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केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में हाई-वेव अलर्ट! समुद्री लहरों को लेकर 48 घंटे की चेतावनी

तिरुवनंतपुरम: केरल, दक्षिणी तमिलनाडु और लक्षद्वीप के तटीय इलाकों के लिए समुद्र की ऊंची लहरों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। INCOIS ने 19 और 20 अगस्त 2026 के लिए Swell Surge Warning जारी करते हुए तटीय और निचले इलाकों में समुद्री पानी के अचानक बढ़ने की चेतावनी दी है।  48 घंटे तक बना रहेगा खतरा INCOIS के मुताबिक दक्षिणी हिंद महासागर से आने वाली लंबी अवधि की तेज समुद्री लहरें केरल और दक्षिणी तमिलनाडु के तट तक पहुंच चुकी हैं। इनका असर 19 अगस्त की शाम से 20 अगस्त की शाम तक बने रहने की संभावना है।  इन लहरों के कारण निचले तटीय इलाकों में समुद्री पानी घुसने और स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। खासतौर पर हाई टाइड के दौरान खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।  मछुआरों और तटीय लोगों को सावधानी की सलाह अलर्ट वाले इलाकों में रहने वाले मछुआरों और तटीय आबादी को समुद्र की स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। INCOIS ने छोटे नावों को तट के बेहद करीब नहीं चलाने और नावों को सुरक्षित दूरी पर एंकर करने की सलाह दी है।  समुद्र तटों और नजदीकी समुद्री क्षेत्रों में पर्यटन एवं मनोरंजक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की सलाह भी दी गई है।  किन इलाकों में ज्यादा सतर्कता? केरल के सभी तटीय जिलों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। दक्षिणी तमिलनाडु के कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और रामनाथपुरम जैसे तटीय क्षेत्रों में भी हाई-वेव और Swell Surge का खतरा बताया गया है। लक्षद्वीप के तटीय इलाकों को भी चेतावनी के दायरे में रखा गया है।  समुद्र से दूर रहने की अपील प्रशासन और समुद्री एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि चेतावनी की अवधि में समुद्र के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचें। खासकर निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अचानक समुद्री पानी बढ़ने की स्थिति में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल 19 से 20 अगस्त तक का यह समुद्री अलर्ट तटीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों को स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक समुद्री चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। स्रोत: INCOIS, PTI, Indian Express, Onmanorama Jai Rashtra News

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शेयर बाजार में गिरावट! कच्चा तेल $91 के पार पहुंचा, Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 250-300 अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी 24,250 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की अवधि खत्म होने और तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 77,418.97 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 24,223.85 के आसपास शुरुआत की। बाद में निफ्टी 24,177 के करीब आ गया और बाजार में गिरावट और गहरी हुई। आईटी शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर प्रमुख गिरने वाले क्षेत्रों में रहा। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत बने हुए हैं। स्रोत: Reuters, NDTV, IIFL Jai Rashtra News

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति, कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। श्रावण के तीसरे सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़ बताया जा रहा है कि श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए अशोक धाम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर परिसर में भीड़ अचानक बढ़ गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बैरिकेडिंग टूटने की भी बात सामने आई लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच भीड़ काफी बढ़ गई थी। शुरुआती जानकारी में मंदिर की एक तरफ की बैरिकेडिंग टूटने के बाद कई लोगों के एक-दूसरे पर गिरने की बात सामने आई है। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मंदिर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है और मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका घटना अभी विकासशील स्थिति में है। शुरुआती रिपोर्टों में 6 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों का भी उल्लेख आया है। इसलिए फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। निष्कर्ष लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में श्रावण सोमवार के दौरान भारी भीड़ के बीच हुई इस त्रासदी ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति की वास्तविक वजह क्या थी। Source: PTI, The New Indian Express, The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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बाबा रामदेव का सरकार पर निशाना? सरकारी नौकरियों में ‘90-99% घोटाले’ का दावा, बोले—सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करना पड़ेगा

हरिद्वार: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और देश में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। सरकारी नौकरी के इंटरव्यू पर गंभीर आरोप रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनके मुताबिक, कई मामलों में पहले से तय कर लिया जाता है कि किस उम्मीदवार को नौकरी देनी है और बाद में चयन प्रक्रिया उसी के अनुसार आगे बढ़ती है। उन्होंने पैसे लेकर भर्ती और पक्षपात के भी आरोप लगाए। हालांकि, 90-99 प्रतिशत के इस आंकड़े के समर्थन में रामदेव ने कोई आधिकारिक आंकड़ा या दस्तावेज पेश नहीं किया है। इसलिए इसे उनके द्वारा लगाया गया आरोप/दावा ही माना जाना चाहिए। जाति और विचारधारा को लेकर भी सवाल रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर भर्ती में योग्यता के बजाय संगठन, विचारधारा, जाति और वर्ग जैसे कारकों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था को युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया। ‘नहीं सुधरे तो आंदोलन करना पड़ेगा’ रामदेव ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि वह अराजकता या हिंसक आंदोलन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर कथित गड़बड़ियों को दूर नहीं किया गया तो लोगों और युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है और उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है। शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल रामदेव ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, पानी, बिजली, शौचालय और किताबों की उपलब्धता को लेकर शिकायतों का जिक्र किया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना युवाओं के भविष्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। राजनीति में संवाद की अपील रामदेव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से राजनीतिक मतभेदों को दुश्मनी में नहीं बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारी है और देशहित में आपसी संवाद तथा सम्मान जरूरी है। क्या यह सीधे मोदी सरकार पर हमला था? रामदेव के बयान में सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर तीखे सवाल जरूर उठाए गए, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका मुख्य फोकस सरकारी नौकरी, इंटरव्यू, शिक्षा व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार पर था। इसलिए इसे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला बताने के बजाय सरकारी व्यवस्था पर रामदेव की आलोचना के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव के बयान ने सरकारी भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 90-99% घोटाले के उनके दावे और आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। हालांकि, उनके लगाए गए प्रतिशत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। Source: ABP News, NewsTak, Peoples Update जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री मोदी के तिरंगा बैज को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा, रंगों के क्रम पर उठे सवाल

नई दिल्ली: 15 अगस्त 2026 को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिधान पर लगे तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर/बैज को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके रंगों के क्रम को लेकर सवाल उठाए और इसे भारतीय तिरंगे से अलग बताया। क्या है पूरा मामला? स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक पोशाक के साथ एक रंगीन पॉकेट स्क्वायर पहना था। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि इसमें हरा, सफेद और केसरिया रंग जिस क्रम में दिखाई दे रहे थे, वह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के सामान्य क्रम से अलग था। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे आयरलैंड के झंडे से जोड़ते हुए टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर तंज कसा गया। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस प्रधानमंत्री की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों के बीच इस पॉकेट स्क्वायर को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे महज फैशन और डिजाइन का हिस्सा बताया, जबकि कुछ ने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम और सोशल मीडिया अभियान जोर पकड़ रहे हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान भी चर्चा में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की थी। उन्होंने देशवासियों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस को गर्व के साथ मनाने का आह्वान किया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के अपने परिधान पर दिखाई दिए तिरंगे रंगों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा ने राजनीतिक बहस का रूप ले लिया। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं कांग्रेस ने पॉकेट स्क्वायर के रंगों के क्रम को लेकर प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया और इसे आयरलैंड के झंडे से जोड़ते हुए सवाल उठाया। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस विवाद को अनावश्यक बताते हुए इसे केवल कपड़ों के डिजाइन से जुड़ा मामला बताया। निष्कर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर पहने गए तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर/बैज को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोगों ने इसके रंगों के क्रम पर सवाल उठाए, वहीं अन्य लोगों ने इसे राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय सामान्य परिधान का हिस्सा बताया। Source: Times of India, सोशल मीडिया पोस्ट जय राष्ट्र न्यूज़

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PM Modi ने युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े ऐलान किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए युवाओं और महिलाओं को लेकर कई बड़े ऐलान किए। प्रधानमंत्री के भाषण में रोजगार, AI skilling, competitive exams, innovation और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर विशेष जोर रहा। 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को Artificial Intelligence (AI) की training दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को तेजी से बदलती technology और future jobs के लिए तैयार करना है। सरकार का फोकस युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय AI और emerging technologies में practical skills देने पर रहेगा। Competitive Exams के लिए Free Online Coaching प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए free online coaching की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि competitive examinations की तैयारी में coaching का खर्च गरीब और middle-class परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालता है। नई व्यवस्था के जरिए युवाओं को बिना फीस के online preparation resources उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा खास तौर पर उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है जो महंगी coaching के कारण बेहतर तैयारी नहीं कर पाते। युवाओं के Ideas और Innovation को मिलेगा Push PM Modi ने युवाओं से बड़े सपने देखने और अपने innovative ideas को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के initiative का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य ambitious ideas, innovation और research को समर्थन देना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसाधनों की कमी युवाओं के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। Sports Talent Hunt भी शुरू करने का ऐलान युवाओं और बच्चों के लिए सरकार ने nationwide sports talent hunt की दिशा में भी बड़ा कदम बताया। इस initiative के तहत 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में sports talent की पहचान करने और उन्हें आगे training देने पर जोर रहेगा। लक्ष्य भविष्य के Olympic-level athletes तैयार करना है। महिलाओं के लिए 33% राजनीतिक आरक्षण पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं के लिए 33% reservation से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की। प्रस्ताव का उद्देश्य Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर साथ आने की अपील करते हुए कहा कि वे इस ऐतिहासिक बदलाव का श्रेय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। महिलाओं की भागीदारी को विकास से जोड़ा PM Modi ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। महिलाओं को केवल welfare schemes की beneficiary के रूप में नहीं, बल्कि economic growth, entrepreneurship, leadership और nation-building की active partners के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। Youth को बनाया Independence Day Speech का केंद्र इस साल के भाषण में युवाओं का उल्लेख विशेष रूप से prominent रहा। एक रिपोर्ट के अनुसार PM Modi ने अपने भाषण में youth-related शब्दों का 52 बार इस्तेमाल किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार की आगामी विकास रणनीति में युवाओं को केंद्रीय भूमिका दी जा रही है। Jobs और Manufacturing पर भी जोर प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए manufacturing, MSMEs, startups और technology sectors को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि भारत में उत्पादन बढ़ने से नए employment opportunities पैदा होंगे और युवा देश की economic growth के प्रमुख भागीदार बनेंगे। ‘Viksit Bharat’ के लक्ष्य से जुड़े ऐलान इन घोषणाओं को प्रधानमंत्री ने Viksit Bharat @2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा। AI skills, free coaching, innovation, sports और women’s representation जैसे मुद्दों को education, employment और national development के साथ जोड़कर पेश किया गया। युवाओं के लिए घोषणाओं का महत्व इन ऐलानों का सीधा असर लाखों छात्रों और job seekers पर पड़ सकता है। मुख्य लाभों में शामिल हैं: महिलाओं के लिए राजनीतिक भागीदारी का बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री की अपील ने इसे Independence Day के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेशों में शामिल कर दिया है। यदि प्रस्ताव को पर्याप्त राजनीतिक समर्थन मिलता है, तो इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकता है। निष्कर्ष PM Modi के Independence Day 2026 संबोधन में युवा और महिला सशक्तिकरण दो महत्वपूर्ण themes के रूप में सामने आए। एक ओर 1 करोड़ युवाओं को AI training, free online coaching, innovation funding और sports talent hunt जैसे initiatives पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से महिलाओं के 33% reservation का समर्थन करने की अपील की। इन घोषणाओं को सरकार के Viksit Bharat @2047 vision का हिस्सा बताया गया है, जिसमें युवा भारत की technology और economic strength के केंद्र में होंगे और महिलाओं की भागीदारी को development तथा governance दोनों में बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। Source: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अगस्त 2026 का Independence Day address और आज प्रकाशित ताजा रिपोर्ट्स। Original Report: PM Modi ने Independence Day speech में युवाओं के लिए AI training और free competitive-exam coaching तथा महिलाओं के लिए 33% political reservation को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं और अपील की। Jai Rashtra News

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छात्राओं का आक्रोश! स्कूल 15 किलोमीटर दूर किया तो छात्राओं ने घेरा कलेक्टर कार्यालय

[स्थान]: स्कूल को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले की तरह नजदीक रखने या उनके लिए सुविधाजनक वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की। स्कूल दूर होने से बढ़ी परेशानी छात्राओं का कहना है कि स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने से रोजाना आने-जाने में काफी परेशानी होगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए लंबी दूरी तय करना सुरक्षा, समय और परिवहन से जुड़े सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कहा कि स्कूल की दूरी बढ़ने से कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और कुछ छात्राओं को शिक्षा छोड़ने जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने स्कूल को दूर किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। छात्राओं ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा तक पहुंच आसान होना चाहिए, न कि विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा करने वाला। परिवहन सुविधा की मांग प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और उनके परिवारों की ओर से उचित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। उनका कहना है कि यदि स्कूल को दूर रखना प्रशासनिक रूप से जरूरी है, तो विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और नियमित बस या अन्य परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। सुरक्षा को लेकर भी चिंता 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी को लेकर छात्राओं ने सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि रोजाना लंबी दूरी तय करने के दौरान विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। अभिभावकों ने भी प्रशासन से छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की। शिक्षा पर पड़ सकता है असर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल की दूरी बढ़ने का असर केवल आने-जाने की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। यात्रा में अधिक समय लगने से छात्राओं के पढ़ाई, आराम और परिवार के साथ समय पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की सीमित उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना सकती है। प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले के स्थान पर संचालित करने या ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की जिससे किसी विद्यार्थी को लंबी दूरी के कारण पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने अधिकारियों से मामले की समीक्षा कर जल्द समाधान निकालने की अपील की। छात्राओं की मांग पर अब प्रशासन की नजर कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद यह मामला प्रशासन के सामने प्रमुखता से पहुंच गया है। अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से स्कूल की दूरी, परिवहन और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क्या निर्णय लिया जाता है। छात्राओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि शिक्षा को सुलभ और सुरक्षित बनाए रखने की मांग को लेकर है। Source: छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन से संबंधित जानकारी। Original Report: स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। Jai Rashtra News

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स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में सुरक्षा कड़ी, 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां अंतिम चरण में

नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 15 अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय समारोहों को देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली में लाल किले के आसपास सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी सख्त किया गया है। लाल किले पर फुल ड्रेस रिहर्सल स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली के लाल किले पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की गई। रिहर्सल के दौरान सुरक्षा बलों और विभिन्न टुकड़ियों ने मुख्य समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा दिल्ली पुलिस ने राजधानी के महत्वपूर्ण स्थानों, सार्वजनिक क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। रेलवे स्टेशन, बाजार, परिवहन केंद्र और अन्य प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। लाल किले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा जांच भी बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं। ट्रैफिक पर भी रहेगी पाबंदी 15 अगस्त को लाल किले में होने वाले समारोह के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और सड़क प्रतिबंध लागू रहेंगे। कुछ मार्गों पर सामान्य यातायात को सीमित किया जाएगा और बसों तथा व्यावसायिक वाहनों के संचालन में भी बदलाव रहेगा। लोगों को समारोह वाले इलाकों में जाने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। सुबह 4 बजे से चलेगी दिल्ली मेट्रो स्वतंत्रता दिवस के दिन यात्रियों की सुविधा के लिए दिल्ली मेट्रो सेवाएं सुबह 4 बजे से शुरू की जाएंगी। इसका उद्देश्य विशेष मेहमानों, आम लोगों और समारोह में शामिल होने वाले लोगों की आवाजाही को आसान बनाना है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से लाल किले और आसपास के इलाकों में कुछ प्रतिबंध लागू रहेंगे। देश के अन्य हिस्सों में भी तैयारियां तेज दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कई जगहों पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की गई है, जिसमें पुलिस, सुरक्षा बलों, एनसीसी और स्कूली छात्रों ने हिस्सा लिया। ओडिशा के भुवनेश्वर में भी 51 टुकड़ियों ने फुल ड्रेस रिहर्सल में भाग लिया। वहीं पंजाब और अन्य राज्यों में भी प्रशासनिक अधिकारियों ने समारोह की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। भारत-पाक सीमा पर भी चौकसी स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे इलाकों में भी सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई गई है। सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती, गश्त और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इस बार खास होगा स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 का स्वतंत्रता दिवस कई मायनों में खास है। इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले से इसे विशेष रूप से प्रस्तुत किए जाने की योजना है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यानी 14 अगस्त को राष्ट्र को संबोधित करेंगी। इसकी जानकारी राष्ट्रपति सचिवालय/PIB की ओर से जारी की गई है। सुरक्षा के साथ सफाई और व्यवस्थाओं पर भी जोर लाल किले के आसपास नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी प्रशासनिक एजेंसियां सक्रिय हैं। जलभराव वाले स्थानों को ठीक करने, सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम तेज किया गया है। निष्कर्ष 80वें स्वतंत्रता दिवस के लिए देश तैयार है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। दिल्ली में लाल किले के आसपास सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और निगरानी बढ़ाई गई है, जबकि देश के अलग-अलग राज्यों में भी फुल ड्रेस रिहर्सल और समारोह की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे और पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए जाएंगे। Source: PIB, NDTV, Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र! — विपक्ष का तीखा हमला

नई दिल्ली: संसद और देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दलितों के प्रति कथित भेदभावपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। इसी क्रम में “यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र!” जैसी तीखी टिप्पणी सामने आई है। हालांकि, इस बयान के संदर्भ में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह विपक्ष की राजनीतिक टिप्पणी/आरोप है, भाजपा का आधिकारिक बयान नहीं। दलित मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा विपक्ष लंबे समय से केंद्र सरकार पर दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाता रहा है। संसद में आरक्षण, प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी अलग-अलग मौकों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। विपक्ष का आरोप है कि दलित समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को अधिक स्पष्ट जवाब देना चाहिए। भाजपा का क्या कहना है? भाजपा की ओर से कई मौकों पर विपक्ष के ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है। पार्टी का कहना रहा है कि केंद्र सरकार ने दलित कल्याण, गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। भाजपा नेता यह भी दावा करते रहे हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचा है। आरक्षण और सामाजिक न्याय फिर चर्चा में दलित राजनीति के संदर्भ में आरक्षण और सामाजिक न्याय हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक संस्थाओं में भागीदारी को लेकर भी बहस होती रही है। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस नीतिगत कदमों और उनके प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी बयान चर्चा में “यही है भाजपा का दलितों के प्रति असली चरित्र!” जैसी टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे बयानों के बीच किसी भी दावे को उसके मूल वीडियो, बयान और पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी है। निष्कर्ष दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा पर विपक्ष का यह हमला सियासी बयानबाजी को और तेज करता है। विपक्ष जहां भाजपा पर दलित हितों के खिलाफ रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है, वहीं भाजपा ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े कदमों को सामने रखती रही है। जय राष्ट्र न्यूज़

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