प्रमुख खबरें
Ukraine 30-day ceasefire

Ukraine 30-day ceasefire: 30 दिन के युद्ध विराम के लिए यूक्रेन हुआ राजी, डोनाल्ड ट्रंप ने किया रूस जाने का ऐलान

बीते तीन वर्षों से जारी भीषड़ युद्ध के बाद यूक्रेन गोलीबारी बंद (Ukraine 30-day ceasefire) करने और रूस के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। दरअसल, सऊदी अरब के जेद्दा में वार्ता के दौरान अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने कहा कि “यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने आज एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है कि वे शांति के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के दृष्टिकोण को साझा करते हैं।” इस दौरान वाल्ट्ज ने कहा कि “वार्ताकारों ने इस बात पर ठोस विवरण प्राप्त किया कि यह युद्ध कैसे स्थायी रूप से समाप्त होने जा रहा है, जिसमें दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी भी शामिल है।” गौर करने वाली बात यह कि घोषणाएं ऐसे समय पर आई हैं जब यूक्रेन और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने सऊदी अरब में मास्को के कीव के खिलाफ तीन साल के युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित वार्ता शुरू की। रूस द्वारा 300 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराए जाने के कुछ ही घंटों बाद चर्चा शुरू हुई। बता दें कि क्रेमलिन द्वारा अपने पड़ोसी पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण का आदेश दिए जाने के बाद से यह यूक्रेन का सबसे बड़ा हमला था।  यूक्रेन ने की 30 दिन के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) के ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा  बता दें कि सऊदी अरब के जेद्दा में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीनेटर मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज ने किया। उन्होंने यूक्रेन से आए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री यरमक, विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा और रक्षा मंत्री रुस्तम उमारोव कर रहे थे। इस बैठक के दौरान, यूक्रेन ने 30 दिन के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) के ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की। अहम बात यह कि यह निर्णय व्हाइट हाउस में अमेरिकी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों के बीच हुए सार्वजनिक मतभेद के बाद आया है। गौर करने वाली बात यह कि सप्ताह भर पहले ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को रूसी सेना के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता में शामिल होने के लिए दबाव डालने के लिए ये उपाय लागू किए थे। अब उसे इसमें सफलता मिलती दिख रही है। जेलेंस्की की ओर से युद्ध विराम पर सहमत होने की बात कहे जाने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि “अमेरिका क्रेमलिन के समक्ष युद्ध विराम प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा।” इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि “अब हम रूस को बताएंगे कि यूक्रेन 30 दिन के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। अब यह रूस पर निर्भर करेगा कि वे हाँ कहें या न, यदि वे दुर्भाग्य से नहीं कहते हैं, तो हमें पता चल जाएगा कि यहाँ शांति के लिए क्या बाधा है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक यूक्रेन तैयार, अब रूस को भी इसके लिए राजी करने की कोशिश की जाएगी-डोनाल्ड ट्रंप  खैर इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “हाल ही में युद्धविराम पर सहमति बनी है और अब रूस से बातचीत करनी होगी। यूक्रेन ने रूस के साथ 30 दिनों के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) पर सहमति व्यक्त की है।” ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा कि “यूक्रेन युद्ध विराम के लिए तैयार हो गया है और अब रूस को भी इसके लिए राजी करने की कोशिश की जाएगी।”  इस दौरान ट्रंप ने कहा कि “हम अब रूस जाने की योजना बना रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस पर सहमति जताएंगे। शहरों में हिंसा जारी है, धमाके हो रहे हैं, और निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता इस युद्ध को समाप्त करना है। यह एक पूर्ण युद्ध विराम का आह्वान है, और हमें आशा है कि रूस भी इसे स्वीकार करेगा। यदि हम रूस को इसके लिए राजी कर सके, तो यह एक बड़ी सफलता होगी।” हालांकि ट्रंप ने उम्मीद जरूर जताई कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस फैसले को स्वीकार करेंगे। इस बीच महत्वपूर्ण बात यह कि यूक्रेन की ओर से 30 दिन के लिए युद्ध विराम पर सहमत होने के बाद अमेरिका ने सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी साझा करना फिर से शुरू कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ukraine 30-day ceasefire #UkraineCeasefire #30DayTruce #USUkrainePeace #TrumpRussiaVisit #ZelenskyPeaceEfforts #PutinCeasefireResponse #RussiaUkraineConflict #MiddleEastPeaceTalks #GlobalDiplomacy #CeasefireNegotiations

आगे और पढ़ें
Pakistan Train Hijack

Pakistan Train Hijack: बलोच हाईजैकर के सामने पस्त हुई पाकिस्तानी सेना, रात भर चला ऑपरशन, अभी भी कई बंधक गिरफ्त में

पाकिस्तान के क्वेटा से  पेशावर के लिए रवाना हुई जाफर एक्सप्रेस के बोलन पहुंचते ही बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने ट्रेन पर हमला कर दिया। ट्रेन को हाईजैक (Pakistan Train Hijack) करने के लिए उन्होंने रेल्वे ट्रैक को ही उखाड़ दिया। रेलवे ट्रक उखाड़कर पहले ट्रेन को रोका और फिर इसके बाद उसे एक सुरंग में ले गए। जानकारी के मुताबिक ट्रेन में 450 से ज्यादा यात्री सवार थे। इसमें पाकिस्तान सेना के 140 जवानों को बंधक बना लिया गया। बता दें कि ट्रेन में पाकिस्तानी पुलिस, सेना, आतंकवाद निरोधक बल (एटीएफ) और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के कर्मचारी सवार थे और ये सभी छुट्टी पर पंजाब जा रहे थे। बहुत मुमकिन है बलोच लड़ाकों ने इन्हें ही टारगेट बनाकर हमला किया था। बीएलए की फिदायीन यूनिट और मजीद ब्रिगेड ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इस बीच अपने सैनिकों को बचाने के लिए पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक करने की तैयारी की लेकिन उनकी सारी तयारी धरी की धरी रह गई। जैसे ही बलोच आर्मी को एयर स्ट्राइक की जानकारी मिली उन्होंने सीधे धमकी दी कि यदि हवाई हमला हुआ तो सभी 140 सैनिकों को मार दिया जाएगा। गौर करने वाली बात यह कि ये हमला पाकिस्तान सेना पर बलोच अलगाववादियों द्वारा अबतक के सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। बलोच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के 30 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है।  पाकिस्तानी सेना ने बड़ा एक्शन लेते हुए 104 बंधकों को (Pakistan Train Hijack) छुड़ाया  खैर, इस बीच पाकिस्तानी सेना ने भी बड़ा एक्शन लिया है और 104 बंधकों को (Pakistan Train Hijack) छुड़ा लिया है। फ़िलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बीएलए और सेना के बीच गोलीबारी जारी है। इस दौरान हुई गोलीबारी में पाकिस्तान के कई सैनिक और बीएलए के लड़ाके मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षाबलों ने बीएलए की ओर से बंधक बनाए गए 104 लोगों को बचा लिया है। बचाए गए लोगों में 31 महिलाएं, 15 बच्चे और 58 पुरुष,शामिल हैं। साथ ही सुरक्षाकर्मी शेष यात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सेना की अब तक की कार्रवाई में बीएलए के कुल 23 लड़ाकों को मार गिराया गया है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण आतंकवादी छोटे-छोटे समूहों में बंट गए हैं। घायल यात्रियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दरम्यान बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि “तकरीबन 400 यात्री अभी भी ट्रेन में ही हैं, जो सुरंग के अंदर है।” उन्होंने बताया कि “सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है। पेशावर जाने वाली यात्री ट्रेन पर भीषण गोलीबारी की खबरों के बीच बचाव दल को मौके पर भेजा गया है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक बैठक के कुछ दिनों बाद ही ट्रेन हाइजैक (Pakistan Train Hijack) के कारनामे को दिया गया अंजाम  बता दें कि बलोच लड़ाके अलग बलूचिस्तान देश की जंग बरसों से लड़ रहे हैं और इस हमले के लिए पहले से प्लानिंग की जा रही थी। अभी कुछ दिन पहले ही बलोच समूहों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ एक नए हमले का ऐलान किया था। बलोच लड़ाकों ने हाल ही में सिंधी अलगाववादी समूहों के साथ युद्धाभ्यास खत्म किया है। कहने की जरूरत नहीं, अब पाकिस्तान सेना के खिलाफ विद्रोही संगठन एकजुट हो रहे हैं। सिंधी और बलोच संगठनों के एकसाथ आने से पाकिस्तान में सीपेक प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जानकारी के मुताबिक बीते महीने बीआरएस यानी बलोच राजी आजोई संगर की एक बैठक हुई थी।  इस बैठक में बलोच लिबरेशन आर्मी, बलोच रिपब्लिकन गार्ड्स, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, सिंधी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, सिंधु देश रिवोल्यूशनरी आर्मी के कमांडर शामिल हुए थे। इस बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ बड़े ऑपरेशन का प्रस्ताव रखा गया था। कमाल की बात यह कि बैठक के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान में ट्रेन हाइजैक (Pakistan Train Hijack) के कारनामे को अंजाम दिया गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Train Hijack #PakistanTrainHijack #BalochMilitants #PakistanArmyFail #TrainHostageCrisis #BalochistanUnrest #PakCrisis #TerrorAttack #BalochRebels #PakistanNews #HijackRescue

आगे और पढ़ें
Pakistan Train Hijack-Baloch Liberation Army

पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक

पाकिस्तान में एक बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है, जहां बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army) ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया है। इस ट्रेन में 500 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से करीब 182 लोग अब भी BLA के कब्जे में हैं। इस घटना के बाद पूरे पाकिस्तान में दहशत का माहौल है। कैसे हुआ हमला? बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army) के प्रवक्ता जेयंद बलूच के अनुसार यह ऑपरेशन पहले से सुनियोजित था। BLA के लड़ाकों ने मश्कफ, धादर और बोलन इलाके में रेलवे ट्रैक को विस्फोट कर उड़ा दिया, जिससे ट्रेन को रोक दिया गया। इसके तुरंत बाद, BLA के सशस्त्र सदस्यों ने ट्रेन पर कब्जा कर यात्रियों को बंधक बना लिया। प्रवक्ता के मुताबिक इस अभियान को BLA की तीन प्रमुख इकाइयों – मजीद ब्रिगेड, एसटीओएस और फतेह स्क्वाड ने मिलकर अंजाम दिया है। बीएलए का दावा और चेतावनी BLA ने दावा किया है कि इस हमले में अब तक 20 पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल उन यात्रियों को बंधक बनाया है, जो पाकिस्तानी सेना, पुलिस, आईएसआई या एटीएफ के कर्मी थे और छुट्टी पर पंजाब लौट रहे थे। BLA के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि महिलाओं, बच्चों और बलूच समुदाय के यात्रियों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। शहबाज शरीफ सरकार को चेतावनी BLA ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तानी सेना किसी भी तरह का आर्मी ऑपरेशन करती है, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। प्रवक्ता ने धमकी देते हुए कहा कि अगर पाक सेना ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की, तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा। BLA ने अपनी अंतिम चेतावनी में साफ कहा कि यदि पाकिस्तानी सेना के हवाई हमले तुरंत नहीं रोके गए, तो अगले एक घंटे के भीतर सभी बंधकों की हत्या कर दी जाएगी। BLA का कहना है कि इस खून-खराबे के लिए पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना जिम्मेदार होगी। पाकिस्तानी सेना और पुलिस की चुप्पी इस बड़े आतंकी हमले के बाद अब तक पाकिस्तान की सेना या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तानी प्रशासन अभी भी स्थिति को संभालने में संघर्ष कर रहा है। BLA की बढ़ती गतिविधियां: एक गंभीर चिंता बलूच लिबरेशन आर्मी लंबे समय से पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही है। यह संगठन पाकिस्तानी सेना और प्रशासन के खिलाफ कई हिंसक हमलों को अंजाम दे चुका है। BLA का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना बलूच नागरिकों के साथ अन्याय कर रही है और उनके संसाधनों का शोषण कर रही है। BLA द्वारा इस तरह की हाईजैकिंग की घटना ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे भी पढ़ें:- स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार पाकिस्तान सरकार के सामने अब दो विकल्प हैं — इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है क्योंकि एक गलत कदम से सैकड़ों बंधकों की जान खतरे में पड़ सकती है। BLA का यह हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तानी प्रशासन इस संकट का समाधान कैसे निकालता है। क्या शहबाज शरीफ सरकार बातचीत का रास्ता अपनाएगी या फिर सैन्य कार्रवाई के जरिए इस संकट को सुलझाने का प्रयास करेगी? आने वाले कुछ घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Train hijack #PakistanTrain #JaffarExpress #BalochLiberationArmy

आगे और पढ़ें
Trump tariff claim

Tariff Dispute: भारत ने ट्रंप के टैरिफ वाले दावे से किया किनारा, कहा अभी कोई समझौता नहीं, बस बातचीत जारी

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से कनाडा, मैक्सिको और चीन समेत भारत पर टेरिफ लगाने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया था कि भारत टैरिफ कटौती पर सहमत (Tariff Dispute) हो गया है। जब कि भारत का कहना है कि “इस मुद्दे पर अमेरिका संग अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।” हालाँकि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। जानकारी के मुताबिक ट्रंप के दावे के दो दिन बाद भारत सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को ये बात बताई। संसदीय पैनल के समक्ष अपनी बात रखते हुए सरकार ने कहा कि “व्यापार शुल्क को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मुद्दे के हल के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है।” खैर, ऐसे में बड़ा सवाल यह कि ट्रंप आखिर करना क्या चाहते हैं? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि ट्रंप ने दावा किया था कि “भारत टैरिफ कटौती पर राजी हो गया है।” तो वहीं इस मामले पर भारत का कहना है कि “अब तक ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं।” जानकारी के मुताबिक वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को बताया कि “भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को बहुत कम करने को लेकर अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। दोनों ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। सिर्फ तत्काल टैरिफ के मुद्दे पर ही नहीं दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।” संसदीय समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर पूछे कई प्रश्न  जानकारी के मुताबिक समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर कई प्रश्न पूछे। इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि “व्यापार वार्ता के दौरान भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने समिति से कहा कि “भारत मुक्त व्यापार के पक्ष में है। और व्यापार का उदारीकरण चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि “टैरिफ वॉर छिड़ने से अमेरिका समेत किसी को भी फायदा नहीं होगा, इससे मंदी के हालात पैदा हो सकते हैं।” खैर, इस दौरान कुछ संसद सदस्यों ने वाणिज्य सचिव से यह भी पूछा कि “भारत सीमा शुल्क पर अमेरिकी कदमों को लेकर मेक्सिको और कनाडा की तरह अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहा?” इस कड़वे सवाल पर बर्थवाल ने कहा कि “दोनों मामलों की तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि अमेरिका के उनके साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं और सीमा आव्रजन संबंधी मुद्दे हैं।” इस दौरान समिति से वाणिज्य सचिव ने कहा कि “भारत ऐसे उद्योगों की रक्षा करेगा जो उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। भारत द्विपक्षीय रूप से सीमा शुल्क कम कर सकता है लेकिन बहुपक्षीय रूप से ऐसा नहीं कर सकता। इसी वजह से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम किया जा रहा है।” इसे भी पढ़ें:- स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर नहीं करना चाहिए भरोसा (Tariff Dispute) गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि समिति के कई सदस्यों ने ट्रंप के उस दावे पर भी चिंता जाहिर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत टैरिफ घटाने को राजी (Tariff Dispute) हो गया है। बता दें कि कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा, असदुद्दीन ओवैसी और टीएमसी की सागरिका घोष जैसे विपक्षी सांसदों ने इसे लेकर कई सवाल पूछे। जिस पर सुनील बर्थवाल ने कहा कि “किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्यों कि दोनों ही देशों के बीच समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने संसदीय समिति को बताया कि “भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क के मोर्चे पर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tariff Dispute #IndiaUSRelations #TariffDispute #TradeTalks #USIndiaTrade #TrumpIndia #EconomicPolicy #TariffWar #BilateralTrade #TradeNegotiations #GlobalEconomy

आगे और पढ़ें
Spain Pakistani arrests

Pakistani arrests in Spain: स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार

स्पेन के बार्सिलोना में एक संगठन के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन किया गया। खबर के मुताबिक कैटेलोनिया पुलिस, स्पेनिश राष्ट्रीय पुलिस और इतालवी पुलिस के संयुक्त अभियान में बार्सिलोना में 10 और इतालवी शहर पियासेंज़ा में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इन पर अपने विरोधियों की हत्या और सिर कलम करने के लिए उकसाने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक जांच में पता चला कि संदिग्ध किसी ऐसे संगठित आपराधिक संगठन से जुड़े थे, जो मैसेजिंग ग्रुप के जरिए हिंसक आदेश जारी करते थे। दरअसल, बार्सिलोना में बीती रात कई मस्जिदों पर आतंकवाद रोधी दस्ते ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस को शक था कि इन मस्जिदों से आतंकी गतिवधियां संचालित की जा रही हैं। मजे की बात यह कि इस छापेमारी के एक दिन पहले बार्सिलोना में ही 10 पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिर क्या था इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबलों ने कई मस्जिदों में अचानक छापेमारी की।  यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था (Pakistani arrests in Spain) इस छापेमारी पर स्पेनिश पुलिस बलों द्वारा जारी किये गए बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन 3 मार्च की रात को किया गया था और जांच के बाद 2022 में 5 और 2023 में 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस बीच सोमवार को सैंट एड्रिया डे बेजोस, मोंटकाडा आई रेसच, सांता कोलोमा डे ग्रामेनेट और सबडेल में 10  (Pakistani arrests in Spain) गिरफ्तारियां हुईं। जांच में पता चला कि संगठन एक चरमपंथी समूह से जुड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार, यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था। ये मैसेजिंग ऐप के माध्यम से विरोधियों के खिलाफ हिंसक संदेश फैलाने का काम करता था। इस दौरान कुछ व्यक्तियों ने यूरोप में विशिष्ट लोगों को संभावित लक्ष्य के रूप में पहचान करनी शुरू कर दी थी। ध्यान देने वाली बात यह कि इस संगठन के पोस्ट में उन व्यक्तियों की भी प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने ईशनिंदा के आरोप में यूरोप और पाकिस्तान में हमले किए थे। समूह का उद्देश्य न सिर्फ चरमपंथी विचारों का प्रचार करना था बल्कि संभावित लक्ष्यों की पहचान करना भी था ताकि भविष्य में सटीक कार्रवाई की जा सके। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष किया गया पेश  खैर, यह भी पता चला है कि गिरफ्तार महिलाओं में से एक के नेतृत्व वाले मैसेजिंग समूह में सिर्फ महिलाएं ही शामिल थीं। जांच अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का संबंध आतंकवादी संगठन से है। जिसे अपने आर्थिक समर्थन के लिए अपने सदस्यों से ही दान मिला करता था। जानकारी के लिए बता दें कि 6 मार्च को, दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। उन पर आतंकवाद की सहायता, उसे बढ़ावा देने, आर्थिक मदद करने और भर्ती करने के साथ-साथ संभावित लक्ष्यों की पहचान करने हेतु प्रारंभिक कदम उठाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई उपर्युक्त अदालत के न्यायाधीश की देखरेख में हो रही है। खबर के मुताबिक न्यायाधीश ने स्पेन के राष्ट्रीय न्यायालय के लोक अभियोजक कार्यालय के सहयोग से चार लोगों को हिरासत में लेने का आदेश दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistani arrests in Spain #SpainTerrorAction #PakistanArrests #TerrorismCrackdown #SpainPolice #GlobalSecurity #BreakingNews #TerrorSuspects #InternationalCrime #LawEnforcement #SecurityAlert

आगे और पढ़ें
EconomicPartnership

Mark Carney होंगे कनाडा के नये प्रधानमंत्री, क्या सुधरेंगे भारत से संबंध?

ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी को देश के नया प्रधानमंत्री चुनने को कह दिया था। हालांकि अब जाकर कनाडा के नए प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगी है। मार्क कार्नी, जी हाँ मार्क कार्नी (Mark Carney) कनाडा के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कनाडा के पीएम की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा था। वर्तमान पीएम जस्टिन ट्रूडो के उत्तराधिकारी के रूप में मार्क कार्नी के नाम ठप्पा लगा दिया है। रविवार को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने उन्हें अपना नेता चुना। दरअसल, ट्रूडो के खिलाफ अपने ही नेताओं ने मोर्चा खोल लिया था, जिसके बाद ट्रूडो ने इस्तीफे का ऐलान किया था। खैर, नाम के ऐलान के कार्नी जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे। वैसे तो मार्क कार्नी कनाडा की राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन इस बीच इस बीच उन्हें मौके कई बार मिले। साल 2012 में ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने वित्त मंत्री बनने का मौका दिया था, लेकिन उनके प्रस्ताव को उन्होंने नकार दिया था। बता दें कि कार्नी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं औऱ वह दुनिया के दो बड़े देशों में गवर्नर रह चुके हैं। मार्क कार्नी (Mark Carney) को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है बात करें मार्क कार्नी की तो वे (Mark Carney) 59 वर्ष के हैं। 16 मार्च, 1965 को नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़ के फ़ोर्ट स्मिथ में जन्मे कार्नी का पालन-पोषण एडमॉन्टन, अल्बर्टा में हुआ था। मार्क कार्नी एक प्रसिद्ध कनाडाई आर्थिक विशेषज्ञ हैं। कार्नी को केंद्रीय बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 2008 से साल 2013 तक बैंक ऑफ कनाडा और 2013 से 2020 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड का संचालन भी किया है। यही नहीं कार्नी गोल्डमैन सैक्स के पूर्व कार्यकारी भी रहे हैं। साल 2003 में बैंक ऑफ कनाडा के डिप्टी गवर्नर नियुक्त होने से पहले उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो और टोरंटो में 13 साल तक काम किया। उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं है।उन्हें विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने, केंद्रीय बैंकों की भूमिका को पुनः परिभाषित करने में माहरत हासिल है। रही बात उनकी शिक्षा की तो साल 1988 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास मार्क कार्नी (Mark Carney) रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है  ऐसे में बड़ा सवाल यह कि भारत के प्रति मार्क कार्नी (Mark Carney) का क्या रुख होगा। क्योंकि जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों को बदतर करने में कोई कोर असर नहीं छोड़ी थी। हालांकि मार्क कार्नी रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है। दरअसल,कार्नी ही वह शख्स हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि “भारत के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने चाहिए।” यहां जानकारों की माने तो मार्क कार्नी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पसंद नहीं करते। वो बात और है कि उन्होंने कभी खुल कर मुख़ालफ़त नहीं की। कनाडा पर ट्रंप की बदनीयत के बाद कार्नी के सामने न सिर्फ इकोनॉमी को मजबूत करने बल्कि देश के लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती होगी। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कनाडा इस समय कई संकटों से घिरा है। जिसमें अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर सबसे ऊपर है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mark Carney #MarkCarney #CanadaPM #CanadaIndiaRelations #JustinTrudeau #Diplomacy #GlobalPolitics

आगे और पढ़ें
China population crisis

Population crisis China: चीन की सरकार का तुगलकी फरमान, 9 महीने में बच्चा पैदा करो वरना नौकरी से हाथ धो बैठो

बढ़ती आबादी किसी भी देश के लिए चिंता का सबब होती है। भारत में यह एक सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जो घटती आबादी से परेशान हैं। उन्हीं देशों में एक देश है चीन। चंद वर्षों पहले चीन बढ़ती आबादी से परेशान था। कारण यही जो उसने अपने देश में सिंगल चाइल्ड पॉलिसी को बढ़ावा दिया था। कुछ साल पहले तक दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा चीन अब घटती आबादी से (Population crisis China) परेशान है। मौजूदा दौर में भारत दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बीते तीन-चार दशकों में चीन ने बेहिसाब आर्थिक प्रगति की है। यह तो ठीक लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि इस प्रगति का बुरा असर वहां के युवाओं पर पड़ा है। युवा करियर और पैसों  के चक्कर में इस कदर पागल हो चुके हैं कि शादी और परिवार में कोई दिलचस्पी नहीं गई है। आपको जानकार हैरानी होगी कि इस समस्या का शिकार सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि  हाल चीन के पड़ोसी मुल्क जापान और दक्षिण कोरिया भी हैं। दक्षिण कोरिया में आलम यह कि दक्षिण कोरिया में फर्टिलिटी रेट दुनिया में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है।  युवा अपनी निजी आजादी का हवाला देकर पैदा नहीं (Population crisis China) करना चाहता बच्चा  चीन की आर्थिक प्रगति के साथ से वहां लिविंग स्टाइल और कॉस्ट में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। युवाओं के एक वर्ग मानना है कि कॉस्ट बढ़ने की वजह से वह बच्चे पैदा नहीं करना चाहते हैं। इसके अलावा एक वर्ग अपनी निजी आजादी का हवाला देकर बच्चा पैदा नहीं (Population crisis China) करना चाहता। अधिकतर युवा लिव इन में रहना चाहते हैं। वह शादी से कतराने लगे हैं। बता दें कि बीते साल चीन में 61 लाख शादियां हुई जो 2023 की तुलना में 20 फीसदी कम है। यह आंकड़ा 1986 के बाद से सबसे कम है। ध्यान देने वाली बात यह कि पिछले तीन वर्षों से लगातार चीन की आबादी गिर रही है। चीन की सरकार इस चलन को रोकना चाहती है। इसलिए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी महिलाओं के पास जा रहे हैं और उन्हें उनके प्रेग्नेंट होने की सलाह दे रहे हैं। जनसंख्या बढ़ाने के लिए ऐसे प्रचार किए जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी से महिलाएं और ज्यादा खूबसूरत होती हैं। इसके अलावा चीन की सरकार कम उमर में शादी की भी अनुमति देने की सोच रही है। वर्तमान में चीन में शादी के लिए लड़कों की कम से कम उम्र 22 साल और लड़कियों की न्यूनतम उम्र 21 साल है। सरकार लड़का-लड़की की उम्र 18 साल करने के पर भी विचार कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल अगले नौ महीने के दौरान बच्चे पैदा करें वरना नौकरी से (Population crisis China) दिया जाएगा निकाल  खैर, इस बीच घटती फर्टिलिटी रेट से चीन की सरकार बेहद चिंतित है। अगर यही हाल रहा तो आगामी वर्षों में चीन में कामकाजी लोगों की भारी कमी हो जाएगी। इसे देखते हुए वहां की सरकार ने अपनी जनसंख्या नीति में बदलाव किया है। चीन की सरकार ने एक बच्चे की नीति को खत्म कर दिया है। पहले चीन में एक दंपत्ति एक बच्चा का नियम था। अब चीन की कंपनी शंगडोंग शंटियन केमिकल ग्रुप ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि “वह अगले नौ महीने के दौरान बच्चे पैदा करें वरना उनको नौकरी से (Population crisis China) निकाल दिया जाएगा। इसने एक आंतरिक आदेश में कहा है कि “हमारे कर्मचारी मेहनती और भरोसेमंद हैं। वे देश की बेहतरी के लिए बच्चा पैदा करना चाहते हैं। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि कर्मचारी 30 सितंबर तक वे फैमिली प्लानिंग कर लें वरना नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। बता दें कि शंगडोंग शंटियन चीन के इकलौती कंपनी नहीं है जिसने इस तरह का आदेश दिया है। कुछ सप्ताह पहले एक लोकप्रिय सुपर मार्केट चेन ने भी कुछ इसी तरह का आदेश दिया था। उसने अपने आदेश में कहा था कि “युवा जोड़े शादी-सगाई में गिफ्ट की डिमांड न करें।” हालांकि इन कंपनियों के आदेशों की खूब आलोचना भी हुई थी। Latest News in Hindi Today Hindi news Population crisis China #ChinaPopulationCrisis #ChinaBirthPolicy #JobThreatChina #PopulationDecline #ChinaGovtRules #OneChildPolicy #ChinaDemographics #BirthRateCrisis #ChineseEconomy #StrictGovtPolicy

आगे और पढ़ें
Elon Musk Clashes with Minister

Elon Musk Clashes with Minister: कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल

अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में कई कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि उनके फैसलों का अमेरिका में जमकर विरोध भी हो रहा है। ट्रंप प्रशासन का एक ऐसा ही फैसला है सरकारी स्टाफ में कटौती का। उनके इस फैसले की आलोचना न सिर्फ अमेरिकी राजकर्मियों के संगठन बल्कि अन्य लोग भी कर चुके हैं। इस बीच उनके अपने इस फैसले के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख एलन मस्क के बीच नोकझोंक होने की खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को ट्रंप की मौजूदगी में कैबिनेट बैठक के दौरान दोनों के बीच झड़प (Elon Musk Clashes with Minister) हुई। खैर, बाद में ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है। मजे की बात यह कि एक तरफ जहां ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है तो वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एलन मस्क के बीच स्टाफ कटौती के मुद्दे पर बहस हुई थी। गौर करने वाली बात यह कि रॉयटर्स ने भी इस बहस को रिपोर्ट किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की माने तो यह ड्रामा उस बैठक में हुआ, जिसमें ट्रंप ने अपने कैबिनेट प्रमुखों से कहा कि “उनकी एजेंसियों में स्टाफिंग और नीति पर अंतिम फैसला मस्क का नहीं, बल्कि उनका है।” ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का करना पड़ा है सामना  प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह बैठक एजेंसी प्रमुखों से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ, सूजी विल्स सहित व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों तक मस्क ऑपरेशन के कठोर-बलपूर्ण दृष्टिकोण के बारे में की गई शिकायतों के बाद बुलाई गई थी। स्टाफ कटौती के इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का सामना करना पड़ा है। हालांकि शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ट्रंप से जब टाइम्स की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि कोई टकराव नहीं। मैं वहां स्वयं मौजूद था।” उन्होंने आगे कहा कि “एलन मस्क मार्को रुबियो के साथ बहुत अच्छे से पेश आते हैं और वे दोनों शानदार काम कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत बढ़ती बहस (Elon Musk Clashes with Minister) को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को स्वयं करना पड़ा हस्तक्षेप   बैठक के दौरान मजे लेते हुए मस्क ने कहा कि “आपने किसी को भी नहीं निकाला है। आपका विदेश विभाग अभी भी फूला हुआ है।” मस्क के तीखे सवाल को सुनते ही रुबियो भड़क उठे। उन्होंने जवाब दिया कि मस्क को 1,500 विदेश विभाग के अधिकारियों की याद दिला दी जिन्होंने बायआउट किया था। मगर  मस्क प्रभावित नहीं हुए। खैर, रुबियो ने व्यंग्यात्मक रूप से पूछा कि “क्या मस्क चाहते हैं कि वे उन सभी लोगों को फिर से काम पर रखें ताकि वे उन्हें फिर से नौकरी से निकालने का दिखावा कर सकें?” इस बीच दोनों के बीच जैसे ही बहस (Elon Musk Clashes with Minister) बढ़ी वैसे ही राष्ट्रपति ट्रंप, जो पहले हाथ पर हाथ धरे देख रहे थे, आखिरकार उन्हें स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। ट्रंप ने कहा कि “कैबिनेट सचिव कार्यभार संभालेंगे, जबकि मस्क की टीम केवल सलाह देगी।” बेशक यह ट्रंप का पहला महत्वपूर्ण संकेत था कि मस्क के प्रभाव पर सीमाएं लगाने के लिए तैयार थे। कहने की जरूरत नहीं, इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि ट्रंप की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हैरत की बात यह कि एक तरफ पूरी दुनिया को ट्रंप अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री ही आपस लड़ रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk Clashes with Minister #ElonMusk #DonaldTrump #USPolitics #ForeignAffairs #TechVsPolitics #CabinetClash #MuskVsMinister #TrumpMediation #BreakingNews #PoliticalDrama

आगे और पढ़ें

Trump limits Musk’s authority: एलन मस्क पर सख़्त हुए ट्रंप, कहा- आपको सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई हक नहीं

जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से ट्रंप और एलन मस्क दोनों ताबड़तोड़ एक के बाद एक चौंकाने वाले निर्णय ले रहे हैं। चाहे वो कनाडा और मैक्सिको समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाना हो या फिर अपने ही देश के सरकारी कर्मचारियों की छटनी करनी हो। बेख़ौफ़ होकर निर्णय ले रहे थे। लेकिन इस बीच स्थिति बदलते देर नहीं लगी। इस दरम्यान अनावश्यक हुई सरकारी कर्मचारियों की छंटनी के बाद बगावती सुर बुलंद होने लगे और असंतोष की भावना पनपने लगी। बगावती सुर बुलंद होता देख ट्रंप ने कहा कि “टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक (Trump limits Musk’s authority) सीमित हैं। और वे कर्मियों या नीतियों पर स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते।” बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कैबिनेट को स्पष्ट किया कि “बिलियनेयर सलाहकार एलन मस्क को संघीय विभागों के अध्यक्ष की तरह अधिकार नहीं दिए गए हैं। और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई अधिकार है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक सीमित हैं।”   इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने स्वीकार किया कि “पिछले सप्ताह ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी।” दरअसल, एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी (डीओजेई) फेडरल कर्मचारियों की छंटनी सहित खर्चों में कटौती के उपायों पर काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि मस्क के पास स्वयं सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी की पहल के चलते भारी संख्या में छंटनी और इस्तीफे हुए हैं। इस बीच जानकारी के लिए बता दें कि 20,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। और तकरीबन 75,000 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इन छंटनियों का सबसे अधिक असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो प्रोबेशन की अवधि में थे। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि उनके पास नागरिक सेवा से जुड़े संरक्षण के अधिकार सीमित होते हैं। इस कारण उन्हें हटाना बेहद आसान होता है। इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इन नौकरियों में कटौती का प्रभाव कई एजेंसियों पर पड़ा है। जिनमें आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस), ऊर्जा विभाग, दिग्गज मामलों का विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटरन्स अफेयर्स) और अन्य शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के नए निर्देश एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ट्रंप के आदेश के अनुसार डीओजेई और उसकी टीम सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। लेकिन अंतिम फैसले लेने का अधिकार कैबिनेट सचिवों के पास ही होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump limits Musk’s authority #TrumpVsMusk #ElonMusk #DonaldTrump #SpaceX #USPolitics #TechRegulation #MuskVsGovernment #TrumpNews #Tesla #XCorp

आगे और पढ़ें
Trump softens stance

Trump softens stance: नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत

इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप बड़े एक्शन में दिख रहे थे। बता दें कि बीते 45 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों ने टैरिफ शब्द का नाम न लिया हो। इसके चलते उन्होंने टैरिफ वार की धमकी अपने पड़ोसी मुल्कों कनाडा और मैक्सिको भी दी। लेकिन अब धीरे-धीरे उनके तेवर नरम (Trump softens stance) पड़ते जा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने पहले मैक्सिको और फिर कनाडा को टैरिफ से छूट देने की घोषणा कर दी। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार के दौरान, कनाडा ने अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बावजूद अपने जवाबी टैरिफ को हटाने से इंकार कर दिया है। गुरुवार को कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया है, लेकिन इसके बावजूद कनाडा द्वारा अमेरिका पर लगाए गए जवाबी टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेंगे। इस दौरान कनाडा ने आरोप लगाया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पहले लागू करके और फिर उन्हें हटाकर सोची समझी रणनीति के तहत अनिश्चितता और अव्यवस्था पैदा की। उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को महीने भर के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था।  दरअसल, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित अधिकांश उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था। हालांकि, कनाडा के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ लगाए गए उनके जवाबी टैरिफ अब भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ लगभग $30 बिलियन (यूएस$21 बिलियन) मूल्य के हैं और इनमें अमेरिकी संतरे का रस, मूंगफली का मक्खन, कॉफी, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, मोटरसाइकिल और कुछ प्रकार के कागज उत्पाद शामिल हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले घोषणा की कि “अधिकांश टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे। फिलहाल कुछ अस्थायी और छोटे टैरिफ लागू हैं।” हालांकि इस बीच ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि “वह ऑटोमोबाइल पर 25 प्रतिशत टैरिफ में छूट को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं।” ट्रंप के आदेशों के अनुसार, 2020 में हुए (यूएसएमसीए) व्यापार समझौते के तहत मेक्सिको से होने वाले आयात को एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से मुक्त रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक कनाडा से ऑटो से संबंधित आयात, जो व्यापार समझौते के नियमों का पालन करते हैं। उन्हें एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। तो वहीं कनाडा से अमेरिकी किसानों द्वारा आयात किए जाने वाले पोटाश पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बता दें कि यह वही दर है जिस पर ट्रंप कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर शुल्क लगाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं व्हाइट हाउस के अधिकारी के मुताबिक, कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह यह कि  वे यूएसएमसीए समझौते के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी तरह, मेक्सिको से आयात होने वाले ऐसे उत्पादों पर भी कर लगाया जाएगा जो यूएसएमसीए के अनुरूप नहीं हैं, जैसा कि ट्रंप के आदेशों में कहा गया है। बता दें कि मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका के तीन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, क्रमश: कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाकर एक नया व्यापारिक संघर्ष शुरू किया, जिसके जवाब में इन देशों ने भी प्रतिक्रिया दी। फिर क्या था इसके बाद इससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई। खैर, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि “राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लागू करने और फिर उन्हें हटाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अनिश्चितता और अराजकता बढ़ रही है।” इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कनाडा इस स्थिति से नाखुश है और यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी जनता को इसका एहसास हो।” हालाँकि इस बीच ट्रूडो ने यह भी उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध जारी रहेगा।” खैर, इसका असर यह कि गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी निवेशक ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से घबराए हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump softens stance #DonaldTrump #TrumpNews #USPolitics #MexicoCanada #TradeRelations #TrumpUpdates #GlobalTrade #USA #PolicyChange #BreakingNews

आगे और पढ़ें
Translate »