रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व तनाव पर दुनिया की नजर

वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और कूटनीति पर बढ़ रहा दबाव रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया के कई देश इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका प्रभाव केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष वैश्विक राजनीति का प्रमुख विषय बना हुआ है। इस संघर्ष के कारण यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था, रक्षा नीतियों और ऊर्जा रणनीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। कई देशों ने अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया है और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया है। वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर तेल और गैस बाजारों पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिलता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश प्रभावित हो सकते हैं। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। विकासशील देशों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है क्योंकि वे ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर होते हैं। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना रहती है। ऊर्जा बाजारों की चिंता मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि होने पर परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है। यूरोप में भी ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद कई देशों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों की तलाश तेज कर दी है। इसके परिणामस्वरूप नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा विविधीकरण पर निवेश बढ़ा है। कूटनीतिक प्रयास जारी संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। विभिन्न देशों के नेता कूटनीतिक समाधान तलाशने पर जोर दे रहे हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक शांति के लिए बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है। कई देशों ने संयम बरतने और संवाद जारी रखने की अपील की है। सुरक्षा चुनौतियां भू-राजनीतिक संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। साइबर सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग, रक्षा सहयोग और वैश्विक स्थिरता जैसे विषय भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के प्रभाव तेजी से वैश्विक स्तर पर महसूस किए जाते हैं। इसलिए दुनिया के प्रमुख देश इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। मुख्य बिंदु • रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दुनिया की नजर • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से चिंता • ऊर्जा बाजारों पर असर की आशंका • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव • कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी • सुरक्षा और व्यापार पर संभावित प्रभाव निष्कर्ष रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दुनिया भर के देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और शांति तथा स्थिरता की दिशा में प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में इन घटनाक्रमों का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण रूप से देखने को मिल सकता है। (जय राष्ट्र न्यूज़ अंतरराष्ट्रीय डेस्क)

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यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ९०% समझौता तैयार, लेकिन खतरे बरकरार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर, ३ जनवरी २०२६ यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध अब तीसरे साल में है। हाल ही में शांति की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि समझौता ९०% तैयार है। लेकिन चुनौतियां अभी भी हैं। रूस की तरफ से झूठे हमले की चेतावनी दी गई है। यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस लेख में हम नवीनतम घटनाओं पर नजर डालेंगे। हम शांति वार्ता की प्रगति देखेंगे। साथ ही, बाधाओं पर भी बात करेंगे। यह जानकारी आपको अपडेट रखेगी। शांति समझौते की प्रगति जेलेंस्की ने नए साल के संबोधन में अच्छी खबर दी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच समझौता लगभग पूरा है। यह युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, रूस को इसमें शामिल करना बाकी है। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन शांति चाहते हैं। लेकिन रूसी अधिकारी सहमत नहीं दिखते। यूक्रेन ने सुरक्षा सहयोगियों से बात की। ये वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। वे समझौते को मजबूत बनाती हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन कमजोर हो रहा है। लेकिन यूक्रेन मजबूती से खड़ा है। इसके अलावा, परमाणु संयंत्र एक बड़ी समस्या है। जपोरिजिया परमाणु संयंत्र: मुख्य बाधा जपोरिजिया संयंत्र यूक्रेन में है। लेकिन रूस ने इसे कब्जा कर रखा है। यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। जेलेंस्की ने कहा कि यह शांति योजना में अटकाव है। यदि रूस इसे नहीं छोड़ेगा, तो खतरा बढ़ेगा। संयंत्र में कोई दुर्घटना हो सकती है। यह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगी। संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। वे सुरक्षा चाहते हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए, समझौते में इसका समाधान जरूरी है। अन्यथा, शांति मुश्किल होगी। रूस की संभावित साजिश यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है। वे कहते हैं कि रूस झूठा हमला कर सकता है। यह हमला रूस में ही होगा। इसका उद्देश्य शांति वार्ता बिगाड़ना है। यह फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन होगा। इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं। चेतावनी के अनुसार, यह हमला चर्च पर हो सकता है। रूसी ऑर्थोडॉक्स क्रिसमस से पहले। यह ७ जनवरी को है। यूक्रेन ने कहा कि रूस ऐसा करके दोष यूक्रेन पर डालेगा। इससे वार्ता रुक जाएगी। दुनिया को सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, रूस लगातार हमले कर रहा है। हाल ही में एक मिसाइल हमले में दो लोग मारे गए। इसमें एक तीन साल का बच्चा भी था। ३१ लोग घायल हुए। यह दिखाता है कि युद्ध थमा नहीं है। फ्रंटलाइन पर स्थिति यूक्रेन ने फ्रंटलाइन से निकासी का आदेश दिया। हजारों लोगों को सुरक्षित जगह जाना होगा। रूसी सेना आगे बढ़ रही है। खारकीव क्षेत्र में ड्रोन हमले हो रहे हैं। यूक्रेन की सेना नियमों का पालन कर रही है। वे नागरिकों की रक्षा कर रही हैं। हालांकि, रूस का दावा अलग है। वे कहते हैं कि यूक्रेन हार रहा है। लेकिन यूक्रेन ने कहा कि वे लड़ते रहेंगे। शांति के लिए तैयार हैं। लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया इस पर नजर रखे हुए है। अमेरिका यूक्रेन का समर्थन कर रहा है। ट्रंप प्रशासन वार्ता को बढ़ावा दे रहा है। यूरोपीय संघ भी शामिल है। वे सुरक्षा गारंटी चाहते हैं। रूस ने कहा कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। लेकिन शर्तें उनकी होंगी। पुतिन ने कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन उनके अधिकारी सक्रिय हैं। इसके अलावा, चीन और भारत जैसे देश मध्यस्थता कर सकते हैं। वे शांति चाहते हैं। २०२६ में शांति की संभावना नए साल में शांति की उम्मीद है। लेकिन बाधाएं हैं। यदि झूठे हमले हुए, तो सब बिगड़ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि वार्ता जारी रखनी चाहिए। दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। यूक्रेन ने कहा कि वे ९०% तैयार हैं। बाकी १०% पर काम हो रहा है। लेकिन रूस की मंशा साफ नहीं है। इसलिए, सावधानी जरूरी है। भारत की भूमिका भारत ने हमेशा शांति की वकालत की है। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से बात की। भारत मध्यस्थ बन सकता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा होगा। इसके अलावा, युद्ध से ऊर्जा कीमतें प्रभावित होती हैं। भारत को फायदा होगा यदि शांति हो। निष्कर्ष यूक्रेन-रूस शांति वार्ता महत्वपूर्ण मोड़ पर है। ९०% समझौता तैयार है। लेकिन रूस की साजिश चिंता का विषय है। दुनिया को एकजुट होना चाहिए। शांति से सभी को फायदा होगा। हम आगे की खबरों पर नजर रखेंगे। यह स्थिति तेजी से बदल रही है। अधिक जानकारी के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें। यदि आपके कोई सवाल हैं, तो कमेंट करें।

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रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

भारतीय संस्कृति रियल रिव्यू गुरुग्राम: सोशल मीडिया पर इन दिनों रशियन महिला केसेनिया शकीरजियानोवा (@vegkseniia) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। केसेनिया पिछले तीन साल से भारत में रह रही हैं और गुरुग्राम में बस चुकी हैं। कार में सैंडविच खाते हुए रिकॉर्ड किए गए इस कैजुअल वीडियो में उन्होंने भारत को लेकर विदेशियों की छह बड़ी गलतफहमियों को बेबाकी से खारिज किया है। वीडियो की शुरुआत में केसेनिया मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं भारत में लगभग तीन साल से रह रही हूं, और आज कुछ मिथकों को क्लियर करती हूं।” उनका यह ईमानदार और सहज अंदाज लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। केसेनिया ने तोड़े ये 6 मिथक: केसेनिया का मुख्य संदेश है कि भारत ने उन्हें नहीं बदला, बल्कि भारत को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच को उन्होंने चुनौती दी है। वे कहती हैं कि भारत का जीवन विदेशियों की कल्पना से कहीं ज्यादा आधुनिक, विविध और सामान्य है। इस वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं कमाल की हैं। एक यूजर ने लिखा, “आपकी ईमानदारी के लिए थैंक यू, भारत की सच्ची इमेज दिखाने के लिए!” दूसरे ने कहा, “ये वीडियो हर विदेशी को दिखाना चाहिए।” कई लोगों ने इसे भारत की पॉजिटिव इमेज बनाने वाला बताया। केसेनिया का यह वीडियो न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि यह दुनिया को भारत की असली तस्वीर दिखा रहा है। अगर आप भी विदेशी नजर से भारत का रियल रिव्यू देखना चाहते हैं, तो इंस्टाग्राम पर @vegkseniia जरूर चेक करें! रशियन महिला केसेनिया का भारत प्रेम: पहले वीडियो ने भी मचाया था तहलका, हैदराबाद को बताया दुबई से बेहतर! केसेनिया शकीरजियानोवा हैदराबाद वीडियो | रशियन टूरिस्ट इंडिया रिव्यू | भारत मॉडर्न सिटी रशियन नजर केसेनिया शकीरजियानोवा सिर्फ मिथक तोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने हैदराबाद की हाइटेक सिटी को देखकर कहा था, “हबीबी, ये दुबई नहीं, हैदराबाद है!” सनसेट व्यू और मॉडर्न आर्किटेक्चर देखकर वे हैरान रह गई थीं। यह वीडियो भी लाखों लोगों ने देखा और भारतीयों ने गर्व महसूस किया। केसेनिया जैसे विदेशी भारत की तेज विकास और विविधता की तारीफ कर दुनिया को नई नजर से देखने पर मजबूर कर रहे हैं।

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कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर: जासूसी की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर भारत में सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कर्नाटक के कारवार तट पर एक सीगल पक्षी पकड़ा गया, जिसकी पीठ पर हाई-टेक चीनी GPS ट्रैकर लगा हुआ मिला। यह घटना दिसंबर 2025 में सामने आई है और इससे जासूसी की आशंका गहरा गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। चीनी GPS ट्रैकर वाली सीगल की घटना के विवरण यह सीगल पक्षी कारवार क्षेत्र में पकड़ा गया। पक्षी पर लगा ट्रैकर अत्याधुनिक तकनीक वाला है, जो चीन से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रैकर पक्षियों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की निगरानी या डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत में चीनी जासूसी उपकरणों की खबरें आई हैं, लेकिन पक्षी पर ट्रैकर मिलना एक नया और चौंकाने वाला मामला है।यह घटना भारत-चीन सीमा तनाव और समुद्री क्षेत्रों में निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और खुफिया एजेंसियां पहले से ही दक्षिण चीन सागर और भारतीय महासागर में चीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत इस ट्रैकर को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि यह ट्रैकर कितने समय से सक्रिय था और क्या कोई संवेदनशील डेटा भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट जारी किया गया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीनी ड्रोनों और जासूसी उपकरणों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। यह घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सामाजिक मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे चीनी जासूसी का सबूत बताया, जबकि कुछ ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत-चीन संबंधों का संदर्भ यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध सामान्य की दिशा में हैं, लेकिन सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।कर्नाटक तट भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई आधार हैं। इस घटना से समुद्री सुरक्षा पर फिर से बहस छिड़ गई है।फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आएगी। जय राष्ट्र न्यूज इस घटना पर नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स लाता रहेगा।यह चीनी GPS ट्रैकर सीगल पक्षी मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें।

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ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

भारत ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात 38% घटाया: ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 दिसंबर 2025 भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल का आयात मूल्य के हिसाब से 38 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 31 प्रतिशत तक कम कर दिया। यह 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर सबसे ज़्यादा निर्भरता दिखाने वाले भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल क्रूड आयात में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उसका हिस्सा सितंबर 2025 के 40 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर में करीब 35 प्रतिशत रह गया। दूसरी तरफ इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका से आयात में तेज़ उछाल देखा गया है। पिछले तीन साल का ट्रेंड उलट गया 2022 के बाद से रूस भारत को औसतन 1.5 से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बेच रहा था। उस समय पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी उराल ग्रेड क्रूड ब्रेंट से 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था। भारतीय रिफाइनरियों (खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा वाडिनार) ने इसका भरपूर फायदा उठाया था। लेकिन अक्टूबर 2025 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गिरावट के पांच बड़े कारण रिफाइनरियों पर क्या असर? रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बताया कि रूसी भारी-खट्टा क्रूड (उराल) की जगह अब वे इराकी बसरा हेवी, सऊदी अरेबियन मीडियम और अमेरिकी WTI मिडलैंड क्रूड ले रहे हैं। इनमें सल्फर कम है और रिफाइनिंग मार्जिन 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल बेहतर मिल रहा है। नायरा एनर्जी (रूस की रोसनेफ्ट में हिस्सेदार) ने भी कहा कि वह अब स्पॉट मार्केट से मध्य-पूर्व का तेल खरीद रही है। रोसनेफ्ट से लंबे अनुबंध अभी भी जारी हैं, लेकिन मात्रा में 25-30 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। अर्थव्यवस्था को फ़ायदा भारत-रूस संबंधों पर असर? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला “100 प्रतिशत व्यावसायिक” है। रूस के साथ 15 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य अभी भी बरकरार है। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा में S-400 की अतिरिक्त रेजीमेंट, ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात और न्यूक्लियर पावर प्लांट के समझौते हुए हैं। तेल की मात्रा कम होने से द्विपक्षीय संबंधों पर कोई ठेस नहीं पहुँची है। आगे की राह: हरित ऊर्जा और विविधीकरण सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी साल गुजरात और राजस्थान में 50 गीगावाट के सोलर पार्क और 30 गीगावाट के ग्रीन हाइड्रोजन हब को मंजूरी मिली है। लेकिन अभी भी तेल भारत की कुल ऊर्जा मांग का 33 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए अगले 10-15 साल तक विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते कहा था,“हमारा लक्ष्य है कि 2035 तक किसी एक देश से 25 प्रतिशत से ज़्यादा तेल न लें।” निष्कर्ष अक्टूबर 2025 की 38 प्रतिशत कटौती कोई अस्थायी घटना नहीं है। यह भारत की नई ऊर्जा रणनीति का पहला ठोस संकेत है। सस्ता तेल चाहिए, लेकिन सुरक्षित और विविध स्रोतों से। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक कीमतें 65 डॉलर से नीचे चली गईं, तो फिर रूसी तेल की वापसी हो सकती है। लेकिन तब भी पुरानी मात्रा शायद ही लौटे। भारत अब ऊर्जा के खेल में सिर्फ़ खरीदार नहीं, एक स्मार्ट रणनीतिकार बनकर उभरा है। जय राष्ट्र न्यूज़ – भारत की खबर, भारत की आवाज़Instagram: @jairashtranewsYouTube: @JaiRashtraNewsवेबसाइट: jairashtranews.com RussianOilCut #IndiaEnergyPolicy #JaiRashtraNews

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Iran Wants to Destroy US , trump

Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path: ईरान अमेरिका को नष्ट करना चाहता है, मगर उसकी राह में इजरायल सबसे बड़ा रोड़ा है- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच भीषण युद्ध युद्ध हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद कई दिनों तक चला भीषण युद्ध समाप्त हुआ था। इसके बाद अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। दरअसल, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को मौत का पंथ कहते हुए कहा कि “यह अमेरिकी की मौत की बात करता (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) है। अमेरिका को ईरान नष्ट करना चाहता है। मगर उसकी राह में इजरायल रोड़ा है। बता दें कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में मारे गए लोगों के घरों का दौरा किया। वह उन क्षेत्रों में भी गए जहां, ईरानी मिसाइलों से लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान नेतन्याहू ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “यह ईरान पर ऐतिहासिक विजय के बाद ऐतिहासिक दौरे का अंतिम दिन है। मैं और मेरी पत्नी सारा की ओर से, गुश एत्ज़ियों में मारे गए व्यक्ति के परिवार के प्रति दिल से संवेदनाएं प्रकट करता हूं। आतंक के खिलाफ लड़ाई गाज़ा, यहूदा , और सामरिया में और उससे भी आगे सभी मोर्चों पर जारी है।” हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाते नेतन्याहू ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि “मैंने जीवित और शहीद दोनों बंधकों के परिवारों से मुलाकात की। मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि हम सभी को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं एक ऐसे कदम को आगे बढ़ा रहा हूं जो एक महत्वपूर्ण रिहाई की ओर ले जाएगा, लेकिन केवल उन्हीं शर्तों पर जो इज़रायल निर्धारित करता है। हमास को निरस्त्र किया जाए, गाज़ा को सैन्य मुक्त किया (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाए। अगर यह कूटनीति से संभव नहीं हुआ तो यह बल प्रयोग से किया जाएगा। हम पहले भी ऐसे ही कार्य करते आए हैं और आगे भी ऐसे ही करेंगे। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।” इसके अलावा एक साक्षात्कार के दौरान ​उन्होंने यह भी कहा कि “अब्राहम समझौते में सीरिया को शामिल करने से पहले उन्हें हिज़्बुल्लाह और भयानक तानाशाह हाफ़िज़ अल-असद को हराया था।” अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि “सीरिया तब तक अब्राहम समझौतों में शामिल नहीं हो सकता था, जब तक हिज़्बुल्लाह और हाफ़िज़ असद जैसे तत्वों को पराजित नहीं किया जाता।” यहाँ बता दें कि “हाफ़िज़ असद ने 1973 के अरब-इज़रायल युद्ध में इज़रायल से लड़ाई लड़ी थी और उनका निधन वर्ष 2000 में हो गया था।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है बंधकों की अगली (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) रिहाई- इज़राइली प्रधानमंत्री बड़ी बात यह कि इस बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ़ संकेत दिया है कि “अगली बंधक रिहाई कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है।” उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दौर में वह बचे हुए 50 में से लगभग आधे बंधकों को वापस ला सकते (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) हैं। बंधकों की रिहाई पर नेतन्याहू ने कहा कि “हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही बड़ी संख्या में अपने लोगों को घर ला सकेंगे।” गौर करने वाली बात यह कि हमास ने भी संकेत दिया है कि “वह 10 बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त ये है कि पहले समझौते की कुछ शर्तें पूरी की जाएं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत एक नए समझौते की ओर इशारा कर रही है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि क्या हमास वाकई में बंधकों को सही सलामत रिहा करता है या फिर कोई खेल खेलता है। इस बात में रंच मात्र भी गुंजाईश नहीं है कि हमास ने यदि जरा भी चालाकी की तो इजरायल एक और बड़ा हमला करने से चूकेगा नहीं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path #Netanyahu #IranThreat #IsraelDefense #USMiddleEast #BenjaminNetanyahu #IranVsUS

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Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid

Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension: 50 फीसदी टैरिफ लगाने पर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप दी यह चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिरवैश्विक व्यापार पर कड़ा कदम उठाते हुए एक साथ कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। सबसे पहले उन्होंने लीबिया, अल्जीरिया, इराक, श्रीलंका (30%), ब्रुनेई, मोल्दोवा (25%) और फिलीपींस (20%) पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने ब्राजील पर भी 50 प्रतिशत का सीधा टैरिफ थोप (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) दिया। जानकारी के लिए बता दें कि ये सभी शुल्क 1 अगस्त से लागू होंगे। इस बीच ट्रंप की घोषणा के चंद घंटों बाद ही ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आँख दिखाते हुए अमेरिका को आर्थिक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। गुस्से से लाल सिल्वा ने दो टूक कहा कि “यदि अमेरिका ने ब्राजील पर एकतरफा तौर पर टैरिफ बढ़ाया तो ब्राजील भी उसी स्तर पर जवाबी कदम उठाएगा। गौरतलब हो कि ट्रंप ने यह फैसला ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के साथ हो रहे व्यवहार के संदर्भ में लिया बताया। बता दें कि बोलसोनारो इस समय तख्तापलट की साजिश रचने के आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।  अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा इस बीच ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के ऑफिस ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में सख्त रुख अपनाते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि “अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा।” कहने की जरूरत नहीं, उनके इस बयान के बाद अमेरिका और ब्राजील के बीच संभावित व्यापार युद्ध की आशंका और गहरा गई है। दरअसल, ट्रंप का आरोप है कि ब्राजील, अमेरिका के साथ निष्पक्ष व्यापार नहीं कर रहा। बता दें कि ट्रंप की घोषणा के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा कि “ब्राजील एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, जो किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा।” लूला ने यह भी लिखा कि “ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है, जिसकी अपनी स्वतंत्र संस्थाएं हैं। हम किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को मान्यता नहीं देंगे।” देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) होगा इस बीच राष्ट्रपति लूला ने यह भी स्पष्ट किया कि “पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह ब्राजील की न्यायपालिका के अधीन है और इस पर कोई बाहरी दबाव असर नहीं (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) डालेगा। उन्होंने कहा कि “तख्तापलट की साजिश में शामिल लोगों पर चल रहे मुकदमे हमारे न्याय तंत्र के अधिकार क्षेत्र में हैं। इन्हें किसी धमकी या बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।” इस दौरान उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अपना रुख साफ करते हुए कहा कि “ब्राजील में स्वतंत्रता का मतलब नफरत, हिंसा या अपमानजनक भाषा फैलाने की छूट नहीं है। राष्ट्रपति ने ब्राजील के कानूनों पर जोर देते हुए कहा कि “सरकार किसी भी प्रकार की ऑनलाइन हेट स्पीच, नस्लवाद, बाल शोषण या अन्य अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगी। देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया जायज  डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को जायज (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया। न सिर्फ जायज ठहराया बल्कि उलटे ब्राजील पर आरोप लगाया कि “ब्राजील ने अमेरिकी चुनावों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किया है।” जवाब में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप के आरोपों को निराधार और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाला बताते हुए कहा कि “पिछले 15 सालों में अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में रहा है। अमेरिका को इस दौरान कुल 410 अरब डॉलर का लाभ हुआ है और यह कोई दावा नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी सरकारी आंकड़े बताते हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension #LulaDaSilva #TrumpTariff #TradeTensions #BrazilUSRelations #GlobalTrade

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Trump Ukraine weapons

Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine: सीजफायर की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन को और भेजेंगे हथियार, ऐसे मिलेगा नोबेल?

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच आग ने घी डालने का काम करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को और हथियार भेजने का ऐलान किया है। मजे की बात यह कि पिछले हफ्ते ही हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कही गई थी। खैर, इस बीच, रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। दरअसल, अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि “यूक्रेन को और हथियार भेजे जाएंगे।” ध्यान देने वाली बात यह कि उनका यह बयान ऐसे समय में आया (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) है, जब कुछ दिन पहले ही पेंटागन ने यूक्रेन को दी जाने वाली कुछ अहम हथियारों की सप्लाई रोक दी थी। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमलों को और तेज कर दिया है, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं।  हाल के दिनों में रूस ने यूक्रेन पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) हैं गौरतलब हो कि कि पिछले हफ्ते ही पेंटागन ने कहा था कि “अमेरिका के पास हथियारों का स्टॉक कम हो रहा है, इसलिए यूक्रेन को कुछ हथियारों की डिलीवरी रोकी जा रही है।” इनमें एयर डिफेंस सिस्टम और सटीक निशाना लगाने वाले तोपखाने शामिल थे। लेकिन सोमवार को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि “हमें यूक्रेन को और हथियार भेजने होंगे। उन्हें अपनी हिफाजत के लिए लड़ने का हक है।” ऐसे में कहने की जरूरत नहीं उनका यह बयान यूक्रेन के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो रूस के लगातार हमलों का सामना कर रहा (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) है। दोनों देशों के बीच बढ़ते युद्ध को देखते हुए रूस ने हाल के दिनों में यूक्रेन पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इस हमले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि “पिछले एक हफ्ते में रूस ने 1270 ड्रोन, 39 मिसाइलें, और करीब 1000 शक्तिशाली ग्लाइड बम यूक्रेन पर दागे। इन हमलों में कम से कम 11 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें 7 बच्चे भी शामिल हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि “रूस के हमलों में ओदेसा में एक व्यक्ति की मौत हुई जबकि खारकीव में एक व्यक्ति मारा गया और 71 लोग घायल हुए।” इस दौरान उन्होंने आगे बताया कि “सूमी में ड्रोन हमलों में 2 लोग मारे गए और 2 घायल हुए जबकि दोनेत्स्क में 7 लोग मारे गए और 9 घायल हुए।’ जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार को रूस ने यूक्रेन के सैन्य भर्ती केंद्रों पर भी हमले किए। बड़ी बात यह कि ये पिछले 5 दिनों में ऐसा तीसरी बार हुआ है। दरअसल, इसका मेन मकसद यूक्रेन की सेना में नई भर्ती को रोकना था। हालांकि इसके जवाब में यूक्रेन ने भी रूस के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इस बीच रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उन्होंने रातोंरात 13 रूसी क्षेत्रों में 91 यूक्रेनी ड्रोन मार (Trump Talks Peace But Sends More Weapons to Ukraine) गिराए। ऐसा नहीं है कि यूक्रेन हाथ पर हाथ धीरे बैठा है, यूक्रेन ने पहले भी रूस के सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों पर ताबड़तोड़ ड्रोन हमले किए हैं। यही नहीं, हाल ही में ऑपरेशन स्पाइडरवेब में यूक्रेन ने रूस के 4 एयरबेस पर 117 ड्रोन्स से हमला किया था, जिसमें कई रूसी फाइटर जेट तबाह हो गए थे। यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच रूसी परिवहन मंत्री रोमन स्टारोवोइत की सोमवार को मौत हो गई। रूसी अधिकारियों ने इसे आत्महत्या बताया। ध्यान देने वाली बात यह कि उनकी मौत की खबर उनके बर्खास्त होने के चंद घंटों बाद ही आई। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्टारोवोइत को मई 2024 से परिवहन मंत्री बनाया था। उनकी बर्खास्तगी की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई। रूसी मीडिया का कहना है कि “यह कुर्स्क क्षेत्र में डिफेंस वॉल के लिए दी गई रकम में गबन की जांच से जुड़ा हो सकता है।” गौरतलब हो कि कुर्स्क में अगस्त 2024 में यूक्रेन की अचानक घुसपैठ के दौरान रूस की रक्षा लाइन कमजोर साबित हुई थी, जिसके लिए स्टारोवोइत को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था। #Trump #Ukraine #NobelPeacePrize #WeaponsAid #USPolitics #Ceasefire #TrumpNews #UkraineWarZ Latest News in Hindi Today Hindi news 

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US Tariff Relief for 14 Nations Until August 1

अमेरिका से ट्रेड डील कर रहे देशों को 1 अगस्त तक टैरिफ से राहत, बांग्लादेश, म्यांमार और जापान समेत 14 देशों पर 25% से 40% टैक्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्लोबल टैरिफ (US Tariffs) बढ़ाने की अंतिम तारीख में एक बार फिर से बढ़ोत्तरी की है। ट्रंप ने इस तारीख को 9 जुलाई से बढ़ाकर अब 1 अगस्त कर दिया है। साथ ही बांग्लादेश और जापान समेत 14 देशों पर टैरिफ (US Tariffs) लागू करने की घोषणा भी की है। ट्रंप प्रशासन ने बताया कि टैरिफ से प्रभावित सभी देशों को हमारी तरफ से लेटर भेजकर औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत समेत जिन देशों को 21 दिनों का अतिरिक्त मोहलत दी है, उनके साथ अमेरिका ट्रेड डील कर रहा है। कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) में सहमति बन चुकी है और आज इस संबंध में घोषणा हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस सप्ताह कई देशों के साथ ट्रेड डील की घोषणा कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन भी ट्रेड डील करने के काफी नजदीक पहुंच गए हैं। वहीं स्विटजरलैंड, पाकिस्तान और ताइवान समेत कई दूसरे देश भी अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने की कोशिश कर रहे हैं।  अमेरिका ने लगाया 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ बता दें कि अमेरिका ने घोषणा की थी कि जिन देशों के साथ वह ट्रेड डील नहीं कर रहा है, उन पर 9 जुलाई को टैरिफ (US Tariffs) लगा देगा। हालांकि ट्रंप ने उससे दो दिन पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वह उन देशों को 1 अगस्त तक के लिए टैक्स से राहत दे रहे हैं, जिनके साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) चल रही है। वहीं जिन देशों के साथ अमेरिका इस तरह का डील नहीं कर रहा है, उन पर 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ 9 जुलाई से लागू हो जाएगा। अमेरिका ने म्यांमार और लाओस पर सबसे ज्यादा 40% टैरिफ लगाया है। इसी तरह थाईलैंड और कंबोडिया 36%, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%, इंडोनेशिया पर 32%, साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30% टैरिफ लगाया है। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया पर 25% टैरिफ लगाया है।  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पहली बार अप्रैल माह में दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले सभी समानों पर 10% बेसलाइन टैक्स लगाने और 60 देशों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का ऐलान किया था। ट्रंप के इस  घोषणा के बाद पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई थी। शेयर और बॉन्ड बाजार भरभरा कर गिरने लगे थे, जिसके कारण ट्रंप ने अपने टैरिफ पॉलिसी को कुछ समय तक टालते हुए दूसरे देशों को 8 जुलाई तक अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने का मौका दिया था।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ US ने ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ शुरुआती ट्रेड डील की अमेरिका अभी तक सिर्फ ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ ही ट्रेड डील कर पाया है। हालांकि, इन डील्स के बारे में अमेरिका द्वारा ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। चीन और वियतनाम के साथ हुए समझौते में तो किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया है कि किन शर्तों पर सहमति बनी है। वहीं, अमेरिका का अपने करीबी देशों जापान और साउथ कोरिया के साथ भी ट्रेड डील नहीं हो पाया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ट्रंप इन दोनों देशों के सबसे अहम प्रोडक्ट्स जैसे कि कार, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भारी टैक्स लगाना चाहते थे, जिसे ये देश मानने को तैयार नहीं थे। जिसकी वजह से अमेरिका इनके साथ ट्रेड डील नहीं कर पाया। वहीं भारत को लेकर ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जल्द ही इसके बारे में घोषणा की जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #USTariffRelief #TradeDeal #BangladeshTrade #JapanUS #MyanmarTrade #ImportTax #TariffUpdate #GlobalTrade

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Trump warns 10% extra tariff on countries aligning with BRICS

Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations: ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़ने वाले देश पर लगाएंगे 10% अतिरिक्त टैरिफ- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अपने ऊटपटांग फैसलों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया शिगूफा छोड़ा है। एक बार फिर उन्होंने 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकी दी है। दरअसल, 7 जुलाई (रविवार) को कहा कि “ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ने वाले देशों से 10% अतिरिक्त टैरिफ वसूला जाएगा।” यह बात ट्रंप ने ट्रुथ सोशल के एक पोस्ट में (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) कही। ट्रंप ने कहा कि “ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया जाएगा। इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा। इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद।” बता दें कि ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों से जुड़े देशों पर ट्रंप ने कहा कि “इस नीति के लिए कोई अपवाद नहीं होगा यानी हर देश पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।” वैश्विक प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने 90-दिन के लिए इसे रोक दिया (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) था मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दुनियाभर के विभिन्न देशों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ पत्र और समझौते, सोमवार, 7 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे (पूर्वी) से वितरित किए जाएंगे।” मजे की बात यह कि टैरिफ रोकने की समयसीमा क़रीबा आता देख ट्रंप ने कहा (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है कि “उनके पास 12 देशों के लिए टैरिफ पत्र तैयार हैं। ट्रंप ने कहा है कि पत्र सोमवार को दोपहर 12 बजे जारी किए जाएंगे। गौरतलब हो कि 2 अप्रैल को ट्रंप ने अमेरिका के सभी ट्रे़डिंग पार्टनर देशों के लिए संशोधित और बढ़ी हुई टैरिफ दरों की घोषणा की थी। वैश्विक प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने 90-दिन के लिए इसे रोक दिया था। ये रोक 9 जुलाई को खत्म हो रही है, उससे पहले ही ट्रंप फिर से ट्रैरिफ लगाने की बात कह रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ 11 देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है बता दें कि वर्तमान समय में ब्राजील में ब्रिक्स समिट का आयोजन किया जा रहा है। ब्रिक्स की स्थापना ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर की थी। इसके बाद साल 2023 में इसमें इंडोनेशिया, ईरान, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी जुड़ गए। ध्यान देने वाली बात यह कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित उभरते 11 देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती (Trump Warns 10% Tariff for Pro-BRICS Nations) है।  और बड़ी बात यह कि इसमें वैश्विक आर्थिक उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा है। इस बीच ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में बिना नाम लिए अमेरिका और ट्रंप की आलोचना की है। ब्रिक्स घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई है। ब्रिक्स समिट में  पीएम मोदी ने कहा कि “भारत ने हमेशा मानवता के लिए काम किया। वैश्विक संस्थाओं में बड़े बदलाव की जरूरत है। ग्लोबल साउथ को केवल प्रतीकात्मक सहयोग मिला। वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधार करने होंगे।” पीएम मोदी ने आतंकवाद पर जोर देते हुए कहा कि “आतंकवाद मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती है और आतंकवाद पीड़ितों और समर्थकों को एक ही तराजू में नहीं तौलना चाहिए।” इसके साथ ही ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा पत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। पीएम मोदी ने ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। न सिर्फ लताड़ लगाई बल्कि वैश्विक नेताओं से आतंक के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump #Trump #BRICS #Tariff #TradeWar #USPolicy #GlobalPolitics #BRICSvsUSA

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