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दशहरे पर IPS अंकिता शर्मा ने किया शस्त्र पूजन, AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल

राजनांदगांव, 21 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन के दौरान पुलिस अधीक्षक और 2018 बैच की IPS अधिकारी अंकिता शर्मा का AK-47 से फायरिंग करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस लाइन में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जवान भी मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग इसे पुलिस की परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने इस तरह की फायरिंग की प्रकृति और औचित्य पर सवाल उठाए हैं। शस्त्र पूजन के बाद AK-47 से की फायरिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंकिता शर्मा पारंपरिक साड़ी पहनकर शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान विधि-विधान से हथियारों और पुलिस वाहनों की पूजा की गई। पूजा के बाद उनके AK-47 से कई राउंड फायरिंग करने का वीडियो सामने आया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा और लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगा। हर्ष फायरिंग या औपचारिक प्रदर्शन? वीडियो को लेकर सबसे अधिक चर्चा इस बात पर हो रही है कि फायरिंग को किस श्रेणी में रखा जाए। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और रिपोर्ट्स में इसे हर्ष फायरिंग कहा जा रहा है, जबकि अन्य इसे शस्त्र पूजन के दौरान की गई औपचारिक फायरिंग या हथियार संचालन के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस फायरिंग की आधिकारिक प्रकृति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे अवैध हर्ष फायरिंग करार देना उचित नहीं होगा। इस संबंध में पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। वीडियो पर सोशल मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। कुछ यूजर्स ने इसे पुलिस की परंपरा और अधिकारी के हथियार संचालन से जोड़कर देखा, जबकि कुछ ने धार्मिक आयोजन के दौरान AK-47 जैसे स्वचालित हथियार से फायरिंग किए जाने पर सवाल उठाए। इस तरह वीडियो ने शस्त्र पूजन की परंपरा और सार्वजनिक आयोजनों में हथियारों के इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कौन हैं IPS अंकिता शर्मा? अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की IPS अधिकारी हैं और राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया रैंक 203 हासिल की थी। अपने करियर के दौरान वह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा विजयादशमी के अवसर पर देश के कई हिस्सों में पुलिस, सुरक्षा बलों और अन्य संस्थानों में शस्त्र पूजन किया जाता है। इस परंपरा को शक्ति, सुरक्षा, साहस और कर्तव्य के प्रतीकात्मक सम्मान से जोड़ा जाता है। राजनांदगांव पुलिस लाइन में भी इसी अवसर पर शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। हालांकि, पूजा के बाद की गई फायरिंग की आधिकारिक प्रकृति और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी का इंतजार है। Source: Aaj Tak, NDTV, Navbharat Times, Jansatta जय राष्ट्र न्यूज़

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लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहने पर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस बोली—पुराना वीडियो, जुबान फिसली थी

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा कर सवाल उठाए हैं। इस क्लिप में एक DCP गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कथित तौर पर “साहब” कहते सुनाई देते हैं। दीपके ने इस टिप्पणी को कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके ने क्या सवाल उठाए? अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि एक कुख्यात गैंगस्टर के लिए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर सख्ती बरती जाती है। उन्होंने पुलिस की भाषा और व्यवहार में इस अंतर को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो एक साल से भी अधिक पुराना है। पुलिस के मुताबिक, DCP के मुंह से लॉरेंस बिश्नोई के नाम के साथ “साहब” शब्द निकलना केवल जुबान फिसलने का मामला था। पुलिस ने इस टिप्पणी को किसी विशेष सम्मान या तरजीही व्यवहार के तौर पर देखे जाने से इनकार किया। पुराना वीडियो अब क्यों चर्चा में है? टाइगर श्रॉफ के वाहन पर कथित गोलीबारी के मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इसी बीच दीपके द्वारा पुराना वीडियो साझा किए जाने के बाद पुलिस की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके कथित गिरोह के नेटवर्क को लेकर विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां भी जांच करती रही हैं। पुलिस के व्यवहार को लेकर फिर उठी बहस यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब CJP और दिल्ली पुलिस के बीच हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। अभिजीत दीपके को हाल ही में कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। फिलहाल, इस मामले में दीपके की आलोचना और दिल्ली पुलिस की सफाई दोनों चर्चा में हैं। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने इसे पुरानी रिकॉर्डिंग और जुबान फिसलने की घटना बताया है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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कोलकाता पंडाल हादसे के बाद अमित शाह के भव्य स्वागत पर सवाल, विपक्ष ने BJP को घेरा

कोलकाता, 19 अक्टूबर 2026: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हादसे के कुछ ही समय बाद ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ अमित शाह का स्वागत किया गया, जो संवेदनहीनता को दर्शाता है। हादसे और स्वागत के बीच करीब 35 मिनट का अंतर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंडाल में भगदड़ की घटना शाम करीब 7:40 बजे हुई, जबकि अमित शाह लगभग 8:15 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस आयोजन के समय और तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने साधा निशाना कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर हादसे और एयरपोर्ट स्वागत से जुड़े वीडियो साझा करते हुए BJP नेतृत्व की आलोचना की। विपक्ष का कहना था कि जिस समय शहर में लोग हादसे का शिकार हुए थे, उसी दौरान गृह मंत्री के स्वागत में समारोह आयोजित किया जा रहा था। हालांकि, ये राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। TMC ने भी BJP को घेरा तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी भगदड़ की घटना के बाद BJP और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पार्टी ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच की मांग की। घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अमित शाह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की एयरपोर्ट स्वागत को लेकर उठे विवाद के बीच अमित शाह ने अगले दिन अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने घटना पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भगदड़ में 19 लोगों की मौत, जांच जारी चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल (SIT) भीड़ प्रबंधन में संभावित लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और उस घोषणा की भूमिका की जांच कर रहा है, जिससे कथित तौर पर लोगों में घबराहट फैल गई थी। एयरपोर्ट स्वागत बना राजनीतिक विवाद का मुद्दा कोलकाता हादसे के बाद अमित शाह के स्वागत का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इसे संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़कर BJP की आलोचना कर रहा है। वहीं, हादसे से जुड़े तथ्यों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक चूक की जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। Source – Aaj Tak, Economic Times, Lagatar News, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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“माफ़ी मांगने से क्या होगा? कोर्ट में मिलते हैं!” ABP News पर भड़कीं नेहा सिंह राठौर, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने ABP News के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके बारे में प्रकाशित एक कथित गलत खबर को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। विवाद बढ़ने के बाद ABP Network ने खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए माफी जारी की। हालांकि, नेहा सिंह राठौर का कहना है कि केवल माफी मांगने से मामला खत्म नहीं होगा और वह न्याय के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रही हैं। किस खबर को लेकर शुरू हुआ विवाद? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ABP के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित एक खबर में नेहा सिंह राठौर का नाम कथित तौर पर सेक्स रैकेट और कॉल गर्ल से जुड़े मामले के साथ गलत तरीके से जोड़ दिया गया था। इस खबर को लेकर विवाद सामने आने के बाद नेटवर्क ने स्पष्टीकरण जारी किया और स्वीकार किया कि नेहा से संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। ABP Network ने मांगी माफी ABP Network ने अपने स्पष्टीकरण में खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए त्रुटि पर खेद जताया और माफी मांगी। इस घटनाक्रम के बाद मामला मीडिया की जिम्मेदारी और खबरों की तथ्यात्मक जांच को लेकर चर्चा में आ गया। नेहा सिंह राठौर ने माफी पर उठाए सवाल नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर नेटवर्क की माफी पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि किसी महिला को गंभीर और अपमानजनक आरोपों से जोड़ने वाली खबर प्रकाशित होने के बाद केवल माफी मांगना कैसे पर्याप्त हो सकता है। उन्होंने इस मामले को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया और न्याय की मांग की। “कोर्ट में मिलते हैं”, कानूनी कार्रवाई के संकेत प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा सिंह राठौर ने ABP News के खिलाफ FIR दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। उनकी प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि वह इस मामले को केवल सार्वजनिक माफी तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मौजूदा स्थिति और किसी औपचारिक शिकायत या मुकदमे के दर्ज होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज ABP Network की माफी और नेहा सिंह राठौर की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले ने मीडिया संस्थानों की जवाबदेही, खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर गलत जानकारी के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्रोत: प्रभात खबर, स्टेट मिरर जय राष्ट्र न्यूज़

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मीरा-भायंदर महापालिका की बैठक में हंगामा, BJP पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों से मारपीट के आरोप; FIR दर्ज

मीरा-भायंदर, 18 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) की जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान हंगामे का मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट करने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की संख्या को लेकर अंतर बताया गया है। मोबाइल से रिकॉर्डिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महानगरपालिका की बैठक के दौरान दर्शक दीर्घा में मौजूद कुछ लोग मोबाइल फोन से कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसके बाद कुछ BJP पार्षद दर्शक दीर्घा तक पहुंचे, जहां नागरिकों के साथ कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। पत्रकारों से मारपीट और मोबाइल तोड़ने के आरोप बैठक की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों ने भी उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक पत्रकार का मोबाइल फोन छीनकर तोड़ने और पत्रकारों की ओर जूते-चप्पल फेंकने के आरोप भी सामने आए हैं। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस द्वारा उपलब्ध वीडियो और CCTV फुटेज की जांच किए जाने की जानकारी दी गई है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। BJP पार्षदों के खिलाफ FIR, आरोपियों की संख्या पर अलग-अलग दावे मामले में भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। Free Press Journal और कुछ मराठी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 BJP पार्षदों और एक पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं, Amar Ujala की रिपोर्ट में एक FIR में 17 पार्षदों के नाम होने की बात कही गई है। रिपोर्टों में इस अंतर के कारण आरोपियों की अंतिम संख्या और प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति पुलिस की जांच तथा आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता। पुलिस की मौजूदगी में घटना होने का दावा कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया है कि घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई और समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। घटना के दौरान पुलिस की भूमिका और सामने आए आरोपों की भी तथ्यों के आधार पर पड़ताल जरूरी है। पत्रकारों ने किया प्रदर्शन घटना के बाद पत्रकारों ने महानगरपालिका परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पत्रकार संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की। विपक्षी दलों ने भी घटना पर आपत्ति जताई और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। BJP नेतृत्व की प्रतिक्रिया BJP के समूह नेता हसमुख गेहलोत ने घटना को निंदनीय बताया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले में जवाबी शिकायतें दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। जांच के नतीजों पर टिकी नजर मीरा-भायंदर महानगरपालिका की बैठक में हुए इस विवाद ने स्थानीय निकायों की बैठकों में नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच, वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी। स्रोत: The Indian Express/भाषा रिपोर्ट्स, Loksatta, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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“प्रमाण दो या रावण दहन बंद करो!” महाकाल मंदिर के पुजारी के नोटिस से उज्जैन में नई बहस

उज्जैन, 18 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने शहर की चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर सवाल उठाया है कि रावण दहन का उल्लेख किस वेद, पुराण या धार्मिक ग्रंथ में मिलता है। उन्होंने आयोजकों से सात दिनों के भीतर शास्त्रीय प्रमाण देने या इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। चार दशहरा समितियों को भेजा गया कानूनी नोटिस अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज की ओर से चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। आयोजकों से धार्मिक ग्रंथों के आधार पर जवाब मांगा गया है। नोटिस में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर न्यायालय का रुख करने की चेतावनी भी दी गई है। महेश पुजारी का क्या है तर्क? महेश पुजारी का कहना है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में रावण वध का वर्णन मिलता है, लेकिन उनके अनुसार इन ग्रंथों में रावण के पुतले को सार्वजनिक रूप से जलाने की परंपरा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका तर्क है कि धार्मिक परंपराओं के शास्त्रीय आधार पर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, यह महेश पुजारी का धार्मिक और वैचारिक पक्ष है। रावण दहन की ऐतिहासिक उत्पत्ति और विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रचलन को समझने के लिए धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ लोक परंपराओं और ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है। “प्रमाण मिला तो विरोध वापस ले लूंगा” महेश पुजारी ने आयोजन समितियों को शास्त्रार्थ की चुनौती भी दी है। उनके मुताबिक, यदि कोई समिति धार्मिक ग्रंथों के आधार पर रावण दहन का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करती है, तो वह अपना विरोध वापस लेने के लिए तैयार हैं। वहीं, प्रमाण नहीं मिलने की स्थिति में उन्होंने इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। रावण के विद्वान ब्राह्मण होने का भी दिया हवाला महेश पुजारी ने रावण को विद्वान और ब्राह्मण बताते हुए उसके पुतले के सार्वजनिक दहन पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, दशहरे पर रावण दहन देश के कई हिस्सों में भगवान राम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इस परंपरा के धार्मिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय स्वरूप अलग-अलग हो सकते हैं। उज्जैन में पोस्टर अभियान रावण दहन के विरोध में उज्जैन में पोस्टर भी लगाए गए हैं। महेश पुजारी ने अपने अभियान को विभिन्न राज्यों और समुदायों से समर्थन मिलने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। अब आयोजन समितियों के जवाब पर नजर कानूनी नोटिस के बाद उज्जैन में धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या, परंपराओं के आधार और दशहरे के आयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब आयोजन समितियों के जवाब और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, नोटिस भेजे जाने से रावण दहन पर कोई प्रतिबंध स्वतः लागू नहीं होता; आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की कार्रवाई और किसी संभावित न्यायिक आदेश पर निर्भर करेगी। स्रोत: NDTV, Amar Ujala, Navbharat जय राष्ट्र न्यूज़

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रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष Neha Bora को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, Delhi Police Act की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। रिहाई के बाद Bora ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने की आवश्यकता और पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Neha Bora ने हिरासत पर क्या सवाल उठाए? रिहाई के बाद Neha Bora ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को पूरी रात हिरासत में रखने की कानूनी जरूरत क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें कई घंटों तक वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उनके बयानों ने पुलिस हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता तक पहुंच और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने पर सवाल Bora ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी आपत्ति हिरासत की अवधि और उसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर थी। हालांकि, हिरासत की वैधता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। ‘Lehra Do Tiranga’ प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिरासत Neha Bora को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा तथा भीड़ नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू किए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में कम से कम तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। इन मामलों में दर्ज आरोपों की जांच जारी है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। Abhijeet Dipke भी रिहा CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke को भी निवारक हिरासत के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरी ओर, Neha Bora और अन्य प्रदर्शनकारियों ने हिरासत की अवधि, वकील तक पहुंच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान कानूनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। स्रोत: The Indian Express, The Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमध्ये घरातच शाब्दिक वाद? VIDEO व्हायरल

नवी दिल्ली, 17 ऑक्टोबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) चे संस्थापक अभिजीत दिपके यांच्या घरी दिल्ली पोलीस पोहोचल्यानंतर झालेल्या शाब्दिक वादाचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर व्हायरल झाला आहे. CJP च्या ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमापूर्वी हा प्रकार घडला. पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथे परवानगीशिवाय मोर्चा किंवा मोठा जमाव आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. “माझ्या घरी कोण येईल, हे तुम्ही ठरवणार नाही” व्हायरल व्हिडिओमध्ये अभिजीत दिपके आणि पोलीस अधिकाऱ्यांमध्ये तीव्र शाब्दिक वाद होताना दिसत आहे. दिपके पोलिसांच्या उपस्थितीवर आणि त्यांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित करताना दिसतात. दुसऱ्या व्हिडिओमध्ये दिपके यांनी “मी एकटाच आहे” असे सांगत ताब्यात घेण्याच्या कारवाईवर आक्षेप घेतल्याचे दिसते. या व्हिडिओंमुळे सोशल मीडियावर या प्रकरणाची चर्चा सुरू झाली आहे. दिल्ली पोलिसांनी दिली होती नोटीस दिल्ली पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथील सेंट्रल पार्कमध्ये प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. संबंधित परिसरात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) च्या कलम 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू असल्याचे पोलिसांनी स्पष्ट केले होते. तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नाही, मात्र मोर्चाला आक्षेप पोलिसांच्या नोटीसमध्ये तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नसल्याचे स्पष्ट करण्यात आले होते. मात्र, आवश्यक परवानगीशिवाय मोठा जमाव किंवा मोर्चा आयोजित केल्यास कायदेशीर कारवाई होऊ शकते, असा इशाराही देण्यात आला होता. दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले 16 ऑक्टोबर रोजी कार्यक्रमासाठी घरातून बाहेर पडताना दिल्ली पोलिसांनी अभिजीत दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले. या कारवाईचा व्हिडिओही सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणावर शेअर झाला. व्हिडिओमुळे राजकीय वादाला पुन्हा हवा CJP समर्थकांनी पोलिसांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित केले आहेत. दुसरीकडे, दिल्ली पोलिसांनी कायदा-सुव्यवस्था राखणे, वाहतूक सुरळीत ठेवणे आणि गर्दीवर नियंत्रण ठेवणे या कारणांचा हवाला दिला आहे. ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमाच्या पार्श्वभूमीवर घडलेल्या या घटनांमुळे अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमधील वाद पुन्हा चर्चेत आला आहे. स्रोत – Times of India, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली रामलीला में CM Rekha Gupta की जुबान फिसलने पर विवाद, “हर एक राम मारा न जाए” बयान को लेकर AAP-Congress का हमला

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) का रामलीला कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में मुख्यमंत्री कथित तौर पर “जब तक हर एक रावण मारा न जाए” कहने के बजाय “जब तक हर एक राम मारा न जाए” बोलती सुनाई देती हैं। इस कथित बयान को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। वहीं, रेखा गुप्ता ने वायरल वीडियो और विपक्ष की आलोचना पर पलटवार किया है। कहां का है वायरल वीडियो? रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 13 अक्टूबर को दिल्ली के आजादपुर स्थित केवल पार्क इलाके में आयोजित श्री आदर्श कला केंद्र की रामलीला की है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ भाजपा विधायक राज कुमार भाटिया भी मौजूद थे। क्या कहा रेखा गुप्ता ने? सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर ‘रावण’ की जगह ‘राम’ शब्द सुनाई देता है। इसी हिस्से को विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने साझा करते हुए सवाल उठाए हैं। वीडियो में दिखाई देने वाली टिप्पणी को जुबान फिसलने की घटना बताया जा रहा है। हालांकि, बयान के आशय को समझने के लिए पूरे भाषण और उसके संदर्भ को देखना जरूरी है। AAP और कांग्रेस ने साधा निशाना वायरल वीडियो को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और मुख्यमंत्री के कथित बयान को भगवान राम के प्रति पार्टी की सोच से जोड़ने की कोशिश की। कांग्रेस नेताओं ने भी इस टिप्पणी पर सवाल उठाए। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि, विपक्ष की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें मुख्यमंत्री की मंशा का प्रमाण नहीं माना जा सकता। रेखा गुप्ता ने क्या दिया जवाब? विवाद के बीच रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी इस बात पर नजर रखते हैं कि वह क्या बोलती हैं और क्या पहनती हैं। उन्होंने वायरल सामग्री को लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया। वायरल वीडियो की जांच क्यों जरूरी? वीडियो को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे AI से बनाया गया या एडिट किया हुआ होने का दावा किया है। हालांकि, किसी वीडियो के संपादित होने या AI से तैयार किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर हुई जुबान की चूक का जिक्र है। ऐसे में वीडियो के छोटे हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल और पूरा वीडियो देखना महत्वपूर्ण है। इस मामले में वीडियो की प्रामाणिकता और पूरे संदर्भ की पुष्टि विवाद को समझने के लिए अहम होगी। स्रोत – Live Hindustan, ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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एंटी-CEC प्रदर्शन के बाद नया विवाद: तीन पत्रकारों के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR, क्राइम ब्रांच करेगी जांच

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 3 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद विवाद और गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न और कथित मारपीट के आरोप लगाने वाले तीन पत्रकारों के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने पत्रकारों पर जातिसूचक टिप्पणियां करने, मानहानि और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। किन धाराओं में दर्ज हुई FIR? पुलिस के मुताबिक, तीनों पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 356(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी नेमप्लेट और जातिगत पहचान का उल्लेख करते हुए अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इन आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है। पत्रकारों ने पहले पुलिस अधिकारी पर लगाए थे आरोप इससे पहले एक महिला पत्रकार ने प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। अन्य पत्रकारों ने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतें की थीं। इन शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को अलग-अलग शिकायतों के आधार पर जांचा जा रहा है। क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपों और संबंधित शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और प्रदर्शन के समय रिकॉर्ड किए गए वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान हुई गतिविधियों और दोनों पक्षों की शिकायतों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई चिंता महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने आरोपों पर जवाब के लिए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी मांगी थी। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी इस मामले में अब दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्रकारों ने पुलिस अधिकारी पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं, जबकि एसीपी विवेक भगत ने जातिसूचक टिप्पणियों, मानहानि और सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायत की है। फिलहाल, किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी। Source – The Indian Express, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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