Iran US tensions

Iran: Military Will Decide Response to US Actions: अमेरिका को कब, कहां और कैसे जवाब देना है? ये अब सेना तय करेगी- ईरान

रविवार को ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर्स से ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों नातांज, फोरदो और इस्फहान पर हमले किए। हमले के बाद ईरान ने अमेरिका से इस हमले का बदला लेने का संकेत दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबीक संयुक्त राष्ट्र में इसका ऐलान करते हुए ईरानी राजदूत ने कहा, हम कब-कहां और कैसे बदला लेंगे, ये ईरानी सेना तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी। वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि दुश्मन ने बड़ी भारी भूल की है, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हम दुश्मन पर हमले तेज करेंगे। गुनहगारों को सजा मिलकर रहेगी। यहूदी देश ने बड़ी भयंकर भूल की है। उसे सजा मिलनी चाहिए और ये उसे मिलकर रहेगी। उसे सजा मिल भी रही है।  ईरानी सेना अमेरिका पर ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद ईरान में तबाही मची है। इस हमले के बाद ईरान ने बड़ा बयान दिया है और कहा है कि अमेरिका ने देश के परमाणु कार्यक्रम पर हमला करके कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया और अब ईरानी सेना अमेरिका पर ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी। बता दें कि रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आमिर सईद इरावानी ने कहा कि अमेरिका द्वारा उसके तीन परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करने के बाद ईरान ने युद्धोन्मादी अमेरिकी शासन को बार-बार चेतावनी दी थी कि वह इस दलदल में न फंसे। राजदूत ने बैठक में कहा, हम सभी आवश्यक उपाय करेंगे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करके कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया और अब ईरानी सेना ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय करेगी। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को घेरते हुए इरावानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को तुरंत ऐसे अन्याय और कानूनों के उल्लंघन के मामले में कदम उठाना चाहिए। ऐसा नहीं होता है तो यूएन खुद अपनी हैसियत खो देगा।  इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! संयुक्त राज्य अमेरिका एक और महंगे और निराधार युद्ध में फंस गया (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) है ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत इरावानी यहीं नहीं रुके, उन्होंने ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पश्चिम का घटिया काम करने और अमेरिकी विदेश नीति को हाईजैक करने में सफल होने का आरोप लगाया, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका एक और महंगे और निराधार युद्ध में फंस गया (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) है। हमले के बाद उनका गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता को अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट और घोर उल्लंघन करार दिया। इरावानी ने कहा कि इस सप्ताह ईरान के विदेश मंत्री ने कई यूरोपीय समकक्षों के साथ बातचीत की, संयुक्त राज्य अमेरिका ने उस कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया। हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी पूछा कि इस स्थिति से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? पश्चिमी देशों के दृष्टिकोण से, ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लौटना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर बिना सोचे समझे अपनी सुरक्षा को सिर्फ इसलिए दांव पर लगाया है कि नेतन्याहू को बचाया जा सके, लेकिन ईरान को अपनी आत्मरक्षा का वैधानिक अधिकार है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Iran: Military Will Decide Response to US Actions #iran #usairstrikes #middleeastcrisis #iranmilitary #geopolitics #breakingnews #worldnews #irannews #tensionsrise

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Indus Waters Treaty

भारत सिंधु जल संधि बहाल करे, नहीं तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर करेगा कब्जा- बिलावल भुट्टों की गीदड़भभकी

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवादों में रही सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को भारत की तरफ से स्थगित करने के बाद से पाकिस्तान लगातार दर्द से बिलबिला रहा है। इस मुद्दे पर अब पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने भारत को युद्ध की धमकी देते हुए कहा है कि भारत के पास सिर्फ दो विकल्प हैं। बिलावल का यह बयान गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) के एक बयान के बाद आया है। अमित शाह ने एक इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि भारत का सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को बहाल करने का कोई इरादा नहीं है। शाह के इस बयान के बाद से ही पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में हडकंप मची हुई है।  अगर भारत सिंधु जल संधि को बहाल नहीं करता, तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने भी अमित शाह (Amit shah) के इसी बयान का जवाब देते हुए एक रैली में भारत को सीधे तौर पर युद्ध की धमकी दी। बिलावल ने कहा, “भारत के पास अब केवल दो विकल्प हैं, या तो वह सिंधु जल संधि को मानते हुए हमारे साथ सहयोग करे या पाकिस्तान से युद्ध के लिए तैयार रहे।” बिलावल यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने कहा कि अगर भारत सिंधु जल संधि को बहाल नहीं करता, तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिलावल भुट्टो का यह बयान पाकिस्तान की बौखलाहट को दिखाता है। भारत ने जब से सिंधु जल संधि पर रोक लगाया है, पाकिस्तान तभी से इस तरह की गीदड़भभकी दे रहा है।  हम सिंधु सभ्यता के संरक्षक हैं और इसकी रक्षा के लिए युद्ध का रास्ता भी अपनाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने यह भी कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित करना “शांति को खत्म करने जैसा कदम” है। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व का सवाल है और पाकिस्तान की सरकार इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। बिलावल ने धमकी देते हुए कहा, “हम सिंधु सभ्यता के संरक्षक हैं और इसकी रक्षा के लिए युद्ध का रास्ता भी अपनाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।” बता दें कि बिलावल भुट्टों इससे पहले भी इस तरह का भड़काऊ बयान दे चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर से पहले बिलावल ने भारत को धमकी देते हुए कहा था, “या तो नदियों में पानी बहेगा, या फिर भारत का खून।” इस तरह के बयान न केवल भारत-पाक के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की छवि को भी प्रभावित कर रहे हैं। इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमित शाह के बयान के बाद बौखलाया पाकिस्तान गृहमंत्री अमित शाह (Amit shah) ने हाल में एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें कहा था कि, भारत सिंधु जल समझौते को बहाल नहीं करेगा। शाह ने कहा, “भारत को अब अपने अधिकारों को जानने और उन पर अमल करने का समय आ गया है।” शाह के इस बयान को पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि भारत अब अपनी जल कूटनीति को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने को तैयार है। इस बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे “अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन” बताया और वैश्विक मंचों पर भारत की शिकायत करने की चेतावनी दी। वहीं बिलावल भुट्टों भारत को युद्ध की धमकी देने लगे। लेकिन भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संयम दिखाया है और कभी भी युद्ध जैसी कोई भाषा नहीं अपनाई, लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक वर्ग द्वारा बार-बार युद्ध की धमकी देना कहीं न कहीं उनकी राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक दबावों को दर्शाता है। सिंधु जल संधि: क्या है विवाद की जड़? बता दें कि सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुई थी। इस संधि के तहत छह नदियों का पानी दोनों देशों में बांटा गया। भारत को रावी, ब्यास, सतलुज का पानी मिला था और पाकिस्तान को सिंधु, झेलम, चिनाब का पानी मिला था। इस संधि के तहत भारत पाकिस्तान की नदियों के पानी को रोक नहीं सकता, लेकिन सीमित सिंचाई, जल-विद्युत और घरेलू उपयोग के लिए संरचनाएं बना सकता है। हालांकि, भारत हमेशा से इस संधि को गलत मानता रहा, लेकिन कभी रोक नहीं लगाया। लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया है। भारत का कहला है कि पाकिस्तान के साथ यह संधि अच्दे रिश्ते और शांति के लिए किए गए थे, लेकिन बदले में पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद और हिंसा फैलाई। पानी और खून अब एक साथ नहीं बह सकता। इसलिए पाकिस्तन जब तक आतंकवाद को खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Amit shah Bilawal Bhutto #IndusWatersTreaty #BilawalBhutto #IndiaPakistan #RiverDispute #SouthAsiaTensions #Geopolitics #BreakingNews #PakistanThreat

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Iran nuclear strikes

Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes: ईरान के न्यूक्लियर साइट्स तबाह करने के बाद इस वजह से ट्रंप ने दिए खामेनेई को सत्ता से बेदखल करने के संकेत 

13 जून से ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध है की थमने के नाम ही नहीं ले रहा है। तेहरान को न्यूक्लियर वेपन हासिल करने से रोकने के लिए इजरायल ने ईरान पर अचानक हमला किया था। अक्टूबर 2023 से गाजा में इजरायल के लंबे युद्ध के बाद पहले से ही चरम पर है ऊपर से ईरान और इजरायल युद्ध ने पूरे क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है। इस दरम्यान दोनों के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका की भी इंट्री हो गई। सरेंडर करने की हिदायत को अनदेखा करने के बाद अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर बी 2 बॉम्बर के जरिए अटैक किया। दरअसल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के उद्देश्य से अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु केन्द्रों फोर्दो, नतांज और इस्फहान पर यह हमला किया। इस अटैक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना की तारीफ की। ध्यान देने वाली बात यह कि इस हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली सेना को अमेरिका के साथ काम करने के लिए धन्यवाद दिया। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर भी बड़ा चौंकाने वाला बयान दिया (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) है। बयान के मुताबिक उन्होंने खामेनेई को सत्ता से बाहर करने का स्पष्ट संकेत दिया है।  ईरानी शासन ईरान को फिर से महान बनाने में असमर्थ है, तो क्यों (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) नहीं होगा शासन परिवर्तन? रविवार को ईरान की परमाणु साइट्स पर अमेरिका के बड़े पैमाने पर सटीक हमलों के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने  इस्लामी गणराज्य में शासन परिवर्तन की संभावना का न सिर्फ संकेत दिया बल्कि देश की मौजूदा नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाया। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किये एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, शासन परिवर्तन शब्द का उपयोग करना राजनीतिक रूप से सही नहीं है, लेकिन अगर वर्तमान ईरानी शासन ईरान को फिर से महान बनाने में असमर्थ है, तो शासन परिवर्तन क्यों (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) नहीं होगा? MIGA (मेक ईरान ग्रेट अगेन) यही नहीं, अपने एक अलग पोस्ट में ट्रंप ने सेना के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा, ईरान में परमाणु स्थलों को हुआ नुकसान बड़ा है। हमले कठोर और सटीक थे। हमारी सेना ने शानदार कौशल दिखाया। ट्रंप ने कहा, महान बी-2 पायलट अभी-अभी मिसौरी में सुरक्षित रूप से उतरे हैं। बेहतरीन काम के लिए धन्यवाद! डोनाल्ड जे. ट्रंप, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति। बड़ी बात यह कि ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा ऑपरेशन मिडनाइट हैमर शुरू करने के एक दिन बाद आई है।  इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमेरिकी राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) थे स्पष्ट आदेश- अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ इसके अलावा रविवार को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान में अमेरिका द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन की सफलता की (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) पुष्टि की। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी सैनिकों या नागरिकों को निशाना नहीं बनाया। बता दें कि संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ एयर फोर्स के अध्यक्ष जनरल डैन कैन के साथ मीडिया से रूबरू होते हुए हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, इस्फ़हान और नतांज में सफलतापूर्वक सटीक हमले किए हैं। पिछली रात, राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर यूएस सेंट्रल कमांड ने ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों- फोर्डो, इस्फहान और नतांज पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने या उसे गंभीर रूप से सीमित करने के लिए आधी रात को सटीक हमला किया। यह एक अविश्वसनीय और जबरदस्त सफलता थी। हेगसेथ ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के आदेश स्पष्ट थे। उन्होंने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नष्ट कर दिया। हमारे कमांडर-इन-चीफ से हमें जो आदेश मिला वह केंद्रित था, यह शक्तिशाली था, और स्पष्ट था। हमने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes #Trump #Khamenei #IranStrike #USIranTensions #NuclearSiteAttack #MiddleEastCrisis #BreakingNews

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Iran–Israel

ईरान ने इजरायल पर रात भर बरसाईं बैलिस्टिक मिसाइल, इजरायल की चेतावनी-‘भीषण और लंबे युद्ध के लिए तैयार रहो’

ईरान और इजरायल के बीच पिछले सप्ताह से जारी जंग (Iran–Israel War) अब भीषण हो चुकी है। ईरान ने बीती रात इजरायल पर मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए। जवाब में इजरायल ने भी फाइटर जेड से ईरान के न्यूक्लियर और सैन्य ठिकानों के साथ इंडस्ट्रियल एरिया पर हमले किए। इन हमलों से दोनों तरफ भारी तबाही हुई है। ईरान के हमलों पर इजरायल ने दावा किया है कि वह उसके रिहायशी इलाकों पर मिसाइले दाग रहा है। इन हमलों से नाराज इजरायल ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि अब ये जंग (Iran–Israel War) और भीषण और लंबी होगी। ईरान बुरे से बुरे हालात के लिए तैयार रहे।  बता दें कि इजरायल-ईरान युद्ध (Israel–Iran War) नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है भीषण होता जा रहा है। ईरान पीछे हटने की जगह अपने बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल पर जबरदस्त हमला बोल रहा है। युद्ध लंबा खिंचता देख इजरायली सैन्य प्रमुख इयाल जमीर ने शुक्रवार को अपने नागरिकों से कहा कि, वो “लंबे संघर्ष” के लिए तैयार रहें। साथ ही ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अपने एक-एक मिसाइल की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। क्योंकी हम ईरान पर और भी भीषण (Iran–Israel War) हमला करने जा रहे हैं।  इजरायल ने किया ईरान के एक और बड़े कमांडर को मारने का दाव  इजरायल ने दावा किया है कि उसके आईडीएफ ड्रोन (IDF Drone) हमले में एक ईरानी कमांडर मारा गया है। इजरायल ने बताया कि उसके ड्रोन ने ईरानी सैनिकों के एक ऐसे समूह पर हमला किया, जिसमें आईआरजीसी (IRGC) का कमांडर भी मौजूद था। यह कमांडर 15 मिसाइल लांचर का जिम्मेदार था। जब उ्रोन ने हमला किया, तब सैनिकों का यह समूह मिसाइल दागने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसके पहले सभी को मार दिया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के बीरशेबा, तेल अवीव और यरूशलेम समेत कई दूसरे शहरों पर मिसाइलें दागी। इनमें से ज्यादातर मिसाइलों को इजरायल ने हवा में ही मार गिराया। हालांकि कुछ मिसाइलें इन शहरों में भी गिरी हैं, जिससे इजरायल को भारी नुकसान हुआ है।   इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! इजरायली हमले के बीच परमाणु मसले पर बात नहीं करेगा ईरान ईरान और इजरायल (Iran–Israel) के बीच चह रहे इस युद्ध को रोकने के लिए अब कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री से बात की। जिसके बाद ईरान ने बयान जारी कर कहा कि वह युद्ध पर बात कर सकता है, लेकिन इजरायली हमलों के बीच वह परमाणु मसले पर समझौता करने के लिए किसी भी देश से बातचीत नहीं करेगा। वहीं यूरोपीय देशों ने ईरान को अमेरिका से बातचीत करने को कहा है। यूरोपीय देशों ने ईरान और इजरायल से युद्ध को जल्द से जल्द रोकने की अपील की है।   ईरान को ट्रंप ने दिया दो सप्ताह का समय  ईरान और इजरायल (Iran–Israel) में संघर्ष विराम को लेकर व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान की मदद यूरोपीय देश नहीं कर सकते हैं। उन्हें अमेरिका से बात करनी होगी। वहीं ईरान पर हमले को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि, ईरान पर हमले के बारे में उन्होंने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। बातचीत के लिए ईरान के पास अभी दो सप्ताह का समय है। इसके बाद स्थितियों का आकलन करते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि युद्ध में उतरा जाए कि नहीं। अमेरिका का कहना है कि अभी ईरान के साथ वार्ता की संभावना तलाशा जा रहा है। ईरान के साथ अगर कोई समझौता होता है तो वह अमेरिका की शर्तों पर होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Iran–Israel #IranIsrael #IranIsraelwar

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Netanyahu Iran conflict,

Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War: ट्रंप के बाद नेतन्याहू ने दी खामेनेई को धमकी, अमेरिका के बाद ईरान-इजरायल युद्ध में रूस की भी हुई इंट्री

बीतते समय के साथ-साथ ईरान-इजरायल तनाव लगातार जारी है। आठवें दिन भी लगातार तनाव बना हुआ है। जारी तनाव के बीच गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, इजरायली हमलों से कोई भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी निशाने पर हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से करना (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए। दरअसल, नेतन्याहू ने यह टिप्पणी दक्षिणी इजरायली शहर बीरशेबा में सोरोका मेडिकल सेंटर के दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। गौरतलब हो कि गुरुवार सुबह ईरान ने मिसाइल हमला किया था। ईरानी हमले से तिलमिलाए नेतन्याहू ने कहा, मैंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी इससे अछूता नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह कुछ बोलने में नहीं, बल्कि कार्रवाई करके दिखाने में भरोसा करते हैं।  युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हालाँकि इस बीच नेतन्याहू ने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया चाहिए और कार्रवाई में सटीकता होनी चाहिए। सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने बात को वहीं खत्म करते हुए कहा कि प्रेस में इस बारे में बात न करना ही बेहतर है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि ईरान में इजरायल की कार्रवाई उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल भंडार के खिलाफ थी, न कि ईरान की तरह निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) लिए। अस्पतालों पर बमबारी हुई बमबारी पर नेतन्याहू ने कहा कि वे उन अस्पतालों पर बमबारी करते हैं, जहां लोग खतरे से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे कार्यशील लोकतंत्र और इन हत्यारों के बीच का अंतर है, जो कानून का पालन करता है। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी मंजूरी  बता दें कि ईरान और इजरायल युद्ध पर अमेरिका भी अपनी नजर बनाए हुए है। जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद और बिना शर्त आत्मसमर्पण करने हेतु कहा था। इसके अलावा लगातार ईरान पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को मंजूरी दे दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी। खैर, उन्होंने अधिकारियों को अंतिम फैसले के लिए रुकने के लिए कहा था। इस पूरे मामले पर बोलते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप अगले दो हफ्ते में ईरान को लेकर फैसला कर सकते हैं। इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी- ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ध्यान देने वाली बात यह कि ट्रंप के आत्मसमर्पण के प्रस्ताव को ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने यह कहते हुए ठुकरा था कि जो लोग ईरान के इतिहास और उसकी संघर्षशीलता से वाकिफ हैं, वे हमें कभी धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे। ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी। समर्पण करना तो दूर उन्होंने ट्रंप को सीधे चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इजरायल की मदद करने की कोशिश करता है या सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो उसे ऐसे नुकसान उठाने पड़ेंगे जो पूरी तरह से कभी भर नहीं पाएंगे।  अमेरिका इस संघर्ष से (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) ही रहे दूर- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन महत्वपूर्ण बात यह कि अमेरिका के बाद इजरायल-ईरान युद्ध में रूस की भी एंट्री हो (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली चेतावनी देते हुए कहा, अमेरिका इस संघर्ष से दूर ही रहे। पुतिन ने ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलों को लेकर कहा कि हम वाशिंगटन को ऐसे काल्पनिक विकल्पों के खिलाफ भी आगाह करते हैं। ऐसा कोई भी कदम पूरे हालात को गंभीर रूप से अस्थिर कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War #Netanyahu #Khamenei #Russia #IranIsraelWar #Trump #MiddleEastConflict #GlobalTension #WW3Alert

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India Pakistan conflict,

‘भारत के हमले से नूर खान और शोरकोट एयरबेस तबाह…’ पाकिस्तान के डिप्टी पीएम ने कबूला सच्चाई, खोली अपने ही झूठ की पोल

पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से हुए भारी नुकसान को छुपाने की लाख कोशिश कर ले, लेकिन उनके नेताओं के मुंह से सच निकल ही जाता है। अब एक बार फिर पाकिस्तान ने भारत के सफलता का खुलासा कर दिया है। इस बार पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने सच को स्वीकार्य किया है। डार ने पाकिस्तान के GEO न्यूज को इंटरव्यू देते हुए भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की सफलता का खुलासा किया। उन्होंने माना कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान के दो सबसे अहम एयरबेस- नूर खान और शोरकोट को भारी नुकसान हुआ है। भारत के इस विध्वंसक हमले के कारण पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की योजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। इशाक डार (Ishaq Dar) का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान इस सैन्य संघर्ष को अपनी जीत के रूप में पेश कर रहा है और अभी तक अपने नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य नहीं किया है।  Pakistani deputy PM Ishaq Dar claims India hit Nur Khan and Shorkot airbases. He says Saudi Prince Faisal bin Salman asked if he could tell Jaishankar that Pakistan is ready to stop— revealing that it wasn't just the US that Pakistan went to at that the time to convince India… pic.twitter.com/uV3wU7av13 — Shubhangi Sharma (@ItsShubhangi) June 19, 2025 हम पलटवार की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले भारत ने कर दिया हमला- डार इशाक डार (Ishaq Dar) ने इस इंटरव्यू में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइलों से उसके ऐयरबेस पर हमला किया, तब पाकिस्तान खुद भारत पर एक जवाबी सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा था। लेकिन भारत ने जिस तरह से सटीक हमला किया उससे पाकिस्तान (Shehbaz Sharif) की रणनीति निष्प्रभावी हो गई। क्योंकि भारत के हमले में दोनों एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचा और वे किसी भी सैन्य ऑपरेशन लायक नहीं रह गए। इशाक डार ने यह भी स्वीकार्य किया कि भारत का यह हमला पाकिस्तान के लिए “सामरिक रूप से बेहद चौंकाने वाला” था।  सऊदी अरब से की थी मध्यस्थता की अपील  इशाक डार ने इस दौरान यह भी खुलासा किया कि भारत के इस हमले से हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके थे कि हमें तुरंत अमेरिका और सऊदी अरब से मदद मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का उनके पास फोन आया और उन्होंने पूछा कि क्या मैं इस संघर्ष को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करूं और उनसे कहूं कि पाकिस्तान सीजफायर के लिए तैयार है? इशाक डार ने बताया कि क्राउन प्रिंस की बात पर उन्होंने तुरंत सहमति व्यक्ति कर दी और कहा कि हां प्लीज आप एस. जयशंकर से बात करके बताईए कि पाकिस्तान सीजफायर चाहता है।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! एयर डिफेंस तबाह हुआ तो घुटनों पर आया पाक इशाक डार द्वारा यह सच्चाई स्वीकार्य करने से एक बात साफ हो गई है कि भारत के हमले से पाकिस्तान बेहद डर गया था और समझ गया था कि अगर सीजफायर नहीं होता तो भारत उसका नामो निशान मिटा देगा। भारत पहले ही पाकिस्तान के एयर डिफेंस को तबाह कर चुका था। इसलिए  वह भारत के हमले को रोकने में सक्षम ही नहीं था। इशाक डार को पाकिस्तान के बरबोले नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि सऊदी प्रिंस ने खुद उन्हें फोन किया था, लेकिन जिस तरह के हालात थे, उससे ऐसा लगता नहीं है। पाकिस्तान उस समय जिस तरह घुटनों पर बैठा हुआ था, उससे तो यही लगता है कि पाकिस्तान ने खुद ही सऊदी अरब को फोन लगाकर सीजफायर की गुहार लगाई होगी। भारत के इस हमले से पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस अभी भी आईसीयू में है। यह एयरबेस अभी भी पूरी तरह से बंद पड़ा है और यहां पर मरम्मत का कार्य चल रहा है। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने भी स्वीकार किया था कि भारत के हमले में उनके कई एयरबेस को भारी नुकसान हुआ है। वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) भी हाल ही में वॉशिंगटन में बयान दे चुके हैं कि भारत अब “न्यू नॉमर्ल” सैन्य सिद्धांत स्थापित करना चाहता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Shehbaz Sharif #IndiaPakistanConflict #AirstrikeTruth #NoorKhanAirbase #ShorkotAirbase #PakistanNews #BreakingNews

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Trump cryptic statement

Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir: आखिर ट्रंप ने क्यों कहा, कोई नहीं जानता कि मैं क्या करूंगा, मचा हड़कंप

बीते सप्ताह भर से इजरायल और ईरान के बीच आत्मघाती हमले जारी हैं। एक तरफ जहां इजरायल तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में एयर स्ट्राइक कर रहा है और उसके न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान इजरायल पर लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। यही नहीं, ईरान-इजरायल युद्ध में अब अमेरिका भी कूद पड़ा है। बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमले को मंजूरी दे दी है। फिलहाल उन्होंने अंतिम आदेश के लिए रुकने को कहा है। उनके मुताबिक फाइनल आदेश के बाद हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) जाएगा। दरअसल, वो यह देख रहे हैं कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम की हठ छोड़ता है या नहीं। खैर, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान-इजरायल युद्ध के बीच एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए व्हाइट हाउस आने को तैयार था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया।  आज की स्थिति और एक हफ्ते पहले की स्थिति में काफी आ (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) चुका है फर्क  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि अब बातचीत का समय बीत चुका है। ट्रंप ने कहा कि आज की स्थिति और एक हफ्ते पहले की स्थिति में काफी फर्क आ (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) चुका है। अब किसी को नहीं पता कि मेरा अगला कदम क्या होगा, क्योंकि मेरा धैर्य अब खत्म हो गया है। उन्होंने आगे कहा, “ईरान की ओर से व्हाइट हाउस आने का सुझाव भी दिया गया था। यह एक साहसिक कदम था, लेकिन उनके लिए ऐसा करना आसान नहीं होता।” दरअसल, ट्रंप से उस बयान पर पूछा गया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया था। इस पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, मैं उन्हें सिर्फ शुभकामनाएं दूंगा। अब हमारा सब्र जवाब दे चुका है। उनका देश बर्बादी के कगार पर है। कई लोगों की जान जा चुकी है। जो कि बेहद दुखद है। इस दौरान  जब ट्रंप से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा? तो उन्होंने शांत शब्दों में कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी कि हमला होगा या नहीं।  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) दिया करारा जवाब गौरतलब हो कि राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) के बयान से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को करारा जवाब (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) दिया है। खामेनेई ने साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान कभी भी घुटने नहीं टेकेगा और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान अपने शहीदों के खून की अनदेखी नहीं करेगा और उसे हमेशा याद रखेगा। विदित हो कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खामेनेई को सख्त संदेश देते हुए कहा था कि ईरान को बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। इसके जवाब में खामेनेई ने अमेरिका को तीखा संदेश भेजा।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! यदि अमेरिका ने हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) तो उसे ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेगा, और यदि अमेरिका ने हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) तो उसे ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे जिनकी भरपाई संभव नहीं होगी। इस दौरान खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान विदेशी शक्तियों की किसी भी धमकी या दबाव के सामने झुकेगा नहीं। खामेनेई ने बेबाकी अंदाज में दो टूक कहा, हम न तो किसी जबरन थोपे गए युद्ध को स्वीकार करेंगे और न ही किसी थोपी गई शांति को हम हर परिस्थिति में डटकर मुकाबला करेंगे। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir #Trump #DonaldTrump #USPolitics #CrypticStatement #GlobalNews #2025Elections #TrumpNews

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Khalistan Supporters in Canada

‘भारत विरोधी खालिस्तानियों को हम पनाह देते हैं’; पीएम मोदी के दौरे के बाद कनाडा ने मानी अपनी गलती 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के दौरे के बाद कनाडा ने पहली बार स्वीकार किया है कि खालिस्तानी चरमपंथी उसके जमीन का इस्तेमाल भारत में हिंसा-आतंकवाद फैलाने के लिए कर रहे हैं। कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट में बताया गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) कनाडा का इस्तेमाल भारत में हिंसा फैलाने, धन जुटाने और अलगावाद को बढ़ावा देने का प्लान बनाने के रूप में कर रहे हैं। सीएसआईएस (CSIS) ने अपनी यह वार्षिक रिपोर्ट बुधवार को जारी की। इसमें कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रमुख खतरों और चिंताओं के बारे में बताया गया है।  खालिस्तानी आतंकवादियों का पनहगाह बन चुका है कनाडा  सीएसआईएस ने अपने इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि, ‘खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) कनाडा में मौजूद हैं और ये यहां के जमीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, गैर कानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने या अलगावाद को योजना बनाने के लिए लंबे समय से कर रहे हैं। सीएसआईएस की रिपोर्ट पुष्टि करती है कि कनाडा अब भारत विरोधी तत्वों के लिए एक सुरक्षित देश बन चुका है। इस रिपोर्ट ने भारत द्वारा सालों से उठाई जा रही चिंताएं पुष्ट की है। भारत दशकों से कनाडा को चेतावनी देता रहा है कि उसका देश खालिस्तानी आतंकवादियों  का पनहगाह बन चुका है, लेकिन कनाडा इस सच्चाई को स्वीकार्य करने को तैयार नहीं था। हालांकि अब उसकी खुद की खुफिया एजेंसी द्वारा यह खुलासा होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कनाडा सरकार जल्द ही भारत विरोधी इन तत्वों पर कार्रवाई शुरू करेगा।  खालिस्तानी चरमपंथ को रोकने के लिए भारत कर रहा कनाडा में कार्रवाई  सीएसआईएस के रिपोर्ट में कहा गया है कि 1980 के दशक के मध्य से ही कनाडा में भारत विरोधी कुछ छोटे संगठन मौजूद हैं। जिन्हें खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) माना जाता है, क्योंकि ये कनाडा का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। कनाडा से उभरने वाला ये खालिस्तानी चरमपंथ कनाडा में भारतीय विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियों को बढ़ावा देने का कारण है। इनको रोकने के लिए ही भारत हमारी धरती पर गैर अधिकृति कार्रवाई कर रहा है।   कनाडा ने खालिस्तानियों के लिए पहली बार किया उग्रवाद शब्द का इस्तेमाल सीएसआईएस के इस रिपोर्ट की सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि कनाडा ने पहली बार खालिस्तानियों के लिए आधिकारिक तौर पर ‘उग्रवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया है। यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे पहले कनाडा की सरकार इन खालिस्तानियों (Khalistani Extremists) को हल्के में लेती थीं और इनके कार्रवाई को ‘सामुदायिक गतिविधियों’ की तरह देखती थी। लेकिन सीएसआईएस ने जिस तरह से अब इन्हें उग्रवादी कहकर संबोधित किया उससे यही लगता है कि, खालिस्तानी उग्रवादी अब न केवल भारत के लिए खतरा हैं, बल्कि कनाडा के लिए भी खतरा बन चुके हैं। इसीलिए सीएसआईएस ने खालिस्तान पर चिंता व्यक्ति करते हुए इन पर कार्रवाई की मांग की है।   इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! ट्रूडो सरकार में बेहद खराब स्तर पर पहुंच गए थे दोनों देशों के रिश्ते  बता दें कि कनाडा में जब पीएम जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) की सरकार थी, तब दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे। साल 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पीएम ट्रूडो इसका आरोप भारत पर लगाया था और दावा किया था कि उनके पास इस हत्याकांड में भारत की संलिप्तता के सबूत हैं। भारत ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे “बेतुका” और “बेबुनियाद” बताया था। साथ ही कनाडा पर भारत विरोधी तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद भारत ने कनाडा के छह राजनायिकों को देश से निकालने के साथ अपने राजनायिकों को भी वापस बुला लिया था। लेकिन कनाडा में सत्ता परिवर्तन होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार होता नजर आ रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने हाल ही में संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) को भी आमंत्रित किया था। इस दौरान दोनों देशों ने फिर से राजनायिक रिश्ते को पहले की तरह बहाल करने पर सहमति जताई।  Latest News in Hindi Today Hindi news Khalistani Extremists #PMModiVisit #CanadaKhalistanRow #IndiaCanadaTensions #ModiTrudeau #CanadaAdmitsMistake

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Donald Trump General Munir meeting

ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और पाकिस्तान के सेना प्रमुख व फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) के बीच व्हाइट हाउस में बुधवार दोपहर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों के बीच यह मुलाकात व्हाइट हाउस के कैबिनेट रूम में लंच के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि इस बैठक में ईरान-इजरायल संघर्ष (Iran–Israel War) और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पाकिस्तान की क्षेत्रीय समझ की सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान ईरान को अमेरिका से बेहतर समझता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। हमें उनकी कूटनीतिक शक्ति और अनुभव का लाभ लेना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है।” डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने आगे कहा कि वे पाकिस्तान की उस भूमिका को भी महत्व देते हैं जो उसने हाल ही में भारत-पाक सीमा पर तनाव कम करने में निभाई है। पाकिस्तान दक्षिण एशिया में संतुलन बनाए रखने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश का असर? व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने बैठक के बाद प्रत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि यह बैठक जनरल मुनीर (Asim Munir) द्वारा ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिफारिश किए जाने के बाद आयोजित की गई थी। अन्ना केली ने कहा, “फील्ड मार्शल मुनीर ने हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रोकने में भूमिका निभाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति ने इस सम्मान के लिए आसिम मुनीर (Asim Munir) का व्यक्तिगत रूप से आभार जताया।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने जनरल मुनीर की उस भूमिका की सराहना की जिससे भारत-पाक तनाव के बीच सैन्य संघर्ष टल सका। उन्होंने इसे एक “साहसिक और जिम्मेदार” कदम बताया। दोनों के बीच व्यापारिक संबंधों पर भी हुई चर्चा व्हाइट हाउस के अनुसार, इस बैठक में केवल कूटनीतिक मसलों पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग और व्यापार को लेकर भी चर्चा हुई। ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिका पाकिस्तान और भारत के साथ त्रिपक्षीय व्यापारिक बातचीत की संभावनाएं तलाश रहा है। उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान की आर्थिक चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं। व्यापारिक मोर्चे पर शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है, और हम आगे बढ़ने को तैयार हैं।” हालांकि, ट्रंप ने किसी संभावित समझौते की समय-सीमा या स्पष्ट ढांचे पर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन यह संकेत जरूर दिए कि आने वाले समय में इस दिशा में ठोस प्रगति हो सकती है। इसे भी पढ़ें:- Modi-Trump की 35 मिनट की बातचीत: आतंकवाद पर कड़ा संदेश, अमेरिका का भारत को समर्थन ट्रंप के झूठे दावों को नाकार चुका भारत  बता दें कि हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद आतंकी ढांचे पर हमला किया था, जवाब में पाकिस्तान (Asim Munir) ने भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की। जिससे सीमा पर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई थी। भारते ने जब पाकिस्तान के एयर बेस पर हमला किया तो उसने संघर्ष रोककर बातचीत की अपील की। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी पहल पर भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूका, लेकिन भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष के शामिल होने से इंकार कर दिया। भारत का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान के अपील पर रोका गया। हालांकि, इस संघर्ष के बाद से ही पाकिस्तान की लीडरशीप ट्रंप की चापलूसी करने में जुटी है। इसी के तहत मुनीर ने ट्रंप को शांति दूत बताते हुए नोबेल पुरस्कार देने की मांग की थी। पाकिस्तान के इस अपील से गदगद हुए ट्रंप ने मुनीर को मिलने के लिए व्हाइट हाउस बुला लिया था।   Latest News in Hindi Today Hindi news Asim Munir #Trump #Pakistan #IranIsraelConflict #GeneralMunir #MiddleEastPeace #USForeignPolicy

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Axiom Mission 4

अब 22 जून को लॉन्च होगा Axiom Mission 4: ISRO

भारत के अंतरिक्ष मिशन में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसमें भारत के शुभांशु शुक्ला का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। साल 1984 में राकेश शर्मा के बाद शुभांशु दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनने जा रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करेंगे। यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। शुभांशु शुक्ला को Axiom Mission 4 (Ax-4) के अंतर्गत अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन न केवल भारत के लिए बल्कि पोलैंड और हंगरी के लिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इन तीनों देशों के प्रतिनिधि पहली बार मानव अंतरिक्ष यात्रा में भाग लेंगे। यह मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। 22 जून को लॉन्च होगा Axiom Mission 4   ISRO ने एक्स पर यह जानकारी दी है कि अब 22 जून को Axiom Mission 4  लॉन्च होगा। इस 14 दिवसीय मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला न केवल अंतरिक्ष में रिसर्च करेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का भी प्रदर्शन करेंगे। वह भारतीय छात्रों और शिक्षकों के साथ सीधे संवाद स्थापित करेंगे, जिससे न केवल बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी बल्कि युवाओं को प्रेरणा भी मिलेगी। यह प्रयास शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भारत के दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर दर्शाएगा। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सहयोग से संभव हो रही है। ISRO ने हमेशा से नई तकनीक और स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक के विकास को प्राथमिकता दी है। इस मिशन में ISRO द्वारा तैयार किए गए विशेष वैज्ञानिक प्रयोगों को अंतरिक्ष में अंजाम दिया जाएगा, जिनके परिणाम आने वाले समय में विज्ञान, औषधि और पर्यावरण के क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। शुभांशु का चयन एक कठिन प्रक्रिया के बाद हुआ है, जिसमें शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और वैज्ञानिक समझ को परखा गया। भारत अब अंतरिक्ष विज्ञान में न केवल तकनीक और प्रक्षेपण के क्षेत्र में बल्कि मानव संसाधन के स्तर पर भी अग्रणी बनता जा रहा है। Axiom Mission 4  को @Axiom_Space द्वारा @NASA और @SpaceX के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस तरह भारत अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ साझेदारी में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहा है। इससे भारत को वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक शक्ति के रूप में मान्यता मिल रही है। इस मिशन का सबसे विशेष पक्ष यह है कि यह केवल वैज्ञानिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी प्रतीक बन रहा है। शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में भारत की संस्कृति, परंपरा और शांति के संदेश को लेकर जाएंगे, जिससे विश्व समुदाय में भारत की सॉफ्ट पावर को भी बल मिलेगा। इसे भी पढ़ें:- Modi-Trump की 35 मिनट की बातचीत: आतंकवाद पर कड़ा संदेश, अमेरिका का भारत को समर्थन युवाओं के रोलमॉडल हैं “शुभांशु शुक्ला” इनसबके अलावा शुभांशु शुक्ला के साथ जुड़ी यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। जब भारतीय बच्चे यह देखेंगे कि उनका प्रतिनिधि अंतरिक्ष में जाकर न केवल वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं, बल्कि देश की पहचान भी मजबूत कर रहे हैं, जिससे वे भी विज्ञान, तकनीक और नई-नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगे। भारत के लिए यह अवसर केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि यह देश की वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक कूटनीति और युवाओं के उज्जवल भविष्य का प्रतीक है। यह मिशन दर्शाता है कि भारत अब केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और मानवता के हित में भी अंतरिक्ष विज्ञान का उपयोग कर रहा है। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया मोड़ लाने जा रही है। यह मिशन न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह देश के युवाओं को सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी देगा। यह ऐतिहासिक क्षण भारत को एक बार फिर गर्व से भर देगा, और अंतरिक्ष में भारत की मजबूत उपस्थिति को रेखांकित करेगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Axiom Mission 4  #AxiomMission4 #ISRO #ShubhanshuShukla #SpaceX #ISS #Falcon9 #SpaceExploration

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