नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026: भारत में चीनी उत्पादन के नए सत्र 2026-27 की शुरुआत तेज रफ्तार के साथ हुई है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के अनुसार, 5 नवंबर तक देश में चीनी का उत्पादन 12.85 लाख टन पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में केवल 3.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया है। देशभर में अब तक 184 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 154 मिलें चालू थीं।
पिछले साल के मुकाबले चार गुना बढ़ा चीनी उत्पादन
ISMA द्वारा 6 नवंबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू विपणन वर्ष 2026-27 में चीनी उत्पादन ने शुरुआती दिनों में ही तेजी पकड़ ली है।
इस वर्ष 5 नवंबर तक 12.85 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया गया।
वहीं, पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 3.20 लाख टन था।
यानी देश के चीनी उत्पादन में लगभग 9.65 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है।
संघ के अनुसार, इसका प्रमुख कारण महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू होना है।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन
महाराष्ट्र ने इस साल चीनी उत्पादन में सबसे तेज शुरुआत की है।
राज्य में अब तक 136 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 101 मिलें संचालित थीं।
महाराष्ट्र में 5 नवंबर तक 10.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
पिछले साल इसी समय राज्य में केवल 1.23 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया था।
इस प्रकार देश के कुल शुरुआती चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 84 प्रतिशत रही।
उत्तर प्रदेश में 19 चीनी मिलें चालू
देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में भी पेराई सत्र शुरू हो गया है।
राज्य के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में अब तक 19 चीनी मिलें चालू हुई हैं।
इन मिलों से लगभग 20 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
हालांकि पिछले वर्ष इसी समय उत्तर प्रदेश में 32 मिलें चालू थीं और 1.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
ISMA के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अधिकांश बची हुई मिलें जल्द पेराई शुरू कर सकती हैं, जबकि मध्य उत्तर प्रदेश में दिवाली के बाद उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
कर्नाटक और तमिलनाडु में भी उत्पादन जारी
कर्नाटक में सात चीनी मिलों ने विशेष पेराई सत्र के तहत उत्पादन जारी रखा है।
इन मिलों से अब तक 90 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
वहीं, तमिलनाडु में सात मिलों से 64 हजार टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया गया।
गुजरात में 12 और तेलंगाना में तीन चीनी मिलों ने भी संचालन शुरू कर दिया है।
आने वाले दिनों में अन्य मिलों के शुरू होने से देश के कुल उत्पादन में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
देश में चीनी की कमी नहीं होने का दावा
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने बताया कि चालू चीनी सत्र की शुरुआत सकारात्मक रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के लगभग 36 लाख टन चीनी भंडार के साथ इस साल का नया उत्पादन भी बाजार में उपलब्ध है।
इससे घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी होने का अनुमान है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने के बावजूद संघ ने आपूर्ति की स्थिति को संतोषजनक बताया है।
हालांकि उत्पादन बढ़ने से खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें कितनी प्रभावित होंगी, यह मांग, आपूर्ति और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है उत्पादन
देश में गन्ने की पेराई का मुख्य सत्र अभी शुरुआती चरण में है।
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में अतिरिक्त चीनी मिलों के चालू होने से उत्पादन की रफ्तार बढ़ने की संभावना है।
ISMA ने कहा कि उद्योग घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है।
फिलहाल 184 मिलों के संचालन और 12.85 लाख टन उत्पादन के साथ भारत के चीनी उद्योग ने नए सत्र की मजबूत शुरुआत की है।
स्रोत: भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA), प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), द इकोनॉमिक टाइम्स (6 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (6 नवंबर 2026), द ट्रिब्यून।
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