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Food Safety पर बड़ा Action: FSSAI ने Nestle, PepsiCo, Coca-Cola समेत कंपनियों से जुड़े मामलों में 150 से ज्यादा Notices जारी किए

नई दिल्ली: देश के खाद्य सुरक्षा नियामक Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने misleading advertisements, गलत दावों और labeling नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी है। FSSAI के मुताबिक हाल के महीनों में 150 से ज्यादा notices जारी किए गए हैं और कार्रवाई के दायरे में Nestle India, PepsiCo और Coca-Cola India समेत कई बड़ी food और beverage कंपनियों के नाम शामिल हैं। FSSAI ने सोशल मीडिया के जरिए हालिया enforcement action का ब्यौरा साझा करते हुए कहा कि ये notices misleading advertisements, false claims और labelling non-compliances से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं। किन बड़ी कंपनियों के नाम आए सामने? Food regulator ने जिन प्रमुख कंपनियों के खिलाफ हाल के महीनों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है, उनमें कई बड़े national और international brands शामिल हैं। FSSAI द्वारा साझा सूची में: जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं। हालांकि किसी कंपनी को notice जारी होना अपने आप में अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं होता। यह regulatory process का हिस्सा है, जिसमें संबंधित company से जवाब और compliance की मांग की जा सकती है। किस वजह से जारी किए गए Notices? FSSAI के मुताबिक कार्रवाई मुख्य रूप से तीन प्रकार की कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है। पहला मामला misleading advertisements यानी ऐसे विज्ञापनों से जुड़ा है जिनसे उपभोक्ता किसी product के benefits या nature को लेकर भ्रमित हो सकता है। दूसरा मुद्दा false या potentially misleading claims का है। Food products के पैकेट या advertisements पर health, nutrition, ingredients या product benefits से जुड़ा कोई दावा तय नियमों और scientific evidence के अनुरूप होना जरूरी है। तीसरा मामला labelling regulations का है। Packaged food पर ingredients, nutritional information और अन्य जरूरी declarations नियमों के अनुसार देना आवश्यक होता है। Energy Drinks और Alcoholic Beverages पर भी सख्ती FSSAI ने हाल के महीनों में energy drink और alcoholic beverage segments पर भी निगरानी बढ़ाई है। कुछ मामलों में regulator ने नियमों के उल्लंघन के चलते products जब्त करने की कार्रवाई भी की है। Energy drinks के marketing और labelling को लेकर FSSAI इससे पहले भी कंपनियों को निर्देश जारी कर चुका है। Food regulator का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी product की packaging या advertisement ऐसी जानकारी न दे जिससे ग्राहक उसकी वास्तविक प्रकृति या health effects को लेकर भ्रमित हो। Amazon और Flipkart को भी 12 Notices FSSAI की कार्रवाई केवल packaged food manufacturers तक सीमित नहीं रही। Regulator के मुताबिक Amazon और Flipkart जैसे e-commerce platforms से जुड़े मामलों में कुल 12 notices जारी किए गए हैं। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में Amazon के एक warehouse का food licence भी cancel किया गया है। Online food retail तेजी से बढ़ने के कारण e-commerce platforms पर बिकने वाले products की licensing, expiry, storage और labeling भी regulators की निगरानी में हैं। KFC, McDonald’s, Domino’s समेत Food Chains को भी Notices Restaurant और food-service sector में भी FSSAI ने कार्रवाई की जानकारी दी है। Regulator के मुताबिक 30 से ज्यादा notices KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee जैसे food service establishments से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं। FSSAI ने यह भी बताया कि Domino’s के पांच licences suspend किए गए हैं। यह कार्रवाई अलग-अलग outlets या licence holders से जुड़ी हो सकती है, इसलिए इसे पूरी chain के nationwide operations पर प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। कई कंपनियों ने शुरू किया Corrective Action FSSAI के मुताबिक notices मिलने के बाद कई food companies ने corrective actions शुरू किए हैं। इसका मतलब कंपनियां अपने advertisements, labels, claims या operating procedures में जरूरी बदलाव कर रही हैं ताकि उन्हें food safety regulations के अनुरूप लाया जा सके। Regulatory notice मिलने के बाद company को आम तौर पर जवाब देने और कमियों को दूर करने का मौका दिया जाता है। गंभीर violations पाए जाने पर regulator product seizure, licence suspension या cancellation जैसी कार्रवाई भी कर सकता है। Consumers के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह Action? Food products खरीदते समय आम ग्राहक काफी हद तक product label और advertising claims पर निर्भर रहता है। अगर किसी food item को ज्यादा healthy, nutritious या किसी बीमारी से संबंधित benefit देने वाला बताया जाता है, तो ग्राहक के purchasing decision पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से FSSAI के नियम कंपनियों को health और nutrition claims को लेकर तय standards का पालन करने के लिए बाध्य करते हैं। Misleading claims के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और food industry में transparency बढ़ाना है। Label पढ़ते समय किन बातों पर दें ध्यान? Packaged food खरीदते समय consumers को केवल बड़े advertisement claims पर भरोसा करने के बजाय product की पूरी labeling देखनी चाहिए। Ingredients list, nutritional information, manufacturing और expiry dates, allergen information तथा FSSAI licence details की जांच करना उपयोगी हो सकता है। अगर किसी product पर किए गए health claim को लेकर संदेह हो, तो ग्राहक company और regulator की official information देख सकता है। FSSAI ने बढ़ाई Enforcement हाल के महीनों में food safety regulator ने packaged food, restaurants, e-commerce platforms और beverage companies के खिलाफ enforcement activity तेज की है। 150 से ज्यादा notices की जानकारी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। हालांकि notices में शामिल किसी brand या company के मामले में वास्तविक violation और अंतिम regulatory outcome अलग-अलग हो सकता है। इसलिए notice जारी होने और किसी company के दोषी साबित होने में अंतर समझना जरूरी है। FSSAI की इस कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिलता है कि food advertising, labeling और consumer claims को लेकर regulator आने वाले समय में और कड़ी निगरानी जारी रख सकता है। स्रोत – एफएसएसएआई (FSSAI), पीटीआई, एनडीटीवी, इकोनॉमिक टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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Karnataka में ‘Analogue Paneer’ पर एक साल का Ban, सरकार ने Public Health का दिया हवाला

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य में Analogue या Non-Dairy Paneer को सामान्य ‘Paneer’ के नाम से बनाकर, स्टोर करके, सप्लाई या बेचने पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और ग्राहकों को भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रतिबंध से संबंधित आदेश 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। Analogue Paneer आखिर होता क्या है? सामान्य पनीर दूध से बनाया जाता है। वहीं Analogue या Non-Dairy Paneer ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध की वसा या milk solids को पूरी तरह या आंशिक रूप से vegetable oil, vegetable fat या अन्य non-dairy ingredients से बदल दिया जाता है। ऐसे उत्पाद अपने आप में हर स्थिति में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ नहीं होते, लेकिन उन्हें असली दूध से बने पनीर की तरह पेश करना या उपभोक्ता को बिना जानकारी दिए ‘Paneer’ के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। किन गतिविधियों पर लगाया गया प्रतिबंध? Karnataka Food Safety and Drug Administration की ओर से जारी अधिसूचना के तहत analogue/non-dairy paneer को ‘Paneer’ के नाम से बेचने से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर एक साल की रोक लागू की गई है। आदेश में इसके: पर रोक शामिल है, जब ऐसा उत्पाद सामान्य paneer के नाम से बाजार में पेश किया जा रहा हो। 17 अगस्त से लागू हुआ आदेश राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार यह अधिसूचना 17 अगस्त 2026 से प्रभावी है और एक साल तक लागू रहेगी। Food Safety and Drug Administration Commissioner Srinivas K ने कहा कि कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि non-dairy substitutes को असली paneer बताकर न बेचा जाए। Public Health का क्यों दिया गया हवाला? सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे public health और consumer protection को प्रमुख वजह बताया है। समस्या मुख्य रूप से तब पैदा होती है जब ग्राहक को यह बताए बिना non-dairy या analogue product असली paneer के रूप में परोसा या बेचा जाता है। इससे उपभोक्ता उत्पाद की वास्तविक सामग्री और गुणवत्ता को लेकर भ्रमित हो सकता है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि बाजार में बेचे जाने वाले paneer को निर्धारित food standards के अनुरूप होना चाहिए और ग्राहक को यह साफ पता होना चाहिए कि वह dairy product खरीद रहा है या उसका analogue substitute। FSSAI भी पहले जारी कर चुका है चेतावनी यह मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने अप्रैल 2026 में cheese analogues की सही labeling को लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। FSSAI ने साफ किया था कि किसी cheese analogue को ‘paneer’ के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है। Food businesses और restaurants को निर्देश दिया गया था कि यदि किसी dish में analogue product का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दी जाए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी restaurant में असली dairy paneer की जगह analogue product इस्तेमाल किया जा रहा है, तो menu पर उसका वास्तविक स्वरूप स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि ग्राहक informed choice कर सके। दूसरे राज्यों में भी हो चुकी है कार्रवाई Analogue paneer और अन्य dairy substitutes को लेकर पिछले कुछ समय से कई राज्यों में food safety authorities सक्रिय हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी ऐसे उत्पादों की बिक्री और गलत labeling के खिलाफ कार्रवाई देखने को मिली है। इससे साफ है कि analogue dairy products की सही पहचान और labeling अब देशभर में food regulators के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। क्या Analogue Paneer पूरी तरह अवैध है? यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। कार्रवाई का मुख्य केंद्र non-dairy या analogue product को असली ‘paneer’ बताकर बेचने की प्रथा है। FSSAI के नियम analogue products के लिए स्पष्ट labeling और disclosure की मांग करते हैं। यानी ग्राहक को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह milk-based paneer खरीद रहा है, जबकि उत्पाद में milk fat या milk solids की जगह दूसरे ingredients का इस्तेमाल किया गया हो। इसलिए इसे केवल “हर तरह के analogue food पर प्रतिबंध” के रूप में समझना सही नहीं होगा। Restaurants और दुकानदारों पर बढ़ेगी निगरानी नए आदेश के बाद कर्नाटक में food safety officials के restaurants, hotels, caterers, manufacturers और retailers की जांच बढ़ाने की संभावना है। अधिकारियों का फोकस यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि असली paneer के नाम से कोई non-dairy substitute ग्राहक को न दिया जाए और food businesses product की सही पहचान तथा labeling से जुड़े नियमों का पालन करें। कर्नाटक सरकार का यह फैसला food adulteration और misleading labeling के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि packaged paneer खरीदते समय ingredients और label की जांच करें और restaurant में संदेह होने पर इस्तेमाल किए जा रहे product के बारे में जानकारी मांगें। स्रोत – कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, FSSAI, इंडिया टुडे, मनीकंट्रोल जय राष्ट्र न्यूज़

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ओडिशा में भारी बारिश का रेड अलर्ट, कई इलाकों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

भुवनेश्वर: ओडिशा में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अगस्त 2026 को ओडिशा के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। राज्य में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र का असर मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा और आसपास के राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके कारण ओडिशा में व्यापक बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बेहद तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। IMD के ताजा बुलेटिन में 13 अगस्त को ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। रेड अलर्ट के बीच प्रशासन सतर्क रेड अलर्ट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को संभावित जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने, सड़क यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर बिजली एवं संचार सेवाओं में व्यवधान की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखने और अनावश्यक रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है। कई जिलों में स्कूल बंद भारी बारिश के प्रभाव को देखते हुए मयूरभंज जिले में 13 अगस्त को स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। यह कदम छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। बारिश की स्थिति को देखते हुए अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी स्थानीय प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार जरूरी कदम उठा सकता है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ पर भी असर ओडिशा के अलावा मौसम प्रणाली का प्रभाव गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। इन राज्यों के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुछ स्थानों पर अत्यधिक बारिश की स्थिति बनने की आशंका के कारण प्रशासन को सतर्क किया गया है। बिजली गिरने और तेज हवाओं का भी खतरा बारिश के साथ कुछ इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की गतिविधियां भी हो सकती हैं। IMD के अनुसार 13 अगस्त को ओडिशा और झारखंड में मध्यम से गंभीर बिजली गतिविधि की संभावना है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, पेड़ के नीचे या जलभराव वाले स्थानों पर खड़े होने से बचना जरूरी है। मछुआरों के लिए भी सावधानी बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण समुद्री परिस्थितियां भी खराब हो सकती हैं। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को मौसम की स्थिति और आधिकारिक चेतावनियों को ध्यान में रखने की सलाह दी है। आगे भी जारी रह सकता है बारिश का दौर मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा मौसम प्रणाली का प्रभाव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रह सकता। ओडिशा और आसपास के पूर्वी राज्यों में आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। निष्कर्ष ओडिशा में 13 अगस्त को भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। IMD ने राज्य में भारी से बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी के मौसम तंत्र का असर पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। बारिश के बीच जलभराव, बाढ़, बिजली गिरने और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। Source: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), NewsonAir, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-UP समेत कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा भी बना हुआ है। दिल्ली-NCR में बारिश को लेकर अलर्ट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में मानसून की सक्रियता के कारण तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के दौरान कई स्थानों पर जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आ सकती है। दिल्ली-NCR के लोगों को मौसम में अचानक बदलाव और तेज बारिश के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासतौर पर निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। उत्तर प्रदेश में भी तेज बारिश का दौर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव और फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन को भी संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने की जरूरत है। कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की गतिविधियां अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पश्चिमी तट और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राजस्थान और गुजरात में भी बारिश का असर राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में मानसूनी बारिश का दौर जारी है। कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी सतर्कता महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना के बीच स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। पहाड़ी और निचले इलाकों में बारिश के दौरान भूस्खलन, जलभराव और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। केरल में भी बारिश का अलर्ट केरल में मानसून के कारण कई क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश के कारण नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। बारिश के दौरान समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों को स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है। आंधी और बिजली गिरने का भी खतरा भारी बारिश के साथ कुछ राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है। मौसम खराब होने के दौरान खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना जरूरी है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। जलभराव और ट्रैफिक को लेकर बढ़ी चिंता शहरी इलाकों में तेज बारिश का सबसे बड़ा असर सड़क यातायात पर देखने को मिलता है। कम समय में ज्यादा बारिश होने पर निचले इलाकों में पानी जमा हो सकता है। दिल्ली-NCR जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में बारिश के दौरान ट्रैफिक जाम और जलभराव की समस्या लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। भारी बारिश के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचना और जलभराव वाले रास्तों पर जाने से परहेज करना सुरक्षित रहेगा। निष्कर्ष देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय रहने के कारण भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश समेत कई क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और जलभराव की स्थिति बन सकती है। लोगों को सलाह है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखें और भारी बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें। Source: India Meteorological Department (IMD) / Weather reports जय राष्ट्र न्यूज़

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बार-बार मसूड़ों से खून आना न करें नजरअंदाज, दांतों की बीमारी के साथ दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का भी हो सकता है संकेत

नई दिल्ली: अगर ब्रश करते समय या खाना खाते वक्त आपके मसूड़ों से बार-बार खून आता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मसूड़ों से खून आना अक्सर मसूड़ों की बीमारी और प्लाक के जमने से जुड़ा होता है, लेकिन कुछ मामलों में हार्मोनल बदलाव, मधुमेह, कुछ दवाएं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याएं भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार खून आना अपने आप में किसी एक गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह ऐसा लक्षण है जिसकी वजह का पता लगाना जरूरी है। मसूड़ों से खून आने की सबसे आम वजह क्या है? मसूड़ों से खून आने की सबसे आम वजह मसूड़ों की बीमारी हो सकती है। दांतों पर जमा प्लाक नियमित रूप से साफ न होने पर मसूड़ों में सूजन और जलन पैदा कर सकता है। शुरुआती अवस्था को जिंजीवाइटिस कहा जाता है। इसमें मसूड़े लाल, सूजे हुए और संवेदनशील हो सकते हैं तथा ब्रश या फ्लॉस करते समय खून आ सकता है। अगर इस समस्या का इलाज न किया जाए तो यह आगे बढ़कर पीरियोडोंटाइटिस जैसी गंभीर मसूड़ों की बीमारी में बदल सकती है, जिसमें दांतों को सहारा देने वाली हड्डी और ऊतक प्रभावित हो सकते हैं। किन स्थितियों में भी बढ़ सकता है मसूड़ों से खून? मसूड़ों से खून आने के पीछे केवल खराब ओरल हाइजीन ही जिम्मेदार नहीं होती। कुछ अन्य परिस्थितियां भी मसूड़ों की समस्या को बढ़ा सकती हैं। इनमें मधुमेह, गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव, धूम्रपान, कुछ दवाएं, खराब पोषण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से मसूड़ों से खून आ रहा है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय दंत चिकित्सक से जांच कराना बेहतर है। क्या मसूड़ों से खून आना हृदय स्वास्थ्य से भी जुड़ा है? मसूड़ों की बीमारी और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर शोध जारी है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, शोध में मसूड़ों के स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों से खून आने वाला हर व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित है। इसलिए इस लक्षण को किसी गंभीर बीमारी का सीधा प्रमाण मानने के बजाय उचित चिकित्सकीय जांच को प्राथमिकता देना चाहिए। मसूड़ों की बीमारी के अन्य लक्षण भी पहचानें अगर मसूड़ों से खून आने के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे रहा है, तो दंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है: मसूड़ों की बीमारी आगे बढ़ने पर दांतों के ढीले होने और यहां तक कि दांत गिरने की समस्या भी हो सकती है। ब्रश करते समय खून आए तो ब्रश करना बंद न करें कई लोग मसूड़ों से खून आने पर ब्रश करना कम या बंद कर देते हैं। लेकिन प्लाक को हटाने के लिए नियमित ओरल हाइजीन जरूरी है। विशेषज्ञ नियमित रूप से फ्लोराइड टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करने और दांतों के बीच की सफाई के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। हालांकि बहुत जोर से ब्रश करने से मसूड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए सही तकनीक और उपयुक्त टूथब्रश का इस्तेमाल करना जरूरी है। कब डॉक्टर या डेंटिस्ट से संपर्क करें? अगर मसूड़ों से खून बार-बार या लगातार आता है, तो दंत चिकित्सक से जांच कराना चाहिए। खासकर तब जब इसके साथ दर्द, सूजन, बदबू, दांतों का हिलना या मुंह में घाव जैसी समस्या भी हो। अगर मसूड़ों में बहुत ज्यादा सूजन हो, दांत ढीले हो रहे हों या मुंह में कोई गांठ अथवा असामान्य लाल/सफेद निशान दिखाई दे, तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। मसूड़ों को स्वस्थ रखने के आसान तरीके मसूड़ों की बीमारी से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें काफी महत्वपूर्ण हैं: दिन में दो बार ब्रश करें: फ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। दांतों के बीच सफाई करें: रोजाना फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करें। धूम्रपान से बचें: धूम्रपान मसूड़ों की बीमारी को बढ़ा सकता है। नियमित दंत जांच कराएं: शुरुआती समस्या का पता चलने पर उसका इलाज आसान हो सकता है। खाने-पीने पर ध्यान दें: संतुलित आहार और अच्छी सामान्य स्वास्थ्य आदतें भी ओरल हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण हैं। लक्षण को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी मसूड़ों की बीमारी हमेशा दर्द के साथ सामने नहीं आती। कई बार व्यक्ति को केवल ब्रश करते समय खून दिखाई देता है और वह इसे मामूली समस्या समझ लेता है। लेकिन अगर प्लाक और मसूड़ों की सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो बीमारी दांतों को सहारा देने वाले ऊतकों तक पहुंच सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। निष्कर्ष बार-बार मसूड़ों से खून आना सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी सबसे आम वजह मसूड़ों की बीमारी हो सकती है, लेकिन मधुमेह, हार्मोनल बदलाव, धूम्रपान, कुछ दवाएं और अन्य स्वास्थ्य कारक भी मसूड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि मसूड़ों से खून आना किसी गंभीर बीमारी का सीधा प्रमाण नहीं है। सही कारण जानने के लिए दंत चिकित्सक से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। नियमित ब्रशिंग, दांतों के बीच सफाई और समय-समय पर दंत जांच से मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। Source: NHS, American Dental Association, Health Education England जय राष्ट्र न्यूज़

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लगातार बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल बुखार की रोकथाम के लिए राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में जारी मानसूनी बारिश के बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और अन्य मौसमी वायरल बुखारों की रोकथाम के लिए निगरानी और तैयारियाँ बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि बारिश के मौसम में मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए सभी राज्यों को सर्विलांस, अस्पतालों की तैयारी, समय पर जांच और जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करना चाहिए. अस्पतालों और स्वास्थ्य एजेंसियों को विशेष निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की समय पर जांच, पर्याप्त बेड, आवश्यक दवाइयाँ और लैब सुविधाएँ उपलब्ध रखी जाएँ। संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान कर उन्हें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के माध्यम से रिपोर्ट करने पर भी जोर दिया गया है. मच्छर नियंत्रण अभियान तेज़ राज्यों को घरों, सार्वजनिक स्थानों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी हटाने, फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और स्वच्छता अभियान तेज़ करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय निकायों से सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और लोगों को मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने के लिए जागरूक करने को कहा है. कुछ क्षेत्रों में मामले बढ़ने से सतर्कता हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर पुणे और तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाने और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण मच्छरों के पनपने की स्थिति अनुकूल हो जाती है, इसलिए शुरुआती रोकथाम सबसे प्रभावी उपाय है. लोगों के लिए सलाह स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें तथा तेज़ बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने से बचने और समय पर जांच कराने की भी सलाह दी गई है. निष्कर्ष मानसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें निगरानी, अस्पतालों की तैयारी और जन-जागरूकता के माध्यम से संभावित प्रकोप को रोकने के प्रयास तेज़ कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नागरिकों की सतर्कता और सामुदायिक सहयोग संक्रमण की रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. Source: Ministry of Health & Family Welfare | National Centre for Vector Borne Diseases Control (NCVBDC) जय राष्ट्र न्यूज़

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मानसून के बीच डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल बुखार को लेकर केंद्र अलर्ट, राज्यों को सतर्कता और तैयारियाँ बढ़ाने के निर्देश

नई दिल्ली: मानसून के दौरान मच्छरजनित और मौसमी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने तथा रोकथाम की तैयारियाँ मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और वायरल बुखार के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने, अस्पतालों की तैयारियाँ बढ़ाने और जन-जागरूकता अभियान तेज़ करने पर विशेष जोर दिया है। राज्यों को दिए गए प्रमुख निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे: दिल्ली सहित कई राज्यों में विशेष निगरानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित उन राज्यों में तैयारियों की समीक्षा की है जहाँ मानसून के दौरान डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को भी डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के मरीजों के उपचार के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से सावधानी बरतने की अपील स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाँह के कपड़े पहनें, मच्छररोधी उपाय अपनाएँ और तेज़ बुखार, शरीर दर्द, प्लेटलेट्स में कमी या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। निष्कर्ष मानसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य मौसमी बीमारियों के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर निगरानी, साफ-सफाई, मच्छर नियंत्रण और जनभागीदारी से इन बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। Source: Ministry of Health & Family Welfare | National Centre for Vector Borne Diseases Control (NCVBDC) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका में राष्ट्रीय रक्त संकट घोषित, रक्तदान के लिए तत्काल अपील; अस्पतालों में उपचार प्रभावित होने की आशंका

वॉशिंगटन डी.सी.: अमेरिका में American Red Cross ने देश के इतिहास में दूसरी बार राष्ट्रीय रक्त आपूर्ति संकट (National Blood Supply Crisis) घोषित किया है। संस्था के अनुसार गर्मियों के दौरान रक्तदान में भारी गिरावट आने से देशभर में रक्त की उपलब्धता गंभीर स्तर तक पहुँच गई है। विशेष रूप से O पॉज़िटिव और O नेगेटिव रक्त समूह की कमी के कारण कई अस्पतालों में सर्जरी, ट्रॉमा उपचार और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। Red Cross के अनुसार जुलाई के दौरान रक्तदान चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। बढ़ती गर्मी, खराब वायु गुणवत्ता, मौसमी बीमारियों और छुट्टियों के कारण रक्तदान शिविरों में अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुँच सके। परिणामस्वरूप कई अस्पतालों को रक्त की आपूर्ति सीमित करनी पड़ी है। मरीजों पर पड़ सकता है सीधा असर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पर्याप्त रक्तदान नहीं हुआ तो— तत्काल रक्तदान की अपील American Red Cross ने सभी योग्य नागरिकों से जल्द से जल्द रक्तदान करने की अपील की है। संस्था का कहना है कि यदि प्रत्येक रक्तदान शिविर में केवल तीन अतिरिक्त दाता भी पहुँच जाएँ, तो राष्ट्रीय रक्त आपूर्ति को स्थिर करने में बड़ी मदद मिल सकती है। विशेष रूप से O ग्रुप के दाताओं से तुरंत रक्तदान करने का अनुरोध किया गया है। स्वास्थ्य एजेंसियाँ भी हुईं सक्रिय Red Cross के साथ अन्य रक्त संग्रह संस्थाओं और स्वास्थ्य एजेंसियों ने भी लोगों से रक्तदान अभियान में भाग लेने की अपील की है। कई राज्यों में अतिरिक्त रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अस्पतालों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। निष्कर्ष अमेरिका में घोषित राष्ट्रीय रक्त संकट स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पर्याप्त रक्तदान होने पर ही अस्पतालों में उपचार सेवाओं को सामान्य बनाए रखा जा सकेगा। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियाँ पूरे देश में रक्तदान बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चला रही हैं। Source: American Red Cross | U.S. Department of Health & Human Services जय राष्ट्र न्यूज़

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हेपेटाइटिस-B की समय पर जांच और इलाज को लेकर विशेषज्ञों की नई चेतावनी, लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारत के चिकित्सा विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस-B (Hepatitis-B) संक्रमण को लेकर नई चेतावनी जारी करते हुए लोगों से समय पर जांच और उपचार कराने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। (who.int) डॉक्टरों के अनुसार भारत में लाखों लोग हेपेटाइटिस-B से संक्रमित हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों को इसकी जानकारी ही नहीं होती। इसी कारण नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर स्क्रीनिंग को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हेपेटाइटिस-B क्या है? हेपेटाइटिस-B एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से लिवर (यकृत) को प्रभावित करता है। यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित चिकित्सा उपकरण, संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रव तथा जन्म के दौरान मां से बच्चे में भी फैल सकता है। (who.int) किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? विशेषज्ञों ने निम्न लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है— हालांकि कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए जोखिम वाले लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है। समय पर जांच क्यों जरूरी है? विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते संक्रमण का पता चलने पर दवाओं और नियमित निगरानी से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आधुनिक उपचार से वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। (cdc.gov) बचाव के उपाय डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस-B से बचाव के लिए लोगों को सलाह दी है— विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है। इसके लिए समय पर जांच, टीकाकरण और उपचार को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। (who.int) निष्कर्ष विशेषज्ञों का मानना है कि हेपेटाइटिस-B की समय पर पहचान और उचित इलाज से गंभीर लिवर रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में जोखिम कारक मौजूद हैं या लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना देरी किए जांच कराना और चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। Source: World Health Organization (WHO) | Centers for Disease Control and Prevention (CDC) जय राष्ट्र न्यूज़

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चंडीगढ़ में BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक, डिजिटल हेल्थ और महामारी तैयारी पर विशेष फोकस

चंडीगढ़: भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने डिजिटल हेल्थ, महामारी से निपटने की तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की। बैठक में भारत, ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित BRICS देशों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान भारत ने डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के अपने अनुभव साझा किए। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजिटल तकनीक, डेटा साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना आवश्यक है। बैठक के प्रमुख एजेंडे बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं— भारत ने साझा किया डिजिटल हेल्थ मॉडल भारत ने अपने डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली का अनुभव साझा करते हुए बताया कि तकनीक की मदद से मरीजों को बेहतर, तेज और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कई सदस्य देशों ने भारत के डिजिटल हेल्थ मॉडल में रुचि दिखाई और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। महामारी से मिले सबक पर चर्चा बैठक में कोविड-19 सहित अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से मिले अनुभवों की समीक्षा की गई। सदस्य देशों ने महामारी के दौरान सामने आई चुनौतियों और भविष्य में बेहतर समन्वय, सूचना साझा करने तथा संयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वास्थ्य सहयोग को मिलेगा बढ़ावा BRICS देशों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, वैक्सीन अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। निष्कर्ष चंडीगढ़ में आयोजित BRICS स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक ने डिजिटल हेल्थ, महामारी तैयारी और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया है। भारत ने अपने डिजिटल स्वास्थ्य मॉडल और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का संदेश दिया। Source: Ministry of Health & Family Welfare | BRICS | PIB | WHO जय राष्ट्र न्यूज़

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