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Global market crash: टैरिफ वॉर के डर से भारत सहित ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, ट्रंप ने कही यह बड़ी बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी लागू होने के बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम (Global market crash) मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर के शेयर बाजारों से करीब 6 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू जलकर स्वाहा हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी। ट्रंप की तरफ से लगाए गए भारी इम्पोर्ट टैक्स के जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर सख्त टैरिफ लगा दिए। इस ट्रेड वॉर के डर से दुनिया भर के निवेशक डर के मारे शेयर बेचने लगे हैं। आज यानी सोमवार, 7 अप्रैल को एशियाई शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। हॉन्ग कॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे बड़े मार्केट्स में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। बात करें ग्लोबल मार्किट की तो गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की आई है गिरावट (Global market crash) ध्यान देने वाली बात यह कि इस गिरावट (Global market crash) के बाद जापान में फ्यूचर ट्रेडिंग को रोकना पड़ा, यानी सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। इस तरह की गिरावट मार्केट में डर और पैनिक का साफ संकेत देती है। दरअसल, ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इन्वेस्टर्स को लग रहा है कि ट्रेड वॉर की वजह से ग्लोबल ग्रोथ पर असर पड़ेगा और कंपनियों के मुनाफे में बड़ी गिरावट हो सकती है। सिर्फ एशियाई मार्केट ही नहीं, बल्कि अमेरिका के शेयर फ्यूचर्स में भी बड़ी गिरावट देखी गई। गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की गिरावट आई है और यह 3,013 डॉलर प्रति औंस तक आ गया है।  ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी (Global market crash)  शेयर बाजार में जारी गिरावट (Global market crash) पर रविवार को ट्रंप ने यह इनकार किया कि “वो जानबूझकर शेयर बाजार में गिरावट ला रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “उन्हें मार्केट रिएक्शन का अंदाजा नहीं था और जब तक दूसरे देशों के साथ व्यापार घाटे का समाधान नहीं होता, तब तक वो कोई डील नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा, कभी-कभी किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी ही पड़ती है। दरअसल, ट्रंप का कहना है कि “ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी। चाहे कुछ भी हो, लेकिन इन्वेस्टर्स को फ़िलहाल नुकसान ही दिख रहा है। बता दें कि एयर फाॅर्स वन में रिपोर्टर्स से बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि “उन्होंने इस मसले पर दुनिया के कई नेताओं से बातचीत की है और कहा कि वो सब डील करने को बेताब हैं।” इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ ट्रंप के फैसले के बाद से भारतीय शेयर बाजार में देखने मिल रही है गिरावट (Global market crash) गोलबल मार्किट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी अब पूरी तरह से इसकी चपेट में (Global market crash) आ गया है। सोमवार, 7 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 3914.75 अंकों की गिरावट के साथ 71,449.94 अंकों पर खुला। एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी आज 1146 अंकों की गिरावट के साथ 21,758.40 अंकों पर खुला। ट्रंप के फैसले के बाद से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। बता दें कि कोविड के बाद भारतीय शेयर बाजार में ये अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Global market crash #GlobalMarketCrash #TariffWar #TrumpTradePolicy #StockMarketNews #IndianMarkets #USChinaTensions #EconomicCrash #SensexToday #MarketPanic #GlobalRecession

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iPhone price increase

iPhone price increase: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ के चलते बढ़ सकती हैं आईफोन की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 180 से अधिक देशों पर लगाए गए भारी-भरकम रिसिप्रोकल टैरिफ का असर अब दुनिया में देखा जाने लगा है। दुनिया भर के बाजारों में गिरावट जारी है। इस टैरिफ ने ट्रेड वर्ल्ड वॉर की आशंका बढ़ा दी है। अब इसका असर एप्पल के आईफोन पर भी कीमतों पर भी पड़ (iPhone price increase) सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि कंपनी टैरिफ की लागत ग्राहकों पर डालती है तो ग्रहकों की जेब ढीली हो सकती है। ऐसे में इस फैसले के चलते कंपनी के पास दो विकल्प हैं, या तो वह इस अतिरिक्त शुल्क का वहन खुद वहन करे या फिर इसका बोझ ग्राहकों पर डाले। अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालती है, तो आईफोन की कीमतों में 40% तक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में एक हाई-एंडआईफोन की कीमत लगभग 2,300 डॉलर तक पहुंच सकती है। गौर करने वाली बात यह कि एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग मुख्य रूप से चीन में होती है। और डोनाल्ड ट्रंप ने 54% का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया गया है। जाहिर है, आईफोन की कीमतों में भारी उछाल होना लाजमी है।  30 से 40 प्रतिशत तक की (iPhone price increase) हो सकती है बढ़ोतरी  बता दें कि ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ नीति के चलते आईफोन की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी (iPhone price increase) हो सकती है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। आईफोन 16 जो कि $799 लांच हुआ था, इस नीति के चलते अब वो $1,142 तक पहुंच सकता है, तो वहीं, आईफोन16 प्रो मैक्स की कीमत तकरीबन  $2,300 के आसपास जा सकती है। इतना ही नहीं, आईफोन का सबसे सस्ता मॉडल आईफोन 16e की कीमत भी $599 से बढ़कर $856 तक बढ़ सकती है। ध्यान देने वाली बात यह कि आईफोन ही नहीं, एप्पल के अन्य डिवाइसेज़ भी महंगे हो सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं, अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालता है, तो कंपनी की बिक्री में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही कई बाजारों में एप्पल  की सेल गिर रही है। क्योंकि इसके इसके फीचर्स ग्राहकों को अधिक प्रभावित नहीं कर पाए हैं। ऐसे में, यदि आईफोन महंगा होता है, तो ग्राहक सैमसंग, गूगल पिक्सेल और अन्य ब्रांड्स की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का किया है ऐलान (iPhone price increase) सीएफ़आरए रिसर्च के एक्सपर्ट एंजेलो ज़िनो का मानना है कि आपले ग्राहकों पर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत लागत ही डाल पाएगा। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि कंपनी फिलहाल आईफोन 17 की लॉन्चिंग तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करने वाली है। भले ही एप्पल कुछ निर्माण भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट कर रहा है लेकिन वहां भी 26% से 46% तक के टैक्स लागू हैं, जिससे लागत कम नहीं हो रही है। खैर, जानकारी के मुताबिक अगले चार वर्षों में एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इसपर सीईओ टिम कुक ने कहा कि “हम अमेरिकी में निवेश करेंगे और इस निवेश से देश के भविष्य को और मजबूत करेंगे।” ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निवेश आईफोन की आसमान छूती कीमतों (iPhone price increase) को रोक पाएगा भी या नहीं?  Latest News in Hindi Today Hindi news iPhone price increase #iPhonePriceHike #TrumpTariffs #iPhone2025 #USChinaTrade #ReciprocalTariff #AppleNews #iPhoneCost #TradeWarImpact #TechNews #AppleTariff

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Modi meets Muhammad Yunus

Modi meets Muhammad Yunus: 9 महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहम्मद यूनुस ने थाईलैंड राजधानी बैंकॉक में की मुलाकात  

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश-भारत के रिश्ते लगातार तल्ख बने हुए हैं। भले बांग्लादेश के अंतरिम लीडर लगातार भारत विरोधी स्टैंड दिखाते रहे लेकिन पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर बेकरार भी दिखे। बांग्लादेश को उम्मीद थी कि भारत की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद यह द्विपक्षीय वार्तो हो जाएगी। ऐसा ही हुआ भी। हालांकि जब दोनों नेताओं की मुलाकात हुई (Modi meets Muhammad Yunus) तो, पीएम मोदी गंभीर और शांत दिखे जबकि यूनुस के चेहरे पर मुस्कान दिखी। इस बैठक में भारत की ओर से एस जयशंकर, एनएसए अजित डोभाल और अन्य सीनियर अधिकारी मौजूद थे। दरअसल, 4 अप्रैल को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों नेता बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए थाईलैंड की यात्रा पर हैं।  40 मिनट तक चली पीएम मोदी और यूनुस के बीच यह बैठक करीब (Modi meets Muhammad Yunus)  बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह पहली मुलाकात थी। बैंकॉक में दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई है। इससे पहले गुरुवार की रात बिम्सटेक नेताओं के डीनर प्रोग्राम में भी दोनों एक-दूसरे के बगल में ही बैठे थे। सूत्रों की माने तो भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत हुई है। पीएम मोदी और यूनुस के बीच यह बैठक करीब (Modi meets Muhammad Yunus) 40 मिनट तक चली है। बड़ी बात यह कि ढाका ने ही बिम्सटेक बैठक से इतर नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय वार्ता का आग्रह किया था। बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी और यूनुस बैंकॉक में बिम्सटेक रात्रिभोज में एक साथ बैठे नजर आए थे।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ मोहम्मद यूनुस मिलकर (Modi meets Muhammad Yunus) मोदी नहीं दिखे खुश  गौरतलब हो कि मोहम्मद यूनुस ने भारत संग दुश्मनी निभाने का कोई कसर नहीं छोड़ी है। जब से शेख हसीना की सरकार गई है, तब से बांग्लादेश ने चीन का दामन थाम रखा है। हाल ही में मोहम्मद यूनुस ने चीन का दौरा किया था और बीजिंग में उन्होंने  बांग्लादेश को समंदर का गार्जियन बताया था और पूर्वोत्तर पर बयान देकर भारत को नाराज किया था। हालांकि, जयशंकर ने बिम्सटेक के मंच से ही बांग्लादेश को अच्छे से सुनाया था। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात वाली इन तस्वीरों पर हैरानी इसलिए है, क्योंकि पीएम मोदी जब भी किसी राष्ट्राध्यक्ष से मिलते हैं तो उमसें गर्मजोशी दिखती है। वह खुले दिल से गले मिलते हैं। लेकिन तस्वीर देख लग नहीं रहा कि मोहम्मद यूनुस मिलकर (Modi meets Muhammad Yunus) मोदी खुश दिखे हों। संभवतः इसकी वजह भारत और बांग्लादेश की बीच तल्खी ही हो सकती है। हालांकि यूनुस और मोदी के इस मुलाकात में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक भी मौजूद थे। बता दें कि मोदी से मुलाकात के लिए यूनुस लगातार कोशिश कर रहे थे। आखिरकार अब जाकर उनकी मुलाकात संभव हो सकी।   Latest News in Hindi Today Hindi news Modi meets Muhammad Yunus NarendraModi #PMModi #MuhammadYunus #ModiInBangkok #IndiaThailandRelations #ModiMeetsYunus #InternationalDiplomacy

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Donald Trump Imposes 26% Tariff on Indian Goods

26% tariff on Indian goods: डोनाल्ड ट्रम्प ने लागू किया पारस्परिक टैरिफ, भारत पर लगाया 26% लगाया तो चीन और पाक को दिया तगड़ा झटका

आखिरकार 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के तमाम देशों पर पारस्परिक टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) लागू कर दिया। ट्रम्प ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ (26% tariff on Indian goods) लगाया है, जबकि अचीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में भाषण के दौरान पारस्परिक टैरिफ की योजना की घोषणा की। देशों के एक समूह पर संयुक्त राज्य अमेरिका से वसूले जाने वाले टैरिफ की लगभग आधी दर से टैरिफ लागू किया गया है। इस दौरान ट्रम्प ने कहा कि “यह अमेरिकी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। यह हमारी आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा है। सालों तक, कड़ी मेहनत करने वाले अमेरिकी नागरिकों को किनारे पर बैठने के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन अब हमारे समृद्ध होने का समय है।” इस बीच भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “भारत, बहुत, बहुत सख्त है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी-अभी यहां से गए हैं। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने कहा कि आप मेरे दोस्त हैं, लेकिन आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं। वे हमसे 52 प्रतिशत शुल्क लेते हैं। आपको समझना होगा, हमने उनसे सालों-साल और दशकों तक कुछ भी शुल्क नहीं लिया। यह केवल सात साल पहले की बात है। जब मैं सत्ता में आया, तब हमने चीन के साथ इसकी शुरुआत की।” अमेरिका द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 26% पारस्परिक टैरिफ (26% tariff on Indian goods) के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है वाणिज्य मंत्रालय  गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि “अमेरिका द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 26% पारस्परिक टैरिफ (26% tariff on Indian goods) के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है।” एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक “अमेरिका में सभी आयात पर एक समान 10 प्रतिशत का शुल्क 5 अप्रैल से और बाकी 16 प्रतिशत शुल्क 10 अप्रैल से लागू होगा।” उन्होंने कहा कि “एक प्रावधान है कि अगर कोई देश अमेरिका की चिंताओं का समाधान करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उस देश के खिलाफ शुल्क कम करने पर विचार कर सकता है।” बता दें कि भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। बता दें कि मेक्सिको के बाद अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े आयातक चीन को अब इस नई नीति के तहत 34% टैरिफ का देना पड़ेगा। बीजिंग ने यूरोपीय संघ के साथ मिलकर पहले ही जवाबी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन ने बार-बार अमेरिका द्वारा चीन से आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रति अपनी कड़ी असहमति और मजबूत विरोध जताया है। यही नहीं,  चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि “देश अपने अधिकारों और हितों की दृढ़ता से रक्षा करने के लिए जवाबी कदम उठाएगा।” इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ फिर भी भारत कई दूसरे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है (26% tariff on Indian goods) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के टॉप निर्यातक संगठन, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने गुरुवार को कहा कि “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ (26% tariff on Indian goods) आयात शुल्क से निस्संदेह घरेलू प्लेयर प्रभावित होंगे।” इसके अलावा अजय सहाय ने यह भी कहा कि “भारत कई दूसरे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता, जिस पर वर्तमान में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, जल्द संपन्न हो जाएगा, क्योंकि इससे इन पारस्परिक टैरिफ से राहत मिलेगी। बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने बाकी देशों द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क की आधी दर पर ही पारस्परिक शुल्क लगाया है। आने वाले समय में अमेरिका सहित कई देशों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news 26% tariff on Indian goods #DonaldTrump #IndiaUSTrade #TariffWar #IndianExports #USIndiaRelations #GlobalTrade #TradePolicy #EconomicImpact #TrumpTariff #IndiaChina

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US Reciprocal Tariffs May Cost India ₹26,000 Crore

US reciprocal tax impact on India: अमेरिका के रेसिप्रोकल टैक्स के चलते भारत को हो सकता है 26000 करोड़ का नुकसान

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से दुनिया भर को उन्होंने अपने फैसलों से चौंका दिया है। कनाडा, चीन और भारत समेत सभी देशों को टेरिफ का टेरर दिखा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप आज यानी, 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने जा रहे हैं। इस टैक्स का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। जानकारी के मुताबिक रेसिप्रोकल टैक्स से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर बड़ा असर (US reciprocal tax impact on India) पड़ सकता है। केयरएज रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के नए टैरिफ के चलते उत्तर अमेरिकी देश को होने वाले निर्यात पर भारत को तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (26000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का नुकसान हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 अप्रैल को केयरएज रेटिंग्स की निदेशक स्मिता राजपुरकर ने मुंबई में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि “हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 0.1 प्रतिशत (3.1 बिलियन डॉलर) पर सीमित है, लेकिन फिर भी इस जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ये क्या है रेसिप्रोकल टैक्स? तो आपको बता दें कि रेसिप्रोकल का शाब्दिक अर्थ है आप जैसा करोगे, वैसा ही हम करेंगे।   सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं बता दें कि ट्रंप ने पहले ही कई टैरिफ उपायों की घोषणा कर दी है, जिसमें चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ तो मैक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है, जबकि कनाडाई तेल पर 10 प्रतिशत की कम दर लागू होगी। दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप का मानना है कि चीन, भारत, कनाडा और मैक्सिको, अमेरिका पर अधिक टैक्स लगाते हैं। कारण यही जो अब हम भी उन पर अधिक टैरिफ लगाएंगे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हर देश एक-दूसरे से पेट्रोल-डीजल, गैस समेत अन्य वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं। इस दौरान सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है (US reciprocal tax impact on India) बात करें भारत रेसिप्रोकल टैक्स से होने वाले नुकसान की तो भारतीय निर्यात पर 8 प्रतिशत डिफरेंशियल टैरिफ और डॉलर के मुकाबले रुपये में 4 प्रतिशत एक्सचेंज रेट डेप्रिशिएशन के अनुमान के परिणामस्वरूप, करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट करते हुए, 4 बिलियन डॉलर का शुद्ध निर्यात प्रभाव देखने को मिलेगा। इस तरह सभी निर्यात श्रेणी में एक समान अतिरिक्त टैरिफ को ध्यान में रखते हुए तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (US reciprocal tax impact on India) होने का अनुमान है। अमेरिकी टैरिफ से भारत के ऑटो और फार्मा जैसे सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा सेक्टर स्पेसिफिक टैरिफ भी लागू किए गए हैं, जैसे सभी स्टील और एल्युमीनियम आयातों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और ऑटोमोबाइल व कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ, साथ ही सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य उद्योग भी रडार पर हैं। ऐसा नहीं कि भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है। गौरतलब हो कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले साल भारत ने वहां 78 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जो कुल निर्यात व्यापार का 18 प्रतिशत है।   Latest News in Hindi Today Hindi news US reciprocal tax impact on India #USReciprocalTariffs #IndiaExportLoss #TradeDeficit #ReciprocalTaxImpact #IndiaUSTradeRelations #ExportSectorsAffected #JewelryExports

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DonaldTrump2028

Trump presidential plans: क्या तीसरी बार भी अमेरिका के राष्ट्रपति बनना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल 4 साल का होता है और कोई भी शख्स दो बार से अधिक इस पद पर नहीं रह (Trump presidential plans) सकता। दरअसल, फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट लगातार चार बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे। इसके बाद साल 1951 में अमेरिकी संविधान में 22वां संशोधन किया गया। उस संसोधन के मुताबिक कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर दो बार से अधिक नहीं चुना जाएगा। इस संशोधन के साथ अमेरिका में अधिकतम 2 बार ही राष्ट्रपति बनने की सीमा लगा दी गई। इस संविधान संशोधन के बाद अब तक चुने गए सभी राष्ट्रपति इस सीमा का पालन करते आए हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरी बार भी राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। बता दें की डोनाल्ड ट्रंप साल 2017 से लेकर 2021 तक अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इसके बाद साल 2021 में वो जो बाइडेन को हाथों चुनाव हार गए थे।  अमेरिका का पुतिन बनने को सोच (Trump presidential plans) रहे हैं- डोनाल्ड ट्रंप इसके बाद साल 2025 में एक फिर से वो चुनाव में लड़े और इस बार उनका मुकाबला जिसमें उनका मुकाबला कमला हैरिस से हुआ। बड़ी बात यह की इस चुनाव को वे भारी अंतर से जीत गए। अब उनका यह कार्यकाल साल 2029 में खत्म होगा। गौर करने वाली बात यह कि तब तक वे 82 वर्ष के हो चुके होंगे। इसके बावजूद ट्रंप को उम्मीद है कि उनकी लोकप्रियता की वजह से अमेरिकी जनता उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए सहमत हो जाएगी। इस तरह वो अमेरिका का पुतिन बनने को सोच (Trump presidential plans) रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या वे भी संवैधानिक सीमा को हटाकर तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने जा रहे हैं? दरअसल, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संविधान में संशोधन कर चुनाव लड़ने की सीमा हटा चुके हैं। हालांकि इस बारे पहले से अटकलें लगाईं जा रही थी लेकिन रविवार को  ट्रंप ने खुद ही इस बारे में स्पष्ट कर दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि “वे तीसरी बार भी राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा करना चाहते हैं।”  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही देखिए मुझे काम करना (Trump presidential plans) पसंद है- डोनाल्ड ट्रंप एनबीसी न्यूज को टेलीफोनिक इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि “क्या वह उस समय देश की सबसे कठिन नौकरी में सेवाएं देना जारी रखना चाहेंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि “देखिए मुझे काम करना (Trump presidential plans) पसंद है।” इस दौरान उन्होंने दावा किया कि “अमेरिका की जनता उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए तैयार हो जाएगी। ट्रंप यही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि “मैं मजाक नहीं कर रहा हूं। ऐसे तरीके हैं जिनसे आप ऐसा कर सकते हैं। हालांकि इसके बारे में विचार करना अभी काफी जल्दबाजी होगी।” विदेश नीति मामलों के विशेषज्ञों की माने तो ट्रंप के इरादों से स्पष्ट है कि साल 2029 में अपना दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वे तीसरी बार चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वे शायद दो से अधिक बार देश का नेतृत्व करने पर लगी रोक संबंधी संवैधानिक बाधा को पार करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। तो वहीं ट्रम्प की टिप्पणियों की तीखी आलोचना भी की जा रही है। प्रतिनिधि डैनियल गोल्डमैन ने इसे सरकार को संभालने और हमारे लोकतंत्र को खत्म करने के उनके स्पष्ट प्रयास में वृद्धि करार दिया है।उन्होंने कहा कि “अगर कांग्रेस के रिपब्लिकन संविधान में विश्वास करते हैं, तो वे तीसरे कार्यकाल के लिए ट्रम्प की महत्वाकांक्षाओं का विरोध करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump presidential plans #TrumpThirdTerm #DonaldTrump2028 #Trump2028Campaign #USPresidentialElections #Trump2028Run #TrumpForPresident #Trump2028Bid #Trump2028

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Elon Musk's xAI Acquires X in $33 Billio

Elon Musk sells X: एलन मस्क ने इस शख्स को दो लाख 82 हजार करोड़ रुपए में बेचा  X

टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क अपने हैरतअंगेज निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स नीलाम कर दिया है। पहले तो साल 2022 में उन्होंने ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदा था और फिर नाम बदलकर X किया। न सिर्फ नाम में बदलाव किया बल्कि उन्होंने अभद्र भाषा और यूजर वेरिफिकेशन और गलत सूचना पर पॉलिसी में बदलाव किया था। यही नहीं मस्‍क ने मैनेजमेंट संभालते ही कई बदलाव किए और लोगों से ब्‍लू टिक के लिए फीस वसूली जाने लगी। इस बीच मजे की बात यह कि अब उन्होंने X को ही बेच दिया (Elon Musk sells X)। वो भी 33 बिलियन डॉलर (28,23,43,71,00,00 रुपए) में। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आखिर वो कौन रईस है जिसने एलन को इतनी बड़ी रकम दी। आखिर कौन है वो शख्स और क्या करती है उसकी कंपनी, जिसने X ख़रीदा। आइये जानते हैं कौन वो खरीदार जिसने इतनी बड़ी डील की।   एलन मस्‍क की ही दूसरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI ने खरीदा है (Elon Musk sells X) बता दें कि वो रईसजादा कोई और नहीं बल्कि अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क स्वयं ही हैं। उन्होंने किसी और को नहीं बल्कि अपनी ही कंपनी (Elon Musk sells X) को बेचा है। बता दें कि xAI यूएस आधारित अमेरिकी पब्लिक-बेनेफिट कॉरपोरेशन है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करती है। बड़ी बात यह कि इस कंपनी को खुद एलन मस्क ने ही साल 2023 में शुरू किया था। इस कंपनी का हेडक्वार्टर कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में स्थित है। कुल मिलाकर बड़ी बात यह कि एक्‍स को किसी और ने ही नहीं बल्कि एलन मस्‍क की ही दूसरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI ने खरीदा है। यह डील 33 अरब डॉलर में हुई है। भारतीय करेंसी में यह राशि दो लाख 82 हजार करोड़ में बिकी।  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही हमारा लक्ष्य सच्चाई की खोज करना और ज्ञान को बढ़ाना है (Elon Musk sells X)  जानकारी के मुताबिक दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क ने हाल ही में X पर एक पोस्ट शेयर किया है। शेयर किये पोस्ट में उन्होंने बताया कि X और xAI का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। आज हम मॉडल, डिस्ट्रीब्यूशन, कंप्यूट, जेटा और टैलेंट को एक साथ लाने की दिशा में कदम उठा (Elon Musk sells X) रहे हैं। इस डील को लेकर एलन मस्क का कहना है कि “X की विशाल पहुंच और xAI की एडवांस एआई क्षमता, दोनों ही एक साथ मिलकर आपार संभावनाओं के दरवाजों को खोलेंगे। अपनी बात को रखते हुए एलन मस्क ने कहा कि “हमारा लक्ष्य सच्चाई की खोज करना और ज्ञान को बढ़ाना है। इसी के साथ हम अरबों लोगों को ज्यादा उपयोगी और बेहतर एक्सपीरियंस देने का काम करेंगे।” बता दें कि एलन मस्क ने हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X को अपनी ही कंपनी xAI को बेच दिया है। ये डील 33 बिलियन डॉलर (लगभग 28,23,43,71,00,00 रुपए) में हुई है। ध्यान देने वाली बात यह कि इस सौदे की घोषणा के बाद X और xAI के प्रवक्ताओं ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की। सौदे के कई पहलू अभी अस्पष्ट हैं, जैसे कि निवेशकों को मुआवजा कैसे मिलेगा, X के नेतृत्व का नई कंपनी में एकीकरण कैसे होगा, या नियामक जांच की संभावना क्या है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk sells X #ElonMusk #xAI #XCorp #TechNews #AIIntegration #SocialMedia #BusinessAcquisition #Innovation #ArtificialIntelligence #TechUpdate

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MyanmarEarthquake

Myanmar earthquake: म्यांमार में आये भीषण भूकंप से मची तबाही, 700 से अधिक लोगों की हुई मौत, हजारों घायल

शुक्रवार को म्यांमार में अचानक भूकंप (Myanmar earthquake) के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के पास था। भूकंप की तीव्रता 7.7 थी। इसी के बाद करीब 11 मिनट बाद 6.4 तीव्रता का जोरदार झटका आया। भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि इससे कई इमारतें ढह गईं। अचानक आये इस भूकंप से लोग दहशत में आ गए। चारों तरफ अफरा-तरफ का माहौल मच गया। तबाही का मंजर ऐसा कि इस भूकंप में तकरीबन 700 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। मौतों का अकड़ा बढ़ने के आसार हैं। हजारों लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। फ़िलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी चल ही रहा है, इसी के चलते बचाव कार्य जारी रहने के चलते मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। यही नहीं, म्यांमार में आए भूकंप के झटके पड़ोसी देश थाईलैंड तक में महसूस किए गए। पड़ोसी देश थाईलैंड के बैंकॉक में एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। बता दें कि म्यांमार में सबसे ज्यादा नुकसान 15 लाख की आबादी वाले मांडले शहर में हुआ। यहां पर बचाव कार्य जारी है। बता दें कि मुख्य भूकंप के बाद शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 11:56 बजे म्यांमार में 4.2 तीव्रता का झटका आया। इस झटके के बीच नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने पुष्टि की कि यह झटका 10 किमी की गहराई पर आया। जिससे आगे के झटकों की संभावना बढ़ गई है।   इस मुश्किल घड़ी में भारत ने म्यांमार की तरफ बढ़ाया मदद का हाथ (Myanmar earthquake) म्यांमार में आये भीषण भूकंप (Myanmar earthquake) के बाद राहत अभियान शुरू किया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने घोषणा की कि “संयुक्त राष्ट्र जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए दक्षिण पूर्व एशिया में जुट रहा है, राहत के लिए 5 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं।” तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “उन्होंने म्यांमार में अधिकारियों से बात की है और पुष्टि की है कि उनका प्रशासन देश को सहायता देगा।” म्यांमार की सरकार ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बल्ड के जरूरत की बात कही है। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी म्यांमार की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। कहा जा रहा है कि भारत म्यांमार को स्लीपिंग बैग, खाना, टेंट, स्वच्छता किट और आवश्यक दवाओं सहित 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजेगा। जानकारी के मुताबिक सहायता वायु सेना स्टेशन हिंडन से भारतीय वायु सेना के सी-130जे विमान के जरिए यह मदद देश तक पहुंचाई जाएगी।  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही थाईलैंड में बैंकॉक के चाटुचक बाजार के पास एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत (Myanmar earthquake) ढह गई प्राप्त जानकारी के अनुसार, म्यांमार के सैन्य जुंटा नेता जनरल जुंटा प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने एक वीडियो स्पीच में कहा कि “मैंने राहत प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन का अनुरोध किया है। उन्होंने अधिक मौतों और हताहतों की चेतावनी दी है। इस दौरान उन्होंने सभी देशों से मदद और दान देने की गुजारिश की है। जबकि मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने बताया कि “नेपीडॉ, मांडले और सागांग शहर में अस्पताल घायलों से भरे हुए हैं।” यही नहीं, थाईलैंड में, बैंकॉक के चाटुचक बाजार के पास एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत (Myanmar earthquake) ढह गई। इमारत के ढहने के बाद बचावकर्मी मलबे की ओर दौड़े और घायल लोगों को फौरन अस्पताल ले जाया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Myanmar earthquake #MyanmarEarthquake #EarthquakeNews #MyanmarDisaster #SeismicActivity #EarthquakeAlert #BreakingNews #EarthquakeDeathToll #MyanmarRescue #TsunamiAlert #NaturalDisaster

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Myanmar Thailand Earthquake

Myanmar Thailand Earthquake: म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही

म्यांमार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके (Myanmar Thailand Earthquake) आए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.7 बताई जा रही है। भूकंप के तेज झटके की वजह से बैंकॉक और म्यांमार के शहरों में बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की बिखर गई। रिपोर्ट के मुताबिक जो बिल्डिंग निर्माणाधीन थी, वो भूकंप के तीव्र झटके को सह नहीं पाई। भूकंप के बाद बैंकॉक में तकरीबन 43 लोग लापता हो गए हैं। भूकंप के बाद हुई तबाही का यह आलम यह कि वहां इमरजेंसी लगा दी है। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप का एपिसेंटर म्यांमार के साउदर्न कोस्ट के सागाइंग के पास था। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी के जेएफझेड भूविज्ञान केंद्र ने कहा कि “भूकंप 10 किलोमीटर (6.2 मील) की गहराई पर था। इसी वजह से भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया है।”  भूकंप से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।  भूकंप का केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास था (Myanmar Thailand Earthquake)  मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भूकंप का केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास (Myanmar Thailand Earthquake) था। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इरावजी नदी पर बना एक विशाल पुल ढह गया है। इसके आलावा  म्यांमार की राजधानी नेपिडो में सड़कों पर दरार आ गई है। जबकि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भूंकप के झटकों के बाद गिरती इमारतों से लोग दूर भागते नजर आए। सरकार ने आपात बैठक कर रही है। म्यांमार में खतरनाक भूकंप के झटके महसूस हुए। लोगों में भूकंप के बाद दशहत महसूस की गई। भूकंप के झटके काफी तेज थे। झटकों से लोग दहशत में आ गए और अपने घरों-दफ्तरों से बाहर निकल आए। ये झटके इतने जबरदस्त थे कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इन्हें महसूस किया गया।  View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jai.rashtranews) भूकंप के बाद मोदी की प्रतिक्रिया दोनों देशों की हर संभव मदद करने के लिए भारत तैयार है (Myanmar Thailand Earthquake)  दोनों देशों में आए भीषण भूकंप पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप के तेज झटकों से वह चिंतित हैं। वह लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।” पीएम ने कहा कि “दोनों देशों की हर संभव मदद करने के लिए भारत तैयार है।” जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने भारत में संबंधित अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने विदेश मंत्रालय को म्यांमार और थाईलैंड (Myanmar Thailand Earthquake) की सरकारों के साथ संपर्क में रहने के लिए कहा है।” खैर, म्यांमार में आये भूकंप का असर कोलकाता और आसपास के इलाकों में भी देखा गया। इन इलाकों में हल्के झटके महसूस किए। मणिपुर में, भूकंप के झटकों के कारण इंफाल के थंगल बाजार में लोगों में दहशत फैल गई। गौर करने वाली बात यह कि यहां कई पुरानी बहुमंजिला इमारतें हैं। इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन क्यों आते हैं भूकंप और कैसे नापी जाती है तीव्रता? (Myanmar Thailand Earthquake)  जानकारी के लिए बता दे कि धरती के भीतर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स निरंतर घूमती रहती हैं। ये प्लेटें जब आपस में टकराती हैं, इनमे रगड़ होती है या फिर एक दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन में कंपन होती है। आसान भाषा में इसे ही भूकंप कहते हैं। भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं। जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं। रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 के बीच होती है। 1 यानी नॉर्मल तीव्रता और 9 यानी सबसे भयावह। अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Myanmar Thailand Earthquake #MyanmarThailandEarthquake #EarthquakeAlert #ThailandQuake #MyanmarQuake #SeismicActivity #EarthquakeNews #DisasterUpdate #Tremors #BuildingCollapse #NaturalDisaster

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Militants Execute Bus Passengers in Balochistan, Pakistan​

Balochistan bus attack: खूनी हमलों से दहला बलूचिस्तान, यात्रियों को बसों से उतारकर गोलियों से भूना

कहने के लिए तो बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन बड़ा होने के साथ ही यह सबसे अस्थिर प्रांत भी है। अस्थिरता के आलम का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में यहां हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हाल ही में बस से उतारकर पंजाबियों को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने बस से यात्रियों को उतारकर विशेष रूप से पंजाबी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया है। बता दें कि बलूचिस्तान में संदिग्ध विद्रोहियों द्वारा किए गए दो अलग-अलग हमलों में आठ लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल (Balochistan bus attack) हो गए, जबकि तीन लोगों को अगवा कर लिया गया। बुधवार को बस यात्रियों पर हमला ऐसे समय में हुआ जब प्रांत में पहले से ही माहौल तनावपूर्ण था। बता दें कि मार्च महीने की शुरुआत में, अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस का अपहरण कर लिया था। जिसमें कुल 440 यात्री सवार थे।  इस घटना में 18 सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 26 बंधकों की जान चली गई थी। जानकारी के मुताबिक गुरुवार को क्वेटा के बारेच मार्केट क्षेत्र में एक पुलिस वाहन के पास बम विस्फोट हुआ, जिसमें दो लोगों की जान चली गई और 17 घायल हो गए।  कलमत क्षेत्र के पास एक यात्री बस को रोक लिया और गोलीबारी (Balochistan bus attack) कर दी इस पूरे मामले पर बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद के मुताबिक “विस्फोटक सामग्री एक मोटरसाइकिल में छिपाई गई थी, जो पुलिस वाहन के पास धमाके से फट गई।” खैर, इस बीच घायलों को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले, बुधवार रात ग्वादर जिले में उग्रवादियों ने एक यात्री बस को रोका और पंजाब प्रांत के छह यात्रियों को नीचे उतारकर गोली मार दी। साथ ही, तीन अन्य यात्रियों को अपहरण कर अपने साथ ले गए। इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हफीज बलूच ने बताया कि “यह हमला ग्वादर जिले में बुधवार देर रात हुआ, जब कुछ हथियारबंद हमलावरों ने ओरमारा राजमार्ग पर कलमत क्षेत्र के पास एक यात्री बस को रोक लिया और गोलीबारी (Balochistan bus attack) कर दी। इस हमले में पांच यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य यात्री ने गुरुवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया।” पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि “हमलावरों ने यात्रियों के पहचान-पत्र जांचने के बाद छह लोगों की हत्या कर दी और तीन अन्य को अपने साथ ले गए। सभी पीड़ित पंजाब प्रांत के रहने वाले थे। हलाँकि अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बता दें कि उग्रवादियों ने ग्वादर बंदरगाह से खाद ले जा रहे तीन ट्रकों को भी सड़क पर बाधा डालकर रोक लिया और फिर उनमें आग लगा दी।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यात्री बस पर हुए हमले (Balochistan bus attack) की निंदा  प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यात्री बस पर हुए हमले (Balochistan bus attack) की निंदा की। न सिर्फ निंदा की बलि संबंधित अधिकारियों को जांच करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश भी दिया। यही नहीं, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि “आतंकवादी देश की प्रगति और बलूचिस्तान की खुशहाली के विरोधी हैं, क्योंकि वे वहां विकास होता नहीं देख सकते।” इसके अलावा बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “निर्दोष यात्रियों को बस से उतारकर पहचान के आधार पर उनकी हत्या करना एक अमानवीय और कायरतापूर्ण कृत्य है।” इसके अलावा प्रांत के नसीराबाद संभाग के सोहबत क्षेत्र में एक और घटना घटी, जहां हथियारबंद हमलावरों ने एक घर पर हमला कर दिया। इस हमले में एक महिला और तीन बच्चों समेत एक ही परिवार के सात सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, यह अपराध दो समूहों के बीच चल रहे भूमि विवाद को लेकर हुआ। पुलिस इसे आपसी रंजिश से जुड़ा मामला बता रही है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Balochistan bus attack #BalochistanAttack #BusAttack #PakistanViolence #TerrorismInPakistan #BalochistanUnrest #PassengerSafety #SectarianViolence #HumanRights #SecurityConcerns #PeaceInBalochistan

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