IIT Bombay Research Finds New Diabetes

आईआईटी बॉम्बे की रिसर्च: डायबिटीज का नया कारण है शरीर में मौजूद कॉलेजन प्रोटीन

डायबिटीज (Diabetes) वो गंभीर रोग है, जिसमें हमारा शरीर ब्लड शुगर को सही से रेगुलेट नहीं कर पाता। इस वजह से शरीर में ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि हमारा पैंक्रियाज पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बना पाता है या इसका सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण शरीर के कई अंगों को बहुत नुकसान होता है खासतौर पर हमारे हार्ट. नर्वज, किडनी आदि को। डायबिटीज के बारे में हुए एक नए शोध के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के कारण डायबिटीज (Diabetes) का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में और पाएं जानकारी इस शोध के बारे में। कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में क्या कहती है स्टडी? डायबिटीज के दौरान पैंक्रियाज के बीटा सेल्स धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। यह बीटा सेल्स इंसुलिन का निर्माण करते हैं। वहीं, एमेलिन उस हॉर्मोन को कहा जाता हैं जो इंसुलिन के साथ मिलकर ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करता है। लेकिन, डायबिटीज (Diabetes) की स्थिति में एमेलिन मॉलिक्यूल गलत तरीके से फोल्ड हो जाते हैं और एक दूसरे से चिपकने लगते हैं। इसकी वजह से सेल्स के लिए टॉक्सिसिटी बढ़ती है। हाल ही में आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए शोध से यह पता चला है कि पैंक्रियाज के एक्सटर्नल मैट्रिक्स में पाया जाने वाले कोलेजन I एमेलिन कोगुलेशन यानी जमाव को बढ़ाता है। इससे बीटा सेल्स को नुकसान होता है और डायबिटीज (Diabetes) की समस्या बढ़ती है। कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध के बारे में स्टडी का निष्कर्ष संक्षेप में कहा जाए तो आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए शोध में यह पता चला है कि एमेलिन और कोलेजन (Collagen) के बीच के इस कनेक्शन से डायबिटीज (Diabetes) की समस्या बढ़ सकती है। इससे कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में भी पता चलता है। इससे यह भी निष्कर्ष निकलता है कि डायबिटीज के इलाज के लिए नए इलाज के तरीकों की आवश्यकता है ताकि इस समस्या से बचा जा सके। इसलिए शोधकर्ता अब एमेलिन और कोलेजन (Collagen) के बीच के कनेक्शन को समझने के लिए क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी मॉडल को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही वो पैंक्रियाज को रिपेयर करने के नए तरीके भी ढूंढ रहे हैं। आइए जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) से बचाव करने के लिए आप क्या कर सकते हैं? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले डायबिटीज से बचाव के बारे में जानें डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए हमें कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Diabetes #IITBombay #DiabetesResearch #CollagenProtein #HealthNews #MedicalBreakthrough

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Jamun Seed Powder

जामुन बीज का पाउडर: एक प्राकृतिक उपाय जो करेगा इन 6 बीमारियों को दूर और रखेगा आपको स्वस्थ

फलों में कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं और हेल्थ के लिए इनका सेवन बेहतरीन माना गया है। ऐसा ही एक फल है जामुन (Jamun), जो गर्मियों में आता है। इसका रंग ही नहीं बल्कि स्वाद भी सबसे अलग होता है। इस फल को खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है इसीलिए इसे सुपरफूड भी कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जामुन की गुठली यानी बीज भी इस फल के जितना ही फायदेमंद होता है? ऐसा माना जाता है कि जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) का रोजाना खाली पेट सेवन करना बहुत लाभदायक है। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार जामुन (Jamun) में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स आयरन और विटामिन सी आदि भी होते हैं। इससे शरीर का फ्री रेडिकल्स से बचाव होता है और इसके कई अन्य बेनिफिट्स भी हैं। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में।  डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहतरीन जामुन के बीज के पाउडर का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए मदद कर सकता है। इसलिए, डायबिटीज के रोगियों के लिए इसे खासतौर पर फायदेमंद माना गया है। इन बीजों में कुछ कंपाउंड्स पाए जाते हैं जैसे जाम्बोलिन और जाम्बोसाइन। यह कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं और इंसुलिन सेक्रेशन को स्टिमुलेट करते हैं। जामुन (Jamun) के फल को भी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद माना गया है।  पाचन को सुधारे जामुन (Jamun) और जामुन के बीजों में फाइबर होता है, जो पेट के लिए फायदेमंद है। इससे पाचन क्रिया सही रहती है और कई समस्याओं से भी राहत मिल सकती है जैसे एसिडिटी और गैस आदि। वजन को रखे रही अगर आप वजन को मैनेज करना चाहते हैं तो आपको जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) रोजाना सुबह खाली पेट लेना चाहिए। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और भूख कम लगती है। इससे वजन कम होने और इसे सही बनाए रखने में मदद मिलती है। दिल के लिए फायदेमंद जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) खाने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल सही रहने में मदद मिलती है। इससे हार्ट हेल्थ में सुधार होता है और दिल की समस्याओं से बचाव हो सकता है। दिल ही नहीं बल्कि मुंह, स्किन और लिवर के स्वास्थ्य के लिए भी जामुन के बीज को लाभदायक पाया गया है। इम्युनिटी को करे बूस्ट इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए इस प्राकृतिक कंपाउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इम्युनिटी के मजबूत होने से शरीर का कई बीमारियों और इंफेक्शंस से बचाव होता है।  इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले आर्थराइटिस में फायदेमंद जामुन (Jamun) और जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) एंटी-अर्थरिटिक इफेक्ट युक्त होता है। इनके सेवन से ब्लड में रेड ब्लड सेल्स की संख्या, हीमोग्लोबिन लेवल और एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट में सुधार होता है।  इससे जॉइंट्स में सूजन और दर्द कम होने में मदद मिलती है। यानी अर्थराइटिस के रोगियों के लिए यह फायदेमंद है।  हालांकि इसके बारे में अधिक शोध करना अभी जरूरी है।  यह तो थी जानकारी जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। लेकिन, अपनी डायट में इसे शामिल करने से पहले डॉक्टर से बात अवश्य करें, खासतौर पर अगर आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है या आप किसी तरह की दवाईयां ले रहे हैं। अगर बात की इसके साइड-इफेक्ट्स के बारे में तो इसमें फाइबर बहुत अधिक होता ,है ऐसे में इसे लेने के बाद लोग गैस या ब्लोटिंग की समस्या अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Jamun Seed Powder #jamunseedpowder #naturalremedy #ayurvedichealth #immunitybooster #diabetescontrol #jamunbenefits

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Oral Allergy Syndrome

ओरल एलर्जी सिंड्रोम क्या हैं इस बीमारी के कारण और लक्षण जो आपके खाने को बना सकती है जहर

ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) का दूसरा नाम पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) हैं। यह एक तरह की फल, सब्जियों और नट्स आदि से होने वाली फूड एलर्जी है। इसके कारण रोगी के मुंह, गले और होंठों आदि में एलर्जिक रिएक्शन होता है। यह समस्या अधिकतर उन लोगों को प्रभावित करती है जिन्हें पेड़ों, घास आदि से एलर्जी होती है। तीन साल से छोटे बच्चों को यह एलर्जी होने की संभावना कम होती है क्योंकि पॉलेन एलर्जी को डेवलप होने में थोड़ा समय लगता है। अधिकतर मामलों में यह समस्या गंभीर नहीं होती है लेकिन कुछ लोग इसके कारण गंभीर एलर्जिक रिएक्शन का अनुभव कर सकते हैं, जो जानलेवा भी हो सकता है। आइए जानें ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) के लक्षणों के बारे में। इससे बचाव के बारे में भी जानें। ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) हर रोगी में अलग हो सकते हैं। लेकिन, इससे रोगी का मुंह और गला प्रभावित होता है। जब रोगी किसी ट्रिगर फूड का सेवन करता है, तो इसके लक्षण दिखाना शुरू हो जाते हैं। ओरल एलर्जी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Oral Allergy Syndrome) इस प्रकार हैं: ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) के कारण हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार जब किसी को यह समस्या होती है, तो कुछ फल, सब्जियां और नट्स उनके एलर्जिक रिएक्शन को ट्रिगर कर सकते हैं। ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) या पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) पराग और फल व सब्जियों की प्लांट प्रोटीन के बीच की क्रॉस रिऐक्टिविटी के कारण होती है। पॉलेन एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति जब कच्चे फल या सब्जियों का सेवन करते हैं, तो उनका इम्यून सिस्टम इनमे समानता पाता है और इससे एलर्जी रिएक्शन होता है। लेकिन, पकाए हुए फल और सब्जियां उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज ओरल एलर्जी सिंड्रोम का उपचार पॉलेन फ़ूड एलर्जी सिंड्रोम (Pollen Food Allergy Syndrome) का कोई खास उपचार नहीं है। ऐसा माना गया है कि एलर्जिक रिएक्शन के कारण होने वाली समस्याएं कुछ देर में ही ठीक हो जाती है, जब रोगी उन फूड्स को खाना बंद कर देते हैं। केला, संतरा, टमाटर, खीरा, गाजर, सनफ्लॉवर सीड्स आदि कुछ फूड्स हैं, जो एलर्जिक रिएक्शंस को ट्रिगर कर सकते हैं। एंटीहिस्टामिन एलर्जी मेडिकेशन लेने से रिएक्शन बंद होने में मदद मिल सकती है या इससे कंडीशन बदतर न होने में मदद मिलती है। डॉक्टर ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) से राहत पाने रोगी को के लिए निम्नलिखित दवाईयों की सलाह दे सकते हैं: ओरल एलर्जी सिंड्रोम से बचाव ओरल एलर्जी सिंड्रोम (Oral allergy syndrome) से बचाव के लिए रोगी को इसे ट्रिगर करने वाले फूड्स को न खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ट्रिगर फूड से रिएक्शन को कम करने के कुछ अन्य उपाय इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Oral allergy syndrome #oralallergysyndrome #foodallergy #oasymptoms #crossreactivity #allergyrisks #allergytreatment #healthalert

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viral fever symptoms

वायरल फीवर क्या है, इसके कारण, लक्षण और उपचार, जानिए किस तरह से करें इससे बचाव

वायरल फीवर (Viral fever) एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। इसका कारण कई वायरल इंफेक्शंस को माना जाता है। इस समस्या में रोगी के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जो हानिकारक वायरस के प्रति हमारे इम्यून सिस्टम के रिस्पांस का संकेत है। इस समस्या के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे शरीर में दर्द, थकावट आदि और गंभीर मामलों में इसके कारण रोगी को कई कॉम्प्लीकेशन्स का सामना भी करना पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए वायरल फीवर (Viral fever) चिंता का विषय हो सकता है। आइए जानें वायरल फीवर के लक्षणों (Symptoms of Viral Fever) के बारे में। इसके उपचार और बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार वायरल फीवर (Viral fever) में रोगी को हाई टेम्प्रेचर की समस्या हो सकती है। उनके शरीर का तापमान 103°F से भी अधिक बढ़ सकता है। मनुष्यों को कई तरह के वायरल इंफेक्शंस प्रभावित करते हैं। इनमें से कई इंफेक्शंस में रोगी को कम बुखार होता है जबकि कई वायरल इंफेक्शंस जैसे डेंगू में रोगी को हाई फीवर होता है। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) इस प्रकार हो सकते हैं: यह लक्षण अधिकतर रोगी में कुछ दिनों तक ही दिखाई देते हैं।  अब जानिए वायरल फीवर (Viral fever) के कारण क्या हो सकते हैं? वायरल फीवर के कारण दूषित फ़ूड और ड्रिंक्स भी इस इंफेक्शन (Infection) का कारण बन सकती हैं।  वायरल फीवर का उपचार ज्यादातर वायरल फीवर (Viral fever) के मामलों में खास उपचार की जरूरत नहीं होती है है। इसके उपचार के तरीकों में लक्षणों से आराम पाने पर फोकस किया जाता है। इसके सामान्य उपचार के तरीके इस प्रकार हैं: बुखार कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाईयां लेना जैसे आइबूप्रोफेन और एसिटामिनोफेन आदि। इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज वायरल फीवर से कैसे बचें? नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Viral fever #viralfever #feversymptoms #healthtips #viralprevention #fevertreatment

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Health Ministry confirms no link between COVID-19

No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks: स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा बयान, “कोरोना वैक्सीन का हार्ट अटैक से कोई संबंध नहीं” 

बीते दिनों दिल का दौरा पड़ने से मौतों के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोरोना वैक्सीन का हार्ट अटैक से कोई संबंध नहीं है। दरअसल, कर्नाटक में पिछले महीने में दिल का दौरा पड़ने से 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके लिए कनार्टक की सरकार ने कोरोना वैकसीन को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके बाद कोरोना वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। अचानक दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों की वजह वैक्सीन को बताते हुए सवाल उठाए जा रहे थे। इस बीच मंत्रालय ने इन सवालों का जवाब एक मेडिकल रिसर्च के आधार पर दे दिया है। इस मुद्दे पर देश की दो सबसे बड़ी मेडिकल संस्थाओं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने बड़ी और गहरी जांच की है, जिसमें साफ कहा गया है कि “कोविड वैक्सीन और अचानक मौतों का कोई सीधा संबंध नहीं (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है।”  अचानक हुई मौतें कोरोना वैक्सीन का दुष्प्रभाव नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली और पुरानी बीमारी मौत होने का प्रमुख कारण (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है बता दें कि आईसीएमआर और एम्स की रिसर्च में स्पष्ट हो गया है कि कोरोना वैक्सीन और कर्नाटक में हो रही अचानक मौतों का कोई संबंध (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) नहीं है। दरअसल, यह रिसर्च कोरोना काल के बाद अचानक हुई मौतों को लेकर की गई थी। रिसर्च में निष्कर्ष निकला कि अचानक हुई मौतें कोरोना वैक्सीन का दुष्प्रभाव नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली और पुरानी बीमारी मौत होने का प्रमुख कारण है। इस रिपोर्ट को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि “देश में कई एजेंसियों के माध्यम से अचानक होने वाली मौतों के मामलों की जांच की गई है, जिनसे यह साबित हो गया है कि कोविड-19 टीकाकरण और देश में अचानक होने वाली मौतों की खबरों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि इस रिपोर्ट से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी कहा था कि “अचानक मौत की वजह कोविड वैक्सीन नहीं है। उस दौरान नड्डा ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि वैक्सीनेशन से जोखिम बढ़ा नहीं बल्कि कम हुआ है।  इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से 20 से जयादा लोगों की हो (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) चुकी है मौत  गौरतलब हो कि मई-जून 2025 के बीच कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से 20 से जयादा लोगों की मौत हो चुकी है। अचानक हुई इन मौतों का कारण कोरोना वैक्सीन का साइड इफेक्ट बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कोविड वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की। इस समिति का नेतृत्व जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. केएस रविंद्रनाथ करेंगे। जांच 10 दिन में पूरी करके रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। कर्नाटक के CM सिद्धारमैया ने भी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि “दुनियाभर में हुई रिसर्च में साबित हुआ है कि कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव होते हैं। जल्दबाजी में वैक्सीन को परमिशन दी गई, जो अचानक हो रही मौतों का कारण हो सकती है।” कनार्टक के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2 साल में हासन जिले में 507 हार्ट अटैक के मरीज रिकॉर्ड हुए। इनमें से 190 लोगों की मौत हुई है। कहने की जरूरत नहीं, कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोगों ने कोविड वैक्सीन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था लेकिन,आईसीएमआर और एम्स की ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा संबंध नहीं (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है।  Latest News in Hindi Today Hindi news COVID Vaccine #covidvaccine #heartattack #healthministry #vaccinesafety #covid19update #govtstatement #coronavirusnews #vaccinefacts #healthnews #covidtruth

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Cancer

सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर की शुरुआत सिर और गले के एरिया में होती है। ऐसे कई तरह के कैंसर (Cancer) हैं जो सिर और गले में हो सकते हैं। इनमे से हर एक ही शुरुआत कोशिकाओं की वृद्धि के रूप में शुरू होती है, जो हेल्दी टिश्यूज पर हमला कर उन्हें नष्ट कर सकती है। यह कैंसर को मुंह,गले, साइनस और स्लाइवरी ग्लेंड्स से शुरू होने वाले कैंसरस के रूप में जाना जाता है। हेड और नेक कैंसर का उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। इनमे कैंसर (Cancer) की लोकेशन, इसका साइज और सेल्स के प्रकार आदि शामिल हैं। इसके साथ ही उपचार के लिए डॉक्टर रोगी की सम्पूर्ण हेल्थ को भी कंसीडर करते हैं। इस समस्या के निदान और सही उपचार के लिए इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। आइए जानें हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) के बारे में।  हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या हो सकते हैं? क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार दुनिया भर में पाए जाने वाले लगभग 4.5% हेड एंड नेक के कैंसर होते हैं। यह कैंसर (Cancer) अधिकतर पुरुषों को प्रभावित करता है। हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या इस प्रकार हो सकते हैं: गले, जबड़े या मुंह में गांठ हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण है जबड़ों और मुंह में गांठ का होना। यह लम्पस रोगी के होंठों पर भी हो सकते हैं। हालांकि, गले में गांठ थायरॉइड कैंसर का लक्षण भी हो सकता है या ऐसा भी हो सकता है की ऐसा लिम्फ नोड के बढ़ने के कारण हो रहा हो। इस कैंसर (Cancer) का सबसे सामान्य लक्षण है एक या अधिक लिम्फ नोड्स में सूजन होना, इनमें माउथ कैंसर और स्लाइवरी ग्लेंड कैंसर भी शामिल है। अगर यह लम्पस बार-बार हो रहे हों और ठीक हो रहे हों तो यह कैंसर की वजह से नहीं हैं। क्योंकि, कैंसर में यह गांठ बनती है और फिर बढ़ती रहती है। जबड़ा हिलाने में समस्या होना हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में जबड़ों की मसल्स, हड्डियां या नर्वज में समस्या भी शामिल हैं। इसके कारण रोगी को मुंह खोलने में समस्या हो सकती है। इसमें अधिकतर रोगी मुंह खोलने में असमर्थ होते हैं। अगर किसी को यह परेशानी होती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। चबाने में परेशानी सिर और गले के कैंसर के कारण रोगी को खाना चबाने व निगलने में दर्द व बर्निंग सेंसेशन हो सकती है। इसमें रोगी को ऐसा भी महसूस हो सकता है जैसे फ़ूड गले में फंस गया है। इसके साथ ही रोगी की आवाज भी प्रभावित हो सकती है। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि जैसे उन्हें- हुआ हो। मुंह में सफेद पैच इस कैंसर (Cancer) में रोगी को मुंह में सफेद पैच हो सकता है जिसे ल्यूकोप्लाकिया कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर जबड़ों में, गालों या जीभ के अंदर होती है। यह परेशानी स्मोकिंग और तंबाकू से हो सकती है जो कैंसर का कारण बनती है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन गले में दर्द गले में दर्द जो ठीक न हो रही हो ,वो भी इस कैंसर का एक लक्षण है। हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में रोगी के चेहरे पर भी दर्द होती है और उसमे कमजोरी आ सकती है। यही नहीं, यह कैंसर (Cancer) ब्रीदिंग को भी प्रभावित कर सकता है। नेजल कंजेशन इस समस्या का एक लक्षण हो सकता है। इसमें कुछ लोग नाक से खून आना जैसे समस्याओं का भी अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Clevelandclinic #headandneckcancer #cancersymptoms #earlycancersigns #healthawareness #cancerprevention

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caffeine anti-aging

क्या कैफीन एजिंग प्रोसेस को स्लो कर सकता है और रख सकता है आपको हमेशा यंग

अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें सुबह उठते ही कैफीन (Caffeine) की जरूरत होती है, तो याद रखें आप अकेले नहीं हैं क्योंकि अधिकतर लोगों के लिए सुबह उठते ही चाय या कॉफी पीना उनकी एक जरूरत है। कैफीन एक नेचुरल केमिकल है, जिसमें स्टीमुलेंट इफेक्ट्स होते हैं। यह चाय, कॉफी, कोकोआ आदि में पाया जाता है। कैफीन (Caffeine) से हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम, हार्ट, मसल्स और वो सेंटर्स स्टिमुलेट होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं। कैफीन (Caffeine) से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह वाटर पिल की तरह काम करता है जिससे यूरिन फ्लो बढ़ता है। एक सवाल यह है कि क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है? तो आइए जानें कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में। कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging): पाएं जानकारी मायो क्लिनिक (MayoClinic) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 400 मिलीग्राम कैफीन लेना सुरक्षित माना गया है। इसलिए, इस बात को ध्यान रखें कि कैफीन (Caffeine) का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स का। आइए कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में और जानें कि क्या कैफीन (Caffeine) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है?  क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है? साइंटिस्ट के अनुसार कैफीन (Caffeine) सिर्फ एनर्जी को बढ़ाने का ही काम नहीं करती है बल्कि यह और भी बहुत सी चीजों में फायदेमंद है। यह हेल्दी एजिंग (Aging) में मददगार है। शोध के अनुसार कैफीन एएमपी को एक्टिव रखता है, जो स्ट्रेस और चिंता आदि से लड़ने में मददगार है। एएमपीके का अर्थ है एक्टिवेटेड प्रोटीन किनेज, जो एक सेलुलर एनर्जी सेंसर है और सेल्स के अंदर एनर्जी बैलेंस बनाये रखने में मदद करता है।  कैफीन (Caffeine) सेल्स के डिवीजन और डेवलपमेंट को भी प्रभावित करता है। इससे हमारे सेल्स को लम्बे समय तक सर्वाइव करने में मदद मिलती है और तनाव से बचाव होता है। तनाव से हमारे शरीर और दिमाग नेगेटिव प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे बचाव से समय से पहले एजिंग (Aging) से भी बचा जा सकता है और यंग रहने में मदद मिलती है। लेकिन, इसके बारे में और शोध करने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कैफीन के अन्य फायदे क्या हैं? कैफीन हमें सतर्क रखने और एनर्जी को सुधारने का काम करता है। इसके अन्य फायदे इस प्रकार हैं: कैफीन (Caffeine) को दर्द दूर करने वाली दवाईयों के साथ लेने से माइग्रेन के उपचार के लिए प्रभावी है।  कॉग्निटिव परफॉरमेंस को सुधारने में भी इसे फायदेमंद माना गया है। मूड को सुधारने और डिप्रेशन के रिस्क को कम करने में भी कैफीन लाभदायक है। लेकिन, इसका सेवन सही मात्रा में ही करना चाहिए। कुछ स्टडीज यह बताती है कि नियमित रूप से कैफीन (Caffeine) का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज, पर्किंसन,स डिजीज आदि के डेवलप करने के जोखिम कम होता है। ऐसा माना गया है कि इसे लेने से हार्ट फेलियर के रिस्क को कम किया जा सकता है। लेकिन, कैफीन का सेवन सही और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कैफीन को पीने से लिवर डैमेज और सिरोसिस के रिस्क के साथ भी लिंक किया जाता है। कैफीन (Caffeine) में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जो सर्कुलेशन को सुधारने और झुर्रियों को कम करने में फायदेमंद हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Caffeine #caffeine #antiaging #stayyoung #youthfulskin #coffeehealth #skincare #healthtips

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Motion Sickness

Motion Sickness: मोशन सिकनेस से हैं परेशान? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान घरेलू उपाय

जब भी हम यात्रा करते हैं, तो कई बार चक्कर आना, उल्टी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। यह समस्याएं कार, बस या जहाज कहीं भी हो सकती हैं। क्या आप जानते हैं कि यह सब मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) हैं? यह वो कंडीशन है जो तब होती है जब हमारे आंखें, अंदरूनी कान और शरीर हमारे ब्रेन को विपरीत संदेश देते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह समस्या उस समय परेशान करती है जब हमारा शरीर तो स्थिर होता है लेकिन हम किसी वाहन द्वारा मूव कर रहे होते हैं। यही नहीं,  कुछ लोग मोशन सिकनेस (Motion sickness) तब भी अनुभव कर सकते हैं जब वो वीडियो गेम या कोई अन्य गेम खेल रहे होते हैं। आइए जानें कि कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness) और इससे कैसे बचा जा सकता है? कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness)?  मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कई कारण हो सकते हैं। अगर आपको यह समस्या है तो इसके कारण इस प्रकार हो सकते हैं: मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) धीरे-धीरे भी विकसित हो सकते हैं या एकदम भी नजर आ सकते हैं। कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness), यह तो आप समझ ही गए होंगे। इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: यह इस समस्या के सभी लक्षणों की लिस्ट नहीं है। इसके अलावा भी लोगों में मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कुछ और लक्षण नजर आ सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन मोशन सिकनेस का उपचार मोशन सिकनेस (Motion sickness) के लक्षणों से राहत पाने के लिए यह उपाय काम में आ सकते हैं: मोशन सिकनेस से कैसे बचें? मोशन सिकनेस (Motion sickness) को नजरअंदाज करना संभव नहीं है लेकिन थोड़ी प्लानिंग से आप गंभीर लक्षणों से बच सकते हैं। जैसे अगर आप बस से सफर कर रहे हैं तो विंडो सीट लें और कार में आगे की सीट पर बैठे। यात्रा करते हुए हल्का भोजन और पेय पदार्थों का सेवन करें। भारी या मसालेदार भोजन का सेवन न करें। इसके साथ ही आप डॉक्टर की सलाह के बाद मोशन सिकनेस (Motion sickness) की दवाईयां ले सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Motion sickness #motionSickness #homeRemedies #naturalCure #travelTips #nauseaRelief #dizzinessRelief #healthTips

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Discover key symptoms of epilepsy

एपिलेप्सी: जानिए कैसे पहचानें इसके लक्षण, अपनाएं बचाव के तरीके और पाएं एक स्वस्थ जीवन

एपिलेप्सी (Epilepsy) यानी मिर्गी को सीजर डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यह दिमाग से सम्बन्धित वो समस्या है जिसके कारण रोगी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में यह समस्या किस वजह से होती है, यह बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ लोगों में इसके कारण हो पहचाना जा सकता है। एपिलेप्सी (Epilepsy) की समस्या किसी भी उम्र, लिंग या बैकग्राउंड के लोगों को हो सकती है। इस दौरान होने वाले सिजर्स के लक्षण भी रोगियों में अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि एक बार दौरा पड़ने पर व्यक्ति को मिर्गी जैसी समस्या हो। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। आइए जानें एपिलेप्सी (Epilepsy) के बारे में विस्तार से। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) और इससे बचाव के बारे में भी इंफॉर्मेशन पाएं। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार एपिलेप्सी (Epilepsy) एक गंभीर नॉनकम्युनिकेबल डिजीज है, जिससे पूरी दुनिया भर में लगभग पांच करोड़ लोग प्रभावित हैं। एपिलेप्सी का मुख्य लक्षण है बार-बार दौर पड़ना। हालांकि, इसके लक्षण सीजर के टाइप पर भी निर्भर करते हैं। इस के लक्षण इस प्रकार हैं:  एपिलेप्सी के कारण एपिलेप्सी के लक्षण क्या हो सकते हैं (Symptoms of Epilepsy), यह जानने के बाद इसके कारणों के बारे में भी पता होना चाहिए। अधिकतर मामलों में इस परेशानी के कारणों के बारे में जानकारी नहीं होती। इसके कुछ कारण इस प्रकार हो सकते हैं: एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार किसी व्यक्ति को एक दौरे (Seizures) के बाद उपचार की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर किसी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं, तो उपचार जरूरी है। एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार के विकल्प इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन एपिलेप्सी (Epilepsy) से कैसे बचें?  हालांकि, मिर्गी के अधिकतर कारण कंट्रोल से बाहर हैं और उनसे बचाव संभव नहीं है। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियों के विकसित होने की संभावना को कम किया जा सकता है जो मिर्गी का कारण बन सकती हैं, जैसे: ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के रिस्क को कम करने के लिए हमेशा गाडी में सफर करते हुए सीटबेल्ट पहनें और बाइक चलाते हुए हेलमेट पहनें। इसके साथ ही ऐसी स्थितियों को भी नजरअंदाज करें जिसमें आपको चोट लग सकती है। स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए हेल्दी डायट लें, नियमित एक्सरसाइज करें और अपने वजन को सही बनाए रखें। एल्कोहॉल और अन्य इलीगल ड्रग्स ब्रेन को नुकसान पहुंचा सके हैं और एपिलेप्सी (Epilepsy) का कारण बन सकते हैं। इसलिए इनका सेवन करने से बचें। संक्षेप में कहा जाए तो एपिलेप्सी (Epilepsy) या मिर्गी ब्रेन में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के अनियंत्रित होने को कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे सिर में चोट या सही से न सोना आदि। इस समस्या का उपचार पूरी तरह से संभव है। अगर आपको इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर आता है और इसके हल्के में न लें। तुरंत मेडिकल हेल्प लें और जांच कराएं। क्योंकि, मिर्गी और दौरों से रोगी का जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Epilepsy #epilepsy #epilepsysymptoms #seizuredisorder #neurologicalhealth #healthylifestyle #epilepsyawareness

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Anti-Aging Medicines

एंटी एजिंग मेडिसिन का सच, यंग दिखने के हैं कुछ फायदे और बहुत से नुकसान

अभिनेत्री शैफाली जरीवाला की कार्डियक अटैक के कारण हुई मृत्यु आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कार्डियक अटैक की वजह है एंटी एजिंग दवाईयां और इंजेक्शंस हो सकते हैं। शेफाली पिछले कई सालों से यंग दिखने के लिए इन्हें ले रही थी। सिर्फ शैफाली ही नहीं बहुत से सेलेब्रिटीज हमेशा जवान दिखने के लिए इन दवाईयों का इस्तेमाल करते हैं। एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) में इंजेक्शन और कई अन्य ट्रीटमेंट्स शामिल हैं। इनका उद्देश्य बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करके यंग दिखना है। इनके जहां कुछ फायदे हैं लेकिन बहुत से साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। आइए जानें एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) और इनके साइड इफेक्ट्स के बारे में।  एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine): पाएं जानकारी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National library of medicine) के अनुसार एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक रूप से युवा बनाए रखना है। इनसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है। एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) इस प्रकार हैं: झुर्रियों को करे कम  एंटी एजिंग इंजेक्शंस जैसे बोटॉक्स और फिलर्स से झुर्रियां और फाइन लाइंस कम होती है जिससे स्किन स्मूद बनती हैं और कॉम्प्लेक्शन में सुधार होता है। स्किन टेक्सचर में सुधार:  फिलर्स से स्किन टेक्सचर में सुधार होता है। इनके उपयोग से त्वचा में फुलाव आता है जिससे फाइन लाइन्स त्वचा की बनावट में इम्प्रूवमेंट होती है। यही नहीं एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) में से एक यह भी है कि फिलर चेहरे के खोये वॉल्यूम को वापस लाने में मदद करती हैं जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं और यंग दिखते हैं।  नॉन-सर्जिकल एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) और इंजेक्शंस का इस्तेमाल नॉन सर्जिकल होता है। इनसे कोई नुकसान नहीं होता और आप बहुत जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकते हैं। यही नहीं, इनके इस्तेमाल से चेहरे के फीचर्स को बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) भी हो सकते हैं। ऐसा माना गया है कि यह साइड इफेक्ट्स आमतौर पर माइल्ड और टेम्पररी होते हैं। जानिए इनके बारे में:  यह तो थे एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines)।  एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) के कुछ दुर्लभ और गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे अन्धपन या आंखों की रोशनी का कम होना। यही नहीं, अगर फिलर्स ब्लड वेसल्स तक पहुंच जाएं तो इससे स्ट्रोक या ब्रेन डैमेज का रिस्क बढ़ सकता है। याद रखें, इनका इस्तेमाल करने से पहले अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और संभावित रिस्क के बारे में किसी क्वालिफाइड डॉक्टर से बात करें और उसके बाद ही इन्हें लें। (Anti aging medicine) नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Anti aging medicine #antiaging #lookyoung #skincare #youthfulglow #beautytruth #antiagingrisks #antiagingfacts

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