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‘नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा चलाओ’—बृजेश पाठक का बयान वायरल, विपक्ष ने साधा निशाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का रोजगार और स्वरोजगार को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान पाठक ने लोगों से कहा कि वे केवल नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि अपनी गाड़ी चलाकर कमाई करें और परिवार को भी समय दें। सोशल मीडिया पर उनके बयान को “नौकरी मत ढूंढो, ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में शेयर किया जा रहा है, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर निशाना साधा है। 23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ कार्यक्रम में दिया बयान यह बयान 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित ‘भारत टैक्सी’ सेवा के औपचारिक शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत कई नेता मौजूद थे। ‘भारत टैक्सी’ एक cooperative-led ride-hailing platform है, जिसमें ड्राइवरों को ‘सारथी’ के रूप में सदस्य और हिस्सेदार बनाने की व्यवस्था है। सेवा उत्तर प्रदेश में लखनऊ के साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी शुरू की गई। बृजेश पाठक ने आखिर क्या कहा? वायरल वीडियो में बृजेश पाठक लोगों को स्वरोजगार के फायदे बताते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी के चक्कर में ही न पड़े रहें, बल्कि कुछ घंटे अपनी गाड़ी चलाएं, कमाई करें और दोपहर में परिवार तथा बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्होंने दूसरे के अधीन नौकरी करने की तुलना में खुद का काम करने पर जोर दिया। उनकी टिप्पणी का संदर्भ ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner model और स्वरोजगार से जुड़ा था। Times of India ने भी कार्यक्रम की रिपोर्ट में लिखा कि पाठक ने अपनी गाड़ी खुद चलाकर कमाई को स्थानीय परिवारों और अर्थव्यवस्था के भीतर रखने की बात कही थी। क्या उन्होंने सीधे ‘ई-रिक्शा चलाओ’ कहा था? कई सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ खबरों में बयान को “ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में पेश किया गया है। हालांकि उपलब्ध विस्तृत रिपोर्ट में पाठक का सीधा उद्धरण “नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, अपना चार घंटा चलाओ” है और पूरा संदर्भ टैक्सी तथा अपनी गाड़ी चलाने से जुड़ा है। ‘भारत टैक्सी’ प्लेटफॉर्म में टैक्सी के साथ दो-पहिया और तीन-पहिया वाहन चालक भी जुड़ सकते हैं। इसलिए ई-रिक्शा वाली व्याख्या इसी व्यापक परिवहन मॉडल से जोड़ी जा रही है, लेकिन वायरल headline को पाठक का शब्दशः पूरा बयान मानना सही नहीं होगा। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने किया पलटवार बृजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि देश का युवा देश चलाएगा और यदि उपमुख्यमंत्री को रिक्शा चलाने में रुचि है तो वह उन्हें एक रिक्शा उपहार में भेज सकते हैं। यह विपक्षी नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। कांग्रेस ने भी बयान पर उठाए सवाल कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी वायरल वीडियो शेयर करते हुए बृजेश पाठक की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या उपमुख्यमंत्री अपने परिवार के युवाओं को भी यही सलाह देंगे। कांग्रेस की ओर से इस बयान को बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के मुद्दे से जोड़कर देखा गया, जबकि पाठक का मूल भाषण ‘भारत टैक्सी’ के जरिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के संदर्भ में था। ‘भारत टैक्सी’ क्या है? केंद्र सरकार के अनुसार ‘भारत टैक्सी’ देश का पहला cooperative-led ride-hailing platform है। इसमें ड्राइवरों को केवल service provider नहीं बल्कि cooperative का stakeholder बनाने का मॉडल अपनाया गया है। प्लेटफॉर्म zero-commission मॉडल पर काम करता है, यानी ऐप के जरिए मिली ride के किराये में से driver-partner से commission नहीं काटा जाता। सरकार इसे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल के रूप में पेश कर रही है। उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में हुई शुरुआत 23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ को उत्तर प्रदेश में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। लखनऊ के अलावा गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी सेवा की शुरुआत हुई। PIB के मुताबिक लॉन्च के समय उत्तर प्रदेश के लगभग 40 हजार ड्राइवर प्लेटफॉर्म से पंजीकृत हो चुके थे। कार्यक्रम में ड्राइवरों को cooperative model के जरिए आर्थिक भागीदारी देने पर जोर दिया गया। वायरल क्लिप बनाम पूरा संदर्भ बृजेश पाठक का बयान ऐसे समय वायरल हुआ है जब रोजगार और सरकारी नौकरियां उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय हैं। विपक्ष उनके शब्दों को युवाओं को नौकरी की जगह रिक्शा या टैक्सी चलाने की सलाह के रूप में पेश कर रहा है। दूसरी ओर पूरा कार्यक्रम और आधिकारिक संदर्भ देखें तो पाठक ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner मॉडल और स्वरोजगार के विकल्प की बात कर रहे थे। इसलिए वायरल क्लिप का संदर्भ समझना जरूरी है—पाठक ने नौकरी के बजाय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात जरूर कही, लेकिन “ई-रिक्शा चलाओ” वाला वाक्य सोशल मीडिया और मीडिया headlines में की गई संक्षिप्त व्याख्या है। source – PIB / Hindustan / ABP News / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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आशुतोष रांका की हिरासत पर NCP-SP ने उठाए सवाल, अनीश गवांडे ने कार्रवाई को बताया ‘असंवैधानिक’

गुवाहाटी: असम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके साथ कई कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने पर अब NCP (शरदचंद्र पवार) ने भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे ने पुलिस कार्रवाई को “अवैध और असंवैधानिक” बताते हुए रांका और अन्य कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की थी। रांका और उनके साथ हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बाद में रविवार रात रिहा कर दिया गया। गुवाहाटी में बैठक से पहले हिरासत 27 सितंबर को CJP ने गुवाहाटी में अपनी पहली क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई थी। पार्टी के मुताबिक बैठक शांतिपूर्ण तरीके से एक निजी परिसर में होनी थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले आशुतोष रांका और कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्ट्स में 30 से अधिक, जबकि अन्य में 40 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई। NCP-SP प्रवक्ता अनीश गवांडे ने उठाए सवाल NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे ने गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिरासत का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रांका और अन्य CJP कार्यकर्ताओं को एक निजी आवास से बिना कानूनी नोटिस या स्पष्ट कारण बताए हिरासत में लिया गया। गवांडे ने इसे “illegal and unconstitutional” कार्रवाई बताते हुए सभी को तत्काल रिहा करने की मांग की। यह NCP-SP नेता का आरोप था; हिरासत को किसी अदालत ने अवैध घोषित नहीं किया है। ‘जंगल राज’ वाला आरोप भी लगाया गवांडे ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार की आलोचना करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ी टिप्पणी की और इसे कथित तौर पर “जंगल राज” से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि सरकार असहमति की आवाजों से डर रही है। ये NCP-SP प्रवक्ता के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। CJP ने भी हिरासत को बताया गलत CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि रांका और उनकी टीम को हिरासत में लेते समय कोई स्पष्ट कानूनी कारण नहीं बताया गया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया गया तो वह खुद अन्य CJP सदस्यों के साथ असम पहुंचेंगे। रांका ने भी पुलिस वाहन से जारी वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर उन्हें असम के स्कूलों, काजीरंगा और अन्य स्थानीय मुद्दों को उठाने से रोकने का आरोप लगाया। बैठक की जगह भी बदलनी पड़ी CJP की बैठक पहले अथगांव के Assam Shree Parshuram Seva Sadan में होने वाली थी। बाद में आयोजकों ने आरोप लगाया कि दबाव के कारण आयोजन स्थल बदलकर असम सचिवालय के सामने Chowdhury Tilla करना पड़ा। वहीं दोपहर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनीश गवांडे के साथ CJP नेता सैफुर रहमान और नागरिक संगठन Asom Nagarik Sanmilan के परेश मालाकार भी मौजूद रहे। पुलिस ने नहीं दिया विस्तृत सार्वजनिक कारण 27 सितंबर को घटना के समय उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में गुवाहाटी पुलिस की ओर से हिरासत का विस्तृत सार्वजनिक आधार सामने नहीं आया था। The Week ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस ने उस समय हिरासत की वजह पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया था। 12 घंटे से ज्यादा बाद हुई रिहाई आशुतोष रांका और अन्य CJP कार्यकर्ताओं को 12 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद रविवार रात रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद रांका ने पुलिस कार्रवाई को “illegal detention” बताते हुए कहा कि उन्हें उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहां से हिरासत में लिया गया था। “अवैध हिरासत” उनका दावा है और इस पर किसी अदालत का निर्णय सामने नहीं आया है। हिरासत के दौरान भूख हड़ताल का दावा CJP ने दावा किया कि काहिलीपाड़ा स्थित पुलिस परिसर में रखे जाने के दौरान रांका और अन्य कार्यकर्ताओं ने हिरासत के विरोध में भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। पार्टी ने इस कार्रवाई को अपने राजनीतिक और सामाजिक अभियान को रोकने की कोशिश बताया। असम की राजनीति में बढ़ी हलचल रांका की हिरासत का विरोध केवल CJP तक सीमित नहीं रहा। NCP-SP के साथ कांग्रेस नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल रांका और अन्य कार्यकर्ता रिहा हो चुके हैं, लेकिन यह घटनाक्रम असम में राजनीतिक बैठकों, विरोध के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई की सीमाओं को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। source – Hindustan / Northeast Now / The Week / Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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गोरखपुर में भारी बारिश से जलभराव, रवि किशन ने किया निरीक्षण; डेढ़ घंटे में 150 MM बारिश से कई इलाके डूबे

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव हो गया। नगर निगम के अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम के मुताबिक करीब डेढ़ घंटे में 150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कई सड़कों, बाजारों, घरों और दुकानों में पानी भर गया। स्थिति का जायजा लेने के लिए गोरखपुर सांसद रवि किशन ने महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त अजय जैन और अन्य अधिकारियों के साथ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया तथा पानी जल्द निकालने के निर्देश दिए। डेढ़ घंटे की बारिश से शहर हुआ पानी-पानी 26 सितंबर को गोरखपुर में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम के ऑटोमेटिक रेन गेज ने महज डेढ़ घंटे में करीब 150 MM बारिश दर्ज की। तेज बारिश के बाद शहर के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों में जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया और कई जगह नाले ओवरफ्लो हो गए। घरों और दुकानों में घुसा पानी बारिश के कारण दाऊदपुर, इंदिरा नगर, तारामंडल, तिवारीपुर, इलाहीबाग, विजय चौक, धर्मशाला बाजार, बिलंदपुर और गोरखनाथ समेत कई इलाकों में पानी भर गया। कुछ निचले इलाकों में घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया और लोगों का घरेलू सामान पानी में तैरने लगा। कई परिवारों को ऊंचे स्थानों या घरों की ऊपरी मंजिलों पर जाना पड़ा। जिला अस्पताल की OPD तक पहुंचा पानी भारी बारिश का असर सरकारी संस्थानों पर भी दिखाई दिया। जिला अस्पताल की OPD और डॉक्टरों के चेंबर तक बारिश और नालियों का पानी पहुंच गया। महिला अस्पताल, नगर निगम परिसर, आकाशवाणी परिसर और कई सरकारी कार्यालयों के आसपास भी जलभराव दर्ज किया गया। मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। रवि किशन ने किया जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण गोरखपुर के BJP सांसद रवि किशन भी जलभराव की स्थिति देखने के लिए सड़क पर उतरे। उन्होंने महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त अजय जैन और नगर निगम के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रवि किशन ने अधिकारियों से जलनिकासी के लिए पंप चलाने और प्रभावित क्षेत्रों से जल्द से जल्द पानी निकालने को कहा। करीब 3 हजार परिवार प्रभावित अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक लालडिग्गी, घंटाघर, रायगंज, बिलंदपुर, कालेपुर और आसपास के इलाकों में जलभराव के कारण करीब 3,000 से अधिक परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह सड़क और नाली का अंतर दिखाई देना बंद हो गया। पानी में वाहन बंद होने से लोगों को घुटनों तक पानी में पैदल चलना पड़ा। बाजारों में भी भारी नुकसान महेवा गल्ला मंडी, साहबगंज और राप्ती कॉम्प्लेक्स समेत कई कारोबारी इलाकों में दुकानों के अंदर पानी घुस गया। महेवा मंडी के व्यापारियों ने करीब ₹50 लाख से अधिक के सामान के नुकसान का दावा किया है। राप्ती कॉम्प्लेक्स की निचली मंजिल की करीब 15 दुकानों में भी पानी भरने की बात सामने आई। ये नुकसान के आंकड़े व्यापारियों के शुरुआती दावे हैं और अंतिम प्रशासनिक आकलन अलग हो सकता है। जलभराव पर रवि किशन और BJP पार्षद में नोकझोंक बारिश के बाद जलनिकासी को लेकर सांसद रवि किशन और BJP पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच फोन पर हुई बातचीत भी चर्चा में आ गई। वायरल वीडियो में दोनों तरकुलानी और रामगढ़ताल क्षेत्र से पानी निकालने को लेकर बात करते सुनाई देते हैं। बातचीत के दौरान राजनीतिक तंज भी हुए। हालांकि वायरल वीडियो के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है। कमिश्नर ने भी परखी जलनिकासी व्यवस्था भारी बारिश को देखते हुए मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने महापौर और अन्य अधिकारियों के साथ सुमेर सागर नाला, धर्मशाला ब्रिज, राप्ती कॉम्प्लेक्स और अन्य संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को अगले तीन से चार दिनों तक अलर्ट रहने, suction machines तैयार रखने और जलभराव की सूचना मिलने पर तत्काल टीम भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम की टीमें जलनिकासी में जुटीं नगर आयुक्त अजय जैन ने डोमिनगढ़, इलाहीबाग और लालडिग्गी पंपिंग स्टेशन समेत कई जगहों का निरीक्षण किया। सभी पंपिंग स्टेशनों को लगातार चलाने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पंप लगाने के निर्देश दिए गए। फिलहाल शहर के निचले और जलभराव वाले इलाकों की निगरानी जारी है। प्रशासन ने बारिश के दौरान लोगों से सावधानी बरतने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की अपील की है। source – Amar Ujala / Dainik Jagran / Hindustan / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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लखनऊ में आफत की बारिश, सितंबर का पुराना रिकॉर्ड टूटा! हनुमान सेतु पर 200 MM से ज्यादा वर्षा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 26 सितंबर को हनुमान सेतु क्षेत्र में करीब 200.8 से 201.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसे स्थानीय मौसम रिकॉर्ड में सितंबर की सबसे भारी बारिश बताया गया है। वहीं अमौसी स्थित मुख्य मौसम केंद्र पर 24 घंटे में 135.8 मिमी बारिश दर्ज हुई। शहर के कई हिस्सों में जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। हनुमान सेतु इलाके में 200 MM से ज्यादा बारिश क्षेत्रीय मौसम आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को हनुमान सेतु के आसपास 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। दैनिक जागरण ने इसे लखनऊ में सितंबर महीने के लिए मौसम विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड में सबसे अधिक बारिश बताया है। हालांकि शहर के अलग-अलग वर्षामापी केंद्रों पर आंकड़े अलग रहे। अमौसी मौसम केंद्र ने 135.8 मिमी और अलीगंज कंट्रोल रूम ने 152.2 मिमी बारिश दर्ज की। 2022 के बाद अमौसी में सबसे ज्यादा बारिश अमौसी स्थित लखनऊ के मुख्य मौसम केंद्र पर दर्ज 135.8 मिमी बारिश सितंबर 2022 के बाद सबसे अधिक एक-दिवसीय वर्षा रही। 16 सितंबर 2022 को यहां 160.3 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। इस मॉनसून सीजन में भी यह लखनऊ के मुख्य मौसम केंद्र पर एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश है। शहर के कई इलाके पानी में डूबे लगातार बारिश से जानकीपुरम, आशियाना, गोमती नगर, इंदिरा नगर, हजरतगंज, अलीगंज, चारबाग, चौक और आलमबाग समेत कई इलाकों में जलभराव हुआ। कुछ स्थानों पर सड़क पर घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया। जानकीपुरम के कुछ हिस्सों में दो फीट तक पानी जमा होने की खबर है। कई जगह सड़क धंसने और पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। स्कूल-कॉलेज रहे बंद भारी बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लखनऊ प्रशासन ने शनिवार को प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक सभी स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद रखने का आदेश दिया था। खराब मौसम के चलते स्कूलों के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालयों की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित तेज बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली नेटवर्क को नुकसान पहुंचा। लखनऊ समेत राज्य में बड़ी संख्या में 11 KV feeders और substations के बंद होने की सूचना मिली। UPPCL ने अधिकारियों को खराबी जल्द ठीक करने और मरम्मत टीमों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का निर्देश दिया। 25 डिग्री तक गिरा दिन का तापमान लगातार बादल और बारिश के कारण लखनऊ का अधिकतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो सामान्य से करीब आठ डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 20.6 डिग्री दर्ज किया गया, जिसे सितंबर में पिछले करीब 12 वर्षों का सबसे कम न्यूनतम तापमान बताया गया है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से हुई भारी बारिश मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारी बारिश के पीछे बंगाल की खाड़ी से आया मौसमी सिस्टम प्रमुख कारण रहा। इस सिस्टम से बड़ी मात्रा में नमी उत्तर प्रदेश की ओर पहुंची और कई जिलों में लगातार भारी बारिश हुई। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट 27 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों को भारी बारिश वाले क्षेत्र में रखा गया, जबकि कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया। तेज हवाएं भी चलने का अनुमान जताया गया। मौसम विभाग के मुताबिक 28 सितंबर से बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना है और अक्टूबर के शुरुआती दिनों में प्रदेश से मॉनसून की वापसी की परिस्थितियां बन सकती हैं। बारिश ने ठप की रोजमर्रा की जिंदगी दो दिनों से अधिक समय तक चली बारिश ने राजधानी में ट्रैफिक, स्कूल, बिजली और रोजमर्रा की सेवाओं पर बड़ा असर डाला। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए, जबकि कैब, डिलीवरी और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुईं। फिलहाल प्रशासन जलभराव वाले इलाकों की निगरानी कर रहा है और लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। source – India Meteorological Department / Dainik Jagran / Hindustan Times / Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में 14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई! 39 हजार से ज्यादा निर्माण रडार पर

मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर की झोपड़पट्टियों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। यह कार्रवाई 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी। BMC के मुताबिक पूरे मुंबई में ऐसे 39,111 ढांचे चिन्हित किए गए हैं। कार्रवाई के ऐलान के बाद झोपड़ीवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध भी शुरू हो गया है। 1 अक्टूबर से शुरू होगा तीन महीने का अभियान BMC ने 19 सितंबर को घोषणा की कि झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माण और 14 फीट या उससे अधिक ऊंचे ढांचों के खिलाफ विशेष कार्रवाई शुरू की जाएगी। महानगरपालिका ने प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे अनधिकृत हिस्से खुद हटा लें। ऐसा नहीं करने पर नागरिक निकाय की टीम कार्रवाई करेगी। यह अभियान 31 दिसंबर तक जारी रहने वाला है। 39,111 निर्माणों की पहचान BMC के आंकड़ों के मुताबिक शहर और उपनगरों में कुल 39,111 ऐसी झोपड़ी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें लगभग 3,348 संरचनाएं मुंबई शहर, 4,536 पश्चिमी उपनगरों और 31,227 पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं। BMC के अनुसार मुंबई में कुल करीब 2.23 लाख झोपड़ी संरचनाएं दर्ज हैं। 14 फीट की सीमा पर उठे सवाल BMC के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि कार्रवाई के लिए 14 फीट की ऊंचाई को ही आधार क्यों बनाया गया। 24 सितंबर को BMC की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अलग-अलग दलों के पार्षदों ने प्रशासन से इस सीमा का आधार स्पष्ट करने को कहा। कई सदस्यों ने यह भी सवाल किया कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले निर्वाचित प्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई। पुनर्वास के बिना कार्रवाई का विरोध समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इससे हजारों परिवारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि किसी भी तरह की तोड़फोड़ से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनाई जाए। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने भी “पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई” की मांग की है। ये संबंधित नेताओं के राजनीतिक रुख हैं। BJP पार्षद ने भी नोटिस रोकने की मांग की BMC के फैसले पर विरोध केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। BJP पार्षद और BMC हाउस के नेता गणेश खनकर ने भी नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर कार्रवाई और नोटिस प्रक्रिया रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि झोपड़पट्टियों में बड़ी आबादी रहती है और किसी भी कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास व वैकल्पिक आवास को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। कानूनी नोटिस भी भेजा गया गोवंडी के New Sangam Welfare Society की ओर से BMC कमिश्नर, SRA, MMRDA और महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग विभाग को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कार्रवाई की प्रक्रिया और प्रभावित निवासियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रईस शेख का दावा है कि इस अभियान से लगभग 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह संख्या उनका दावा है, BMC का आधिकारिक प्रभावित-जनसंख्या आंकड़ा नहीं। कुछ इलाकों में नोटिस भेजे जाने शुरू मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार BMC ने कुछ झोपड़ी धारकों को कार्रवाई से जुड़े नोटिस जारी करना भी शुरू कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ कोलीवाड़ा और गांवठाण क्षेत्रों में भी नोटिस मिलने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है। क्यों शुरू की गई कार्रवाई? BMC का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माणों को हटाना और सुरक्षा जोखिम कम करना है। हाल में कुर्ला समेत कुछ पहाड़ी और भूस्खलन-प्रभावित इलाकों में जोखिम सामने आने के बाद प्रशासन ने ऐसी ऊंची और अनधिकृत संरचनाओं पर कार्रवाई की जरूरत बताई है। कार्रवाई से पहले बढ़ा सियासी और कानूनी दबाव अभियान शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन इससे पहले ही BMC पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ गया है। जहां महानगरपालिका इसे सुरक्षा और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, वहीं कई पार्षद और नेता पुनर्वास, 14 फीट की सीमा के आधार और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि BMC 1 अक्टूबर से तय योजना के मुताबिक अभियान शुरू करती है या विरोध के बाद इसमें कोई बदलाव किया जाता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mid-Day जय राष्ट्र न्यूज़

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केदारनाथ धाम में बिगड़ा मौसम, हेलीकॉप्टर सेवाओं पर असर; 27 सितंबर तक यात्रा स्थगित

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में भारी बारिश के अलर्ट के बीच केदारनाथ धाम का मौसम बिगड़ गया है। खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण धाम के लिए संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को 26 सितंबर की दोपहर से 27 सितंबर 2026 तक स्थगित कर दिया है। खराब मौसम के कारण हेली सेवा बंद 26 सितंबर को केदारघाटी में बारिश और खराब मौसम के कारण केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा संचालित नहीं हो सकी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम अनुकूल होने के बाद ही हेली सेवाओं और यात्रा संचालन को सामान्य करने का फैसला लिया जाएगा। रेड अलर्ट के बाद प्रशासन का फैसला मौसम विभाग की चेतावनी के बाद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने केदारनाथ धाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने के आदेश जारी किए। गढ़वाल मंडल प्रशासन ने भी मौसम की स्थिति और अलग-अलग जिलों से मिली जानकारी की समीक्षा के बाद चारधाम यात्रा को 27 सितंबर तक स्थगित रखने का निर्णय लिया। रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 सितंबर को भी उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। रुद्रप्रयाग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। IMD ने चारधाम यात्रा मार्गों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कें बाधित होने का खतरा भी बना हुआ है। 15 सितंबर से दोबारा शुरू हुई थी हेली सेवा केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा मानसून के कारण जून में बंद कर दी गई थी। चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में इसे 15 सितंबर 2026 से दोबारा शुरू किया गया था। गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी जैसे हेलीपैड से केदारनाथ के लिए उड़ानों का संचालन किया जा रहा था। 15 से 30 सितंबर के पहले स्लॉट के हजारों टिकट पहले ही बुक हो चुके थे। खराब विजिबिलिटी में उड़ान संभव नहीं केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन काफी हद तक मौसम और दृश्यता पर निर्भर रहता है। बारिश, घना कोहरा, बादल या तेज हवाएं होने पर सुरक्षा कारणों से उड़ानों को रोक दिया जाता है। इससे पहले भी केदारघाटी में मौसम अचानक खराब होने पर हेलीकॉप्टर उड़ानों को रोकना और विमानों की आपात लैंडिंग कराना पड़ा है। यात्रियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील प्रशासन ने केदारनाथ और अन्य चारधाम यात्रियों से मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और पर्यटकों व श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। मौसम सुधरने के बाद ही शुरू होगी यात्रा फिलहाल प्रशासन मौसम और यात्रा मार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। बारिश कम होने और मार्ग सुरक्षित पाए जाने के बाद ही केदारनाथ यात्रा और हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन पर अगला निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में केदारनाथ जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा एडवाइजरी देखने के बाद ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी गई है। source – Amar Ujala / NDTV / Hindustan Times / India Meteorological Department जय राष्ट्र न्यूज़

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पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, यौन अपराध मामले में ‘आपत्तिजनक टिप्पणियों’ पर जताई चिंता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है, जिसमें एक महिला के कपड़े उतारने की कोशिश और उसके साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कृत्यों को तथ्यों के आधार पर ‘बलात्कार के प्रयास’ के लिए पर्याप्त नहीं माना गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियों को “offending observations” बताते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया है। 9 जुलाई के पटना हाई कोर्ट के फैसले का मामला मामला पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने आरोपी हिमांशु कुमार पाठक की उस दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था, जो IPC की धारा 376 के साथ धारा 511 यानी बलात्कार के प्रयास से संबंधित थी। हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने जैसी हरकतें, बिना ऐसे स्पष्ट कृत्य के जो बलात्कार करने के इरादे को निर्णायक रूप से दिखाए, ‘attempt to rape’ के अपराध को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। हालांकि कोर्ट ने इन कृत्यों को महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ा अपराध माना था। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणियों को बताया ‘आपत्तिजनक’ 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि फैसले में कुछ “आपत्तिजनक टिप्पणियां” हैं और उन्हें हटाने या फैसला रद्द करने से पहले संबंधित आरोपी का पक्ष सुनना आवश्यक है। आरोपी हिमांशु पाठक को जारी हुआ नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी हिमांशु पाठक को नोटिस जारी किया है। पीठ ने बिहार के एडवोकेट जनरल से स्थानीय पुलिस के माध्यम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आरोपी तक नोटिस पहुंचाया जाए, ताकि अगली सुनवाई में उसका पक्ष भी कोर्ट के सामने आ सके। 2008 की घटना से जुड़ा है मामला यह मामला 19 जनवरी 2008 की घटना से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक महिला अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने आरोपी के स्टूडियो गई थी। आरोप था कि आरोपी ने महिला के पिता को कंप्यूटर पर फोटो देखने के लिए कहा और इसके बाद स्टूडियो का दरवाजा बंद कर महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार किया। महिला द्वारा शोर मचाने पर उसके पिता पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा निचली अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 और 342 के तहत दोषी ठहराया था। उसे बलात्कार के प्रयास के मामले में तीन साल की कठोर कैद और गलत तरीके से बंद रखने के मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई थी। बाद में पटना हाई कोर्ट ने बलात्कार के प्रयास वाली दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मामले से भी जुड़ा संदर्भ इस मामले का जिक्र इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में उस समय भी हुआ था, जब अदालत इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक अन्य यौन अपराध संबंधी फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी। उस मामले में भी हाई कोर्ट की ओर से यौन अपराध के प्रयास को लेकर की गई व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। शीर्ष अदालत ने बाद में वह फैसला रद्द करते हुए न्यायाधीशों के लिए यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी दृष्टिकोण को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटना हाई कोर्ट के फैसले को अंतिम रूप से रद्द नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित आरोपी को सुनने के बाद ही इस पर आगे फैसला लिया जाएगा। मामले को SMW (Crl) No. 5/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। आने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि पटना हाई कोर्ट की टिप्पणियों और कानूनी निष्कर्षों में किस हद तक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। source – Supreme Court Proceedings / LiveLaw / Bar & Bench / Hindustan Times / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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जमुई मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुलिस मुठभेड़ पर उठे सवाल

पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में नंदन के पैर में गोली लगी, जबकि उसका साथी हरेराम यादव भागने की कोशिश में घायल हुआ। हालांकि अब इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर आरोपी के परिवार और ABVP ने सवाल उठाए हैं और पारदर्शी जांच की मांग की है। 19 सितंबर की घटना के बाद वायरल हुआ था वीडियो मामला 19 सितंबर 2026 का है। पुलिस के मुताबिक जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्रा को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और कथित छेड़छाड़ की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया और आरोपियों की पहचान शुरू की। मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी के नेतृत्व में SIT भी गठित की गई। नंदन यादव के पैर में लगी गोली 22 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया। मुंगेर रेंज के DIG राकेश कुमार के मुताबिक नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जबकि हरेराम यादव भागने की कोशिश के दौरान घायल हुआ। दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने क्या बताई मुठभेड़ की कहानी? पुलिस के अनुसार नंदन यादव को पकड़ने के दौरान उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। हालांकि मुठभेड़ के घटनाक्रम और बरामद हथियार को लेकर बाद में सवाल उठने शुरू हो गए। ABVP ने पूछा- हथियार कहां है? अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर कई सवाल उठाए हैं। ABVP नेताओं ने पूछा कि यदि वास्तव में आरोपी और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई थी तो घटनास्थल से हथियार की आधिकारिक बरामदगी क्यों नहीं दिखाई गई। संगठन ने घटनास्थल की बैरिकेडिंग, साक्ष्यों के संरक्षण और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हरेराम की चोट को लेकर भी उठे सवाल ABVP ने हरेराम यादव की चोट को लेकर भी पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उसके पैर में गंभीर चोट या फ्रैक्चर होने की बात सामने आई थी। बाद में उसकी अदालत में पेशी से जुड़े वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि यदि चोट इतनी गंभीर थी तो वह अगले दिन सामान्य रूप से कैसे चल रहा था। हालांकि Amar Ujala की पड़ताल के मुताबिक सोशल मीडिया पर नंदन और हरेराम की चोटों को लेकर भ्रम भी फैला। पुलिस का कहना है कि गोली नंदन यादव को लगी थी, जबकि हरेराम को भागते समय चोट आई थी और उसके पैर टूटने की बात सही नहीं थी। आरोपी की मां ने लगाया ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप नंदन यादव की मां ने बेटे की घटना में भूमिका को गलत बताते हुए नहीं बचाया, लेकिन पुलिस मुठभेड़ पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने नंदन को पकड़ने के बाद उसके पैर में गोली मारी और इसे मुठभेड़ बताया। यह परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अपने बयान में इसे गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ बता रही है। अस्पताल में रखने के तरीके पर भी विवाद 26 सितंबर को यह सवाल भी उठा कि नंदन यादव को अस्पताल के सामान्य कैदी वार्ड के बजाय एक अलग आइसोलेशन वार्ड में क्यों रखा गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि नंदन फिलहाल मरीज के रूप में भर्ती है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कैदी वार्ड से जुड़ी व्यवस्था लागू होगी। कई आरोपी हिरासत में पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, वाहन नंबर और डिजिटल सबूतों के जरिए आरोपियों की पहचान की गई। इसके साथ ही पीड़ित नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग जमुई की मूल घटना को लेकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग व्यापक रही है, लेकिन इसके साथ पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो गई है। एक तरफ पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भागने और फायरिंग की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर परिवार और ABVP मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इन सवालों से पुलिस मुठभेड़ के फर्जी होने की पुष्टि नहीं होती और अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र या आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। source – Hindustan Times / Dainik Jagran / Times Now Navbharat / Amar Ujala / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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तेलंगाना में तूफान का कहर! पेड़ उखड़े, छतों की चादरें उड़ीं

हैदराबाद: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में तेज हवाओं, धूल और बारिश ने अचानक तबाही मचा दी। बुधवार शाम मोरमपल्ली बंजारा गांव में इतनी तेज हवाएं चलीं कि कई पेड़ उखड़ गए, घरों की छतों पर लगी टिन की चादरें उड़ गईं और सड़कों पर मलबा बिखर गया। स्थानीय लोगों ने हवाओं को ‘बवंडर जैसा’ बताया, हालांकि अधिकारियों ने इसे tornado घोषित नहीं किया है। अचानक अंधेरा छाया, फिर चलीं तेज हवाएं घटना 23 सितंबर 2026 की शाम भद्राद्री कोठागुडेम जिले के Burgampadu मंडल स्थित मोरमपल्ली बंजारा गांव में हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज धूल भरी हवाएं चलने लगीं। कुछ ही देर में पेड़ गिरने लगे और कई घरों की छतों की चादरें हवा में उड़ गईं। सड़क पर पलटा ठेला, ट्रैफिक भी प्रभावित तेज हवाओं के कारण सड़क किनारे लगा एक ट्रैफिक स्टैंड भी गिर गया। पेड़ों, धूल और दूसरे मलबे के सड़क पर जमा होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में सड़क पर बिखरा मलबा और पलटा हुआ ठेला दिखाई दिया। एक फल विक्रेता घायल The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक घटना में एक फल विक्रेता के घायल होने की सूचना है, जबकि कुछ अन्य लोगों को भी मामूली चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की मौत की सूचना नहीं है। कई घरों को पहुंचा नुकसान तेज हवाओं ने इलाके में कई मकानों को भी नुकसान पहुंचाया। घरों पर लगी धातु की चादरें उड़ गईं और पेड़ गिरने से लोगों में दहशत फैल गई। Deccan Chronicle के मुताबिक हवाएं करीब एक घंटे तक प्रभावी रहीं और इस दौरान कई लोग सुरक्षा के लिए अपने घरों के अंदर ही रहे। राजुपेटा ब्रिज को भी नुकसान भारी बारिश का असर केवल मोरमपल्ली बंजारा तक सीमित नहीं रहा। जिले के Mulakalapally इलाके में Akeru stream पर बना Rajupeta Bridge भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ। इससे आसपास के कुछ गांवों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित हुई। क्या यह Tornado था? घटना के कई वीडियो और स्थानीय लोगों के बयानों में हवाओं को ‘tornado-like’ यानी बवंडर जैसी बताया गया। हालांकि अधिकारियों या मौसम विभाग की ओर से अभी इस घटना को आधिकारिक रूप से tornado घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल तेज आंधी या gale-force winds की घटना के रूप में ही देखा जा रहा है। भारी बारिश के अलर्ट के बीच बंद रहे स्कूल भारी बारिश और मौसम संबंधी चेतावनियों को देखते हुए भद्राद्री कोठागुडेम जिला प्रशासन ने 23 और 24 सितंबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की थी। यह आदेश सरकारी, निजी और आवासीय स्कूलों पर लागू किया गया था। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने के निर्देश भी दिए थे। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का दिखा असर इसी अवधि में बंगाल की खाड़ी में बने Deep Depression के कारण दक्षिण और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 24 सितंबर को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा क्षेत्र में मौजूद Deep Depression को लेकर मौसम चेतावनियां जारी की थीं। तेलंगाना के कई हिस्सों में भी बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। फिलहाल प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। source – The New Indian Express / Deccan Chronicle / India Meteorological Department जय राष्ट्र न्यूज़

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ऋषिकेश का रामझूला बंद, मरम्मत का काम जारी! 60% काम पूरा, अब फरवरी 2027 तक बढ़ी समयसीमा

ऋषिकेश: उत्तराखंड के प्रसिद्ध रामझूला पुल पर इन दिनों मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम जारी है। मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाला यह पुल फिलहाल आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद है। लोक निर्माण विभाग (PWD) का दावा है कि करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन निर्माण में देरी के चलते पुल को खोलने की समयसीमा अब बढ़ाकर फरवरी 2027 कर दी गई है। 25 जुलाई से पूरी तरह बंद है रामझूला रामझूला को मरम्मत कार्य के चलते 25 जुलाई 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इससे पहले पुल पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पहले ही सुरक्षा कारणों से रोक दी गई थी और केवल पैदल यात्रियों को आने-जाने की अनुमति थी। PWD ने पुल के डेक, सस्पेंडर वायर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को बदलने तथा मजबूत करने का काम शुरू किया है। पहले दिसंबर तक पूरा होना था काम शुरुआत में अधिकारियों ने मरम्मत कार्य पूरा कर दिसंबर 2026 तक पुल को दोबारा खोलने का लक्ष्य रखा था। जुलाई में अधिकारियों ने भी कहा था कि मरम्मत, अपग्रेडेशन और नवीनीकरण के बाद पुल को दिसंबर तक खोलने की योजना है। हालांकि सितंबर में सामने आई ताजा जानकारी के मुताबिक निर्माण कार्य की गति अपेक्षा से धीमी रहने के कारण अब समयसीमा को फरवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है। PWD का दावा- 60 प्रतिशत काम पूरा PWD के नरेंद्रनगर डिवीजन के मुताबिक रामझूला के मरम्मत कार्य का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। 22 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल पुल के डेक को बदलने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पुल को तय समय से पहले भी खोला जा सके। करीब ₹10-11 करोड़ की लागत से हो रही मरम्मत रामझूला के मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए करीब ₹10 से ₹11 करोड़ की परियोजना तैयार की गई है। इसमें पुल के सस्पेंडर वायर, डेक और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मरम्मत शामिल है। करीब 220 मीटर लंबा यह सस्पेंशन ब्रिज 1980 के दशक में बनाया गया था और वर्षों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। व्यापारियों पर पड़ा असर रामझूला बंद होने का सीधा असर मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र के व्यापारियों पर भी पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि पुल बंद होने के बाद इलाके में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है। स्थानीय व्यापारी चाहते हैं कि निर्माण कार्य की गति बढ़ाई जाए और पुल जल्द से जल्द खोला जाए। पर्यटकों को लेना पड़ रहा वैकल्पिक रास्ता रामझूला बंद रहने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जानकी सेतु और लक्ष्मणझूला क्षेत्र के वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ गया है और बुजुर्ग यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों की वापसी की भी उम्मीद मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद रामझूला पर पैदल यात्रियों के साथ दोपहिया वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। पहले पुल पर दोपहिया वाहन चलते थे, लेकिन सस्पेंडर वायर क्षतिग्रस्त होने और सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट के बाद उन पर रोक लगा दी गई थी। फिलहाल रामझूला पूरी तरह बंद है और PWD मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। अब स्थानीय लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों की नजर इस बात पर है कि पुल फरवरी 2027 की नई समयसीमा से पहले खुल पाता है या नहीं। source – Amar Ujala / Live Hindustan / Hindustan Times / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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