प्रमुख खबरें
Bangladesh plan Bengal

Bangladesh plan Bengal: साजिशकर्ताओं ने बंगाल को बांग्लादेश बनाने की योजना बनाई थी, बांटे गए थे 500-500 रुपए

वक़्फ़ कानून लागू होने के बाद से पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाके मुर्शिदाबाद में 10 अप्रैल से लगातार विरोध जारी है। विरोध के दौरान हुई हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। यही नहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तकरीबन 500 से अधिक लोगों ने हिंसा के डर से पलायन कर लिया है। वक़्फ़ संसोधन बिल पास होने के बाद से ही हिंसा और उपद्रव का अंदाजा था। ख़ुफ़िया विभाग ने पश्चिम बंगाल में अराजक तत्वों द्वारा हिंसा फ़ैलाने का इनपुट पहले दिया गया था। लेकिन राज्य सरकार की नाकामी के चलते हिंसा भड़क उठी। स्थित नियंत्रण के बाहर होती देख जिले में केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात किया गया है। इस बीच मुर्शिदाबाद दंगा मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस हिंसा की साजिश तीन महीने पहले ही रची गई थी। इसके अलावा तुर्कीए से फंडिंग भी की गई थी। हमलावरों को लूटपाट के लिए बाकायदा 500-500रुपये दिए गए थे। दरअसल, साजिशकर्ताओं का लक्ष्य बंगाल को बांग्लादेश (Bangladesh plan Bengal) जैसा बनाना था।  पहले रामनवमी की तारीख तय थी, लेकिन कड़ी सुरक्षा के चलते योजना को (Bangladesh plan Bengal) पड़ा टालना  भारतीय जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों की माने तो, इस हिंसा की प्लानिंग लंबे समय से की जा रही थी। पिछले 3 महीनों से इलाके के लोग इस घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। जांच के दौरान एजेंसियों को पता चला कि आतंकवाद फैलाने का यह एक नया तरीका है। इस दौरान यह भी पता चला कि दो महीने पहले एटीबी के दो जाने-माने सदस्य मुर्शिदाबाद आए और कहा कि “एक बड़ी दावत होगी।” दरअसल, वो मौके की ताक में थे। पहले रामनवमी की तारीख तय थी। लेकिन कड़ी सुरक्षा के चलते योजना को (Bangladesh plan Bengal) टालना पड़ा।  इसे भी पढ़ें: – जम्मू कश्मीर के पुंछ में मुठभेड़, 2 से 3 आतंकी जंगल में छुपे, गोलीबारी में सेना का एक जवान घायल बांग्लादेश की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी अराजकता फ़ैलाने की (Bangladesh plan Bengal) थी योजना  इस बीच वक़्फ़ संसोधन बिल पास हो गया और इस बिल ने अराजक तत्वों को अराजकता फ़ैलाने का मौका दे दिया। इसमें हिंदुओं की हत्या करना, उनके घरों को लूटना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और ट्रेनों को बाधित करना उनका पहला मकसद था। उन्हें अधिक से अधिक चीजों का नुकसान करने की हिदायत दी गई थी। हमलावरों से कहा गया था कि जितनी ज्यादा चीजों को खराब करेंगे, उन्हें उतना ही पैसा दिया जाएगा। जांच एजेंसियों की मानें तो इस योजना में शामिल हर हमलावर और पत्थरबाजों को लूटपाट के लिए 500 रुपये दिए गए थे। यही नहीं, पिछले 3 महीनों से इनकी लगातार ट्रेनिंग भी चल रही थी। बांग्लादेश की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी अराजकता फ़ैलाने की योजना (Bangladesh plan Bengal) थी। हालाँकि मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा कि “मैं सभी से कहूंगी कि सभी को अनुमति लेकर शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है, लेकिन कानून अपने हाथ में न लें। चाहे कोई भी हो। कानून तोड़ने वालों की कोई जरूरत नहीं है। जो शांत दिमाग रखता है, वही जीतता है।”   Latest News in Hindi Today Hindi news  Bangladesh plan Bengal #BangladeshPlanBengal #BengalConspiracy #WestBengalNews #PoliticalPlot #500RupeeNews #BengalNews #BreakingNews #IndiaAlert #BangladeshLink #ConspiracyExposed

आगे और पढ़ें
Trump Xi Jinping warning

Trump Xi Jinping warning: ट्रंप के टैरिफ की मार से चीन हुआ बेहाल, डोनाल्ड ट्रंप ने जिनपिंग को दी यह धमकी

लंबे अरसे से अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक युद्ध चला आ रहा है। ट्रंप प्रशासन में इसे अधिक तेजी (Trump Xi Jinping warning) मिली। गौरतलब हो कि अमेरिका ने चीन से आयातित वस्तुओं पर 145% तक की टैरिफ लगा दिया है। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 125% तक का जवाबी शुल्क लगाया है। हालांकि, इस बीच शुक्रवार को अमेरिका ने स्मार्टफोन, लैपटॉप, सेमीकंडक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर टैरिफ में छूट की घोषणा की थी। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति से पूरी दुनिया को हिला रखा है। अब वह सेमिकंडक्टर पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि “अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए ‘किसी को बख्शा नहीं जायेगा।” इस बीच उन्होंने यह भी साफ़ किया कि शुक्रवार को जिन उत्पादों पर टैरिफ छूट दी गई है, वे अब भी 20% फेंटानिल टैरिफ के दायरे में हैं।  हम किसी भी देश, खासकर चीन जैसे दुश्मन व्यापारिक राष्ट्रों के आगे बंधक (Trump Xi Jinping warning) नहीं बन सकते राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि “अब समय आ गया है कि हम अपने उत्पादों का निर्माण अमेरिका में ही करें। हम किसी भी देश, खासकर चीन जैसे दुश्मन व्यापारिक राष्ट्रों के आगे बंधक नहीं बन सकते। ये देश दशकों से हमारा व्यापारिक शोषण करते आ रहे हैं, लेकिन अब वो दिन (Trump Xi Jinping warning) लद चुके हैं।” हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि “अमेरिका जल्द ही राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ जांच के तहत सेमीकंडक्टर और संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन की समीक्षा करेगा।” अहम बात ये कि यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन पर चीन को रियायत देने के आरोप लग रहे हैं। दरअसल, शुक्रवार को स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ से छूट तो दी गई थी, लेकिन अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने साफ किया है कि “यह सिर्फ एक अस्थायी राहत है, जब तक कि ट्रंप प्रशासन सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए नया टैरिफ ढांचा तैयार नहीं कर लेता।”  इसे भी पढ़ें:– 14,000 करोड़ रुपये डकारने वाला मेहुल चोकसी बेल्जियम में हुआ गिरफ्तार स्थायी टैरिफ नीति पर काम हो (Trump Xi Jinping warning) रहा है कहने की जरूरत नहीं कि इस कदम से ऐसा लगने लगा था कि अमेरिका दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप और वाणिज्य सचिव ने इसे सिर्फ एक अस्थायी कदम बताया। महत्वपूर्ण बात यह कि इस नई छूट से एपल, एनविडिया और डेल जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों को राहत मिल सकती है। ये कंपनियां अपने कई उत्पादों का निर्माण चीन में कराती हैं।  विशेषकर आईफोन और अन्य प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे में ट्रंप ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि “स्थायी टैरिफ नीति पर काम हो (Trump Xi Jinping warning) रहा है।” वैसे आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका चीन समेत अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंधों में कितनी सख्ती अपनाता है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Xi Jinping warning #TrumpWarning #XiJinping #USChinaTensions #TradeWar #TrumpTariffs #ChinaEconomy #Geopolitics #USChinaRelations #GlobalTrade #TrumpNews

आगे और पढ़ें
Nirav Modi Mehul Choksi

Mehul Choksi Arrested in Belgium: 14,000 करोड़ रुपये डकारने वाला मेहुल चोकसी बेल्जियम में हुआ गिरफ्तार

रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में भगोड़े मेहुल चोकसी को बेल्जियम में पुलिस ने (Mehul Choksi Arrested in Belgium) गिरफ्तार कर लिया गया है।जानकारी के मुताबिक 65 वर्षीय चोकसी को शनिवार (12 अप्रैल) को केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया है। फ़िलहाल अभी भी वो जेल में है। भारत अब बेल्जियम के अधिकारियों से उसके प्रत्यर्पण के लिए कह रहा है। गौर करने वाली बात यह कि चोकसी के खिलाफ कोई रेड नोटिस नहीं है। बता दें कि हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी 14,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपी हैं। दोनों फरार चल रहे हैं। खैर, मार्च 2025 में बेल्जियम सरकार ने भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी की अपनी धरती पर मौजूदगी की पुष्टि की थी और कहा थी कि “वह इस मामले को बहुत महत्व और ध्यान दे रही है।” बेल्जियम पुलिस ने अस्पताल से किया गिरफ्तार (Mehul Choksi Arrested in Belgium)  प्राप्त जानकारी के मुताबिक चोकसी को बेल्जियम पुलिस ने एक अस्पताल से गिरफ्तार कर (Mehul Choksi Arrested in Belgium) अपनी कस्टडी में ले लिया है। वह इलाज के लिए बेल्जियम पहुंचा था। भारतीय एजेंसियों को जैसे ही उसकी मौजूदगी की खबर मिली वो एक्टिव हो गई। सीबीआई और ईडी ने 3 महीने पहले ही उसके प्रत्यर्पण के लिए एप्लिकेशन मूव की थी। मेहुल चोकसी इतना शातिर है कि बेल्जियम में शिंकजा कसता देख वह स्विट्ज़रलैंड भागने की फिराक में था। इससे पहले की वो भाग पात, भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर बेल्जियम प्रशासन ने उसे धर दबोचा। भारत से भागने के बाद चोकसी सीधा कैरेबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा पहुंच गया था। ख़बरों की माने तो उसने वहां की नागरिकता भी ले ली थी। इसके बाद वह वहां से डोमिनिका रिपब्लिक भी गया लेकिन वहां उसे अवैध रूप से घुसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन देशों से भारत कोई प्रत्यर्पण समझौता नहीं होने के कारण चोकसी भारत के चुंगल से बच निकला था। इस बार चौकसी ने गलती कर दी। जिस देश में उसमें पनाह ली उसका भारत से प्रत्यर्पण समझौता है। यह संधि 1901 से यानी अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। इसके तहत भारत चौकसी के प्रत्यपर्ण की मांग कर सकता है।  इसे भी पढ़ें:– इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी बेल्जियम से भारत लाना है काफी (Mehul Choksi Arrested in Belgium) आसान  गौर करने वाली बात यह कि अभी महीना भर भी नहीं हुआ कि भगोड़े व्यवसायी मेहुल चोकसी और प्रीति चोकसी ने बेल्जियम का एफ रेजीडेंसी कार्ड हासिल किया था। प्रीति चोकसी बेल्जियम की निवासी हैं। दरअसल, चोकसी का पूरा परिवार बेल्जियम का है। साल 2024 में यह जोड़ा एंटीगुआ से बेल्जियम चला गया था। मेहुल के भतीजे नीरव मोदी को मई 2019 में लंदन में मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। नीरव के पास प्रत्यर्पण के लिए कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं, लेकिन वह मानवीय आधार पर ब्रिटेन में रहने में कामयाब रहा है। बता दें कि हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोपी है। सीबीआई ने मेहुल चोकसी और अन्य के खिलाफ 15 फरवरी, 2018 को पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कर रखा है। देश से भागने के बाद मेहुल वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। मजे की बात यह कि खुद ही उस देश में पहुंच गया, जहां से उसे भारत लाना काफी (Mehul Choksi Arrested in Belgium) आसान है। बेल्जियम की एक अस्पताल से गिरफ्तारी के बाद अब चोकसी भारतीय एजेंसियों की पकड़ में आ सकता है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Mehul Choksi Arrested in Belgium #MehulChoksi #PNBScam #ChoksiArrested #BelgiumNews #FraudAlert #NiravModi #FugitiveArrest #IndiaNews #ChoksiScam #BreakingNews

आगे और पढ़ें
Mumbai attacks accused

Tahawwur Rana extradition: अमेरिका से लाया गया मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा, पाकिस्तान ने झाड़ा पल्ला

26/11 मुंबई आतंकी हमले के एक बड़े आरोपी तहव्वुर राणा को  कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली लाया (Tahawwur Rana extradition) जा चुका है। इस खूंखार आतंकी को अमेरिका से एनआईए की 7 सदस्यीय टीम दिल्ली लेकर पहुंची है। दिल्ली एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह यहां पहुंचा। इस बीच सबसे पहले तहव्वुर राणा का मेडिकल कराया जाएगा और फिर एनआईए उसे कोर्ट में पेश करेगी। खबर है कि राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जा सकता है। बता दें कि 64 वर्षीय तहव्वुर राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। राणा को रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक सभी तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। राणा साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी भी है। राणा को लेकर एक विशेष चार्टर्ड विमान बुधवार को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था। 2008 के आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। मुंबई ले जाने पर तहव्वुर राणा को (Tahawwur Rana extradition) ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा तहव्वुर राणा पर कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, आपराधिक साजिश, हत्या, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम इत्यादि शामिल हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस को अभी तक उसके शहर में स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि उसे मुंबई ले जाने पर ऑर्थर रोड जेल के उसी सेल में रखा जाएगा, जहां आतंकी कसाब को रखा गया था। कहा जाता है कि डेविड कोलमेन हेडली का सहयोगी राणा के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ करीबी संबंध थे। बता दें कि राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा (Tahawwur Rana extradition) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान की थी। इस घोषणा के बाद राणा ने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी सभी कानूनी अपीलों को खारिज कर दिया गया था। इसे भी पढ़ें:– इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने तहव्वुर राणा को बताया कनाडाई नागरिक (Tahawwur Rana extradition) प्राप्त जानकारी के मुताबिक तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पित किया जा रहा है। खबर है कि राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में लिया जाएगा, जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण का कोर्डिनेशन कर रही है। फिर उसे दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जा सकता है। कुल-मिलाकर मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को जांच एजेंसी एनआईए की टीम अमेरिका से लेकर भारत आ चुकी है। इस बीच मजे की बात यह कि तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की खबर सुनते ही पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने उसे कनाडाई नागरिक बताते हुए उसका पाकिस्तान कनेक्शन होने से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Tahawwur Rana extradition #TahawwurRana #MumbaiAttacks #Extradition #26November #USIndiaRelations #Terrorism #PakistanNews #IndiaNews #BreakingNews #GlobalSecurity

आगे और पढ़ें
War threat Iran

US warns Iran: इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी

अमेरिका और ईरान की अदावत किसी से छुपी नहीं है। आये दिन दोनों एक दूसरे को देख लेने की धमकी देते (US warns Iran) रहते हैं। अमेरिका को डर है कि कहीं ईरान परमाणु बम न बना ले। इसके चलते अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देते हुए ये साफ कहा है कि “अगर ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं छोड़ता तो उसके खिलाफ सैन्य हमले का अगुवा इजराइल होगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “अगर इसके लिए सेना की आवश्यकता होगी तो हम वह भी करेंगे। इसमें स्पष्ट रूप से इजराइल बहुत अधिक शामिल होगा। वे इसके नेता होंगे। लेकिन कोई भी हमारा नेतृत्व नहीं करता है और हम वही करते हैं जो हम करना चाहते हैं।” तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा, अमेरिकी निवेश पर आपत्ति नहीं।” ट्रंप ने यह टिप्पणी ओमान में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ता से पहले बुधवार को की। इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि वार्ता प्रत्यक्ष होगी, जबकि ईरान ने इस अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत को अप्रत्यक्ष बताया है।  ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (US warns Iran)  दरअसल, अमेरिका इस बात से चिंतित है (US warns Iran) कि तेहरान पहले से कहीं अधिक एक कारगर हथियार के करीब है। कारण यही जो ट्रंप ने बुधवार को कहा कि “वार्ता के समाधान पर पहुंचने के लिए उनके पास कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।” अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता के पहले बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा।” उन्होंने यह भी कहा कि “दोनों देशों के बीच कोई समझौता होने पर ईरान में अमेरिकी निवेश पर भी कोई ऐतराज नहीं है।” दरअसल, राष्ट्रपति पेजेशकियन की टिप्पणियां विश्व शक्तियों के साथ 2015 के परमाणु समझौते के बाद ईरान के रुख में बदलाव को दर्शाती हैं। बता दें कि उस समझौते में तेहरान ने अमेरिकी विमान खरीदने की मांग की थी, लेकिन प्रभावी रूप से अमेरिकी कंपनियों को देश में आने से रोक दिया था। इसे भी पढ़ें:– डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से बजार में आई तेजी, इन तीन लोगों ने की बंपर कमाई 100 बार सत्यापन कर लिया है, चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें (US warns Iran) इस बीच तेहरान में दिए गए भाषण में पेजेशकियन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा कि “उन्हें ईरान में अमेरिकी निवेशकों के निवेश से कोई आपत्ति नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि “अमेरिकी निवेशक ईरान आएं और निवेश करें।” बेशक इस तरह के व्यावसायिक प्रस्ताव से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समझौते में दिलचस्पी बढ़ सकती है। बता दें कि राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में विश्व शक्तियों के साथ ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था और अब देश के साथ एक नया समझौता करना चाहते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल अपने चुनाव के दौरान पश्चिमी देशों तक पहुंच बनाने के लिए प्रचार करने वाले पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “शनिवार को ओमान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरघची और पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के राजदूत स्टीव विटकॉफ के बीच होने वाली वार्ता अप्रत्यक्ष रूप से होगी। ट्रंप ने कहा है कि वार्ता प्रत्यक्ष रूप से होगी और ईरान ने (US warns Iran) इससे इनकार भी नहीं किया है। हालांकि पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “हम परमाणु बम नहीं बना रहे। आपने 100 बार इसका सत्यापन कर लिया है। चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें।”  Latest News in Hindi Today Hindi news US warns Iran #USIranTensions #MiddleEastConflict #IranWarning #MilitaryStrike #Geopolitics #USDefense #GlobalSecurity #IranNews #WarThreat #PentagonAlert

आगे और पढ़ें
Trump’s Announcement Sparks Market Rally

Donald Trump announcement: डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से बजार में आई तेजी, इन तीन लोगों ने की बंपर कमाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी राहत (Donald Trump announcement) देते हुए टैर‍िफ पर अगले 90 दिनों तक रोक लगा दी है। यह ऐलान होते ही कई द‍िन से ग‍िरावट से जूझ रहे शेयर बाजार में अचानक से बड़ी उछाल देखी गई। इस राहत के सबसे अधिक असर अमेरिकी शेयर बाजार पर पड़ा। शेयर बाजार में आई तेजी का सबसे अधिक ललाभ दुन‍िया के चुन‍िंदा अरबपत‍ियों को हुआ। आपको बता दें कि ज‍िन कारोबार‍ियों को सबसे ज्‍यादा लाभ हुआ है उनमें एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और जेफ बेजोस का नाम शामिल है। गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप के ऐलान के बाद शेयर बाजार में आई तेजी के दम पर इन तीनों ने चंद घंटों में तकरीबन 80 अरब डॉलर कमा ल‍िये। इस ऐलान का सबसे ज्‍यादा असर टेस्ला, अमेजन और मेटा समेत कई दिग्गज टेक कंपन‍ियों के शेयरों पर देखाा गया। ब्‍लूमबर्ग ब‍िलेन‍ियर इंडेक्‍स की माने तो एलन मस्‍क को सबसे अधिक 35.9 ब‍िल‍ियन डॉलर का फायदा हुआ। इस लाभ के साथ उनकी संपत्‍त‍ि बढ़कर 326 अरब डॉलर हो गई। दुन‍ियाभर के अरबपत‍ियों में मुकेश अंबानी 17वें पायदान पर हैं और उनकी संपत्‍त‍ि इस समय तकरीबन 84 ब‍िल‍ियन डॉलर है।  ट्रंप के ऐलान के बाद (Donald Trump announcement) मस्क ने एक ही द‍िन में 35.9 अरब डॉलर (3,08,883.6 करोड़ रुपये) कमाए  ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक (Donald Trump announcement) मस्क ने एक ही द‍िन में 35.9 अरब डॉलर (3,08,883.6 करोड़ रुपये) कमा ल‍िये। इसके अलावा मार्क जुकरबर्ग को 25.9 अरब डॉलर का फायदा हुआ तो वहीं जेफ बेजोस को 18.5 अरब डॉलर का मुनाफा हुआ। यही नहीं, लैरी एल‍िसन को भी 15 अरब डॉलर का फायदा हुआ। बता दें कि 107 अरब डॉलर की ग‍िरावट के बाद भी एलन मस्क टॉप पर बने हुए हैं। उनकी कुल नेटवर्थ 326 ब‍िलियन डॉलर पर पहुंच गई है। इस ल‍िस्‍ट में जेफ बेजोस 210 ब‍िल‍ियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर है। उन्‍हें शुरुआती तीन महीने में 28.7 ब‍िल‍ियन डॉलर का नुकसान हुआ है।  इसे भी पढ़ें:– क्या सच में जानबूझकर मार्केट गिरा रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप? ट्रंप द्वारा दी गई राहत (Donald Trump announcement) का सबसे ज्‍यादा असर टेक शेयरों पर देखने को मिला यही नहीं, इस ल‍िस्‍ट में तीसरे नंबर पर मार्क जुकरबर्क हैं। उनकी कुल 207 ब‍िल‍ियन डॉलर की संपत्‍त‍ि है। इस साल उन्‍हें 723 म‍िल‍ियन डॉलर का नुकसान हुआ। बुधवार को टेस्ला के शेयर में करीब 23 प्रत‍िशत का बंपर उछाल देखा गया। ट्रंप द्वारा दी गई राहत (Donald Trump announcement) का सबसे ज्‍यादा असर टेक शेयरों पर देखने को मिला। बता दें कि नैस्डैक में 12.2% की बढ़त दर्ज की गई। इस बढ़त का असर मेटा और अमेजन के शेयर पर भी दिखा। दोनों के शेयरों में क्रमश: 15 प्रत‍िशत और 12 प्रत‍िशत की बढ़त देखी गई।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump announcement #DonaldTrump #TrumpAnnouncement #StockMarket #MarketRally #EconomicNews #WallStreet #InvestorsGain #TrumpEffect #USPolitics #FinancialNews

आगे और पढ़ें
Donald Trump Market Crash

Donald Trump market crash: क्या सच में जानबूझकर मार्केट गिरा रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप?

रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने के बाद से दुनियाभर के शेयर बाजार में हंगामा मचा हुआ है। अमेरिका से लेकर जापान समेत भारत भी इस आग की जद्द में आ गया है। क्या चीन क्या भारत सब टैरिफ की आग में बुरी तरह झुलस रहे हैं। एक तरफ जहां दुनियाभर के विशेषज्ञ इसे दुनिया के लिए खतरनाक बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिका अमीर बन जायेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप अमेरिका को बनाने के लिए जानबूझकर बाजार गिरा (Donald Trump market crash) रहे है? इसके पीछे उनकी कोई गहरी सोची समझी साजिश है? उनकी इस हरकत एक सोशल मीडिया पोस्ट ने हवा दे दी है। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो साझा किया। साझा किये इस वीडियो में यह दावा किया गया कि “वे जानबूझकर अमेरिकी शेयर बाजार को गिरा रहे हैं। इस रणनीति को वीडियो में वाइल्ड चेस मूव बताया गया और कहा गया कि शेयर बाजार से पैसा निकलकर ट्रेजरी बॉन्ड्स में जाएगा, जिससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा। नतीजतन डॉलर कमजोर होगा। मॉर्गेज दरें घटेंगी और सरकारी कर्ज सस्ता हो जाएगा।  ट्रंप बाजार पर गिरने का (Donald Trump market crash) बना रहे हैं दबाव  ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि उनके इस पोस्ट से भी साफ़ हो रहा है कि “कैसे वो बाजार पर गिरने का दबाव (Donald Trump market crash) बना रहे हैं।” और तो और ट्रंप की यह रणनीति अमेरिका के बढ़ते कर्ज बोझ के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि साल 2025 में अमेरिका को लगभग $7.2 ट्रिलियन का कर्ज रिफाइनेंस करना है। अगर ब्याज दरें कम हों, तो सरकार की भुगतान क्षमता पर बड़ा फर्क पड़ सकता है। ऐसे में यदि ब्याज दरें 4.3% से घटकर 3.3% हो जाती हैं, तो अमेरिका को सालाना तकरीबन $72 बिलियन की बचत हो सकती है।  इसे भी पढ़ें:– ड्रैगन ने दिखाई आंख तो अमेरिका ने ठोक दिया 104% टैरिफ, चीन पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा अटैक ताकि निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे बॉन्ड्स इत्यादि में (Donald Trump market crash) लगाएं पैसा  इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप की रणनीति साफ है कि बाजार में भय का माहौल बनाओ, ताकि डर के मारे निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे बॉन्ड्स इत्यादि में पैसा (Donald Trump market crash) लगाएं। सुरक्षित विकल्प में निवेश बढ़ने से यील्ड घटेगी और सरकार सस्ते ब्याज दर पर कर्ज जुटा सकेगी। ताकि इस बचत को अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं, मसलन रक्षा या स्पेस इत्यादि में लगाया जा सके। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि अमेरिका को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अनिश्चितता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि यदि गलती से भी शेयर बाजार में गिरावट लंबी चली या उपभोक्ता विश्वास डगमगाया मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि व्यापारिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो ट्रंप का यह दांव अमेरिका को दीर्घकालिक लाभ पहुंचा सकता है। यह तो ठीक, लेकिन इसकी कीमत वैश्विक बाजारों की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास में गिरावट के रूप में चुकानी पड़ सकती है। खैर, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि ट्रंप कहाँ तक सही साबित होते हैं। फ़िलहाल रेसिप्रोकल टैरिफ से राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।   Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump market crash #DonaldTrump #MarketCrash #StockMarketNews #USEconomy #TrumpStrategy #WallStreet #FinancialNews #TrumpNews #MarketUpdate #EconomicCrash

आगे और पढ़ें
Trump's 50% Tariff Threat Triggers China’s Warning

Trump tariff threat: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% और टैरिफ लगाने की धमकी पर भड़का चीन, दी महाशक्ति को सीधे धमकी

दो अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन समेत दुनियाभर के 180 देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसी कड़ी में चीन पर भी 34 फीसदी टैरिफ लगाया था। इससे पहले भी ट्रंप 20 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। इस तरह अमेरिका अब तक चीनी सामानों पर कुल-मिलाकर 54 फीसदी टैरिफ थोप चुका (Trump tariff threat) है। कारण यही जो इस टैरिफ को लेकर चीन का अमेरिका पर बेहद रुख सख्त है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि “चीन अमेरिका के दबाव में किसी भी हाल में नहीं झुकेगा।” चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि “अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर रहा है।” गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप के टैरिफ एलान के 48 घंटे के भीतर चीन ने अमेरिका को करारा जवाब दिया। उसने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। कहने की जरूरत नहीं ट्रंप, चीन के इस कदम से खफा हैं। सोमवार को ट्रंप ने चीन को धमकी भरे लहजे में कहा कि “यदि बीजिंग मंगलवार तक अपने जवाबी शुल्क नहीं हटाता है, तो इसी सप्ताह चीनी आयात पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे।” इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि “चीन के साथ होने वाली सभी बैठकों को भी रद कर दिया जाएगा।” अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं चीन  इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि चाहे कुछ भी हो, चीन अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं, बल्कि इसके खिलाफ आखिरी तक लड़ेगा। इस पूरे मामले पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि “वे अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ अंत तक लड़ाई लड़ेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “चीन पर और टैरिफ लगाने की धमकी एक गलती के ऊपर दूसरी गलती होगी। इससे अमेरिका का ब्लैकमेलिंग स्वभाग उजागर होगा। चीन इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। अगर अमेरिका हमें अपने तरीके से चलने पर मजबूर करेगा तो चीन आखिरी तक उसका मुकाबला करेगा। और अगर अमेरिका ने टैरिफ की दर बढ़ाई तो चीन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा में जवाबी कदम उठाएगा।” इसके साथ ही चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि “वह अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है। ट्रेड वार में कोई विजेता नहीं होता है।” बता दें कि टैरिफ के ऐलान के बाद से ही वैश्विक बाजार में उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। इसे भी पढ़ें:– क्या टैरिफ से 90 दिन के लिए राहत देंगे ट्रंप? अपने सलाहकार के बयान पर व्हाइट हाउस ने दी सफाई  ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से बौखला उठा है चीन  इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से चीन बौखला उठा। बदले में उसने भी अमेरिकी सामान पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। चीन की इस घोषणा से ट्रंप खफा हैं। इसके बाद खार खाए ट्रंप ने चीन पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी। कहने की जरूरत नहीं, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक मंदी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump tariff threat #TrumpTariffThreat #ChinaVsUS #TradeWar #TrumpNews #50PercentTariff #ChinaReaction #GlobalTrade #USChinaConflict #DonaldTrump #TariffHike

आगे और पढ़ें
Trump trade statement

Global market crash: टैरिफ वॉर के डर से भारत सहित ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, ट्रंप ने कही यह बड़ी बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी लागू होने के बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम (Global market crash) मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर के शेयर बाजारों से करीब 6 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू जलकर स्वाहा हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी। ट्रंप की तरफ से लगाए गए भारी इम्पोर्ट टैक्स के जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर सख्त टैरिफ लगा दिए। इस ट्रेड वॉर के डर से दुनिया भर के निवेशक डर के मारे शेयर बेचने लगे हैं। आज यानी सोमवार, 7 अप्रैल को एशियाई शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। हॉन्ग कॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे बड़े मार्केट्स में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। बात करें ग्लोबल मार्किट की तो गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की आई है गिरावट (Global market crash) ध्यान देने वाली बात यह कि इस गिरावट (Global market crash) के बाद जापान में फ्यूचर ट्रेडिंग को रोकना पड़ा, यानी सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। इस तरह की गिरावट मार्केट में डर और पैनिक का साफ संकेत देती है। दरअसल, ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इन्वेस्टर्स को लग रहा है कि ट्रेड वॉर की वजह से ग्लोबल ग्रोथ पर असर पड़ेगा और कंपनियों के मुनाफे में बड़ी गिरावट हो सकती है। सिर्फ एशियाई मार्केट ही नहीं, बल्कि अमेरिका के शेयर फ्यूचर्स में भी बड़ी गिरावट देखी गई। गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की गिरावट आई है और यह 3,013 डॉलर प्रति औंस तक आ गया है।  ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी (Global market crash)  शेयर बाजार में जारी गिरावट (Global market crash) पर रविवार को ट्रंप ने यह इनकार किया कि “वो जानबूझकर शेयर बाजार में गिरावट ला रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “उन्हें मार्केट रिएक्शन का अंदाजा नहीं था और जब तक दूसरे देशों के साथ व्यापार घाटे का समाधान नहीं होता, तब तक वो कोई डील नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा, कभी-कभी किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी ही पड़ती है। दरअसल, ट्रंप का कहना है कि “ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी। चाहे कुछ भी हो, लेकिन इन्वेस्टर्स को फ़िलहाल नुकसान ही दिख रहा है। बता दें कि एयर फाॅर्स वन में रिपोर्टर्स से बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि “उन्होंने इस मसले पर दुनिया के कई नेताओं से बातचीत की है और कहा कि वो सब डील करने को बेताब हैं।” इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ ट्रंप के फैसले के बाद से भारतीय शेयर बाजार में देखने मिल रही है गिरावट (Global market crash) गोलबल मार्किट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी अब पूरी तरह से इसकी चपेट में (Global market crash) आ गया है। सोमवार, 7 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 3914.75 अंकों की गिरावट के साथ 71,449.94 अंकों पर खुला। एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी आज 1146 अंकों की गिरावट के साथ 21,758.40 अंकों पर खुला। ट्रंप के फैसले के बाद से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। बता दें कि कोविड के बाद भारतीय शेयर बाजार में ये अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Global market crash #GlobalMarketCrash #TariffWar #TrumpTradePolicy #StockMarketNews #IndianMarkets #USChinaTensions #EconomicCrash #SensexToday #MarketPanic #GlobalRecession

आगे और पढ़ें
iPhone price increase

iPhone price increase: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ के चलते बढ़ सकती हैं आईफोन की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 180 से अधिक देशों पर लगाए गए भारी-भरकम रिसिप्रोकल टैरिफ का असर अब दुनिया में देखा जाने लगा है। दुनिया भर के बाजारों में गिरावट जारी है। इस टैरिफ ने ट्रेड वर्ल्ड वॉर की आशंका बढ़ा दी है। अब इसका असर एप्पल के आईफोन पर भी कीमतों पर भी पड़ (iPhone price increase) सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि कंपनी टैरिफ की लागत ग्राहकों पर डालती है तो ग्रहकों की जेब ढीली हो सकती है। ऐसे में इस फैसले के चलते कंपनी के पास दो विकल्प हैं, या तो वह इस अतिरिक्त शुल्क का वहन खुद वहन करे या फिर इसका बोझ ग्राहकों पर डाले। अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालती है, तो आईफोन की कीमतों में 40% तक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में एक हाई-एंडआईफोन की कीमत लगभग 2,300 डॉलर तक पहुंच सकती है। गौर करने वाली बात यह कि एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग मुख्य रूप से चीन में होती है। और डोनाल्ड ट्रंप ने 54% का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया गया है। जाहिर है, आईफोन की कीमतों में भारी उछाल होना लाजमी है।  30 से 40 प्रतिशत तक की (iPhone price increase) हो सकती है बढ़ोतरी  बता दें कि ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ नीति के चलते आईफोन की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी (iPhone price increase) हो सकती है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। आईफोन 16 जो कि $799 लांच हुआ था, इस नीति के चलते अब वो $1,142 तक पहुंच सकता है, तो वहीं, आईफोन16 प्रो मैक्स की कीमत तकरीबन  $2,300 के आसपास जा सकती है। इतना ही नहीं, आईफोन का सबसे सस्ता मॉडल आईफोन 16e की कीमत भी $599 से बढ़कर $856 तक बढ़ सकती है। ध्यान देने वाली बात यह कि आईफोन ही नहीं, एप्पल के अन्य डिवाइसेज़ भी महंगे हो सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं, अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालता है, तो कंपनी की बिक्री में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही कई बाजारों में एप्पल  की सेल गिर रही है। क्योंकि इसके इसके फीचर्स ग्राहकों को अधिक प्रभावित नहीं कर पाए हैं। ऐसे में, यदि आईफोन महंगा होता है, तो ग्राहक सैमसंग, गूगल पिक्सेल और अन्य ब्रांड्स की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का किया है ऐलान (iPhone price increase) सीएफ़आरए रिसर्च के एक्सपर्ट एंजेलो ज़िनो का मानना है कि आपले ग्राहकों पर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत लागत ही डाल पाएगा। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि कंपनी फिलहाल आईफोन 17 की लॉन्चिंग तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करने वाली है। भले ही एप्पल कुछ निर्माण भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट कर रहा है लेकिन वहां भी 26% से 46% तक के टैक्स लागू हैं, जिससे लागत कम नहीं हो रही है। खैर, जानकारी के मुताबिक अगले चार वर्षों में एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इसपर सीईओ टिम कुक ने कहा कि “हम अमेरिकी में निवेश करेंगे और इस निवेश से देश के भविष्य को और मजबूत करेंगे।” ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निवेश आईफोन की आसमान छूती कीमतों (iPhone price increase) को रोक पाएगा भी या नहीं?  Latest News in Hindi Today Hindi news iPhone price increase #iPhonePriceHike #TrumpTariffs #iPhone2025 #USChinaTrade #ReciprocalTariff #AppleNews #iPhoneCost #TradeWarImpact #TechNews #AppleTariff

आगे और पढ़ें
Translate »