प्रमुख खबरें
Mamata Banerjee's Oxford Union Speech Controversy

Mamata Banerjee Oxford Speech: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ममता बनर्जी के भाषण के दौरान हुआ जमकर हंगामा, बोलो दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ता 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन में ऑक्सफोर्ड (Mamata Banerjee Oxford Speech) यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में भाषण दे रही थीं, तभी कुछ छात्रों ने उनका भाषण रोक दिया। दरअसल, छात्र राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा और आरजी कर कॉलेज के मुद्दे पर विरोध कर रहे थे। गौर करने वाली बात यह कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बहुत ही शालीनता से स्थिति को संभाला। उन्होंने विरोध करने वाले छात्रों को न सिर्फ जवाब दिया बल्कि अपनी बात भी रखी। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि “अपनी पार्टी से कहो कि वो हमारे राज्य यानी पश्चिम बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाएं ताकि वो हमसे मुकाबला कर सकें।” अचानक हुए इस विरोध से वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। लेकिन, उन्होंने मुख्यमंत्री के जवाब की सराहना की। दर्शकों ने विरोध करने वाले छात्रों को हॉल से बाहर जाने के लिए कहा। इसके बाद ममता बनर्जी ने बिना किसी रुकावट के अपना भाषण पूरा किया। बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया- यूके ने ली है। संगठन ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “हम पश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में ममता बनर्जी और टीएमसी के भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।” इसे राजनीति करने का मंच बनाने के बजाय, बंगाल जाओ (Mamata Banerjee Oxford Speech) प्राप्त जानकारी के मुताबिक जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में उद्योगों के विकास पर बोल (Mamata Banerjee Oxford Speech) रही थीं, तो टाटा ग्रुप की टीसीएस कंपनी में निवेश की बात उठी। तभी उसी समय, कुछ लोग हाथों में पोस्टर लेकर खड़े हो गए। इन पोस्टरों में राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा और आरजी कर कॉलेज के मुद्दे लिखे हुए थे। इस बीच विरोध करने वाले लोग नारे भी लगा रहे थे, जिससे ममता बनर्जी के भाषण में बाधा आ रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री बिल्कुल भी परेशान नहीं हुईं। उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ आवाज में विरोध करने वालों को जवाब दिया। उन्होंने उनसे कहा कि आप मेरा स्वागत कर रहे हैं, धन्यवाद। मैं आपको मिठाई खिलाऊंगी। तभी मुख्यमंत्री ने एक प्रदर्शनकारी को भाई कहकर संबोधित करते हुए कहा कि “झूठ मत बोलो। मुझे तुम्हारे लिए सहानुभूति है। लेकिन इसे राजनीति करने का मंच बनाने के बजाय, बंगाल जाओ और अपनी पार्टी से कहो कि वो खुद को मजबूत करे ताकि वो हमसे मुकाबला कर सके।” उनका जवाब सुनकर दर्शक जोर-जोर से तालियां बजाने लग। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे कह कि “मेरा अपमान करके अपने संस्थान का अपमान मत करो। मैं यहां देश के प्रतिनिधि के तौर पर आई हूं। अपने देश का अपमान मत करो।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन यहां राजनीति मत करो, यह राजनीति करने का मंच नहीं है (Mamata Banerjee Oxford Speech) इस बीच जब प्रदर्शनकारियों ने आरजी कर कॉलेज में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया (Mamata Banerjee Oxford Speech) तो मुख्यमंत्री ने कहा कि “थोड़ा जोर से बोलिए, मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। मैं आपकी हर बात सुनूंगी। क्या आपको पता है कि यह मामला अभी भी चल रहा है? इस मामले की जांच की जिम्मेदारी अब केंद्र सरकार के हाथों में है, यह मामला अब हमारे हाथ में नहीं है।” ममता बनर्जी ने आगे कहा कि “यहां राजनीति मत करो, यह राजनीति करने का मंच नहीं है। मेरे राज्य में जाओ और मेरे साथ राजनीति करो। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जादवपुर विश्वविद्यालय की घटना का भी जिक्र किया।” अहम बात यह कि भारत की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली भी उस समय वहां मौजूद थे। बता दें कि ममता बनर्जी लंदन में कई उद्योग और व्यापार से जुड़ी बैठकों में शामिल हुईं। उनके दौरे का मुख्य आकर्षण केलॉग कॉलेज में उनका भाषण था। और कमाल की बात यह कि यहीं पर विरोध प्रदर्शन हुआ।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mamata Banerjee Oxford Speech #MamataBanerjee #OxfordSpeech #SpeechControversy #PoliticalDebate #TMC #BJP #CPI(M) #FakeDegree #OxfordUnion #KelloggCollege

आगे और पढ़ें
Pakistan Army Revolt Crisis Against Aasim Munir Grows

Pakistan army revolt: अपने ही देश में पाकिस्तानी सेनाप्रमुख के खिलाफ बगावत के सुर, सकते में सैयद आसिम मुनीर

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर की मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां बलोच लिब्रेशन आर्मी का लड़कों ने उनकी नाक में दम कर रखा है तो वहीं दूसरी तरफ जूनियर सैन्य अधिकारियों के बीच विरोध के स्वर (Pakistan army revolt) तेज हो गए हैं। दरअसल, पाकिस्तानी सेना में जनरल मुनीर के खिलाफ लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। असंतोष बढ़ने की वजह से विद्रोह की स्थिति बनती नजर आ रही है। जूनियर सैन्य अधिकारियों के असंतोष का यह आलम है कि कुछ अधिकारियों ने जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग करते हुए एक पत्र लिखा है। जानकारी के मुताबिक लिखे पत्र उन्होंने सेना प्रमुख की नीतियों की आलोचना की है और नए नेतृत्व की आवश्यकता जताई है।  पाकिस्तानी सेना में (Pakistan army revolt) की स्थिति बन रही है बगावत  इसकी पुष्टि इमरान खान की पार्टी के एक नेता ने खुद ने की। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इमरान खान की पार्टी के एक नेता ने दावा किया है कि “पाकिस्तानी सेना में बगावत (Pakistan army revolt) की स्थिति बन रही है। कई सैन्य अधिकारी जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और वर्तमान हालात को 1971 जैसी स्थिति से जोड़ रहे हैं।” यही नहीं,  इसके अलावा देशभर में शहबाज शरीफ के खिलाफ भी प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि यदि सेना में विद्रोह की ज्वाला भड़कती है तो यह पूरे पाकिस्तान में भारी उथल-पुथल मचा सकती है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में (Pakistan army revolt) पड़ने लगी है अलग-थलग दावा तो यहाँ तक किया जा रहा है कि “पाकिस्तानी सेना के जूनियर अधिकारियों ने सेना प्रमुख जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग की है। अफसरों ने तल्खी भरा खत लिखकर उन पर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि उन्होंने सेना का इस्तेमाल जबरन राजनीतिक प्रताड़ना और निजी दुश्मनी निकालने के साधन के रूप में किया है।” बता दें कि पत्र में मुनीर के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा गया है कि “उन्होंने पाकिस्तान को संकट की गहराइयों में धकेल दिया है। उनके नेतृत्व की तुलना 1971 की स्थिति से की गई है, जब पाकिस्तान को करारी हार झेलनी पड़ी थी। और इसका परिणाम बांग्लादेश के गठन के रूप में झेलना पड़ा था। इस बीच गौर करने वाली बात यह कि पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में अलग-थलग (Pakistan army revolt) पड़ने लगी है।  اگر تو یہ کھلا خط اصلی ہے تو میلہ مویشیاں کا مہمان خصوصی اب ڈر اور خوف کے مارے مزید ظلم و بربریت کرے گا۔ بزدل انسان ہمیشہ ظالم ہوتا ہے اور جب اسے اپنی طاقت ختم ہوتی نظر آنے لگے تو وہ کچھ بھی داؤ پر لگانے کو تیار ہوتا ہے۔ تاریخ حافظ سید عاصم منیر شاہ کو دور حاضر کے یزید و فرعون کے… pic.twitter.com/vtYl8SYEvQ — Ali Malik (@AliHasnainMalik) March 18, 2025 बच्चें हमारी चौकियों पर पत्थर फेंकते हैं (Pakistan army revolt) खुफिया सूत्रों की माने तो इस बगावत की वजह से पाकिस्तानी सेना के अस्तित्व पर ही संकट के बदल मंडराने लगे हैं। बड़ी बात यह कि पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि मुनीर अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तो सेना स्वयं उनके खिलाफ बगावती कदम उठाएगी।बता दें कि एक पत्र में उल्लेख किया गया है कि “बच्चें हमारी चौकियों पर पत्थर फेंकते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में अलग-थलग पड़ गई है। खबर एक मुताबिक सेना के अधिकारियों ने आर्मी चीफ की तुलना एक क्रूर फासीवादी जानवर (Pakistan army revolt) से की है, जो अपने ही नागरिकों की कीमत पर लाभ उठा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Pakistan army revolt #PakistanArmyRevolt #AasimMunirCrisis #PakistanPolitics #MilitaryMutiny #PakArmyProtest #PakistanUnrest #PoliticalCrisis #PakistanNews #ArmyRebellion #SyedAasimMunir

आगे और पढ़ें

US Military Attack Plan Leak: मैगजीन ने किया अमेरिकी सेना का पूरा का पूरा अटैक प्लान लीक, चैट के हर डिटले को छापा

किसी भी देश की सेना का प्लान बहुत ही सीक्रेट होता है। वह कब, किसपर और कहां अटैक करने जा रही है यह टॉप सीक्रेट होता है। ऐसे में यदि उसका सारा का सारा सीक्रेट यदि दुनिया के सामने लीक हो जाये तो? और तो और लीक करने वाला खुद ही राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार हो तो? जाहिर सी बात है यह बड़ी ही चिंता की बात होगी। दरअसल, अमेरिकी सेना की रणनीति सरेआम दुनिया के सामने उजागर (US Military Attack Plan Leak) हो गई है। हैरत की बात लीक करने वाल कोई औरनहीं , बल्कि खुद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अटालांटिक मैगजीन के चीफ एडिटर को ही उस मैसेज ग्रूप में जोड़ लिया था, जिसमें हमले को लेकर बातचीत हो रही थी। खैर, जबसे यह खबर आई है तब से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस और कई शीर्ष अधिकारियों ने इस बात से इनकार करते हुए कहा है कि “15 मार्च को यमन में हूती उग्रवादियों पर हमले की योजना पर चर्चा करने वाले मैसेजिंग ग्रूप पर कोई क्लासिफाइड यानी सीक्रेट जानकारी शेयर नहीं की गई थी।” मजे की बात यह कि अटलांटिक मैगजीन ने स्क्रीनशॉट सहित पूरा का पूरा चैट ही शेयर कर दिया है। इस स्क्रीनशॉट में दिख रहा है कि अमेरिकी सेना की बमबारी शुरू होने से दो घंटे से अधिक समय पहले ही पत्रकार के पास हरेक जानकारी पहुंच चुकी थी।  उसे पहले ही पता था (US Military Attack Plan Leak) कि किस खास वक्त कहां से अमेरिका के लड़ाकू विमान भरने वाले हैं उड़ान  हालांकि अब मैगजीन ने जोर देकर कहा कि उसे पहले ही पता था (US Military Attack Plan Leak) कि किस खास वक्त कहां से अमेरिका के लड़ाकू विमान यमन के लिए उड़ान भर रहे थे। अगर मैगजीन की जगह किसी गलत हाथों में ये जानकारी चली जाती तो, यह अमेरिकी पायलटों और अन्य कर्मियों को और भी बड़े खतरे में डाल देती। जानकारी के मुताबिक अटलांटिक के एडिटर इन चीफ जेफरी गोल्डबर्ग को अनजाने में सिग्नल मैसेजिंग ऐप पर ग्रुप चैट में जोड़ लिया था। दरअसल, इस ग्रूप पर ही बमबारी की योजना पर चर्चा की जा रही थी। कथित तौर पर चैट में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा सचिव हेगसेथ, केंद्रीय खुफिया एजेंसी यानी सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज, विदेश मंत्री मार्को एंटोनियो रुबियो, नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और अन्य शामिल थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 26 जनवरी (बुधवार) को द अटलांटिक ने एक नई रिपोर्ट छापी। इसमें मैगजीन ने पूरी चैट के डिटेल शेयर करने के पीछे का अपना तर्क समझाते हुए मैगजीन ने कहा कि “रक्षा सचिव हेगसेथ ने दावा किया है कि ग्रूप में कोई भी युद्ध की योजना नहीं लिख रहा था। जबकि ट्रंप और अन्य ने कहा था कि “यह कोई क्लासीफाइड जानकारी नहीं थी।” बस इसी को गलत साबित करने के लिए मैगजीन ने पूरी चैट ही छाप दी है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन कई प्रशासन के अधिकारियों ने दावे कि हम चैट के कंटेंट के बारे में झूठ बोल रहे (US Military Attack Plan Leak) हैं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैगजीन ने कहा कि “हेगसेथ, गब्बार्ड, रैटक्लिफ और ट्रंप के बयानों के साथ-साथ कई प्रशासन के अधिकारियों ने दावे कि हम चैट के कंटेंट के बारे में झूठ बोल रहे (US Military Attack Plan Leak) हैं। इसने हमें यह विश्वास दिलाया है कि लोगों को अपने निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए पूरे टेक्स्ट को खुद देखना चाहिए। ट्रंप के सलाहकारों ने गैर-सुरक्षित संचार चैनलों में जिस तरह की जानकारी शामिल की है, उसका खुलासा करने में एक स्पष्ट सार्वजनिक रुचि है, खासकर क्योंकि वरिष्ठ प्रशासन के लोग शेयर किए गए मैसेज के महत्व को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।” इस पूरे मामले पर मैगजीन ने कहा कि “एक्सपर्ट्स ने उन्हें बार-बार बताया था कि ऐसी संवेदनशील चर्चाओं के लिए सिग्नल चैट का उपयोग करना “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है” और बताया कि गोल्डबर्ग को बमबारी शुरू होने से दो घंटे पहले हमलों की जानकारी मिली थी।” Latest News in Hindi Today Hindi news  #USMilitaryLeak #SignalAppBreach #NationalSecurity #YemenOperation #HouthiTarget #PentagonLeak #DefenseDepartment #MilitaryIntelligence #InformationSecurity #JournalistInclusion​

आगे और पढ़ें
Donald Trump’s Big Change in US Voting System Revealed

Donald Trump voting changes: अमेरिका में वोट देने के तरीके में यह बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप  

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मंगलवार (25 मार्च) को अमेरिका में होने वाले चुनावों में व्यापक बदलाव की मांग वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए। दरअसल, ट्रंप ने वहां के फेडरल चुनावों (केंद्रीय) में वोटिंग के रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का डॉक्यूमेंट प्रूव देना अनिवार्य (Donald Trump voting changes) कर दिया है। यानी जिस तरह भारत में हम मतदान के समय आधार कार्ड या वोटर कार्ड जैसे आधिकारिक आईडी प्रूव देते हैं। ठीक उसी तरह अब अमेरिकी नागरिकों को भी अपनी आईडी प्रूफ दिखाना होगा। आईडी प्रूफ दिखाने के बाद ही वो वोट डालने हेतु रजिस्टर कर सकेगा। इस बीच भारत और कुछ अन्य देशों का हवाला देते हुए इस आदेश में कहा गया है कि “अमेरिका, स्वशासन वाले अग्रणी देश होने के बावजूद, आधुनिक, विकसित और विकासशील देशों द्वारा उपाय में लाए जाने वाले बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “उदाहरण के लिए, भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए यह काफी हद तक स्व-सत्यापन पर ही निर्भर है।” अब अमेरिकी मतदाताओं को देना होगा नागरिकता का सबूत (Donald Trump voting changes) प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब मतदाताओं को नागरिकता का सबूत डॉक्यूमेंट फॉर्म में देना होगा। जैसे अमेरिकी पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “राज्यों को अपनी मतदाता सूची और मतदाता सूची के रखरखाव के रिकॉर्ड को समीक्षा के लिए होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सरकारी दक्षता विभाग (डीओजी) को सौंप देना चाहिए। इस बीच आदेश में चुनाव के दिन तक वोट डालने और उसे प्राप्त करने को आवश्यक बताया गया है। कहा गया है कि फेडरल फंडिंग उस समय सीमा के राज्य अनुपालन पर सशर्त होनी चाहिए। इसके अलावा आदेश में चुनाव सहायता आयोग को चुनावी अखंडता की रक्षा के उद्देश्य से वोटिंग सिस्टम के लिए अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने का निर्देश दिया गया। जानकारी के मुताबिक इसमें यह मार्गदर्शन शामिल होगा कि वोटिंग सिस्टम को उन मतपत्रों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जो मतगणना प्रक्रिया में बारकोड या क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप के आदेश में विदेशी नागरिकों को अमेरिकी चुनाव में योगदान देने या चंदा देने पर भी रोक लगा दी गई है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन कई अमेरिकी चुनावों में मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान करने की है सुविधा (Donald Trump voting changes) बता दें कि आदेश में डेनमार्क और स्वीडन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश व्यक्तिगत रूप से मतदान करने में असमर्थ लोगों के लिए मेल-इन वोटिंग को समझदारी से सीमित करते हैं और पोस्टमार्क की तारीख की परवाह किए बिना देर से आने वाले वोटों की गिनती नहीं करते हैं, लेकिन कई अमेरिकी चुनावों में अब मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान की सुविधा है (Donald Trump voting changes)। कई अधिकारी बिना पोस्टमार्क वाले या चुनाव की तारीख के बाद प्राप्त मतपत्रों को स्वीकार करते हैं। जनवरी में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को पटखनी देकर सत्ता में लौटे राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि “धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से मुक्त स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव हमारे संवैधानिक गणतंत्र को बनाए रखने के लिए मौलिक हैं।” इस बीच ट्रंप ने कहा कि “अमेरिकी नागरिकों का अपने वोटों को अवैध रूप से कमजोर किए बिना उचित ढंग से गिनती और सारणीबद्ध करने का अधिकार, चुनाव के असली विजेता का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है।”  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump voting changes #DonaldTrump #USVoting #Election2024 #TrumpPolicies #VotingChanges #TrumpCampaign #USElections #BallotReform #TrumpNews #VotingRights

आगे और पढ़ें
Jammu and Kashmir issue

Jammu and Kashmir issue: UN में दहाड़ा भारत, कहा जम्मू और कश्मीर ‘भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा’

पाकिस्तान दशकों से यूएन में कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) का राग अलाप रहा है। कश्मीर को अपना बताने का कोई मौका नहीं छोड़ता। इस बार संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पी हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। दरअसल, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में शांति स्थापना सुधारों पर बहस के दौरान जम्मू और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बार-बार दिए गए बयानों को सख्ती से खारिज किया। न सिर्फ ख़ारिज किया बल्कि उन्हें अनुचित बताते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा रखा है, जिसे उसे खाली करना ही होगा।” बता दें कि पाकिस्तानी टिप्पणी को खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि “पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने एक बार फिर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर अनुचित टिप्पणी की है। इस तरह बार-बार संदर्भ देने से उनके अवैध दावे मान्य नहीं हो सकते। न ही पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को उचित ठहराया जा सकता है।” पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने फिर की भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) पर अनुचित टिप्पणी   यही नहीं, भारतीय राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि “वह शांति स्थापना पर मुख्य चर्चाओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है।” इस दौरान उन्होंने कहा कि “भारत यह स्पष्ट करना आवश्यक समझता है कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने एक बार फिर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) पर अनुचित टिप्पणी की है। ऐसे बार-बार किए गए दावे न तो उनके अवैध दावों को मान्यता देते हैं और न ही उनके राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को सही ठहराते हैं।” यही नहीं, पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए हरीश ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि “पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए है और उसे तुरंत खाली करना चाहिए। इस पर अधिक जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान अवैध रूप से जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर कब्जा बनाए हुए है, जिसे उसे छोड़ देना चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “भारत वैश्विक मंचों पर अपनी संप्रभुता पर सवाल नहीं उठने देगा।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन म पाकिस्तान को सलाह (Jammu and Kashmir issue) देंगे कि वह इस मंच का ध्यान भटकाने की कोशिश न करे इस दरम्यान हरीश ने पाकिस्तान के अपने संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडे के लिए संयुक्त राष्ट्र मंच के दुरुपयोग के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि “हम पाकिस्तान को सलाह (Jammu and Kashmir issue) देंगे कि वह इस मंच का ध्यान भटकाने की कोशिश न करे। इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “भारत विस्तृत प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं समझता, क्योंकि उसकी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। भारत अधिक विस्तृत उत्तर देने के अधिकार का प्रयोग करने से परहेज करेगा।” दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सत्र शांति स्थापना में सुधारों पर केंद्रित था। इस दौरान भारत ने इस अवसर का उपयोग सशस्त्र समूहों और आधुनिक हथियारों से उत्पन्न खतरों जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता पर जोर देने के लिए किया। बता दें कि इस दौरान हरीश ने शांति अभियानों के जनादेश को निर्धारित करने में सेना और पुलिस योगदान देने वाले देशों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Jammu and Kashmir issue IndiaAtUN #JammuAndKashmir #UnitedNations #IndiaStrong #KashmirIsIndia #IndianDiplomacy #UNSpeech #IndiaOnKashmir #GlobalPolitics

आगे और पढ़ें
Trump's 2025 Ukraine Strategy Impact on Zelensky's Leadership​

Trump Ukraine plan 2025: क्या जेलेंस्की को सत्ता से बेदखल कर देंगे अमेरकी राष्टपति ट्रंप? ये है पूरा प्लान

पीछले तीन वर्षों से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के चलते थमने जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध विराम होता है तो यूक्रेन का क्या होगा? और इससे भी बड़ा सवाल यह कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का क्या होगा (Trump Ukraine plan 2025) ? ये वो सवाल हैं जो हर किसी के मन में कौंध रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने न सिर्फ युद्धविराम का रोडमैप तैयार कर लिया है, बल्कि जेलेंस्की और यूक्रेन के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला कर लिया है। ट्रंप के यूक्रेन प्लान को लेकर नया और बड़ा खुलासा हुआ है। ट्रंप और उनकी टीम ने जेलेंस्की का तख्तापलट करने की तैयारी कर ली है। जेलेंस्की के बाद यूक्रेन की कमान कौन संभालेगा, ये भी तय हो गया है। जानकारी के मुताबिक यूक्रेन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और जेलेंस्की ने एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह कि उनका ये ब्लूप्रिंट लीक हो गया है। लीक हुए ब्लूप्रिंट से पता चला है कि ट्रंप किसी यूक्रेनी महिला को यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। दरअसल, ट्रंप का यह कदम युद्धविराम के बाद होने वाले चुनावों के साथ जुड़ा हुआ है।  यूक्रेन की पूर्व प्रधानमंत्री को ट्रंप सौंपना चाहते हैं यूक्रेन की कमान (Trump Ukraine plan 2025) सोचने वाली गंभीर बात यह कि आखिर वो महिला कौन है जिसे ट्रंप यूक्रेन की कमान सौंपना चाहते हैं (Trump Ukraine plan 2025)? तो वो कोई और नहीं, बल्कि यूक्रेन की पूर्व प्रधानमंत्री यूलिया तिमोशेंको हैं जिन्हें जेलेंस्की की जगह ट्रंप यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। ये वही यूलिया हैं, जो रूस के आक्रमण के बाद से ही राजनीति से नदारद थीं, लेकिन अब तीन साल बाद अचानक बेहद सक्रिय हो गई हैं। खासकर तब, जब युद्ध खत्म होने के करीब है। न सिर्फ वो राजनीति में सक्रिय हुई हैं बल्कि ट्रंप के साथ मिलकर काम भी कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक जेलेंस्की को हटाकर ट्रंप यूलिया तिमोशेंको को यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। मजे की बात यह कि जब ट्रंप ने युद्धविराम के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। गौर करने वाली बात यह कि इन दिनों यूलिया कीव की राजनीति में अचानक काफी सक्रिय हो गई हैं। वो एक तरफ शांति समझौता करवाने में जुटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफों के पुल बाँध रही हैं हैं तो दूसरी तरफ जेलेंस्की की नीतियों का खुलकर विरोध भी कर रही हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ट्रंप युद्धविराम के तुरंत बाद यूक्रेन में चुनाव करवाएंगे। दरअसल, ट्रंप यूलिया को ही यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर जेलेंस्की का तख्तापलट करने के लिए आधार तैयार कर रही (Trump Ukraine plan 2025) हैं यूलिया  इस बीच यूलिया बैकडोर चैनल से लगातार ट्रंप के संपर्क में हैं। वो जेलेंस्की का तख्तापलट करने के लिए आधार तैयार कर रही (Trump Ukraine plan 2025) हैं। इस हेतु वो यूक्रेन में अधिक से अधिक लोगों का समर्थन जुटा रही हैं। तो वहीं ट्रंप जेलेंस्की पर चुनाव के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं। इस बीच अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बड़ा दावा किया है। विटकॉफ के मुताबिक “जेलेंस्की ट्रंप के सामने झुक गए हैं।” खबर के मुताबिक कीव राष्ट्रपति चुनाव करवाने के लिए तैयार हो गया है। इधर युद्ध खत्म होगा और उधर यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बज जाएगा। इसके बाद जेलेंस्की की विदाई हो सकती है। बेशक यूक्रेन में चुनाव का सीधा सा मतलब है कि जेलेंस्की और उनकी सरकार का पतन। कहने की जरूरत नहीं, यूलिया एक तरह से यूक्रेन में ट्रंप की कठपुतली राष्ट्रपति होंगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Ukraine plan 2025 #TrumpUkrainePlan​ #ZelenskyRemoval​ #USUkrainePolicy​ #TrumpPeaceStrategy​ #UkraineCeasefire2025​ #TrumpPutinTalks​ #ZelenskyOuster​

आगे और पढ़ें
Pakistan occupied Balochistan

पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन

बलूचिस्तान (Balochistan) क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है और यह आकार के मामले में जर्मनी के बराबर है, लेकिन आबादी के मामले में यह राज्य विरान है। यहां की आबादी मात्र डेढ़ करोड़ है, जो जर्मनी से सात करोड़ कम है। लेकिन इस राज्य की जो सबसे बड़ी खूबी है, वह है कि यह राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरा पूरा है। यहां की खदानों में सोना, तांबा और तेल जैसे कई चीजें मौजूद हैं। पाकिस्तान (Pakistan) इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल कर देश की जरूरतों को पूरा कर रहा है। लेकिन इतना सबकुछ होते हुए बलूचिस्तान (Balochistan) सबसे पिछड़ा राज्य है। यहां के 70 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मामलों में यह राज्य न केवल पाकिस्तान (Pakistan) बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में सबसे पीछे हैं। इसी गरीबी और पिछड़ेपन के कारण ही बलूचिस्तान में पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। बलूच लोग अपने हक की मांग को लेकर विद्रोह कर रहे और आए दिन पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे हैं।  कैसे और शुरू हुआ बलूचिस्तान में विद्रोह भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद से ही बलूचिस्तान (Balochistan) का इतिहास विद्रोह भरा रहा है। बंटवारे के समय चार अगस्त 1947 को दिल्ली में एक बैठक हुई थी। इसमें कलात के शासक मीर अहमद खान, जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना के साथ ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन भी शामिल हुए थे। इस बैठक में फैसला लिया गया था कि कलात, लास बेला, खरान और मकरान को मिलाकर एक आजाद बलूचिस्तान बनाया जाएगा और 11 अगस्त को बलूचिस्तान को अलग देश घोषित कर दिया गया। बलूचिस्तान को आजाद घोषित करने के करीब एक माह बाद 12 सितंबर को इंग्लैंड ने एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें कहा गया कि बलूचिस्तान आर्थिक और सुरक्षा के लिहाज से अलग देश बनने की हालत में नहीं है।  पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया जिसके बाद जिन्ना ने अहमद खान से बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय करने को कहा। लेकिन कलात के शासक ने यह बात नहीं मानी। जिसके बाद पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। लेकिन बलूचों ने हार नहीं मानी और पाकिस्तान के खिलाफ बगावत शुरू हो गई। यह संघर्ष तभी से जारी है। बलूचों का कहना है कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर उनका हक है, लेकिन पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर अवैध कब्जा कर रखा है और वो इस कब्जे को हटाने के लिए लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में अब तक हजारों बलूच मारे जा चुके हैं और हजारों गायब हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी बलूच हार मानने को तैयार नहीं और पाकिस्तानी सेना पर लगातार जवाबी हमले कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने बनाया छठी पीढ़ी का सबसे एडवांस फाइटर जेट, खूबियां सुन कांप जाएगा चीन! ट्रंप ने उठाया राज से पर्दा  औरंगजेब को भी बलूचों के सामने होना पड़ा था नतमस्तक  भारतीय राजा शेरशाह सूरी ने मुगल शासक हुमायूं को युद्ध में हरा दिया था, जिसके बाद उसने भागकर ईरान में शरण ली थी। साल 1545 में जब शेरशाह सूरी की मौत हुई तो हुमायूं फिर भारत लौट आया और बलूचों की मदद से ही साल 1555 में उसने दिल्ली पर कब्जा किया था। साल 1659 में जब औरंगजेब मुगल बादशाह बना तो बलूच सरदारों ने उसके खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया और साल 1666 में बलूचों ने औरंगजेब की सेना को हराकर कलात और क्वेटा पर कब्जा कर दिया। इन इलाकों को औरंगजेब दोबारा कभी नहीं जीत पाया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Balochistan #BalochFreedom #PakistanOccupiedBalochistan #Balochistan #BalochRights #FreeBalochistan #BalochHistory #AurangzebRule #PakistanCrackdown #BalochStruggle #HumanRights

आगे और पढ़ें
Pakistan Army Chief's Alleged Coup Plot with Baloch Insurgents​

पाकिस्तान में बलूचों को मोहरा बनाकर तख्तापलट (Military takeover Pakistan) करने की फिराक में हैं आर्मी चीफ? 

ऐसे में बड़ा सवाल यह की आखिर पाकिस्तान की आवाम को मुनीर क्या संदेश देना चाहते हैं? कुल-मिलाकर उनके कहने का मतलब यही न कि शहबाज से न सिर्फ देश संभल रहा है बल्कि उग्रवाद और आतंरिक आतंकवाद से लड़ने में उनकी सरकार सक्षम नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। उनके मुताबिक सेना ही जो पाकिस्तान ताकतवर बना सकती है। जानकारों की माने तो बलूचों को मोहरा बनाकर आर्मी चीफ पाकिस्तान में तख्तापलट (Military takeover Pakistan) करने की फिराक में हैं। बता दें कि भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी लोकतंत्र का शासन है। बेशक लोकतंत्र में सरकार अपना काम करती है। देश में आर्मी का काम है देश की सुरक्षा करना। लेकिन मजे की बात यह कि अपने काम को बेहतर तरीके से करने के बजाय मुनीर उल्टा सरकार को ही नसीहत देने लगे हैं। जाहिर  तौरपर ऐसे में यह कहा जा सकता है कि वह मुनीर वही चाल चलने की साजिश कर रहे हैं जो कभी दशकों पहले परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के साथ चली थी। ऐसे में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी सत्ता जाने का डर सता रहा है। दरअसल, जिस तरह मुनीर बलोचों से जंग और पाक में हो रहे हमलों का ठीकरा शहबाज शरीफ पर फोड़ रहे हैं, ठीक उसी तरह आज से तकरीबन 25 साल पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी कारगिल की हार का ठीकरा नवाज शरीफ फर फोड़ा था।  इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट के जरिए नवाज शरीफ को कर दिया था सत्ता से बेदखल  बता दें कि पकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को 12 अक्टूबर 1999 को एक सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता से बेदखल कर दिया था। उस समय मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे। गौर करने वाली बात यह कि यह तख्तापलट (Military takeover Pakistan) कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद यह हुआ था। जबकि कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड और रणनीतिकार खुद परवेज मुशर्रफ थे। उन्होंने ही कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। और उन्हीं के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना और एलओसी पार कर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की थी। खैर, बता दें कि पाकिस्तान वर्तमान समय में बड़े संकट से गुजर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बम धमाके हो रहे हैं, तो कहीं अज्ञात हमलावर खौफ फैला रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी सेना हालात पर काबू पाने में नाकाम नजर आ रही है। आम जनता भुखमरी की मार झेल रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Military takeover Pakistan #PakistanArmyChief​ #BalochistanConflict​ #MilitaryCoupPakistan​ #AsimMunir​ #BalochLiberationArmy​ #PakistanPoliticalCrisis​

आगे और पढ़ें
Trump Executive Order Causes 5.32 Lakh Homeless Crisis

Trump executive order: ट्रंप के इस फरमान से 5.32 लाख लोग हुए बेघर 

जब से अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से वह देश में रह रहे अवैध प्रवासियों को निकालने में लगे हुए हैं। एक के बाद एक वो चौंकाने वाले फैसले कर रहे हैं। अपने इन्हीं फैसलों में वह अमेरिका के भीतर अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ पहले ही अभियान चला चुके हैं। राष्ट्रपति ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ अभियान तेज (Trump executive order) किया है। इस सिलसिले में उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों के हजारों लोगों को पकड़कर उनके देश भेजने का काम किया है। इस सभी कार्रवाई को उनकी सरकार अमेरिका को फिर से महान बनाने की रणनीति के लिए जरूरी बता रही है। इस पूरे मामले पर उनका कहना है कि “बाहरी लोगों ने अमेरिकियों का हक मार लिया है और इस कारण अमेरिका में अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। “ ट्रंप के इस फैसले से तकरीबन 5,32,000 लोग (Trump executive order) प्रभावित होंगे हालिया लिए फैसले में अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने कहा है कि “वह क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के लाखों लोगों से कानूनी सुरक्षा छीन लेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इससे तकरीबन 5,32,000 लोग प्रभावित (Trump executive order) होंगे। उन्हें महीने भर के भीतर देश छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, यह फैसला उन लोगों पर लागू होगा, जो अक्टूबर साल 2022 के बाद अमेरिका आए थे। जानकारी के लिए बता दें कि ये लोग वित्तीय सहायकों के साथ आए थे और उन्हें अमेरिका में दो साल तक रहने और काम करने की अनुमति मिली थी। इस मामले पर होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि “इन लोगों का कानूनी दर्जा 24 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। इसके बाद फेडरल रजिस्टर में यह नोटिस छपने के 30 दिन बाद इनको देश छोड़ना पड़ेगा। कहने की जरूरत नहीं यह नई नीति खास तौरपर उन लोगों पर असर डालेगी जो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं और ह्यूमैनिटेरियन पैरोल प्रोग्राम के तहत आए थे। बता दें कि यह प्रोग्राम पहले ट्रंप प्रशासन ने खत्म किया था, क्योंकि उनका मानना था कि “इसका गलत इस्तेमाल हो रहा था।” ध्यान देने वाली बात यह कि यह कानूनी तरीका लंबे समय से उन लोगों को अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने की इजाजत देता था, जिनके देशों में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता थी।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे बता दें कि अपने चुनाव अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि वह अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद अब आप्रवासियों के लिए उन्होंने कानूनी रास्ते भी बंद करने शुरू कर दिए हैं। इस नए आदेश से पहले, इस प्रोग्राम के लाभार्थी अपने पैरोल की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे, लेकिन प्रशासन ने उनके शरण, वीजा या अन्य अनुरोधों को प्रोसेस करना बंद कर दिया। हलाँकि इस फैसले को पहले ही संघीय अदालतों में चुनौती दी जा चुकी है। कुछ अमेरिकी नागरिकों और आप्रवासियों के समूह ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। दरअसल, वे ह्यूमैनिटेरियन पैरोल को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। विदित हो कि बाइडन प्रशासन ने इन चार देशों से हर महीने 30,000 लोगों को दो साल के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी थी, साथ में काम करने का अधिकार भी दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump executive order #TrumpExecutiveOrder #USHomelessCrisis #TrumpPolicyImpact #HomelessnessSurge #PoliticalDebate #USHousingCrisis #TrumpNews #PolicyEffects #BreakingNews #USPolitics

आगे और पढ़ें
Pakistan Terror Attack Pak Army Captain Martyred

Terror attack in Pakistan: आतंकवाद से खुद परेशान हुआ पाकिस्तान, पाकिस्तानी सेना का कैप्टन शहीद, 10 आतंकवादी ढेर

पडोसी मुल्क पाकिस्तान में दिन-ब-दिन आतंकवादी हमलों की घटना है कि बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में क्वेटा में जफ़र एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक की घटना ने देश में हड़कंप मचा दिया था। बता दें कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 400 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया था। हालांकि इस मामले में पाकिस्तानी सेना और बीएलए दोनों ने अलग-अलग दावे किए। सेना की माने तो उसने 33 आतंकवादियों को मारकर लगभग सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया। तो वहीं दूसरी बीएलए ने दावा किया कि उसने 214 बंधकों और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। खैर, इस बीच पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक़ यह मुठभेड़ गुरुवार को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में (Terror attack in Pakistan) हुई। इस मुठभेड़ में सात आतंकवादी मारे गए। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सेना का एक कैप्टन भी शहीद हुआ। दरअसल, यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी के आधार पर दक्षिण वजीरिस्तान की सीमा से लगे डेरा इस्माइल खान जिले के कर्री मलंग इलाके में चलाया गया था। कहने की जरूरत नहीं, पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद के खतरे को जड़ से खत्म करने की खा ली है। खैबर पख्तूनख्वा में हुई मुठभेड़ (Terror attack in Pakistan) में सेना के एक कैप्टन समेत कम से कम 10 आतंकवादी मारे गए खैर, इस पूरे मामले में पाकिस्तानी सेना ने बताया कि “खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान जिले में एक मुठभेड़ (Terror attack in Pakistan) हुई, जिसमें सेना के एक कैप्टन समेत कम से कम 10 आतंकवादी मारे गए।” सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) के मुताबिक यह मुठभेड़ बृहस्पतिवार को एक खुफिया अभियान के दौरान हुई। इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इसे अंजाम दिया गया। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ में कैप्टन हसनैन अख्तर की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के मुताबिक, इस अभियान में कई आतंकवादी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। यही नहीं,आईएसपीआर ने बताया कि ये आतंकवादी न केवल सुरक्षा एजेंसियों पर हमलों में लिप्त थे, बल्कि आम नागरिकों की हत्याओं में भी शामिल थे। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी है। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी (Terror attack in Pakistan) आई है ध्यान देनी वाली बात यह कि साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी (Terror attack in Pakistan) आई है। खास तौरपर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कल तक दुनिया भर में आतंकियों को पनाह देने वाला देश पाकिस्तान आज स्वयं दहशतगर्दी का शिकार बन गया है।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर Terror attack in Pakistan: Pakistan itself troubled by terrorism, Pakistani Army Captain martyred, 10 terrorists killed The incidents of terrorist attacks are increasing day by day in the neighboring country Pakistan. Recently, the incident of Jaffar Express train hijack in Quetta created a stir in the country. Let us tell you that the Balochistan Liberation Army (BLA) had taken more than 400 passengers hostage. However, both the Pakistani Army and BLA made different claims in this matter. If the army is to be believed, it killed 33 terrorists and rescued almost all the hostages safely. On the other hand, BLA claimed that it killed 214 hostages and many Pakistani soldiers. Well, meanwhile, amid the increasing incidents of terrorist attacks in Pakistan, the security forces have claimed to have killed 10 terrorists in Khyber Pakhtunkhwa province. According to the information, this encounter took place on Thursday in the northwestern region (Terror attack in Pakistan). Seven terrorists were killed in this encounter. However, during this operation, a captain of the Pakistani army was also martyred. Actually, this operation was carried out in the Karri Malang area of ​​​​Dera Ismail Khan district bordering South Waziristan on the basis of intelligence information. Needless to say, the Pakistani army is determined to root out the threat of terrorism. Latest News in Hindi Today Hindi news Terror attack in Pakistan #PakistanTerrorAttack #PakArmy #Terrorism #PakistanNews #SecurityCrisis #PakistanViolence #TerrorAttack #PakArmyMartyr #GlobalTerror #PakistanUpdates

आगे और पढ़ें
Translate »