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CBI का बड़ा एक्शन! किशोर बियानी और फ्यूचर रिटेल पर ₹904 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज, मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026: देश के जाने-माने कारोबारी और बिग बाजार के संस्थापक किशोर बियानी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (Future Retail Ltd) और उसके प्रमोटर किशोर बियानी के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में उनके भाई राकेश बियानी समेत कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोप है कि कंपनी ने बैंकों से प्राप्त ऋण का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के बजाय संबंधित कंपनियों को धन हस्तांतरित करने में किया। सीबीआई ने शुक्रवार, 6 नवंबर को मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

SBI की शिकायत पर 4 नवंबर को दर्ज हुई FIR

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 4 नवंबर 2026 को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक की मुंबई स्थित स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच-III की शिकायत पर की गई।

बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी और उसके प्रमोटरों ने कथित आपराधिक साजिश के तहत ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं और बाद में धनराशि का निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार इस्तेमाल नहीं किया।

सीबीआई के अनुसार, इससे एसबीआई को लगभग ₹904.32 करोड़ का कथित वित्तीय नुकसान हुआ।

मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत जांच शुरू की गई है।

किशोर बियानी और भाई राकेश बियानी भी आरोपी

सीबीआई की एफआईआर में फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के अलावा कंपनी के प्रमुख प्रमोटर किशोर लक्ष्मीनारायण बियानी और उनके भाई राकेश गोपीकिशन बियानी के नाम शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने मिलकर बैंक ऋण प्राप्त करने और धन के कथित दुरुपयोग की साजिश रची।

हालांकि यह आरोप फिलहाल जांच के अधीन है और किसी अदालत ने आरोपियों को दोषी घोषित नहीं किया है।

सीबीआई अब सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हुई है।

मुंबई में कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी

एफआईआर दर्ज करने के दो दिन बाद शुक्रवार, 6 नवंबर को सीबीआई ने मुंबई में फ्यूचर रिटेल के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े कई परिसरों की तलाशी ली।

जांच एजेंसी ने छापेमारी के दौरान वित्तीय लेन-देन और कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित दस्तावेज जब्त किए।

सीबीआई के अनुसार, ये दस्तावेज जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में ऋण के वास्तविक इस्तेमाल, संबंधित कंपनियों को हस्तांतरित रकम और अन्य संभावित वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल की जाएगी।

फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

नौ बैंकों के समूह से ली गई थीं ऋण सुविधाएं

सीबीआई के अनुसार, फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ने भारतीय स्टेट बैंक के अलावा नौ बैंकों के एक समूह से भी वित्तीय सुविधाएं प्राप्त की थीं।

इनमें कार्यशील पूंजी ऋण, सावधि ऋण और लेटर ऑफ क्रेडिट जैसी सुविधाएं शामिल थीं।

इन ऋण सुविधाओं का उद्देश्य कंपनी के कारोबारी संचालन और अन्य स्वीकृत व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करना था।

हालांकि बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने ऋण की रकम का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिनके लिए उसे मंजूरी मिली थी।

इसके बजाय धनराशि को कथित तौर पर सहयोगी कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया।

₹904 करोड़ की कथित धोखाधड़ी कैसे हुई?

एसबीआई की शिकायत के अनुसार, फ्यूचर रिटेल ने बैंक से प्राप्त धन का निर्धारित कारोबारी गतिविधियों में इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित कंपनियों को हस्तांतरित किया।

बैंक का आरोप है कि इन लेन-देन के कारण ऋण की रकम का वास्तविक उपयोग निर्धारित उद्देश्यों से अलग हो गया।

सीबीआई अब यह जांच कर रही है कि संबंधित कंपनियों को धन क्यों भेजा गया और उसके अंतिम लाभार्थी कौन थे।

एजेंसी बैंक खातों, भुगतान विवरणों, ऋण दस्तावेजों और संबंधित कंपनियों के कारोबारी रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में किन व्यक्तियों की कितनी भूमिका रही।

फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आई थीं अनियमितताएं

इस मामले में बैंक की शिकायत एक फॉरेंसिक ऑडिट से भी जुड़ी हुई है।

रिपोर्टों के अनुसार, BDO India LLP ने 1 अप्रैल 2017 से 30 अप्रैल 2022 की अवधि के दौरान फ्यूचर रिटेल के वित्तीय लेन-देन की जांच की थी।

ऑडिट में संबंधित और सहयोगी कंपनियों के बीच बड़ी मात्रा में धन के लेन-देन की पहचान की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 13 संबंधित संस्थाओं को की गई शुद्ध भुगतान राशि लगभग ₹5,878.28 करोड़ बताई गई थी।

इन संस्थाओं को कुल ₹24,002.09 करोड़ का भुगतान किया गया, जबकि उनसे लगभग ₹18,123.79 करोड़ प्राप्त हुए थे।

हालांकि इन सभी लेन-देन को स्वतः धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। सीबीआई को जांच के दौरान इनके वास्तविक उद्देश्य और वैधता की पड़ताल करनी होगी।

2021 में NPA बना था कंपनी का ऋण खाता

फ्यूचर रिटेल की आर्थिक परेशानियां कई वर्षों से चल रही थीं।

रिपोर्टों के अनुसार, एसबीआई के रिकॉर्ड में कंपनी का ऋण खाता 26 अप्रैल 2021 से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी NPA के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

बाद में बैंक ने कंपनी के वित्तीय लेन-देन की जांच कराई।

23 मार्च 2026 को एसबीआई की फ्रॉड आइडेंटिफिकेशन कमेटी ने संबंधित खाते को धोखाधड़ी वाले खाते के रूप में वर्गीकृत किया।

इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को बैंक ने सीबीआई को शिकायत भेजी।

शिकायत के आधार पर 4 नवंबर को एफआईआर दर्ज की गई और 6 नवंबर को तलाशी अभियान चलाया गया।

कौन हैं किशोर बियानी?

किशोर बियानी भारत के संगठित रिटेल कारोबार के प्रमुख नामों में शामिल रहे हैं।

उन्होंने फ्यूचर ग्रुप की स्थापना की और देश में बड़े पैमाने पर आधुनिक रिटेल स्टोर की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया।

फ्यूचर रिटेल के अंतर्गत बिग बाजार, फूडहॉल और फैशन@बिग बाजार जैसे प्रसिद्ध ब्रांड संचालित होते थे।

बिग बाजार ने भारत के कई शहरों में घरेलू सामान, किराने और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की बिक्री के लिए बड़े स्टोर स्थापित किए थे।

एक समय फ्यूचर रिटेल भारत की प्रमुख संगठित रिटेल कंपनियों में शामिल थी।

हालांकि बाद के वर्षों में कंपनी गंभीर आर्थिक संकट और ऋण संबंधी समस्याओं से जूझने लगी।

बिग बाजार और फ्यूचर रिटेल का क्या हुआ?

फ्यूचर रिटेल लिमिटेड लंबे समय तक भारतीय रिटेल बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल रही।

कंपनी बिग बाजार और अन्य रिटेल ब्रांडों के माध्यम से देशभर में कारोबार करती थी।

लेकिन बढ़ते कर्ज, वित्तीय कठिनाइयों और कारोबारी चुनौतियों के कारण कंपनी की स्थिति कमजोर होती गई।

बाद में कंपनी के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू हुई।

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने फ्यूचर रिटेल को परिसमापन प्रक्रिया में भेजने का आदेश दिया था।

अब कंपनी के पुराने वित्तीय लेन-देन और ऋण सुविधाओं से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में सीबीआई जांच कर रही है।

अज्ञात सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

सीबीआई ने एफआईआर में कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों का भी उल्लेख किया है।

एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक ऋण स्वीकृत करने, धन के इस्तेमाल और संबंधित वित्तीय प्रक्रियाओं में किसी अधिकारी की अनुचित भूमिका थी या नहीं।

इसके अलावा कंपनी से जुड़े अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सीबीआई के अनुसार, जांच का उद्देश्य कथित साजिश की पूरी जानकारी जुटाना और ऋण की रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाना है।

ब्याज जोड़ने पर कुल नुकसान कितना?

एसबीआई की शिकायत से संबंधित प्रकाशित जानकारी के अनुसार, बैंक ने मूल कथित नुकसान ₹904.32 करोड़ बताया है।

कुछ रिपोर्टों में इसके अतिरिक्त लगभग ₹1,331.91 करोड़ के अनुमानित ब्याज का भी उल्लेख किया गया है।

इस आधार पर ब्याज सहित कुल वित्तीय देनदारी लगभग ₹2,236.23 करोड़ बताई गई है।

हालांकि सीबीआई की एफआईआर में प्रमुख रूप से ₹904.32 करोड़ के कथित नुकसान का मामला दर्ज किया गया है।

अंतिम वित्तीय जिम्मेदारी और राशि संबंधित जांच तथा कानूनी कार्यवाही के आधार पर तय होगी।

कंपनी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं

सीबीआई की कार्रवाई के बाद फ्यूचर रिटेल या किशोर बियानी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

जांच एजेंसी ने बताया कि मामले में दस्तावेजों की जांच और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का आकलन किया जा रहा है।

जांच के दौरान आगे और पूछताछ या अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि सीबीआई ने फिलहाल किसी गिरफ्तारी या अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है।

CBI जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

₹904.32 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी का यह मामला देश के संगठित रिटेल कारोबार से जुड़े प्रमुख कारोबारी समूहों में से एक के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाता है।

एसबीआई की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद सीबीआई ने मुंबई में कई स्थानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज जब्त किए हैं।

जांच एजेंसी अब ऋण की रकम के उपयोग, सहयोगी कंपनियों को किए गए भुगतान और संबंधित अधिकारियों की संभावित भूमिका की पड़ताल कर रही है।

फिलहाल किशोर बियानी, राकेश बियानी और अन्य नामजद व्यक्तियों के खिलाफ आरोप जांच के अधीन हैं।

मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

स्रोत: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आधिकारिक बयान, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), रॉयटर्स, बिजनेस स्टैंडर्ड (6 नवंबर 2026), द इकोनॉमिक टाइम्स (7 नवंबर 2026), इंडिया टुडे, एनडीटीवी, दैनिक जागरण।

जय राष्ट्र न्यूज़

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