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Trump Zelensky ceasefire talks

Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire: पुतिन के बाद ट्रंप ने जेलेंस्की से की युद्धविराम पर बात, जल्द खत्म होगी जंग

पिछले तीन साल से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर संभव कोशिश कर रहे हैं। अच्छी बात यह कि उनकी कोशिश रंग भी ला रही है। इस सिलसिले में मंगलवार जो रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत करने के बाद अगले दिन ही डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) से घंटे भर बात की। इस बातचीत में उन्होंने शांति समझौते के लिए रूस और यूक्रेन के अनुरोधों और जरूरतों पर चर्चा की। यही नहीं, इस बातचीत की जानकारी उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पर साझा करते हुए कहा कि “अधिकांश चर्चा मंगलवार को राष्ट्रपति पुतिन के साथ की गई बातचीत पर ही आधारित थी, ताकि रूस और यूक्रेन दोनों को उनके अनुरोधों और जरूरतों के अनुसार एक साथ लाया जा सके।” ट्रंप ने कहा कि “हम पूरी तरह से सही रास्ते पर हैं।” बता दें कि ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में पुतिन ने ट्रंप के 30 दिनों के पूर्ण युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि “वह केवल यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर 30 दिनों के लिए हमले रोकने पर सहमत होंगे।” गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप इसी प्रस्ताव को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेंलेस्की ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इससे यह उम्मीद लगाई जा रही है कि तीन वर्ष से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है।  दोनों नेताओं ने इस बातचीत को बढ़िया बताया (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire)  जानकारी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति पुतिन की ओर से ट्रंप के 30 दिन के पूर्ण युद्ध विराम के प्रयास को ठुकराने के बाद आंशिक युद्ध विराम समझौता हुआ। पुतिन के बाद ट्रंप ने बुधवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से लगभग एक घंटे की बातचीत की। दोनों नेताओं ने इस बातचीत को बढ़िया बताया। बातचीत (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) के बाद जेलेंस्की ने कहा कि “इस वीकेंड सऊदी अरब में होने वाली तकनीकी वार्ता में यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि समझौते के तहत किस प्रकार के बुनियादी ढांचे की रक्षा की जाएगी।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और रूसी नेताओं के बीच मंगलवार को हुई टेलीफोन वार्ता में पुतिन ने प्रस्तावित 30 दिवसीय पूर्ण युद्धविराम को अस्वीकार कर दिया, जिसे यूक्रेन स्वीकार कर चुका है। इस बातचीत पर जेलेंस्की ने कहा कि “मैं वास्तव में नियंत्रण चाहता हूं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि इस नियंत्रण का मुख्य एजेंट संयुक्त राज्य अमेरिका होना चाहिए।” इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “कीव युद्ध विराम के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए तैयार होगा।” इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर बातचीत  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) घंटे भर बाद रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर किये हवाई हमले  हैरान करने वाली बात यह कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को फोन पर हुई बातचीत  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) को कुछ घंटे भी नहीं हुए कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर हवाई हमले कर दिए। दोनों देशों ने ऊर्जा संयंत्रों पर हमले रोकने को लेकर नए समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। खैर, राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों देशों को फिलहाल आंशिक युद्ध विराम के लिए राजी कर तो लिया है लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि यह कब लागू होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire #TrumpZelensky #UkraineWar #WarCeasefire #TrumpDiplomacy #ZelenskyTalks #PutinUkraine #RussiaUkraineWar #PeaceTalks #GlobalPolitics #CeasefireEfforts

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Netanyahu on Gaza

Netanyahu on Gaza: गाजा हमले में 400 लोगों की मौत के बाद नेतन्याहू ने कहा, अभी तो ये शुरुआत भर है

तकरीबन दो महीने तक इजरायल (Israel) और हमास के बीच चला युद्धविराम आखिरकार टूट गया। दरअसल, हमास द्वारा शेष बंधकों की रिहाई नहीं किए जाने के चलते मंगलवार को इजरायल ने (Netanyahu on Gaza) गाजा पट्टी पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ बमबारी की। इस बमबारी में तकरीबन 400 से ज्यादा फलस्तीनी नागरिक मारे गए और 560 से अधिक घायल हुए हैं। इस हमले को तब अंजाम दिया गया जब रजमान के दौरान लोग तड़के सहरी की तैयारी कर रहे थे। विदित हो कि जनवरी में युद्ध विराम प्रभावी होने के बाद गाजा पर इजरायल का यह सबसे बड़ा हवाई हमला है। कहने की जरूरत नहीं इजरायली हमलों से गाजा में एक बार फिर लोग दहशत में हैं। गाजा के अस्पतालों में शवों का अंबार लग गया है। जानकारी के मुताबिक गाजा में “हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 404 लोगों की मौत हुई है और 560 ज्यादा घायल हुए हैं। कहा जा रहा है कि इस हमले से पहले इजरायल ने ट्रंप प्रशासन और व्हाइट हाउस के साथ विचार-विमर्श किया था। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने कहा कि “हमास युद्ध विराम को आगे बढ़ाने के लिए बंधकों को रिहा कर सकता था, लेकिन उसने इन्कार कर दिया और युद्ध का रास्ता चुना।”  प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा (Netanyahu on Gaza) कि “पूर्व में हुई रिहाई से साबित होता है कि बंधकों की रिहाई के लिए सैन्य दवाब जरूरी है इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि (Netanyahu on Gaza) इजरायल ने युद्धविराम को कई सप्ताह तक बढ़ाया, जिस दौरान हमें बंधक नहीं मिले।” उन्होंने आगे कहा कि “बातचीत करने वाली टीमों को कतर और मिस्र भेजा गया, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। हमास को और अधिक बंधकों को रिहा करने के लिए राजी करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला, जिसके कारण यह आखिरी उपाय था।” नेतन्याहू ने कहा कि “हमास ने बंधक रिहाई का पहला चरण खत्म होने के बाद अभी भी 59 लोगों को रिहा करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। इनमें से 24 के जिंदा होने की उम्मीद है।” यही नहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि “पूर्व में हुई रिहाई से साबित होता है कि बंधकों की रिहाई के लिए सैन्य दवाब जरूरी है।” उन्होंने जोर देते हुए आगे कहा कि “गाजा पर हवाई हमले सिर्फ शुरुआत हैं। युद्ध विराम के लिए सभी वार्ताएं युद्ध के दौरान ही होंगी।” एक बयान में उन्होंने  यह भी कहा कि “इजरायल तब तक आगे बढ़ता रहेगा जब तक वह युद्ध के अपने सभी लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता। इन लक्ष्यों को हासिल करने से इजरायल को कोई नहीं रोक सकता। बता दें कि इन लक्ष्यों में हमास का सफाया और उसके कब्जे से सभी बंधकों की रिहाई शामिल है।”  जब तक जरूरत होगी, तब तक जारी रहेंगे हमले (Netanyahu on Gaza) इस बीच इजरायली सेना ने कहा कि “उसने दर्जनों लक्ष्यों पर हमला (Netanyahu on Gaza) किया। हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक जरूरत होगी।” इसके अलावा सेना ने लोगों को पूर्वी गाजा खाली करने का निर्देश दिया है। बेशक इससे आशंका जताई जा रही है कि संभवतः इजरायली सेना गाजा में फिर से जमीनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। इजरायल ने कहा है कि वह हमास के कब्जे से बंधकों को मुक्त कराने के लिए और ज्यादा बल का प्रयोग करेगा। तो वहीं, हमास ने इजरायल पर युद्ध विराम का उल्लंघन करने और स्थायी शांति के लिए मध्यस्थों के प्रयासों को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। यही नहीं, इजरायल ने पिछले दो सप्ताह से गाजा के लिए सहायता आपूर्ति रोक रखी है। इसकी वजह से मानवीय संकट गहरा गया है।  इसे भी पढ़ें:- इजराइल ने युद्धविराम तोड़ गाजा पर किया हवाई हमला, 200 से अधिक लोगों की हुई मौत अगर हमास अगले कुछ दिनों में बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो और भी तेज होगा ऑपरेशन  बता दें कि सात अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया था। हमास के इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे। 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने हमास के सफाए के लिए गाजा में सैन्य अभियान चला रखा था। 15 महीने तक चले इस अभियान में गाजा में तकरीबन 48 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस नरसंहार के बाद जनवरी में इजरायल और हमास के बीच छह सप्ताह के लिए युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हुआ था। बता दें कि अभी भी हमास के कब्जे में 59 बंधक हैं। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि “अगर हमास अगले कुछ दिनों में बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो ऑपरेशन (Netanyahu on Gaza) और भी तेज हो जाएगा।” Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu on Gaza Israel #IsraelGazaConflict #GazaUnderAttack #Netanyahu #MiddleEastCrisis #WarNews #BreakingNews #Palestine #Israel #GazaCrisis #GlobalConflict

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Trump Putin phone call

Trump Putin phone call: ट्रंप और पुतिन के बीच फोन पर लगभग दो घंटे हुई बात, इस शर्त पर होगी युद्ध समाप्ति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास में जुटे हैं। इस सिलसिले में दोनों के बीच मंगलवार को तकरीबन 2 घंटे तक फ़ोन पर (Trump Putin phone call) बातचीत हुई। जानकारी के मुताबिक इस दौरान युद्धविराम समझौते और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे चर्चा का हिस्सा होंगे। बड़ी बात यह कि इस बातचीत की पुष्टि व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्कैविनो ने की। उन्होंने बाकायदा ट्वीट कर बताया कि “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओवल ऑफिस में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सुबह 10:00 बजे से बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और अभी जारी है।” बता दें कि यह वार्ता तीन साल से चले आ रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है। इस संघर्ष ने अब तक लाखों लोगों की जान ले ली है, करोड़ों को बेघर कर दिया है और यूक्रेन के कई क्षेत्रों को तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत 30 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर बातचीत की। गौर करने वाली बात यह कि इस दौरान युद्ध विराम समझौते के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर 30 दिनों के युद्धविराम समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह सऊदी अरब में हुई अमेरिका की अगुवाई वाली वार्ता के दौरान यूक्रेनी अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की थी। इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया था। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि वार्ता के दौरान क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे के मुद्दे चर्चा का हिस्सा होंगे। इसे भी पढ़ें:- दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई   पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की रखी है (Trump Putin phone call) शर्त  विदित हो कि सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “वे यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम और शांति स्थापित करने के प्रयास करेंगे और उन्हें विश्वास है कि यह संभव हो सकता है।” तो वहीं दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव का समर्थन किया था। लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया कि “रूस अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने से पहले कुछ महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना चाहता है। जानकारी के मुताबिक क्रेमलिन ने क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त (Trump Putin phone call) रखी है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Putin phone call #TrumpPutin #RussiaUkraineWar #Geopolitics #GlobalDiplomacy #USRussiaRelations #TrumpNews #PutinUpdates #WarNegotiations #WorldPolitics #PeaceTalks

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Sunita Williams safe landing

Sunita Williams safe landing: दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई 

जून 2024 में 8 दिनों के अंतरिक्ष मिशन के रवाना हुईं भारतीय मुल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) के यान में तकनीकी खामी आ गई थीं। जिसकी वजह से उन्हें स्पेस स्टेशन में 9 माह गुजारने पड़े। इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी का इंतजार कर रहे थे। उनकी वापसी के लिए स्पेसएक्स ने क्रू-9 मिशन लॉन्च किया था। नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में गुजारने के बाद भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ सकुशल लौट आईं (Sunita Williams safe landing) हैं। भारतीय समयानुसार, बुधवार तड़के 3:27 बजे उनका यान फ्लोरिडा तट के पास उतरा। उनके साथ क्रू-9 मिशन के अन्य दो सदस्य, निक हेग और अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी सुरक्षित वापस आ गए। बता दें कि स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल आईएसएस से 17 घंटे का सफर तय कर मैक्सिको की खाड़ी में पैराशूट की मदद से उतरा। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की सफल लैंडिंग के बाद सुनीता विलियम्स सहित सभी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जैसे ही वे कैप्सूल से बाहर आए, उन्होंने कैमरे की ओर हाथ हिलाकर पृथ्वी पर वापस लौटने की खुशी जाहिर की।  लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) के दौरान डॉल्फिन का झुंड पहुंचा था रिसीव करने  बता दें कि लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) के दौरान एक रोचक घटना घटी। दरअसल, ड्रैगन कैप्सूल के लैंड होते ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की एक टीम बीच समुद्र में मौजूद पहुंची। इस दौरान उन्होंने कैप्सूल के पास डॉल्फिन का एक झुंड देखा। इसे देखकर वहां मौजूद सभी के चेहरे खिलखिला उठे। नजारा देखका ऐसा लग रहा था मानो डॉल्फिन स्वयं अंतरिक्ष यात्रियों को रिसीव करने पहुंची हैं। उन्हें खुद भी महीनों से  सुनीता विलियम्स की वापसी का इंतजार था। डॉल्फिन के इस झुंड का वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ने डॉल्फिन वाला वीडियो ‘एक्स’ पर शेयर करते हुए कहा कि “अनप्लान्ड वेलकम क्रू! क्रू-9 के पास आज दोपहर को कुछ आश्चर्यजनक आगंतुक आए।” इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर सफलतापूर्वक लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) पर व्हाइट हाउस ने एलन मस्क, स्पेसएक्स और नासा को दिया धन्यवाद  The unplanned welcome crew! Crew-9 had some surprise visitors after splashing down this afternoon.🐬 pic.twitter.com/yuOxtTsSLV — NASA's Johnson Space Center (@NASA_Johnson) March 18, 2025 इस सफलता (Sunita Williams safe landing)  पर व्हाइट हाउस ने एलन मस्क, स्पेसएक्स और नासा को धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “जो वादा किया, वो निभाया। नौ महीने से फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित घर लाने के लिए धन्यवाद।” इसके अलावा इस सफलता के लिए नासा की पूरी टीम की सराहना की गई। मिशन के दौरान नासा ने दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की भी प्रशंसा की। इस अवसर पर अंतरिक्ष यात्री हेग ने कैलिफोर्निया के हॉथोर्न स्थित स्पेसएक्स फ्लाइट कंट्रोल सेंटर से रेडियो पर कहा कि “यह एक अद्भुत सफर था। मैं कैप्सूल को देख रहा हूं और बेहद उत्साहित हूं।”  नौ महीने बाद हुई सकुशल (Sunita Williams safe landing) वापसी  जानकारी के लिए बता दें कि सुनीता विलियम्स और वुच विल्मोर दोनों ही अंतरिक्ष यात्रियों की 5 जून को लॉन्च हुए बोइंग के नए स्टारलाइनर क्रू कैप्सूल के लगभग एक सप्ताह बाद ही लौटना था, लेकिन स्पेस स्टेशन के रास्ते में आई तकनीकी खराबी की वजह से स्टारलाइनर को खाली वापस भेजा गया था। इस मिशन का उद्देश्य स्टारलाइनर की क्षमता को परखना था, जिसमें उसे अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचाकर सुरक्षित वापस लाना था। हालांकि, यह मिशन केवल आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उनकी वापसी में टलती गई। आखिरकार नौ महीने बाद ही, सभी की सकुशल वापसी (Sunita Williams safe landing) हो गई। नासा ने इस वापसी को योजना के अनुसार सफल बताया और कहा कि “सभी अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Sunita Williams safe landing Sunita Williams #SunitaWilliams #SpaceReturn #SafeLanding #NASA #AstronautLife #SpaceExploration #InspiringWomen #DolphinCelebration #ProudMoment #SpaceNews

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Israel breaks ceasefire with airstrikes

Gaza airstrike: इजराइल ने युद्धविराम तोड़ गाजा पर किया हवाई हमला, 200 से अधिक लोगों की हुई मौत 

आखिरकार दो महीने तक इजरायल और हमास के बीच चला युद्धविराम टूट ही गया। दरअसल, मंगलवार की सुबह अचानक इजरायल ने गाजा पट्टी पर हमला  (Gaza airstrike) कर दिया। स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 2 बजे एयर स्ट्राइक शुरू हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हमले में तकरीबन 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस तरह इजरायल ने हमला करके सीजफायर तोड़ दिया है। बता दें कि पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन ने युद्धविराम को बढ़ाने की कोशिश की और दोनों पक्षों के सामने एक प्रस्ताव रखा था। कतर की राजधानी दोहा में हुई यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई थी। इस पर अधिक जानकारी देते हुए वाइट हाउस ने कहा कि “हमास ने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।” वैसे यह हमला अचानक से नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने पहले ही ट्रंप प्रशासन को इस हमले की जानकारी दे दी थी। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक वाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने कहा  कि “हमास युद्धविराम बढ़ाने के लिए बंधकों को रिहा कर सकता था, लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया और युद्ध का विकल्प चुना।” ऐसे में बड़ा सवाल यह कि यह सीजफायर टूटा क्यों? आईडीएफ के हमला करने के बाद इजरायल के रक्षा मंत्री बयान जारी कर कहा कि “आज रात हम गाजा की लड़ाई में वापस आ गए हैं।” हमास की ओर से बंधकों को रिहा करने से मना करने और आईडीएफ सैनिकों को नुकसान पहुंचाने की धमकियों के मद्देनजर यह हमला किया गया है। गौर करने वाली बात यह कि इजरायल ने गाजा पर ऐसे समय में हमला किया है जब अमेरिका यमन के हूतियों पर बम बरसा रहा है।  हमास द्वारा हमारे बंधकों को रिहा करने से बार-बार इनकार करने के बाद हुआ हमला  इस हमले पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि “उन्होंने युद्ध विराम को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में प्रगति की कमी के कारण हमलों (Gaza airstrike) का आदेश दिया। यह तुरंत स्पष्ट नहीं था कि क्या यह ऑपरेशन एक बार की दबाव रणनीति थी या 17 महीने पुराना युद्ध फिर से शुरू किया जा रहा है।” नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि “यह हमास द्वारा हमारे बंधकों को रिहा करने से बार-बार इनकार करने और अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकॉफ और मध्यस्थों से प्राप्त सभी प्रस्तावों को अस्वीकार करने के बाद हुआ है।” तो वहीं हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक नैतिक परीक्षण का सामना कर रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति देता है या फिर वह गाजा में निर्दोष लोगों के खिलाफ आक्रामकता और युद्ध को समाप्त करने की प्रतिबद्धता को लागू करता है।” इसे भी पढ़ें:- पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इजराइली हवाई हमलों में (Gaza airstrike) मरने वालों की संख्या 200 के आस-पास बताई जा रही है जानकारी के लिए बता दें कि इजराइल ने सोमवार को गाजा पट्टी, दक्षिणी लेबनान और दक्षिणी सीरिया में हवाई हमले किए, जिसमें कई लोग मारे गए। इजराइली हवाई हमलों में (Gaza airstrike) मरने वालों की संख्या 200 के आस-पास बताई जा रही है। इजराइली सेना ने कहा कि “वह हमलों की साजिश रच रहे आतंकवादियों को निशाना बना रही थी।” उसने आगे कहा कि “वह दक्षिणी सीरिया में सैन्य कमांड सेंटर और उन जगहों को निशाना बना रही थी, जहां असद की सेना के हथियार और वाहन थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल एक बार फिर जमीनी आक्रमण की योजना बना रहा है. गाजा में यह इजरायली सैनिकों की वापसी का संकेत है। बता दें कि इजरायल और हमास का युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को तब शुरू हुआ जब हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। तब से लेकर अब तक युद्ध में 48,000 फिलिस्तीनियों के मारे जाने की रिपोर्ट्स आई थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Gaza airstrike #IsraelGazaWar #GazaAirstrike #MiddleEastConflict #IsraelAttack #GazaUnderAttack #WarCrimes #BreakingNews #PalestineCrisis #CeasefireBroken #HumanRights

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Crew-9

नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर

नासा ने 18 मार्च को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मिशन की घोषणा की जिसके तहत अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विलमोर (Butch Wilmore) को फ्लोरिडा तट के पास समुद्र में उतारा जाएगा। यह मिशन Crew-9 का हिस्सा है, जो नासा द्वारा संचालित है और जिसमें स्पेसएक्स का ‘क्रू ड्रैगन’ यान इस्तेमाल हो रहा है। इस महत्वपूर्ण मिशन के बारे में नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी और दर्शकों को यह अद्वितीय अवसर दिया कि वे लाइव प्रसारण के माध्यम से अंतरिक्ष से धरती पर लौटने की प्रक्रिया को देख सकें। .@NASA will provide live coverage of Crew-9’s return to Earth from the @Space_Station, beginning with @SpaceX Dragon hatch closure preparations at 10:45pm ET Monday, March 17. Splashdown is slated for approximately 5:57pm Tuesday, March 18: https://t.co/yABLg20tKX pic.twitter.com/alujSplsHm — NASA Commercial Crew (@Commercial_Crew) March 16, 2025 नासा द्वारा जारी बयान और लाइव प्रसारण नासा ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह Crew-9 मिशन के अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने का सीधा प्रसारण करेगा। यह प्रसारण सोमवार, 17 मार्च की रात 10:45 बजे से शुरू होगा। इस लाइव कवरेज में ‘स्पेसएक्स ड्रैगन’ कैप्सूल के हैच (दरवाजा) बंद करने की तैयारियों को दिखाया जाएगा। यह लाइव प्रसारण उन लोगों के लिए बेहद रोमांचक होगा जो अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष यात्रियों की गतिविधियों में रुचि रखते हैं। स्प्लैशडाउन (समुद्र में उतरने) का समय मंगलवार, 18 मार्च को शाम 5:57 बजे तय किया गया है, जो इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। मिशन का उद्देश्य और महत्व इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है। दोनों पिछले 9 महीनों से अंतरिक्ष में फंसे हुए थे। दरअसल, इनका मिशन पहले 10 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उनकी वापसी में देरी हो गई। बोइंग स्टारलाइनर कैप्सूल (Boeing Starliner Capsule) में प्रोपल्शन सिस्टम से जुड़ी एक समस्या उत्पन्न हो गई थी, जिसके कारण वे वापस लौटने में सक्षम नहीं हो पाए थे। इस कारण नासा और स्पेसएक्स ने मिलकर इन दोनों को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर लाने के लिए ‘क्रू ड्रैगन’ का इस्तेमाल किया। स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन यान और नासा का सहयोग स्पेसएक्स, एलन मस्क की निजी कंपनी है, जो अंतरिक्ष में यात्रा की नई दिशा दिखा रही है। उनका क्रू ड्रैगन यान अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है। इस यान के जरिए नासा ने अपनी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से वापस लाने का काम किया है। इस बार स्पेसएक्स के ‘क्रू ड्रैगन’ में नासा के अंतरिक्ष यात्री नीक हेग और रूस के कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव भी शामिल होंगे, जो इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सहायता करेंगे। क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन? यह मिशन सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निजी कंपनियों की भूमिका अंतरिक्ष यात्रा में कितनी अहम हो गई है। नासा और स्पेसएक्स के बीच साझेदारी अंतरिक्ष यात्रा की नई दिशा को इंगीत करती है, जहां निजी कंपनियां भी सरकारी मिशनों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: दो फोन, एक कनेक्शन: मिवी सुपरपॉड्स कॉन्सर्टो टीडब्ल्यूएस हुआ लॉन्च इस मिशन के दौरान, नासा और स्पेसएक्स ने तकनीकी दृष्टिकोण से कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने मिलकर इन चुनौतियों को पार किया। यह मिशन न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह मानवता के लिए भी एक प्रेरणा है कि हम किसी भी संकट के बावजूद, मिलकर समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। नासा का ‘Crew-9’ मिशन, जिसमें सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी शामिल है, अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। यह मिशन केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, निजी क्षेत्र की भागीदारी और मानव साहस का प्रतीक भी है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मिशन के सफल समापन के बाद, अंतरिक्ष यात्रा में और भी प्रगति हो और अंतरिक्ष में मानवता का कदम और भी मजबूत हो। Latest News in Hindi Today Hindi news Sunita Williams #Crew9 #NASA #ButchWilmore #SunitaWilliams #ISS #NASAsCrew9mission

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Pakistan Army resignations

Pakistan Army resignations: बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के हमलों से पाक आर्मी में दहशत का माहौल, 2500 सैनिकों ने दिया इस्तीफा

खुद को ऐटमी पावर बताने वाले पड़ोसी मुल्क पाकिस्‍तान में ट्रेन हाइजैक की घटना के बाद से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। विद्रोही संगठन बलूचिस्‍तान लिब्रेशन आर्मी (बीएलए) आए दिन पाकिस्‍तान आर्मी के काफिले पर हमले कर रही है। एक तरफ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हमले तेज होते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के जवान बड़ी संख्या में सेना छोड़कर भाग रहे हैं। दरअसल, पाकिस्‍तान आर्मी के जवानों में इस वक्‍त दहशत का माहौल है। दहशत के इस माहौल में पाक आर्मी को एकजुट रख पाना पाक आर्मी के प्रमुख आसिफ मुनीर के लिए मुश्किल लगने लगा है। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट की माने तो पिछले कुछ दिनों में पाकिस्‍तान की सेना पर हुए हमलों के बाद तकरीबन 2,500 जवानों ने सेना की नौकरी से इस्तीफा (Pakistan Army resignations) दे दिया है। बता दें कि सेना के भीतर बढ़ती असुरक्षा और लगातार होती सैनिकों की मौत के चलते पाकिस्तानी सेना के जवान घबराए हुए हैं। वो इस कदर डरे हुए हैं कि पाकिस्तान में अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय सऊदी कतर, कुवैत, अरब और यूएई जैसे देशों में काम करने का विकल्प तलाश रहे हैं। उनके इस कदम के पीछे की बड़ी वजह यह कि पाक सैनिक लगातार जारी हिंसा और असुरक्षा का सामना ही नहीं करना चाहते। कहने की जरूरत नहीं कि बलूचिस्तान में बढ़ता विद्रोह यह दर्शाता है कि इलाके की स्थिरता चरमरा चुकी है।  सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को नहीं किया है स्वीकार  हाल की घटनाओं जैसे कि बलूचिस्तान में ट्रेन हाइजैक और नोशकी में सैन्य काफिले पर हमला ने हर किसी की चिंता को इस कदर बढ़ा दिया है कि वो विदेश में वैकल्पिक रोजगार की तलाश करने पर मजबूर हैं। हालांकि न तो पाकिस्तानी मीडिया और न ही सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को स्वीकार किया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान नेशनल पार्टी के सांसद फुलैन बलोच ने यह दावा किया था कि बीएलए ने इतनी तदाद में आत्मघाती हमलावरों की भर्ती कर ली है कि उसने फिलहाल के लिए अस्थायी रूप से इन भर्तियों को दिया दी है। इन दिनों  बलूचिस्तान ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। 11 मार्च के बाद से कई पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया है। बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार हमले कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का है संकेत  ऐसे में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर सहसी हमले को अंजाम देकर बीएलए ने हाल के समय में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। विद्रोहियों ने रेलवे ट्रैक पर विस्फोटक लगाए, ट्रेन पर हमला किया और लगभग 450 यात्रियों को बंधक बना लिया था। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सेना देश में जारी हिंसा और असुरक्षा के बीच लड़ाई को जारी रखना नहीं चाहती है। इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का संकेत है। क्योंकि यह स्थिति न सिर्फ सुरक्षा के मुद्दे से नहीं, बल्कि देश के आंतरिक हालातों का परिणाम भी हो सकती है। अगर हालात इसी तरह बिगड़ते गए तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Army resignations #PakistanArmy #BalochistanLiberationArmy #BLAAttacks #PakistanCrisis #MilitaryResignations #BalochistanConflict #PakArmyRetreat #BLAInsurgency #PakistanUnrest #BalochRebellion

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Venezuela gang members

Venezuela gang members: अवैध प्रवासियों पर सख्त ट्रंप प्रशासन, वेनेजुएला के गिरोह के 200 से अधिक सदस्यों को भेजा अल-सल्वाडोर,

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों पर जरा भी नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से ही वो अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासियों को खदेड़ने में लगे हुए हैं। सख्त रुख जारी है। इसी कड़ी में वेनेजुएला के एक गिरोह (Venezuela gang members) के तकरीबन 200 से अधिक कथित लोगों को ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित कर अल साल्वाडोर भेज दिया है। जहां उन्हें उच्च सुरक्षा वाली जेल में ले जाया गया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति ने खुद इस बात की जानकारी दी है। दरअसल, यह ट्रैन डे अरागुआ गिरोह है, जिसका ट्रंप ने शनिवार को जारी की गई अपनी असामान्य घोषणा में जिक्र किया था। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में इनका निर्वासन रोकने का आदेश सुनाया था, लेकिन इससे पहले ही विमान इन्हें लेकर उड़ गया। बता दें कि यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई. बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया। लेकिन वकीलों ने उन्हें बताया कि पहले से ही दो विमान अप्रवासियों के साथ हवा में हैं- एक अल साल्वाडोर जा रहा है, दूसरा होंडुरास जा रहा है।”  वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य को (Venezuela gang members) भेजा गया अल साल्वाडोर गौर करने वाली बात यह कि बोसबर्ग ने मौखिक रूप से विमानों को वापस करने का आदेश दिया, लेकिन जाहिर तौर पर उन्हें वापस नहीं किया गया और उन्होंने अपने लिखित आदेश में निर्देश शामिल नहीं किया। इस बीच ट्रंप प्रशासन पर अदालती आदेश का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में इस बारे में अटकलों का जवाब देते हुए कहा कि “क्या प्रशासन अदालती आदेशों का उल्लंघन कर रहा है? कैरोलिन ने कहा कि “प्रशासन ने अदालती आदेश का पालन करने से इनकार नहीं किया। इस आदेश का कोई वैधानिक आधार नहीं था। इन्हें अमेरिकी क्षेत्र से पहले ही हटा दिए जाने के बाद आदेश जारी किया गया था।” इस संबंध में जानकारी देते हुए अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि “वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य (Venezuela gang members) अल साल्वाडोर आ गए हैं। इन सभी को एक साल के समय के लिए आतंकवाद कारावास केंद्र, सीईसीओटी में ट्रांसफर कर दिया गया है।” नायब बुकेले ने इसपर आगे कहा कि “अमेरिका इसके लिए काफी कम पैसे का भुगतान करेगा, लेकिन हमारे लिए यह काफी ज्यादा है।” उन्होंने आगे बताया कि “सरकार जीरो आइडलनेस कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत 40,000 से अधिक कैदियों की मदद से देश की जेलों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अमेरिका से भेजे गए कैदियों को भी इनके साथ ही प्रोडक्शन में लगाया जाएगा।” यही नहीं, अमेरिका ने अल साल्वाडोर द्वारा वांछित एमएस-13 के 23 सदस्यों को भी भेजा है। बता दें कि इसमें दो सरगना शामिल हैं जो कि आपराधिक संगठन के हाई लेवल का सदस्य है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि इसकी मदद से खुफिया जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को (Venezuela gang members) किया गया निर्वासित  बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को निर्वासित (Venezuela gang members) किया गया था। इसका उपयोग अमेरिकी इतिहास में सिर्फ तीन ही बार किया गया है। पहला साल 1812 के युद्ध दूसरा, प्रथम और तीसरा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान। दरअसल, इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सिर्फ यह घोषणा करनी पड़ती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में है। फिर क्या यह घोषणा करते ही उसे विदेशियों को हिरासत में लेने या हटाने के लिए असाधारण शक्तियां मिलती हैं। जिन्हें आव्रजन या आपराधिक कानूनों के तहत सुरक्षा प्राप्त होती। ध्यान देने वाली बात यह कि आखिरी बार इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी-अमेरिकी नागरिकों की हिरासत को सही ठहराने के लिए किया गया था। खैर, चाहे कुछ भी हो, अमेरिका में अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम बड़े स्तर पर जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस मुद्दे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर रखा है कि वह सभी अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालकर ही दम लेंगे। बेशक ट्रंप के इस कदम चर्चा की पूरी दुनिया में हो रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Venezuela gang members #TrumpImmigrationPolicy #VenezuelaGangs #IllegalMigration #USBorderSecurity #ElSalvadorDeportation #MigrantCrisis #USImmigration #CrimeControl #BidenVsTrump #GangDeportation

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Pakistan Army lies

BLA Claim: सभी आतंकी मारे गए, BLA का दावा 150 लोग अभी भी कब्जे में, क्या झूठ बोल रही है पाकिस्तानी सेना?

मंगलवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हुई ट्रेन हाईजैक की घटना को लेकर सस्पेंस है कि बढ़ता ही जा रहा है। बीतते समय के साथ-साथ स्थिति अधिक पेचीदा होती जा रही है। सस्पेंस इसलिए भी क्योंकि बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) (BLA Claim) और पाकिस्तानी सेना के दावों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। दरअसल, एक तरफ पाकिस्तानी सेना का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और सुरक्षाबलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया गया है। न सिर्फ आतंकियों को मार गिराया बल्कि सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के उलट बीएलए का दावा है कि “इस हमले में 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और अभी भी उनके कब्जे में अब भी 150 से अभी अधिक बंधक मौजूद हैं।” ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या पाकिस्तान की सेना झूठ बोल रही है? क्या पाकिस्तानी सेना अपनी अवाम को बरगलाने के लिए अपनी शेखी बघार रही है? और यदि मान भी ले कि पाकिस्तान का ये दावा सही है, तो फिर इस हकीकत को वो साबित क्यों नहीं कर पा रहा है। ट्रेन कब्जे में हैं तो फिर उसके वीडियो कहां हैं। और बड़ी बात यह कि मारे गए बलूच लड़ाकों के शव कहां हैं? बता दें कि 11 मार्च को दोपहर 1 बजे, आतंकियों ने बलूचिस्तान के बोलन जिले के दादर इलाके में जाफर एक्सप्रेस की पटरी को विस्फोट से उड़ा दिया और ट्रेन में सवार यात्रियों को बंधक बना लिया था। जानकारी के मुताबिक ट्रेन में कुल 440 यात्री मौजूद थे। डीजी आईएसपीआर के मुताबिक, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन शुरू करने से पहले ही आतंकियों ने 21 निर्दोष यात्रियों की निर्ममता से हत्या कर दी थी।  अब तक 100 पाकिस्तानी कर्मचारियों को मार गिराया है (BLA Claim) डीजी आईएसपीआर की माने तो, सुरक्षा बलों ने पूरी सावधानी और पेशेवर रणनीति के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। सुरक्षाबलों ने 33 आतंकवादियों को ढेर कर दिया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ। डीजी आईएसपीआर के मुताबिक इस भयावह और कायराना हमले में शामिल सभी आतंकवादियों को मौके पर ही मार गिराया गया। तो वहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बयान में कहा कि “उन्होंने सिर्फ सेना और आईएसआई के अधिकारियों को बंधक बनाया है। जबकि बाकी लोगों को रिहा कर दिया गया है। बता दें कि 12 मार्च को बीएलए ने दावा (BLA Claim) किया था कि “उन्होंने अब तक 100 पाकिस्तानी कर्मचारियों को मार गिराया है। उनके अनुसार, बुधवार को महज एक घंटे के भीतर 50 बंधकों को मौत के घाट उतारा दिया था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि “11 मार्च की रात पाकिस्तान के ड्रोन हमले के जवाब में 10 बंधकों को मार दिया गया था।”  बीएलए का दावा (BLA Claim) है कि उनके कब्जे में अब भी 150 बंधक मौजूद हैं हालांकि बीएलए का दावा (BLA Claim) है कि उनके कब्जे में अब भी 150 बंधक मौजूद हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने बंधकों को 3-4 समूहों में विभाजित कर उनके पास आत्मघाती हमलावरों को तैनात कर दिया था। ये सभी आतंकी अफगानिस्तान में अपने हैंडलर्स से लगातार संपर्क में थे और निर्देश प्राप्त कर रहे थे। इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा है कि “सेना और एयरफोर्स ने ऑपरेशन पूरा कर लिया है। सुसाइड बॉम्बर्स को मार गिराया गया है।” पाक सेना के दावे के मुताबिक, हाइजैक के दौरान 21 यात्री और 4 सैनिक मारे गए हैं। बीएलए के सभी 33 लड़ाकों को मार गिराया गया है।”  तो वहीं, एक चश्मदीद ने 70-80 शव देखने का दावा किया है। बलोच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, ट्रेन में कुल 426 यात्री थे। जिसमें पाकिस्तान के 214 सैनिक थे। ट्रेन में मौजूद 212 नागरिकों को छोड़ दिया गया था। 60 सैनिक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा पाकिस्तान आर्मी के हमले में बलूच आर्मी के 3 कमांडर भी मारे गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक मांगे नहीं मानी गई तो सभी 150 बंधक सैनिकों को मार देंगे (BLA Claim)  इस बीच बलूच आर्मी की डेडलाइन आज दोपहर 1 बजे खत्म हो रही। दरअसल, उसने बलूच कैदियों को नहीं छोड़ने पर ट्रेन में मौजूद सभी बंधकों को मारने की धमकी दी है। बीएलए ने (BLA Claim) अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम में कहा कि “अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो सभी 150 बंधक सैनिकों को मार देंगे।” बता दें कि बीएलए ने पाकिस्तान की जेलों में बंद 241 बलोचों की रिहाई की मांग की है। खैर, अपने अल्टीमेटम पर बोलते हुए बीएलए ने कहा है कि “पाकिस्तान को अपने सैनिकों की फिक्र नहीं है। पाक की तरफ से बातचीत की कोई कोशिश नहीं हुई है। हम जो कहते हैं वो करने का माद्दा रखते हैं। डेडलाइन खत्म होने के हर घंटे में हम 5 बंधक मारेंगे। एक बार हमने फैसला कर लिया तो वो नहीं बदलेगा। पाकिस्तान के पास भूल सुधारने का आखिरी मौका है। वो प्रोपेगेंडा और फेक नैरेटिव चलाना बंद करे।” बलूचों का दावा है कि उसने आम रेल पैंसेजर्स को बगैर नुकसान पहुंचाए रिहा किया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news BLA Claim #BLAClaim #PakistanArmy #BalochistanAttack #TerroristAttack #PakistanCrisis #BLAHostage #PakistanNews #MilitaryConflict #BalochistanCrisis #PakFakeClaims

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AirtelSpaceXPartnership

Airtel SpaceX partnership: जिओ के सुस्त इंटरनेट से मिलेगी मुक्ति, अब ग्राहकों को मिलेगा सुपर-फास्ट इंटरनेट

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की भारत में एंट्री होने तो जा रही है। भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और ग्राहकों को सुपर-फास्ट इंटरनेट देने के लिए भारती एयरटेल और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (Airtel SpaceX partnership) ने हाथ मिलाया है। इस डील के तहत स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट को भारत में लॉन्च किया जाएगा। दरअसल, एयरटेल ने मंगलवार को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस एग्रीमेंट की जानकारी दी। यह तो ठीक, लेकिन यह डील अभी भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की हालिया मुलाकात के कुछ हफ्ते बाद ही आया है। बता दें कि मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मस्क से मुलाकात की थी, जिसमें इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर सहयोग बढ़ाने की बात हुई थी। मुख्य बात यह कि एलन मस्क लंबे समय से स्टारलिंक को भारत में लाना चाहते थे, लेकिन रेगुलेटरी चुनौतियों और रिलायंस जिओ जैसे घरेलू टेलीकॉम दिग्गजों के विरोध के चलते मामला अटका हुआ था। यही नहीं, नवंबर 2022 में भारतीय टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि “स्टारलिंक ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया है, जिससे उसका सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाइसेंस रुका हुआ है।” कहने की जरूरत नहीं, भारत एक बड़ा बाजार है, जहां 1.4 अरब लोगों में से तकरीबन 40 फीसदी लोगों के पास अभी भी इंटरनेट नहीं है।  सस्ता और भरोसेमंद इंटरनेट मिल सके इसलिए स्टारलिंक एयरटेल के उत्पादों (Airtel SpaceX partnership) को बनाएगा बेहतर  एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के साथ हुए समझौते पर (Airtel SpaceX partnership) एयरटेल के वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल का कहना है कि “भारत में स्पेसएक्स के साथ काम करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अगली पीढ़ी की उपग्रह कनेक्टिविटी के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाता है।” यह साझेदारी हमें भारत के सबसे दूरस्थ इलाकों में भी हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने की क्षमता देगी। प्रत्येक भारतीय को सस्ता और भरोसेमंद इंटरनेट मिल सके इसलिए स्टारलिंक एयरटेल के उत्पादों को और बेहतर बनाएगा। तो वहीं इस डील पर स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने कहा कि “हम एयरटेल के साथ काम करके भारत के लोगों के लिए स्टारलिंक के ट्रांसफॉर्मेटिव प्रभाव को लेकर उत्साहित हैं। एयरटेल की टीम ने भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए उनके साथ काम करना हमारे लिए सही कदम है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक स्पेसएक्स को इंडियन अथॉरिटी से लाइसेंस मिलना है (Airtel SpaceX partnership) बाकी  भले ही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की भारत में एंट्री होने तो जा रही है लेकिन अभी तक स्पेसएक्स को इंडियन अथॉरिटी से लाइसेंस मिलना बाकी है। ऐसे में सवाल ये है कि स्टारलिंक (Airtel SpaceX partnership) अगर भारत में दस्तक देती है तो इससे क्या फायदा होगा? इस डील का बड़ा फायदा यह कि भारत में स्टारलिंक एयरटेल के जरिए अपने इक्विपमेंट्स बेच सकेग। इस पार्टनरशिप से दोनों ही कंपनियों को फायदा होगा। इससे एयरटेल स्टारलिंक का इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकेगा, तो वहीं मस्क की कंपनी के लिए भारत में अपना विस्तार करना आसान हो जाएगा। दोनों कंपनियां ग्रामीण स्कूलों, हेल्थकेयर सेंटर्स और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए मिलकर काम करेंगी। और तो और इससे एयरटेल के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा स्टारलिंक को भी मिलेगा। इससे भारत में न सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होगी बल्कि रूरल और रिमोट एरिया में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा मिल सकेगी। यही नहीं भारत में किफायती दरों पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड एक्सेस मिल सकेगा। इसके अलावा दूरदराज के जिन इलाकों में कनेक्टिविटी नहीं है, वहां भी आसानी से इंटरनेट पहुंच पाएगा। बड़ी बात यह कि आम लोगों को सबसे कम कीमत वाली सैटेलाइट इंटररनेट सर्विस मिल सकेगी Latest News in Hindi Today Hindi news #AirtelSpaceXPartnership #StarlinkIndiaLaunch #HighSpeedInternetIndia #SatelliteInternet #DigitalIndia #ElonMusk #BhartiAirtel #SpaceX #InternetRevolution #JioCompetitor

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