US Cuts Trade Ties with Canada Over Digital Tax

अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए कनाडा के साथ सभी व्यापारिक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को व्यापार के लिए कठिन देश करार देते हुए यह फैसला लिया है। इस निर्णय के पीछे कनाडा की ओर से लगाए गए डिजिटल सर्विस टैक्स (Digital Service Tax) और अत्यधिक टैरिफ को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप ने सोहल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर लिखा है कि जब कनाडा अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है और अब डिजिटल सेवाओं पर कर थोप रहा है, तो अमेरिका ऐसे देश के साथ व्यापारिक रिश्ता क्यों बनाए रखे? इस फैसले से अमेरिका-कनाडा (America-Canada) के लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों को तगड़ा झटका लगा है। कनाडा पर संभावित असर कनाडा की अर्थव्यवस्था (Canada’s Economy) में अमेरिका की हिस्सेदारी अत्यधिक है। साल 2024 में कनाडा ने कुल निर्यात का लगभग 75% और आयात का 50% हिस्सा अमेरिका के साथ किया था। अमेरिका-कनाडा (America-Canada) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार का टूटना कनाडा के लिए बहुआयामी संकट खड़ा कर सकता है। समस्या खासकर ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र इस निर्णय से सीधे प्रभावित होंगे। कनाडा की GDP में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। यह गिरावट बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। ओंटारियो, क्यूबेक जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं पर संकट अमेरिका द्वारा रोजाना लगभग 4 मिलियन बैरल तेल कनाडा से आयात किया जाता था। इस आयात के रुकते ही कनाडा की ऑयल और एनर्जी कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात भी बंद हो जाएगा, जिससे कनाडा में उत्पादन लागत और महंगाई में इजाफा होगा। कनाडा को विकल्प के रूप में चीन, भारत या यूरोप जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने होंगे, जो न केवल समय लेगा बल्कि जियोपॉलिटिकल के अनुसार भी चुनौतीपूर्ण भी होगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा झटका कनाडा का ऑटो सेक्टर (Canada’s Auto Sector) भी इस फैसले से खासा प्रभावित होगा। अमेरिका से व्यापार रुकने के कारण फोर्ड, जनरल मोटर्स (GM), स्टेलेंटिस जैसी बड़ी कंपनियों के संचालन पर असर पड़ेगा। संभावनाएं हैं कि इन कंपनियों को या तो उत्पादन कम करना पड़े या फिर ऑफिस बंद करने पड़ें। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि तकनीकी निवेश पर भी ब्रेक लग जाएगा। कमजोर होता कनाडाई डॉलर और निवेश में गिरावट इस निर्णय के चलते कनाडाई डॉलर पर दबाव बढ़ेगा और उसकी वैल्यू में गिरावट हो सकती है। इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका से निवेश बंद होने के कारण कनाडा के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स भी रुक सकते हैं। इसे भी पढ़ें:-  ‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप रणनीतिक साझेदारियों पर भी खतरा अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच हुआ USMCA (पूर्व NAFTA) समझौता भी इस निर्णय से टूट सकता है। इससे न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक सहयोग पर भी असर पड़ेगा। NORAD और NATO जैसे रक्षा संगठनों में साझेदारी कमजोर हो सकती है, जिससे उत्तर अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का यह फैसला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़े प्रभाव वाला है। कनाडा के लिए अमेरिका के बिना व्यापार चलाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। जहां एक ओर अमेरिका कनाडा पर कर नीति को लेकर सख्ती बरत रहा है, वहीं कनाडा को अपने व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और गहराने की संभावना है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Truth Social #uscanadadispute #digitalservicestax #ustraderelations #canadataxrow #tradeconflict

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Trump Warns of Bombing Iran Again if Needed

‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप

इजरायल और ईरान युद्ध (Israel–Iran War) के दौरान अमेरिका ने भी ईरान पर बम गिराए थे। अमेरिका ने यह बम ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट पर गिराए थे और दावा किया था कि इस हमले में ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए, वहीं ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों को सिर्फ मामूली नुकसान हुआ है। हालांकि अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस हमले को लेकर अपने ही देश में अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। अमेरिका के कांग्रेस का ऊपरी सदन में अमेरिकी हमले को लेकर बहस भी हुई और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को ईरान पर आगे हमला करने से रोकने का प्रयास भी हुआ। लेकिन विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी का यह प्रयास विफल हो गया। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में अमेरिकी राष्ट्रपति के युद्ध शक्तियों को फिर से स्थापित करने का प्रयास लेकर आई थी। डेमोक्रेटिक पार्टी का दावा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस से अनुमति लिए ईरान पर हमला (Israel–Iran War) किया था, लेकिन डेमोक्रेटिक सांसदों के इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन पार्टी ने विफल कर दिया। इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेिटक सीनेटर टिम कैन ने रखा था। इसमें टिम कैन ने लिखित में प्रस्ताव दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति ट्रंप ने नियम का उल्लंघन किया है। अगर आगे इस तरह की सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए तो पहले ट्रंप को कांग्रेस से अनुमति लेनी होगी।  ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं- ट्रंप सीनेट में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान जब उनसे पूछे गया कि क्या वह आवश्यक समझे जाने पर फिर से ईरान के न्यूक्लियर साइट पर बमबारी करने पर विचार कर सकते हैं, तो इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, जरूर बिना किसी सवाल के। अगर जरूरत पड़ी तो वह बगैर सोचे ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।’ वहीं, सीनेट में इस प्रस्ताव को रखने को विपक्ष की ट्रंप को घेरने की एक लंबी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।  सीनेट में ट्रंप को मिला पूरा समर्थन  बता दें कि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत हैं। जब इस प्रस्ताव को रखा गया तो वे राष्ट्रपति के समर्थन में खड़े हो गए। इन सीनेटर का कहना था कि ईरान न सिर्फ इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इसलिए ईरान तक कठोर कार्रवाई जरूरी था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमला करने का जो निर्णाय लिया वह ठीक था, इस कार्रवाई के कारण ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला गया है। इस दौरान रिपब्लिकन सीनेटर एकमत होकर कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना ईरान के तीन न्यूक्लियर साइट पर अमेरिकी बमबारी करने के फैसले का समर्थन किया।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? ट्रंप अगर डील करना चाहते हैं तो सम्मान करें- ईरान  डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ जहां अपने ही देश में घेरे जा रहे हैं, वहीं बड़बोलेपन की वजह से ईरान भी उन पर पलटवार कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर ट्रंप ईरान के साथ वास्तव में कोई समझौता करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के प्रति सम्मानजनक भाषा का उपयोग करा होगा। दरअसल, ट्रंप ने कहा था कि अयातुल्ला खामेनेई को अपमानजनक मौत मिलने वाली थी, लेकिन हमने बचा लिया। इसी के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘ईरानी लोगों का आत्मसम्मान और दृढ़ता खून में है। हमारी राष्ट्रीय भावना बेहद सीधी और स्पष्ट है। हम अपनी स्वतंत्रता को समझते और पहचानते हैं। हम किसी को अपने भाग्य का निर्धारण करने की इजाजत नहीं देते। इसके लिए हम अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हैं। अगर ट्रंप को ईरान के साथ कोई समझौता करना है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक बात करनी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #trump #iran #bombing #senate #usnews #worldnews #middleeast

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Pakistan approached Court of Arbitration on Indus Water Treaty

सिंधु जल समझौते पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पहुंचा पाकिस्तान तो भारत ने दे दिया करारा झटका

सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा स्थगित करने के बाद से ही पाकिस्तान कभी युद्ध की धमकी दे रहा है तो कभी बातचीत की भीख मांग रहा है। लेकिन इससे भी दाल नहीं गली तो वह सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर नया ड्रामा शुरू कर दिया था, लेकिन यहां भी भारत को तगड़ा झटका दिया। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) को लेकर पाकिस्तान ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) में भारत की शिकायत की थी। जिसे भारत ने गैरकानूनी और अवैध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा है कि इस कोर्ट की न तो कानूनी मान्यता है और न ही यह मुद्दा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।  बता दें कि, साल 1960 में भारत और पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) किया था। इस संधि के तहत सिंधु नदी बेसिन की 6 नदियों में से 3 पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) का पानी भारत को और 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को मिला था। किशनगंगा नदी झेलम की एक उपनदी है और इस पर भारत का अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान लंबे समय से भारत के किशनगंगा (330 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) परियोजना पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत की यह परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर रही है। इसकी वजह से झेलम में आने वाला पानी प्रभावित हो रहा है। वहीं भारत का कहना है कि यह दोनों प्रोजेक्ट ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (पानी नहीं रोका जाता) तकनीक पर आधारित है, जो समझौते के किसी भी नियम को नहीं तोड़ता।  पाकिस्तान के कोर्ट ड्रामे पर भारत का करारा जवाब भारत के इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए ही पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) पहुंचा था। पाकिस्तान ने कोर्ट से इन प्रोजेक्ट पर ‘सप्लीमेंटल अवॉर्ड’ (पूरक फैसला) की मांगा की थी, लेकिन भारत ने इस कोर्ट को ही अवैध बता दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने बयान जारी कर कहा, ‘यह कोर्ट गैरकानूनी रूप से बनाया गया है और इसके किसी भी फैसले का न तो कानूनी आधार है और न ही बाध्यता। इस अवैध कोर्ट के फैसले हमेशा से शून्य और अमान्य रहे हैं।’ इस दौरान विदेश मंत्रालय Indian Foreign Ministry ने यह भी बताया कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो को भारत ने पत्र लिखकर मौजूदा विवाद समाधान प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है। भारत अब न तो पाकिस्तान को इन नदियों से जुड़ा कोई लिखित दस्तावेज या जानकारी देगा और न ही संयुक्त बैठक करेगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत ने क्या दिया है पाकिस्तान को संदेश? भारत ने पाकिस्तान को यह साफ कर दिया है कि सिंधु जल समझौता पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। भारत अब पूर्वी नदियों के साथ पश्चिमी नदियों के पानी को भी पूरा इस्तेमाल करने का हक रखता है। खासकर तब, जब पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है। भारत अब न सिर्फ पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पानी की कमी को पूरा कर सकता है। भारत ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इन राज्यों में पश्चिमी नदियों का पानी पहुंचाने के लिए भारत नए नहर बनाने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान को मिर्ची लगी हुई है और वहां के नेता युद्ध की धमकी दे रहे हैं। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि, ‘पाकिस्तान की ये सारी कोशिशें महज गीदड़भभकी हैं। भारत पहले की तरह अपने रुख पर अडिग है।’ Latest News in Hindi Today Hindi news Hydroelectric Projects Indian Foreign Ministry #induswatertreaty #pakistannews #indiaresponse #courtofarbitration #sindhuwaterdispute

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PM Modi and President Trump

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘भारत के साथ ट्रेड डील लगभग फाइनल, चीन को लेकर भी कर दी बड़ी घोषणा

अमेरिका और भारत के बीच हो रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा संकेत दिया है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस में हो रहे बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में बोलते हुए कहा कि वो जल्द ही भारत के साथ एक बहुत बड़ी डील (Indo-US Trade Deal) करने जा रहे हैं। यह डील अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदेमंद रहने वाला है। इसी इवेंट में ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील हो चुकी है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इसी साल 2 अप्रैल को कई देशों पर भारी भरकम टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसी दौरान भारत से आने वाले कई सामानों पर भी 26 फीसदी तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, दबाव बढ़ने पर ट्रंप प्रशासन ने नए ट्रैरिफ पर 90 दिनों की रोक लगाते हुए कहा था कि यह टैक्स 9 जुलाई से दोबारा लागू होगा। इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन के अधिकारी कई देशों के साथ बातचीत कर इस ट्रेड डील करने में जुटा है। पिछले कई दिनों से अमेरिकी अधिकारी भारत से भी ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) करने में जुटे हैं। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका द्वारा थोपे गए इस एक्स्ट्रा टैक्स से पूरी तरह छूट मिले। वहीं, अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों के लिए  भारत अपने बाजार को पूरी तरह खोले और कुछ खास प्रोडक्ट्स पर टैक्स छूट दे। ट्रंप ने ट्रेड डील के बारे में क्या कहा? बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि, “हर कोई हमारे साथ सौदा करना चाहता है और ट्रेड डील का हिस्सा बनना चाहता है। आप लोग याद कीजिए कुछ महीने पहले मीडिया कहती थी कि, क्या वाकई कोई देश है जिसकी हमारे साथ ट्रेड डील करने में कोई दिलचस्पी हो? छोड़ो, हमने कल ही खास ट्रेड डील पर चीन के साथ हस्ताक्षर किए हैं। हमने पिछले कुछ दिनों में कई बेहतरीन सौदे किए हैं। हमारे पास एक और बड़ा सौदा करने वाले हैं, शायद भारत (Indo-US Trade Deal) के साथ। यह बहुत बड़ा होने वाला है। जहां हम एक तरफ भारत के दरवाजे अपने लिए खोलने जा रहे हैं, वहीं चीन के दरवाजे अपने लिए खोल चुके हैं।”  ट्रंप ने इस दौरान यह भी कहा कि इस तरह का खास सौदा हर देश के साथ नहीं किया जाएगा। इस तरह का सौदा कुछ खास देशों के लिए ही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम हर किसी के साथ इस तरह का सौदा नहीं करेंगे। कुछ देशों को हम सिर्फ पत्र भेजकर उनका धन्यवाद करेंगे। ऐसे देशों को अमेरिका में अपना प्रोडेक्ट बेचने के लिए 25, 35, 45 फीसदी टैरिफ का भुगतान करना ही होगा। यह तरीका सभी के लिए आसान होगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत और चीन से डील के बारे विस्तार से नहीं बताया  ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान न तो यह बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ किस तरह की डील की है और न ही यह बताया कि भारत के साथ किस तरह की डील करने जा रहे हैं। हालांकि इसी माह के शुरुआत में CNN ने चीन के साथ ट्रेड डील को लेकर एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें बताया था कि दोनों देश एक नया व्यापार समझौता करने के बेहद करीब हैं। यह डील अमेरिका के लिए ज्यादा फायदेमंद होने वाला है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि भारत और अमेरिका भी ट्रेड डील पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान में सीजफायर कराने का जबरन श्रेय लेने के कारण भारत इस डील को धीमा कर दिया है। हालांकि ट्रंप के बयान से ऐसा लग रहा है कि दोनों देश इस डील के करीब पहुंच गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Indo-US Trade Deal #donaldtrump #indiatradedeal #usindiarelations #chinaannouncement #trumplatestnews

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Khamenei statement

Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire: सीजफायर के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कही यह बात

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल के साथ लड़ाई में अपने देश की जीत का दावा (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। जीत का दावा करते हुए खामेनेई ने कहा कि “ईरानी हमलों से इजरायल घुटनों पर आ गया और सीजफायर के लिए मजबूर हुआ।” गुरुवार को ईरानी सरकारी मीडिया में देश के नाम संदेश जारी खामेनेई ने कहा कि “मैं महान राष्ट्र ईरान और उसके लोगों को बधाई देता हूं। इजरायली सरकार अपने सभी शोर और दावों के बावजूद तेहरान के मिसाइल हमलों के सामने हार गया। हमने इस लड़ाई में उनको कुचल कर रख दिया है।” सरकारी मीडिया के मुताबिक फिलहाल  खामेनेई का छोटा वीडियो जारी किया गया है। उनका पूरा वीडियो संदेश बाद में जारी किया जाएगा। इस वीडियो में हमले को लेकर और भी जानकारी खामनेई देंगे और देश की रणनीति को सामने रखेंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया दरअसल, 24 जून को ईरान-इजराइल युद्ध में सीजफायर होने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। उन्होंने अपने संबोधन में ईरान की जनता को जीत की बधाई दी। साथ ही कहा कि ईरान ने जायनी दुश्मन को ध्वस्त कर दिया है। इस संदेश से पहले ईरान के अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट की है कि इजराइल और अमेरिकी हमले से बचने के लिए सुरक्षाबल खामेनेई को तेहरान के एक सुरक्षित बंकर में ले गए थे। खामेनेई की ओर से सार्वजनिक बयान ना आने की वजह से लगातार कई सवाल उठ रहे थे। ऐसे में उनके संदेश से एक बात तो साफ़ जो गई है कि वो देश छोड़कर भागे नहीं हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई का दावा है कि अमेरिका ने युद्ध में इसलिए प्रवेश किया क्योंकि उसे लगा कि अगर वह ऐसा नहीं करता तो इजरायल पूरी तरह से नष्ट हो जाता। खामेनेई ने यह भी कहा कि “यहां भी, इस्लामिक रिपब्लिक विजयी हुआ और बदले में अमेरिका के चेहरे पर जोरदार तमाचा मारा।” इजरायली हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी 13 जून को इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई तब शुरू हुई जब इजरायल ने ईरान पर यकायक ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया और इजरायल पर मिसाइल से हमले शुरू कर दिए। 12 दिन तक दोनों के बीच भीषण लड़ाई देखने मिली। इस बीच 22 जून को इस लड़ाई में अमेरिका भी कूद गया। अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसमें अमेरिका ने बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया और ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट को तबाह कर देने का दावा किया। इसके बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर भी 14 मिसाइलें दाग दीं। इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया जारी इस लड़ाई के बीच 24 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान किया। पहले तो इजरायल और ईरान ने शुरू में सीजफायर पर सहमति ना बनने के बात कही, लेकिन बाद में दोनों देशों ने इसे मान लिया। गौरतलब हो कि 24 जून को सुप्रीम लीडर ने कहा था कि जो लोग ईरानी लोगों और उनके इतिहास को जानते (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) हैं, वे जानते हैं कि ईरानी राष्ट्र आत्मसमर्पण करने वाला राष्ट्र नहीं है।” दरअसल, ये ट्रंप के उस धमकी का जवाब था जिसमें कहा गया था कि “ईरान बिनाशर्त सरेंडर करे। मजे की बात यह कि सीजफायर के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire #khamenei #iran #ceasefire #iranisupremeleader #irannews #middleeast #iranisraelconflict #breakingnews

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Iran uranium missing

400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran- Real or Drama?: क्या सच में ईरान का 400 Kg संवर्धित यूरेनियम लापता हुआ है या फिर खेला अभी बाकी है?

बेशक ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर लागू होने से दोनों देशों के बीच युद्ध रुक गया है, लेकिन इस बीच तेहरान के 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को लेकर अफवाहें हैं कि थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल, इजरायल और अमेरिका के हमले एकमात्र लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना था। हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। इसी उद्देश्य अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमले किए। लेकिन इस बीच बड़ा सवाल यह कि 60 प्रतिशत संवर्धित 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम कहां (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है? फ़िलहाल इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कई रिपोर्टों में तो यहाँ तक दावा किया गया है कि परमाणु संयंत्रों पर हमलों से पहले ही ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। जेडी वेंस ने कहा कि इस यूरेनियम से बनाए जा सकते (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) हैं 10 परमाणु हथियार ऐसे में महत्वपूर्ण बात यह कि यदि ईरान का 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम सुरक्षित (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है? तो फिर तो वो भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा सकता है। इस हिसाब से तो इजरायल और अमेरिका दोनों के हाथ खाली ही रहे। जिस उद्देश्य से उन्होंने युद्ध किया था वो तो पूरा ही नहीं हुआ, यदि 400 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक संवर्धित हैं तो। हालांकि इस बात को अधिक गंभीरता से इसलिए भी लिए जा रहा है क्योंकि अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एबीसी न्यूज चैनल से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि “ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर अमेरिकी हवाई हमले किए। अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु संयंत्र ‘बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए या उन्हें एक तरह से मिटा दिया गया। फिर भी उन्हें संदेह है।” जेडी वेंस ने कहा कि इस यूरेनियम से 10 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।” इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा यदि 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ईरान के पास (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है, तो वो आज नहीं तो, कल परमाणु हथियार बना ही लेगा यहाँ तक कि कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों से पहले ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में फोर्डो परमाणु सुविधा के बाहर 16 ट्रकों का काफिला दिखाई दिया था। हालांकि इस बीच इजरायली खुफिया ने भी शंका जताई है कि हो सकता है कि ईरान ने हमलों से पहले ही यूरेनियम को स्थानांतरित कर दिया हो। यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के परमाणु संयंत्रों की तत्काल निरीक्षण की अपील की है। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि गायब यूरेनियम को लेकर अमेरिका और इजरायल दोनों के माथे पर चिंता की लकीरे उठ रही हैं। खैर, इसमें कोई राय नहीं है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन बात फिर वही कि यदि 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ईरान के पास (400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama?) है, तो वो आज नहीं तो, कल परमाणु हथियार बना ही लेगा। फ़िलहाल ईरान और इजरायल के बीच अभी अस्थायी सीजफायर हुआ है। लापता 400 किलोग्राम यूरेनियम को नष्ट करने के लिए इजरायल आगे ईरान पर यदि हमला करता है, तो इसमें कोई हैरानी भी नहीं होनी चाहिए। देखना दिलचस्प होगा कि यह सीजफायर कब तक रहता है? Latest News in Hindi Today Hindi 400 Kg Enriched Uranium Missing from Iran – Real or Drama? #iran #uranium #missinguranium #nuclearnews #irannews #enricheduranium #truthordrama

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hahbaz Begs for Talks

Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror: इस देश के सामने गिड़गिड़ाए शहबाज शरीफ, कहा- पीओके-आतंकवाद सारे मसले सुलझाएंगे, बस भारत से बात करवा दो

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान की अकड़ इस कदर ढीली हुई है कि वो भारत से बात करने के लिए लालायित बैठा है। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भारत से बात करके पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और व्यापार से जुड़े मुद्दा सुलझाना चाहते हैं। इस हेतु उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अब्दुलअजीज अल सउद से कहा (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) है कि वह हर हाल में भारत से बात करने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी न्यूज चैनल एआरवाई न्यूज की माने तो, शहबाज शरीफ की मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात हुई। इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब से कहा कि “पाकिस्तान पीओके, सिंधु जल संधि, व्यापार और आतंकवाद पर भारत के साथ बात करने के लिए तैयार है।” भारत ने पाकिस्तान नागरिकों की वापसी के साथ अटारी वाघा बॉर्डर बंद कर दिया (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) था गौरतलब हो कि 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान को लेकर सख्त कदम उठाए थे। भारत ने पाकिस्तान नागरिकों की वापसी के साथ अटारी वाघा बॉर्डर बंद कर दिया (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) था। इस कड़ी में भारत ने न सिर्फ पाकिस्तानियों को सार्क वीजा की छूट देना बंद कर किया था बल्कि  पाकिस्तान हाई कमीशन में स्टाफ की संख्या भी कम कर दी थी। यही नहीं, भारत ने सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। आतंकवाद को लेकर भारत का एकदम रुख साफ है। भारत के मुताबिक जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और पीओके का मामला नहीं सुलझाएगा, तब तक उसके साथ किसी और मुद्दे पर भी चर्चा नहीं की जाएगी।  पाकिस्तान ने ओआईसी में 57 मुस्लिम देशों के सामने (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) रखा सिंधु जल संधि का मुद्दा  गौरतलब हो कि 65 साल पहले 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। यह समझौता दोनों देशों को मान्य था। हुए समझौते के तहत पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर पाकिस्तान का और पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलज के पानी पर भारत का अधिकार है। इस तरह भारत को 20 फीसदी और पाकिस्तान को 80 फीसदी पानी मिलता है। इस लिहाज से पानी की इस पर ज्यादा निर्भरता है। इस बीच बात न बनती और भारत के कड़े रुख को देखते हुए पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा ओआईसी में 57 मुस्लिम देशों के सामने (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) रखा। यही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अलग-अलग देशों की यात्रा पर भेजे गए बिलावल भुट्टो जरदारी के डेलीगेशन ने भी पानी का मुद्दा उठाया। यह सब इसलिए ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। मजे की बात यह कि पाकिस्तान की सभी कोशिशें नाकाम रहीं और किसी भी देश ने घास तक नहीं डाली।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) की थी  बता दें कि जम्मू-कश्मीर स्थित पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा, हुए हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों को तबाह कर दिया था। इससे तिलमिलाए पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) की। जिसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई की। भारत की कार्रवाई में पाकिस्तान के नूर खान जैसे बड़े एयरबेस को काफी नुकसान हुआ था। कहने की जरूरत नहीं, पहलगाम आतंकी हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। अब इस बढ़े हुए तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री दुनिया के कई देशों में सामने भारत से बात कर समझौता करने की दुहाई दे चुके हैं। भारत ने साफ़ कर दिया है कि बात अब होगी तो सिर्फ पीओके और आतंकवाद पर ही होगी। देखना दिलचस्प होगा कि आगे चलकर क्या भारत पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अख्तियार करता है या फिर आपने रुख में कोई बदलाव न कर पाकिस्तान को नाकों चने चबवाने के लिए और मजबूर करता है।  Latest News in Hindi Today Hindi Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror #shahbazsharif #pokissue #terrorism #indiapakistantalks #bilateraltalks #indiaupdates #pakistannews

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Iranian Nuclear Sites Survive US Bombs

अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा

ईरान-इजरायल युद्ध (Iran–Israel War) में कूदते हुए अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बंकर ब्लास्टर बमों से हमला किया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया था कि अमेरिकी हमले में ईरान के तीनों परमाणु संयंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। इस शक्ति प्रदर्शन के बाद ही अब शांति आएगी, लेकिन इस अमेरिकी हमले को लेकर अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि अमेरिका के हमले के बाद भी ईरान के परमाणु ठिकाने सुरक्षित हैं। इस हमले के बाद तेहरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ महीनें भले ही पीछे चला गया है, लेकिन वह पूरी तरह से नष्ट नहीं हुआ है। सीएनएन का दावा है कि यह रिपोर्ट पेंटागन की खुफिया शाखा ने तैयार किया है। अमेरिकी हमले में ईरान की परमाणु संवर्धन ठिकानें पूरी तरह से नष्ट हो गए सीएनएन ने खुफिया सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान पर हमले (Iran–Israel War) के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां परमाणु स्थलों को हुए नुकसान और प्रभाव का विश्लेषण कर रही हैं। सीएनएन ने कहा कि अभी जो रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है, वह प्रारंभिक जांच के आधार पर है और अधिक जानकारी आने के बाद इस रिपोर्ट के तत्थों में बदलाव किया जा सकता है। लेकिन अमेरिकी खुफिया विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दावों से विपरीत है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी हमले में ईरान की परमाणु संवर्धन ठिकानें पूरी तरह से नष्ट हो गए। साथ ही ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को भी इससे भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी हमले के बाद मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि ईरान के परमाणु ठिकानें और महत्वाकांक्षाएं अमेरिका ने नष्ट कर दिया है।   ईरान का यूरेनियम भंडार अभी भी सुरक्षित सीएनएन ने इस खुफिया रिपोर्ट तैयार करने वाले दो अधिकारियों से बातचीत के आधार पर कहा कि अमेरिकी हमले में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार नष्ट नहीं हुए हैं। जिस सेंट्रीय फ्यूज में यूरेनियम रखा जाता है, उनको कोई नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के हमले से पहले ही इन ठिकानों से हटा लिया गया था। साथ ही परमाणु ठिकाने का ढांचा भी काफी हद तक सुरक्षित बचा हुआ है। कुछ माह की मरम्मत के बाद इन ठिकानों पर फिर से परमाणु संवर्धन का काम शुरू किया जा सकता है।    इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! व्हाइट हाउस ने कहा- रिपोर्ट के तथ्य गलत  व्हाइट हाउस ने भी यह खुफिया रिपोर्ट होने की बात स्वीकार की, लेकिन इसमें मौजूद तथ्यों को गलत बताया। सीएनएन से बातचीत में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि, अमेरिकी हमले की यह कथित आकलन रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। इस रिपोर्ट को अति गोपनीय के तौर पर संरक्षित किया गया था, लेकिन खुफिया विभाग का एक अनाम और घटिया स्तर की सोच वाले लूजर ने इसे लीक कर दिया। कैरोलिन लेविट ने कहा कि इस रिपोर्ट को लीक करना बताता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) को नीचा दिखाना चाहता है। साथ ही वह ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने वाले हमारे बहादुर लड़ाकू पायलटों को भी बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। कैरोलिन लेविट ने अपने बयान में यह भी कहा कि, ‘दुनिया का हर व्यक्ति जानता है कि जब 30000 पाउंड के 14 बम कहीं पर गिरते हैं तो वहां पर क्या होता है। इसका मतलब है ‘पूर्ण विनाश’। पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट और व्हाइट हाउस के इस बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि संभवता अमेरिकी हमले में ईरान (Iran–Israel War) के परमाणु ठिकानों को उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना वहा उसे बता रहा है। अगर ऐसा है तक 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद भी इजरायल और अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए।   Latest News in Hindi Today Hindi Iran–Israel War #iran #pentagonleak #nuclearreport #usairstrike #middleeastconflict #iranusnews #defensestrategy

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Little Boy’s Wounds Still Bleed

Little Boy के दिए जख्म आज भी नहीं भरे: क्या दुनिया फिर उसी मोड़ पर है?

आज दुनिया में एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं से घिरी है—ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension), मिसाइल हमले और परमाणु शक्तियों की सक्रियता तो ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अतीत के उस खौफनाक दिन को याद करें जब विज्ञान ने मानवता को पीछे छोड़ दिया था। 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम लिटिल बॉय (Atomic Bomb Little Boy) न सिर्फ लाखों जिंदगियों खत्म कर दी, बल्कि यह एक ऐसा जख्म भी था जो आज तक भरा नहीं है।  6 अगस्त 1945 को सुबह 8:15 बजे जब जापान का शहर हिरोशिमा (Hiroshima) अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, दुकानदार खुल रही थीं और लोग अपने-अपने कामों में लगे थे। लेकिन कुछ ही पलों में ऐसा हुआ कि इंसानियत की रूह काँप उठी। आसमान में उड़ता अमेरिकी बॉम्बर विमान एनोला गे (American Bomber Aircraft Enola Gay) और उसके भीतर था लिटिल बॉय (Little Boy) एक यूरेनियम आधारित एटॉमिक बम (Atomic Bomb)। इस बम ने न सिर्फ़ शहर को तबाह किया, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी भी छोड़ गया। लिटिल बॉय: नाम से ठीक विपरीत कारनामा  लिटिल बॉय (Little Boy) नाम जितना मासूम था उसका असर उतना ही भयावह। यह मानव इतिहास का पहला परमाणु हमला था, जिसमें करीब 70,000 से अधिक लोग तुरंत मारे गए और बाद में रेडिएशन और बीमारियों से मरने वालों की संख्या लाखों में जा पहुंची। हिरोशिमा जल उठा, इंसान राख में बदल गए और कुछ की परछाइयाँ आज भी उन दीवारों पर दर्ज हैं जो आज भी खड़े हैं, इंसान की बर्बरता की गवाही देते हुए। यह हमला एक चेतावनी थी कि विज्ञान यदि मानवता के विरुद्ध खड़ा हो जाए, तो उसका अंजाम कितना विध्वंसकारी हो सकता है। आज की दुनिया और परमाणु डर आज जब हम ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension) और मिसाइल हमलों की खबरें सुनते हैं, तो मन में यह सवाल उठता है कि क्या वर्ल्ड वॉर 3 की आहट सुनाई दे रही है? आज की तकनीक, हथियारों की शक्ति और देशों के बीच की असुरक्षा को देखते हुए यह डर अनावश्यक नहीं है। कई देश आज भी परमाणु शक्ति (Atomic Power) से लैस हैं। अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल जैसे देश अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा का कवच बताते हैं, लेकिन जब कूटनीति असफल होती है और युद्धोन्माद हावी हो जाता है, तो यही कवच एक दिन तबाही बन सकता है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) क्या सीखा दुनिया ने 1945 से? इतिहास गवाह है कि हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी ने दुनिया को यह दिखा दिया था कि परमाणु युद्ध (Nuclear war) में कोई जीतता नहीं, हर कोई हारता है। इसके बावजूद आज भी दुनिया के कई हिस्सों में परमाणु ताकत को शक्ति प्रदर्शन का माध्यम समझा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बने हैं ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके। लेकिन क्या ये समझौते वास्तव में प्रभावशाली हैं? जब शक्तिशाली देश खुद इन नियमों का पालन नहीं करते, तो बाकी दुनिया से उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत से निकले हल  आज की दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि संवाद की जरूरत है। वैश्विक नेता यदि अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर मानवता की भलाई के लिए सोचें, तो शायद लिटिल बॉय जैसी घटनाएं फिर कभी न दोहराई जाएं। लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति और समझ दोनों की जरूरत है। लिटिल बॉय (Little Boy) आज सिर्फ एक बम का नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक है कि मानव विनाश की चरम सीमा का प्रतीक। यह घटना हमें बार-बार याद दिलाती है कि यदि हमने इतिहास से नहीं सीखा, तो भविष्य हमारे लिए और भी भयानक हो सकता है। जब हम हिरोशिमा की राख में बसी परछाइयों को देखते हैं, तो ये सवाल फिर सिर उठाता है कि क्या हम एक बार फिर उसी राह पर बढ़ रहे हैं?  लिटिल बॉय (Little Boy) ने जो जख्म दिए, वे आज भी दुनिया के ज़हन में ताज़ा हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि शांति कोई विकल्प नहीं, बल्कि एकमात्र रास्ता है। युद्ध चाहे किसी भी कारण से हो उसका नतीजा हमेशा विनाश ही होता है। Latest News in Hindi Today Hindi Hiroshima #littleboy #hiroshima #nuclearwar #worldwariii #globalcrisis #historyrepeats

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Trump announces end to Iran-Israel war

ट्रंप का ऐलान…खत्म हुआ ईरान-इजरायल युद्ध, तेहरान का दावा हमारा समझौता अभी फाइनल नहीं

कतर में मौजूद अमेरिका के एयरबेस पर ईरानी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने युद्धविराम का ऐलान किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया है कि ईरान और इजरायल पूर्ण युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के लिए सहमत हो गए हैं। पहले ईरान युद्धविराम करेगा और फिर इजरायल करेगा। अगले 24 घंटे के अंदर 12 दिनों से चल रहा युद्धविराम खत्म हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस ऐलान पर जहां इजरायल ने सहमति जताई है, वहीं ईरान ने युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के किसी भी समझौते से इंकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने ट्रंप के दावे का खंडन करते हुए कहा कि फिलहाल अभी युद्धविराम का कोई भी समझौता फाइनल नहीं हुआ है।  12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘बधाई हो सभी को! ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में पूर्ण सीजफायर पर सहमति बन गई है। यह सीजफायर आगामी छह घंटे के भीतर शुरू होगा और सबसे पहले ईरान इसका पालन करते हुए 12 घंटे का युद्धविराम करेगा। 12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा और फिर 24 घंटे बाद युद्ध औपचारिक तौर पर खत्म हो जाएगा।’ ट्रंप ने अपने इस पोस्ट में इजरायल और ईरान के नेताओं  की सहनशक्ति और बुद्धिमत्ता की जमकर तारीफ करते हुए दावा किया कि दोनों देशों के बीच यह युद्ध सालों तक चल सकती थी, जिसके चपेट में आकर पूरा मध्य पूर्व तबाह हो सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।  युद्ध विराम पर फाइनल समझौता नहीं- अराघची  वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि, फिलहाल अभी कोई समझौता फाइनल (Iran–Israel Ceasefire) नहीं हुआ है। हालांकि इस दौरान उन्होंने इजरायल की ओर से हमले रुकने पर ईरान द्वारा युद्ध रोकने की बात कही। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि, इस युद्ध की शुरुआत इजरायल ने ईरान पर हमला करके किया, हमने अपने बचाव में सिर्फ जवाबी कार्रवाई की है। ऐसे में सीजफायर करने की जिम्मेदारी इजरायल पर है। इजरायल को सबसे पहले अपने हमले रोकने होंगे। अगर इजरायल हमला नहीं करता तो ईरान भी जवाबी हमला नहीं करेगा। हम अपने सैन्य अभियान को समाप्त करने पर अंतिम निर्णय बाद में लेंगे।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने किया था हमला  बता दें कि ईरान को परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए अमेरिका ने हमला किया था। अमेरिका का दावा है कि इस हमले से ईरान का परमाणु निर्माण ढांचा पूरी तरह से खत्म हो गया है। इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने की घोषणा की थी। ईरान ने बीती रात कतर की राजधानी दोहा में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला बोलते हुए 14 मिसाइलें दागी। अमेरिका का दावा है कि इनमें से 13 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। वहीं एक मिसाइल ने जमीन पर हिट किया। ईरान के इस हमले से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि ईरान ने हमला करने से पहले इसकी जानकारी कतर को दे दी थी, जिसकी वजह से अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे को खाली करने के साथ एयर डिफेंस को एक्टिव करने का मौका मिल गया।  अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था रॉयटर्स ने बताया कि इस हमले के बाद ट्रंप ने कतर के प्रधानमंत्री को फोन कर सीजफायर का प्रस्ताव रखा और तेहरान से बात करने को कहा। इस बातचीत के बाद ही ट्रंप ने सीजफायर का दावा किया था, लेकिन अब ईरान ने फाइनल समझौते से इंकार कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Iran–Israel Ceasefire #iranisraelwar #trumpnews #middleeastconflict #iranlatestupdate #ceasefiredeal

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