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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे

नई दिल्ली, 4 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरे का उद्देश्य तीनों देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को नई गति देना है। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इंडोनेशिया के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया पहुंचेंगे, जहां दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, व्यापार, कनेक्टिविटी और आसियान (ASEAN) सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), शिक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देश पहले से ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार और शिक्षा पर फोकस यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूज़ीलैंड पहुंचेंगे। यहां द्विपक्षीय व्यापार, कृषि, डेयरी, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास और निवेश सहयोग जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। इंडो-पैसिफिक रणनीति को मिलेगी मजबूती विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को और मजबूत करेगा। समुद्री सुरक्षा, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भारत की भूमिका इस यात्रा के दौरान प्रमुख विषयों में शामिल रहने की संभावना है। निवेश और व्यापार के नए अवसर विशेषज्ञों के अनुसार तीनों देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ने से निवेश, उच्च तकनीक, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में नए अवसर विकसित हो सकते हैं। भारतीय उद्योग जगत भी इस यात्रा से सकारात्मक परिणामों की उम्मीद कर रहा है। वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से भारत के कूटनीतिक और आर्थिक हितों को और मजबूती मिलेगी। आगे की राह प्रधानमंत्री मोदी की इस तीन देशों की यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों, संयुक्त घोषणाओं और सहयोगी पहलों की घोषणा होने की संभावना है। इस दौरे को भारत के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव और वैश्विक साझेदारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्रोत:विदेश मंत्रालय, भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:4 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम और सरकारी सूचनाओं के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज, पश्चिम एशिया की स्थिति पर दुनिया की नजर

वॉशिंगटन/तेहरान, 3 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों के बीच संवाद बढ़ाया जा रहा है ताकि पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखी जा सके। वैश्विक समुदाय के साथ-साथ वित्तीय बाजार भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। संवाद के जरिए समाधान की कोशिश दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्कों के माध्यम से तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न देशों की मध्यस्थता और क्षेत्रीय सहयोग के जरिए बातचीत का माहौल बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। पश्चिम एशिया की स्थिरता पर फोकस विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यहां स्थिरता बनाए रखना न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों की नजर तेल की कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित प्रभाव को देखते हुए निवेशक और वैश्विक बाजार इस घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव में कमी आने से बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने तथा विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से करने की अपील की है। कूटनीतिक समाधान को दीर्घकालिक शांति का सबसे प्रभावी रास्ता माना जा रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा बनी प्राथमिकता पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर लगातार चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद और सहयोग से तनाव कम होने पर पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बन सकता है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच निरंतर संवाद भविष्य में विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर सभी की नजर रहेगी। आगे की राह कूटनीतिक वार्ताओं की प्रगति आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी इसका लाभ मिल सकता है। स्रोत:अमेरिका, ईरान तथा संबंधित देशों की आधिकारिक कूटनीतिक जानकारी और सार्वजनिक बयान। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में, अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति: पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर वार्ता अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ शेष बिंदुओं पर चर्चा जारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े अधिकांश विषयों पर सहमति बन गई है। अब कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत मुद्दों पर चर्चा चल रही है, जिनका समाधान होने के बाद समझौते की घोषणा की जा सकती है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में वृद्धि, निवेश प्रवाह में तेजी और दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है। किन क्षेत्रों पर है विशेष फोकस? वार्ता के दौरान कृषि, औद्योगिक उत्पाद, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार कर रहे हैं। भारतीय उद्योग को मिल सकता है लाभ यदि समझौता अंतिम रूप लेता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। आईटी सेवाएं, फार्मा, इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिल सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण पहल वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी। सरकार का भरोसा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शेष मुद्दों पर भी जल्द सहमति बन जाएगी। आगे क्या? दोनों देशों के अधिकारी शेष बिंदुओं पर बातचीत जारी रखेंगे। सहमति बनने के बाद व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उद्योग जगत और निवेशकों की नजर अब इस महत्वपूर्ण समझौते पर बनी हुई है, क्योंकि इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार तथा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का आधिकारिक बयान। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी आधिकारिक जानकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान तनाव में कमी के बाद कूटनीतिक प्रयास तेज, पश्चिम एशिया पर वैश्विक बाजारों की नजर

वॉशिंगटन/तेहरान, 1 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव में कमी आने के बाद दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में तेजी देखी जा रही है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। इस घटनाक्रम पर वैश्विक निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और वित्तीय बाजारों की करीबी नजर बनी हुई है, क्योंकि पश्चिम एशिया की स्थिरता का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। संवाद को मिल रही प्राथमिकता कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, तनाव कम होने के बाद विभिन्न माध्यमों से संवाद और विश्वास बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत का सिलसिला जारी रहने से क्षेत्र में स्थिरता मजबूत हो सकती है और आगे किसी बड़े टकराव की आशंका कम होगी। वैश्विक बाजार क्यों हैं सतर्क? पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां की किसी भी सुरक्षा या राजनीतिक स्थिति का असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार, तेल बाजार और निवेशक क्षेत्र के हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। क्षेत्र में शांति और निर्बाध नौवहन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है असर यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी नए तनाव या सुरक्षा चुनौती की स्थिति में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। भारत सहित कई देशों की चिंता भारत सहित कई देश पश्चिम एशिया से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। इसलिए क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत लगातार संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत जारी रहना सकारात्मक संकेत है। हालांकि, क्षेत्र की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और स्थायी समाधान के लिए निरंतर संवाद तथा आपसी विश्वास आवश्यक होगा। आगे क्या? आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर रहेगी। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूती मिल सकती है। स्रोत:संबंधित देशों के आधिकारिक बयान एवं अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्र। मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को उपलब्ध आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के बाद कतर में वार्ता की उम्मीद, पश्चिम एशिया पर टिकी वैश्विक बाजारों की नजर

दोहा/वॉशिंगटन/तेहरान, 30 जून। हालिया सैन्य तनाव और संघर्ष विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में नई कूटनीतिक वार्ता की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से वार्ता के स्वरूप और समय को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं, लेकिन मध्यस्थ देशों के प्रयास जारी हैं। संघर्ष विराम के बाद कूटनीतिक प्रयास हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ। इसके बाद कतर सहित क्षेत्रीय मध्यस्थों ने संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं ताकि तनाव दोबारा न बढ़े। वार्ता को लेकर अलग-अलग दावे अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि दोहा में बातचीत की संभावना है। वहीं ईरान ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वार्ता को लेकर अभी आधिकारिक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। वैश्विक बाजारों की नजर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखा जा रहा है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि वार्ता आगे बढ़ती है या क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है। इसी अनिश्चितता के कारण खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में सतर्क रुख देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा विशेषज्ञों के अनुसार वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कतर की मध्यस्थ भूमिका कतर लंबे समय से पश्चिम एशिया में विभिन्न कूटनीतिक वार्ताओं का महत्वपूर्ण मंच रहा है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में उसकी भूमिका आगे भी अहम रह सकती है। आगे क्या? विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है और ऊर्जा बाजारों को स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं यदि बातचीत में प्रगति नहीं होती है, तो पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बनी रह सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर दोहा में संभावित कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। स्रोत:रॉयटर्स, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्र मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 तक उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर परस्पर विरोधी बयान सामने आए हैं। इसलिए वार्ता की पुष्टि दोनों पक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से अभी नहीं की गई है। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने EU से स्क्रैप निर्यात प्रतिबंधों में राहत की मांग की, स्टील और एल्युमिनियम उद्योग की चिंताएं बढ़ीं

नई दिल्ली, 29 जून। भारत ने यूरोपीय संघ (EU) से स्क्रैप धातु के निर्यात पर प्रस्तावित प्रतिबंधों में राहत देने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि यदि इन प्रतिबंधों को लागू किया गया तो भारत के स्टील और एल्युमिनियम उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है। क्यों महत्वपूर्ण है स्क्रैप धातु? स्टील और एल्युमिनियम उद्योग में पुनर्चक्रित (रीसाइकिल) स्क्रैप धातु का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, ऊर्जा की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम रहता है। भारत अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में स्क्रैप धातु का आयात करता है, जिसमें यूरोपीय संघ एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारत ने EU के समक्ष रखी चिंता वाणिज्य अधिकारियों ने यूरोपीय संघ के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा है कि स्क्रैप निर्यात पर कड़े प्रतिबंध या अतिरिक्त शर्तें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। भारत ने सुझाव दिया है कि ऐसे उपाय अपनाए जाएं, जिनसे यूरोपीय उद्योगों की जरूरतें भी पूरी हों और साझेदार देशों को भी पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे। स्टील और एल्युमिनियम उद्योग पर संभावित असर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्क्रैप की उपलब्धता कम होती है तो स्टील और एल्युमिनियम उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां इन धातुओं का व्यापक उपयोग होता है। व्यापार वार्ता पर भी नजर यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार और निवेश सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) सहित कई आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में स्क्रैप निर्यात का विषय भी वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उद्योग जगत की प्रतिक्रिया भारतीय स्टील और धातु उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्थिर और किफायती कच्चे माल की उपलब्धता घरेलू विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उद्योग ने वैकल्पिक स्रोतों के विकास और घरेलू स्क्रैप संग्रह प्रणाली को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम स्क्रैप आधारित धातु उत्पादन को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे नई धातु के उत्पादन की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए स्क्रैप की निर्बाध उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आगे क्या? भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्ष ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं जिससे व्यापारिक हितों का संतुलन बना रहे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उद्योग जगत की नजर अब आगामी वार्ताओं और यूरोपीय संघ के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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वेनेजुएला भूकंप में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,430 हुई, राहत अभियान जारी

कराकास, 28 जून। वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 1,430 हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां, सेना और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चला रहे हैं। भारी मशीनों और विशेष खोजी उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्थानों पर बचाव दलों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। हजारों लोग घायल, राहत शिविरों में शरण सरकारी अधिकारियों के अनुसार हजारों घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उन्हें अस्थायी राहत शिविरों में ठहराया गया है। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय सहायता पहुंच रही भूकंप के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने सहायता भेजनी शुरू कर दी है। खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा विशेषज्ञ, दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियां भी राहत प्रयासों में सहयोग कर रही हैं। आफ्टरशॉक्स से लोगों में दहशत मुख्य भूकंप के बाद कई बार हल्के और मध्यम तीव्रता के झटके महसूस किए गए हैं। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण लोग घरों से बाहर खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान भूकंप के कारण कई इमारतें, सड़कें, पुल और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई हैं। संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा है, जिससे राहत कार्यों में शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इंजीनियरों की टीमें क्षतिग्रस्त संरचनाओं का आकलन कर रही हैं। सरकार ने बढ़ाई निगरानी वेनेजुएला सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण केंद्र स्थापित किए हैं और राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाना, घायलों का उपचार और विस्थापित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना है। विशेषज्ञों ने जताई चिंता आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री समय पर नहीं पहुंची तो मानवीय संकट और गहरा सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। स्रोत:वेनेजुएला राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी एवं आधिकारिक सरकारी जानकारी मूल रिपोर्ट:अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और आधिकारिक बयानों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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वेनेजुएला भूकंप में मृतकों की संख्या 920 के पार, राहत अभियान लगातार जारी

कराकास, 27 जून। वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 920 से अधिक हो गई है, जबकि 3,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियां और आपदा प्रबंधन दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। दो शक्तिशाली भूकंपों से मची तबाही बताया गया है कि उत्तरी वेनेजुएला में कुछ ही समय के अंतराल पर दो तेज भूकंप आए, जिनकी तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई। कम गहराई पर आए इन झटकों के कारण कई इमारतें ढह गईं और व्यापक स्तर पर जन-धन का नुकसान हुआ। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में राजधानी कराकास के आसपास का इलाका और ला ग्वायरा राज्य शामिल हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां, सेना और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। बचावकर्मी भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अब भी कई लोग इमारतों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। हजारों लोग घायल, कई परिवार बेघर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3,360 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत शिविरों में भोजन, पानी तथा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं चौबीसों घंटे संचालित की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता पहुंचनी शुरू भूकंप के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सहायता की पेशकश की है। विदेशी खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा विशेषज्ञ और राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही है। मानवीय सहायता एजेंसियां अस्थायी आश्रय, खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी हैं। आफ्टरशॉक्स से बढ़ी चिंता मुख्य भूकंप के बाद कई हल्के झटके भी महसूस किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स की संभावना अभी बनी हुई है। सरकार ने तेज की निगरानी वेनेजुएला सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी के लिए विशेष नियंत्रण केंद्र स्थापित किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों का उपचार और विस्थापित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही क्षतिग्रस्त भवनों और बुनियादी ढांचे का आकलन भी किया जा रहा है। मानवीय संकट गहराने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि राहत कार्य जितना लंबा चलेगा, प्रभावित लोगों के सामने भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी चुनौतियां उतनी बढ़ेंगी। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने राहत प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। स्रोत:वेनेजुएला राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां एवं आधिकारिक सरकारी जानकारी मूल रिपोर्ट:अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों एवं आधिकारिक बयानों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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वेनेजुएला भूकंप में मृतकों की संख्या बढ़कर 235 पहुंची, राहत अभियान जारी

कराकास, 26 जून। वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 235 हो गई है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश में युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं। दो शक्तिशाली भूकंपों से मची तबाही बुधवार को उत्तरी वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप आए। सबसे अधिक नुकसान ला गुआइरा (La Guaira) राज्य और राजधानी कराकास के आसपास के क्षेत्रों में हुआ, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और आवासीय परिसर क्षतिग्रस्त हो गए। राहत एवं बचाव अभियान जारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां, सेना और अंतरराष्ट्रीय राहत दल लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है ताकि जीवित लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। अधिकारियों का कहना है कि समय बीतने के साथ बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। हजारों घायल, कई लोग अब भी लापता स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 4,300 से अधिक घायल अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने की सूचना है और प्रशासन लगातार उनकी तलाश कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं। आपातकाल लागू, अंतरराष्ट्रीय सहायता पहुंची सरकार ने पहले ही राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने राहत सामग्री, चिकित्सा दल और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ भेजे हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी और अस्थायी आवास उपलब्ध कराने का काम भी जारी है। आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता मुख्य भूकंपों के बाद कई हल्के झटके भी महसूस किए गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का अंतिम आकलन अभी जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। वेनेजुएला सरकार ने कहा है कि राहत और पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक शीघ्र सहायता पहुंचाना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस आपदा से निपटने में वेनेजुएला की सहायता कर रहा है। स्रोत:वेनेजुएला स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां मूल रिपोर्ट:सरकारी ब्रीफिंग, रॉयटर्स, एपी और अन्य अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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वेनेजुएला में लगातार दो भूकंप, आपातकाल घोषित

कराकास, 25 जून। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचा दी है। कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए इन भूकंपों के बाद सरकार ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया है। राजधानी कराकास सहित कई क्षेत्रों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है और राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के आए भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसके लगभग 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंपों का केंद्र उत्तरी वेनेजुएला के तटीय क्षेत्र के पास बताया गया है। कराकास में कई इमारतों को नुकसान भूकंप के झटकों के कारण राजधानी कराकास में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ भवनों के ढहने की भी खबर है, जबकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। सरकार ने घोषित किया आपातकाल अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आपात संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों और कई गैर-जरूरी गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। राहत और बचाव अभियान जारी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को तैनात किया गया है। कई देशों ने वेनेजुएला को सहायता देने की पेशकश भी की है। आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता मुख्य भूकंपों के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी जारी है और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं। प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। स्रोत:वेनेजुएला सरकार, USGS एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां मूल रिपोर्ट:रॉयटर्स, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स एवं आधिकारिक आपदा प्रबंधन अपडेट के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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