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Elon Musk warns Trump of launching a new ‘American Party’

एलॉन मस्‍क की राष्ट्रपति ट्रंप को खुली धमकी- ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ तो बनाऊंगा नई ‘अमेरिकन पार्टी’

अरबपति एलॉन मस्क (Elon Musk) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ‘वन बिग, ब्यूटीफुल बिल’ की एक बार फिर से जमकर आलोचना की है। इस आलोचना के दौरान एलॉन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली धमकी भी दे डाली। उन्‍होंने कहा कि इस बिल को अगर सीनेट मंजूरी देती है, तो वह बिल पास होने के अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। एलॉन मस्क ने इस बिल को ट्रंप का पागलपन बताते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों  टैक्‍सपेयर्स पर एक बोझ की तरह होगा।   बता दें कि ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ ट्रंप का ड्रीम बिल है। इसमें टैक्स कटौती, अवैध प्रवासियों को देश से निकालने और सेना का बजट बढ़ाने जैसी अहम योजनाओं पर खर्च को कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप इस खास बिल के जरिए साल 2017 में लागू किए गए टैक्स कटौती योजना को और आगे ले जाना चाहते हैं। साथ ही देश से प्रवासियों को निकालने के साथ सेना को और मजबूत बनाना चाहते हैं। इस बिल में 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। इस भारी भरकम बिल के कारण ही आलोचक इसका विरोध कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर यह बिल पास होता है तो अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में करीब 3.3 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी होगी साथ ही गरीबों के हेल्थकेयर में 1 ट्रिलियन डॉलर की कटौती की जाएगी।  एलॉन मस्क ने सांसदों को भी दे दी खुली धमकी  एलॉन मस्क (Elon Musk) ने इस बिल का शुरू से ही तीखा विरोध कर रहे हैं। इस बिल की वजह से ही वो ट्रंप के दोस्त से उनके दुश्मन बन चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का साथ छोड़ने के बाद से ही वो इस बिल का खुला विरोध करते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘देश का हर वो सांसद जो देश के पैसे का बर्बादी नहीं चाहता और खर्च कम करना चाहता है। अगर वो कर्ज बढ़ाने वाले इस ऐतिहासिक बिल के पक्ष में वोट देता है, उसे शर्म आनी चाहिए।’ इस के साथ मस्क ने यह भी धमकी दी कि, ‘अगर किसी सांसद ने इस बिल के पक्ष में वोट किया, तो उसे मैं अगले साल उनके प्राइमरी चुनाव में हराकर दम लूंगा, इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े।’ लोगो को नया विकल्प देने के लिए बनाउंगा नई पार्टी- मस्क  एलॉन मस्क ने अपने एक दूसरे पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर ये ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ, तो वे अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ के नाम से नई पार्टी बनाएंगे। अब वक्त है कि अमेरिकी लोगों को रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स के अलावा एक तीसरी राजनीतिक पार्टी का भी विकल्प दिया जाए। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।   इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ सीनेट में वोटिंग शुरू, 7 घंटे में मात्र 14 वोट  बता दें कि, अमेरिकी सीनेट में इस बिल पर सोमवार को वोटिंग की गई। अमेरिका में किसी भी बिल के संशोधन पर अलग-अलग वोटिंग होती है। इस बिल पर पहले 7 घंटे के दौरान मात्र 14 वोट ही पड़े। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी इस बिल को शुक्रवार तक सीनेट में पास कराना चाहती है, लेकिन यहां पर रिपब्लिकन पार्टी अल्पमत में है। जिसकी वजह से इस बिल के सीनेट में लटकने की संभावना ज्यादा है। अगर यहां से यह बिल पास हो जाता है तो इसे हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रखा जाएगा, जहां रिपब्लिकन बहुमत में हैं। हालांकि डेमोक्रेट्स के साथ कुछ रिपब्लिकन भी इस बिल का खुल कर विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों का दावा है कि अगर यह बिल आया तो लाखों नौकरियां खत्म हो जाएंगी। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप इस बिल को अपनी नीतियों की बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk #ElonMusk #DonaldTrump #AmericanParty #USPolitics #OneBigBeautifulBill #MuskVsTrump #USElection2025

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Bangladesh gangrape

Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl: मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में हिंदू लड़की से गैंगरेप, भड़के लोग

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ लगातार हिंसा जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद आई हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके घरों के जलाया गया, हत्याएं की गई। यही नहीं, हिंदुओं को नौकरी से निकालने हेतु जबरन उनके इस्तीफे तक लिए गए हैं। हालिया मामला एक हिंदू लड़की के साथ हुए गैंगरेप से (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) जुड़ा है। इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा देखने मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक हिंदू लड़की के साथ हैवानियत की यह घटना बांग्लादेश के कोमिला जिले में हुई है। हिंदू लड़की के साथ हुए गैंगरेप के बाद बांग्लादेश में लोगों का गुस्सा भड़क गया है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। दरअसल, यह घटना 26 जून को हुई थी। 21 वर्षीय पीड़िता के साथ कोमिला में उसके घर पर एक स्थानीय नेता ने गैंगरेप किया था। गैंगरेप के दौरान लड़की का वीडियो भी बनाया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस हैवानियत का खुलासा हुआ।  फजर अली (36) रात करीब 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुस गया और उसके साथ (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) बलात्कार किया बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट न्यू एज के मुताबिक, बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के स्थानीय नेता फजर अली (36) रात करीब 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुस गया और उसके साथ बलात्कार किया और पिटाई (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) की। चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग जमा हो गए और आरोपियों को पकड़ लिया। इस घटना के बाद ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने इसके विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये। इस दौरान छात्रों ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने गैंगरेप की निंदा करते हुए परिसर में मार्च निकाला। अल्पसंख्यक छात्रों के लिए समर्पित जगन्नाथ हॉल के छात्रावास के छात्रों ने न्याय की मांग करते हुए जुलूस निकाला तो वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिब अहमद वाजेद ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पिछले 11 महीनों में भीड़ के हमलों, आतंकवाद और बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि के लिए यूनुस प्रशासन को दोषी है। इसके अलावा इस पूरे मामले पर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।  इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीर और पहचान उजागर करने के आरोप में (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) गिरफ्तार किया गया है मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी 36 वर्षीय फजोर अली, जो कि स्थानीय नेता है, सहित पांच लोगों को गिरफ्तार (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) किया है। कोमिला जिले के पुलिस प्रमुख नजीर अहमद खान ने कहा कि “मुख्य आरोपी को ढाका के सईदाबाद इलाके से छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया गया है। चार अन्य को सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीर और पहचान उजागर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।” खैर, इस दरम्यान उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि “सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को तुरंत हटाया जाए।” बता दें कि दो न्यायाधीशों की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे आवश्यक उपचार प्रदान करने को भी कहा है। गौरतलब हो कि पिछले साल अगस्त में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार का पतन होने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl #Bangladesh #HinduGirl #Gangrape #MohammadYunus #BangladeshNews #JusticeForVictim #HumanRights #OutrageInBangladesh

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Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah: ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शिया धर्मगुरु ने जारी किया फतवा, दोनों को बताया अल्लाह का दुश्मन

ईरान का परमाणु कार्यक्रम मुसीबत ईरान की जान का दुश्मन बना हुआ है। दरअसल, इजरायल और अमेरिका नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार बनाए। इसी के चलते इसलिए इजरायल ने गत 12 जून को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागीं। दोनों के बीच यह जंग 12 दिन चली। फिर 13वें दिन अमेरिका ने कतर के जरिए ईरान और इजरायल में सीजफायर करा दिया। महत्वपूर्ण बात यह कि सीजफायर के बाद इजरायल तो चुप है, लेकिन ईरान और अमेरिका में जबानी जंग चल रही है। अमेरिका की पहल के चलते भले ही इजरायल और ईरान में सीज फायर हो गया है लेकिन जुबानी जंग है कि थमने का नाम नहीं ले रही है। अब ईरान के शिया धर्मगुरु ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जारी किया है।  दुनियाभर के मुसलमानों से दोनों जान से मारने का किया (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) आह्वान  दरअसल, शिया गुरु देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी दिए जाने से काफी नाराज हैं। फतवा जारी करके ट्रंप और नेतन्याहू को दुश्मन करार देकर जान से मारने का आह्वान किया गया है। इस फतवे के बाद दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। जानकारी के लिए बता दें कि ईरान के शिया धार्मिक नेता ग्रैंड अयातुल्ला नासेर मकारिम शिराजी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक फतवा जारी किया है। जारी फतवे में उन्होंने ट्रंप और नेतन्याहू को अल्लाह का दुश्मन घोषित (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) किया गया। और दुनियाभर के मुसलमानों से दोनों जान से मारने का आह्वान किया गया है। जो भी व्यक्ति या सरकार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी देगी, उसे अल्लाह का दुश्मन माना (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जाएगा यही नहीं, ग्रैंड अयातुल्ला नूरी हमदानी ने भी फतवा जारी किया है और कहा है कि “जो भी व्यक्ति या सरकार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी देगी, उसे अल्लाह का दुश्मन माना (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जाएगा।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अपने परिवार के साथ एक बंकर में छिपकर बैठे हैं। उन्होंने वहीं से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर ईरान के परमाणु ठिकानों पर अब इजरायल और अमेरिका ने हमला किया तो अंजाम बुरा होगा। ईरान अपनी पूरी ताकत के साथ जवाब देगा और मध्य पूर्व में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।” इसके अलावा खामेनेई ने इजरायल पर ईरान की जीत का ऐलान करके देशवासियों को जश्न मनाने को भी कहा है।” मेहर न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, मकारिम ने फैसले में कहा कि “अगर कोई व्यक्ति जो मरजा को धमकी देता है वह वॉरलॉर्ड या मोहरेब माना जाता है।” बता दें कि मोहरेब वह व्यक्ति होता है, जो ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ता है। ईरानी कानून के मुताबिक ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा दी जाती है।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को बताया एहसान (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) फरामोश खैर, इस बीच खामेनेई की इस चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें करार जवाब देते हुए उन्हें एहसान (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) फरामोश कहा। और चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की या सोचा भी तो अमेरिका पहले से ज्यादा हमले करेगा।” ट्रंप ने कहा कि “खामेनेई कहां छिपकर बैठे हैं, इजरायल और अमेरिका दोनों को पता है, लेकिन उन्होंने खामेनेई को भयानक मौत से बचाया है और खामेनेई जान बचाने का आभार जताने की बजाय धमकियां दे रहे हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news  #iran #fatwa #trump #netanyahu #enemyofallah #israeliran #middleeastnews #religiousnews

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Pakistan suicide bombing, 13 soldiers killed

13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack: पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमले में सेना के 13 जवानों की मौत, 10 घायल

आतंकियों को पनाह देने वाला पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अब खुद ही आतंवाद का शिकार होने लगा है। वहाँ आये दिन बम धमाके में लोगों की जान जाती रहती है। ताजा मामला है पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी हिस्से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले का जहाँ एक आत्मघाती हमले में 13 सैनिकों की मौत हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गई। जानकारी के मुताबिक आत्मघाती हमलावर विस्फोटक से भरे वाहन में सवार था। और उसने सेना के काफिले को सीधी टक्कर मार दी। इस टक्कर के बाद हुए धमाके में पाकिस्तानी सेना के 13 जवानों की मौत हो गई। इस हमले में 10 गंभीर रुप से घायल हुए हैं और 19 आम नागरिक भी चोटिल हुए हैं।  धमाके में 13 सैनिक मारे गए, 10 सैन्यकर्मी और 19 नागरिक घायल हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गए इस पूरे मामले पर स्थानीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि एक “आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे वाहन को सैन्य काफिले में घुसा दिया। इसके बाद हुए धमाके में 13 सैनिक मारे गए, 10 सैन्यकर्मी और 19 नागरिक घायल हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गए। इस हमले में आस-पास के घरों को भी नुकसान पहुंचा है।” पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “विस्फोट के कारण दो घरों की छतें भी गिर गईं, जिससे छह बच्चे घायल हो गए।” अब तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पीटीआई की माने तो घटना के समय सैन्य आवाजाही के कारण इलाके में कर्फ्यू लगाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट के बाद राहत अभियान शुरू किया है। गौरतलब हो कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पाकिस्तान के सबसे तनावपूर्ण इलाकों में से एक है। यहां अक्सर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमले होते रहे हैं। यही नहीं, पाकिस्तान में पिछले कुछ समय में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी हुई है।  यह हमला अफगानिस्तान सीमा के पास (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) हुआ यहाँ गौर करने वाली बात यह कि पिछले एक साल में पाकिस्तानी सेना पर कई आतंकी हमले हुए हैं। दिसंबर 2024 में एक हमले में 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे और 8 घायल हुए थे। यह हमला अफगानिस्तान सीमा के पास (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) हुआ। इस हमले की जिम्मेदारी टीटीपी ने ली। फिर जनवरी में बलूच लिबरेशन आर्मी ने केच में 35 हमले किए।  इन हमलों में 94 सैनिकों की मौत का दावा किया गया। इसके बाद जून में ग्वादर के सयाबद में बलोच आर्मी ने हमला किया था, जिसमें 16 सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमले बड़ी तेजी से बढ़े हैं। कहने की जरूरत नहीं, ऐसे में एक और बड़ा हमला पाकिस्तान की चिंता बढ़ाने वाला है। बेशक यह दिखाती है कि पिछले एक वर्ष में पाकिस्तानी सेना को कई आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों को मार गिराया (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) था जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च में पाकिस्तानी सेना ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि उसने टीटीपी से संबंध रखने वाले 10 संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) है। दरअसल दक्षिणी वजीरिस्तान स्थित जंडोला चेकपोस्ट के पास फ्रंटियर कोर के शिविर पर एक आत्मघाती हमला हुआ था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों को मार गिराया था। एएफपी के मुताबिक साल की शुरुआत से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान दोनों में सरकार से लड़ने वाले सशस्त्र समूहों द्वारा अब तक लगभग 290 लोग, जिनमें ज्यादातर सुरक्षा अधिकारी हैं, मारे गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news 13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack #pakistan #suicidebombing #soldierskilled #terrorattack #breakingnews #pakistanarmy #worldnews

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US Cuts Trade Ties with Canada Over Digital Tax

अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए कनाडा के साथ सभी व्यापारिक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को व्यापार के लिए कठिन देश करार देते हुए यह फैसला लिया है। इस निर्णय के पीछे कनाडा की ओर से लगाए गए डिजिटल सर्विस टैक्स (Digital Service Tax) और अत्यधिक टैरिफ को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप ने सोहल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर लिखा है कि जब कनाडा अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है और अब डिजिटल सेवाओं पर कर थोप रहा है, तो अमेरिका ऐसे देश के साथ व्यापारिक रिश्ता क्यों बनाए रखे? इस फैसले से अमेरिका-कनाडा (America-Canada) के लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों को तगड़ा झटका लगा है। कनाडा पर संभावित असर कनाडा की अर्थव्यवस्था (Canada’s Economy) में अमेरिका की हिस्सेदारी अत्यधिक है। साल 2024 में कनाडा ने कुल निर्यात का लगभग 75% और आयात का 50% हिस्सा अमेरिका के साथ किया था। अमेरिका-कनाडा (America-Canada) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार का टूटना कनाडा के लिए बहुआयामी संकट खड़ा कर सकता है। समस्या खासकर ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र इस निर्णय से सीधे प्रभावित होंगे। कनाडा की GDP में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। यह गिरावट बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। ओंटारियो, क्यूबेक जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं पर संकट अमेरिका द्वारा रोजाना लगभग 4 मिलियन बैरल तेल कनाडा से आयात किया जाता था। इस आयात के रुकते ही कनाडा की ऑयल और एनर्जी कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात भी बंद हो जाएगा, जिससे कनाडा में उत्पादन लागत और महंगाई में इजाफा होगा। कनाडा को विकल्प के रूप में चीन, भारत या यूरोप जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने होंगे, जो न केवल समय लेगा बल्कि जियोपॉलिटिकल के अनुसार भी चुनौतीपूर्ण भी होगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा झटका कनाडा का ऑटो सेक्टर (Canada’s Auto Sector) भी इस फैसले से खासा प्रभावित होगा। अमेरिका से व्यापार रुकने के कारण फोर्ड, जनरल मोटर्स (GM), स्टेलेंटिस जैसी बड़ी कंपनियों के संचालन पर असर पड़ेगा। संभावनाएं हैं कि इन कंपनियों को या तो उत्पादन कम करना पड़े या फिर ऑफिस बंद करने पड़ें। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि तकनीकी निवेश पर भी ब्रेक लग जाएगा। कमजोर होता कनाडाई डॉलर और निवेश में गिरावट इस निर्णय के चलते कनाडाई डॉलर पर दबाव बढ़ेगा और उसकी वैल्यू में गिरावट हो सकती है। इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका से निवेश बंद होने के कारण कनाडा के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स भी रुक सकते हैं। इसे भी पढ़ें:-  ‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप रणनीतिक साझेदारियों पर भी खतरा अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच हुआ USMCA (पूर्व NAFTA) समझौता भी इस निर्णय से टूट सकता है। इससे न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक सहयोग पर भी असर पड़ेगा। NORAD और NATO जैसे रक्षा संगठनों में साझेदारी कमजोर हो सकती है, जिससे उत्तर अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का यह फैसला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़े प्रभाव वाला है। कनाडा के लिए अमेरिका के बिना व्यापार चलाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। जहां एक ओर अमेरिका कनाडा पर कर नीति को लेकर सख्ती बरत रहा है, वहीं कनाडा को अपने व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और गहराने की संभावना है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Truth Social #uscanadadispute #digitalservicestax #ustraderelations #canadataxrow #tradeconflict

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Trump Warns of Bombing Iran Again if Needed

‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप

इजरायल और ईरान युद्ध (Israel–Iran War) के दौरान अमेरिका ने भी ईरान पर बम गिराए थे। अमेरिका ने यह बम ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट पर गिराए थे और दावा किया था कि इस हमले में ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए, वहीं ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों को सिर्फ मामूली नुकसान हुआ है। हालांकि अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस हमले को लेकर अपने ही देश में अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। अमेरिका के कांग्रेस का ऊपरी सदन में अमेरिकी हमले को लेकर बहस भी हुई और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को ईरान पर आगे हमला करने से रोकने का प्रयास भी हुआ। लेकिन विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी का यह प्रयास विफल हो गया। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में अमेरिकी राष्ट्रपति के युद्ध शक्तियों को फिर से स्थापित करने का प्रयास लेकर आई थी। डेमोक्रेटिक पार्टी का दावा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस से अनुमति लिए ईरान पर हमला (Israel–Iran War) किया था, लेकिन डेमोक्रेटिक सांसदों के इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन पार्टी ने विफल कर दिया। इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेिटक सीनेटर टिम कैन ने रखा था। इसमें टिम कैन ने लिखित में प्रस्ताव दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति ट्रंप ने नियम का उल्लंघन किया है। अगर आगे इस तरह की सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए तो पहले ट्रंप को कांग्रेस से अनुमति लेनी होगी।  ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं- ट्रंप सीनेट में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान जब उनसे पूछे गया कि क्या वह आवश्यक समझे जाने पर फिर से ईरान के न्यूक्लियर साइट पर बमबारी करने पर विचार कर सकते हैं, तो इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, जरूर बिना किसी सवाल के। अगर जरूरत पड़ी तो वह बगैर सोचे ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।’ वहीं, सीनेट में इस प्रस्ताव को रखने को विपक्ष की ट्रंप को घेरने की एक लंबी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।  सीनेट में ट्रंप को मिला पूरा समर्थन  बता दें कि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत हैं। जब इस प्रस्ताव को रखा गया तो वे राष्ट्रपति के समर्थन में खड़े हो गए। इन सीनेटर का कहना था कि ईरान न सिर्फ इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इसलिए ईरान तक कठोर कार्रवाई जरूरी था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमला करने का जो निर्णाय लिया वह ठीक था, इस कार्रवाई के कारण ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला गया है। इस दौरान रिपब्लिकन सीनेटर एकमत होकर कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना ईरान के तीन न्यूक्लियर साइट पर अमेरिकी बमबारी करने के फैसले का समर्थन किया।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? ट्रंप अगर डील करना चाहते हैं तो सम्मान करें- ईरान  डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ जहां अपने ही देश में घेरे जा रहे हैं, वहीं बड़बोलेपन की वजह से ईरान भी उन पर पलटवार कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर ट्रंप ईरान के साथ वास्तव में कोई समझौता करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के प्रति सम्मानजनक भाषा का उपयोग करा होगा। दरअसल, ट्रंप ने कहा था कि अयातुल्ला खामेनेई को अपमानजनक मौत मिलने वाली थी, लेकिन हमने बचा लिया। इसी के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘ईरानी लोगों का आत्मसम्मान और दृढ़ता खून में है। हमारी राष्ट्रीय भावना बेहद सीधी और स्पष्ट है। हम अपनी स्वतंत्रता को समझते और पहचानते हैं। हम किसी को अपने भाग्य का निर्धारण करने की इजाजत नहीं देते। इसके लिए हम अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हैं। अगर ट्रंप को ईरान के साथ कोई समझौता करना है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक बात करनी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #trump #iran #bombing #senate #usnews #worldnews #middleeast

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Pakistan approached Court of Arbitration on Indus Water Treaty

सिंधु जल समझौते पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पहुंचा पाकिस्तान तो भारत ने दे दिया करारा झटका

सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा स्थगित करने के बाद से ही पाकिस्तान कभी युद्ध की धमकी दे रहा है तो कभी बातचीत की भीख मांग रहा है। लेकिन इससे भी दाल नहीं गली तो वह सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर नया ड्रामा शुरू कर दिया था, लेकिन यहां भी भारत को तगड़ा झटका दिया। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) को लेकर पाकिस्तान ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) में भारत की शिकायत की थी। जिसे भारत ने गैरकानूनी और अवैध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा है कि इस कोर्ट की न तो कानूनी मान्यता है और न ही यह मुद्दा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।  बता दें कि, साल 1960 में भारत और पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) किया था। इस संधि के तहत सिंधु नदी बेसिन की 6 नदियों में से 3 पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) का पानी भारत को और 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को मिला था। किशनगंगा नदी झेलम की एक उपनदी है और इस पर भारत का अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान लंबे समय से भारत के किशनगंगा (330 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) परियोजना पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत की यह परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर रही है। इसकी वजह से झेलम में आने वाला पानी प्रभावित हो रहा है। वहीं भारत का कहना है कि यह दोनों प्रोजेक्ट ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (पानी नहीं रोका जाता) तकनीक पर आधारित है, जो समझौते के किसी भी नियम को नहीं तोड़ता।  पाकिस्तान के कोर्ट ड्रामे पर भारत का करारा जवाब भारत के इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए ही पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) पहुंचा था। पाकिस्तान ने कोर्ट से इन प्रोजेक्ट पर ‘सप्लीमेंटल अवॉर्ड’ (पूरक फैसला) की मांगा की थी, लेकिन भारत ने इस कोर्ट को ही अवैध बता दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने बयान जारी कर कहा, ‘यह कोर्ट गैरकानूनी रूप से बनाया गया है और इसके किसी भी फैसले का न तो कानूनी आधार है और न ही बाध्यता। इस अवैध कोर्ट के फैसले हमेशा से शून्य और अमान्य रहे हैं।’ इस दौरान विदेश मंत्रालय Indian Foreign Ministry ने यह भी बताया कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो को भारत ने पत्र लिखकर मौजूदा विवाद समाधान प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है। भारत अब न तो पाकिस्तान को इन नदियों से जुड़ा कोई लिखित दस्तावेज या जानकारी देगा और न ही संयुक्त बैठक करेगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत ने क्या दिया है पाकिस्तान को संदेश? भारत ने पाकिस्तान को यह साफ कर दिया है कि सिंधु जल समझौता पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। भारत अब पूर्वी नदियों के साथ पश्चिमी नदियों के पानी को भी पूरा इस्तेमाल करने का हक रखता है। खासकर तब, जब पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है। भारत अब न सिर्फ पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पानी की कमी को पूरा कर सकता है। भारत ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इन राज्यों में पश्चिमी नदियों का पानी पहुंचाने के लिए भारत नए नहर बनाने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान को मिर्ची लगी हुई है और वहां के नेता युद्ध की धमकी दे रहे हैं। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि, ‘पाकिस्तान की ये सारी कोशिशें महज गीदड़भभकी हैं। भारत पहले की तरह अपने रुख पर अडिग है।’ Latest News in Hindi Today Hindi news Hydroelectric Projects Indian Foreign Ministry #induswatertreaty #pakistannews #indiaresponse #courtofarbitration #sindhuwaterdispute

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PM Modi and President Trump

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘भारत के साथ ट्रेड डील लगभग फाइनल, चीन को लेकर भी कर दी बड़ी घोषणा

अमेरिका और भारत के बीच हो रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा संकेत दिया है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस में हो रहे बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में बोलते हुए कहा कि वो जल्द ही भारत के साथ एक बहुत बड़ी डील (Indo-US Trade Deal) करने जा रहे हैं। यह डील अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदेमंद रहने वाला है। इसी इवेंट में ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील हो चुकी है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इसी साल 2 अप्रैल को कई देशों पर भारी भरकम टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसी दौरान भारत से आने वाले कई सामानों पर भी 26 फीसदी तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, दबाव बढ़ने पर ट्रंप प्रशासन ने नए ट्रैरिफ पर 90 दिनों की रोक लगाते हुए कहा था कि यह टैक्स 9 जुलाई से दोबारा लागू होगा। इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन के अधिकारी कई देशों के साथ बातचीत कर इस ट्रेड डील करने में जुटा है। पिछले कई दिनों से अमेरिकी अधिकारी भारत से भी ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) करने में जुटे हैं। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका द्वारा थोपे गए इस एक्स्ट्रा टैक्स से पूरी तरह छूट मिले। वहीं, अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों के लिए  भारत अपने बाजार को पूरी तरह खोले और कुछ खास प्रोडक्ट्स पर टैक्स छूट दे। ट्रंप ने ट्रेड डील के बारे में क्या कहा? बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि, “हर कोई हमारे साथ सौदा करना चाहता है और ट्रेड डील का हिस्सा बनना चाहता है। आप लोग याद कीजिए कुछ महीने पहले मीडिया कहती थी कि, क्या वाकई कोई देश है जिसकी हमारे साथ ट्रेड डील करने में कोई दिलचस्पी हो? छोड़ो, हमने कल ही खास ट्रेड डील पर चीन के साथ हस्ताक्षर किए हैं। हमने पिछले कुछ दिनों में कई बेहतरीन सौदे किए हैं। हमारे पास एक और बड़ा सौदा करने वाले हैं, शायद भारत (Indo-US Trade Deal) के साथ। यह बहुत बड़ा होने वाला है। जहां हम एक तरफ भारत के दरवाजे अपने लिए खोलने जा रहे हैं, वहीं चीन के दरवाजे अपने लिए खोल चुके हैं।”  ट्रंप ने इस दौरान यह भी कहा कि इस तरह का खास सौदा हर देश के साथ नहीं किया जाएगा। इस तरह का सौदा कुछ खास देशों के लिए ही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम हर किसी के साथ इस तरह का सौदा नहीं करेंगे। कुछ देशों को हम सिर्फ पत्र भेजकर उनका धन्यवाद करेंगे। ऐसे देशों को अमेरिका में अपना प्रोडेक्ट बेचने के लिए 25, 35, 45 फीसदी टैरिफ का भुगतान करना ही होगा। यह तरीका सभी के लिए आसान होगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत और चीन से डील के बारे विस्तार से नहीं बताया  ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान न तो यह बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ किस तरह की डील की है और न ही यह बताया कि भारत के साथ किस तरह की डील करने जा रहे हैं। हालांकि इसी माह के शुरुआत में CNN ने चीन के साथ ट्रेड डील को लेकर एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें बताया था कि दोनों देश एक नया व्यापार समझौता करने के बेहद करीब हैं। यह डील अमेरिका के लिए ज्यादा फायदेमंद होने वाला है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि भारत और अमेरिका भी ट्रेड डील पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान में सीजफायर कराने का जबरन श्रेय लेने के कारण भारत इस डील को धीमा कर दिया है। हालांकि ट्रंप के बयान से ऐसा लग रहा है कि दोनों देश इस डील के करीब पहुंच गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Indo-US Trade Deal #donaldtrump #indiatradedeal #usindiarelations #chinaannouncement #trumplatestnews

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Khamenei statement

Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire: सीजफायर के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कही यह बात

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल के साथ लड़ाई में अपने देश की जीत का दावा (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। जीत का दावा करते हुए खामेनेई ने कहा कि “ईरानी हमलों से इजरायल घुटनों पर आ गया और सीजफायर के लिए मजबूर हुआ।” गुरुवार को ईरानी सरकारी मीडिया में देश के नाम संदेश जारी खामेनेई ने कहा कि “मैं महान राष्ट्र ईरान और उसके लोगों को बधाई देता हूं। इजरायली सरकार अपने सभी शोर और दावों के बावजूद तेहरान के मिसाइल हमलों के सामने हार गया। हमने इस लड़ाई में उनको कुचल कर रख दिया है।” सरकारी मीडिया के मुताबिक फिलहाल  खामेनेई का छोटा वीडियो जारी किया गया है। उनका पूरा वीडियो संदेश बाद में जारी किया जाएगा। इस वीडियो में हमले को लेकर और भी जानकारी खामनेई देंगे और देश की रणनीति को सामने रखेंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया दरअसल, 24 जून को ईरान-इजराइल युद्ध में सीजफायर होने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। उन्होंने अपने संबोधन में ईरान की जनता को जीत की बधाई दी। साथ ही कहा कि ईरान ने जायनी दुश्मन को ध्वस्त कर दिया है। इस संदेश से पहले ईरान के अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट की है कि इजराइल और अमेरिकी हमले से बचने के लिए सुरक्षाबल खामेनेई को तेहरान के एक सुरक्षित बंकर में ले गए थे। खामेनेई की ओर से सार्वजनिक बयान ना आने की वजह से लगातार कई सवाल उठ रहे थे। ऐसे में उनके संदेश से एक बात तो साफ़ जो गई है कि वो देश छोड़कर भागे नहीं हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई का दावा है कि अमेरिका ने युद्ध में इसलिए प्रवेश किया क्योंकि उसे लगा कि अगर वह ऐसा नहीं करता तो इजरायल पूरी तरह से नष्ट हो जाता। खामेनेई ने यह भी कहा कि “यहां भी, इस्लामिक रिपब्लिक विजयी हुआ और बदले में अमेरिका के चेहरे पर जोरदार तमाचा मारा।” इजरायली हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी 13 जून को इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई तब शुरू हुई जब इजरायल ने ईरान पर यकायक ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया और इजरायल पर मिसाइल से हमले शुरू कर दिए। 12 दिन तक दोनों के बीच भीषण लड़ाई देखने मिली। इस बीच 22 जून को इस लड़ाई में अमेरिका भी कूद गया। अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसमें अमेरिका ने बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया और ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट को तबाह कर देने का दावा किया। इसके बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर भी 14 मिसाइलें दाग दीं। इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया जारी इस लड़ाई के बीच 24 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान किया। पहले तो इजरायल और ईरान ने शुरू में सीजफायर पर सहमति ना बनने के बात कही, लेकिन बाद में दोनों देशों ने इसे मान लिया। गौरतलब हो कि 24 जून को सुप्रीम लीडर ने कहा था कि जो लोग ईरानी लोगों और उनके इतिहास को जानते (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) हैं, वे जानते हैं कि ईरानी राष्ट्र आत्मसमर्पण करने वाला राष्ट्र नहीं है।” दरअसल, ये ट्रंप के उस धमकी का जवाब था जिसमें कहा गया था कि “ईरान बिनाशर्त सरेंडर करे। मजे की बात यह कि सीजफायर के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire #khamenei #iran #ceasefire #iranisupremeleader #irannews #middleeast #iranisraelconflict #breakingnews

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Iran uranium missing

400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran- Real or Drama?: क्या सच में ईरान का 400 Kg संवर्धित यूरेनियम लापता हुआ है या फिर खेला अभी बाकी है?

बेशक ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर लागू होने से दोनों देशों के बीच युद्ध रुक गया है, लेकिन इस बीच तेहरान के 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को लेकर अफवाहें हैं कि थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल, इजरायल और अमेरिका के हमले एकमात्र लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना था। हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। इसी उद्देश्य अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमले किए। लेकिन इस बीच बड़ा सवाल यह कि 60 प्रतिशत संवर्धित 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम कहां (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है? फ़िलहाल इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कई रिपोर्टों में तो यहाँ तक दावा किया गया है कि परमाणु संयंत्रों पर हमलों से पहले ही ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। जेडी वेंस ने कहा कि इस यूरेनियम से बनाए जा सकते (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) हैं 10 परमाणु हथियार ऐसे में महत्वपूर्ण बात यह कि यदि ईरान का 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम सुरक्षित (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है? तो फिर तो वो भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा सकता है। इस हिसाब से तो इजरायल और अमेरिका दोनों के हाथ खाली ही रहे। जिस उद्देश्य से उन्होंने युद्ध किया था वो तो पूरा ही नहीं हुआ, यदि 400 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक संवर्धित हैं तो। हालांकि इस बात को अधिक गंभीरता से इसलिए भी लिए जा रहा है क्योंकि अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एबीसी न्यूज चैनल से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि “ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर अमेरिकी हवाई हमले किए। अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु संयंत्र ‘बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए या उन्हें एक तरह से मिटा दिया गया। फिर भी उन्हें संदेह है।” जेडी वेंस ने कहा कि इस यूरेनियम से 10 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।” इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा यदि 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ईरान के पास (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है, तो वो आज नहीं तो, कल परमाणु हथियार बना ही लेगा यहाँ तक कि कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों से पहले ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में फोर्डो परमाणु सुविधा के बाहर 16 ट्रकों का काफिला दिखाई दिया था। हालांकि इस बीच इजरायली खुफिया ने भी शंका जताई है कि हो सकता है कि ईरान ने हमलों से पहले ही यूरेनियम को स्थानांतरित कर दिया हो। यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के परमाणु संयंत्रों की तत्काल निरीक्षण की अपील की है। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि गायब यूरेनियम को लेकर अमेरिका और इजरायल दोनों के माथे पर चिंता की लकीरे उठ रही हैं। खैर, इसमें कोई राय नहीं है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन बात फिर वही कि यदि 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ईरान के पास (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है, तो वो आज नहीं तो, कल परमाणु हथियार बना ही लेगा। फ़िलहाल ईरान और इजरायल के बीच अभी अस्थायी सीजफायर हुआ है। लापता 400 किलोग्राम यूरेनियम को नष्ट करने के लिए इजरायल आगे ईरान पर यदि हमला करता है, तो इसमें कोई हैरानी भी नहीं होनी चाहिए। देखना दिलचस्प होगा कि यह सीजफायर कब तक रहता है? Latest News in Hindi Today Hindi 400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama? #iran #uranium #missinguranium #nuclearnews #irannews #enricheduranium #truthordrama

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