Know the harmful effects of Giloy juice

गिलोय के जूस के हो सकते हैं बहुत से नुकसान, जानिए किन लोगों को नहीं करना चाहिए इसका सेवन

आयुर्वेद में ऐसी कई हर्ब्स हैं जिन्हें हेल्थ के लिए लाभदायक माना जाता है। उन्हीं में से एक है गिलोय (Giloy)। इसे अमृता या गुडुची के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना गया है कि यह हर्ब डायजेशन के लिए अच्छी है और इसके साथ ही इम्युनिटी को भी बढ़ाती है। यही नहीं, इस हर्ब में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके सेवन से बुखार कम करने में मदद मिलती है और शरीर को कई तरह के इंफेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि आजकल गिलोय का जूस (Giloy juice) बड़ी सख्या में लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके बहुत से फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? आइए जानें कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार गिलोय (Giloy) सीजनल एलर्जीज में फायदेमंद होती है। इससे स्किन रैशेज कम हो सकते हैं। इसके साथ ही डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि को मैनेज करने में भी यह मदद कर सकती है। लेकिन, कुछ लोगों को इनका सेवन करने से बचना चाहिए। जानें किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? ऑटोइम्यून डिजीज के रोगी:  गिलोय का जूस (Giloy juice) इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट करता है जिससे ल्यूपस, रुमेटीइड गठिया या क्रोहन रोग  से पीड़ित लोगों के लिए इसका सेवन उनकी स्थिति को और बदतर बना सकता है। गर्भवती महिलाएं गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति में गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने की सलाह नहीं दी जाती है। यही नहीं उन्हें इस दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसका सेवन करना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाईयां लेने वाले लोग  गिलोय का जूस (Giloy juice) उन लोगों को भी नहीं पीना चाहिए, जो ब्लड प्रेशर लो करने वाली दवाईयां ले रहे हैं। क्योंकि गिलोय (Giloy) भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है। ऐसे में इन दोनों के कॉम्बिनेशन से रोगी का ब्लड प्रेशर लेवल बहुत अधिक कम हो सकता है। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  लिवर की समस्या से पीड़ित रोगी ऐसा पाया गया है कि गिलोय (Giloy) लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जिन लोगों को लिवर संबंधी समस्याएं हैं या जिन्हें पीलिया के के लक्षणों का अनुभव हो रहा हो, उन्हें इनका सेवन करने से बचना चाहिए। यह तो आप जान ही गए होंगे कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)। यह भी सलाह दी जाती है कि गिलोय (Giloy) या गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने से पहले किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर कि सलाह लें खासतौर पर अगर आप किसी अंडरलाइंग हेल्थ कंडीशन से गुजर रहे हों या कोई दवा ले रहे हैं।  गिलोय (Giloy) के कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। कुछ लोग इसके सेवन के बाद पेट में परेशानी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। ऐसा आमतौर पर इसकी अधिक मात्रा लेने से होता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि गिलोय या गिलोय का जूस (Giloy juice) किसी भी बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। इसलिए, कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Giloy #giloyjuice #sideeffects #ayurvedichealth #immunitybooster #healthalert #naturalremedies #giloywarning

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cardiac arrest symptoms

दिल की सेहत के लिए अलर्ट, कार्डियक अरेस्ट के लक्षण और बचाव

पिछले कुछ सालों में कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कुछ सेलेब्रिटीज भी इसकी वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें सिद्धार्थ शुक्ला, सिंगर केके, पुनीत सुपरस्टार, राजू श्रीवास्तव आदि का नाम शामिल है। हाल ही में आई एक खबर के अनुसार अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की भी कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) की वजह से मौत हो गई। एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि कोविड महामारी के बाद से हार्ट से जुड़ी समस्याओं के कारण मृत्यु के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, इसके बारे में कोई सुबूत मौजूद नहीं है कि इनका कारण कोविड 19 है। स्ट्रेस, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और अंडरलायिंग मेडिकल कंडीशन आदि को इस समस्या के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है। आइए पाएं जानकारी कार्डियक अरेस्ट के बारे में। यह भी जानें कि इससे कैसे बचा जा सकता है? कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) के बारे में पाएं जानकारी क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार यह समस्या तब होती है जब दिल धड़कना करना बंद कर देता है या इतनी तेजी से धड़कता है कि यह ब्लड पंप करना बंद कर देता है। चिंता की बात यह है कि इसके लक्षण बिना किसी चेतावनी के नजर आते हैं। इस स्थिति में ब्लड ब्रेन और अन्य जरूरी अंगों तक फ्लो करना बंद कर देता है। अगर इसका तुरंत उपचार न हो, तो कुछ ही मिनटों में रोगी की मृत्त्यु हो सकती है। लेकिन, तुरंत उपचार से रोगी का जीवन बच सकता है। कार्डियक अरेस्ट के कारण  कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) का प्राइमरी कारण हार्ट में इलेक्ट्रिकल मॉलफंक्शन्स को माना जाता है, जो जीवन के लिए हानिकारक एरिथमिया (Arrhythmia) का कारण बन सकता है। यह इलेक्ट्रिकल खराबी कई अंडरलाइंग हार्ट कंडीशंस या अन्य फैक्टर्स के कारण हो सकती है। यह अंडरलाइंग कारण इस प्रकार हैं: जानिए कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) क्या हो सकते हैं? कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) अधिकतर मामलों में इस कंडीशन का रोगी में कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) इस प्रकार हैं: कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) संभव है लेकिन यह उपचार रोगी को तुरंत मिलना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) इस तरह से संभव है: इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  कार्डियक अरेस्ट से कैसे बचें? अगर आपको कोरोनरी आर्टरी डिजीज या अन्य हार्ट डिजीज है, तो इनके सही समय पर इलाज से इस समस्या के जोखिम को कम किया जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Cardiac arrest #hearthealth #cardiacarrest #heartcare #healthalert #preventiontips #healthylifestyle

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magic mushroom depression

क्या जादुई मशरूम की सिर्फ एक खुराक से आ सकती है डिप्रेशन के लक्षणों में कमी

डिप्रेशन (Depression) या स्ट्रेस एक ऐसी समस्या है, जिससे बड़ी संख्या में आजकल लोग प्रभावित हैं। अन्य शब्दों में कहें तो आजकल यह समस्या आम है। इसका कारण खराब जीवनशैली और व्यस्त जीवन को माना जा सकता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए सही आहार का सेवन करना, एक्सरसाइज करना और योगा आदि को फायदेमंद माना गया है। कुछ फूड से भी डिप्रेशन (Depression) की समस्या से आराम मिल सकता है। इन्हीं में से एक है एक तरह की मशरूम जिसे मैजिक मशरूम (Magic mushroom) के नाम से जाना जाता है। एक नई स्टडी यह बताती है जी कि मैजिक मशरूम (Magic mushroom) में पाया जाने वाला कंपाउंड स्ट्रेस और डिप्रेशन (Depression) के इलाज में फायदेमंद हो सकता है। आइए जानें इसके बारे में और अधिक। मैजिक मशरूम और डिप्रेशन में संबंध नई स्टडी के अनुसार मैजिक मशरूम (Magic mushroom) में पाए जाने वाले कंपाउंड सिलोसाइबिन (Psilocybin) की सिर्फ एक डोज डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस के इलाज में प्रभावी है, खासतौर पर कैंसर के मरीजों में। यही नहीं यह भी पाया गया है कि इस डोज का प्रभाव रोगियों में दो साल से भी अधिक समय तक रहता है। यह स्टडी उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण की तरह है, जो कैंसर से जूझ रहे हैं। ट्रायल यह बताते हैं की सिलोसाइबिन (Psilocybin) की एक डोज को थेरेपी के साथ लेने से इमोशनल डिस्ट्रेस कम हो सकता है। मैजिक मशरूम और डिप्रेशन में संबंध के बारे में की गयी स्टडी इस स्टडी में 28 कैंसर के रोगियों को एक डोज सिलोसाइबिन (Psilocybin) की दी गई और इसके साथ ही उन्हें साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी दिया गया। दो साल के बाद इनमे से पचास प्रतिशत से भी अधिक लोगों में डिप्रेशन (Depression) की कमी पाई गई। यह भी पाया गया है कि लगभग पचास प्रतिशत लोगों में यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो गयी है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत लोगों में इसकी कमी पायी गई। अभी इसके बारे में स्टडी चल रही है और इसकी दो डोजेज की तुलना प्लेसबो से की जा रही है, जो एक नकली ट्रीटमेंट है जो वास्तव में कोई थेराप्यूटिक इफेक्ट नहीं डालता, लेकिन रोगी के मन पर इसका प्रभाव हो सकता है। इस मशरूम की डोज के बारे में की गई और अधिक स्टडी से यह पता चल सकता है कि क्या रोगी इसके इस्तेमाल से डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस से राहत पा सकता है या नहीं। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  क्या है मैजिक मशरूम (Magic mushroom)  मैजिक मशरूम (Magic mushroom) प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मशरूम हैं, जो अपने हैलुसिनोजेनिक इफेक्ट्स के लिए जानी जाती हैं। इसका प्रमुख कंपाउंड है सिलोसाइबिन (Psilocybin)। जब इसका सेवन किया जाता है, तो सिलोसाइबिन (Psilocybin) शरीर में सिलोसिन में बदल जाता है जो एक साइकोएक्टिव केमिकल है। यह मशरूम आम मशरूम की तरह दिखती है। इसके कई इफेक्ट हो सकते हैं: कई देशों में मैजिक मशरूम (Magic mushroom) का इस्तेमाल पूरी तरह से इलीगल माना गया है। रीसर्चर इसके लाभों आदि पर अभी और शोध कर रहे हैं और इसके लाभों के बारे में अभी और अधिक रिसर्च की जानी बहुत जरूरी है। अगर इस पर किए जाने वाले शोधों का परिणाम सही रहता है, तो आने वाले समय में सिलोसाइबिन (Psilocybin) का इस्तेमाल कैंसर के रोगियों में डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस के उपचार के लिए एक स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट बन सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Psilocybin #magicmushroom #psilocybin #depressionrelief #mentalhealth #psychedelictherapy

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भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा 

वजन का बढ़ना या मोटापा (Obesity) आजकल न केवल वयस्कों बल्कि बच्चों के लिए भी एक बड़ी समस्या बन चुका है। अधिक वजन कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का एक कारण भी है। इसके लिए लोग जिम में घंटों समय बिताते हैं और कई तरह की डायट्स फॉलो करते हैं। यही नहीं, इसके लिए आजकल लोग इसके लिए सर्जरी और कई दवाईयों का भी सहारा ले रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स इनकी सलाह नहीं देते हैं। लेकिन अगर आप दवा से वजन कम करने चाहते हैं तो यह आपके लिए एक अच्छी खबर हो सकती है क्योंकि अब डेनमार्क की एक मशहूर दवा “वेगोवी (Wegovy)” भारत में भी जल्दी ही उपलब्ध होगी। आइए जानें डेनमार्क मशहूर दवा वेगोवी (Wegovy) के बारे में विस्तार से। इसकी कीमत के बारे में भी जानें।  पाएं जानकारी वजन कम करने वाली दवा वेगोवी (Wegovy weight loss medicine) के बारे में वजन और मोटापा (Obesity) कम करने वाली दवा वेगोवी (Wegovy) को वजन कम करने में बहुत प्रभावी पाई गयी है। इस दवा को खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो मोटापा (Obesity) से पीड़ित हैं और जिन्हें वजन कम करने में समस्या हो रही है। इस दवा को डेनमार्क की कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo nordisk) ने बनाया है। यह दवा पेन के आकार में उपलब्ध है। उन दवा का इस्तेमाल बीएमआई 30 ज्यादा लोगों के लिए किया जा सकता है। इसके साथ ही वो लोग भी इसे ले सकते हैं जिनका बीएमआई 27 से अधिक है और जिन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हैं। लेकिन, ध्यान रहे डॉक्टर की सलाह के बिना इस दवा को लेने से बचें अन्यथा वजन कम करने वाली दवा वेगोवी (Wegovy weight loss medicine) कई परेशानियों का कारण बन सकती है। कैसे करती है यह दवा काम? वेगोवी (Wegovy) एक जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट है जो भूख को कम करने का काम करती है और इसके साथ ही इससे पाचन भी स्लो हो जाता है। यही नहीं, इससे इन्सुलिन सेक्रेशन भी बढ़ सकता है। इन सबसे वजन कम करने में मदद मिल सकती है और मोटापा (Obesity) कम हो सकता है। भारत में भी उपलब्ध है वजन कम करने वाली दवा वेगोवी (Wegovy weight loss medicine)  अब यह दवा भारत में भी मिलने वाली है। इसे बनाने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo nordisk) से यह बताया है कि वो जल्दी ही इसे भारत में लांच करने वाले हैं। अगर बात की जाए इसकी कीमत की तो उम्मीद है कि यह लगभग 17,000 रुपये की शुरुआती कीमत पर लोगों के लिए उपलब्ध होगी। हालांकि, इसकी कीमत कुछ अन्य फैक्टर्स पर भी डिपेंड करेगी। यह दवा इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध होगी और यह अलग-अलग डोज में मिलेगी। विभिन्न डोज की कीमत अलग रहेगी। इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा सन फार्मा, सिप्ला आदि भी वेगोवी (Wegovy) जैसी दवाइयां बनाने की दिशा में कर रही हैं काम  ऐसा माना गया है कि नोवो नॉर्डिस्क (Novo nordisk) द्वारा बनाई वेगोवी (Wegovy) के हेल्थ पर कई अन्य पॉजिटिव इफेक्ट्स हो सकते हैं। लेकिन इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से बचें।  ऐसा पाया गया है कि पिछले कुछ सालों में भारत में मोटापे की समस्या बहुत अधिक बढ़ी है लेकिन यहां ऐसे लोग बहुत कम हैं जो इसके लिए दवाइयों का सेवन करते हों। भारत की कुछ दवा कंपनियां जैसे सन फार्मा, सिप्ला आदि भी वेगोवी (Wegovy) जैसी दवाइयां बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इनके द्वारा बनाई दवा भी आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। इस बात का भी ध्यान रखें कि दवा के साथ ही मरीज को हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की भी राय दी जाती है। इस दवा के परिणाम रोगी की हेल्थ और जीवनशैली पर निर्भर करता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Wegovy #weightloss #healthnews #indiahealth #fatloss #obesitytreatment #newdruglaunch #fitnessindia #slimmingpill

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6 Worst Foods for Heart Health You Should Avoid

दिल की सेहत के लिए न खाएं ये 6 फूड्स, नहीं तो बढ़ जाएगा हार्ट अटैक का खतरा

ऐसा माना जाता है कि लाइफस्टाइल फैक्टर्स जैसे एक्सरसाइज करना, स्मोकिंग व एल्कोहॉल को अवॉयड करना और स्ट्रेस से बचाव आदि से हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) से बचा जा सकता है। हमारे आहार का सीधा संबंध कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन से है। हेल्दी आहार से ब्लड प्रेशर सही और कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है। हालांकि, हेल्दी डायट किसी डॉक्टर द्वारा रेकमेंडेड दवाई या थेरेपी का विकल्प नहीं है लेकिन इससे गंभीर हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का रिस्क कम हो सकता है जैसे हार्ट अटैक (Heart attack) आदि। ऐसे कई फूड्स हैं जिन्हें अवॉयड करने से हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है। आइए जानें हेल्दी हार्ट के लिए अवॉयड किए जाने वाले फूड्स (Foods to avoid to keep heart healthy) के बारे में। हेल्दी हार्ट के लिए अवॉयड किए जाने वाले फूड्स (Foods to avoid to keep heart healthy): पाएं जानकारी  मायो क्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार कुछ आहार हार्ट डिजीज के रिस्क को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अपनी ईटिंग हैबिट्स को बदलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके कई फायदे हैं। हेल्दी हार्ट के लिए अवॉयड किए जाने वाले फूड्स (Foods to avoid to keep heart healthy) इस प्रकार हैं: मीठे पेय-पदार्थ अगर आप मीठे पेय पदार्थों के शौकीन हैं, तो ध्यान रखें कि यह ड्रिंक्स आपकी हार्ट हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। इसलिए, मीठे और बोतल में मिलने वाले जूस, सोडा और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करने से बचें। यह ड्रिंक्स शुगर से भरपूर होते हैं और इनमें कैलोरीज बहुत अधिक होते हैं। इससे वजन बढ़ सकता है और इसके साथ ही डायबिटीज का रिस्क भी अधिक रहता है। फ्राइड फिश क्या आप जानते हैं कि जिन तले-भुने खाने को आप पसंद करते ,हैं वो आपके हार्ट को नुकसान पहुंचा सकते है? इसलिए फ्रेंच फ्रिज, फ्राइड चिकन, डोनट आदि को खाने से बचना जरूरी है। इन खाद्य पदार्थों को अनहेल्दी तेल में पकाया जाता है। इन्हें खाने से बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और हार्ट अटैक (Heart attack) का खतरा बढ़ सकता है।  एल्कोहॉल  ऐसा माना गया है कि सही मात्रा में एल्कोहॉल का सेवन करना हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) की वजह नहीं बन सकता, लेकिन अगर आपका ब्लड प्रेशर या ट्राईग्लिसराइड लेवल अधिक हो, तो यह हार्ट प्रॉब्लम्स का कारण बन सकता है। अधिक एल्कोहॉल का सेवन करने से मोटापा और ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकती हैं।  पिज़्जा पिज़्जा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे खाना हर कोई व्यक्ति पसंद करता है। पिज़्जा हेल्दी हो सकता है अगर उसे सही तरीके से बनाया जाए। लेकिन, बाजार में मिलने वाले पिज़्जा में अधिक मात्रा में सोडियम, फैट और कैलोरीज होती हैं जिससे हार्ट अटैक (Heart attack) का जोखिम बढ़ सकता है। हो सके तो कम चीज, होल वीट और अधिक सब्जियों के साथ इसे बनाएं।  इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा योगर्ट अगर आप फ्लेवर्ड योगर्ट यानी दही खाने के शौकीन हैं, तो अभी सावधान हो जाएं क्योंकि हेल्दी हार्ट के लिए अवॉयड किए जाने वाले फूड्स (Foods to avoid to keep heart healthy) में यह भी शामिल है। यह फैट से भरपूर होता है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इसका सेवन करता है तो इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यही नहीं, इससे वजन, ब्लड प्रेशर और अन्य हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) की संभावना बढ़ सकती हैं। इसकी जगह सादे दही को खाएं। सफेद चावल या ब्रेड सफेद चावल या ब्रेड खाने से मोटापे, बैली फैट और डायबिटीज का जोखिम बढ़ता है। इन सभी समस्याओं से हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ता है। इनकी जगह आप ब्राउन राइस या ब्रेड का सेवन करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Heart problems #hearthealth #heartattack #unhealthyfoods #cardiacrisk #healthtips #dietalert

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Curry Leaves Benefits

करी पत्ते का सेवन: वजन कम करने से लेकर आंखों की रोशनी बढ़ाने तक, जानिए इसके 7 बड़े फायदे

भारत का खाना अपने मसालों और हर्ब्स के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां हर घर में ऐसे मसालों और हर्ब्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो न केवल आहार को स्वादिष्ट बनाते हैं बल्कि हेल्थ के लिए लाभदायक भी हैं। इन्हीं में से एक है कड़ी पत्ता। कड़ी पत्ता (curry leaf) साउथ इंडिया के आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका इस्तेमाल करी, चटनी, चावल से बनी डिशेज और सूप आदि में किया जाता है। कड़ी पत्ता (Curry leaves) एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन ए, बी और सी और कई मिनरल्स से भरपूर होता है जैसे कैल्शियम, फोस्फोरस, आयरन आदि। इसमें कई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज होती हैं। आइए जानें कड़ी पत्ते के बेनेफिट्स (Benefits of curry leaves) के बारे में विस्तार से। कड़ी पत्ते के बेनेफिट्स (Benefits of curry leaves): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार कड़ी पत्ता कड़ी के पौधे (जिसे मुरैना कोएनिगी कहा जाता है) के पत्ते हैं। यह पत्ते बहुत ही खुशबूदार होते हैं और इनका स्वाद भी अनोखा होता है। आइए जानें कड़ी पत्ते के बेनेफिट्स (Benefits of curry leaves) के बारे में। डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद ऐसा पाया गया है कि कड़ी पत्ता (Curry leaves) ब्लड शुगर को मैनेज करने में फायदेमंद है।अपने एंटी-हाइपरग्लायसेमिक गुणों के कारण यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम कर सकते हैं और ब्लड शुगर लेवल को सही बनाए रखते हैं। हालंकि, इसके बारे में और अधिक शोध किया जाना आवश्यक है। स्किन के लिए लाभदायक  अगर आप अच्छी स्किन पाना चाहते हैं, तो कड़ी पत्ता (curry leaf) या इससे बने एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल करें, जो इंफ्लेमेटरी सेल्स के अगेंस्ट काम करते हैं। अगर इसका इस्तेमाल स्किन बर्न्स, नील आदि पर किया जाए तो भी त्वचा को हील होने में आसानी होती है। इसलिए कड़ी पत्ते (Curry leaves) से बने एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल क्रीम्स आदि में किया जाता है। यही नहीं, इन्हें दाग-धब्बों, खुजली, रिंगवर्म, मुहांसों आदि के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। कोलेस्ट्रॉल को रखे सही कड़ी पत्ते के बेनेफिट्स (Benefits of curry leaves) कोलेस्ट्रॉल से भी जुड़े हुए हैं। इन पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिससे यह कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड लेवल को कम करने में हेल्प करते हैं। यानी, यह पत्ते कोलेस्ट्रॉल और फैट मेटाबॉलिज्म को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  लिवर हेल्थ को रखे सही कुछ शोध यह बताते हैं कड़ी पत्ते (Curry leaves) का एक्सट्रेक्ट लिवर एंजाइम्स की एक्टिविटीज को बढ़ाते हैं। यह एंजाइम्स लिवर में लिपिड्स की ऑक्सीडेशन को सपोर्ट करते हैं। यानी, कड़ी पत्ता (curry leaf) के उपयोग से लिवर को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके बारे में भी और अधिक स्टडी की जानी जरूरी है।   इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा बालों के स्वास्थ्य को रखे सही कड़ी पत्ता (curry leaf) हेयर ग्रोथ को बढ़ाता है और इससे बालों का झड़ना भी कम हो सकता है। इनमें कुछ ऐसे न्यूरिएंट्स भी होते हैं, जो हेयर फॉलिकल्स को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही बालों को जल्दी सफेद से भी यह बचाता है। वजन को करे कम  वजन को कम करने में भी कड़ी पत्ते (Curry leaves) को लाभदायक पाया गया है। इन पत्तों के सेवन से डायजेशन सही रहता है और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यही नहीं यह मेटाबॉलिज्म को कम करने में भी यह हेल्पफुल है।  आंखों के लिए फायदेमंद कड़ी पत्ता (curry leaf) को आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है। यह विटामिन ए का अच्छा स्त्रोत है जो आंखो के स्वास्थ्य के लिए बेनेफिशियल पाया गया है। इसके नियमित सेवन से आंखों संबंधी कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है जैसे मोतियाबिंद। यह नहीं विजन को भी इससे सुधारा जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Curry leaves #currybenefits #weightloss #eyehealth #ayurvedicherbs #naturalremedies #healthylifestyle #curryleaves

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guggul benefits

गुग्गुल, एक ऐसी आयुर्वेदिक हर्ब जो स्वास्थ्य को सुधारे और रखें हमें स्वस्थ व तंदुरुस्त

यह तो हम सब जानते हैं कि आयुर्वेद (Ayurveda) की उत्पत्ति भारत में हुई है। इसका उद्देश्य सही डायट, व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करना है। गुग्गुल (Guggul) ऐसी हर्ब है जिसे आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद पाया गया है। इसका इस्तेमाल पुराने समय से ही आयुर्वेदिक मेडिसिन्स के किया जाता रहा है। गुग्गुल का अर्थ है बीमारियों को दूर करना। गुग्गुल (Guggul) का सबसे बड़ा बायोएक्टिव कॉम्पोनेन्ट है ओलियो गम रेसिन, जिसके कई चिकित्सीय लाभ हैं। आयुर्वेदा (Ayurveda) के अनुसार यह हर्ब वजन कम करने, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने आदि में बहुत बेनेफिशियल है। इसके और भी बहुत से फायदे हैं। आइए जानें गुग्गुल के बेनेफिट्स (Benefits of Guggul) के बारे में। गुग्गुल के बेनेफिट्स (Benefits of Guggul): पाएं जानकारी हेल्थललाइन (Healthline) के अनुसार गुग्गुल (Guggul) में प्लांट कंपाउंड्स, जरूरी तेलों, फ्लेवोनोइड्स और अमीनो एसिड का मिश्रण होता है। यह सभी हेल्थ के लिए फायदेमंद पाए गए हैं। आइए जानें गुग्गुल के बेनेफिट्स (Benefits of Guggul) के बारे में। शरीर से हानिकारक तत्वों को निकाले बाहर गुग्गुल (Guggul) शरीर से हानिकारक और विषाक्त चीजों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। अगर शरीर की डेटोक्सिफिकेशन करनी है, तो यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। यही नहीं,हेल्दी इशूज के लिए भी फायदेमंद है। कोलेस्ट्रॉल को कम करे यह हर्ब कोलेस्ट्रॉल लेवल को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है। कोलेस्ट्रॉल लेवल को बैलेंस करने की पूरी शक्ति गुग्गुल (Guggul) में होती है। अधिक कोलेस्ट्रॉल से हार्ट प्रॉब्लम्स होने की संभावना बढ़ जाती है। यानी, कोलेस्ट्रॉल को मैनेज कर के हार्ट संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। पेट के लिए बेहतरीन ऐसा भी माना गया है कि पाचन क्रिया को सही बनाए रखने में यह हर्ब फायदेमंद है। शरीर की प्राकृतिक पाचन क्षमता को बढ़ाने में यह हर्ब मदद करती है। पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने और पाचन क्षमता को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।  वजन को रखे सही अगर आप वजन को सही रखना चाहते हैं, तो भी इस हर्ब का इस्तेमाल किया जा सकता है। गुग्गुल (Guggul) शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार है और अधिक टिश्यू के बनने से रोकता है। यह ऑयल और फैट के पाचन में भी सहायता करता है। इससे मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है, जिससे कई तरीकों से वेट मैनेजमेंट में सहायता मिलती है। जोड़ों के लिए फायदेमंद गुग्गुल (Guggul) जॉइंट की मूवमेंट की सपोर्ट में भी फायदेमंद पाया गया है। इसमें डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं जिससे जोड़ों से भी टॉक्सिन्स बाहर निकालते हैं। यह टॉक्सिन्स डिस्कम्फर्ट का कारण बन सकते हैं। यह जोड़ों के अंदर और आसपास के टिशूज को ल्युब्रिकेंट करने और उसकी मरम्मत करने में फायदेमंद पाया है, जिससे जोड़ों की मूवमेंट आसानी से हो पाती है। इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा स्किन हेल्थ में बेहतरीन गुग्गुल (Guggul) को कुछ स्किन कंडीशंस को दूर करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे एक्जिमा और सोरायसिस। यह दोनों स्किन की वो समस्याएं हैं जिसके कारण स्किन में इन्फ्लेमेशन होती है। हालांकि इसके बारे में अभी अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। कुछ स्टडीज में यह भी बता चला है कि यह हर्ब स्किन में रैशेज और खुजली जैसी समस्याओं से राहत पाने में भी फायदेमंद है। गुग्गुल (Guggul) को आमतौर पर हेल्थ के लिए अच्छा पाया गया है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन कुछ मामलों में नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए, इसके बारे में एक्सपर्ट या डॉक्टर से जान लें और उसके बाद ही इसका सेवन करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Guggul #guggul #ayurvedicherbs #naturalremedies #herbalhealth #guggulbenefits #ayurvedicmedicine #holistichealth

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Sleep Tourism: The New Trend in Restful Travel

Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest: स्‍लीप टूर‍िज्‍म, इसलिए ट्रैवल का यह नया ट्रेंड इन द‍िनों खूब क‍िया जा रहा है पसंद

अमूमन टूरिज्म का नाम सुनते ही मन में बैग पैक कर कहीं घूमने अथवा सैर-सपाटे का ही दृश्य नजर आता है। लेकिन स्लीप टूरिज्म में ऐसा नहीं है। स्लीप टूरिज्म यानी एक ऐसी ट्रिप्स या छुट्टियां जहां फोकस घूमने के बजाय अच्छी नींद पर होता है। आपको जानकर तज्जुब होगा कि अब लोग सिर्फ सोने के लिए सैर पर निकल रहे हैं। इस नए चलन को स्लीप टूरिज्म का नाम दिया गया है। इसमें नींद को सुधारने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा मेडिकल जांच और इलाज या फिर ऐसे स्पा ट्रीटमेंट्स दिए जाते हैं जो नींद लाने में मदद करते (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ये इंडस्ट्री लगभग 690 बिलियन डॉलर की हो चुकी है और तो और साल 2028 तक इसमें 400 बिलियन डॉलर की और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके पीछे की वजह यह कि अब लोग हेल्थ को सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज के रूप में ही नहीं देख रहे बल्कि वो नींद को भी अहमियत देने लगे हैं।   दुनिया भर में कई तरह के स्लीप-फोकस्ड ट्रिप्स मिल रहे (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हैं हालाँकि देखा यह भी गया है कि अब जब लोग जब छुट्टियों पर जाते हैं, तो वे काम से कोसों दूर रहते हैं और बच्चों के साथ टाइम स्पेंड करते हैं। अधिकतर लोग परिवार के बाद नींद को प्राथमिकता देना चाहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि होटल्स भी इसीलिए नींद को लेकर नए-नए प्रोग्राम्स बना रहे हैं। इस नए ट्रेंड के तहत दुनिया भर में कई तरह के स्लीप-फोकस्ड ट्रिप्स मिल रहे (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हैं। स्पेन के कई वेलनेस क्लिनिक में तो मेडिकल स्लीप प्रोग्राम मिलता है। यहां डॉक्टर सबसे पहले आपकी नींद की जांच करते हैं। जैसे, बार-बार नींद खुलना या खर्राटे। इसके बाद फिर वो आपकी लाइफस्टाइल, डाइट और कुछ तकनीकों से नींद बेहतर करने की प्लानिंग करते हैं। यूके में 74% लोग नींद न आने की बीमारी से ग्रसित (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हैं  इस बात इंकार नहीं किया जा सकता कि नींद की कमी अब एक आम समस्या बन चुकी है। दुनिया भर में लोग नींद न आने की बीमारी से पीड़ित हैं। एक आकड़ें के मुताबिक तो यूके में 74% लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। यहाँ तक 5 से 7 % लोग तो नींद पूरी न होने के चलते थकान की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जा रहे हैं। बेशक आज के युग में अच्छी नींद को अब एक लक्जरी माना जाने लगा है। ध्यान देने वाली बात यह कि लोग इसे पाने हेतु बड़ी कोशिश भी कर रहे (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हैं। कारण यही जो आजकल एक नया ट्रेंड काफी मशहूर हो रहा है। जिसे स्लीप टूरिज्म कहा जा रहा है। यह इस कदर मशहूर हो रहा है कि इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं जहाँ एक तरफ सोशल मीडिया पर लोकबाग सुबह योगा करते दिखते हैं, वहीं कई लोग अपनी नींद से जुड़ी रिपोर्ट्स भी शेयर कर रहे हैं। है न, हैरत वाली बात? नीदं से जुड़ी रिपोर्ट्स।   इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार  टेक्नोलॉजी से नींद को बेहतर बनाने की दिशा में भी (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) हो रहा है प्रयास  गौरतलब हो कि स्लीप और ड्रीम एक्सपर्ट चार्ली मॉर्ली ने लंदन के किम्पटन होटल के साथ एक प्रोग्राम बनाया है। उनके इस प्रोग्राम में मेहमान वीआर हेडसेट लगाकर गाइडेड मेडिटेशन करते हैं। और इस दौरान खास हर्बल टी पीते हैं। बहुत मुमकिन है भविष्य में स्लीप टूरिज्म में स्मार्ट बेड्स, डेटा एनालिसिस और टेक्नोलॉजी से ये भी देखा जा सकेगा कि क्या तरीका आपके लिए सबसे असरदार (Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest) है। इसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि भले ही टेक्नोलॉजी नींद खराब करने का कारण बनती हो, लेकिन बड़ी बात यह कि उसी टेक्नोलॉजी से नींद को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास हो रहा है। ऐसे में यदि आप भरपूर नींद का मजा एक सुंदर नजारे को देखते हुए लेना चाहते हैं, तो भारत में ये जगह इसके ल‍िए बेस्‍ट मानी गई हैं। इसमें मनाली, ऋष‍िकेश, गोवा, कुर्ग और मैसूर हैं। जहाँ सुकून की नींद के मजे ले सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Sleep Tourism: The Latest Travel Trend for Deep Rest #SleepTourism #WellnessTravel #TravelTrends2025 #RestfulVacations #Sleepcation #MindfulTravel #SleepRetreats

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International Yoga Day 2025

एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योगा, पीएम मोदी का इंटरनेशनल योगा डे पर संदेश

योगा (Yoga) को फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद माना गया है। यही कारण है कि पूरी दुनिया ने योगा के महत्व को समझा है और इसे अपनाया है। हर साल जून 21 को इंटरनेशनल योगा डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन की शुरुआत 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा की गई थी। इस साल इसकी थीम है “एक पृथ्वी, एक हेल्थ के लिए योगा”। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है लोगों के बीच के योग के लिए जागरूक करना और उन्हें इसे अपने जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित करना। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) मनाया। आइए जानें इस बारे में और अधिक। योगा (Yoga)  के महत्व के बारे में भी जानें।   इंटरनेशनल योगा डे 2025 इस साल का इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा विशाखापट्टनम में किया गया। इस इवेंट को रामकृष्ण बीच से भोगलपुराम तक 26 किलोमीटर के एरिया में आयोजित किया गया। ऐसा अनुमान है इसमें लगभग 3 लाख लोगों ने भाग लिया। आज 11वें इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) पर प्रधानमंत्री ने लोगों को यह संदेश दिया कि योगा (Yoga) मानवता के लिए एक जरूरी साधन है, जो हमें तनाव से दूर रहने में मदद कर सकता है।  आंध्र प्रदेश सरकार ने इस इवेंट के लिए अच्छे तैयारियां की थी। इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार ने योगंध्र-2025″ इवेंट ऑर्गेनाइज किया है। इसका उद्देश्य केवल और केवल योगा (Yoga)  को बढ़ावा देना और लोगों को इसे करने के लिए प्रेरित करना है। इस दिन कई अन्य प्रतिष्ठित लोगों ने भी भाग लिया और लोगों को इसके बारे में बताया। यह कार्यक्रम न केवल योगा (Yoga) के महत्व को लोगों तक बताने बल्कि भारत की कल्चरल हेरिटेज को लोगों को पहुंचाने का अच्छा तरीका है। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार क्या हैं योगा के फायदे? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार योगा (Yoga) के कई फायदे हैं जो शरीर और दिमाग से जुड़े हैं। इन्हें करने से शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी और स्ट्रेंथ बढ़ती है। इसके साथ ही चिंता और तनाव भी दूर होते हैं। जानिए किस तरह से है यह हमारे लिए बेनेफिशियल और क्यों करना चाहिए इसे हमें अपने जीवन में शामिल: संक्षेप में कहा जाए तो हेल्दी रहने के लिए योगा को अपनी दिनचर्या का एक भाग बना लेना चाहिए। इस इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) आप भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं और अन्य लोगों को भी इसके बारे में बताएं। यह बात भी ध्यान में रखें कि योगा (Yoga) की शुरुआत किसी एक्सपर्ट की राय और मार्गदर्शन के बाद ही करें। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi International Yoga Day #PMModi #YogaDay2025 #OneEarthOneHealth #InternationalYogaDay #YogaForWellness

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Sun Salutation

Surya Namaskar: क्यों है सूर्य नमस्कार हर दिन का सबसे बेहतर योग अभ्यास?

योग भारतीय संस्कृति का अमूल्य उपहार है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी संतुलन प्रदान करता है। योग के तमाम आसनों में से सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को सबसे बेहतर और संपूर्ण योगाभ्यास माना जाता है। आयुष मंत्रालय (Ayush Mantralaya) और योग से जुड़े जानकारों (Yoga Expert) के अनुसार नियमित और सही तरह से सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अत्यधिक लाभ मिलता है। सूर्य नमस्कार  (Surya Namaskar) सूर्य नमस्कार, जिसे सन सलुटेशन (Sun Salutation) भी कहा जाता है। सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) योग की एक शृंखलाबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें कुल 12 आसनों (postures) का समावेश होता है। ये आसन शरीर के विभिन्न अंगों को सक्रिय करते हैं और रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाते हैं। हर आसन के साथ विशेष श्वास प्रक्रिया जुड़ी होती है, जिससे फेफड़ों की क्षमता (Lungs Capacity) भी बढ़ती है। प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक शोधों के अनुसार सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को दिन की शुरुआत में सूर्योदय के समय करना सर्वोत्तम होता है, क्योंकि तब शरीर सबसे अधिक ऊर्जा ग्रहण करने की स्थिति में होता है। सूर्य नमस्कार के 12 चरण (12 Stages of Surya Namaskar) क्या कहते हैं रिसर्च? जर्नल ऑफ बॉडी वर्क एंड मूवमेंट थेरेपी 2011 (Journal of Bodywork and Movement Therapies 2011) के अनुसार लगातार 12 हफ्तों तक सूर्य नमस्कार करने से बॉडी फ्लेक्सिबल होती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहता है। रिसर्च के अनुसार सूर्य नमस्कार न केवल कैलोरी बर्न करता है बल्कि यह कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए भी लाभकारी है। सूर्य नमस्कार के लाभ 1. संपूर्ण शरीर का व्यायाम- सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) से शरीर के सभी मुख्य भाग जैसे पीठ, छाती, पेट, हाथ-पैर, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है। यह एक प्रकार का फुल-बॉडी वर्कआउट है। 2. वजन घटाने में सहायक- रिसर्च के मुताबिक सूर्य नमस्कार की 12 पूर्ण चक्रों से लगभग 156 कैलोरी बर्न होती हैं। इसे नियमित करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है। 3. हार्मोन बैलेंस करता है- सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) ग्रंथियों को सक्रिय करता है, विशेषकर थायरॉइड और पिट्यूटरी ग्रंथि। इससे हार्मोनल असंतुलन ठीक होता है, जो महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। 4. मानसिक तनाव में राहत- हर आसन में की जाने वाली गहरी सांसें और ध्यान, तनाव और चिंता को दूर करने में सहायक होती हैं। Harvard Health Publishing की एक रिपोर्ट के अनुसार, नियमित योग करने वाले लोगों में अवसाद और चिंता के लक्षणों में कमी देखी गई है। 5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है- पदहस्तासन और भुजंगासन जैसे आसन पेट के अंगों की मालिश करते हैं, जिससे कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) किसे नहीं करना चाहिए? सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलन मिलता है। प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक फिटनेस विशेषज्ञों तक, सभी इस योग अभ्यास की प्रभावशीलता को मान्यता देते हैं। यदि आप दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य से करना चाहते हैं, तो सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करें। योग से जुड़े जानकारों के अनुसार अगर आप शुरुआत करना चाहते हैं, तो सप्ताह में 3 से 5 दिन करें और फिर धीरे-धीरे आप आप अपने योगाभ्यास को बढ़ा सकते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। किसी भी योगासन, चिकित्सा सलाह या इलाज के लिए डॉक्टर या योग से जुड़े जानकारों से सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi Sun Salutation #SuryaNamaskar #DailyYoga #YogaBenefits #SunSalutation #MorningYoga #HealthyLifestyle #YogaPractice #MindBodyWellness

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