Burn Fat & Stay Fit with the Power of Yoga

योगा की शक्ति से मोटापा हराएं, वजन कम करें और स्वस्थ जीवन पाएं

अधिक वजन यानी मोटापा (Obesity) आजकल की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वयस्क ही नहीं बल्कि बच्चे भी आजकल इस रोग का शिकार हैं। मोटापा कम करने के लिए लोग कई उपाय करते हैं जैसे घंटों जिम में बिताते हैं और कई तरह की डायट फॉलो करते हैं। योगा (Yoga) को वजन कम करने और मोटापा मैनेज करने का अच्छा तरीका माना गया है। यह न केवल शरीर और दिमाग के लिए बेहतरीन है बल्कि इससे ईटिंग हैबिट्स भी सुधरती हैं। हालांकि, सिर्फ योगा (Yoga) से ही आप मोटापा (Obesity) कम नहीं कर सकते हैं बल्कि इसके साथ सही डायट का ध्यान रखना और एक्सरसाइज करना भी आवश्यक है। आइए जानें मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद योगासन (Beneficial yogasana to reduce obesity) के बारे में। मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद योगासन (Beneficial yogasana to reduce obesity) हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) के अनुसार अगर बहुत मेहनत के बाद भी किसी का वजन कम नहीं हो रहा है तो ऐसा हो सकता है कि इसका कारण कोई गंभीर रोग हो। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद योगासन (Beneficial yogasana to reduce obesity) इस प्रकार हैं। सूर्य नमस्कार सूर्य नमस्कार बारह आसनों का मेल होता है जिसे सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना गया है। इसमें शरीर की अच्छे से स्ट्रेचिंग होती है। यही नहीं, इससे शरीर को स्ट्रेंथ भी मिलती है। इसमें व्यायाम के साथ-साथ डीप ब्रीदिंग भी शामिल होती है। ऐसा माना गया है कि रोजाना सूर्यासन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। सुबह के समय इसे करना और भी अधिक लाभदायक है। अगर आप चाहे तो आप 12 से अधिक बार भी इसे कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार को करने से कमर से फैट कम होता है, मोटापा (Obesity) मैनेज करने में मदद मिलती है, मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और डायजेस्टिव सिस्टम सही रहता है। नौकासन मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद योगासन (Beneficial Yogasana to reduce obesity) में नौकासन शामिल है। यह पोज करने से पेट की चर्बी कम होती है, ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, पेट के मसल्स मजबूत होते हैं, पाचन सही रहता है और हमारे अंगों को सही से काम करने में मदद मिलती है। इससे मोटापा (Obesity) भी कम होता है। इसे करना भी बेहद आसान है। इसके लिए सिर्फ आपको शांत जगह पर मैट पर पीठ के बल लेटना है। इसके बाद अपनी बाजुओं और टांगों को छत की तरफ इस तरह के ले जाना है कि आपको पोजीशन बोट की तरह लगे। इस योगासन को करने के बाद आपको ऐसा लगेगा जैसे आपके पेट की मसल्स मुड़ रही हैं। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार चतुरंग दंडासन योगा (Yoga) का यह आसान आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन कलाइयों, बाजुओं और एब्स आदि के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर मजबूत बनता है और मोटापा (Obesity) कम होता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है। शुरुआत में इसे कुछ सेकंड्स तक करें। उसके बाद टाइमिंग को बढ़ाएं। चतुरंग दंडासन यानी प्लान्क पोस्चर करने के लिए आपको अपने हाथों को सीधे कंधे के नीचे रखना होगा, जैसे कि पुश-अप की पोजीशन में किया जाता है। इस दौरान आपको अपने पैल्विक एरिया को फर्श के पैरेलल रखना होगा।  भुजंगासन मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद योगासन (Beneficial yogasana to reduce obesity) में इस आसन को भी किया जा सकता है। इस आसान को करने से कंधे मजबूत होते हैं, फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है और पेट के मसल्स के स्ट्रेच होने से पेट की चर्बी कम होने में मदद मिलती है। वजन कम करने में भी यह मददगार है। इस योगासन को करना भी बेहद आसान है। इस आसान को रोजाना करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Yoga #YogaForWeightLoss #BurnFatWithYoga #HealthyLifestyle #ObesityControl #PowerYoga #FitnessJourney #YogaDaily

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Aerial Yoga Benefits

Aerial Yoga: एरियल योगा के एक नहीं, बल्कि हैं कई फायदे 

आज के समय में फिटनेस और मानसिक संतुलन दोनों पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसी स्थितियों में एरियल योगा (Aerial Yoga) बेहद लाभकारी माना जाता है। एरियल योगा को  हैंगिंग योगा, एंटी‑ग्रैविटी योगा या हैम्मॉक योगा भी कहा जाता है। इसमें रेशम जैसे मजबूत कपड़े से बनी हैम्मॉक को ठोस संरचना से लटकाया जाता है और आप उसमें ऊपर‑नीचे झूलते हुए योगासन करते हैं। यह जिम्नास्टिक, पिलाटिस, डांस और पारंपरिक योग का मिश्रण है। Benefits of Aerial Yoga: एरियल योगा के फायदे  शारीरिक लचीलापन और मसल्स टोनिंग- हवा में झूलते हुए मांसपेशियां बिना अतिरिक्त दबाव के स्ट्रेच होती हैं। इससे शरीर लचीला होता है, विशेषकर कोर, रीढ़ और कंधों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। यह वजन घटाने और शरीर को शेप में लाने में भी मददगार है। स्पाइन व बैक पेन में राहत- उल्टे पोज़ (इनवर्सन) की तकनीक से रीढ़ की हड्डी को डी-कंप्रेस करने में मदद मिलती है। इससे पीठ, रीढ़ और हिप्स पर पड़ने वाला तनाव कम होता है। पाचन में सुधार- स्ट्रेच करने वाली आसनों से पाचन क्रिया तेज होती है, जिससे कब्ज, गैस या अपच जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। हार्ट हेल्थ- नियमित योगासन से ब्लड फ्लो बेहतर होता है, ब्लड सर्कुलेशन सक्रिय होता है और दिल की कार्यक्षमता में सुधार होता है। मानसिक स्वास्थ्य़- तनाव, चिंता और अवसाद जैसी परेशानियों पर भी यह मददगार होता है। हवा में झूलने से एक आंतरिक सुकून मिलता है और मूड में स्पष्ट सुधार होता है। एरियल योगा (Aerial Yoga) सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि सभी उम्र के लिए फायदेमंद है। शरीर की संतुलन क्षमता बढ़ती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। एरियल योगा: किसे करना चाहिए और किसे नहीं? एरियल योगा (Aerial Yoga) स्वास्थ्य के लिए जबरदस्त फ़ायदेमंद है लेकिन कुछ स्थितियों में सावधानी जरूरी है। इसकी शुरुआत अनुभवी प्रशिक्षक की निगरानी में होनी चाहिए। यह प्रेग्नेंट, हाई ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा या हाल ही में चोट लगने की स्थिति में करने के लिए उपयुक्त नहीं। शुरुआत में उल्टे आसनों के दौरान चक्कर या परेशानी महसूस हो सकती है, इसलिए धीरे–धीरे इस योगा का अभ्यास करें। कैसे करें एरियल योगा? एरियल योगा (Aerial Yoga) करने के लिए निम्नलिखित स्टेप्स फॉलो करें। जैसे :  चोट से बचने के लिए और एरियल योगा का गलत तरीका फॉलो ना करें इसलिए एक्सपर्ट की मौजूदगी में एरियल योगा (Aerial Yoga) करना चाहिए। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार शुरुआती चुनौतियाँ एरियल योगा (Aerial Yoga) शुरू में चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे शरीर इसकी लय में समाहित होता है, यह मनोरंजक तथा प्रभावशाली अभ्यास बन जाता है। बॉलीवुड में कई सेलिब्रिटीज जैसे तापसी पन्नू, करीना कपूर और मलाइका अरोड़ा ने इसका अनुभव लिया है, और सकारात्मक परिवर्तन महसूस किए हैं। यदि आप एक नया चुनौतीपूर्ण लेकिन संपूर्ण फिटनेस और मानसिक संतुलन वाला अभ्यास ढूंढ रहे हैं, तो एरियल योगा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है।  नोट: यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। किसी भी योगासन, चिकित्सा सलाह या इलाज के लिए डॉक्टर या योग प्रशिक्षक से जुड़ना आवश्यक है। Latest News in Hindi Today Hindi Aerial Yoga #aerialyoga #yogaforhealth #fitnessgoals #antiGravityYoga #yogaposes #aerialfitness #wellness

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COVID new variant

रेजर ब्लेड थ्रोट: कोविड के नए वेरिएंट ने दी दस्तक, जानिए इसके लक्षण से बचाव के तरीके

कोविड-19 (Covid-19) के मामले एक बार फिर से बढ़ने लगे हैं, जो चिंता का कारण हैं। अब तक भारत के कई राज्यों में इसके सैंकड़ों मामले आ चुके हैं। अभी पूरे देश में 7000 से भी अधिक केसेस एक्टिव हैं। साल 2019 से लेकर अब तक कोविड-19 (Covid-19) के कई वेरिएंट्स आ चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अभी ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट्स जैसे एनबी.1.8.1 (NB.1.8.1) परेशानी की वजह बना हुआ है। ऐसा भी माना जा रहा है कि यह वेरिएंट अधिक हानिकारक नहीं हैं लेकिन फिर भी हम सब के लिए सावधानी बरतना जरूरी हैं। अभी रोगियों में इसके कारण एक गंभीर लक्षण देखने को मिल रहा है जिसे एक नया नाम दिया गया है “रेजर ब्लेड थ्रोट (Razor blade throat)”। जानिए उस कोरोना वायरस वेरिएंट के बारे में, जो रेजर ब्लेड थ्रोट (Razor blade throat) जैसे लक्षण का कारण बन रहा है। इससे जुड़ी अन्य जानकारी भी पाएं। रेजर ब्लेड थ्रोट (Razor blade throat): कोविड-19 का लक्षण कोविड-19 (Covid-19) के आये नए वेरिएंट ने एक बार फिर से विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। इसके लक्षणों में एक लक्षण को रेजर ब्लेड थ्रोट(Razor blade throat) का नाम दिया गया है। इस लक्षण के कारण रोगी के गले में खराश होती है और ऐसा महसूस होता है जैसे गले में कोई रेजर या ब्लेड चल रहा हो। इसमें रोगी को गले में बहुत अधिक दर्द होता है। इस लक्षण और कोविड-19 वेरिएंट्स से जोड़ा जा रहा है। इस समस्या के कारण रोगी इन समस्याओं का अनुभव कर सकता है: इसके अलावा भी रोगी में रेजर ब्लेड थ्रोट(Razor blade throat) के कोई और लक्षण नजर आ सकता है। आइए जानें इस वेरिएंट के बारे में, जो गले में परेशानी की वजह बन सकता है। वेरिएंट जो है रेजर ब्लेड थ्रोट(Razor blade throat) का कारण एनबी.1.8.1 (NB.1.8.1) यानि निंबस वो है, जो इस दर्दभरी समस्या का कारण बन सकता है। इसे बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस लक्षण के अलावा इस समस्या में रोगी कुछ अन्य लक्षणों को भी नोटिस कर सकते हैं: एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस समस्या से बचाव के लिए सावधानी बरतना हर किसी के लिए जरूरी है लेकिन बुजुर्गों, बच्चों, कमजोर इम्युनिटी वाले और गंभीर समस्याओं से पीड़ित लोगों को खासतौर पर सावधान रहना चाहिए। एनबी.1.8.1 (NB.1.8.1) और रेजर ब्लेड थ्रोट(Razor blade throat) की समस्या से बचाव के लिए सावधानियों के बारे में जानें। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार एनबी.1.8.1 और रेजर ब्लेड थ्रोट से किस तरह से बचा जा सकता है? इस वेरिएंट और रेजर ब्लेड थ्रोट (Razor blade throat) को अवॉयड करने के लिए कुछ तरीके हैं जिनका ख्याल रखना चाहिए। यह तरीके इस तरह से हैं: कोई भी लक्षण नजर आने पर डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह लें। कोविड-19 (Covid-19) ने नजर आने वाले लक्षण अन्य समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए सही निदान जरूरी है। अगर आप कोई भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो डॉक्टर की सलाह का पालन करें। हाइड्रेट रहें और हेल्दी जीवनशैली अपनाएं ताकि रोगी जल्दी रिकवर हो सके। सही समय पर निदान और उपचार से भी रोगी जल्दी रिकवर हो सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Razor blade throat #COVID2025 #RazorBladeThroat #NewCOVIDVariant #ThroatPain #HealthAlert #COVIDSymptoms #VirusPrevention

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PM Modi Canada Visit,

क्या लैपटॉप गोद में रखकर काम करना महिलाओं की फर्टिलिटी के लिए हो सकता है खतरनाक?

बदलते समय के साथ कई चीजों में बदलाव आ चुका है। अब लोग 9 से 5 बजे तक काम नहीं करते हैं बल्कि अब फ्लेक्सिबल आर्स में आराम से घर बैठ कर काम किया जाता है। आज लाखों लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। जहां घर से काम करने के कई फायदे हैं वहीं इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। लगातार लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करना आसान नहीं होता और सेहत के लिए भी हानिकारक है। कई बार ऐसा भी होता है कि हम लैपटॉप को गोद में रखकर काम करते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि लैपटॉप और फर्टिलिटी (Fertility) के बीच में संबंध है? ऐसा पाया गया है कि गोद में लैपटॉप रखकर काम करने से महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) पर असर हो सकता है। आइए जानें लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बारे में विस्तार से। लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बारे में जानें पुरुष जो लैपटॉप को अपनी गोद में रख कर काम करते हैं, उन्हें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसा पाया गया है कि इससे पुरुषों की फर्टिलिटी (Fertility) पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे उनके स्पर्म की क्वालिटी पर असर होता है। लेकिन, स्टडी के अनुसार इससे लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बीच में भी संबंध है। इससे उनकी एग की गुणवत्ता भी खराब हो सकती हैं। यानी लैपटॉप से महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) प्रभावित होती है और यह इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। यही नहीं, लम्बे समय तक लॅपटॉप को गोद में रख कर काम करने से एग रिलीज में भी समस्या हो सकती है। जिससे महिलाओं को कंसीव करने में मुश्किल हो सकता है। दरअसल लैपटॉप से हीट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन जनरेट होती हैं, जिससे हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे पीरियड्स में भी समस्या आ सकती है।  इसका अर्थ यह यह है कि लैपटॉप का अधिक समय तक गोद में रख कर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आप उचित दूरी पर इसे रख कर इसका प्रयोग करें और इसका प्रयोग सही तरीके से करें। महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) पर इसके प्रभाव के अलावा भी लैपटॉप के इस्तेमाल के कई अन्य नुकसान भी हो सकते हैं। जानिए इनके बारे में। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक लैपटॉप के इस्तेमाल के कई अन्य नुकसान यह नहीं हो सकता कि हम लैपटॉप का कम या बिलकुल भी इस्तेमाल न करें। अगर आप कंसीव करना चाहती हैं तो आपको यह सलाह दी जाती है कि गोद में लैपटॉप को रख कर इसके इस्तेमाल से बचें। इसके अन्य नुकसान इस प्रकार हैं: लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s Fertility) के संबंध के बारे में तो आप जान ही गए होंगे। इसलिए गोद की जगह टेबल या किसी स्टैंड का इस्तेमाल करें। आपकी आंखों और शरीर से यह उचित दूरी पर होना चाहिए। इसके अलावा कूलिंग पैड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ताकि लैपटॉप से निकलने वाली हीट और रेडिएशन्स से बचने में मदद मिल सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Fertility #FemaleFertility #LaptopUse #ReproductiveHealth #RadiationRisks #WomenHealthTips

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improve concentration in kids

Yoga for Kids: बच्चों के लिए योग: बढ़ाएं एकाग्रता और इम्यूनिटी

आज के डिजिटल युग में बच्चे तेजी से टेक्नोलॉजी से जुड़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही वे तनाव, ध्यान की कमी और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे में योग एक ऐसा प्राचीन उपाय है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकता है। योग केवल वयस्कों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी बेहद लाभकारी (Yoga for Kids)  माना गया है। यह उनके शरीर को मजबूत करता है, मन को शांत रखता है और एकाग्रता के साथ-साथ उनकी इम्यूनिटी (Immunity) को भी बेहतर बनाता है। Yoga for Kids: बच्चों के लिए योग के फायदे  बच्चों में योग (Yoga for Kids) का महत्व बच्चे स्वभाव से ही चंचल और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। अगर इस ऊर्जा को सही दिशा दी जाए, तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद सशक्त बन सकते हैं। योग बच्चों को संतुलन, धैर्य, अनुशासन और आत्म-नियंत्रण सिखाता है, जो उनकी पढ़ाई और सामाजिक जीवन में भी मदद करता है। एकाग्रता बढ़ाने में योग की भूमिका आजकल बच्चों का ध्यान बहुत जल्दी भटकता है, खासकर मोबाइल, टीवी और गेम्स की वजह से। योग बच्चों की मानसिक स्थिरता बढ़ाकर उन्हें वर्तमान में जीने की कला सिखाता है। AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) द्वारा की गई एक स्टडी में यह पाया गया कि 6 से 12 साल के बच्चों ने जब लगातार 3 महीने तक रोज़ 20 मिनट योग किया, तो उनकी एकाग्रता में 30% तक सुधार देखा गया। साथ ही उनके व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव आए। बच्चों में योग (Yoga for Kids): योगासन जो एकाग्रता बढ़ाते हैं-  इम्यूनिटी मजबूत करने में योग बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) मजबूत हो, तो वे बार-बार बीमार नहीं पड़ते। योग सांस प्रणाली, पाचन और रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है। National Institute of Health (NIH) द्वारा प्रकाशित शोध के अनुसार, प्राणायाम और ध्यान करने से शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) का स्तर कम करता है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक सक्रिय होती है। योगासन जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं: बच्चों के लिए योग (Yoga for kids) अभ्यास कैसे शुरू करें? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बच्चों के लिए योग के अन्य लाभ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए योग एक प्राकृतिक, सरल और प्रभावशाली उपाय है। यह न केवल उन्हें बीमारियों से बचाता है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है। आज जब तनाव और असंतुलन बचपन में ही दस्तक देने लगे हैं, तो योग बच्चों के जीवन में स्थिरता और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने का माध्यम बन सकता है। नोट: यह ध्यान रखें कि बच्चों को अगर कोई शारीरिक या मानसिक समस्या है तो ऐसे में एकबार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Cobra Pose #YogaForKids #ChildWellness #KidsYoga #ImmunityBoost #FocusWithYoga #HealthyKids #YogaBenefits #MindfulChildren

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Discover 5 powerful vegan protein

प्रोटीन की कमी पूरी करेंगे ये 5 वीगन सोर्सेज, आज ही करें अपनी डायट में शामिल

प्रोटीन हमारी बॉडी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह शरीर के कई जरूरी कार्यों में मददगार है जैसे मसल्स, हड्डियों, स्किन आदि को बनाने के लिए। यह टिश्यू रिपेयर, मजबूत इम्यून सिस्टम आदि के लिए भी फायदेमंद है। यानी, हेल्दी रहने के लिए प्रोटीन को अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में शामिल करना बहुत जरूरी है। आजकल अधिकतर लोग वीगन (Vegan) हैं। वीगन वो लोग होते हैं जो अपनी डायट में किसी भी तरह के पशु उत्पाद को शामिल नहीं करते। यहां तक की वो गाय के दूध की बनी चीजों का भी सेवन नहीं करते हैं। अगर आप भी वीगन (Vegan) हैं, तो आपके लिए वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि आपके आहार में प्रोटीन की कम न हो। आइए जानें वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) के बारे में। वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline)  के अनुसार शाकाहारी लोगों के लिए सबसे चिंता का विषय होता है आहार में पर्याप्त प्रोटीन का न होना। ऐसे में उन्हें बेहतरीन वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) के बारे में पता होना चाहिए, जो इस प्रकार हैं: टोफू टोफू सोया मिल्क से बनाया जाता है और यह प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। टोफू (Tofu) को टिश्यू को बनाने और रिपेयर करने के लिए फायदेमंद पाया गया है। टोफू (Tofu) में सेचुरेटेड फैट कम होता है और हेल्दी मोनो अनसेचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स होते हैं। यही नहीं, इनमें आयरन और कैल्शियम भी होता है। टोफू (Tofu) का इस्तेमाल नमकीन और मीठी किसी भी तरह के डिशेस में किया जा सकता है। वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) में यह एक अच्छा विकल्प है। चिया सीड्स चीया सीड्स में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है। यह एक बेहतरीन प्लांट बेस्ड सोर्स है जिसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड होता है। अल्फा लिनोलेनिक एसिड एक तरह का ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। दिल और दिमाग के लिए इसे फायदेमंद माना गया है। यही नहीं, चिया सीड फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य मिनरल्स का भी अच्छा स्त्रोत है। इनका सेवन करने से हाइड्रेशन में और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस में मदद मिलती है। बादाम  बादाम को वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) में शामिल किया जाए सकता है क्योंकि इसमें भी प्रोटीन होता है। साथ ही इसमें मोनो अनसेचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। बादाम विटामिन और मिनरल्स का भी अच्छा स्त्रोत है। अच्छी मात्रा में फाइबर होने के कारण केवल पेट के लिए यह फायदेमंद है। क्विनोआ क्विनोआ अपने हेल्थ बेनिफिट्स के कारण आजकल बहुत प्रसिद्ध है। यह एक कम्पलीट प्रोटीन मील है। वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) में क्विनोआ में नौ जरूरी एमिनो एसिड्स होते हैं, इन्हें हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता। वीगन (Vegan) और शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। इसके साथ ही इनमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक आदि भी होता है। यही नहीं यह ग्लूटेन फ्री भी है, यानी ग्लूटेन सेंसिटिव लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक चना सफेद चने न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं बल्कि न्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा बैलेंस प्रदान करते हैं। वीगन प्रोटीन सोर्सेज (Vegan Protein Sources) में यह भी बेहतरीन है। इनमें कई अन्य जरूरी मिनरल भी होते हैं जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फोलेट आदि। दिल के लिए भी सफेद चने को फायदेमंद माना गया है। इनका इस्तेमाल न केवल सलाद, सूप, सब्जी आदि में किया जा सकता है बल्कि इसे भून का ऐसे भी खाया जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Vegan Protein Sources #VeganProtein #PlantBasedDiet #ProteinDeficiency #HealthyEating #VeganNutrition

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cancer-fighting foods

कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं यह 6 फूड्स, इन्हें करें अपनी डायट में शामिल

कैंसर (Cancer) एक गंभीर बीमारी है जो सेल्स की असामान्य ग्रोथ और फैलने की वजह से होती है। कैंसर के कई प्रकार हैं और यह पूरे शरीर में फैल सकता है। इसका मुख्य कारण जेनेटिक म्यूटेशन को माना जाता है। हालांकि, इसके अन्य कई कारण भी हैं जैसे जीवनशैली में खराबी या एनवायरनमेंट फैक्टर्स आदि। कैंसर (Cancer) के रिस्क से बचाव पूरी तरह से संभव नहीं है। लेकिन, अपनी जीवनशैली में सही बदलाव से कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है। कुछ फूड्स को भी इसमें फायदेमंद पाया गया है। आइए जानें कैंसर के रिस्क को कम करने वाले फूड्स (Foods that reduce the risk of cancer) के बारे में। कैंसर के रिस्क को कम करने वाले फूड्स (Foods that reduce the risk of cancer): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार कुछ फूड्स खाने से कैंसर (Cancer) के विकसित होने का रिस्क कम हो सकता है और कैंसर ग्रोथ भी कम हो सकती है। इनमें सब्जियां, मसाले, फल आदि शामिल हैं। कैंसर के रिस्क को कम करने वाले फूड्स (Foods that reduce the risk of cancer) इस प्रकार हैं: डार्क चॉकलेट डार्क चॉकलेट में कोकोआ होता है जो फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स युक्त होता है। इससे कुछ कैंसरस का रिस्क कम होता है। यही नहीं इसमें पॉलीफेनोल और फ्लेवेनोल भी होते हैं, जो हेल्दी गट बैक्टीरिया के लिए अच्छे हैं। लेकिन, ध्यान रखें इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। लहसुन लहसुन को अपनी खुशबु और स्वाद के लिए जाना जाता है। इसका इस्तेमाल कुकिंग और मेडिसिन में किया जाता है। गार्लिक में एलिसिन होता है, जो एक प्रोटेक्टिव सल्फर कंपाउंड है। यह कैंसर (Cancer) को बढ़ने से रोकता है। ऐसा माना गया है कि नियमित रूप से इसका सेवन करने से कोलोरेक्टल कैंसर का रिस्क (Cancer risk) कम होता है। हालांकि, इसके बारे में और अधिक स्टडी की जा रही है। बेरीज बेरीज यानी ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी आदि कैंसर के रिस्क को कम करने वाले फूड्स (Foods that reduce the risk of cancer) में शामिल हैं। इनमें विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि होते हैं जैसे एंथोसायनिन, एलाजिक एसिड और रेस्वेराट्रोल आदि। इन्हें खाने से डायजेस्टिव ट्रैक्ट के कैंसर (Cancer) के रोकथाम में मदद मिलती है। शोध यह बताते हैं कि रोजाना इनका सेवन करने से कैंसर का रिस्क (Cancer risk) कम होने में भी हेल्प मिल सकती है। फिश मच्छी न्यूट्रिएंट्स और प्रोटीन से भरपूर होती है खासतौर पर सालमोन, टूना आदि। यह मच्छलियां ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का अच्छा स्त्रोत है। ऐसा माना गया है कि यह फिश इन्फ्लेमेशन को रोकती हैं और ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर (Cancer) से बचाव में फायदेमंद हैं।  मेवे कुछ स्टडीज यह बताती हैं कि कुछ मेवे कैंसर (Cancer) के रिस्क को कम करते हैं। ऐसा माना गया है कि ब्राजील नट व अखरोट को कैंसर के रिस्क को कम करने में फायदेमंद हैं। अख़रोट में खासतौर पर कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। इसलिए, इनका सेवन कैंसर का रिस्क (Cancer risk) कम किया जा सकता है। नट्स को आप ऐसे भी खा सकते हैं या सलाद आदि में मिला कर भी इनका सेवन कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक साबुत अनाज साबुत अनाज का सेवन करना भी कैंसर (Cancer) जैसे कोलोरेक्टल कैंसर से बचाने में मदद कर सकता है। इनमे फाइबर के साथ ही अन्य मिनरल, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। इसलिए साबुत अनाज खाने से भी सम्पूर्ण रूप से हेल्दी रहने में सहायता मिल सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Cancer #CancerPrevention #HealthyEating #Superfoods #AntiCancerDiet #WellnessTips #EatClean #NutritionMatters

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Why Practice Yoga on an Empty Stomach

योग क्यों करना चाहिए खाली पेट? जानिए वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण 

योग भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन जब भी योग की बात होती है, अक्सर सलाह दी जाती है कि इसे खाली पेट किया जाए। आखिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक या आयुर्वेदिक कारण है? आज इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि योग (Yoga) खाली पेट क्यों करना चाहिए और इसके पीछे विशेषज्ञों और रिसर्च का क्या कहना है। योग और पाचन – एक सीधा संबंध योग करते समय शरीर के कई हिस्सों पर खिंचाव और दबाव पड़ता है, खासतौर पर पेट और आंतों पर। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद या तीन से साढ़े तीन घंटे के अंदर योग करेंगे तो इससे ना ही खाना ठीक तरह से डायजेस्ट हो पायेगा और ना ही योगासन का आपको लाभ मिलेगा। योग से जुड़े जानकारों की मानें  भोजन के तुरंत बाद योग करने से एसिडिटी (Acidity), गैस (Gas), उल्टी (Vomiting) जैसा एहसास और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। इससे न केवल योग का लाभ कम होता है, बल्कि शरीर को नुकसान भी हो सकता है। क्या कहती है रिसर्च? The American Journal of Physiology के रिसर्च के अनुसार भोजन के बाद बॉडी का ब्लड फ्लो डायजेस्टिव सिस्टम की ओर होता है। ऐसे में कोई भी शारीरिक क्रिया  विशेषकर योग की शैली से नुकसान पहुंच सकता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (2020) की रिपोर्ट के अनुसार व्यायाम या योग भोजन के तुरंत बाद करने से अपच indigestion, एसिड रिफ्लक्स acid reflux और ब्लोटिंग bloating की शिकायत आम हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार,भोजन के बाद शरीर में अग्नि (पाचन ऊर्जा) सक्रिय रहती है। यदि आप इस समय योग करते हैं, तो ऊर्जा विभाजित हो जाती है – न पाचन ठीक से होता है, न योग के लाभ मिलते हैं। आयुर्वेद योग को सतोगुणी क्रिया मानता है, जो शुद्धता, संयम और एकाग्रता को बढ़ावा देता है — और यह तभी संभव है जब पेट खाली हो। कब करें योग? योग विशेषज्ञों की राय है कि भोजन और योग के बीच कम से कम 3 से 3.5 घंटे का अंतराल होना चाहिए। अगर आपने दोपहर 1 बजे खाना खाया है, तो योग 4:30 या 5 बजे से पहले नहीं करना चाहिए। वैसे आप भोजन के तुरंत बाद आप वज्रासन जरूर कर सकते हैं, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा आसन है जो पाचन में मदद करता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक खाली पेट योग के फायदे खाली पेट योग करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और आयुर्वेद से सिद्ध एक प्रभावी तरीका है जिससे न केवल शरीर को लाभ होता है बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा भी जागृत होती है। चाहे आप शुरुआत कर रहे हों या अनुभवी योगी हों, यह नियम हमेशा याद रखें – योग से पहले पेट खाली रखें और इसका लाभ आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर लाभ होगा। नोट: अगर आप किसी भी शारीरिक या मानसिक से परेशान हैं तो हेल्थ से जुड़े एक्सपर्ट से मिलें। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट आपके परेशानियों को समझकर उसका सही इलाज कर सकते हैं।   Latest News in Hindi Today Hindi news पाचन ऊर्जा Yoga #Yoga #EmptyStomachYoga #Ayurveda #HealthBenefits #YogaRoutine #MorningYoga #YogaForEnergy

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Shatavari benefits

प्राकृतिक तरीके से महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने इस तरह के फायदेमंद है शतावरी

महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ यानी प्रजनन स्वास्थ्य उनके शारीरिक, मानसिक और सामान्य स्वास्थ्य से संबंधित है। इनमें रिप्रोडक्टिव सिस्टम का स्वास्थ्य, मेंस्ट्रुअल हेल्थ, प्रेग्नेंसी, कंट्रासेप्शन, सेक्शुअल हेल्थ आदि शामिल है। महिलाओं के लिए अपनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए महिलाओं के लिए जागरूक रहना चाहिए और उनके लिए रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराना और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना भी जरूरी है। इसके लिए कुछ प्लांट भी फायदेमंद हो सकते हैं। ऐसा ही एक प्लांट है शतावरी (Shatavari), जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। आयुर्वेदिक मेडिसिन में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए वरदान माना गया है। आइए महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के बारे में। महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी(Shatavari for women’s reproductive health): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार शतावरी (Shatavari) को अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) भी कहा जाता है। यह एक सब्जी है जो सफेद, हरे और पर्पल रंग में मिलती है। इसका प्रयोग कई तरह की डिशेस बनाने में किया जाता है। महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के फायदे इस प्रकार हैं: हॉर्मोनल बैलेंस : ऐसा माना गया है कि शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस फीमेल रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन्स को रेगुलेट और बैलेंस करने के लिए फायदेमंद है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि अनियमित पीरियड्स और पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम्स जैसी समस्याओं के लिए यह फायदेमंद है। फर्टिलिटी शतावरी (Shatavari) ओवेरी के कार्यों को सुधारने के लिए भी जाना जाता है यानी वो फर्टिलिटी को सपोर्ट करने में फायदेमंद है। इसके साथ ही इससे एग्स की गुणवत्ता भी सुधरती है।  स्ट्रेस को करे कम शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) को हमारे मेंटल हेल्थ के लिए भी लाभदायक पाया गया है। इससे स्ट्रेस कम होने में मदद मिलती है। ऐसा पाया गया है कि चिंता और स्ट्रेस से महिलाओं की रिप्रोडक्टिव पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका इस्तेमाल एंडोमेट्रियोसिस, दर्दनाक पीरियड्स और मेनोपॉज के लक्षणों को दूर करने में भी किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक पोस्टपार्टम फायदे महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health)  के फायदे पोस्टपार्टम सपोर्ट से भी जुड़े हुए हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं में शतावरी (Shatavari) मिल्क प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करती है और इससे पोस्टपार्टम के लक्षण भी दूर होते हैं। यह तो थे महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के फायदे। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी चीज के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) के बारे में भी अभी और रिसर्च की जानी जरूरी है। इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें और इसके साइड-इफेक्ट्स के बारे में भी जान लें। अपनी मर्जी से किसी भी चीज का सेवन करना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Shatavari #shatavari #womenshealth #reproductivehealth #naturalremedies #hormonebalance #ayurveda #fertilitybooster

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insulin plant

डायबिटीज के लिए इंसुलिन प्लांट; डायबिटीज को मैनेज करने का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प

डायबिटीज को एक भयानक बीमारी माना गया है, जिसमे रोगी का शरीर या तो जरूरी इंसुलिन को बना नहीं पाता है या सही से उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता। कई मामलों में इसका कोई भी लक्षण रोगी में नजर नहीं आता है। आजकल यह समस्या सामान्य होती जा रही है। गंभीर बात यह है यह रोग इंसान के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बीमारी को कुछ हद तक मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना सबसे जरूरी है। कुछ हर्ब्स को भी इसके लिए फायदेमंद पाया गया है। इन्हीं में से एक है इंसुलिन प्लांट (Insulin plant)। आइए जानें इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) यानी कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) के बारे में विस्तार से। क्या है इंसुलिन प्लांट (Insulin plant)?  इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) को कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) के नाम से भी जाना जाता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बहुत फायदेमंद प्लांट है और डायबिटीज में इसे फायदेमंद पाया गया है। हालांकि, अन्य उपायों के साथ ही रोगी के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है। हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार यह पौधा कुछ डायबिटीज के रोगियों में ग्लूकोज लेवल को कम करने में लाभदायक हो सकता है और रोगी निम्नलिखित तरीकों से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं: इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) यानी कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन को ठीक करने में भी फायदेमंद है। आइए जानें क्या यह डायबिटीज के रोगियों के लिए सुरक्षित है? क्या सच में इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) डायबिटीज के रोगियों के लिए सुरक्षित है? ऐसा माना गया है कि इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) के पत्ते खाना डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है। स्टडी भी यह बताती हैं इसके सेवन से ब्लड ग्लूकोज लेवल में कमी आ सकती है। जो रोगी इंसुलिन लेते हैं, उनमे इसको लेने की आवश्यकता कम हो सकती है। लेकिन, इनका सेवन करना कुछ लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जब भी इसका सेवन करना शुरू करें उससे पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें खासतौर पर अगर आप कोई और दवा ले रहे हैं या आपको कोई गंभीर बीमारी है। इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) इस प्लांट का सेवन करना कुछ लोगों के लिए बुरा भी साबित हो सकता है। इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम बढ़ना इसलिए, किसी भी दवा या हर्ब्स का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा अधिक समय तक इसका सेवन भी इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) का कारण बन सकता है। इसके बारे में और अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Costas Costus Igneus #insulinplant #diabetesmanagement #naturaltreatment #bloodsugarcontrol #herbalremedy #costusigneus #healthylifestyle

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