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तेलंगाना में तूफान का कहर! पेड़ उखड़े, छतों की चादरें उड़ीं

हैदराबाद: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में तेज हवाओं, धूल और बारिश ने अचानक तबाही मचा दी। बुधवार शाम मोरमपल्ली बंजारा गांव में इतनी तेज हवाएं चलीं कि कई पेड़ उखड़ गए, घरों की छतों पर लगी टिन की चादरें उड़ गईं और सड़कों पर मलबा बिखर गया। स्थानीय लोगों ने हवाओं को ‘बवंडर जैसा’ बताया, हालांकि अधिकारियों ने इसे tornado घोषित नहीं किया है। अचानक अंधेरा छाया, फिर चलीं तेज हवाएं घटना 23 सितंबर 2026 की शाम भद्राद्री कोठागुडेम जिले के Burgampadu मंडल स्थित मोरमपल्ली बंजारा गांव में हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज धूल भरी हवाएं चलने लगीं। कुछ ही देर में पेड़ गिरने लगे और कई घरों की छतों की चादरें हवा में उड़ गईं। सड़क पर पलटा ठेला, ट्रैफिक भी प्रभावित तेज हवाओं के कारण सड़क किनारे लगा एक ट्रैफिक स्टैंड भी गिर गया। पेड़ों, धूल और दूसरे मलबे के सड़क पर जमा होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में सड़क पर बिखरा मलबा और पलटा हुआ ठेला दिखाई दिया। एक फल विक्रेता घायल The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक घटना में एक फल विक्रेता के घायल होने की सूचना है, जबकि कुछ अन्य लोगों को भी मामूली चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की मौत की सूचना नहीं है। कई घरों को पहुंचा नुकसान तेज हवाओं ने इलाके में कई मकानों को भी नुकसान पहुंचाया। घरों पर लगी धातु की चादरें उड़ गईं और पेड़ गिरने से लोगों में दहशत फैल गई। Deccan Chronicle के मुताबिक हवाएं करीब एक घंटे तक प्रभावी रहीं और इस दौरान कई लोग सुरक्षा के लिए अपने घरों के अंदर ही रहे। राजुपेटा ब्रिज को भी नुकसान भारी बारिश का असर केवल मोरमपल्ली बंजारा तक सीमित नहीं रहा। जिले के Mulakalapally इलाके में Akeru stream पर बना Rajupeta Bridge भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ। इससे आसपास के कुछ गांवों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित हुई। क्या यह Tornado था? घटना के कई वीडियो और स्थानीय लोगों के बयानों में हवाओं को ‘tornado-like’ यानी बवंडर जैसी बताया गया। हालांकि अधिकारियों या मौसम विभाग की ओर से अभी इस घटना को आधिकारिक रूप से tornado घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल तेज आंधी या gale-force winds की घटना के रूप में ही देखा जा रहा है। भारी बारिश के अलर्ट के बीच बंद रहे स्कूल भारी बारिश और मौसम संबंधी चेतावनियों को देखते हुए भद्राद्री कोठागुडेम जिला प्रशासन ने 23 और 24 सितंबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की थी। यह आदेश सरकारी, निजी और आवासीय स्कूलों पर लागू किया गया था। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने के निर्देश भी दिए थे। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का दिखा असर इसी अवधि में बंगाल की खाड़ी में बने Deep Depression के कारण दक्षिण और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 24 सितंबर को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा क्षेत्र में मौजूद Deep Depression को लेकर मौसम चेतावनियां जारी की थीं। तेलंगाना के कई हिस्सों में भी बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। फिलहाल प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। source – The New Indian Express / Deccan Chronicle / India Meteorological Department जय राष्ट्र न्यूज़

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ऋषिकेश का रामझूला बंद, मरम्मत का काम जारी! 60% काम पूरा, अब फरवरी 2027 तक बढ़ी समयसीमा

ऋषिकेश: उत्तराखंड के प्रसिद्ध रामझूला पुल पर इन दिनों मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम जारी है। मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाला यह पुल फिलहाल आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद है। लोक निर्माण विभाग (PWD) का दावा है कि करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन निर्माण में देरी के चलते पुल को खोलने की समयसीमा अब बढ़ाकर फरवरी 2027 कर दी गई है। 25 जुलाई से पूरी तरह बंद है रामझूला रामझूला को मरम्मत कार्य के चलते 25 जुलाई 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इससे पहले पुल पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पहले ही सुरक्षा कारणों से रोक दी गई थी और केवल पैदल यात्रियों को आने-जाने की अनुमति थी। PWD ने पुल के डेक, सस्पेंडर वायर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को बदलने तथा मजबूत करने का काम शुरू किया है। पहले दिसंबर तक पूरा होना था काम शुरुआत में अधिकारियों ने मरम्मत कार्य पूरा कर दिसंबर 2026 तक पुल को दोबारा खोलने का लक्ष्य रखा था। जुलाई में अधिकारियों ने भी कहा था कि मरम्मत, अपग्रेडेशन और नवीनीकरण के बाद पुल को दिसंबर तक खोलने की योजना है। हालांकि सितंबर में सामने आई ताजा जानकारी के मुताबिक निर्माण कार्य की गति अपेक्षा से धीमी रहने के कारण अब समयसीमा को फरवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है। PWD का दावा- 60 प्रतिशत काम पूरा PWD के नरेंद्रनगर डिवीजन के मुताबिक रामझूला के मरम्मत कार्य का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। 22 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल पुल के डेक को बदलने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पुल को तय समय से पहले भी खोला जा सके। करीब ₹10-11 करोड़ की लागत से हो रही मरम्मत रामझूला के मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए करीब ₹10 से ₹11 करोड़ की परियोजना तैयार की गई है। इसमें पुल के सस्पेंडर वायर, डेक और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मरम्मत शामिल है। करीब 220 मीटर लंबा यह सस्पेंशन ब्रिज 1980 के दशक में बनाया गया था और वर्षों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। व्यापारियों पर पड़ा असर रामझूला बंद होने का सीधा असर मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र के व्यापारियों पर भी पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि पुल बंद होने के बाद इलाके में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है। स्थानीय व्यापारी चाहते हैं कि निर्माण कार्य की गति बढ़ाई जाए और पुल जल्द से जल्द खोला जाए। पर्यटकों को लेना पड़ रहा वैकल्पिक रास्ता रामझूला बंद रहने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जानकी सेतु और लक्ष्मणझूला क्षेत्र के वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ गया है और बुजुर्ग यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों की वापसी की भी उम्मीद मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद रामझूला पर पैदल यात्रियों के साथ दोपहिया वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। पहले पुल पर दोपहिया वाहन चलते थे, लेकिन सस्पेंडर वायर क्षतिग्रस्त होने और सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट के बाद उन पर रोक लगा दी गई थी। फिलहाल रामझूला पूरी तरह बंद है और PWD मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। अब स्थानीय लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों की नजर इस बात पर है कि पुल फरवरी 2027 की नई समयसीमा से पहले खुल पाता है या नहीं। source – Amar Ujala / Live Hindustan / Hindustan Times / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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₹10 हजार के बकाया वेतन का विवाद, मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान!

सूरत: गुजरात के सूरत में महज ₹10 हजार के कथित बकाया वेतन को लेकर शुरू हुआ विवाद करोड़ों रुपये के नुकसान में बदल गया। पुलिस के मुताबिक एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने पुराने मालिक को “सबक सिखाने” के इरादे से श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। भीषण आग में कई दुकानें और भारी मात्रा में कपड़ा जल गया, जिसका नुकसान करीब ₹24 करोड़ आंका गया है। मामले में 33 वर्षीय पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। 9 सितंबर को लगी थी भीषण आग सूरत के सारोली इलाके स्थित श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में 8 और 9 सितंबर की दरमियानी रात भीषण आग लगी थी। शुरुआत में इसे सामान्य आग की घटना माना जा रहा था, लेकिन CCTV फुटेज और पुलिस जांच में मामला कथित आगजनी का निकला। आग इतनी भीषण थी कि बाजार में रखा करोड़ों रुपये का कपड़ा और अन्य सामान जलकर खाक हो गया। अलग-अलग रिपोर्ट्स में प्रभावित दुकानों की संख्या 14 से 17 के बीच बताई गई है, जबकि पुलिस ने कुल नुकसान लगभग ₹24 करोड़ बताया है। पूर्व अकाउंटेंट पर आग लगाने का आरोप सूरत क्राइम ब्रांच ने मामले में 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह महाराष्ट्र के धुले जिले का रहने वाला है और अप्रैल 2026 से मार्केट की एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था। उसे करीब ₹30 हजार प्रतिमाह वेतन मिलता था। बाद में काम को लेकर मालिक और दूसरे अकाउंटेंट से विवाद होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। आरोपी का दावा था कि उसके करीब ₹10 हजार अभी भी बकाया थे। ₹150 का पेट्रोल खरीदकर रची साजिश पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी ने कथित तौर पर केवल ₹150 का पेट्रोल खरीदा और रात में मार्केट पहुंचा। CCTV में एक व्यक्ति चेहरा ढककर बैग के साथ मार्केट में प्रवेश करता दिखाई दिया। पुलिस का आरोप है कि उसने कपड़ों के पैकेट पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जो देखते ही देखते आसपास की दुकानों तक फैल गई। पहले भी की थी आग लगाने की कोशिश India Today की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर इससे पहले भी दुकान में आग लगाने की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दोबारा योजना बनाई और पेट्रोल का इस्तेमाल कर आग लगाने का आरोप है। CCTV से पुलिस आरोपी तक पहुंची आग लगने के बाद पुलिस ने मार्केट और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज और अन्य सूचनाओं के आधार पर जांच एजेंसियां विनोद सावले तक पहुंचीं। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद आरोपी अपना मोबाइल बंद कर परिवार के साथ सूरत से निकल गया था। वह राजस्थान के खाटू श्याम और बाद में अयोध्या गया। कुछ दिनों बाद सूरत लौटने पर उसे डिंडोली इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। ₹10 हजार का विवाद, ₹24 करोड़ का नुकसान सूरत के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त करणराज वाघेला के मुताबिक आग से कुल नुकसान करीब ₹25 करोड़ तक हो सकता है, जबकि नष्ट हुए टेक्सटाइल की कीमत लगभग ₹24 करोड़ आंकी गई है। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि पेट्रोल किस तरह खरीदा गया और पूरी घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। व्यापारियों को हुआ भारी नुकसान श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में बड़ी मात्रा में नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के लिए तैयार कपड़ों का स्टॉक रखा हुआ था। आग के कारण कई व्यापारियों का माल पूरी तरह नष्ट हो गया। एक दुकान मालिक ने अकेले करीब ₹6 करोड़ के नुकसान का दावा किया है। हालांकि व्यापारियों के व्यक्तिगत नुकसान का अंतिम आंकड़ा जांच और मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस जांच जारी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पूरी वारदात का reconstruction भी कराया है। मामले में आगजनी के पीछे कथित वेतन विवाद और कार्यस्थल पर अपमान के आरोपों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान से शुरू हुए विवाद ने पूरे टेक्सटाइल मार्केट के व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। source – The Indian Express / India Today / Times of India / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को उनके पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर और भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया सम्मान 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान करते हुए उनके अभिनय और भारतीय सिनेमा में योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि अनंत नाग का अभिनय थिएटर और सिनेमा की बेहतरीन विशेषताओं का संगम है। उन्होंने उनके अभिनय को स्वाभाविक, संयमित और प्रामाणिक बताया। पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर अनंत नाग ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्होंने सबसे ज्यादा कन्नड़ सिनेमा में अभिनय किया, लेकिन हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। 1970 के दशक में फिल्मों में सक्रिय हुए अनंत नाग ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। उनका सहज अभिनय और संवाद अदायगी उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। ‘अंकुर’ और ‘मालगुडी डेज’ से मिली खास पहचान अनंत नाग ने कन्नड़ फिल्मों के साथ-साथ हिंदी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण काम किया। श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ सहित कई चर्चित फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। टीवी सीरीज ‘मालगुडी डेज’ में उनके अभिनय ने भी उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया। उनके करियर में गंभीर, हास्य और चरित्र भूमिकाओं का खास मिश्रण देखने को मिला। सम्मान कर्नाटक को किया समर्पित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की घोषणा के बाद अनंत नाग ने इस सम्मान को कर्नाटक और वहां के लोगों को समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने उनके अभिनय करियर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनंत नाग लंबे समय से कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी बधाई दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए अनंत नाग के नाम की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों से अनंत नाग के सहज अभिनय, बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है। भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में किसी कलाकार को उसके जीवनभर के योगदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। अनंत नाग को यह पुरस्कार मिलने के साथ उनका नाम उन चुनिंदा कलाकारों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने लंबे समय तक भारतीय सिनेमा को अपने अभिनय से समृद्ध किया है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अनंत नाग के अलावा ममूटी, कार्तिक आर्यन और यामी गौतम समेत कई कलाकारों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। source – President of India / PIB / NDTV / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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मेरठ एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा टला! मालवाहक वाहन पलटा, चालक सुरक्षित

गाजियाबाद: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। एबीईएस कॉलेज के सामने एक छोटा मालवाहक वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। गनीमत रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और चालक भी सुरक्षित बच गया। वाहन के बीच सड़क पर पलटने से एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित हुआ और कुछ समय के लिए वाहनों की लंबी कतार लग गई। कमानी का पट्टा टूटने से पलटा वाहन पुलिस के मुताबिक मालवाहक वाहन दिल्ली से डासना की ओर जा रहा था। दोपहर करीब 2 बजे वाहन जैसे ही एबीईएस कॉलेज के सामने पहुंचा, उसकी कमानी का पट्टा अचानक टूट गया। इसके बाद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और वाहन एक्सप्रेसवे पर पलट गया। हादसे के दौरान चालक ने किसी तरह खुद को सुरक्षित बाहर निकाला। पीछे से आ रहे वाहनों के लिए बढ़ा खतरा वाहन के एक्सप्रेसवे की लेन में पलटने के बाद पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे दूसरे वाहनों के लिए स्थिति खतरनाक हो गई थी। हालांकि समय रहते यातायात धीमा हो गया और कोई दूसरा वाहन पलटे हुए मालवाहक वाहन से नहीं टकराया। इस वजह से संभावित बड़ा हादसा टल गया। पुलिस के अनुसार घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। एक्सप्रेसवे पर लगा लंबा जाम हादसे के बाद एक्सप्रेसवे की एक लेन प्रभावित हो गई। पीछे से आने वाले वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही थी, जिसके चलते एबीईएस कॉलेज के आसपास वाहनों की कतार लग गई। कई वाहन चालकों को धीमी गति से निकलना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने क्रेन से हटवाया वाहन घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रैफिक व्यवस्था संभाली। पुलिस ने क्रेन की मदद से सड़क पर पलटे वाहन को हटवाया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब ढाई बजे तक वाहन को किनारे कर रास्ता साफ कर दिया गया और दोपहर लगभग तीन बजे तक यातायात सामान्य हो गया। ACP ने दी घटना की जानकारी एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि वाहन की कमानी का पट्टा टूटने की वजह से मालवाहक वाहन पलट गया था। उन्होंने कहा कि हादसे में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और पुलिस ने वाहन को हटवाकर यातायात दोबारा सुचारू करा दिया। व्यस्त एक्सप्रेसवे पर टला गंभीर हादसा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में तेज रफ्तार वाहन चलते हैं। ऐसे में बीच सड़क पर किसी वाहन का अचानक पलटना बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था। इस मामले में चालक के सुरक्षित बचने और पीछे से आने वाले किसी वाहन के न टकराने के कारण बड़ा नुकसान नहीं हुआ। घटना ने एक बार फिर हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर वाहनों की तकनीकी स्थिति और नियमित मेंटेनेंस के महत्व की ओर ध्यान खींचा है। source – Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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7 महीने में 3 घटनाएं, IIT Bombay में छात्र सुरक्षा पर गंभीर सवाल

मुंबई: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान IIT Bombay में सात महीनों के भीतर तीन छात्रों की मौत ने छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद सैकड़ों छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया और प्रशासन से पारदर्शी जांच तथा बेहतर छात्र सहायता व्यवस्था की मांग की। सितंबर की घटना के बाद कैंपस में प्रदर्शन 18 सितंबर 2026 को Energy Science and Engineering विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत हुई। इससे पहले उसी दिन परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर उनसे पूछताछ हुई थी। IIT Bombay ने शुरुआती बयान में कहा था कि छात्र को समझाया गया था और उस समय कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। घटना के बाद 400 से अधिक छात्र कैंपस में जुटे और संस्थान की प्रक्रिया, मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। मध्य-सेमेस्टर परीक्षाएं भी स्थगित की गईं। फरवरी में भी हुई थी छात्र की मौत इससे पहले 4 फरवरी 2026 को IIT Bombay के दूसरे वर्ष के Civil Engineering छात्र नमन अग्रवाल की हॉस्टल परिसर में गिरने के बाद मौत हुई थी। पुलिस ने उस समय Accidental Death Report दर्ज की थी और कमरे से एक हस्तलिखित नोट मिलने के बाद परिस्थितियों की जांच शुरू की थी। जुलाई में दूसरे वर्ष के छात्र की मौत इसके करीब पांच महीने बाद जुलाई 2026 में 20 वर्षीय दूसरे वर्ष के छात्र सोहिल राजकुमार सांगवान अपने हॉस्टल कमरे में मृत पाए गए। पुलिस ने मामले में ADR दर्ज कर छात्र के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा था। सात महीने में तीन मामले सितंबर में हुई घटना के साथ IIT Bombay में सात महीनों के भीतर तीन छात्र मौतें दर्ज की गईं। इसी कारण कैंपस में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्रों ने मांग की कि ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र जांच हो, counselling व्यवस्था मजबूत की जाए और अकादमिक या अनुशासनात्मक मामलों में छात्रों के साथ अधिक संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जाए। छात्रों की 18 मांगों पर बनी सहमति साहिल वाकोडे की मौत के बाद तीन दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कई मांगें रखीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक संस्थान ने 18 मांगों पर सहमति जताई, जिनमें स्वतंत्र जांच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, छात्र प्रतिनिधित्व और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने जैसी बातें शामिल थीं। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप साहिल वाकोडे के परिवार ने मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है और जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। IIT Bombay से जुड़े शिक्षकों के एक समूह ने संबंधित प्रोफेसर का बचाव भी किया है। ऐसे में मामले में अलग-अलग दावे सामने आए हैं और जांच जारी है। Crime Branch कर रही जांच मुंबई क्राइम ब्रांच CCTV फुटेज, छात्रों और शिक्षकों के बयान तथा डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी छात्र के परीक्षा कक्ष से निकलने के बाद के घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर रही है। छात्र सुरक्षा पर बढ़े सवाल लगातार हुई इन घटनाओं ने IIT Bombay जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में academic pressure, counselling support, grievance redressal और student welfare mechanisms को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है। फिलहाल सितंबर की घटना की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन सात महीनों में तीन छात्रों की मौत ने कैंपस में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है। source – The Indian Express / NDTV / India Today / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार बाढ़ के बीच दो तस्वीरों ने खींचा ध्यान; एक में बेबसी, दूसरी में मदद की मिसाल

पटना: बिहार में हालिया बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित की है। कई इलाकों में घर पानी में डूबे, परिवार राहत शिविरों में पहुंचे और खेती को भारी नुकसान हुआ। इस संकट के बीच सामने आई दो तरह की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा है—एक तरफ अपना घर-सामान गंवाकर अस्थायी शिविरों में रह रहे परिवारों की बेबसी, तो दूसरी ओर नावों और दूसरे साधनों से बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाते लोगों की तस्वीरें उम्मीद का संदेश दे रही हैं। राहत शिविरों में घर लौटने का इंतजार भागलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है। तिल्हा कोठी समेत कई जगहों पर लोगों ने प्लास्टिक शीट और उपलब्ध सामान से अस्थायी ठिकाने बनाए हैं। Indian Express की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कुछ परिवारों के घर अब भी पानी में डूबे हैं। बाढ़ में दस्तावेज, अनाज, पैसे और घरेलू सामान तक बहने या खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। प्रभावित लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पानी उतरने के बाद उनके पास वापस लौटने के लिए क्या बचेगा। करीब 50 लाख लोगों तक पहुंचा था बाढ़ का असर सितंबर में बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ा था। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 15 जिलों में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। पटना, भागलपुर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत कई जिलों में घर, सड़कें और कृषि भूमि जलमग्न हुईं। इस दौरान गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानी पैदा की। दूसरी तस्वीर में राहत पहुंचाते दिखे सोनू सूद बाढ़ की मुश्किल तस्वीरों के बीच अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सूद भी राहत कार्य के लिए बिहार पहुंचे। बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित इलाकों में उन्होंने नाव से जाकर लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित की और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। सोनू सूद ने कहा कि बिहार को जब भी मदद की जरूरत होगी, वह लोगों के साथ खड़े रहेंगे। उनकी राहत सामग्री बांटते हुए सामने आई तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहीं। प्रशासन और स्थानीय लोग भी राहत कार्य में जुटे बिहार के कई हिस्सों में NDRF, SDRF, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी समूहों ने नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने का काम किया। सितंबर की शुरुआत में स्थिति गंभीर होने के दौरान 13 जिलों में 34 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की सूचना थी। भागलपुर में एक नाव पलटने के बाद SDRF ने उसमें सवार सभी 10 लोगों को सुरक्षित बचाया था। पानी घटा, लेकिन मुश्किलें बाकी कई क्षेत्रों में अब बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन नुकसान की पूरी तस्वीर पानी उतरने के बाद सामने आ रही है। खेतों में फसल खराब होने, घरों को नुकसान और जरूरी सामान बर्बाद होने से प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और रोजमर्रा की जिंदगी दोबारा शुरू करने की चुनौती है। राज्य सरकार ने बाढ़ से फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 23 से 29 सितंबर के बीच कृषि इनपुट अनुदान के आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू की है। दो तस्वीरें, एक ही त्रासदी के अलग चेहरे बिहार बाढ़ की ये तस्वीरें आपदा के दो अलग पहलू दिखाती हैं। एक ओर ऐसे परिवार हैं जो अपना घर और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन, स्वयंसेवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के राहत प्रयास सामने आ रहे हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में पुनर्वास, फसल नुकसान की भरपाई और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करना अगली बड़ी चुनौती होगी। source – The Indian Express / Navbharat Times / Mongabay India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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आदिवासी स्कूल में ₹2.5 लाख की पानी की टंकी? वायरल वीडियो में उठे सवाल

जयपुर: राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में लगी पानी की टंकी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि आदिवासी बच्चों के स्कूल में लगाई गई पानी की टंकी पर करीब ₹2.5 लाख खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। हालांकि ₹2.5 लाख की लागत के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में क्या दावा किया गया? 20 सितंबर को आशुतोष रांका के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में उन्होंने स्कूल परिसर में लगी एक पानी की टंकी दिखाते हुए दावा किया कि इसकी कीमत करीब ₹2.5 लाख है। उन्होंने कहा कि टंकी में तीन आउटलेट दिखाई देते हैं, लेकिन केवल एक नल लगा है और उससे भी पानी नहीं आ रहा। रांका ने सवाल उठाया कि यदि इस व्यवस्था पर वास्तव में इतनी राशि खर्च की गई है तो विद्यार्थियों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा और पैसा कहां खर्च हुआ। ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आया मामला यह मामला CJP के ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आया। सात सदस्यीय टीम ने राजस्थान के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी गांवों में सरकारी स्कूलों का दौरा किया था। टीम ने देमत, पोंगली और बाबरी जैसे गांवों में स्कूल भवन, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार CJP ने आदिवासी विकास के लिए निर्धारित फंड के इस्तेमाल पर भी पारदर्शिता की मांग की और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही। स्कूलों में पानी और शौचालय की समस्या का भी दावा उदयपुर क्षेत्र में किए गए निरीक्षणों के दौरान आशुतोष रांका और उनकी टीम ने कई सरकारी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, पंखे और फर्नीचर जैसी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। Amar Ujala की रिपोर्ट के अनुसार रांका ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन देकर सुधार की मांग भी की। इन निरीक्षणों को लेकर प्रकाशित दूसरी रिपोर्ट्स में कुछ स्कूलों में जर्जर भवन और पर्याप्त कक्षाओं की कमी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। ₹2.5 लाख की कीमत की पुष्टि नहीं वायरल वीडियो में टंकी की कीमत ₹2.5 लाख बताए जाने के बावजूद अभी ऐसी कोई सार्वजनिक आधिकारिक दस्तावेजी जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सके कि संबंधित टंकी की वास्तविक स्वीकृत या खर्च की गई लागत इतनी ही थी। The Nation Mirror ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पानी की टंकी की कीमत और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। इसलिए ₹2.5 लाख की राशि को फिलहाल रांका द्वारा किया गया दावा ही माना जाना चाहिए। राजस्थान के सरकारी स्कूल पहले भी रहे चर्चा में राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हाल के महीनों में कई मामले सामने आए हैं। अगस्त में राज्य सरकार ने स्कूलों की सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और भवनों की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों को स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भौतिक सत्यापन करने को भी कहा गया था। इसके अलावा जयपुर के रामपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल की खराब स्थिति पर विवाद के बाद सरकार ने नए भवन के निर्माण के लिए करीब ₹18 लाख मंजूर किए थे। प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार ₹2.5 लाख की पानी की टंकी के विशेष दावे को लेकर उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में संबंधित विभाग की कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन टंकी की वास्तविक लागत और भुगतान से जुड़े निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। source – The Indian Express / Amar Ujala / The Nation Mirror जय राष्ट्र न्यूज़

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धीरेंद्र शास्त्री की ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा कितना सच? सामने आई सफाई

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उनके पैरों में नजर आई सुनहरे रंग की खड़ाऊ को लेकर दावा किया जाने लगा कि वह सोने की बनी हुई है। वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद अब खुद धीरेंद्र शास्त्री ने इस दावे पर सफाई देते हुए बताया है कि उनकी खड़ाऊ सोने की नहीं, बल्कि लकड़ी की है, जिस पर गोल्डन रंग किया गया है। सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर या वीडियो के आधार पर किए गए दावे अक्सर तेजी से वायरल हो जाते हैं। ऐसा ही मामला अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ को लेकर सामने आया है। सितंबर 2026 में मुंबई दौरे के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। उनके पैरों में सुनहरे रंग की पारंपरिक खड़ाऊ दिखाई दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे ‘सोने की खड़ाऊ’ बताते हुए सवाल उठाने शुरू कर दिए। कहां से शुरू हुई ‘सोने की खड़ाऊ’ की चर्चा? यह मामला मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया में आयोजित गणेश उत्सव से जुड़ा है। कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री कैमरों के सामने दिखाई दिए तो उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ ने लोगों का ध्यान खींचा। तस्वीरों में खड़ाऊ चमकीले गोल्डन रंग में दिखाई दे रही थी। इसी के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि बागेश्वर बाबा सोने की खड़ाऊ पहनते हैं। हालांकि, तस्वीर में किसी वस्तु का सुनहरे रंग का दिखाई देना अपने आप में उसके सोने का बना होने का प्रमाण नहीं है। क्या सच में सोने की थी खड़ाऊ? अब तक सामने आई विश्वसनीय रिपोर्टों में खड़ाऊ के असली सोने से बने होने की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसके उलट धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वयं कहा है कि खड़ाऊ लकड़ी से बनी हुई है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। कुछ रिपोर्टों में भी इसे लकड़ी की पारंपरिक खड़ाऊ बताया गया है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर चल रहा ‘सोने की खड़ाऊ’ वाला दावा प्रमाणित नहीं होता। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या सफाई दी? विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वे मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव में शामिल होने गए थे, लेकिन कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उनकी खड़ाऊ की होने लगी। शास्त्री के अनुसार, उनकी खड़ाऊ सामान्य लकड़ी की है और किसी ने उस पर गोल्डन पेंट कर दिया था। उसी रंग के कारण लोगों ने उसे सोने की खड़ाऊ मान लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में नहीं पहना जाता। ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’ इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया अंदाज भी अपनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब अगर लोग उनकी खड़ाऊ को लेकर इतनी चर्चा कर रहे हैं तो अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बनवाने की सोचेंगे। उनका यह बयान व्यंग्यात्मक अंदाज में दिया गया था। इसके साथ ही उन्होंने आलोचकों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का भी जवाब दिया। तस्वीरों में क्यों लगी सोने की? वायरल वीडियो और तस्वीरों में खड़ाऊ पर चमकदार सुनहरी फिनिश दिखाई देती है। यही कारण माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लोगों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उसे सोने का समझ लिया। 16 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उपलब्ध तस्वीरों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर खड़ाऊ को लकड़ी का बताया गया था, जिस पर गोल्डन फिनिश थी। ऐसे में सिर्फ तस्वीरों के आधार पर खड़ाऊ के वास्तविक पदार्थ या उसकी कीमत के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। क्या है वायरल दावे की सच्चाई? दावा: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोने की खड़ाऊ पहनकर एंटीलिया पहुंचे थे। उपलब्ध तथ्य: वायरल खड़ाऊ के सोने से बने होने का कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि वह लकड़ी की खड़ाऊ है जिस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। इसलिए मौजूदा उपलब्ध जानकारी के आधार पर ‘धीरेंद्र शास्त्री ने सोने की खड़ाऊ पहनी थी’ वाला दावा पुष्ट नहीं है। पूरे विवाद की शुरुआत खड़ाऊ के सुनहरे रंग से हुई और बाद में सोशल मीडिया पर इसे असली सोने से जोड़कर पेश किया जाने लगा। धीरेंद्र शास्त्री की सफाई के बाद फिलहाल यही सामने आता है कि खड़ाऊ लकड़ी की थी, जिस पर गोल्डन पेंट या फिनिश किया गया था।

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सेलेब्रिटीज की ट्रोलिंग पर सलमान खान ने उठाए सवाल, बोले- हर मुद्दे पर हमसे जवाब क्यों?

उन्होंने इस तरह के कथित पेड प्रमोशन और पेड ट्रोलिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसी फिल्म या कलाकार के बारे में दर्शकों के बीच गलत धारणा बन सकती है। यह भी सलमान द्वारा कार्यक्रम में किया गया दावा है। सलमान की बात के समर्थन में आईं रिचा चड्ढा सलमान खान के बयान के बाद अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने भी उनके बॉडी शेमिंग विरोधी रुख का समर्थन किया। रिचा ने खास तौर पर मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में आने वाले बदलावों को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी और महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की बात कही। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने भी ऑनलाइन ट्रोलिंग के मुद्दे पर सलमान की टिप्पणियों का समर्थन करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने की आजादी किसी व्यक्ति को अपमानित करने का आधार नहीं हो सकती। सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस सलमान खान के बयान के बाद से सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज की ट्रोलिंग, बॉडी शेमिंग और उनकी निजी सीमाओं को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक पक्ष का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों के काम पर आलोचना स्वाभाविक है, जबकि व्यक्तिगत रूप, उम्र या शरीर को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों को आलोचना से अलग माना जाना चाहिए। सलमान खान की टिप्पणी ने इसी अंतर पर ध्यान खींचा है—कि किसी कलाकार के काम की समीक्षा और उसकी निजी जिंदगी या शरीर पर व्यक्तिगत हमला दो अलग बातें हैं। फिलहाल बिग बॉस 20 के Weekend Ka Vaar से सामने आए सलमान के ये बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं और मनोरंजन जगत के कई लोगों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग तथा बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।

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