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Control BP, Sugar & Depression

ब्लड प्रेशर, शुगर और डिप्रेशन को कंट्रोल करने के लिए यह ड्रिंक्स हैं बेहतरीन

हेल्दी रहने के लिए कई चीजों को महत्वपूर्ण माना गया है उन्हीं में से एक है सही आहार का सेवन। हाई ब्लड प्रेशर (Blood Pressure), डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं आजकल सामान्य होती जा रही हैं। हेल्दी आहार के साथ ही ड्रिंक्स का सेवन करना भी इनसे बचाव के लिए जरूरी हैं। ऐसा माना गया है कि डिहाइड्रेशन कई समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में पानी और अन्य हेल्दी ड्रिंक्स पीना ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन के रोगियों के लिए फायदेमंद माने गए हैं। कुछ पेय पदार्थ खासतौर पर ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को कंट्रोल करने, ब्लड शुगर को कम करने और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। आइए जाने ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) हारवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard School of Public Health) के अनुसार पानी वो ड्रिंक है जो शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही दूध को भी हेल्थ के लिए फायदेमंद पाया गया है। आइए जानें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में:  ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को मैनेज करने के लिए इन ड्रिंक्स का सेवन करें: डायबिटीज (Diabetes) डायबिटीज (Diabetes) को कंट्रोल में रखने के लिए पानी, बिना चीनी के चाय व कॉफी और लो फैट मिल्क को फायदेमंद पाया गया है। इसके अलावा अन्य फायदेमंद ड्रिंक्स इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डिप्रेशन (Depression) डिप्रेशन एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल बहुत से लोग प्रभावित हैं। डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स इस प्रकार हैं: कैमोमाइल चाय: कैमोमाइल चाय को अपने शांत करने और तनाव से बचाव वाले गुणों के लिए जाना जाता है। इससे स्ट्रेस और एंग्जायटी को मैनेज करने में मदद मिलती है।  हिबिस्कस टी: कुछ स्टडीज यह बताती हैं कि हिबिस्कस टी यानी गुड़हल की चाय में मूड को सही रखने वाले गुण होते हैं। इससे डिप्रेशन को दूर करने में मदद मिलती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Diabetes #bloodpressure #sugarcontrol #depressionrelief #healthydrinks #naturalremedies

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विटामिन डी डेफिशिएंसी: इस कमी से बढ़ सकता है इन 5 बीमारियों का जोखिम

विटामिन डी (Vitamin D) एक ऐसा जरूरी न्यूट्रिएंट है, जिसका इस्तेमाल हमारा शरीर कैल्शियम और फोस्फरस को एब्जॉर्ब करने के लिए करता है। अगर बात की जाए कैल्शियम और फोस्फरस की, तो यह हमारी हड्डियों और दांतों को बनाने और मजबूत बनाये रखने में मददगार हैं। इसके साथ ही इनके कई अन्य लाभ भी हैं। विटामिन डी (Vitamin D) का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना गया है है। हालांकि, कुछ फूड्स से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी यानी डेफिशिएंसी होने से कई समस्याएं होने का रिस्क रहता है। आइए जानें विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) के बारे में। विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार विटामिन डी (Vitamin D) को सूरज की रोशनी, कई फूड्स और सप्लीमेंट्स से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) दुनिया भर में सामान्य समस्याओं में से सबसे सामान्य है।  विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) इस प्रकार हैं  रिकेट्स रिकेट्स बच्चों में होने वाली समस्या है, जिसमें उनकी हड्डियां कमजोर और सॉफ्ट हो जाती है। इससे हड्डियों का आकर अलग हो जाता है। ऐसा माना गया है कि इसका मुख्य कारण होता है विटामिन डी (Vitamin D) की कमी। लोग इस समस्या को गरीबी और कुपोषण से जोड़ कर देखते हैं। वयस्कों में इस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया के नाम से जाना जाता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द हो सकता है और मसल्स कमजोर हो सकते हैं। यह नहीं इससे फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में कैल्शियम के एब्ज़ोर्प्शन के लिए विटामिन डी (Vitamin D) जरूरी है। इसकी कमी के कारण बोन डेंसिटी कम होती है और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ता है। यही नहीं इससे हड्डियों के टूटने का रिस्क भी अधिक हो जाता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही इस रोग के विकसित होने की संभावना बढ़ती है। ऑटोइम्यून डिजीज  ऐसा पाया गया है कि विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) ऑटोइम्यून डिजीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑटोइम्यून कंडीशन से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल पाया गया है। यह कंडीशंस हैं मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि। हालांकि, इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। कुछ कैंसर विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) से कुछ कैंसर होने का रिस्क भी बढ़ता है। कुछ स्टडीज भी इन दोनों के लिंक के बारे में बताती हैं। ऐसा माना गया है कि इस कमी से ब्रेस्ट कैंसर और बाउल कैंसर का रिस्क बढ़ता है। ऐसा भी पाया गया है कि लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल से सम्पूर्ण कैंसर मोर्टेलिटी में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि इससे प्रोस्टेट और पैंक्रियाटिक कैंसर का रिस्क बढ़ता है। यानी, यह कमी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है, जो एक गंभीर समस्या का विषय है। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कार्डियोवैस्कुलर डिजीज विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज  से भी जोड़ा गया है, जिसमें कई हार्ट डिजीज शामिल हैं।  यह भी पाया गया है कि इससे बुजुर्गों की मसल्स कमजोर हो सकती हैं और उन्हें दर्द हो सकता है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और अन्य मेंटल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। यह कमी मूड डिसऑर्डर्स का कारण भी बन सकती है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Vitamin D #vitamind #healthtips #bonehealth #immunity #diseaserisk #nutrition #healthawareness

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Ice Bath Benefits & Risks You Should Know

आइस बाथ- एक लोकप्रिय ट्रेंड जिसके कई हैं फायदे, लेकिन इसके इन स्वास्थ्य जोखिमों से रहें सावधान

पिछले कुछ समय से आइस बाथ (Ice bath) चैलेंज सोशल मीडिया पर बहुत प्रचलित हो रहा है। ऐसा माना गया है कि इसके कई फायदे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप आइस बाथ के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इसे कायरोथेरेपी भी कहा जाता है। इसमें ठंडे पानी में बर्फ मिला कर नहाया जाता है ताकि सूजन और मांसपेशियों में दर्द को कम किया जा सके। लेकिन, हाल ही में हुई रिसर्च बताती हैं कि आइस बाथ (Ice bath) से कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार अगर आइस बाथ (Ice bath) को सही से लिया जाए तो यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो स्पोर्ट्स में भाग लेते हैं। लेकिन, इसको आजमाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लें और इसकी सही तकनीक के बारे में जान लें। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। हायपोथर्मिया ठंडे पानी में ज्यादा समय रहने से शरीर पर फिजिकल रिएक्शन हो सकता है। 15 डिग्री सेल्सियस  से कम तामपान के पानी में जाना बहुत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसमें शरीर का तापमान बहुत कम हो सकता है जिसे हायपोथर्मिया कहा जाता है। यह एक एमेर्जेंसी हैं, जिसमें तुरंत डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है। यही नहीं, ठंडे पानी से बाहर आने के बाद भी शरीर का टेम्प्रेचर कम हो सकता है और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर पर असर आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of Ice bath) ब्लड प्रेशर से भी संबंधित हैं। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती और यह अनकण्ट्रोल हो सकती है। इसका प्रभाव ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यही नहीं, अधिक ठंड से एकदम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन लोगों के लिए आइस बाथ (Ice bath) खासतौर पर खतरनाक है जिन्हें हार्ट, ब्लड वेसल्स या दिमाग से सम्बन्धित कोई समस्या है। सांस संबंधी समस्याएं आइस बाथ (Ice bath) के दौरान ठंडे पानी में रहने से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जैसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस। इस पानी में अधिक देर तक रहने से नर्वस और ब्लड वेसल्स को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे पैरों और हाथों में दर्द, उनका सुन्न होना या ठंड के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। यह तो थे आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath)। आइए जानें कि सही मार्गदर्शन और सलाह के बाद आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) के बारे में। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) आइस बाथ के फायदे (Benefits of Ice bath) इस प्रकार हो सकते हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Ice bath #icebath #coldtherapy #healthtrend #cryotherapy #wellnesstips

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Air Pollution May Trigger Anxiety and Depression

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा

एयर पॉल्यूशन (Air pollution) गंभीर समस्याओं में से एक है। हमारे देश में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। इस परेशानी का मुख्य कारण माना जाता जाता है गाड़ियों और इंडस्ट्रीज से निकले धुएं को। इस धुएं से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड आदि। इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन सांस संबंधी और कई रोगों का कारण बन सकता है। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार इसका प्रभाव मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के साथ लिंक किया है। आइए जानें पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में। पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार लगभग पूरी दुनिया की अधिकतम आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन लिमिट्स से अधिक है तथा जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक हैरान करने वाली जानकारी दी है। उनके अनुसार एयर पॉल्यूशन (Air pollution) मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण हो सकता है। एयर पॉल्यूशन (Air pollution) में मौजूद  हानिकारक पार्टिकल्स और गैसेस से हमारे दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब हमारी ब्लडस्ट्रीम पर पहुंच कर दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ावा मिलता है। यह तो थी पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में जानकारी। अब जानते हैं एयर पॉल्यूशन के अन्य प्रभावों के बारे में।  एयर पॉल्यूशन के दिमाग पर इफेक्ट  जैसा की पहले ही बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन (Air pollution) से मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इससे मेंटल हेल्थ की क्वालिटी कम होती है जिससे नींद में भी समस्या आ सकती है और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।  बच्चों और पहले से ही मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के रोगी पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकते हैं।  हालांकि, पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में अभी अधिक स्टडी की जानी जरूरी है। यही नहीं, लोगों को एयर पॉल्यूशन (Air pollution) के सम्पर्क में आने से भी बचना चाहिए, ताकि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सके।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने के उपाय? एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने  के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Air pollution #airpollution #WHOwarning #mentalhealth #anxiety #depression #toxicair #healthalert

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6 Tips from Harvard Doctors to Keep Your Liver Healthy

हार्वर्ड डॉक्टर्स से जानें लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए 6 महत्वपूर्ण बातों के बारे में

लिवर (Liver) हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पेट के ऊपरी हिस्से में होता है। यह अंग हमारे शरीर के कई जरूरी कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है जैसे खून से टॉक्सिन को फिल्टर करना, ब्लड प्रेशर  और डाइजेशन को सही रखना आदि। यही नहीं ,यह यह शरीर का सबसे बड़ा ग्लेंड है और स्ट्रांग इम्युनिटी, डेटोक्सिफिकेशन, विटामिन स्टोरेज आदि में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। इसलिए, अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसे हेल्दी रखने का सबसे बेहतरीन उपाय है अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाना। लिवर (Fatty liver) से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनकी जानकारी हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार हर किसी को होनी चाहिए। आइए जानें लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know)।  लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know) कोलंबियासर्जरी (Columbiasurgery) के अनुसार लिवर (Liver) शरीर का वो सबसे बड़ा सॉलिड ऑर्गन है, जो कई जरूरी कार्यों को करने का काम करता है। हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know), इस प्रकार हैं: लिवर की पुनर्जन्म क्षमता लिवर एक ऐसा ऑर्गन है जो अपने सेल्स को फिर से जेनरेट कर सकता है। लिवर (Liver) की यह कपैसिटी उसे सही से कार्य करने में मदद करती है और इससे शरीर को हेल्दी रहने में भी मदद मिलती है। हालांकि, किसी समस्या के कारण यह कपैसिटी सीमित हो सकती है। लिवर के लिए यह चीजें हैं हानिकारक अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जैसे एल्कोहॉल। एल्कोहॉल के सेवन से लिवर संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही अनहेल्दी डायट को लेने से भी बचें। जंक फ़ूड और प्रोसेस्ड आहार को अपने आहार में जगह देने से बचें। यही नहीं, कुछ दवाईयों का अधिक सेवन करने से भी लिवर (Liver) को नुकसान हो सकता है। लिवर के लिए यह हैं फायदेमंद चीजें खट्टे फल जैसे निम्बू, संतरे आदि का सेवन करना लिवर (Fatty liver) के लिए बेनेफिशियल है। यही नहीं हरी पत्तेदार सब्जियों को खाना भी लिवर के साथ-साथ सम्पूर्ण हेल्थ के लिए फायदेमंद है। कॉफ़ी का सेवन लिवर (Liver) के लिए अच्छा है लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। नींद से प्रभावित होता है लिवर  खराब नींद लिवर की कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है जैसे टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना आदि। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 9 घंटे रात की नींद लेने से लिवर को रिपेयर करने और सम्पूर्ण रूप से हेल्दी रहने में मदद मिलती है। कुछ दवाईयां भी लिवर (Liver) पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। इसे भी पढ़ें:- मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान लिवर को हेल्दी रखने के तरीके अगर आप अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना चाहते हैं, तो हमारे लिए हाइड्रेट रहना, पर्याप्त नींद लेना और सही आहार का सेवन करना जरूरी है। यही नहीं स्मोकिंग करना भी लिवर के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से लिवर टेस्ट कराने से भी लिवर (Liver) को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है। लिवर को कौन सी समस्याएं कर सकती हैं प्रभावित? लिवर संबंधी समस्याओं में एक है हेपेटाइटिस जो वायरस, बैक्टीरिया आदि के कारण होती है। इसके साथ ही फैटी लिवर (Fatty liver) वो परेशानी है, जिसमें लिवर में अधिक फैट जमा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक एल्कोहॉल का सेवन करने वाले लोगों को फैटी लिवर (Fatty liver) की समस्या होती है। लेकिन नॉन-एल्कोहॉलिक लोगों को भी फैटी लिवर (Fatty liver) हो सकता है। लिवर फेलियर होने पर लिवर ट्रांसप्लांट एक इलाज है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fatty liver #liverhealth #harvarddoctors #livercare #healthtips #naturalremedies #liverdetox #healthybody

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सीडीएससीओ की अपील: टॉयलेट में फ्लश करें एक्सपायर्ड दवाएं, जानिए क्यों

दवाईयां कई चीजों में ट्रीटमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं। यह गंभीर और लंबे समय से परेशान करने वाली कंडिशंस का उपचार कर सकती हैं। यह न केवल बीमारियों का उपचार करती है बल्कि इनसे हेल्थ में भी सुधार होता है। अधिकतर लोगों को अपने जीवन के किसी न किसी पॉइंट पर दवाई लेनी ही पड़ती है। लेकिन, दवाईयों का गलत इस्तेमाल हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है। बिना एक्सपर्ट की सलाह के इन्हें नहीं लेना चाहिए। भारत की टॉप ऑर्गनाइजेशन ने हाल ही में लोगों से यह अपील की है कि वो मेडिसिन्स को टॉयलेट में ही फ्लश करके डिस्पोज करें। आइए जानें सीडीएससीओ द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly) के बारे में। सीडीएससीओ द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly): पाएं जानकारी  मेडलाइनप्लस (Medlineplus) के अनुसार दवाईयों के साथ एक रिस्क जुड़ा होता है। इसलिए दवाईयों को लेने से पहले इन रिस्क्स के बारे में विचार करना जरूरी है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) हमारे देश की सबसे बड़ी ड्रग रेगुलेटरी एजेंसी है। इसने लोगों से एक अपील की है। इसके अनुसार लोगों को एक्सपायर्ड या उन दवाईयों को जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते हैं, कभी कूड़ेदान में न फेंकें बल्कि इसकी जगह इन्हें टॉयलेट में फ्लश करें। यह तो थी सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा एक्सपायर्ड दवाईयों को सही से डिस्पोज करने की अपील (CDSCO appeals to dispose of expired medicines properly) के बारे में जानकारी। अब जानिए कि ऐसा करने कि सलाह क्यों दी जा रही है?  सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा क्यों दी जा रही है यह सलाह? सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) यानी सीडीएससीओ (CDSCO) ने ऐसी कुछ दवाईयों की लिस्ट भी जारी की है जिनका गलत तरीके से इस्तेमाल करना न केवल हानिकारक है, बल्कि मृत्यु का कारण भी बन सकती है। सीडीएससीओ (CDSCO) के अनुसार इन दवाईयों को कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। ऐसा करना हानिकारक हो सकता है। हो सकता है कि कूड़ेदान या गलत तरीके से इन्हें डिस्पोज करने से यह किसी बच्चे के हाथ लग जाए और वो इसे खा लें। ऐसा करना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे ही अगर इन्हें गलती से कोई जानवर खा ले, तो यह उसके लिए भी हानिकारक है। इसीलिए, इन्हें कूड़ेदान की जगह टॉयलेट में फ्लश करना चाहिए। सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा जारी की दवाईयों की लिस्ट इस प्रकार है:  इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ड्रग टेक बैक प्रोग्राम दवाईयों को सही तरीके से डिस्पोज करने के लिए सीडीएससीओ (CDSCO) ने स्टेट ड्रग कंट्रोल डेप्रार्ट्मेंट और केमिस्ट्स एसोसिएशन को ड्रग टेक बैक प्रोग्राम शुरू करने की सलाह दी है। इस प्रोग्राम के अनुसार लोगों को अपनी एक्सपेयर्ड या इस्तेमाल न होने वाली दवाओं को सही से डिस्पोज करने के लिए सही स्थानों में जमा कराने की सुविधा मिलेगी। जिससे दवाईयों को सही से डिस्पोज किया जा सकेगा। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) के अनुसार दवाईयों को सही से डिस्पोज करने से न केवल जानवरों और लोगों को कोई हानि नहीं होगी बल्कि एनवायरनमेंट की भी इससे रक्षा होगी। ड्रग टेक बैक प्रोग्राम को स्थापित करने का उद्देश्य केवल सही से इनको डिस्पोज करना ही नहीं, बल्कि पर्यवरण पर इनके प्रभाव को कम करना भी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। इसे भी पढ़ें:- मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान Latest News in Hindi Today Hindi CDSCO #CDSCO #ExpiredMedicines #DrugDisposal #FlushMedicines #HealthSafety #IndiaPharma #MedicalWaste #DrugAwareness

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monsoon mosquito control

मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान

बरसात का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। मच्छर आकार में छोटे होते हैं, लेकिन इनके कारण होने वाले रोग जानलेवा भी हो सकते हैं। दुनिया भर में मच्छरों की  3,500 से ज़्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। यह नमी वाले वातारण में पनपते और बढ़ते हैं। इनमें मादा मच्छरों के काटने से मनुष्यों और जानवरों में रोगों के फैलने की संभावना अधिक रहती है। मच्छरों से बचाव के सावधानियां बरतना जरूरी हैं। अच्छी बात यह है कि जल्दी ही आंध्र प्रदेश सरकार मच्छरों के खतरे से लड़ने के लिए एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) यानी एसएमओएसएस (SMOSS) शुरू करने की तैयारी में है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।  क्या है एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system)? जैसा की पहले ही बताया गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार बरसात के मौसम में मच्छरों के खतरे को कंट्रोल करने के लिए एक एआई बेस्ड सोल्यूशन को शुरू करने वाली है। इसका नाम है स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) यानी एसएमओएसएस (SMOSS)। यह सिस्टम मच्छरों के लिंग, जाति, पॉपुलेशन डेंसिटी और मौसम की कंडीशन को पहचाने के लिए एआई से काम करने वाले सेंसर्स, ड्रोन और अन्य डिवाइसेस का इस्तेमाल करेगा। अगर किसी क्षेत्र में मच्छरों संख्या अधिक हो जाती है, तो यह सिस्टम ऑटोमेटिक एलर्ट भेजेगा। इससे उन क्षेत्रों में जल्दी से मच्छरों से बचाव क लिए छिड़काव और फोगिंग का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। यानी, एसएमओएसएस (SMOSS) के इस्तेमाल से मच्छरों को नष्ट करने और इनके कारण होने वाले रोगों से बचाव में मदद मिलेगी। स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) की खास बातें एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) की कुछ खासियतें इस प्रकार हैं:  एआई-बेस्ड स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (AI-based smart mosquito surveillance system) का उद्देश्य आंध्र प्रदेश में इस सिस्टम को बहुत जल्दी लांच किया जा रहा है। इसके उद्देश्य इस प्रकार हैं” इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है लोगों को मच्छरों से होने वाली बीमारियों (SMOSS) से बचाना, जिसके हर साल लाखों मामले सामने आते हैं। इस सिस्टम से मच्छरों की डेंसिटी का भी पता चल सकता है और जरूरत पड़ने पर सही कार्यवाई करने में मदद मिलेगी। आंध्र प्रदेश सरकार जल्दी ही स्मार्ट मॉस्क्वीटो सर्विलांस सिस्टम (Smart Mosquito Surveillance System) की शुरुआत करने वाली है और इसको राज्य के विभिन स्थानों से शुरू किया जाएगा जैसे विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, काकीनाडा,  नेल्लोर और कुर्नूल आदि। अब जानिए कि मच्छरों से बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें? मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को भी कुछ सावधानियों को बरतना चाहिए, जैसे:  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi SMOSS #monsoon #mosquitoes #AItechnology #AndhraPradesh #SMOSS #healthcareinnovation #mosquitocontrol #technews #publichealth

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harmful foods for kids

हार्ट एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों को नजर अंदाज करने चाहिए यह 5 हानिकारक फूड्स

जब भी बात गंभीर बीमारियों की आती है, तो हम अक्सर यही मानते हैं कि यह समस्याएं वयस्कों या बुजुर्गों को प्रभावित करती हैं। लेकिन, बदलते समय में डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) जैसे रोग बच्चों में भी सामान्य होते जा रहे हैं। बच्चों में हार्ट कंडीशंस को पेडिएट्रिक हार्ट कंडीशंस के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों में बढ़ती इन समस्याओं के कई कारण हैं और एक्सपर्ट्स की मानें तो अनहेल्दी डायट उनमें से ही एक है। आजकल बच्चे हेल्दी आहार की जगह जंक फ़ूड की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन, बच्चों के खान-पान का खास ध्यान रखना जरूरी है। इस बात की जानकारी होना बहुत जरूरी है कि हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) से बचाव के लिए बच्चों को किन फूड्स को देने से बचना चाहिए? आईये जानें हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार अधिकतर लोग यह सोचते हैं कि बचपन में बच्चों को हार्ट डिजीज (Heart disease) का कोई जोखिम नहीं होता, लेकिन बचपन में ही हार्ट का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। पाएं जानकारी कि हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? अधिक चीनी युक्त आहार अधिक चीनी युक्त पेय पदार्थ या  आहार का सेवन बच्चों के हार्ट के साथ-साथ सम्पूर्ण स्वास्थ के लिए हानिकारक है। सोडा, पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स , केक आदि के सेवन से वजन बढ़ता है और वजन बढ़ना हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकता है। फ्लेवर्ड योगर्ट फ्लेवर्ड योगर्ट में अधिक चीनी, रंग और अन्य केमिकल्स होते हैं, जो हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकते हैं। इसलिए, इनकी जगह बच्चों को सादा दही खाने को दें। आप इन में फल, शहद आदि डाल कर बच्चे को दे सकते हैं। सफेद चावल बच्चे अक्सर सफेद चावल खाना पसंद करते हैं। लेकिन, इनमें हेल्दी फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स नहीं होते। यही नहीं, रिफाइंड ग्रेन जैसे सफेद चावल, ब्रेड, पास्ता आदि बहुत जल्दी शुगर में बदल जाते हैं, जो शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज (Heart disease) का रिस्क बढ़ जाता है। तले हुए फूड्स अधिक तला भुला आहार भी बच्चों हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का कारण बन सकता है। बाजार में मिलने वाले तले भूने आहार को अक्सर बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल में बनाया जाता है। इससे एक्रिलामाइड्स और एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) जैसे हानिकारक कंपाउंड्स पैदा होते हैं, जिससे इंफ्लेमेशन की समस्या हो सकती है। इसलिए बच्चों को इनका सेवन करने से भी बचना चाहिए। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले आइसक्रीम  आइसक्रीम में चीनी, कैलोरीज और सेचुरेट फैट्स अधिक होते हैं। अधिक चीनी और फैट युक्त आहार से भी वजन बढ़ता है। यही नहीं इससे हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart problems) का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए इसका सेवन करने से भी बचना चाहिए। अब यह तो आप समझ ही गए होंगे कि हार्ट एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए (According to heart experts what things children should not consume)? इसलिए बच्चों हार्ट डिजीज (Heart disease) से बचाने के लिए उन्हें बाजार में मिलने वाले खाने की जगह घर पर बना आहार खाने को दें। उनके आहार में फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज आदि शामिल करें। बच्चे के वजन को सही बनाए रखें और इसके साथ ही बच्चों का भी रूटीन चेक-अप कराएं।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Heart problems #KidsHealth #HeartExpertsTips #HarmfulFoodsForKids #HealthyParenting #ChildNutrition #AvoidTheseFoods #UnhealthySnacks

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IIT Bombay Research Finds New Diabetes

आईआईटी बॉम्बे की रिसर्च: डायबिटीज का नया कारण है शरीर में मौजूद कॉलेजन प्रोटीन

डायबिटीज (Diabetes) वो गंभीर रोग है, जिसमें हमारा शरीर ब्लड शुगर को सही से रेगुलेट नहीं कर पाता। इस वजह से शरीर में ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि हमारा पैंक्रियाज पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बना पाता है या इसका सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण शरीर के कई अंगों को बहुत नुकसान होता है खासतौर पर हमारे हार्ट. नर्वज, किडनी आदि को। डायबिटीज के बारे में हुए एक नए शोध के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के कारण डायबिटीज (Diabetes) का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में और पाएं जानकारी इस शोध के बारे में। कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में क्या कहती है स्टडी? डायबिटीज के दौरान पैंक्रियाज के बीटा सेल्स धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। यह बीटा सेल्स इंसुलिन का निर्माण करते हैं। वहीं, एमेलिन उस हॉर्मोन को कहा जाता हैं जो इंसुलिन के साथ मिलकर ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करता है। लेकिन, डायबिटीज (Diabetes) की स्थिति में एमेलिन मॉलिक्यूल गलत तरीके से फोल्ड हो जाते हैं और एक दूसरे से चिपकने लगते हैं। इसकी वजह से सेल्स के लिए टॉक्सिसिटी बढ़ती है। हाल ही में आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए शोध से यह पता चला है कि पैंक्रियाज के एक्सटर्नल मैट्रिक्स में पाया जाने वाले कोलेजन I एमेलिन कोगुलेशन यानी जमाव को बढ़ाता है। इससे बीटा सेल्स को नुकसान होता है और डायबिटीज (Diabetes) की समस्या बढ़ती है। कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध के बारे में स्टडी का निष्कर्ष संक्षेप में कहा जाए तो आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए शोध में यह पता चला है कि एमेलिन और कोलेजन (Collagen) के बीच के इस कनेक्शन से डायबिटीज (Diabetes) की समस्या बढ़ सकती है। इससे कोलेजन प्रोटीन और डायबिटीज के बीच में संबंध (Connection between collagen protein and diabetes) के बारे में भी पता चलता है। इससे यह भी निष्कर्ष निकलता है कि डायबिटीज के इलाज के लिए नए इलाज के तरीकों की आवश्यकता है ताकि इस समस्या से बचा जा सके। इसलिए शोधकर्ता अब एमेलिन और कोलेजन (Collagen) के बीच के कनेक्शन को समझने के लिए क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी मॉडल को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही वो पैंक्रियाज को रिपेयर करने के नए तरीके भी ढूंढ रहे हैं। आइए जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) से बचाव करने के लिए आप क्या कर सकते हैं? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले डायबिटीज से बचाव के बारे में जानें डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए हमें कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Diabetes #IITBombay #DiabetesResearch #CollagenProtein #HealthNews #MedicalBreakthrough

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Jamun Seed Powder

जामुन बीज का पाउडर: एक प्राकृतिक उपाय जो करेगा इन 6 बीमारियों को दूर और रखेगा आपको स्वस्थ

फलों में कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं और हेल्थ के लिए इनका सेवन बेहतरीन माना गया है। ऐसा ही एक फल है जामुन (Jamun), जो गर्मियों में आता है। इसका रंग ही नहीं बल्कि स्वाद भी सबसे अलग होता है। इस फल को खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है इसीलिए इसे सुपरफूड भी कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जामुन की गुठली यानी बीज भी इस फल के जितना ही फायदेमंद होता है? ऐसा माना जाता है कि जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) का रोजाना खाली पेट सेवन करना बहुत लाभदायक है। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार जामुन (Jamun) में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स आयरन और विटामिन सी आदि भी होते हैं। इससे शरीर का फ्री रेडिकल्स से बचाव होता है और इसके कई अन्य बेनिफिट्स भी हैं। आइए जानें जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में।  डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहतरीन जामुन के बीज के पाउडर का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए मदद कर सकता है। इसलिए, डायबिटीज के रोगियों के लिए इसे खासतौर पर फायदेमंद माना गया है। इन बीजों में कुछ कंपाउंड्स पाए जाते हैं जैसे जाम्बोलिन और जाम्बोसाइन। यह कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं और इंसुलिन सेक्रेशन को स्टिमुलेट करते हैं। जामुन (Jamun) के फल को भी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद माना गया है।  पाचन को सुधारे जामुन (Jamun) और जामुन के बीजों में फाइबर होता है, जो पेट के लिए फायदेमंद है। इससे पाचन क्रिया सही रहती है और कई समस्याओं से भी राहत मिल सकती है जैसे एसिडिटी और गैस आदि। वजन को रखे रही अगर आप वजन को मैनेज करना चाहते हैं तो आपको जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) रोजाना सुबह खाली पेट लेना चाहिए। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और भूख कम लगती है। इससे वजन कम होने और इसे सही बनाए रखने में मदद मिलती है। दिल के लिए फायदेमंद जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) खाने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल सही रहने में मदद मिलती है। इससे हार्ट हेल्थ में सुधार होता है और दिल की समस्याओं से बचाव हो सकता है। दिल ही नहीं बल्कि मुंह, स्किन और लिवर के स्वास्थ्य के लिए भी जामुन के बीज को लाभदायक पाया गया है। इम्युनिटी को करे बूस्ट इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए इस प्राकृतिक कंपाउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इम्युनिटी के मजबूत होने से शरीर का कई बीमारियों और इंफेक्शंस से बचाव होता है।  इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले आर्थराइटिस में फायदेमंद जामुन (Jamun) और जामुन बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder) एंटी-अर्थरिटिक इफेक्ट युक्त होता है। इनके सेवन से ब्लड में रेड ब्लड सेल्स की संख्या, हीमोग्लोबिन लेवल और एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट में सुधार होता है।  इससे जॉइंट्स में सूजन और दर्द कम होने में मदद मिलती है। यानी अर्थराइटिस के रोगियों के लिए यह फायदेमंद है।  हालांकि इसके बारे में अधिक शोध करना अभी जरूरी है।  यह तो थी जानकारी जामुन बीज पाउडर के बेनिफिट्स (Benefits of Jamun Seed Powder) के बारे में। लेकिन, अपनी डायट में इसे शामिल करने से पहले डॉक्टर से बात अवश्य करें, खासतौर पर अगर आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है या आप किसी तरह की दवाईयां ले रहे हैं। अगर बात की इसके साइड-इफेक्ट्स के बारे में तो इसमें फाइबर बहुत अधिक होता ,है ऐसे में इसे लेने के बाद लोग गैस या ब्लोटिंग की समस्या अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Jamun Seed Powder #jamunseedpowder #naturalremedy #ayurvedichealth #immunitybooster #diabetescontrol #jamunbenefits

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