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AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman

Bihar Assembly Election 2025: क्या है AIMIM की नई रणनीति और तीसरे मोर्चे की तैयारी?

जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) का समय करीब आ रहा है, राज्य का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी  तैयारी में जुट गए हैं और इसी कड़ी में अब असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने एक नई सियासी चाल चली है। AIMIM ने बिहार में फिर से राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें शुरू कर दी हैं और यह साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार कोई बड़ा दांव खेलने को तैयार है। महागठबंधन को दिया प्रस्ताव AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि उन्होंने करीब 15 दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और वाम दलों (Wam Dal) को एक प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि बिहार के हित में खासकर युवाओं और सामाजिक दृष्ट्रिकों से यह कदम उठाया गया है। अख्तरुल ईमान ने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन 2020 के चुनाव में हासिल सीटों और प्रदर्शन के आधार पर कोई फॉर्मूला तय किया जा सकता है। गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) में महागठबंधन ने कुल 112 सीटें जीती थीं, जबकि AIMIM ने 20 में से 5 सीटें अपने नाम की थीं। तीसरे मोर्चे की अटकलें तेज हालांकि AIMIM की ओर से महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर गठबंधन में उन्हें जगह नहीं मिली, तो वे तीसरे मोर्चे का विकल्प भी तलाश सकते हैं। अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने बताया कि कुछ अन्य दलों से बातचीत चल रही है, हालांकि उन्होंने इन दलों के नामों का खुलासा नहीं किया। यह संकेत इशारा करता है कि बिहार की राजनीति में एक नया मोर्चा उभर सकता है जो न तो एनडीए (NDA) का हिस्सा होगा और न ही महागठबंधन (UPA) का। AIMIM का यह रुख संभावित सहयोगी दलों के साथ एक अलग सेक्युलर फ्रंट खड़ा करने की मंशा दर्शाता है। वोटर लिस्ट पर सवाल और NRC का डर AIMIM ने चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा की जा रही वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया NRC जैसी है, जिसके जरिए दलित, महादलित और अल्पसंख्यकों को सूची से हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि AIMIM का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराएगा। AIMIM का बिहार में राजनीतिक दखल 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) से खासा बढ़ा है। उस चुनाव में पार्टी ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट के तहत 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह सीटें बिहार के सीमांचल क्षेत्र से थीं, जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है। पार्टी को कुल 5.23 लाख वोट मिले थे और उसका वोट शेयर लगभग 1.3% रहा था। हालांकि चुनाव के बाद AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी को झटका लगा था। लेकिन इस बार पार्टी फिर से सीमांचल को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। AIMIM और पुराने सहयोगी दल 2020 में AIMIM ने जिन दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी जनता दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल थे। आज इनमें से कई दल एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि कुछ ने खुद को नए राजनीतिक स्वरूप में ढाल लिया है। उदाहरण के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा अब राष्ट्रीय लोक मंच बनाकर एनडीए में शामिल हैं, जबकि ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी एनडीए के साथ है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में AIMIM की सक्रियता और उसकी रणनीतिक पहल यह दर्शाती है कि पार्टी इस बार निर्णायक भूमिका निभाने की मंशा रखती है। महागठबंधन से प्रस्ताव स्वीकार नहीं होने की स्थिति में तीसरा मोर्चा बनाना AIMIM के लिए एक बड़ा राजनीतिक कदम हो सकता है, जिससे बिहार की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। जहां एक ओर AIMIM भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिलाने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर वह अपने सीमांचल प्रभाव का इस्तेमाल कर एक स्वतंत्र शक्ति बनकर उभरना चाहती है। आने वाले हफ्ते और महीने यह तय करेंगे कि यह रणनीति AIMIM को चुनावी फायदे दिलाएगी या फिर सियासी नुकसान। लेकिन एक बात तो तय है कि इस बार बिहार की राजनीति में AIMIM एक बार फिर से सुर्खियों में है। Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman #BiharAssemblyElection2025 #AssemblyElection #AIMIM #AsaduddinOwaisi #AkhtarulIman

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MP Chandrashekhar Azad Issues Warning

Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat: इस वजह से भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मचाया उत्पात, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दी धमकी 

दिन रात संविधान की दुहाई देने वाले नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने इटौसी गांव जाने से क्या रोका, उनके कार्यकर्ताओं ने संविधान और कानून को हाथ में लेते हुए जमकर तोड़फोड़ की। दरअसल, इटौसी गांव के देवीशंकर नामक व्यक्ति की 13 अप्रैल को आग से झुलसकर मृत्यु हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि देवीशंकर की जलाकर हत्या की गई (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) है। जानकारी के मुताबिक नगीना से सांसद चंद्रशेखर पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे थे और वह सर्किट हाउस पहुंचे थे। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें इटौसी गांव जाने से रोक दिया। इसके अलावा कौशांबी में रेप पीड़ित मासूम बच्ची के घर भी जाने नहीं दिया। फिर क्या था गांव जाने से पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पाद मचाया। और पुलिस के दो वाहनों में तोड़फोड़ की।  सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, कठोर कार्रवाई की जाएगी- डीसीपी यमुना नगर विवेक चंद्र यादव  इस पूरे मामले पर डीसीपी यमुना नगर विवेक चंद्र यादव ने बताया कि “करछना तहसील के इटौसी गांव में सांसद चंद्रशेखर के आने की सूचना थी, जिसको लेकर पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इकट्ठा (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) थे तथा कार्यकर्ताओं को अपने नेता के नहीं आने की जानकारी मिलने पर कार्यकर्ताओं ने पथराव शुरू कर दिया। डीसीपी ने बताया कि “भीड़ द्वारा डायल 112 नंबर की गाड़ी और एक अन्य गाड़ी को क्षतिग्रस्त किया गया।” डीसीपी ने आगे कहा कि “उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया। स्थिति को काबू में करने के लिए कई थानों की फोर्स को तैनात किया गया। स्थानीय लोगों की मदद से भी स्थिति को कंट्रोल किया गया। उपद्रव करने वालों की पुलिस पहचान कर रही है। सीसीटीवी, वीडियो और फोटो के जरीए उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। कठोर कार्रवाई की जाएगी।  मैं नहीं जानता कि पुलिस ने वहां क्यों नहीं जाने (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) दिया- नगीना सांसद आजाद ने कहा कि “मैं कल प्रयागराज गया था। मैं वहां हमारी पाल समुदाय की बेटी के लिए न्याय मांगने गया था, लेकिन पुलिस ने मुझे इलाहाबाद सर्किट हाउस में रखा। मैं नहीं जानता कि पुलिस ने वहां क्यों नहीं जाने (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) दिया। मैंने कहा कि अगर आप मुझे वहां नहीं जाने दे रहे हैं तो कम से कम उनके परिजनों से बात करने दें। मेरा मानना है कि पुलिस और प्रशासन ने ऐसे अपराध किए और उनको छिपाने के लिए मुझे वहां जाने के लिए रोका। प्रयागराज में भड़की हिंसा के मामले में सांसद ने कहा कि “हमारे कार्यकर्ता, संविधान में विश्वास रखते हैं और वह हिंसा में शामिल नहीं होते। आज लोगों के लिए यह सामान्य बात हो गई है कि वह नीला पटका पहन कर घूमते हैं। मैं इस मामले में सीबीआई की जांच की मांग करता हूं। अगर सरकार, पुलिस या प्रशासन किसी को जानबूझकर निशाना बनाएगा, तो हम शांत नहीं बैठेंगे और लखनऊ में बड़ा आंदोलन करेंगे।”  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन जब तक प्रशासन पीड़ित परिवार से मिलने नहीं देगा तब तक प्रयागराज छोड़कर नहीं (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) जाऊंगा नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि “जब तक प्रशासन उनको पीड़ित परिवार से मिलने नहीं देगा और गिरफ्तार किए हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ा नहीं जाएगा तब तक वो प्रयागराज छोड़कर नहीं (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) जाएंगे।” पार्टी के मुताबिक आज बवाल शुरू होने की बड़ी वजह चंद्रशेखर आजाद को प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर कौशांबी में रेप पीड़ित मासूम बच्ची के घर जाने नहीं दिया। इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त हंगामा किया। वहीं प्रयागराज में भीम आर्मी के बवाल पर कांग्रेस नेता अजय राय ने टिप्पणी की। मीडिया से बातचीत में अजय राय ने कहा कि “यह सरकार की मिली भगत है। चंद्रशेखर आजाद को जाने देना चाहिए। हम भी अपने सांसद के साथ वहां पर गए थे। पूरा सहयोग किया गया। सरकार ने जानबूझकर प्रवोग किया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news  MP Chandrashekhar Azad #bhimarmy #chandrashekharazad #dalitrights #naginaprotest #azadthreat #bhimprotest

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BJP leader Sudhanshu Trivedi asserts

हम संविधान को कुड़ेदान में फेंकने नहीं देंगे: सुधांशु त्रिवेदी

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत भी गरमाती जा रही है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हाल ही में आयोजित एक बड़ी रैली ने इस राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। यह रैली वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) के खिलाफ आयोजित की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो वे इस कानून को प्रदेश में लागू नहीं होने देंगे और उसे कूड़ेदान में फेंक देंगे। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया है। तेजस्वी का एलान और सियासी संदेश RJD नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) को मुस्लिम समुदाय की जमीन और अधिकारों पर हमला बताते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने मंच से कहा कि यह कानून प्रदेश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और उनकी पार्टी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। तेजस्वी ने इसे धर्मनिरपेक्षता और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। तेजस्वी यादव के इस बयान को न सिर्फ उनके मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक दांव के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे वे NDA के खिलाफ एक मज़बूत सेकुलर गठबंधन का नेतृत्व करना चाहते हैं। भाजपा का पलटवार: संविधान और संसद का अपमान? भाजपा ने इस बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी (Dr. Sudhanshu Trivedi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी के बयान को संविधान और संसद का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जिस गांधी मैदान में कभी लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाखों लोगों ने आंदोलन किया था, उसी जगह अब संविधान के विरुद्ध बयानबाजी हो रही है। सुधांशु त्रिवेदी (Sudhanshu Trivedi) ने कहा है कि तेजस्वी यादव ने संसद से पारित एक कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कहकर न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है, बल्कि न्यायपालिका और संविधान का भी अनादर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ शब्द कुरान में नहीं है और यह एक बाद की व्याख्या है, जिसे मौलवियों और मुल्लाओं द्वारा गढ़ा गया है। उनके अनुसार इस्लाम देने और ज़कात की बात करता है, न कि संपत्ति इकट्ठा करने की। वक्फ कानून का संदर्भ वक्फ एक इस्लामिक व्यवस्था है, जिसके तहत मुसलमान अपनी संपत्ति को धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य के लिए दान करते हैं। भारत में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए वक्फ बोर्ड (Wakf Amendment Act)  बनाए गए हैं और समय-समय पर इनसे संबंधित कानूनों में संशोधन होते रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन विरोधी दलों का आरोप है कि इससे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ेगा और अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन होगा। नमाजवाद बनाम समाजवाद भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (BJP Spokesperson Sudhanshu Trivedi) ने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे समाजवाद की बात नहीं कर रहे, बल्कि नमाजवाद का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी बिहार में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं? उन्होंने वक्फ प्रणाली को समाजवाद के विरोध में बताते हुए कहा कि यह कुछ लोगों को सारी संपत्तियों पर कब्जा करने का अधिकार देता है, जो सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन चुनावी रणनीति या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण? इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से जोड़कर देख रहे हैं। तेजस्वी यादव का यह बयान उन्हें मुस्लिम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बना सकता है, लेकिन साथ ही यह भाजपा को भी मौका देता है कि वह धर्म और संविधान के मुद्दे को केंद्र में रखकर अपने कोर वोट बैंक को सक्रिय करे। यह पूरा विवाद आने वाले चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति को और तेज कर सकता है। वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) पर तेजस्वी यादव और भाजपा के बीच टकराव ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। जहां एक तरफ तेजस्वी इसे अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला मान रही है। यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि चुनावी बहस का भी केंद्र बनेगा। बिहार का मतदाता अब देखेगा कि सियासी दल धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Wakf Amendment Act #SudhanshuTrivedi #Constitution #BJP #IndianPolitics #ParliamentDebate #PoliticalNews

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Maharashtra Govt Scraps Old Language Policies

3-Language Policy: महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में पहले जारी किए गए दोनों सरकारी आदेश (GR) 16 अप्रैल 2025 और 17 जून 2025 के फैसले को अब औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Dy. CM Eknath Shinde) और अजित पवार (Ajit Pawar) भी मौजूद थे। यह फैसला राज्य में तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर बढ़ते विरोध और भ्रम की स्थिति के बाद लिया गया है। तीन भाषा नीति (3-Language policy) पर बढ़ता विवाद दरअसल, महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने 16 अप्रैल 2025 को एक सरकारी आदेश जारी किया था, जिसके अंतर्गत अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों (English and Marathi Medium School) में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाना अनिवार्य किया गया था। इस निर्णय के खिलाफ विभिन्न शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने विरोध दर्ज किया था। उनका तर्क था कि इससे मराठी भाषा (Marathi Language) और स्थानीय संस्कृति पीछे छूट सकती है। शिवसेना यूबीटी (Shivsena-UBT), एमएनएस (MNS), एनसीपी-एसपी (NCP-SP) और अन्य राजनीतिक पार्टियां एकजुट होकर विरोध कर रही हैं। वहीं राजनीतिक पार्टियों द्वारा किये जा रहे विरोध को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 17 जून को दूसरा सरकारी आदेश जारी कर हिंदी को वैकल्पिक भाषा बना दिया, लेकिन इससे स्थिति साफ होने के बजाय और अधिक जटिल हो गई। कई स्कूलों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई कि कौन-सी भाषा अनिवार्य है और कौन-सी वैकल्पिक। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कहा है कि हम मराठी केंद्रित और मराठी छात्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देने वाली भाषा नीति बनाएंगे। इस मुद्दे को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर तीन भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, वर्तमान सरकार का मानना है कि भाषा नीति पर ऐसा कोई भी फैसला व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के बिना लागू नहीं किया जा सकता। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? नई समिति का गठन राज्य सरकार ने इस विषय पर समीक्षा की और भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति त्रिभाषा सूत्र पर अध्ययन करेगी, राज्य के सभी वर्गों के विचारों को ध्यान में रखेगी और सरकार को एक सर्वमान्य रिपोर्ट सौंपेगी। डॉ. नरेंद्र जाधव इस क्षेत्र में अनुभव रखते हैं और नीति विशेषज्ञ हैं। वे पहले भी शिक्षा और सामाजिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण नीतिगत सलाह दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में बनी यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि भाषा नीति (Language policy) बच्चों की शिक्षा में सहायक हो, न कि बाधा। मराठी भाषा को प्राथमिकता महाराष्ट्र की नई नीति का फोकस मराठी भाषा (Marathi Language) को सुदृढ़ करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मराठी भाषा राज्य की आत्मा है और इसे शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक स्थान दिया जाएगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को अन्य भाषाओं के ज्ञान से भी वंचित न किया जाए। त्रिभाषा नीति (3-Language policy )का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई दृष्टि से समृद्ध बनाना है, लेकिन यह तभी संभव है जब नीति क्षेत्रीय आवश्यकताओं और सामाजिक संवेदनशीलता के अनुरूप बनाई जाए। महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) का यह फैसला भाषा नीति पर एक संतुलित और सोच-समझकर उठाया गया कदम माना जा सकता है। जहां एक ओर इससे मराठी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा होती है, वहीं दूसरी ओर नई समिति के गठन से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भाषा नीति विद्यार्थियों के हित में हो। यह निर्णय राजनीति से ऊपर उठकर लिया गया है और इसका उद्देश्य राज्य की शैक्षिक नींव को मजबूत बनाना है। अब सबकी निगाहें डॉ. नरेंद्र जाधव समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो भविष्य की भाषा नीति (Language policy) का खाका तैयार करेगी। उम्मीद की जा सकती है कि यह नीति राज्य के बहुभाषिक समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #educationnews #3languagepolicy #governmentdecision #marathi #hindipolicy #englishpolicy

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Lalu Yadav land

‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

बिहार में इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव में उतर रही राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे को घेरने के साथ अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुटी है। इस बीच जदयू (JDU) ने घोषणा की है कि अगर राज्य में सरकार बनती है तो राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पटना के फुलवारीशरीफ में मौजूद जमीन को जब्त किया जाएगा। इस जमीन पर सरकारी खर्च पर घर बनाए जाएंगे और वो घर राज्य के भूमिहीन गरीब लोगों को दिया जाएगा।  यह घोषणा जदयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने फुलवारीशरीफ में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में कही। नीरज कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लालू परिवार जब भी सत्ता में आई, जनता को सिर्फ लूटने का कार्य किया। इस परिवार ने राज्य के गरीब लोगों को लूटकर पटना और इसके आसपास के इलाकों में करीब 40 एकड़ जमीन बनाई है। इनमें से 6 एकड़ जमीन तो सिर्फ फुलवारशरीफ में ही मौजूद है। नीरज कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद (Lalu Prasad) और उनका परिवार जनता को लूटकर पटना का सबसे बड़े शहरी जमींदार बन चुका है। लालू परिवार ने अपने पूरे शासनकाल में भ्रष्टाचार का केवल धन का ही अर्जन किया। इनकी सरकार के एजेंडे में जन कल्याण कभी नहीं रहा। बता दें कि नीरज कुमार राज्य कैबिनेट में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री भी रह चुके हैं। अभी वो विधान परिषद के सदस्य हैं।  कानून बनाकर ली जाएगी लालू परिवार की जमीन- नीरज  लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की जमीन को सरकार के अधीन कर उस पर गरीबों के लिए घर बनावाने की घोषणा जदयू की तरफ से किसी नेता ने पहली बार की है। नीरज के इस घोषणा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नीरज ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि लालू की जमीन का गरीबों को देने के लिए राज्य सरकार द्वारा बकायदा कानून लाया जाएगा। राजद (RJD) ने अपने 15 साल के शासन में गरीबों को खूब लूटा है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते भी लालू यादव ने नौकरी के बदले लोगों की जमीन हड़पी। अब समय आ गया है कि गरीब जनता को उनका हक वापस दिया जाए और यह काम हमारी सरकार करेगी।  राजद प्रवक्ता ने भी किया नीरज पर तीखा पलटवार   जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार के इस बयान पर राजद (RJD) ने तीखा पलटवार किया है। राजद के मुख्य प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जीत कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद नई सरकार बनाने जा रही है। जिसके बाद एनडीए शासनकाल के दौरान इनके सभी नेताओं का भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जांच होगी। जिन्होंने भी जनता और राज्य को लूटा है उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। चितरंजन गगन ने यह भी कहा कि नीरज कुमार जागते हुए सपना देख रहे हैं कि फिर से उनकी सरकार (Bihar Assembly Elections) बनने जा रही है। लेकिन सच यह है कि बिहार की जनता ने नीतीश सरकार को इस बार जड़ से उखाड़ फेकने का मन बना लिया है। इस सरकार में भ्रष्टाचार और अपराध जिस स्तर तक पहुंचा है, वह अपने आप में एक शर्मनाक रिकॉर्ड है। यह सरकार आम जनता का शोषण कर रही है और यह हमारी जनता भी अब समझ चुकी है। इनके सपने सिर्फ सपने ही रह जाएंगे।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? वोटर लिस्ट को लेकर बिहार का सियासी घमासान तेज  चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है। इसको लेकर भी यहां खूब हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष  दल इसे भाजपा का षडयंत्र बता इसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के साथ कानून लड़ाई लड़ने की बात कह रही हैं। महागठबंधन में शामिल पार्टियों का कहना है कि चुनाव आयोग के इस अभियान का मकसद विपक्ष के वोट को काटना है। इसके खिलाफ जल्द ही राजनीतिक अभियान शुरू किया जाएगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Prasad #LaluYadav #JDULeader #BiharPolitics #LandDispute #PoorHousingScheme #LaluFamily #PoliticalControversy

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rashtriya janata dal bihar

Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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BJP MLA scandal

BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct: बीजेपी नेत्री ने अपने ही विधायक पर लगाया समलैंगिकता और 13 वर्षीय नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप

वैसे तो भाजपा बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ और नारी सशक्तिकरण पर जोर देती नजर आती तो है, लेकिन धरातल स्थिति बिलकुल इसके विपरीत ही नजर आ रही है। पार्टी के नेता और विधायक इन नारों पर अमल करते नजर नहीं आते। ताजा मामला है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का, जहाँ भाजपा विधायक को लेकर हंगामा मचा हुआ है। दरअसल, भाजपा विधायक पर समलैंगिक होने के साथ ही 13 वर्षीय नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) लगा है। यह आरोप किसी विरोधी पार्टी की नहीं बल्कि भाजपा महिला मोर्चा नेता द्वारा लगाया गया है। यही नहीं, इसे लेकर बुलाई महापंचायत में पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। बता दें कि यह महापंचायत भाजपा महिला मोर्चा की नेता कोमल गुर्जर द्वारा गंगोह भाजपा विधायक कीरत सिंह गुर्जर के खिलाफ बुलाई गई थी। कोमल गुर्जर द्वारा बुलाई गई महापंचायत में दोनों पक्ष से बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे। पंचायत में दोनों पक्षों में जमकर बहस भी हुई। इस बीच मामला बिगड़ता देख पुलिस ने लाठी भांजनी शुरू कर दी। बड़ी बात यह कि बवाल बढ़ता देख इस महापंचायत के बाद भाजपा ने कोमल गुर्जर के खिलाफ एक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से निकाल दिया। जल्द ही पुख्ता सबूत सार्वजनिक (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) करुँगी- कोमल  कोमल ने विधायक पर उनके पति और परिजनों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “जल्द ही वह पुख्ता सबूत सार्वजनिक (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) करेंगी।” अब इन आरोपों को खारिज करते हुए विधायक कीरत ने सबूत दिखाने की चुनौती दी है। बता दें कि इससे पहले कोमल गुर्जर ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर कहा था कि “गंगोह विधायक के इशारे पर मेरे परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। मेरे पैर में टक्कर मारी गई। इसके बाद मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए।” यही नहीं, इसी वीडियो में उन्होंने महापंचायत बुलाई थी। वीडियो में उन्होंने कहा कि “इस पंचायत में वही आएं जो मेरे भाई हैं, चमचों की जरूरत नहीं है। भाजपा कहती है कि हम महिलाओं का सम्मान करते हैं। तो मेरा भी सम्मान है।” पंचायत में महिला के आरोपों को लेकर लोगों ने उलटे महिला पर ही नाराजगी (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) जताई खैर, भाजपा नेत्री कोमल के आरोपों के चलते ही 24 जून रंढेड़ी गांव स्थित बाबा घूमरा देव मंदिर परिसर में गुर्जर समाज की पंचायत हुई थी। गौर करने वाली बात यह कि इस पंचायत में महिला के आरोपों को लेकर लोगों ने उलटे महिला पर ही नाराजगी (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) जताई। पंचायत में वक्ताओं ने इसे साजिश और विधायक के खिलाफ षडयंत्र करार दिया। इसके बाद पंचायत में गुर्जर समाज लोगों भी 27 जून को पंचायत में पहुंचे। 24 जून की पंचायत में वक्ताओं ने विधायक कीरत के खिलाफ भाजपा के ही एक दूसरे नेता की साजिश बताते हुए मामले में सम्मानजनक समाधान की चेतावनी दी थी।  इसे भी पढ़ें:- मध्य प्रदेश में कर्ज चुकाने के लिए पत्नी को किया दोस्त के हवाले, दोस्त ने लूटी इज्जत कोमल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गंगोह विधायक की छवि को नुकसान पहुंचाया है मामला यहीं ठंडा नहीं हुआ। इसके बाद शहरी पुल स्थित रमेश पंवार घसौती के यहां गुर्जर समाज की पंचायत हुई। इस पंचायत में वक्ताओं ने विधायक के खिलाफ कोमल के आरोपों पर रोष जताया। सामाजिक नेताओं ने कहा कि “अगर शिकायत थी भी तो संगठन के सामने अपनी बात रखते। सोशल मीडिया पर समाज के नेता की छवि धुमिल करने पर की क्या जरूरत (BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct) थी? नेत्री के बवाल के बाद इस मामले में रामपुर मनिहारान क्षेत्र के उमाही कलां गांव निवासी सुधीर कुमार ने महिला कोमल चौधरी के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। सुधीर कुमार ने अपनी शिकायत में कहा कि “कोमल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गंगोह विधायक की छवि को नुकसान पहुंचाया है।” Latest News in Hindi Today Hindi BJP MLA Accused of Minor Abuse & Homosexual Misconduct #bjp #mla #minorabuse #homosexualmisconduct #politics #breakingnews #bjpcontroversy #sexualabusecase #indianpolitics

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Kanhaiya Kumar Reveals CM Face

Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar: कन्हैया कुमार ने बता दिया कौन होगा महागठबंधन से बिहार का मुख्यमंत्री?

इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा, इसको लेकर कांग्रेस ने तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। दरअसल, 27 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि “महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव के प्रमुख चेहरा होने को लेकर कोई असमंजस और विवाद (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) नहीं है।” उन्होंने कहा कि “विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के जीतने पर सबसे बड़े घटक दल के रूप में राष्ट्रीय जनता दल का नेता ही स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक साजिश के तहत इनसे ध्यान भटकाने के लिए बार-बार चेहरे की बात की जा रही है।  बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) में है कन्हैया कुमार ने कहा कि “मेरे खयाल से पिछली बार भी बदलाव का माहौल था। थोड़े अंतर से महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई। पिछले पांच वर्षों से बिहार की जो स्थिति है, उससे लगता है कि इस बार बदलाव की हवा पहले से कहीं  ज्यादा मजबूत है।” इस दौरान कन्हैया कुमार ने दावा किया (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) कि “बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश में है।” उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं है कि वे नीतीश जी के अस्वस्थ होने पर यह कोशिश कर रहे हैं। वह पहले भी प्रयास कर चुके हैं। भाजपा पिछले कई दशकों से बिहार में वही करना चाहती है जो दूसरी जगह करने में सफल रही है। मतलब पहले क्षेत्रीय दल का साथ पकड़ो और फिर धीरे-धीरे उसे निगल जाओ। बिहार में ऐसा न कर पाने की वजह से बीजेपी नीतीश का साथ लेने को मजबूर हुई।” सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है  सीएम के सवाल पर कन्हैया ने कहा कि “सीएम कौन बनेगा, इस जनता तय करती है, जिनके पास संख्या बल होगा, वह सीएम बनेगा। आरजेडी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी। संख्या बल उसके पास होगा। सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं है। इसे लेकर एनडीए में (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इस चुनाव में नीतीश चेहरा होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में चेहरा महत्वपूर्ण नहीं होता, मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।” बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि “सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर सीएम फेस के नाम पर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के मामले को उठाकर ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने नेता को बिहार में स्थापित करेगी। बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। वह एनडीए सरकार के छल को समझ चुकी है। संविधान विरोधी लोगों को जनता पसंद नहीं करती है।” इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है बता दें कि बिहार में इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है। इस गठबंधन में वाम दलों के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। उसका मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से है। एनडीए में बीजेपी, नीतीश कुमार की जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (आर), जीतन राम मांझी की हम, और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम शामिल है। गौरतलब हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 प्रतिशत की सफलता दर से 75 सीटें हासिल की थी तो वहीं कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसमे से सिर्फ 19 सीटें जीती थीं। इसके आलावा भाकपा (माले) लिबरेशन ने 19 सीट पर चुनाव लड़ा और 12 पर जीत हासिल की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस इस बार भी पिछली बार इतनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन राजद इस बार उसे उतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। फिर भी कांग्रेस इस बार ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar #kanhaiyakumar #biharpolitics #mahagathbandhan #biharcmface #2025elections #cmcandidate

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CM Mohan Yadav convoy halted

CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed: सीएम मोहन यादव के काफिले की गाड़ियां अचनाक हुईं बंद, इस वजह से पेट्रोल पंप हुआ सीज

क्या हो यदि आप पेट्रोल पंप से डीजल भरवाएं और कुछ दूरी पर जाने के बाद अचानक से आपकी गाड़ी बंद पड़ जाए? निश्चित आप इसे तकनीकी खरीब समझकर धक्का मारने पर मजबूर होंगे। ये तो बात रही आम इंसान की। यही घटना अगर सूबे के मुख्यमंत्री के साथ हो तो? निश्चित ही सरकारी अमले में हड़कंप मचना तय है। दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में शामिल एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां अचानक रास्ते में बंद हो गईं। पहले तो मामला तकनीकी खराबी का लगा, लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि इन गाड़ियों में पानी मिला डीजल भरा गया था। सीएम के दौरे को देखते हुए प्रशासन को सीएम काफिले के लिए तत्काल इंतजाम करना (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पड़ा। सीएम काफिले के लिए इंदौर से गाड़ियों का दूसरा रैक भेजा गया। मुख्यमंत्री मोहन आज रतलाम के पोलो ग्राउंड में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड इम्पलॉयमेंट कॉन्क्लेव 2025 में शिकरत करेंगे। जानकारी के मुताबिक, इन सभी वाहनों में डोसीगांव स्थित पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया गया था। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया है और ईंधन के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।  चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार शाम सीएम मोहन के रतलाम दौरे से पहले रतलाम के लिए रवाना हुईं सीएम काफिले की 19 गाड़ियों ने एक पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया था। मुख्यमंत्री का काफिला रतलाम जा रहा था, लेकिन चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं, जिससे चालकों का गाड़ियों से उतरकर धक्का लगाना पड़ गया। आशंका जताई जा रही है कि गईं कि पेट्रोल पंप का डीजल मिलावटी होने के कारण काफिले की गाड़ियां बंद पड़ गई। सीएल काफिले की 19 गाड़ियों के अचानक बंद होने की सूचना मिलते ही जिले में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने आनन-फानन में उस पेट्रोल पंप को सील कर दिया, जहां से काफिले की गाड़ियों में तेल भऱवाया गया था। बता दें कि डीजल में मिलावट की पुष्टि की है, जिसके बाद प्रशासन ने पेट्रोल पंप के खिलाफ एक्शन लिया। गौरतलब है मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव आज रतलाम दौरे पर है। सीएम मोहन दोपहर भोपाल से रतलाम पहुंच रहे हैं।   इसे भी पढ़ें:- हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान आया (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पानी  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच में यह बात पता चली है कि जिन गाड़ियों में 20 लीटर डीजल डलवाया गया था, उनमें से लगभग 10 लीटर पानी निकला है। सभी वाहनों में लगभग यह स्थिति (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) है। यही नहीं, एक ट्रक चालक ने भी 200 लीटर डीजल भरवाया था। वो भी थोड़ी दूरी पर ही बंद हो गया। प्रशासन की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि बारिश के चलते डीजल टैंक में पानी का रिसाव हो सकता है। फिलहाल, कलेक्टर और जिला प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच में जुट गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है। तहसीलदार ने कहा, काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान पानी आया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता जांचने के क्या इंतजाम हैं? क्या सच में आम लोगों को भी ऐसा ही मिलावटी ईंधन दिया जा रहा है? Latest News in Hindi Today Hindi news CM Mohan Yadav #cmMohanyadav #convoyhalted #petrolpumpsealed #madhyapradeshnews #fuelqualityissue

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Sharad Pawar says imposition of Hindi

हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी

हाल ही में देशभर में हिंदी भाषा (Hindi Language) को अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप अनिवार्य किये जाने पर सभी राजनीतिक पार्टियों की अपनी-अपनी सोच है। कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, तो कुछ इसका समर्थन। अब इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (NCP (SP) Sharad Pawar) का बड़ा बयान सामने आया है। शरद पवार ने न सिर्फ हिंदी के महत्व को स्वीकार किया, बल्कि यह भी समझाने की कोशिश की कि भाषा के सवाल पर संतुलन और संवेदनशीलता ज़रूरी है। हिंदी को पूरी तरह इग्नोर नहीं किया जा सकता शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि हिंदी को देश की एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में नकारा नहीं जा सकता। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी माना कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी (Sharad Pawar) है और इसे अनदेखा करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने इस विषय को भावनात्मक नहीं बल्कि तर्कसंगत तरीके से देखने की सलाह दी है। पांचवी कक्षा के बाद हिंदी अनिवार्य करने का सुझाव शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि पहली से चौथी कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने से बच्चों पर दबाव पड़ सकता है। उनके अनुसार इस उम्र में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चे अपनी मूल भाषा में मजबूत आधार बना सकें। उन्होंने यह सुझाव दिया कि पांचवीं कक्षा के बाद हिंदी को अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे बच्चे बिना मानसिक दबाव के हिंदी सीखने में सक्षम हो सकते हैं। महाराष्ट्र के लोग हिंदी विरोधी नहीं शरद पवार (Sharad Pawar) ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र के लोग हिंदी के विरोध में नहीं हैं। महाराष्ट्र की जनता अन्य भाषाओं के प्रति भी उतना ही स्नेह रखते हैं जितना मराठी के प्रति। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को लेकर जो विरोध दिखाई देता है, वह भाषा से अधिक राजनीतिक भावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ा है। ठाकरे परिवार की बातों पर गौर शरद पवार ने यह भी बताया कि उन्होंने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) दोनों की इस मुद्दे पर राय सुनी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के विचारों को समझना और उनका विश्लेषण करना ज़रूरी है। पवार ने यह संकेत दिया कि वह किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और एजेंडे को पूरी तरह से समझना चाहेंगे। राज ठाकरे के मोर्चे पर प्रतिक्रिया जब पवार से पूछा गया कि क्या वे राज ठाकरे के हिंदी-विरोधी मोर्चे में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी के बुलावे पर सिर्फ़ इसलिए शामिल नहीं हो सकते कि वह कोई बड़ा नेता है। यदि मुद्दा वाकई में जनहित का है और गंभीरता से उठाया गया है, तो ही वह उसका समर्थन करेंगे। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? सभी राजनीतिक दलों से समझदारी की अपील शरद पवार ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाज़ी या भावनात्मक बयानबाज़ी से बचें। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को थोपना या किसी भाषा को नीचा दिखाना देश की एकता और विविधता के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि भाषा संस्कृति से जुड़ी होती है और इस पर संवाद, समझ और सम्मान की ज़रूरत होती है। शरद पवार (Sharad Pawar) का बयान ऐसे वक्त में महत्वपूर्ण है जब देशभर में भाषायी पहचान और राष्ट्रीय एकता के सवाल पर बहस चल रही है। उनका दृष्टिकोण संतुलित, व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर है। भाषा का सवाल केवल शिक्षा या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और सांस्कृतिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में शरद पवार जैसे अनुभवी नेताओं की भूमिका इस बहस को सही दिशा देने में अहम हो सकती है। वैसे अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार (Central Government) इस दिशा में कोई नई नीति अपनाती है और क्या राज्य सरकारें इस पर सहयोग करती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sharad Pawar #sharadpawar #hindiimposition #languagepolitics #indianpolitics #hindidebate

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