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पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा: पूर्णिया में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन, एयरपोर्ट व मखाना बोर्ड शामिल पूर्णिया (बिहार), 15 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्णिया के दौरे पर रहे और यहां राज्य के लिए कई बड़े विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय बुनियादी ढांचे, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।  पीएम ने इस दौरे के दौरान उत्तर बिहार के एक लंबे समय से प्रतीक्षित कदम के रूप में पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्धाटन किया, जिसे क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। साथ ही केंद्र और राज्य के सहयोग से कई लोक-कल्याणकारी और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिनकी कुल लागत मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब ₹36,000–40,000 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।  प्रधानमंत्री का यह दौरा उस राजनीतिक और विकासात्मक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है जिसमें बिहार अगले कुछ महीनों में निर्वाचन की तैयारियों के बीच है; केन्द्र की नीतियों और प्रोजेक्ट्स को स्थानीय स्तर पर दिखाने का यह एक रणनीतिक अवसर भी माना जा रहा है। पदयात्रा के एजेंडे में कृषि, ऊर्जा, रेल व महिला-समर्थन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल थे, जिनके जरिए रोजगार और कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी का दावा किया गया है।  इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में 16वीं कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन भी किया — केंद्रीय कार्यक्रमों और राज्य यात्राओं का यह समन्वय बताता है कि इसी दिन पीएम कई राज्यों के कार्यक्रमों में जुड़े हुए थे। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 13-15 सितंबर के बीच कई पूर्वनिर्धारित राज्यों के दौरे का बयान जारी किया गया था।  स्थानीय प्रतिक्रिया के संदर्भ में, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों व नागरिकों ने परियोजनाओं के लाभ-हानि दोनों पहलुओं पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं — जहां कुछ लोगों ने विकास और कनेक्टिविटी की उम्मीद जताई, वहीं आलोचक परियोजनाओं की प्राथमिकता व चुनावी मकसद पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे समय में यह देखना बाकी है कि घोषित निवेश स्थानीय लोगों तक कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगा। 

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नेपाल में जारी हिंसा के बीच छतरपुर के 14 लोग फंसे, पीएम-सीएम से सुरक्षित वापसी की गुहार

नेपाल में जारी हिंसा के बीच छतरपुर के 14 लोग फंसे, पीएम-सीएम से सुरक्षित वापसी की गुहार

नेपाल में जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के कारण वहां फंसे भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई है। हजारों भारतीयों के बीच मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के 14 लोग भी काठमांडू में फंसे हुए हैं। इनमें चार परिवार शामिल हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी मौजूद हैं। सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री से सुरक्षित भारत वापसी की अपील की है। जानकारी के मुताबिक छतरपुर के कोतवाली क्षेत्र के गल्ला मंडी निवासी व्यापारी पप्पू मातेले, ट्रांसपोर्ट कारोबारी निर्देश अग्रवाल, गुड्डू अग्रवाल और एक कुशवाहा परिवार नेपाल घूमने गए थे। लेकिन अचानक बढ़ी हिंसा के कारण सभी काठमांडू के एक होटल में फंस गए। हिंसा की वजह से नेपाल में आगजनी, तोड़फोड़ और मौतों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में वहां मौजूद भारतीय परिवारों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। निर्देश अग्रवाल ने होटल की खिड़की से बाहर हो रही आगजनी और हिंसा का वीडियो भेजकर स्थिति की गंभीरता दिखाई है। इस बीच, छतरपुर विधायक ललिता यादव ने नेपाल में फंसे व्यापारियों और उनके परिवारों से फोन पर बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करेगी। फिलहाल छतरपुर के इन परिवारों सहित हजारों भारतीय नेपाल में हिंसा के बीच फंसे हुए हैं और जल्द सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

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पंजाब में बाढ़: जनजीवन अस्त-व्यस्त, राहत कार्य जारी

पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी वर्षा और पहाड़ी इलाकों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण नदियाँ उफान पर हैं। कई जिलों के सैकड़ों गाँव पानी में डूब चुके हैं। गाँव की गलियाँ, खेत और घर जलमग्न हो गए हैं। लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। फसलों और पशुधन पर भारी असर पंजाब, जिसे देश का अन्नदाता कहा जाता है, आज फसल बर्बादी के गहरे संकट से जूझ रहा है। धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलें पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। किसानों की मेहनत और सालभर की कमाई एक ही झटके में खत्म हो गई। साथ ही, हज़ारों मवेशियों और पोल्ट्री को भी बाढ़ ने प्रभावित किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और गहरा असर पड़ा है। जनहानि और पलायन कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। राहत शिविरों में शरण लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पीने के पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राहत और बचाव कार्य राज्य सरकार और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन नावों और ट्रैक्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचा रहे हैं। कई जगहों पर अस्थायी शिविर, भोजन वितरण केंद्र और चिकित्सा सुविधाएँ भी स्थापित की गई हैं। राजनीतिक बहस और भविष्य की चुनौती बाढ़ ने न केवल पंजाब की आर्थिक स्थिति को झकझोरा है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। सरकार पर पर्याप्त तैयारी न करने के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते बाँधों और तटबंधों की मरम्मत की जाती और जल निकासी की व्यवस्था सुधारी जाती, तो नुकसान कम हो सकता था। सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं  पंजाब की यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि चेतावनी भी है कि हमें जल प्रबंधन और आपदा नियंत्रण की योजनाओं को और मज़बूत करना होगा। आज सबसे बड़ी ज़रूरत है कि प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। PunjabFloods #punjabNews#punjabfloods2025 #PunjabRescue #floods #PunjabFloodSituation #BreakingNews #FloodAlert

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Chirag Paswan's Bold Move in Bihar 2025 Polls

Chirag Paswan: राजनीतिक विरासत के युवा चेहरे की मजबूत दस्तक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में LJP की भूमिका

जनता के बीच चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नाम हमेशा से ही युवा ऊर्जा और राजनीतिक बदलाव का पर्याय रहा है। राम विलास पासवान के बेटे और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री, चिराग ने अपनी अगुआई में लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। युवा चेहरे की मजबूती चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) सोच को 2025 विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में अगली पंक्ति की लड़ाई में बदलना चाहते हैं । उन्होंने आरा में नव संकल्प महासभा (Nav Sankalp Mahasabha) आयोजन किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे खुद चुनाव लड़ेंगे, हालांकि अभी यह तय नहीं कि वे किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बिहार से चुनाव नहीं लड़ूंगा, बल्कि बिहार के लिए लड़ूंगा।”   243 सीटों की चुनौती छपरा में आयोजित विशाल रैली में चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे बीजेपी–जेडीयू गठबंधन (BJP-JDU Alliance) को सीट शेयरिंग में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  LJP(RV) की रणनीति और गठबंधन समन्वय चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने खुद को नए बिहार के एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते हुए, दलित–पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। उन्होंने नालंदा में बहुजन भीम संकल्प समागम (Bahujan Bhim Sankalp Samagam) की शुरुआत की जिसका मकसद जनता के बीच मजबूत पैठ बनाना है। BJP उन्हेंNDA में सीटों के लिए दबाव बनाते हुए देख रही है – 30 से 40 सीटों की उनकी मांग चर्चा में है। जेडीयू भी सतर्क है और गठबंधन पर फिर से बातचीत की संभावना संकेत दे रहा है। नीतीश–चिराग का गठबंधन राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, चिराग ने संकेत दिए हैं कि यदि NDA सहयोगी बने रहें, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही मुख्यमंत्री का चेहरे होंगे।  हालांकि उनका इरादा सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का नहीं है बल्कि दलित, युवा और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बनकर उनकी परेशानियों को दूर करना है। युवा और दलित वोट बैंक आकर्षित चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अपील में यह स्पष्ट झलकता है कि वे युवा और दलित मतदाताओं को सबसे पहले प्राथमिकता देंगे। बिहार में दलित लगभग 19% आबादी बनाते हैं, और इस समूह पर उनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है । दलित वर्ग को जोड़ने के लिए उनके बहुजन–भीम समूह अभियान पीछे नहीं रहे। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  नई रणनीतिक योजना उनकी रणनीति में शामिल हैं: चिराग पासवान बिहार की राजनीति में अब तक केंद्र में रहे युवा नेता के रूप में सामने आए हैं – उन्होंने दिल्ली वाली राजनीति से ध्यान हटाकर बिहार की जमीन पर आकर मजबूत स्वरुप अपनाया है। उनका बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) विजन बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) तक चिराग का राजनीतिक जोर बढ़ा हुआ दिखता है। अगर वे गठबंधन और सीट वितरण की कवायद में संतुलन बनाए रखते हुए, अपनी रणनीति को धरातल पर ला पाए, तो बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उनका हस्ताक्षर आनेवाला है। चिराग पासवान (Chirag Paswan) केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, वे बिहार में राजनीतिक नवप्रवर्तन लाना चाहते हैं। उनका युवा नेतृत्व, ‘दलित–युवा’ आधारित नीतियां और गठबंधन की चालबाजी 2025 के चुनावी समीकरण को नए स्वरूप देने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharElection2025 #LJP #YouthLeader #BiharPolitic

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Indore digital city

इंदौर बनेगा देश का पहली डिजिटल सिटी: हर घर को मिलेगा यूनिक डिजिटल एड्रेस

भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर अब एक और बड़ी उपलब्धि की ओर अग्रसर है। मध्य प्रदेश का यह शहर देश की पहली डिजिटल सिटी (Digital City) बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। स्वच्छता में छह बार नंबर वन रह चुके इंदौर ने अब टेक्नोलॉजी और स्मार्ट गवर्नेंस को मिलाकर नागरिक सुविधाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की योजना शुरू कर दी है। यह परियोजना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि प्रत्येक नागरिक को डिजिटल पहचान देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। क्या है डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट? इस परियोजना के तहत इंदौर के हर घर को एक यूनिक डिजिटल एड्रेस (Digital Address) दिया जाएगा, जो GPS आधारित होगा। इस यूनिक एड्रेस (Unique Address) को एक QR कोड (QR Code) के माध्यम से घर के बाहर लगाया जाएगा। इस क्यूआर कोड (QR Code) को कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से स्कैन (Scan) करेगा तो संबंधित संपत्ति की विस्तृत जानकारी तुरंत मोबाइल स्क्रीन (Mobile Screen) पर दिखेगी। इस डिजिटल पते में शामिल होगी: यह सभी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) पर उपलब्ध होगी, जिससे नागरिकों को सेवाएं पाने में सुविधा होगी और नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। वार्ड 82 से शुरुआत, पूरे शहर को कवर करने की तैयारी इंदौर में इस डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट (Digital City Project) की शुरुआत वार्ड 82 से की गई है। पहले दिन इस योजना के तहत 20 घरों को जोड़ा गया और इसकी शुरुआत सुदामा नगर में साहित्यकार सदाशिव कौतुक के घर से की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार अगले 20 दिनों में पूरे वार्ड के लगभग 7,000 घरों को इस योजना के तहत शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद इंदौर के बाकी 81 वार्डों में यह योजना एक साथ लागू की जाएगी, जिससे अगले दो महीनों में इंदौर पूरी तरह डिजिटल सिटी (Digital City Indore) बन जाएगा। दावा-आपत्ति और नागरिक शिकायतों के लिए भी तय समय सीमा के भीतर समाधान का प्रावधान रखा जाएगा, जिससे जनता की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। डिजिटल एड्रेस (Digital Address) का क्या होगा फायदा? स्मार्ट गवर्नेंस (Smart Governance): नगर निगम को अब घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की ज़रूरत नहीं होगी। QR कोड स्कैन (QR Code Scan) कर अधिकारी सीधे डिजिटल डेटा देख सकेंगे। नागरिकों को सुविधा: लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पानी-बिजली के बिल, टैक्स की स्थिति, अस्पताल से संबंधित सेवाएं एक क्लिक पर मिलेंगी। ट्रांसपरेंसी: डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) होने से टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और शहरी विकास में वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। आपातकालीन सेवाएं तेज़: किसी भी मकान की सही लोकेशन को क्यूआर कोड (QR Code) के ज़रिए तत्काल साझा किया जा सकेगा, जिससे एम्बुलेंस या फायर सर्विस जैसी सेवाएं जल्दी पहुंच सकेंगी। डिजिपिन से कनेक्टिविटी: यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के डिजिपिन प्लेटफॉर्म (Digipin Platform) से जुड़ा है। डिजिपिन यानी डिजिटल पिन (Digital Pin) के ज़रिए नागरिकों की पहचान और लोकेशन को एक साथ जोड़ दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  डिजिटल भारत की दिशा में अहम कदम इंदौर का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की डिजिटल इंडिया मुहिम (Digital India campaign) के तहत एक बड़ा मॉडल बन सकता है। जहां देशभर के शहर डिजिटल गवर्नेंस को लेकर योजनाएं बना रहे हैं, वहीं इंदौर इस पर वास्तविक काम कर रहा है और उदाहरण पेश कर रहा है। इससे पहले इंदौर ने स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट, सफाई ऐप्स और डिजिटल बिलिंग जैसी कई योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। अब डिजिटल एड्रेसिंग प्रणाली से यह शहर न सिर्फ स्मार्ट बनेगा, बल्कि यह भारत के अन्य शहरों को भी नई दिशा दिखाएगा। इंदौर का डिजिटल सिटी (Digital City) बनने का यह प्रयास सिर्फ एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह सिटी गवर्नेंस और नागरिक सुविधा का आधुनिक मॉडल बन रहा है। हर घर का डिजिटल एड्रेस (Digital Address) न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, बल्कि नागरिकों के लिए भी जीवन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य शहर भी इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। डिजिटल युग में इंदौर एक बार फिर देश को रास्ता दिखा रहा है और इस बार स्वच्छता नहीं, स्मार्ट नागरिक सेवाओं के जरिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  Prime Minister Narendra Modi #indoredigitalcity #firstdigitalcity #smartcityindia #digitaladdress #indorenews

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4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025: बिहार चुनाव में इन 4.96 करोड़ वोटरों को नहीं देना होगा कोई भी दस्तावेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर सूची की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु एक नया कदम उठाया है। इस कदम के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि “2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हैं। उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगी। बता दें कि इस सूची में राज्य के कुल लगभग 60% यानी 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट दोबारा अपलोड होगी। इसमें जिनके नाम हैं, उन्हें जन्म प्रमाण नहीं देना होगा। बाकी 3 करोड़ को दस्तावेज देने होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि पुनरीक्षण के दौरान सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र व्यक्ति न रहे।  3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बिहार में 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज देने की जरूरत नहीं। लेकिन शर्त यह है कि वे पुनरीक्षण के बाद की मतदाता सूची का हिस्सा संलग्न करें। बाकी बचे 3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा। ऐसे में जिनके माता-पिता 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपनी जन्म तिथि/स्थान का दस्तावेज देना होगा, माता-पिता का नहीं। बाकी मतदाताओं की पहचान सत्यापित होने के बाद ही उनके नाम सूची में शामिल होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह दस्तावेज़ी प्रक्रिया राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लागू होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और दस्तावेजों के बिना किसी को भी सूची में शामिल न किया जाए। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदाता की पात्रता सत्यापित की जाएगी। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को हटाना है।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि “यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे। आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पुनः वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुराने रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सके।” जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। जिससे 4.96 करोड़ मतदाता अपने नाम की पुष्टि कर सकें। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश करार दे दिया। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि “यह अनुच्छेद 326 का पालन करता है, जो पात्र नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने को कहा, ताकि मतदाता सूची में खामियां न रहें। अब तक 1,54,977 बीएलए नियुक्त हो चुके हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news 4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025 #BiharElection2025 #VotersWithoutID #ElectionCommission #BiharNews #VotingRights

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Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Kanhaiya Kumar Reveals CM Face

Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar: कन्हैया कुमार ने बता दिया कौन होगा महागठबंधन से बिहार का मुख्यमंत्री?

इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा, इसको लेकर कांग्रेस ने तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। दरअसल, 27 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि “महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव के प्रमुख चेहरा होने को लेकर कोई असमंजस और विवाद (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) नहीं है।” उन्होंने कहा कि “विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के जीतने पर सबसे बड़े घटक दल के रूप में राष्ट्रीय जनता दल का नेता ही स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक साजिश के तहत इनसे ध्यान भटकाने के लिए बार-बार चेहरे की बात की जा रही है।  बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) में है कन्हैया कुमार ने कहा कि “मेरे खयाल से पिछली बार भी बदलाव का माहौल था। थोड़े अंतर से महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई। पिछले पांच वर्षों से बिहार की जो स्थिति है, उससे लगता है कि इस बार बदलाव की हवा पहले से कहीं  ज्यादा मजबूत है।” इस दौरान कन्हैया कुमार ने दावा किया (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) कि “बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश में है।” उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं है कि वे नीतीश जी के अस्वस्थ होने पर यह कोशिश कर रहे हैं। वह पहले भी प्रयास कर चुके हैं। भाजपा पिछले कई दशकों से बिहार में वही करना चाहती है जो दूसरी जगह करने में सफल रही है। मतलब पहले क्षेत्रीय दल का साथ पकड़ो और फिर धीरे-धीरे उसे निगल जाओ। बिहार में ऐसा न कर पाने की वजह से बीजेपी नीतीश का साथ लेने को मजबूर हुई।” सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है  सीएम के सवाल पर कन्हैया ने कहा कि “सीएम कौन बनेगा, इस जनता तय करती है, जिनके पास संख्या बल होगा, वह सीएम बनेगा। आरजेडी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी। संख्या बल उसके पास होगा। सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं है। इसे लेकर एनडीए में (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इस चुनाव में नीतीश चेहरा होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में चेहरा महत्वपूर्ण नहीं होता, मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।” बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि “सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर सीएम फेस के नाम पर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के मामले को उठाकर ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने नेता को बिहार में स्थापित करेगी। बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। वह एनडीए सरकार के छल को समझ चुकी है। संविधान विरोधी लोगों को जनता पसंद नहीं करती है।” इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है बता दें कि बिहार में इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है। इस गठबंधन में वाम दलों के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। उसका मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से है। एनडीए में बीजेपी, नीतीश कुमार की जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (आर), जीतन राम मांझी की हम, और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम शामिल है। गौरतलब हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 प्रतिशत की सफलता दर से 75 सीटें हासिल की थी तो वहीं कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसमे से सिर्फ 19 सीटें जीती थीं। इसके आलावा भाकपा (माले) लिबरेशन ने 19 सीट पर चुनाव लड़ा और 12 पर जीत हासिल की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस इस बार भी पिछली बार इतनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन राजद इस बार उसे उतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। फिर भी कांग्रेस इस बार ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar #kanhaiyakumar #biharpolitics #mahagathbandhan #biharcmface #2025elections #cmcandidate

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CM Mohan Yadav convoy halted

CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed: सीएम मोहन यादव के काफिले की गाड़ियां अचनाक हुईं बंद, इस वजह से पेट्रोल पंप हुआ सीज

क्या हो यदि आप पेट्रोल पंप से डीजल भरवाएं और कुछ दूरी पर जाने के बाद अचानक से आपकी गाड़ी बंद पड़ जाए? निश्चित आप इसे तकनीकी खरीब समझकर धक्का मारने पर मजबूर होंगे। ये तो बात रही आम इंसान की। यही घटना अगर सूबे के मुख्यमंत्री के साथ हो तो? निश्चित ही सरकारी अमले में हड़कंप मचना तय है। दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में शामिल एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां अचानक रास्ते में बंद हो गईं। पहले तो मामला तकनीकी खराबी का लगा, लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि इन गाड़ियों में पानी मिला डीजल भरा गया था। सीएम के दौरे को देखते हुए प्रशासन को सीएम काफिले के लिए तत्काल इंतजाम करना (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पड़ा। सीएम काफिले के लिए इंदौर से गाड़ियों का दूसरा रैक भेजा गया। मुख्यमंत्री मोहन आज रतलाम के पोलो ग्राउंड में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड इम्पलॉयमेंट कॉन्क्लेव 2025 में शिकरत करेंगे। जानकारी के मुताबिक, इन सभी वाहनों में डोसीगांव स्थित पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया गया था। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया है और ईंधन के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।  चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार शाम सीएम मोहन के रतलाम दौरे से पहले रतलाम के लिए रवाना हुईं सीएम काफिले की 19 गाड़ियों ने एक पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया था। मुख्यमंत्री का काफिला रतलाम जा रहा था, लेकिन चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं, जिससे चालकों का गाड़ियों से उतरकर धक्का लगाना पड़ गया। आशंका जताई जा रही है कि गईं कि पेट्रोल पंप का डीजल मिलावटी होने के कारण काफिले की गाड़ियां बंद पड़ गई। सीएल काफिले की 19 गाड़ियों के अचानक बंद होने की सूचना मिलते ही जिले में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने आनन-फानन में उस पेट्रोल पंप को सील कर दिया, जहां से काफिले की गाड़ियों में तेल भऱवाया गया था। बता दें कि डीजल में मिलावट की पुष्टि की है, जिसके बाद प्रशासन ने पेट्रोल पंप के खिलाफ एक्शन लिया। गौरतलब है मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव आज रतलाम दौरे पर है। सीएम मोहन दोपहर भोपाल से रतलाम पहुंच रहे हैं।   इसे भी पढ़ें:- हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान आया (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पानी  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच में यह बात पता चली है कि जिन गाड़ियों में 20 लीटर डीजल डलवाया गया था, उनमें से लगभग 10 लीटर पानी निकला है। सभी वाहनों में लगभग यह स्थिति (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) है। यही नहीं, एक ट्रक चालक ने भी 200 लीटर डीजल भरवाया था। वो भी थोड़ी दूरी पर ही बंद हो गया। प्रशासन की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि बारिश के चलते डीजल टैंक में पानी का रिसाव हो सकता है। फिलहाल, कलेक्टर और जिला प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच में जुट गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है। तहसीलदार ने कहा, काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान पानी आया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता जांचने के क्या इंतजाम हैं? क्या सच में आम लोगों को भी ऐसा ही मिलावटी ईंधन दिया जा रहा है? Latest News in Hindi Today Hindi news CM Mohan Yadav #cmMohanyadav #convoyhalted #petrolpumpsealed #madhyapradeshnews #fuelqualityissue

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बिहार चुनाव से पहले आयोग कर रहा वोटर लिस्ट की एसआईआर, मतदाताओं को दिखाने होंगे ये खास दस्तावेज

बिहार में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारी में जुटी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग भी अपनी तैयारी को पुख्ता कर रहा है। चुनाव आयोग (Election Commission) इस समय वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कर रहा है। इस दौरान चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सर्वे कर रहे हैं। इसके आधार पर ही वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं को जोड़ने और फर्जी मतदाताओं को हटाने का कार्य किया जाएगा। एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के ऑफिस (Election Commission) द्वारा एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि ग्राउंड पर लिस्ट तैयार होने के बाद उसकी जांच बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) करेंगे। इस दौरान मतदाताओं के वैध दस्तावेजों की जांच होगा, फिर लिस्ट की सत्यापन कर उसे वोटर लिस्ट में अपडेट किया जाएगा। इसके बाद लिस्ट में सुधार के लिए मतदाताओं को भी कुछ समय दिया जाएगा और फिर फाइनल लिस्ट जारी कर मतदान के चुनाव तारीखों (Bihar Assembly Elections) का ऐलान कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा बिहार में मतदाता सूची का एसआईआर करीब 22 साल बाद किया जा रहा है। इससे पहले यह काम साल 2003 में किया गया था। ऐसे में मतदाताओं के मन में भी यह सवाल है कि चुनाव आयोग के कर्मचारी जब उनके घ्घर आएंगे तो उन्हें क्या-क्या दस्तावेज दिखाना होगा? 27 जुलाई तक होगा सत्यापन चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर (SIR) का कार्य शुरू हो गया है और यह अगले कुछ सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद बीएलओ 27 जुलाई तक मतदाताओं द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। एसआईआर के दौरान आयोग के कर्मचारी जब घर पहुंचेंगे तो हर वोटर को एक फॉर्म देंगे, जिसे उन्हें भरना होगा। मतदाता इस फॉर्म को भरकर अपने सभी डॉक्यूमेंट के साथ वापस बीएलओ को देंगे। अगर मतदाता चाहे तो इस फॉर्म को भरने के बाद उसे निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी अपलोड कर सकता है। आइये जानते हैं कि मतदाताओं को क्या-क्या दस्तावेज देना होगा।  1 जुलाई 1987 से पहले जन्म लेने वाले मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म भारत में 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें अपनी जन्म तिथि और  स्थान की सत्यापन के लिए कोई भी एक वैध दस्तावेज देना होगा।  1987 से 2004 के बीच जन्में मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद और 2 दिसंबर 2004 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें अपने पहचान पत्र के साथ अपने माता-पिता में से भी किसी एक का पहचान पत्र देना होगा।  2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाता वहीं, जिन मतदाताओं (Election Commission) का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद भारत में हुआ है उन्हें अपने साथ अपने माता-पिता (दोनों) का वैध दस्तावेज देना होगा। अगर माता-पिता में से कोई या फिर दोनों विदेशी नागरिक है, तो उसे अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ  विदेशी नागरिक के वैध पासपोर्ट और वीजा की सेल्फ अटेस्टेड प्रति भी जमा करनी होगी।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? चुनाव आयोग को देने होंगे ये दस्तावेज 1. आम मतदाता कोई भी वैध पहचान पत्र दे सकता है। वहीं केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी अपने वेतन या पेंशन भुगतान आदेश की प्रति भी लगा सकते हैं।  2. सरकार द्वारा जारी 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र, स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी कोई भी दस्तावेज मान्य होगा।  3. जन्म प्रमाण पत्र  4. विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट जरूरी  5. मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय या बोर्ड द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्र या मैट्रिक का सर्टिफिकेट भी मान्य  6. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा जारी मूल निवास प्रमाण पत्र मान्य है।  7. ओबीसी, एससी और एसटी का जाति प्रमाण पत्र 8. वन अधिकार प्रमाण पत्र 9. राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय का फैमिली रजिस्टर में शामिल नाम का पत्र  10. सरकार द्वारा जारी किसी जमीन का या फिर घर का प्रमाण पत्र Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission #bihar2025 #voterlistupdate #elections2025 #voterverification #biharnews

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