link between diabetes and loneliness

Loneliness: अकेलेपन का कनेक्शन ब्लड शुगर से – क्या कहती है रिसर्च?

डायबिटीज (Diabetes) यानी मधुमेह एक ऐसी समस्या है, जो आजकल लोगों की खराब जीवनशैली के कारण बढ़ती जा रही है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण कई गंभीर रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस रोग की संभावना को कम करने के लिए एक्सपर्ट सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, एक और परेशानी जिससे आजकल अधिकतर पब्लिक परेशान है वो है अकेलापन (Loneliness)। यह अकेलापन (Loneliness) भी कई रोगों का कारण बन सकता है जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि। लेकिन, एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) का कारण भी बन सकता है। आइए जानें डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness): पाएं जानकारी  हेल्थलाइन (Health line) के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और कई कंडीशंस का कारण बन सकता है जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी। एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन (Loneliness) न केवल मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि इससे फिजिकल हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। यानी डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) पाया गया है। इस स्टडी के अनुसार जो लोग सोशली आइसोलेटेड होते हैं, उनमें डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर का खतरा बढ़ सकता है। इस स्टडी में ऐसा पाया गया है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं उनमें डायबिटीज (Diabetes) का रिस्क 34% अधिक होता है। इन लोगों में अकेले नहीं रहने वाले लोगों की तुलना में 75% अधिक पुअर शुगर कंट्रोल भी पाया गया है। इस स्टडी से यह भी पता चलता है कि अकेलापन (Loneliness) डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकता है जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। डायबिटीज और अकेलेपन से कैसे बचें?  डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को ठीक बनाए रखना जरूरी है। इसमें सही डायट का सेवन करना, एक्सरसाइज और योगा करना, तनाव से बचना आदि शामिल है। इसके साथ ही नियमित रूप से चेक-अप कराना भी इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। अकेलेपन से बचाव के लिए यह सुझाव आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं: वालंटियर बने दूसरों की मदद करना अकेलेपन को दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके लिए उन ग्रुप्स और आर्गेनाईजेशन को ज्वाइन करें, जो यह कार्य करते हैं। इसके साथ ही आप सपोर्ट ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते हैं।  एक्टिव रहें एक्टिव रहने से आप अपने अकेलापन (Loneliness), डायबिटीज (Diabetes) और कई समस्याओं से बचा जा सकता है। यही नहीं इससे आप अन्य लोगों से भी मिलजुल सकते हैं। इसके लिए आप योगा, कार्डियो जैसी क्लासेज को ज्वाइन कर सकते हैं। अपने प्रियजनों और दोस्तों से बात करें अकेलापन (Loneliness) को दूर करने के लिए उन लोगों के सम्पर्क में रहें जो आपके करीबी हैं। ऐसे लोगों से कनेक्ट करते रहें जो आपको पॉजिटिव रहने में मदद करें। कुछ ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप्स और फोरम्स को भी ज्वाइन कर सकते हैं। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में आप जान ही गए होंगे। अब जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) के बारे में कुछ और। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डायबिटीज के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Thelinkbetweendiabetesandloneliness #diabetes #loneliness 

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Excessive salt intake

Excessive Salt Intake: भारत में एक साइलेंट महामारी, जो स्वास्थ्य के लिए है एक बड़ा खतरा

नमक (Salt) यानी साल्ट खाने का एक जरूरी हिस्सा है, जिसकी मात्रा खाने में ज्यादा हो या कम, दोनों ही स्थितियों में खाने का स्वाद पूरी तरह से बदल जाता है। नमक शरीर के लिए फायदेमंद है और कई कार्यों को करने में उपयोगी है जैसे फ्लूइड बैलेंस, नर्व और मसल फंक्शन व मसल फंक्शन को मेंटेन करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक नमक (Salt) खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) एक साइलेंट महामारी की तरह है, जो कई गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा रही है। आइए जानें कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (ICMR) के अनुसार हमारे देश में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) करना एक साइलेंट महामारी के समान है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें विस्तार में कि कौन-कौन से कारण है जिसकी वजह से भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) को एक साइलेंट महामारी माना जा रहा है:  यह तो थी जानकारी कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? अब जानिए कि नमक की खपत कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा नमक की खपत कम करने के लिए क्या करें?  नमक का भी सही या कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। नमक (Salt) की खपत को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं: यह तो थी जानकारी भारत में अधिक नमक (Salt) के सेवन के बारे में। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी दोनों लोगों को कम सोडियम युक्त नमक के सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है ताकि लोगों को अधिक नमक से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। याद रखें कि नमक (Salt) के शरीर के लिए लाभ और हानियां उसकी मात्रा पर निर्भर करती हैं। अगर इसको कम और सही मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #WhyhighsaltintakeisasilentepidemicinIndia #Excesssaltintake #silentepidemic #salt #heartproblems

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Control BP, Sugar & Depression

ब्लड प्रेशर, शुगर और डिप्रेशन को कंट्रोल करने के लिए यह ड्रिंक्स हैं बेहतरीन

हेल्दी रहने के लिए कई चीजों को महत्वपूर्ण माना गया है उन्हीं में से एक है सही आहार का सेवन। हाई ब्लड प्रेशर (Blood Pressure), डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं आजकल सामान्य होती जा रही हैं। हेल्दी आहार के साथ ही ड्रिंक्स का सेवन करना भी इनसे बचाव के लिए जरूरी हैं। ऐसा माना गया है कि डिहाइड्रेशन कई समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में पानी और अन्य हेल्दी ड्रिंक्स पीना ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन के रोगियों के लिए फायदेमंद माने गए हैं। कुछ पेय पदार्थ खासतौर पर ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को कंट्रोल करने, ब्लड शुगर को कम करने और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। आइए जाने ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) हारवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard School of Public Health) के अनुसार पानी वो ड्रिंक है जो शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही दूध को भी हेल्थ के लिए फायदेमंद पाया गया है। आइए जानें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में:  ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को मैनेज करने के लिए इन ड्रिंक्स का सेवन करें: डायबिटीज (Diabetes) डायबिटीज (Diabetes) को कंट्रोल में रखने के लिए पानी, बिना चीनी के चाय व कॉफी और लो फैट मिल्क को फायदेमंद पाया गया है। इसके अलावा अन्य फायदेमंद ड्रिंक्स इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डिप्रेशन (Depression) डिप्रेशन एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल बहुत से लोग प्रभावित हैं। डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स इस प्रकार हैं: कैमोमाइल चाय: कैमोमाइल चाय को अपने शांत करने और तनाव से बचाव वाले गुणों के लिए जाना जाता है। इससे स्ट्रेस और एंग्जायटी को मैनेज करने में मदद मिलती है।  हिबिस्कस टी: कुछ स्टडीज यह बताती हैं कि हिबिस्कस टी यानी गुड़हल की चाय में मूड को सही रखने वाले गुण होते हैं। इससे डिप्रेशन को दूर करने में मदद मिलती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Diabetes #bloodpressure #sugarcontrol #depressionrelief #healthydrinks #naturalremedies

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vitamin d

विटामिन डी डेफिशिएंसी: इस कमी से बढ़ सकता है इन 5 बीमारियों का जोखिम

विटामिन डी (Vitamin D) एक ऐसा जरूरी न्यूट्रिएंट है, जिसका इस्तेमाल हमारा शरीर कैल्शियम और फोस्फरस को एब्जॉर्ब करने के लिए करता है। अगर बात की जाए कैल्शियम और फोस्फरस की, तो यह हमारी हड्डियों और दांतों को बनाने और मजबूत बनाये रखने में मददगार हैं। इसके साथ ही इनके कई अन्य लाभ भी हैं। विटामिन डी (Vitamin D) का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना गया है है। हालांकि, कुछ फूड्स से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी यानी डेफिशिएंसी होने से कई समस्याएं होने का रिस्क रहता है। आइए जानें विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) के बारे में। विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार विटामिन डी (Vitamin D) को सूरज की रोशनी, कई फूड्स और सप्लीमेंट्स से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) दुनिया भर में सामान्य समस्याओं में से सबसे सामान्य है।  विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) इस प्रकार हैं  रिकेट्स रिकेट्स बच्चों में होने वाली समस्या है, जिसमें उनकी हड्डियां कमजोर और सॉफ्ट हो जाती है। इससे हड्डियों का आकर अलग हो जाता है। ऐसा माना गया है कि इसका मुख्य कारण होता है विटामिन डी (Vitamin D) की कमी। लोग इस समस्या को गरीबी और कुपोषण से जोड़ कर देखते हैं। वयस्कों में इस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया के नाम से जाना जाता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द हो सकता है और मसल्स कमजोर हो सकते हैं। यह नहीं इससे फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में कैल्शियम के एब्ज़ोर्प्शन के लिए विटामिन डी (Vitamin D) जरूरी है। इसकी कमी के कारण बोन डेंसिटी कम होती है और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ता है। यही नहीं इससे हड्डियों के टूटने का रिस्क भी अधिक हो जाता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही इस रोग के विकसित होने की संभावना बढ़ती है। ऑटोइम्यून डिजीज  ऐसा पाया गया है कि विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) ऑटोइम्यून डिजीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑटोइम्यून कंडीशन से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल पाया गया है। यह कंडीशंस हैं मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि। हालांकि, इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। कुछ कैंसर विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) से कुछ कैंसर होने का रिस्क भी बढ़ता है। कुछ स्टडीज भी इन दोनों के लिंक के बारे में बताती हैं। ऐसा माना गया है कि इस कमी से ब्रेस्ट कैंसर और बाउल कैंसर का रिस्क बढ़ता है। ऐसा भी पाया गया है कि लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल से सम्पूर्ण कैंसर मोर्टेलिटी में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि इससे प्रोस्टेट और पैंक्रियाटिक कैंसर का रिस्क बढ़ता है। यानी, यह कमी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है, जो एक गंभीर समस्या का विषय है। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कार्डियोवैस्कुलर डिजीज विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज  से भी जोड़ा गया है, जिसमें कई हार्ट डिजीज शामिल हैं।  यह भी पाया गया है कि इससे बुजुर्गों की मसल्स कमजोर हो सकती हैं और उन्हें दर्द हो सकता है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और अन्य मेंटल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। यह कमी मूड डिसऑर्डर्स का कारण भी बन सकती है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Vitamin D #vitamind #healthtips #bonehealth #immunity #diseaserisk #nutrition #healthawareness

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Ice Bath Benefits & Risks You Should Know

आइस बाथ- एक लोकप्रिय ट्रेंड जिसके कई हैं फायदे, लेकिन इसके इन स्वास्थ्य जोखिमों से रहें सावधान

पिछले कुछ समय से आइस बाथ (Ice bath) चैलेंज सोशल मीडिया पर बहुत प्रचलित हो रहा है। ऐसा माना गया है कि इसके कई फायदे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप आइस बाथ के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इसे कायरोथेरेपी भी कहा जाता है। इसमें ठंडे पानी में बर्फ मिला कर नहाया जाता है ताकि सूजन और मांसपेशियों में दर्द को कम किया जा सके। लेकिन, हाल ही में हुई रिसर्च बताती हैं कि आइस बाथ (Ice bath) से कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार अगर आइस बाथ (Ice bath) को सही से लिया जाए तो यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो स्पोर्ट्स में भाग लेते हैं। लेकिन, इसको आजमाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लें और इसकी सही तकनीक के बारे में जान लें। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। हायपोथर्मिया ठंडे पानी में ज्यादा समय रहने से शरीर पर फिजिकल रिएक्शन हो सकता है। 15 डिग्री सेल्सियस  से कम तामपान के पानी में जाना बहुत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसमें शरीर का तापमान बहुत कम हो सकता है जिसे हायपोथर्मिया कहा जाता है। यह एक एमेर्जेंसी हैं, जिसमें तुरंत डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है। यही नहीं, ठंडे पानी से बाहर आने के बाद भी शरीर का टेम्प्रेचर कम हो सकता है और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर पर असर आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of Ice bath) ब्लड प्रेशर से भी संबंधित हैं। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती और यह अनकण्ट्रोल हो सकती है। इसका प्रभाव ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यही नहीं, अधिक ठंड से एकदम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन लोगों के लिए आइस बाथ (Ice bath) खासतौर पर खतरनाक है जिन्हें हार्ट, ब्लड वेसल्स या दिमाग से सम्बन्धित कोई समस्या है। सांस संबंधी समस्याएं आइस बाथ (Ice bath) के दौरान ठंडे पानी में रहने से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जैसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस। इस पानी में अधिक देर तक रहने से नर्वस और ब्लड वेसल्स को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे पैरों और हाथों में दर्द, उनका सुन्न होना या ठंड के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। यह तो थे आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath)। आइए जानें कि सही मार्गदर्शन और सलाह के बाद आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) के बारे में। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) आइस बाथ के फायदे (Benefits of Ice bath) इस प्रकार हो सकते हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Ice bath #icebath #coldtherapy #healthtrend #cryotherapy #wellnesstips

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Air Pollution May Trigger Anxiety and Depression

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा

एयर पॉल्यूशन (Air pollution) गंभीर समस्याओं में से एक है। हमारे देश में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। इस परेशानी का मुख्य कारण माना जाता जाता है गाड़ियों और इंडस्ट्रीज से निकले धुएं को। इस धुएं से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड आदि। इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन सांस संबंधी और कई रोगों का कारण बन सकता है। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार इसका प्रभाव मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के साथ लिंक किया है। आइए जानें पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में। पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार लगभग पूरी दुनिया की अधिकतम आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन लिमिट्स से अधिक है तथा जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक हैरान करने वाली जानकारी दी है। उनके अनुसार एयर पॉल्यूशन (Air pollution) मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण हो सकता है। एयर पॉल्यूशन (Air pollution) में मौजूद  हानिकारक पार्टिकल्स और गैसेस से हमारे दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब हमारी ब्लडस्ट्रीम पर पहुंच कर दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ावा मिलता है। यह तो थी पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में जानकारी। अब जानते हैं एयर पॉल्यूशन के अन्य प्रभावों के बारे में।  एयर पॉल्यूशन के दिमाग पर इफेक्ट  जैसा की पहले ही बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन (Air pollution) से मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इससे मेंटल हेल्थ की क्वालिटी कम होती है जिससे नींद में भी समस्या आ सकती है और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।  बच्चों और पहले से ही मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के रोगी पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकते हैं।  हालांकि, पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में अभी अधिक स्टडी की जानी जरूरी है। यही नहीं, लोगों को एयर पॉल्यूशन (Air pollution) के सम्पर्क में आने से भी बचना चाहिए, ताकि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सके।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने के उपाय? एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने  के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Air pollution #airpollution #WHOwarning #mentalhealth #anxiety #depression #toxicair #healthalert

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6 Tips from Harvard Doctors to Keep Your Liver Healthy

हार्वर्ड डॉक्टर्स से जानें लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए 6 महत्वपूर्ण बातों के बारे में

लिवर (Liver) हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पेट के ऊपरी हिस्से में होता है। यह अंग हमारे शरीर के कई जरूरी कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है जैसे खून से टॉक्सिन को फिल्टर करना, ब्लड प्रेशर  और डाइजेशन को सही रखना आदि। यही नहीं ,यह यह शरीर का सबसे बड़ा ग्लेंड है और स्ट्रांग इम्युनिटी, डेटोक्सिफिकेशन, विटामिन स्टोरेज आदि में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। इसलिए, अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसे हेल्दी रखने का सबसे बेहतरीन उपाय है अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाना। लिवर (Fatty liver) से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनकी जानकारी हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार हर किसी को होनी चाहिए। आइए जानें लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know)।  लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know) कोलंबियासर्जरी (Columbiasurgery) के अनुसार लिवर (Liver) शरीर का वो सबसे बड़ा सॉलिड ऑर्गन है, जो कई जरूरी कार्यों को करने का काम करता है। हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know), इस प्रकार हैं: लिवर की पुनर्जन्म क्षमता लिवर एक ऐसा ऑर्गन है जो अपने सेल्स को फिर से जेनरेट कर सकता है। लिवर (Liver) की यह कपैसिटी उसे सही से कार्य करने में मदद करती है और इससे शरीर को हेल्दी रहने में भी मदद मिलती है। हालांकि, किसी समस्या के कारण यह कपैसिटी सीमित हो सकती है। लिवर के लिए यह चीजें हैं हानिकारक अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जैसे एल्कोहॉल। एल्कोहॉल के सेवन से लिवर संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही अनहेल्दी डायट को लेने से भी बचें। जंक फ़ूड और प्रोसेस्ड आहार को अपने आहार में जगह देने से बचें। यही नहीं, कुछ दवाईयों का अधिक सेवन करने से भी लिवर (Liver) को नुकसान हो सकता है। लिवर के लिए यह हैं फायदेमंद चीजें खट्टे फल जैसे निम्बू, संतरे आदि का सेवन करना लिवर (Fatty liver) के लिए बेनेफिशियल है। यही नहीं हरी पत्तेदार सब्जियों को खाना भी लिवर के साथ-साथ सम्पूर्ण हेल्थ के लिए फायदेमंद है। कॉफ़ी का सेवन लिवर (Liver) के लिए अच्छा है लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। नींद से प्रभावित होता है लिवर  खराब नींद लिवर की कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है जैसे टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना आदि। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 9 घंटे रात की नींद लेने से लिवर को रिपेयर करने और सम्पूर्ण रूप से हेल्दी रहने में मदद मिलती है। कुछ दवाईयां भी लिवर (Liver) पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। इसे भी पढ़ें:- मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान लिवर को हेल्दी रखने के तरीके अगर आप अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना चाहते हैं, तो हमारे लिए हाइड्रेट रहना, पर्याप्त नींद लेना और सही आहार का सेवन करना जरूरी है। यही नहीं स्मोकिंग करना भी लिवर के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से लिवर टेस्ट कराने से भी लिवर (Liver) को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है। लिवर को कौन सी समस्याएं कर सकती हैं प्रभावित? लिवर संबंधी समस्याओं में एक है हेपेटाइटिस जो वायरस, बैक्टीरिया आदि के कारण होती है। इसके साथ ही फैटी लिवर (Fatty liver) वो परेशानी है, जिसमें लिवर में अधिक फैट जमा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक एल्कोहॉल का सेवन करने वाले लोगों को फैटी लिवर (Fatty liver) की समस्या होती है। लेकिन नॉन-एल्कोहॉलिक लोगों को भी फैटी लिवर (Fatty liver) हो सकता है। लिवर फेलियर होने पर लिवर ट्रांसप्लांट एक इलाज है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fatty liver #liverhealth #harvarddoctors #livercare #healthtips #naturalremedies #liverdetox #healthybody

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सीडीएससीओ की अपील: टॉयलेट में फ्लश करें एक्सपायर्ड दवाएं, जानिए क्यों

दवाईयां कई चीजों में ट्रीटमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं। यह गंभीर और लंबे समय से परेशान करने वाली कंडिशंस का उपचार कर सकती हैं। यह न केवल बीमारियों का उपचार करती है बल्कि इनसे हेल्थ में भी सुधार होता है। अधिकतर लोगों को अपने जीवन के किसी न किसी पॉइंट पर दवाई लेनी ही पड़ती है। लेकिन, दवाईयों का गलत इस्तेमाल हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है। बिना एक्सपर्ट की सलाह के इन्हें नहीं लेना चाहिए। भारत की टॉप ऑर्गनाइजेशन ने हाल ही में लोगों से यह अपील की है कि वो मेडिसिन्स को टॉयलेट में ही फ्लश करके डिस्पोज करें। आइए जानें सीडीएससीओ द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly) के बारे में। सीडीएससीओ द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly): पाएं जानकारी  मेडलाइनप्लस (Medlineplus) के अनुसार दवाईयों के साथ एक रिस्क जुड़ा होता है। इसलिए दवाईयों को लेने से पहले इन रिस्क्स के बारे में विचार करना जरूरी है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) हमारे देश की सबसे बड़ी ड्रग रेगुलेटरी एजेंसी है। इसने लोगों से एक अपील की है। इसके अनुसार लोगों को एक्सपायर्ड या उन दवाईयों को जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते हैं, कभी कूड़ेदान में न फेंकें बल्कि इसकी जगह इन्हें टॉयलेट में फ्लश करें। यह तो थी सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly) के बारे में जानकारी। अब जानिए कि ऐसा करने कि सलाह क्यों दी जा रही है?  सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा क्यों दी जा रही है यह सलाह? सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) यानी सीडीएससीओ (CDSCO) ने ऐसी कुछ दवाईयों की लिस्ट भी जारी की है जिनका गलत तरीके से इस्तेमाल करना न केवल हानिकारक है, बल्कि मृत्यु का कारण भी बन सकती है। सीडीएससीओ (CDSCO) के अनुसार इन दवाईयों को कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। ऐसा करना हानिकारक हो सकता है। हो सकता है कि कूड़ेदान या गलत तरीके से इन्हें डिस्पोज करने से यह किसी बच्चे के हाथ लग जाए और वो इसे खा लें। ऐसा करना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे ही अगर इन्हें गलती से कोई जानवर खा ले, तो यह उसके लिए भी हानिकारक है। इसीलिए, इन्हें कूड़ेदान की जगह टॉयलेट में फ्लश करना चाहिए। सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा जारी की दवाईयों की लिस्ट इस प्रकार है:  इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ड्रग टेक बैक प्रोग्राम दवाईयों को सही तरीके से डिस्पोज करने के लिए सीडीएससीओ (CDSCO) ने स्टेट ड्रग कंट्रोल डेप्रार्ट्मेंट और केमिस्ट्स एसोसिएशन को ड्रग टेक बैक प्रोग्राम शुरू करने की सलाह दी है। इस प्रोग्राम के अनुसार लोगों को अपनी एक्सपेयर्ड या इस्तेमाल न होने वाली दवाओं को सही से डिस्पोज करने के लिए सही स्थानों में जमा कराने की सुविधा मिलेगी। जिससे दवाईयों को सही से डिस्पोज किया जा सकेगा। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) के अनुसार दवाईयों को सही से डिस्पोज करने से न केवल जानवरों और लोगों को कोई हानि नहीं होगी बल्कि एनवायरनमेंट की भी इससे रक्षा होगी। ड्रग टेक बैक प्रोग्राम को स्थापित करने का उद्देश्य केवल सही से इनको डिस्पोज करना ही नहीं, बल्कि पर्यवरण पर इनके प्रभाव को कम करना भी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। इसे भी पढ़ें:- मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान Latest News in Hindi Today Hindi CDSCO #CDSCO #ExpiredMedicines #DrugDisposal #FlushMedicines #HealthSafety #IndiaPharma #MedicalWaste #DrugAwareness

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मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान

बरसात का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। मच्छर आकार में छोटे होते हैं, लेकिन इनके कारण होने वाले रोग जानलेवा भी हो सकते हैं। दुनिया भर में मच्छरों की  3,500 से ज़्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। यह नमी वाले वातारण में पनपते और बढ़ते हैं। इनमें मादा मच्छरों के काटने से मनुष्यों और जानवरों में रोगों के फैलने की संभावना अधिक रहती है। मच्छरों से बचाव के सावधानियां बरतना जरूरी हैं। अच्छी बात यह है कि जल्दी ही आंध्र प्रदेश सरकार मच्छरों के खतरे से लड़ने के लिए एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) यानी एसएमओएसएस (SMOSS) शुरू करने की तैयारी में है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।  क्या है एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system)? जैसा की पहले ही बताया गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार बरसात के मौसम में मच्छरों के खतरे को कंट्रोल करने के लिए एक एआई बेस्ड सोल्यूशन को शुरू करने वाली है। इसका नाम है स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) यानी एसएमओएसएस (SMOSS)। यह सिस्टम मच्छरों के लिंग, जाति, पॉपुलेशन डेंसिटी और मौसम की कंडीशन को पहचाने के लिए एआई से काम करने वाले सेंसर्स, ड्रोन और अन्य डिवाइसेस का इस्तेमाल करेगा। अगर किसी क्षेत्र में मच्छरों संख्या अधिक हो जाती है, तो यह सिस्टम ऑटोमेटिक एलर्ट भेजेगा। इससे उन क्षेत्रों में जल्दी से मच्छरों से बचाव क लिए छिड़काव और फोगिंग का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। यानी, एसएमओएसएस (SMOSS) के इस्तेमाल से मच्छरों को नष्ट करने और इनके कारण होने वाले रोगों से बचाव में मदद मिलेगी। स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) की खास बातें एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) की कुछ खासियतें इस प्रकार हैं:  एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) का उद्देश्य आंध्र प्रदेश में इस सिस्टम को बहुत जल्दी लांच किया जा रहा है। इसके उद्देश्य इस प्रकार हैं” इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है लोगों को मच्छरों से होने वाली बीमारियों (SMOSS) से बचाना, जिसके हर साल लाखों मामले सामने आते हैं। इस सिस्टम से मच्छरों की डेंसिटी का भी पता चल सकता है और जरूरत पड़ने पर सही कार्यवाई करने में मदद मिलेगी। आंध्र प्रदेश सरकार जल्दी ही स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) की शुरुआत करने वाली है और इसको राज्य के विभिन स्थानों से शुरू किया जाएगा जैसे विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, काकीनाडा,  नेल्लोर और कुर्नूल आदि। अब जानिए कि मच्छरों से बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें? मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को भी कुछ सावधानियों को बरतना चाहिए, जैसे:  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi SMOSS #monsoon #mosquitoes #AItechnology #AndhraPradesh #SMOSS #healthcareinnovation #mosquitocontrol #technews #publichealth

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हार्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों को नजर अंदाज करने चाहिए यह 5 हानिकारक फूड्स

जब भी बात गंभीर बीमारियों की आती है, तो हम अक्सर यही मानते हैं कि यह समस्याएं वयस्कों या बुजुर्गों को प्रभावित करती हैं। लेकिन, बदलते समय में डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) जैसे रोग बच्चों में भी सामान्य होते जा रहे हैं। बच्चों में हार्ट कंडीशंस को पेडिएट्रिक हार्ट कंडीशंस के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों में बढ़ती इन समस्याओं के कई कारण हैं और एक्सपर्ट्स की मानें तो अनहेल्दी डायट उनमें से ही एक है। आजकल बच्चे हेल्दी आहार की जगह जंक फ़ूड की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन, बच्चों के खान-पान का खास ध्यान रखना जरूरी है। इस बात की जानकारी होना बहुत जरूरी है कि हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) से बचाव के लिए बच्चों को किन फूड्स को देने से बचना चाहिए? आईये जानें हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार अधिकतर लोग यह सोचते हैं कि बचपन में बच्चों को हार्ट डिजीज (Heart disease) का कोई जोखिम नहीं होता, लेकिन बचपन में ही हार्ट का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। पाएं जानकारी कि हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? अधिक चीनी युक्त आहार अधिक चीनी युक्त पेय पदार्थ या  आहार का सेवन बच्चों के हार्ट के साथ-साथ सम्पूर्ण स्वास्थ के लिए हानिकारक है। सोडा, पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स , केक आदि के सेवन से वजन बढ़ता है और वजन बढ़ना हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकता है। फ्लेवर्ड योगर्ट फ्लेवर्ड योगर्ट में अधिक चीनी, रंग और अन्य केमिकल्स होते हैं, जो हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकते हैं। इसलिए, इनकी जगह बच्चों को सादा दही खाने को दें। आप इन में फल, शहद आदि डाल कर बच्चे को दे सकते हैं। सफेद चावल बच्चे अक्सर सफेद चावल खाना पसंद करते हैं। लेकिन, इनमें हेल्दी फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स नहीं होते। यही नहीं, रिफाइंड ग्रेन जैसे सफेद चावल, ब्रेड, पास्ता आदि बहुत जल्दी शुगर में बदल जाते हैं, जो शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज (Heart disease) का रिस्क बढ़ जाता है। तले हुए फूड्स अधिक तला भुला आहार भी बच्चों हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकता है। बाजार में मिलने वाले तले भूने आहार को अक्सर बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल में बनाया जाता है। इससे एक्रिलामाइड्स और एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) जैसे हानिकारक कंपाउंड्स पैदा होते हैं, जिससे इंफ्लेमेशन की समस्या हो सकती है। इसलिए बच्चों को इनका सेवन करने से भी बचना चाहिए। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले आइसक्रीम  आइसक्रीम में चीनी, कैलोरीज और सेचुरेट फैट्स अधिक होते हैं। अधिक चीनी और फैट युक्त आहार से भी वजन बढ़ता है। यही नहीं इससे हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए इसका सेवन करने से भी बचना चाहिए। अब यह तो आप समझ ही गए होंगे कि हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? इसलिए बच्चों हार्ट डिजीज (Heart disease) से बचाने के लिए उन्हें बाजार में मिलने वाले खाने की जगह घर पर बना आहार खाने को दें। उनके आहार में फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज आदि शामिल करें। बच्चे के वजन को सही बनाए रखें और इसके साथ ही बच्चों का भी रूटीन चेक-अप कराएं।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Heart problems #KidsHealth #HeartExpertsTips #HarmfulFoodsForKids #HealthyParenting #ChildNutrition #AvoidTheseFoods #UnhealthySnacks

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