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स्वदेशी रक्षा तकनीक और AI आधारित सैन्य प्रणालियों पर रक्षा प्रतिष्ठानों में समीक्षा तेज़, आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बीच उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में स्वदेशी रक्षा तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सैन्य प्रणालियाँ, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। सरकार का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना है। AI और आधुनिक युद्ध तकनीक पर विशेष जोर रक्षा अधिकारियों के अनुसार भविष्य के युद्धों में AI आधारित निगरानी प्रणाली, स्वायत्त ड्रोन, स्मार्ट सेंसर, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली (Network-Centric Warfare) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेनाएँ नई तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से अपने परिचालन ढाँचे में शामिल करने की दिशा में काम कर रही हैं। स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा समीक्षा बैठकों में DRDO द्वारा विकसित विभिन्न स्वदेशी परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इनमें मिसाइल प्रणालियाँ, एयर डिफेंस सिस्टम, काउंटर-ड्रोन तकनीक, उन्नत संचार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण शामिल हैं। सरकार चाहती है कि भारतीय उद्योग और रक्षा स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाकर घरेलू रक्षा निर्माण को और गति दी जाए। तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर फोकस थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए संयुक्त कमान, साझा डिजिटल नेटवर्क और एकीकृत रक्षा प्रणाली (Integrated Defence Architecture) पर भी काम किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से निर्णय लेने की गति और सैन्य दक्षता दोनों में सुधार होगा। निजी उद्योग और स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों, MSME और रक्षा स्टार्टअप्स के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को नई परियोजनाओं से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को लेकर चल रही समीक्षा बैठकें देश की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। AI आधारित प्रणालियों, आधुनिक हथियारों और स्वदेशी अनुसंधान पर बढ़ते फोकस से भारत की रक्षा क्षमता को आने वाले वर्षों में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। Source: Ministry of Defence | DRDO | Indian Armed Forces जय राष्ट्र न्यूज़

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भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर जोर, रक्षा प्रतिष्ठानों में समीक्षा बैठकों का दौर जारी

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता बढ़ाने और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से रक्षा प्रतिष्ठानों में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में आधुनिक युद्ध तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, एयर डिफेंस, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations) की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू रक्षा उद्योग को नई गति देना है। स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को मिल रहा बढ़ावा रक्षा मंत्रालय और DRDO लगातार नई स्वदेशी तकनीकों के विकास पर काम कर रहे हैं। हाल ही में DRDO और भारतीय वायुसेना ने Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) नामक स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया, जो सामान्य बमों को सटीक निर्देशित हथियारों में बदलने की क्षमता रखती है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं। ड्रोन और एयर डिफेंस पर विशेष फोकस हाल के सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारतीय सेना और वायुसेना ड्रोन रोधी (Counter-Drone) प्रणालियों, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम (AEW&C) और आधुनिक सेंसर नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही हैं। हाल ही में भारतीय सेना ने स्वदेशी ‘भार्गवास्त्र’ (Bhargavastra) काउंटर-ड्रोन प्रणाली का प्रदर्शन देखा, जिसे ड्रोन झुंड (Drone Swarm) जैसे खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। संयुक्त सैन्य क्षमता पर जोर रक्षा प्रतिष्ठानों में चल रही समीक्षा बैठकों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त कमान प्रणाली, डिजिटल युद्ध क्षमता और भविष्य के युद्धों के लिए तकनीकी तैयारियों पर भी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में नेटवर्क आधारित संचालन, साइबर सुरक्षा और AI आधारित निर्णय प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। रक्षा उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी सरकार रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार स्वदेशी अनुसंधान, निर्माण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों के साथ सहयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में चल रही समीक्षा बैठकें भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार का उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और आधुनिक सैन्य शक्ति तैयार करना है। Source: Ministry of Defence | DRDO | Indian Armed Forces जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई मजबूती दी, पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी सैन्य तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित किया है। इस इंजन का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने किया है। इसे भविष्य में लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों, लॉयटरिंग म्यूनिशन और मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAVs) में इस्तेमाल करने की योजना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी इंजन तकनीक को नई दिशा देने के साथ-साथ विदेशी रक्षा तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। क्या है एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन? एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया जाता है जिनका उपयोग एक विशेष मिशन के लिए किया जाता है, जैसे— इस प्रकार के इंजन का उद्देश्य कम लागत में उच्च प्रदर्शन उपलब्ध कराना होता है। रक्षा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल इस उपलब्धि से— यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों की राय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गैस टर्बाइन इंजन विकसित करना किसी भी देश के लिए सबसे जटिल एयरोस्पेस तकनीकों में से एक माना जाता है। ऐसे में भारत द्वारा स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन का विकास देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। आगे की योजना इंजन के सफल विकास के बाद अब इसके विभिन्न तकनीकी परीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया जारी रहेगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे भविष्य की स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। निष्कर्ष पहले स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन का विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे भविष्य की मिसाइल, ड्रोन और अन्य उन्नत रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। Source: DRDO | Ministry of Defence | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने विकसित किया पहला स्वदेशी 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का टर्बोजेट इंजन, रक्षा तकनीक में बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी टर्बोजेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित किया है। यह इंजन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत Gas Turbine Research Establishment (GTRE) द्वारा विकसित किया गया है। इसे भविष्य में लॉन्ग-रेंज ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलों और अन्य मानव रहित रक्षा प्लेटफॉर्म में उपयोग किए जाने की योजना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी इंजन तकनीक को नई दिशा देगी और विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम यह स्वदेशी टर्बोजेट इंजन भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। अब तक इस श्रेणी के इंजन के लिए भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नए इंजन के विकास से घरेलू रक्षा उत्पादन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। किन प्लेटफॉर्म में होगा उपयोग? विशेषज्ञों के अनुसार इस इंजन का उपयोग भविष्य में कई रक्षा प्रणालियों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं— रक्षा उद्योग को मिलेगा लाभ इस परियोजना से— विशेषज्ञों की राय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन तकनीक किसी भी एयरोस्पेस कार्यक्रम का सबसे जटिल हिस्सा होती है। ऐसे में स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का विकास भारत के लिए तकनीकी दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है और यह भविष्य में AMCA, ड्रोन तथा अन्य स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा। आगे क्या होगा? इंजन के विकास के बाद अब विभिन्न परीक्षणों और प्रमाणन (Certification) की प्रक्रिया जारी रहेगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे रक्षा प्लेटफॉर्म में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। निष्कर्ष 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के पहले स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का विकास भारत की रक्षा तकनीक और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी, बल्कि भविष्य की स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को भी नई गति मिलेगी। Source: DRDO | Ministry of Defence | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वदेशी रक्षा और एयरोस्पेस कार्यक्रमों पर सरकार का फोकस बढ़ा, AMCA, Kaveri 2.0 और नई रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम जारी

नई दिल्ली: भारत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस कार्यक्रमों को नई गति देने पर जोर बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्रालय, DRDO, HAL, ADA और निजी रक्षा कंपनियां मिलकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही हैं, जिनका उद्देश्य भारत की रक्षा क्षमता को आधुनिक बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। सरकार का फोकस विशेष रूप से AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft), Kaveri 2.0 Jet Engine, LCA Tejas Mk-2, TEDBF (Twin Engine Deck Based Fighter) और नई पीढ़ी के ड्रोन, मिसाइल तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास पर है। इन परियोजनाओं को भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। किन परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है? देश में इस समय कई प्रमुख स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है— आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं से— निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी सरकार रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ा रही है। कई भारतीय कंपनियां अब रक्षा निर्माण, एयरोस्पेस, ड्रोन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में भी मदद मिल रही है। भविष्य की रणनीति रक्षा मंत्रालय आने वाले वर्षों में कई स्वदेशी परियोजनाओं के परीक्षण, उत्पादन और तैनाती की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कार्यक्रमों के सफल होने से भारत की रणनीतिक क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी स्थिति दोनों मजबूत होंगी। निष्कर्ष AMCA, Kaveri 2.0, Tejas Mk-2 और अन्य स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस कार्यक्रम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकार का बढ़ता फोकस आधुनिक तकनीकों के विकास, घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को नई गति दे रहा है। Source: Ministry of Defence (MoD) | DRDO | HAL | Aeronautical Development Agency (ADA) | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के स्वदेशी रक्षा और एयरोस्पेस कार्यक्रमों पर बढ़ा फोकस, आधुनिक तकनीकों से आत्मनिर्भरता को मिल रही नई गति

नई दिल्ली: भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी रक्षा और एयरोस्पेस कार्यक्रमों पर अपना फोकस और तेज कर दिया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। रक्षा मंत्रालय, DRDO, HAL और निजी रक्षा कंपनियां मिलकर नई पीढ़ी की तकनीकों पर काम कर रही हैं। इनमें उन्नत लड़ाकू विमान, स्वदेशी जेट इंजन, ड्रोन, मिसाइल प्रणाली, रडार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रक्षा प्रणालियां प्रमुख हैं। किन परियोजनाओं पर है सबसे ज्यादा फोकस? भारत वर्तमान में कई रणनीतिक रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है, जिनमें प्रमुख हैं— आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से— निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी हाल के वर्षों में कई निजी भारतीय कंपनियां भी रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में सक्रिय हुई हैं। सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) का प्रमुख केंद्र बनाना है। आगे क्या? रक्षा मंत्रालय आने वाले वर्षों में कई परियोजनाओं के परीक्षण, उत्पादन और तैनाती की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी तकनीकों में निवेश भारत की दीर्घकालिक रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा और रणनीतिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगा। निष्कर्ष भारत के स्वदेशी रक्षा और एयरोस्पेस कार्यक्रम देश की सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। AMCA, Kaveri 2.0, तेजस Mk-2 और अन्य उन्नत परियोजनाएं भविष्य में भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। Source: Ministry of Defence (MoD) | DRDO | HAL | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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Kaveri 2.0 इंजन प्रोग्राम को लेकर रक्षा क्षेत्र में नई हलचल, AMCA परियोजना पर बढ़ा फोकस

नई दिल्ली: भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में Kaveri 2.0 जेट इंजन प्रोग्राम एक बार फिर चर्चा में है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत इस इंजन को भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) परियोजना को लेकर इस इंजन की संभावित भूमिका पर विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Kaveri 2.0 प्रोग्राम सफल होता है, तो भारत को लड़ाकू विमानों के इंजन के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी AMCA के लिए Kaveri 2.0 के अंतिम चयन या तैनाती को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। क्या है Kaveri 2.0 प्रोग्राम? Kaveri इंजन का विकास गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE), जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत कार्य करता है, द्वारा किया जा रहा है। Kaveri 2.0 को आधुनिक तकनीकों के साथ विकसित करने का उद्देश्य भविष्य के भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए एक शक्तिशाली और विश्वसनीय स्वदेशी इंजन तैयार करना है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य है— AMCA परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण? Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) भारत की प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) की स्टेल्थ लड़ाकू विमान परियोजना है। इस विमान को आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, उन्नत सेंसर, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि AMCA भारत के रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ? रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार— हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इंजन विकास में अभी कई तकनीकी परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा यदि Kaveri 2.0 सफलतापूर्वक विकसित होता है, तो इससे— आगे क्या? रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में Kaveri 2.0 से संबंधित परीक्षण और विकास कार्य आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं AMCA परियोजना भी अपने निर्धारित विकास चरणों के अनुसार आगे बढ़ रही है। सरकार और DRDO की ओर से भविष्य में इस संबंध में आधिकारिक अपडेट जारी किए जा सकते हैं। निष्कर्ष Kaveri 2.0 इंजन प्रोग्राम और AMCA परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। हालांकि दोनों परियोजनाओं पर काम जारी है, लेकिन अभी Kaveri 2.0 को AMCA में शामिल करने को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आने वाले वर्षों में ये कार्यक्रम भारत की रक्षा तकनीक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। Source: रक्षा मंत्रालय (MoD), DRDO, GTRE एवं आधिकारिक रक्षा कार्यक्रमों से संबंधित उपलब्ध जानकारी। जय राष्ट्र न्यूज़

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के लिए DFP-2026 जारी किया, रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली, 29 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए Delegation of Financial Powers (DFP)-2026 जारी किया। नई वित्तीय शक्तियों का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और स्वदेशीकरण को नई गति मिलेगी। क्या है DFP-2026? DFP-2026 एक संशोधित वित्तीय अधिकार ढांचा है, जिसके तहत DRDO के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इससे अनुसंधान परियोजनाओं की मंजूरी, उपकरणों की खरीद और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान को मिलेगी रफ्तार रक्षा मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की स्वीकृति पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिल सकेगी। इससे मिसाइल प्रणाली, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, साइबर सुरक्षा और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम तेज होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से स्वदेशी रक्षा उपकरणों का विकास तेज होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा लाभ नई वित्तीय व्यवस्था से निजी उद्योग, MSME और रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप के साथ DRDO की साझेदारी भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नई तकनीकों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर DFP-2026 में वित्तीय निर्णयों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नई प्रणाली से परियोजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप कदम बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सरकार आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। AI, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है। DFP-2026 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। भविष्य की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि DFP-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से DRDO की अनुसंधान क्षमता और मजबूत होगी तथा नई रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रक्षा तैयारियों, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्रोत:रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:रक्षा मंत्रालय एवं DRDO द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों और सैन्य आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

नई दिल्ली, 28 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी स्वदेशी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत “समुद्र से आसमान तक लगातार अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है।” उन्होंने जून महीने में रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों को आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण सफलता बताया। स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS Dunagiri, INS Sanshodhak और INS Agray का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्लेटफॉर्मों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीक का प्रमाण बताया। मेड-इन-इंडिया C-295 विमान की सराहना अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत में निर्मित C-295 सैन्य परिवहन विमान की पहली सफल उड़ान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे 40 विमानों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एयरोस्पेस उद्योग, एमएसएमई क्षेत्र और रोजगार को नई गति मिलेगी। DRDO की मिसाइल उपलब्धि का भी जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) के सफल परीक्षण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में DRDO और भारतीय उद्योगों ने मिलकर काम किया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आत्मनिर्भर भारत को मिल रही नई मजबूती प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं करता, बल्कि उद्योग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी उत्पादन को लगातार बढ़ा रहा है। नागरिकों के योगदान की भी सराहना प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संभव होती है। साथ ही उन्होंने अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने का भी संदेश दिया। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक पहचान विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक सैन्य तकनीक और अनुसंधान में बढ़ते निवेश से भारत की वैश्विक रक्षा क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इससे रक्षा निर्यात बढ़ाने और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलने की भी संभावना है। आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण पर रहेगा फोकस सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को और गति देना है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि स्वदेशी तकनीक और भारतीय उद्योगों की भागीदारी से भारत रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड और आधिकारिक सरकारी बयानों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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