नई दिल्ली: भारत ने रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी सैन्य तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित किया है। इस इंजन का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने किया है। इसे भविष्य में लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों, लॉयटरिंग म्यूनिशन और मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAVs) में इस्तेमाल करने की योजना है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी इंजन तकनीक को नई दिशा देने के साथ-साथ विदेशी रक्षा तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
क्या है एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन?
एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया जाता है जिनका उपयोग एक विशेष मिशन के लिए किया जाता है, जैसे—
- लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल
- लॉयटरिंग म्यूनिशन (Suicide Drones)
- मानव रहित हवाई प्लेटफॉर्म
- विशेष सामरिक मिशन
इस प्रकार के इंजन का उद्देश्य कम लागत में उच्च प्रदर्शन उपलब्ध कराना होता है।
रक्षा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
इस उपलब्धि से—
- विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम होगी।
- स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमता मिलेगी।
- भविष्य के रक्षा प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित विकसित किए जा सकेंगे।
- रक्षा निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गैस टर्बाइन इंजन विकसित करना किसी भी देश के लिए सबसे जटिल एयरोस्पेस तकनीकों में से एक माना जाता है। ऐसे में भारत द्वारा स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन का विकास देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
आगे की योजना
इंजन के सफल विकास के बाद अब इसके विभिन्न तकनीकी परीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया जारी रहेगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे भविष्य की स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा।
निष्कर्ष
पहले स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन का विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे भविष्य की मिसाइल, ड्रोन और अन्य उन्नत रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Source:
DRDO | Ministry of Defence | PIB
जय राष्ट्र न्यूज़






