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मानसून में संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टरों ने स्वास्थ्य संबंधी नई सलाह जारी की

नई दिल्ली, 26 जून। देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय होने के साथ ही संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने लोगों के लिए नई स्वास्थ्य सलाह जारी करते हुए स्वच्छता, सुरक्षित खानपान और समय पर उपचार को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर मानसून के दौरान होने वाली कई बीमारियों से बचा जा सकता है। वायरल संक्रमण और जलजनित बीमारियों का बढ़ा खतरा विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और पेट से जुड़े संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। जलभराव और दूषित पानी के कारण संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने लोगों से साफ और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीने की सलाह दी है। खानपान में बरतें विशेष सावधानी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान बाहर का खुला और लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना चाहिए। ताजा और घर का बना भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। मौसमी फल और हरी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करने की सलाह दी गई है। मच्छरों से बचाव है बेहद जरूरी डॉक्टरों ने कहा कि बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की है। बच्चों और बुजुर्गों को रखें विशेष सुरक्षित विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार के बुखार, उल्टी, दस्त या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर दें ध्यान डॉक्टरों ने पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने, पौष्टिक भोजन खाने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है। विटामिन और खनिजों से भरपूर आहार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक होता है। लक्षण दिखें तो स्वयं दवा लेने से बचें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचने की सलाह दी है। यदि बुखार लगातार बना रहे, तेज सिरदर्द हो या शरीर में कमजोरी महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून का मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन सही खानपान, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय सलाह के जरिए अधिकांश संक्रमणों से बचाव संभव है। उन्होंने लोगों से मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। स्रोत:स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सार्वजनिक सलाह, स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा संस्थानों द्वारा जारी दिशानिर्देश मूल रिपोर्ट:डॉक्टरों की सलाह, स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी तथा विभिन्न स्वास्थ्य समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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बारिश और उमस के मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जारी की सलाह

नई दिल्ली, 25 जून। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय होने के साथ बारिश और उमस का प्रभाव बढ़ गया है। मौसम में आए इस बदलाव के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है। संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैल सकते हैं। जलभराव और गंदे पानी के कारण डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर और पेट संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। खानपान में बरतें सावधानी डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में बाहर का खुला और अस्वच्छ भोजन खाने से बचना चाहिए। ताजा और घर का बना भोजन स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की भी सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान की जरूरत विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है। ऐसे लोगों को मौसम में बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बुखार, खांसी या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दी गई है। मच्छरों से बचाव जरूरी बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी है। मच्छरदानी, रिपेलेंट और पूरी बाजू के कपड़ों का उपयोग करने की भी सिफारिश की गई है। स्वच्छता और व्यक्तिगत देखभाल पर जोर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से हाथ धोना, साफ पानी का उपयोग करना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनने और शरीर को साफ रखने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही खानपान, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय सलाह के माध्यम से मानसून के दौरान होने वाली अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। स्रोत:स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सार्वजनिक सलाह एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित जानकारी मूल रिपोर्ट:मौसमी स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों, चिकित्सा विशेषज्ञों की राय एवं विभिन्न स्वास्थ्य समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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गर्मी और उमस के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जारी की सावधानी संबंधी सलाह

नई दिल्ली, 24 जून 2026। देश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अत्यधिक गर्मी और उमस शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन, थकान, हीट स्ट्रेस और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्म मौसम में शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे पानी और आवश्यक खनिजों की कमी हो सकती है। ऐसे में लोगों को नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है। नारियल पानी, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन भी लाभदायक माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने दोपहर के समय तेज धूप में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि किसी कारणवश बाहर जाना आवश्यक हो तो हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने और सिर को ढककर रखने की सलाह दी गई है। इससे शरीर पर गर्मी का प्रभाव कम किया जा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इन वर्गों में गर्मी और उमस का असर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। किसी भी प्रकार की कमजोरी, चक्कर, अत्यधिक पसीना या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों ने खानपान पर भी ध्यान देने की सलाह दी है। ताजे फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। वहीं अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही जीवनशैली अपनाकर गर्मी और उमस के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है। लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों और स्वास्थ्य सलाह का पालन करने की अपील की गई है। स्रोत:स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह से प्राप्त जानकारी मूल रिपोर्ट:विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों, चिकित्सकीय सलाह और समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर स्वास्थ्य और वेलनेस पर फोकस, देशभर में विशेष कार्यक्रम

जय राष्ट्र न्यूज़ | लाइफ एंड हेल्थ डेस्क | 21 जून 2026 मुख्य समाचार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर देशभर में स्वास्थ्य, फिटनेस और वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक परिसरों, सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने योग के महत्व को लेकर जागरूकता अभियान चलाए। इस वर्ष योग दिवस का मुख्य फोकस स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग लोगों के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर जोर योग दिवस कार्यक्रमों में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योग अभ्यास तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। कई कार्यक्रमों में प्राणायाम, ध्यान और योगासन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया। देशभर में सामूहिक योग कार्यक्रम दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। हजारों लोगों ने खुले मैदानों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर योगाभ्यास में भाग लिया। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी विशेष योग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योग अभ्यास हृदय स्वास्थ्य, श्वसन प्रणाली, लचीलापन और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों ने लोगों को योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी। युवाओं में बढ़ती रुचि हाल के वर्षों में युवाओं के बीच योग और फिटनेस के प्रति रुचि बढ़ी है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी योग से जुड़े कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों को व्यापक पहुंच मिली है। विश्लेषकों का मानना है कि युवा पीढ़ी स्वास्थ्य और वेलनेस को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो रही है। जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव विशेषज्ञों ने बताया कि योग मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और तनाव से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में योग को एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है। योग दिवस के अवसर पर कई चिकित्सा संस्थानों ने भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। वैश्विक स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब दुनिया के अनेक देशों में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा योग आज वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का हिस्सा बन चुका है। कई देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों ने भी योग दिवस समारोह आयोजित किए। निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 ने एक बार फिर स्वास्थ्य, फिटनेस और मानसिक संतुलन के महत्व को रेखांकित किया है। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि योग आने वाले समय में भी स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। स्रोत: Ministry of AYUSH मूल रिपोर्ट:https://www.ayush.gov.in जय राष्ट्र न्यूज़

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मानसून के साथ वायरल संक्रमण और डेंगू रोकथाम पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष तैयारी

जय राष्ट्र न्यूज़ | लाइफ एंड हेल्थ डेस्क | 19 जून 2026 मुख्य समाचार देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने वायरल संक्रमण, डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में जलभराव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और बदलते मौसम के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और अस्पतालों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। डेंगू और वायरल संक्रमण पर विशेष नजर स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मानसून के दौरान डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका रहती है क्योंकि बारिश का जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इसके अलावा वायरल बुखार, फ्लू और अन्य संक्रमण भी इस मौसम में तेजी से फैल सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और नियमित निगरानी की प्रक्रिया तेज कर दी है। अस्पतालों को दिए गए निर्देश कई राज्यों में सरकारी और निजी अस्पतालों को संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से गंभीर मामलों की संख्या को कम किया जा सकता है। जागरूकता अभियान भी तेज स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। नागरिकों को घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों और स्थानीय निकायों के माध्यम से भी जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह दी है: इन उपायों से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मौसम और स्वास्थ्य का संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान तापमान और आर्द्रता में बदलाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अफवाहों और अप्रमाणित उपचारों से बचने तथा केवल चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की अपील कर रहे हैं। प्रशासन की निगरानी जारी स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। कई नगर निकायों ने फॉगिंग, सफाई अभियान और जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी और समय पर कार्रवाई से डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। निष्कर्ष मानसून के आगमन के साथ वायरल संक्रमण और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। साफ-सफाई, मच्छर नियंत्रण और समय पर चिकित्सा सलाह ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है। स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:https://www.mohfw.gov.in जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET Re-Exam के दबाव के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की चिंता

जय राष्ट्र न्यूज़ | लाइफ एंड हेल्थ डेस्क | 17 जून 2026 मुख्य समाचार NEET Re-Exam 2026 को लेकर देशभर में लाखों छात्र तैयारी में जुटे हुए हैं। हालांकि परीक्षा की तैयारी और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने छात्रों के तनाव और भावनात्मक दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोबारा परीक्षा की तैयारी, अनिश्चितता का माहौल और लगातार प्रतिस्पर्धा का दबाव कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को इस विषय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बढ़ रहा है मानसिक दबाव NEET देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में री-एग्जाम की स्थिति ने कई छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक दबाव पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक तनाव, चिंता और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना छात्रों की एकाग्रता और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों की क्या राय है? मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि परीक्षा को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानने की सोच छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। उनका सुझाव है कि छात्रों को अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या और परिवार का सहयोग मानसिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। छात्रों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का दबाव डालने के बजाय उन्हें भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार खुलकर बातचीत करना और छात्रों की चिंताओं को समझना तनाव कम करने में मदद कर सकता है। सोशल मीडिया का प्रभाव परीक्षा से जुड़े समाचार, अफवाहें और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएं भी छात्रों की चिंता बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छात्र केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अनावश्यक अफवाहों से दूर रहें। डिजिटल माध्यमों का संतुलित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। तनाव कम करने के उपाय विशेषज्ञों ने छात्रों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं: इन उपायों से परीक्षा के दौरान मानसिक दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों की राय शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी महत्वपूर्ण है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है। बेहतर प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ और संतुलित रहना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को परिणाम के बजाय अपनी तैयारी और सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। समाज के लिए भी एक संदेश विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा में सफलता और असफलता को लेकर समाज का दृष्टिकोण भी बदलने की आवश्यकता है। छात्रों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का बोझ कम किया जाना चाहिए ताकि वे स्वस्थ मानसिक वातावरण में अपनी क्षमता का विकास कर सकें। निष्कर्ष NEET Re-Exam 2026 के दबाव के बीच छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित दिनचर्या, पारिवारिक सहयोग और सकारात्मक सोच छात्रों को तनाव से निपटने में मदद कर सकती है। परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें स्वास्थ्य, शिक्षा और युवाओं से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए।

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बदलते मौसम के बीच वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क

बदलते मौसम में वायरल संक्रमण बढ़ने की आशंका, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा स्वास्थ्य अपडेट दिनांक: 13 जून 2026 मुख्य समाचार नई दिल्ली: देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच वायरल संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर नजर रखते हुए अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान और आर्द्रता में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतने और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। अस्पतालों में बढ़ाई गई निगरानी नई दिल्ली: संभावित संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। अस्पतालों को आवश्यक दवाओं और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार बुखार, सर्दी, खांसी और गले में संक्रमण जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर विशेष नजर रखी जा रही है। बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा नई दिल्ली: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में वायरल संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने कहा है कि लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होगा। बचाव के लिए जारी की गई सलाह नई दिल्ली: स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को नियमित रूप से हाथ धोने, पर्याप्त पानी पीने और संतुलित आहार लेने की सलाह दी है। इसके अलावा खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों में सतर्क रहने को कहा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वच्छता और समय पर उपचार से संक्रमण के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। मौसम परिवर्तन बना प्रमुख कारण नई दिल्ली: मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि कई क्षेत्रों में तापमान, बारिश और आर्द्रता के स्तर में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे मौसम में वायरस अधिक सक्रिय हो सकते हैं, जिससे संक्रमण के मामले बढ़ने की संभावना रहती है। स्वास्थ्य विभाग लगातार मौसम और बीमारी के आंकड़ों की निगरानी कर रहा है। जनजागरूकता अभियान पर जोर नई दिल्ली: स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से अभियान चलाने की योजना बनाई है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जागरूकता फैलाने से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। निष्कर्ष नई दिल्ली: बदलते मौसम के कारण वायरल संक्रमण के मामलों में वृद्धि की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। अस्पतालों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर उपचार से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें स्वास्थ्य, जीवनशैली और जनहित से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए।

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गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत

गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत

गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत, अस्पताल में नशाखोरी और गंदगी का बोलबाला छतरपुर (मप्र) छतरपुर जिले के बक्सवाहा स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। ग्राम कुही किशनपुरा निवासी करीब 60 वर्षीय महेश पाटोदिया उर्फ टीकाराम की मौत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गलत इलाज और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हो गई। साधारण बुखार और जुकाम की शिकायत पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टर ने दवा देने के साथ बोतल इंजेक्शन लगाया। लेकिन इंजेक्शन चढ़ते ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बार-बार डॉक्टर को बुलाया, लेकिन समय पर मदद नहीं मिली और थोड़ी ही देर में मरीज ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि यह मौत सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि यदि सही समय पर ध्यान दिया जाता और बेहतर उपचार मिलता तो मरीज की जान बच सकती थी। वहीं इस घटना ने अस्पताल की अंदरूनी हालत की पोल भी खोल दी है। अस्पताल परिसर में नशाखोरी और गंदगी का आलम इस कदर है कि रिकॉर्ड रूम के बाहर शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं, महिला प्रसव कक्ष और शौचालय तक शराबखोरी के सबूत मिले हैं। गंदगी का स्तर इतना अधिक है कि अस्पताल इलाज का केंद्र कम और नशेड़ियों का अड्डा ज्यादा नजर आता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर समय पर अस्पताल में नहीं मिलते, दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं और मरीजों को सही इलाज नहीं दिया जाता। इसके विपरीत अस्पताल में शराबखोरी आम हो गई है और यहां तक कि वार्ड और ड्रेसिंग रूम के बाहर भी आवारा कुत्ते और जानवर आराम फरमाते दिखाई देते हैं। इससे साफ है कि अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस घटना से ग्रामीणों में गुस्सा है। मृतक परिवार और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार डॉक्टरों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल में फैली गंदगी और नशाखोरी पर तुरंत रोक लगाई जाए और मरीजों को समय पर दवाएं और उचित इलाज उपलब्ध कराया जाए। यह कोई पहला मामला नहीं है जब बक्सवाहा अस्पताल की लापरवाही सामने आई हो। ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कभी कार्रवाई नहीं होती। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह घटना भी पहले की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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link between diabetes and loneliness

Loneliness: अकेलेपन का कनेक्शन ब्लड शुगर से – क्या कहती है रिसर्च?

डायबिटीज (Diabetes) यानी मधुमेह एक ऐसी समस्या है, जो आजकल लोगों की खराब जीवनशैली के कारण बढ़ती जा रही है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण कई गंभीर रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस रोग की संभावना को कम करने के लिए एक्सपर्ट सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, एक और परेशानी जिससे आजकल अधिकतर पब्लिक परेशान है वो है अकेलापन (Loneliness)। यह अकेलापन (Loneliness) भी कई रोगों का कारण बन सकता है जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि। लेकिन, एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) का कारण भी बन सकता है। आइए जानें डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness): पाएं जानकारी  हेल्थलाइन (Health line) के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और कई कंडीशंस का कारण बन सकता है जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी। एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन (Loneliness) न केवल मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि इससे फिजिकल हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। यानी डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) पाया गया है। इस स्टडी के अनुसार जो लोग सोशली आइसोलेटेड होते हैं, उनमें डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर का खतरा बढ़ सकता है। इस स्टडी में ऐसा पाया गया है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं उनमें डायबिटीज (Diabetes) का रिस्क 34% अधिक होता है। इन लोगों में अकेले नहीं रहने वाले लोगों की तुलना में 75% अधिक पुअर शुगर कंट्रोल भी पाया गया है। इस स्टडी से यह भी पता चलता है कि अकेलापन (Loneliness) डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकता है जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। डायबिटीज और अकेलेपन से कैसे बचें?  डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को ठीक बनाए रखना जरूरी है। इसमें सही डायट का सेवन करना, एक्सरसाइज और योगा करना, तनाव से बचना आदि शामिल है। इसके साथ ही नियमित रूप से चेक-अप कराना भी इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। अकेलेपन से बचाव के लिए यह सुझाव आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं: वालंटियर बने दूसरों की मदद करना अकेलेपन को दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके लिए उन ग्रुप्स और आर्गेनाईजेशन को ज्वाइन करें, जो यह कार्य करते हैं। इसके साथ ही आप सपोर्ट ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते हैं।  एक्टिव रहें एक्टिव रहने से आप अपने अकेलापन (Loneliness), डायबिटीज (Diabetes) और कई समस्याओं से बचा जा सकता है। यही नहीं इससे आप अन्य लोगों से भी मिलजुल सकते हैं। इसके लिए आप योगा, कार्डियो जैसी क्लासेज को ज्वाइन कर सकते हैं। अपने प्रियजनों और दोस्तों से बात करें अकेलापन (Loneliness) को दूर करने के लिए उन लोगों के सम्पर्क में रहें जो आपके करीबी हैं। ऐसे लोगों से कनेक्ट करते रहें जो आपको पॉजिटिव रहने में मदद करें। कुछ ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप्स और फोरम्स को भी ज्वाइन कर सकते हैं। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में आप जान ही गए होंगे। अब जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) के बारे में कुछ और। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डायबिटीज के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Thelinkbetweendiabetesandloneliness #diabetes #loneliness 

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Excessive salt intake

Excessive Salt Intake: भारत में एक साइलेंट महामारी, जो स्वास्थ्य के लिए है एक बड़ा खतरा

नमक (Salt) यानी साल्ट खाने का एक जरूरी हिस्सा है, जिसकी मात्रा खाने में ज्यादा हो या कम, दोनों ही स्थितियों में खाने का स्वाद पूरी तरह से बदल जाता है। नमक शरीर के लिए फायदेमंद है और कई कार्यों को करने में उपयोगी है जैसे फ्लूइड बैलेंस, नर्व और मसल फंक्शन व मसल फंक्शन को मेंटेन करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक नमक (Salt) खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) एक साइलेंट महामारी की तरह है, जो कई गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा रही है। आइए जानें कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (ICMR) के अनुसार हमारे देश में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) करना एक साइलेंट महामारी के समान है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें विस्तार में कि कौन-कौन से कारण है जिसकी वजह से भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) को एक साइलेंट महामारी माना जा रहा है:  यह तो थी जानकारी कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? अब जानिए कि नमक की खपत कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा नमक की खपत कम करने के लिए क्या करें?  नमक का भी सही या कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। नमक (Salt) की खपत को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं: यह तो थी जानकारी भारत में अधिक नमक (Salt) के सेवन के बारे में। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी दोनों लोगों को कम सोडियम युक्त नमक के सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है ताकि लोगों को अधिक नमक से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। याद रखें कि नमक (Salt) के शरीर के लिए लाभ और हानियां उसकी मात्रा पर निर्भर करती हैं। अगर इसको कम और सही मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #WhyhighsaltintakeisasilentepidemicinIndia #Excesssaltintake #silentepidemic #salt #heartproblems

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