने के कगार पर है। हालांकि इस कार्रवाई के बीच इजराइल ने गाजा से बाहर निकलने की ढील भी दी है जिसमें चुनिंदा फिलिस्तीनी ही बाहर जा सकते हैं और ये सख्ती इसलिए बरती गई है, ताकि हमास के लड़ाके गाजा से बाहर न निकल सकें। कारण यही जो, इस सख्ती ने यूरोप के कई देशों को भी इजराइल के खिलाफ खड़ा कर दिया है।  इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल गाजा तक पहुंचने वाली सहायता पर प्रतिबंध नहीं हटाता है तो इजराइल के खिलाफ हमें कोई करनी (Israel Gaza Conflict) पड़ेगी ठोस कार्रवाई  इस पूरे बवाल पर फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि “अगर इजराइल गाजा पर नए हमले नहीं रोकता है, गाजा तक पहुंचने वाली सहायता पर प्रतिबंध नहीं हटाता है तो इजराइल के खिलाफ हमें कोई ठोस कार्रवाई करनी (Israel Gaza Conflict) पड़ेगी।” यह तो ठीक, लेकिन नेतन्याहू ने गाजा पर नियंत्रण के लिए कदम आगे बढ़ा दिया है। बेशक नेतन्याहू को रोक पाना सबके बस की बात नहीं है। हालांकि ट्रंप टाल सकते हैं, लेकिन ट्रंप ने कुछ और ही सोच रखा है। कुछ भी ही इजरायल गाजा को वीरान कर के ही मानेगा। और बड़ी बात यह कि ट्रंप खुद भी यही चाहते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news #IsraelGazaConflict #GazaUnderAttack #IsraelAirstrikes #MiddleEastCrisis #PalestineConflict #GazaWar #BreakingNews #HumanitarianCrisis #GazaNews #PrayForGaza

आगे और पढ़ें
India exposes Pakistan

India exposes Pakistan: इस तरह पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब करेगा भारत 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत चैन से नहीं बैठने वाला। पहलगाम हमले का खामियाजा अभी पाकिस्तान (Pakistan) को और भी भुगतना है। आतंकियों की जन्नत कहे जाने वाले पकिस्तान को भारत कहीं का नहीं छोड़ेगा। इस कड़ी में भारत सरकार ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने एक्सपोज़ करने के लिए एक बड़ी चाल चल दी है। जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार पाकिस्तान को बेनकाब (India exposes Pakistan) करने के लिए मल्टी पार्टी डेलिगेशन भेजेगी। फ़िलहाल सरकार अभी सभी दलों से बातचीत कर रही है। खबर है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद अलग-अलग देशों में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की संभावना पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है। बता दें कि सरकार मल्टी पार्टी डेलिगेशन यानी प्रतिनिधिमंडल की संरचना और कार्यक्रम को अंतिम रूप देने से पहले उन्हें साथ लाना चाहती है। सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर एकजुट मोर्चा पेश करने की दिशा में यह सरकार का यह एक कड़ा प्रयास है।  अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान (India exposes Pakistan) के भीतर पनप रहे आतंकवाद पर रुख स्पष्ट करना है दरअसल, इस पहल का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने न सिर्फ पाकिस्तान (Pakistan) के भीतर पनप रहे आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट रूप से रखना है बल्कि पाकिस्तान को बेनकाब (India exposes Pakistan) करना है। जानकारी के मुताबिक विदेश जाने वाला भारत का मल्टी पार्टी डेलिगेशन यानी बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत का पक्ष रखने हेतु पांच सूत्रीय एजेंडे पर डिस्कस करेगा। मसलन,  इसे भी पढ़ें:- कांग्रेस विधायक ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कही यह बात आतंकवाद के मद्देनजर ऑपरेशन सिंदूर की जरूरत और उसके मायनों पर भारत का पक्ष (India exposes Pakistan) रखेगी डेलिगेशन  प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय डेलिगेशन थिंक टैंक, विदेशी सरकारों और मीडिया संस्थानों से बातचीत करेगी। यही नहीं भारत की यह टीम पाकिस्तानी (Pakistan) जमीन से आतंकवाद के मद्देनजर ऑपरेशन सिंदूर की जरूरत और उसके मायनों पर भारत का पक्ष (India exposes Pakistan) रखेगी। खबर है कि सभी पक्षों से बातचीत के बाद डेलिगेशन का स्वरूप घोषित किया जाएगा, क्योंकि सरकार सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर एक बहुदलीय दृष्टिकोण चाहती है। हालाँकि यह कोई पहली बार नहीं है कि भारत ने इस तरह की कोई पहल की है। इससे पहले भी पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव ने अटल बिहारी वाजपेयी को यूएनएचआरसी (UNHRC) में भेजा था। इसके अलावा  26/11 मुंबई हमलों के बाद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने भी आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बात की थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news India exposes Pakistan #IndiaExposesPakistan #PakistanTerrorism #ModiSpeech #IndiaUN #DiplomaticStrike #IndiaVsPakistan #PakistanLiesExposed #UNUpdate #GlobalSecurity #TerrorismExposed

आगे और पढ़ें
Peace talks with Pakistan

Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की अकड़ हुई ढीली, लगाने लगा शांति वार्ता की गुहार

पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हमला कर 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर इस कायराना आतंकी हमले का बदला लिया था। इस कार्रवाई में भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया बल्कि पाकिस्तान के एयर डिफेन्स सिस्टम और एयर बेस को भी तबाह कर दिया। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया था। कहने की जरूरत नहीं इस ऑपरेशन के बाद पूरी दुनिया ने भारत की सैन्य शक्ति का लोहा माना। ऑपरेशन सिन्दूर के तहत भारत आतंक का पर्याय बन चुके पाकिस्तान को ऐसी चोट दी है कि वो कभी नहीं भूलेगा। तीन दिन चली इस स्ट्राइक में पाकिस्तान घुटनों पर आ गया। और सीजफायर की गुहार लगाने लगा। मजे की बात यह कि भारत से कुटने के बाद अब पाकिस्तान भारत के साथ शांति वार्ता करने को बेकरार है। बड़ी बात यह कि पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद भारत के सामने बातचीत (Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor) का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि “शांति बहाल करने के लिए वो वार्ता करने को तैयार हैं। पाक पीएम के अनुसार इस शांति वार्ता में कश्मीर का मुद्दा भी शामिल होगा।” पाकिस्तान ने भारत के समक्ष बातचीत का (Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor) रखा है प्रस्ताव  दरअसल, गुरुवार को पंजाब के कामरा एअरबेस के दौरे पर गए पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सैन्य अधिकारियों और सेना को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत-पाक तनाव पर चर्चा की। इस बीच उन्होंने भारत के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव (Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor)  भी रखा है। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान शांति बहाल करने के लिए भारत के साथ वार्ता करना चाहता है।” यही नहीं, कश्मीर मुद्द्दे पर बोलते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि “भारत ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। भारत हमेशा जोर देता है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं और हमेशा रहेंगे।” इस संबोधन के दौरान कामरा एअरबेस पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, विदेश मंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख जनरल मुनीर और वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू भी मौजूद थे। इसे भी पढ़ें:- कांग्रेस विधायक ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कही यह बात पाकिस्तान पीओके में अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय इलाकों को कब खाली करेगा- भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर हालाँकि अभी तक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस ऑफर (Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor) पर भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन गुरूवार को होंडुरास के दूतावास का उद्घाटन करते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह जरूर साफ कर दिया था कि “कश्मीर पर चर्चा के लिए केवल एक ही बात बची है कि पाकिस्तान पीओके में अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय इलाकों को कब खाली करेगा?” देखना यह दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान के इस प्रस्ताव पर भारत क्या पहल करता है? क्या भारत शांतिवार्ता के लिए राजी होगा? खैर, होगा या नहीं ये तो वक़्त ही बताएगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Pakistan Seeks Peace Talks After Operation Sindoor #OperationSindoor #PakistanPeaceTalks #IndiaPakistanTensions #PeaceNegotiations #PakistanAppealsPeace #IndiaStrikesBack #MilitaryDiplomacy #IndiaDefence #PakistanArmy #SouthAsiaSecurity

आगे और पढ़ें
Translate »