महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल! क्या फिर एकजुट होगा पवार परिवार? शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात से दोनों NCP गुटों के विलय की चर्चा तेज
मुंबई, महाराष्ट्र, 7 नवंबर 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच 10 नवंबर के बाद फिर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दावा किया है कि यदि अजित पवार जीवित होते तो दोनों गुटों का विलय इसी साल 12 फरवरी को हो गया होता। हालांकि अभी किसी भी गुट ने नए विलय की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। अस्पताल में शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल गुरुवार, 5 नवंबर को एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने 85 वर्षीय शरद पवार से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। शरद पवार को सीने में संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच देश और महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी बातचीत हुई। इस मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के फिर एक होने की अटकलें तेज हो गईं। 10 नवंबर के बाद फिर हो सकती है मुलाकात शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की बातचीत से जुड़ा एक वीडियो राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में शरद पवार आगे बातचीत के लिए साथ बैठने की बात करते दिखाई देते हैं। इस पर प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वह 10 नवंबर के बाद मुंबई में मौजूद रहेंगे और उस समय मुलाकात की जा सकती है। दोनों नेताओं के बीच आगे बातचीत पर सहमति बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में विलय की संभावना को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि प्रफुल्ल पटेल ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में उनकी मुलाकात मुख्य रूप से शरद पवार के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए हुई थी। उन्होंने कहा कि बातचीत में सामान्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन एनसीपी के आंतरिक मामलों पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया। सुनील तटकरे का दावा- 12 फरवरी को होना था विलय एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार के जीवित रहते हुए दोनों एनसीपी गुटों के विलय पर गंभीर बातचीत हुई थी। तटकरे के अनुसार, अजित पवार ने दोनों दलों को एकजुट करने की इच्छा जताई थी और इस संबंध में 12 फरवरी 2026 की तारीख पर सहमति बनने की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि यदि अजित पवार जीवित होते तो दोनों गुट संभवतः फरवरी में ही एक हो चुके होते। हालांकि तटकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। अजित पवार के निधन के बाद बदले राजनीतिक समीकरण महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद एनसीपी की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। अजित पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट महाराष्ट्र की महायुति सरकार का हिस्सा था। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और उपमुख्यमंत्री का पद भी ग्रहण किया। वहीं, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) अलग राजनीतिक दल के रूप में सक्रिय रही। ऐसे में दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रोहित पवार ने कहा- अजित पवार चाहते थे परिवार एक रहे एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने भी दोनों गुटों के विलय के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार चाहते थे कि पवार परिवार और एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हों। रोहित पवार ने सुनील तटकरे के बयानों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद पहले विलय की बातचीत से इनकार किया गया था, लेकिन अब वरिष्ठ नेता स्वीकार कर रहे हैं कि दोनों दलों को एक करने पर चर्चा हुई थी। रोहित पवार ने दावा किया कि विलय की प्रक्रिया को लेकर पहले से बातचीत चल रही थी। हालांकि दोनों गुटों के बीच वर्तमान में किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। अमित शाह से मिले एनसीपी के वरिष्ठ नेता महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल के बीच एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2 नवंबर को दिल्ली में हुई बैठक में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे जैसे नेता शामिल थे। इस बैठक में एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार मौजूद नहीं थे। सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका को लेकर असंतोष जताया। हालांकि एनसीपी ने पार्टी के भीतर किसी तरह की बड़ी फूट या बगावत की खबरों से इनकार किया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, अमित शाह से मुलाकात पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा थी। क्या सुनेत्रा और पार्थ पवार के नेतृत्व पर उठ रहे सवाल? अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके बेटे पार्थ पवार भी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। हालांकि हालिया मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेता संगठन से जुड़े फैसलों में पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं होने से असंतुष्ट हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ फिर बातचीत शुरू करने के पक्ष में है। लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एनसीपी ने संगठन में किसी बड़े मतभेद की बात को खारिज किया है और नेतृत्व…

