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Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid

Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension: 50 फीसदी टैरिफ लगाने पर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप दी यह चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिरवैश्विक व्यापार पर कड़ा कदम उठाते हुए एक साथ कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। सबसे पहले उन्होंने लीबिया, अल्जीरिया, इराक, श्रीलंका (30%), ब्रुनेई, मोल्दोवा (25%) और फिलीपींस (20%) पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने ब्राजील पर भी 50 प्रतिशत का सीधा टैरिफ थोप (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) दिया। जानकारी के लिए बता दें कि ये सभी शुल्क 1 अगस्त से लागू होंगे। इस बीच ट्रंप की घोषणा के चंद घंटों बाद ही ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आँख दिखाते हुए अमेरिका को आर्थिक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। गुस्से से लाल सिल्वा ने दो टूक कहा कि “यदि अमेरिका ने ब्राजील पर एकतरफा तौर पर टैरिफ बढ़ाया तो ब्राजील भी उसी स्तर पर जवाबी कदम उठाएगा। गौरतलब हो कि ट्रंप ने यह फैसला ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के साथ हो रहे व्यवहार के संदर्भ में लिया बताया। बता दें कि बोलसोनारो इस समय तख्तापलट की साजिश रचने के आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।  अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा इस बीच ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के ऑफिस ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में सख्त रुख अपनाते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि “अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा।” कहने की जरूरत नहीं, उनके इस बयान के बाद अमेरिका और ब्राजील के बीच संभावित व्यापार युद्ध की आशंका और गहरा गई है। दरअसल, ट्रंप का आरोप है कि ब्राजील, अमेरिका के साथ निष्पक्ष व्यापार नहीं कर रहा। बता दें कि ट्रंप की घोषणा के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा कि “ब्राजील एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, जो किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा।” लूला ने यह भी लिखा कि “ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है, जिसकी अपनी स्वतंत्र संस्थाएं हैं। हम किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को मान्यता नहीं देंगे।” देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) होगा इस बीच राष्ट्रपति लूला ने यह भी स्पष्ट किया कि “पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह ब्राजील की न्यायपालिका के अधीन है और इस पर कोई बाहरी दबाव असर नहीं (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) डालेगा। उन्होंने कहा कि “तख्तापलट की साजिश में शामिल लोगों पर चल रहे मुकदमे हमारे न्याय तंत्र के अधिकार क्षेत्र में हैं। इन्हें किसी धमकी या बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।” इस दौरान उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अपना रुख साफ करते हुए कहा कि “ब्राजील में स्वतंत्रता का मतलब नफरत, हिंसा या अपमानजनक भाषा फैलाने की छूट नहीं है। राष्ट्रपति ने ब्राजील के कानूनों पर जोर देते हुए कहा कि “सरकार किसी भी प्रकार की ऑनलाइन हेट स्पीच, नस्लवाद, बाल शोषण या अन्य अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगी। देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया जायज  डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को जायज (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया। न सिर्फ जायज ठहराया बल्कि उलटे ब्राजील पर आरोप लगाया कि “ब्राजील ने अमेरिकी चुनावों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किया है।” जवाब में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप के आरोपों को निराधार और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाला बताते हुए कहा कि “पिछले 15 सालों में अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में रहा है। अमेरिका को इस दौरान कुल 410 अरब डॉलर का लाभ हुआ है और यह कोई दावा नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी सरकारी आंकड़े बताते हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension #LulaDaSilva #TrumpTariff #TradeTensions #BrazilUSRelations #GlobalTrade

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Trump Ukraine weapons

Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine: सीजफायर की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन को और भेजेंगे हथियार, ऐसे मिलेगा नोबेल?

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच आग ने घी डालने का काम करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को और हथियार भेजने का ऐलान किया है। मजे की बात यह कि पिछले हफ्ते ही हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कही गई थी। खैर, इस बीच, रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। दरअसल, अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि “यूक्रेन को और हथियार भेजे जाएंगे।” ध्यान देने वाली बात यह कि उनका यह बयान ऐसे समय में आया (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) है, जब कुछ दिन पहले ही पेंटागन ने यूक्रेन को दी जाने वाली कुछ अहम हथियारों की सप्लाई रोक दी थी। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमलों को और तेज कर दिया है, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं।  हाल के दिनों में रूस ने यूक्रेन पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) हैं गौरतलब हो कि कि पिछले हफ्ते ही पेंटागन ने कहा था कि “अमेरिका के पास हथियारों का स्टॉक कम हो रहा है, इसलिए यूक्रेन को कुछ हथियारों की डिलीवरी रोकी जा रही है।” इनमें एयर डिफेंस सिस्टम और सटीक निशाना लगाने वाले तोपखाने शामिल थे। लेकिन सोमवार को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि “हमें यूक्रेन को और हथियार भेजने होंगे। उन्हें अपनी हिफाजत के लिए लड़ने का हक है।” ऐसे में कहने की जरूरत नहीं उनका यह बयान यूक्रेन के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो रूस के लगातार हमलों का सामना कर रहा (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) है। दोनों देशों के बीच बढ़ते युद्ध को देखते हुए रूस ने हाल के दिनों में यूक्रेन पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इस हमले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि “पिछले एक हफ्ते में रूस ने 1270 ड्रोन, 39 मिसाइलें, और करीब 1000 शक्तिशाली ग्लाइड बम यूक्रेन पर दागे। इन हमलों में कम से कम 11 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें 7 बच्चे भी शामिल हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि “रूस के हमलों में ओदेसा में एक व्यक्ति की मौत हुई जबकि खारकीव में एक व्यक्ति मारा गया और 71 लोग घायल हुए।” इस दौरान उन्होंने आगे बताया कि “सूमी में ड्रोन हमलों में 2 लोग मारे गए और 2 घायल हुए जबकि दोनेत्स्क में 7 लोग मारे गए और 9 घायल हुए।’ जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार को रूस ने यूक्रेन के सैन्य भर्ती केंद्रों पर भी हमले किए। बड़ी बात यह कि ये पिछले 5 दिनों में ऐसा तीसरी बार हुआ है। दरअसल, इसका मेन मकसद यूक्रेन की सेना में नई भर्ती को रोकना था। हालांकि इसके जवाब में यूक्रेन ने भी रूस के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इस बीच रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उन्होंने रातोंरात 13 रूसी क्षेत्रों में 91 यूक्रेनी ड्रोन मार (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) गिराए। ऐसा नहीं है कि यूक्रेन हाथ पर हाथ धीरे बैठा है, यूक्रेन ने पहले भी रूस के सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों पर ताबड़तोड़ ड्रोन हमले किए हैं। यही नहीं, हाल ही में ऑपरेशन स्पाइडरवेब में यूक्रेन ने रूस के 4 एयरबेस पर 117 ड्रोन्स से हमला किया था, जिसमें कई रूसी फाइटर जेट तबाह हो गए थे। यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच रूसी परिवहन मंत्री रोमन स्टारोवोइत की सोमवार को मौत हो गई। रूसी अधिकारियों ने इसे आत्महत्या बताया। ध्यान देने वाली बात यह कि उनकी मौत की खबर उनके बर्खास्त होने के चंद घंटों बाद ही आई। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्टारोवोइत को मई 2024 से परिवहन मंत्री बनाया था। उनकी बर्खास्तगी की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई। रूसी मीडिया का कहना है कि “यह कुर्स्क क्षेत्र में डिफेंस वॉल के लिए दी गई रकम में गबन की जांच से जुड़ा हो सकता है।” गौरतलब हो कि कुर्स्क में अगस्त 2024 में यूक्रेन की अचानक घुसपैठ के दौरान रूस की रक्षा लाइन कमजोर साबित हुई थी, जिसके लिए स्टारोवोइत को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था। #Trump #Ukraine #NobelPeacePrize #WeaponsAid #USPolitics #Ceasefire #TrumpNews #UkraineWarZ Latest News in Hindi Today Hindi news 

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US Tariff Relief for 14 Nations Until August 1

अमेरिका से ट्रेड डील कर रहे देशों को 1 अगस्त तक टैरिफ से राहत, बांग्लादेश, म्यांमार और जापान समेत 14 देशों पर 25% से 40% टैक्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्लोबल टैरिफ (US Tariffs) बढ़ाने की अंतिम तारीख में एक बार फिर से बढ़ोत्तरी की है। ट्रंप ने इस तारीख को 9 जुलाई से बढ़ाकर अब 1 अगस्त कर दिया है। साथ ही बांग्लादेश और जापान समेत 14 देशों पर टैरिफ (US Tariffs) लागू करने की घोषणा भी की है। ट्रंप प्रशासन ने बताया कि टैरिफ से प्रभावित सभी देशों को हमारी तरफ से लेटर भेजकर औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत समेत जिन देशों को 21 दिनों का अतिरिक्त मोहलत दी है, उनके साथ अमेरिका ट्रेड डील कर रहा है। कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) में सहमति बन चुकी है और आज इस संबंध में घोषणा हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस सप्ताह कई देशों के साथ ट्रेड डील की घोषणा कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन भी ट्रेड डील करने के काफी नजदीक पहुंच गए हैं। वहीं स्विटजरलैंड, पाकिस्तान और ताइवान समेत कई दूसरे देश भी अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने की कोशिश कर रहे हैं।  अमेरिका ने लगाया 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ बता दें कि अमेरिका ने घोषणा की थी कि जिन देशों के साथ वह ट्रेड डील नहीं कर रहा है, उन पर 9 जुलाई को टैरिफ (US Tariffs) लगा देगा। हालांकि ट्रंप ने उससे दो दिन पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वह उन देशों को 1 अगस्त तक के लिए टैक्स से राहत दे रहे हैं, जिनके साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) चल रही है। वहीं जिन देशों के साथ अमेरिका इस तरह का डील नहीं कर रहा है, उन पर 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ 9 जुलाई से लागू हो जाएगा। अमेरिका ने म्यांमार और लाओस पर सबसे ज्यादा 40% टैरिफ लगाया है। इसी तरह थाईलैंड और कंबोडिया 36%, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%, इंडोनेशिया पर 32%, साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30% टैरिफ लगाया है। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया पर 25% टैरिफ लगाया है।  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पहली बार अप्रैल माह में दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले सभी समानों पर 10% बेसलाइन टैक्स लगाने और 60 देशों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का ऐलान किया था। ट्रंप के इस  घोषणा के बाद पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई थी। शेयर और बॉन्ड बाजार भरभरा कर गिरने लगे थे, जिसके कारण ट्रंप ने अपने टैरिफ पॉलिसी को कुछ समय तक टालते हुए दूसरे देशों को 8 जुलाई तक अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने का मौका दिया था।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ US ने ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ शुरुआती ट्रेड डील की अमेरिका अभी तक सिर्फ ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ ही ट्रेड डील कर पाया है। हालांकि, इन डील्स के बारे में अमेरिका द्वारा ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। चीन और वियतनाम के साथ हुए समझौते में तो किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया है कि किन शर्तों पर सहमति बनी है। वहीं, अमेरिका का अपने करीबी देशों जापान और साउथ कोरिया के साथ भी ट्रेड डील नहीं हो पाया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ट्रंप इन दोनों देशों के सबसे अहम प्रोडक्ट्स जैसे कि कार, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भारी टैक्स लगाना चाहते थे, जिसे ये देश मानने को तैयार नहीं थे। जिसकी वजह से अमेरिका इनके साथ ट्रेड डील नहीं कर पाया। वहीं भारत को लेकर ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जल्द ही इसके बारे में घोषणा की जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #USTariffRelief #TradeDeal #BangladeshTrade #JapanUS #MyanmarTrade #ImportTax #TariffUpdate #GlobalTrade

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Trump warns 10% extra tariff on countries aligning with BRICS

Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations: ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़ने वाले देश पर लगाएंगे 10% अतिरिक्त टैरिफ- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अपने ऊटपटांग फैसलों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया शिगूफा छोड़ा है। एक बार फिर उन्होंने 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकी दी है। दरअसल, 7 जुलाई (रविवार) को कहा कि “ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ने वाले देशों से 10% अतिरिक्त टैरिफ वसूला जाएगा।” यह बात ट्रंप ने ट्रुथ सोशल के एक पोस्ट में (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) कही। ट्रंप ने कहा कि “ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया जाएगा। इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा। इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद।” बता दें कि ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों से जुड़े देशों पर ट्रंप ने कहा कि “इस नीति के लिए कोई अपवाद नहीं होगा यानी हर देश पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।” वैश्विक प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने 90-दिन के लिए इसे रोक दिया (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) था मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दुनियाभर के विभिन्न देशों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ पत्र और समझौते, सोमवार, 7 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे (पूर्वी) से वितरित किए जाएंगे।” मजे की बात यह कि टैरिफ रोकने की समयसीमा क़रीबा आता देख ट्रंप ने कहा (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है कि “उनके पास 12 देशों के लिए टैरिफ पत्र तैयार हैं। ट्रंप ने कहा है कि पत्र सोमवार को दोपहर 12 बजे जारी किए जाएंगे। गौरतलब हो कि 2 अप्रैल को ट्रंप ने अमेरिका के सभी ट्रे़डिंग पार्टनर देशों के लिए संशोधित और बढ़ी हुई टैरिफ दरों की घोषणा की थी। वैश्विक प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने 90-दिन के लिए इसे रोक दिया था। ये रोक 9 जुलाई को खत्म हो रही है, उससे पहले ही ट्रंप फिर से ट्रैरिफ लगाने की बात कह रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ 11 देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है बता दें कि वर्तमान समय में ब्राजील में ब्रिक्स समिट का आयोजन किया जा रहा है। ब्रिक्स की स्थापना ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर की थी। इसके बाद साल 2023 में इसमें इंडोनेशिया, ईरान, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी जुड़ गए। ध्यान देने वाली बात यह कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित उभरते 11 देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है।  और बड़ी बात यह कि इसमें वैश्विक आर्थिक उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा है। इस बीच ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में बिना नाम लिए अमेरिका और ट्रंप की आलोचना की है। ब्रिक्स घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई है। ब्रिक्स समिट में  पीएम मोदी ने कहा कि “भारत ने हमेशा मानवता के लिए काम किया। वैश्विक संस्थाओं में बड़े बदलाव की जरूरत है। ग्लोबल साउथ को केवल प्रतीकात्मक सहयोग मिला। वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधार करने होंगे।” पीएम मोदी ने आतंकवाद पर जोर देते हुए कहा कि “आतंकवाद मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती है और आतंकवाद पीड़ितों और समर्थकों को एक ही तराजू में नहीं तौलना चाहिए।” इसके साथ ही ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा पत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। पीएम मोदी ने ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। न सिर्फ लताड़ लगाई बल्कि वैश्विक नेताओं से आतंक के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump #Trump #BRICS #Tariff #TradeWar #USPolicy #GlobalPolitics #BRICSvsUSA

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PM Modi warns Pakistan against double standards on terrorism at BRICS summit

‘आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं, चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत…’, PM मोदी ने पाक को BRICS के मंच से जमकर धोया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपनी 8 दिवसीय विदेश यात्रा के 6 दिन ब्राजील पहुंचे हैं। पीएम मोदी (PM Modi) ने यहां रियो डी जनेरियो में चल रहे 17वें ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) में हिस्सा लिया। इस समिट में उन्होंने आतंकवाद मानवता के समक्ष सबसे बड़ा खतरा बताते हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”पहलगाम में जो अमानवीय और कायराना आतंकी हमला हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा। यह सामान्य आतंकी हमला नहीं था, यह इंसानियत पर हमला था।”  पीएम मोदी (PM Modi) ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) के पीस एंड सिक्योरिटी एंड रिफॉर्म ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस सत्र में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सभी देशों के बीच शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जता, लेकिन साथ ही पड़ोसी मुल्क पर आतंकवाद के लिए निशाना भी साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”दोहरे मापदंडों की इस दुनिया में कोई जगह नहीं है। अगर कोई देश आतंकवाद का भरण पोषण कर रहा है, तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। आतंकियों पर कार्रवाई करने और उन पर प्रतिबंध लगाने में किसी को  कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद पर मौन सहमति को भारत जिस तरह से बर्दाश्त नहीं कर रहा है, उसी तरह सभी देशों को आतंकवाद पर निर्णायक फैसला लेना चाहिए।  पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध की धरती है और उनके द्वारा दिखाए गए शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने को लेकर प्रतिबध है। हमारे सामने चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थितियां आएं, हमारे लिए शांति और मानवता का कल्याण ही सबसे बेहतरीन मार्ग रहेगा।  पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स देशों ने की निंदा  ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) में भारत को बड़ी सफलता मिली है। इस समिट में शामिल सभी देशों ने एकजुट होकर कड़े शब्दों में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर प्रारूप, सीमापार आतंकवाद और आतंकवाद व आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ प्रति जीरो टॉलरेस नीति बनाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई। ब्रिक्स देशों की तरफ जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि, ”हम 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम आतंकवाद के हर प्रारूप के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाने का आग्रह करने के साथ आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मापदंडों को भी पूरी तरह से खारिज करते हैं।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ ब्रिक्स सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और जयशंकर ने की कई अहम द्विपक्षीय बैठकें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और विदेश मंत्री डाॅ. एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कई दूसरे देश के लीडरशिप के साथ अहम बैठकें की है। पीएम मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चीन्ह, मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डिआज-कैनेल के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। इन बैठकों का लक्ष्य द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूत बनाना और अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत करना था।  वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर (S Jaishankar) ने भी दूसरे देश के अपने समकक्षों के साथ बैठक की। एस जयशंकर (S Jaishankar) ने सबसे पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने के साथ उसे और आगे ले जाने पर सहमति जताई। इसके अलावा जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ भी बैठक की। इस द्विपक्षीय मुलाकात में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर बातचीत हुई। बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर ईरानी विदेश मंत्री के साथ की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘हमारी बातचीत हाल के अहम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर केंद्रित रही।’ विदेश मंत्री जयशंकर ने मैक्सिको के विदेश सचिव जुआन रामोन डे ला फ़ुएंते के साथ भी अहम बैठक की। इस मुलाकात में देानों देशों के बीच स्वास्थ्य, डिजिटल, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे अहम मुद्दों पर साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।  Latest News in Hindi Today Hindi news BRICS Summit #PMModi #BRICSSummit #Pakistan #Terrorism #ModiSpeech #IndiaPakistan #BRICS2025

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PM Shehbaz’s Advisor Reveals 30-45 Sec Response Window

हमारे पास 30 से 45 सेकंड थे’, भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमले पर PM शहबाज के सलाहकार का बड़ा खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइलें दागी (Brahmos Missile Attack On Pakistan) थी, जिसने पाकिस्तान घुटनों पर आकर सीजफायर की भीख मांगने लगा था। हालांकि सीजफायर होने के बाद पाकिस्तान अपने इस नाकामी को छुपाने में जुट गया, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के प्रमुख सलाहकार राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने ही इस झूठ की पोल खोल दी है। राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने पाकिस्तानी मीडिया को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा, ”भारत ने जब हम पर ब्रह्मोस मिसाइल दागी, तो हमारे नेतृत्व के पास ये तय करने के लिए सिर्फ 30 से 45 सेकंड ही थे कि यह इन मिसाइलों में परमाणु हथियार है कि नहीं।  राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि, भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile Attack On Pakistan) रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर दागी, तो हमारे एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट का संकेत भेजने लगा। जिसने पाकिस्तान के पूरे रक्षा तंत्र को ही हिलाकर रख दिया था। उस समय हमारे नेतृत्व के पास सिर्फ 30 से 45 सेकेंड यह तय करने के लिए थे कि इस मिसाइल में परमाणु हथियार है कि नहीं। यहां पर एक चूक महाविनाश ला सकती थी। सनाउल्लाह ने कहा कि, ”मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करके अच्छा किया, लेकिन पाकिस्तान के लोग अगर गलति से इसे परमाणु हमला समझ लेते तो परमाणु युद्ध छिड़ सकता था।” ट्रंप ने निभाई युद्ध रूकवाने में अहम भूमिका- सनाउल्लाह    इंटरव्यू के दौरान राण सनाउल्लाह भले ही अपने डर को जाहिर करते हुए सच्चाई स्वीकार्य कर गए हों, लेकिन वो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने से नहीं चकू। अपने पाकिस्तानी आकाओं की तरह   सनाउल्लाह ने भी सीजफायर का क्रेडिट डोनाल्ड ट्रंप को देते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने और युद्ध रोकने में ट्रंप ने अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने अगर परमाणु युद्ध टालने में भूमिका निभा कर दुनिया को बड़े विनाश से बचाया है, तो दुनिया को भी उनके इस  भूमिका का निष्पक्ष आंकना कर उनकी सराहना करनी चाहिए। सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने कहा कि इस बात को पाकिस्तान अच्छे से समझता है और इसीलिए पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने के लिए नामित किया है। हालांकि, भारत ने सीजफायर में ट्रंप के किसी भी तरह के भूमिका से इंकार करते हुए कहा है कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने अनुरोध किया था। भारत ने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया था, इसलिए पाकिस्तान की तरफ से फोन कॉल आने के बाद युद्ध को रोका गया। इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? भारत के हमले से खौफ में था पाकिस्तान नेतृत्व  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने 10 मई को ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किया था। भारत के हमले में नूर खान एयरबेस समेत पाकिस्तान के कई एयरबेस के रनवे, बंकर और हैंगर को भारी नुकसान हुआ। भारत के इस हमले से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हुई और पाकिस्तान के फाइटर जेट उड़ान तक नहीं भर पाए। सनाउल्लाह ने इंटरव्यू के दौरान भारत के इसी हमले का जिक्र करते हुए स्वीकार किया कि भारत के तरफ से हुए इस भीषण हमले से पाकिस्तान को दहशत फैल गया था। इसकी वजह से परमाणु संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी।  पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया था कि भारत के हमले में पाकिस्तान के एयरबेस को बड़ा नुकसान हुआ था। भारत ने जब हमला किया तो हम भारत पर हमला करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन भारत ने चौकानें वाला हमला करके हमारी योजना को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान की तरफ से एक के बाद एक इस तरह के बयान तब आ रहे हैं, जब पाकिस्तानी सेना इस युद्ध में अपनी जीत का दावा करते हुए किसी भी तरह के क्षति से इनकार कर चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rana Sanaullah #IndiaBrahMos #PakistanReaction #ShehbazSharif #BrahMosMissile #DefenseAlert #IndiaPakistanTensions #MissileStrike

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US House passes 'Big Beautiful Bill'

अमेरिक के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हुआ ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’, ट्रंप बोले-  लाखों लोगों को मिलेगा ‘डेथ टैक्स’ से आजादी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने को अपने देश में बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की है। ट्रंप का बहुचर्चित ”बिग ब्यूटीफुल बिल” (Big Beautiful Bill) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से 218-214 के अंतर से पास हो गया। ट्रंप की रिपब्लिकन के दो सदस्य इस बिल के खिलाफ वोट किया, हालांकि ये दोनों पहले से ही बिल का विरोध कर रहे थे। अब इस बिल पर सिर्फ ट्रंप के हस्ताक्षर की जरूरत है, जिसके बाद यह लागू हो जाएगा।  अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में बिल पास होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसकी घोषणा करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अभी-अभी रिपब्लिकन ने बिग ब्यूटीफुल बिल (Big Beautiful Bill) को पास कर दिया है, जो दिखाता है कि हमारी पार्टी अब पहले से कहीं ज्यादा एकजुट है। इस बिल पर मैं अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के खास मौके पर हस्ताक्षर करूंगा। बता दें कि अमेरिकी सीनेट ने भी इसी सप्ताह मंगलवार को इस बिल को पारित किया था।  बिल पर हस्ताक्षर के लिए ट्रंप करेंगे भव्य समारोह का आयोजन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने एक दूसरे पोस्ट में बिल पास होने पर खुशी जताते हुए कहा, ‘यह अमेरिका के लिए बेहद ऐतिहासिक दिन है। अमेरिका का दिशा और दशा बदलने वाले इस बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए 4 जुलाई को शाम 4 बजे (अमेरिकी समयानुसार) व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में अमेरिकी कांग्रेस के सभी सदस्यों और सभी सीनेटर को आमंत्रित किया गया है। हम सभी एकजुट होकर अमेरिका की स्वतंत्रता और इस बिल के पास होने का जश्न मनाएंगे। अमेरिका के लोग अब पहले से ज्यादा समृद्ध, सुरक्षित और गौरवान्वित महसूस कर रहे  होंगे।’ बिग ब्यूटीफुल बिल क्या है? डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने इस बिल को अमेरिका की किस्मत बदलने वाला ड्रीम बिल बता चुके हैं। यह 869 पन्नों का बिल है और इसमें ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैक्स कटौती को और भी व्यापक तरीके से शामिल किया गया है। अमेरिकी लोगों को मिलने वाली आयकर छूट जारी रहेगी, साथ ही होटल टिप्स और ओवरटाइम वेतन पर लगने वाला टैक्स भी खत्म कर दिया गया है। लोगों को टैक्स में यह छूट 2028 तक मिलेगी। इसके अलावा बिल में कर्ज लेने की की सीमा बढ़ाकर 50 लाख डॉलर तक कर दिया गया है।  वहीं अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भी बिल में कई गुना ज्यादा बजट का प्रावधान किया गया है। बिल में गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड के लिए 25 अरब डॉलर का बजट रखा गया है। इससे अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत होगा। इसके अलावा मंगल मिशन के लिए 10 अरब डॉलर, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को रिटायर करने के लिए 32.5 करोड़ डॉलर रखे गए हैं। इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास डेमोक्रेट्स ने बिल को बताया गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला डेमोक्रेट्स इस बिल का शुरूआत से विरोध कर रहे हैं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि ट्रंप का यह  बिल देश के लाखों गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला है। इस बिल की वजह से मेडिकेड पर कई नए प्रतिबंध लगेंगे, जो फ्री स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। डेमोक्रेट्स का यह भी कहना है कि इस भारी भरकम बिल की वजह से अमेरिका पर कर्ज कई गुना बढ़ जाएगा। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलॉन मस्क (Elon Musk) भी इस बिल के विरोध में हैं। उन्होंने इस बिल को ‘बेहूदा’ बताते हुए कह चुके हैं कि अगर यह बिल पास हुआ तो वह अगल दिन ही नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। अब देखना यह होगा कि एलॉन मस्क (Elon Musk) कब नई पार्टी की घोषणा करते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #Trump #BigBeautifulBill #DeathTax #USPolitics #HouseBill2025 #TaxReform #EstateTax #TrumpSpeech

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Thailand scam 2025

कंबोडियाई अंकल की धोखेबाजी में थाई प्रधानमंत्री सस्पेंड, किस विवाद से चर्चा में भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन थाईलैंड?

थाईलैंड…यह नाम सुनते ही ज्यादातर भारतीयों को नीले समुद्र तट, नाइट लाइफ और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की याद आने लगती है। क्योंकि थाईलैंड छुट्टियां बिताने के लिए भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन है। एक तो यह भारत से ज्यादा दूर नहीं और दूसरा यहां आने-जाने और रहने का खर्च कम। इसलिए थाइलैंड मिडिल क्लास भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन यह खूबसूरत देश इस समय अपने राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय तनाव के कारण चर्चा में है।  थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) को वहां की संवैधानिक कोर्ट ने एक लीक फोन कॉल विवाद के कारण सस्पेंड कर दिया है। दुनिया के किसी भी देश में कोर्ट द्वारा एक प्रधानमंत्री को ही सस्पेंड कर देना अपने आप में अभूतपूर्व उदाहरण है। कोर्ट के इस कार्रवाई के बाद फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) आज थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। इसकी जानकारी देते हुए थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता जीरायु होंगसुब ने बताया कि फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) को महामहिम राजा शपथ दिलाएंगे। जिसके बाद वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर कार्य करेंगे आइए अब उस पूरे विवाद के बारे में जानते हैं, जिससे थाईलैंड की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और पेटोंगटार्न शिनावात्रा का पीएम पद से सेस्पेंड कर दिया गया।  कंबोडियाई सीनेट अध्यक्ष ने कर ली फोन कॉल रिकॉर्ड  बता दें कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) का जो फोन कॉल लीक हुआ है उसमें व कंबोडियाई सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन (Hun Sen) बातचीत करते हुए अपने ही देश के सेना और सैन्य जनरलों की आलोचना करती सुनी जा सकती है। दोनों के बीच यह बातचीत 15 जून को हुआ था, जिसे अब लीक किया गया। हुन सेन (Hun Sen) ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए बतया की उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था। जिसे अब 80 से ज्यादा लोगों के साथ शेयर किया है। इस लीक कॉल रिकॉर्ड में सुना जा सकता है कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) और हुन सेन एक ट्रांसलेटर के माध्यम से थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर हुई सैन्य झड़प पर चर्चा कर रहे हैं। ये दोनों नेता बातचीत से घातक झड़प के बाद दोनों देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। पेटोंगटार्न इस कॉल में हुन सेन (Hun Sen) को अंकल संबोधित करते हुए कहती हैं कि वे थाईलैंड के सेना कमांडर की बात को न सुनें। थाई कमांडर ने सीमा विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से कंबोडिया की आलोचना करते हुए उन्हें “विरोधी” कहा था। इस दौरान पेटोंगटार्न ने हुन सेन से यह भी कहा कि वह उन्हें बताएं कि वे इस समस्या के समाधान के लिए क्या चाहते हैं और वे उसका समाधान करेंगी। गौरतलब है कि हुन सेन को पेटोंगटार्न के पिता और थाईलैंड के पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा का बेहद पुराना मित्र कहा जाता है। हुन सेन के बेटे हुन मानेत इस समय कंबोडिया के पीएम हैं।  इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास थाईलैंड-कंबोडिया सीमा झड़प में एक सैनिक की मौत  बता दें कि दोनों देश बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और यहां की रहन सहन और खान पान लगभग एक जैसी है, लेकिन सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच तनातनी हमेशा बनी रहती है। बीते मई माह में इन दो पड़ोसियों के बीच उस समय विवाद चरम पर पहुंच गया, जब एक थाई सैनिक की फायरिंग में कंबोडिया के एक सैनिक की मौत हो गई। इस विवाद को लेकर कंबोडिया की सेना ने बयान जारी कर कहा था कि बॉर्डर पर रुटीन पेट्रोलिंग कर रहे उनके जवानों पर थाईलैंड के सैनिकों ने फायरिंग कर दी थी। इस घटना में उसके एक जवान की मौत हो गई। वहीं थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया के सैनिक पेट्रोलिंग के दौरान विवादित क्षेत्र में जबरदन घुस आए थे। थाईलैंड के जवान बातचीत के माध्यम से इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी कंबोडियाई सैनिकों ने गोली चला दी। जवाब में थाईलैंड आर्मी ने भी गोली चलाई। इस सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों ने अपनी सीमा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का एक दूसरे के देश में आना-जाना लगभग बंद है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Patongtarn Shinawatra #thailandscam #thaipmsuspended #cambodianuncle #indiantravel #thailandcontroversy #travelnews2025 #tourismalert #thaipolitics

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Trump Gaza ceasefire

Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees: ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास 

इजरायल और ईरान में सीजफायर कराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल और हमास में भी सीजफायर (GazaCeasefire) कराने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इजरायल और हमास में 60 दिन का युद्धविराम हो सकता है। हालाँकि इससे पहले भी जनवरी 2025 में 15 महीने की जंग के बाद इजरायल और हमास के बीच 6 सप्ताह का युद्धविराम हुआ (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। खैर, इजरायल सीजफायर के लिए तैयार है, बात हमास को लेकर अटकी है। दोनों के बीच सीजफायर हो सके इसलिए वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इजरायल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रान डर्मर से बातचीत भी की। बड़ी बात यह कि इस मुलाकात में इजरायल के मंत्री हमास के साथ सीजफायर की शर्तों को मानने के लिए राजी हो गए हैं। इस मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ]सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर इजरायल और हमास में सीजफायर होने की उम्मीद जताई। गौरतलब हो कि “दोनों पक्षों में संघर्ष विराम की बात तब उठी, जब गाजा को खाली करने नया आदेश जारी हुआ।” जरायल ने 60 दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है सहमति  राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की जानकारी अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट के रूप में दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि “अमेरिका के प्रतिनिधियों ने आज गाजा के साथ युद्धविराम के मुद्दे पर इजरायलियों के साथ लंबी बैठक की। इजरायल ने 60 दिन के युद्धविराम (GazaCeasefire) के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर सहमति जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है। दोनों पक्षों में संघर्ष विराम तभी होगा, जब सभी मिलकर एक साथ प्रयास करेंगे। कतर और मिस्र सीजफायर के अंतिम प्रस्ताव को पेश करेंगे। उम्मीद है कि मध्य पूर्व की भलाई के लिए हमास सीजफायर के समझौते को स्वीकार करेगा, क्योंकि अगर युद्ध चलता रहा तो हालात और बदतर होते जाएंगे। इसलिए हमास भी संघर्ष विराम के लिए आगे आए।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर किया था (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) हमला  कहने की जरूरत नहीं कि गाजा में सीजफायर हेतु दुनिया की नजरें अब हमास के रुख पर (GazaCeasefire) टिकी हैं। हमास ने इससे पहले कहा था कि “वह इजरायली सैनिकों की पूर्ण वापसी और गाजा में युद्ध खत्म करने के बदले सभी बंधकों को रिहा करने को तैयार है।” लेकिन इजरायल ने अपनी सेना की वापसी और युद्ध पूरी तरह खत्म करने के हमास के प्रस्ताव को खारिज कर दिया (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। बता दें कि पिछले 20 महीने से इजरायल-हमास युद्ध चल रहा है। लगातार जारी युद्ध की वजह से हालात दिन-ब-दिन ख़राब होते जा रहे हैं। इस जंग का मकसद हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादी संगठनों को खत्म करना हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1200 इजरायली मारे गए और 250 से अधिक लोग बंधक बनाए गए। जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल ने गाजा में हवाई और जमीनी हमला किया। आज तक चले संघर्ष में गाज में रहने वाले 56000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस युद्ध में इजरायल के 726 सैनिक और 1200 लोगों ने जान गंवाई। खैर, ऐसे में एक पक्ष सीजफायर के लिए तैयार है। दूसरे पक्ष को अपना फैसला करना है। अब अमेरिका की शांति कराने की कोशिश किस हद तक सफल होती है, यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा, लेकिन बड़ी बात यह कि अमेरिका ने संघर्ष विराम के लिए इजरायल को मना लिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees #trump #gaza #ceasefire #israel #hamas #middleeast #gazawar #gazaceasefire #trumpnews #breakingnews

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India won’t bow to Pakistan’s nuclear blackmail

India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail: पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लैकमेल से नहीं डरेंगे- विदेश मंत्री एस. जयशंकर

ऑपेरशन सिंदूर के बाद से भारत पाकिस्तान पर हमलावर है। पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करने का एक भी मौका भारत जाने नहीं देता। इस कड़ी में पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम आतंकवादी हमला आर्थिक युद्ध का नया कृत्य था। जिसका मकसद कश्मीर में पर्यटन खत्म करना था। इसका उद्देश्य धार्मिक हिंसा को भड़काना भी था क्योंकि लोगों को मारने से पहले उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा गया था।” पाकिस्तान को आइना दिखाते हुए उन्होंने कहा कि “भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु ब्लैकमेल (nuclear blackmail) की पाकिस्तान की नीति भारत को पड़ोसी देश से उत्पन्न आतंकवाद का जवाब देने से नहीं रोक (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) पाएगी।” दरअसल, समाचार पत्रिका न्यूजवीक के सीईओ देव प्रगाद के साथ मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित प्रकाशन के मुख्यालय में आयोजित एक बातचीत के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की।  पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था, इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) करना था जयशंकर ने कहा कि “भारत में पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान से प्रेरित कई आतंकवादी हमले हुए हैं और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में यही भावना है कि अब बहुत हो गया।” विदेश मंत्री जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था। इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह करना था, जो वहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) है। इसलिए हमने तय किया कि हम आतंकवादियों को दंडित किए बिना नहीं छोड़ सकते। वे सीमा के उस तरफ हैं और इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, मुझे लगता है कि इस तरह के विचार को चुनौती देने की आवश्यकता है और हमने यही किया।” जयशंकर ने कहा कि “हम यह भी बहुत लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु संपन्न देश हैं और इसलिए कोई और शख्स आएगा और खौफनाक चीजें करेगा, लेकिन आप कुछ नहीं कर सकते क्योंकि इससे दुनिया चिंतित हो जाती है। अब हम इसके झांसे में नहीं आने (nuclear blackmail) वाले हैं। अगर वे आकर कुछ करेंगे तो हम वहां जाएंगे और जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें निशाना बनाएंगे। हम परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकने वाले हैं, आतंकवादियों को कोई छूट नहीं मिलेगी, उनके छिप छिपकर हमलों को बख्शा नहीं जाएगा। हमें अपने लोगों की रक्षा के लिए जो करना है, करेंगे।” उन्होंने कहा कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आतंकवादियों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। हम अब उन पर परोक्ष रूप से नहीं बल्कि सीधा सीधा हमला करेंगे और उस सरकार को नहीं बख्शेंगे जो उनका समर्थन, वित्तपोषण और कई तरीकों से उन्हें बढ़ावा देती है। परमाणु ब्लैकमेल की नीति हमें जवाब देने से नहीं रोकेगी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था-जयशंकर   गौरतलब हो कि जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस बीच मंगलवार को चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए वाशिंगटन डीसी जाएंगे। क्वाड चार देशों – भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह है। विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित आतंकवाद की मानवीय कीमत शीर्षक वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करके (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि “भारत के खिलाफ हमलों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान के आतंकवादी गुप्त रूप से काम नहीं करते हैं और इन आतंकी संगठनों के पाकिस्तान के घनी आबादी वाले शहरों में कॉरपोरेट मुख्यालय सरीखे ठिकाने हैं। हर कोई जानता है कि संगठन ‘ए’ और संगठन ‘बी’ का मुख्यालय क्या है और ये वे इमारतें, मुख्यालय हैं जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिया।” बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना था। पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे और पाकिस्तान के आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने जिम्मेदारी ली थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news  S Jaishankar #India #Pakistan #NuclearThreat #SJaishankar #NationalSecurity #IndiaForeignPolicy

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